Update:-74 (B)
अपस्यु:- अच्छा ऐसी बात है तो बताओ क्या तुमने अब तक ध्रुव को किस्स किया है। एक बार भी..
साची:- ये हमारा पर्सनल मैटर है, तुम्हे क्यों बताऊं।
अपस्यु:- चल झुटी, किस्स की होती तब तो जवाब होता।
साची:- इतना भेजा फ्राई कौन करता है.. इसे मजबूरी का फायदा उठाना कहते है। तुम क्या चाहते हो वो मुझे बताओ…
अपस्यु:- मै चाहता हूं कि तुम समझने की कोशिश करो, जो तुम्हारी फीलिंग है मेरे लिए वो मात्र आकर्षण है जो सिर्फ पाना चाहता है, और ना मिल पाने की स्थिति में तुम्हे दर्द हो रहा है।
साची:- गुरु जी की अब नई कहानी शुरू होगी.. लव और अट्रैक्शन के बारे में.. और फिर मेरे दिमाग के साथ खेलने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
अपस्यु:- चलो एक डील करते है…
साची:- कैसी डील..
अपस्यु:- तुमसे कोई सवाल करूं तो सब सच-सच बताना और तुम्हे किसी भी पल ऐसा लगे कि मै तुम्हारे दिमाग के साथ खेल रहा हूं, तो तुम मुझे साफ़ मेरे मुंह पर कह देना मुझे अब कोई जवाब नहीं देना.. मंजूर..
साची:- हां मंजूर…
अपस्यु:- क्या तुम्हे मुझसे प्यार है.. अब भी..
साची:- हां..
अपस्यु:- क्या जब मैंने तुम्हे सच बताया था मेरे और ऐमी के बारे में, तब तुम्हे लगा था कि मुझे तुमसे प्यार है…
साची:- पता नहीं…
अपस्यु:- क्या उस सच को सुनते वक़्त भी तुम्हे मुझसे प्यार था।
साची:- हां..
अपस्यु:- फिर फैसला किसने लिया था कि मै तुमसे दूर रहूं?
साची:- मैंने..
अपस्यु:- तुम्हारे फैसले के बाद क्या मैंने तुम्हे फिर परेशान किया…
साची:- परेशान ना करके भी करते रहे।
अपस्यु:- क्या तुम रोई थी?
साची:- आज तक रोती हूं।
अपस्यु:- क्या तुमने मेरे बारे में सोचा था कि मुझे सच बताने की जो तुमने इतनी बड़ी सजा दी है, उससे मेरी फीलिंग हर्ट नहुई होगी? क्या तुम्हे एक बार भी ख्याल आया कि मिलकर बात ही कर ले की हमारे बीच के रिश्ते में तुम्हे ऐमी खटक रही है?
साची:- लेकिन तुमने तो खुद मुझसे कहा था ना कि तुम दोनों में से किसी को नहीं छोड़ सकते, फिर उस बात के लिए इतने सवाल क्यों?
अपस्यु:- हां मैंने ऐसा कहा था, लेकिन तुम्हे तो सच्चा प्यार था ना, तुम तो एक बार सीधे-सीधे भी तो कह सकती थी ना.. यदि साची चाहिए तो तुम्हे ऐमी को छोड़ना होगा… नहीं तो हम दोबारा कभी नहीं मिलेंगे…
साची:- इतनी बात कह देने से क्या तुम उसे छोड़ देते..
अपस्यु:- बिल्कुल नहीं…
साची:- बस तो फिर बात ही खत्म..
अपस्यु:- हां मै भी बात क्लोज ही कर रहा हूं बस इतनी सी बात के साथ की हमरे बीच के रिश्ते में जितनी भी अब तक डिस्कस हुई है, उसमे केवल तुम्हारी फीलिंग, तुम्हारी इक्छा तुम्हारी चाहते और केवल तुम है तुम हो… अब तुम मुझे बताओ कि हमारे इस रिश्ते में.. मेरी फीलिंग, मेरी चाहत और मेरे लिए कितनी बातें डिस्कस हुई है…
साची:- हां तो इस पूरे घटना का केंद्र बिंदु तो तुम ही हो, और तुम्हारे कारन ही तो मेरे साथ ये सब घटनाएं हुई है…
अपस्यु:- और इसलिए मेरी फीलिंग कोई मायने नहीं रखती… मेरी फीलिंग के साथ जब जी में आया फुटबॉल खेल दिया। तुम्हे जब जी में आया आशु बहा लिए और खुद के लिए सिंपैथी बटोर लिया, क्योंकि लड़कों पर तो धोखेबाज का टैग लगा होता है ना, उसकी कोई फीलिंग ही नहीं होती है। मैंने तुमसे ऐमी के बारे में सच बता दिया उसके बाद से तो मेरी फीलिंग मर गई ना तुम्हारे लिए…..
साची:- सॉरी.. ये सही है कि मैंने अकेले फैसला किया था लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैंने तुम्हारी फीलिंग के बारे में नहीं सोचा था… मै रोज इस ख्याल में रोती थी कि मैंने हम दोनों को सजा दी है। हां केवल उस घटना के बाद फिर कभी तुमसे जाता नहीं पाई की मुझे तुम्हारी फीलिंग की कदर है, और तुम दूर रहकर भी बस मुझे मेरे गम से उबारने कि कोशिश में लगे हुए थे। फिर चाहे वो तुम्हारा किसी लड़की के साथ लाइन मारने वाला फ्लॉप सीन ही क्यों ना प्लान किया हो, या फिर कुंजल और लावणी के साथ मिलकर मेरा ब्रेन वाश करना.. की तुम एक बुरे लड़के हो।
अपस्यु:- बुरा लड़का, क्रिमिनल, और ना जाने क्या क्या तुम भी तो मुझे कह चुकी हो..
साची:- "तुम्हे गुस्से और नफरत से मै कुछ भी कहूं लेकिन जो सच है वो सच है। मुझे नहीं पता कि हमारे रिश्ते के बीच तुम्हे कभी प्यार था भी या नहीं था, लेकिन तुमने मुझे हमेशा रेस्पेक्ट दिया। तुमने ही तो समझाया था कि एकतरफा सोचकर फैसला नहीं लेते, जब मै हताश थी कॉफी वाली घटना को लेकर। तुमने ही तो एहसास करवाया था कि मै जितनी गहराइयों से बातों को सोचकर खुद को सजा दे रही थी, उतनी बातें तो तुम्हारे ख्यालों में भी कभी नहीं था। हां बस मेरा दिल तब टूट गया जब मैंने तुम्हे और ऐमी को देखा। पता नहीं तुमने वो कौन से फालतू रिलेशन का जिक्र किया था मेरे साथ, लेकिन मेरा दिल मुझसे एक ही बात कहता रहा.. जो स्थान ऐमी के लिए तुम्हारे दिल में है, वो मेरा नहीं।"
तुम दोनों के रिश्ते के बीच मै तो कभी थी ही नहीं… आज भी दिल धड़क रहा की मेरा अपस्यु मुझे गले लगाकर कह दे कि चलो छोड़ो भूलते हैं पुरानी बातों को, भूल जाओ इस एंगेजमेंट को, सब कुछ मै संभाल लूंगा.. मै बिना सवाल किए साथ आ जाऊंगी.. लेकिन ये मात्र इक्छा जो कभी पूरी नहीं होगी। क्यों अपस्यु क्यों, जब तुम्हारे लाइफ में पहले से ऐमी थी तब क्यों तुम मेरी जिंदगी में आए… ऐसा भी क्या मोह था मुझसे .. या फिर मै ये मान लूं कि, एक लड़का जो ऑन स्क्रीन मेरे फैंटेसी को अपनी भूल समझकर गलत मतलब निकाला बैठा, उसका तुम बदला ले रहे थे।"
कितना उकसाने के बाद पहली बार साची अपनी दिल की पूरी बात जुबान पर ला चुकी थी। वो अपस्यु से पूरी कहानी कहकर वहीं मायूस और खामोश होकर अपस्यु के ओर देखने लगी…
अपस्यु साची का हाथ थामकर उसके आखों में आए कुछ बूंद आशु को पोछने लगा.. साची खुद में इतनी टूटी थी कि वो सामने अपस्यु को देखकर खुद को रोक नहीं पाई, और उससे लिपट कर रोने लगी…. अपस्यु उसे सांत्वना देते हुए उसे चुप कराने की कोशिश करता रहा, लेकिन साची को ऐसा लग रहा था, पहली बार वो किसी सही कंधे पर सुकून से अपना सर रखकर रो रही है।
"साची काफी देर रो ली, और ज्यादा हुआ तो आखों के आगे सिलवटें आ जाएगी.. शांत हो जाओ।"…… "बस कुछ देर और, अच्छा लग रहा है तुमसे लिपट कर रोने में।"…..
अपस्यु साची को वहीं नीचे बिठाते हुए उसके आशु साफ किए और पानी बॉटल बढ़ाते हुए कहने लगा…. "मुझे पता था यहां के सीन में तुम्हारा रोना होगा ही इसलिए पानी बॉटल का इंतजाम पहले से कर रखा था"…. साची, अपस्यु की बात सुनकर रोते-रोते हंस दी और अपने दोनों हाथ तेजी से उसपर चलती हुई मारने लगी। पानी पीकर साची कुछ शांत हुई… कुछ पल दोनों खामोश रहे, साची अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाती हुई कहने लगी…. "मन हल्का हो गया.. ओय मिस्टर तुम कौन हो जो मेरे पास बैठे हो।"…
अपस्यु:- अरे इतनी जल्दी मुझे पहचाने से भी इनकार…
साची:- येस.. अब कोई गिला-शिकवा नहीं बस ऐसा लग रहा है अब सब ठीक है।
अपस्यु:- नहीं अभी कुछ भी सही नहीं हुआ है… तो क्या अब मैं तुम्हे कुछ झटके दे सकता हूं?
साची अपस्यु को घूरती हुई देखने लगी…. "नो नो नो नो.. नहीं अपस्यु कोई पागलपन नहीं… मुझे कैंटीन का वो तुम्हारा साइको रूप अब भी याद है।"
अपस्यु:- भरोसा है मुझ पर..
साची:- बिल्कुल नहीं, मुझे तुम पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है.. चलो हो गया मेरा दर्द चला गया है.. और बताया तो अब कोई गिला-शिकवा नहीं बचा.. जाओ अपनी ऐमी के पास बिना ब्रश के चबाओ एक दूसरे के मुंह..
अपस्यु:- अभी सिर्फ तुम्हारा दिल का बोझ हल्का हुआ है, दिल से मेरी वो छवि नहीं गई है… बस उस छवि को निकालने दो..
साची:- बहुत कर ली तुमने बकवास, चलो यहां से..
अपस्यु:- चुप एकदम.. और ध्यान से सुनो.. क्रेज़ी बॉय की आईडी ऐमी की है जो मेरे कहने पर उसने बनाया था, मैंने कोई तुम्हारा लैपटॉप या फोन नहीं चेक किया था।
ऐसा लग रहा था जैसे अपस्यु की आत्मा साची के अंदर घुसी थी.. क्रेज़ी बॉय की सच्चाई सुनने के बाद भी वो मुस्कुरा रही थी और अपस्यु के ओर देख रही थी। अपस्यु साची की इस हालत को देखकर समझ चुका था कि उसके अंदर का क्या माहौल है। हुआ भी कुछ ऐसा ही, मुस्कुराती हुई साची अपने हाथ इधर-उधर करके कुछ ढूंढ़ रही थी और तभी उसके हाथ पत्थर लगा और उसने अपस्यु के सर पर दे मारा।
अपस्यु ने भी बचने कि कोई कोशिश नहीं किया और नतीजा सिर से खून निकलना शुरू हो चुका था। अपस्यु के सर से जैसे ही खून निकला, तुरंत वो कॉटन लिया और फटाफट उसपर उपचार करके फिलहाल के लिए खून बहने से रोक लिया। साची पर लेकिन जैसे भूत चढ़ रहा हो।
वो हर बात की समीक्षा कर रही थी, उसने सिर फूटने पर अपस्यु की पहले से कि गई व्यवस्था भी देख रही थी। दोनों आमने सामने बैठे थे, साची उसका गला पकड़ कर उसके ऊपर चढ़ गई…. "अपस्यु तुम्हारा खून करके मै जेल आज जाकर रहूंगी। लेकिन खून करके रहूंगी… जब से तुमने क्रेज़ी बॉय का नाम लिया था, मै बस दिल को तसल्ली दे रही थी कि नहीं नहीं ये अपस्यु नहीं है इसके पीछे….. तेरी तो… आज मै तुम्हे नहीं छोड़ने वाली… कमिने कुत्ते.. मां की गली नहीं दे सकती.. आंटी रेस्पेक्टेड है और मै उनकी फैन हूं… वरना अभी तुम्हे मै बताती….. साले चूतीए.. खून पी जाऊंगी मै तुम्हारा।"
अपस्यु जोर-जोर से हंसते हुए उसे अपने ऊपर से हटाया और साची के सर पर पूरी पानी की बॉटल उर्रेल दिया। साची पुतले की तरह बैठी रही और फुह-फूह करके, पानी के ऊपर फुफकार मार रही थी…. "दिमाग कुछ शांत हुआ क्या?"
साची एक फिर उसका गला पकड़ कर उसे लिटा दी और 3-4 बार उसका गला जोर जोर से दबाने के बाद 8-10 थप्पड उसे जल्दी-जल्दी में लगा कर उसी के ऊपर बैठकर अपनी श्वांस सामान्य करने लगी।
अपस्यु:- मै भी कितनी बाजारू हूं जो उन पर थप्पड मारा। वो इतने महान है और मैंने ऐसे किया अपने अपस्यु के साथ।
साची:- कॉमेडी हां… तुम्हारा खून कर दूंगी मै अपस्यु चाकू दो मुझे..
अपस्यु जोर जोर से हंसते हुए… "उसी बैग में तुम्हे चाकू भी मिल जाएगा.."
साची एक हाथ बढ़ाकर वो चाकू निकलती हुई… "तुम्हे पहले से पता था कि मुझे इसकी जरूरत भी पड़ेगी.. तुम्हे क्या लगा तुम इस नकली चाकू से मुझे भ्र्मा दोगे..
इतना बोलते-बोलते साची बड़े विश्वास के साथ, चाकू टेस्ट करने के लिए अपनी हथेली पर चला चुकी थी, तभी अपस्यु तेजी से वो बैग उठाकर चाकू और हथेली के बीच लगाया…. "ओए पागल, वो असली चाकू है, हाथ बचता नहीं रिंग डालने के लिए।"
साची उसके बाल पकड़ कर तीन चार बार वहीं नीचे पटकती हुई उसके ऊपर से हटी। गुस्सा उसका अब भी शांत नहीं हुआ था और वो गुस्से में कहने लगी… "तुम्हे पीटना है, मुझे अभी के अभी रोड चाहिए।"
इतना कहकर जैसे ही साची पीछे मुड़ी अपस्यु रेलिंग पर खड़ा था। उस रेलिंग पर खड़ा देखकर साची कहने लगी… "अब तुम रस्सी लगाकर नीचे कूदोगे यहीं ना.. और इससे मेरा गुस्सा ठंडा हो जायेगा क्या?"
"खुद ही देख लेना की रस्सी है कि नहीं बंधी"… इतना कहकर अपस्यु नीचे छलांग लगा चुका था। उस कूदते देख साची का कलेजा धक से रह गया। उसकी श्वांस ही अटक गई। वो भागकर रेलिंग के पास पहुंची.. 30 मंजिली इमारत के नीचे देखने से ही जहां देहसत पैदा हो जाए वहां से अपस्यु को छलांग लगते देख साची स्तब्ध (shocked) होकर नीचे देखने लगी।
नीचे देखते हुए उसे डर लग रहा था लेकिन किसी तरह हिम्मत बांध कर वो अपस्यु को ढूंढ़ने लगी। आस-पास नजर दौड़ा कर वो देखने लगी कि कहीं कोई रस्सी बांधकर तो नहीं कुदा लेकिन रस्सी के नाम पर कोई साक्ष्य (proof) नहीं था छत पर। साची पागलों की तरह नीचे देखने लगी…. तभी उसके बाएं ओर से लटकते हुए अपस्यु की आवाज़ आयी... "ओ मिस मै कोई सुसाइड नहीं कर रहा था, पीछे हट जाओ वरना यहां से गिरी तो फिर कुछ बचना भी नहीं है।"