Update:-42
लावणी तो पहले ही देख चुकी थी अब बारी थी अनुपमा की, जो ऊपर नजर उठा कर बड़े-बड़े बैनर में लिखा पढ़ रही थी…. "लावणी आई एम् सॉरी…. किसिंग इमोजी… आई लवयू बेबी ….. किसिंग इमोजी…. प्लीज मुझसे लाइब्रेरी के पास मिलो, तुम्हारे सारे गीले शिकवे दूर कर दूंगा।"
(बैनचो चुटिया कहीं का… फसा दिया साले ने)…. लावणी
अनुपमा उस बड़े-बड़े बैनर को पढ़ने के बाद गुस्से में आखें लाल पीली करती हुई लावणी के ओर देखने लगी…. "ये सब क्या है"… अनुपमा की तेज आवाज और लावणी सहम गई। उसके पाऊं कापने लगे और आखों से गंगा-जमुना बहने लगा।
अनुपमा:- इसकी तो मैं बाद में खबर लेती हूं, अपस्यु चल पहले प्रिंसिपल ऑफिस।
अपस्यु:- बिल्कुल आंटी चलो चलते हैं।
दोनों प्रिंसिपल ऑफिस के दरवाजे पर पहुंचे जहां दरवाजे पर खड़ा चपरासी उन्हें रोकते हुए कहने लगा…. "सर अभी मीटिंग में व्यस्त है, आप बाहर इंतजार कीजिए।"
अनुपमा मिश्रा, अब कहां रुकने वाली थी, धड़ाम से दरवाजा खोली और फाटक से अंदर। प्रिंसिपल अपने चेयर पर बैठकर सामने कुछ लोगों से बात कर रहा था। अनुपमा और अपस्यु को इस तरह बिना इजाज़त अंदर घुसते हुए देखकर, प्रिंसिपल ने चपरासी से कड़े लहजे में जवाब तलब किया।
चपरासी तो धीमे बोलना शुरू ही किया था लेकिन बीच में ही अनुपमा ने चिल्लाना शुरू कर दिया…. "आप ये कॉलेज चला रहे है या लवर्स पार्क। ऊपर से शिकायत करने आओ तो बाहर इंतजार करने के लिए बोला जाता है। क्यों करे इंतजार, आखिर आप की कोई जवाबदेही बनती है कि नहीं।"
प्रिंसिपल अपने सामने बैठे लोगों को बाद ने आने के लिए कहकर अनुपमा को शांत होकर पूरा मामला समझाने के लिए कहता है। अनुपमा पूरे गुस्से में अपनी बात कहकर प्रिंसिपल को घूरने लगती है।
प्रिंसिपल:- मैम आप का गुस्सा जायज है मै सारे मामलों की छान-बीन करके पूरा एक्शन लूंगा। आप निश्चिंत रहिए।
अनुपमा:- आप मेरे साथ चलकर अभी एक्शन लीजिए, तभी मेरा गुस्सा ठंडा होगा।
इधर अनुपमा जैसे ही प्रिंसिपल के ऑफिस के लिए अपस्यु के साथ निकली, लावणी दौड़ कर लाइब्रेरी के पास पहुंची। वहीं कोने में आरव उसका इंतजार कर रहा था।.. लावणी को देखते ही वो खुशी से नाचते हुए गाने लगा…. "आईये आप का इंतजार था।".. अराव लावणी को आते देख मुस्कुराते हुए गा रहा था और लावणी उसके पास पहुंचकर उसे एक थप्पड चिपका दी।
आरव:- बेबी मेरा दूसरा गाल बुरा मान जाएगा… एक बार प्यार से इनपर भी हाथ फेर दो ना।
लावणी उसकी ये अरमान भी पूरी करती हुई कहने लगी… "तुम दोनों भाई पागल हो, उसने रात वाली तुम्हारी हरकत मुझे बताई और तुम्हारी सुबह वाली हरकत बड़ी मां को दिखा दिया।"
आरव:- क्या मतलब तुम्हारा…
लावणी उसके बाल को अपने दोनो हाथों से जोड़-जोड़ से नोचती हुई कहने लगी… "तुमने जो बड़े-बड़े बैनर लगाकर ढिंढोरा पिटा है ना उसे तुम्हारे भाई ने मेरी बड़ी मां को दिखा दिया।"
आरव उसके पास आने लगा, लेकिन तभी लावणी उसे हाथ दिखाती हुई कहने लगी…. "आज से हमारा ब्रेकअप… तुम तो दूर ही रहना मुझसे… और तुम्हारे भाई की वजह से यदि मुझे कुछ सुनना परा ना तो तुम देख लेना, क्या करती हूं मै।"
लावणी पूरा आक्रोशित होकर वहां से निकली। …. "कमिना माहौल बना कर मज़े लूट रहा है, तूने अच्छा ना किया अपस्यु।"…. ख्यालों में ही गाली देते हुए उसने तुरंत कुंजल को कॉल लगा दिया। 1 मिनट में उसने कल रात से सुबह तक का सरा मामला समझाकर, 5 मिनट में ही उसे किसी तरह मामला सैटल करने के लिए बोल दिया।
थोड़े ही देर में अनुपमा सबको लेकर लाइब्रेरी के पास पहुंच गई…. "ये क्या है"… सामने एक टेबल पर केक रखा था और 4-5 लड़के लड़कियों ने जैसे ही सामने से लावणी को आते हुए देखा, सब एक स्वर में गाने लगे…. "सॉरी सॉरी सॉरी पकड़े दोनों कान क्या"
प्रिंसिपल:- वहां बैनर किसने लगवाया…
विन्नी आगे आकर कहने लगी…. "हम सब ने सर"
प्रिंसिपल:- और ऐसे बैनर लगाने का क्या मतलब है, तुमलोग समझाओगे मुझे।
कुंजल:- सर हमने अपने जूनियर को थोड़ा परेशान किया था ना इसके लिए उसे सरप्राइज देने और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए ये प्लान किया था।
प्रिंसिपल:- मतलब तुम सब ने मिलकर रैगिंग की इस कैंपस में।
विन्नी:- सर थोड़ी सी छेड़-छाड़ कब से रैगिंग हो गई। क्या आपको अनुभव नहीं है कि रैगिंग क्या होती है। आप अपने जमाने से पहले तुलना कीजिए फिर कहिए।
क्रिश:- वैसे भी क्या उसने शिकायत कि है? पूछ लीजिए उससे की हमने रैगिंग की थी या थोड़ा सा मस्ती मज़ाक। उससे ज्यादा परेशान तो हमलोग आप को कर देते हैं कभी-कभी।
प्रिंसिपल:- बस-बस मुझे मत समझाओ, इनके गार्जियन आए हैं इन्हे समझाओ ये बात।
कुछ देर की बातचीत और कुंजल ने सरा मामला संभाल लिया। ये मैटर तो सलट गया लेकिन आरव और लावणी के बीच की कहानी फसा कर अपस्यु अपनी कहानी सुलझाने के इरादे से कैंटीन में बैठा साची का इंतजार कर रहा था।
"ये सब क्या था भाई, तुमने जान-बुझ कार आरव को फसाया"… कुंजल पास बैठते पूछने लगी।
अपस्यु:- अरे ऐसे झगड़ों को एन्जॉय करो। जरा मै भी तो देख लुं इनके रिश्ते की गहराई को। लवर्स है या केवल अब तक गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड पर ही अटके है।
कुंजल:- जानते हो एक बात भाई..
अपस्यु:- क्या ?
कुंजल:- आप ना खुद को इतना ऊंचा उठा लिए हो की बाकी सभी आपको अपने नीचे नजर आने लगे है। केवल आप ही सही हो। आप जैसा सोचते हो सब वैसा ही करे।
अपस्यु:- अरे .. किस बात से खफा है रे बच्चा… इतना गुस्सा।
कुंजल:- गुस्सा ना रहूं तो क्या करूं। खुद दूसरों के साथ क्या कर रहे हो इस बात की जानकारी भी है क्या? क्या आप को समझ में आता है कि आप के वजह से कोई सुसाइड भी कर सकती है?
अपस्यु:- कुछ सवालों के जवाब वक़्त देता है, इसलिए मै क्या कर रहा हूं वो खुद तुम्हे पता चल जाएगा।
कुंजल:- हुंह । इसे घमंड कहते है। "जो भी मै कर रहा… तू अभी बच्ची है… अभी नहीं समझ में आएगा"…. हर कहानी तो खुद के ही बात पर खत्म कर देते हो।
अपस्यु:- ओ.. ओ .. !! कुंजल इतना गुस्सा क्यों?
कुंजल गुस्से में उठकर चली गई। अपस्यु उसकी बातों को सोच कर बस मुस्कुराए जा रहा था। …. "जरूर मुझ पर ही हंस रहे होगे।"… साची सामने बैठकर पूछने लगी।
अपस्यु:- अरे मुकेश 2 कप कॉफी लाना तो।
अपस्यु, का ऐसा कहना था कि साची उसे हैरानी से देखने लगी। अपस्यु वहीं अपने मुस्कुराते अंदाज में साची से कहने लगा…. "मै आज तुम से अपना कुछ अनुभव साझा करने वाला हूं। यदि तुम अपनी यथावत स्तिथि (करेंट सिचुएशन) से बाहर निकलना चाहती हो तो मुझ पर भरोसा रखना और यदि कुछ कहूं तो मान लेना।"
साची:- अपस्यु अब तो तुमसे डर लगने लगा है। तुम्हारे अंदर मुझे कोई साइको दिख रहा है। जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आए हो ज़िन्दगी बदतर होते चली जा रही हैं क्यों कर रहे हो ऐसा।
अपस्यु:- अरे … धीरज रखो थोड़ा। अच्छा चलो मुझे मारो…
साची:- तुम पागल हो चुके हो अपस्यु। मै जा रही हूं।
अपस्यु:- सोच लो यदि अभी तुम यहां से गई तो मुझे ये सबको बताते देर नहीं लगेगी की मैं कल रात तुम्हारे साथ था।
साची वापस उसके पास पहुंचती, अपने हाथ के हाव-भाव और नजरों से नफरत बरसाती हुई कहने लगी…. "दिया मैने, तुमको आज का दिन लेकिन एक बार तुम्हारी कहानी खत्म होगी फिर तुम मुझे कभी परेशान नहीं करोगे।"
अपस्यु:- अच्छा फैसला, चलो अब खींच कर एक तमाचा मारो।
"बड़े ही शौक से"… और इतना कहकर साची ने पूरी ताकत झोंक दी उस थप्पड में। थप्पड मारने के बाद वो अपनी कलाई पकड़कर बैठ गई। कुछ बूंद आशु उसके आखों में थे, वो अपनी पलकें उठा कर पूछने लगी… "क्यों कर रहे हो ऐसा।"
अपस्यु, अब भी मुस्कुरा रहा था… "मैंने तुम्हारी भावनाओ को क्यों नहीं समझा, इस बात के लिए ये थप्पड था। …. चलो अब चलते हैं।
अपस्यु, साची का हाथ थामे उसे अपने साथ ले जा रहा था। संभवतः ये वो लम्हा तो बिल्कुल भी नहीं था जिसके ख्वाब कभी साची ने संजोए थे। अब तो बस चंद सवाल, मन के भीतर दबा कहीं प्यार और अपस्यु के लिए ढेर सारा नफरत ही अपस्यु के साथ चल रही थी।
कुछ ही पल में दोनों दिल्ली उत्तराखंड के हाईवे पर थे। कार लगभग 160 के गति से चल रही थी। इतने स्पीड को अनुभव करते ही साची का दिल जोड़ से धड़कने लगा… वो गति कम करने की अनुरोध करने लगी, इसे सुनकर अपस्यु ने गति बढ़ा कर 170 तक लेे गया। साची को अब और भी डर लगने लगा…
वो फिर से एक बार गति में परिवर्तन के लिए कहने लगीं। इस बार फिर से अपस्यु ने गति को बढ़ाकर 180 तक लेे गया। ऐसे ही साची अपने डर के कारण बार-बार मिन्नतें करती रही और कार की गति बढ़ते-बढ़ते 230 के पार चली गई। साची डर के मारे चीखती हुई, कार रोकने के लिए कहने लगी।
अपस्यु ने झटके वाला ब्रेक लिया। हंडब्रेक का इस्तमाल करते हुए कार को 180 डिग्री पर रोल किया। तकरीबन 10 फिट आगे जाकर कार पूरी तरह रुक चुकी थी। दरवाजा खुला और साची बाहर जाकर उल्टियां करने लगी। अपस्यु वहीं सड़क से कार को नीचे उतार कर उसके आने का इंतजार करने लगा…
15 मिनट तो साची को सामान्य होने में लग गए। एक बार जब वो सामान्य हुई तब उसने अपस्यु का चेहरा देखी, और मायूसी से पूछने लगी…. "आखिर मेरी गलती क्या है अपस्यु?"
अपस्यु:- यूं समझ लो, ये मैंने तुम्हे आखरी बार कष्ट दिया था, अब प्लीज थोड़ा आराम करो।
अपस्यु ने साची को जूस दिया पीने और कुछ देर कार में बिठाए रखा। अपस्यु को जब लगा अब सब ठीक है तब वो साची को लेकर सड़क के नीचे पेड़ों के बीच गया और वहीं नीचे बैठ गया। साची भी उसके साथ नीचे बैठ गई।
अपस्यु:- हो सके तो मुझे माफ़ कर दो केवल आज के लिए नहीं बल्कि हर वो दर्द के लिए, जो तुमने कुंजल के साथ साझा की थी।
साची:- अपस्यु अब मुझ में हिम्मत नहीं बची है किसी भी बात को समझने की। बस तुम कहते रहो मैं सुन रही हूं।
अपस्यु अब अपने पूरे लय में आते हुए कहने लगा…. "साची मै बहुत ही सरल शब्दों में अपनी बात रखता हूं। मैं पिछले 2-3 महीनों से ही लोगों के बीच रहने लगा हूं, इसलिए मुझे बहुत से इंसानी स्वभाव का ज्ञान ही नहीं था।
साची, हैरानी से उसे देखती:- मतलब..
अपस्यु:- मतलब यही की कल जितनी भी बातें तुमने कुंजल से कही, वैसी मेरी कोई फीलिंग थी ही नहीं। मै तो बस तुमसे इसलिए अनजान बन रहा था क्योंकि कैंटीन में अाकर जब तुमने मुझ से बिना किसी भाव के अपनी बात रखी, तो मुझे लगा अब तुम्हारे दिल में मेरे लिए कोई फीलिंग ही नहीं रही इसलिए मैंने भी उचित समझ कर बात को वहीं खत्म करने का फैसला किया। इसलिए शायद तुम्हारी दोस्ती भी कबूल नहीं थी क्योंकि हम जितने पास होंगे भावनाएं उतनी ही करीब खींचेंगी एक दूसरे को।
साची:- ये सरल भाषा है या पजल। तुम मुझे कंफ्यूज कर रहे हो।
अपस्यु:- हम दोनों ही एक दूसरे से आकर्षित और एक दूसरे को लेकर बहुत ही दुविधा में है। यहीं कन्फ्यूजन दूर करने तो यहां बैठकर बातें करने आए है।
"मै और ऐमी पिछले 12 सालों से साथ है। जैसा कि मैंने तुम्हे बताया मै 2-3 महीनों से ही लोगों के बीच रह रहा हूं इसलिए कुछ इंसानी स्वभाव को कभी मैंने जाना ही नहीं… जैसे कि जब दो लोग प्रेम में होते है तो उसके समतुल्य कोई तीसरा नहीं होना चाहिए। और हम दोनों के बीच ऐमी है।
"तुम्हारी भावनाएं सिर्फ इस बात को लेकर आहत हो जाती है कि कोई लड़की मुझे क्यों छलावा दे, या मै किसी दूसरी लड़की के पीछे क्यों जा रहा हूं। जबकि इस रिश्ते में तो एक लड़की बहुत पहले से मेरे साथ है, और बस यही वजह है कि मैं तुम्हारे साथ वो रिश्ता नहीं निभा सकता।"
साची:- तुम्हारे कहने का मतलब है कि तुम मुझसे भी प्यार करते हो और ऐमी से भी।
"हम दोनों एक दूसरे से प्यार नहीं करते, बस हम दोनों कैज़ुअल रिलेशन में है।"….