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Romance भंवर (पूर्ण)

Chutiyadr

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Yaar aap galat samajh liye.. :doh:
dekhiye hum readers is baat pe ade rahte ki aage kahani aise na hoke kuch achha matlab ki kaajal aur dhokha na de vikas ko... par Dr sahab nahi maante... toh isi baat hum do teen reader hai joh raise revo dete the ki.. for example shikari wali story pe meri joh last revos hai :D... ab aisi revo padh shayad Dr sahab readers ki mutabik kuch toh change laye kahani mein... par woh nahi late... waise woh kahaniya completed ho chuki hai.... actually baat haar jeet ki nahi baat yeh hai ki Dr sahab ki kahani mein Dr sahab ke hi logics bol bala hai... naki hum readers ki... Aur haan koi reader kahani ki ant mein kuch bole ki kaajal ko kya yeh sab karke to Dr sahab kahenge ab kahani hi aisi thi main kya karu isme.... iske aage bhi ek famous dialogue bhi chipka denge.... 'kahani ko sachhe dil se ya dil lagake padhe uske liye dhanywad' :D p.s.ummid ki mutabik reply nahi milta unse...
(aapko isliye read karne ko boling... ek ummid hai ki shayad aapko 'woh readers ke' ummid ke mutabik reply ya jawab mil jaye... taaki hum jaan sake aakhir us kirdaar aisa kyun kiya)
itani tarif ke liye dhanywad naina ji :D
 

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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Hahaha .. lagta hai maine arth ka anrath kar diya .. sorry :) ..

Iske kiye to haar jit swikaar hai .. lekin ek baat pahle bata dun iska result anth me wahi hona hai jaisa aap ne kaha :D .. fir bhi gherta hun main doctor sahab ko ki kahani ke hisab se kyon nahi reply dete hain :)
Woh chhodiye nainu ji woh dekhiye... .ki kaise dr sahab bas Sukriya kah rahe hai itni baatein sunne ki baad bhi... :doh: yeh Dr sahab reply bhi aise hi deke readers se picha chhura lete hai :sigh:
itani tarif ke liye dhanywad naina ji :D
:sigh2:
 

Chutiyadr

Well-Known Member
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Update:-81



दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे। दोनों की आखें बंद हो चली, होंठ से होंठ उलझ चुके थे और दोनों की श्वांस लंबी होती चली जा रही थी। दोनों ही एक दूसरे में खोते चले गए और ख्याल भी नहीं रहा कि दोनों कुंजल के कमरे में है। स्वस्तिका और कुंजल दोनों लौट आयी थी और दोनों ही दरवाजा खोलकर अचानक से अंदर….


कुंजल और स्वस्तिका जैसे ही अंदर घुसे, दरवाजे खुलने की आहट से अपस्यु और ऐमी दोनों ही चौकान्ना तो हुए लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। इधर जैसे ही दोनों दरवाजे से अंदर आए, पीछे से दोनों को ऐमी के बाल नजर आ रहे थे और अपस्यु का हल्का माथा। दोनों की आखें बड़ी हो गई…


"ओह हो तो दोनों के बीच कुछ नहीं, और यहां बहनों के कमरे में रोमांस चालू है। इतने बेशर्म हो गए दोनों।"… स्वस्तिका दोनों को छेड़ते हुई कहने लगी।


कुंजल:- ये तो बेशर्मों से भी एक कदम आगे है। कैसे एक दूसरे से चिपके है।


ऐमी:- जिसे जिसे शर्म आ रही है वो यहां से चली जाएं, लेकिन हमे परेशान नहीं करे, दाव पर एक दिन लगा है और मुझे इस अकडू को इसके बेवड़ेपन की सजा देनी है।


"दोनों कर क्या रहे है। मुझे लगा किस्स कर रहे है।".. स्वस्तिका अपनी बात कहती हुई आगे बढ़ी.. तभी पीछे से नंदनी और वीरभद्र भी पहुंचे और वहां का माहौल देखकर नंदनी हैरानी से पूछने लगी… "ये दोनों (अपस्यु और ऐमी) क्या कर रहे है, और तुम दोनों (कुंजल और स्वस्तिका) क्या देख रही हो।"..


वीरभद्र:- मुझे तो लग रहा है दोनों चूम रहे है।..


चटाक से एक थप्पड वीरभद्र के गाल पर…. "तुमसे किसी ने डिटेल पूछी क्या?".... नंदनी अपने चिर परिचित अंदाज में वीरभद्र के बेवकूफी की सजा दे चुकी थी… "जिसे कोई शंका है यहां आ जाओ.. कुछ भी अंदाज़ा मत लगाओ"..


अपस्यु की बात सुनकर सब वहां पहुंचे। दोनों एक दूसरे के आखों में आखें डालकर एक दूसरे को देख रहे थे। … "ये क्या कर रहे हो दोनों?"… नंदनी पास पहुंचकर पूछने लगी।


ऐमी:- आंटी ये मुझे जगाने आ रहा था और मैं इसकी उस हरकत से नाराज़ चल रही हूं जिसका प्रदर्शन इसने कल रात किया था।


अपस्यु:- मां ये बस फेवर लेना चाहती है, घोड़े बेचकर सोने की आदत है।


नंदनी:- तुम दोनों की हालात से तुम्हारी बातों का क्या संबंध हैं।


ऐमी:- पलक कौन पहले झलकता है उसकी शर्त लगी है और मेरी पलक झपक जाए इसके लिए बिस्तर में अाकर लेटा गया ये…


"इतनी गन्दी हरकत सिर्फ शर्त जितने के लिए।" …. "चटाक…. चटक" एक ही गाल पर 2 थप्पड नंदनी ने जड़ दिए। अपस्यु अपना गाल पकड़ कर खड़ा हो गया। इधर अपस्यु ने पलक झपकी और उधर बिस्तर से उछलकर ऐमी बाहर…. "याह हू .. मै जीत गई… सुनो अकडू शर्त याद है ना.. एक दिन जैसा-जैसा मै कहूंगी करना होगा।"


अपस्यु:- मै नहीं मानता, तुमने चीटिंग की है.. मां ने मेरा कन्सन्ट्रेट भंग किया है।


नंदनी:- चप्पल से मारूंगी तुझे, जवान लड़की है उसके साथ ऐसे सोया था।


ऐमी:- अरे आंटी.. आप गलत सोच रही है। मैं जब बहुत छोटी थी तब से हम साथ ही सोया करते थे… आप भी ना क्या से क्या सोच लेती हैं।


स्वस्तिका:- हां मां.. आप इन दोनों में लड़का या लड़की ना लाइए..


नंदनी:- सॉरी बेटा वो गुस्से में मैंने ना जाने क्या-क्या सोच लिया? थोड़ी शर्मिंदगी सी होने लगी है।


ऐमी:- चिल करो आंटी, और फैसला कीजिए मैं जीती या नहीं।


नंदनी:- हां तू ही विनर है, अच्छा सबक सीखना इसे .. ऐसा की दोबारा किसी पार्टी फंक्शन में ये अपना दादा या नाना जैसी हरकतें ना करे।


कुंजल:- ऐसे कैसे ऐमी जीत गई, भाई आप के साथ चीटिंग हुई है, मैं आप के सपोर्ट में हूं।


स्वस्तिका:- मै ऐमी के सपोर्ट में। हमारा 2 वोट.. अब बोल..


कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- हां कुंजल जी..


कुंजल:- आओ.. हमारा वोट बढ़ाकर मैच टाई कर दो..

वीरभद्र:- कुंजल जी जज कैसे वोट देगा, फिर फैसला कौन सुनाएगा।


वीरभद्र की बात पर सभी हसने लगे। समय हो रहा था इसलिए सभी जाने की तैयारियों में लग चुके थे। अपस्यु भी नीचे जाकर सभी पेमेंट क्लियर करके चेकआउट की तैयारियां कर रहा था। तभी होटल कि लॉबी में ध्रुव भी पहुंच गया। दोनों में थोड़ी सी हाय-हेल्लो के बाद ध्रुव साची से मिलने चला गया।


बैठकर वो अभी सारी फॉर्मेलिटी कर ही रहा था कि राजीव और मनीष भी नीचे पहुंच गए। मनीष पेमेंट के लिए काउंटर पर गया और राजीव वहीं पास में बैठ गया। अपस्यु वहां के मैनेजर से कुछ ड्रिंक सर्व करने बोला और अाकर राजीव के पास बैठ गया।


राजीव:- कल की एंगेजमेंट में मजा आ गया। मेरे भाई के ओर से कल के लिए मै माफी मंगता हूं। हमारे गांव में यदि एंगेजमेंट हुआ होता तो लोग इससे भी ज्यादा पीकर ड्रामा करते है और हम उन ड्रामा को एन्जॉय करते हैं।


अपस्यु:- कोई बात नहीं है अंकल। वैसे हमरे बीच की शुरवात कुछ अच्छी नहीं रही, इसलिए खटास है सबके मन में।


राजीव:- हां शायद यही बात है। लेकिन तुम्हारा परिवार अच्छा है, मुझे खुशी है कि मेरी बच्ची तुमलोग को पसंद आयी।


अपस्यु:- आप किसी चिंता में दिख रहे हैं अंकल, बात क्या है?


राजीव:- कुछ नहीं मै बाद में बात करता हूं।


अभी राजीव अपनी बात कह ही रहा था उसी बीच मनीष कहने लगा… "राजीव तूने अपनी पेमेंट पहले ही कर दी है क्या?"


राजीव:- मुझे नहीं पता भईया.. मैंने तो नहीं कि…


अपस्यु उसका हाथ थामकर कहने लगा…. "मुझे कल रात की बात पता है। खुशी खुशी यहां से विदा होइए, और चिंता मत कीजिए।"..


राजीव:- मुझे माफ़ कर दो, ना जाने मै तुम लोगों की क्या-क्या कहता रहा लेकिन मेरे बुरे वक़्त में…


अपस्यु राजीव को बीच में ही रोकते हुए… "बुरा वक्त नहीं होता लेकिन कभी-कभी हम अपने कर्मो के फल को बुरा वक़्त मान लेते हैं। कर्म धोखेबाज वाले होंगे तो अपना भाई भी ऐसे ही करता है। मैंने कोई आप पर रहम खाकर पैसे नहीं दिए बल्कि मुझे पसंद नहीं की किसी धोखेबाज कि कमाई हमारी लावणी खाए। आप अपने बीवी बच्चे को किसके खून से सना पैसा खिलाते थे, उससे मुझे कोई लेना देना नहीं। लेकिन अब वो हमारी जान है और मै उसे धोखे के कमाई वाले पैसों का खाना नहीं खाने दे सकता। हो सके तो अपने कर्मों के प्रश्चित का तरीका ढूंढिए वरना कल रात तो केवल आप के भाई ने आप को ज़ख्म दिए है, आगे और भी दर्द आप के हिस्से में बचे होंगे। शायद उसका असर आप के बेटे पर भी देखने को मिले। आगे आप की मर्जी, हमे अपने घर की बच्ची जान से प्यारी है हम तो बस उसे है बचा कर चलेंगे।"


अपस्यु अपनी बात कहकर वहां से उठकर चला गया और राजीव वहीं शांत बैठकर अपस्यु की बातों पर सोचने लगा। ऊपर आकर अपस्यु सबसे मिला। चुपके से ऐमी के साथ अपनी वो अधूरी किस्स पूरी करते उसे बाय-बाय विश दिया और वापस सबके साथ नीचे चला आया।


एयरपोर्ट पर सबको ड्रॉप करने के बाद अपस्यु ध्रुव के साथ वापस होटल लौटा और अपना बैग उसकी कार में डालकर उसकी मेहमान नवाजी को स्वीकार करते उसके साथ चल दिया। अपने बंगलो के गेस्ट हाउस में अपस्यु के रुकने का इंतजाम किया गया था।


ध्रुव, अपस्यु को पूरा गेस्ट हाउस दिखाने ले बाद वहां से चला गया और अपस्यु वहां बिस्तर पर बैठकर आराम से टीवी देखने लगा और उसके लिए जो हाउस सर्वेंट छोड़ा गया था उस बुलाकर उसने अपने कॉकटेल का सरा सामान मंगवा लिया। उस हाउस सर्वेंट को पहले तो उसने वो कॉकटेल बनवाया फिर आराम से फिल्म का मज़ा लेते हुए कॉकटेल का आनंद उठाने लगा।


4-5 पेग पीने के बाद अपस्यु ने उससे कुछ स्नैक और पनीर मंगवाया। वो हाउस सर्वेंट चला गया उसका ऑर्डर पूरा करने और इधर अपस्यु बाहर लॉन में अाकर घूमने लगा। शाम के 6 बज रहे होंगे, जब अपस्यु लॉन में था और तभी बाहर एक कार अाकर खड़ी हुई जिसमें से एक लंबा चौड़ा आदमी बाहर आया। देखने में कोई आर्मी ऑफिसर लग रहा था।


अपस्यु एक झलक उसे देखा और अनदेखा करके वहीं घूमने लगा। इतने में वो हाउस सर्वेंट अपस्यु का ऑर्डर के आइटम को लेकर पहुंच गया और अपस्यु भी उसी के साथ अंदर चला गया। अपस्यु ने तो उस ऑफिसर पर रती भर भी ध्यान नहीं दिया लेकिन वो अपस्यु को घूरते ही अंदर आ रहा था।


मेघा को उसके आने की पहले से सूचना थी इसलिए वो पहले से बौंगलो के मीटिंग हॉल में उसका इंतजार कर रही थी जहां हाड़विक और प्रकाश पहले से उसका इंतजार कर रहे थे। एक औपचारिक परिचय के बाद जेम्स ने बोलना शुरू किया…


"वेल प्लैनड मर्डर, जिसने भी किया है काफी शातिर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हैं। एक शातिर टीम जिसकी पहचान छिपी है लेकिन कभी भी उसने छिपकर हमला नहीं किया।"…


प्रकाश:- तुम्हारे कहने का मतलब है कि जो भी ये सब कर रहा है उसे हम जानते हैं।


जेम्स…. मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दीजिए फिर कोई सवाल हो तो पूछ लेना… मै सिर्फ कल के मर्डर के आधार पर सारी बात बता रहा हूं। आगे के इन्वेस्टिगेशन के लिए पहले डील फाइनल होनी भी तो चाहिए।

"यह जो कोई भी है, ये तो नहीं कहा जा सकता कि आप लोग उसे जानते है या नहीं लेकिन वो आप लोगो को अच्छे से जानता है। एक परफेक्ट प्रोफेशनल टीम जो यूएस के एजेंसी को भी अपने आगे कुछ नहीं समझता, खुला सबके बीच रहकर पूरी मर्डर प्लान की गई थी और किसी को कानोकान खबर तक नहीं।"


"कम से कम 3 दिन से वो प्लान कर रहा था लेकिन छत पर लगे सर्विलेंस कैमरे में कोई भी ऐसा नहीं जो प्लान करते नजर आए। 3 टन का जेनरेटर जो काफी सुरक्षित रूप से लगाया गया था। मजबूत पिलर के बीच था वो जेनरेटर और होटल के छत कि फेंसिंग इतनी मजबूत की एक क्या 2 जेनरेटर एक साथ फोर्स डालते तो भी नहीं टूट पता। किसी को भनक तक नहीं की क्या इस्तमाल किया गया, कौन सी टेक्नोलॉजी थी जिससे जेनरेटर के पिलर को तोड़ा गया, फिर छत कि मजबूत रेलिंग का एक हिस्सा हटाया गया। क्योंकि छत की जांच में केवल और केवल वहां पर इलेक्ट्रिक वायर मिले हैं जिनका मैन्युफैक्चरिंग रशिया का है।"


"उन वायर के सहारे उसने कैसे धमाका किया वो भी बिना आवाज़ किए, फिर होटल कि आधी फेंसिंग को भी उसी से तोड़ा गया। और सबसे बड़ा सवाल उस 3 टन में जेनरेटर को कैसे धक्का लगाया होगा। और इतने सारे सवालों के बीच एक अहम सवाल 30 जून की सुबह से वहां 5 एजेंसी थी, सब ने सुरक्षा के पूरे इंतजामात चेक किए थे। 8 स्निपर तो उस होटल की छत पर थे और 4 स्निपर सामने में बिल्डिंग में।"


"वो वहां चाहता तो किसी को भी टारगेट कर सकता था लेकिन उसने केवल उन्हीं 4 को मारा, क्योंकि उसे पता था किस टारगेट को मारने से सुरक्षा एजेसी दखल नहीं देंगे। कंप्लीट प्लान, फोकस टारगेट, छिपकर मारना कभी मोटिव नहीं था क्योंकि उसे भी पता था कि इतना भारी जेनरेटर बिना मजबूत प्लान करके खिसकाया नहीं जा सकता था।"…


हाड़विक:- जब इतना पता लगा लिया तो ये भी बता दो कौन है? कम ऑन कोई एक नाम?


जेम्स:- कोई नाम नहीं। हमने होटल के सर्विलेंस को चैक किया। कोई ऐसा नहीं था जो ऐसे काम को अंजाम दे सके। हां लेकिन एक लड़के ने हमे कुछ देर के लिए उलझाया जरूर था। और हां उसके साथ तुम्हारे घर की होने वाली बहू भी थी उस रात छत पर।

प्रकाश:- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है?

जेम्स:- पहले ये क्लिप देखिए फिर मै बताता हूं।


एंगेजमेंट से ठीक एक रात पहले की क्लिप चलाई गई, जहां अपस्यु और साची की बात हुई। हालाकि यह छत का वो हिस्सा नहीं था जहां से जेनरेटर गिराया गया था, पूरे क्लिप में रोने, दोनों के बीच झगड़े और चौंकाने वाला वो अपस्यु का जंप था। वो जंप देखकर तो सभी के मुंह खुले रह गए थे।


जेम्स:- यहीं वो स्टंट था जिसे देखने के बाद हमारा दिमाग घूम गया था। उस हिस्से में सर्विलेंस कैमरा कवर नहीं करता इसलिए हमे खुद जाकर देखना परा की वहां नीचे क्या था, फिर पता चला कि उसने फिल्म का स्टंट किया था। ठीक एक फिट नीचे कांच साफ करने के लिए क्रेन लगाया गया था। हालांकि थोड़ा हम उलझे लेकिन इसकी पूरी जानकारी निकली। क्षमता है, पर ये जरूरत से ज्यादा शराब पीता है और एक शराबी वो भी अकेला इतना शार्प प्लान नहीं कर सकता।


"तो सवाल यह है कि वो आखिर कौन था जो इतना सबकर गया वो भी बिना किसी के नजर आए। उसका सीधा जवाब है, कोई आप लोगों के बीच का है, जिसके पास पल-पल की खबर हो। वो चाहता है कि आप पूरा बर्बाद हो जाए। उसे जब भी सही वक़्त दिखता है वो आप पर हाथ डालता है और फिर शांत हो जाता है। वाह आप पर छिपकर वार तो कर रहा है लेकिन वो छिपा हुआ नहीं है। बिल्कुल आप की आखों के सामने है बस उसे आप देख नहीं पा रहे। कोई ऐसा जो अपना काम करवाना जानता हो। जिसे अच्छे से पता है कि किससे कहां का काम दिया जाए और वो लोग उसके लिए काम परा कर दे ।


प्रकाश:- हम्मम। जितना तुमने बताया है उतनी खूबियां सिर्फ 1 में ही है और वो कल इसी घर में था। जेम्स तुम्हे ये काम दिया मैंने। उम्मीद करता हूं यह काम तुम जल्दी पूरा कर लोगे।


जेम्स:- डील के हिसाब से पेमेंट कर दीजिए और हम काम शुरू कर देते हैं।


जेम्स अपनी बात खत्म करके वापस लौट गया और तीनों ही बैठकर लोकेश के खिलाफ रणनीति तय करने लगे। उन्हें लगने लगा कि जो भी घाटे के आधे पेमेंट किए गए है, वो केवल उनसे जान बुझ कर वसूल किया गया है। कुछ देर की आपसी बातचीत के बाद तीनों हॉल में आ गए।


हॉल में पहुंचते ही प्रकाश ने ध्रुव को बुलाया। ध्रुव प्रोजेक्ट की फाइल चेक करके कुछ देर के बाद उनसब के बीच पहुंचा, प्रकाश अपना रोष दिखाते हुए पूछने लगा… "साची और उस लड़के अपस्यु के बीच क्या चल रहा है?"
jab wo kisi bhi servalance cemere me nahi pakad aaya to fir sanchi ke sath kaise pakad me aa gaya :yikes:
apsayu ne to use bhi plan kiya tha na.....
 

Adirshi

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Update:-54 (A)



इधर अपस्यु और ऐमी ने अपनी कार होटल में पार्क कि और दोनों रूम में जाकर बाहर का नजारा देखने लगे। हर मिनट कैलकुलेट हो रहा था और हर बारीक चीज पर अपस्यु अपनी नजर बनाए हुए था।

ऐक्सिडेंट के ठीक 5 मिनट बाद पुलिस वाहन वहां पहुंच चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा कांड हुआ हो। कुल 22 पुलिसकर्मी वहां पहुंचे थे। जिनमे ज्यादातर 1 या 2 सितारा वाले पुलिस थे। कुछ पुलिसकर्मी ऊपर बिल्डिंग के पास गए। 2-3 उसके चारो ओर चक्कर लगाकर देखने लगे। 5-6 पुलिस वाले वहां के ट्रैफिक को देख रहे थे, हालांकि रात के इस प्रहर में ज्यादा ट्रैफिक तो नहीं थी, लेकिन फिर भी पुलिस पूरी मुस्तैदी से वहां के ट्रैफिक को मेनटेन कर रहे थे।

लगभग आधे घंटे में वहां का पूरा तमाशा खत्म हो चुका था। पुलिस वालों के जाते ही एक सिक्योरिटी गार्ड बाहर आकर खड़ा हुआ। वहीं उसके दाएं ओर सबसे आखरी में बिल्डिंग के पिलर पर एक बॉक्स लगा था। उस बॉक्स के ऊपर लगे दोनों स्विच को बंद करके वहीं कोने में बैठ गया।

"कुछ भी बदलाव नहीं है, अब फिर से वही सब कुछ यहां होगा"… ऐमी भी बाहर के ओर देखती हुई कहने लगा। अपस्यु उसके पीछे अाकर, अपने चेहरे को उसके कंधे पर रख कर, अपने चेहरे को उसके चेहरे से बिल्कुल जोड़ते …. "बस एक बदलाव है, यहां इस कमरे में"….

अपनी बात कहकर अपस्यु उसके जैकेट के बटन को खोलता चला गया। जैकेट के दोनों साइड को पकड़ कर वो धीरे-धीरे पीछे आने लगा… ऐमी अपने दोनो हाथ पीछे की ओर उठा कर अपने पूरे बदन को आगे की ओर झुका ली, और जैकेट हाथों से फिसलते हुए, धीरे-धीरे उसके बदन से अलग हो गया।

अपस्यु तेजी से उसके पीछे पहुंचा और उसके खुले पीठ पर अपने हाथ फेरते हुए, उसके कानों के नीचे गले पर चूमने लगा। पीछे से चूमते हुए, उसने कंधे से स्ट्रिप को खिसकना शुरू किया और धीरे-धीरे ऐमी हाथों से सरकाते हुए उसे बाहर निकाल दिया।

स्ट्रिप के हाथों से निकाल ही ऐमी की छोटी सी पोशाक भी उसके पाऊं में थी और अपस्यु उसके दोनों कंधो के बीच पीठ पर चूमते हुए, उसके स्तनों पर पर अपने हाथ डालते उसे मसलते हुए, उसे पीछे से गर्दन से लेकर पीठ तक चूमने लगा। ऐमी की कसमसाहट, और मस्ती में अपने होटों को दातों तले दबाकर वो तेज-तेज श्वास लेने लगी।

अपस्यु उसके स्तनों को अपने हाथों के बीच पूरा मसलते मज़े ले रहा था। उसके पीठ को चूमते हुए अपस्यु नीचे बैठ गया। अपने हाथों से उसके पैंटी को नीचे खिसकाते, धीरे-धीरे नीचे लाते उसे भी बाहर निकाल फेका। ऐमी आगे के ओर झुकी खिड़की पर लगे पाइप को अपने मुट्ठी में पकड़ी, तेज-तेज चलती श्वासो के साथ, धीमी-धीमी सिसकियां भी ले रही थी।

अपस्यु नीचे बैठ कर पैन्टी को उसके पाऊं से बाहर निकाल कर फेंक दिया। आखों के सामने ऐमी को पीछे पूर्ण नग्न देखने का मादक एहसास। बिल्कुल सफेद शरीर और उभरा वो नितम्ब। अपस्यु उसके जांघ को चूमते हुए ऊपर बढ़ा और अपना चेहरा उसके नितम्बों के बीच पूरा डालकर खेलना शुरू कर दिया..

ऐमी पागल होती अपने होंठ दबाकर तेज सिसकारियां लेने लगी। उसके शरीर में कंपन फैल गया। उसका रोम-रोम सिहर उठा। अपस्यु उसके पीछे अपना पूरा चेहरा लगाकर, अपने हाथ को आगे ले गया और उसके योनि के ऊपर डालकर, योनि को कभी धीमे तो कभी जोर से मसलते जा रहा था। ऐमी की मादक सिसकारियां जोड़ पकड़ने लगी थी। उसके पाऊं मस्ती से हिलने लगे और अब खुद को संभालना भी मुश्किल हो रहा था…

ऐमी तेजी में पलटी, अपस्यु को खड़ा करती उसके होटों को चूमना और काटना शुरू कार दी। फिर खुद नीचे बैठकर अपस्यु के पैंट को पूरे तेजी के साथ खोली। उसके अंडरवीयर को नीचे सरकाती, उसके लिंक को अपने मुट्ठी में जकड़कर, उसे कुछ देर तक आगे पीछे हिलाने के बाद, बॉल को चूमते हुए उसके लिंग पर अपनी जीभ चलाई और अपना मुंह खोल कर अंदर ले ली।

पूरे मस्ती में वो उसके लिंग को चूसती हुई उसके बॉल को अपने हाथों में लेकर उसके साथ खेनलने लगी.. अपस्यु बिल्कुल बेकाबू अपने सिर को ऊपर किए तेज तेज सांस लिए जा रहा था और ऐमी लगातार उसके लिंग को मुंह में लेकर आगे पीछे करती हुई चूस रही थी।

अपस्यु से भी अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल हो गया। वो ऐमी को कंधे से पकड़ कर ऊपर उठाया। उसके दोनों स्तनों को अपने दोनो हथेलियों के बीच दबाकर, उसे पूरा अपने हाथों में कैद करके मसले हुए ऐमी के होंठों को चूसने लगा।

ऐमी भी पागल होती उसके होटों को काटती उसके जीभ को चूसने लगी। अपस्यु ने उसके अपने गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक कर उसके दोनों पाऊं को फैला दिया। योनि के बीच अपने लिंग को डालते, एक ही झटके में अपने लिंग को पूरा अंदर तक तेज झटका मारा। ऐमी के स्तनों को दोनों हाथों में दबोज कर, उसपर पूरे अपने नाखूनों को धसा दिया। ऐमी तेज तेज "आहहहहहहहहहहहहहहहहह" करती अपने दोनो मुट्ठी में चादर को दबोचकर अपनी छाती ऊपर करने लगी। ऐमी भी लिंग को योनि के पूरा अन्दर मेहसूस करने लिए तेज-तेज ऊपर नीचे कमर को झटकने लगी।

हर झटका पूरे थिरकन के साथ अंदर तक मेहसूस हो रहा था। वासना अपने पूरे चरम पर थी और फिर तेज-तेज झटकों के बीच ऐमी का बदन अकड़ने लगा। इसी के साथ अपस्यु ने भी अपने झटकों कि रफ्तार पूरा बढ़ाते, उसका पूरा साथ साथ देने लगा। और फिर दोनों ही अपने चरम पर पहुंचकर उस सुख को भोगते हुए शांत हो गए।

अपस्यु वहीं उसके पास में लेट कर अपनी श्वास सामान्य करने लगा।… एक मीठी रात दोनों के जहन में कैद हो गई और दोनों निढल पड़े सो गए। सुबह जब ऐमी की नींद खुली तो अपस्यु के नंगे बदन को देखकर उसके अंदर गुदगुदी सी हो गई। वो अपस्यु के होंठ को चूमती हुई बाथरूम में घुसी और जल्दी से फ्रेश होकर बाहर निकल गई।

जबतक वो बाहर आयी अपस्यु भी जाग चुका था… ऐमी के बाहर निकलते ही, वो भी अंदर घुसा। जबतक वो बाहर आया ऐमी खाने का आर्डर कर चुकी थी… दोनों खा पीकर जब निश्चिंत हो चुके थे।

दोनों लैपटॉप खोलकर बैठ गए और कल रात के मैक्रो डिवाइस की सभी फुटेज को देखने लगे। लगभग 2 घंटे तक हर बात को नोट करने के बाद…

अपस्यु:- ऐमी तुम्हे क्या लगता है यहां की सुरक्षा को देखकर…

ऐमी:- ये लोग बहुत ही निश्चिंत है अपने सिक्योरिटी सिस्टम के कारण। ग्राउंड फ्लोर के नीचे बने बेसमेंट में जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है, और वहां पर भी इन्होंने लेजर बिम्ब लगा रखा है।

अपस्यु:- 4 ट्रेंड गार्ड जो ग्राउंड फ्लोर पर हमेशा रहते है और एक गार्ड बाहर लगातार चारों ओर चक्कर लगाता है। 15 गार्ड की टीम जो 8 घंटे के हिसाब से 5 की टुकड़ियों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं।

ऐमी:- अंदर के चारों गार्ड कभी बाहर नहीं निकलते और बाहर का माहौल जरा भी गड़बड़ हो तो, बाहर वाला गार्ड दोनों स्विच ऑन करके उन्हें खतरे का सिग्नल देता है।

अपस्यु:- खतरे की स्तिथि में 5 मिनट में पुलिस कि टीम भी पहुंच जाती है। पुलिस की टीम को देखकर तो यही लगता है कि ये एक्स्ट्रा सिक्योरिटी है आरडी वालों की, जो खतरे कि स्तिथि में अलर्ट हो जाती है।

ऐमी:- 3 पॉवर बैकअप है और पॉवर जाने की स्थिति में ग्राउंड फ्लोर 4 फिट मोटी स्टील के अंदर कवर, जिसे मिसाईल से भी तोड़ने में परेशानी हो जाए।

अपस्यु:- अब इतनी जानकारी हासिल करने के बाद एक ही सवाल उठता है, ये चोरी कैसे संभव होगी।

ऐमी:- यह असाइनमेंट नहीं है, ये एक ट्रैप है।

अपस्यु:- तो कल की रात फंसते है इस ट्रैप में।

ऐमी:- कैसे….

"जब रात के अंधेरे में घना कोहरा छाएगा… हम शान से, सामने से जाएंगे.. सूट उप एंड गेट रेडी फॉर एक्शन"


18 जून 2014 USA Trip


सब न्यूयॉर्क भी पहुंच गए थे और वहां पहुंचकर मस्ती कि सारी प्लैनिंग भी हो चुकी थी। रात का वक़्त और चारो कैसिनो में जाकर मज़े कर रहे थे। इसी बीच वीरभद्र के पास कुछ प्रायोजित (sponsored) लड़कियां पहुंची। जो वीरभद्र के साथ बहुत ही अभद्र हरकतें शुरू कर चुकी थी। कोई बालों मै हाथ फेर रही थी तो कोई गालों को हाथ लगा रही थी। एक ने तो पैंट के ऊपर हाथ रखकर उसके लिंग को ऊपर-ऊपर से सहलाने लगी।

कोई और मौका होता तो शायद वो पूरा मज़ा भी लेता, लेकिन नजरों के सामने कुंजल थी जो राउंड टेबल पर बैठकर, चकरी घूमने वाले जुए के टेबल पर थोड़ा-थोड़ा पैसा लुटा रही थी। वहीं पास वाली सेक्शन में विन्नी बैठकर, पासे (dice) की संख्या पर पैसे लगा रही थी, और उसके कुछ दूरी पर क्रिश बैठा हुआ अपनी गर्लफ्रेंड को तार रहा था बेचारा।

वीरभद्र उन लोगों को सामने देखकर थोड़ा असहज मेहसूस करने लगा। तभी कुंजल ने वीरभद्र को देखा और चौंकने की झुटी प्रतिक्रिया देती उसने अपना मुंह खोल ली।

कुंजल की ऐसी प्रतिक्रिया देखकर वीरभद्र उन लड़कियों को किनारे करने कि कोशिश में जुट गया। सिर को ना में हिलाकर जताने कि कोशिश करने लगा कि वो कुछ नहीं कर रहा, बल्कि यही लड़कियां पीछे पड़ी है। तभी कुंजल उसके कंफ्यूज से चेहरे को देखकर जोड़ से हसी और बड़ी अदा से चलती हुई उसके पास पहुंची और अाकर सीधा उसके गोद में बैठ गई।

ये तो वीरभद्र के लिए और भी ज्यादा चौंकाने वाला छन था और उसका हैरानी से भड़ा चेहरा देखने लायक था।…. "कुंजल जी"…. "हां वीरे जी"..

वीरभद्र:- कुंजल जी आप ये क्या कर रही है, मेरे प्राण हलख में आ गए है। आप प्लीज ऐसा मत कीजिए। मै पहले ही इन गोरी कन्याओं सें परेशान हूं।

कुंजल:- वीरे जी, ये लड़कियां आप जैसे गबरू देशी नौजवान पर फिदा हो गई है। आप 2 मिनट मुझे दीजिए, इन सबको अभी भागती हूं।

कुंजल ने कुछ देर अंग्रेजी में खिटिर-पिटिर करके समझाने कि कोशिश करने लगी कि वो लोग उसके बॉयफ्रेंड को छेड़ रही है। वीरभद्र बिल्कुल शांत बस वहां चल रहे माहौल को सुनने में लगा हुआ था और बस यही प्रार्थना करने में लगा था कि कुंजल जल्दी यहां से उठ कर जाए…

बात होते-होते अंत में ऐसा हुआ कि, वीरभद्र को कुंजल ने उसके गाल को चूमने के लिए कहने लगी। वीरे अब पूरा फसा। कुंजल ना तो उसके गोद से उठने का नाम ले रही थी और ना ही वहां से वो लड़कियां जाने का नाम ले रही थी। लेकिन वीरभद्र की अभी प्राथमिक समस्या तो कुंजल को वहां से उठाना था और इसी क्रम में वीरभद्र उसके गाल को अपने होंठ से छू कर जल्दी से सीधा हो गया…

कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- जी कुंजल जी…

कुंजल:- किसी बच्चे को चूम रहे है क्या, गर्लफ्रेंड को चूम रहे है। थोड़ा अच्छे से चुमिए वरना ये लड़कियां आप को नहीं छोड़ने वाली।

बेचारा वीरभद्र क्या करता, सांप छूछुंदर जैसी हालत थी। उसने एक बार फिर कुंजल के गाल को चूमा। ये चुम्बन थोड़ा लम्बा चला और वीरभद्र कुंजल को चूमने के बाद फिर से सीधा बैठ गया। उसके इस किस्स के बाद वहां की सारी लड़कियां गायब हो गई और कुंजल भी उठकर बैठ गई।

कुंजल के हटते ही वीरभद्र वहां से कुछ देर के लिए गायब हो गया और इधर कुंजल, विन्नी और क्रिश हंस रहे थे। थोड़ी देर बाद वो वापस आया। कुंजल उससे मज़ाक करती हुई कहने लगी… "बहुत थके हुए लग रहे है, कहां गए थे।"

वीरभद्र, थोड़ा घबराते हुए कहने लगा…. "वो बाथरूम… मै बाथरूम गया हुआ था।"

कुंजल उसे देखकर जोड़ से हंसती हुई कहने लगी…. "हां इतनी सरी लड़कियां जब इधर-उधर हाथ लगाएगी तब तो बाथरूम जाना लाजमी ही है।"

वीरभद्र अपना मुंह छिपाए हुए इधर-उधर देखने लगा…. "वो दोनों कहां गए, मै उसे ढूंढ़ कर लाता हूं।"

कुंजल उसका हाथ पकड़कर रोकती हुई…. "अरे आप कहां जा रहे है। दोनों प्रेम के पंछी उड़ चले, उसे कहां आप ढूंढ़ने जाएंगे।"..

वीरभद्र:- उनकी तो अभी बैंड बज जानी है… अभी आरव को सब बताता हूं मै।

कुंजल:- वैसे क्रिश जाते जाते बोलता गया है.. "यदि वीरभद्र मेरे किस्स वाली फोटो भेजेगा तो वो भी हमारी किस्स वाली तस्वीर आरव को भेज दूंगा।"

वीरभद्र:- आप लोगों ने मिलकर मेरा ही चुटिया काट दिया। ये अच्छा ना किया आप लोगों ने। ये मेरा पहला काम था और मै अपने पहले काम में असफल हो गया।

कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- जी कहिए …

कुंजल:- ऐसे अपसेट नहीं होते। वैसे भी प्रेमियों को मिलने से जब उसके घर के लोग नहीं रोक पाते तो फिर हम कौन है। आप बिल्कुल भी असफल नहीं हुए है। अब मूड ऑफ नहीं कीजिए और चलिए चलकर थोड़ा माल कमाया जाए। मैं 1000 डॉलर हार चुकी हूं।

वीरभद्र, बेचारा मायूस कुंजल के पीछे चल दिया। उसकी जीत पर फीकी मुस्कान देता और और उसके हार पर फिका सा अफसोस….
Kaam ke sath sath romance to koi apasyu se sikhe jabardast
Aur yaar kunjal ne kya jabardast batli main utara hai veerbhardra ko maja aa gaya :lol1: ab wo Vinni aur krish ko pareshan na karega
Badhiya update
 

Adirshi

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18 June 2014 USA Trip…

शाम का वक्त था। आरव होटल के कैसिनो में बैठकर, वहां पर ड्रिंक के मज़े ले रहा था। वो वहां के बार काउंटर पर बैठकर लोगों के हारने और जितने कि प्रतिक्रिया को देखकर अपना मन बहला रहा था।

कैसिनो के अंदर का वो प्यारा सा संगीत उस माहोल में चार चांद लगा रहा था। तभी सामने से, मनीष मिश्रा, साची के पिताजी, का बड़ा बेटा कबीर जो लगभग 26 साल का था कैसिनो के अंदर आया। उसके साथ उसका चचेरा भाई नीरज, जो राजीव मिश्रा, लावणी के पिताजी, का बड़ा बेटा, लगभग 24 साल का था, वो भी आ रहा था।

दोनों अाकर वहीं बार काउंटर पर आरव के पास बैठ गए। कोई एक दूसरे को जानता नहीं था और सब अपने अपने हिसाब से वहां मज़े कर रहे थे। आरव का फोन बजा… "हे स्वीटी, तुमने व्हाट्स एप से मुझे अनब्लॉक कर दिया क्या?"

लावणी:- वेरी फनी.. क्या चाहते हो मै फिर से ब्लॉक कर दूं।

आरव:- बिल्कुल नहीं बेबी, तुम तो गुस्सा हो गई.. आई लव यू..

लावणी:- लव यू टू। अब जल्दी से बताओ कहां हो। तुम्हे देखने के लिए तरप गई हूं।

आरव:- कहां हो मै आता हूं ना, बताओ…

लावणी:- ना मै आती हूं, तुम बताओ कहां हो?

आरव:- अपने कमरे में, आ जाओ..

लावणी:- नाइस जोक.. लेकिन शाम के 7 बजें तुम्हारा भाई ये बात कहता तो मान भी लेती। लेकिन तुम इस वक़्त अपने रूम में हो मान ही नहीं सकती। जरूर किसी गोरी के पाऊं या उसके क्लीवेज ताड़ रहे होगे।

आरव:- क्या मेरा इतना रेपो गिरा हुआ है…

लावणी:- ओ मेरा बेबी मायूस हो गए.. आती हूं उदासी दूर करने… अब बताओ भी…

आरव:- ओके बाबा कैसिनो में आ जाओ, यहीं बैठा हूं…

लावणी चहकती हुई कैसिनो के अंदर पहुंची और वहां पहुंच कर वो आरव को ढूंढ़ने लगी। और जब आरव मिला तब उसकी आखें बड़ी हो गई। वो जैसे ही आयी वैसे ही वहां से भागने लगी, लेकिन इस बीच आरव उसे देख चुका था और वो दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा..

लावणी क्यों कोई प्रतिक्रिया दे या फिर मुड़ कर ही देखे। वो तो सीधे-सीधे वहां से रवाना हुई। उसके पीछे-पीछे आरव भी गया, लेकिन कैसिनो से बाहर निकलते ही उसने अपना रास्ता बदला और बाहर के ओर चल दिया, क्योंकि रिसेप्शन लॉबी में लावणी, अनुपमा और सुलेखा के साथ बातें कर रही थी।

माहौल को समझते हुए आरव भी वहां से दबे पाऊं बिना किसी के नजर में आए निकलने लगा। वो होटल के बाहर जा ही रहा था कि तभी उस होटल में मानो कोई बहुत बड़ी हस्ती ने अभी-अभी कदम रखा हो। बॉडीगार्ड रास्ता क्लियर करते हुए आरव को किनारे किए और बीच से एक इंडियन फैमिली चली आ रही थी।

उस फैमिली को रिसीव करने खुद मनीष और राजीव भी नीचे पहुंच चुके थे, और पूरी मिश्रा परिवार देखते ही देखते वहां जमा हो चुका था। आरव वहीं किनारे खड़े होकर, दूर चल रहे मिश्रा परिवार का ये भारत मिलाप के सीन को समझने कि कोशिश कर ही रहा था तभी साची की नजर आरव पर पड़ी। साची अपने परिवार को छोड़कर चुपके से जाकर आरव के पास खड़ी हो गई…

"लावणी आज काफी प्यारी दिख रही है ना।"…. "वो तो मेरी जान … वो वो वो.... साची तुम, व्हाट्स अ प्लीजेट सरप्राइज।"..

साची:- अच्छा बच्चू, नाटक हो रहा है.. हां..

आरव:- तुमसे झूट नहीं कहूंगा साची, तुम जो सोच रही हो वही बात हैं।

साची:- कमाल है ना आरव, ये तो कमाल ही हो गया।

आरव:- क्या हुआ साची, क्या कमाल कर दिया मैंने?

साची:- तुमने नहीं बल्कि तुम दोनों भाई ने। दोनों ने कभी मुझसे झूठ बोला ही नहीं। काश बोला होता।

आरव साची का हाथ पकड़कर कहने लगा…. कभी-कभी अच्छे लोग ज्यादा दर्द दे जाते है। और अपस्यु उन्हीं में से एक है। कभी वक़्त मिले तो उसकी कहानी मुझसे सुन लेना क्योंकि वो तो ठीक से अपनी कहानी भी बता नहीं सकता।

साची:- हमारा रिश्ता शायद किस्मत को ही मंजूर नहीं थी, लेकिन फिर भी ये दिल है कि मानता नहीं।

आरव:- साची तुम्हे मायूस देखता हूं तो मेरे दिल में दर्द होने लगता है।

साची:- छोड़ो वो सब, अब बीते वक़्त पर रोने से अच्छा है कि उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए। मै भी कहां अपनी कहानी लेकर बैठ गई। अभी तो तुम्हारी टांगें तोड़नी है। तो आज सुबह वो तुम थे जिसे देख कर लावणी चहकने लगी.. हां..

आरव:- मै तो यहां से 5 दिनों से हूं, लावणी से मिला भी नहीं अब तक।

साची:- ओय.. साची को उल्लू बनाने चले हो मिस्टर… सोच लो पहरा लगा दूंगी मै फिर। सब सच-सच निकालना चाहिए…

आरव ने फिर शुरू से यूएस आने की कहानी उसे बता दिया…. "ओह हो तो कुंजल भी आयी है, पक्का वो कहीं और घूम रही होगी।"

आरव:- अरे ऐसी कोई बात नहीं है। वो उसके साथ, उसके कुछ और दोस्त थे तो वो उन्हीं के साथ न्यूयॉर्क निकल गई।

साची:- कोई नहीं तुमसे मै कल बात करती हूं, अपना रूम नंबर बताओ..

आरव:- 806

साची:- ठीक है आराम से सुबह मिलती हूं अभी जरा उन सब के बीच जाऊं वरना पूरा खानदान मुझे ढूंढ़ते तुम्हारे पास पहुंच जाएगा। अभी चलती हूं लेकिन कल सुबह मै तुम्हारी खबर लेती हूं।

आरव:- साची सुनो तो.. ये बड़े-बड़े लोग कौन है..

साची:- पता नहीं मुझे भी यार.. सोची थी यूएस घूमने का प्रोग्राम होगा लेकिन पापा ने अपने किसी दोस्त को बुला लिए, फैमिली मीटिंग करने।

आरव:- बाप रे, ये तो कोई बिलियनेयर लगता है वो भी डॉलर में कमाने वाला..

साची:- हीहीहीही.. मुझे भी पता नहीं, सुबह पूरी डीटेल मिल जाएगी। अब जाने दो और ज्यादा मस्ती नहीं हां..

आरव अपने दोनो कान पकड़ कर सिर को झुका दिया और उसे देखकर साची हंसती हुई अपने परिवार के पास पहुंची।

19 June 2014.. Banglore…

रात के 9 बज रहे थे। अपस्यु और ऐमी अपनी तैयारियों पर एक बार पुनः नजर डालते हुए हर बारीकियों पर अपनी नजर बनाए थे, साथ ही साथ हर संभावनाओं पर अपनी चर्चा कर रहे थे।

अपस्यु:- सो, तैयार हो…

ऐमी:- शुरू से तैयार हूं…

ऐमी फिर वही अपना जैकेट पहनी। अपस्यु भी कोट और टाय के साथ बिल्कुल जेंटलमैन कि तरह तैयार हुआ। एक होटल बॉय को बुलवाकर अपना बड़ा बैग उठवाया। वो बैग कार में रखा और दोनों चल दिए।

वहां से तकरीबन 2 किलोमीटर दूर जाकर कार किसी कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पार्किंग में रुकी। आज यहां पर संगीत का कोई क्रयक्रम आयोजित था जहां ऐमी भी गाने वाली थी। दोनों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई और उनके परफॉर्मेंस के वक़्त आने तक दोनों को एक कमरा दे दिया गया ठहरने के लिए।

दोनों जैसे ही उस कमरे में पहुंचे, ऐमी लैपटॉप ऑन करती एक धीमा संगीत शुरू की और उसी के साथ-साथ उसने वहां का सर्विलेंस को हैक कर लिया। हैक होने के बाद दोनों ने जल्दी से अपने ऊपर के कपड़े उतारे, जिसके नीचे दोनों ने काले रंग का बुलेट प्रूफ कपड़ा डाल रखा था।

अपने काम का सरा सामान अपस्यु ने एक छोटे से बैग में पैक किया और अपने कंधे में टांग कर खिड़की से बाहर निकला। छज्जे के ऊपर पाइप से और पाइप के सहारे फिर से छज्जा और ऐसे करते हुए वो उस बिल्डिंग के टॉप पर था।

16 माले की बिल्डिंग के सबसे टॉप पर अपस्यु… फिर अपस्यु ने दौड़ लगाई। 38 की रफ्तार से दौड़ते हुए वो बिल्डिंग से छलांग लगाते उसने तकरीबन 8 फिट की लंबी छलांग लगाई और दूसरी बिल्डिंग के 14th फ्लोर के एक छोटे से छज्जे को अपने हाथ से मजबूती के साथ पकड़ा…

ऐमी अपने लैपटॉप से उसे पूरा एसिस्ट कर रही थी। उस बिल्डिंग के 14th फ्लोर से वो फिरसे ऊपर चढ़ना शुरू किया और चढ़ते चढ़ते वो 20th फ्लोर के ऊपर जाकर एक बार फिर टॉप पर था।

अपस्यु ने वापस से दौर लगाया और एक बिल्डिंग के टॉप से कूद कर दूसरी बिल्डिंग के 2-3 फ्लोर नीचे लैंड करता वो आगे बढ़ता जा रहा था। फाइनली वो आरडी के हेड ऑफिस के ठीक पास वाले बिल्डिंग के टॉप पर खड़ा था… "तुम्हारी बारी अब.. कांउटडाउन शुरू करो"… अपस्यु ने ऐमी को अनुदेश दिया। और दोनों ने 3 की गिनती पर 10 मिनट का कांउटडाउन शुरू किया।

ऐमी भी खिड़की से निकली और हॉल के पीछे अंधेर में गुम होती उसने सड़क पर दौड़ लगा दी। 25 की रफ्तार से वो दौड़ती तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर जब थी, अपने बैग को हाथ में ली और हर कदम बढ़ती वो स्मोक बॉम्ब गिराती, वहां कोहरा बनाने लगी.. घड़ी की उल्टी गिनती छटवे मिनट पर और अपस्यु उस बिल्डिंग के टॉप से नीचे आना शुरु कर चुका था।

आरडी हेड ऑफिस के बाहर का गार्ड दूर उठते धुएं को देखकर कंफ्यूज हो गया.. लेकिन इस से पहले की वो स्विच ऑन करता अपस्यु पहले ही नीचे पहुंच चुका था। उसने वहां 6 स्मोक बॉम्ब एक साथ चारो ओर गिराते हुए, अपने कमर में टंगा दोनों रोड निकाल कर तेजी से दौड़ते हुए उस गार्ड के पास पहुंचा।

इससे पहले की वो कोई प्रतिक्रिया देता सिर के नीचे एक रोड और वो वहीं धराशाही हो गया। अपस्यु को पता था ऐमी धुएं के अंदर एक कदम नहीं चल सकती इसलिए वो तय समय के हिसाब से 5 सेकंड रुका और तय जगह पर बिना किसी परेशानी के पहुंच कर उसने ऐमी का हाथ थामा और फिर ऐमी अपस्यु के कदम से कदम मिला कर बस दौड़ने लगी।

उल्टी गिनती बिल्कुल 5 मिनट पर थी। ऐमी अपना लैपटॉप ऑन कर चुकी थी और अपस्यु सभी माइक्रो डिवाइस फैला चुका था। दोनों सामने से ग्राउंड फ्लोर के दरवाजे से अंदर घुसे। 4 हथियारबंद ट्रेंड गार्ड के नजरों के सामने कई सारे लोग नजर आने लगे। चोरों की पूरी टोली जो काले लिबास में सिर से पाऊं तक खुद को ढके हुए थे। एक गार्ड ने तुरंत सिक्योरिटी अलर्ट किया, दूसरे ने पूरे ग्राउंड फ्लोर को सील कर दिया .. बचे दो गार्ड तबतक अपनी गन निकाल कर फायरिंग शुरू करने ही वाले थे…

इधर अंदर आते ही ये दोनों भी अपने काम पर लग चुके थे.. ऐमी तेजी के साथ स्मोक बॉम्ब निकाल कर बिखेरने लगी और अपस्यु अपने आंख पर पट्टी बांध रहा था। … जबतक पहली गोली फायर हुई… इधर ग्राउंड फ्लोर स्टील के दीवार के पीछे सील हो रहा था… और सिक्यूरिटी अलर्ट का सिग्नल भेजा जा रहा था… इतने वक़्त में ऐमी 4 स्मोक बॉम्ब डाल चुकी थी और पहली फायरिंग से पहले अपस्यु अपने आखों पर पट्टियां लगाकर, ऐमी का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए विस्थापित (displacement) कर तय जगह पर छोड़ चुका था।

ग्राउंड फ्लोर पूरा कोहरे में था। कहीं कुछ दिख नहीं रहा था, बस जलती हुई लाइट के कारण वो जगह उजले धुएं से घिरा हुआ नजर आ रहा था। ऐमी बिना कोई हरकत के अपनी जगह पर लेटकर माइक्रो डिवाइस को कमांड कर रही थी। और इधर अपस्यु हर आहट पर अपना जवाब देते हुए अपने रोड से वार करता जा रहा था।

चारो कुशल प्रशिक्षित गार्ड खुद को उस धुएं के कोहरे में असहाय महसूस कर रहे थे। गोलियां एक दूसरे को लग ना जाए इस वजह से अपने डंडे और चाकू का प्रयोग कर रहे थे और अपस्यु हवा के ध्वनि में आए बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए हमला करता जा रहा था।

किसी गार्ड को कुछ दिख तो नहीं रहा था, लेकिन उस लोकेशन के चप्पे चप्पे और हर इंच को अपस्यु अपने दिमाग में डाउनलोड कर चुका था। वो अपने हर कदम एक निश्चित दिशा में रखता और वापस अपने जगह पर अाकर फिर से दूसरी दिशा में आगे बढ़ता। अपस्यु के रोड जब उन गार्ड को पड़ते तो बस वहां चिख ही निकाल रही थी।

उल्टी गिनती का वक़्त नीचे आता 210 सेकंड का और वक़्त बचा। "बस 90 सेकंड है तुम्हारे पास, शुरू करो"… अपस्यु ऐमी के बनाए एक डिवाइस को सिक्योरिटी अलर्ट स्विच के पीछे पीन करते हुए कहा।

ऐमी अपने लैपटॉप पर हाथ चलना शुरू की। सभी सिक्योरिटी को भेदकर ऐमी नीचे का रास्ता खोल चुकी था और उन रास्तों से सभी माइक्रो डिवाइस चींटी की कतार में तेजी से नीचे जाने लगे।

उल्टी गिनती 150 सेकंड पर… माइक्रो डिवाइस नीचे जा चुकी थी। और इधर जबतक अपस्यु अपना कुछ बचाव करता, मोटी पीन जैसी छोटी बुलेट, अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदकर उसके सीने में घुस चुकी थी। लगभग 10 फिट की दूरी से चली थी ये बुलेट जो रफ्तार के साथ बुलेट प्रूफ़ जैकेट को भेदने में सफल हो चुकी थी। एक प्रतिबंधित वैपन जिसका स्कोप बॉडी के थर्मल हीट को डिटेक्ट करता है। 20 फिट मोटी दीवार के पीछे का भी जो डिटेक्ट करने की क्षमता रखता हो। स्पेशल ऑपरेशन में इस्तमल किया जाने वाले गन से शूट किया जा रहा था।

अच्छी बात ये थी कि अपस्यु ने खुद को इतनी तेजी से हटाया, की गोली दिल के सही निशाने पर ना लग कर थोड़ी बाएं जाकर घुसी… अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त लिया। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।
Is wale update main to bahut kuch hai dada romance drama aur action :applause:
Lavni aur arav ki bate hamesha achi lagti hai yaar bole to sweet couple wahi ye sachi madem ab bhi unhi bato main uljhi lag rahi hai aur update khatam hote hote to action bhi suru ho gaya aur apne hero ko goli bhi lag gayi ab dekhte hai ki Amy waha se nikal kar apasyu ko kaise bachati hai
:superb:
 
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अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त निकला। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।

सभी माइक्रो डिवाइस नीचे खुले रास्ते में जरिए नीचे पहुंच चुके थे। एक बड़ा सा वाल्ट था, जिसके ऊपर एक रेटीना स्कैनेर लगा हुआ था। सारे माइक्रो डिवाइस, उस स्कैनर के ऊपर आकर उसे पूरा कवर कर चुके थे। उसके कोने से वो जगह बनाते धीरे-धीरे अन्दर घुसते चले गए। स्कैनर में लगे वायर के रास्ते वो सारे डिवाइस वाल्ट के अंदर तक पहुंच चुके थे। वहां जितनी भी फाइल रखी थी लगभग सभी फाइल्स में घुसकर अंदर हर पन्ने को पूरा स्कैन होने लगा।

ऐमी वक़्त पर काम ख़त्म करके सभी डिवाइस को वापस आने का कमांड दे चुकी थी और इस बीच अपस्यु भी बेहोश गार्ड के बीच आकर लेट चुका था। अपस्यु को इस बात का इल्म था कि जो भी फायरिंग कर रहा है वो लेटे हुए पर इसलिए गोली नहीं चला सकता क्योंकि वो उसी के साथी होंगे।

अपस्यु जैसे ही लेटा, उसकी तेज चलती सासों के साथ आ रही दर्द कि हल्की आवाज ऐमी साफ सुन पा रही थी। "वहां क्या हो रहा है.. तुम सुरक्षित तो हो अल्फा (अपस्यु)"…. "लेटे रहना बीटा (ऐमी).. क्या तुम 6 फिट ऊंचा आग जला सकते हो बीटा"…. "कितने सेकंड का विंडो चाहिए"… "3 सेकंड का विंडो चाहिए…. 30⁰ पुरव 1 मीटर के रेडियस में आग चाहिए।"

10 सेकंड का वक़्त लेती हुई ऐमी ने जवाब दिया… "मै तैयार हूं अल्फा"…. "मेरे 3 की गिनती पर तैयार हो जाना एक बार फिर कदम मिला कर भागने के लिए बीटा"… "मै तैयार हूं।"…

3 की गिनती के साथ ही ऐमी कमांड देकर दौड़ने के लिए तैयार थी। ऐमी के कमांड देते ही सभी माइक्रो डिवाइस 1 मीटर के रेडियस का सर्किल बनाते हुए, वहां 10 फिट ऊंचा धमाका हुआ। अचानक से तेज लपटें उठीं, और अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर तुरंत ग्राउंड फ्लोर के बाहर आया।

इधर आग जलने के कारण थर्मल डिवाइस बॉडी स्कैन तो नहीं कर पा रही थी लेकिन हवा में लगातार गोलियां फायर हो रही थी। बाहर निकलते ही ऐमी ने सिक्योरिटी अलर्ट के पास लगी डिवाइस में एक छोटा सा धमाका की और देखते ही देखते फिर से वो ग्राउंड फ्लोर स्टील के मजबूत दीवारों से ढक चुकी थी।

उल्टी गिनती के 30 सेकंड बचे थे। बाहर घुएं का कोहरा छटने लगा था, पुलिस के सायरन की आवाज़ दोनों को सुनाई भी देने लगी। अपस्यु ने फिर से बाहर स्मोक का कोहरा बना दिया और ऐमी ने लैपटॉप बैग में डाला। दोनों वापसी के लिए तैयार थे।

दौड़ते हुए दोनों ने तकरीबन 100 मीटर की दूरी तक पूरा कोहरा की चादर बिछाते हुए आगे बढ़े और अपने तय समय से 1 मिनट की देर से 10.21 मिनट पर वापस कमरे के पीछे पहुंच चुके थे।

ऐमी खिड़की से अंदर गई और पीछे से अपस्यु पहुंचा… दोनों बिना कोई देर किए अपने बुलेट प्रूफ जैकेट को निकालाना शुरू कर चुके थे। ऐमी जबकि अपने ऊपर कपड़े डाल रही थी और अपस्यु अपने चोट खाई जगह को कॉटन से दबा कर खून को नीचे गिरने से रोक रहा था।

"ऐमी, क्या तुम जल्दी से इनपर पट्टियां बांध कर मास्क करोगी।" ऐमी पीछे पलटकर, जब अपस्यु के खुले बदन पर बहते खून को कॉटन से साफ करती देखी, तो वो हताश हो गई…. "अपस्यु तुम्हे ट्रीटमेंट की जरूरत है। अभी हॉस्पिटल चलो।"

अपस्यु:- हां मै जानता हूं मुझे ट्रीटमेंट की जरूरत है लेकिन अभी नहीं। पट्टियां लगाओ और उपर बॉडी को मास्क करो। भूल गई पुलिस पहले अपने पास ही आएगी पूछताछ के लिए।

ऐमी:- लेकिन तुम्हे बुलेट लगी है, आम जख्म नहीं है।

अपस्यु:- जानता हूं। मै वो सेल रिकवर थेरेपी लेता हूं, कुछ वक़्त का सपोर्ट मिल जाएगा जबतक तुम स्वस्तिका से बात करके देखो यदि वो बंगलौर आ सके तो।

ऐमी की घबराहट और बेचैनी दोनों अपने सबब पर थी। वो टाइट पट्टी लगा कर अपस्यु के बदन के उपरी हिस्से में स्किन की बनी एक सूट डाली जों देखने में बिल्कुल असली और उसको ऊपर से काटने पर खून भी निकलता था।

ऐमी उसके उपर की बॉडी मास्क करके, वहां के फ्लोर पर टपके खून पर किसी तरह का केमिकल डालकर, तेजी के साथ साफ की। दोनों के बुलेट प्रूफ जैकेट और अन्य संदेह जनक सामान को लेकर एक बार फिर से खिड़की से बाहर गई और छिपाने के तय स्थान पर उनको छिपा कर वापस आयी।

अपस्यु लेटा हुआ था, ऐमी ने वापस अाकर सबसे पहले बचा काम खत्म की। अपने लैपटॉप से सारे स्कैन फाइल को एक साथ डिलीट मारी और सारे हैकिंग सॉफ्टवेर को वो अपने लैपटॉप से गायब कर दी। काम खत्म करने के बाद वो अपस्यु के सिरहाने बैठी और उसके बालों मै हाथ फेरती उसे देखने लगी…. "11.10 में मुंबई से स्वस्तिका की फ्लाइट है। लगभग 1 बजे तक वो हमारे साथ होगी।"….

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है। वैसे तुम इतनी मायूस होकर मुझे क्यों देख रही हो?

ऐमी के आंसू टपक कर अपस्यु के चेहरे के ऊपर गिरी। ऐमी अपने आशु पोंछती कहने लगी… "पहली बार तुम्हारे चेहरे पर मै दर्द को देख रही हूं। तुमसे ये दर्द नहीं छिप रहा अपस्यु।

अपस्यु:- हां जानता हूं, मुझे शवंस लेने ने भी बहुत तकलीफ़ हो रही है। क्या तुम कहीं से कोकीन ला सकती हो क्या?

ऐमी हड़बड़ी में वहां से निकली और कार स्टार्ट करके पास में ही किसी डिस्को का पता लगाकर वहां पहुंची। नजरे अब बस उसकी ढूंढ़ने लगीं… ज्यादा वक़्त नहीं लगा, उसे एक ड्रग बेचने वाला मिल गया।

ऐमी जल्दी से उसके पास पहुंची और हड़बड़ी में पैसे निकालकर उससे कोकीन मांगने लगी। उस ड्रग डीलर ने पहले उसे ऊपर से नीचे तक देखा और देखकर मना कर दिया। ऐमी उससे मिन्नतें करने लगी… "प्लीज दे दो।" लेकिन वो ड्रग डीलर ऐमी को सुनने के लिए तैयार ही नहीं हो रहा था।

ऐमी परेशान होने लगी लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा। ऐमी अपने बैग से 1लाख की पूरी गद्दी टेबल पर पटककर कहने लगी….. "या तो अभी मेरी चीज दे दो। और कहीं तुम्हे ऐसा लगता हो की मै कोई खबरी हूं तो तुम इस वक़्त तो गलत हो, लेकिन मेरे पास इतना पैसा है कि मै देखूंगी तुम कभी जेल से बाहर ना आने पाओ।"..

उसके ड्रग डीलर के साथ एक और डीलर था, वो पैसे उठाकर कहने लगा…. "इतने से नहीं होगा और पैसे चाहिए, और हां तेरे पास कितने भी पैसे हो, हमारे बैकग्राउंड के आगे सब मूत देंगे।"

ऐमी ने अपना बैग देखा उसने पैसे नहीं थे, फिर वो अपनी डायमंड इयर रिंग उतार कर देती हुई कहने लगी…. "12 लाख की कीमत का है… अब दोगे या मै कहीं और जाऊं।"

दोनों ड्रग डीलर जोड़-जोड़ से हंसते हुए, ऐमी को कोकीन कि एक छोटी सी पुड़िया थामा कर, उसके पीछे हाथ फेरते हुए कहने लगा…. "हम तुझे यहीं मिल जाएंगे, दोबारा जब जरूरत हो तो फिर आना।"

ऐमी वो पुड़िया उठकर वहां से जाते-जाते बोली…. "फ़िक्र मत करो मै वापस जरूर आऊंगी, ये वादा रहा।"…

ऐमी जबतक वापस पहुंची 11.30 बजने ही वाला था। वो जैसे ही कमरे के पास पहुंची, 2 स्टाफ वहां पहले से खड़े थे…. "मैडम आप कहां चली गई थी, आप का इंतजार हो रहा है बैंक स्टेज पर, 11.30 बजे से आप का शो है।

ऐमी:- प्लीज मुझे माफ़ कीजियेगा। आप लोग बढ़िये मै आयी...

स्टाफ:- मैम इट्स ओके, हम यहां इंतजार कर रहे है।

ऐमी झटपट में अंदर गई और अपस्यु को एक नजर देखने लगी। उसका बदन पूरा जल रहा था, उसकी आखें बिल्कुल लाल हो चुकी थी, लेकिन इतना होने के बाद भी वो अपनी आखें खोले हुए था।…. "ऐमी वो दो और जाओ, मैं भी आया तुम्हारे पीछे।"

उसकी हालत देखकर वो अपने आंसू छिपाती, वहां से निकल गई। अपस्यु किसी तरह उठकर टेबल पर ड्रग फैलाया और अपने नाक से उसे खींचने लगा। ऐमी के द्वारा लाए हुए कोकीन को वो पूरा इस्तमाल करने के बाद कुछ देर के लिए बैठा और फिर लड़खड़ाते किसी तरह खड़ा हुआ।

खड़ा होकर सिर को वो 2 बार झटका। बैग के अंदर से 2 सीरप की बॉटल निकला। इनमे सेल रिकवर और डेवलपमेंट वाली वहीं द्रव्य था जो आईवी सेट के जरिए अपस्यु ने अपने एक्सिडेंट के वक़्त इस्तमाल किया था। दोनों सीरप को पीने के बाद वो कुछ देर और वहीं बैठा.. फिर खुद को सामान्य की स्तिथि में दिखाते हुए वो प्रोग्राम हॉल में पहुंचा।

बिल्कुल खामोश, बिल्कुल शांत जैसे सब अपनी धड़कने रोके ऐमी के दर्द को सुन रहे थे… फिर उस खामोशी में दर्द के साथ वो आवाज़ आयी... "सुन रहा है ना तू, रो रही हूँ मैं सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रही हूँ मैं… सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रही हूँ मैं.. यारा"…

ऐमी का गाना जैसे ही समाप्त हुआ, लोग खड़े होकर तालियां बजाने लगे। अपस्यु को ऐमी का हाल-ए-दिल पता था, इसलिए वह बैंक स्टेज पर पहुंचा। जब वो पहुंचा तब ऐमी उसे देख कर दौड़कर उसके पास पहुंची और उसके गले लगकर खुद को शांत करने लगी।

अपस्यु उसे खुद से अलग करता हुआ, उसके चेहरे को साफ किया… "आय मिस अवनी, रोते नहीं है।"

ऐमी:- मै कहां रो रही हूं, बस तुम्हारी हीरोगिरी रुला रही है।
अपस्यु:- शांत बच्चा शांत। चलो यहां से चलते है।

दोनों बैंक स्टेज से निकलकर वापस आ ही रहे होते है कि पुलिस की एक टुकड़ी उन्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचती हैं। प्रोग्राम ऑर्गनाइजर उन्हें ऐमी और अपस्यु के पास लेकर पहुंच ही रहे होते और सभी रास्ते में ही टकराते है…

ऑर्गनाइजर:- यहीं है दोनों, जिन्हे आप ढूंढ़ रहे है।
पुलिस:- आप मिस्टर अपस्यु और मिस ऐमी है।
अपस्यु:- क्या हुआ सर, कोई बात हुई है क्या?

पुलिस:- हमे प्लीज कोऑपरेट कीजिए। जितना पूछा जाए उतना ही जवाब दीजिए।

अपस्यु:- सॉरी सर.. हां मै अपस्यु हूं और ये ऐमी।

पुलिस:- आप दोनों अपनी-अपनी आईडी दिखाइए।

दोनों अपनी आईडी पुलिस वाले को दिखाने लगे। आईडी देखने के बाद पुलिसवाला पूछने लगा…. "आप दोनों 10.00 बजे कहां थे।

ऐमी:- मेरा प्रोग्राम था इसलिए हम दोनों यहीं थे।

क्रॉस चेक करने के लिए पुलिस वालों ने पूरा सीसी टीवी फुटेज देखा उनके कमरे की तलाशी ली। बैग लैपटॉप सरा सामान उन लोगों ने चेक कर लिया… जब वो चेक करके अपस्यु से कुछ पूछने लगे तभी ऐमी बीच में ही पूछने लगी…

"सर आधे घंटे से आप हमसे पूछताछ कर रहे है, अब बताइएगा हुआ क्या है।"… ऐमी थोड़ा तेवर दिखाती हुई पूछने लगी..

"मिस कहा ना आप हमे कोऑपरेट कीजिए.. आप बिल्कुल शांत खड़े रहीए।".. पुलिसवाला उसे घूरते हुए कहने लगा… ऐमी ने भी बिना देर लिए सिन्हा जी को फोन लगा दी… "पापा देखो ना यहां पुलिस वाला अाधे घंटे से हमे परेशान कर रहा है और कुछ बता भी नहीं रहा कि क्यों हमसे पूछताछ कर रहा है।"…

ऐमी अपनी बात समाप्त करके फोन स्पीकर पर डाली…. "हेल्लो तुम किस केस में मेरी बच्ची से इंक्वायरी कर रहे हो।"…

पुलिस:- देखिए यहां एक रॉबरी हुई है उसी के सिलसिले में पूछताछ चल रही है। आप प्लीज हमे हमारा काम करने दीजिए।

सिन्हा जी:- ऐमी बेटा, वो उनकी छोटी सी इंक्वायरी चल रही है, और कोई परेशानी नहीं है। हां अगर ऐसा लगे कि जानबुझ कर परेशान किया जा रहा है फिर फोन करना।

सिन्हा जी ने कॉल डिस्कनेक्ट किया और पुलिस वाला ऐमी से पूछने लगा… "आप के पापा क्या करते हैं।"

ऐमी:- सुप्रीम कोर्ट में वकील है, एडवोकेट अनिरुद्ध सिन्हा..

पुलिस:- क्या !! आप वो मशहूर वकील एडवोकेट सिन्हा की बेटी है।

ऐमी:- जी हां सर। वैसे आप को तसल्ली हो गई या और कुछ पूछना है। मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि कोई रॉबरी हुई है तो आप क्रिमिनल को पकड़ने के बदले यहां पूछताछ करने क्यों आ गए?

पुलिस:- हमारा काम है हर संभावना को देखना। कल रात ओवर स्पीड ड्राइविंग तुम लोग ही कर रहे थे ना, और किसी कार का एक्सिडेंट भी हुआ था तुमसे रेस करने के चक्कर में।

ऐमी:- वो ! अच्छा हुआ ऐक्सिडेंट हो गया उनका सर। आप जानते भी है कल क्या हुआ था हमारे साथ।

पुलिस:- हां मै सब जानता हूं। खैर मै चलता हूं, थैंक्स फॉर कोऑपरेशन। और हां अपने दोस्त को बोलो थोड़ा नशा कम करे।

ऐमी हंसती हुई उसके बात का अभिवादन की और उसके जाते ही वो अपस्यु को देखने लगी। ऐमी अपने साथ ऑर्गनाइजर के एक स्टाफ को लेकर वहां का सरा सामान पैक करवाई और अपस्यु को लेकर पार्किंग तक पहुंची।

रास्ते में ऐमी, अपस्यु से बात करती रही लेकिन अपस्यु हिम्मत अब टूट चुकी थी। वो बेहोश सा होने लगा था, फिर भी वो किसी तरह खुद को खींचते हुए पार्किंग तक पहुंचा। लेकिन ज्यों ही वो कार में बैठा, उसके मुंह से खून की उल्टियां होने लगी और वो बेहोश होकर वहीं सीट पर गिर गया।
Amy= beauty with brain
Jabardast samajhdari aur presence of mind ka pradarshan jisse thoda hi sahi apasyu sambhala hua hai aur apasyu ko himmat aur junoon ke liye :applause:
Par ab to lagta hospital jana hi padega aur ab to naya character bhi aa gaya wo bhi swastika naam ki ladki hai :D
 

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
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Yaar aap galat samajh liye.. :doh:
dekhiye hum readers is baat pe ade rahte ki aage kahani aise na hoke kuch achha matlab ki kaajal aur dhokha na de vikas ko... par Dr sahab nahi maante... toh isi baat hum do teen reader hai joh raise revo dete the ki.. for example shikari wali story pe meri joh last revos hai :D... ab aisi revo padh shayad Dr sahab readers ki mutabik kuch toh change laye kahani mein... par woh nahi late... waise woh kahaniya completed ho chuki hai.... actually baat haar jeet ki nahi baat yeh hai ki Dr sahab ki kahani mein Dr sahab ke hi logics bol bala hai... naki hum readers ki... Aur haan koi reader kahani ki ant mein kuch bole ki kaajal ko kya yeh sab karke to Dr sahab kahenge ab kahani hi aisi thi main kya karu isme.... iske aage bhi ek famous dialogue bhi chipka denge.... 'kahani ko sachhe dil se ya dil lagake padhe uske liye dhanywad' :D p.s.ummid ki mutabik reply nahi milta unse...
(aapko isliye read karne ko boling... ek ummid hai ki shayad aapko 'woh readers ke' ummid ke mutabik reply ya jawab mil jaye... taaki hum jaan sake aakhir us kirdaar aisa kyun kiya)
ye reply veer jara movie ke seen ke jesa kaiko lag raha :shhhh:
:D
 
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