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Romance भंवर (पूर्ण)

THE FIGHTER

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Bhai acche the update good
Pahele update me jo dono ladkiyon ne pitai ki hai wah mast mast
Drug dealer ka kissa khatam
Mast style me mara de fatke pe fatka belan jhadu lath hath very good
Arav aur lavni ka to mast chal raha hai but abhi Sulekha ne suna hai matlab kuch to hoga
Ye sab delhi agaye lekin Nandani USA farar kyu kis liye gai hai
Gufran ya pradip ko pucho to nikkame drivers
 

Aakash.

ɪ'ᴍ ᴜꜱᴇᴅ ᴛᴏ ʙᴇ ꜱᴡᴇᴇᴛ ᴀꜱ ꜰᴜᴄᴋ, ɴᴏᴡ ɪᴛ'ꜱ ꜰᴜᴄᴋ & ꜰᴜᴄᴋ
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Mai apne review me likhna bhul gaya nandani kaha gayi or kyu gayi....
:hmm2:
 

Akki ❸❸❸

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Update:-18(B)



आरव:- सिर्फ इतनी सी बात तो नहीं हो सकती।

मुन्ना:- हर खबर की एक कीमत होती है.. और ये खबर तो शायद तुम्हारे लिए बहुत बड़ी होगी।

आरव:- मुंह खोलो..

मुन्ना:- मुझे ऐसा क्यों लगता है कि मैं एक पिंजरे में फंसे तोते से बात कर रहा हूं जिसकी गर्दन किसी भी वक़्त मरोड़ी जा सकती है।

आरव:- अपना मुंह खोलो मुन्ना..

मुन्ना:- तुम हारे हुए खिलाड़ी हो और यदि मैंने तुम्हारा साथ दिया तो फिर ये पैसा किस काम का, जिससे मेरी जान ही चली जाए और घूम फिर कर वो पैसा उन्हीं के पास पहुंच जाए।

आरव:- तो तुम क्या चाहते हो।

मुन्ना:- अब आए हो सही मुद्दे पर। मैं चाहता हूं कि तुम मुझ से सौदा कर लो।

आरव:- बोलो, मैं सुन रहा हूं।

मुन्ना:- तुम मुझे 150 करोड़ देदो और अपनी जान बचा लो।

आरव:- 200 करोड़ दिए.. अब उनकी बात बताओ और अपनी योजना।

मुन्ना:- जमील बहुत खुश था क्योंकि कल जमील और भूषण की बैठक सेंट्रल होम मिनिस्टर के साथ होनी है। वो लोग कुछ उनके फायदे की बात करेंगे और बदले में दिल्ली के अंदर एक टारगेट को उड़ाने वाले है जिसके लिए उन्हें होम मिनिस्टर का साथ चाहिए।

आरव:- ये सारी बातें जमील ने तुम्हे बताई।

मुन्ना:- तुम्हे क्या लगा तुम कोई झुनझुना मेरे रायफल में लगाकर चले जाओगे और मुझे पता ना चलेगा। मेरी जान (उसकी स्नाइपर रायफल) के ऊपर परा एक निशान जब मुझे खटकता है फिर तो तुमने उसपर ना जाने क्या-क्या चिपका कर गए थे। तुमने उतना ही सुना जितना मैंने तुम्हे सुनाया। फिर सोचा थोड़ा इंतजार कर लूं, देखूं तुम आगे क्या करते हो। हालांकि खिलाड़ी तो तुम सही हो पर खेल गलत आदमी के साथ रहे हो।

आरव:- तू काहे मेरा बाप बनने की कोशिश कर रहा है। भाई थोड़ा शॉर्ट में निपटा ना।

मुन्ना:- जानते हो एक शूटर की सबसे खास बात क्या होती हैं धैर्य… वो पूरे माहौल का मुआयना करता है, हवा का रुख परखता है उसकी गति को महसूस करता है। फिर किसी मेहबूबा कि तरह अपने रायफल को बड़े प्यार से हाथ लगता है और बहुत ही नाजो से वो ट्रिगर दबाता है। तब कहीं जाकर एक सही निशाना लगता है।

आरव:- हम्म्म…

मुन्ना:- देख भाई मुझे पता है कि तू उसका गेम बजाना चाहता है और वो तुम दोनों भाइयों का। हालांकि तुमने जमील को अच्छा ऑफर दिया था लेकिन मुझे पता था वो रहेगा भूषण के साथ ही.. क्योंकि जमील तो केवल मुखड़ा है और भूषण चाह लेे तो किसी को भी उसकी जगह लाकर बिठा दे। और तेरी परेशानी भी मैं जान रहा हूं कि क्या है….

आरव अपना खंजर निकाल कर उसके गले पर थोड़ा दवाब बना कर रखते हुए कहने लगा…

" साले तू कोई बाबा है क्या जो प्रवचन पर प्रवचन दिए जा रहा है। चुतिय एक बात कहने में 10 मिनट लगा रहा है। तू जानता भी है हमारा टारगेट कौन है।मदर** कब से देख रहा हूं बकवास पर बकवास किए जा रहा है। तुझे 150 करोड़ चाहिए थे 200 करोड़ दिए। अब जितना मैं पूछूं बस उतना ही जवाब दे। ये लवादा-लहसुन किया ना तो यहीं छिल दूंगा। चल अब बता कि तू क्या जानता है सेंट्रल मिनिस्टर के साथ के मीटिंग के बारे में"।

मुन्ना:- चाकू तो हटा साले.. खून तो निकाल दिया अब क्या गला कटेगा।

आरव:- चल बोल जल्दी।

मुन्ना:- मेरा एक खबरी है उसी ने बताया कि जमील और भूषण बात कर रहे थे कि "मिनिस्टर साहब फोन पर कोई वैसी बात नहीं कर सकते इसलिए उन्होंने बिना कुछ सुने सीधा कह दिया कि कल मेरे फार्म हाउस अाकर मिलो"..

आरव:- अब ये बता कि तू मेरी जान कैसे बचाएगा..

मुन्ना:- अपने पास एक पंटर की गैंग है जिसे बड़ा नाम करना है। इधर जमील को मैं जैसे ही बोलूंगा की मुझे पैसा मिल गया है तो जमील और भूषण एक ही जगह पर एक साथ मिल जाएंगे, वो भी बिना किसी सरकारी आदमी के। वहां उन्हें वो पंटर टपका देगा और पुलिस इन्वेस्टिगेशन में वो लोग फंस जाएंगे।

आरव:- चुत्तिए और वो पंटर पहले तेरा नाम बकेगा और फिर तू मेरा।

मुन्ना:- नहीं ऐसा नहीं होगा क्योंकि जो मेरा नाम जानता होगा उसे हम वहीं टपका देंगे। हम तक पहुंचने वाली सभी कड़ी ही खत्म।

आरव:- अबे लेकिन तू तो बता रहा था कि कल वो मीटिंग करेंगे दिल्ली में, फिर ये सब कैसे होगा। जब वो मिनिस्टर से मिल लेगा और उसे पूरा मामला पता चल गया तो बिना किसी बात के एक और राजदार बढ़ेगा और फिर उसे भी पैसे खिलाओ।

मुन्ना:- कमाल है .. तुझे तेरे भाई की चिंता नहीं की यदि वो होम मिनिस्टर से मिल लिया तो पहले तेरा भाई ही टपक जाएगा।

आरव:- तू पागल है क्या और फिर से बकवास शुरू कर दिया। वैसे तू इतना ही चिंता में है, तो मै तुझे बता दूं कि वो किस्मत के साथ पैदा हुआ है मरने वालों में से नहीं। अब तू बकवास ना कर और ये बता कि फायदा क्या होगा जब वो दोनो मिनिस्टर से मिल ही लेगा।

मुन्ना:- इसलिए तो उनको आज रात ही टपका देना है..

आरव:- कैसे.. 11.30 अभी हो रहे है। यहां से इंदौर पहुंचने में 1 घंटा.. वहां क्या एयरपोर्ट पर तेरा बाप बैठा है जो उदयपुर कि स्पेशल फ्लाइट चलाएगा।

मुन्ना:- मेरा बाप स्पेशल फ्लाइट तो नहीं पर हेलीकॉप्टर जरूर भेज देगा पर उसके लिए थोड़ा ड्रामा लगेगा।

आरव:- इंप्रेसिव .. चल जल्दी से काम पर लग जा…

पूरी योजना तय हो गई और मुन्ना लग काम पर। सबसे पहले वीरभद्र रिजॉर्ट के बाहर आया, वो भी आरव का सरा सामान लेकर। रिजॉर्ट वालों को लगा कि डील करने वाला लड़का रात को कहीं निकाल रहा है। और जैसा की उम्मीद थी इसकी खबर भूषण को लग गई। कुछ ही समय बाद मुन्ना और वीरभद्र को कॉल आए जिसमे आरव की जानकारी ली गई। दोनों ने एक ही बात बताया.. "अपना बैग लेकर निकला है".. इसके बाद तो भूषण ने दोनों को कहा कि "देखो क्या कर रहा है और बताते रहो"


सब प्लान के मुताबिक हो रहा था। लगभग 5 मिनट बाद दोनों ने खबर दी कि वो किसी से मिलकर एक बैग ले रहा है। भूषण ने सीधा गोली मारने का आदेश दिया और बैग को अपने कब्जे में करने के लिए कहा।

उधर भूषण का आदेश और इधर दो गोलियों की चलने कि आवाज़। लगभग 15 मिनट बाद वीरभद्र और मुन्ना दोनों एक ही जगह पर खड़े होकर भूषण को बताया कि उन्होंने बैग कब्जे में ले लिया है। इतना सुनने के बाद तो जैसे भूषण नाचने ही लगा हो। उसने तुरंत वीडियो कॉल लगाया और नीचे धूल में परे पहले आरव की लाश देखी, फिर बैग खोल कर दिखाने कहा। भूषण जब सब तरह से सुनिश्चित हो गया, तब उसने अपना पावर इस्तमाल कर एक हैलीकॉप्टर उस लोकेशन पर भिजवा दिया।

रात के लगभग 1 बजे उस लोकेशन पर हेलीकॉप्टर पहुंच चुकी थी। आरव की लाश को यहां छोड़ा नहीं जा सकता था, यह बोलकर उन लोगों ने आरव की लाश को अपने साथ लेते चले। लेकिन वीडियो कॉल के बाद और हेलीकॉप्टर आने से पहले मुन्ना ने अपने कहे अनुसार सरा मामला सेट कर लिया था। इस छोटी गैंग को 50 करोड़ पहले ही ऑफर कर दिए गए थे जिसकी पेशकी उन्हें मुन्ना के घर से 1 करोड़ के रूप में मिल चुकी थी।
Bdiya update bhai ?

Arav ki do baat khrab h impatient aur overconfidence kahi ye cheeze kisi din uske ❤de na lga de
मुन्ना:- जानते हो एक शूटर की सबसे खास बात क्या होती हैं धैर्य… वो पूरे माहौल का मुआयना करता है, हवा का रुख परखता है उसकी गति को महसूस करता है। फिर किसी मेहबूबा कि तरह अपने रायफल को बड़े प्यार से हाथ लगता है और बहुत ही नाजो से वो ट्रिगर दबाता है। तब कहीं जाकर एक सही निशाना लगता है।
:claps:
 

Akki ❸❸❸

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Update:-18(C)


हेलीकॉप्टर सीधा उदयपुर के किसी एक होटल के हेलीपैड पर उतरी। आरव की लाश के साथ दोनों बाहर अा गए और हेलीकॉप्टर पुनः उड़ चली। उस जगह पर पहले से कुछ लोग इंतजार कर रहे थे। वो लोग जमील और पैसों के बैग के साथ लेकर निकल गए और वीरभद्र को लाश ठिकाने लगा कर घर लौट जाने के लिए बोल दिया।

वीरभद्र, आरव को हिलाते हुए कहा.. उठ जाओ भाईजी। आरव उठकर जल्दी से अपना एयरपोड कान में लगाया.. और कान में लगाते ही अपस्यु ने उसे जो सुनाया। मामला ये नहीं था कि आरव ने अपस्यु से बात नहीं की, बल्कि उसने सारी डिवाइस पैक कर के बैग में रख दिया और अपस्यु कुछ भी देख नहीं पा रहा था।

आरव ने सबसे पहले सभी वाचिंग डिवाइस को सक्रिय किया और कपड़े बदलने लगा। एक एयरपोड अपने कान में डाला और दूसरा वीरभद्र को दे दिया। अब तीनों एक ही लाइन पर कनेक्ट थे।

अपस्यु:- आरव कितना अम्मिनेशन है तुम्हारे पास।

आरव:- 4 मैग्जीन पिस्तौल के और 12 मैग्जीन स्नाइपर के।

अपस्यु:- ठीक है, अपनी स्नाइपर वीरभद्र को देदो और तुम पिस्तौल और खंजर से लैस हो जाओ। वीरे तुम्हे मैं जहां बताऊंगा वहां जाकर पोजीशन लेे लेना और आरव को बैकअप देना। आरव तुम छिपो ऊपर कोई अा रहा है।

आरव पानी टंकी के पीछे तुरंत ही छिप गया। ऊपर 2 लोग आए और वीरभद्र से लाश के बारे में पूछने लगे। वीरभद्र ने उन्हें बोल दिया कि लाश ठिकाने लगा दिया है, किंतु उन्हें देखना था कि आखिर लाश कहां ठिकाने लगाए है। वीरभद्र ने छत के नीचे इशारा करते हुए बताया कि लाश यहां है।

दोनों अपने कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़े फिर कुछ सोच कर वापस चले गए और जाते-जाते वीरभद्र को अपने घर वापस लौटने के लिए बोल गए। उनके जाते ही आरव बाहर निकला। अपस्यु उन्हें रास्ता बताता गया और वो दोनों उसी के इशारे पर चलते-चलते एक खंडहर हो चुके किले के पास पहुंचे, जो किसी वीराने में थी।

अपस्यु चारो ओर का जायजा लेने के बाद वीरभद्र को दक्षिण दिशा से उस खंडहर के ऊपर चढ़ने का रास्ता बताया और आरव को पश्चिम के ओर से बाहर निकालने वाले रास्ते के पास की दीवार के पीछे जाकर छिपने के लिए बोल दिया।

थोड़े ही देर में दोनो अपनी अपनी जगह लेे चुके थे। इधर अंदर मुन्ना की लाश नीचे परी हुई थी और वहां पूरे 20 लोग थे, जिसमे जमील और भूषण भी था। अपस्यु दोनों को अपना पोजिशन होल्ड करने और आरव को स्मोक बॉम्ब निकाल कर तैयार रहने के लिए कहा।

अपस्यु अंदर के माहौल को थोड़ा नजदीक से समझने की कोशिश करने लगा। कुछ ही देर में उनकी आवाज़ भी आनी शुरू हो गई जिसे तीनों सुन सकते थे।

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अंदर भूषण कह रहा था… "जमील कैसे कैसे गद्दार तूने पाल रखे थे, ये तो सारा पैसा लेकर हमे ही टपकाने चला था"

जमील:- क्या वो वीरभद्र भी इसके साथ मिला होगा?

भूषण:-पता नहीं, लेकिन यदि मिला होगा तो उसे भी इसी के पास पहुंचा देंगे। आज से मुन्ना की जगह इस रफीक को देदे। आखिर इसी ने तो सारी सच्चाई बताई है और हां साथ में 2 करोड़ भी दे देना इनका इनाम।

जमील:- नेता जी । इसे साथ रखने में खतरा है। साला पूरा एडा है, ये सीधा मारना जानता है सफाई से काम करना नहीं।

भूषण:- तो काम सिखाओ इसे। आखिर इसने अपनी वफादारी दिखाई है। सबको ऊपर बढ़ने का हक है।

जमील:- जैसा कहो नेता जी, चलो रे पंटर लोग अपना अपना हिस्सा लेकर जाओ।

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अपस्यु:- आरव अभी वक़्त है, वीरभद्र के शूट करते ही 5 स्मोक बॉम्ब, 4 बॉम्ब चारो कोने और एक बीच में। वीरभद्र सरप्राइज देने का टाइम अा गया, लगभग 30 मीटर की दूरी पर है दोनों। पहली गोली भूषण और दूसरी गोली जमील… कोई चूक ना हो और बिना समय लिए दोनों को गोली मारना।… मेरे गिनती खत्म होते ही दोनों एक साथ.. 3… 2… 1… अभी।

वीरभद्र ने बिना समय लिए पहली गोली चला दी, और सीधे जाकर लगी भूषण के सीने में… भूषण और जमील बात कर ही रहे थे और इसी बीच भूषण को गोली सीधा उसके सीने में लगी। इससे पहले की जमील को कुछ समझ आता 3 सेकंड के अंतर में दूसरी गोली और जमील के सिर में एक छेद बनाती गोली जमीन में।

वहां मौजूद लोग, इससे पहले कि यहां-वहां देखकर गोली चलाने वाले को ढूंढते, वहां धुआं ही धुआं हो गया था। कुछ समझ में ना आने की स्तिथि में वो लोग अंधाधुन फायरिंग करने लगे। आरव बाहर ही खड़ा था और अंदर की फायरिंग खत्म होने का इंतजार कर रहा था।

इधर वीरभद्र को दिशा मिल रहा था और वो धुएं के अंदर ही एक-एक करके टपकना शुरू कर चुका था। 20 में से 8 लोग मारे जा चुके थे। रफीक बचे लोगों को दीवार कि आड़ में छिपने के लिए जोर से चिल्लाया। …"मादर*** तू जो कोई भी है आज बचके ना जा पायेगा"…

"बचना तो तुझे है, फालतू में इनलोगो के चक्कर में तू भी मारा जाएगा"… आरव जोर से ठहाके लगाकर कहने लगा और जब उसकी आवाज़ बंद हुई उसी के चंद पलों के अंदर, एक दर्दनाक चिंख़ निकली और उसके एक आदमी का गला आरव ने रेत दिया।

उसकी चीख सुनकर एक पंटर बावरा हो कर चिल्लाते हुए उसी ओर भागा जिस ओर से चिल्लाने कि आवाज़ अा रही थी। जैसे ही वो अपने आवरण (कवर) से बाहर आया, अपस्यु ने दिशा बताया और वीरभद्र ने उसकी चीख को मौत की सिसकियों में बदल दिया।

धुवां जब तक छंटा तब उस जगह पर केवल रफीक और उसका 2 साथी बचा था जो दीवार कि आड़ लिए अपनी जान बचा रहा था। आरव उस जगह के बिल्कुल मध्य में खड़ा होकर ललकारने लगा…. "क्या हुआ बे बच्चे, मूत तो ना निकल गई"..

रफीक:- साला इतना ही बड़ा मर्द है तो…. (इतना कहते वक़्त उसने अपने एक आदमी को इशारों में दीवार से छिपकर ही थोड़ा आगे जाकर बाहर निकालने वाले रास्ते तक पहुंचने का इशारा किया)… अपने उस स्निपर को ….

अभी इतना ही कह रहा था कि इशारा मिलने पर जो आदमी रेंगता हुआ बाहर निकालने वाले रास्ते के ओर जा रहा था उसका हाथ थोड़ा दिखा और वीरभद्र ने ऐसी गोली मेरी की वो चिल्लाने लगा।

आरव:- देख बेटा ये तो चीटिंग है। या तो तू बात कर ले या यहां से भाग ले।

रफीक:- अच्छा सुन मेरे पास तेरे लिए एक बंपर ऑफर है।

आरव जहां था वहीं बैठते हुए….. "ठीक है बोल मैं सुन रहा हूं"

रफीक:- यहां पर बहुत सारे डॉलर परे हुए हैं। तूने ज्यादा से ज्यादा कितने की सुपारी ली होगी, 10 करोड़ की। यहां पर 100 करोड़ से भी ऊपर है। पूरा तेरा बस उसमे से कुछ मुझे देदेना।

आरव:- चल ठीक है डील मंजूर। तू और बचा हुए तेरा एक साथी, बिना हथियार के बाहर अा..…

रफीक:- ना मैं नहीं आऊंगा कहीं तेरा शूटर ने मुझे गोली मार दी तो।

आरव:- फिर क्या करे रफीक बेटा, तू ही बता दे।

रफीक:- तू ही अा जा मेरे पास, देख हमदोनो ने अपने हथियार तेरे ओर फेंक दिए।

आरव हंसते हुए "चल ठीक है कहा"… और क़दमों की थाप धीरे-धीरे रफीक के ओर बढ़ने लगी। जैसे ही रफीक को लगा कि आरव दीवार के किनारे पर पहुंच चुका है वो और उसका आदमी, अपना गन ताने बाहर आया.. और तभी गोली चली। एक ही सेकंड के अंदर, रफीक और उसका साथी ढेर। दरअसल जो आगे जा रहा था वो वीरभद्र था और आरव पीछे खड़ा बस उनके बाहर निकालने का इंतजार कर रहा था।

आरव टूट कर जैसे चुड़ हो चुका था। उसने वीरभद्र को सबकी गिनती करने बोल दिया और साथ में यह भी की किसी में अगर जान बाकी है तो बेजान कर दे। आरव जहां था वहीं पहले लड़खड़ा कर बैठ गया। उसकी हालत ऐसी थी मानो अंदर कोई जान ना बचा हो। फिर धीरे-धीरे उसका बदन बेजान सा हो कर जमीन पर गिर गया।

दोनों बाहें फैलाए उसने अपनी आंखें मूंद ली और आशुओं की एक धारा चेहरे पर एक रेखा बनाती, धीरे-धीरे टपकने लगी। शायद जो इस वक़्त आरव मेहसूस कर रहा था वहीं अपस्यु भी। वो भी अपने बिस्तर पर लेटा-लेटा अपनी आखें मुंदे बस आशुओं की एक धारा बहा रहा था।
Bdiya update bhai ji ?

Akhirkar bhusan, jamil mare hi gye

Lekin arav apsyu kyo ro rahe h ?
Dekhte h agle update me ?
 

Mbindas

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:D .... :bow: :bow: :bow: ... bindas bhai i m feeling myself proud .. wo aaj mujeh dil ko sukkon mil gaya us din ke counter reply ka ... "itne se comment par itna bada reply :D ..... aakhir kaar aap majboor hokar 5 line likh hi diye ;) ... koi nahi agar meri baten taunt lag rahi ho to kahin kone me ja kar char gali de dena ... :D

aur haan ... :thanks: for such a beautiful comment ...
Aapko pehle bhi itni galiya de chuka hi par majal hai ki lagti hi nahi :D ab to galiya hi mujhe ulti galiya dene lagi hai ki tu ese insan ko kyo galiya de raha hai:tongue:
 

Chunmun

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Fabulous update.
Kya baat hai ek bar fir se dono bhai collage mai dhamal machane aa gye hai.
Kunjal se mulakat ho gai or Aarav parchi k madhyam se lagta hai use apne bare mai bta bhi diya hai.
Idhar dono bhai kunjal k piche lage hai or wo dono bahne kuch or samajh kr baukhlai hui hai.
 
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