sunilyadav8874
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GajabShandar kahani... Waiting for next part
GajabShandar kahani... Waiting for next part
Kahani fictional hai par logical bhi sahi baithi hai. aahh jawan b*ti aur adhedh umr ka b**p. Lajawab hai ye jodi.. wah.. kya scene haiफिर हमने बस से ही जाने का सोचा।
15 मिनट बीत चुके थें पर बस का कोई नमोनिशान नहीं था.
“उबर बुला लूं क्या ?”.
“रहने दो पापा … बेकार में पैसे खर्च होंगे. बस अभी आ जायेगी.”
मैंने कहा. “उबर पे पैसे बर्बाद ना करके उसी पैसों से आप मुझे एक साड़ी खरीद देना.”
“अच्छा ? दो तीन सौ में कहाँ से आयेगी साड़ी ?”.
“दो तीन सौ में कुछ और पैसे मिला लेना पापा …”. मैं हँसते हुए बोली.
कुछ देर में ही उनकी बस आ गई.
“आजाओ पापा …”.
“इसमें नहीं नीलम … बहुत भीड़ है.”.
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“पापा … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं… चलो.”
जगदीश को आराम से सफर करने कि आदत पड़ी थी, बस में अंदर घुसते ही भीड़ देख कर उसका दिमाग़ घुमने लगा. मैं इन सब में निपुण थी, मैंने अपने पापा का हाथ पकड़ा और भीड़ में जगह बनाती हुई बस के एकदम पीछले हिस्से में चली गई.
भीड़ तो वहाँ भी कम नहीं थी पर बस के पिछले हिस्से में कम से कम आने जाने वाले लोगों कि धक्को से बचा जा सकता था. मुश्किल से खड़े होने कि जगह मिली थी उन्हें, दोनों एक दूसरे के अगल बगल खड़े हो गये, बस चल पड़ी.
“अच्छा नीलम … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं ?”.
“हाँ पापा … तो ? वैसे आज थोड़ी ज़्यादा ही भीड़ है इस बारिश कि वजह से… रोज़ नहीं होता इतना… पर…”.
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मैं जिस जगह खड़ी थी उसके पीछे एक आदमी बड़ा सा बैग लिये खड़ा था. उस बैग कि वजह से मैं ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी और बार बार ठोकर लग रही थी.
“इधर आ जा नीलम .”.
पापा ने जब ये ध्यान किया तो उसने अपने सामने थोड़ी सी जगह बना ली और मैं वहाँ घुस कर अपने पापा के आगे खड़ी हो गई. अब पीठ अपने पापा के तरफ थी और धक्के मुक्के से बचाने के लिये पापा पीछे खड़े थें.
पापा मेरे लिये इतने रक्षात्मक थें ये देख कर मैं मन ही मन मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं. मुझे अपने पापा के साथ नोंक झोंक वाला रिश्ता ही ज़्यादा भाता था, औपचारिकता वाला नहीं !
बाहर बारिश होने कि वजह से दिन के वक़्त भी अच्छा खासा अंधेरा छा गया था, बस कि सारी खिड़कीयां बंद थी तो अंदर बस में भी अंधकार ही था, जो जहाँ था वहीं चुपचाप खड़ा था, हिलने डूलने कि तो जगह ही नहीं थी. कुछ देर कि यात्रा के बाद पापा और मैं अब शिथिल हो गयें थें…
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पापा ने अपनी बेटी को अपने सामने खड़े होने कि जगह तो दे दी थी पर वो आरामदायक नहीं हो पा रहा था, मेरा तो उसे पता नहीं. दरअसल, उसकी बेटी का बदन उसके जिस्म से एकदम चिपक गया था, उसपे उसकी बेटी का सलवार कमीज़ और खुद उसका पतलून और शर्ट भीग कर तर बतर हो चुका था.
शुरू में काफी देर तक उसने कोशिश कि, की उसका शरीर अपनी बेटी के बदन से ना सटे, पर पीछे से पड़ रहे लोगों की भीड़ के दबाव को वो ज़्यादा देर तक रोक नहीं पाया. मुसीबत तब हुई जब आखिरकार पापा के कमर का नीचला हिस्सा उसकी बेटी के नितंब में जा सटा.
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इतना तो फिर भी ठीक था पर सबसे शर्मनाक स्थिति तब आई जब पापा की टांगों के बीच वाला हिस्सा उसकी बेटी की कमीज़ और सलवार में लिपटी पानी से गीली हुई चूतड़ों के मध्य की पतली दरार के बीचो बीच फंस गया !
पापा बस यही सोच रहा था की उसकी बेटी पता नहीं क्या सोच रही होगी, शायद उसे कुछ महसूस ही ना हो रहा हो, ना ही हो तो बेहतर है ! पापा की कमर और दोनों जांघो वाला हिस्सा अब मैं के गांड़ की दोनों गोल उभारों में सट गया था जबकि उसका लण्ड वाला हिस्सा उन दो गोल गुंबदो के बीच घुस गया था !
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अनुभूति तो आखिर अनुभूति ही होती है जो इंसान महसूस करता है और जिसका तर्क हर वक़्त ना खोजना संभव है और ना समझना. पापा को भी जब किसी नरम मुलायम गद्दे जैसी अपनी बेटी के गांड़ का उभार अनुभव हुआ तो ना चाहते हुए भी, या फिर यूँ कहें, की उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसका लण्ड उसकी पैंट में फूलने लगा !!!
पानी में पूरी तरह से भीगे होने के कारण उसके पतलून के अंदर उसका अंडरवीयर भी ढीला और लचीला हो गया था, जिसकी वजह से उसका अंडरवीयर ज़्यादा देर उसके लण्ड के बढ़ते उभार और आकार को दबा नहीं पाया. उसका लण्ड उसके जांघिये में नीचे की ओर मुड़े हुए ही खड़ा होने लगा!
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मेरी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी. परिस्थिति हाथ से बाहर जाता देख पापा ने धीरे से अपनी कमर पीछे खिसका कर अपने लण्ड को अपनी बेटी की गांड़ की दरारों से बाहर निकाला, और थोड़ा पहलू होने की कोशिश की ताकि वो उसकी गांड़ से ना सटे.
पर इस प्रयास में चूंकि पीछे से भीड़ का काफी दबाव था, उसका लण्ड बाहर तो निकला पर इस बार वापस जाकर मेरी बाई गांड़ के गुंबद पे टिक गया. और ये मैंने बहुत ही अच्छे से बिना किसी गलतफहमी के महसूस भी किया !!!
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“आप ठीक है न पापा ? मैं थोड़ा हटूं क्या ?”. मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर बस इतना सा घुमा कर पूछा की उसकी आँख पापा के आँख से ना मिले.
“हाँ!”. पापा ने जितना हो सका अपनी आवाज को स्वाभाविक बना कर कहा, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.
मैंने अपने पापा का लण्ड साफ अपनी गांड़ पर महसूस कर लिया था, थोड़ा अजीब लगा पर मैं जानती थी की ये जान-बूझकर नहीं था. मैंने अपनी गांड़ थोड़ी सी हिला कर ठीक करना चाहि पर उससे मामला और बिगड़ गया !
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मेरी इस हरकत से पापा का लण्ड घिसट कर वापस मेरी गांड़ की दरार में फिट हो गया और इस बार पापा का नीचे मुड़ा हुआ लण्ड जांघिये में थोड़ी सी जगह पाकर सीधे ऊपर की ओर उठ गया !!!
पापा और मैं इतने सालों से एक साथ रह रहें थें, पापा ने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था जैसा वो अब कर रहा था. ऐसी बात नहीं है की वो कभी अपनी बेटी के इतना करीब ना गया हो, इससे ज़्यादा करीबी और क्या हो सकती है.
पर हमेशा से एक सामान्य बाप बेटी रहे इन दोनों के बीच अभी जो भी हो रहा था, ऐसा क्यूं हो रहा था !! दोनों बाप बेटी सामने ऊपर की तरफ बस का rod पकड़े खड़े थें. पापा का मुँह अपनी बेटी के भीगे खुले बालों के ठीक पीछे था…
उसके बालों से आ रही बारिश के पानी और शैम्पू की घुली मिली महक ने मानो बेटी और उसके बीच का संकरा फासला कम कर दिया था. अभी तक तो पापा असमंजस में था की क्या हो रहा है और वो क्या करे और क्या ना करे, पर अब जब उसका लण्ड पूरी तरह से टाईट ठनक कर खड़ा हो गया तो उसने समझ लिया की वो अपनी ही सगी बेटी के बदन से सट कर कामोत्तेजित हो रहा था !!!
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अब पापा के पास बस एक ही रास्ता था… ये टेस्ट करना की उसकी बेटी क्या चाहती है, अगर वो तिनका भर भी आपत्ती दिखायेगी तो उसे तुरंत खुद को रोक लेना होगा. पापा ने अपनी कमर हल्के से सामने की ओर बढ़ाई तो मेरी गांड़ के बीच रगड़ खा कर उसके लण्ड का चमड़ा पीछे खिसक कर खुल गया और उसका मोटा सुपाड़ा बाहर निकल आया. पापा का लंड इतना फूल गया था कि वो उनकी अंडरवियर टाइट हो रहा था .
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अब पापा अपने भीगे पतलून में अपने खड़े लौड़े का सुपाड़ा खोले अपनी बेटी की गोल गदराई चूतड़ से टिका खड़ा था !!! मेरा रहा सहा शक भी अब जाता रहा की जो कुछ भी हो रहा था वो अनजाने में हो रहा था. वो समझ गई की उसके पापा बेचारे परिस्थिति के सताये कामोन्मादित हो रहें थें. परिस्थिति के सताये और मारे ही कहेंगे ना…
क्यूंकि मैं समझ रही थी आज तक उसके पापा ने ना जाने कितनी बार मुझे नाईटी में और पजामे में देखा था, पर कभी भी मुझ पे गंदी नज़र नहीं डाली थी. आज का दिन मगर कुछ और ही था… मन ही मन मैं थोड़ा मुस्कुराई, पर कुछ ना बोली, चुप रही.
इधर पापा का मन बढ़ गया जब उसकी बेटी की ओर से ऐसा कोई इशारा नहीं हुआ जिसके द्वारा वो अपनी असहमति दिखाए. फिर क्या था, उसने एकदम धीरे धीरे मेरी नरम गांड़ में अपना लण्ड ठेलना शुरू किया. उसके खड़े लण्ड का सुपाड़ा तो पहले ही खुल चुका था, सो अपने पानी में गीले भीगे पैंट के अंदर अपना लौड़ा घिसने में उसे ऐसी आनंद की अनुभूति होने लगी की वो बयां नहीं कर सकता था !
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अभी उसने तीन चार बार ही अपना लण्ड रगड़ा होगा की बस रुक गई… कोई ठिकाना आया था. वो थोड़ा संभल कर खड़ा हो गया पर उसने देखा की जितने लोग बस से उतरे नहीं उससे ज़्यादा लोग चढ़ गयें, भीड़ और बढ़ गई थी. बस फिर से चल पड़ी.
“अभी दूर है क्या नीलम ?”. पापा ने अपनी बेटी के मूड का जायजा लेने के मकसद से पूछा.
“हाँ पापा … ये बस दूसरे मार्ग से जाती है ना. आपकी बाइक में तो ज़ल्दी हो जाता है.”. मैंने तुरंत जवाब दिया, पर अभी भी पीछे नहीं मुड़ी.
“हाँ …”.
पापा ने इधर उधर आस पास के लोगों को देखा पर सभी अपने में मगन और परेशान खड़े थें… बस में दो अच्छे घराने के बाप बेटी क्या कर रहें थें इसमें शायद ही किसी को रूचि हो !!!
पापा अपना दाया हाथ नीचे सरका के अपने पतलून तक ले गया और पैंट की ज़िप यानि चैन खोल दी. मैं पीछे देख तो नहीं पा रही थो पर वो समझ गई की उसके पापा अब कोई और नई शैतानी करने वाले हैं. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा…
अपने पतलून के अंदर हाथ डाल कर पापा ने अपना खड़ा लण्ड अपने जांघिये से बाहर निकाल लिया और फिर पैंट कि ज़िप वापस लगा ली. अब उसका लण्ड अंडरवीयर से बाहर लेकिन पतलून के अंदर था. उसने ऐसा इसलिये किया था ताकि उसके लण्ड को अपनी बेटी के चूतड़ का ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श मिल सके.
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अब उसने अपनी बेटी कि गीली कमीज़ उठा कर सीधे उसके सलवार में लिपटी गांड़ में अपना लण्ड सटा दिया और उसकी कमीज़ से वो हिस्सा ढक दिया, जिससे अगर कोई देखे तो सिर्फ ये समझे कि दोनों बस ऐसे ही बाकि यात्रियों कि तरह खड़े हैं !
मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई पब्लिक में अपने पापा कि इस साहसी हरकत को देख कर ! मैंने अपने भीगे बालों और गर्दन पर अपने पापा कि गरम साँसे महसूस कि… पापा अब पहले से और ज़्यादा सट कर खड़ा हो गया था. अब पापा के लण्ड और मेरी गांड में सिर्फ उनके पैन्ट और मेरी स्कर्ट के कपडे का ही अंतर था.
टी शर्ट के अंदर ढकी मेरी गांड़ में पापा अब खुल कर लण्ड घिसने रगड़ने लगा. मेरी मांसल पुष्ट गांड़ कि गोलाईयां उसके लण्ड को इतना सुकून और आनंद देंगी, ये उसे अभी अभी पता चला था ! अपने पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके लण्ड से पापा ने ठेल ठेल कर अपनी बेटी कि स्कर्ट और उसके अंदर पहनी पैंटी को उसकी चूतड़ कि फांक में घुसा दिया था.
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मुझेतो मन ही मन हँसी आने लगी अपने पापा कि बेचैनी देख कर. अति कामोत्तेजना में पापा को पता ही नहीं चला कि कब रुकना है और उसने अपना लण्ड अपनी बेटी कि टाईट गांड़ में कुछ ज़्यादा ही घिस दिया था, इस वजह से वो स्खलित होने के करीब पहुंच गया.
उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी गांड़ से हटा लिया और साँस रोक कर अपना माल गिरने से रोकने कि कोशिश करने लगा. इस कोशिश में उसके पेट मे बल पड़ गया, मगर अब काफी देर हो चुकी थी, उसका लण्ड उसके पैंट में एकदम से बड़ा होकर फूल गया और उसका वीर्य निकल आया !!!
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जब पापा ने देखा कि अब कोई फायदा नहीं तो उसने वापस अपना लण्ड अपनी बेटी कि स्कर्ट में घुसा दिया और झड़ने लगा. उसका गाढ़ा वीर्य पतलून के कपड़े से बाहर रिस रिस कर बहने लगा. मैंने जब अपनी स्कर्ट में गांड़ और जांघो पर गरम गरम मलाई जैसी चिकनी रस के एक के बाद दूसरी धार को गिरता हुआ महसूस किया तो वो समझ गई कि उसके पापा का काम तमाम हो चुका है !!!
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20 सेकंड के अंदर ही पापा कि पिचकारी पूरी खाली हो गई. उसके पैर अचानक से हुए इस शीघ्रपतन से काँप रहें थें और उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अपनी बेटी के ऊपर गिरने से रोका था. मैंने अपने हाथ से अपनी गांड़ में घुस चुकी पैंटी और स्कर्ट को निकाला और अपने कपड़े ठीक करने लगी. पर पापा का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था !
अभी अभी थोड़ी सी शिथिल हुई मैंने अचानक अपने पापा का दाया हाथ सीधे अपनी चूत पे रेंगता हुआ महसूस किया. पापा चूत स्कर्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा !
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पापा अचानक से इतने बेशरम कैसे हो गयें ???… मैं बेचारी ये सोच ही रही थी कि पापा ने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी ऊँगलीयां फंसा दी…
हाय !… पापा पागल हो गयें थें क्या… इतने लोगों के बीच भरी बस में अपनी सगी बेटी को नंगा करना चाहते थें क्या ??? घबरा कर मैंने तुरंत अपने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया. पापा रुक तो गया… उसने अपनी बेटी कि स्कर्ट का नहीं खोला मगर अब अपना हाथ स्कर्ट के अंदर ही डाल दिया.
लेकिन मैंने स्कर्ट इतनी टाईट बाँध रखी थी कि मुश्किल से पापा का हाथ अंदर घुस पाया और पापा बेचारे सिर्फ पैंटी का ऊपरी हिस्से वाला इलास्टिक ही छू पायें थें !!! अब ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा था… मैं एकाएक अपने पापा के तरफ मुड़ कर खड़ी हो गई. पापा को ये अंदेशा नहीं था कि उसकी बेटी अचानक आमने - सामने हो जायेगी. उसने झट से अपनी नज़र घुमा ली.
“पापा ! मम्मी को फोन किया कि हम लेट हो जायेंगे ?”. मैंने पूछा.
पापा समझ गया कि मैं जानबूझ कर ज़ोर से बोल रही थी और “पापा ” शब्द पर ज़्यादा दबाव डाल रही थी ताकि आस पास खड़े लोगों को उनकी हरकतों पे कोई शक ना हो. पापा कि हिम्मत नहीं हुई कि अपनी बेटी से आँख मिला सके… उसने कोई जवाब नहीं दिया… उसका गला सूख रहा था. मैं अब सीधे उसकी आँखों में देख रही थी.
“कितनी भीड़ है पापा … मैं गिर जाउंगी.”. मैंने अचानक अपने दाये हाथ से अपने पापा का कमर पकड़ लिया और बाये हाथ से बस का डंडा पकड़े खड़ी रही.
पापा को और किसी इशारे कि ज़रूरत नहीं थी… वो समझ गया कि उसकी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया था वो उसे अच्छा लगा हो या ना पर इतना तो तय था कि वो नाराज़ नहीं थी… उसकी बेटी के गोल मम्मे अब उसकी छाती से दब रहें थें.
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उसकी कमीज़ बारिश में भीगे होने के कारण पापा महसूस कर पा रहा था कि मेरे दोनों निप्पल खड़े हो गयें थें. उसे अब बस में अपनी बेटी के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था ! पापा का पैंट मेरी स्कर्ट से ढक गया था…
उसने अंदर हाथ डाल कर अपने पैंट कि ज़िप खोल दी और इस बार अपना लण्ड पतलून से बाहर निकाल लिया. मुझेअपने पापा कि इस हरकत पे अब कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था… सबसे नज़र बचा कर वो दोनों जो कुछ भी कर रहें थें उससे अब मुझेएक अजीब सा यौन किंक मिलने लगा था !!!
पापा का लण्ड अब अपने खुद के पेट और उसकी बेटी के पेट के बीच में दबा पड़ा था और ऊपर से बेटी कि स्कर्ट से पूरी तरह ढका हुआ था. मैंने उसके लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी नाभी में टच होता महसूस किया… अफ़सोस कि अपने पापा का लौड़ा देख नहीं पा रही थी… पर उसके स्पर्श से इतना तो अंदाज़ा लगा लिया था कि पापा का लौड़ा अच्छा खासा बड़ा होगा.
पापा धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपनी बेटी के पेट और नाभी में रगड़ने लगा. अब वो सीधा अपनी बेटी कि नज़रों से नज़रें मिलाये खड़ा था. उसका चेहरा अपनी बेटी के चेहरे के इतने पास था कि उसका तो मन कर रहा था उसे चुम ही ले. चूंकि पापा का लण्ड अभी अभी झड़ा था, सो उसके लण्ड में ज़्यादा गर्मी नहीं आ रहा था पर उसका मन कर रहा था कि वो फिर एक बार माल गिराये.
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“अब हम पहुँचने ही वाले हैं पापा …”. मैंने अपने पापा को आगाह किया!!!
पापा ने धीरे से अपना सिर हिला कर हामी भरी और लण्ड घिसता रहा… पर अब इससे बात नहीं बनने वाली थी… उसने तुरंत बेटी कि स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपना लण्ड पकड़ लिया और मूठ मारने लगा ! मैं अपने पापा का साथ देने के लिये उसके कमर को सहलाने लगी और अपनी जांघे पापा के पैरों में सटा दिया.
पापा अपनी बेटी के बदन, उसकी जांघ, उसकी चूचियाँ, सबका स्पर्श करते हुए , मूठ मारने लगा. उसकी मेहनत जल्द ही रंग लाई… उसके लण्ड का पानी छूट पड़ा. वीर्य कि पहली तीन चार धार तो इतनी तेज़ थी कि स्कर्ट के अंदर होती हुई ब्रा तक पहुंच गई.
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फिर पेट और स्कर्ट पर गिरने लगी और फिर पापा ने झड़ता हुआ लौड़ा तुरंत अपने पैंट में घुसा लिया और बाकि का माल अपने पतलून के अंदर गिराने लगा. उसकी बेटी ने अगर उसकी कमर ना पकड़ी हुई होती तो बेचारा उत्तेजना के मारे गिर ही गया होता ! फिर भी वो थोड़ा सा लड़खड़ा गया तो पास खड़े एक आदमी ने उसे टोका.
“ओ भाई… थोड़ा संतुलन बना के रहो… तब से देख रहा हूं !”
“भाईसाहब… सॉरी !”. पापा कि आवाज गले में अटक गई.
मुझे हँसी आ गई अपने पापा कि हालत देख कर. उनका स्टॉप आ गया था… दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किये, पापा ने अपना शर्ट बाहर कर लिया ताकि उसके पैंट में बना लण्ड का तंबू और वीर्य का गीलापन का पता ना चले और बस से उतर गयें. मौसम हमारे पक्ष में था, अभी भी तेज़ बारिश हो रही थी, सो उसके और उसकी बेटी के कपड़ों पे लगा वीर्य ऐसे ही धुल गया.
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Gajab idea hai. Double meaning me jo maza hai wo sidhi baat me nahi. Wahअगले दिन सुबह जब हम उठे तो मैं रोज की तरह नीचे आयी, मम्मी और पापा चाय पी रहे थे. नानी भी पास ही बैठी थी.
पापा अखबार पढ़ रहे थे.
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उस में हमारे शहर में चल रहे किसी साधु बाबा के कथा का इश्तिहार था.
वो कथा रोज दोपहर 3 बजे से शाम को 6 बजे तक होती थी. नानी ने जब यह सुना तो वो माँ से बोली की वो उस कथा को सुनना चाहती हैं. उस दिन संडे भी था तो पापा को भी छुटी थी. मम्मी और नानी ने उस में जाने का प्रोग्राम बना लिया। और मुझे भी साथ चलने को कहा. पर उस दिन पापा भी घर पर ही थे तो मुझे यह एक सुनहरी मौका लगा की घर पर पापा से कुछ छेड़छाड़ करुँगी तो मैंने पढाई का बहाना बना कर घर पर ही रहने का बोल दिया।
पापा भी खुश हो गए. पापा ने कहा की वे मम्मी और नानी को कार से छोड़ आएंगे और शाम को ले भी आएंगे।
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मैं पापा के चेहरे पर आयी हुई ख़ुशी को साफ़ साफ़ अनुभव कर सकती थी. मैं भी समझ रही थी कि पापा क्यों खुश है?
हम लोगों ने जल्दी खाना खा लिया और फिर पापा कार में चल पड़े। मैं भी उनके साथ चल पड़ी ताकि वापिसी में कुछ देर और ज्यादा पापा के साथ अकेली रहने का मौका मिल सके.
मम्मी और नानी को छोड़ कर हम वापिस आ रहे थे. मैंने पापा को आइसक्रीम खाने का कहा तो पापा ने एक आइसक्रीम की दूकान पर कार रोक ली.
आइसक्रीम पार्लर पर पापा ने मुझे पुछा की मुझे क्या खाना है तो मैंने पापा की आँखों में देखते हुए कहा कि
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"पापा मुझे तो कुल्फी या चॉकोबार ही पसंद है, उसे मैं चूस चूस कर कहती हूँ."
पापा मेरी आँखों की चमक देख कर ही समझ रहे थे कि में किस चॉकोबार की बात कर रही हूँ तो वो भी शरारत से बोले
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"नीलम मुझे तो आइसक्रीम ही पसंद है. मैं आइसक्रीम की डिब्बी में अपनी जीभ घुसा कर पूरी आइसक्रीम चाट चाट कर खाना पसंद करता हूँ. मुझे आइसक्रीम मैं पूरी जीभ डाल कर चाटना ही अच्छा लगता है."
मैं शर्मा गयी. हम दोनों ही बात को समझ रहे थे.
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पापा ने मेरे लिए चॉकोबार ली और अपने लिए आइसक्रीम ली. फिर हम कार में आ कर बैठ गए और वहां पर पापा ने मुझे चॉकोबार पकड़ाई और आंखे मेरी आंखे मैं डाल कर मुझे चॉकोबार खिलाने लगे और खुद अपनी जीभ आइसक्रीम की डिब्बी में घुसा कर मुस्कुराते हुए अपने मुंह को खोल आइसक्रीम खाते हुए आँखो के इशारे से बताने लगी कि अभी मुझे तुमने अपनी आइसक्रीम इस तरह आइसक्रीम खिलानी है.
पापा : नीलम कैसे लगी तुम्हें चॉकोबार ?
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पापा फिर से प्यार से देखते हुए कहते हैं " मुझे आइसक्रीम बहुत अच्छी लगती है, कितनी मलाईदार होती है?"
और ये बात बोलते ही एक चेहरे की मुस्कान आ गयी. मैं पापा को देख कर अपने होठों पर फिराने लगी।
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मेरे जैसी खूबसूरत लड़की की इस जानलेवा अदा पर कोई मर्द कैसे बच सकता था पापा भी मेरी कामुक अदा देख कर कहा चुप रहने वाले थे मेरी आंखो में देखते हुए अपने हाथ को जींस में खड़े अपने लंड को सहलाते बोले वो तुम लड़कियों को मलाईदार क्रीमी आइसक्रीम पसंद ज्यादा होती है अब तुम्हें रोज बढ़िया ब्लैक चोकोबार आइसक्रीम खिलाऊंगा.
मैं पापा की इस हरकत पर समझ रही थी कि पापा मुझे कोन सी चोकोबार आइसक्रीम खिलाने की बात कर रहे हैं ये बात सुनते ही मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।
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इसी तरह शरारत करते और दो अर्थी बातें करते हुए हमने अपनी अपनी चॉकोबार और आइसक्रीम चाट ली.
मैंने इस तरह से चाट चाट कर और अपने मुंह में पूरा डाल कर चॉकोबार चूसी कि जैसे पापा का लण्ड चूस रही होऊं और पापा ने भी पूरी जीभ से चाट चाट कर आइसक्रीम चाटी जैसे मेरी चूत को चाट रहे हों.
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पापा का लौड़ा खड़ा हो गया था जिसे वो बार बार दबा कर सेट कर रहे थे मेरी भी चूत पूरी गर्म हो चुकी थी और गीली हो गयी थी.
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आइसक्रीम ख़त्म होने पर हम घर वापिस आ गए.
Aap apni story per update kab de rahe hoWah bhai wah. B**p-B*ti ki kahaniyo me ek aus sitara zud gaya hai, Raw-Hot kahani hai ye.
Jald hi de dunga. Dhyna banaye rakhna.Aap apni story per update kab de rahe ho
+5Jald hi de dunga. Dhyna banaye rakhna.
Waise meri sotry ko kinta rate kaorge? 5 me se.