• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest बाप बेटी का अनोखा प्यार

Ting ting

Ting Ting
767
3,342
139
हम मार्किट पहुंच गए थे वहां बहुत ही भीड़ थी तो हमने स्कूटर को पार्किंग में लगा दिया और भीड़ में चले गए बाजार में सेल लगने के कारण बहुत ही ज्यादा भीड़ थी
new-delhi-india-people-shop-at-a-crowded-market-place-in-new-delhi-india-on-july-08-2025.jpg

मैं आगे चल रही थी पापा पीछे चल रहे थे अचानक से भीड़ में धक्का मुक्की होने लगी हम भीड़ में फंस गए थे मुझे आगे से धक्के आ रहे थे और पापा को पीछे से धक्के लग रहे थे धक्का लगने के कारण पापा मेरे पीछे से टच हो गए थे उनका लंड मेरी गांड में टच हो गया.

मैं धक्का लगने का नाटक करते हुए पीछे की तरफ अपने आप धकेलने लगी और पापा के लंड का स्पर्श पा लिया . लंड मेरी गांड के साथ सट गया था और भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को पता नहीं चल रहा था अब मैं और पापा एक दूसरे के साथ साथ आ गए थे.
74547917_007_29c3.jpg

मेरा पूरा जिस्म मेरे पापा के सीने से लग रहा था मुझे मज़ा रहा था और मैं हॉट हो रही थी. और पापा का लंड भी खड़ा सख्त हो रहा था मैं पापा को और सेड्यूस करने लगी और अपनी गांड को हिलाने लगी अब मेरी गांड पापा के लंड को घिस रही थी और मैं अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी.
99952465_040_c58c.jpg

पापा का भी कण्ट्रोल लूस हो रहा था और पापा भी अपना लंड मेरी गांड पर लगा रहे थे. अचानक मैंने महसूस किया की पापा के दोनों हाथ मेरी कमर पर है उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा हुआ है. मैं हैरान हो गई थी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पापा ने अपना कण्ट्रोल खो दिया था और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी गांड को ऊपर से सहलाने लगे.
depositphotos_204423624-stock-video-close-up-the-hips-fashion.jpg

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन मैं ऐसे रियेक्ट कर रही थी की जैसे भीड़ बहुत ज्यादा है मैं खुश हो गई थी की आखिर मैंने पापा को सेड्यूस कर ही दिया. वो अपने साथ से मेरी गांड सहलाये जा रहे थे. थोड़ी देर हमने मज़े लिए उसके बाद वो नार्मल हो गए और हम भीड़ में से निकल गए.
depositphotos_206302174-stock-video-close-up-the-hips-fashion.jpg

हम मार्किट में शॉपिंग करने लगे. लेकिन पापा ने मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की. हम शॉपिंग करने के बाद घर आ रहे थे तो पापा ने मुझे कहा की नीलम जो भी हुआ उसको भूल जाओ और किसी को मत बताना .

तो मैंने कहा “कोई बात नहीं पापा. डोंट वरी. ऐसी गलतिया हो जाती है. आखिर हो तो आप भी एक मर्द.”
13104545_004_8a22.jpg

मैंने ये कहकर एक सेक्सी स्माइल देकर ग्रीन सिग्नल दे दिया पापा भी मुस्कुराये और कहा की “बेटी अब समझदार हो गई है.”
थोड़ी देर के बाद हम दोनों स्कूटर के पास आये घर जाने के लिए, तो देखा कि स्कूटर का अगला पहिया पंचर हो गया था.

पास में कोई दूकान नहीं थी. तो पापा ने एक जान पहचान वाले दूकानदार के पास स्कूटर रख दिया और कहा कि वो उसे कल ले जायेंगे.

फिर हमने घर जाने के लिए कुछ और इंतजाम करने का सोच. मैं तो नाराज़ थी क्योंकि मैं सोच रही थी कि वापिसी में भी पापा से कुछ मजे ले लुंगी और अपनी कार्यवाही को कुछ और आगे ले जाउंगी पर सब गड़बड़ हो गया.


96125195_010_6439.jpg
 

Ting ting

Ting Ting
767
3,342
139
No comments are coming.
Perhpas readers don't like the story.
so I may close it early.
Anyway I have written some episods and may stop writing more.
Your comments are the best tonic for a writer to put his time and efforts. if nobody likes the story, writer also loses his enthusiasm.
 

Ting ting

Ting Ting
767
3,342
139
फिर हमने बस से ही जाने का सोचा।

15 मिनट बीत चुके थें पर बस का कोई नमोनिशान नहीं था.

“उबर बुला लूं क्या ?”.

“रहने दो पापा … बेकार में पैसे खर्च होंगे. बस अभी आ जायेगी.”

मैंने कहा. “उबर पे पैसे बर्बाद ना करके उसी पैसों से आप मुझे एक साड़ी खरीद देना.”

“अच्छा ? दो तीन सौ में कहाँ से आयेगी साड़ी ?”.

“दो तीन सौ में कुछ और पैसे मिला लेना पापा …”. मैं हँसते हुए बोली.

कुछ देर में ही उनकी बस आ गई.

“आजाओ पापा …”.

“इसमें नहीं नीलम … बहुत भीड़ है.”.
crowded-bus-with-people-hanging-outside.jpg

“पापा … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं… चलो.”

जगदीश को आराम से सफर करने कि आदत पड़ी थी, बस में अंदर घुसते ही भीड़ देख कर उसका दिमाग़ घुमने लगा. मैं इन सब में निपुण थी, मैंने अपने पापा का हाथ पकड़ा और भीड़ में जगह बनाती हुई बस के एकदम पीछले हिस्से में चली गई.

भीड़ तो वहाँ भी कम नहीं थी पर बस के पिछले हिस्से में कम से कम आने जाने वाले लोगों कि धक्को से बचा जा सकता था. मुश्किल से खड़े होने कि जगह मिली थी उन्हें, दोनों एक दूसरे के अगल बगल खड़े हो गये, बस चल पड़ी.

“अच्छा नीलम … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं ?”.

“हाँ पापा … तो ? वैसे आज थोड़ी ज़्यादा ही भीड़ है इस बारिश कि वजह से… रोज़ नहीं होता इतना… पर…”.
multigenerational-group-of-travelers-on-a-busy-electric-eco-bus.jpg

मैं जिस जगह खड़ी थी उसके पीछे एक आदमी बड़ा सा बैग लिये खड़ा था. उस बैग कि वजह से मैं ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी और बार बार ठोकर लग रही थी.

“इधर आ जा नीलम .”.

पापा ने जब ये ध्यान किया तो उसने अपने सामने थोड़ी सी जगह बना ली और मैं वहाँ घुस कर अपने पापा के आगे खड़ी हो गई. अब पीठ अपने पापा के तरफ थी और धक्के मुक्के से बचाने के लिये पापा पीछे खड़े थें.

पापा मेरे लिये इतने रक्षात्मक थें ये देख कर मैं मन ही मन मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं. मुझे अपने पापा के साथ नोंक झोंक वाला रिश्ता ही ज़्यादा भाता था, औपचारिकता वाला नहीं !

बाहर बारिश होने कि वजह से दिन के वक़्त भी अच्छा खासा अंधेरा छा गया था, बस कि सारी खिड़कीयां बंद थी तो अंदर बस में भी अंधकार ही था, जो जहाँ था वहीं चुपचाप खड़ा था, हिलने डूलने कि तो जगह ही नहीं थी. कुछ देर कि यात्रा के बाद पापा और मैं अब शिथिल हो गयें थें…
father-and-daughter.jpg

पापा ने अपनी बेटी को अपने सामने खड़े होने कि जगह तो दे दी थी पर वो आरामदायक नहीं हो पा रहा था, मेरा तो उसे पता नहीं. दरअसल, उसकी बेटी का बदन उसके जिस्म से एकदम चिपक गया था, उसपे उसकी बेटी का सलवार कमीज़ और खुद उसका पतलून और शर्ट भीग कर तर बतर हो चुका था.

शुरू में काफी देर तक उसने कोशिश कि, की उसका शरीर अपनी बेटी के बदन से ना सटे, पर पीछे से पड़ रहे लोगों की भीड़ के दबाव को वो ज़्यादा देर तक रोक नहीं पाया. मुसीबत तब हुई जब आखिरकार पापा के कमर का नीचला हिस्सा उसकी बेटी के नितंब में जा सटा.
38940511_008_876b.jpg

इतना तो फिर भी ठीक था पर सबसे शर्मनाक स्थिति तब आई जब पापा की टांगों के बीच वाला हिस्सा उसकी बेटी की कमीज़ और सलवार में लिपटी पानी से गीली हुई चूतड़ों के मध्य की पतली दरार के बीचो बीच फंस गया !

पापा बस यही सोच रहा था की उसकी बेटी पता नहीं क्या सोच रही होगी, शायद उसे कुछ महसूस ही ना हो रहा हो, ना ही हो तो बेहतर है ! पापा की कमर और दोनों जांघो वाला हिस्सा अब मैं के गांड़ की दोनों गोल उभारों में सट गया था जबकि उसका लण्ड वाला हिस्सा उन दो गोल गुंबदो के बीच घुस गया था !
85294925_065_df20.jpg

अनुभूति तो आखिर अनुभूति ही होती है जो इंसान महसूस करता है और जिसका तर्क हर वक़्त ना खोजना संभव है और ना समझना. पापा को भी जब किसी नरम मुलायम गद्दे जैसी अपनी बेटी के गांड़ का उभार अनुभव हुआ तो ना चाहते हुए भी, या फिर यूँ कहें, की उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसका लण्ड उसकी पैंट में फूलने लगा !!!

पानी में पूरी तरह से भीगे होने के कारण उसके पतलून के अंदर उसका अंडरवीयर भी ढीला और लचीला हो गया था, जिसकी वजह से उसका अंडरवीयर ज़्यादा देर उसके लण्ड के बढ़ते उभार और आकार को दबा नहीं पाया. उसका लण्ड उसके जांघिये में नीचे की ओर मुड़े हुए ही खड़ा होने लगा!
90685136_027_0697.jpg

मेरी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी. परिस्थिति हाथ से बाहर जाता देख पापा ने धीरे से अपनी कमर पीछे खिसका कर अपने लण्ड को अपनी बेटी की गांड़ की दरारों से बाहर निकाला, और थोड़ा पहलू होने की कोशिश की ताकि वो उसकी गांड़ से ना सटे.

पर इस प्रयास में चूंकि पीछे से भीड़ का काफी दबाव था, उसका लण्ड बाहर तो निकला पर इस बार वापस जाकर मेरी बाई गांड़ के गुंबद पे टिक गया. और ये मैंने बहुत ही अच्छे से बिना किसी गलतफहमी के महसूस भी किया !!!
91102412_020_3e6c.jpg

“आप ठीक है न पापा ? मैं थोड़ा हटूं क्या ?”. मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर बस इतना सा घुमा कर पूछा की उसकी आँख पापा के आँख से ना मिले.

“हाँ!”. पापा ने जितना हो सका अपनी आवाज को स्वाभाविक बना कर कहा, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.

मैंने अपने पापा का लण्ड साफ अपनी गांड़ पर महसूस कर लिया था, थोड़ा अजीब लगा पर मैं जानती थी की ये जान-बूझकर नहीं था. मैंने अपनी गांड़ थोड़ी सी हिला कर ठीक करना चाहि पर उससे मामला और बिगड़ गया !
58751_16.jpg

मेरी इस हरकत से पापा का लण्ड घिसट कर वापस मेरी गांड़ की दरार में फिट हो गया और इस बार पापा का नीचे मुड़ा हुआ लण्ड जांघिये में थोड़ी सी जगह पाकर सीधे ऊपर की ओर उठ गया !!!

पापा और मैं इतने सालों से एक साथ रह रहें थें, पापा ने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था जैसा वो अब कर रहा था. ऐसी बात नहीं है की वो कभी अपनी बेटी के इतना करीब ना गया हो, इससे ज़्यादा करीबी और क्या हो सकती है.

पर हमेशा से एक सामान्य बाप बेटी रहे इन दोनों के बीच अभी जो भी हो रहा था, ऐसा क्यूं हो रहा था !! दोनों बाप बेटी सामने ऊपर की तरफ बस का rod पकड़े खड़े थें. पापा का मुँह अपनी बेटी के भीगे खुले बालों के ठीक पीछे था…

उसके बालों से आ रही बारिश के पानी और शैम्पू की घुली मिली महक ने मानो बेटी और उसके बीच का संकरा फासला कम कर दिया था. अभी तक तो पापा असमंजस में था की क्या हो रहा है और वो क्या करे और क्या ना करे, पर अब जब उसका लण्ड पूरी तरह से टाईट ठनक कर खड़ा हो गया तो उसने समझ लिया की वो अपनी ही सगी बेटी के बदन से सट कर कामोत्तेजित हो रहा था !!!
48061487_008_af37.jpg

अब पापा के पास बस एक ही रास्ता था… ये टेस्ट करना की उसकी बेटी क्या चाहती है, अगर वो तिनका भर भी आपत्ती दिखायेगी तो उसे तुरंत खुद को रोक लेना होगा. पापा ने अपनी कमर हल्के से सामने की ओर बढ़ाई तो मेरी गांड़ के बीच रगड़ खा कर उसके लण्ड का चमड़ा पीछे खिसक कर खुल गया और उसका मोटा सुपाड़ा बाहर निकल आया. पापा का लंड इतना फूल गया था कि वो उनकी अंडरवियर टाइट हो रहा था .
43915-Njc5Mjgw.jpg

अब पापा अपने भीगे पतलून में अपने खड़े लौड़े का सुपाड़ा खोले अपनी बेटी की गोल गदराई चूतड़ से टिका खड़ा था !!! मेरा रहा सहा शक भी अब जाता रहा की जो कुछ भी हो रहा था वो अनजाने में हो रहा था. वो समझ गई की उसके पापा बेचारे परिस्थिति के सताये कामोन्मादित हो रहें थें. परिस्थिति के सताये और मारे ही कहेंगे ना…

क्यूंकि मैं समझ रही थी आज तक उसके पापा ने ना जाने कितनी बार मुझे नाईटी में और पजामे में देखा था, पर कभी भी मुझ पे गंदी नज़र नहीं डाली थी. आज का दिन मगर कुछ और ही था… मन ही मन मैं थोड़ा मुस्कुराई, पर कुछ ना बोली, चुप रही.

इधर पापा का मन बढ़ गया जब उसकी बेटी की ओर से ऐसा कोई इशारा नहीं हुआ जिसके द्वारा वो अपनी असहमति दिखाए. फिर क्या था, उसने एकदम धीरे धीरे मेरी नरम गांड़ में अपना लण्ड ठेलना शुरू किया. उसके खड़े लण्ड का सुपाड़ा तो पहले ही खुल चुका था, सो अपने पानी में गीले भीगे पैंट के अंदर अपना लौड़ा घिसने में उसे ऐसी आनंद की अनुभूति होने लगी की वो बयां नहीं कर सकता था !
88b_065.jpg

अभी उसने तीन चार बार ही अपना लण्ड रगड़ा होगा की बस रुक गई… कोई ठिकाना आया था. वो थोड़ा संभल कर खड़ा हो गया पर उसने देखा की जितने लोग बस से उतरे नहीं उससे ज़्यादा लोग चढ़ गयें, भीड़ और बढ़ गई थी. बस फिर से चल पड़ी.

“अभी दूर है क्या नीलम ?”. पापा ने अपनी बेटी के मूड का जायजा लेने के मकसद से पूछा.

“हाँ पापा … ये बस दूसरे मार्ग से जाती है ना. आपकी बाइक में तो ज़ल्दी हो जाता है.”. मैंने तुरंत जवाब दिया, पर अभी भी पीछे नहीं मुड़ी.

“हाँ …”.

पापा ने इधर उधर आस पास के लोगों को देखा पर सभी अपने में मगन और परेशान खड़े थें… बस में दो अच्छे घराने के बाप बेटी क्या कर रहें थें इसमें शायद ही किसी को रूचि हो !!!

पापा अपना दाया हाथ नीचे सरका के अपने पतलून तक ले गया और पैंट की ज़िप यानि चैन खोल दी. मैं पीछे देख तो नहीं पा रही थो पर वो समझ गई की उसके पापा अब कोई और नई शैतानी करने वाले हैं. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा…

अपने पतलून के अंदर हाथ डाल कर पापा ने अपना खड़ा लण्ड अपने जांघिये से बाहर निकाल लिया और फिर पैंट कि ज़िप वापस लगा ली. अब उसका लण्ड अंडरवीयर से बाहर लेकिन पतलून के अंदर था. उसने ऐसा इसलिये किया था ताकि उसके लण्ड को अपनी बेटी के चूतड़ का ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श मिल सके.
43915-Njc5Mjcz.jpg

अब उसने अपनी बेटी कि गीली कमीज़ उठा कर सीधे उसके सलवार में लिपटी गांड़ में अपना लण्ड सटा दिया और उसकी कमीज़ से वो हिस्सा ढक दिया, जिससे अगर कोई देखे तो सिर्फ ये समझे कि दोनों बस ऐसे ही बाकि यात्रियों कि तरह खड़े हैं !

मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई पब्लिक में अपने पापा कि इस साहसी हरकत को देख कर ! मैंने अपने भीगे बालों और गर्दन पर अपने पापा कि गरम साँसे महसूस कि… पापा अब पहले से और ज़्यादा सट कर खड़ा हो गया था. अब पापा के लण्ड और मेरी गांड में सिर्फ उनके पैन्ट और मेरी स्कर्ट के कपडे का ही अंतर था.

टी शर्ट के अंदर ढकी मेरी गांड़ में पापा अब खुल कर लण्ड घिसने रगड़ने लगा. मेरी मांसल पुष्ट गांड़ कि गोलाईयां उसके लण्ड को इतना सुकून और आनंद देंगी, ये उसे अभी अभी पता चला था ! अपने पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके लण्ड से पापा ने ठेल ठेल कर अपनी बेटी कि स्कर्ट और उसके अंदर पहनी पैंटी को उसकी चूतड़ कि फांक में घुसा दिया था.
91102412_020_3e6c.jpg

मुझेतो मन ही मन हँसी आने लगी अपने पापा कि बेचैनी देख कर. अति कामोत्तेजना में पापा को पता ही नहीं चला कि कब रुकना है और उसने अपना लण्ड अपनी बेटी कि टाईट गांड़ में कुछ ज़्यादा ही घिस दिया था, इस वजह से वो स्खलित होने के करीब पहुंच गया.

उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी गांड़ से हटा लिया और साँस रोक कर अपना माल गिरने से रोकने कि कोशिश करने लगा. इस कोशिश में उसके पेट मे बल पड़ गया, मगर अब काफी देर हो चुकी थी, उसका लण्ड उसके पैंट में एकदम से बड़ा होकर फूल गया और उसका वीर्य निकल आया !!!
88407112_042_f9be.jpg

जब पापा ने देखा कि अब कोई फायदा नहीं तो उसने वापस अपना लण्ड अपनी बेटी कि स्कर्ट में घुसा दिया और झड़ने लगा. उसका गाढ़ा वीर्य पतलून के कपड़े से बाहर रिस रिस कर बहने लगा. मैंने जब अपनी स्कर्ट में गांड़ और जांघो पर गरम गरम मलाई जैसी चिकनी रस के एक के बाद दूसरी धार को गिरता हुआ महसूस किया तो वो समझ गई कि उसके पापा का काम तमाम हो चुका है !!!
21013759_011_88e1.jpg

20 सेकंड के अंदर ही पापा कि पिचकारी पूरी खाली हो गई. उसके पैर अचानक से हुए इस शीघ्रपतन से काँप रहें थें और उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अपनी बेटी के ऊपर गिरने से रोका था. मैंने अपने हाथ से अपनी गांड़ में घुस चुकी पैंटी और स्कर्ट को निकाला और अपने कपड़े ठीक करने लगी. पर पापा का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था !

अभी अभी थोड़ी सी शिथिल हुई मैंने अचानक अपने पापा का दाया हाथ सीधे अपनी चूत पे रेंगता हुआ महसूस किया. पापा चूत स्कर्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा !

79173951_011_d4ae.jpg

पापा अचानक से इतने बेशरम कैसे हो गयें ???… मैं बेचारी ये सोच ही रही थी कि पापा ने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी ऊँगलीयां फंसा दी…

हाय !… पापा पागल हो गयें थें क्या… इतने लोगों के बीच भरी बस में अपनी सगी बेटी को नंगा करना चाहते थें क्या ??? घबरा कर मैंने तुरंत अपने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया. पापा रुक तो गया… उसने अपनी बेटी कि स्कर्ट का नहीं खोला मगर अब अपना हाथ स्कर्ट के अंदर ही डाल दिया.

लेकिन मैंने स्कर्ट इतनी टाईट बाँध रखी थी कि मुश्किल से पापा का हाथ अंदर घुस पाया और पापा बेचारे सिर्फ पैंटी का ऊपरी हिस्से वाला इलास्टिक ही छू पायें थें !!! अब ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा था… मैं एकाएक अपने पापा के तरफ मुड़ कर खड़ी हो गई. पापा को ये अंदेशा नहीं था कि उसकी बेटी अचानक आमने - सामने हो जायेगी. उसने झट से अपनी नज़र घुमा ली.

“पापा ! मम्मी को फोन किया कि हम लेट हो जायेंगे ?”. मैंने पूछा.

पापा समझ गया कि मैं जानबूझ कर ज़ोर से बोल रही थी और “पापा ” शब्द पर ज़्यादा दबाव डाल रही थी ताकि आस पास खड़े लोगों को उनकी हरकतों पे कोई शक ना हो. पापा कि हिम्मत नहीं हुई कि अपनी बेटी से आँख मिला सके… उसने कोई जवाब नहीं दिया… उसका गला सूख रहा था. मैं अब सीधे उसकी आँखों में देख रही थी.

“कितनी भीड़ है पापा … मैं गिर जाउंगी.”. मैंने अचानक अपने दाये हाथ से अपने पापा का कमर पकड़ लिया और बाये हाथ से बस का डंडा पकड़े खड़ी रही.

पापा को और किसी इशारे कि ज़रूरत नहीं थी… वो समझ गया कि उसकी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया था वो उसे अच्छा लगा हो या ना पर इतना तो तय था कि वो नाराज़ नहीं थी… उसकी बेटी के गोल मम्मे अब उसकी छाती से दब रहें थें.
57226461_007_1e27.jpg

उसकी कमीज़ बारिश में भीगे होने के कारण पापा महसूस कर पा रहा था कि मेरे दोनों निप्पल खड़े हो गयें थें. उसे अब बस में अपनी बेटी के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था ! पापा का पैंट मेरी स्कर्ट से ढक गया था…

उसने अंदर हाथ डाल कर अपने पैंट कि ज़िप खोल दी और इस बार अपना लण्ड पतलून से बाहर निकाल लिया. मुझेअपने पापा कि इस हरकत पे अब कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था… सबसे नज़र बचा कर वो दोनों जो कुछ भी कर रहें थें उससे अब मुझेएक अजीब सा यौन किंक मिलने लगा था !!!

पापा का लण्ड अब अपने खुद के पेट और उसकी बेटी के पेट के बीच में दबा पड़ा था और ऊपर से बेटी कि स्कर्ट से पूरी तरह ढका हुआ था. मैंने उसके लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी नाभी में टच होता महसूस किया… अफ़सोस कि अपने पापा का लौड़ा देख नहीं पा रही थी… पर उसके स्पर्श से इतना तो अंदाज़ा लगा लिया था कि पापा का लौड़ा अच्छा खासा बड़ा होगा.

पापा धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपनी बेटी के पेट और नाभी में रगड़ने लगा. अब वो सीधा अपनी बेटी कि नज़रों से नज़रें मिलाये खड़ा था. उसका चेहरा अपनी बेटी के चेहरे के इतने पास था कि उसका तो मन कर रहा था उसे चुम ही ले. चूंकि पापा का लण्ड अभी अभी झड़ा था, सो उसके लण्ड में ज़्यादा गर्मी नहीं आ रहा था पर उसका मन कर रहा था कि वो फिर एक बार माल गिराये.
20422096_158_a0dd.jpg

“अब हम पहुँचने ही वाले हैं पापा …”. मैंने अपने पापा को आगाह किया!!!

पापा ने धीरे से अपना सिर हिला कर हामी भरी और लण्ड घिसता रहा… पर अब इससे बात नहीं बनने वाली थी… उसने तुरंत बेटी कि स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपना लण्ड पकड़ लिया और मूठ मारने लगा ! मैं अपने पापा का साथ देने के लिये उसके कमर को सहलाने लगी और अपनी जांघे पापा के पैरों में सटा दिया.

पापा अपनी बेटी के बदन, उसकी जांघ, उसकी चूचियाँ, सबका स्पर्श करते हुए , मूठ मारने लगा. उसकी मेहनत जल्द ही रंग लाई… उसके लण्ड का पानी छूट पड़ा. वीर्य कि पहली तीन चार धार तो इतनी तेज़ थी कि स्कर्ट के अंदर होती हुई ब्रा तक पहुंच गई.
84263464_016_97c5.jpg

फिर पेट और स्कर्ट पर गिरने लगी और फिर पापा ने झड़ता हुआ लौड़ा तुरंत अपने पैंट में घुसा लिया और बाकि का माल अपने पतलून के अंदर गिराने लगा. उसकी बेटी ने अगर उसकी कमर ना पकड़ी हुई होती तो बेचारा उत्तेजना के मारे गिर ही गया होता ! फिर भी वो थोड़ा सा लड़खड़ा गया तो पास खड़े एक आदमी ने उसे टोका.

“ओ भाई… थोड़ा संतुलन बना के रहो… तब से देख रहा हूं !”

“भाईसाहब… सॉरी !”. पापा कि आवाज गले में अटक गई.

मुझे हँसी आ गई अपने पापा कि हालत देख कर. उनका स्टॉप आ गया था… दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किये, पापा ने अपना शर्ट बाहर कर लिया ताकि उसके पैंट में बना लण्ड का तंबू और वीर्य का गीलापन का पता ना चले और बस से उतर गयें. मौसम हमारे पक्ष में था, अभी भी तेज़ बारिश हो रही थी, सो उसके और उसकी बेटी के कपड़ों पे लगा वीर्य ऐसे ही धुल गया.
70594921_045_c0d2.jpg
 

1112

Well-Known Member
6,356
9,039
188
यही सोचते सोचते शाम हो चुकी थी पापा घर आए तो मैं तैयार होकर बैठी थी क्योकि मां ने कहा था की पापा के साथ मार्किट चली जा कुछ सामान मंगवाना है तो मैं तैयार थी मैंने ब्लैक कलर की मिनी स्कर्ट और रेड कलर का टॉप डाला हुआ था जो की में डेट पर डालती थी
70853643_002_e70f.jpg

थोड़ी देर बाद पापा घर आए और मां ने कहा की बेटी के साथ मार्किट जाकर जरा सामान ले आओ तो पापा ने कहा ठीक है.

मैं पापा के पास आई तो पापा मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक घूरने लगे. मुझे लगा आज फिर डांट पड़ेगी पर पापा ने मुझे मिनी स्कर्ट पहनने पर कुछ भी नहीं कहा था में खुश हो गई की पापा को मैं पसंद हूं.

पापा ने स्माइल करते हुए कहा कि चलें बेटी ?

तो मैंने कहा जी पापा .

पापा तो कार ले कर जाना चाहते थे पर मैंने सोचा की यदि पापा को पटाना है तो स्कूटर ज्यादा ठीक रहेगा तो मैंने पापा को कहा

"पापा! मार्किट में तो बहुत भीड़ होती है. आप स्कूटर ले कर चलें तो आसान रहेगा। और रास्ते में मैं भी स्कूटर चलाना की थोड़ी प्रक्टिस कर लूंगी। बहुत देर से स्कूटर नहीं चलाया है."

पापा मान गए , शायद वो भी चाहते थे क्योंकि स्कूटर पर उन्हें अपनी बेटी के कामुक शरीर के ज्यादा पास होने का मौका मिलता।

खैर हम बाप बेटी स्कूटर पर चल पड़े.
cheerful-couple-enjoying-scooter-ride-islands-riding-red-moto-island-64887109.jpg

हम मार्किट की तरफ निकाल गए पापा की नजरे मेरी मिनी स्कर्ट पर थी मैं अनजान होने का नाटक कर रही थी मुझे लगने लगा कि पापा मेरी तरफ अट्रेक्ट होने लगे है मैं एक्साइटीड़ थी.

अब पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।

यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।

मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।

उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।

उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।
cheerful-young-couple-riding-scooter-town-street-fun-91640407.jpg


मैं तो इस चक्कर में थी कि किसी तरह कुछ मामला आगे बढ़ जाए।

मैंने सोचा कि क्यों ना अभी गरम लोहे पर चोट की जाए.

जब हम घर से थोड़ी दूर आ गए वहां पर खुली सड़क थी और दोनों ओर जंगल ही था. कोई आता जाता भी नहीं था.

मैंने वहां पर कुछ कोशिश करने का सोचा और पापा से कहा

"पापा! यहाँ खुली जगह है. और जंगल है. आप पीछे बैठिये और मुझे थोड़ा स्कूटर चलाने की प्रैक्टिस करने दें. मैंने बहुत दिनों से स्कूटर नहीं चलाया है."

मैं चाहती थी कि जब पापा पीछे बैठे तो उनका लंड मेरी चूत को स्पर्श करे और अगर एक बार ऐसा हो गया तो शायद पापा खुद पर कंट्रोल न रखें और मुझे चोद डालें।

पापा पीछे बैठ गए और मुझे आगे बैठने को कहा तो मैं जान बुझ कर उनसे चिपकी हुई बैठ गई मैंने देखा कि मुझे उनके लंड ने टच नहीं किया था मतलब अभी वो शांत था।
cheerful-young-female-scouter-enjoying-road-trip-her-scooter-32010846.jpg

पापा ने मेरी दोनो बाहों के साइड से स्कूटर का हेंडल पकड़ा और मुझे भी हेंडल पकड़ने को कहा और फिर मुझे स्कूटर सिखाने लगे मैं जान भूज कर अपने बाजू दबा देती थी ताकि पापा के बाजू मेरे मुम्मों को टच करने लगें ऐसा करने से मुझे अब मेहसूस हो रहा था कि पापा का लंड खड़ा है होने लगा है मुझे अपनी पीठ पर कोई चीज़ टच करती महसूस हो रही थी।

अब मैं पापा के लंड पर बैठना चाहती थी तो कोई बहाना ढूंढने लगी।

मैंने एक स्कीम सोची और फिर मैंने अपनी चप्पल नीचे गिरा दी और स्कूटर रोक कर कहा कि पापा मैं चप्पल ले कर आई।

जब मैं चपल लेकर आई तो मैंने चोरी से देखा कि पापा का लंड फफक रहा है। मैं जान भुज कर पापा के पेट से सट कर बैठ गई

और इस बार उनका लंड मेरे चूतड़ों के नीचे दब गए तो पापा बोले नीलम कैसे बैठी हो जरा आगे हो कर बैठो तो मैंने कहा कि आगे तो बहुत ही थोड़ी सी जगह है और स्कूटर चलाने लगी।

पापा का लंड मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा हुआ था फनकार रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मेरी चूत गीली हो रही थी। लेकिन मैं तो अंजान बनी बैठी थी जैसे कुछ पता ही नहीं हो कि उनका लंड मैं दबा के बैठी हूँ।
64894860_008_d209.jpg

मैंने पापा से कहा कि आप हेंडल छोड़ दीजिए मैं चलाती हूं तो मैं धीरे-धीरे स्कूटर चलाने लगी और पापा ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अंजाने में ही उनसे मेरे स्तन टच हो गए तो मुझे लगा कि पापा अपना कंट्रोल खो रहे हैं क्योंकि मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरे मुम्मों को हल्का हल्का टच करने की कोशिश कर रहे थे.

मैं तो यही चाहती थी कि मुझे और क्या चाहिए था। पापा का लंड अभी भी मेरी चूतड़ों के नीचे फंस रहा था। मैंने पापा से कहा कि एक मिनट जरा आप हैंडल को पकड़ लीजिये ताकि मैं जरा ठीक हो कर बैठ जाऊं और मैं थोड़ा और पीछे को हो कर बैठ गई ताकि उनका लंड मेरे नीचे से निकल न पाए।

अब शायद पापा समझ गए थे कि मैं भी उनसे चुदवाना चाहती हूँ, या कम से कम मैं उनके लौड़े का मजा तो ले ही रही हूँ, इस लिए वो भी चुपचाप बैठे रहे और उनका लौड़ा मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा रहा. वो बोले कुछ नहीं और मजा लेते रहे.

उनकी भी भावनाएं मेरे लिए काफी हद तक बदल तो चुकी ही थी, तो उन्होंने भी शायद यही सोचा की मौका मिल रहा है तो लगे हाथ वो भी मजे ले ही लें. और शायद वो भी सोच रहे थे कि इस तरह यदि उनकी प्यारी बेटी गर्म हो जाये तो शायद उन्हें भी इसके आगे यानि मुझे चोद पाने का मौका मिल जाये.

आखिर वो भी तो चूत मारने का कोई मौका ढूंढ ही रहे थे.

अब मेरे दिमाग में तेजी से सोच रहा था कि क्या करें जिस से बात थोड़ी और आगे को बढ़ सके.
1680516040_fuskator-me-p-porn-naked-scooter-40.jpg


अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।
Behtareen update. Mast
 

1112

Well-Known Member
6,356
9,039
188
मैंने पापा से पूछा- पापा, यहां टॉयलेट किधर है, मुझे जाना है।
31165874_009_7c44.jpg


जबकि मुझे पता था कि वहां कोई टॉयलेट नहीं है।

पापा बोले- बेटा, यहां तो कोई टॉयलेट नहीं है। तुम्हें बाहर खुले में ही करना पड़ेगा।

मैंने नखरा दिखाते हुए कहा- ना बाबा ना ... खुले में कैसे करूंगी।

इस पर पापा ने कहा- क्या हुआ बेटा। यहाँ कोई भी तो नहीं है. तुम थोड़ा साइड में स्कूटर ले लो और वहां झाडीओं के पास जा कर कर लो।
74932607_004_91ad.jpg

मैंने कहा- नहीं में वहां अकेली कैसे अकेली जाऊँगी, मुझे डर लग रहा है।

तब पापा ने कहा- कोई बात नहीं बेटा, कोई चिंता की बात नहीं है, अच्छा ऐसा करते हैं की मैं भी पेशाब कर लूँगा. ठण्ड है न तो मुझे भी पेशाब आ रहा है. चलो दोनों बाप बेटी कर लेते हैं.
43562-NjcyODMy.jpg

(पता नहीं पापा को सच में पेशाब आया था या वो भी मेरी तरह कोई चाल चल रहे थे )

हम दोनों एक साइड में चले गए जहाँ कोई नहीं आता था और वो जगह सुनसान थी.

मैंने कहा- आप यहीं रहियेगा, मैं आ रही हूं.

और फिर मैं एक तरफ बढ़ गई और एक ऐसी जगह चुनी जहाँ से पापा मुझे देख सकते थे.

जानबूझ कर मैं ऐसी जगह में पेशाब करना चाह रही थी ताकि मैं इन्हें अपनी गांड दिखा सकूं।

एक झाडी के पास पहुंच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो पापा मुझे देख रहे थे।

मैंने कहा- प्लीज़ जाइयेगा मत!

पापा ने कहा- ठीक है।
फिर मैंने अपनी स्कर्ट को ऊपर कर लिया और पैंटी को नीचे तक खिसका दिया,और जानबूझकर बैठने में थोड़ा टाइम लिया ताकि पापा मेरी गोरी-गोरी गांड देख सकें।
77482837_009_e32f.jpg

और फिर धीरे से बैठ कर पेशाब करने लगी, साथ में मेरी नंगी गांड की नुमाइश करने लगी।

मेरे पेशाब करने में छरछराहट की आवाज भी सन्नाटे में गूँज रही थी।
11597607_001_07b9.jpg

मैंने पापा को आवाज दे कर कहा "पापा आप भी पेशाब कर लीजिये ताकि फिर आप के पेशाब करने में समय खराब न हो.

पापा तो मेरी गांड देखने में मस्त थे, मेरी आवाज़ सुन कर पापा ने भी वहीँ खड़े खड़े अपना पैजामा खोला और वहीं खड़े खड़े अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और पेशाब करने लगे.
43793-Njc3MDA0.jpg

पापा मेरी नंगी गांड देखते हुए पेशाब करने की कोशिश कर रहे थे, पर पापा का लौड़ा तो पहले से ही टाइट था और अब अपनी प्यारी बेटी की गांड के दर्शन करने से और भी टाइट हो चूका था तो उनके लण्ड से पेशाब बहुत ही कम स्पीड से निकल रहा था.

पेशाब करने के बाद मैं खड़ी हो गई और एक बार फिर लेगिंग ऊपर करने में थोड़ा समय लिया ताकि एक बार और पापा मेरी गांड देख सकें।
90731143_012_3e45.jpg

फिर एकदम से पापा की तरफ घूम गयी जैसे मुझे पता ही न हो कि पापा वहीं खड़े हो कर पेशाब कर रहे थे.

पापा का लौड़ा मेरी ओर तना हुआ और तीर की तरह खड़ा था. मेरे अचानक उठने और उनकी तरफ घूम जाने के कारण पापा को लण्ड को पाजामे में करने और ढंकने का मौका ही नहीं मिल पाया.
27646.jpg

वो एकदम से घबरा से गए और लंड को पजामे के अंदर करने की कोशिश करने लगे।

उनका लंड अभी पजामेके बाहर था ही और खड़ा था जिसे वे पजामे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे। पर क्योंकि उनके लौड़े से पेशाब निकल रहा था तो बेचारे उसे एकदम से अंदर भी नहीं कर सकते थे. आप लोग तो जानते ही हैं कि जब आदमी के लंड से पेशाब निकल रहा होता है तो उसे एकदम से बंद नहीं किया जा सकता। तो पापा के लंड से पेशाब थोड़ी देर तक निकलता रहा और मैं उसे देखती रही. पापा पहले तो थोड़ा घबरा रहे थे पर जब उन्होंने मुझे कोई इतराज करते न देखा तो वो भी थोड़ा संतुष्ट हो गए और पूरा पेशाब किया और फिर अपने लौड़े को जो अब तक पूरा तन चूका था, को अंदर किया।
42252-NjUwMDA1.jpg

पर मुझे लगा की पापा इतनी तेजी से फिर भी अपना लण्ड अंदर नहीं कर रहे थे जितना करना चाहिए था.

मैं समझ गई थी कि वे जानबूझकर अपना लंड मुझे दिखा रहे हैं।

तो मैं भी आंखें फाड़े उनका लंड देख रही थी।
373502.jpg

पापा ने जब मुझे कुछ भी बोलते या कोई इतराज करते न देखा तो उन्होंने बड़े ही आराम से और धीरे धीरे अपना लण्ड पूरा समय ले कर पजामे में अंदर किया और इतनी देर मैंने भी पापा के लण्ड के खूब दर्शन किये.

हालाँकि मैंने पहले भी कई बार पापा का लण्ड देखा था पर आज पहली बार पापा के सामने उनकी जानकारी में उनका खड़ा हुआ लौड़ा देखा. और पापा ने भी मुझे लण्ड ठीक से दिखाया था.
368246.jpg

यह निष्चय ही हमारे आपसी संबंधों में एक अगले स्तर की कारवाही थी.

मैंने अपनी गांड दिखा कर और पापा ने अपना लण्ड दिखा कर यह तो बता ही दिया था की हम बाप बेटी असल में क्या चाहते हैं.

बस अब देर थी तो बाप बेटी के संबंधों की समाज की आपसी दिवार गिरने की.

पापा का लण्ड देख कर मैं हल्का मुस्कुरा दी।
240_F_616478922_sj3rMhGC7vaJCCaGVJoYea2px9NqqCkg.jpg

उधर पापा को तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था, मेरी मुस्कराहट देख कर,उनके दिल में यदि कोई छोटा मोटा डर था भी तो निकल गया.

पापा भी मुस्कुरा पड़े।

वो भी समज रहे थे कि मैं और पापा दोनों अब खुलकर मजे लेना चाह रहे हैं।

इस पेशाब करने के वाकये ने माहौल को सेक्सी बना दिया था।


मेरी चूत से भी पानी निकल कर मेरी पैंटी को हल्का-हल्का गीला कर रहा था इसलिए मैं भी शर्म लाज छोड़ कर मजे लेने का मूड आ चुकी थी।
58565598_013_5ad9.jpg
Mast update
 

1112

Well-Known Member
6,356
9,039
188
फिर हमने बस से ही जाने का सोचा।

15 मिनट बीत चुके थें पर बस का कोई नमोनिशान नहीं था.

“उबर बुला लूं क्या ?”.

“रहने दो पापा … बेकार में पैसे खर्च होंगे. बस अभी आ जायेगी.”

मैंने कहा. “उबर पे पैसे बर्बाद ना करके उसी पैसों से आप मुझे एक साड़ी खरीद देना.”

“अच्छा ? दो तीन सौ में कहाँ से आयेगी साड़ी ?”.

“दो तीन सौ में कुछ और पैसे मिला लेना पापा …”. मैं हँसते हुए बोली.

कुछ देर में ही उनकी बस आ गई.

“आजाओ पापा …”.

“इसमें नहीं नीलम … बहुत भीड़ है.”.
crowded-bus-with-people-hanging-outside.jpg

“पापा … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं… चलो.”

जगदीश को आराम से सफर करने कि आदत पड़ी थी, बस में अंदर घुसते ही भीड़ देख कर उसका दिमाग़ घुमने लगा. मैं इन सब में निपुण थी, मैंने अपने पापा का हाथ पकड़ा और भीड़ में जगह बनाती हुई बस के एकदम पीछले हिस्से में चली गई.

भीड़ तो वहाँ भी कम नहीं थी पर बस के पिछले हिस्से में कम से कम आने जाने वाले लोगों कि धक्को से बचा जा सकता था. मुश्किल से खड़े होने कि जगह मिली थी उन्हें, दोनों एक दूसरे के अगल बगल खड़े हो गये, बस चल पड़ी.

“अच्छा नीलम … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं ?”.

“हाँ पापा … तो ? वैसे आज थोड़ी ज़्यादा ही भीड़ है इस बारिश कि वजह से… रोज़ नहीं होता इतना… पर…”.
multigenerational-group-of-travelers-on-a-busy-electric-eco-bus.jpg

मैं जिस जगह खड़ी थी उसके पीछे एक आदमी बड़ा सा बैग लिये खड़ा था. उस बैग कि वजह से मैं ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी और बार बार ठोकर लग रही थी.

“इधर आ जा नीलम .”.

पापा ने जब ये ध्यान किया तो उसने अपने सामने थोड़ी सी जगह बना ली और मैं वहाँ घुस कर अपने पापा के आगे खड़ी हो गई. अब पीठ अपने पापा के तरफ थी और धक्के मुक्के से बचाने के लिये पापा पीछे खड़े थें.

पापा मेरे लिये इतने रक्षात्मक थें ये देख कर मैं मन ही मन मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं. मुझे अपने पापा के साथ नोंक झोंक वाला रिश्ता ही ज़्यादा भाता था, औपचारिकता वाला नहीं !

बाहर बारिश होने कि वजह से दिन के वक़्त भी अच्छा खासा अंधेरा छा गया था, बस कि सारी खिड़कीयां बंद थी तो अंदर बस में भी अंधकार ही था, जो जहाँ था वहीं चुपचाप खड़ा था, हिलने डूलने कि तो जगह ही नहीं थी. कुछ देर कि यात्रा के बाद पापा और मैं अब शिथिल हो गयें थें…
father-and-daughter.jpg

पापा ने अपनी बेटी को अपने सामने खड़े होने कि जगह तो दे दी थी पर वो आरामदायक नहीं हो पा रहा था, मेरा तो उसे पता नहीं. दरअसल, उसकी बेटी का बदन उसके जिस्म से एकदम चिपक गया था, उसपे उसकी बेटी का सलवार कमीज़ और खुद उसका पतलून और शर्ट भीग कर तर बतर हो चुका था.

शुरू में काफी देर तक उसने कोशिश कि, की उसका शरीर अपनी बेटी के बदन से ना सटे, पर पीछे से पड़ रहे लोगों की भीड़ के दबाव को वो ज़्यादा देर तक रोक नहीं पाया. मुसीबत तब हुई जब आखिरकार पापा के कमर का नीचला हिस्सा उसकी बेटी के नितंब में जा सटा.
38940511_008_876b.jpg

इतना तो फिर भी ठीक था पर सबसे शर्मनाक स्थिति तब आई जब पापा की टांगों के बीच वाला हिस्सा उसकी बेटी की कमीज़ और सलवार में लिपटी पानी से गीली हुई चूतड़ों के मध्य की पतली दरार के बीचो बीच फंस गया !

पापा बस यही सोच रहा था की उसकी बेटी पता नहीं क्या सोच रही होगी, शायद उसे कुछ महसूस ही ना हो रहा हो, ना ही हो तो बेहतर है ! पापा की कमर और दोनों जांघो वाला हिस्सा अब मैं के गांड़ की दोनों गोल उभारों में सट गया था जबकि उसका लण्ड वाला हिस्सा उन दो गोल गुंबदो के बीच घुस गया था !
85294925_065_df20.jpg

अनुभूति तो आखिर अनुभूति ही होती है जो इंसान महसूस करता है और जिसका तर्क हर वक़्त ना खोजना संभव है और ना समझना. पापा को भी जब किसी नरम मुलायम गद्दे जैसी अपनी बेटी के गांड़ का उभार अनुभव हुआ तो ना चाहते हुए भी, या फिर यूँ कहें, की उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसका लण्ड उसकी पैंट में फूलने लगा !!!

पानी में पूरी तरह से भीगे होने के कारण उसके पतलून के अंदर उसका अंडरवीयर भी ढीला और लचीला हो गया था, जिसकी वजह से उसका अंडरवीयर ज़्यादा देर उसके लण्ड के बढ़ते उभार और आकार को दबा नहीं पाया. उसका लण्ड उसके जांघिये में नीचे की ओर मुड़े हुए ही खड़ा होने लगा!
90685136_027_0697.jpg

मेरी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी. परिस्थिति हाथ से बाहर जाता देख पापा ने धीरे से अपनी कमर पीछे खिसका कर अपने लण्ड को अपनी बेटी की गांड़ की दरारों से बाहर निकाला, और थोड़ा पहलू होने की कोशिश की ताकि वो उसकी गांड़ से ना सटे.

पर इस प्रयास में चूंकि पीछे से भीड़ का काफी दबाव था, उसका लण्ड बाहर तो निकला पर इस बार वापस जाकर मेरी बाई गांड़ के गुंबद पे टिक गया. और ये मैंने बहुत ही अच्छे से बिना किसी गलतफहमी के महसूस भी किया !!!
91102412_020_3e6c.jpg

“आप ठीक है न पापा ? मैं थोड़ा हटूं क्या ?”. मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर बस इतना सा घुमा कर पूछा की उसकी आँख पापा के आँख से ना मिले.

“हाँ!”. पापा ने जितना हो सका अपनी आवाज को स्वाभाविक बना कर कहा, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.

मैंने अपने पापा का लण्ड साफ अपनी गांड़ पर महसूस कर लिया था, थोड़ा अजीब लगा पर मैं जानती थी की ये जान-बूझकर नहीं था. मैंने अपनी गांड़ थोड़ी सी हिला कर ठीक करना चाहि पर उससे मामला और बिगड़ गया !
58751_16.jpg

मेरी इस हरकत से पापा का लण्ड घिसट कर वापस मेरी गांड़ की दरार में फिट हो गया और इस बार पापा का नीचे मुड़ा हुआ लण्ड जांघिये में थोड़ी सी जगह पाकर सीधे ऊपर की ओर उठ गया !!!

पापा और मैं इतने सालों से एक साथ रह रहें थें, पापा ने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था जैसा वो अब कर रहा था. ऐसी बात नहीं है की वो कभी अपनी बेटी के इतना करीब ना गया हो, इससे ज़्यादा करीबी और क्या हो सकती है.

पर हमेशा से एक सामान्य बाप बेटी रहे इन दोनों के बीच अभी जो भी हो रहा था, ऐसा क्यूं हो रहा था !! दोनों बाप बेटी सामने ऊपर की तरफ बस का rod पकड़े खड़े थें. पापा का मुँह अपनी बेटी के भीगे खुले बालों के ठीक पीछे था…

उसके बालों से आ रही बारिश के पानी और शैम्पू की घुली मिली महक ने मानो बेटी और उसके बीच का संकरा फासला कम कर दिया था. अभी तक तो पापा असमंजस में था की क्या हो रहा है और वो क्या करे और क्या ना करे, पर अब जब उसका लण्ड पूरी तरह से टाईट ठनक कर खड़ा हो गया तो उसने समझ लिया की वो अपनी ही सगी बेटी के बदन से सट कर कामोत्तेजित हो रहा था !!!
48061487_008_af37.jpg

अब पापा के पास बस एक ही रास्ता था… ये टेस्ट करना की उसकी बेटी क्या चाहती है, अगर वो तिनका भर भी आपत्ती दिखायेगी तो उसे तुरंत खुद को रोक लेना होगा. पापा ने अपनी कमर हल्के से सामने की ओर बढ़ाई तो मेरी गांड़ के बीच रगड़ खा कर उसके लण्ड का चमड़ा पीछे खिसक कर खुल गया और उसका मोटा सुपाड़ा बाहर निकल आया. पापा का लंड इतना फूल गया था कि वो उनकी अंडरवियर टाइट हो रहा था .
43915-Njc5Mjgw.jpg

अब पापा अपने भीगे पतलून में अपने खड़े लौड़े का सुपाड़ा खोले अपनी बेटी की गोल गदराई चूतड़ से टिका खड़ा था !!! मेरा रहा सहा शक भी अब जाता रहा की जो कुछ भी हो रहा था वो अनजाने में हो रहा था. वो समझ गई की उसके पापा बेचारे परिस्थिति के सताये कामोन्मादित हो रहें थें. परिस्थिति के सताये और मारे ही कहेंगे ना…

क्यूंकि मैं समझ रही थी आज तक उसके पापा ने ना जाने कितनी बार मुझे नाईटी में और पजामे में देखा था, पर कभी भी मुझ पे गंदी नज़र नहीं डाली थी. आज का दिन मगर कुछ और ही था… मन ही मन मैं थोड़ा मुस्कुराई, पर कुछ ना बोली, चुप रही.

इधर पापा का मन बढ़ गया जब उसकी बेटी की ओर से ऐसा कोई इशारा नहीं हुआ जिसके द्वारा वो अपनी असहमति दिखाए. फिर क्या था, उसने एकदम धीरे धीरे मेरी नरम गांड़ में अपना लण्ड ठेलना शुरू किया. उसके खड़े लण्ड का सुपाड़ा तो पहले ही खुल चुका था, सो अपने पानी में गीले भीगे पैंट के अंदर अपना लौड़ा घिसने में उसे ऐसी आनंद की अनुभूति होने लगी की वो बयां नहीं कर सकता था !
88b_065.jpg

अभी उसने तीन चार बार ही अपना लण्ड रगड़ा होगा की बस रुक गई… कोई ठिकाना आया था. वो थोड़ा संभल कर खड़ा हो गया पर उसने देखा की जितने लोग बस से उतरे नहीं उससे ज़्यादा लोग चढ़ गयें, भीड़ और बढ़ गई थी. बस फिर से चल पड़ी.

“अभी दूर है क्या नीलम ?”. पापा ने अपनी बेटी के मूड का जायजा लेने के मकसद से पूछा.

“हाँ पापा … ये बस दूसरे मार्ग से जाती है ना. आपकी बाइक में तो ज़ल्दी हो जाता है.”. मैंने तुरंत जवाब दिया, पर अभी भी पीछे नहीं मुड़ी.

“हाँ …”.

पापा ने इधर उधर आस पास के लोगों को देखा पर सभी अपने में मगन और परेशान खड़े थें… बस में दो अच्छे घराने के बाप बेटी क्या कर रहें थें इसमें शायद ही किसी को रूचि हो !!!

पापा अपना दाया हाथ नीचे सरका के अपने पतलून तक ले गया और पैंट की ज़िप यानि चैन खोल दी. मैं पीछे देख तो नहीं पा रही थो पर वो समझ गई की उसके पापा अब कोई और नई शैतानी करने वाले हैं. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा…

अपने पतलून के अंदर हाथ डाल कर पापा ने अपना खड़ा लण्ड अपने जांघिये से बाहर निकाल लिया और फिर पैंट कि ज़िप वापस लगा ली. अब उसका लण्ड अंडरवीयर से बाहर लेकिन पतलून के अंदर था. उसने ऐसा इसलिये किया था ताकि उसके लण्ड को अपनी बेटी के चूतड़ का ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श मिल सके.
43915-Njc5Mjcz.jpg

अब उसने अपनी बेटी कि गीली कमीज़ उठा कर सीधे उसके सलवार में लिपटी गांड़ में अपना लण्ड सटा दिया और उसकी कमीज़ से वो हिस्सा ढक दिया, जिससे अगर कोई देखे तो सिर्फ ये समझे कि दोनों बस ऐसे ही बाकि यात्रियों कि तरह खड़े हैं !

मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई पब्लिक में अपने पापा कि इस साहसी हरकत को देख कर ! मैंने अपने भीगे बालों और गर्दन पर अपने पापा कि गरम साँसे महसूस कि… पापा अब पहले से और ज़्यादा सट कर खड़ा हो गया था. अब पापा के लण्ड और मेरी गांड में सिर्फ उनके पैन्ट और मेरी स्कर्ट के कपडे का ही अंतर था.

टी शर्ट के अंदर ढकी मेरी गांड़ में पापा अब खुल कर लण्ड घिसने रगड़ने लगा. मेरी मांसल पुष्ट गांड़ कि गोलाईयां उसके लण्ड को इतना सुकून और आनंद देंगी, ये उसे अभी अभी पता चला था ! अपने पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके लण्ड से पापा ने ठेल ठेल कर अपनी बेटी कि स्कर्ट और उसके अंदर पहनी पैंटी को उसकी चूतड़ कि फांक में घुसा दिया था.
91102412_020_3e6c.jpg

मुझेतो मन ही मन हँसी आने लगी अपने पापा कि बेचैनी देख कर. अति कामोत्तेजना में पापा को पता ही नहीं चला कि कब रुकना है और उसने अपना लण्ड अपनी बेटी कि टाईट गांड़ में कुछ ज़्यादा ही घिस दिया था, इस वजह से वो स्खलित होने के करीब पहुंच गया.

उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी गांड़ से हटा लिया और साँस रोक कर अपना माल गिरने से रोकने कि कोशिश करने लगा. इस कोशिश में उसके पेट मे बल पड़ गया, मगर अब काफी देर हो चुकी थी, उसका लण्ड उसके पैंट में एकदम से बड़ा होकर फूल गया और उसका वीर्य निकल आया !!!
88407112_042_f9be.jpg

जब पापा ने देखा कि अब कोई फायदा नहीं तो उसने वापस अपना लण्ड अपनी बेटी कि स्कर्ट में घुसा दिया और झड़ने लगा. उसका गाढ़ा वीर्य पतलून के कपड़े से बाहर रिस रिस कर बहने लगा. मैंने जब अपनी स्कर्ट में गांड़ और जांघो पर गरम गरम मलाई जैसी चिकनी रस के एक के बाद दूसरी धार को गिरता हुआ महसूस किया तो वो समझ गई कि उसके पापा का काम तमाम हो चुका है !!!
21013759_011_88e1.jpg

20 सेकंड के अंदर ही पापा कि पिचकारी पूरी खाली हो गई. उसके पैर अचानक से हुए इस शीघ्रपतन से काँप रहें थें और उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अपनी बेटी के ऊपर गिरने से रोका था. मैंने अपने हाथ से अपनी गांड़ में घुस चुकी पैंटी और स्कर्ट को निकाला और अपने कपड़े ठीक करने लगी. पर पापा का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था !

अभी अभी थोड़ी सी शिथिल हुई मैंने अचानक अपने पापा का दाया हाथ सीधे अपनी चूत पे रेंगता हुआ महसूस किया. पापा चूत स्कर्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा !

79173951_011_d4ae.jpg

पापा अचानक से इतने बेशरम कैसे हो गयें ???… मैं बेचारी ये सोच ही रही थी कि पापा ने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी ऊँगलीयां फंसा दी…

हाय !… पापा पागल हो गयें थें क्या… इतने लोगों के बीच भरी बस में अपनी सगी बेटी को नंगा करना चाहते थें क्या ??? घबरा कर मैंने तुरंत अपने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया. पापा रुक तो गया… उसने अपनी बेटी कि स्कर्ट का नहीं खोला मगर अब अपना हाथ स्कर्ट के अंदर ही डाल दिया.

लेकिन मैंने स्कर्ट इतनी टाईट बाँध रखी थी कि मुश्किल से पापा का हाथ अंदर घुस पाया और पापा बेचारे सिर्फ पैंटी का ऊपरी हिस्से वाला इलास्टिक ही छू पायें थें !!! अब ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा था… मैं एकाएक अपने पापा के तरफ मुड़ कर खड़ी हो गई. पापा को ये अंदेशा नहीं था कि उसकी बेटी अचानक आमने - सामने हो जायेगी. उसने झट से अपनी नज़र घुमा ली.

“पापा ! मम्मी को फोन किया कि हम लेट हो जायेंगे ?”. मैंने पूछा.

पापा समझ गया कि मैं जानबूझ कर ज़ोर से बोल रही थी और “पापा ” शब्द पर ज़्यादा दबाव डाल रही थी ताकि आस पास खड़े लोगों को उनकी हरकतों पे कोई शक ना हो. पापा कि हिम्मत नहीं हुई कि अपनी बेटी से आँख मिला सके… उसने कोई जवाब नहीं दिया… उसका गला सूख रहा था. मैं अब सीधे उसकी आँखों में देख रही थी.

“कितनी भीड़ है पापा … मैं गिर जाउंगी.”. मैंने अचानक अपने दाये हाथ से अपने पापा का कमर पकड़ लिया और बाये हाथ से बस का डंडा पकड़े खड़ी रही.

पापा को और किसी इशारे कि ज़रूरत नहीं थी… वो समझ गया कि उसकी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया था वो उसे अच्छा लगा हो या ना पर इतना तो तय था कि वो नाराज़ नहीं थी… उसकी बेटी के गोल मम्मे अब उसकी छाती से दब रहें थें.
57226461_007_1e27.jpg

उसकी कमीज़ बारिश में भीगे होने के कारण पापा महसूस कर पा रहा था कि मेरे दोनों निप्पल खड़े हो गयें थें. उसे अब बस में अपनी बेटी के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था ! पापा का पैंट मेरी स्कर्ट से ढक गया था…

उसने अंदर हाथ डाल कर अपने पैंट कि ज़िप खोल दी और इस बार अपना लण्ड पतलून से बाहर निकाल लिया. मुझेअपने पापा कि इस हरकत पे अब कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था… सबसे नज़र बचा कर वो दोनों जो कुछ भी कर रहें थें उससे अब मुझेएक अजीब सा यौन किंक मिलने लगा था !!!

पापा का लण्ड अब अपने खुद के पेट और उसकी बेटी के पेट के बीच में दबा पड़ा था और ऊपर से बेटी कि स्कर्ट से पूरी तरह ढका हुआ था. मैंने उसके लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी नाभी में टच होता महसूस किया… अफ़सोस कि अपने पापा का लौड़ा देख नहीं पा रही थी… पर उसके स्पर्श से इतना तो अंदाज़ा लगा लिया था कि पापा का लौड़ा अच्छा खासा बड़ा होगा.

पापा धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपनी बेटी के पेट और नाभी में रगड़ने लगा. अब वो सीधा अपनी बेटी कि नज़रों से नज़रें मिलाये खड़ा था. उसका चेहरा अपनी बेटी के चेहरे के इतने पास था कि उसका तो मन कर रहा था उसे चुम ही ले. चूंकि पापा का लण्ड अभी अभी झड़ा था, सो उसके लण्ड में ज़्यादा गर्मी नहीं आ रहा था पर उसका मन कर रहा था कि वो फिर एक बार माल गिराये.
20422096_158_a0dd.jpg

“अब हम पहुँचने ही वाले हैं पापा …”. मैंने अपने पापा को आगाह किया!!!

पापा ने धीरे से अपना सिर हिला कर हामी भरी और लण्ड घिसता रहा… पर अब इससे बात नहीं बनने वाली थी… उसने तुरंत बेटी कि स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपना लण्ड पकड़ लिया और मूठ मारने लगा ! मैं अपने पापा का साथ देने के लिये उसके कमर को सहलाने लगी और अपनी जांघे पापा के पैरों में सटा दिया.

पापा अपनी बेटी के बदन, उसकी जांघ, उसकी चूचियाँ, सबका स्पर्श करते हुए , मूठ मारने लगा. उसकी मेहनत जल्द ही रंग लाई… उसके लण्ड का पानी छूट पड़ा. वीर्य कि पहली तीन चार धार तो इतनी तेज़ थी कि स्कर्ट के अंदर होती हुई ब्रा तक पहुंच गई.
84263464_016_97c5.jpg

फिर पेट और स्कर्ट पर गिरने लगी और फिर पापा ने झड़ता हुआ लौड़ा तुरंत अपने पैंट में घुसा लिया और बाकि का माल अपने पतलून के अंदर गिराने लगा. उसकी बेटी ने अगर उसकी कमर ना पकड़ी हुई होती तो बेचारा उत्तेजना के मारे गिर ही गया होता ! फिर भी वो थोड़ा सा लड़खड़ा गया तो पास खड़े एक आदमी ने उसे टोका.

“ओ भाई… थोड़ा संतुलन बना के रहो… तब से देख रहा हूं !”

“भाईसाहब… सॉरी !”. पापा कि आवाज गले में अटक गई.


मुझे हँसी आ गई अपने पापा कि हालत देख कर. उनका स्टॉप आ गया था… दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किये, पापा ने अपना शर्ट बाहर कर लिया ताकि उसके पैंट में बना लण्ड का तंबू और वीर्य का गीलापन का पता ना चले और बस से उतर गयें. मौसम हमारे पक्ष में था, अभी भी तेज़ बारिश हो रही थी, सो उसके और उसकी बेटी के कपड़ों पे लगा वीर्य ऐसे ही धुल गया.
70594921_045_c0d2.jpg
Bhout hi kammuk update hai.
 
Top