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हम मार्किट पहुंच गए थे वहां बहुत ही भीड़ थी तो हमने स्कूटर को पार्किंग में लगा दिया और भीड़ में चले गए बाजार में सेल लगने के कारण बहुत ही ज्यादा भीड़ थी
मैं आगे चल रही थी पापा पीछे चल रहे थे अचानक से भीड़ में धक्का मुक्की होने लगी हम भीड़ में फंस गए थे मुझे आगे से धक्के आ रहे थे और पापा को पीछे से धक्के लग रहे थे धक्का लगने के कारण पापा मेरे पीछे से टच हो गए थे उनका लंड मेरी गांड में टच हो गया.
मैं धक्का लगने का नाटक करते हुए पीछे की तरफ अपने आप धकेलने लगी और पापा के लंड का स्पर्श पा लिया . लंड मेरी गांड के साथ सट गया था और भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को पता नहीं चल रहा था अब मैं और पापा एक दूसरे के साथ साथ आ गए थे.
मेरा पूरा जिस्म मेरे पापा के सीने से लग रहा था मुझे मज़ा रहा था और मैं हॉट हो रही थी. और पापा का लंड भी खड़ा सख्त हो रहा था मैं पापा को और सेड्यूस करने लगी और अपनी गांड को हिलाने लगी अब मेरी गांड पापा के लंड को घिस रही थी और मैं अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी.
पापा का भी कण्ट्रोल लूस हो रहा था और पापा भी अपना लंड मेरी गांड पर लगा रहे थे. अचानक मैंने महसूस किया की पापा के दोनों हाथ मेरी कमर पर है उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा हुआ है. मैं हैरान हो गई थी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पापा ने अपना कण्ट्रोल खो दिया था और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी गांड को ऊपर से सहलाने लगे.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन मैं ऐसे रियेक्ट कर रही थी की जैसे भीड़ बहुत ज्यादा है मैं खुश हो गई थी की आखिर मैंने पापा को सेड्यूस कर ही दिया. वो अपने साथ से मेरी गांड सहलाये जा रहे थे. थोड़ी देर हमने मज़े लिए उसके बाद वो नार्मल हो गए और हम भीड़ में से निकल गए.
हम मार्किट में शॉपिंग करने लगे. लेकिन पापा ने मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की. हम शॉपिंग करने के बाद घर आ रहे थे तो पापा ने मुझे कहा की नीलम जो भी हुआ उसको भूल जाओ और किसी को मत बताना .
तो मैंने कहा “कोई बात नहीं पापा. डोंट वरी. ऐसी गलतिया हो जाती है. आखिर हो तो आप भी एक मर्द.”
मैंने ये कहकर एक सेक्सी स्माइल देकर ग्रीन सिग्नल दे दिया पापा भी मुस्कुराये और कहा की “बेटी अब समझदार हो गई है.”
थोड़ी देर के बाद हम दोनों स्कूटर के पास आये घर जाने के लिए, तो देखा कि स्कूटर का अगला पहिया पंचर हो गया था.
पास में कोई दूकान नहीं थी. तो पापा ने एक जान पहचान वाले दूकानदार के पास स्कूटर रख दिया और कहा कि वो उसे कल ले जायेंगे.
फिर हमने घर जाने के लिए कुछ और इंतजाम करने का सोच. मैं तो नाराज़ थी क्योंकि मैं सोच रही थी कि वापिसी में भी पापा से कुछ मजे ले लुंगी और अपनी कार्यवाही को कुछ और आगे ले जाउंगी पर सब गड़बड़ हो गया.
मैं आगे चल रही थी पापा पीछे चल रहे थे अचानक से भीड़ में धक्का मुक्की होने लगी हम भीड़ में फंस गए थे मुझे आगे से धक्के आ रहे थे और पापा को पीछे से धक्के लग रहे थे धक्का लगने के कारण पापा मेरे पीछे से टच हो गए थे उनका लंड मेरी गांड में टच हो गया.
मैं धक्का लगने का नाटक करते हुए पीछे की तरफ अपने आप धकेलने लगी और पापा के लंड का स्पर्श पा लिया . लंड मेरी गांड के साथ सट गया था और भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को पता नहीं चल रहा था अब मैं और पापा एक दूसरे के साथ साथ आ गए थे.
मेरा पूरा जिस्म मेरे पापा के सीने से लग रहा था मुझे मज़ा रहा था और मैं हॉट हो रही थी. और पापा का लंड भी खड़ा सख्त हो रहा था मैं पापा को और सेड्यूस करने लगी और अपनी गांड को हिलाने लगी अब मेरी गांड पापा के लंड को घिस रही थी और मैं अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी.
पापा का भी कण्ट्रोल लूस हो रहा था और पापा भी अपना लंड मेरी गांड पर लगा रहे थे. अचानक मैंने महसूस किया की पापा के दोनों हाथ मेरी कमर पर है उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा हुआ है. मैं हैरान हो गई थी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पापा ने अपना कण्ट्रोल खो दिया था और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी गांड को ऊपर से सहलाने लगे.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन मैं ऐसे रियेक्ट कर रही थी की जैसे भीड़ बहुत ज्यादा है मैं खुश हो गई थी की आखिर मैंने पापा को सेड्यूस कर ही दिया. वो अपने साथ से मेरी गांड सहलाये जा रहे थे. थोड़ी देर हमने मज़े लिए उसके बाद वो नार्मल हो गए और हम भीड़ में से निकल गए.
हम मार्किट में शॉपिंग करने लगे. लेकिन पापा ने मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की. हम शॉपिंग करने के बाद घर आ रहे थे तो पापा ने मुझे कहा की नीलम जो भी हुआ उसको भूल जाओ और किसी को मत बताना .
तो मैंने कहा “कोई बात नहीं पापा. डोंट वरी. ऐसी गलतिया हो जाती है. आखिर हो तो आप भी एक मर्द.”
मैंने ये कहकर एक सेक्सी स्माइल देकर ग्रीन सिग्नल दे दिया पापा भी मुस्कुराये और कहा की “बेटी अब समझदार हो गई है.”
थोड़ी देर के बाद हम दोनों स्कूटर के पास आये घर जाने के लिए, तो देखा कि स्कूटर का अगला पहिया पंचर हो गया था.
पास में कोई दूकान नहीं थी. तो पापा ने एक जान पहचान वाले दूकानदार के पास स्कूटर रख दिया और कहा कि वो उसे कल ले जायेंगे.
फिर हमने घर जाने के लिए कुछ और इंतजाम करने का सोच. मैं तो नाराज़ थी क्योंकि मैं सोच रही थी कि वापिसी में भी पापा से कुछ मजे ले लुंगी और अपनी कार्यवाही को कुछ और आगे ले जाउंगी पर सब गड़बड़ हो गया.