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Erotica नियति से बंधी नीतू

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निधि को टू-पीस ब्रा पैंटी में देखने के बाद से दीपक की आंखों के सामने सिर्फ उसका ही चित्र उभर आता था। उसकी अधनंगी देह को याद करते हुए जटका मारने की श्रृंखला जारी रखते हुए वह थक चुका था। जितनी भी कोशिश करता, उसके मन में मिटने न देने वाली छाप छोड़कर अपनी छाप जमा चुकी निधि की अधनंगता हर पल उसे उसके नाम पर जटका मारने के लिए प्रेरित करती रहती थी। इसके साथ ही निधि की प्रकृति प्रदत्त सौंदर्य की खान जैसी सफेद गोल कूल्हों को पूरी तरह नंगे देखने वाले वे दोनों घटिया व्यक्तित्व वाले बूढ़े इस लोक की यात्रा समाप्त करके चले गए थे और उनका अंतिम संस्कार पूरा हो चुका था। निधि ने अनजाने में ही अपने घर की लड़कियों को काम की दृष्टि से देखने वाले उन दोनों बूढ़ों को भी मुक्ति दे दी थी।

मैसूर सिल्क कारखाने में लाखों रुपये की साड़ियां...रेशमी धोती...वल्ली खरीदकर लॉज लौटे तो......

निकिता......आंटी, ये क्या है इतने सारे बैग? आप सब शॉपिंग गए थे क्या?

प्रीति......हमारे साथ तुम सबके लिए आने वाले गौरी उत्सव के लिए मैसूर सिल्क साड़ियां लाए हैं। साड़ी पहनोगी ना?

नमिता......आंटी, दीदी को साड़ी पहनना बहुत पसंद है, लेकिन मुझे पहनना भी नहीं आता।

रश्मि.....हां मम्मा, मुझे भी साड़ी पहनना नहीं आता।

नीतु.....हम इसीलिए हैं ना मम्मा, तुम सबको साड़ी पहनना सिखा देंगे, ठीक है?

नयन.......आंटी, पहले बेंगलुरु में निधि दीदी और निकिता दीदी ही शॉपिंग गई थीं, अब यहां भी आप हमें छोड़कर चले गए। हमें कोई शॉपिंग पर नहीं ले जाता।

हरीश......नाराज मत हो, कल शाम को ही तुम सबको शॉपिंग ले जाने की जिम्मेदारी मेरी है। तू क्यों उदास है?

सुरेश.....और क्या अप्पा, मेरे भैय्या को कोई पूछता ही नहीं। सारी लड़कियों के लिए ही, हम दोनों के लिए एक-दो पैंट और दो शर्ट ला दिए तो काम खत्म।

रेवंत हंसते हुए......सुरेश, कल तुम्हारे अप्पा इन्हें अपने साथ ले जाएं, मैं, तू और गिरीश चलेंगे।

सुरेश खुश होकर......ओके मामा।

नीतु.....निधि—दृष्टि दिखाई नहीं दे रही।

रश्मि.....मम्मा, दीदी और दृष्टि दोनों सो रही हैं।

प्रीति....तुम सब जाकर रेस्ट करो, शाम को के.आर.एस.।

शाम को सब विश्वप्रसिद्ध वृंदावन गार्डन्स घूमने गए और वहां के अद्भुत दृश्यों को आंखें भरकर निहार रहे थे। निशा सबसे ज्यादा शोर मचाती हुई फुल मस्ती में थी तो दंपति बेटी की खुशी देखकर खुद भी खुश हो रहे थे। वहां से मैसूर लौटकर एक सुप्रसिद्ध रेस्तरां में घुसे तो......

दृष्टि.....दीदी, पहले चाट्स मंगवाएं?

निधि....मुझे इन चाट्स के बारे में कुछ पता नहीं, कुछ नाम सुन रखे हैं बस, लेकिन अब तक खाए नहीं।

सुरेश.....दीदी, मुझे पता है मसालापुरी...पानीपुरी, मुझे तो मसालापुरी ही मंगवा दो।

नयन......बंदर, सिर्फ मसालापुरी ही पता है क्या? कितनी वैरायटी की चाट्स होती हैं, पता है?

सुरेश.....मुझे वो सब नहीं पता, मैंने तो सिर्फ मसालापुरी....पानीपुरी ही खाई हैं।

बड़ी बेटी और छोटे बेटे की बात सुनकर नीतु की आंखों से दो बूंद आंसू निकल आए, तुरंत पोंछ लिए, फिर भी हरीश ने पत्नी के आंसू नोटिस करके भी चुप रहा।

प्रीति......अब हर तरह की चाट्स एक-एक करके मंगवाते हैं, सब टेस्ट करके जिसे जो पसंद आए वही उसे मंगवाएंगे। हमारे गांव में ये सब मिलता है, कहां मिलता है मैं दिखा दूंगी, ओके।

बच्चे सब चाट्स चखते हुए अपनी पसंद वाली बार-बार मंगवा रहे थे। मम्मा की गोद में बैठी निशा अपनी आंखों को जो पसंद आता सिर्फ वही मम्मा से खिलाती रही, कोई और चीज सामने रखने पर मुंह इधर-उधर घुमाकर मना कर देती।

रूम में बेटी को सुलाकर उसके पास बैठी पत्नी के गाल सहलाते हुए......

हरीश......रेस्तरां में तेरी आंखों से आंसू क्यों आए थे?

नीतु पति की तरफ देखकर......आपने सुना नहीं? निधि छोटी उम्र से ही आश्रम के जीवन में रही, इसलिए उसे इन चाट्स के बारे में पता नहीं। लेकिन सुरेश हमारे साथ रहते हुए भी हमने उसे कभी कोई नई तरह का नाश्ता-खाने की चीजें नहीं खिलाईं। उसने कहा “मैंने तो सिर्फ मसालापुरी ही खाई है, बाकी के बारे में कुछ नहीं पता” तो मुझे कितना दुख हुआ, पता है?

हरीश......हां, पैसे में हम आराम से थे फिर भी बच्चों के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन आगे ऐसा नहीं होगा। जीवन में वे जो इच्छा करें वही करें। उनका चुना रास्ता सही है या गलत, सिर्फ इतना ध्यान रखें और उनका सहारा बनकर खड़े रहें। अब चिंता छोड़कर सो जा, पुरानी बातें सोच-सोचकर दुखी मत हो।

नीतु......आप भी सो जाओ, कल तुम्हारी यह चिन्नू हम सबको खूब सर्कस करवाएगी।



अगले दिन नाश्ता करके सब चिड़ियाघर गए तो अप्पा की बाहों में बैठी निशा भैय्या-दीदियों के साथ शैतानी करती हुई हंस रही थी। पहले एक्वेरियम के अंदर कई रंग-बिरंगी मछलियां देखकर बहुत हैरान हुई निशा अप्पा से अपनी-अपनी सवाल पूछती हुई कुतूहल से उन्हें देख रही थी।

गिरीश....मम्मा, क्या हम घर में भी एक एक्वेरियम लाकर रख सकते हैं?

दृष्टि.....हां आंटी, छोटा ही सही, एक ले आएं, मुझे भी बहुत इच्छा है।

नीतु......ठीक है, तुम्हें जो पसंद हो वही ले लेना, लेकिन सफाई भी तुम्हें ही करनी होगी।

रश्मि.....ओके मम्मा, हम सब मिलकर करेंगे।

एक्वेरियम देखकर वहां से आगे कई तरह के पक्षी देखने के बाद पांच मोरों वाले जगह पर आकर रुके। कोई वन अधिकारी अपने दोनों बड़े बच्चों को मोरों के पास खड़ा करके फोटो खींच रहा था तो निशा अप्पा के गाल सहलाते हुए......

निशा....पप्पा, मैं वहां जाऊंगी....कहकर मोर की तरफ उंगली दिखाई।

हरीश....नहीं कंद, वहां नहीं जाना, यहां जानवरों को छूना मना है, गलती से अंकल डांटेंगे।

निशा सिर हिलाते हुए......मैं जाऊंगी पप्पा, मुझे डांटेंगे....

हरीश.....हां कंद, नहीं जाना, यहीं से देख।

अप्पा की बात से निशा उदास हो गई लेकिन मोरों को देखकर “आ...आ..” कहकर बुला रही थी, जिसे उनके बगल में खड़े दंपति ने नोटिस किया।

महिला.....तू भी मोर के पास जाना चाहती है पुट्टी? तेरा नाम क्या है?

निशा उनकी तरफ मुड़कर हां नहीं कहकर सिर हिलाई और मोर की तरफ उंगली दिखाते हुए......मैं नहीं जाऊंगी, मुझे डांटेंगे.... कहने पर उस महिला के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

पुरुष......आ पुट्टी, मैं तुझे ले चलता हूं।

हरीश......सर, बेवजह आपको परेशानी, चिड़ियाघर के अंदर किसी भी जानवर के पास जाना मना है। इसे कोई भी जानवर-पक्षी दिख जाए तो उनके पास जाना चाहती है।

वह व्यक्ति हंसते हुए......सर, आपने तो अपने दोनों बच्चों को मोर के पास ले जा रखा है।

हरीश......सर, वे वन अधिकारी लगते हैं।

व्यक्ति......मेरा नाम प्रवीण है, मैं भी इसी वन विभाग में उच्च अधिकारी हूं। चिंता मत करो, आ पुट्टी, हम चलते हैं।

निशा अप्पा की तरफ देखी, उसने हां कहा तो उस व्यक्ति का हाथ पकड़कर मोरों की तरफ कदम बढ़ाया। थोड़ी दूर खड़ी नीतु पति के पास आई और क्या कहा तो हरीश की जगह......

महिला......तुम्हारी बेटी बहुत प्यारी है मम्मा, चिंता मत करो, मेरे पति भी वन अधिकारी हैं, तुम्हारी बेटी को मोरों के पास ले जा रहे हैं। मेरा नाम वैष्णवी है।

नीतु.....नमस्ते मैडम, मैं नीतु, मेरे पति हरीश सरकारी हाईस्कूल में अध्यापक हैं। यह छोटी बेटी निशा, पता नहीं क्यों, इसे जानवर-पक्षी दिख जाएं तो कोई आकर्षण सा हो जाता है। घर में भी कुत्ता...तोता...गौरैया और कुछ बंदर ही इसके फ्रेंड्स हैं, सबको साथ मिलाकर ही यह खेलती है।

निधि पास आकर......मम्मा, देखो चिन्नू मोरों को अपना फ्रेंड बना रही है।

वन अधिकारी प्रवीण के साथ मोरों के पास गई निशा उनके गले सहलाते हुए अपनी भाषा में बातें कर रही थी तो मोरों को भी उसकी बात समझ आ गई हो जैसे चोंच से हल्के से निशा के हाथ को छूकर अपना परिचय दे रहे थे। पांचों मोर निशा को घेरकर अपने पंख फैलाकर अपनी खुशी जताते हुए नाचने लगे तो खुश होकर निशा ताली बजाती हुई खुद भी मोरों के साथ नाचने लगी। गिरीश...रश्मि...निकिता और रेवंत अपने-अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहे थे तो चिड़ियाघर देखने आए लोग समूह बनाकर मोरों का नृत्य देखने जुट गए। सब इस दुर्लभ दृश्य को मोबाइल में कैद कर रहे थे। आसपास नाचते मोरों को देखती निशा की खुशी का ठिकाना न रहा, मम्मा-अप्पा को बुला-बुलाकर मोर दिखाती हुई कूद रही थी। पांच-छह मिनट नाचने के बाद मोरों ने निशा के हाथ पर चोंच से हल्के से छुआ तो उनके गले सहलाकर टाटा करके निशा दौड़कर मम्मा के कंधे पर चढ़ गई।

नीतु.......चिन्नू, मजा आया कंद?

निशा फुल खुशी में.....मम्मा, तोता.....कहकर दोनों हाथ फैलाकर मोर के पंखों जैसे हिलाती हुई खुद भी नाचने लगी।

हरीश.....बहुत थैंक्स सर, मेरी बेटी के चेहरे पर इतनी खुशी लाने के आप ही कारण हैं।

प्रवीण......सर, मैं भी बांदीपुर...नागरहोल आदि जंगलों में सेवा कर चुका हूं, लेकिन आपकी बेटी को देखकर पांचों मोरों ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी, बहुत आश्चर्य हुआ। शायद आपकी बेटी में कोई दैवी शक्ति है।

नीतु......सर, पता नहीं, लेकिन कोई भी जानवर हो या पक्षी, इसके साथ बहुत जल्दी दोस्ती और घुल-मिल जाते हैं।

प्रवीण.....बहुत खुशी मैडम, आज चिड़ियाघर देखने आए तो मुझे एक अविस्मरणीय अनुभव मिला।

वहां से आगे शेर...बाघ...हाथी और अन्य जानवरों को भी निशा अपनी भाषा में बुला-बुलाकर उनका ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी तो प्रवीण और वैष्णवी दंपति हैरान हो रहे थे।

रेवंत.....प्रवीण सर, यहां के जानवरों को हम गोद ले सकते हैं क्या, पूछा था कैसे सर?

प्रवीण.....एक साल तक उनके खाने और देखभाल का खर्च उठाकर आप भी जानवरों को गोद ले सकते हैं। चलिए ऑफिस में यहां के अधिकारियों से आपका परिचय करा देता हूं।

शाम को गेट बंद होने तक चिड़ियाघर में रहे, कुछ जानवरों को बच्चों के नाम पर गोद लेने के लिए पैसे जमा करके बाहर आए तो प्रीति आंटी की बाहों में बैठी निशा अपनी खुशी को अपने अंदाज में बयान कर रही थी।

वैष्णवी......नीतु, आप सबसे परिचय हुआ हमें बहुत खुशी हुई। आप बेंगलुरु आएं तो जरूर हमारे घर आना।

प्रवीण.....हां मिस्टर हरीश, जरूर आइएगा।

हरीश.....आएंगे सर, आप भी कामाक्षीपुर में हमारे घर अतिथि बनकर आएं तो खुशी होगी।

उनसे विदा लेने से पहले फोन नंबर लेकर निशा को प्यार किया दंपति और वहां से चले गए। निशा दोनों को चुंबन देकर टाटा बोली और भैय्या-दीदियों ने चिड़ियाघर के अंदर लिए फोटो-वीडियो देखती हुई फुल खुश हो रही थी। होटल जाकर फ्रेश होने के बाद सब मैसूर पैलेस घूमकर शॉपिंग के लिए निकल पड़े।
 

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रविवार
कामाक्षीपुर......

रविवार सुबह 7:00 बजे कामाक्षीपुर पहुंचे फूड यूनिट को मशीनरी सप्लाई करने वाले तीन विदेशियों का जानी ने स्वागत किया और उन्हें सीधे यूनिट ले गया। वहां रवि और विक्रम ने तीनों का स्वागत किया और फूड यूनिट की गतिविधियां दिखाई तो वे बहुत खुश हुए।

जॉनसन (जर्मनी).....मिस्टर रवि, अब आपके पास मौजूद फ्रीजर और मशीनरी पर्याप्त नहीं लगती। शुरुआत में ही आपकी यूनिट को इतनी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

मार्टिन (पोलैंड)......और सात-आठ बड़े फ्रीजर रखने की जगह तो है। अगर आप सहमत हों तो हम भेज देंगे।

रवि......इस बारे में हमने अभी फैसला नहीं लिया। नीतु लौटने के बाद उनके साथ चर्चा करके आपको बताएंगे।

टिम (फ्रांस).......yes..yes..neethu she is a brave and smart woman. वे आ जाएं तो तय करके बता देना।

विक्रम......इस यूनिट की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की है ना, इसलिए वे ही फैसला लें तो अच्छा है।

करीब डेढ़ घंटे वहां बात करने के बाद तीनों दोस्त जानी के बगीचे लौट आए।

जॉनसन......छे, नीतु गांव में नहीं होने पर ही हम यहां आ गए। अगर वह होती तो अच्छा रहता।

मार्टिन.......yes, हम एक बार फिर विवाहित भारतीय महिला की योनि का स्वाद ले सकते थे।

जानी.....डोंट वरी ब्रदर्स, नीतु न होने पर भी आपके सुख में कोई रुकावट नहीं आएगी। रजनी और अनुष नाम की उनकी दोनों असोसिएट्स आपके सबके सुख के लिए अभी आने वाली हैं।

टिम.....Really are they married?

जानी......yes, दोनों की शादी हो चुकी है।

टिम.....वाव, शादीशुदा भारतीय औरत के शरीर का स्वाद ही अद्भुत होता है।

चारों बातें कर ही रहे थे कि रजनी और अनुष बगीचे में आ गईं। उनके खूबसूरत शरीर को देखते ही तीनों फिरंगियों के लंड टॉवर की तरह खड़े हो गए। नीतु यहां न होने पर भी और उतनी सुंदर न होने पर भी आम औरतों की तुलना में रजनी और अनुष सौ गुना बेजोड़ सुंदरियां थीं। दोनों को जानी ने तीनों को लाल बंदरों की तरह परिचय कराया तो टिम आगे बढ़कर रजनी की कमर पकड़कर पास खींच लिया और होंठों से होंठ मिलाकर जोर-जोर से चूसने लगा। चारों हैरानी से दोनों को देख रहे थे कि रजनी के शरीर से पल्लू सरकाकर टिम ने उसे उठा लिया और छोटे तालाब के किनारे बिछाए बिस्तर पर लुढ़क गया।

मार्टिन.....Tim what is this? Show some respect to the lady u idiot.

टिम कामुकता से होश में आकर......सॉरी...सॉरी...I am really sorry मिसेज रजनी। कृपया माफ कर दो, मैं सड़क किनारे के लौफर की तरह व्यवहार कर बैठा।

रजनी......इट्स ओके, कोई बात नहीं.....कहती हुई बिस्तर पर उठकर बैठ गई तो बाकी दोनों की नजर काली ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब स्तनों पर थी।

जानी....कम ऑन बडीज, हम यहां इकट्ठे हुए ही खेलने का मजा लेने के लिए, सो नो फॉर्मेलिटीज, एंजॉय।

उसकी बात सुनकर पल्लू ठीक करती रजनी पर फिर से टूट पड़े टिम ने उसके ऊपर लुढ़ककर होंठ चूसने शुरू कर दिए। टिम के रास्ते पर चलते जॉनसन भी बिस्तर पर चढ़ गया और रजनी के चिकने पेट पर हाथ फेरते हुए उसकी साड़ी उतारकर एक तरफ रख दी और लहंगे की डोरी खींच ली। दोनों दोस्तों से मैं कम नहीं, इस भाव से मार्टिन ने अनुष को गले लगा लिया और उसके गाल...ठोड़ी...होंठ...गर्दन...कंधों पर चुंबन की बौछार करते हुए मुलायम कूल्हों को मन भरकर मसल दिया। रजनी का काला लहंगा उसके पैरों से निकल गया और लाल फूलों वाली हरी पैंटी में थोड़ा उभरी हुई भारतीय विवाहित महिला की योनि देखकर जर्मनी के जॉनसन ने उसकी टांगें फैला दीं, केले के तने जैसी जांघों के बीच मुंह घुसाया और पैंटी के ऊपर ही योनि को एक चुंबन देकर वहां की सुगंध का स्वाद लेने लगा। अनुष घास पर घुटनों के बल बैठी थी, उसके सामने खड़े पोलैंड के मार्टिन ने अपनी चड्डी उतार फेंकी और सफेद नौ इंच के लंड को हिलाते हुए अनुष के मुंह में ठूंस दिया। पहले कभी न देखी, न पहचानी फिरंगी की लंड मुंह में घुसते ही अनुष को पूरा रोमांच हुआ और मजे से उसकी लंड चूसने लगी। पहले ही रजनी के साथ कई बार खेल चुके और पिछले हफ्ते से अनुष की योनि तथा गांड के छेद की सर्विसिंग कर चुके जानी आज दोनों को अपने दोस्तों के साथ मजा देने के लिए बगीचे के कामों में लग गए।

मार्टिन भी अनुष के साथ दूसरे बिस्तर पर जा पहुंचा, उसके शरीर से चूड़ीदार अलग करके गुलाबी ब्रा-पैंटी में मौजूद उसे गले लगाकर बिस्तर पर लोट-पोट होने लगा। रजनी की योनि को पैंटी के ऊपर ही चाट रहे जॉनसन ने पैंटी थोड़ी सी एक तरफ सरकाई तो सफेद रंग की बिना बालों वाली चिकनी भारतीय योनि देखकर पागल हो गया। रजनी के होंठों का शहद मन भरकर चख चुके टिम ने खुद को नंगा करते हुए ब्लाउज के हुक खोले, शरीर से अलग किया और काली ब्रा भी उतारकर एक तरफ रख दी। नीतु जैसी ही रजनी के स्तन भी जरा भी ढीले न पड़े हुए उभरे हुए देखकर खुश हुए टिम ने एक को पकड़कर मसलते हुए दूसरे स्तन को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। रजनी की पैंटी नीचे खींचकर उतार फेंके जॉनसन ने चिकनी योनि पर दर्जनों चुंबन दिए, उंगलियों से होंठ फैलाए और योनि के अंदर जीभ घुसाकर रतिरस का स्वाद लेने लगा। इधर अनुष के शरीर से भी ब्रा-पैंटी दूर हो चुकी थी, उसके सुकोमल नंगे शरीर को गले लगाए मार्टिन प्यार करते हुए स्तन मसल रहा था और कूल्हों को बहुत जोर से मसल रहा था। अनुष ने टांगें फैला दीं और मार्टिन के सिर को योनि पर दबाया तो वह भी मजे से रसभरी योनि चाटते हुए हाथों से स्तन मसलता रहा और डबल मजा ले रहा था। एक-दो मिनट में ही अनुष की योनि से रतिरस छलक आया, उसे सब सोख लेने के बाद मार्टिन ने उसकी टांगें उठाकर कंधों पर रख लीं और अपना साढ़े आठ इंच का लंड चमकते हुए योनि के सामने रखकर जोर से आगे बढ़ाया। द्रव्य के प्रभाव से नीतु घर की औरतों की योनियां बहुत टाइट थीं। लगातार तीन धक्के लगाने के बाद ही मार्टिन का लंड का सिरा अनुष की योनि में घुस पाया। अगले तीन-चार मिनट बिना रुके धक्के पर धक्के लगाते हुए मार्टिन ने अपने पोलैंड देश के लंड को अनुष की भारतीय विवाहित योनि में पूरी तरह घुसा दिया। अनुष आह...आह....हां...अम्मा...आह कहती हुई कराहती रही और फक मी और जोर से कहती हुई नीचे से कूल्हे उठा-उठाकर दे रही थी तो मार्टिन भी ऊपर से जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। पांच मिनट में ही मार्टिन के लंड पर दो बार रतिरस का अभिषेक कर चुकी अनुष अब उसकी लंड की लयबद्ध मार को जबरदस्त मजे से झेल रही थी।

रजनी को नंगा करके खुद भी नंगे हो चुके जॉनसन और टिम ने आंखों से इशारा किया। पहले जॉनसन ने रजनी की टांगें फैलाकर उसकी जांघों के बीच समाया और योनि पर अपना लंड ठोका। रजनी की योनि भी टाइट थी। चार-पांच मिनट लगातार कोशिश के बाद जॉनसन का लंड उसकी योनि की सारी रुकावटें तोड़कर अंदर घुस गया। रजनी के होंठों पर डीप किस किए टिम ने उसके मुंह में अपना फ्रांस देश का लंड ठूंसकर चूसाया तो वह विवाहित भारतीय योनि के दही को जॉनसन अपने जर्मनी देश के लंड से फाड़ रहा था। टिम की लंड को कलात्मक ढंग से चूसती रजनी नीचे जॉनसन के धक्कों के जवाब में खुद भी कूल्हे उठा-उठाकर दोनों को मजा दे रही थी। आधे घंटे तक अनुष की योनि खेल चुके मार्टिन ने वीर्य की पिचकारी गर्भ के अंदर छोड़कर पीछे हटते देखा तो टिम ने एक पल भी बर्बाद न करते हुए रजनी के मुंह से लंड निकाला और बगल के बिस्तर पर पड़ी अनुष की जांघों के बीच समा गया। अभी-अभी पोलैंड देश के लंड से जोरदार चुदाई झेल चुकी अनुष की योनि में अब फ्रांस देश के टिम का लंड घुस गया और उसकी जवानी लूट रहा था। अनुष से पूरा मजा ले चुके मार्टिन ने एक-दो मिनट संभलकर अपनी सिकुड़ी पड़ी लंड पकड़ी और रजनी के पास आकर उसके मुंह में ठूंसकर चूसाने लगा। चालीस मिनट तक रजनी की योनि खेल चुके जॉनसन ने अपनी पिचकारी उसके गर्भ के अंदर छोड़ दी और पूरा संतोष अनुभव किया। जॉनसन के पीछे हटते ही रजनी को लंड चूसाकर उसे फिर से खड़ा कर चुके मार्टिन उसके ऊपर चढ़ गया और सवारी शुरू कर दी। इधर अनुष को जोर-जोर से चौड़ा-तिरछा चोद रहे टिम उसके स्तन मसलते-चूसते हुए जोर से योनि के अंदर लंड घुसा-घुसाकर विवाहित भारतीय औरत के शरीर का अनुभव ले रहा था।

अगले तीन-चार घंटे अपनी-अपनी जगह बदलते हुए तीनों विदेशी फिरंगियों ने रजनी और अनुष दोनों की भारतीय विवाहित योनियों को एक-एक बार खेला और पूरा मजा लिया।

जॉनसन......वाव रजनी—अनुष, तुम दोनों ने जबरदस्त मजा दिया। इसलिए अगली बार तुम्हें किसी भी तरह की मशीनरी चाहिए तो हम वह सब फ्री ऑफ कॉस्ट डिलीवरी और इंस्टॉलेशन करके देंगे।

टिम.....खाना खाकर एक और राउंड शुरू करें क्या?

रजनी.....सॉरी मिस्टर टिम, हम दोनों को एक घंटे में घर लौटना है, बहुत जरूरी काम हैं। we will enjoy full day next time.

तीनों फिरंगियों को निराशा हुई फिर भी दोनों ने दिए सुख के लिए आभार जताया और खुशी से विदा ली। फिर जानी के साथ बीयर पीते हुए बातों में लग गए।

रविवार के दिन मैसूर के आसपास नंजनगूड और श्रीरंगपट्टण घूमकर शाम चार बजे के आसपास दोनों कारें कामाक्षीपुर की तरफ निकल पड़ीं। आगे-पीछे रक्षकों की तीन जीपें सुरक्षा में थीं।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 229

कामाक्षीपुर लौटकर घर वालों से अच्छी तरह प्यार करवा लेने वाली निशा दादा...दादी...शीला सबको बता रही थी कि उसने चिड़ियाघर में मोरों के साथ कैसे नाचा, तभी गिरीश ने उसका वीडियो सबको दिखाया। टीवी पर खुद को मोरों के बीच देखकर निशा बहुत खुश हो गई और कूदने-नाचने लगी। मैसूर सिल्क की साड़ियां कल देखेंगे कहकर शीला के रूम में ही रखकर बच्चों को सोने भेज दिया गया। सबसे मिलने आए सविता—सुकन्या दंपति अपने घर जा रहे थे तो नमिता—निकिता भी अप्पा-मम्मा के साथ चली गईं। निशा ने मम्मा से कहा कि वह दादी के साथ सोएगी और दादा के साथ उनके रूम में दौड़ गई। अशोक—सुम तथा रजनी>विक्रम के बीच आंखों के इशारे से बातें होती देखकर नीतु ने कहा कि वह आज भैय्या के साथ सोएगी और रेवंत के साथ चली गई। विक्रम सामने वाले घर की तरफ निकला तो सुमा को सिग्नल देने वाली रजनी भी चली गई। सुमा के शरीर की खूबसूरती देखते अशोक भी उसके साथ सामने वाले घर की तरफ कदम बढ़ा दिया। हरीश रूम में पांव रखते ही प्रीति अंदर आई, दरवाजे पर चटकनी लगाई और......

प्रीति......अभी नीतु अपने भैय्या के साथ सोने चली गई, अच्छा हुआ डार्लिंग। बहुत दिनों बाद तुम्हारे साथ मिलने का समय मिला है।

प्रीति को खींचकर गले लगा लिया हरीश ने। उसके सुंदर चेहरे को दोनों हाथों में लेकर होंठों को मन भरकर चूमा और मीठे शहद का रस पिया। प्रीति भी अपने होंठ खोलकर हरीश का साथ दे रही थी। उसके होंठों का स्वाद लेते हुए ही ट्रैक पैंट के अंदर हाथ डालकर चड्डी के ऊपर ही लंड सहलाने लगी। प्रीति की चूड़ी टॉप जमीन पर गिर चुकी थी। काली टाइट ब्रा में उसके जवानी के कलश फूटे पड़े उभरे हुए थे और मसलने-चूसने का निमंत्रण दे रहे थे। हरीश की नजर उसके स्तनों पर टिकी देखकर प्रीति औरत की स्वाभाविक प्रतिक्रिया की तरह शर्मा गई, लेकिन उसका काम मंदिर तीन-चार बूंद रस टपका बैठा। दोनों एक-दूसरे को देखते खड़े थे। हरीश की टी-शर्ट ऊपर उठाकर उतार दी प्रीति ने। उसके कसे हुए चौड़े सीने पर हाथ फेरते हुए सहलाया और कई चुंबन दिए। हरीश के सीने...गर्दन...होंठों को चूमकर नीचे सरकी प्रीति ने ट्रैक पैंट को चड्डी समेत नीचे खींच दिया। बाहर निकली कामदंड का साइज देखकर हांफते हुए बिस्तर पर चढ़कर बैठ गई।

हरीश.......क्यों प्रीति, पसंद नहीं आया क्या?

प्रीति.....उफ्फ..ऐसे लंड से चुदवाए बिना कौन औरत रहना चाहेगी। आज मेरी चूत पूरी तरह फटने वाली है, इसमें दो राय नहीं।

हरीश.....आचार्य ने दिए दिव्य द्रव्य का असर है कि यह इतना बड़ा हो गया है। तुम्हारे ऊपर भी उसका असर हुआ होगा ना? कुछ बताया नहीं।

प्रीति.....मेरे ऊपर द्रव्य का क्या असर हुआ, यह मुझे खुद नहीं पता।

हरीश......क्यों चिन्न, देखने से पता नहीं चलता? तुम पहले से भी बहुत ज्यादा सुंदर हो गई हो। साथ ही स्तन मुलायम होने के बावजूद जरा भी लटक नहीं रहे, तने हुए खड़े हैं।

हरीश की तारीफ भरी बातों से प्रीति शर्मा गई। आगे झुककर लंड के सिरे को जीभ से चाटा, दर्जनों चुंबन दिए और अंडों से लेकर सिरे तक अच्छी तरह चाटने लगी। हरीश को बिस्तर पर लेटने को कहा प्रीति ने। अपनी लेगिंग उतारकर काली ब्रा और पीली पैंटी में बिस्तर पर चढ़ी। हरीश के माथे पर पहला चुंबन देकर उसके ठोड़ी...गाल और होंठों को किस किया। हरीश के चौड़े सीने पर जीभ फेरकर चाटा। लंड के पास पहुंची तो मुंह चौड़ा करके अंदर ले लिया। प्रीति जितना भी मुंह फैलाती, हरीश के विशाल लंड का सिर्फ छह इंच ही अंदर ले पाती और उतना ही साफ-सुथरा चूस रही थी। प्रीति ने पहले सिर्फ एक बार कॉलेज के समय सहेली के साथ ब्लू फिल्म देखी थी और उसी में देखे अनुसार पहली बार हरीश के साथ मिलन के समय उसकी लंड चूसी थी। लेकिन अब हरीश—रेवंत और जानी तीनों की लंड चूसने का काफी अनुभव हो चुका था, इसलिए आसानी से हरीश की लंड चूस रही थी। हरीश आनंद सागर में तैरते हुए प्रीति के बाल सहला रहा था और उसका सिर थपथपा रहा था।

हरीश.....बस कर प्रीति, पंद्रह मिनट से मुझे मजा दे रही हो। अब मेरी बारी है, लेट जा।

प्रीति.....पहले से अब तुम्हारे लंड का स्वाद बदल गया है। चूसने में बहुत मजा आ रहा है।

हरीश हंसते हुए......टेस्ट चेंज हो गया है क्या? मुझे अभी पता चलेगा। चूसना तो तुम लोग ही करती हो। लेकिन मैं कह सकता हूं कि तेरी चूत का स्वाद तो जबरदस्त ही रहता है।

प्रीति......थू पगले, फिर क्यों देर कर रहे हो। मैं तो चाटने के लिए तैयार हूं।

प्रीति को लिटाकर उसके गोल स्तनों को ब्रा समेत पकड़कर मसला हरीश ने। उनकी मुलायमता जांच ली। प्रीति के स्तन जितने मसले उतने ही और उभरकर हरीश को चुनौती देते हुए तन जाते। रुई जैसे नरम गोल स्तनों को मसलने-कुचलने में उसे भी जबरदस्त मजा आ रहा था। प्रीति की पीठ की तरफ हाथ डालकर ब्रा के हुक खोले और शरीर से अलग करते ही दो पके आम जैसे सफेद स्तन छलांग लगाकर बाहर आ गए। उनमें से एक को पकड़कर मसला हरीश ने। दूसरे स्तन के निप्पल पर जीभ फेरते हुए दूध पीने वाले बच्चे की तरह चूसने लगा।

प्रीति......क्या बच्चे की तरह चूस रहे हो। उनमें अब दूध नहीं आता, सूख चुका है। हमारी नयन छोटी थी तब अच्छी तरह पी चुकी है।

हरीश मुस्कुराते हुए.......फिर भी चूसने में आनंद आ रहा है।

प्रीति के स्तनों के साथ मन भरकर खेला हरीश नीचे सरका। नाभि के अंदर तक चाटते हुए केले के तने जैसी जांघों को सहलाया...रगड़ा...मसलता रहा। काम मंदिर की रक्षा कर रही पीली पैंटी के आगे का हिस्सा देखकर हैरान रह गया।

हरीश......ये क्या प्रीति, पहले ही तेरी चूत से इतना रस बह निकला है।

प्रीति.....क्या करूं हरीश, तुम्हारे साथ होते ही मेरी छोटी बहन बहुत आंसू बहाती है। जल्दी उसकी भूख मिटा दो।

पीली पैंटी का इलास्टिक पकड़कर नीचे खींचकर उतार फेंका हरीश ने। उसके सामने बहुत चिकनी, रस टपकाती चूत आ गई। प्रीति की सुंदर बिना बालों वाली चूत पर कई चुंबन दिए और चाटने लगा। हरीश को ऊपर आने को कहकर खींच लिया प्रीति ने। जितना हो सके टांगें फैला दीं। फुंफकारते विशाल साइज के लंड को पकड़कर चूत के सामने रख लिया। हरीश की आंखों में आंखें डालकर प्रीति ने चुपचाप सहमति दी तो हरीश ने चूत पर पहला धक्का मारा। प्रीति की चूत टाइट थी। हरीश का लंड उसे फैलाते हुए दो-तीन इंच अंदर घुसाने के लिए पांच-छह धक्के लगाने पड़े।

प्रीति......मुझे दर्द हो रहा है सोचकर इतनी धीमी गति से धक्के लगा रहे हो तो तुम्हारा लंड चूत में घुसते-घुसते सूर्योदय हो जाएगा। अपनी पूरी ताकत लगाकर जोर से मारो......अम्मा....मर गई...आह.. वैसे ही और जोर से मारो, मैं सह लूंगी।

प्रीति की टांगें उठाकर कंधों पर रख ली हरीश ने। तेज गति से धक्के लगाते हुए तेईसवें धक्के में उसकी चूत के अंदर लंड पूरी तरह घुसाने में सफल हो गया। उसके बाद बिस्तर पर अलग-अलग मुद्राओं में प्रीति को गिराते हुए उसकी चूत से रतिरस की बाढ़ आने के अंदाज में चोदता रहा। एक घंटे तक उसे कामसुख के स्वर्गलोक में तैरवाते हुए पूरा मजा दिया। प्रीति भी हरीश का हर तरह से साथ देती रही। उसके धक्कों के जवाब में खुद भी कूल्हे उठा-उठाकर अच्छी तरह झेलती रही और उसके लंड को जबरदस्त मजा दिलवाया। एक घंटे की लंबी चुदाई के बाद हरीश के लंड से निकली वीर्य की पिचकारी की आखिरी बूंद तक प्रीति ने अपने गर्भ में भर ली। दोनों पूरी तरह संतुष्ट हो गए। दस-पंद्रह मिनट दोनों एक-दूसरे की बाहों में आराम करते रहे। फिर प्रीति उठी, हरीश की लंड सहलाते-चूसते हुए दूसरे राउंड के लिए लंड तैयार करने में लग गई।
 

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शुक्रवार सुबह जब सब बच्चे मैसूर चले गए थे, नाश्ता करने बैठे राजीव...अशोक..विक्रम...रवि चारों के सामने पहले रजनी ने दो प्लेट रखीं, बाकी दो सुम ला रही थी। अशोक कुर्सी से उठा और खुद किचन के दरवाजे के पास गया तो सुम दो और प्लेट पकड़े हुए थी। उसके कंधे से पल्लू सरक गया था, उसे ठीक करने के लिए वह जूझ रही थी। अशोक उसके सामने खड़ा हुआ, पल्लू उठाकर कंधे पर ठीक से रख दिया और “बहुत सुंदर लग रही हो” कहकर उससे प्लेट ले ली। जब वह मुड़ा तो सुमा का चेहरा सेब की तरह लाल हो चुका था। इसी तरह रजनी—विक्रम के बीच भी कई बार अचानक शारीरिक स्पर्श वाले मौके आ चुके थे और दोनों जोड़े एक-दूसरे की ओर आकर्षित हो चुके थे। रविवार रात जब विक्रम सामने वाले घर जा रहा था तो उसके पीछे दौड़ी रजनी ने उसे अपने रूम के अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया।

विक्रम......रजनी, क्या कर रही हो? अभी अशोक यहां आ सकता है। हमें एक ही रूम में, वह भी दरवाजे पर चटकनी लगी हालत में देख लेगा तो तेरे बारे में क्या सोचेगा।

रजनी.....डोंट वरी डार्लिंग, सब देख लिया है मैंने। तुम्हें यहां इसलिए लाई हूं कि आज रात हमें कोई डिस्टर्ब भी नहीं करेगा। इस बारे में चिंता छोड़ दो।

विक्रम....अशोक कहां जाएगा? सुम हमारे रूम के अंदर मैं न होने को नोटिस नहीं करेगी क्या?

रजनी.....सुम आज रात शीला के साथ सो रही है। रवि और अशोक दोनों फैक्ट्री के बारे में बात करने के लिए सामने वाले घर के ऊपर वाले रूम में होंगे। अनु—प्रताप जैसे बच्चे सो चुके हैं, सो हम दोनों ही यहां हैं।

विक्रम हंसते हुए......बढ़िया खिलाड़ी हो तुम.....

रजनी गर्व से......और क्या होना चाहिए। नहीं तो तुम्हारे जैसे मूर्ख को टोकरी में कैसे डाल पाती? अब और बातें मत करो, हम दोनों रूम में इकट्ठे हुए हैं तो काम शुरू करें?

विक्रम......येस...येस...रजनी के जवानी के तालाब में डुबकी लगाकर तैरने को मैं भी बेताब हूं।

रजनी ने नकली गुस्सा दिखाते हुए विक्रम के पेट पर हल्का घूंसा मारा तो उसने रजनी को पास खींचकर गले लगा लिया और प्यार से माथे पर चुंबन दिया। विक्रम के दिए मीठे चुंबन में कामुकता का स्पर्श नहीं, पूरी तरह प्यार भरा हुआ था। इसे नोटिस करके रजनी ने उसे कसकर गले लगा लिया और अपने कमल जैसे होंठ खोल दिए। रजनी के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए विक्रम आगे झुका और उसके होंठों को अपने होंठों से बांध लिया। दोनों एक-दूसरे को चूसने में मग्न हो गए। चार-पांच मिनट के लंबे चुंबन के बाद दोनों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो पीछे हटे और हांफने लगे। रजनी की साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरककर जमीन पर गिर चुका था। हल्के नीले ब्लाउज के अंदर सांस के हिसाब से ऊपर-नीचे हो रहे गोल स्तन देखकर विक्रम आगे झुका, बाएं स्तन को पकड़कर वजन जांचने के अंदाज में नीचे से ऊपर उठाया और हल्के से मसला। रजनी के मुंह से “आह....” की कामोद्गार ध्वनि सुनकर उत्साहित हुए विक्रम उसके दोनों स्तन सहलाते-मसलते रहे तो रजनी के मुंह से लगातार कामोद्गार की आवाजें निकलती रहीं। रजनी की चूत की गर्मी हद से ज्यादा बढ़ चुकी थी। विक्रम की पैंट-शर्ट उतारकर उसने उसकी चड्डी के अंदर हाथ डाला और खड़े हो चुके लंड को पकड़ लिया।

भारत लौटने से पहले विक्रम हमेशा काम के टेंशन में और अपने सपने वाले केमिकल फैक्ट्री को विधायक को सौंपने की मजबूरी वाले दुख में कामुकता की तरफ ध्यान ही नहीं देता था, उदासीन रहता था। लेकिन अब भगवान की दी हुई अपनी प्यारी बहन की मदद से विधायक ने डरा-धमकाकर कब्जा किए फैक्ट्री का काम फिर से शुरू हो चुका था और जीवन में कोई टेंशन नहीं थी। इसके साथ आचार्य दिए द्रव्य के प्रभाव से उसकी बुद्धिमत्ता...चतुराई बढ़ने के साथ कामुकता भी कई गुना बढ़ गई थी। पहले साढ़े सात इंच जितना रहा विक्रम का लंड अब साढ़े नौ इंच लंबा और बहुत मजबूत आकार में बढ़ चुका था।

रजनी......ये क्या विक्की, तेरी रॉड इतनी गरम-गरम है। सुम इसे सही प्यार नहीं दिखाती क्या?

विक्रम......सुम जितना भी प्यार दिखाए, तेरे जैसी अप्सरा की संगत में आने पर यह स्वाभाविक रूप से गरम हो ही जाता है, इसमें शक नहीं डार्लिंग।

रजनी.......तो अब तेरी यह अप्सरा इसे ठंडा कर देगी।

रजनी अपनी साड़ी उतार रही थी तो विक्रम उसके ब्लाउज के हुक खोलकर शरीर से अलग कर रहा था। टाइट पीली-काली मिश्रित डिजाइनर ब्रा में छिपे स्तनों को पकड़कर मसलने लगा। रजनी के लहंगे की डोरी खींचकर नीचे सरका दी विक्रम ने। आंखों के सामने छोटी लाल पैंटी में खड़ी सुंदरी को देखते ही उसका लंड तुरंत कूदने लगा। रजनी को अपनी बाहों में उठाकर तीन चक्कर घुमाया विक्रम ने। उसके साथ बिस्तर पर लुढ़क गया और चेहरे पर चुंबन की बौछार करते हुए गर्दन के हिस्से पर अपना प्यार का मोहर लगा दिया। रजनी ने ब्रा का कप एक तरफ सरकाया और एक स्तन बाहर निकाला तो विक्रम ने तुरंत उसे मुंह में ले लिया और चूसने लगा। विक्रम मुंह पूरा चौड़ा करके जितना हो सके स्तन अंदर लेने की कोशिश कर रहा था। रजनी ने ब्रा उतारकर एक तरफ फेंक दी और दोनों स्तनों को आजाद करके उसकी सुपुर्दगी में सौंप दिया। जीवन में पत्नी सुमा को छोड़कर पहली बार किसी और औरत के संपर्क में आने के जोश में विक्रम स्तनों को पकड़-पकड़कर मसलता रहा, संतुष्ट होने तक चूसता रहा और मजा लेता रहा। विक्रम को अपने ऊपर से एक तरफ धकेलकर पलटा लिया रजनी ने। खुद उसके ऊपर चढ़ गई। सीने पर चुंबन देते हुए हल्के से काटती रही और चड्डी पकड़कर खींच ली। चड्डी की कैद से आजाद हुआ लंड स्प्रिंग की तरह बाहर कूदकर खड़ा हो गया। उसे पकड़कर रजनी ने मुंह में ठूंस लिया और चूसने लगी। रजनी बहुत कलात्मक ढंग से लंड चूस रही थी। विक्रम पूरी तरह फिदा हो गया। उसके सिर को थपथपाते हुए लंड चूसाने का मजा ले रहा था। रजनी की पैंटी खींचकर फेंक दी विक्रम ने। उसकी जांघों के मिलन स्थल पर सफेद त्रिकोणाकार चमकती काम मंदिर देखकर वह मोहित हो गया। आगे झुका तो नाक में नशा चढ़ाने वाली चूत से निकलती स्त्री सुगंध का परimal लगा। रजनी की रसभरी चूत को होंठ छूते ही विक्रम के शरीर में बिजली दौड़ गई और वह रोमांचित हो उठा। विक्रम ने अपनी लंबी जीभ बाहर निकालकर चूत के होंठ चाटे। उसका स्वाद उसे इतना पसंद आया कि जीवन में पहली बार किसी औरत की चूत चाट रहा था। रजनी उससे चूत चटवाते हुए रतिरस टपकाकर पिला दी। उसके बाद भी विक्रम बिना छोड़े चूत चाटता रहा, इसे नोटिस करके.......

रजनी......क्या विक्की, मेरी चूत का स्वाद तुझे इतना पसंद आया?

विक्रम.......सच कहूं तो अब तक मैंने सुमा की चूत भी नहीं चाटी थी। यह मेरे जीवन का पहला अनुभव है। अब जो अनुभव मिल रहा है उसे शब्दों में बयान करना मेरे बस की बात नहीं। गलती से कहूं तो सिर्फ यही कह सकता हूं कि अद्भुत है।

रजनी......अभी भी चाटने की इच्छा बाकी है?

विक्रम......वह तो रहती ही है, बुझने वाली नहीं। उससे पहले तेरे जवानी के तालाब में डुबकी लगाने की हसरत है।

रजनी....तो फिर देर किस बात की.....कहकर टांगें फैला दीं।

विक्रम......तू इतनी चौड़ी टांगें फैलाए फिर भी तेरी चूत के होंठ जरा भी नहीं खुले चिन्न।

रजनी.......सब स्वामीजी हमें दिए द्रव्य का असर है, हमेशा टाइट ही रहती है। तुम बातें करते समय गवाओगे या आगे बढ़ने का मन करोगे?

विक्रम......अभी ले डार्लिंग।

रजनी की मजबूत जांघों को सहारे के लिए पकड़ लिया विक्रम ने। अपना साढ़े नौ इंच का लंड चूत के सामने रखा तो रजनी ने चूत के होंठ उंगलियों से फैलाकर अंदर घुसाने को कहा। विक्रम ने अपनी पूरी ताकत लगाई और जीवन में पत्नी सुम के बाद दूसरी औरत की काम गुफा के अंदर अपनी रॉड घुसा दी। रजनी उसका साथ देते हुए कूल्हे उठा-उठाकर दे रही थी तो विक्रम पूरे जोश में जोर-जोर से लंड के धक्के लगा रहा था। पंद्रह-सोलह धक्कों में लंड तल तक चूत के अंदर घुसाने पर विक्रम के चेहरे पर जैसे उसने कुछ जीत लिया हो वैसी विजय की तृप्ति छा गई। विक्रम को पूरा मजा देना चाहती रजनी कूल्हे उठा-उठाकर दे रही थी तो पहली चुदाई में ही उसे इम्प्रेस कर देने के पूरे जोश में विक्रम भी जोर-जोर से धक्के मार रहा था। दोनों की काम चुदाई पैंतालीस मिनट तक चली। रजनी ने कई बार चूत के रस से विक्रम के लंड का अभिषेक किया। उसके बाद उसने भी अपना सारा वीर्य रजनी के गर्भ में भर दिया। दोनों के चेहरों पर चुदाई की संतुष्टि थी।

आज रात सुमा के साथ पहली मुलाकात करने के बारे में सोच रहे अशोक को पता चला कि उसका मासिक चक्र शुरू हो गया है। उसने खुद गीजर ऑन करके गर्म पानी भर दिया। घर में सेफ्टी पैड खत्म हो गए हैं यह सुम ने अशोक को बताया तो दिन-रात खुली मेडिकल स्टोर जाकर पैड लेकर आया। अशोक के गाल पर प्यार से किस करके सुम ने माफी मांगी।

अशोक......क्या हम दोनों आज रात एक हुए तभी हमारे बीच का प्यार बचकर बढ़ेगा? वह तो कभी खत्म होने वाला नहीं। यह औरत होने का हर महीने का दर्द है। इसमें हमें तुम्हारा साथ देना चाहिए, नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।

सुम हंसते हुए....तुम्हारी प्यार भरी बातों से मैं फ्लैट हो गई हूं। हमारे दोनों के मिलन को नई तरह से होने दो, तुम ध्यान रखना।

अशोक थोड़ा सोचकर....तो फिर वह इस गांव में नहीं। उस बारे में आराम से सोचेंगे। जा नहा ले।

सुम फ्रेश होकर नहाकर आई और अशोक की छाती पर सिर रखकर लेट गई। वह उसकी पीठ सहलाते हुए दोनों प्यार भरी बातें करते-करते नींद में चले गए।
 

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सुबह 5:30 पर जाग गई नीतु ने भैय्या को सोया हुआ देखा। खुद फ्रेश होकर बाहर आई और अपने रूम का दरवाजा जोर से खटखटाकर नीचे चली गई। हरीश की बाहों में दो बार कामसुख अनुभव करके नंगी लेटी प्रीति दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनकर घबराकर उठ बैठी। प्रीति बहुत घबराई हुई थी, हांफ रही थी और उसके जवानी के कलश तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे।

हरीश.......इतनी घबराहट क्यों? यह सब तेरी ननद की शरारत है, आराम से रह।

प्रीति......आप सोए रहिए, मैं जा रही हूं।

प्रीति कपड़े पहनकर बाहर आई तो वहां कोई नहीं दिखा। सामने अपने रूम में सिर्फ पति रेवंत सोए हुए थे। नीतु की शरारत याद आकर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई और वह फ्रेश होने बाथरूम चली गई। नीतु के नीचे आने तक दूध देने आए गिरि से निधि दूध ले चुकी थी। सामने वाले घर से फ्रेश होकर आई अनुष दूध गर्म करने किचन में चली गई। रवि और शीला भी फ्रेश होकर आ गए थे। उनके साथ नीतु कॉफी पीने बैठी तो अनुष मम्मा-अप्पा को कॉफी देने उनके रूम में गई और दीदी को “आओ” कहकर पुकारा। तीनों रूम के अंदर गए तो घर के बाहर कुत्तों से खेल रही निधि भी रूम की तरफ आ गई।

नीतु......क्यों पुकारा, क्या हुआ? मम्मा, क्या हुआ मम्मा?

रेवती......रात आराम से थी, लेकिन अब चिन्नू का शरीर गर्म है। चेक करो, बुखार तो नहीं आ गया।

नीतु बेटी के माथे...गर्दन को छूकर देख रही थी तभी अनुष तुरंत थर्मामीटर लेकर आई, निशा के मुंह में रखा और जांच करके.....

अनुष.....हां दीदी, चिन्नू को बुखार है।

रूम में मौजूद नयन को देखकर नीतु......नयना, ऊपर तुम्हारी मम्मा के रूम में मेरा मोबाइल है, ले आ।

नयन मोबाइल लाई तो डॉक्टर शालिनी को फोन करके बेटी को बुखार आने की बात बताई।

शालिनी.......नीतु, मैं खुद घर आ रही हूं, तू वहीं रह।

इतने में निशा जाग गई और छोटी उंगली दिखाई। उठाने के लिए आगे आई दादी....अनुष....निधि, किसी के पास नहीं गई और मम्मा की तरफ हाथ बढ़ाया। नीतु बेटी को गोद में लेकर चली तो.....

शीला........चिन्नू को बुखार आए....उसे बेचैनी हो....इंजेक्शन लगवाने पर भी वह किसी के साथ नहीं जाती, मम्मा ही होनी चाहिए।

शीला की बात पर सब मुस्कुराते हुए बाहर आए। नीतु भी बेटी को फ्रेश करके सोफे पर बैठी और बेटी को अपनी गोद में लिटा लिया। हरीश नीचे आया तो पत्नी की गोद में उदास लेटी बेटी को बुखार होने की बात सुनी। उसके सिर को थपथपाते हुए बगल में बैठ गया। डॉक्टर शालिनी आकर जांच की और थकान से बुखार आया है कहकर कुछ टॉनिक लिख दिए। कहीं मुझे इंजेक्शन तो नहीं लगाएंगे, इस डर से निशा मम्मा को कसकर गले लगाए हुए थी।

शालिनी........चिन्नू मरी, डर मत, मैं तुझे सुई नहीं लगाऊंगी। लेकिन तू कुछ दिन आइसक्रीम नहीं खाएगी, ठीक है?

“सुई नहीं लगाऊंगी” सुनकर निशा की घबराहट गायब हो गई और आइसक्रीम नहीं खाऊंगी कहकर सिर हिलाया। रेवंत लाए चार टॉनिक कितनी मात्रा में कब पिलाने हैं यह बताकर शालिनी शाम को एक बार और आने को कहती हुई चली गई।

राजीव.....नीतु, कंद को ऊपर वाले रूम में ही सुला दो। यहां रहेगी तो कुत्ता.....बंदर मांगने लगेगी।

सुम....वहीं ले चलो, रेवंत आते समय इडली लाया है, मैं वहां ले आती हूं।

रेवती......इडली में सिर्फ चीनी डालना, घी-मक्खन नहीं।

दादी की बात सुनकर निशा मम्मा से.....मक्खन नहीं मम्मा, मुझे मक्खन नहीं..... बोली। डॉक्टर आंटी ने कहा कि मक्खन खाएगी तो सुई लगाएंगी, इस डर से नीतु ने बेटी को ऊपर अपने रूम में ले जाया। हरीश ने सब बच्चों को तैयार होकर स्कूल-कॉलेज जाने को कहा और खुद भी रूम में आ गया।

हरीश......ले, क्या मैं स्कूल में छुट्टी लगा दूं?

नीतु......री, तुम घर में रहकर क्या करोगे? नाश्ता खिलाकर दवाई पिला दी तो आराम से सो जाएगी। तुम चिंता मत करो, स्कूल जाओ।

हरीश.......कुछ लाना हो तो बताना।

निधि.....अप्पा, हम सब यहां हैं ना, आप तैयार हो जाओ।

निशा नाश्ता खाते समय आए भैय्या-दीदियों को टाटा बोली और सबसे प्यार करवा लिया। अशोक...विक्रम...रेवंत...रवि फैक्ट्री जाने से पहले चिन्नू की तबीयत पूछकर चले गए। अनुष घर में रहूंगी कहने पर भी फूड यूनिट पर प्रीति और रजनी के साथ जाने को नीतु ने तीनों को भेज दिया।

रेवती......मैसूर में कंद पर किसी की नजर लग गई होगी। तूने नजर का टीका नहीं लगाया था क्या?

नीतु.......नहीं मम्मा, भूल गई।

सुम.....अरे नीतु, छोटे बच्चों को बाहर ले जाते समय नजर का टीका लगाना चाहिए, यह नहीं पता था क्या?

नीतु.....सॉरी आंटी, गलती हो गई।

रेवती......जाने दो। चिन्नू उठे तो नीचे ले आना, मैं वहीं टीका उतार दूंगी। निधि, तू आ, कुछ सामान चाहिए, ला देने को।

निधि....चलो दादी, निक्की आ, चलते हैं।

निशा.....मम्मा, तू कहां जाएगी....कहां जाएगी।

नीतु......नहीं कंद, मम्मा कहीं नहीं जाएगी, यहीं रहेगी। तू आराम से सो जा बंगारी......कहकर बेटी को थपथपाते हुए नींद में सुला दिया।


गुरुवार सुबह और दोपहर स्विमिंग पूल के पास निधि को टू-पीस ब्रा पैंटी में देखने वाले दीपक उसकी गोल स्तनों...उभरे कूल्हों और त्रिकोण चूत के आकार को याद करते हुए तीन दिनों से लगातार जटका मारते-मारते थककर चूर हो चुका था। रविवार शाम अप्पा-मम्मा के साथ होने पर थकान से बैठे-बैठे इधर-उधर लुढ़कते देखकर डॉक्टर के पास ले गए। उन्होंने जांच करके बहुत कमजोरी हो गई है कहकर ड्रिप चढ़ाकर सुला दिया।
 

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राजस्थान....उदयपुर महल.....

राणा......अजय सिंह, काम कहां तक पहुंचा है?

अजय......हमारे लोग चंचलादेवी, उनके पति...बच्चों और घर के अन्य सदस्यों के पीछे परछाई की तरह पहरा दे रहे हैं। लेकिन एक समस्या सामने आ गई है।

विक्रम सिंह......क्या है वह?

अजय......चंचलादेवी अपने घर के सदस्यों को कहीं भी बाहर भेजें तो उनके साथ 10—12 लोगों को सिक्योरिटी के लिए भेजती हैं। उन सबको मारे बिना घर वालों को लाना संभव नहीं। अगर उन्हें बेहोश भी कर दिया तो उन्हें भी हमें उठाकर लाना पड़ेगा। वहीं छोड़ दिया तो चंचलादेवी के परिवार के किडनैप होने की बात पूरे जग जाहिर हो जाएगी। रात के समय घर पर छापा मारना भी खतरनाक है क्योंकि घर के अंदर बाहर से जबरदस्ती किसी भी तरफ से प्रवेश किया तो शिमला के हर पुलिस थाने में तुरंत सिग्नल पहुंचने वाली व्यवस्था की गई है। उसे निष्क्रिय किए बिना हम जाना असंभव है।

राणा......असंभव? अजय, तेरे मुंह से यह बात मैंने उम्मीद नहीं की थी।

सुमेर सिंह.......अजय ने जो कहा उसे तुमने सही समझा नहीं। माता का आदेश क्या था? यहां हम सूर्यवंशी संस्थान के विरोधियों को अपने कब्जे में लें, इसकी किसी को जरा सी भी भनक न लगे।

अजय.....उन्हें अपने कब्जे में लेना हमारी टीम के लिए दस मिनट का काम है। लेकिन यह सब सूर्यवंशी संस्थान के रक्षकों ने ही किया है, यह सबको पता चल जाएगा। इसलिए कोई और रास्ता खोजना जरूरी है।

विक्रम सिंह.......एक रास्ता है। हमारे कंप्यूटर विशेषज्ञों में सबसे निपुण दो को यहां बुलाओ सुमेर।

एक घंटे बाद दो युवक आए और विश किया। उन्हें बैठने को कहा और सामने आई समस्या के बारे में बताया। इस बात को तीसरे व्यक्ति के कान तक न पहुंचने की चेतावनी भी दी गई।

तज्ञ 1......मैं सूर्यवंशी संस्थान का निष्ठावान हूं। किसी भी कारण प्राण त्याग दूंगा, लेकिन इस विषय पर किसी से बात नहीं करूंगा।

तज्ञ 2......उस घर में कितनी भी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लगी हो, उसके चालू रहने के लिए सबसे जरूरी बिजली है। हमें उसे रोकना होगा।

अजय......उस घर को बिजली सप्लाई करने वाले ट्रांसफॉर्मर को ही नष्ट कर दें तो?

तज्ञ 1......वह एक रास्ता सही है। लेकिन बिजली न होने पर भी सुरक्षा व्यवस्था काम करती रहे, इसके लिए घर में अलग व्यवस्थाएं भी की होंगी। उन्हें भी नष्ट करना होगा।

तज्ञ 2......सर, हमें उस घर के पास ले चलो। वहां किस तरह की आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं लगी हैं और उन्हें कैसे निष्क्रिय किया जा सकता है, हम पता लगाएंगे।

राणा......यह अच्छी सलाह है। अजय—सुमेर, तुम सब तैयारियां करके आज रात ही हिमाचल प्रदेश इनके साथ निकल जाओ। लेकिन सावधानी से काम करना। किसी को जरा सा भी संदेह न हो, इस बारे में सतर्क रहना। कोई भी छोटा सा क्लू किसी के खोजने पर भी न मिले।

चारों ठीक कहकर चले गए तो.......

विक्रम सिंह.......अब मुख्यमंत्री....8 मंत्री....18 विधायक....19 अधिकारी, इन्हें अपने कब्जे में लेने का प्लान बनाना है।

राणा......दिलेर....वीर सिंह और बशीर खान उनके पीछे परछाई की तरह हैं। लेकिन मौका दो-तीन हफ्तों बाद ही मिलेगा। जुलाई महीने के पहले हफ्ते में इतने लोगों में से किसी का भी बाहर जाने का कोई प्रोग्राम तय नहीं है। सब घर पर ही रहेंगे। उस रात सबको जैसलमेर की बंदिखाने में ट्रांसफर करना है। इस भानुप्रताप ने किस तरह के षड्यंत्र चलाए थे, उसके पीछे कौन थे, पता चला क्या? कुछ बोला क्या?

विक्रम सिंह......बहुत घाटी बूढ़ा आसानी से मुंह नहीं खोला। लेकिन जो कुछ भी किया, चंचलादेवी दीदी के कहे अनुसार किया, सिर्फ इतना कहा।

राणा......खुद भाई...भाभी...अप्पा...मम्मा को मरवाने जैसे नीच काम पर चंचलादेवी उतरेंगी, यह कल्पना नहीं की थी।

विक्रम सिंह......सूर्यवंशी संस्थान की प्रतिष्ठा....गरिमा....सम्मान....पैसे-जायदाद सब सिर्फ वह और उसका परिवार ही भोगे, इस हीन मानसिकता में ऐसे नीच काम पर हाथ डाला है। ऐसे लोग कितने नीचे स्तर तक गिरने में भी नहीं हिचकते।

राणा.....तुम सही कह रहे हो। ऐश्वर्य किसी को भी बदल देता है ना।

विक्रम सिंह......लेकिन माता और उनके परिवार वाले इसके बिल्कुल विपरीत मन के हैं। दोनों राजकुमारियों को अपने खुद के बच्चों से भी ज्यादा देखभाल करते हैं। खासकर छोटी राजकुमारी को उस घर में जितनी आजादी मिली है, शायद इस महल में भी नहीं मिलती। माता के परिवार की जगह कोई और होता तो राजकुमारियों के साथ इतने में ही आकर सूर्यवंशी संस्थान पर अपना अधिकार जताने जैसा व्यवहार करने लगता।

राणा......हां विक्रम, तुमने जो कहा वही सच है। मैं और आचार्य हरीश सर से घर के सब लोगों को महल में शिफ्ट होने को कहे थे, लेकिन उन्होंने बहुत नर्म अंदाज में मना कर दिया। उन्होंने क्या कहा पता है? पैसे को हम कोई महत्व नहीं देते। सब बच्चों को आम लोगों की तरह पालकर जीवन के सुख-दुख का अहसास उनमें जगाना और उन्हें श्रेष्ठ व्यक्ति बनाना ही हमारे जीवन का लक्ष्य है। मैं अपनी कमाई से ही बच्चों की जरूरतें पूरी करने में सक्षम हूं। मुझे सूर्यवंशी संस्थान से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं चाहिए। लेकिन बच्चे बड़े होने पर उनका फैसला लेने के लिए वे स्वतंत्र हैं, यह भी कहा।

विक्रम सिंह........हरीश जैसे अच्छे देवता-मनुष्य के बच्चे होना हमारी राजकुमारियों का सौभाग्य ही है। उदाहरण के लिए सुभाष को ही ले लो। वह स्कूल का एक आम विद्यार्थी है। हरीश से किसी भी तरह का संबंध नहीं। हजारों विद्यार्थियों में वह भी एक। लेकिन उसकी पढ़ाई और जीवन का सहारा बनकर आज उसे इतने ऊंचे अधिकारी पद तक पहुंचाने में माता और उनका परिवार ही मुख्य भूमिका निभाया। एक बात मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं—हमारी बड़ी राजकुमारी अपना अधिकार संभालने के बाद भी यहां की सारी जिम्मेदारी अपनी मां यानी माता पर ही छोड़ देंगी।

राणा....माता यह सब संभालने में सक्षम भी हैं, इसमें दो राय नहीं। लेकिन यह महल सौ साल बाद माता के खून के लिए तरस रहा है, इस बात को सोचते ही हर पल मेरा दिल कांप उठता है।

विक्रम.....हम सबको माता और राजकुमारियों को किसी भी तरह की परेशानी न होने देना चाहिए, उनकी रक्षा करनी चाहिए।

इस विषय पर दोनों की चर्चा लंबी चली और कुछ फैसले लिए गए।
 
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