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Erotica नियति से बंधी नीतू

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नियति से बंधी नीतू - Part 67


दोपहर में रजनी का फोन आया, तो नीतु निशा को सहेली के पास छोड़कर उसे लेने निकली। रजनी के घर पहुंचते ही उसने नीतु को अंदर खींचा, दरवाजा बंद किया और सीधे कमरे में ले जाकर उसके कपड़े उतारकर नंगी कर दिया। खुद भी नंगी होकर रजनी ने नीतु के होंठों को चूमा। नीतु की रसीली चूत को जी भरकर चाटते हुए रजनी ने उसके रस की हर बूंद का स्वाद लिया। नीतु की गांड के छेद में उंगली डालकर रजनी बोली, "आह, क्या मस्त माल है तू! इसीलिए मेरा पति हमेशा तुझ जैसी मोटी गाय की सवारी के लिए तैयार रहता है। तेरे यौवन का रस किसी भी मर्द के लिंग से पानी निकाल देता है।" नीतु ने रजनी को बिस्तर पर धकेला और उसके सफेद चूत को चाटने लगी। पांच मिनट में ही रजनी रस छोड़कर हांफने लगी। रजनी की गांड के छेद को चाटते हुए नीतु ने उंगली डाली और बोली, "अशोक ने तेरी गांड का सील भी खोला?" रजनी हंसते हुए बोली, "उसे तो बहुत इच्छा थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब हरीश से ही अपनी गांड मरवाऊंगी।" दोनों ने 15 मिनट तक एक-दूसरे के नंगे शरीर को सहलाया, मसला और समलैंगिक सुख का आनंद लिया, फिर जाने के लिए तैयार हुईं।

घर पहुंचे, तो आंगन में निशा चीखते हुए भाई के पीछे छोटे-छोटे कदमों से दौड़ रही थी। पड़ोस की तीन औरतें शीला के साथ खड़ी होकर निशा का खेल देखकर हंस रही थीं। नीतु को देखकर निशा दौड़कर आई और गोद में उठने के लिए दोनों हाथ ऊपर किए। नीतु की गोद में जाकर उसने भाई की ओर इशारा किया। नीतु को समझ नहीं आया कि वह क्या कह रही है। शीला और गिरीश की ओर देखा, तो गिरीश बोला, "अम्मा, वह थोड़ी देर से टॉम एंड जेरी देख रही थी। अब मुझे उसी तरह दौड़ा रही है और तुम्हें भी मेरे पीछे दौड़ने को कह रही है।" नीतु ने निशा के गाल पर चुम्मा देकर कहा, "चिन्नी, हम भाई के पीछे नहीं दौड़ेंगे। घर जाकर पापा को दौड़ाएंगे, ठीक है?" निशा ने मां को चूमा और भाई को पास बुलाकर उसके कंधे पर चढ़ गई। पड़ोस की औरतों ने नीतु से कहा कि गोद ली बेटी बहुत प्यारी और चंचल है, और उसने बहुत अच्छा काम किया। फंक्शन भी बहुत शानदार था। वे नीतु से कुछ देर बात करके चली गईं।

अंदर शीला रवि की पीठ पर सवार होकर खुशी से हंस रही थी और सबको हाथ हिला रही थी। गिरीश ने रजनी को देखकर पूछा, "आंटी, आप दादा-दादी के साथ नहीं गईं?" रजनी जवाब नहीं दे पाई और नीतु की ओर देखने लगी। नीतु बोली, "इनकी सास के साथ कुछ काम है, इसलिए इन्हें हमारे गांव ले जा रही हूं। तेरी होने वाली पत्नी रश्मि अकेले दादा-दादी के साथ गई है। अगर तू कहे, तो तुझे भी उनके पास भेज दूं।" गिरीश शरमाकर चुप हो गया। नीतु की बात सुनकर रजनी और शीला जोर से हंसने लगीं। गिरीश शर्म और संकोच से न तो बैठ पा रहा था, न उठ पा रहा था। रजनी बोली, "नीतु, बेचारे मेरे दामाद को यूं मत सता। अगर उसने मेरी बेटी से शिकायत की, तो वह पतिव्रता शिरोमणि मुझ पर टूट पड़ेगी।"

हंसते-हंसते कुछ समय बिताने के बाद रवि और शीला से विदा लेकर नीतु, रजनी और निशा गांव के लिए निकलीं। शीला ने नीतु को गले लगाकर कहा, "पता नहीं क्यों, लेकिन डर लग रहा है।" वह रोने लगी। नीतु ने उसे सांत्वना दी और रवि से बोली, "अण्णा, मेरी प्यारी सहेली का बहुत ध्यान रखना। वह बहुत परेशान है। अगर ऐसा ही रहा, तो मुझे तुरंत फोन करना, मैं उसे अपने गांव ले जाऊंगी। अण्णा, मेरी इस सहेली का खास ख्याल रखना। यह मेरी तुमसे गुजारिश है, मुझे निराश मत करना।" रवि ने नीतु का सिर सहलाकर कहा, "चिंता मत कर, मेरे पास सिर्फ मेरी पत्नी ही है। उसकी जिम्मेदारी मेरी है। मैं रोज तुम्हें उसकी खबर दूंगा। तुम निश्चिंत होकर जा। दीपावली पर हम भी वहां आएंगे। तुम्हें और हमारी छोटी कंदम्मा को उदास देखना मुझे बर्दाश्त नहीं।" निशा ने रवि और शीला को चूमा, टाटा किया और मां के साथ गांव के लिए रवाना हुई।

नीतु SUV चला रही थी। निशा भाई की गोद में खड़ी होकर खिड़की से बाहर देख रही थी और लोगों को चीखकर बुला रही थी। घर पहुंचते ही सुरेश दौड़कर आया और निशा को गोद में लेकर दुलारने लगा। रजनी ने हरीश को देखा, तो उसकी चूत की पंखुड़ियां फड़फड़ाने लगीं। नीतु ने हरीश को गले लगाया और बच्चों के साथ अंदर चली गई। हरीश ने रजनी को गले लगाया और उसके कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को तैयार रहना।" उसने रजनी को अंदर ले गया। हरीश ने पहले से खाना बना रखा था। नीतु बोली, "री, मैं आकर खाना बनाती। तुमने क्यों बनाया?" हरीश हंसा और बोला, "अपने छोटे बेटे से पूछ, मैं अच्छा खाना बनाता हूं या नहीं। दो घंटे ड्राइव करके आई मेरी पत्नी के लिए इतना तो कर सकता हूं। फ्रेश हो जा, कॉफी बनाता हूं।" उसने रजनी को भी भेज दिया। सुरेश रवि के दिए बबल मेकर से बुलबुले बना रहा था, और निशा उन्हें तोड़ने के लिए चीखते हुए घर में दौड़ रही थी। पापा और भाइयों के साथ रात तक खूब उछल-कूदकर निशा जल्दी खाना खाकर सो गई। गिरीश ने पापा को बताया कि निशा टॉम एंड जेरी देखकर वैसा ही खेल रही थी। हरीश खुश हुआ और नीतु से बोला, "लैपटॉप के लिए इंटरनेट कनेक्शन चाहिए था। कल कंपनी वालों से बात करके अनलिमिटेड पैक वाई-फाई डिवाइस के लिए पूरा पेमेंट कर दिया। वे कल डिवाइस फिक्स कर जाएंगे। इससे घर में हर जगह सुपर-फास्ट इंटरनेट मिलेगा। बच्चों और मुझे सुविधा होगी। तुम भी अब मोबाइल की बजाय वाई-फाई से लैपटॉप यूज करो। निशा के लिए टॉम एंड जेरी और दूसरे कार्टून डाउनलोड करके दिखाओ, उसे भी खुशी होगी।" रात के खाने के बाद दोनों बच्चे बहन के साथ सोने के लिए कमरे में दौड़े। नीतु ने हरीश को चुदाई का इशारा किया और कमरे में चली गई।

रसोई में पानी पी रही रजनी को हरीश ने गोद में उठाकर कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद किया। रजनी ने हरीश की टी-शर्ट उतारी और उसके सीने को सहलाते हुए कई चुम्बन देकर अपना प्यार जताया। हरीश ने रजनी के माथे, गाल, गले और कानों पर चुम्मे दिए और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी पीठ सहलाने लगा। रजनी का चूड़ीदार टॉप उतारकर हरीश ने नीली ब्रा में कैद गोल स्तनों को मसला और अपना चेहरा उनके बीच दबाकर चाटने और चूमने लगा। 10 मिनट तक स्तनों को मसलवाने के बाद रजनी पीछे हटी, बिस्तर पर बैठी और हरीश की ट्रैक पैंट और चड्डी उतारकर उसके 10 इंच के तने हुए लिंग को सहलाया। लिंग के सिरे को चूमकर और जीभ से चाटकर रजनी ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। उसने हरीश के अंडकोषों को भी सहलाया और चूसा। हरीश ने रजनी का चूड़ीदार बॉटम उतारा और उसकी नीली पैंटी के ऊपर से चूत को चूमा, उसकी सुगंध ली। रजनी को बिस्तर पर लिटाकर हरीश ने उसके पैरों को चूमा, मोटी जांघों को सहलाया और चाटा, फिर पैंटी के ऊपर से चूत को चाटने लगा। उसने रजनी के पेट को सहलाया, नाभि में जीभ डाली, जिससे रजनी कामवासना में कराहने लगी। हरीश ने उसके स्तनों को जोर से मसला। रजनी को पीठ के बल लिटाकर उसकी लंबी पीठ को सहलाया, चूमा और कमर पर दांतों से निशान बनाए। रजनी के गोल कूल्हों को मसलकर हरीश ने नीली पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा और सफेद कूल्हों को चाटकर दांतों से निशान बनाए। कूल्हों को फैलाकर उसने रजनी की गांड के भूरे छेद को चाटा और ब्रा की हुक खोलकर उसे सीधा लिटाया।

रजनी की ब्रा हटाकर हरीश ने उसके नंगे स्तनों को मसला, निप्पलों को चूसा और उन पर दांतों के निशान बनाए। रजनी ने पैंटी का इलास्टिक पकड़कर कूल्हे उठाए और उसे उतार दिया। पहली बार अशोक के अलावा किसी और के सामने रजनी ने अपना नंगा शरीर प्रदर्शित किया। हरीश ने रजनी की रस टपकाती चूत को चूमा, उसका स्वाद लिया और चाटने लगा। उसने चूत की पंखुड़ियां फैलाकर जीभ अंदर डाली, जिससे रजनी सुख के आकाश में तैरने लगी और "हां... आह..." कहकर चीखने लगी। उसने चूत से रस का फव्वारा छोड़ा, जिसे हरीश ने पी लिया। रजनी हांफते हुए बिस्तर पर लेट गई।

पांच मिनट बाद हरीश ने रजनी के पैर उठाकर अपने कंधों पर रखे और उसकी जांघों के बीच आकर अपने लिंग से उसकी चूत की पंखुड़ियों को ऊपर-नीचे रगड़ा और उस पर थप्पड़ मारे। रजनी की कामवासना भड़क उठी। उसने कहा, "प्लीज, हरीश, और मत तड़पाओ। जल्दी अपनी तुन्नी मेरी चूत में डालो और मुझे पूरी तरह अपनी बना लो। मैं तुम्हारे प्यार के लिए बहुत दिन से तरस रही हूं।" उसकी बात पूरी होने से पहले हरीश ने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद किया और तीन इंच लिंग उसकी चूत में डाला। हर पल रजनी को संभलने का मौका देते हुए सात-आठ धक्कों में उसने पूरा 10 इंच का लिंग उसकी चूत में घुसा दिया। रजनी की कराह को शांत करने के लिए हरीश ने उसके होंठों को चूमा, स्तनों को सहलाया, निप्पलों को चूसा और उसकी पीड़ा को कम करके उसे सामान्य स्थिति में लाया। हरीश का पूरा लिंग अपनी चूत में लेने की खुशी में रजनी ने चार बूंद आंसू बहाए और उसे आगे बढ़ने को कहा।

हरीश ने रजनी की चूत में अपना लिंग धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए चोदना शुरू किया। 10 मिनट में रजनी ने रस छोड़ा। हरीश ने अपने धक्कों की गति बढ़ाई और तेजी से चोदने लगा। आधे घंटे में रजनी चार बार रस छोड़ चुकी थी और अपने कूल्हे उठाकर हरीश के धक्कों का जवाब दे रही थी। नौवीं बार रस छोड़कर रजनी थक गई। हरीश ने भी अपने वीर्य से उसकी गर्भभूमि को भरा और उसके बगल में लेट गया। रजनी को अविस्मरणीय सुख देकर हरीश ने उसके नंगे शरीर को अपनी ओर खींचकर गले लगाया।

हरीश में किसी भी औरत को तृप्त करने की क्षमता थी, लेकिन रजनी को अब समझ आया कि नीतु ने अशोक के साथ शारीरिक संबंध क्यों बनाए। जैसे पुरुषों को अपनी खूबसूरत पत्नी के बावजूद दूसरी औरतों का आकर्षण होता है, वैसे ही पति के अलावा दूसरे पुरुष के लिंग के धक्कों में अनोखा सुख होता है। उस रात हरीश ने दोबारा रजनी की चुदाई नहीं की, बल्कि प्यार से उसके नंगे शरीर को सहलाते हुए गले लगाकर सो गया।

सुबह नीतु कमरे से बाहर आई, तो हरीश ड्राइविंग क्लास के लिए जा चुका था। उसने नीतु के खूबसूरत चेहरे को देखकर मंत्रमुग्ध होकर उसे गले लगाया और होंठ चूमने लगा। दोनों के होंठों का खेल चल रहा था, तभी नींद में आंखें मलती हुई निशा आई और नीतु की नाइटी खींची। दंपति शरमाकर निशा की ओर देखने लगे। हरीश ने बेटी को गोद में लिया, गाल पर चूमा और बोला कि उसे ड्राइविंग क्लास ले जाएगा। नीतु ने निशा को छीनकर कहा, "री, वह अभी जागी है, नींद का खुमार बाकी है। पहले वह टॉयलेट जाए, फ्रेश हो, मुंह धोए। उसे कॉम्प्लान पिलाने में आधा घंटा लगेगा। तुम जाओ।" उसने हरीश को भेज दिया।

रजनी भी फ्रेश होकर बोली, "मैं रसोई संभालती हूं, तुम चिन्नी को फ्रेश कराओ।" नीतु ने रजनी के कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को खूब मजा आया?" और बाथरूम चली गई। निशा को फ्रेश कराकर, मुंह धुलवाकर लाई, तो रजनी ने उसे गोद में बिठाकर कॉम्प्लान पिलाया। नीतु ने रजनी के साथ कॉफी पी और बच्चों को हॉर्लिक्स देकर नाश्ता तैयार करने चली गई। निशा कॉम्प्लान पीकर टेडी बेयर लेकर भाइयों के पीछे चली गई। रजनी ने नीतु की मदद करते हुए रात की रासलीला बताई और धन्यवाद दिया। नीतु ने उसे गले लगाकर कहा, "इसके लिए थैंक्स? सिम्पल लॉजिक। तेरा पति मुझे चोदता है, मेरा पति तुझे। दो-तीन दिन हरीश के साथ अकेले चुदवाओ, फिर हम दोनों मिलकर..." दोनों हंसने लगीं।

निशा चीखते हुए कमरे से बाहर दौड़ी। नीतु उसके पास गई, तो निशा ने उसे गले लगाया और पीछे आ रही रिमोट कार की ओर इशारा किया। नीतु ने समझा कि वह कार से डर गई है। उसने निशा को गोद में बिठाकर कार उठाई, उसे आगे-पीछे घुमाकर दिखाया और सुरेश को उसे चलाने को कहा। निशा का डर पूरी तरह खत्म होने तक नीतु उसके साथ बैठी और समझाती रही। डर खत्म होने पर निशा भाई के साथ कार चलाकर खेलने लगी। जब पापा और भाई स्कूल-कॉलेज गए, तो पहले की तरह उदास होने की बजाय निशा ने उन्हें टाटा किया और गाल पर चुम्मा देकर विदा किया। नीतु और रजनी नहाकर नाश्ता करने तक निशा अपने खेल में मस्त थी। वह खेलते-खेलते सोफे पर ही सो गई।

नीतु खाना बनाने की तैयारी करने लगी, तो रजनी ने उसे बैठाया और बोली, "वांगी भात बचा है। दोपहर में वही खा लेंगे। चिन्नी का खाना जागने के बाद बनाएंगे।" दोनों बातें करने बैठ गईं। शीला को फोन करके कुछ देर बात की। तभी दरवाजे की घंटी बजी। नीतु ने दरवाजा खोला, तो आर्किटेक्ट रमेश मुस्कुराते हुए खड़ा था। उसने नीतु को विश किया। नीतु ने भी उसे विश करके अंदर बुलाया। रजनी को देखकर रमेश ने उसे विश किया और सोफे पर बैठकर अशोक और रश्मि के बारे में पूछा। नीतु ने बताया कि दोनों कहीं गए हैं और वह अकेली थी, इसलिए यहां आई। नीतु ने उसे कॉफी दी और बोली, "रमेश जी, कल रात से मेरे दिमाग में एक बात चल रही है। हम पहली मंजिल पर पूरा घर बना रहे हैं। क्या दूसरी मंजिल पर कम से कम दो कमरे बन सकते हैं?" रमेश ने सोचकर कहा, "नीतु, मैंने इस गांव में अपने रहने के लिए एक घर दो साल पहले डिजाइन किया था। उसे देख लो, तुम्हें अंदाजा हो जाएगा। अपनी जरूरत बताओ, उसी हिसाब से डिजाइन करेंगे। आज ही चलकर देख लेते हैं। देर करने से दीवारें बनने के बाद बदलाव के लिए तोड़ना पड़ेगा।" नीतु और रजनी को बात सही लगी। रजनी निशा का ध्यान रखने और नीतु घर देखने जाने को तैयार हुई। नीतु तैयार होने कमरे में गई। रमेश उसकी हिलती हुई कूल्हों को देखकर हाथ मलते हुए बाहर चला गया। नीतु सफेद टाइट चूड़ीदार-लेगिंग्स में आई, तो रजनी बोली, "नाइटी में भी तेरे कूल्हे कितना हिलते हैं। बेचारा रमेश हाथ मल रहा था। अब उसे अपनी जलवा मत दिखा, कहीं बेहोश हो गया तो मुश्किल होगी।" दोनों हंसने लगीं। नीतु ने सो रही निशा के गाल पर चुम्मा दिया। निशा नींद में मुस्कुराई। नीतु खुशी से रमेश के साथ घर देखने निकली।
 
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नियति से बंधी नीतू - Part 68

रमेश ने नीतु को घर दिखाया और जगह का उपयोग कैसे किया जा सकता है, इसका विस्तार से वर्णन किया। नीतु ने कुछ देर सोचकर अपनी जरूरतें बताईं और रमेश से उसी हिसाब से डिजाइन करने को कहा। रमेश उसे अपने रहने वाले कमरे में ले गया और लैपटॉप पर काम शुरू किया। अपनी कुशलता दिखाते हुए उसने नीतु को प्रभावित करने के लिए शानदार डिजाइन तैयार किया। उसने बताया कि पहली मंजिल पर एक लिविंग एरिया, तीन अटैच्ड कमरे, एक कॉमन बाथरूम और बालकनी होगी। दूसरी मंजिल पर चार अटैच्ड कमरे, एक बाथरूम और सिटआउट होगा। छत पर सोलर पैनल, वॉटर टैंक और कपड़े सुखाने की जगह होगी। सब कुछ व्यवस्थित और सुसज्जित होगा। नीतु डिजाइन को ध्यान से देख रही थी, जबकि रमेश की नजरें उसके खूबसूरत चेहरे से खिसककर उसकी टाइट चूड़ीदार में उभरे गोल स्तनों पर टिक गईं। सफेद चूड़ीदार टॉप के नीचे लाल ब्रा साफ दिख रही थी, जिससे रमेश का पुरुषत्व जाग उठा। नीतु ने उसकी नजरों को भांप लिया और उसे और तड़पाने के लिए कुर्सी से उठकर टेबल पर झुकी। झुकते ही चूड़ीदार टॉप ऊपर सरक गया, और उसके गोल कूल्हों का आकार रमेश को साफ दिखने लगा। सफेद लेगिंग्स के नीचे हरी पैंटी भी हल्की-सी नजर आ रही थी। करीब 10 मिनट तक नीतु उसी पोज में झुकी रही और कमर हिलाकर रमेश के पुरुषत्व को उकसाती रही। नीतु की खूबसूरती और देह की चंचलता से रमेश का आत्मनियंत्रण टूट गया, और उसने पीछे से उसे जोर से गले लगा लिया।

नीतु ने नहीं सोचा था कि रमेश इतना आगे बढ़ेगा। वह छुड़ाने की कोशिश करने लगी, लेकिन जब रमेश ने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रखे, तो नीतु के शरीर में बिजली-सी दौड़ गई। वह कोशिश छोड़कर शांत हो गई। रमेश ने नीतु की संवेदनशील गर्दन, कानों के पीछे और कानों को चूमकर चाटना शुरू किया। नीतु के मुंह से कराह की आवाजें निकलने लगीं। रमेश ने उसकी गर्दन और कंधों को चाटते हुए उसका सपाट पेट सहलाया और हाथ ऊपर सरकाकर उसके नरम, गोल स्तनों को छुआ। जब रमेश की हथेलियों ने उसके स्तनों को पूरी तरह दबोचा, नीतु की सारी तड़प खत्म हो गई, और उसका शरीर पुरुष सुख के लिए आत्मसमर्पण कर गया। रमेश ने नीतु को अपनी ओर घुमाया और उसके कांपते होंठों पर अपने होंठ रखकर उनके मधुर रस का पान करने लगा। नीतु के होंठ चूसते हुए रमेश के हाथ उसकी पीठ पर सरकने लगे और नीचे जाकर कमर को दबाने लगे। नीतु की चीख रमेश के मुंह में ही दब गई।

रमेश ने नीतु का शॉर्ट चूड़ीदार टॉप ऊपर सरकाया और टाइट लेगिंग्स के ऊपर से उसके नरम, गोल कूल्हों को मसला। नीतु की कामवासना पूरी तरह बेकाबू हो गई। रमेश ने पीछे से चूड़ीदार की जिप खींचकर टॉप उतारने की कोशिश की। नीतु, जो अब उसकी कठपुतली बन चुकी थी, ने हाथ उठाकर टॉप उतारने में मदद की। लाल ब्रा में नीतु को बिस्तर पर धकेलकर रमेश ने अपने कपड़े उतारे और सिर्फ VIP चड्डी में उसके ऊपर लेट गया। नीतु के स्तनों को ब्रा के ऊपर से मसलकर और उनके उभरे हिस्से को चाटकर वह नीचे सरका। उसने नीतु के पेट और नाभि को चाटा। नीतु की लेगिंग्स उतारकर रमेश ने उसकी हरी पैंटी में उसकी नारीत्व की सुगंध ली और चूत के आसपास अनगिनत चुम्बन दिए। नीतु को उल्टा लिटाकर उसकी गर्दन से कमर तक चुम्बनों की बौछार की। रमेश पहले से ही उसके नरम कूल्हों पर फिदा था और अब उन्हें जोर से मसलने लगा। नीतु "आह... हां... आह..." कहकर कराह रही थी और बिना किसी विरोध के रमेश को अपना शरीर सौंप चुकी थी। रमेश ने नीतु की ब्रा उतारी और उसके नंगे, सफेद, रुई जैसे नरम स्तनों को चूमा, मसला और चूसा। उसकी हरी पैंटी उतारकर रमेश ने उसकी जांघों के बीच मुंह डाला और यौवन के रस से भरे अमृत को चाटने लगा।

रमेश ने अपनी चड्डी उतारी और नंगा होकर नीतु की जांघें फैलाकर बीच में आ गया। उसने अपने नौ इंच के तने हुए लिंग को नीतु की चूत के सामने रखा और धक्का मारा। पहले से ही रस टपकाती नीतु की चूत ने सातवें पुरुष के लिंग को पूरे दिल से स्वागत किया और छह-सात जोरदार धक्कों से उसे पूरा अंदर ले लिया। रमेश ने कभी नहीं सोचा था कि उसे नीतु जैसी यौवन से भरी औरत का सुख भोगने का मौका मिलेगा। वह मौके का फायदा उठाते हुए धनाधन चोदने लगा। नीतु अपनी चूत को रमेश से अच्छे से चुदवाने के लिए कमर हिलाकर अपने कूल्हे उठा-उठाकर दे रही थी। 40-45 मिनट तक नीतु के रसीले शरीर का रस चूसने के बाद रमेश ने पांच-छह बार उसकी चूत को अपने रस से नहलाया और फिर अपना वीर्य उसकी गर्भभूमि में डालकर खाली हो गया।

नीतु का यौवन भोगकर रमेश ने उसके होंठों को चूमा और बोला, "तुम जैसी रसीली औरत का स्वाद चखने का सौभाग्य मुझे सपने में भी नहीं मिला। अब मैं रोज निर्माण स्थल पर आऊंगा और इस कामदेवी के शरीर का फिर से स्वाद लेने का मौका ढूंढूंगा।" नीतु ने उसे अपने ऊपर से हटाया और बोली, "तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी न? अब घर जाओ।" बिस्तर पर बैठे रमेश ने उसे गले लगाया और उसकी गांड के छेद में उंगली डालकर सहलाते हुए कहा, "इसमें भी प्रवेश का सौभाग्य दे दो।" नीतु पीछे हटी, तौलिये से शरीर पोंछा और कपड़े पहनते हुए बोली, "सब कुछ पहले दिन नहीं मिलता। अगर मुमकिन हुआ, तो सोचूंगी। लेकिन मुझ पर हक जमाने की कोशिश मत करना।" रमेश उसके पैरों के पास हाथ जोड़कर बैठ गया और बोला, "मैं तुम पर हक जमाऊं? यह सपने में भी नहीं हो सकता। इस पल से मैं तुम्हारा गुलाम हूं। मुझे अपने कुत्ते की तरह समझो, लेकिन इस कुत्ते को अपनी मालकिन का रस चाटने का मौका देना।" नीतु हंसकर मजाक में बोली, "ठीक है, टॉमी। अपनी मालकिन का रस तुझे भी चाटने को मिलेगा।" रमेश "भौं-भौं" कहकर उसके पैर चाटने लगा। उस दिन एक और पुरुष नीतु के यौवन को चूसने में कामयाब हुआ।

13 साल की कामवासना को बसव ने खत्म किया था, और अब नीतु के शरीर में ठंडी पड़ी कामाग्नि दिन-ब-दिन भड़क रही थी। एक टेलर को छोड़कर नीतु ने अपने आसपास के पुरुषों को ही शारीरिक सुख के लिए चुना और प्यार का अभेद्य किला बना लिया। टेलर को छोड़कर बाकी सभी नीतु की बातों, व्यवहार और गुणों का सम्मान करते थे। उसकी अहमियत उनके जीवन में सर्वोपरि थी। उस दिन इस सूची में आर्किटेक्ट रमेश भी शामिल हो गया। आश्रम के मैनेजर ने भी नीतु का सुख भोगने के बाद उसके गुणों और सुंदरता पर फिदा होकर मन ही मन खुद को उसका गुलाम मान लिया था। चाहे कोई भी तरीका हो, नीतु के आसपास आने वाले पुरुषों को उसकी जांघों के बीच जगह मिल ही जाती थी, कुछ को छोड़कर। बसव को तीन-चार महीने की कोशिश के बाद नीतु की सवारी का मौका मिला था। लेकिन बसव ने जो कामाग्नि भड़काई थी, उसके कारण अशोक, SI प्रताप, टेलर, आश्रम का मैनेजर और अब रमेश को नीतु का शरीर आसानी से मिल गया।

घर पहुंचकर नीतु ने रमेश को नए डिजाइन के अनुसार काम शुरू करने को कहा। रमेश ने कहा, "भौं-भौं, जैसा आप कहें।" नीतु हंसकर बोली, "यह थोड़ा ज्यादा नहीं हो गया?" रमेश ने कहा, "जब हम अकेले हों, मैं आपका टॉमी हूं।" वह सिर हिलाकर मजदूरों को निर्देश देने ऊपर चला गया। निशा ने मां को देखकर "मम्म... मम्म..." कहकर दौड़कर बुलाया। नीतु खुशी से बेटी को गोद में लेकर दुलारने लगी और रजनी की ओर देखा। रजनी हंसकर बोली, "पिछले कुछ समय से मैं हमारी पुट्टी को मम्मी-पप्पा सिखा रही थी। वह बहुत होशियार है। मम्मी, पप्पा, अन्ना, अक्का, आंटी, अंकल कहना सीख गई। कुछ दिन बाद सब साफ बोलने लगेगी। लेकिन तू इतनी देर से कहां थी?" नीतु ने घर के बदले प्लान के बारे में बताया। रजनी हंसकर बोली, "टॉप फ्लोर का कमरा मैं और हरीश मिलकर गृहप्रवेश करके उद्घाटन करेंगे।" दोनों सहेलियां हंसने लगीं।

रजनी ने नीतु को छेड़ते हुए कहा, "रमेश तुझे ही घूर रहा था, क्या हुआ?" नीतु ने मन में सोचा, "घूरना क्या, उसने मेरी चूत में गूटा ही मार दिया।" लेकिन बोली, "वह क्या करेगा बेचारा, थोड़ा देखकर खुश हो लेता है। तुझे जलन हो रही है?" रजनी ने नीतु के कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "एक बात बताऊं। रमेश की पत्नी भारती उस दिन फंक्शन में आई थी। गजब का माल है। मुझे पता है कि चार-पांच साल से वह और अशोक के बीच शारीरिक संबंध हैं। रमेश ने भी मुझ पर कई बार कोशिश की, लेकिन लिप किस, थोड़ा सहलाना और मसलने से आगे नहीं बढ़ पाया।" नीतु ने रजनी का स्तन मसलकर कहा, "अब बोल, उसके सांप को भी तेरी चूत में घुसने का मौका दिलवाऊं?" रजनी हंसकर बोली, "अगर तू साथ हो, तो मैं अभी तैयार हूं। रमेश बहुत अच्छा इंसान है, उसे धोखा-छल नहीं आता। मुझे पता है कि अशोक उसकी पत्नी को चोदता है, इसलिए मुझे भी रमेश के नीचे लेटने की इच्छा थी, लेकिन मौका नहीं मिला। अगर तू तैयार है, तो दोनों मिलकर मजा कर लें।" नीतु बोली, "ठीक है, देखते हैं। अगर रमेश की किस्मत में हम दोनों की चूत चोदना लिखा है, तो कौन रोक सकता है।" (मन में सोचा, "अशोक ने उसकी दूसरी पत्नी की चूत चोदी, अब पहली पत्नी की बारी है।")

शाम को हरीश के आने पर नीतु ने निर्माण में बदलाव के बारे में बताया। हरीश ने बिना सवाल किए सहमति दी और बोला, "लेकिन सब कुछ हमारे जॉइंट अकाउंट से करना।" नीतु ने सिर हिलाकर कहा, "नहीं, जॉइंट अकाउंट का पैसा बाद में सोचेंगे। रमेश को तुमने एक लाख और भैया ने 15 लाख का चेक दिया था। बाकी पैसा मेरे अकाउंट से दूंगी। तुम इस मामले में दखल मत देना।" हरीश ने पत्नी की बात मान ली।

हरीश के स्कूल से आने की खबर सुनकर रमेश नीचे आया और बदलावों के बारे में बताया। हरीश ने उसकी कार्यकुशलता की तारीफ की और नीतु को बुलाकर कहा, "ये बेचारे धूप में हमारा घर बनवा रहे हैं। इनका भी थोड़ा ध्यान रखना हमारा फर्ज है।" रमेश ने मन में सोचा, "सर, आपकी पत्नी ने तो मुझे अपनी गर्म चूत में जगह दे दी। इससे ज्यादा ध्यान और क्या?" लेकिन बोला, "कोई चिंता नहीं, सर। मैडम दिन में तीन-चार बार कॉफी या जूस देती हैं। मजदूरों का भी ख्याल रखती हैं, इसलिए वे खुशी से काम करते हैं। दीपावली से एक दिन पहले पहली मंजिल की छत डाल देंगे। 10 दिन बाद दूसरी मंजिल शुरू करेंगे। अगर ऐसे ही काम चला, तो युगादी से पहले गृहप्रवेश हो जाएगा। दूसरी मंजिल की छत के बाद पहली मंजिल का प्लास्टर, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल काम शुरू करवाऊंगा। जब दूसरी मंजिल का प्लास्टर होगा, तब XXX गांव में ग्रेनाइट देखकर ऑर्डर देंगे। मैं अच्छे कारीगरों से काम करवाऊंगा।"

हरीश ने सहमति दी और बोला, "जैसा तुम कहो, लेकिन ग्रेनाइट सिलेक्शन के लिए मेरी जगह नीतु जाएगी। उसे ले जाओ, उसका चुना हुआ हमें मंजूर है।" नीतु ने पति की बात सुनकर मन ही मन हंसते हुए सोचा, "तुम ऐसे कह रहे हो जैसे मुझे ले जाकर चोद लो कह रहे हो।"

हरीश और सुरेश ट्यूशन के लिए गए, तो रमेश मजदूरों को निर्देश देने ऊपर चला गया। नीतु ने गौर किया कि रमेश ने घर में रहते हुए एक बार भी उसे कामुक या गलत नजर से नहीं देखा। रजनी की बात सही थी कि रमेश सभ्य और अच्छा इंसान है।

उस रात हरीश ने रजनी की चूत को दो बार चोदा और उसकी गांड में लिंग डालकर उसका उद्घाटन कर दिया।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 69

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अगले दिन हरीश और बच्चे स्कूल-कॉलेज जाने के लिए निकले, तो रजनी अभी भी सो रही थी। हरीश ने नीतु से उसका ध्यान रखने को कहकर चला गया। निशा अपने खेल में मस्त थी। नीतु रजनी के कमरे में गई और बोली, "क्या मैडम, कल रात बैक इंजन की सर्विस करवाकर अभी तक सो रही हो?"

रजनी मुश्किल से उठकर बैठी और बोली, "एक बार अपने पति की गदा अपनी चूत में लेकर देख, तब पता चलेगा कितना दर्द होता है।"

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नीतु ने रजनी के कूल्हे सहलाते हुए कहा, "जब तुम, रश्मि, हरीश, शीला सब गांव में नहीं थे, तब अशोक ने मेरी गांड खोली थी। उसके बाद भी चार-पांच बार और सर्विस करवाई। मेरा पति भी रोज मेरी गांड मारना चाहता है, और मैं उसे अच्छे से चुदवाती हूं। तू तो एक ही धक्के में पंचर हो गई।"

रजनी ने मुंह पर हाथ रखकर कहा, "सच बोल रही है? गांड खोलने के बाद भी अशोक से चार-पांच बार चुदवाया? तू इंसान है भी?"

नीतु हंसकर बोली, "उठ, गर्म पानी से नहा ले। फ्रेश होने के बाद ये क्रीम अच्छे से लगा। एक-दो घंटे में ठीक हो जाएगी। फिर रात को हरीश पर तू ही चढ़कर उसकी गांड मारने को कहेगी।" उसने सहेली को बाथरूम धकेल दिया।

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निशा बाहर जाने की जिद करने लगी। नीतु उसे आंगन में घास पर खेलने के लिए छोड़कर वहीं बैठ गई। तभी एक स्वामीजी भिक्षा मांगने आए। निशा को देखकर वे मंत्रमुग्ध हो गए। नीतु ने निशा के हाथ से उन्हें 100 रुपये दिलवाए, लेकिन स्वामीजी ने पैसे लेने से मना किया और बोले, "मैं पैसे नहीं मांगता। सिर्फ एक वक्त का भोजन चाहता हूं। इस बच्ची के हाथ से कुछ खाने को मिले, तो मैं तृप्त हो जाऊंगा।" नीतु ने उन्हें आदर से अंदर बुलाया, लेकिन स्वामीजी बोले, "साधु लोग सांसारिकों के घर में कदम नहीं रखते। मैं यहीं घास पर बैठता हूं।" नीतु ने फल और मिठाई लाकर निशा के हाथ से दी। स्वामीजी ने निशा के सिर पर हाथ रखकर कहा, "भगवान तुझे हमेशा अच्छा रखे। तूने इस बच्ची को गोद लेकर बहुत अच्छा काम किया। यह बच्ची देवी लक्ष्मी के समय जन्मी है, इसलिए इस घर में लक्ष्मी हमेशा रहेगी। इसमें एक छोटा दोष है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। अगले नौ दिन तू, उसकी मां, शारीरिक सुख से दूर रहकर एक वक्त का भोजन कर। सुबह लक्ष्मी और पार्वती की पूजा कर। दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा में निशा से पूजा करवाकर नौ कन्याओं को फल, नवधान्य, कपड़े और 101 रुपये दान दे। उनकी आशीर्वाद दिलवाओ, तो दोष खत्म हो जाएगा। यह बच्ची माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए हमेशा अच्छा करेगी और तुम सबके सम्मान को बढ़ाएगी। एक और बात, तेरे पिछले जन्म के पाप के कारण छह पुरुष तेरे जीवन में आए हैं, तेरे पति को छोड़कर।" (स्वामीजी के यह कहते ही कि हरीश के अलावा छह पुरुषों से संबंध हैं, नीतु आश्चर्य से उन्हें देखने लगी।)

स्वामीजी हंसकर बोले, "इतना आश्चर्य मत कर। यह तेरे पिछले जन्म का कर्मफल है, जो तुझे भोगना होगा। अगले दो-तीन साल में और कई पुरुष तेरे जीवन में आएंगे, लेकिन पांच को छोड़कर कोई परेशानी नहीं होगी। उनमें से एक तो इस दुनिया से जा चुका है। बाकी चार बचे हैं। उनके बारे में डरने की जरूरत नहीं। इस भाग्यदेवी के कदमों की धूल से तुझे कोई परेशानी नहीं होगी। अपनी सहेली को अपने पति के साथ अटूट बंधन में बांधने का तेरा विचार बहुत सही है। उसे जल्द ही पति के साथ की जरूरत है, जो सिर्फ तेरा पति दे सकता है। उसे अपने साथ रख। अगर तू कोशिश करे, तो उसका पति, जो तेरा भाई है, उसे खुशी से तेरे साथ भेजेगा। तेरी सहेली को आने वाली परेशानी से तू ही बचा सकती है, क्योंकि उसे भगवान से ज्यादा तुझ पर भरोसा है। मैं जाता हूं, बेटी। भगवान तेरा भला करे।" तभी रजनी आई और स्वामीजी का आशीर्वाद लिया।

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नीतु ने हाथ जोड़कर पूछा, "स्वामीजी, मेरी सहेली या परिवार को कोई परेशानी होगी? अगर हो, तो बताएं और उसका उपाय सुझाएं। मैं कुछ भी करने को तैयार हूं।"

स्वामीजी ने नीतु का सिर सहलाकर कहा, "जल्दी घबरा मत। सब अच्छा होगा। कोई जानलेवा घटना नहीं होगी। छोटी-मोटी समस्याएं आ सकती हैं, जिन्हें तू अपने साहस और दृढ़ता से ठीक कर सकती है। हमेशा हिम्मत रख और इस बच्ची का ध्यान रख। इसके भाई इस पर बहुत प्यार करते हैं और इसके सुख के लिए मेहनत करेंगे। इसके फलस्वरूप उनकी प्रतिभा दीपावली के बाद कभी भी दुनिया के सामने आएगी। तेरे आसपास के लोग हमेशा तेरे साथ रहेंगे।"

नीतु ने फिर पूछा, "स्वामीजी, आपको मिलना हो, तो मैं..."

स्वामीजी ने बात काटकर कहा, "बेटी, मैं लोक संचारी हूं। आज यहां, कल कहीं और। मैं एक जगह नहीं रुकता। जब तुझे कोई परेशानी आए और तू हताश हो, तब मैं खुद आऊंगा। लेकिन जब यह बच्ची पहली बार स्कूल जाएगी, मैं तेरे घर के दरवाजे पर आऊंगा।"

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रजनी को आशीर्वाद देते हुए स्वामीजी बोले, "तेरी बेटी के लिए चुना घर और वर बहुत अच्छा है। वह सुखी जीवन जिएगी। हां, तेरे जीवन में भी कई पुरुष आएंगे। अगर तुम सब एकजुट रहो, तो हर समस्या का सामना कर सकोगे। इस छोटी बच्ची पर खास प्यार रख।" निशा को फिर आशीर्वाद देकर वे चले गए।

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रजनी ने स्वामीजी के बारे में पूछा, तो नीतु ने अशोक के बारे में छोड़कर (जो उसे पहले से पता था) और हरीश-शीला की शादी को छोड़कर सब बताया।

रजनी ने नीतु का हाथ पकड़कर कहा, "शीला मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी सहेली है। हमें उसे कोई परेशानी नहीं होने देनी चाहिए। (हंसते हुए) यानी हमारे जीवन में और भी पुरुष आएंगे। ठीक है, जब आएंगे, तब देख लेंगे। निशा के लिए मैं भी एक वक्त का भोजन कर सकती हूं?"

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नीतु ने रोका और बोली, "नहीं, मुझे अकेले करना है। अपनी बेटी के लिए मुझे शारीरिक सुख से भी दूर रहना है। अगर तू भी साथ देगी, तो बेचारे हरीश का क्या होगा? तू अकेले उसे संभाल। लेकिन अभी एक वक्त के भोजन की बात हरीश या शीला को मत बताना। तीन-चार दिन बाद बताएंगे। अगर अभी बता दिया, तो वे मेरी बात न मानकर खुद भी ऐसा करेंगे, जो नहीं होना चाहिए। कल की पहली पूजा में तू बेटी के साथ शामिल हो।"

शाम को हरीश आया, तो नीतु ने स्वामीजी की बात बताई और लक्ष्मी पूजा के दिन निशा के नाम से कन्याओं को दान देने की बात कही। हरीश बोला, "तो उस दिन पुरोहित बुलाकर पूजा करवाएं और परिचितों के लिए भोजन का इंतजाम करें।" नीतु से पहले रजनी ने हामी भरी।

नीतु बोली, "सब ठीक, लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं, जिन्हें तुम सबको मानना होगा। तब मेरी बेटी का भला होगा। पहली, पूजा का सारा खर्च हरीश अकेले करेंगे, वह भी अपनी तनख्वाह से, जमीन बिक्री के पैसे से नहीं। दूसरी, बाहर से खाना नहीं मंगवाएंगे, हम सब मिलकर घर में बनाएंगे। तीसरी, नौ कन्याओं को दान में रेशमी साड़ी, फल, फूल, घर की मिठाई, चूड़ी, हल्दी-कुमकुम और लक्ष्मी का चांदी का विग्रह देना होगा। री, तुम्हारे अकाउंट में इतना पैसा है न?"

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हरीश ने पत्नी का कंधा थपथपाकर कहा, "दो-तीन साल से तनख्वाह का पैसा खर्च नहीं हुआ। अकाउंट में 18-20 लाख पड़े हैं। लेकिन रवि, अशोक और प्रताप को खर्च की बात तू ही बताना। मैं कहूंगा, तो वे नहीं मानेंगे। रजनी, तू भी नीतु के साथ उन्हें मनाने में मदद कर।" दोनों ने हामी भरी।

निशा "भैया... भैया..." कहकर गिरीश और सुरेश के पीछे दौड़ रही थी। उसे भाई कहते देख दोनों की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने उसे गोद में लेकर खूब दुलारा। निशा ने "पप्पा... पप्पा..." कहकर हरीश की गोद में चढ़ी। हरीश ने कुछ देर बेटी के साथ खेला और सुरेश को लेकर ट्यूशन चला गया। गिरीश ने निशा को लैपटॉप पर कार्टून दिखाया। निशा बड़बड़ाते हुए हंस रही थी। नीतु ने देखा कि वह लैपटॉप में मस्त है और उसके पास बैठ गई। निशा मां की गोद में चढ़कर उसे भी कार्टून दिखाने लगी। नीतु को हरीश की बात याद आई कि वाई-फाई आ गया है। उसने अगले दिन कार्टून डाउनलोड करने का फैसला किया।

नीतु ने पहले शीला से बात की, स्वामीजी की बात बताई और रवि से खर्च की बात सख्ती से कहकर दोनों को मना लिया। अशोक को बताया, तो वह खर्च पर अड़ा रहा। रजनी ने सुना और पूछा कि अब क्या करें। नीतु ने गुस्से में अशोक को चार बातें सुनाईं। अशोक डरकर बोला, "जैसा तू कहे, मैं वही करूंगा।" नीतु ने फोन रखा, तो रजनी हंसते हुए बोली, "तू बहुत खतरनाक है। मेरा पति उड़ रहा था, तेरे गुस्से से ठंडा पड़ गया। तू गजब की चीज है।" नीतु भी हंस पड़ी। उसने SI प्रताप को फोन करके रात के खाने और बात के लिए बुलाया।

रात को हरीश लौटा, तो निशा पापा की गोद में चढ़कर कार्टून की बातें अपनी भाषा में बताने लगी। उसकी खुशी देखकर हरीश भी बच्चा बनकर खेलने लगा। प्रताप आया, तो नीतु ने पूजा की बात बताई। उसने खर्च उठाने की बात कही, लेकिन नीतु की डांट खाकर चुप हो गया। खाने के बाद प्रताप से उसकी कॉलेज की प्रेमिका के बारे में पूछने की कोशिश में हरीश को नीतु ने रोका और प्रताप को घर भेज दिया। हरीश और रजनी बोले, "पूछने में क्या बुराई थी? हम मदद कर सकते थे।" नीतु ने दोनों को चुप कराया और निशा को कमरे में भाइयों के साथ सुलाकर बाहर आई।

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नीतु सोफे पर बैठकर बोली, "मैंने उस लड़की के बारे में सब पता कर लिया। मेरे छोटे भाई (विदेश में) का दोस्त डिटेक्टिव एजेंसी चलाता है। मैंने भाई के जरिए उससे बात की और लड़की की जानकारी मांगी। उसका नाम अनुषा है। उसकी शादी नहीं हुई और वह किसी से प्यार भी नहीं करती। कॉलेज में उसे प्रताप पसंद था, लेकिन उस मूर्ख को समझ नहीं आया। चार साल पहले उसके पिता और दो साल बाद मां गुजर गए। अब वह अकेली है। एक प्राइवेट बैंक में अच्छी नौकरी और तनख्वाह है, लेकिन अकेली लड़की है। बैंक का MD भाई का दोस्त है। मैंने भाई से बात करके अनुषा का ट्रांसफर हमारे गांव में करवाया। आज उसका ट्रांसफर ऑर्डर MD ने खुद दिया। उसने गांव आने में कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन रहने की समस्या बताई। मैंने भाई से MD के जरिए कहलवाया कि हमारे घर में पेइंग गेस्ट की जगह है। आज शाम अनुषा ने मुझे फोन किया। मैंने उसे बहन की तरह बुलाया, तो वह रोने लगी। उसे चुप कराने में मुझे पसीना छूट गया। इस शनिवार को वह हमारे गांव आ रही है। दीपावली पर प्रताप से उसकी मुलाकात करवाएंगे। अगर दोनों शादी को तैयार हुए, तो उसे प्रताप के घर शिफ्ट कर देंगे। तुम शुक्रवार से लक्ष्मी पूजा तक प्रताप को घर के पास न भटकने देना।"

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हरीश और रजनी हैरानी से नीतु को देखने लगे। रजनी बोली, "तूने घर बैठे इतना कुछ कर लिया और हमें भनक तक नहीं लगी। हमारे साथ रहकर भी बिना शक के सब कर लिया और मासूम बन रही है।" नीतु ने नाइटी का कंधा कॉलर की तरह ऊपर खींचा और दोनों को आंख मारकर बोली, "कैसा लगा शॉकिंग न्यूज?" हरीश बिना जवाब दिए हाथ जोड़कर नीतु के पैर पकड़ने झुका, तो नीतु उछलकर कमरे में भाग गई। हरीश हंसते हुए खुश हुआ और रजनी को उस रात अच्छे से चोदने के इरादे से गोद में उठाकर कमरे में ले गया।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 70

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मंगलवार सुबह 5 बजे उठकर नीतु पहले फ्रेश हुई, फिर निशा को नहलाकर तैयार किया और दोनों मां-बेटी घर के मंदिर में पहुंचीं। रजनी पहले ही नहाकर पूजा की तैयारी कर रही थी। नीतु ने निशा को गोद में बिठाकर रजनी की मदद से नौ दिनों की देवी अनुष्ठान पूजा शुरू की। हरीश ड्राइविंग क्लास के लिए निकलते वक्त पत्नी, बेटी और रजनी को पूजा करते देख बिना डिस्टर्ब किए चला गया। निशा, जो मां की गोद में थी, पापा को टाटा कर रही थी।

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आज निशा जल्दी उठी थी, इसलिए नींद पूरी नहीं हुई और वह मां की गोद में जम्हाई ले रही थी। हरीश को थोड़ा बुरा लगा, लेकिन वह बिना कुछ कहे चला गया। एक घंटे तक नीतु ने निशा के साथ स्वामीजी के बताए अनुसार पूजा की और आरती की। तब तक हरीश लौट आया। रजनी ने तीनों के लिए कॉफी, निशा के लिए कॉम्प्लान और दोनों बच्चों के लिए हॉर्लिक्स लाई। निशा पापा की गोद में चढ़कर उनके हाथ से कॉम्प्लान पीकर सोफे पर ही सो गई। हरीश ने बच्चों के साथ नाश्ता किया और स्कूल जाने से पहले निशा के गाल सहलाकर बोला, "नीतु, क्या रोज मेरी बेटी को सुबह जल्दी उठाना जरूरी है? देख, वह हमें टाटा करती थी, अब आलस से सो गई।" नीतु बोली, "नहीं, आज पहला दिन था, इसलिए स्वामीजी ने कहा था कि निशा से पूजा शुरू करवाएं। कल से मैं अकेले उठूंगी। शाम को पुरोहित के घर चलें। तुम ट्यूशन से जल्दी आने की कोशिश करना।" हरीश मान गया और चला गया।

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शाम को हरीश 7 बजे ट्यूशन से लौटा। पति-पत्नी पुरोहित के घर गए। निशा भी जाने को दौड़ी, लेकिन नीतु ने उसे भाइयों के साथ खेलने को मनाकर छोड़ दिया। पुरोहित से पूजा की बात की, सामग्री लाने को कहा, पैसे दिए और पूजा शाम 6 बजे तक तय की। फिर वे सोने की दुकान गए और 12 लक्ष्मी मूर्तियों का ऑर्डर दिया। नीतु ने हरीश से कहा कि कुछ बात करनी है और उसे पास के पार्क में ले गई। वहां उसने पूजा के अनुष्ठान और एक वक्त के भोजन के बारे में बताया। हरीश ने भी निशा के लिए एक वक्त भोजन करने की बात कही, लेकिन नीतु ने उसे किसी तरह मना लिया।

नीतु ने गहरी सांस ली और शीला के मन की चिंता के बारे में हरीश को बताया। उसने कहा कि शीला के लिए और उसके होने वाले बच्चे के लिए उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करना होगा। हरीश ने हैरानी से कहा, "नीतु, तुझे पता है तू क्या कह रही है? मुझे शीला से दोस्ती और प्यार है, लेकिन उसे तेरी जगह देखना मेरे लिए असंभव है। फिर तूने यह फैसला क्यों लिया?"

नीतु ने हरीश का हाथ पकड़कर कहा, "मैंने बहुत सोचकर यह फैसला लिया। स्वामीजी ने भी कहा कि मेरा निर्णय सही है। शीला को आने वाले कठिन समय में हम दोनों ही सहारा दे सकते हैं। तुम्हारी जिंदगी में मेरी जगह कोई नहीं ले सकता, यह शीला को भी पता है। लेकिन मुझे पता है कि तुम्हारे दिल में उसके लिए भी जगह है। स्वामीजी ने कहा कि शीला को मुझ पर भगवान से ज्यादा भरोसा है। कल से मैं उसके लिए चिंतित हूं कि उसे क्या अनहोनी होगी। प्लीज, बच्चे को अवैध संबंध का परिणाम न समझे, इसके लिए मान जाओ।"

हरीश ने पत्नी को गले लगाकर कहा, "वह बच्चा मेरा है, नीतु। वह अवैध कैसे होगा? शीला के मन की चिंता दूर करने के लिए मैं पूरे मन से उसका तालि बांधने को तैयार हूं। उसका कोई नुकसान न हो, इसके लिए हम दोनों मिलकर ध्यान रखेंगे। शादी कब, कहां, कैसे? यह तू तय कर।"


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नीतु ने हरीश के गाल पर चुम्मा देकर कहा, "मैंने सोच लिया। रजनी दीपावली तक यहीं रहेगी। शनिवार को अशोक और रश्मि के साथ शीला को भी बुलाया है, क्योंकि रवि अण्णा को ऑफिस में बहुत काम है। सोमवार को XXX गांव के बाहर वेंकटेश्वर मंदिर में तुम दोनों की शादी करवाऊंगी। उस दिन स्कूल की छुट्टी ले लेना।" यह कहकर वह हरीश को लेकर घर चली गई।

अगले तीन दिन नीतु पूजा में व्यस्त रही। रजनी रात को हरीश को सुख देती और सुबह रसोई का काम संभालती।


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निशा की चंचलता बढ़ती जा रही थी। वह हमेशा मस्ती में घर में दौड़ती और सबको खुश रखती। शुक्रवार रात प्रताप भी खाने के लिए आया। बातचीत में हरीश ने उसे पूजा तक घर न आने को कहा। प्रताप घबराकर बोला, "मुझसे कोई गलती हुई? बताओ, मैं सुधार लूंगा। लेकिन ऐसी सजा मत दो।" हरीश ने उसे बिठाकर कहा, "तूने कोई गलती नहीं की। हम सजा नहीं दे रहे। हम सब मिलकर तुझे एक तोहफा देना चाहते हैं। अभी मत पूछ क्या। पूजा तक घर मत आ।" प्रताप मान गया।

शनिवार सुबह निशा भाइयों के साथ आंगन में गेंद खेल रही थी। कार से उतरी रश्मि को देखकर वह दौड़ी। रश्मि ने उसे दुलारा, फिर निशा अशोक की गोद में चढ़ी और शीला के सीने से लिपट गई। रश्मि ने नीतु से कहा, "मम्मी, तुमने मुझे दादा-दादी के साथ भेज दिया और यहां मजे कर रही हो। तुमसे बात नहीं करूंगी।"


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रजनी ने बेटी का सिर सहलाकर कहा, "मेरी रश्मि को मम्मी पर गुस्सा आया? मैं यहां गिरीश को देखने आई थी कि वह मेरी बेटी का जिंदगी भर ख्याल रखेगा या नहीं। मेरी पुण्यवंती बेटी को अच्छा पति मिल रहा है।" रश्मि शर्म और खुशी से मां को गले लगाई। नीतु ने यह देखकर रश्मि को फ्रेश होने भेजा और रजनी से बोली, "कितनी समझदार हो गई। बेटी को अच्छा टोपी पहनाया।" रजनी बोली, "सब तेरी संगत का असर।" दोनों हंसने लगीं।

शीला ने पूजा और अनुष्ठान के बारे में सुना और नीतु से बोली, "तू मुझसे कुछ छिपा रही है।" नीतु की हड़बड़ाहट देखकर शीला को यकीन हो गया। रजनी ने शीला को एक वक्त के भोजन की बात बताई। शीला गुस्से में बोली, "नीतु, तू ऐसा कर रही है? निशा हम तीनों की बेटी है। फिर हम सब एक वक्त का भोजन क्यों नहीं कर सकते?" नीतु ने समझाकर उसका गुस्सा शांत किया और गले लगाया।


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अनुषा ने फोन करके बताया कि वह बस स्टैंड पहुंच गई है। नीतु ने उसे राघवेंद्र मंदिर के सामने रुकने को कहा और शीला को उसका पूरा ब्योरा बताने को रजनी से कहा। अशोक हरीश के साथ हॉल में हंसी-मजाक कर रहा था। नीतु उसे लेकर बस स्टैंड गई। राघवेंद्र मंदिर पहुंचकर नीतु ने फोन किया, तो सामने खड़ी एक युवती फोन उठाकर बात करने लगी। नीतु ने उसे "अनुषा" कहकर बुलाया। 28 साल की खूबसूरत अनुषा ने नीतु को "अक्का" कहकर गले लगाया। नीतु ने उसका सिर सहलाकर कहा, "चल, घर जाकर बात करते हैं।" अनुषा का सामान अशोक ने कार की डिक्की में रखा। नीतु ने उसे अपनी सहेली का पति और आत्मीय दोस्त कहकर परिचय कराया। तीनों घर की ओर निकले।

घर पहुंची, तो निशा बाहर मजदूरों से अपनी भाषा में बात कर रही थी। नीतु को देखकर "मम्म... मम्म..." कहकर दौड़ी और उससे लिपट गई। नीतु ने मजदूरों से कहा, "क्या मेरी बेटी तुम्हें परेशान कर रही थी? वह शरारती है, लेकिन उसे ऊपर मत जाने देना। वह रेत और ईंटों से खेलकर चोट खा सकती है।" मजदूर हंसकर बोले, "नहीं, मैडम, निशा बहुत चंचल है। हम उसे ऊपर नहीं जाने देते। अगर गलती से आई, तो चिंता मत करो, हम उसका ध्यान रखेंगे।"

निशा अनुषा को देखकर "पिलपिल" नजरों से देख रही थी। अनुषा ने उसके गाल सहलाए, लेकिन निशा मां से चिपककर सिर हिलाकर मना कर रही थी। घर में नीतु ने अनुषा का सबसे परिचय कराया। बच्चों के स्टडी टेबल वाले कमरे में सिंगल बेड लगवाकर अनुषा का सामान रखा। सबने अनुषा से प्यार से बात की, जिससे उसकी आंखों में आंसू आ गए।

शीला ने उसका सिर सहलाकर पूछा, "क्यों रो रही है? हमारे साथ रहने में कोई परेशानी है?" अनुषा ने सिर हिलाकर कहा, "नहीं, मुझे बहुत खुशी है। दो साल पहले मां के जाने के बाद मैं अकेली थी। तुम सबके प्यार से मेरी आंखें भर आईं। मैं तुम सबके साथ रहकर बहुत खुश हूं।"


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नीतु ने उसे गले लगाकर कहा, "खुद को बाहरी मत समझ। अपनी बड़ी बहन के घर आई है। फिर यह घर तुझे भी अपना लगेगा। दीपावली के बाद सब अपने गांव चले जाएंगे। पति और बच्चे स्कूल-कॉलेज जाएंगे। तब घर में मैं और मेरी चिन्नी होंगी।" अनुषा मां के पैरों से लिपटकर रो रही थी। निशा उसे देख रही थी। नीतु ने उसे गोद में लिया, तो निशा ने अनुषा के आंसू पोंछे। अनुषा ने उसे गोद में लेकर दुलारा। शाम तक अनुषा घर में घुलमिल गई और रसोई में सबकी मदद की।

रात के खाने के बाद नीतु ने हरीश, अशोक और दोनों लड़कों को हॉल में सोने को कहा। शीला और रजनी को बच्चों के कमरे में भेजा। अशोक बोला, "नीतु, यह ठीक नहीं। पुट्टी को मेरे साथ सुला दे, वरना..." सब उसे और नीतु को देखने लगे। नीतु ने कमर पर हाथ रखकर अशोक के सामने खड़े होकर कहा, "वरना क्या कर लोगे?" अशोक डरकर बोला, "अगर पुट्टी नहीं सोई, तो मैं अकेला सो जाऊंगा।" पहले शेर की तरह गरजने वाला अशोक अब डरा हुआ था। रजनी जोर-जोर से हंसने लगी। अशोक ने नीतु की ओर देखा, जो उसे घूर रही थी। उसने तुरंत चादर मुंह पर खींचकर लेट गया। हरीश हंसकर बोला, "अशोक, मेरी पत्नी के सामने कोई नहीं टिकता। तू सिम्हन को क्यों गुस्सा दिलाता है?" नीतु ने हरीश को घूरा, तो वह भी चुप हो गया। बच्चे पहले ही मां से डरकर चादर ओढ़कर सो चुके थे। नीतु निशा, रश्मि और अनुषा को अपने कमरे में ले गई और अनुषा से कुछ देर बात करके सो गई।


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सुबह नाश्ते के समय रमेश आया। सबको विश करके अशोक और हरीश से बात की और पूछा, "इस बुधवार को पहली मंजिल की छत डालें?" हरीश ने नीतु को बुलाया। नीतु बोली, "डालो, दिन भी अच्छा है। लेकिन कंक्रीट यहीं मिलाओगे या रेडीमिक्स लाओगे?" रमेश बोला, "लॉरी से रेडीमिक्स लाऊंगा।" नीतु ने हरीश से कहा, "अपने भाई को फोन करके कैटरर का नंबर लो। बुधवार को मजदूरों और घरवालों के लिए खाना और मिठाई की व्यवस्था करवाओ।" अशोक नाश्ता करके फैक्ट्री के काम से गांव लौट गया। नीतु उसके साथ बाहर आई और बोली, "बुधवार शाम को आने की कोशिश करना। बेटी और होने वाली बहू के साथ यह हमारी पहली दीपावली है। रवि को भी साथ लाना, बेचारे को बस से नहीं आना पड़े।"

नीतु अनुषा के साथ कमरे में बैठी और बोली, "अनु, तूने अभी तक शादी क्यों नहीं की? तेरी उम्र में मेरे दोनों बच्चे स्कूल जा रहे थे। किसी से प्यार किया?" अनुषा शरमाते हुए बोली, "अक्का, मैं तुम्हें दिल से बड़ी बहन मानती हूं। सब कुछ बताऊंगी। मास्टर्स पूरा करके टीचर या प्रोफेसर बनना चाहती थी, लेकिन तब पापा गुजर गए। उनकी प्राइवेट नौकरी थी, तो आय रुक गई। मेरी और मां की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। तभी मुझे XXX प्राइवेट बैंक में नौकरी मिली। पापा के जाने के बाद मां की तबीयत बिगड़ती गई। मेरा ध्यान उसी पर था, तो शादी की ओर मन नहीं गया। रिश्तेदार पापा के जाने के बाद हमसे दूर हो गए। दो साल बाद मां भी मुझे अकेला छोड़कर चली गईं। उनका अंतिम संस्कार भी मुझे करना पड़ा। बाद में रिश्तेदारों ने शादी की बात की, लेकिन मैंने उनकी नहीं सुनी। अकेली लड़की को लोग कैसे देखते हैं, तुम जानती हो। किराए के मकान का मालिक भी मुझे गलत नजर से देखता था। लेकिन मैं ज्यादा बात नहीं करती थी, तो उसकी कोशिशें नाकाम रहीं। अक्का, मुझे भी शादी, पति और बच्चों की इच्छा है, लेकिन पता नहीं यह सब होगा या नहीं।"

नीतु ने उसका गाल सहलाकर कहा, "अब तू अकेली नहीं। मैं और दो बहनें तेरे साथ हैं। हम सब मिलकर तुझे अच्छा लड़का ढूंढकर शादी करवाएंगे। लेकिन तूने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया कि किसी से प्यार किया?"

अनुषा शरमाकर बोली, "अक्का, कॉलेज में प्रताप नाम का लड़का मुझे बहुत पसंद था। बेचारा अनाथ था, खुद मेहनत करके पढ़ता था। लेकिन वह मूर्ख मेरी भावनाएं नहीं समझा और एक दिन गांव से गायब हो गया। आज भी मुझे उसकी याद आती है, लेकिन पता नहीं उसे मेरा ख्याल है या वह शादी करके अपनी पत्नी के साथ खुश है। उसे देखे सात साल हो गए।"

नीतु ने मन में सोचा, "दोनों तरफ आग अभी जल रही है। शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा के दिन इनकी मुलाकात करवानी होगी।" उसने पूछा, "तू ड्यूटी कब से जॉइन करेगी? कुछ दिन का समय दिया है?" अनुषा बोली, "अक्का, मैं दूर से आई हूं, तो 10 दिन का समय है। पहले सोमवार से ड्यूटी जॉइन करने का सोचा था, लेकिन तुम सब से मिलकर और परिवार का प्यार पाकर दीपावली के बाद ड्यूटी शुरू करूंगी।"
 
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नियति से बंधी नीतू - Part 71

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नीतु ने अनुषा की पीठ सहलाते हुए कहा, "चल, बाहर चलें। आज रविवार है, मेरा पति अपनी बेटी के साथ बंदर बन रहा होगा।" बाहर निकली, तो हरीश निशा के साथ आंगन में खेल रहा था। नीतु ने गुस्से में हरीश को डांटा, "री, वह छोटी बच्ची है, लेकिन तुम्हें तो अक्ल होनी चाहिए! इतनी धूप में बाहर खेला रहे हो? उसे टोपी पहनाने की भी फिक्र नहीं। मेरी बेटी के लिए सब कुछ मुझे ही बताना पड़ेगा? पिता होकर तुममें जिम्मेदारी नहीं है?"

शीला और रजनी नीतु की चीख सुनकर बाहर आईं। रजनी बोली, "नीतु, आज छुट्टी है, वह बेटी के साथ खेल रहा है। इतना गुस्सा क्यों? प्यार से समझा सकती थी।"

नीतु ने रजनी को हरीश की ओर धकेलते हुए कहा, "मुझे कुछ नहीं पता। तू ही प्यार से समझा। लेकिन मेरा कहा काम होना चाहिए, वरना पति के साथ तुझे भी बाहर खड़ा कर दूंगी।"


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सुरेश, गिरीश और रश्मि को हंसते देख नीतु बोली, "तुम्हें यह कॉमेडी लग रही है? खेल बंद करो और पढ़ने जाओ, वरना ग्रहचाल ठीक नहीं रहेगा।" तीनों तुरंत कमरे में पढ़ने चले गए। निशा मां के गुस्से की परवाह न करते हुए उसे खेलने बुलाने लगी।

शीला हंसकर बोली, "मेरी प्यारी बेटी ही तुझसे नहीं डरती।" नीतु ने निशा का सिर सहलाकर कहा, "वह अभी छोटी है। स्कूल जाने की उम्र हो, फिर देख, इसे भी इसके पिता के साथ बूढ़ी चुड़ैल का त्योहार मनवाऊंगी।" निशा दौड़कर पापा के कंधे पर चढ़ गई। हरीश ने निशा को एक्टिवा के आगे खड़ा किया और बोला, "चल, बेटी, हमें तुम्हारी मां से कोई नहीं बचाएगा।" नीतु ने चप्पल पहनी और हरीश के पीछे बैठकर बोली, "चलो।"


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निशा चुपचाप इधर-उधर देख रही थी। दुकान पहुंचकर नीतु ने उसे गोद में लिया। निशा तरह-तरह की टोपियां देखकर "मम्म... मम्म..." कहकर दिखाने लगी। नीतु ने उसकी खुशी देखकर तीन टोपियां और रश्मि के लिए दो टोपियां चुनीं। वहां से सोने की दुकान गए और लक्ष्मी मूर्तियां लीं। नीतु ने हरीश से कहा, "अनुषा के लिए एक सोने की चेन लें। वह नकली चेन पहन रही है।" हरीश ने सहमति दी और चेन खरीदी। निशा "पप्पा... पप्पा..." कहकर हर तरफ इशारा कर रही थी। हरीश उसकी खुशी में डूबकर बोला, "बेटी, तू बड़ी हो जा, सब ले दूंगा।" दुकान से बाहर निकलते ही निशा ने गुब्बारे वाले को देखकर मां की मंगलसूत्र खींचकर गुब्बारे मांगे। नीतु ने पांच-छह गुब्बारे लिए। निशा की खुशी उसके चेहरे की मुस्कान में झलक रही थी।

नीतु ने अनुषा को बुलाकर सबके सामने उसकी नकली चेन उतारी और सोने की चेन पहनाई। बोली, "मेरी बहन का नकली चेन पहनना मुझे पसंद नहीं। अब एक शब्द भी मत बोलना, चुपचाप काम कर।" उसे रसोई भेज दिया। निशा ने भाइयों और रश्मि को पढ़ते देखा, फिर पापा के पास जाकर लैपटॉप पर कार्टून देखने लगी।


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अगले दिन सोमवार को हरीश गिरीश को स्कूल छोड़कर लौटा। नीतु ने निशा को घर पर छोड़ा और हरीश, शीला को लेकर प्रताप के घर गई। पहले से ली चाबी से घर खोला, दोनों को वर-वधू की तरह सजाया और सोने की दुकान गई। शीला के लिए मंगलसूत्र लिया। दोनों को कार में बिठाकर नीतु ने पहले से चुनी दो डोर की सोने की चेन में मंगलसूत्र बनवाया, काले मोती और सोने के दाने लगवाए। फिर फूल, पूजा सामग्री और गुलाब का हार खरीदा। वहां से XXX गांव के बाहर श्रीनिवास मंदिर गई। पुरोहित से कहा, "मेरी सहेली को उसके पति से दोष निवारण के लिए मंगलसूत्र दोबारा पहनवाना है।" हरीश और शीला की शास्त्रोक्त शादी करवाकर नीतु ने सहेली को अपनी सौतन बनाया। घर लौटते वक्त शीला हरीश के सीने पर सिर रखकर खुशी के आंसू बहा रही थी।

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नीतु ने मजाक में कहा, "मेरे लिए इतनी मस्त सौतन आई और तू आंसू बहा रही है।" प्रताप के घर जाकर दोनों ने कपड़े बदले और अपने घर की ओर निकले। रास्ते में शीला को गले लगाकर हरीश ने कहा, "अब मुझे दो पत्नियों को संभालना है। शीला, अगर तू नहीं रुकी, तो यहीं चुदाई शुरू करनी पड़ेगी।" दोनों सौतनें उसे घूरने लगीं। घर पहुंचकर नीतु ने शीला का हाथ पकड़कर कहा, "तुझे विधिवत गृहप्रवेश नहीं करवा सकती, माफ कर।" शीला ने उसे गले लगाकर कहा, "तेरे जैसा त्याग कोई नहीं कर सकता। मैं हरीश की पत्नी बनकर बहुत खुश हूं। तेरा ऋण जिंदगी भर नहीं चुका सकती। चल, जल्दी हरीश की पत्नी बनकर अपनी बेटी को गोद में लेना चाहती हूं।"

निशा अनुषा और रश्मि के साथ कार्टून देखकर चीख रही थी। शीला ने घर में कदम रखकर निशा को गोद में लिया। हरीश की पत्नी के रूप में उसे गोद में लेने का अनुभव पहले से अलग था।


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दो दिन बाद बुधवार को घर के सामने तीन-चार कंक्रीट लॉरियां खड़ी थीं। निशा सोफे पर चढ़कर खिड़की से देख रही थी और बाहर जाने के लिए दरवाजा खोलने की जिद कर रही थी। नीतु मना कर रही थी। शीला ने निशा को टोपी पहनाकर गोद में लिया और लॉरियों को दिखाया। नीतु, रश्मि, रजनी और अनुषा भी बाहर आईं। निशा लॉरियों के घूमते ड्रम को देख रही थी। रमेश ने निशा को गोद में लेकर ऊपर ले जाकर कंक्रीट का काम दिखाया। निशा नीचे मां और बाकियों को देखकर चीख रही थी। दोपहर तक छत का काम खत्म होने से पहले कैटरर ने खाना पहुंचा दिया। अनुषा, रजनी, शीला और रश्मि मजदूरों को खाना परोस रही थीं। नीतु निशा को गोद में बिठाकर दही और दो जलेबी खिला रही थी। मजदूरों और घरवालों ने एक ही खाना खाया। रमेश और मजदूरों का नीतु और उसके परिवार के लिए सम्मान बढ़ गया। निशा खाना खाकर आंगन में दौड़ रही थी और मजदूरों को मिठाई दे रही थी। मजदूर उसके मासूम मन को देखकर मुस्कुरा रहे थे। शीला ने हरीश के दिए पैसे से 14 मजदूरों और 8 लॉरी ड्राइवरों को निशा के हाथ से 500 रुपये और मिठाई दिलवाए। वे खुशी से निशा को आशीर्वाद देकर गए। अशोक ने पहले ही फोन करके बताया था कि वह और रवि गुरुवार शाम तक पहुंचेंगे।

गुरुवार को नरक चतुर्दशी के दिन कॉलोनी के बच्चों के पटाखों की आवाज से डरकर निशा कमरे में बिस्तर पर चादर ओढ़कर सो गई। हरीश ने उसे डर की वजह से नहीं बुलाया। बाकी घरवालों ने भी उसका साथ दिया। लेकिन नीतु को बेटी को डरपोक बनाना मंजूर नहीं था। उसने निशा को गोद में लेकर बाहर लाई। सब बोलने से पहले उसने चुप रहने को कहा। निशा डर से मां से लिपटी थी, लेकिन नीतु ने सुरेश और गिरीश को पटाखे जलाने को कहा। हरीश ने कहा कि उसने पटाखे नहीं लिए। नीतु गुस्से में बोली, "ऐसे डरपोक बनाएंगे, तो उसमें हिम्मत कैसे आएगी? मेरी बेटी अब से डर पर काबू पाएगी।" उसने बच्चों को पटाखे लाने भेजा।


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हरीश पटाखे लाया। नीतु ने निशा को गोद में लेकर गिरीश, सुरेश और रश्मि को पटाखे जलाने को कहा। 10-15 मिनट तक निशा पटाखों की आवाज से डरकर चीख रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसका डर कम हुआ और वह उत्सुकता से देखने लगी। शाम तक उसका डर पूरी तरह खत्म हो गया। वह पापा को खींचकर पटाखे जलाने लगी। शीला हंसकर बोली, "नीतु, तू कमाल है। पहले डर की चिंता थी, अब वह सबसे पहले पटाखे जलाने दौड़ रही है।" हरीश निशा को गोद में लेकर पटाखे जलवाकर खुश कर रहा था। अनुषा, रश्मि, नीतु, रजनी और शीला भी फुलझड़ी और चकरी जला रही थीं। निशा खुशी से उछल रही थी। तभी रवि और अशोक आए। उन्होंने ढेर सारे पटाखे लाए थे। अशोक निशा को गोद में लेकर पटाखे जलवाने लगा। खाने के वक्त भी निशा पटाखों की बात कर रही थी। शीला उसे खाना खिलाने के लिए पीछे-पीछे दौड़ रही थी।

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अगले दिन लक्ष्मी पूजा के लिए घर को फूलों से सजाया गया। गिरीश ने लिविंग हॉल में अपनी कला से शानदार मंडप बनाया। नीतु और हरीश ने सबके लिए नए कपड़े लाए। अनुषा नीली रेशमी साड़ी में चमक रही थी। खाना घर में बनाने का फैसला था। हरीश के पुराने किराए के घर की सास दोपहर को आई और शीला, रजनी, अनुषा की मदद की। रश्मि भी सहायता कर रही थी। नीतु को रसोई में नहीं आने दिया गया। वह बाहर के काम देख रही थी। निशा अशोक के साथ बंदर की तरह खेल रही थी।

दोपहर में प्रताप ने हरीश को फोन करके कहा, "अण्णा, अब तो आ सकता हूं? कॉलोनी गेट पर तुम्हारा फोन इंतजार कर रहा था।" हरीश ने नीतु को बताया। नीतु ने इशारा करके अनुषा को कमरे में बुलाया और बाहर न आने की सख्त हिदायत दी। प्रताप निशा की पसंद की मिठाई और पटाखे लेकर आया। हरीश, रवि और अशोक का आशीर्वाद लेकर निशा को दुलारने लगा। नीतु ने निशा को अशोक को सौंपा और प्रताप को कमरे में ले गई। प्रताप और अनुषा ने इतने साल बाद एक-दूसरे को देखकर खुशी और आश्चर्य महसूस किया। नीतु हंसकर बोली, "तुम दोनों को 15 मिनट का समय देती हूं। जो बात करनी हो, कर लो। लेकिन शादी का फैसला नहीं लिया, तो फिर मिलने नहीं दूंगी।" वह दरवाजा बंद करके बाहर आई। 20 मिनट बाद दोनों बाहर आए और हरीश को प्रणाम किया। हरीश ने आशीर्वाद देते हुए कहा, "इतने साल बाद तुम दोनों का मिलन नीतु की वजह से हुआ। उसने तुम्हारा ट्रांसफर करवाकर बुलाया। उसने किसी को नहीं बताया।" अनुषा ने नीतु को गले लगाकर रोते हुए कहा, "अक्का, तुम बहुत महान हो। मेरे रिश्तेदारों ने भी जो नहीं किया, वह तुमने मेरे लिए किया। तुम्हारा ऋण जिंदगी भर नहीं चुका सकती।" शीला ने उसका सिर सहलाकर कहा, "उसे अक्का कहती है, तो बहन-बहन में कैसा ऋण? अब ऐसी बात मत करना। हम रक्त से नहीं, लेकिन एक अटूट परिवार हैं।" अनुषा ने हामी भरी और उसे गले लगाया। प्रताप और अनुषा ने सबका आशीर्वाद लिया। बच्चों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।


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शाम को जल्दी हरीश के स्कूल के प्रिंसिपल का परिवार, रमेश का परिवार और नौ आमंत्रित परिवारों के सामने पुरोहित की मौजूदगी में नीतु और हरीश ने निशा के साथ देवी पूजा की। नीतु ने आगे न बढ़कर हरीश की दूसरी पत्नी शीला और प्रेमिका रजनी को आगे किया। निशा के हाथों नौ कन्याओं को हल्दी, कुमकुम, फल, फूल, साड़ी और चांदी की लक्ष्मी मूर्ति दान दी गई और उनका आशीर्वाद लिया गया। खाना तैयार था। हरीश ने घर और मेहमानों के बच्चों को बाहर ले जाकर पटाखे जलवाए। प्रिंसिपल की पत्नी की गोद में निशा पटाखों की आवाज पर नाच रही थी। अनुषा ने उसे गोद में लेकर अशोक को सौंपा। सभी बच्चे पटाखे जलाकर खुश थे। प्रिंसिपल ने हरीश की पीठ थपथपाकर कहा, "तुमने त्योहार में शानदार पारिवारिक माहौल बनाया। मुझे तुम पर गर्व है।" हरीश बोला, "यह सब मेरी पत्नी और उसकी सहेलियों की वजह से।" प्रिंसिपल और उनकी पत्नी ने नीतु, रजनी और शीला की तारीफ की। बाकी मेहमान भी शामिल हुए। अशोक और रवि के साथ निशा अपने भाइयों, रश्मि और मेहमानों के बच्चों के साथ पटाखे जलाकर चीख रही थी। रात को सब एक परिवार की तरह खाना खाकर खुश थे। निशा ज्यादा उछल-कूदकर शीला की गोद में सो गई।

मेहमान एक-एक करके अपने घर गए। घरवाले सबको प्यार से विदा कर रहे थे। रमेश की पत्नी भारती की नजर हरीश पर थी, जिसे रजनी और नीतु ने देखकर आंखों से इशारा करके हंस लिया।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 72

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अगले दिन, शनिवार को बलिपद्यामी के त्योहार पर नीतु सुबह रजनी और अशोक को साथ लेकर गई थी। लौटने पर वह जन्मदिन की पार्टी के लिए सामान लाई। रश्मि ने पूछा, "मम्मी, यह सब किसके लिए?" नीतु ने हरीश की ओर देखकर मुस्कुराते हुए भौंहें उठाईं। हरीश को अचानक याद आया। उसने निशा को गोद में लेकर दुलारते हुए कहा, "आज हमारी राजकुमारी का जन्मदिन है।" सबको पता चला कि निशा एक साल की हो गई। सभी ने बारी-बारी से उसे गोद में लेकर दुलारा। निशा को कुछ समझ नहीं आया। वह एक की गोद से दूसरी की गोद में जा रही थी और सबको हैरानी से देख रही थी कि आज सब इतना प्यार क्यों दिखा रहे हैं।

प्रताप के साथ पहली बार बाहर गई अनुषा ने निशा के लिए बार्बी ड्रेस खरीदी। प्रताप ने पैसे देने की कोशिश की, लेकिन अनुषा ने रोका और कहा, "री, तुम्हारे पैसे पर मेरा पूरा हक है, लेकिन यह ड्रेस मैं अपनी कमाई से लेना चाहती हूं। निशा के लिए गिफ्ट तुम्हारे पैसे से लूंगी।" उसने छह-सात महंगे खिलौने गिफ्ट के लिए लिए।

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उस दिन सिर्फ घरवाले निशा का जन्मदिन मनाने वाले थे। नीतु के माता-पिता की जगह लेने वाले भैया -भाभी और उनके परिवार ने वीडियो कॉल से निशा को बधाई दी। निशा ने दादा-दादी को पहचानकर फोन पर उनके चेहरे सहलाए और खुशी जताई। उनके दोनों नाती-पोतों ने भी निशा को बधाई दी और अपनी चचेरी बहन से खूब बात की। नीतु के अनुरोध पर आश्रम का मैनेजर और सुधा भी आए।

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निशा के जन्मदिन के लिए टॉम एंड जेरी का केक लाया गया। निशा उसे पकड़ने दौड़ी। गिरीश और सुरेश के लिए उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। हरीश ने निशा को गोद में लेकर केक कटवाया और पहला टुकड़ा खिलाया। निशा ने केक का स्वाद चखकर अपने हाथ का टुकड़ा भी मुंह में ठूंस लिया। सब हंसने लगे। सबने खुशी-खुशी खाना खाया। मैनेजर अपनी पत्नी के साथ होटल लौटने लगा, तो नीतु उसे छोड़ने गई। उसने मैनेजर की पत्नी से खूब बात की और गांव आने पर मिलने को कहा। मैनेजर ने पत्नी को अंदर भेजकर नीतु को लॉज के पास अंधेरे में ले जाकर उसके पैर पकड़े और बोला, "मैडम, उस दिन से आपको भूल नहीं पा रहा। एक बार फिर वह सुख भिक्षा के रूप में दे दो।" नीतु समझ नहीं पाई कि क्या जवाब दे। उसने कहा, "देखते हैं, अब उठो।" मैनेजर खुश होकर उसे गले लगाकर होंठ चूमने लगा और उसके कूल्हों को मसलने लगा। नीतु के शरीर में कामवासना भड़कने लगी और वह अनजाने में उसका साथ देने लगी।

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मैनेजर ने घुटनों पर बैठकर नीतु का चूड़ीदार टॉप ऊपर उठाया और लेगिंग्स को घुटनों तक खींचा। नीली पैंटी पर नाक रखकर उसकी नारीत्व की सुगंध ली, फिर पैंटी उतारकर उसकी सफेद चूत पर पांच-छह चुम्मे देकर चाटने लगा। कई दिनों बाद पुरुष स्पर्श से नीतु जल्दी रस छोड़ बैठी। मैनेजर ने उसका रस एक बूंद भी बर्बाद किए बिना पी लिया। नीतु ने उसे पीछे धकेला, पैंटी और लेगिंग्स ऊपर खींची और घर की ओर निकल गई। मैनेजर ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "मैडम, आपके लिए इंतजार करूंगा। निराश मत करना।" नीतु ने अगली बार कोशिश करने का वादा किया और घर चली गई।

दोपहर में अशोक, रवि, रजनी और रश्मि अपने गांव गए। नीतु ने शीला को उस हफ्ते रुकने को कहा और सबको प्यार से विदा किया। रवि को प्रणाम करके नीतु ने अशोक को गले लगाया और उदास रश्मि को सांत्वना देते हुए कहा, "तुझे और गिरीश को दूसरी पीयूसी के बाद एक ही कॉलेज में डालूंगी। तब तुम उसके साथ खूब समय बिताना।" रश्मि शरमाकर नीतु के सीने में मुंह छिपा लिया। रजनी ने हरीश को गले लगाकर फुसफुसाते हुए कहा कि अगली बार ज्यादा दिन रुकेगी। सबने निशा को दुलारा और गिरीश, सुरेश, अनुषा से फिर मिलने का वादा करके अपने गांव गए।

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रात को खाने के बाद नीतु ने अनुषा के लिए बच्चों के स्टडी रूम में बिस्तर तैयार किया और कहा, "शादी तक यह तेरा कमरा है।" उसने तीनों बच्चों को अपने साथ सुलाया और नवविवाहित जोड़े हरीश और शीला को फर्स्ट नाइट के लिए बच्चों के कमरे में भेजा।

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मध्यरात्रि में अनुषा बाथरूम गई, तो एक औरत की कराह सुनाई दी। वह सोचने लगी कि नीतु अक्का बच्चों के साथ सो रही है, तो यह आवाज कहां से? उसे शीला की याद आई। चुपके से पीछे का दरवाजा खोलकर वह कमरे की खिड़की तक गई। खिड़की थोड़ी खुली थी। उसने झांका, तो हरीश का विशाल लिंग शीला की चूत में घुस रहा था। अनुषा पहले चौंकी, फिर उसका यौवन जाग उठा। उसने नाइटी के ऊपर से अपनी चूत रगड़नी शुरू की।

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उसी वक्त नीतु भी जागकर बाथरूम गई। अनुषा के कमरे का दरवाजा खुला देखकर वह अंदर गई। अनुषा को न पाकर वह घबरा गई। उसने हर जगह ढूंढा, फिर पीछे का दरवाजा खुला देखकर वहां गई। अनुषा को खिड़की से झांकते और नाइटी के ऊपर चूत रगड़ते देखकर नीतु पहले घबराई, फिर मुस्कुराई। हरीश का लिंग शीला की चूत में धक्के मार रहा था। अनुषा की कामवासना चरम पर थी और वह अपने पहले स्कलन के करीब थी। जैसे ही उसकी चूत से रस छूटने लगा, उसने चीख दबाने के लिए मुंह पर हाथ रखा और कांपते पैरों से वहीं बैठ गई। नीतु ने उसे संभालने की सोची, लेकिन हालात देखकर चुप रही। 10-15 मिनट बाद अनुषा उठी और फिर झांका। हरीश अभी भी शीला को चोद रहा था। अनुषा मुस्कुराकर अपने कमरे की ओर गई, लेकिन नीतु पहले ही वहां पहुंच चुकी थी। अनुषा कमरे में लेटी, लेकिन उसकी आंखों के सामने हरीश का लिंग ही घूम रहा था। उसने नाइटी उठाकर देखा, तो उसकी गुलाबी पैंटी रस से भीगी थी और स्कर्ट-नाइटी भी गीली थी। वह शरमाकर उदास हो गई।


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नीतु बेटी का सिर सहलाते हुए सोच रही थी, "17 साल बाद मेरे पति को मेरी तरह एक और सील पैक चूत मिलेगी।"

सुबह दूध गर्म करते वक्त अनुषा ने कहा, "दीदी, आज से ड्यूटी जॉइन कर लूं?" नीतु ने हामी भरी और छेड़ते हुए कहा, "यह सब अपने होने वाले पति प्रताप से पूछना चाहिए, मुझसे क्यों पूछ रही है?" अनुषा बोली, "अक्का, इस अनाथ को तुमने बहन, भाई और परिवार का प्यार दिया। सात साल बाद प्रताप से मिलवाया। तुम्हारी आज्ञा मेरे लिए सबसे जरूरी है।" नीतु ने उसका सिर सहलाकर माथे पर चूमा और बोली, "मैं मजाक कर रही थी। आज पहला दिन है, मैं तुझे बैंक छोड़ूंगी और रास्ता दिखाऊंगी। कल से मेरी एक्टिवा ले जाना।" अनुषा ने कहा, "दीदी, मैं एक्टिवा लूंगी, तो तुम कैसे घूमोगी?" नीतु हंसकर बोली, "बाहर देख, घर में दो-दो गाड़ियां हैं। मुझे कहां जाना है? जरूरत पड़ी, तो कार से चली जाऊंगी।" तभी शीला रसोई में आई। नीतु को कुछ सूझा और उसने पूछा, "क्या, रात को नींद आई या जागरण हुआ?" और अनुषा की ओर आंख मार दी। शीला ने ज्यादा ध्यान न देकर हंसकर चुप रह गई, लेकिन अनुषा को रात का दृश्य याद आया और वह शरमाकर सिर झुका लिया। नीतु ने देखा कि अनुषा जल्द ही हरीश के नीचे लेटने को तैयार है। उसने अनुषा को हिलाकर कहा, "क्या खड़े-खड़े सपने देख रही है? जा, तैयार हो, नाश्ता करके बैंक छोड़ूंगी।"

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नाश्ते के वक्त निशा भाइयों के साथ खेल रही थी। शीला उसे खाना खिला रही थी। अनुषा हरीश के सामने बैठकर नाश्ता कर रही थी और उसे चोरी-छिपे देखकर शरमा रही थी। नीतु ने गौर किया। हरीश और बच्चों के साथ नीतु अनुषा को बैंक छोड़ने गई। सुरेश बोला, "अम्मा, आज तुम मुझे छोड़ो।" वह SUV की पीछे की सीट पर बैठ गया। निशा ने भाई को गाड़ी में देखकर "मम्म... मम्म..." कहकर मां को बुलाया। शीला ने निशा को अनुषा की गोद में बिठाया, लेकिन वह वहां से खिसककर सुरेश के पास बैठ गई। नीतु ने बेटे को बहन संभालने को कहा और उसे स्कूल छोड़ने गई। सरकारी स्कूल होने के बावजूद वहां की पढ़ाई मशहूर थी, इसलिए बड़े लोग अपने बच्चे वहां पढ़ाते थे। नीतु ने गिरीश को गेट पर उतारा। निशा ने भाई को चूमा और टाटा किया। नीतु ने उसे गोद में लेकर आगे बिठाया। हरीश के साथ काम करने वाली कुछ अध्यापिकाएं निशा को देखकर रुक गईं। नीतु उन्हें अच्छे से जानती थी। पूजा में उनके परिवार आए थे। वह उनसे बात करने लगी। तभी हरीश आया। नीतु ने देखा कि तीन खूबसूरत अध्यापिकाएं हरीश को प्यार से देख रही थीं। उनसे विदा लेकर नीतु निशा को गोद में लेकर अनुषा के साथ बैंक गई। मैनेजर के चैंबर में जाकर बोली, "नमस्ते सर, मैं नीतु, श्रीधर (विदेश में भाई) की बहन। MD ने आपको फोन किया होगा।" मैनेजर उठकर खड़ा हुआ और नीतु को बैठने को कहा। अनुषा को गर्व हुआ कि इतने बड़े बैंक का मैनेजर उसकी दीदी को सम्मान दे रहा है। नीतु ने अनुषा की ओर इशारा करके कहा, "सर, यह मेरी बहन है। इसका ट्रांसफर हुआ है। इसका ध्यान रखें।" मैनेजर बोला, "मैडम, आपको आने की जरूरत नहीं थी। एक फोन पर मैं घर आ जाता। अनुषा को कोई परेशानी नहीं होगी।" उसने अनुषा का ड्यूटी रिपोर्ट करवाया। नीतु निशा के साथ घर लौट गई।

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नीतु ने शीला को बताया कि अनुषा ने रात को उसकी और हरीश की चुदाई देखी थी। शीला घबराई, लेकिन नीतु ने उसे शांत किया और बताया कि अनुषा ने चूत रगड़कर स्कलन किया। शीला ने राहत की सांस ली और बोली, "तो हमारे पतिदेव को एक और फ्रेश चूत मिलेगी।" नीतु बोली, "हां, लेकिन इस बार तू हरीश को तैयार करना।" नीतु ने शाम को प्रताप को फोन करके अनुषा को घर छोड़ने को कहा।

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दोनों प्रेमी घूमकर, लिप किस और थोड़े सहलाने में समय बिताकर घर पहुंचे। अनुषा का शरीर कामवासना से भड़क रहा था।

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रात को हरीश से चुदवाते वक्त शीला ने अनुषा के उन्हें देखने की बात बताई और उसकी कामवासना शांत करने को कहा। हरीश ने पहले मना किया, लेकिन दोनों पत्नियों की इच्छा समझकर अनुषा की चूत का सील तोड़ने को तैयार हो गया। अनुषा उस रात भी खिड़की से उनकी चुदाई देख रही थी। नीतु ने उसे नाइटी के ऊपर चूत रगड़ते देखा। अनुषा ने स्कर्ट नहीं पहनी थी और हरी पैंटी पर चूत रगड़ रही थी। पांच मिनट में वह रस छोड़कर पैंटी गीली कर चुकी थी और कामवासना में बिस्तर पर गिर गई। सात-आठ साल से प्रताप से प्यार करने के बावजूद अनुषा हरीश के लिंग के मोह में फंस गई थी। उसने शादी से पहले हरीश से अपनी कौमार्य तुड़वाने का फैसला किया, लेकिन उसे सही मौका चाहिए था।
 
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नियति से बंधी नीतू - Part 73
A photograph of Neetu and Pratap in an intimate bedroom setting, sharing a passionate moment.


अगले दिन, रविवार को हरीश, बच्चे और अनुषा के जाने के बाद नीतु नहाने गई। 14 दिन तक पुरुष के धक्कों के बिना वह बेचैन थी। उसने प्रताप को उसके घर के पास बुलाया। शीला से कुछ काम की बात कहकर और निशा को चूमकर वह अपनी कामवासना शांत करने निकली। प्रताप बाहर इंतजार कर रहा था। नीतु घर में घुसी, दरवाजा बंद किया और उसे बेडरूम में ले जाकर अपने चूड़ीदार, ब्रा और पैंटी उतारी। नंगी होकर उसने प्रताप के कपड़े उतारे और बिस्तर पर पैर फैलाकर लेट गई। प्रताप को अपनी जांघों के बीच लिया। नीतु की रस टपकाती चूत पर प्रताप ने चुम्मा दिया और जीभ से चाटकर उसकी पंखुड़ियां फैलाईं। जितना संभव था, जीभ अंदर डालकर चाटने लगा। दो मिनट में ही नीतु ने रस का फव्वारा छोड़ा, जिसे प्रताप ने पी लिया।

प्रताप ने नीतु को उल्टा लिटाया और उसके सफेद, गोल, मुलायम कूल्हों को मसला, उन पर चुम्मों की बौछार की। कूल्हों को मसलकर तृप्त होने के बाद उसने उन्हें फैलाया और हल्के भूरे रंग के गांड के छेद की सुगंध ली। फिर जीभ से चाटने लगा। नीतु की गांड का स्वाद प्रताप को बहुत पसंद आया। उसने कूल्हों को और फैलाकर जीभ को जितना संभव था, अंदर डालकर चाटा। न हरीश ने, न अशोक ने उसकी गांड को इतनी गहराई तक चाटा था। नीतु घुटनों पर झुकी और गांड को और फैलाकर प्रताप को और रस दिया। 15 मिनट चाटने के बाद प्रताप ने अपने तने लिंग को उसकी गांड के छेद पर रगड़ा। नीतु ने रोका और बोली, "पहले मेरी चूत की चूल शांत कर। आज तू मेरी गांड भी मारकर ही जाऊंगा।"

प्रताप ने नीतु को झुकाकर बैठाया और छह-सात धक्कों में अपना लिंग उसकी चूत में डाला। कमर हिलाकर उसकी चूत को चोदने लगा। नीतु ने भी उसके जोरदार धक्कों का जवाब देते हुए कूल्हे पीछे धकेले। 10 मिनट बाद नीतु की चूत से रस बहने लगा। प्रताप ने उस रस से अपना लिंग नहलाया और उंगलियों से उसे नीतु की गांड में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। नीतु ने उसका हाथ हटाया और बोली, "अब अपनी तुन्नी मेरी गांड में डाल और अपनी इच्छा पूरी कर।" प्रताप ने नीतु की गांड के छेद पर लिंग रखा, उसकी कमर पकड़ी और जोरदार धक्का मारा। दो इंच लिंग अंदर गया। नीतु की गांड बहुत टाइट थी। सात-आठ जोरदार धक्कों के बाद उसका पूरा लिंग नीतु की गांड में घुस गया, और उसके अंडकोष कूल्हों से टकराने लगे। नीतु के मुंह से चीखें और कामोन्माद की विचित्र आवाजें निकल रही थीं। थोड़ा समय देने के बाद प्रताप ने उसकी कमर पकड़कर धनाधन चोदना शुरू किया। नीतु "आह... आह... अम्मा... हां... हां..." चीख रही थी, लेकिन कूल्हे पीछे धकेलकर प्रताप से गांड चुदवाती रही। आधे घंटे तक नीतु की गांड चोदकर प्रताप ने उसमें वीर्य डाला और पूरी तृप्ति पाकर अपनी ख्वाहिश पूरी की।


A photograph of Pratap and Neetu in an intimate bedroom moment, sharing a deep conversation.


दोनों बिस्तर पर लेटे। प्रताप बोला, "नीतु, कल से मैं पांच-छह दिन के लिए दूसरी जगह जा रहा हूं। जाने से पहले तुमने मुझे अपनी गांड चोदने का मौका दिया, बहुत खुशी हुई।"

नीतु बोली, "आखिर तूने मेरी गांड चोदकर अपनी इच्छा पूरी कर ली। एक बात पूछती हूं, सच बोल। अगर अनुषा ने पहले किसी को अपनी कौमार्य दे दी होती, तो क्या तू उसे पहले की तरह प्यार करता या उसे हल्का समझता?"

प्रताप बोला, "तुम्हारा सवाल सही है। मुझे सिर्फ प्यार की भूख है, शारीरिक नहीं। मैं तुम और अनुषा को छोड़कर किसी और औरत की ओर नहीं देखूंगा। अगर अनुषा ने एक, दो या सारी दुनिया के मर्दों के साथ संबंध बनाए, तब भी वह मेरी प्यारी पत्नी रहेगी। तुम्हें ही देखो, मैं तुमसे 10 साल छोटा हूं और तुम्हारे पति को भैया कहता हूं, फिर भी उनकी पीठ पीछे उनकी पत्नी के साथ संबंध रखता हूं। मैं खुद गलत हूं, तो अनुषा से पवित्रता की उम्मीद कैसे करूं? अगर उसका मन किसी और के साथ हुआ, तो उसे पूरी आजादी है। तुम्हें मैं देवी की तरह पूजता हूं और भैया को आदर्श मानता हूं। छोड़ो, पुट्टी अपनी मां को ढूंढ रही होगी।"


A nude Neetu in a bathroom shower, contemplating a plan involving Anusha, Harish, and Bharati.


नीतु बाथरूम में फ्रेश होने गई और सोचने लगी, "तू अपने भैया को आदर्श मानता है। उनकी टोकरी में दूसरों की पत्नियां खुद गिर रही हैं और तू उनकी पत्नी को चोद रहा है। प्रताप की बात से साफ है कि अनुषा को हरीश के साथ अपनी कौमार्य देने में कोई दिक्कत नहीं। जैसे प्रताप ने मेरी चूत से पहला कामसुख लिया, वैसे ही अनुषा हरीश के लिंग से पहला कामसुख लेकर अपनी कौमार्य खोएगी। और वह आर्किटेक्ट की पत्नी भारती हरीश को कैसे देख रही थी! मेरे दूसरे पति (अशोक) ने उसे पहले ही चोद लिया है, अब हरीश की बारी है।" वह फ्रेश होकर घर लौटी।


A photograph of Nisha and Sheela in a playful home interaction, with Nisha wanting to watch cartoons.
A family moment with Neetu, Nisha, and Sheela in a cozy home, watching Tom & Jerry on a laptop.


A photograph of Neetu and Sheela, two Indian women, in a kitchen setting, sharing a conspiratorial conversation.


निशा शीला को लैपटॉप दिखाकर कुछ बड़बड़ा रही थी। शीला को समझ आया कि वह कार्टून देखना चाहती है, लेकिन पासवर्ड नहीं पता था। निशा शीला की गोद में बैठकर उसे "मम्म... मम्म..." कहकर तंग कर रही थी। शीला ने नीतु को फोन करने के लिए मोबाइल उठाया, तभी नीतु घर पहुंची। निशा मां को देखकर उछलकर उसकी गोद में चढ़ी और लैपटॉप की ओर इशारा किया। शीला बोली, "पासवर्ड तो बता देती। हम दोनों इसके सामने सिर पीट रहे थे।" नीतु ने पासवर्ड बताया। शीला ने लैपटॉप खोलकर निशा को टॉम एंड जेरी लगाया और उसे सोफे पर बिठाया। नीतु ने शीला को पास बिठाकर कहा, "इस शुक्रवार को अनुषा का सील खुलवाने का प्लान है। अगर हरीश के जोरदार धक्कों से उसे दर्द हुआ, तो दो दिन की छुट्टी में वह ठीक हो जाएगी।" शीला ने सहमति दी।


A photograph of Anusha and Pratap sharing a passionate moment at their home entrance, in warm golden hour lighting.


रात के खाने के वक्त नीतु ने शीला को इशारा किया कि अनुषा हरीश को चोरी-छिपे देख रही है। निशा भाइयों के साथ खेल रही थी, बीच-बीच में पापा को छेड़ रही थी। शीला ने उसे खाना खिलाया और वह भाइयों के साथ नीतु के कमरे में सोने चली गई। उस रात भी अनुषा हरीश और शीला की चुदाई देख रही थी। इस बार उसने पैंटी उतारकर चूत में उंगली डाली। नीतु ने देखा कि वह पूरी तरह उत्तेजित है।




A photograph of Anusha peeking through a window at a private bedroom scene with Harish and Sheela.


अगले दिन सुबह प्रताप आया और हरीश को बताया कि वह पांच-छह दिन के लिए बाहर जा रहा है। नीतु बोली, "अनुषा रोज मेरी एक्टिवा ले जाती है। मुझे बाहर जाना हो, तो कार लेनी पड़ती है। उसे गाड़ी ले दो। उसकी पुरानी किराए की जगह का सामान तुम्हारे घर शिफ्ट करना है।

तुम्हें किसी बात की चिंता नहीं, कौन से सीमे का दूल्हा बनेगा?" प्रताप ने डेबिट कार्ड निकालकर नीतु को दिया और बोला, "मेरे तीन अकाउंट हैं। दो में मेरे खर्च के लिए काफी पैसा है। इस अकाउंट में ज्यादा है। अनुषा के लिए गाड़ी और जो चाहिए, ले लो। शादी के बाद मैं उसकी जरूरतों का ध्यान रखूंगा।" हरीश ने नीतु से कार्ड लेकर प्रताप को लौटाया और बोला, "हमने अनुषा के लिए गाड़ी बुक कर दी। कल शाम तक रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। यह कार्ड नीतु को देने की बजाय अपनी होने वाली पत्नी को दे।" प्रताप शरमाकर अनुषा को कार्ड दे गया। अनुषा चुपचाप बैठी थी। नीतु ने उसका सिर पीटकर कहा, "ले, पति के पैसे पर पहला हक पत्नी का होता है। इसे अपने पास रख।" अनुषा ने कार्ड लिया।

शुक्रवार को नीतु ने अनुषा को बैंक छोड़ा और कहा कि शाम को नई गाड़ी की डिलीवरी लेंगे। नीतु, शीला और निशा अनुषा को बैंक से लेकर शोरूम गए। नई एक्टिवा ली और मंदिर में पूजा करवाकर घर लौटे।

रात को हरीश और शीला की चुदाई देखते वक्त अनुषा को दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा, तो नीतु अंदर आ रही थी। वह डर गई कि दीदी इस हाल में क्या सोचेगी।


A seductive bedroom scene with Neetu, Harish, Sheela, and Anusha in an intimate setting.
A photograph of an intimate bedroom scene with Neetu, Harish, Sheela, and Anusha in a warm, dimly lit setting.


लेकिन नीतु ने नाइटी, ब्रा और पैंटी उतारकर नंगी होकर हरीश और शीला के पास लेट गई। अनुषा उसकी आकर्षक कूल्हों को देखकर मोहित हो गई। हरीश ने शीला से हटकर नीतु की जांघें फैलाईं और उसकी चूत में लिंग डालकर चोदने लगा। नीतु ने चोरी से खिड़की की ओर देखा और अनुषा को वहां खड़ा पाया।

रस छोड़ने के बाद उसने हरीश को शीला के पास भेजा और बाहर जाने का नाटक करके अचानक खिड़की खोलकर अनुषा के सामने नंगी खड़ी हो गई। अनुषा डर गई, लेकिन नीतु ने आंखों से सांत्वना दी और अंदर आने का इशारा किया। अनुषा डरते-डरते कमरे में आई।


A photograph of Anusha, Harish, and Sheela in an intimate bedroom scene with dim lighting.


अनुषा ने देखा कि हरीश और शीला बिस्तर पर बैठे हैं। हरीश का ढीला लिंग भी पांच इंच का था। अनुषा की नजर उस पर टिकी और वह मूर्ति की तरह खड़ी हो गई। नीतु ने उसे हिलाकर बैठाया और बोली, "चार दिन से तुम इनकी चुदाई देख रही हो, मुझे शुरू से पता है। मैं साफ कहना चाहती हूं, तुम भी बिना संकोच अपनी बात कहो।" अनुषा ने हामी भरी। नीतु ने उसके गाल थपथपाकर कहा, "डर मत, तू मेरी बहन है। शीला मेरी सौतन है।" शीला भी हंसने लगी।


A photograph of Neetu and Anusha in an intimate bedroom, discussing seriously at midnight.


नीतु बोली, "तेरी उम्र 28 हो गई। अब तक तुझे कामसुख देने वाला मर्द मिल जाना चाहिए था, लेकिन देर हुई। हरीश का लिंग देखकर तेरी इच्छाएं जागी हैं, मुझे पता है। लेकिन प्रताप से तेरी शादी तय है। अब तुझे फैसला करना है कि हरीश के साथ शारीरिक सुख लेना चाहती है या प्रताप का इंतजार करेगी। एक बात साफ कहूंगी, प्रताप का भी एक औरत से संबंध है, जो शादी के बाद भी रहेगा। तू उसका स्थान नहीं ले सकती और तेरे स्थान को कोई नहीं लेगा। वह तुझे रानी की तरह रखेगा, लेकिन उस औरत को देवी की तरह पूजेगा। उससे तेरे वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी नहीं होगी, मैं गारंटी देती हूं। अब तेरा फैसला बता।"


A photograph of Anusha and Harish in an intimate bedroom setting, capturing emotional connection.


अनुषा ने तीनों को देखा, हरीश के लिंग पर नजर डाली और बोली, "दीदी, इससे पहले मेरे मन-शरीर ने इतनी बेचैनी नहीं महसूस की। प्रताप ने मुझे उस औरत के बारे में बताया, लेकिन यह नहीं कि वह कौन है। मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करती हूं और उनसे बहुत प्यार करती हूं। हरीश के लिए मेरे मन में प्यार, मोह या कामवासना है, मुझे नहीं पता। मैंने इसे समझने की कोशिश नहीं की। तुम्हारी इजाजत हो, तो मैं उनके साथ समर्पण करना चाहती हूं।"


A photograph of an intimate bedroom scene between Sheela and Anusha, two Indian women.


A photograph of Anusha and two nude Indian women in an intimate bedroom scene.


शीला ने उसका सिर सहलाकर पूछा, "आज रात अपने पहले मिलन के लिए तैयार हो?" अनुषा शरमाकर हामी भरी। नीतु और शीला ने हरीश को इशारा किया और बाहर गईं। अनुषा ने दोनों का हाथ पकड़कर कहा, "यह मेरा पहला अनुभव है। मुझे अपनी दोनों दीदियों की जरूरत है। आज रात मेरे साथ रहो।"
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 74

शीला ने उसका सिर सहलाया... "आज रात तू अपने पहले मिलन के लिए तैयार है क्या?" यह पूछने पर अनुषा शरमाते हुए "हूं" कहकर सिर हिलाई। नीतु और शीला ने अपने पति को इशारा करके बाहर जाने लगे, तभी अनुषा ने दोनों का हाथ पकड़ा... "यह मेरा पहला अनुभव है, इसलिए मुझे अपनी दोनों की बहुत जरूरत है। कृपया आज रात मेरे साथ रहें," उसने अनुरोध किया। हरीश ने सोचा कि आज रात, 17 साल बाद, उसके को एक कन्या की चूत के रक्ताभिषेक का अनुभव होगा, और यह सोचकर उसका लंड पूरी तरह से भयंकर आकार में खड़ा हो गया।

A photograph of an intimate bedroom scene with Anusha, Harish, Neetu, and Sheela in a private setting.


जब अनुषा का हाथ हरीश ने पकड़ा, तो उसके पूरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई और वह एक पल के लिए कांप उठी। हरीश ने अनुषा को अपनी ओर घुमाकर प्यार से उसके माथे... आँखों... गालों... नाक... और गालों पर चुम्बन दिए और उसके लाल होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक मिनट के चुम्बन से ही अनुषा को सांस लेना मुश्किल हो रहा था, यह जानकर हरीश उससे पीछे हटा और उसकी नाइटी की जिप को नीचे खींचा। अनुषा ने पूरी तरह सहयोग करते हुए नाइटी को अपने शरीर से उतार दिया और लाल रंग की ब्रा और पैंटी में पहली बार एक पुरुष के सामने खड़ी होकर अपने शरीर को प्रदर्शित करते हुए शरमा रही थी। नीतु और शीला बिस्तर के सामने कुर्सी पर बैठकर इन दोनों की कामक्रीड़ा को देखते हुए अपनी-अपनी चूत पर हाथ फेरने लगीं।


A sensual bedroom scene with four Indian individuals in intimate foreplay, featuring Harish, Anusha, Neetu, and Sheela.


A photograph of an intimate erotic moment between Harish, Anusha, and Neetu in a dimly lit bedroom.


हरीश ने अनुषा के स्तनों को ब्रा के ऊपर से पकड़ा और धीरे से दबाया, तो उसके मुंह से हल्की सी कामोन्माद की आवाज निकली और वह इच्छा की गर्मी से कराहने लगी। हरीश ने उसे बिस्तर पर लिटाकर उसकी गर्दन... कंधे... और स्तनों की घाटी में जीभ फेरी और चुम्बन देते हुए धीरे-धीरे मालिश करने लगा। अनुषा के पेट को सहलाते हुए उसकी गहरी नाभि में जीभ डाली, तो उसकी सहनशक्ति कमजोर पड़ गई और वह चीखते हुए अपनी चूत से रस की धारा बहाकर अपनी पैंटी गीली कर बैठी। नीतु उठकर अनुषा जैसे सुंदर कन्या की स्त्रीत्व की सुगंध को सूंघकर बोली... "अनु, तेरी खुशबू बहुत मनमोहक है। जरा धीरे से, मेरी छोटी बहन के लिए यह पहला मौका है। इस जेल को अच्छे से लगाने के बाद ही सील खोलना," कहकर वह शीला के पास जाकर बैठ गई। हरीश ने अनुषा की ब्रा उतारी और उसके मुलायम, मध्यम आकार के स्तनों को दबाने के बाद नीचे सरका और पैंटी के ऊपर ही उसकी चूत पर चुम्बन दिया, जिससे अनुषा का शरीर कांप उठा। हरीश ने अनुषा की जांघों को सहलाते हुए चाटा और चुम्बन दिए, फिर उसे पेट के बल लिटाकर उसकी चिकनी पीठ को छूते हुए नीचे सरका और पैंटी में छिपे खरगोश जैसे नितंबों को मसलना शुरू किया।


A photograph of Harish and Anusha in an intimate moment, observed by Neetu and Sheela in a dimly lit bedroom.


हरीश ने आधे घंटे तक अनुषा के शरीर को सहलाया... मालिश की... और चुम्बनों की बौछार की, फिर उसकी पैंटी को नीचे खींचकर पहली बार अनुषा की बिना बालों वाली छोटी सी चूत को उजागर किया। अनुषा पूरी तरह नग्न होकर बिस्तर पर लेटी थी और हरीश से अपनी चूत पर चुम्बन करवाते हुए उसने खुद अपनी चूत की पंखुड़ियों को फैलाकर उसकी जीभ को अंदर तक चाटने में सहयोग किया। अनुषा की टाइट सील पैक चूत की पंखुड़ियां एक-दूसरे से पूरी तरह चिपकी हुई थीं, और हरीश को लगा कि अपने मोटे लंड को अंदर घुसाने के लिए उसे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। उसने पहले अपनी उंगली पर जेल लगाकर उसकी चूत में घुसाया और सहलाया, फिर दूसरी उंगली भी डाली। सात-आठ मिनट तक हरीश ने अपनी तीन उंगलियों को अच्छे से चलाकर उसकी चूत को काफी ढीला किया, फिर उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। नीतु अपनी छोटी बहन के पास बैठकर बोली... "अनु, डर मत, पहली बार थोड़ा दर्द होगा क्योंकि यह तेरा पहला अनुभव है, लेकिन पूरी कॉलोनी घर के पीछे जमा हो जाए, ऐसा चीख मत।" यह सुनकर सब हंस पड़े। हरीश ने अपने दस इंच के खड़े लंड को अनुषा की सील बंद चूत के सामने रखा और उंगलियों से पंखुड़ियों को फैलाकर चार-पांच बार अंदर घुसाने की कोशिश की, लेकिन वह चिकनी चूत की सतह पर फिसल जाता था। शीला भी बिस्तर पर चढ़ी और हरीश के लंड को पकड़कर अनुषा की चूत की पंखुड़ियों को जितना संभव था उतना फैलाया और अपने पति को अब घुसाने को कहा।


A photograph of an intense deflowering scene with Harish, Anusha, Neetu, and Sheela in a dimly lit bedroom.


हरीश ने बहुत जोरदार धक्का मारा, लेकिन केवल दो इंच का हिस्सा ही अनुषा की चूत में घुस पाया और वह दर्द से अपनी आँखों में आंसू लिए कराह रही थी। शीला ने अपने पति को एक-दो मिनट रुकने को कहा और नीतु को अपनी बहन के दर्द को शांत करने और सामान्य करने का इशारा किया। नीतु ने अनुषा के होंठों पर चुम्बन दिया और उसके स्तनों को धीरे से दबाते हुए गहरे होंठों का चुम्बन किया और अपने पति को घुसाने का इशारा किया। इस बार हरीश ने और भी भयंकर धक्का मारा, तो चार इंच का हिस्सा अनुषा की चूत की कन्या झिल्ली को फाड़ते हुए अंदर घुस गया और उसके कन्यत्व के रक्त से हरीश के लंड का अभिषेक हो गया। अनुषा दर्द से चीखी, लेकिन नीतु ने अपने मुंह से उसका मुंह बंद कर रखा था, इसलिए उसकी सारी आवाज नीतु के गले में ही दब गई। तीन-चार मिनट तक अनुषा को सामान्य होने का मौका देने के बाद हरीश ने एक के बाद एक पांच-छह जोरदार धक्के मारे और अपने पूरे दस इंच के लंड को अनुषा की चूत में घुसाकर उसके कन्यत्व को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया। हरीश ने पांच-छह मिनट तक अपने लंड को चूत में बिना हिलाए स्थिर रखा, जब तक कि अनुषा दर्द से उबरकर सामान्य नहीं हो गई। इसके बाद उसने धीरे-धीरे बाहर निकाला और फिर अंदर डालकर उसे संभोग करने लगा।

थोड़ी देर बाद अनुषा का दर्द कम हुआ और संभोग के खेल में उसे मजा आने लगा। उसने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाकर जवाब देना शुरू किया और हरीश से संभोग करवाने लगी। पंद्रह मिनट के संभोग में ही उसने चार-पांच बार चूत से रस बहाया और थककर बेसुध होकर लेट गई। शीला ने अपने पति को अनुषा से हटने को कहा और उसे अपने ऊपर चढ़ाकर अपनी चूत को चोदने का काम शुरू किया। पंद्रह-बीस मिनट बाद अनुषा को थोड़ा आराम महसूस हुआ। जब उसने आँखें खोलीं, तो हरीश नीतु को झुकाकर जोर-जोर से उसके नितंबों को चोद रहा था। अपनी दीदी के चेहरे पर नितंबों में चुदाई का आनंद देखकर अनुषा ने तय किया कि वह भी एक दिन हरीश से अपने नितंबों को चुदवाएगी। अगले आधे घंटे तक हरीश ने अपनी दोनों पत्नियों, नीतु और शीला, को बारी-बारी से चोदा और फिर से अनुषा की चूत में घुसकर चोदना शुरू किया। उसने अनुषा की गर्भभूमि में पहली मॉनसून की बारिश की तरह अपने वीर्य की बौछार कर दी। अनुषा ने हरीश के होंठों पर चुम्बन देकर उसे अपने पहले अविस्मरणीय काम सुख के लिए धन्यवाद दिया। हरीश ने अनुषा को वहीँ लेटने दिया ताकि वह अपने जीवन के पहले संभोग के दर्द और थकान से उबर सके। फिर उसने अपने फिर से खड़े लंड से नीतु और शीला दोनों को अच्छे से चोद डाला।


A tender aftercare moment between Anusha, Harish, and Neetu in a private setting.


A photograph of intimate aftercare among Anusha, Harish, and Neetu in a private setting.


नीतु ने अनुषा का साथ देते हुए उसे पहले बाथरूम में ले जाकर गर्म पानी से नहलाया। नहाने के बाद अनुषा को बहुत ताजगी महसूस हुई, लेकिन चूत की झिल्ली फटने के कारण अभी भी थोड़ा दर्द था। वह अपने लिए रखे कमरे में आई और नीतु द्वारा दी गई दर्द की गोली निगलकर सो गई।


A family breakfast scene with Neetu, Anusha, Harish, Sheela, and children Nisha, Gireesh, and Suresh.


सुबह सभी उठकर अपनी रोजमर्रा की गतिविधियाँ पूरी करने के बाद, निशा अपने पिता के साथ खेल रही थी। अचानक वह "आंटी... आंटी" कहकर अनुषा को ढूंढते हुए उसके कमरे में गई, तब अनुषा की नींद खुली। उसकी चूत का दर्द 90 प्रतिशत तक कम हो गया था।

उसने निशा को गोद में उठाकर प्यार किया, नहाया, और सभी के साथ नाश्ते के लिए बैठ गई। नीतु ने उसके दर्द के बारे में पूछा, तो अनुषा शरमाते हुए बोली... "अब नहीं है, दीदी। क्या आप लोग बाहर जाने के लिए तैयार हो रहे हैं?" नीतु की जगह शीला ने जवाब दिया और अनुषा को पीने के लिए हल्दी वाला गर्म दूध लाकर रखा... "हूं, मैं अपने गांव वापस जा रही हूँ। तुम्हें और हरीश को छोड़कर बाकी सब गांव जा रहे हैं।" [उसके कान में फुसफुसाते हुए] "दो दिन तुम दोनों अच्छे से आनंद लो।" यह सुनकर अनुषा शरमाकर लाल हो गई।


A photograph of Sheela and Harish in an emotional farewell scene in a traditional Indian courtyard.


सभी ने नाश्ता खत्म करके गांव की ओर प्रस्थान किया। शीला ने हरीश को एक तरफ बुलाकर उसे गले लगाया और रोने लगी। हरीश ने उसे सांत्वना देते हुए कहा... "तू हमेशा मेरी पत्नी रहेगी। यह घर तेरा भी है। नीतु को मेरे ऊपर जितना अधिकार है, उतना ही अधिकार तुझे भी है। खुशी से जा और आ, और अपने गर्भ में पल रहे हमारे बच्चे का थोड़ा ध्यान रख।" यह कहकर उसने उसके माथे पर चुम्बन देकर उसे विदा किया।

सबके जाने के बाद घर में आई अनुषा को शरमाते हुए खड़ा देखकर हरीश ने उसका गाल उठाकर दर्द के बारे में पूछा। अनुषा ने कहा, "अब मैं पहले जैसी तैयार हूँ, कोई दर्द नहीं है," और उसने अपना चेहरा हरीश की छाती में छिपा लिया। हरीश ने अनुषा के होंठों पर अपने होंठ रखकर चुम्बन किया और उसे गोद में उठाकर "एक और राउंड?" पूछा। अनुषा शरमाकर "हूं" बोली, और दोनों बिस्तर पर चढ़कर कामक्रीड़ा के लिए तैयार हो गए।


Neetu parks an SUV near a village house, with her daughter Nisha held by Gireesh and Suresh in a serene rural scene.


नीतु ने अपनी एस.यू.वी. को शीला के गांव के घर के सामने रोका और पीछे मुड़कर देखा। उसकी बेटी निशा, गिरीश की गोद में सिर रखकर और सुरेश के ऊपर अपने पैर फैलाकर आराम से सो रही थी। दोनों भाई अपनी प्यारी छोटी बहन को सावधानी से लिटाए हुए थे ताकि उसे कोई तकलीफ न हो। नीतु ने अपने तीनों बच्चों का आपसी स्नेह देखकर खुशी से कार से उतरी। शीला ने अपनी बेटी को गोद में उठाकर घर के अंदर ले जाकर बिस्तर पर लिटाया।

उनके पीछे-पीछे घर पहुंची रजनी और रश्मि की ओर देखकर सुरेश ने मजाक किया... "रश्मि, भाभी, भैया अब तक बिना तेल के दीपक की तरह फीका था, लेकिन अब तुम्हें देखते ही 1000 वाट के बल्ब की तरह चमक रहा है।" गिरीश ने अपने छोटे भाई के कंधे पर दो घूंसे मारे, तो रश्मि वहीँ खड़ी होकर शरमाने लगी और अपने पैर के अंगूठे से जमीन कुरेदने लगी।

नीतु ने रश्मि को गले लगाकर कहा... "सुरेश, मेरी बहू को क्यों छेड़ रहा है? देख, बेचारी कितना शरमा रही है।

क्या उसे भी इच्छा नहीं होगी? उसे अपने होने वाले पति को देखना है न, मेरी प्यारी?" यह कहकर नीतु ने भी उसे छेड़ा, तो रश्मि ने कहा, "मम्मी, आप भी सुरेश की तरह ही हैं," और उसने अपना चेहरा नीतु की छाती में छिपाकर मुस्कुराया। थोड़ी देर बाद जागी निशा ने आसपास देखा और खुद को अकेला पाकर डर गई। वह "मम्मी... मम्मी" कहकर जोर से चिल्लाई। शीला अपनी बेटी के कमरे में दौड़ी।

निशा डर से रोने ही वाली थी। शीला ने उसे गले लगाया, तो निशा "मम्मी... मम्मी" कहकर उससे लिपट गई। शीला ने समझा कि कोई नजर में न होने से उसकी बेटी डर गई थी। उसने निशा के गाल पर चुम्बन देकर उसे सांत्वना दी, पहले उसे तरोताजा करवाया, फिर बाहर लाई। जब निशा ने अपनी माँ, भाई, बहन, और आंटी को देखा, तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने शीला के गाल पर चुम्बन दिया और उसकी बांह से उतरकर रश्मि के पास दौड़ गई।

शाम को औरतें बच्चों को लेकर कुछ खरीदारी करने और घूमने के लिए निकलीं। खरीदारी पूरी करके कार की ओर जाते समय वहाँ खड़े पांच-छह गुंडों ने कहा... "क्या मस्त तीन आइटम हमारे गांव में आ गए और हमें पता ही नहीं।" उनमें से एक ने नीतु की ओर इशारा करके कहा... "उस बच्चे को गोद में लिए उस फिगर को देखो, उसका नितंब कैसे हिल रहा है। अगर मिल जाए तो उसके नितंब को तब तक चोदूंगा जब तक वह टूट न जाए।" गिरीश और सुरेश को गुस्सा आया और वे उनकी ओर बढ़े। बातों की नोकझोंक हाथापाई तक पहुंच गई। भले ही गुंडे छह थे, लेकिन दोनों भाइयों ने उन सभी पर हमला बोलकर मारपीट शुरू कर दी। तभी एक गुंडे का नाखून सुरेश के माथे के पास लगा और खरोंच से खून बहने लगा। छोटा भाई सुरेश को खून बहता देख नीतु गुस्से में आ गई। उसने सो रही बेटी को शीला को सौंपा और पास पड़ा एक डंडा उठाकर दो गुंडों को चार जोरदार प्रहार किए। तभी वहाँ आया एक विदेशी ने उन छह गुंडों को एक मिनट से भी कम समय में जमीन पर पटककर कराहने की हालत में ला दिया। रजनी ने तुरंत अशोक को फोन करके घटना की जानकारी दी।

अशोक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके वहाँ पुलिस भेजी और खुद भी निकल पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। तभी आए अशोक ने गुस्से में एस.आई. से कहा... " हमारे घर की औरतों को छेड़कर मेरे बच्चों से झगड़ा करने वालों को अभी तक नहीं ले गए और बातचीत कर रहे हो? लगता है तुम्हारे एस.पी. को बुलाना पड़ेगा।" यह कहकर उसने फोन उठाया। एस.आई. डर गया और बोला, "सर, हमारे एस.पी. साहब ने पहले ही फोन किया था। हम इन्हें अभी ले जा रहे हैं और इन्हें सही सजा मिलेगी।" यह कहकर उसने छह गुंडों को जीप में ठूंसकर ले गया।


Neetu tends to Suresh's forehead in a tense village market scene, with Gireesh and Rashmi nearby.


A photograph of Neetu and Johnny in a village market, showing gratitude and arousal amidst a curious crowd.


नीतु ने अपने बेटे की चोट देखी, तो पाया कि यह केवल नाखून से हल्की खरोंच थी। उसने रूमाल से खून पोंछा और दोनों को कार में बैठने को कहा। उसने रश्मि को दोनों की देखभाल के लिए भेजा। नीतु ने उस विदेशी की ओर ध्यान दिया, जिसने सही समय पर आकर गुंडों को सबक सिखाया और उनकी मदद की। उसे छह फीट का, लगभग 35-36 साल का, आठ पैक बॉडी वाला विदेशी दिखा, और उसकी चूत की पंखुड़ियां उत्तेजना से गीली होने लगीं।

उसने पहले उसे धन्यवाद दिया और उसके बारे में पूछा। उसने टूटी-फूटी हिंदी में कहा... "मैं भारत में बारह साल से हूँ और यहाँ का नागरिक भी हूँ।" सभी को उसके बारे में उत्सुकता हुई और उन्होंने उसे अपने साथ आने को मजबूर किया। शीला के घर पहुंचकर विदेशी ने बताया... "मेरा नाम जॉनी है। मैं अमेरिका में पैदा हुआ, लेकिन भारत, यहाँ की परंपराएं, संस्कृति, और रीति-रिवाजों से आकर्षित होकर यहीं बसने का फैसला किया। पहले दस साल मैंने पूरे देश के कोने-कोने की यात्रा की। अब दो साल से मैं प्रकृति की गोद में, यानी कामाक्षीपुर में, 25 एकड़ का बाग खरीदकर वहाँ तरह-तरह के फल, सब्जियां, फूल, और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां उगा रहा हूँ। मैंने वहाँ घर भी बनाया है। तुम्हारे दोनों बच्चे भले ही ताकतवर न हों, लेकिन बहुत साहसी नन्हे हैं। अगर मैं यहीं रहता, तो दोनों को अपने पास ट्रेनिंग देकर मार्शल आर्ट्स में निपुण बना देता।"

गिरीश तुरंत उसके पास गया और बोला... "सर, हम भी कामाक्षीपुर में रहते हैं। क्या आप हमें भी अपनी तरह बॉडी बिल्डिंग और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देंगे?" जॉनी ने तुरंत हामी भर दी।

नीतु ने पूछा कि वह इस गांव में क्यों आया और कहाँ रुका है। जॉनी ने कहा... "कुछ फल और जड़ी-बूटियां पहुंचाने आया था। काम खत्म होने के बाद घूम रहा था, तभी तुम्हारे झगड़े पर ध्यान गया और मैं वहाँ पहुंच गया। मैं कार नहीं लाया, इसलिए रात आठ बजे की बस से वापस जाऊंगा।" नीतु ने कहा... "नहीं, आज रात आप यहीं रुकें और कल हमारे साथ गांव चलें।" जॉनी ने कहा... "मुझसे आपको तकलीफ होगी।" रजनी ने कहा... "पिछली गली में हमारा एक और घर है। आप दोनों भाइयों के साथ वहाँ आराम से रह सकते हैं।" रजनी के जोर देने पर वह मान गया।


A joyful photograph of baby Nisha and adult Johnny in a playful interaction at home.
A photograph of Neetu and Ashok in an intimate embrace in a traditional Indian bedroom.


नन्ही निशा, जो अंदर सो रही थी, उठकर अशोक के पास गई और उससे गाल पर चुम्मी लेने के बाद घर में आए इस नए व्यक्ति के सामने अपनी दोनों बाहें पीछे बाँधकर जॉनी की ओर देख रही थी। जॉनी को भी यह प्यारी बच्ची देखकर किसी की याद आई और उसने उसे अपने पास बुलाया। निशा उसके पास चली गई। जब जॉनी ने उसे गोद में उठाया, तो निशा ने अपनी मुट्ठी बाँधकर उसके सीने पर घूंसे मारे। जॉनी ने दर्द का नाटक करते हुए "आह... आह..." कहा, जिसे देखकर निशा हँसने लगी और बहुत खुश होकर उससे उतरकर रश्मि के पास दौड़ गई।

गिरीश और सुरेश दोनों जॉनी के साथ बॉडी बिल्डिंग और मार्शल आर्ट्स के बारे में उत्साह से बात कर रहे थे।

नीतु ने अशोक को कमरे में बुलाया और अपने दूसरे पति को गले लगाकर कहा... "तुम इतना उत्तेजित क्यों हो जाते हो? तुम्हारी पत्नी इतनी आसानी से किसी से हारने वाली नहीं है।" यह कहकर उसने अपने पति के होंठों पर चुम्बन दिया। अशोक ने उसे खींचकर गहरे चुम्बन किए और उसके नितंबों को दबाते हुए कुछ देर तक उससे बात की। उसने बताया कि फैक्ट्री के काम के सिलसिले में अब चार दिन के लिए बैंगलोर जा रहा है। नीतु ने अपने पति के होंठों पर चुम्बन देकर उसे शुभकामनाएँ दीं और विदा किया।


A photograph of Rajani and Neetu, two Indian women in a playful conversation in a rustic village home.


रजनी अपनी सहेली के पास आई और बोली... "स्वामीजी ने जो पुरुषों की लिस्ट दी थी, उसमें जॉनी को भी शामिल करके उसके साथ डिंग डांग खेलने का इरादा है क्या?" नीतु मुस्कुराकर "हूं" बोली। रजनी खुशी से उसे गले लगाकर बोली... "तो मुझे भी मौका दिलवाना।" नीतु ने कहा... "पहले मैं, फिर तू, और बाद में हम दोनों मिलकर उससे चुदवाएँगे। उसे भी पता चलेगा कि हमारी भारतीय चूत कितनी रसदार होती है।" यह सुनकर दोनों हँस पड़ीं।


A photograph of Neetu and Rajani in a bedroom, planning with Johnny in an intimate setting.


Neetu sends off her sons and friend Johnny in a nighttime village courtyard, in a realistic style.


रात के खाने के बाद नीतु ने जॉनी के साथ अपने दोनों बेटों को पिछली गली के अपने घर में सोने के लिए भेजा और रश्मि व रजनी के साथ शीला के घर में एक कमरे में शामिल हो गई। निशा, जो रवि के साथ देर तक खेल रही थी, उसके साथ ही सो गई, जबकि शीला ने अपनी बेटी को अपने साथ सुलाया।


A nighttime photograph of Sheela, Neetu, Rajani, and baby Nisha in a serene, dimly lit room.


अगली सुबह नीतु अपने बेटों को जगाने के लिए अपने घर गई। उसने देखा कि केवल दोनों बेटे ही सो रहे थे। वह जॉनी को ढूँढने लगी। बाथरूम से पानी गिरने की आवाज सुनकर नीतु उस ओर बढ़ी और पहले से मालूम छोटे छेद से अंदर झाँका।

जॉनी की कसरती आठ पैक वाली बॉडी देखकर उसका मन चंचल हो गया और उसकी नजर उसके असाधारण सफेद लंड पर पड़ी। उसका मन हुआ कि अभी अंदर जाकर उसे मुँह में ले ले और चूस ले, लेकिन उसने बड़ी मुश्किल से खुद को रोका। जॉनी ने नहाकर केवल चड्डी पहनकर बाहर आया। नीतु उसकी मांसपेशियों और बॉडी के कट्स को बिना पलक झपकाए देख रही थी। जॉनी ने सीधे उसके होंठों पर चुम्बन दिया और चुपके से पीछे हट गया। नीतु उसकी बॉडी से पूरी तरह सम्मोहित होकर उसके पास गई और उसकी नंगी छाती को सहलाया।


A candid photograph of Johnny and Neetu sharing an intimate moment in a hallway.


A photograph of Neetu and Johnny in an intimate embrace, in a dimly lit corridor.


A photograph of Johnny and Neetu in an intimate, interrupted moment in a dimly lit hallway.


जॉनी ने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों पर गहरे चुम्बन किए। उसने एक हाथ से उसका एक स्तन पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को मसला। नीतु ने अपनी चूत से रस बहा दिया। जॉनी ने नीतु की को कमर तक ऊपर उठाया और लाल रंग की पैंटी में छिपी चूत पर चुम्बन दिया। तभी बाहर बच्चों के उठने की आवाज सुनाई दी और वह पीछे हट गया। जॉनी ने नीतु की चूत को नाइटी के ऊपर से सहलाया और कहा... "कल मेरे बाग में आना, मैं तुझे स्वर्ग में ले जाऊँगा। कल एक भारतीय शादीशुदा चूत को चोदूँगा।" नीतु शरमाकर बाहर चली गई।

जॉनी नाश्ता करके निशा और बच्चों के साथ हँसते-खेलते समय बिता रहा था, जबकि नीतु की चूत उसके सफेद लंड की याद में तीन-चार बार रस बहा चुकी थी।

दोपहर का खाना खाने के बाद नीतु अपने तीनों बच्चों और जॉनी के साथ अपने गाँव के लिए रवाना हुई। रजनी ने अपनी सहेली को गले लगाया और उसके कान में कहा... "जितनी जल्दी हो सके, जॉनी से चुदवाने का इंतजाम कर। मैं भी उसके नीचे लेटने को बेताब हूँ।" नीतु फुसफुसाते हुए बोली... "रे, जल्दी क्या कह रही है? मैं तो अभी इस पल तैयार हूँ। सुबह से चार-पांच बार नीचे रस बह चुका है। अब मुझसे रुका नहीं जा रहा। कल ही मैं उसके बाग में जाऊँगी और उसके अमेरिकी लंड को अपनी भारतीय चूत में ले लूँगी। मैं तेरे बारे में भी बता दूँगी। अगर सब कुछ सोचे हुए जैसा हुआ, तो अगले हफ्ते तू भी आ। हम दोनों मिलकर उसके अमेरिकी लंड का रस चूस लेंगे।"


A photograph of Neetu and Ashok in an intimate farewell moment in a traditional Indian home.


शीला ने अपनी बेटी को गले लगाया और उसके गालों पर चुम्बन दिए। आज निशा की आँखों में भी आँसू थे और वह "मम्मी... मम्मी" कहकर शीला से लिपट गई। रवि ने बच्ची का सिर सहलाया और बोला... "शीला, तुम्हारी बेटी तुमसे बहुत प्यार करने लगी है। इसलिए उसे तुमसे दूर जाना अच्छा नहीं लग रहा। शायद अगर हम सब एक ही गाँव में रहते, तो कितना अच्छा होता।" रजनी ने उसकी बात का समर्थन करते हुए कहा... "मैंने भी उनसे कहा है कि कामाक्षीपुर में, खासकर नीतु की कॉलोनी में, एक घर खरीद लें और हम भी वहाँ शिफ्ट हो जाएँ। आप रोज फैक्ट्री आ-जा सकते हैं या यहाँ भी एक-दो दिन रहने के लिए वैसे भी यहाँ घर है। हमें वहाँ हरीश, नीतु, गिरीश, सुरेश, अनुषा, और हमारी प्यारी नन्ही के साथ रहने का मौका मिलेगा। रश्मि को पढ़ाई में गिरीश का साथ मिलेगा।" उन्होंने कहा कि वे इस बारे में सोचेंगे। आप भी कोशिश करें।" शीला ने अपने पति की ओर अनुरोध भरी नजरों से देखा। रवि ने अपनी पत्नी का कंधा थपथपाया और बोला, "हम भी इस बारे में जल्दी सोचेंगे।"

नीतु ने सभी से विदा लेकर अपनी एस.यू.वी. चलाने के लिए निकली, तभी जॉनी ने उससे चाबी ले ली और बोला, "जब मैं हूँ, तो तुम ड्राइव करोगी? अपनी बेटी के साथ आराम से बैठो।" आज पहली बार निशा अपनी माँ की गोद में बैठकर गाँव जा रही थी। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वह खिड़की से बाहर देख रही थी, पीछे बैठे अपने भाइयों को चिढ़ा रही थी, और पूरी मस्ती कर रही थी।


A happy family moment in a vehicle: Neetu holds baby Nisha while Johnny drives, in a candid style.


A tense family moment as Harish approaches an SUV with Neetu, Johnny, and baby Nisha in a traditional Indian courtyard.


नीतु ने जॉनी से कहा, "पहले हमारे घर चलो।" उसने उसे जबरदस्ती अपने साथ ले लिया। घर के बाहर खड़े हरीश ने देखा कि कोई और कार चला रहा है और उसकी पत्नी बगल में बैठी है। उसे लगा कि शायद नीतु को कुछ हो गया है। वह घबराकर उसके दरवाजे की ओर आया।


A family reunion with Nisha, Harish, Neetu, and Johnny in a warm courtyard.


निशा ने अपने पापा को देखा और खुशी से "पापा... पापा" कहकर उनकी गर्दन से लिपट गई। हरीश ने अपनी बेटी को गोद में उठाकर प्यार किया और अपनी पत्नी की कुशलता पूछी। नीतु कार से उतरी और समझ गई कि उसका पति घबरा गया है। उसने कहा... "मुझे कुछ नहीं हुआ। मैं ठीक हूँ।

आज मुझे अपनी बेटी को गोद में लेकर गाँव वापस आने का सौभाग्य मिला।" उसने जॉनी का परिचय करवाया और उससे मुलाकात की बात बताई। हरीश ने उसकी मदद के लिए धन्यवाद दिया और अपने दोनों बेटों को चोट के बारे में पूछा।

अनुषा भी बाहर आई और गिरीश व सुरेश से बात की। उसने अपने पिता की बाहों में बैठी निशा को चुम्मी दी और अपनी दीदी को गले लगाया।

नीतु ने कहा... "हम सब दो दिन तक नहीं थे, तो क्या तुम दोनों की रासलीला जोर-शोर से चली? कैसी रही?" अनुषा शरमाकर "हूं" बोली।

जॉनी, हरीश के साथ बात करते हुए, अपने बाग के स्थान और उसके बारे में विस्तार से बताते हुए सब कुछ समझाया और कहा, "दोनों बच्चों को हर दिन सुबह एक घंटे के लिए भेज दो। मैं उन्हें व्यायाम और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी मार्शल आर्ट्स में निपुण बनाऊँगा।" जब हरीश ने बच्चों से पूछा, तो वे उत्साह से बोले। सुरेश ने कहा, "पापा, अगर कल मेरे पास इतनी ताकत होती, तो मैं अकेले ही उन गुंडों को पीट देता।" जॉनी को सहमति देते हुए हरीश ने कहा, "इस हफ्ते मेरी ड्राइविंग क्लास खत्म हो रही है।

अगले हफ्ते से मैं बच्चों के साथ खुद आऊँगा।" बीच में बोल पड़ी नीतु ने कहा, "रे, गिरीश अच्छे से गाड़ी चला लेता है। आपको इन दोनों को साथ ले जाने की क्या जरूरत है? फिर ये लोग समझदारी कब सीखेंगे? वैसे भी, गिरीश के कॉलेज से एक-दो किलोमीटर आगे ही जाना है। मेरे एक्टिवा से दोनों जा-आ सकते हैं।" यह सुनकर बच्चे खुश हुए, और हरीश ने भी सहमति दे दी। निशा सब कुछ सुन रही थी और जॉनी की ओर गई। अपनी छोटी मुट्ठी से उसे घूंसे मारते हुए खुशी से हँस रही थी। जॉनी उसके साथ खेलते हुए बोला, "छोटी परी, मैं तुझे चैंपियन बनाऊँगा। बस थोड़ा बड़ा हो जा," और हँसने लगा।


A heartfelt farewell in a residential courtyard with Johnny, Harish, and Neetu sharing a warm moment.


जब जॉनी जाने के लिए तैयार हुआ, तो हरीश ने कहा कि रात का खाना खाकर ही जाएँ, लेकिन जॉनी ने कहा, "अब तो हम दोस्त बन गए हैं। जब भी मन होगा, बिना झिझक तुम्हारे घर खाना खाने आ जाऊँगा।" नीतु ने इनोवा की चाबी उठाई और बोली, "मैं खुद ड्रॉप करके आती हूँ। तुम अपनी बेटी के साथ खेलो, और तुम दोनों भाई पढ़ने बैठो। कल से किताब को हाथ नहीं लगाया।" यह कहकर उसने उन्हें कमरे में भेज दिया। अनुषा ने दीदी से कहा, "आराम से आओ, मैंने खाना तैयार कर लिया है।"


A family moment with Neetu, Johnny, and baby Nisha during a departure in a home courtyard.


A photograph of Johnny and Neetu in a moving vehicle, sharing an intimate moment with romantic tension.


जॉनी ने कहा कि वह इनोवा खुद ड्राइव करेगा और निकल पड़ा। उसके बगल में बैठी नीतु उसे लालसा भरी नजरों से देख रही थी।

जॉनी ने उसकी चूड़ी के ऊपर से ही उसका एक स्तन दबाया और बोला, "चिंता मत कर, डियर। मेरे फार्म में घुसते ही तुझे चोदूँगा। अपनी चूत को गर्म और तैयार रख।" जॉनी ने इनोवा को बाग के गेट के सामने रोका और उतर गया।

15-20 कुत्ते दौड़कर आए और उसे घेरकर अपनी चाहत जताने लगे।

जॉनी ने नीतु को भी उतरने को कहा और उसे कुत्तों से मिलवाया। उसने कहा, "एक बार इनसे तेरा परिचय हो गया, तो ये तुझे मरते दम तक नहीं भूलेंगे। अगली बार जब तू बाग में आएगी और मैं कहीं काम में व्यस्त होकर यहाँ न आ पाऊँ, तो ये तुझे अंदर घुसने भी नहीं देंगे। अब इन्हें तेरी खुशबू अच्छे से पता चल गई है, तो कोई परेशानी नहीं। तू आराम से आ सकती है।" जॉनी के बाग में तरह-तरह के फल, फूल, विभिन्न सब्जियाँ, और कुछ आयुर्वेदिक पौधों को वैज्ञानिक तरीके से उगाया गया था, जिससे बहुत अच्छी पैदावार होती थी।


Johnny secures an orchard gate in a lush farm, with dogs patrolling, in a realistic style.


जॉनी ने इनोवा को गेट के अंदर लाकर गेट बंद किया। उसने कुत्तों को इशारा किया, तो दो कुत्ते गेट के पास खड़े हो गए, और बाकी बाग के अंदर फैलकर अपनी चौकीदारी की जिम्मेदारी को चुस्ती से निभाने लगे।
 

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नियति से बंधी नीतू - Part 75

जॉनी ने इनोवा को बाग के बीच में बने घर के सामने रोका। नीतु को उतरने से पहले उसने घर का दरवाजा खोला, फिर नीतु का दरवाजा खोलकर उसे छोटे बच्चे की तरह अपने कंधे पर उठाकर घर के अंदर ले गया।

नीतु के गोल-मटोल मुलायम नितंबों को सहलाते हुए जॉनी कभी-कभी अपनी मजबूत हथेली से उन्हें दबाता था।

उसने नीतु को बेडरूम में लाकर बिस्तर पर बैठाया। नीतु के देखते ही जॉनी ने अपनी टी-शर्ट, जींस, और चड्डी उतार दी।

नग्न जॉनी का आधा खड़ा लंड देखकर नीतु उसे सहलाने लगी। जॉनी ने उसका सिर पकड़कर उसे उसकी ओर झुकाया। नीतु को पता था कि आगे क्या करना है। उसने जॉनी के लंड को अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। एक मिनट के अंदर ही वह लोहे की रॉड की तरह सख्त और विशाल होकर खड़ा हो गया। नीतु ने बड़े मजे से जॉनी के लंड को अच्छे से चाटकर और चूसकर उसके सिरे पर चुम्बन दिए। जॉनी ने कभी नहीं सोचा था कि एक भारतीय महिला इतने अच्छे से लंड चूस सकती है। वह आकाश में तैर रहा था। हरीश के लंड से थोड़ा लंबा और अब तक नीतु की चूत में घुसे सभी निजी अंगों से कहीं ज्यादा मोटा जॉनी का लंड देखकर नीतु की चूत रस बहाने लगी थी।

A nude man and partially undressed woman in an intimate bedroom setting.


जब जॉनी ने नीतु की चूड़ी का टॉप पकड़ा, तो नीतु ने खुद ही जिप नीचे खींची और अपनी बाहें ऊपर उठाकर उसे टॉप उतारने दिया। काली ब्रा में छिपे अपने गोल-मटोल स्तनों को उसने जॉनी को दिखाया।

जॉनी ने दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़ा और एक-दो मिनट तक धीरे-धीरे दबाने के बाद जोर से मसलना शुरू किया। नीतु के मुँह से कामोन्माद की आवाजें एक साथ निकलने लगीं।

जॉनी ने नीतु की लेगिंग्स भी उतार फेंकी और पीली पैंटी में छिपे उसके भारतीय काम मंदिर पर चुम्बन देकर अपनी उंगलियों से रगड़ना शुरू किया। नीतु जोर से "आह... आह... हाँ... जॉनी... आह..." चीखते हुए अपनी चूत से अमृत रस बहाकर पैंटी गीली कर बैठी।

A photograph of Johnny and Neetu in an intimate bedroom, sharing a sensual massage.


A nude Johnny and Neetu in an intimate moment, in a blurred bedroom with soft natural light.


जॉनी ने नीतु के शरीर से ब्रा और पैंटी हटाई और उसके स्तनों को सहलाया, मसला, और स्तन के निप्पलों को उंगलियों से मरोड़ा।

फिर उन्हें धीरे से खींचकर अपने मुँह में भर लिया और अच्छे से चूस लिया। नीतु काम की आग में कराहते हुए जॉनी को अपने स्तन चुसवाती थी और जोर-जोर से चीख रही थी, "जॉनी, चूस... आह... और जोर से... आज से मेरे शरीर पर तेरा पूरा अधिकार है, जॉनी... आह... निप्पलों को... हाँ... ऐसे ही धीरे से काट... जॉनी, लव यू... चूस मुझे।" 20 मिनट तक नीतु के स्तनों को मसलने और दबाने के बाद जॉनी नीचे सरका और उसकी नाभि के हिस्से को चाटने लगा। उसने नीतु के पैरों को फैलाया और उसकी सुंदर, गोरी, छोटी चूत की खुशबू का आनंद लेना शुरू किया। जॉनी ने नीतु की चूत को सूँघा और कहा, "अद्भुत... शानदार... भारतीय शादीशुदा चूत की खुशबू स्वर्ग जैसी है।" उसने अपनी जीभ बाहर निकालकर लपलपाते हुए चूत के आसपास चाटना शुरू किया और वहाँ चिपके हुए नीतु के अमृत रस को चाटने लगा। नीतु ने अपनी चूत की पंखुड़ियों को जितना संभव था उतना फैलाया। जॉनी ने अंदर तक चाटने के बाद चूत के ऊपरी हिस्से की छोटी परत को अपने दाँतों से धीरे से काटकर खींचा। नीतु ने पहले कभी न अनुभव किया हुआ सुख पाया और जोर-जोर से चीखते हुए अपनी चूत से फिर से रस उड़ेलकर जॉनी को पिलाया। लगभग 20-25 सेकंड तक बहने वाले नीतु की चूत के अमृत रस की एक बूँद भी बर्बाद न होने देने वाले जॉनी ने कहा, "नीतु, तेरी चूत का रस स्वर्ग की शराब जैसा है, डियर। बहुत शानदार और स्वादिष्ट। किसी दिन मैं तेरा मूत्र भी पिऊँगा।" जॉनी की यह इच्छा सुनकर नीतु बहुत शरमाई और अपने हाथों से चेहरा ढककर हँसने लगी।

जॉनी ने नीतु की जांघों को फैलाया और उसकी रस बहा रही चूत पर अपने खड़े लंड को रगड़ा। पटपटाकर पांच-छह बार जोर से मारा, तो नीतु कामोन्माद से चीख पड़ी। जॉनी अपने लंड को अंदर नहीं घुसा रहा था और चूत की पंखुड़ियों पर रगड़ रहा था, जिससे नीतु की उत्तेजना हद पार कर गई। उसने कहा, "प्लीज, जॉनी, मुझे तड़पाओ मत। अपने अमेरिकी लिंग को मेरी रसदार भारतीय शादीशुदा चूत में डाल दो और मुझे चोदो... प्लीज, मुझे एक वेश्या की तरह चोदो... आह... आह..." वह कराह रही थी। जॉनी ने चूत की पंखुड़ियों को उंगलियों से फैलाया और अपने लंड को उसके सामने रखकर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से घुसाया। आधा लंड नीतु की चूत को चीरता हुआ अंदर घुसा, और नीतु के मुँह से इतनी जोरदार चीख निकली कि वह पूरे बाग में गूँज उठी। जॉनी के लंड के प्रहार की रफ्तार से नीतु की आँखों से चार बूँद आँसू टपके, लेकिन उससे मिल रहे सुख को वह बयान नहीं कर सकती थी। तीन-चार और भयंकर प्रहारों के साथ जॉनी का अमेरिकी लंड नीतु की भारतीय चूत में पूरी तरह घुस गया। नीतु की ओर देखकर मुस्कुराते हुए जॉनी ने कहा, "अब असली चुदाई शुरू होती है, डियर। चलो, चोदें और इस भारतीय शादीशुदा चूत को फाड़ दें।" उसने तीव्र गति से उसकी चूत को चोदना शुरू किया। पहले नीतु की चूत में हरीश का लंड ही तेजी से घुसता था और हर मिनट में 20-25 प्रहार करता था, लेकिन जॉनी का लंड सुपरफास्ट गति से घुस रहा था और हर सेकंड एक प्रहार की तरह उसकी चूत को चोद रहा था। इतनी जबरदस्त गति और शानदार प्रहारों से अपनी चूत को चुदवाती नीतु जोर-जोर से चीख रही थी और चिड़िया की तरह उड़ने का अनुभव ले रही थी। उसके प्रहारों की गति से उसका शरीर हिल रहा था और उसके स्तन दिशाहीन होकर इधर-उधर उछल रहे थे।

बिस्तर पर पैर फैलाकर लेटी नीतु, जो जॉनी को अपने ऊपर सवारी करवा रही थी, के मुलायम नितंबों को जॉनी ने अपनी हथेलियों में पकड़ा और उसे ऊपर उठा लिया। नीतु ने उसकी गर्दन के चारों ओर अपनी बाहें लपेट लीं। नीतु को उठाकर खड़ा जॉनी बहुत रफ्तार से अपनी कमर हिलाते हुए नीतु की चूत को उसकी कल्पना से परे गति से चोद रहा था। नीतु को नहीं पता था कि उसने कितनी बार अपनी चूत से रस बहाकर जॉनी के विदेशी लंड का अभिषेक किया। वह इस अकल्पनीय चुदाई के सुख का अनुभव कर रही थी। लगभग एक घंटे से ज्यादा समय तक नीतु की चूत को मन भरकर चोदने के बाद जॉनी ने अपने वीर्य को उसके गर्भ में भर दिया और तब जाकर शांत हुआ।

Neetu and Johnny in a serene farmhouse bedroom after intimate moments, in a candid photograph.


नीतु ऐसी अकल्पनीय चुदाई से मिले अविस्मरणीय सुख का अनुभव करते हुए लेटी और अपनी थकान को दूर करने लगी।

आधे घंटे बाद तरोताजा होकर लौटी नीतु ने अपने कपड़े पहने और तैयार हुई।

जॉनी ने उसे खींचकर गहरे होंठों का चुम्बन किया और कहा, "तू स्वर्ग की परी है, डियर। अगर कोई मुझसे पूछे कि स्वर्ग कहाँ है, तो मेरा जवाब होगा- भारतीय शादीशुदा औरत की चूत में।" यह सुनकर नीतु हँसते हुए उसकी छाती पर चार घूंसे मारे।

जब नीतु अपने घर की ओर निकली, तो जॉनी ने उसके हिलते हुए नितंबों को पकड़कर जोर से दबाया और बोला, "अगली बार मैं पीछे से घुसूँगा। मैं तेरे पवित्र नितंबों को चोद डालूँगा।" नीतु हँसते हुए जीभ लहराकर उसे चिढ़ाने लगी।

जैसे ही उसने इनोवा का दरवाजा खोला, जॉनी ने उसे रोका, सीट पर बैठाया, और खुद स्टेप पर खड़े होकर उसके चेहरे के सामने अपना लंड लहराया। नीतु हँसते हुए उसने अपने मुँह में लिया और दस मिनट तक चूसा। फिर जॉनी ने कहा, "कल से दोनों बच्चों को सुबह साढ़े पांच बजे भेज दे। मैं उन्हें इतना मजबूत बना दूँगा कि वे लोहा भी मोड़ सकें। मेरी पत्नी की मृत्यु के 14 साल बाद मुझे ऐसा सुख मिला है। जिस दिन मैं तुझे भूल जाऊँ, वह मेरा आखिरी दिन होगा, डियर।" नीतु ने उसके होंठों पर चुम्बन देकर कहा, "यह सुख तुझे जब चाहे तब मिलेगा। मेरी सहेली भी तेरे नीचे लेटने की इच्छा रखती है। क्या तू उसे भी मेरे जैसा सुख देने को तैयार है?" जॉनी हँसते हुए बोला, "कौन, रजनी... शीला? मैं दोनों को चोदने के लिए तैयार हूँ, क्योंकि वे तेरी हैं। अगली बार जब वे आएँ, तो उन्हें साथ ले आ।"

जब नीतु ने इनोवा स्टार्ट किया, तो जॉनी ने एक मिनट रुकने को कहा और अंदर जाकर अपने उगाए हुए ताजा फल और सब्जियाँ लाकर दीं। उसने कहा, "कल जब बच्चे घर से निकलें, तो मुझे फोन करके बता देना और जब तक मैं न आऊँ, गेट का ताला न खोलने को कह दे। पहले मैं उन्हें चौकीदार कुत्तों से मिलवाऊँगा और उनके साथ दोस्ती करवाऊँगा। फिर वे बाग में बिना डर के घूम सकेंगे। हाँ... और अगली बार उस क्यूट डॉल को भी यहाँ ले आ। उसने मेरा मन और दिल पूरी तरह चुरा लिया है। इस बाग में वह अपनी मर्जी से खेल सकती है। अगर तू स्वर्ग की परी है, तो तेरी बेटी स्वर्ग की राजकुमारी है। मेरे लिए वह छोटी सी देवी जैसी है।" यह कहकर उसने नीतु को विदा किया।

A photograph of Neetu in a vehicle, expressing satisfaction after an encounter, in a realistic style.


जब नीतु घर की ओर जा रही थी, तो रजनी ने फोन किया और बोली, "रे, प्यारी के साथ बात करनी है। जल्दी वीडियो कॉल कर।" नीतु हँसते हुए बोली, "रे, मैं अभी घर के रास्ते में ही हूँ। अपने प्रेमी को फोन कर और बेटी के साथ-साथ उनसे भी बात कर।" रजनी ने पूछा, "वे सब घर पर हैं, तो तू कहाँ है?" नीतु ने कहा, "जॉनी को उसके बाग में ड्रॉप करने गई थी। अब घर जा रही हूँ।" रजनी ने आश्चर्य से कहा, "रे, सच बता, उसे छोड़ने गई थी या उससे चुदवाने?" नीतु ने कार को किनारे रोका और बोली, "रे, तेरे आसपास रश्मि तो नहीं है?" उत्सुक रजनी ने कहा, "नहीं, रे। क्या बात है? तूने कुछ कर डाला क्या?"

नीतु रहस्यमयी ढंग से हँसते हुए बोली, "तेरी सोच बिल्कुल सही है, रे। मैं उससे अपनी चूत चुदवाने ही गई थी। अरे... ऐसा लगा जैसे मैं किसी बुलेट ट्रेन के नीचे लेट गई हूँ। उसने मुझे बच्चे की तरह दोनों हाथों में उठाकर अच्छे से चोद डाला, रे। मेरा शरीर अभी भी उसके प्रहारों से काँप रहा है, लेकिन बहुत मजा दिया, रे। उसने क्या कहा, पता है? स्वर्ग कहाँ है, तो भारतीय शादीशुदा औरत की चूत में। हाहाहा... मैंने तेरे बारे में भी बता दिया है। जब तू फ्री होकर यहाँ आए, तो हम दोनों मिलकर उसके बाग में उसके साथ थ्रीसम करेंगे।" रजनी हँसते हुए बोली, "रे, तेरी बात सुनकर तो मेरी चूत रो रही है, रे। अगर संभव हुआ, तो इस हफ्ते ही आने की कोशिश करूँगी। तूने जैसा कहा, आज ही उसे अपने ऊपर चढ़ा लिया, रे। पक्की रंडी है तू। रे, तू अशोक से एक बार कह दे कि हमारे गाँव में शिफ्ट हो जाएँ। अगर तू कहेगी, तो अशोक बिना टालमटोल के मान जाएगा, प्लीज, रे।" नीतु बोली, "रे, इतना घबराने की क्या बात है? अगले हफ्ते तुझे आने की जरूरत नहीं। मैं खुद आ जाऊँगी। अशोक को अपनी जांघों के बीच लेकर ऐसी बात करूँगी कि वह तुरंत मान जाएगा।" रजनी जोर से हँसते हुए बोली, "मैंने कहा था न, रे, तू पक्की रंडी है। वहाँ भी तू मजा लेती है, यहाँ आने पर भी तू ही मजा लेती है। मेरी चूत भूखी ही रह जाए।" नीतु ने कहा, "वैसे भी अशोक गाँव में नहीं है। अगर तू माने, तो बोल, मैं रमेश को तेरे घर भेज दूँ। तुम दोनों का पहले से लिंक है न। थोड़ा जलवा दिखा, बिस्तर पर लेटकर उससे चुदवा।

Neetu, a beautiful Indian woman, in a parked Toyota Innova, engaged in a video call with a teasing conversation.


वह भी अच्छे से चोदता है।" रजनी आश्चर्य से बोली, "वह अच्छे से चोदता है, ये तुझे कैसे पता? मतलब तू और रमेश... कब? कहाँ? कैसे?" नीतु हँसते हुए बोली, "उस दिन घर दिखाने के लिए ले गई थी न, उसी दिन उसने अपने कमरे में मुझे उठाकर चोद डाला।" रजनी हँसते हुए बोली, "तुझे पता भी है कि तू कब क्या करती है, रे। कल ही फोन करके रमेश को भेज दे। कल मैं उसे चोदने तक नहीं छोडूँगी। हाँ... सुबह जल्दी भेज दे। दोपहर तीन बजे तक रश्मि कॉलेज से आ जाती है।" नीतु ने कहा, "चिंता मत कर, डार्लिंग। कल रमेश को तेरी चूत की सवारी करने का मौका मिलेगा। रे, तू ही हरीश को फोन करके चिन्नी के साथ बात कर। मैं घर पहुँचकर सोना चाहती हूँ। जॉनी ने मेरा पूरा शरीर हिलाकर रख दिया है। कल रमेश को फोन करने के बाद तुझे बता दूँगी।"

नीतु ने गाड़ी स्टार्ट करने से पहले अपनी चूत को एक बार सहलाया और बोली, "जॉनी, तूने तो जज्जी-बज्जी कर दिया। आखिर मेरी भारतीय चूत में अमेरिकी लंड घुसकर चोद ही डाला।" हँसते हुए उसने घर का रास्ता पकड़ा।

A photograph of Anusha and her baby Nisha sharing a tender moment in a bedroom.


जब नीतु घर पहुँची, तो निशा अनुषा की जांघ पर बैठी थी। उसने लैपटॉप के जरिए पहले शीला से बात की, फिर रजनी और रश्मि के साथ वीडियो कॉल पर अपनी समझ के मुताबिक कुछ न कुछ बोल रही थी।

Harish and Neetu share an intimate moment in the hallway, leaving Nisha with Anusha.


हरीश ने अपनी पत्नी को आया देखकर निशा को आंटी के साथ रहने को कहा और पत्नी को कमरे में ले गया। नीतु ने कहा, "रे, बच्चे?" हरीश ने कहा, "वे दोनों पढ़ रहे हैं। चिन्नी अनुषा के साथ खेल रही है। आ।" यह कहकर उसने अपनी पत्नी को नग्न करके चोदना शुरू किया।

अभी-अभी जॉनी से चुदवाकर आई नीतु को हरीश ने भी 45 मिनट तक अच्छे से चोद डाला। नीतु ने थोड़ा आराम किया और तरोताजा होकर रसोई में गई।

वहाँ अनुषा हँसते हुए बोली, "क्या, दीदी, जीजू ने अच्छे से रगड़ डाला?" नीतु ने उसके सिर पर हल्का सा मारा और बोली, "तूने दो दिन तक ड्रिलिंग नहीं करवाई थी क्या? अब मेरी बारी है। हाँ, बता, तुम दोनों की रासलीला कितनी बार हुई?" अनुषा शरमाते हुए बोली, "दीदी, रात-दिन।" नीतु ने अपना मुँह ढक लिया और बोली, "रे, शादी से पहले ही तू प्रेग्नेंट हो जाना चाहती है क्या? इसके बारे में थोड़ा सावधान रह, समझी? अब खाना परोस दे। मेरा पूरा शरीर दुख रहा है। रात को अगर जरूरत हो, तो अपने जीजू को तू ही सुला ले।" अनुषा ने सिर हिलाया और बोली, "नहीं, दीदी। कल भी सोई नहीं। आज अपने कमरे में पूरी तरह आराम करूँगी।"

सबने खाना खाया, फिर नीतु ने बच्चों से कहा, "कल सुबह पांच बजे उठकर तैयार हो जाना। गिरीश, तुम्हारे कॉलेज के पास वाली सड़क पर तीन किलोमीटर आगे जाने पर बाईं तरफ xxxxxx फार्म का बोर्ड दिखेगा। वही जॉनी का बाग है। लेकिन जब तक वह न आए, तुम गेट न खोलना। अंदर 15-20 कुत्ते हैं। वह आएगा और तुम दोनों का उनसे परिचय करवाएगा। फिर कोई डर नहीं। जब तुम यहाँ से निकलोगे, मैं फोन करके जॉनी को बता दूँगी कि बच्चे आ रहे हैं। वह जो सिखाए, उसे डर, भक्ति और श्रद्धा से सीखना, समझे।" अपने पिता की गोद में बैठी निशा अपनी माँ की बात ध्यान से सुन रही थी और अपने भाइयों को भी देख रही थी। नीतु ने बच्चों को उनके कमरे में भेजा और अपने पति से कहा, "बेटी के साथ अपने कमरे में जाओ।" अनुषा ने कहा, "दीदी, तुम भी जाकर सो जाओ। रसोई का ज्यादा काम नहीं है। मैं कर लूँगी।" उसने निशा को गुड नाइट किस दिया और रसोई की ओर चली गई। नीतु कमरे में गई, तो निशा अपने पापा की छाती पर बैठकर खेल रही थी। नीतु हँसते हुए 4:45 का अलार्म सेट करके अपने पति और बेटी को देखते हुए लेट गई।

निशा भी अपने पापा के ऊपर से उतरकर अपनी माँ के पास आकर सो गई।
 
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नियति से बंधी नीतू - Part 76

सुबह अलार्म की आवाज से हरीश को नींद खुली, लेकिन बेटी को गले लगाकर सो रही नीतू जरा भी नहीं हिली। हरीश ने पत्नी और बेटी को देखकर मुस्कुराते हुए खुद ही बच्चों को जगाने उनके कमरे में गया, तो देखा कि बड़े भाई-छोटे भाई पहले ही अलार्म सेट करके उठ चुके थे, मुँह धोकर तरोताजा होकर ट्रैक और टी-शर्ट पहनकर तैयार हो रहे थे। हरीश ने दोनों बच्चों को देखकर "बढ़िया" कहा और खुद जॉनी को फोन करके बच्चों के बगीचे में आने की बात बताई। उसने यह भी कहा कि नीतू बता रही थी कि वहाँ दस-बीस कुत्ते हैं। जॉनी ने कहा, "आप बिल्कुल चिंता न करें सर, मैं हूँ न," और फोन रख दिया। दोनों बच्चे जाने के बाद अनुषा भी उठी, तरोताजा हुई और हरीश को कॉफी दी। कॉफी पीते हुए उसने कहा कि आज रात वह उसके कमरे में आएगी। हरीश की ओर मुस्कुराते हुए देखकर अनुषा ने "हूँ" कहकर सिर हिलाया और नाश्ता तैयार करने चली गई, जबकि हरीश ड्राइविंग क्लास के लिए निकल गया।

हरीश और बच्चे लौट आए थे, लेकिन माँ-बेटी अभी भी आराम से सो रही थीं। साढ़े सात बजे के आसपास नींद से जागी नीतू ने अपनी प्यारी बेटी का चेहरा देखकर उसके गाल पर चुम्मी दी, तो निशा भी करवट लेते हुए माँ को देख रही थी। दोनों नीचे उतरे और बाहर आए, तो निशा आँखें मलते हुए सोफे पर अखबार पढ़ रहे पापा के पास गई और उनसे चिपक गई। उस दिन हरीश ने खुद बेटी को तरोताजा कराया, मुँह धुलवाया और वापस लाया। नीतू कॉफी पीते हुए बच्चों के साथ आज जॉनी ने क्या-क्या सिखाया, इसके बारे में बात कर रही थी और पति की ओर देखकर बेटी को कॉम्प्लान पिलाने के लिए ग्लास थमा दिया। सभी नहा-धोकर तैयार होने गए, तो नीतू ने रमेश को फोन किया और कहा कि आज सुबह अशोक के घर चले जाओ। रमेश ने पूछा, "फिर से आपकी सवारी?" तो नीतू हँसते हुए बोली, "जितना जल्दी हो सके," और फोन रख दिया। नीतू ने रजनी को भी फोन करके बताया कि रमेश दस बजे तक आएगा। हरीश और बच्चों को स्कूल-कॉलेज और अनुषा को बैंक भेजने के बाद नीतू अपनी बेटी के साथ बैठी और अपनी पक्की सहेली शीला से वीडियो कॉल पर बात की। उस दिन रजनी के घर पहुँचे रमेश को रजनी ने अपनी जवानी से उत्तेजित किया और उसका लंड अपनी चूत में डलवाकर दोपहर तक दो-दो बार संभोग करवाया। जहाँ अशोक ने रमेश की एकमात्र पत्नी को चोदा था, वहीं रमेश को उसकी दो पत्नियों, नीतू और रजनी, की चूत को चोदने का मौका मिला था।

हर दिन बच्चे सुबह खुद ही उठकर तैयार होकर जॉनी के बगीचे में जाते और वहाँ बताए गए व्यायाम और मार्शल आर्ट्स सीखने लगे थे। सुबह पापा और भाइयों के न होने की वजह से नीतू अपनी बेटी को सात बजे से पहले नहीं जगाती थी। गुरुवार की सुबह, जब घर में सिर्फ माँ-बेटी थीं, नीतू अपनी बेटी के साथ जॉनी के बगीचे में गई। पहले से फोन कर रखा था, इसलिए जॉनी गेट के पास ही उनका इंतजार कर रहा था। उसे देखकर निशा उसे टाटा कर रही थी। जॉनी ने उसे "माय लिटिल एंजल" कहकर गोद में उठाया और अंदर ले गया। कुत्तों को देखकर निशा बहुत डर गई और चीखते हुए जॉनी से कसकर लिपट गई। कुछ देर बाद जॉनी ने उसे कुत्तों से परिचय करवाया, उसका डर दूर किया और निशा से ही उन्हें ब्रेड और बिस्किट खिलवाए। तब निशा खुशी से हँसते हुए "मम्मी... मम्मी" कहकर नीतू को बुला रही थी और कुत्तों को सहला रही थी। बगीचे का माहौल निशा को बहुत पसंद आया और वह अपने छोटे-छोटे कदमों से इधर-उधर दौड़कर खेल रही थी, जबकि जॉनी उसके पीछे-पीछे रहता था। निशा ने लंबे समय तक बगीचे में घूमकर वहाँ के पेड़-पौधों, फलों और सब्जियों को उत्सुकता से देखा, छुआ और खुश हो रही थी। काफी देर तक जॉनी और माँ के साथ बगीचे में घूमने के बाद निशा थक गई और माँ की गोद में आकर सो गई। जॉनी के साथ घर के अंदर आई नीतू ने अपनी बेटी को आराम से बिस्तर पर लिटाया और जैसे ही मुड़ी, जॉनी ने उसे बाहों में ले लिया। उसने नीतू का चूड़ीदार उतार फेंका और नीली ब्रा-पैंटी में खड़ी नीतू को उठाकर घर से बाहर बगीचे की घास पर लिटा दिया। इस तरह दिन के उजाले में, प्रकृति की गोद में सिर्फ ब्रा-पैंटी पहने जॉनी की बाहों में होना नीतू के लिए एक नया अनुभव था। जॉनी ने नीतू की ब्रा-पैंटी भी उतार दी और उसके नंगे शरीर को चाटने, जोर से मसलने और दबाने लगा। फिर नीतू की जाँघों के बीच आकर उसने अपनी लंड चूत में डालकर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। नीतू भी घास पर पैर फैलाकर जोर से चीख रही थी और जॉनी के लंड के धक्कों का मजा लेते हुए आनंदित हो रही थी।

एक घंटे तक चूत को चोदकर संतुष्ट होने के बाद, जॉनी के वीर्य स्खलन के बाद नीतू तरोताजा होने के लिए घर की ओर चली। जॉनी ने उसे उठाकर बगीचे में बनाए गए प्राकृतिक छोटे तालाब में उतारा और दोनों ने एक-दूसरे के शरीर को रगड़कर तरोताजा हुए। जब नीतू ने टॉयलेट की बात कही, तो जॉनी ने उसे अपने कंधों पर बिठाया और कहा, "डार्लिंग, आज मैं तुम्हारा पेशाब पीना चाहता हूँ, कृपया मेरे मुँह में डालो," और उसकी चूत पर मुँह लगा दिया। जीवन में पहली बार किसी के मुँह में पेशाब डालने के अनुभव को सोचकर नीतू का पूरा शरीर रोमांचित होकर काँप उठा। नीतू की चूत से "सुर... सुर... सुर..." की आवाज के साथ निकल रही जलधारा को जॉनी ने पूरी तरह पी लिया और उसे नीचे उतारा। उसने कहा, "नीतू, तुम्हारा पेशाब शराब से ज्यादा नशा देता है। अब जब भी तुम यहाँ आओगी, मैं तुम्हारा पेशाब पिऊँगा।" नीतू शरमाते हुए उसका सिर थपथपाकर घास पर पड़ी अपनी ब्रा-पैंटी उठाई और नंगे शरीर में ही घर की ओर चल पड़ी। नीतू की आकर्षक, गोल-मटोल, हिलती हुई नितंबों को देखकर जॉनी जोर से चिल्लाया, "अगली बार मैं तुम्हारी गांड चोदूँगा, बेबी।" नीतू ने उसका मजाक उड़ाया और घर के अंदर जाकर कपड़े पहन लिए।

जब तक नीतू जॉनी के साथ अपनी चूत की चुलबुली शांत करके तैयार हुई, तब तक निशा भी जाग गई थी और बिस्तर से उतरकर घर का मुआयना कर रही थी। नीतू अपनी बेटी के साथ घर जाने लगी, तो इस बार जॉनी ने निशा को कई तरह के स्वादिष्ट फल दिए। नीतू ने कहा, "इतना क्यों? हर बार आने पर ऐसा देते हैं, तो आपका ही नुकसान होगा। और आप मुझसे पैसे भी तो नहीं लेते।"

जॉनी हँसते हुए बोला, "माय लिटिल एंजल," और निशा के गाल पर चुम्मी देते हुए कहा, "नीतू, मैंने यह बगीचा सिर्फ अपनी अकेलापन दूर करने के लिए बनाया है, पैसे कमाने के लिए नहीं। मैंने जीवन में इतना पैसा कमा लिया है कि दोनों हाथों से खर्च करने पर भी खत्म न हो। पत्नी के मरने के बाद अपने देश में नहीं रह सका और शांति के लिए यहाँ आकर बस गया। मेरी भी एक बेटी थी, इस मेरे एंजल जैसी, लेकिन वह भी अपनी माँ के साथ प्लेन क्रैश में मर गई। इसे देखकर मुझे मेरी बेटी की याद आती है, लेकिन यह मेरी बेटी से कहीं ज्यादा प्यारी है। तुम जब भी आओगी, मैं यही फल और सब्जियाँ दूँगा। अगर तुम न आईं, तो चिंता मत करो, मेरे दो जवान, बहादुर लड़के तो आते हैं, उनके साथ भेज दूँगा या मैं खुद तुम्हारे घर ले आऊँगा।" [नीतू दरवाजे की ओर आई] "इनके बदले मैं तुमसे पूरी तरह वसूली भी तो कर रहा हूँ," कहकर उसने नीतू की जाँघों के जोड़ में हाथ डाला और लेगिंग्स के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाई। नीतू शरमा गई। माँ-बेटी अपने घर की ओर चलीं, तो निशा जॉनी को टाटा करते हुए उसी ने सिखाया हुआ फ्लाइंग किस कर रही थी। यह देखकर जॉनी की आँखों में आँसू आ गए। जॉनी ने कहा, "रविवार को पूरा परिवार यहाँ आओ, हम सब मिलकर यहाँ खुशी से समय बिताएँगे, खाना खाएँगे और मस्ती करेंगे।" नीतू ने कहा, "हम शाकाहारी हैं।" जॉनी हँसते हुए बोला, "मेरी पत्नी ने मुझे भी शाकाहारी बना दिया था। खाना भी तुम्हें ही बनाना है, जो चाहो बनाओ," और दोनों की ओर हाथ हिलाकर विदा किया।

रात के समय, बेटी माँ से चिपककर सोती थी, इसलिए हरीश हर रात अनुषा की चूत में अपनी गर्म लावा डालकर तृप्त होकर पत्नी के साथ सोने आता था। शनिवार को आखिरी ड्राइविंग क्लास के लिए निकले पति के साथ नीतू भी बेटी को लेकर गई और स्विफ्ट कार की पीछ वाली सीट पर बैठकर पति की ड्राइविंग स्किल देखकर हैरान रह गई। हरीश को ड्राइविंग सिखाने वाला टीचर बोला, "मैडम, पहले दस दिन में ही सर ने कार चलाना अच्छे से सीख लिया था, लेकिन पत्नी और बच्चों को साथ ले जाने के कारण उन्होंने और बीस दिन प्रैक्टिस की। ड्राइविंग टेस्ट में भी बिना किसी गलती के पास हो गए हैं। एक हफ्ते में उनका लाइसेंस भी आ जाएगा। चिंता न करें, अब वह एक क्वालिफाइड रेसर हैं।" यह सुनकर सब हँस रहे थे। पापा को कार चलाते देख रही निशा, जो माँ की गोद में खड़ी थी, को कुछ समझ में आया या नहीं, लेकिन आज उसे माँ की गोद में बैठना बहुत खुशी दे रहा था।
 
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