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नियति से बंधी नीतू - Part 67
दोपहर में रजनी का फोन आया, तो नीतु निशा को सहेली के पास छोड़कर उसे लेने निकली। रजनी के घर पहुंचते ही उसने नीतु को अंदर खींचा, दरवाजा बंद किया और सीधे कमरे में ले जाकर उसके कपड़े उतारकर नंगी कर दिया। खुद भी नंगी होकर रजनी ने नीतु के होंठों को चूमा। नीतु की रसीली चूत को जी भरकर चाटते हुए रजनी ने उसके रस की हर बूंद का स्वाद लिया। नीतु की गांड के छेद में उंगली डालकर रजनी बोली, "आह, क्या मस्त माल है तू! इसीलिए मेरा पति हमेशा तुझ जैसी मोटी गाय की सवारी के लिए तैयार रहता है। तेरे यौवन का रस किसी भी मर्द के लिंग से पानी निकाल देता है।" नीतु ने रजनी को बिस्तर पर धकेला और उसके सफेद चूत को चाटने लगी। पांच मिनट में ही रजनी रस छोड़कर हांफने लगी। रजनी की गांड के छेद को चाटते हुए नीतु ने उंगली डाली और बोली, "अशोक ने तेरी गांड का सील भी खोला?" रजनी हंसते हुए बोली, "उसे तो बहुत इच्छा थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब हरीश से ही अपनी गांड मरवाऊंगी।" दोनों ने 15 मिनट तक एक-दूसरे के नंगे शरीर को सहलाया, मसला और समलैंगिक सुख का आनंद लिया, फिर जाने के लिए तैयार हुईं।
घर पहुंचे, तो आंगन में निशा चीखते हुए भाई के पीछे छोटे-छोटे कदमों से दौड़ रही थी। पड़ोस की तीन औरतें शीला के साथ खड़ी होकर निशा का खेल देखकर हंस रही थीं। नीतु को देखकर निशा दौड़कर आई और गोद में उठने के लिए दोनों हाथ ऊपर किए। नीतु की गोद में जाकर उसने भाई की ओर इशारा किया। नीतु को समझ नहीं आया कि वह क्या कह रही है। शीला और गिरीश की ओर देखा, तो गिरीश बोला, "अम्मा, वह थोड़ी देर से टॉम एंड जेरी देख रही थी। अब मुझे उसी तरह दौड़ा रही है और तुम्हें भी मेरे पीछे दौड़ने को कह रही है।" नीतु ने निशा के गाल पर चुम्मा देकर कहा, "चिन्नी, हम भाई के पीछे नहीं दौड़ेंगे। घर जाकर पापा को दौड़ाएंगे, ठीक है?" निशा ने मां को चूमा और भाई को पास बुलाकर उसके कंधे पर चढ़ गई। पड़ोस की औरतों ने नीतु से कहा कि गोद ली बेटी बहुत प्यारी और चंचल है, और उसने बहुत अच्छा काम किया। फंक्शन भी बहुत शानदार था। वे नीतु से कुछ देर बात करके चली गईं।
अंदर शीला रवि की पीठ पर सवार होकर खुशी से हंस रही थी और सबको हाथ हिला रही थी। गिरीश ने रजनी को देखकर पूछा, "आंटी, आप दादा-दादी के साथ नहीं गईं?" रजनी जवाब नहीं दे पाई और नीतु की ओर देखने लगी। नीतु बोली, "इनकी सास के साथ कुछ काम है, इसलिए इन्हें हमारे गांव ले जा रही हूं। तेरी होने वाली पत्नी रश्मि अकेले दादा-दादी के साथ गई है। अगर तू कहे, तो तुझे भी उनके पास भेज दूं।" गिरीश शरमाकर चुप हो गया। नीतु की बात सुनकर रजनी और शीला जोर से हंसने लगीं। गिरीश शर्म और संकोच से न तो बैठ पा रहा था, न उठ पा रहा था। रजनी बोली, "नीतु, बेचारे मेरे दामाद को यूं मत सता। अगर उसने मेरी बेटी से शिकायत की, तो वह पतिव्रता शिरोमणि मुझ पर टूट पड़ेगी।"
हंसते-हंसते कुछ समय बिताने के बाद रवि और शीला से विदा लेकर नीतु, रजनी और निशा गांव के लिए निकलीं। शीला ने नीतु को गले लगाकर कहा, "पता नहीं क्यों, लेकिन डर लग रहा है।" वह रोने लगी। नीतु ने उसे सांत्वना दी और रवि से बोली, "अण्णा, मेरी प्यारी सहेली का बहुत ध्यान रखना। वह बहुत परेशान है। अगर ऐसा ही रहा, तो मुझे तुरंत फोन करना, मैं उसे अपने गांव ले जाऊंगी। अण्णा, मेरी इस सहेली का खास ख्याल रखना। यह मेरी तुमसे गुजारिश है, मुझे निराश मत करना।" रवि ने नीतु का सिर सहलाकर कहा, "चिंता मत कर, मेरे पास सिर्फ मेरी पत्नी ही है। उसकी जिम्मेदारी मेरी है। मैं रोज तुम्हें उसकी खबर दूंगा। तुम निश्चिंत होकर जा। दीपावली पर हम भी वहां आएंगे। तुम्हें और हमारी छोटी कंदम्मा को उदास देखना मुझे बर्दाश्त नहीं।" निशा ने रवि और शीला को चूमा, टाटा किया और मां के साथ गांव के लिए रवाना हुई।
नीतु SUV चला रही थी। निशा भाई की गोद में खड़ी होकर खिड़की से बाहर देख रही थी और लोगों को चीखकर बुला रही थी। घर पहुंचते ही सुरेश दौड़कर आया और निशा को गोद में लेकर दुलारने लगा। रजनी ने हरीश को देखा, तो उसकी चूत की पंखुड़ियां फड़फड़ाने लगीं। नीतु ने हरीश को गले लगाया और बच्चों के साथ अंदर चली गई। हरीश ने रजनी को गले लगाया और उसके कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को तैयार रहना।" उसने रजनी को अंदर ले गया। हरीश ने पहले से खाना बना रखा था। नीतु बोली, "री, मैं आकर खाना बनाती। तुमने क्यों बनाया?" हरीश हंसा और बोला, "अपने छोटे बेटे से पूछ, मैं अच्छा खाना बनाता हूं या नहीं। दो घंटे ड्राइव करके आई मेरी पत्नी के लिए इतना तो कर सकता हूं। फ्रेश हो जा, कॉफी बनाता हूं।" उसने रजनी को भी भेज दिया। सुरेश रवि के दिए बबल मेकर से बुलबुले बना रहा था, और निशा उन्हें तोड़ने के लिए चीखते हुए घर में दौड़ रही थी। पापा और भाइयों के साथ रात तक खूब उछल-कूदकर निशा जल्दी खाना खाकर सो गई। गिरीश ने पापा को बताया कि निशा टॉम एंड जेरी देखकर वैसा ही खेल रही थी। हरीश खुश हुआ और नीतु से बोला, "लैपटॉप के लिए इंटरनेट कनेक्शन चाहिए था। कल कंपनी वालों से बात करके अनलिमिटेड पैक वाई-फाई डिवाइस के लिए पूरा पेमेंट कर दिया। वे कल डिवाइस फिक्स कर जाएंगे। इससे घर में हर जगह सुपर-फास्ट इंटरनेट मिलेगा। बच्चों और मुझे सुविधा होगी। तुम भी अब मोबाइल की बजाय वाई-फाई से लैपटॉप यूज करो। निशा के लिए टॉम एंड जेरी और दूसरे कार्टून डाउनलोड करके दिखाओ, उसे भी खुशी होगी।" रात के खाने के बाद दोनों बच्चे बहन के साथ सोने के लिए कमरे में दौड़े। नीतु ने हरीश को चुदाई का इशारा किया और कमरे में चली गई।
रसोई में पानी पी रही रजनी को हरीश ने गोद में उठाकर कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद किया। रजनी ने हरीश की टी-शर्ट उतारी और उसके सीने को सहलाते हुए कई चुम्बन देकर अपना प्यार जताया। हरीश ने रजनी के माथे, गाल, गले और कानों पर चुम्मे दिए और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी पीठ सहलाने लगा। रजनी का चूड़ीदार टॉप उतारकर हरीश ने नीली ब्रा में कैद गोल स्तनों को मसला और अपना चेहरा उनके बीच दबाकर चाटने और चूमने लगा। 10 मिनट तक स्तनों को मसलवाने के बाद रजनी पीछे हटी, बिस्तर पर बैठी और हरीश की ट्रैक पैंट और चड्डी उतारकर उसके 10 इंच के तने हुए लिंग को सहलाया। लिंग के सिरे को चूमकर और जीभ से चाटकर रजनी ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। उसने हरीश के अंडकोषों को भी सहलाया और चूसा। हरीश ने रजनी का चूड़ीदार बॉटम उतारा और उसकी नीली पैंटी के ऊपर से चूत को चूमा, उसकी सुगंध ली। रजनी को बिस्तर पर लिटाकर हरीश ने उसके पैरों को चूमा, मोटी जांघों को सहलाया और चाटा, फिर पैंटी के ऊपर से चूत को चाटने लगा। उसने रजनी के पेट को सहलाया, नाभि में जीभ डाली, जिससे रजनी कामवासना में कराहने लगी। हरीश ने उसके स्तनों को जोर से मसला। रजनी को पीठ के बल लिटाकर उसकी लंबी पीठ को सहलाया, चूमा और कमर पर दांतों से निशान बनाए। रजनी के गोल कूल्हों को मसलकर हरीश ने नीली पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा और सफेद कूल्हों को चाटकर दांतों से निशान बनाए। कूल्हों को फैलाकर उसने रजनी की गांड के भूरे छेद को चाटा और ब्रा की हुक खोलकर उसे सीधा लिटाया।
रजनी की ब्रा हटाकर हरीश ने उसके नंगे स्तनों को मसला, निप्पलों को चूसा और उन पर दांतों के निशान बनाए। रजनी ने पैंटी का इलास्टिक पकड़कर कूल्हे उठाए और उसे उतार दिया। पहली बार अशोक के अलावा किसी और के सामने रजनी ने अपना नंगा शरीर प्रदर्शित किया। हरीश ने रजनी की रस टपकाती चूत को चूमा, उसका स्वाद लिया और चाटने लगा। उसने चूत की पंखुड़ियां फैलाकर जीभ अंदर डाली, जिससे रजनी सुख के आकाश में तैरने लगी और "हां... आह..." कहकर चीखने लगी। उसने चूत से रस का फव्वारा छोड़ा, जिसे हरीश ने पी लिया। रजनी हांफते हुए बिस्तर पर लेट गई।
पांच मिनट बाद हरीश ने रजनी के पैर उठाकर अपने कंधों पर रखे और उसकी जांघों के बीच आकर अपने लिंग से उसकी चूत की पंखुड़ियों को ऊपर-नीचे रगड़ा और उस पर थप्पड़ मारे। रजनी की कामवासना भड़क उठी। उसने कहा, "प्लीज, हरीश, और मत तड़पाओ। जल्दी अपनी तुन्नी मेरी चूत में डालो और मुझे पूरी तरह अपनी बना लो। मैं तुम्हारे प्यार के लिए बहुत दिन से तरस रही हूं।" उसकी बात पूरी होने से पहले हरीश ने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद किया और तीन इंच लिंग उसकी चूत में डाला। हर पल रजनी को संभलने का मौका देते हुए सात-आठ धक्कों में उसने पूरा 10 इंच का लिंग उसकी चूत में घुसा दिया। रजनी की कराह को शांत करने के लिए हरीश ने उसके होंठों को चूमा, स्तनों को सहलाया, निप्पलों को चूसा और उसकी पीड़ा को कम करके उसे सामान्य स्थिति में लाया। हरीश का पूरा लिंग अपनी चूत में लेने की खुशी में रजनी ने चार बूंद आंसू बहाए और उसे आगे बढ़ने को कहा।
हरीश ने रजनी की चूत में अपना लिंग धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए चोदना शुरू किया। 10 मिनट में रजनी ने रस छोड़ा। हरीश ने अपने धक्कों की गति बढ़ाई और तेजी से चोदने लगा। आधे घंटे में रजनी चार बार रस छोड़ चुकी थी और अपने कूल्हे उठाकर हरीश के धक्कों का जवाब दे रही थी। नौवीं बार रस छोड़कर रजनी थक गई। हरीश ने भी अपने वीर्य से उसकी गर्भभूमि को भरा और उसके बगल में लेट गया। रजनी को अविस्मरणीय सुख देकर हरीश ने उसके नंगे शरीर को अपनी ओर खींचकर गले लगाया।
हरीश में किसी भी औरत को तृप्त करने की क्षमता थी, लेकिन रजनी को अब समझ आया कि नीतु ने अशोक के साथ शारीरिक संबंध क्यों बनाए। जैसे पुरुषों को अपनी खूबसूरत पत्नी के बावजूद दूसरी औरतों का आकर्षण होता है, वैसे ही पति के अलावा दूसरे पुरुष के लिंग के धक्कों में अनोखा सुख होता है। उस रात हरीश ने दोबारा रजनी की चुदाई नहीं की, बल्कि प्यार से उसके नंगे शरीर को सहलाते हुए गले लगाकर सो गया।
सुबह नीतु कमरे से बाहर आई, तो हरीश ड्राइविंग क्लास के लिए जा चुका था। उसने नीतु के खूबसूरत चेहरे को देखकर मंत्रमुग्ध होकर उसे गले लगाया और होंठ चूमने लगा। दोनों के होंठों का खेल चल रहा था, तभी नींद में आंखें मलती हुई निशा आई और नीतु की नाइटी खींची। दंपति शरमाकर निशा की ओर देखने लगे। हरीश ने बेटी को गोद में लिया, गाल पर चूमा और बोला कि उसे ड्राइविंग क्लास ले जाएगा। नीतु ने निशा को छीनकर कहा, "री, वह अभी जागी है, नींद का खुमार बाकी है। पहले वह टॉयलेट जाए, फ्रेश हो, मुंह धोए। उसे कॉम्प्लान पिलाने में आधा घंटा लगेगा। तुम जाओ।" उसने हरीश को भेज दिया।
रजनी भी फ्रेश होकर बोली, "मैं रसोई संभालती हूं, तुम चिन्नी को फ्रेश कराओ।" नीतु ने रजनी के कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को खूब मजा आया?" और बाथरूम चली गई। निशा को फ्रेश कराकर, मुंह धुलवाकर लाई, तो रजनी ने उसे गोद में बिठाकर कॉम्प्लान पिलाया। नीतु ने रजनी के साथ कॉफी पी और बच्चों को हॉर्लिक्स देकर नाश्ता तैयार करने चली गई। निशा कॉम्प्लान पीकर टेडी बेयर लेकर भाइयों के पीछे चली गई। रजनी ने नीतु की मदद करते हुए रात की रासलीला बताई और धन्यवाद दिया। नीतु ने उसे गले लगाकर कहा, "इसके लिए थैंक्स? सिम्पल लॉजिक। तेरा पति मुझे चोदता है, मेरा पति तुझे। दो-तीन दिन हरीश के साथ अकेले चुदवाओ, फिर हम दोनों मिलकर..." दोनों हंसने लगीं।
निशा चीखते हुए कमरे से बाहर दौड़ी। नीतु उसके पास गई, तो निशा ने उसे गले लगाया और पीछे आ रही रिमोट कार की ओर इशारा किया। नीतु ने समझा कि वह कार से डर गई है। उसने निशा को गोद में बिठाकर कार उठाई, उसे आगे-पीछे घुमाकर दिखाया और सुरेश को उसे चलाने को कहा। निशा का डर पूरी तरह खत्म होने तक नीतु उसके साथ बैठी और समझाती रही। डर खत्म होने पर निशा भाई के साथ कार चलाकर खेलने लगी। जब पापा और भाई स्कूल-कॉलेज गए, तो पहले की तरह उदास होने की बजाय निशा ने उन्हें टाटा किया और गाल पर चुम्मा देकर विदा किया। नीतु और रजनी नहाकर नाश्ता करने तक निशा अपने खेल में मस्त थी। वह खेलते-खेलते सोफे पर ही सो गई।
नीतु खाना बनाने की तैयारी करने लगी, तो रजनी ने उसे बैठाया और बोली, "वांगी भात बचा है। दोपहर में वही खा लेंगे। चिन्नी का खाना जागने के बाद बनाएंगे।" दोनों बातें करने बैठ गईं। शीला को फोन करके कुछ देर बात की। तभी दरवाजे की घंटी बजी। नीतु ने दरवाजा खोला, तो आर्किटेक्ट रमेश मुस्कुराते हुए खड़ा था। उसने नीतु को विश किया। नीतु ने भी उसे विश करके अंदर बुलाया। रजनी को देखकर रमेश ने उसे विश किया और सोफे पर बैठकर अशोक और रश्मि के बारे में पूछा। नीतु ने बताया कि दोनों कहीं गए हैं और वह अकेली थी, इसलिए यहां आई। नीतु ने उसे कॉफी दी और बोली, "रमेश जी, कल रात से मेरे दिमाग में एक बात चल रही है। हम पहली मंजिल पर पूरा घर बना रहे हैं। क्या दूसरी मंजिल पर कम से कम दो कमरे बन सकते हैं?" रमेश ने सोचकर कहा, "नीतु, मैंने इस गांव में अपने रहने के लिए एक घर दो साल पहले डिजाइन किया था। उसे देख लो, तुम्हें अंदाजा हो जाएगा। अपनी जरूरत बताओ, उसी हिसाब से डिजाइन करेंगे। आज ही चलकर देख लेते हैं। देर करने से दीवारें बनने के बाद बदलाव के लिए तोड़ना पड़ेगा।" नीतु और रजनी को बात सही लगी। रजनी निशा का ध्यान रखने और नीतु घर देखने जाने को तैयार हुई। नीतु तैयार होने कमरे में गई। रमेश उसकी हिलती हुई कूल्हों को देखकर हाथ मलते हुए बाहर चला गया। नीतु सफेद टाइट चूड़ीदार-लेगिंग्स में आई, तो रजनी बोली, "नाइटी में भी तेरे कूल्हे कितना हिलते हैं। बेचारा रमेश हाथ मल रहा था। अब उसे अपनी जलवा मत दिखा, कहीं बेहोश हो गया तो मुश्किल होगी।" दोनों हंसने लगीं। नीतु ने सो रही निशा के गाल पर चुम्मा दिया। निशा नींद में मुस्कुराई। नीतु खुशी से रमेश के साथ घर देखने निकली।
Erotica - नियति से बंधी नीतू
नियति से बंधी नीतू - Part 137 दस मिनट तक हरीश के लंड को चूसने के बाद सविता ने अंत में इसके सिरे पर एक चुम्मन देकर जीभ फिराई और उसे गले लगाकर बिस्तर पर लुढ़क गई। हरीश ने सविता के स्तनों को काटा, मसला और चूसा, फिर उसके पेट पर मुँह रगड़ा और नीली कच्छी का इलास्टिक पकड़कर नीचे खींचा, तो सविता ने...
नियति से बंधी नीतू - Part 67
दोपहर में रजनी का फोन आया, तो नीतु निशा को सहेली के पास छोड़कर उसे लेने निकली। रजनी के घर पहुंचते ही उसने नीतु को अंदर खींचा, दरवाजा बंद किया और सीधे कमरे में ले जाकर उसके कपड़े उतारकर नंगी कर दिया। खुद भी नंगी होकर रजनी ने नीतु के होंठों को चूमा। नीतु की रसीली चूत को जी भरकर चाटते हुए रजनी ने उसके रस की हर बूंद का स्वाद लिया। नीतु की गांड के छेद में उंगली डालकर रजनी बोली, "आह, क्या मस्त माल है तू! इसीलिए मेरा पति हमेशा तुझ जैसी मोटी गाय की सवारी के लिए तैयार रहता है। तेरे यौवन का रस किसी भी मर्द के लिंग से पानी निकाल देता है।" नीतु ने रजनी को बिस्तर पर धकेला और उसके सफेद चूत को चाटने लगी। पांच मिनट में ही रजनी रस छोड़कर हांफने लगी। रजनी की गांड के छेद को चाटते हुए नीतु ने उंगली डाली और बोली, "अशोक ने तेरी गांड का सील भी खोला?" रजनी हंसते हुए बोली, "उसे तो बहुत इच्छा थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब हरीश से ही अपनी गांड मरवाऊंगी।" दोनों ने 15 मिनट तक एक-दूसरे के नंगे शरीर को सहलाया, मसला और समलैंगिक सुख का आनंद लिया, फिर जाने के लिए तैयार हुईं।
घर पहुंचे, तो आंगन में निशा चीखते हुए भाई के पीछे छोटे-छोटे कदमों से दौड़ रही थी। पड़ोस की तीन औरतें शीला के साथ खड़ी होकर निशा का खेल देखकर हंस रही थीं। नीतु को देखकर निशा दौड़कर आई और गोद में उठने के लिए दोनों हाथ ऊपर किए। नीतु की गोद में जाकर उसने भाई की ओर इशारा किया। नीतु को समझ नहीं आया कि वह क्या कह रही है। शीला और गिरीश की ओर देखा, तो गिरीश बोला, "अम्मा, वह थोड़ी देर से टॉम एंड जेरी देख रही थी। अब मुझे उसी तरह दौड़ा रही है और तुम्हें भी मेरे पीछे दौड़ने को कह रही है।" नीतु ने निशा के गाल पर चुम्मा देकर कहा, "चिन्नी, हम भाई के पीछे नहीं दौड़ेंगे। घर जाकर पापा को दौड़ाएंगे, ठीक है?" निशा ने मां को चूमा और भाई को पास बुलाकर उसके कंधे पर चढ़ गई। पड़ोस की औरतों ने नीतु से कहा कि गोद ली बेटी बहुत प्यारी और चंचल है, और उसने बहुत अच्छा काम किया। फंक्शन भी बहुत शानदार था। वे नीतु से कुछ देर बात करके चली गईं।
अंदर शीला रवि की पीठ पर सवार होकर खुशी से हंस रही थी और सबको हाथ हिला रही थी। गिरीश ने रजनी को देखकर पूछा, "आंटी, आप दादा-दादी के साथ नहीं गईं?" रजनी जवाब नहीं दे पाई और नीतु की ओर देखने लगी। नीतु बोली, "इनकी सास के साथ कुछ काम है, इसलिए इन्हें हमारे गांव ले जा रही हूं। तेरी होने वाली पत्नी रश्मि अकेले दादा-दादी के साथ गई है। अगर तू कहे, तो तुझे भी उनके पास भेज दूं।" गिरीश शरमाकर चुप हो गया। नीतु की बात सुनकर रजनी और शीला जोर से हंसने लगीं। गिरीश शर्म और संकोच से न तो बैठ पा रहा था, न उठ पा रहा था। रजनी बोली, "नीतु, बेचारे मेरे दामाद को यूं मत सता। अगर उसने मेरी बेटी से शिकायत की, तो वह पतिव्रता शिरोमणि मुझ पर टूट पड़ेगी।"
हंसते-हंसते कुछ समय बिताने के बाद रवि और शीला से विदा लेकर नीतु, रजनी और निशा गांव के लिए निकलीं। शीला ने नीतु को गले लगाकर कहा, "पता नहीं क्यों, लेकिन डर लग रहा है।" वह रोने लगी। नीतु ने उसे सांत्वना दी और रवि से बोली, "अण्णा, मेरी प्यारी सहेली का बहुत ध्यान रखना। वह बहुत परेशान है। अगर ऐसा ही रहा, तो मुझे तुरंत फोन करना, मैं उसे अपने गांव ले जाऊंगी। अण्णा, मेरी इस सहेली का खास ख्याल रखना। यह मेरी तुमसे गुजारिश है, मुझे निराश मत करना।" रवि ने नीतु का सिर सहलाकर कहा, "चिंता मत कर, मेरे पास सिर्फ मेरी पत्नी ही है। उसकी जिम्मेदारी मेरी है। मैं रोज तुम्हें उसकी खबर दूंगा। तुम निश्चिंत होकर जा। दीपावली पर हम भी वहां आएंगे। तुम्हें और हमारी छोटी कंदम्मा को उदास देखना मुझे बर्दाश्त नहीं।" निशा ने रवि और शीला को चूमा, टाटा किया और मां के साथ गांव के लिए रवाना हुई।
नीतु SUV चला रही थी। निशा भाई की गोद में खड़ी होकर खिड़की से बाहर देख रही थी और लोगों को चीखकर बुला रही थी। घर पहुंचते ही सुरेश दौड़कर आया और निशा को गोद में लेकर दुलारने लगा। रजनी ने हरीश को देखा, तो उसकी चूत की पंखुड़ियां फड़फड़ाने लगीं। नीतु ने हरीश को गले लगाया और बच्चों के साथ अंदर चली गई। हरीश ने रजनी को गले लगाया और उसके कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को तैयार रहना।" उसने रजनी को अंदर ले गया। हरीश ने पहले से खाना बना रखा था। नीतु बोली, "री, मैं आकर खाना बनाती। तुमने क्यों बनाया?" हरीश हंसा और बोला, "अपने छोटे बेटे से पूछ, मैं अच्छा खाना बनाता हूं या नहीं। दो घंटे ड्राइव करके आई मेरी पत्नी के लिए इतना तो कर सकता हूं। फ्रेश हो जा, कॉफी बनाता हूं।" उसने रजनी को भी भेज दिया। सुरेश रवि के दिए बबल मेकर से बुलबुले बना रहा था, और निशा उन्हें तोड़ने के लिए चीखते हुए घर में दौड़ रही थी। पापा और भाइयों के साथ रात तक खूब उछल-कूदकर निशा जल्दी खाना खाकर सो गई। गिरीश ने पापा को बताया कि निशा टॉम एंड जेरी देखकर वैसा ही खेल रही थी। हरीश खुश हुआ और नीतु से बोला, "लैपटॉप के लिए इंटरनेट कनेक्शन चाहिए था। कल कंपनी वालों से बात करके अनलिमिटेड पैक वाई-फाई डिवाइस के लिए पूरा पेमेंट कर दिया। वे कल डिवाइस फिक्स कर जाएंगे। इससे घर में हर जगह सुपर-फास्ट इंटरनेट मिलेगा। बच्चों और मुझे सुविधा होगी। तुम भी अब मोबाइल की बजाय वाई-फाई से लैपटॉप यूज करो। निशा के लिए टॉम एंड जेरी और दूसरे कार्टून डाउनलोड करके दिखाओ, उसे भी खुशी होगी।" रात के खाने के बाद दोनों बच्चे बहन के साथ सोने के लिए कमरे में दौड़े। नीतु ने हरीश को चुदाई का इशारा किया और कमरे में चली गई।
रसोई में पानी पी रही रजनी को हरीश ने गोद में उठाकर कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद किया। रजनी ने हरीश की टी-शर्ट उतारी और उसके सीने को सहलाते हुए कई चुम्बन देकर अपना प्यार जताया। हरीश ने रजनी के माथे, गाल, गले और कानों पर चुम्मे दिए और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी पीठ सहलाने लगा। रजनी का चूड़ीदार टॉप उतारकर हरीश ने नीली ब्रा में कैद गोल स्तनों को मसला और अपना चेहरा उनके बीच दबाकर चाटने और चूमने लगा। 10 मिनट तक स्तनों को मसलवाने के बाद रजनी पीछे हटी, बिस्तर पर बैठी और हरीश की ट्रैक पैंट और चड्डी उतारकर उसके 10 इंच के तने हुए लिंग को सहलाया। लिंग के सिरे को चूमकर और जीभ से चाटकर रजनी ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। उसने हरीश के अंडकोषों को भी सहलाया और चूसा। हरीश ने रजनी का चूड़ीदार बॉटम उतारा और उसकी नीली पैंटी के ऊपर से चूत को चूमा, उसकी सुगंध ली। रजनी को बिस्तर पर लिटाकर हरीश ने उसके पैरों को चूमा, मोटी जांघों को सहलाया और चाटा, फिर पैंटी के ऊपर से चूत को चाटने लगा। उसने रजनी के पेट को सहलाया, नाभि में जीभ डाली, जिससे रजनी कामवासना में कराहने लगी। हरीश ने उसके स्तनों को जोर से मसला। रजनी को पीठ के बल लिटाकर उसकी लंबी पीठ को सहलाया, चूमा और कमर पर दांतों से निशान बनाए। रजनी के गोल कूल्हों को मसलकर हरीश ने नीली पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा और सफेद कूल्हों को चाटकर दांतों से निशान बनाए। कूल्हों को फैलाकर उसने रजनी की गांड के भूरे छेद को चाटा और ब्रा की हुक खोलकर उसे सीधा लिटाया।
रजनी की ब्रा हटाकर हरीश ने उसके नंगे स्तनों को मसला, निप्पलों को चूसा और उन पर दांतों के निशान बनाए। रजनी ने पैंटी का इलास्टिक पकड़कर कूल्हे उठाए और उसे उतार दिया। पहली बार अशोक के अलावा किसी और के सामने रजनी ने अपना नंगा शरीर प्रदर्शित किया। हरीश ने रजनी की रस टपकाती चूत को चूमा, उसका स्वाद लिया और चाटने लगा। उसने चूत की पंखुड़ियां फैलाकर जीभ अंदर डाली, जिससे रजनी सुख के आकाश में तैरने लगी और "हां... आह..." कहकर चीखने लगी। उसने चूत से रस का फव्वारा छोड़ा, जिसे हरीश ने पी लिया। रजनी हांफते हुए बिस्तर पर लेट गई।
पांच मिनट बाद हरीश ने रजनी के पैर उठाकर अपने कंधों पर रखे और उसकी जांघों के बीच आकर अपने लिंग से उसकी चूत की पंखुड़ियों को ऊपर-नीचे रगड़ा और उस पर थप्पड़ मारे। रजनी की कामवासना भड़क उठी। उसने कहा, "प्लीज, हरीश, और मत तड़पाओ। जल्दी अपनी तुन्नी मेरी चूत में डालो और मुझे पूरी तरह अपनी बना लो। मैं तुम्हारे प्यार के लिए बहुत दिन से तरस रही हूं।" उसकी बात पूरी होने से पहले हरीश ने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद किया और तीन इंच लिंग उसकी चूत में डाला। हर पल रजनी को संभलने का मौका देते हुए सात-आठ धक्कों में उसने पूरा 10 इंच का लिंग उसकी चूत में घुसा दिया। रजनी की कराह को शांत करने के लिए हरीश ने उसके होंठों को चूमा, स्तनों को सहलाया, निप्पलों को चूसा और उसकी पीड़ा को कम करके उसे सामान्य स्थिति में लाया। हरीश का पूरा लिंग अपनी चूत में लेने की खुशी में रजनी ने चार बूंद आंसू बहाए और उसे आगे बढ़ने को कहा।
हरीश ने रजनी की चूत में अपना लिंग धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए चोदना शुरू किया। 10 मिनट में रजनी ने रस छोड़ा। हरीश ने अपने धक्कों की गति बढ़ाई और तेजी से चोदने लगा। आधे घंटे में रजनी चार बार रस छोड़ चुकी थी और अपने कूल्हे उठाकर हरीश के धक्कों का जवाब दे रही थी। नौवीं बार रस छोड़कर रजनी थक गई। हरीश ने भी अपने वीर्य से उसकी गर्भभूमि को भरा और उसके बगल में लेट गया। रजनी को अविस्मरणीय सुख देकर हरीश ने उसके नंगे शरीर को अपनी ओर खींचकर गले लगाया।
हरीश में किसी भी औरत को तृप्त करने की क्षमता थी, लेकिन रजनी को अब समझ आया कि नीतु ने अशोक के साथ शारीरिक संबंध क्यों बनाए। जैसे पुरुषों को अपनी खूबसूरत पत्नी के बावजूद दूसरी औरतों का आकर्षण होता है, वैसे ही पति के अलावा दूसरे पुरुष के लिंग के धक्कों में अनोखा सुख होता है। उस रात हरीश ने दोबारा रजनी की चुदाई नहीं की, बल्कि प्यार से उसके नंगे शरीर को सहलाते हुए गले लगाकर सो गया।
सुबह नीतु कमरे से बाहर आई, तो हरीश ड्राइविंग क्लास के लिए जा चुका था। उसने नीतु के खूबसूरत चेहरे को देखकर मंत्रमुग्ध होकर उसे गले लगाया और होंठ चूमने लगा। दोनों के होंठों का खेल चल रहा था, तभी नींद में आंखें मलती हुई निशा आई और नीतु की नाइटी खींची। दंपति शरमाकर निशा की ओर देखने लगे। हरीश ने बेटी को गोद में लिया, गाल पर चूमा और बोला कि उसे ड्राइविंग क्लास ले जाएगा। नीतु ने निशा को छीनकर कहा, "री, वह अभी जागी है, नींद का खुमार बाकी है। पहले वह टॉयलेट जाए, फ्रेश हो, मुंह धोए। उसे कॉम्प्लान पिलाने में आधा घंटा लगेगा। तुम जाओ।" उसने हरीश को भेज दिया।
रजनी भी फ्रेश होकर बोली, "मैं रसोई संभालती हूं, तुम चिन्नी को फ्रेश कराओ।" नीतु ने रजनी के कूल्हों पर हल्के से थप्पड़ मारकर कहा, "रात को खूब मजा आया?" और बाथरूम चली गई। निशा को फ्रेश कराकर, मुंह धुलवाकर लाई, तो रजनी ने उसे गोद में बिठाकर कॉम्प्लान पिलाया। नीतु ने रजनी के साथ कॉफी पी और बच्चों को हॉर्लिक्स देकर नाश्ता तैयार करने चली गई। निशा कॉम्प्लान पीकर टेडी बेयर लेकर भाइयों के पीछे चली गई। रजनी ने नीतु की मदद करते हुए रात की रासलीला बताई और धन्यवाद दिया। नीतु ने उसे गले लगाकर कहा, "इसके लिए थैंक्स? सिम्पल लॉजिक। तेरा पति मुझे चोदता है, मेरा पति तुझे। दो-तीन दिन हरीश के साथ अकेले चुदवाओ, फिर हम दोनों मिलकर..." दोनों हंसने लगीं।
निशा चीखते हुए कमरे से बाहर दौड़ी। नीतु उसके पास गई, तो निशा ने उसे गले लगाया और पीछे आ रही रिमोट कार की ओर इशारा किया। नीतु ने समझा कि वह कार से डर गई है। उसने निशा को गोद में बिठाकर कार उठाई, उसे आगे-पीछे घुमाकर दिखाया और सुरेश को उसे चलाने को कहा। निशा का डर पूरी तरह खत्म होने तक नीतु उसके साथ बैठी और समझाती रही। डर खत्म होने पर निशा भाई के साथ कार चलाकर खेलने लगी। जब पापा और भाई स्कूल-कॉलेज गए, तो पहले की तरह उदास होने की बजाय निशा ने उन्हें टाटा किया और गाल पर चुम्मा देकर विदा किया। नीतु और रजनी नहाकर नाश्ता करने तक निशा अपने खेल में मस्त थी। वह खेलते-खेलते सोफे पर ही सो गई।
नीतु खाना बनाने की तैयारी करने लगी, तो रजनी ने उसे बैठाया और बोली, "वांगी भात बचा है। दोपहर में वही खा लेंगे। चिन्नी का खाना जागने के बाद बनाएंगे।" दोनों बातें करने बैठ गईं। शीला को फोन करके कुछ देर बात की। तभी दरवाजे की घंटी बजी। नीतु ने दरवाजा खोला, तो आर्किटेक्ट रमेश मुस्कुराते हुए खड़ा था। उसने नीतु को विश किया। नीतु ने भी उसे विश करके अंदर बुलाया। रजनी को देखकर रमेश ने उसे विश किया और सोफे पर बैठकर अशोक और रश्मि के बारे में पूछा। नीतु ने बताया कि दोनों कहीं गए हैं और वह अकेली थी, इसलिए यहां आई। नीतु ने उसे कॉफी दी और बोली, "रमेश जी, कल रात से मेरे दिमाग में एक बात चल रही है। हम पहली मंजिल पर पूरा घर बना रहे हैं। क्या दूसरी मंजिल पर कम से कम दो कमरे बन सकते हैं?" रमेश ने सोचकर कहा, "नीतु, मैंने इस गांव में अपने रहने के लिए एक घर दो साल पहले डिजाइन किया था। उसे देख लो, तुम्हें अंदाजा हो जाएगा। अपनी जरूरत बताओ, उसी हिसाब से डिजाइन करेंगे। आज ही चलकर देख लेते हैं। देर करने से दीवारें बनने के बाद बदलाव के लिए तोड़ना पड़ेगा।" नीतु और रजनी को बात सही लगी। रजनी निशा का ध्यान रखने और नीतु घर देखने जाने को तैयार हुई। नीतु तैयार होने कमरे में गई। रमेश उसकी हिलती हुई कूल्हों को देखकर हाथ मलते हुए बाहर चला गया। नीतु सफेद टाइट चूड़ीदार-लेगिंग्स में आई, तो रजनी बोली, "नाइटी में भी तेरे कूल्हे कितना हिलते हैं। बेचारा रमेश हाथ मल रहा था। अब उसे अपनी जलवा मत दिखा, कहीं बेहोश हो गया तो मुश्किल होगी।" दोनों हंसने लगीं। नीतु ने सो रही निशा के गाल पर चुम्मा दिया। निशा नींद में मुस्कुराई। नीतु खुशी से रमेश के साथ घर देखने निकली।
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