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Erotica जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

komaalrani

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जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७

मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में,
मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप


एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड

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komaalrani

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जोरू का गुलाम भाग २६०

तीज पार्टी -लेडीज क्लब और खेल शुरू

४२,८१, ८९५
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क्लब में तैयारी



सुजाता इन्हे मिसेज मोइत्रा के यहाँ छोड़कर सवा दस बजे क्लब पहुँच गयी थी, और तय यह हुआ था की तीज पार्टी ठीक ११ बजे शुरू होगी, हाँ मेंबर पहले भी आ सकती हैं, लेकिन ११ बजे के बाद लेट माना जाएगा और पनिशमेंट मिलेगा जो मिसेज मोइत्रा तय करेगीं, और वो ११ बजने में पांच मिनट रहेगा तो मिसेज मोइत्राआ जाएंगी।

सुजाता को याद आ रहा था जब पहली मीटिंग में मिसेज मोइत्रा की प्रजेंस में तीज पार्टी की मीटिंग हुयी थी, तो सीनियर्स ( वोट लेडीज तो ३० के ऊपर हैं और उनके बच्चे हैं ) कितना खुल के मजाक कर रही थीं, यहाँ तक की मिसेज मोइत्रा भी, खुल कर मुट्ठी करने की बात हो रही थी , और एक ने साफ़ साफ कहा था

" लेकिन वैसलीन क्रीम कडुआ तेल लगा के मत आना , ...



चमची नंबर दो ने हड़का के बोला, " आने दीजिए न , जो करना हो कर लें , ... मैं हूँ न वेलकम कमिटी में , सारी छिनारों का पेटीकोट उठा उठा के आते ही चेक करुँगी ,.. जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , अरे जब तक चरचराए परपराए न , चीख पुकार न मचें, ... क्या मज़ा ,... "

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और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की।

उम्र के हिसाब से तो वो बच्ची पार्टी में भी बड़ी थीं, बच्ची पार्टी में वो लेडीज जिनके बच्चे नहीं थे, और २५-२६ से ज्यादा नहीं।

बेला, बिहार की थीं, गाली देने में चैम्पियन, और शादी हुए तीन साल हो गए थे लेकिन पहली रात ही उसने नाड़ा खोने के पहले पति से पंचवर्षीय योजना ( पहला बच्चा पांच साल बाद, और दो के बाद तीसरा नहीं ) मनवा लिया था। सास बहुत पीछे पड़ीं , " पोता चाहिए, पोता चाहिए " तो उनसे साफ साफ़ बोलीं,

' अबकी जब मेरी पांच दिन की छुट्टी होगी न तो भेज दूंगी आपके बेटे को आपके पास। अभी आप कुडुक तो हुयी नहीं है, मेरी गारंटी, आप का बेटाअसल मरद है, ससुर जी को भूल जाइएगा और पहली रात ही आपको गाभिन कर देगा। गारण्टी मेरी, और मन करे तो मेरी छोटी ननद को भी बोल दीजिये, मैं बोल देंगी उनसे, मेरी बात टालते नहीं है। माँ-बेटी दोनों पे चढ़ जाएंगे। अरे आपकी बेटी भी भले ९ में पढ़ती है लेकिन दो साल से खून उगल रही ही, पक्का मेरा मरद उसे गाभिन कर देगा, तो पोता नहीं तो नाती ही सही। " उसके बाद सास का मुंह बंद हो गया,

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तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।

कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी।
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मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे ना ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।

लेकिन असली खेल दूसरा था,.... चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।


वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।

जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।

ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गरमाच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थीं, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गरमायी थीं .मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं,

" हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "
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"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी "

जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं,

लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, ...वो भी चटवायेगी ये सोच लो "
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अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी,


" अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना,... मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।
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एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया,

" अबे… इस होली में तेरा गैंगरेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस।


ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई। हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, कोमल -पति।

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तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी,

लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनक मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया,

" हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "

और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की।


तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।



कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी। मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे न ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।



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लेकिन असली खेल दूसरा था, चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी सो ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।



वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।



जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।



ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गचमच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थी, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गर्मायी थीं मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं, " हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "

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"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी " जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं, लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, वो भी चटवायेगी ये सोच लो "

अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी, " अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना, मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।

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एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया, " अबे इस होली में तेरा गैंग रेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस। ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई।

हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, ...कोमल -पति।
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तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी, लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनका मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया,

" हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "
 
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लेडीज क्लब और तीज पार्टी
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"एकदम", हंसती हुई वो बोलीं और हाथ पकड़कर सुजाता और सुनयना (चमची नंबर दो) को बाहर ले गईं। प्राव्लम ये थीं की वेलकम टेबल पर बहुत भीड़ हो गयी थी, साढ़े दस बजने वाला था और अर्ली ऑफर्स के चक्कर में ढेर सारी लेडीज एक साथ आ गयी थीं, उन्हें चेक भी करना था ( नो ब्रा, नो पैंटी और कैविटी सर्च भी), नाम लिस्ट करना था, तो वेलकम टीम के लिए मुसीबत हो गयी थी।

चमची नंबर २ ने एक टेबल खींच ली और वहां एक नई वेलकम डेस्क शुरू कर दी।

सुजाता ने मेहंदी वालियों में से एक को खींच के उस वेलकम डेस्क पर बैठा दिया, और कुछ कैटरिंग वालो से बात करके वहीँ पर एक वेटिंग एरिया सेट कर दी, और वहां एक मेंहदी वाली, एक मेकअप वाली उन लेडीज से मिल के ऑप्शन दिखा के डिस्कस कर रहे थे, सामने स्क्रीन पे मेंहदी के च्वायस चल रहे थे। कैटरिंग वालों से बात कर के उसी एरिया में वेलकम ड्रिंक सर्व कराने शुरू कर दिए और आज को भी नॉन अल्कोहोलिक ड्रिंक नहीं था, डाइट कोक में भी अच्छी खासी रम मिली थी और छोटे छोटे लड्डू थे, सब में भांग।
असल में इन लोगों ने इवेंट मैनेजर से बात करके चार होस्टेस लड़कियां बुलाई थीं जो ऑल पर्पज हेल्प करती, लेकिन उन्हें साढ़े दस बजे बुलाया गया था, क्योंकि पार्टी का टाइम ११ बजे था। वो लड़कियां भी खूब खूब सुन्दर, एयर होस्टेस की तरह और ट्रेडिशनल चुनरी लहंगे में, और नो ब्रा नो पैंटी का कोड उनके लिए भी था। पर ये क्राउड साढ़े दस के पहले ही आ गया।

सुजाता के साथ अब बच्ची पार्टी वाली सुनी (सुनीता) और मिसेज साहनी भी आ गईं।


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मेहन्दी वालियों का स्टाल अभी खाली पड़ा था, तो सुनी ने उनमे से कुछ को वेटिंग एरिया में ही मेंहदी का काम शुरू करने को बोल दिया। कैटरर्स अपना स्टाल सेट कर रहे थे, और आज ख़ास बात यह थी की सब लेडीज थीं, वेट्रेस, मेंहदी वालियां और बाकी, और सब चुनरी लहंगे में, हाँ कलर अलग अलग थे जैसे, मेंहदी वालियां हरे रंग की चुनरी ओढ़े थीं।

बार अभी सेट हो रहा था, और उस की जिम्मेदारी बच्ची पार्टी की बेबी, अन्नी की थी। वो अभी भी टीनेजर थी, छह महीने पहले ही शादी हुई थी और लंदन से उसने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया था। इण्डिया वो कपल चार महीने पहले ही लौटे थे और उसका भी भी उसी की तरह बेबी ब्वाय था, पर साइबर वर्ड में उसका दिमाग जबरदस्त चलता था। लेकिन अन्नी ने सुजाता को मेसेज दिया था कि वो थोड़ा लेट आएगी, पर पार्टी शुरू होने से पहले।

वेलकम टेबल की भीड़ कम हुई तो मेकअप एरिया में वेटिंग बढ़ गई, और लेडीज में फुसफुसाहट चालू हो गई। सुजाता ने उसी समय इवेंट मैनेजर और रेवलॉन वालों को भी फोन लगाया की वो भी एक काउंटर सेट कर लें और लक्मे से रिक्वेस्ट किया की दो घण्टे के लिए कुछ मेकअप वालियां और भेज दें।

बाकी सेटिंग भी एक बार चेक करनी थी, क्लब के ओपन एरिया में झूले का और रेन डांस का इंतजाम किया गया था। एक आम के पेड़ पर झूला लगा था। मिसेज साहनी और सुजाता ने चढ़कर भी चेक किया। वहीँ पर शाम को बार-बेक का भी इंतजाम था। एक छोटा सा डांस फ्लोर और कैरोके भी सेट हो रहा था।

मिसेज साहनी के ऊपर बाहर की जिम्मेदारी छोड़ कर, सुजाता सुनी के साथ अंदर हाल में गयी जहाँ मेन पार्टी होने वाली थी, स्टेज पर फोकस लाइट्स लगी थीं, और सुनी वहां चढ़कर स्टेज की सेटिंग, लाइट्स देखने लगी। पहले भी वो थियेटर में काम कर चुकी थी।

और अब सुजाता अकेले थी तो उसने वो सीक्रेट काम सेट किया जिसके बारे में बस तीन चार लोग जानते थे,।
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वीडियो रिकार्डिंग होनी थी, पर असली खेल था क्या रिकार्ड होना है कैसे ट्रांसमिट होना है।

रिर्कार्डिंग वाले से बात करके उसे सब समझा दिया और ज़ूम का एक लिंक दे दिया। जब सब कैमरे बंद होंगे तो भी चार कैमरे चलते रहेंगे और ज़ूम से ट्रांसमिट होंगे, लेकिन वो लिंक निधि का था।



मिसेज मोइत्रा की स्ट्रिपटीज तो मिसेज खन्ना को भी देखनी थी, और उन्हें ट्रांसमिट करती निधि, एक दो मिनट के डिलेड ट्रांसमिशन के साथ। निधि से सुजाता ने रिकार्डिंग वाले की बात भी करा दी।



जब तक सुजाता बाहर निकली, खूब रौनक हो गई थी। वो होस्टेस लड़कियाँ आ गई थीं और वेलकम डेस्क पर चमची नंबर २ और बेला के साथ थीं। वेलकम डेस्क ने सुजाता को बताया कि २४ लेडीज आ चुकी हैं। और कुछ रास्ते में हैं, बस अगले दस मिनट में आ जाएंगी ।



दस पैंतीस हो रहे थे, सुजाता ने कोमल को फोन लगाया की अब वो मिसेज मोइत्रा केघर के लिए निकल पड़े और उनको लेकर दस पचपन पर पहुँच जाए।
 
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मिसेज मोइत्रा और उनके रसगुल्ले

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मिसेज मोइत्रा की दोनों बेटियों की बुलबुलों में आग लगी हुयी थी,


लेकिन उनसे ज्यादा मिसेज मोइत्रा गर्मायी हुईं थी, और बस यही सोच रही थीं, ये स्साला लौंडा, अगर आज पट जाए और किसी तरह रात में उनके पास रुक जाए तो बस, मिसेज मोइत्रा का १६ साल का उपवास आज ख़त्म हो जाए। कोमल ने तो बोला ही है की वो अपनी दोनों छोटी बहनों को शाम को पार्टी के बाद अपने साथ ले जायेगी, मंजू तो अभी चली जायेगी और २४ घंटे बाद कल दोपहर को लौटेगी, फिर तो, अगर ये सीधे से नहीं मानेगा तो मिसेज मोइत्रा ने तय कर लिया था उसका रेप कर देंगी। ललचाता तो है ही उनके जोबन पे वो, अपनी दोनों सालियों को छोड़ के सास के चक्कर में पड़ा रहता है, तो ले ले न जोबन का रस, बस यही है की कुछ ज्यादा ही शर्मीला है तो भले आज जबरदस्त जबरदस्ती करनी पड़े, बिना उसे पेले वो छोड़ेंगी नहीं।


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और गाजर की खीर भी पी गया , तो असर तो उसका होगा ही, आज तक मंजू की कोई बात गलत नहीं हुई है।

चार साड़ियां मिसेज मोइत्रा बदल चुकी थीं और अंत में आलमोस्ट ट्रांसपेरेंट आग लगाने वाली एक रेड शिफॉन की साडी उन्होंने निकाली, उनके भरे बदन पे, गोर रंग पे खूब फबती थी और साथ का एक मैचिंग लो कट का ब्लाउज भी , और उसे कूल्हे के नीचे से बाँधा , उन्हें मालूम था उनकी गहरी नाभि का मर्दो पर क्या असर पड़ता है, गोरा चिकना पेट, चौड़े कूल्हे, और गहरी नाभी, किसी का भी ईमान डोल जाता,


वो शीशे से अपनी बेटियों की छेड़खानी देख रही थीं।



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दोनों एकदम अपने जीजू की तरह बुद्धू हैं। मिसेज मोइत्रा ने शीशे में अपनी बेटियों को देखते हुए सोचा, 'अगर उन की जगह वो होती और उनका कोई जीजू ऐसा हैंडसम होता तो अब तक कब का शीशे में उतार चुकी होतीं "

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खीर कब की ख़त्म हो चुकी थी, और छुटकी अब अपने जीजू को अपने हाथ से पानी पिला रही थी, और वो बार बार जिद कर रहे थे अपने हाथ से पानी पीने को, बड़ी ने छुटकी को कुछ इशारा किया और छीना झपटी में पानी 'सीधे वहीँ ' गिरा जहाँ खूंटा तना था, और एकम भीग गया।

अब तो दोनों दुष्टों को मौका मिल गया, " अरे जीजू इत्ते जोर से आ रही थी तो वाशरूम चले जाते " बड़ी बोली

" अरे मैं बाहर से खड़ी खड़ी सु सु सु सु बोल भी देती, आप कहते तो " छुटकी ने चिढ़ाया।

मिसेज मोइत्रा तो शीशे में देख रही थीं लेकिन मंजू साफ़ साफ़ देख रही थी और उसने जोर से दोनों लड़कियों को चिढ़ाया, " जब वो पानी गिरायेगा न सफ़ेद वाला तो पता चलेगा, पेट फूलने लगेगा , गाभिन हो जाओगी "

" अरे आप भी न, हिम्मत है क्या इनकी ? फिर आप पहले की बात बोल रही हैं, अब दवा आती है, पहले खाओ, बाद में खाओ, कोई पेट वेट नहीं फूलता, "


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छुटकी वहीँ से कपडे से उनके पैंट को रगड़ते बोली, और मिसेज मोइत्रा का अब लगा की उनकी बेटियां बड़ी हो गयी हैं। और वो ये भी देख रही थी, पानी सुखाना एक बहाना था, असल में वो जीजू के तन्नाए खूंटे का मज़ा ले रही थी।

लेकिन मिसेज मोइत्रा का दिमाग शरारत का कारखाना था और अब मंजू की सोहबत में दिन रात बस एक ही बात घूमती थी, एयर मुस्कराते हुए उन्होंने दोनों बेटियों को गुहार लगाई,

" तुम दोनों कैसी सालिया हों, बेचारे मेरे दामाद का ख्याल ही नहीं रखती, पहले तो खुद पानी गिराया, फिर उसे चिढ़ा रही हो। अरे कहीं जुकाम हो गया, बीमार पड़ गया, गीला हो के तो , ऐसे गीली गीली पेंट पहने , उतार दो न "

अबकी बड़ी बेटी मैदान में आ गयी, " आपकी सास का हुकुम है सुन लिया न, और आप हम दोनों को ही बोलते हैं न , चलिए पैंट उतार दीजिये चुपचाप, सूख जायेगी तो पहन लीजियेगा "

मिसेज मोइत्रा से सर पीट लिया, ये लड़कियां मेरी कब बड़ी होंगी, ऐसा मौका छोड़ रही है। दामाद तो बुद्धू है ही, लड़कियां भी। उन्होंने वहीँ से हड़काया, " तुम दोनों किस मर्ज की दवा हो, अरे दो दो सालियाँ होते हुए दामाद अपने हाथ का इस्तेमाल करे "

लेकिन छुटकी माँ का इशारा मिलने के पहले ही बेल्ट खोल के फेंक चुकी थी और अब तो माँ की आज्ञा, दोनों बेटीयों ने मिल के उन की पैंट खींच के वहीँ फेंक दिया जहाँ थोड़ी देर पहले, मंजू ने दोनों लड़कियों की पैंटी उतार के फेंकी थी,



" क्या जीजू, कल की लौंडियों की तरह शर्मा रहे हैं, पैंट के नीचे कुछ नहीं पहना है क्या " शरारत से उनकी आँख में झांकते हुए छोटी बोली

" अरे, नहीं पहना है तो क्या हुआ, बड़ी दीदी दीदी करती हो। तेरी दीदी रोज देखती हैं, प्यार दुलार करती हैं आज दीदी की छोटी बहने भी देख लेंगी, ऐसा क्या है " मंजू ने दोनों लड़कियों को छेड़ा।

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लेकिन दोनों टीनेजर्स देख नहीं पायीं, शेर अभी भी परदे में था, पर देख तो चुकी ही थीं, बीसो बार पिक्स में, वीडियो में, दीदी उनकी रोज भेजती थीं, एक बार तो लाइव भी दिखाया था, व्हाट्सऐप वीडियो काल पे, और अभी भी अंदाज साफ़ लग रहा था। शेर एक बक्सर शार्ट में था आलमोस्ट ट्रांसपेरेंट और खूंटा एकदम तना हुआ तो मोटाई लम्बाई, कड़ेपन का पूरा अंदाजा लग रहा था।

और तभी मिसेज मोइत्रा बाहर निकल कर आ गयीं, जहान उनकी दर्जा नौ वाली दोनों लड़कियां जिन्हे उन्होंने अबतक लड़कों की नजर से बचाकर पाला था, अपने जीजू के साथ खड़ी थीं।



और मिसेज मोइत्रा को देखकर जब उन्होंने खड़े होने की कोशिश की तो मिसेज मोइत्रा ने धप से धक्का देकर उन्हें बैठा दिया और सीधे उनके सामने खड़ी हो गयीं,


बेचारे उनकी ऊपर की सांस ऊपर नीचे की नीचे, जैसे लग रहा था पहली बार मिसेज मोइत्रा को पहली बार देख रहे हों, क्या रूप रंग, क्या जोबन।


उनके एमआइएलएफ वाले सारे वेट ड्रीम्स बचपन से लेकर आज तक के जैसे साकार हो गए हों, मूर्त होकर मिसेज मोइत्रा में समा गए हों, लाल रंग की करीब करीब पारदर्शक साड़ी आग की लपट बनी मिसेज मोइत्रा के शोले ऐसी देह को बस एक पतली लकीर से लपेटे हुए थी, खूब भरे भरे जोबन, कड़े कड़े गदराये छोटी सी चोली में समां नहीं रहे थे। खूब भरी भरीगोरी मांसल देह, लेकिन कमर पर एक छटांक भी एक्स्ट्रा फैट नहीं और सोने की पतली सी तगड़ी, नाभि के ठीक नीचे, और नाभि भी कितनी गहरी और गोरी, चौड़े कूल्हे, और साड़ी कूल्हे से भी खूब नीचे बाँधी,
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बस यही, यही,



किसी तरह उन्होंने थूक गटका, बात मन की मन में रह गयी, और मिसेज मोइत्रा का आँचल छलका, जैसे रणभूमि में किसी ने तलवार निकाल ली हो, पल भर के लिए डिजाइनर चोली उनके सामने थी, ऐसी कटिंग की कड़ाव, उभार, गोराई सब छलक के बिखर गयी, वो आँचल ठीक करने के बहाने मुड़ी। एकदम नंगी गोरी चिकनी पीठ, पान के पत्ते की तरह और पीठ पर गहरी नाली, कामुक स्त्रियों की सबसे बड़ी पहचान, चोली बस अंगुल भर की गुलाबी रस्सी से जैसे बंधी हो,



मिसेज मोइत्रा भी समझ गयीं की जादू चल गया और बस अब ये स्साला किसी तरह रात को रुक जाए ने तो आज तो इस चिकने को अच्छी तरह से निचोड़ के ही रहेंगी, कोमल ने बहुत पिक्स दिखायीं हैं आज उन का मौका रहेगा। बस स्साला किसी तरह रात में उनके हत्थे चढ़ जाए तो गाजर की खीर का पूरा असर होगा।

चेहरा उनका तमतमाया, खूंटा जो पहले ही खड़ा था मिसेज मोइत्रा की बेटियों की शरारत से अब तो एकदम शार्ट को फाड़ रहा था,

और किचन से देख के दोनों उनकी सालिया मुस्करा रही थीं, अब मैदान उन्होंने माँ के हवाले कर दिया था।

मिसेज मोइत्रा ने उनकी ओर हाथ बढ़ाया और वो व्ही हाथ पकड़ के खड़े हो गए और मिसेज मोइत्रा अपने दामाद से एकदम चिपक के खड़ी होगयीं, और अपनी देह अपने दामाद के देह से देह रगड़ते चिढ़ाते फुसफुसाते बोलीं, " कुछ हुआ क्या, मुन्ना "



उस मत्स्यगंधा की गंध पूरी तरह उनके देह में रच बस गयी थी, जैसे किसी ने मूठ मार दी हो, जवाब ठीक ९० डिग्री खड़े उनके बालिश्त भर के खूंटे ने दिए और मिसेज मोइत्रा पर मंजू की बातों का असर था, " बेटियों से लाज अब ख़तम , उन दोनों के सामने ही खूंटा पकड़ लेना, और ऊपर से नहीं, चड्ढी में हाथ डाल के, और एक बार कस के दबाओगी न, पकड़ के मुठियाओगी, तो स्साली तुझे भी असली ताकत अपने दामाद की मालूम होगी और उसे भी तेरा मन पता चल जाएगा, फिर सब हिचक ख़तम और मजा शुरू। और अपनी इन लड़कियों के डरती लजाती रह जाओगी और ये जाती हुयी जवानी कब चली जायेगी पता नहीं चलेगा, "

और मिसेज मोइत्रा ने भट्ठी में हाथ डाल दिया।

उन्हें लगा उन्होंने अंगारे को पकड़ लिया है, हाथ जल गया है, और ये नहीं की पहली बार उन्होंने पकड़ा होगा, बोर्डिंग में ही, अपनी इन दोनों बेटियों से थोड़ी ही बड़ी रही होंगीं, दर्जा बारह पास करने के पहले दर्जन भर से ज्यादा, लेकिन कोई दूर दराज तक भी ऐसा कड़क, मोटा गरम नहीं था, और पिछले सोलह साल से कभी कभार मिस्टर मोइत्रा के केंचुए के अलावा,

उनसे नहीं रहा गया, और मिसेज मोइत्रा ने हल्के से दबाया। मंजू सही कह रही थी, लोहे का रॉड झूठ है। एक बार ये अंदर ठोंक दे, सोलह साल के इन्तजार का फल वसूल हो जाएगा, हलके हलके उन्होंने मुठियाना शुरू कर दिया, सुपाड़े पर ऊँगली लगा के देखा, एकदम खुला गुस्साया,

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और उसी समय बाहर हार्न बजा, दरवाजा खुला, और कोमल अंदर, उनकी दोनों बेटियां लहक के अपनी दी के पास चिपक गयीं,

मिसेज मोइत्रा ने देखा, मुस्कुरायीं, और अभी भी हाथ शॉर्ट से बाहर नहीं निकाला।



वो उस तिलिस्म से बाहर आ गए थे, और कोमल ने चिढ़ाया, " लगी रहिये "



" एकदम, बेटी से पहले दामाद पर सास का हक होता है " हँसते हुए मिसेज मोइत्रा बोलीं और अपने मन की फरमाइश, रात भर के लिए दामाद को बेटी से मांगने की, करने वाली थीं की कोमल ने उन्हें चुप करा दिया।

" एकदम और उस से पहले छोटी बहनों का " कुछ प्यार दुलार से कुछ लेस्बो फील से उन दोनों छोटी बंगालिनों के चिकने गाल सहलाते हुए वो बोलीं, और मिसेज मोइत्रा ने अपनी मन की बात कहने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुंह बोली बेटी ने बात काट दी और अपनी बात सुना दी,

" एक बात अभी से आप से कह रही हूँ, शाम को क्लब से लौटते थोड़ी देर हो जायेगी, और उसके बाद मैं अपनी दोनों बहनों को अपने साथ ले जाउंगी मस्त पार्टी होगी और कल से वहीँ से तीज प्रिंसेज के लिए हम तीनो बहने "

लेकिन उनकी बात छुटकी ने काट दी, अपने जीजू को आँखों से चिढ़ाते हुए

" लेकिन दी जीजू को मत ले चलिएगा पार्टी में, वो वहां भी फिजिक्स के इक्वेशन पूछेंगे, आज दिन भर तो बायोलॉजी पढ़ाएंगे ही "

" एकदम नहीं गर्ल्स ओनली पार्टी होगी " कोमल ने अपनी बहन की बात मान ली और मिसेज मोइत्रा को आगे का काम पकड़ा दिया, " और ये दामाद आपका, आपके हवाले, खूब सेवा करवाइयेगा। आप ने कहा था मंजू भी नहीं है तो घर का सब काम, और जो भी काम हो "

अब मंजू भी मैदान में आ गई। किचेन समेटते बोली,

" मैं कल बारह बजे आउंगी, तब तक अपने इस साले दामाद से झाडू, पोंछा, नाश्ता खाना सब बनवा लीजिएगा। झाड़ता बहुत अच्छा है ये। "

और अगला इंस्ट्रक्शन इन्हे मिला, " शाम को लौटने में देर हो जायेगी तो मेरी दोनों बहनो का पूरा ख्याल रखियेगा और इन दोनों की सब बात मानियेगा और रात में अपने सास की "

और फिर दोनों की निगाह घडी पर पड़ी -१० -४८

" जल्द निकलिए, आप के पहुँचने का टाइम १० बजकर ५५ है , आप की वेलकम पार्टी इन्तजार कर रही होगी और आर आप जानती हैं ११ बजे के बाद पहुँचने वालियों के लिए क्या पनिशमेंट रखा गया है। " हंसती हुयी कोमल मिसेज मोइत्रा का हाथ पकड़ के खींचती हुयी ले गयी।

इतनी देर से दोनों टीनेजर्स भी अपनी दी से बिन बोले आँखों से यही गुहार लगा रही थी, " दी जल्दी से मम्मी को ले जाइये "

पीछे पीछे मंजू भी निकल गयी और बोलती गयी, दरवाजा अंदर से ठीक से बंद कर लो, और बाहर के गेट में भी ताला लगा लो, तुम लोगो की दी और मम्मी तो शाम को सात बजे से पहले आएँगी नहीं।

जीजा और जवानी की कुण्डी खड़काती दोनों जुड़वा सालिया एक ही बात सोच रही थीं, " पूरे ८ घंटे हैं "

घड़ी बता रही थी कि अभी १० बजकर ५० मिनट हो गए हैं।
 
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मिसेज मोइत्रा का स्वागत


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इतना जबरदस्त स्वागत तो जब मिसेज मोइत्रा की तूती बोलती थी, जब उनके इशारे के बिना चपरासी से लेकर, डिपार्टमेंट हेड की पोस्टिंग, ट्रांसफर नहीं होता था, सब मलाईदार डिपार्टमेंट उनके मर्द के पास था और सब कमाने वाली डेस्क पर मिसेज मोइत्रा की और उनकी बेटियों की जूती उठाने वालियों, चमचियों के मर्दो के पास थी, और एक इशारे में उन्होंने निधि के बाप को काला पानी भिजवा दिया था, और चार दिन बाद आधी रात में निधि का सामान टाउनशिप के घर से निकाल के, टाउनशिप के बाहर, क्लब की सेक्रेटरी भी वही थीं, प्रेजिडेंट भी, फिर भी ऐसा स्वागत,...आज तक कभी भी नहीं हुआ



वो सोच भी नहीं सकती थीं, जिस दिन इस क्लब में इलेक्शन हारी थीं, घंटे भर में उनके मरद का ट्रांसफर आर्डर भी हुआ स्पेयर भी कर दिए गए, कि कभी वो इस क्लब में लौटेंगी और लौटेंगी तो कोई सीधे मुंह बात करेगी, पर आज तो,

ठीक १० बजकर ५५ पर उनकी गाडी क्लब के पोर्च में पहुंची, ड्राइव करने वाली खुद क्लब कि सेक्रेटरी, और उनका दरवाजा खोला, क्लब कि ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता ने एकदम झुक कर के,

लेकिन उनका मन हुलस गया अपनी चमचियों को देखकर, सिर्फ उनका राज नहीं लौटा था, उनकी चमचियों का भी, लौट आया था। उनकी तीनो फेवरिट चमचियाँ, जिनका मन उनके इलेक्शन हारते ही सूख गया था, सबसे आगे थीं,


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उनके पसंद की ऑरेंज कलर की साड़ी पहने, एक के हाथ में चांदी की आरती की थाली थी, दूसरे के हाथ में लाल गुलाब की माला, ( वो भी उनका फेवरिट ) और तीसरी माथे पर लगाने के लिए हल्दी कुमकुम।

उनके साथ ही मिसेज साहनी और बाकी डिपार्टमेंट हेड्स की पत्नियां और उनके पीछे क्लब की आफिस बियरर सब बच्ची पार्टी वालियां , हाथ जोड़े, इन्तजार करती। पूरा पोर्टिको भरा हुआ था।

कितनी मालाएं पड़ीं उनके गले में।

वैसे तो वेलकम कमेटी में तीन लेडीज थीं, चमची नंबर दो सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगों की गोल की बेला।

माधुरी, एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में,


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और बेला,करीब २५ साल की। उम्र के हिसाब से तो वो बच्ची पार्टी में भी बड़ी थीं, बच्ची पार्टी में वो लेडीज जिनके बच्चे नहीं थे, और २५-२६ से ज्यादा नहीं।

तो बेला थी तो बच्ची पार्टी में लेकिन सीनियर के भी कान काटती थीं और इस वेलकम कमेटी के जिम्मे एक मजेदार काम था,


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मिसेज मोइत्रा ने साफ़ साफ कहा था " लेकिन वैसलीन क्रीम कडुआ तेल लगा के मत आना , ... "

चमची नंबर दो ने हड़का के बोला, " आने दीजिए न , जो करना हो कर लें , ... मैं हूँ न वेलकम कमिटी में , सारी छिनारों का पेटीकोट उठा उठा के आते ही चेक करुँगी ,.. जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , अरे जब तक चरचराए परपराए न , चीख पुकार न मचें, ... क्या मज़ा ,... "

खूब जोर से हो हो हुआ , ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी।


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मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे ना ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।



लेकिन असली खेल दूसरा था, चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी ,



और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।

मिसेज मोइत्रा ने चमची नंबर दो से पूछा, क्यों कोई तेल चिकनाई लगा के तो नहीं आया, जवाब बेला ने हंस क़े दिया,

" नहीं, मैडम, मैंने खुद चेक किया। खुद दो दो ऊँगली डाल क़े, लेकिन भरी कुप्पी वाली २२ थी, २७ में, आपके अवार्ड स्कीम का बड़ा फायदा हुआ टाउनशिप क़े मर्दो का "



पिछली बार जो ऑरेंज जूस में ऑरेंज वोदका मिला क़े पिलाई गयी थी, मिसेज मोइत्रा को तो उनकी सब झिझक पिछवाड़े घुस गयी थी और उन्होंने ही कहा था,

" सबकी कुप्पी चेक होगी, और जिसकी जिसकी कुप्पी भरी होगी, उसके लिए लेडीज क्लब की ओर से स्पेशल अवार्ड "
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तो मिसेज मोइत्रा ने कोमल की ओर इशारा करके माधुरी से कहा,


" अरे कैसी वेलकम कमेटी हो तुम, कोमलिया की कुप्पी तो जरूरी चेक कर, ...कहीं तेल लगा क़े तो नहीं आयी है "
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और तभी उनकी निगाह लीला पर पड़ी, ,

लीला ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। तो जिनके मर्द बाहर थे, उनकी कुप्पी भरना मुश्किल था। लेकिन लीला का एक देवर था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।
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और जब पिछली बार कुप्पी और मलाई की बात हो रही थी तो उन्हें, उनका देवर का नाम ले ले क़े सब लेडीज ने खूब छेड़ा था

और मिसेज मोइत्रा की निगाह पड़ते ही लीला जोर से मुस्करायीं और सब लेडीज सवाल भी समझ गयीं और जवाब भी लेकिन बेला ने खुल क़े बोल दिया

" अरे मैडम, लीला मैडम ( सीनियर लेडीज को हम बच्ची पार्टी वाले मैडम जोड़ क़े कहते थे लेकिन आज से वो सब बदल जाना था ) की कुप्पी बजबजा रही थी, जबरदस्त मलाई भरवा क़े लायी थीं ये। "

" सीखों सीखो " हंस क़े मिसेज मोइत्रा बोलीं और लीला को गले लगा लिया और कान में ऐसे बोलीं की सब को सुनाई दे,

" अरे मिल बाँट क़े खाओ, देवर तो पूरे लेडीज क्लब का है "



जोर का ठहाका लगा।

तो

मिसेज मोइत्रा और कोमल दोनों की जांच हुयी और मिसेज मोइत्रा की ऊपर ऊपर से मिसेज भसीन से नहीं रहा गया, उन्होंने बेला को इशारा किया और बेला और माधुरी ने मिल क़े मिसेज मोइत्रा का पेटीकोट पलट दिया, और सब लेडीज की सिसकी निकल गयी।


इतनी टाइट तो बच्ची पार्टी वालियों की नहीं होगी, और होती भी कैसे उनके मरद रोज बिना नागा चोदते हैं और मिसेज मोइत्रा क़े बिल में जमाने से सींक भी नहीं गयी थी और अब वो टाइट अगेन भी लगा रही थीं और केगेल कसरते भी करती थीं।

एकदम गुलाबी, एक झांट भी नहीं, पावरोटी से भी फूली बुर। हल्की हलकी गीली।
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वेलकम क़े साथ साथ मिठाई भी खिलाई जा रही थी, नत्था क़े भांग वाले गुलाब जामुन और एक कैटरिंग की होस्टेस साथ में एक प्लेट में लेकर चल रही थी, पर मिसेज मोइत्रा क़े मुंह में सीधे चमची नंबर एक ने डाला और डबल भांग पड़ी थी उसमे।



चमची नंबर तीन ने ऑरेंज जूस का टेट्रा पैक पेश किया, एकदम सीलबंद और सील उन्हीं के सामने खुली। कहने की बात नहीं कि उसमें पहले से इंजेक्शन से आधे से ज्यादा ऑरेंज वोडका मिला दिया गया था।



मिसेज मोइत्रा दो सिप ले चुकी थीं, तभी जैसे कोई गेट क्रैश कर रहा हो, हांफते, भागते दौड़ते कोई गेट एक अंदर घुसा और सीधे वेलकम डेस्क पे।



सबकी निगाह घड़ी पर पड़ी।



११ बजने में अभी भी १ मिनट और बीस सेकंड बाकी थे।

अन्नी थी, बेबी ऑफ़ बच्ची पार्टी,... अभी भी टीनेजर। ठीक १८ साल की उम्र में शादी हुयी थी छह महीने पहले इंग्लैण्ड में और चार महीने पहले उसके हबी भी ने ये कम्पनी ज्वाइन की थी, और वह भी टाउनशिप की सब भाभियों का चहेता देवर,


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बच गयी, हमारी अन्नी,



११ बजे क़े बाद आनेवाली क़े लिए सजा पहले से अनाउन्स थी, पहुँचते ही उसकी गांड मारी जायेगी, वहीँ मेंहदी वालियों क़े सामने, वो भी सूखी।



अभी भी एक मिनट और बीस सेकेण्ड बाकी थे,



लेकिन गलती तो हुयी थी, तय हुआ था की सभी मेंबर मिसेज मोइत्रा क़े पहले आ जाएंगे, इसलिए मिसेज मोइत्रा को लेकर मैं १० बजाकर ५५ पर आयी, पर,

अन्नी कश्मीर से थी, लगती भी कश्मीर की कली थी, गाल कश्मीर क़े दहकते सेब, और चोली में भी काबुली अनार, और भोली इतनी की कई बार डबल मीनिंग वाले मजाक उसे खोल क़े समझाने पड़ते, पिछली मीटिंग में जब एक सीनियर ने बच्ची पार्टी वालियों को चिढ़ाते हुए कहा था कि,

" ये बच्ची पार्टी वालियां आएँगी तो बुर वाली होकर लेकिन जाएंगी भोंसड़ी वालियां बनकर "



इसी अन्नी क़े मुंह से निकल गया था, " कैसे " और वो जमकर हंसी का गोला छूटा, फिर सीनिअर्स में से लीला बोली, अपनी मुट्ठी दिखाते, " ऐसे, बुर में जायेगी ये मुट्ठी और निकलेगी तो भोंसड़ा बना क़े "



और फिर हंसी, और अबकी कई सीनियर पार्टी वालियों ने अन्नी पर निशान लगा दिया, " इस कली कि तो मैं ही फाड़ूंगी, हारेंगी तो है ही बच्ची पार्टी वालियां "



और जब बेबी ऑफ़ बच्ची पार्टी लेट आयी, बेचारी हांफती कांपती मिसेज मोइत्रा से बोली,

" सॉरी मैडम, वो, ये आज वर्क फ्रॉम होम पे थे, और, मैंने मेसेज कर दिया था, पर तब भी बस थोड़ा सा, …"

मिसेज मोइत्रा ने उसकी बात अनुसनी कर क़े कहा, " इसकी कुप्पी मैं चेक करुँगी "

बस वही खड़े खड़े चमची नंबर एक ने पीछे से अन्नी का हाथ पकड़ा, और वेलकम कमेटी कि माधुरी ने एक ओर से लहंगा पकड़ा और बेला ने दूसरी साइड से, लहंगा पलट गया,

बुर एकदम बजबजा रही थी, मलाई अभी भी बह रही थी।




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और जाँघों पर भी लसलसी, हलकी गीली मलाई चिपकी हुई थी, दो चार लकीरें तो बहकर घुटनों तक पहुँच गई थीं। वहां कोई भी अनुचुदी नहीं थीं, और सब समझ गयी कि दो बार की मलाई है ये और अभी ताजा ताजा चुदी है बेचारी,



सब मुस्करा रही थीं, बेचारी हमारी बेबी की हालत देखकर,

" साफ़ भी नहीं कर पायी मैं लेट हो रहा था "


दुखी मुंह बना क़े अन्नी बोली, लेकिन उसकी बात पर मिसेज मोइत्रा कुछ बोलतीं, की पीछे से चमची नंबर १ बोली,

लगता है पीछे भी खुदाई हुयी है, दो चार बूँद मलाई दिख रही है पहले की है क्या "

" निहराओ इसको, फैलाओ चूतड़ पूरा कस क़े " मिसेज मोइत्रा क़े यहाँ देर नहीं होती थी, उन्होंने तुरंत फैसला दिया, और अमल भी पहले क़े जमाने की तरह तुरंत हुआ।


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तीनो चमचियों ने पकड़ क़े अन्नी को निहुरा दिया, और सीनियर्स में सीनयर, मिसेज कौर और मिसेज यादव ने कस क़े दोनों चूतड़ फैला दिए,

भरभरा क़े बीज गांड में से लहकते हुए छलक क़े बहने लगा, क्या कोई ऐनल क्रीमपाई वाली ब्ल्यू फिल्म होगी,
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और मिसेज मोइत्रा ने घटना स्थल का जबरदस्त मुआयना किया, तबतक मिसेज भसीन बोलीं, " लगता है सुबह आज तू बच गयी थी जो, "

" अरे मैडम सुबह कौन मर्द छोड़ता है, स्साले लगता है सुबह उठते ही इसलिए हैं की उठ क़े चढ़ जाएँ "

हमारी बच्ची पार्टी की सुजाता बोली और बच्ची पार्टी ही की रंजना ने अपना किस्सा मिसेज मोइत्रा को सुनाया,


" ,मैडम मेरा वाला तो पहले दिन से ही बेड टी अपने हाथ से बना क़े पिलाता है, बनाता भी बहुत अच्छा है लेकिन बेड टी की कीमत सुबह सुबह एडवांस में ले लेता है "



अब खूब जोर का ठहाका लगा, और मिसेज मोइत्रा अन्नी को सीधा करती बोलीं, " घर घर की कहानी "

अन्नी समझ गयी वो बच गयी, और अपना दुखड़ा सुनाती बोली, " मैडम, मैं तो दस बजे ही आ जाती, इनसे तो मैं बस ये कहने गयी थी की चोली की स्ट्रिंग ठीक से नहीं बंध रही है, प्लीज बाँध दीजिये, वो लैपटॉप पे लगे हुए थे,

" पर बजाय बान्धने क़े उसने खोल दिया न " बच्ची पार्टी की ही साजिदा बोली, उसका मर्द भी एक मिनट नहीं छोड़ता था,
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" हाँ तब भी बस एक क्विकी कह क़े, बस १० बजकर बीस पे मैं फ्री हो गयी थी, पर जैसे ही मुड़े वो बोला,

" अरे यार तेरी पीफिरछे वाली सहेली बुरा मान जायेगी, " और जब तक मैं कुछ कहूं वहीँ पलंग पे निहुरा क़े पिछवाड़े भी,...


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और आप तो जानती है की पिछवाड़े क़े बाद आस टू माउथ तो, और फिर वो दुबारा फनफना गया तो फिर क्विकी क़े नाम पे, अपनी कसम धरा दी, तो थर्ड टाइम भी और "



मुस्कराते हुए खिसियानी आवाज में वो बोली, और मिसेज मोइत्रा ने सजा अनाउंस कर दी,

" सब दोष तेरी चोली का है, तो ये तेरी चूनरी जब्त, चोली छिपाने की कोई जरूरत नहीं। चुनरी कमर में बाँध ले, "

उसने चैन की सांस ली, और कमर में बाँध ली और उसके ३२ डी डी साइज की कश्मीरी सेब चोली फाड़ रहे थे।

लेडीज क्लब में टीनेजर भी अकेली वही थी और ३२ साइज वाली भी, बाकी हम सब बच्ची पार्टी वालियां ३४ क़े आसपास और सीनियर्स ३४ -३६ क़े बीच।


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ज्यादातर लेडीज का ब्यूटी पालर का काम ख़त्म हो गया था, और सब मेंहदी वालियों क़े साथ थीं, मिसेज मोइत्रा क़े लिए लोरियल और लक्मे वाली हेड हाँथ बांधे खड़ी थी, दोनों ने एक एक बूथ मैडम क़े लिए खाली रखा हुआ था, मैडम ने लक्मे चुना तो लोरिएल वाली का मुंह थोड़ा उतर गया, पर मैंने उससे कहा,

" जाने क़े पहले शाम को आप मैडम का जबरदस्त ब्राइडल मेकअप कर दीजियेगा, फर्स्ट नाइट क़े पहले वाला "

और मिसेज मोइत्रा की आँखे चमक गयी, समझ तो वो गयी थीं, लेकिन मैंने कान में साफ़ साफ़ बोल दिया, " बेचारा आप का दमाद आपका दिन भर इन्तजार करेगा, मेकअप कर क़े नहीं जाइएगा तो बिगाड़ेगा कैसे "

" तु भी न "

कहकर नयी दुल्हन की तरह शर्माती हुयी वो लक्मे क़े बूथ में घुस गयीं और मैं बगल में ही जो लॉरियल का बूथ खाली था उसमे। सुजाता खुद एक बार वेलकम ड्रिंक लेकर उनके पास पहुँच गयी,



साढ़े ११ बजे तक उनका मेकअप चला और एक साथ लक्मे वालियों ने तीन तीन लड़कियों को लगा रखा था, एक हेयर अरेंजमेंट कर रही थी, दूसरी पेडिक्योर और तीसरी मैनीक्योर, बॉडी वैक्सिंग पहले हो चुकी थी और सुजाता ने मेकअप वाली को बोल दिया था, फुल बॉडी वैक्सिंग मतलब ब्राजीलियन, बस थोड़ा सा छोड़ देंगे, रेख आती मर्दो की तरह प्रेम गली क़े ऊपर नेम बोर्ड की तरह और उसके अलावा एक बाल भी नहीं, अगवाड़ा पिछवाड़ा सब

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और वहीँ से लेडीज क्लब की सरप्राइज पॅकेज अवार्ड भी मैडम ने घोषित कर दिया,

जो अवार्ड साढ़े दस क़े पहले आने वालों क़े लिए था, ६ महीने का फ्री मेकअप वही जिसकी जिसकी कुप्पी में मलाई थी उसके लिए भी और अन्नी क़े लिए पूरे साल भर का फ्री मेकअप।
 
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मेंहदी
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और उसके बाद मेंहदी का नंबर था और वहां भी खूब मस्ती और बदमाशी हो रही थी। लेकिन मिसेज मोइत्रा क़े वहां आते ही शरारत का लेवल कई गुना बढ़ गया, अभी सामने स्क्रीन पे मेहँदी की डिजाइंस चल रही थीं, पर आते ही मिसेज मोइत्रा ने बोला

:अरे ये सब क्या, ...असली वाले दिखाओ, पता तो चले लेडीज क्लब बदल गया है,"

और पहला फरमान उन्होंने ये जारी किया की सब लेडीज क़े एक हाथ में कम से कम, कामसूत्र वाली पोजीशन बनाया जाएगा,

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भांग और वोदका का नशा चढ़ रहा था, मैंने अन्नी को इशारा किया और उसने एक झटके में मैडम की चोली उतार दी, दोनों जोबन मैदान में, और बोली, " बेस्ट बूब्स इन टाउन, तो इन पे तो जबरदस्त मेंहदी लगेगी "

" मैडम, आपका दामाद स्साला तो वैसे ही इस जुबना का दीवाना है, और एक बार मेंहदी लगे देखेगा न तो नीचे का रुख ही नहीं करेगा ."मैंने उन्हें चिढ़ाया भी, उकसाया भी और मिसेज मल्होत्रा नयी दुल्हन की तरह शर्मा भी गयीं, लेकिन दामाद का तो आज उन्होंने औजार देखा भी था , पकड़ा भी था, मसला भी वो भी अपनी बेटियों के समाने तो सोच के और गरमा गयीं


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मेहँदी वालियां तो और खुल क़े मजाक करती हैं जो मिसेज मोइत्रा को लगा रखी थी, वो हंस क़े बोली,

"अरे मैडम इसकी चिंता मत करिये, ...मैं आपकी बुलबुल पर भी मेंहदी लगा दूंगी, और सीधे यहाँ से वहां का रास्ता भी, अँधेरे में भी ढूंढ लेगा वो "


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सब लोगो को पहले से ही बता दिया गया था, की मैडम स्पेशल हैं,

इसलिए सबके गुलाबजामुन में एक भांग की गोली थी तो मैडम वाले में डबल, सबके स्पाइक्ड ड्रिक्स में एक पेग था तो मिसेज मोइत्रा में डबल।

मंजू ने बोला था बस एक बार इस बंगालन को टुन्न करने की देर है उसके बाद उनकी छिपी चुदास धधक कर बाहर आती है,और उन जैसियों को सेक्स क़े नशे से भी तगड़ा होता है पावर का नशा और उसे दिखाने का नशा, इसलिए मेकअप में सब लोग जहाँ नंबर का वेट कर रहे थे, वहां लक्मे की तीन बेस्ट ब्यूटी आर्टिस्ट एक साथ उन का सिंगार कर रही थीं और शाम को घर जाने क़े पहले लोरियल बुक था। उसी तरह मेंहंदी वालियों ने तीन मेंहंदी आर्टिस्ट उनके साथ लगा दिया,



एक मिसेज मोइत्रा क़े हाथ में कामसूत्र की डिजाइन बना रही थी, दूसरी उनके बूब्स पर एकदम आर्टिस्टिक डिजाइन बना रही थी और तीसरी ने जाँघों को सम्हाला था,



मेरी मेंहदी भी उनके बगल में बैठ क़े लग रही थी, मैंने उनके कान में फुसफुसा क़े कहा,

" आपका दामाद तो आज पागल हो जाएगा, और जो आपके हाथ में खड़े हो क़े बैठ क़े लेने वाली पोज़िशन बन रही हैं न सब ट्राई करेगा, आज अपनी सास क़े साथ, सुबह उठाने लायक नहीं रहेंगी आप "

" न रहूं, मेरा दामाद है जो उसकी मर्जी करे "

अबकी सीधे ऑरेंज वोदका गटकती हुयी वो खिलखिला क़े बोलीं, और फिर आँख मटकाते हुए जोड़ा,

" रोज बेटी मजा लेती है दामाद का मेरे तो कभी सास का भी तो नंबर लगना चाहिए "
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" एकदम, और आप से ज्यादा आज उसकी लाटरी लगी है कब से बेचारा तड़प रहा था इन्ही जोबन क़े लिए "

मैंने चिढ़ाया। और जोड़ा मेहँदी लगने क़े बाद तो रोज मांगेगा आपसे "

" तो रोज दे दूंगी, बल्किन बिना मांगे दे दूंगी " हंसती हुयी वो बोली, फिर मेरे कान में बोलीं, " यार लेकिन उसका औजार है मस्त , सोच सोच क़े मेरी बुलबुल आंसू बहा रही है। "



मैंने उन्हें नहीं बताया की उसी मोटे औजार से मेरा सोना मोना उनकी दर्जा नौ वाले बेटियों की झिल्ली फाड़ रहा है।



अन्नी के लिए मिसेज मोइत्रा ने हुक्म जारी कर दिया, और इसको फुल बॉडी मेंहदी, और पिछवाड़े क़े लिए ख़ास तौर से "


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" अरे साफ़ साफ़ बोलिए न गांड पे " उनकी चहेती चमची नंबर १ बोली। हम लोगो की बच्ची पार्टी की बेला लीला को चिढ़ाते बोली

" चूतड़ पे तो इनके भी मेहँदी लगनी चाहिए , क्यों अभी देवर को पिछवाड़े वाली गली का रास्ता दिखाया की नहीं ? "
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" अरे तो आज दिखा देंगी, पहले तु अपनी बता तेरे मर्द ने कब पिछवाड़े डाका डाला था "


मिसेज साहनी ने बेला को खींचा और बेला एकदम खुल क़े बात करने वाली, उनके बारे में मशहूर था तीन साल हो गए थे शादी हुए और एक दिन भी नागा नहीं हुआ, पांच दिन की छुट्टी में भी।



बेला चुप भी नहीं रहती थी, हंस क़े बोली

" अरे न मैं न ये छेद छेद में भेद नहीं करते, पांच दिन की छुट्टी में तो गोलकुण्डे पर ही चढ़ाई होती है, फिर होली दिवाली , वीकेंड और जब उनका मन कर जाए तब, अरे देह तो सैंया का खेत है जब चाहे तब जोत लें। "


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" आपका दामाद भी छेद छेद में भेद नहीं करता, अब आपका पिछवाड़ा भी नहीं बचेगा, " मैंने मिसेज मोइत्रा को चिकोटी काटी।

" तो न बचे, मेरा दामाद है जो उसकी मर्जी करे, " खुश हो वो बोलीं।



उन्हें नहीं मालूम था इस समय उनका दामाद उनकी उन बेटियों को साथ, जिसे उन्होंने इतना दुनिया से बचा कर रखा था अपनी मर्जी कर रहा होगा।



पहले तो सिर्फ एक हाथ में मेंहदी लेडीज क्लब लगवाती थी, दूसरे का पैसा देना पड़ता था।



और अब फुल बॉडी, और पक्का देख के सबके मर्दों का आज खूंटा फनफनाना था, — तो लेडीज बहुत खुश थीं।



और इन मेहँदी डिजाइन के रेट भी ४०% ज्यादा थे—तो मेहँदी लगाने वाले भी बहुत खुश थे।



पर इसके कारण हमारे टाइम शेड्यूल की ऐसी-तैसी हो गई थी। हमने ४५ मिनट मेंहदी क़े लिए सोचा था और बारह बजे से अगला प्रोग्राम था, डांस और गाने का, लेकिन अब कम से कम एक घंटे लेट हो गया था।

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और इसका मतलब जो लेडीज क्लब का फंक्शन शाम को सात बजे ख़तम होना था, आठ से पहले नहीं - तो मेरे सोना मोना को उन कच्ची कलियों को चीथड़े चीथड़े करने क़े लिए एक घंटे और ज्यादा मिलता, - तो मैं भी बहुत खुश थी।



पौने एक बजे अगला प्रोग्राम शुरू हुआ, डांस, गाना और कैट वाक् का और उसी के साथ लाइट कैटरिंग भी थी।
 
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बारह बजे - मिसेज मोइत्रा का घर,

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ऊपर का कमरा -



" बहुत पिटोगे अगर हिले भी तो, बदमाश " एक खिलखिलाती किशोर आवाज गूंजी।

एक पुरुष पलंग पर, दोनों हाथ पलंग से बंधे, आँखों पर एक मोटा काला ब्लाइंडफोल्ड,
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दो जस्ट टीन- स्कूली बालाएं, खिलखिलाती सिर्फ ख़ुशी का आवरण पहने हुए, चढ़ती जवानी की मस्ती से अपने को ढंके हुए, जो कुछ वीडियों में देखती थीं, सपनो में देखती थीं, पिक्स में देखा था सब सामने परसा हुआ था,

"जीजू तुम न एकदम बुद्धू हो, चल अब मैं पुच्ची लेती हूँ, बस तुझे यह दिखाना होगा की तूने पहचान लिया,: फुसफुसा क़े कान में २० सेकेण्ड छोटी वाली बोली,


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अपनी देह को उस क़े ऊपर लाद दिया, बालों की महक कच्ची अमिया का कड़ापन, गालों पर गालों से रगड़ाई , और कोई होठ बस होंठों की छुअन, जैसे कोई तितली फूल क़े ऊपर बैठे और तुरंत हट जाए,

" छोटी" उनके मुंह से आवाज निकली और चटाक एक प्यार भरा चांटा गाल पर पड़ा, चटाक

गलत जवाब दोनों किशोरियां एक साथ बोलीं, और फिर चार चांटे,
चिपका चिपकी २० सेकेण्ड तक छुटकी ने की थी, होंठ भी एकदम पास ले गयी, लेकिन उड़नछू मारका चुंबन बड़ी ने चिपका दिया और जवाब गलत हो गया।

और अगले दस मिनट तक साइलेंट ट्रीटमेंट चला, न दोनों बोल रही थीं, न उन्हें बोलने दे रही थीं, एक ने इशारा किया और दूसरी ने अपने स्कूल क़े क्राफ्ट क़े बैग से एक फेदर निकाला, और वही फेदर बस सीने पे छुला दिया,

और उनकी सिसकी निकल गयी, देह कसमसाने लगी, कस क़े हाथ बंधे होने से भी चूतड़ उछालने की वो कोशिश कर रहे थे।


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दोनों टीनेजर जुड़वां बहने एक दूसरे को देख क़े मुस्करायी और जिसके हाथ में फेदर था उसने बस बंधे हुए हाथ वाले क़े मेल टिट्स पे छुला क़े रगड़ दिया और दूसरी जो बीस सेकेण्ड छोटी थी, वो फलों से लदी डाल की तरह झुकी, मन तो उसका कर रहा था, चूस ले काट ले, पर बात धीमी आंच पे तड़पाने की थी तो बस अपनी जीभ निकाल क़े दुसरे मेल टिट को छू भर दिया



बेचारे वो, वो तड़प उठे।


जब से उन्होंने मिसेज मोइत्रा की दोनों कबुतरियों को देखा था, और दोनों ने उन्हें जीजू और खुद को स्साली घोषित कर दिया था, उसी पल से उनके स्वामी प्रेमदंड इन दोनों कन्याओं क़े लिए अकड़े हुए थे और आज जब मौका आया तो यही दोनों उन्हें तड़पा रही हैं


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पर अभी तो शुरुआत थी, फेदर क़े लांग स्ट्रोक कभी जाँघों पर, तो कभी पेट पर तो कभी आते जाते तन्नाए प्रेमदंड की भी उड़नछू चुम्मी ले लेते और छोटी क़े तो ऊँगली में जादू था, जैसे मोबाइल क़े की बोर्ड पर नाच रही हो,एकदम बैलेरिना क़े पैर की तरह छोटी साली की उँगलियाँ थिरक रही थीं, कभी चौड़े सीने को सहलातीं, दुलारतीं तो कभी मेल टिट्स को नोच लेती, क्या कई लौंडा किस कच्ची कली क़े आते हुए निप्स नोचेगा, कभी पूरी हथेली सरक क़े नाभि क़े नीच और उँगलियाँ बस उस कुतुबमीनार क़े बाप क़े चारो ओर चक्कर काट क़े लौट आतीं,



उधर प्रेमदंड भी टनटना रहा था, दोनों ने नाप लिया था और दोनों के बालिश्त से काफी बड़ा था।


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दी ने स्केल से जो नाप क़े पिक भेजी थी उसी से उन्हें अंदाज तो लग गया था लें जीजू का खूंटा साली खुद नापे तो असली मजा,



फेदर अब अक्सर उसी प्रेमदंड को छू रहा था कभी प्यार से एक थपकी भी हल्की सी लगा देता, और फेदर वाली ने अपने होंठों से फेदर का काम लेना शुरू लेना शुरू कर दिया।

ओह्ह नहीं, उफ्फ्फ उनकी सिसकी जोर से निकली पड़ी और दो चांटे अबकी कस क़े पड़े दोनों गाल दोनों सालियों ने बाँट लिए थे।

" दी, इनका मुंह बंद कर दो न, बहुत चिल्लाता है " बीस सेकेण्ड छोटी ने कहा,



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और अगले ही पल दोनों जाँघों को फैला क़े अपनी प्रेमकली को उस मर्द क़े मुंह पे,



किसी भी मर्द का मुंह बंद करवाने क़े बहुत तरीके होते हैं, डरा क़े, धमका क़े, पैसा खिला क़े लेकिन ये तरीका सबसे अच्छा है, और दोनों ही लड़कियां भले ही क्लास नौ में थीं, लेकिन थीं पूरी एथलेटिक, कसे भरे बदन की, रोज टेनिस खेलती थीं, स्विम करती थीं और जिसकी प्रेमकली ने मुंह को सील किया था उसने अपनी जाँघों की भी ताकत कस क़े दिखा दी थी, सर दोनों हाथों से पकड़ रखा था, और अब आगे आगे सावन क़े झोंको से झूलते झूले की तरह कमर हिला रही थी,
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" बोलिये न कौन चुसवा रही है, अरे हम लोगो ने हाथ बाँध दिया, आँख बंद कर दी, देखिये हाथ तो इसलिए बाँध दिया की दो सालियों क़े होते हुए भी जीजू अपने हाथ का इस्तेमाल करें, ये तो सख्त नाइंसाफी होती, और फिर कहीं दो दो सालियों को देख क़े आप का मन न दोल जाए इसलिए आँख बंद कर दी, पर मुंह तो खुला है न, बोलिये कौन साली किस्मत वाली है ? "



बोलते भी बेचारे कैसे, जो ऊपर चढ़ी थी, उसने इतनी कस क़े दबोच रखा था और जो उकसा रही थी, वो अब पैर क़े तलुवे पर उसी फेदर से छू रही थी।



बस एक मौका मिला जाए, बस एक बार हाथ खुल जाए, दोनों सालियों की फाड् क़े रख दूंगा लेकिन अभी तो बाजी उन दोनों क़े हाथ में थी और उस का कारण था,



कहते हैं न घर का भेदी, तो बस उन दोनों की दी, मिल गयी थीं और कल रात गूगल मीट पर डेढ़ घंटे की क्लास अपनी बहनो की ली, उनके जीजू क़े दर्जन भर एरोटिक प्वाइंट, कमजोरियां, कैसे उन्हें बुद्धू बनाया जा सकता था और सबसे बढ़ कर असली मसला। जो उन दोनों बंगालिन कन्याओ ने अपनी दी से कहा,

" जीजू में लाख अच्छाई हो,.... लेकिन झिझकते बहुत हैं. .... , आपने इत्ती मुश्किल से टाइम का जुगाड़ किया और ८ घंटे नहीं आप पूरे २४ घंटे दे दीजिये, वो शुरू ही नहीं कर पाएंगे "



बात एकदम सही थी, और जवाब एक ही हो सकता था, तुम दोनों शुरू कर दो ,

तो उन दोनों की दी ने बीसो टोटके नुस्खे बताये


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और सबसे पहला कैसे उनके हाथ बाँध दे आँखे बंद कर दें,

उन्होंने उनके और निधि क़े साथ हुए थ्रीसम की शार्ट क्लिप दे दी और ऍफ़ ऍफ़ एम्, यानी दो लड़कियां और एक लड़के वाली दर्जन भर ब्ल्यू फिल्म भी भेज दी,


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दो दो तीन बार दोनों बहनों ने एक साथ देखी , लेकिन असली गुरु तो मंजू थी


और मंजू ने भी एक बार अपनी बेटी गीता क़े साथ मिल क़े इनकी जबरदस्त रगड़ाई की थी, उन माँ बेटी ने मिलकर इनकी मां बहन का जबरदस्त रोल किया था, और मंजू खाली बात में विश्वास करती थी, प्रैक्टिकल भी करवाया, एक बेलन लेकर, दोनों को बोला
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"साथ-साथ चाटो, एक दाएं से एक बाएं , एक ऊपर से एक नीचे से, एक मुठियाएगी, एक चूसेगी। फिर गन्ने क़े साथ रसगुल्ले चूसने की भी,... और ऊपर चढ़कर चुसवाने की, खुद मंजू बारी-बारी से दोनों के ऊपर चढ़ी और जब तक दो बार नहीं झड़ी, छोड़ा नहीं।
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मंजू ने सिर्फ जीजू की रगड़ाई करने की नहीं बल्कि साथ साथ चुदवाने की भी बीसो ट्रिक बतायीं,

जैसे जब वो एक की टाँगे उठा क़े पेल रहे हों , दूसरी बहन उसके ऊपर चढ़ क़े उस लड़की को अपनी चूत चटवाये, और झुक क़े बहन की बुर में से अंदर आता जाता लंड भी चाट पे, कभी उसकी बुर से निकाल क़े मुंह में लेके चूस ले, और फिर अपने हाथ से अपनी बहन की बुर में डाल दे। अगर एक लड़की जीजू के ऊपर चढ़कर उनका खूंटा घोंटे तो दूसरी भी ऊपर चढ़कर उन्हें अपनी फुद्दी चुसवाए।
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खूंटा तो दोनों बहने मिलकर ही चूसें।

एक और राज की बात मंजू ने बतायी की लड़कों का जितना जल्दी लड़कियों की चुसम चुसाई देख क़े खड़ा होता है उतना जल्दी और कोई चीज देख क़े नहीं खड़ा होता। तो एक राउंड क़े बाद, कुछ देर रुक क़े तुम दोनों आपस में ही, चालू हो जाना, बस।

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और ये नहीं की खड़ा होते ही खेल शुरू, कम से कम पन्दरह बीस मिनट तक तड़पने क़े बाद, निहोरा करने क़े बाद,

और हाँ, गालियां, मंजू ने गालियों की भी खूब प्रैक्टिसकरवाई i यहाँ तक की जीजू क़े मां बहन का नाम भी बता दिया की नाम लेके गाली देना,...

लेकिन मंजू ने सबसे बड़ा काम किया, हथियार, गोला-बारूद सप्लाई करने का। वह चार पैकेट महुआ ले आयी थी, और समझा भी दिया,

" छिनारों, पहला पैकेट पूरा तेरे जीजू के मुंह में वो भी अपने दोनों के जोबन रस से मिला के, उसके बाद कम से कम आधे घंटे तड़पाना स्साले को, फिर कुछ। तब तक इस महुआ का रस तेरे जीजू के देह में, मन में भिन जाएगा और सब सरम झिझक उसके महतारी के पिछवाड़े घुस जायेगी, और बाकी तीन तुम तीनो मिल के, लेकिन आधा उस स्साले तेरे जीजू के ही मुंह में "।



महुए की देसी दारु के साथ उन्होंने एक छोटी शीशी घर की पेरी सरसों के तेल की भी दी और बता भी दिया,

" मर्दो को होश नहीं रहता और तुम जैसी उम्र की कच्ची कलियों के साथ तो स्साले एकदम पागल हो जाते हैं बिना यह सोचे की उनकी महतारी का भोंसड़ा नहीं है, बिना तेल के नहीं घुसेगा। और तुम दोनों को अपना ख्याल खुद करना चाहिए तो पहले तो अपनी चुनमुनिया को फैला के तेल चुआ लेना और फिर उस के लंड में हाथ में लगा के अच्छी तरह मल देना, दो चार बूँद लंड के टोपे का जो मूतने वाला छेद होता हैं न, उसमे भी डाल देना, बहुत तेज लगेगा उसे। "


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" छरछरायेगा नहीं, " ? बड़ी वाली ने चिंताप्रकट की पर

छुटकी बंगाली कन्या बेपरवाही से बाल झटकते हुए बोली, " अरे दी हम दोनों की गुलाबो जो इतने दे से चरचरा है की उसकी तो उस बेदर्दी ने सुध नहीं ली, तो हम लोग, ...अब जब हम दोनों का मौका आया है तो जरा सा "छरछराने की चिंता करें ?"
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पर असली काम जो उन्हें बाँधने छानने का था वो उन दोनों बंग बालिकाओं की दिमाग की उपज था और पहला स्टेप था जीजू का चीरहरण।

छुटकी ने जान बूझ के पानी ठीक जहाँ खूंटा पैंट पे ठीकर मार रहा था, वही गिरा दिया और चिढ़ाया भी,

" सु सु कर दिया क्या ?"

और ऊपर से मिसेज मोइत्रा का हुकुम, दोनों बहनो ने मिल के पैंट खींच के वहीं फेंक दी, जहँ सुबह सबेरे मम्मी के सामने मंजू ने दोनों बहनों की पैंटी उतार दी थी और दोनों की चुनमुनिया पे महुआ की दारु पोत दी थी।



१० बजकर ५० मिनट पर मिसेज मोइत्रा कोमल के साथ क्लब के लिए निकल गयीं,



१० बजकर ५१ मिनट पर ग्लास का बचा पानी, बाहर बरामदे में खड़े खड़े बड़ी वाली ने जीजू की झकझक सफ़ेद शर्ट पर, और वो अंदर तक गीले,

" अरे दी, मम्मी के दामाद तो अभी से गीले हो रहे हैं, कहीं इन्हे जुकाम हो गया तो मम्मी बहुत डाँटेगी, " छुटकी बहुत अदा से बोली।

" तो उतार दीजिये न शर्ट, ...अब दी के सामने तो उतारते ही होंगे तो दी की छोटी बहनों से क्यों शर्मा रहे हैं " बड़ी बड़ों की तरह बोली।
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गेट से बाहर निकलती मंजू ने वहीँ से हड़काया, " छिनारों, दो दो सालिया होते हुए जीजू को हाथ लगाना पड़े "



१० बजकर ५५ मिनट - भव्य स्वागत के बीच मिसेज मोइत्रा लेडीज क्लब पहुँच गयीं।



१० बजकर ५५ मिनट बाहर गेट पर दोनों बहनों ने एक खूब मोटा सा ताला बंद कर दिया, नीचे के दरवाजे, खिड़कियां बंद हो गयीं और जीजू की शर्ट उतर कर जहाँ पैंट थी, वहीँ फेंक दी गयी।
 
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खेल शुरू

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११ बजे - दोनों दर्जा नौ वाली किशोरियां और उनके जीजू ऊपर, लड़कियों के कमरे में पहुँच गए।

डबल बेड पलंग पर साफ़ सफ़ेद चादर अच्छी तरह बिछी थी, और यह मंजू की करामात थी। एकदम उसी तरह जैसे नयी दुल्हन की सुहागरात की चददर सफ़ेद होती है, मंजू ने यही सोचा, जो रक्तधार बहेगी, झिल्ली फटेगी और खून खच्चर होगा तो लाल लाल खून के धब्बे सफ़ेद चादर पर एकदम साफ़ साफ़ दिखेंगे।



पर अगले दस मिनट बड़ी मुश्किल से गुजरे,

मालूम तीनो को था क्या होना है लेकिन शुरुआत कौन करे, क्या बात करें और जो बात करनी थी उसकी हिम्मत किसी में नहीं पड़ रही थी, उन्होंने बस रोज की तरह पूछ लिया, तुम लोगों की पढ़ाई कैसे चल रही है और दोनों बंगबालाओं ने बस अपना माथा नहीं पीटा। थोड़ी देर तक वो दोनों भी चुप रहीं, फिर कुछ इधर उधर की बातें लेकिन रास्ता निकाला बड़ी वाली ने

जैसे बच्चे खेलते हैं वैसे ये दोनों किशोरियां जीजू के साथ स्टैचू खेलतीं थीं, बस एक बात थी की टाइम दस मिनट से ज्यादा नहीं होगा और गेम एकतरफा होता था, दोनों लड़कियों में से ही कोई बोल देती थी और दिन में एक बार से ज्यादा नहीं। और उस के साथ एक दो कंडीशन स्टैचू बोलने वाली लगा सकती थी,

११ बजकर १० मिनट - " स्टैचू, जीजू, बस अब आपको दस मिनट तक हिलना डुलना नहीं है, चुपचाप, सीधे से लेट जाइये, बोलना एकदम नहीं है "शुरुआत बड़ी कबूतरी ने की।



और सिर्फ शॉर्ट पहने वो सफेद चादर बिछी पलंग पर चुपचाप लेट गए और अब बाज़ी दोनों टीनेजर्स के हाथ में थी।

" जीजू, आपको पता है दी को और मुझे स्काउटिंग में नॉट में बैज मिला है और पोजीशन भी अब हम दोनों जल्द ही प्रेजिडेंट गाइड बन जायेंगीं " चहकते हुए मिसेज मोइत्रा की छोटी कबूतरी बोली,

" बताना क्या है, बाँध के दिखा दे न " बड़ी बोली,

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और एक आज्ञाकारी बहन की तरह, छुटकी ने दायां हाथ अपनी टीनेजर ब्रा से, कुल चार गांठे, और बाएं की जिम्मेदारी बड़ी ने सम्हाली और दोनों ने चेक भी कर लिया, गाँठ कितने भी झटके लगे छूटेगा क्या ढीली भी नहीं हो सकती थी।



११ बजकर १५ मिनट - दोनों हाथ बंध गए थे,खूब कसकर।



उनकी निगाहें दोनों स्कूली लड़कियों से चिपकी थीं, जैसे सुन्दर बंगाली लड़कियां होती हैं, बड़ी बड़ी मछली की तरह कजरारी आँखे और उन आँखों में शरारत नाचती, लम्बे घने काले केश, खूब गोरा भोला सा मुखड़ा और कचकचा के काटने लायक, चेहरा एकदम बच्चो सा लेकिन जघन जोबन पर निगाह पड़ती तो देखने वाला समझ जाता एकदम लेने लायक हो गयीं हैं, जस्ट पर्फेक्ट माल,


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और वो दोनों भी समझ रही थीं जीजू की हालत, छुटकी ने अगला दांव फेंका उन्हें इग्नोर करके बड़ी बहन से बोली,

" दी, जीजू तो टॉप लेस हैं और हम दोनों, ये तो सख्त नाइंसाफी है "

और बड़ी बहन ने छोटी वाली का टॉप उतार के दूर फेंक दिया और जैसे बहनों में झगडे होते हैं, छोटी वाली क्यों चूकती, उसने भी बहन का और दोनों

दर्जा नौ वाली टॉप लेस, दोनों के कच्चे टिकोरे बाहर,

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उनकी ऊपर की सांस ऊपर, नीचे की नीचे,

" जीजू अच्छा सच में बताइये मेरे बड़े हैं की जीजू के, दी भले ही २० सेकडं बड़ी हो, लेकिन गुब्बारे मेरे ही बड़े हैं, है न। बेईमानी नहीं " एकदम उनके सामने झुक के अपने उभार दिखाते, दोनों हाथों से सहलाते, छुटकी बोली,

" अरे हाथ खुले होते तो अभी नाप के बता देते की मेरे ही बड़े हैं, जो बड़ा होता है उसकी हर चीज बड़ी होती है " बड़ी ने जोड़ा, पर छोटी मुंह फुला के बोली,

" अरे, रोज स्कूल आते जाते तो इनके हाथ खुले ही रहते थे, मैं तो कित्ती बार गोद में भी बैठी, लेकिन, कभी दबाना तो दूर छुआ भी नहीं "


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और अब बड़ी वाली ने अपने उरोज, जीजू के होंठों के पास बस एक इंच दूरी पे, और हलके से बोली, " अच्छे हैं न जीजू "



छुटकी ने नीचे का रास्ता नापा और शॉर्ट के ऊपर से अपने बूब्स खड़े खूंटे से रगड़ने लगी।


उनकी हालत ख़राब थी, हाथ हिल नहीं पा रहे थे, मारे उत्तेजना के देह चादर से रगड़ रहे थे, बस मन कर रहा था, एक मौका मिल जाये बस अभी बता दूँ सालियों को,


लेकिन उनसे ज्यादा हालत खराब थी, उनके मूसलचंद की, शॉर्ट में तड़प रहा था, छटपटा रहा था, फड़क रहा था। ऊपर से कभी एक बहन की उँगलियाँ कभी दूसरे के जोबन,

छुटकी ने ही उसकी सुधि ली, " दी ये बेचारा तड़प रहा है, कित्ती बुरी हालत है " हथेली से ऊपर से कस कस के दबाते वो बोली,
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" तो खोल दें न मेरी बहन " बड़ी बहन भी उदार थी, और दोनों ने मिल कर शार्ट खींच दिया,

फटा पोस्टर निकला हीरो वो भी पूरे एक फुट का



दोनों की आँखे फटी रह गयीं, उनकी सहेलियां अपने ब्वॉयफ्रेंड्स के खूंटों का किस्सा सुनाती थीं, उन दोनों को जलाती थी लेकिन इतना बड़ा और इतना मोटा,

इसके पहले पिक्स देख चुकी थीं, कोमल दी के साथ इसकी हरकतें भी और कोमल दी ने स्केल से नापते हुए भी पिक भेजी थी,




समय था ११ -- २५ मिनट



हिम्मत कर के छोटकी ने पकड़ा और उसे लगा उसका हाथ जल गया, और मुट्ठी में आया भी नहीं तभी उसे कुछ याद आया



मंजू ने कहा था एक पाउच खेल शुरू होने के पहले जोबन रस का मिला के

बस थोड़ी देर में दोनों बालाएं, जीजू के मुंह के पास और महुए का पाउच खुला बूँद बूँद करके वो आसव पहले बड़ी के उरोजों से छलकता हुआ उनके मुंह के अंदर और फिर छोटी वाली की चूँचियों को भिगोता,

" चुपचाप मुंह खोले रहो " बड़ी वाली ने हड़काया और पांच मिनट में पूरा पाउच खाली,



लेकिन अब हिम्मत कर के वो बोले, " मेरी शार्ट तो तुम लोगो ने उतार दी और अपनी "

"अबे बोलने की इजाजत किसने दी तुझे " बड़ी गरजी, लेकिन छोटी से कहा " पर बात तो सही है "

और खिखिलाती हुयी छोटी बहन की स्कर्ट खींच के उतार दी, छुटकी तो और तेज, एकदम हरी मिर्च, तो बड़ी वाली की भी स्कर्ट उतर गयी और अब तीनो निसुते

लेकिन थोड़ी देर में दोनों बंग बालाएं बदमाशी करने में हिचकने लगी तो बड़ी ने छुटकी के कान में कहा



११ बजकर २५ मिनट - ब्लाइंड फोल्ड, और अबकी दोनों बालिकाओं की माँ की ब्रा इस्तेमाल हुयी, काली ३६ डीडी वाली और वो भी एक नहीं दो दो,



पूरे ४५ मिनट तक दोनों सालियों ने जम के जीजा का मजा लिया , जो जो FFM वाली मूवीज दी ने भेजी थीं , मंजू ने बदमाशी सिखाई थी, सब इस्तेमाल हुयी
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पर दोनों सालियों को दया आ गयी, और

१२ बजकर दस मिनट पर ब्लाइंडफोल्ड खुल गया, पर हाथ अभी भी बंधे थे



लेकिन वे भी कम चालाक नहीं थे, डिवाइड और रूल।

दोनों कच्ची कलियाँ जानती भी थीं और चाहती भी थी की फ़टे, लेकिन पहले दूसरे की और उन्होंने बड़ी वाली को पटा लिया, और जब छुटकी अपने होंठों से चर्मदण्ड की लिप सर्विस कर रही थी

१२-२० बड़ी वाली ने जीजू के हाथ खोल दिए।


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१२ -२० क्लब में मिसेज मोइत्रा की गुलाबो पर मेंहदी लग रही थी और सोच रही थीं आज दामाद की क्या हालत होगी जब रात में उसे ऐसे देखेगा


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और हाथ खुलने के बाद अब जीजू की बारी थी।
 
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जोरू का गुलाम भाग २६० पृष्ठ १६३५

तीज पार्टी -लेडीज क्लब और खेल शुरू
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Chalakmanus

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जोरू का गुलाम भाग २६०

तीज पार्टी -लेडीज क्लब और खेल शुरू

४२,८१, ८९५
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क्लब में तैयारी



सुजाता इन्हे मिसेज मोइत्रा के यहाँ छोड़कर सवा दस बजे क्लब पहुँच गयी थी, और तय यह हुआ था की तीज पार्टी ठीक ११ बजे शुरू होगी, हाँ मेंबर पहले भी आ सकती हैं, लेकिन ११ बजे के बाद लेट माना जाएगा और पनिशमेंट मिलेगा जो मिसेज मोइत्रा तय करेगीं, और वो ११ बजने में पांच मिनट रहेगा तो मिसेज मोइत्राआ जाएंगी।

सुजाता को याद आ रहा था जब पहली मीटिंग में मिसेज मोइत्रा की प्रजेंस में तीज पार्टी की मीटिंग हुयी थी, तो सीनियर्स ( वोट लेडीज तो ३० के ऊपर हैं और उनके बच्चे हैं ) कितना खुल के मजाक कर रही थीं, यहाँ तक की मिसेज मोइत्रा भी, खुल कर मुट्ठी करने की बात हो रही थी , और एक ने साफ़ साफ कहा था

" लेकिन वैसलीन क्रीम कडुआ तेल लगा के मत आना , ...



चमची नंबर दो ने हड़का के बोला, " आने दीजिए न , जो करना हो कर लें , ... मैं हूँ न वेलकम कमिटी में , सारी छिनारों का पेटीकोट उठा उठा के आते ही चेक करुँगी ,.. जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , अरे जब तक चरचराए परपराए न , चीख पुकार न मचें, ... क्या मज़ा ,... "

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और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की।

उम्र के हिसाब से तो वो बच्ची पार्टी में भी बड़ी थीं, बच्ची पार्टी में वो लेडीज जिनके बच्चे नहीं थे, और २५-२६ से ज्यादा नहीं।

बेला, बिहार की थीं, गाली देने में चैम्पियन, और शादी हुए तीन साल हो गए थे लेकिन पहली रात ही उसने नाड़ा खोने के पहले पति से पंचवर्षीय योजना ( पहला बच्चा पांच साल बाद, और दो के बाद तीसरा नहीं ) मनवा लिया था। सास बहुत पीछे पड़ीं , " पोता चाहिए, पोता चाहिए " तो उनसे साफ साफ़ बोलीं,

' अबकी जब मेरी पांच दिन की छुट्टी होगी न तो भेज दूंगी आपके बेटे को आपके पास। अभी आप कुडुक तो हुयी नहीं है, मेरी गारंटी, आप का बेटाअसल मरद है, ससुर जी को भूल जाइएगा और पहली रात ही आपको गाभिन कर देगा। गारण्टी मेरी, और मन करे तो मेरी छोटी ननद को भी बोल दीजिये, मैं बोल देंगी उनसे, मेरी बात टालते नहीं है। माँ-बेटी दोनों पे चढ़ जाएंगे। अरे आपकी बेटी भी भले ९ में पढ़ती है लेकिन दो साल से खून उगल रही ही, पक्का मेरा मरद उसे गाभिन कर देगा, तो पोता नहीं तो नाती ही सही। " उसके बाद सास का मुंह बंद हो गया,

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तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।

कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी।
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मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे ना ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।

लेकिन असली खेल दूसरा था,.... चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।


वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।

जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।

ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गरमाच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थीं, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गरमायी थीं .मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं,

" हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "
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"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी "

जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं,

लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, ...वो भी चटवायेगी ये सोच लो "
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अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी,


" अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना,... मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।
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एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया,

" अबे… इस होली में तेरा गैंगरेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस।


ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई। हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, कोमल -पति।

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तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी,

लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनक मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया,

" हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "

और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की। उम्र के हिसाब से तो वो बच्ची पार्टी में भी बड़ी थीं, बच्ची पार्टी में वो लेडीज जिनके बच्चे नहीं थे, और २५-२६ से ज्यादा नहीं। बेला, बिहार की थीं, गाली देने में चैम्पियन, और शादी हुए तीन साल हो गए थे लेकिन पहली रात ही उसने नाड़ा खोने के पहले पति से पंचवर्षीय योजना ( पहला बच्चा पांच साल बाद, और दो के बाद तीसरा नहीं ) मनवा लिया था।



तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।



कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी। मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे न ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।



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लेकिन असली खेल दूसरा था, चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी सो ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।



वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।



जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।



ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गचमच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थी, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गर्मायी थीं मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं, " हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "

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"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी " जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं, लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, वो भी चटवायेगी ये सोच लो "

अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी, " अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना, मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।

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एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया, " अबे इस होली में तेरा गैंग रेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस। ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई।

हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, ...कोमल -पति।
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तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी, लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनक मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया, " हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "
Achaa update tha.

Par ek hi chiz do baar likh di hai..

Jas ka tas
 
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Chalakmanus

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लेडीज क्लब और तीज पार्टी
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"एकदम", हंसती हुई वो बोलीं और हाथ पकड़कर सुजाता और सुनयना (चमची नंबर दो) को बाहर ले गईं। प्राव्लम ये थीं की वेलकम टेबल पर बहुत भीड़ हो गयी थी, साढ़े दस बजने वाला था और अर्ली ऑफर्स के चक्कर में ढेर सारी लेडीज एक साथ आ गयी थीं, उन्हें चेक भी करना था ( नो ब्रा, नो पैंटी और कैविटी सर्च भी), नाम लिस्ट करना था, तो वेलकम टीम के लिए मुसीबत हो गयी थी।

चमची नंबर २ ने एक टेबल खींच ली और वहां एक नई वेलकम डेस्क शुरू कर दी।

सुजाता ने मेहंदी वालियों में से एक को खींच के उस वेलकम डेस्क पर बैठा दिया, और कुछ कैटरिंग वालो से बात करके वहीँ पर एक वेटिंग एरिया सेट कर दी, और वहां एक मेंहदी वाली, एक मेकअप वाली उन लेडीज से मिल के ऑप्शन दिखा के डिस्कस कर रहे थे, सामने स्क्रीन पे मेंहदी के च्वायस चल रहे थे। कैटरिंग वालों से बात कर के उसी एरिया में वेलकम ड्रिंक सर्व कराने शुरू कर दिए और आज को भी नॉन अल्कोहोलिक ड्रिंक नहीं था, डाइट कोक में भी अच्छी खासी रम मिली थी और छोटे छोटे लड्डू थे, सब में भांग।
असल में इन लोगों ने इवेंट मैनेजर से बात करके चार होस्टेस लड़कियां बुलाई थीं जो ऑल पर्पज हेल्प करती, लेकिन उन्हें साढ़े दस बजे बुलाया गया था, क्योंकि पार्टी का टाइम ११ बजे था। वो लड़कियां भी खूब खूब सुन्दर, एयर होस्टेस की तरह और ट्रेडिशनल चुनरी लहंगे में, और नो ब्रा नो पैंटी का कोड उनके लिए भी था। पर ये क्राउड साढ़े दस के पहले ही आ गया।

सुजाता के साथ अब बच्ची पार्टी वाली सुनी (सुनीता) और मिसेज साहनी भी आ गईं।


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मेहन्दी वालियों का स्टाल अभी खाली पड़ा था, तो सुनी ने उनमे से कुछ को वेटिंग एरिया में ही मेंहदी का काम शुरू करने को बोल दिया। कैटरर्स अपना स्टाल सेट कर रहे थे, और आज ख़ास बात यह थी की सब लेडीज थीं, वेट्रेस, मेंहदी वालियां और बाकी, और सब चुनरी लहंगे में, हाँ कलर अलग अलग थे जैसे, मेंहदी वालियां हरे रंग की चुनरी ओढ़े थीं।

बार अभी सेट हो रहा था, और उस की जिम्मेदारी बच्ची पार्टी की बेबी, अन्नी की थी। वो अभी भी टीनेजर थी, छह महीने पहले ही शादी हुई थी और लंदन से उसने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया था। इण्डिया वो कपल चार महीने पहले ही लौटे थे और उसका भी भी उसी की तरह बेबी ब्वाय था, पर साइबर वर्ड में उसका दिमाग जबरदस्त चलता था। लेकिन अन्नी ने सुजाता को मेसेज दिया था कि वो थोड़ा लेट आएगी, पर पार्टी शुरू होने से पहले।

वेलकम टेबल की भीड़ कम हुई तो मेकअप एरिया में वेटिंग बढ़ गई, और लेडीज में फुसफुसाहट चालू हो गई। सुजाता ने उसी समय इवेंट मैनेजर और रेवलॉन वालों को भी फोन लगाया की वो भी एक काउंटर सेट कर लें और लक्मे से रिक्वेस्ट किया की दो घण्टे के लिए कुछ मेकअप वालियां और भेज दें।

बाकी सेटिंग भी एक बार चेक करनी थी, क्लब के ओपन एरिया में झूले का और रेन डांस का इंतजाम किया गया था। एक आम के पेड़ पर झूला लगा था। मिसेज साहनी और सुजाता ने चढ़कर भी चेक किया। वहीँ पर शाम को बार-बेक का भी इंतजाम था। एक छोटा सा डांस फ्लोर और कैरोके भी सेट हो रहा था।

मिसेज साहनी के ऊपर बाहर की जिम्मेदारी छोड़ कर, सुजाता सुनी के साथ अंदर हाल में गयी जहाँ मेन पार्टी होने वाली थी, स्टेज पर फोकस लाइट्स लगी थीं, और सुनी वहां चढ़कर स्टेज की सेटिंग, लाइट्स देखने लगी। पहले भी वो थियेटर में काम कर चुकी थी।

और अब सुजाता अकेले थी तो उसने वो सीक्रेट काम सेट किया जिसके बारे में बस तीन चार लोग जानते थे,।
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वीडियो रिकार्डिंग होनी थी, पर असली खेल था क्या रिकार्ड होना है कैसे ट्रांसमिट होना है।

रिर्कार्डिंग वाले से बात करके उसे सब समझा दिया और ज़ूम का एक लिंक दे दिया। जब सब कैमरे बंद होंगे तो भी चार कैमरे चलते रहेंगे और ज़ूम से ट्रांसमिट होंगे, लेकिन वो लिंक निधि का था।



मिसेज मोइत्रा की स्ट्रिपटीज तो मिसेज खन्ना को भी देखनी थी, और उन्हें ट्रांसमिट करती निधि, एक दो मिनट के डिलेड ट्रांसमिशन के साथ। निधि से सुजाता ने रिकार्डिंग वाले की बात भी करा दी।



जब तक सुजाता बाहर निकली, खूब रौनक हो गई थी। वो होस्टेस लड़कियाँ आ गई थीं और वेलकम डेस्क पर चमची नंबर २ और बेला के साथ थीं। वेलकम डेस्क ने सुजाता को बताया कि २४ लेडीज आ चुकी हैं। और कुछ रास्ते में हैं, बस अगले दस मिनट में आ जाएंगी ।



दस पैंतीस हो रहे थे, सुजाता ने कोमल को फोन लगाया की अब वो मिसेज मोइत्रा केघर के लिए निकल पड़े और उनको लेकर दस पचपन पर पहुँच जाए।
Wah live telecast
 
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