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Adultery खलिश

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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Veere Review ka intezaar karta to phir kahani band karni padti bc :lol1:kyonki mujhe pta hai mein kuch jayada khaas nhi likh rha :blush: .....mein na dekhta bhai review bas aaj shaam ko deta hoon :five:
Kahani sahi he likh ke lele :deal: Bas aage likhta reh
Abhi hum bhi free honge kuchh chhan me :bigboss: Fir likhenge
 

Sanju@

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Update 20



"मर गया या जिंदा है?"...... मयंक ने आराम से धीमी आवाज में राजीव को पूछा चूंकि दोनों पेड आमने-सामने थे जिनके पीछे वो चुपे हुए थे तो ये आवाज आराम से राजीव के कानों तक गई।





"इतनी जल्दी नहीं मरने वाला‌ में टेंशन मत ले तू अपना देख साले".... राजीव ने मयंक को सीरियस आवाज में जबाब दिया।





राजीव -"तूने बताया नहीं कि तू किस से बात कर रहा था".....





मयंक -"भाई परिस्थिति देख के बोला कर साले अभी ये भी नहीं पता की जिंदा बचेंगे या नहीं"





राजीव -"परिस्थिति गई मा चुदाने... बता रहा है या नहीं"




मयंक -"भाई बता दुंगा बस कुछ देर रुकजा यहां से निकलने दे फिर बताता हूं.......वो देख एक अपनी तरफ आ रहा है और उसके हाथ में बंदूक भी है गये काम से"




इतना सुनते ही राजीव ने पेड की ओट से निकल कर देखा तो एक आदमी दोनों हाथ से बंदूक पकडे आगे बड रहा था इतना देखते ही राजीव के चेहरे पर मुस्कान आ गई......और जैसे ही वो पास आया
राजीव ने एक पत्थर उठाया छोटा सा और मयंक जिस पैर (चोट जिसमें लगी थी) को सीधा करके बैठा था उसको निशाना बनाया और थोडा सा दम लगा के उस पैर में दिया ।





"आह्हहहह"....... मयंक की एक दबी सी चीज निकली जो ज्यादा दूर तो नहीं पर उस आदमी को भली-भांति सुनाई दी ये मयंक के लिए आश्चर्य करने वाला काम था वरना ये चीख भी ना निकलती पर अब क्या होता जैसे ही आदमी को आवाज सुनाई दी वो उस तरफ बड गया पेड को निशाना बनाकर।






वो आदमी पास आता जा रहा था और मयंक का दर्द बडता जा रहा था और जैसे ही आदमी मयंक वाले पेड की तरफ घूमा... पीछे से राजीव ने एक दम से छलांग लगाई और उसके मुंह को दबोच लिया जिससे आवाज ना निकले वो आदमी इस हमले से हाथ पैर चलाने लगा पर तब ही राजीव का हाथ चला और एक पेना लकडी का टुकडा उस आदमी की गर्दन में उतर गया वो टुकडा बहार निकला और एक बार फिर अंदर गुसा उस आदमी का शरीर बुरी तरह से फड़फड़ाने लगा और अगले ही पल उसका शरीर राजीव की पकड में झूल गया। पर इस सब में बाकी आदमियों में से दो का ध्यान इधर पड चुका था उन दोनों ने एक दूसरे को आंखों में इशारा किया और मयंक और राजीव की तरफ बड गये।






"लंगडे किसी काम तो आया तू हाहहा .....जब तक नहीं बतायेगा ऐसे ही मदद लुंगा तेरी "...... राजीव ने उस आदमी की दुनाली को खोलते हुए कहा दोनों छर्रे लगे हुऐ थे राजीव ने झटके से बंदूक को लगाया और मयंक के बगल से बैठते हुए एक बार उन दो आदमियों की तरफ देखा जो काफी पास आ चुके थे।






मयंक -"राजीव मेरे भाई यार मैंने मना थोडी की है बताने की और मुझे पता है तू ये सब जानने के लिए नहीं कर रहा बल्कि मैंने ये सब छुपाया इसलिए कर रहा है"





इतना सुनते ही राजीव ने एक बार मुस्कुराते हुए मयंक को देखाऔर आंख से इशारा किया अब देख ....





वो दोनों आदमी लगभग पेड के पास ही थे की तब ही उनमें से एक को मयंक का वो पैर दिख गया जो सीधा और दर्द की वजस से मयंक उसको मोड भी नहीं पा रहा था। और उस आदमी ने उस पर ही निशाना लगाया और ...औरर






"धांएएएएऐ"......उस छोटे से जंगल में दुनाली की भयंकर आवाज गूंज गयी।





ये गोली चलाई थी राजीव ने पर आश्चर्य वाली बात थी की गोली एक चली पर वो गुंडे दोनों घुटने बल धरती पर गिरे हुआ यूं की जैसे ही वो आदमी अपनी माउजर का एक राउंड फायर करने वाला था तब ही मयंक का पांव गायब हो गया और एक साथ राजीव और मयंक उस पेड के पीछे से निकले और मयंक ने वो लकडी का टुकडा निशाना बनाकर फेंका जो सीधा उस आदमी की गर्दन को फाडता हुआ आरपार हो गया और उधर दुनाली से राजीव ने दूसरे वाले के सर की चिथड़े उडाए। पर अब बाकी के छः लोग जान चके थे की मयंक और राजीव कहां है और जितने देर में वो लोग इधर आए उतनी देर में मयंक दूसरे वाले की दुनाली और राजीव उस माउसर पिस्टल को उठा चुका था।




"धांएएएएऐ..... धांएएएएऐ...... धांएएएएऐ".......एक के बाद एक दस बारह राउंड उस पेड पर फायर हुए पर एक भी बंदूक इतनी सक्षम नहीं थी की उस पेड के तना को चीर सके और पेड की ओट से वो दोनों निकले नहीं तो दोनों सही सलामत थे।





पर ये चूतिए लोग एक साथ ही अपनी बंदूकें खाली कर चुके थे। और जल्दी जल्दी गोलियां भरने लगे तब निकले मयंक और राजीव






"बोल क्या कहता है किधर मारू गोली माथे में या पोथे में"..... मयंक ने निशाना लगाते हुए पूछा





राजीव -"पापा ने क्या बोला था भूल गया माथे में....अगर माथे में छेद ना मिले तो डांट पड़ेगी "..... राजीव ने भी निशाना लगाते हुए कहा।





और एक साथ दो राउंड फायर होने की आवाज आई और दो आदमी खडे खडे ही स्वर्ग को प्रस्थान कर गये।





अभी राजीव और मयंक दूसरी गोली चलाते तब ही एक गुंडे का हाथ उठा जिसका निशाना मयंक था उसकी उंगली ट्रिगर को दबाने जा ही रही थी की तब ही .....





"डिछ्छ््छ"......एक साइलेंसर लगी पिस्टल चलने की आवाज आई और वो आदमी चीखने लगा उसकी बंदूक हाथ से दूर जाकर गिरी ।





और ये चलाने वाला कोई और नहीं अनिल था जो इन लोगों से 20 मीटर पीछे खडा था और उसके हाथ में थी M1911 जिसकी एक गोली चलने के बाद भी 7 बकी थी और आदमी बचे थे चार जिसमें बस तीन ही सही सलामत थे वो लोग कुछ बोल पाते उससे पहले मयंक और राजीव की बंदूके एक बार फिर चलीं और दो लोग और जमीन पर थे उनके सर की नशें गुच्छों में बहार निकल रही थीं।





एक वो हाथ में लगी गोली वाला और दूसरा वो आदमी था जो इन सब मुखिया मालुम पड रहा था वहीं जिंदा थे।






अनिल ने पास आकर उस गोली लगी आदमी के सर पर पांव रख कर फायर किये और ठीक जूते से एक इंच दूर वो तीन गोली जा घुसी और उसके माथे में एक सुरंग सी बन गई। पर तब ही उस आखरी आदमी ने अनिल के ऊपर बंदूक तानी ......जिस पर तीनों हसने लगे





"मादरचोद"...... अनिल एक दम से घुर्राया और ठीक उसके नाभी के नीचे गोली दाग दी और उस आदमी की चीख इतनी जोर की थी मानो चार कोस तक वो आवाज गई हो।





उसके बाद एक गोली उसके दिल पर तीसरी उसके माथे में।







***************



"अब बता ....देख अब मैं मारुंगा नहीं बताया तो"......अब राजीव और मयंक एक बार फिर अस्पताल के कमरे में थे और अनिल अभी भी वहां जंगल में उन लाशों को ठिकाने लगावा रहा था।





"लडकी से बात कर रहा था "....... मयंक ने लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।




"कौन लडकी"..... राजीव ने जगह से लगभग उछलते हुए कहा।





"बहन मेरी ..तेरी .....हम दोनों की बहन "....... मयंक ने राजीव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।





"मयंक मजाक मत कर और बहन के‌ नाम पर तो बिल्कुल नहीं जितना में जानता हूं विष्णु ताऊ के तू एक अकेला लडका और पापा के मैं और अपनी दीदी हैं......और इतना तो मैं जानता हूं ये बात दीदी की नहीं है साफ साफ बोल बात क्या है".......... राजीव ने मयंक की आंखों में आंख डालते हुए कहा।





मयंक -"ये बात तब की है जब तू अपने शहर से यहां इंदौर आ गया था ......






***************



"तो तू है रघु.......साले दो साल पहले मेरे से कट्टे खरीदता था और आज साले तू हमारे ही खिलाफ हो गया ......बताओ क्या जमाना है जिनको हम पाल रहे थे वही आज दो साल में हमारे सामने खडे हैं अब इसको क्या समझूं गुरु यानी मैं ज्यादा अच्छा था या तू मादरचोद था".........इस समय रघु बल्ली के घर में बंधा डला था और बल्ली उससे बाथ्त कर रहा था।




"बल्ली भइया मुझे नहीं पता था की आप एहलावत के साथ हो नहीं तो मैं कभी ये गलती नहीं करता "....... रघु ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा।





"कोई बात नहीं अब पता चल गया ना तो अब हमारे लिए शहीद होजा हाहा".......और इतना कहते ही बल्ली ने तलवार चलाई और रघु की गर्दन उसके शरीर से अलग हो गई दो पल उसका धड फडफडाया और अगले ही
पल वो शांत हो गया ड्राइवर को तो रास्ते में ही निपटा कर नल्ले में फेंक चुके थे बल्ली के आदमी।





वहीं बल्ली ने अपने आदमियों को उस फेक्ट्री पर भेज दिया था जो शहर से तीन किलोमीटर बहार बनी थी ।.....
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है राजीव ने मयंक को टारगेट करके गुंडों को मार दिया हॉस्पिटल आए सारे गुंडे और रघु स्वर्ग सिधार गए हैं अब ये मयंक की बहन का क्या चक्कर है कोन है और कैसे बनी ये ???!
 

Hell Strom

🦁
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Update - 21





"हां तो तू किस बहन की बात कर रहा था तू"....... राजीव के हाथ में दो जूस के ग्लास थे जिसमें से एक मुझे पकड़ाते हुए उसने पूछा।





मयंक -"भाई उसके लिए हमको उस समय में जाना होगा जब तू यहां इंदौर आ रहा था।"





राजीव -"तो अब का महुरत निकरेगो तब बतागो"




रीडर्स लोग बीच बीच में ये‌ खडी बोली आ जाती है उसके लिए माफी पर मैं इसको नहीं रोक सकता क्योंकि "Its in my blood ".... :whistle:





************




शाम का समय,
जगह - ******, मध्यप्रदेश।





"मिलने आ जाना तब तेरा मन हो किसी से पूछने की कतई जरूरत नहीं है समझा".......चाचा (अनिल) ने मुझे गले लगाते हुए कहा जो अभी पापा के यहां से आए थे और वो रात से ही उनके साथ थे। आज चाचा , चाची , दीदी और राजीव सब इंदौर सिफ्ट हो रहे थे।






वैसे तो चाचा का ट्रांसफर उनकी और मेरे पापा की मर्जी के खिलाफ कोई कर नहीं सकता था पर हुआ कुछ ये की कुछ दिन पहले बीहड जो की फोरेस्ट डिपार्टमेंट के अंडर आती है वहां से कुछ लोग अवैध मिट्टी का व्यापार कर रहे थे इतना भी ठीक था पर ये लोग इस हद तक बेकौफ हो गये थे की ज़िले में रोड दुर्घटना चरम पर पहुंच ग चुकी थी।






अब चूंकि चाचा डिविजनल आफिसर है तो उनको ही देखना था और इस को ध्यान रखते हुए चाचा ने इन लोगों की सेंध लगाने की सोची अब ये जो खनन करने वाले थे वो इतनी आसानी से कहां मानने वाले थे तो चाचा ने पहले इन सब को ट्रेक्टर की नंबर प्लेट से खोजने की सोची जिसमें बहुत हद तक सफल भी हुए पर उसका नतीजा ये हुआ अब की जिले के आधे से ज्यादा ट्रेक्टर या तो बिना नंबर के चलने लगे या फिर आधे नंबर लगी नंबर प्लेटों का प्रयोग होने लगा।






और ये होते ही रेत माफिया भी ज्यादा सक्रिय हो गया क्योंकि उनको भी ये तरीका खूब भा रहा था इसी कडी में चाचा ने एक रात योजना बनाई की जो बेरिकेट्स सरकार द्वारा भेजे गये है (2003 ka time hai isliye barricades ek dum nyi cheez thi us waqt )
उनको प्रयोग में लाया जाएगा और रोड के बीचोंबीच उनको रखकर माफिया को रोकने की योजना बनी और इसके साथ ही आरक्षकों (constable) को ये बताया की ट्रेक्टर धीमे होते ही उनपर पत्थर से हमला कर उनको रोका जाए और इसने बहुत हद तक माफिया को रोकने का काम किया पर इसका नतीजा ये हुआ की ट्रेक्टर का मालिक ड्राइवर के साथ मोटरसाइकिल पर अपने आदमियों को भेजने लगा जो बेकौफ पुलिस और वन विभाग पर फायरिंग कर जाते और इसी कडी में चाचा की टीम का एक साथी शहीद हो गया ।







जिसके बाद चाचा और पापा ने (वैसे तो पापा ये सरकारी मामलों से दूर ही रहते थे पर जहां बात चाचा की आती है तो ये चीजें पापा के लिए मायने नहीं रखती) इस अवैध माफिया को गैरकानूनी तरीके से खतम करने की सोची और इसी के चलते चाचा ने करीब 20‌ लोगों को धर दबोचा जिसमें चाचा को एक नई जानकारी मिली की ये सब कठपुतली है असल में चंबल के ये सब काम एक ही करवा रहा है खैर चाचा ने उन बीसों को बीहड में ले जाकर ठोक दिया जिससे माफिया तो एक दम से रुक गया पर एक साथ बीस लोगों का गायब होना काफी बडी बात थी जिसके चलते ना चाहते हुए भी एक टीम आई और छानबीन हुई पर पापा ने एक व्यक्ति को आगे बड कर गुनाह कुबूल करवा दिए जिससे चाचा बाइज्जत बरी हो गये पर उनका यहां रहना ठीक नहीं था क्योंकि उन बीस परिवारों से कैसे बचा जा सकता था वो लोग सामने से कुछ नहीं बोल सकते थे पापा और चाचा के रुतबे के चलते पर पीछे से या अकेले पाकर क्या कर जांए उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था और भले ही चाचा बरी हुए उस केस में पर केस बंद नहीं हुआ था और कभी भी पलट सकता था इसलिए पापा ने जबरन चाचा का ट्रांसफर करवा दिया।





मयंक -"हां चाचा बिलकुल आउंगा जब मन होगा तब "





और इसके साथ ही सब लोग गाडी में चढ चले गये। उसके बाद मैं एक बार फिर अकेला हो गया । क्योंकि बचपन से लेकर इस पल तक मुझे कभी ऐहसास नहीं हो रहा था। फिर एक दिन बलवीर सिंह का आना हुआ जिनके घर पर अखाडा था। और उन्होंने ही मुझे कहा की जब भी अकेला महसूस करो तो चले आया करो हमारे यहां...






बलवीर एक ऐसा व्यक्ति था जो पापा और चाचा के बाद हमारे यहां सबसे ज्यादा रसूक रखता था और ये पापा का दोस्त था पर कभी मैंने पापा को इसके साथ अनिल चाचा की तरह खुल कर बात करते नहीं देखा यही वो व्यक्ति था जिसके यहां से चंबल के सारे अवैध हथियार सप्लाई हुआ करते थे ।





एक दिन मैं यूं ही घर में बोर हो रहा था कि तब ही घर की लैंडलाइन बजी जब फोन उठाया तो बलवीर अंकल का ही फोन था उन्होंने मुझे घर बुलाया था अपने जब वहां पहुंचा तो अंकल ने बताया की उन्होंने हमारे और पडोस के गांव के बीच कब्बड्डी का मैच रखा हुआ है और इसी मैच के चलते मैं उनके आसपास रहा और अक्सर मेरा टाइम वहां गुजरने लगा ।





(जबसे मैंने बलवीर अंकल का जिक्र किया था तब से ही राजीव कुछ ज्यादा ध्यान से सुन रहा था)






कही बार तो उनको लड़कों के साथ मैं छोटे मोटे लफडों में भी चला जाया करता और पता नहीं क्यूं इन सब में मुझे बहुत मजा आने लगा था । ऐसा लगता था जैसे जो पावर है उसका सही इस्तेमाल करने लगा था जैसे मेरे सर पर एक अलग सा नशा चढ़ने लगा और कही बार मैं अंकल(बलवीर) के साथ बीहड में भी जाता था बागियों से मिलना और भी बहुत कुछ उनके साथ होता तो बापू ज्यादा कुछ कहते नहीं थे। अब जो भी बडी डील होती उसके लिए अंकल मुझे भेजने लगे थे ।







और एक दिन जब मैं उनके घर पहुंचा तो उनका फोन बजा और फोन पर बात करके उन्होंने मुझे कहा "मयंक एक काम है"





और इतना बोलते ही मैं शांत हो गया और उन पलों में खो गया कि तब ही ...





"क्या हुआ फिर ...बता साले रुक क्यूं गया"........ राजीव ने मुझे झिंझोड़ते हुए कहा।




"बता रहा हूं ना ...सुन . अभी मैं फिर बताना शुरु करता उससे पहले ही हमारे अस्पताल के कमरे का गेट खुला और वही नर्स अंदर आई ।






(ये जो पास्ट की कहानी है वो बहुत ही कम शब्दों में और सिर्फ उस लडकी पर ही केंद्रित है जो मयंक की बहन बनी बाकी राजीव के जाने के बाद से इंदौर में आने तक बहुत सी घटना हुई जिनका जिक्र जरुरत पड़ने पर होगा।")






"मैं आता हूं अभी"....... जैसे ही नर्स कमरे में आई राजीव कमरे से निकल लिया।





"मैंने सुना तुम पर यहां हमला हुआ.... कुछ लोग मारने आए थे".... नर्स ने एक बार फिर मेरी प्लस रेट चैक की।





"टेंशन मत लो ये अभी बड गई है पहले सही थी "........ जैसे ही उसने पल्स रेट चेक की तो धीरे से बडबडाई 98 ....





नर्स -"अच्छा अभी ऐसा क्या हुआ जो ये बड गई"..... उसने हल्का सा हस्ते हुए कहा।




मयंक -"वो खूबसूरत लड़कियों के टच में जादू होता है"




"फ्लर्ट कर रहे हो मिस्टर"........उसने मुस्कान के साथ आंखें दिखाता हुए पूछा।





मयंक -"हां शायद ...पर आप यहां क्या कर रही है वो समझ नहीं आया "




नर्स -"क्या मतलब यहां क्या कर रही हूं नर्स हूं तो यही होंगी ना"




मयंक -"तो आप नर्स क्यूं है इतनी हाॅट चिक्स अस्पताल में नहीं होनी चाहिए "




इस घटिया फ्लर्ट पर भी नर्स बराबर लाईन दे रही थी तब ही तो कहते हैं लडका पसंद हो तो लडकी को कुछ बुरा नहीं लगता उसका और जो ना पसंद हो तो अच्छे भले लडके में सौ कमी निकाल दें।





"उस रात तुम मुझे क्यूं ढूंढ रहे थे"...... उसने बात बदलते हुए कहा।





"बस ऐसे ही आपने बताया होता तो टूटे पैर के साथ नीचे ना जाना पडता "........





"और इतनी क्या मजबूरी जो टूटे पैर के साथ एक अंजान को ढूंढने चल पडे आप हूं?"......... उसने आंख नचाते हुए कहा।





"मैंने सुना है लड़कियां ज्यादा समझदार होती है लड़कों से मुझे लगता है आपको समझ जाना चाहिए वैसे अबतक "..





इस बात पर वो मुस्कुरा दी और बोली ...."रात नौ बजे के बाद केविन में ही रहने वाली हूं मैं बाकी की बांते वहीं करेंगे सी यू सून" और हस्ती हुई कमरे से निकल गई।





****************




"क्यूं तू तो बडी शान से गया था ना की विष्णु को पकड लेगा ...मेरे कदमों में डाल देगा अब क्या हुआ ".......दद्दा ने कल्लू का मजाक बनाते हुए उससे पूछा।





कल्लू -"दद्दा वो जानवर है पूरा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था की वो ऐसा कुछ करेगा हमारे साथ जो मैने देखा ना उस दिन अभी भी आंखों के सामने पिक्चर जैसे चल रहा है "





दद्दा -"ऐसा क्या देख लिया तूने भला "..... दद्दा ने हसते हुए कहा।





"जब एक इंसान को मारने दस लोग आते हैं तो इंसान के पांव पीछे होते हैं दद्दा पर वो जानवर ही है जो दस आदमियों को देखकर उसकी आंखों में चमक देखी मैंने प्यास देखी जैसे किसी शेर को बडे दिनों बाद शिकार मिला हो "....... कल्लू ने उस मंजर को याद करते हुए कहा।





"अच्छा और ".......





कल्लू -"वो इंसान नहीं है दद्दा जब उसके हाथ रुके तो वहां का मंजर कुछ ऐसा था की मामूली इंसान का दम घुट जाता उसके दिल में रहम नहीं है बिल्कुल रहम नहीं आंते तक काट गई उसकी तलवार पर वो नहीं रुका और मुझे भी ये कहकर छोड दिया कि मैने भाईसा बोला इसलिए छोड रहा है "





"हाहा ऐसा कुछ नहीं है पागल उसने तुझे इसलिए छोडा क्यूं की तुझे मारने का मन नहीं था उसका ........और रही बात बेरहमी की तो तू अभी उसके लडके को नहीं जानता "





"उसका लडका विष्णु से भी खतरनाक है क्या "........ कल्लू ने किसी छोटे बच्चे की तरह पूछा ।






"बस ये मान ले की जो तूने देखा वो मयंक के लिए इंसानियत है "......दद्दा ने कुछ याद करते हुए कहा।





"आप कैसे मिले उससे दद्दा "...... कल्लू ने एक बार फिर सवाल किया।





"बलवीर लाया था उसको मेरे यहां तब ही मिला था उससे मुझसे भी एक हाथ लंबा और शरीर में तुझसे भी दुगना "......दद्दा ने कल्लू के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।





कल्लू- "वैसे दद्दा आपने विष्णु का क्या सोचा है कैसे हराना है इसको "






"तू गया तो था फिर हराया क्यूं नहीं उसको हाहा "....... दद्दा ने एक बार फिर कल्लू का मजाक बनाया।
 
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