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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

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Aaj raat 10 bje tak deta hoon bhaiUpdate dio re

intezaar rahega.....Aaj raat 10 bje tak deta hoon bhai![]()
Nice update....
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update.....
Bahut hi mazedar update
Story line aage ja to Rahi he fir thoda artificial sa laage he
Maybe Mera vehem ho
Nice and superb update.....
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है
अनिल ने मयंक और राजीव को गुंडों के बारे में बता दिया है लेकिन उनके सावधान होने से पहले ही वहा गुंडे आ गए दोनो जंगल की तरफ भाग गए हैं देखते हैं अनिल कितनी देर में पहुंचता है वही बल्ली ने रघु को पकड़ लिया है रघु का तो खेल खत्म होने वाला है अब तो हॉस्पिटल वाली फाइट का इंतजार है
Update 20
![]()
Nice update.....
Thrilling update. Pratiksha agle rasprad update ki
Nice update
Update dio re
Update posted guyss ....i know thoda chota hai par do din phele ground se paseene se bheega sardi mein bike par gaon aya is wajah se bhayank sardi jukhaam ho gaya hai isliye man nhi ho rha likhne ka yhi wajah thi late hone ki agla update bda hoga or jaldi bhi aayega ... Thanksintezaar rahega.....
Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....Update 20
"मर गया या जिंदा है?"...... मयंक ने आराम से धीमी आवाज में राजीव को पूछा चूंकि दोनों पेड आमने-सामने थे जिनके पीछे वो चुपे हुए थे तो ये आवाज आराम से राजीव के कानों तक गई।
"इतनी जल्दी नहीं मरने वाला में टेंशन मत ले तू अपना देख साले".... राजीव ने मयंक को सीरियस आवाज में जबाब दिया।
राजीव -"तूने बताया नहीं कि तू किस से बात कर रहा था".....
मयंक -"भाई परिस्थिति देख के बोला कर साले अभी ये भी नहीं पता की जिंदा बचेंगे या नहीं"
राजीव -"परिस्थिति गई मा चुदाने... बता रहा है या नहीं"
मयंक -"भाई बता दुंगा बस कुछ देर रुकजा यहां से निकलने दे फिर बताता हूं.......वो देख एक अपनी तरफ आ रहा है और उसके हाथ में बंदूक भी है गये काम से"
इतना सुनते ही राजीव ने पेड की ओट से निकल कर देखा तो एक आदमी दोनों हाथ से बंदूक पकडे आगे बड रहा था इतना देखते ही राजीव के चेहरे पर मुस्कान आ गई......और जैसे ही वो पास आया राजीव ने एक पत्थर उठाया छोटा सा और मयंक जिस पैर (चोट जिसमें लगी थी) को सीधा करके बैठा था उसको निशाना बनाया और थोडा सा दम लगा के उस पैर में दिया ।
"आह्हहहह"....... मयंक की एक दबी सी चीज निकली जो ज्यादा दूर तो नहीं पर उस आदमी को भली-भांति सुनाई दी ये मयंक के लिए आश्चर्य करने वाला काम था वरना ये चीख भी ना निकलती पर अब क्या होता जैसे ही आदमी को आवाज सुनाई दी वो उस तरफ बड गया पेड को निशाना बनाकर।
वो आदमी पास आता जा रहा था और मयंक का दर्द बडता जा रहा था और जैसे ही आदमी मयंक वाले पेड की तरफ घूमा... पीछे से राजीव ने एक दम से छलांग लगाई और उसके मुंह को दबोच लिया जिससे आवाज ना निकले वो आदमी इस हमले से हाथ पैर चलाने लगा पर तब ही राजीव का हाथ चला और एक पेना लकडी का टुकडा उस आदमी की गर्दन में उतर गया वो टुकडा बहार निकला और एक बार फिर अंदर गुसा उस आदमी का शरीर बुरी तरह से फड़फड़ाने लगा और अगले ही पल उसका शरीर राजीव की पकड में झूल गया। पर इस सब में बाकी आदमियों में से दो का ध्यान इधर पड चुका था उन दोनों ने एक दूसरे को आंखों में इशारा किया और मयंक और राजीव की तरफ बड गये।
"लंगडे किसी काम तो आया तू हाहहा .....जब तक नहीं बतायेगा ऐसे ही मदद लुंगा तेरी "...... राजीव ने उस आदमी की दुनाली को खोलते हुए कहा दोनों छर्रे लगे हुऐ थे राजीव ने झटके से बंदूक को लगाया और मयंक के बगल से बैठते हुए एक बार उन दो आदमियों की तरफ देखा जो काफी पास आ चुके थे।
मयंक -"राजीव मेरे भाई यार मैंने मना थोडी की है बताने की और मुझे पता है तू ये सब जानने के लिए नहीं कर रहा बल्कि मैंने ये सब छुपाया इसलिए कर रहा है"
इतना सुनते ही राजीव ने एक बार मुस्कुराते हुए मयंक को देखाऔर आंख से इशारा किया अब देख ....
वो दोनों आदमी लगभग पेड के पास ही थे की तब ही उनमें से एक को मयंक का वो पैर दिख गया जो सीधा और दर्द की वजस से मयंक उसको मोड भी नहीं पा रहा था। और उस आदमी ने उस पर ही निशाना लगाया और ...औरर
"धांएएएएऐ"......उस छोटे से जंगल में दुनाली की भयंकर आवाज गूंज गयी।
ये गोली चलाई थी राजीव ने पर आश्चर्य वाली बात थी की गोली एक चली पर वो गुंडे दोनों घुटने बल धरती पर गिरे हुआ यूं की जैसे ही वो आदमी अपनी माउजर का एक राउंड फायर करने वाला था तब ही मयंक का पांव गायब हो गया और एक साथ राजीव और मयंक उस पेड के पीछे से निकले और मयंक ने वो लकडी का टुकडा निशाना बनाकर फेंका जो सीधा उस आदमी की गर्दन को फाडता हुआ आरपार हो गया और उधर दुनाली से राजीव ने दूसरे वाले के सर की चिथड़े उडाए। पर अब बाकी के छः लोग जान चके थे की मयंक और राजीव कहां है और जितने देर में वो लोग इधर आए उतनी देर में मयंक दूसरे वाले की दुनाली और राजीव उस माउसर पिस्टल को उठा चुका था।
"धांएएएएऐ..... धांएएएएऐ...... धांएएएएऐ".......एक के बाद एक दस बारह राउंड उस पेड पर फायर हुए पर एक भी बंदूक इतनी सक्षम नहीं थी की उस पेड के तना को चीर सके और पेड की ओट से वो दोनों निकले नहीं तो दोनों सही सलामत थे।
पर ये चूतिए लोग एक साथ ही अपनी बंदूकें खाली कर चुके थे। और जल्दी जल्दी गोलियां भरने लगे तब निकले मयंक और राजीव
"बोल क्या कहता है किधर मारू गोली माथे में या पोथे में"..... मयंक ने निशाना लगाते हुए पूछा
राजीव -"पापा ने क्या बोला था भूल गया माथे में....अगर माथे में छेद ना मिले तो डांट पड़ेगी "..... राजीव ने भी निशाना लगाते हुए कहा।
और एक साथ दो राउंड फायर होने की आवाज आई और दो आदमी खडे खडे ही स्वर्ग को प्रस्थान कर गये।
अभी राजीव और मयंक दूसरी गोली चलाते तब ही एक गुंडे का हाथ उठा जिसका निशाना मयंक था उसकी उंगली ट्रिगर को दबाने जा ही रही थी की तब ही .....
"डिछ्छ््छ"......एक साइलेंसर लगी पिस्टल चलने की आवाज आई और वो आदमी चीखने लगा उसकी बंदूक हाथ से दूर जाकर गिरी ।
और ये चलाने वाला कोई और नहीं अनिल था जो इन लोगों से 20 मीटर पीछे खडा था और उसके हाथ में थी M1911 जिसकी एक गोली चलने के बाद भी 7 बकी थी और आदमी बचे थे चार जिसमें बस तीन ही सही सलामत थे वो लोग कुछ बोल पाते उससे पहले मयंक और राजीव की बंदूके एक बार फिर चलीं और दो लोग और जमीन पर थे उनके सर की नशें गुच्छों में बहार निकल रही थीं।
एक वो हाथ में लगी गोली वाला और दूसरा वो आदमी था जो इन सब मुखिया मालुम पड रहा था वहीं जिंदा थे।
अनिल ने पास आकर उस गोली लगी आदमी के सर पर पांव रख कर फायर किये और ठीक जूते से एक इंच दूर वो तीन गोली जा घुसी और उसके माथे में एक सुरंग सी बन गई। पर तब ही उस आखरी आदमी ने अनिल के ऊपर बंदूक तानी ......जिस पर तीनों हसने लगे
"मादरचोद"...... अनिल एक दम से घुर्राया और ठीक उसके नाभी के नीचे गोली दाग दी और उस आदमी की चीख इतनी जोर की थी मानो चार कोस तक वो आवाज गई हो।
उसके बाद एक गोली उसके दिल पर तीसरी उसके माथे में।
***************
"अब बता ....देख अब मैं मारुंगा नहीं बताया तो"......अब राजीव और मयंक एक बार फिर अस्पताल के कमरे में थे और अनिल अभी भी वहां जंगल में उन लाशों को ठिकाने लगावा रहा था।
"लडकी से बात कर रहा था "....... मयंक ने लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।
"कौन लडकी"..... राजीव ने जगह से लगभग उछलते हुए कहा।
"बहन मेरी ..तेरी .....हम दोनों की बहन "....... मयंक ने राजीव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
"मयंक मजाक मत कर और बहन के नाम पर तो बिल्कुल नहीं जितना में जानता हूं विष्णु ताऊ के तू एक अकेला लडका और पापा के मैं और अपनी दीदी हैं......और इतना तो मैं जानता हूं ये बात दीदी की नहीं है साफ साफ बोल बात क्या है".......... राजीव ने मयंक की आंखों में आंख डालते हुए कहा।
मयंक -"ये बात तब की है जब तू अपने शहर से यहां इंदौर आ गया था ......
***************
"तो तू है रघु.......साले दो साल पहले मेरे से कट्टे खरीदता था और आज साले तू हमारे ही खिलाफ हो गया ......बताओ क्या जमाना है जिनको हम पाल रहे थे वही आज दो साल में हमारे सामने खडे हैं अब इसको क्या समझूं गुरु यानी मैं ज्यादा अच्छा था या तू मादरचोद था".........इस समय रघु बल्ली के घर में बंधा डला था और बल्ली उससे बाथ्त कर रहा था।
"बल्ली भइया मुझे नहीं पता था की आप एहलावत के साथ हो नहीं तो मैं कभी ये गलती नहीं करता "....... रघु ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा।
"कोई बात नहीं अब पता चल गया ना तो अब हमारे लिए शहीद होजा हाहा".......और इतना कहते ही बल्ली ने तलवार चलाई और रघु की गर्दन उसके शरीर से अलग हो गई दो पल उसका धड फडफडाया और अगले हीपल वो शांत हो गया ड्राइवर को तो रास्ते में ही निपटा कर नल्ले में फेंक चुके थे बल्ली के आदमी।
वहीं बल्ली ने अपने आदमियों को उस फेक्ट्री पर भेज दिया था जो शहर से तीन किलोमीटर बहार बनी थी ।.....
Bohot khub Bhai saUpdate 20
"मर गया या जिंदा है?"...... मयंक ने आराम से धीमी आवाज में राजीव को पूछा चूंकि दोनों पेड आमने-सामने थे जिनके पीछे वो चुपे हुए थे तो ये आवाज आराम से राजीव के कानों तक गई।
"इतनी जल्दी नहीं मरने वाला में टेंशन मत ले तू अपना देख साले".... राजीव ने मयंक को सीरियस आवाज में जबाब दिया।
राजीव -"तूने बताया नहीं कि तू किस से बात कर रहा था".....
मयंक -"भाई परिस्थिति देख के बोला कर साले अभी ये भी नहीं पता की जिंदा बचेंगे या नहीं"
राजीव -"परिस्थिति गई मा चुदाने... बता रहा है या नहीं"
मयंक -"भाई बता दुंगा बस कुछ देर रुकजा यहां से निकलने दे फिर बताता हूं.......वो देख एक अपनी तरफ आ रहा है और उसके हाथ में बंदूक भी है गये काम से"
इतना सुनते ही राजीव ने पेड की ओट से निकल कर देखा तो एक आदमी दोनों हाथ से बंदूक पकडे आगे बड रहा था इतना देखते ही राजीव के चेहरे पर मुस्कान आ गई......और जैसे ही वो पास आया राजीव ने एक पत्थर उठाया छोटा सा और मयंक जिस पैर (चोट जिसमें लगी थी) को सीधा करके बैठा था उसको निशाना बनाया और थोडा सा दम लगा के उस पैर में दिया ।
"आह्हहहह"....... मयंक की एक दबी सी चीज निकली जो ज्यादा दूर तो नहीं पर उस आदमी को भली-भांति सुनाई दी ये मयंक के लिए आश्चर्य करने वाला काम था वरना ये चीख भी ना निकलती पर अब क्या होता जैसे ही आदमी को आवाज सुनाई दी वो उस तरफ बड गया पेड को निशाना बनाकर।
वो आदमी पास आता जा रहा था और मयंक का दर्द बडता जा रहा था और जैसे ही आदमी मयंक वाले पेड की तरफ घूमा... पीछे से राजीव ने एक दम से छलांग लगाई और उसके मुंह को दबोच लिया जिससे आवाज ना निकले वो आदमी इस हमले से हाथ पैर चलाने लगा पर तब ही राजीव का हाथ चला और एक पेना लकडी का टुकडा उस आदमी की गर्दन में उतर गया वो टुकडा बहार निकला और एक बार फिर अंदर गुसा उस आदमी का शरीर बुरी तरह से फड़फड़ाने लगा और अगले ही पल उसका शरीर राजीव की पकड में झूल गया। पर इस सब में बाकी आदमियों में से दो का ध्यान इधर पड चुका था उन दोनों ने एक दूसरे को आंखों में इशारा किया और मयंक और राजीव की तरफ बड गये।
"लंगडे किसी काम तो आया तू हाहहा .....जब तक नहीं बतायेगा ऐसे ही मदद लुंगा तेरी "...... राजीव ने उस आदमी की दुनाली को खोलते हुए कहा दोनों छर्रे लगे हुऐ थे राजीव ने झटके से बंदूक को लगाया और मयंक के बगल से बैठते हुए एक बार उन दो आदमियों की तरफ देखा जो काफी पास आ चुके थे।
मयंक -"राजीव मेरे भाई यार मैंने मना थोडी की है बताने की और मुझे पता है तू ये सब जानने के लिए नहीं कर रहा बल्कि मैंने ये सब छुपाया इसलिए कर रहा है"
इतना सुनते ही राजीव ने एक बार मुस्कुराते हुए मयंक को देखाऔर आंख से इशारा किया अब देख ....
वो दोनों आदमी लगभग पेड के पास ही थे की तब ही उनमें से एक को मयंक का वो पैर दिख गया जो सीधा और दर्द की वजस से मयंक उसको मोड भी नहीं पा रहा था। और उस आदमी ने उस पर ही निशाना लगाया और ...औरर
"धांएएएएऐ"......उस छोटे से जंगल में दुनाली की भयंकर आवाज गूंज गयी।
ये गोली चलाई थी राजीव ने पर आश्चर्य वाली बात थी की गोली एक चली पर वो गुंडे दोनों घुटने बल धरती पर गिरे हुआ यूं की जैसे ही वो आदमी अपनी माउजर का एक राउंड फायर करने वाला था तब ही मयंक का पांव गायब हो गया और एक साथ राजीव और मयंक उस पेड के पीछे से निकले और मयंक ने वो लकडी का टुकडा निशाना बनाकर फेंका जो सीधा उस आदमी की गर्दन को फाडता हुआ आरपार हो गया और उधर दुनाली से राजीव ने दूसरे वाले के सर की चिथड़े उडाए। पर अब बाकी के छः लोग जान चके थे की मयंक और राजीव कहां है और जितने देर में वो लोग इधर आए उतनी देर में मयंक दूसरे वाले की दुनाली और राजीव उस माउसर पिस्टल को उठा चुका था।
"धांएएएएऐ..... धांएएएएऐ...... धांएएएएऐ".......एक के बाद एक दस बारह राउंड उस पेड पर फायर हुए पर एक भी बंदूक इतनी सक्षम नहीं थी की उस पेड के तना को चीर सके और पेड की ओट से वो दोनों निकले नहीं तो दोनों सही सलामत थे।
पर ये चूतिए लोग एक साथ ही अपनी बंदूकें खाली कर चुके थे। और जल्दी जल्दी गोलियां भरने लगे तब निकले मयंक और राजीव
"बोल क्या कहता है किधर मारू गोली माथे में या पोथे में"..... मयंक ने निशाना लगाते हुए पूछा
राजीव -"पापा ने क्या बोला था भूल गया माथे में....अगर माथे में छेद ना मिले तो डांट पड़ेगी "..... राजीव ने भी निशाना लगाते हुए कहा।
और एक साथ दो राउंड फायर होने की आवाज आई और दो आदमी खडे खडे ही स्वर्ग को प्रस्थान कर गये।
अभी राजीव और मयंक दूसरी गोली चलाते तब ही एक गुंडे का हाथ उठा जिसका निशाना मयंक था उसकी उंगली ट्रिगर को दबाने जा ही रही थी की तब ही .....
"डिछ्छ््छ"......एक साइलेंसर लगी पिस्टल चलने की आवाज आई और वो आदमी चीखने लगा उसकी बंदूक हाथ से दूर जाकर गिरी ।
और ये चलाने वाला कोई और नहीं अनिल था जो इन लोगों से 20 मीटर पीछे खडा था और उसके हाथ में थी M1911 जिसकी एक गोली चलने के बाद भी 7 बकी थी और आदमी बचे थे चार जिसमें बस तीन ही सही सलामत थे वो लोग कुछ बोल पाते उससे पहले मयंक और राजीव की बंदूके एक बार फिर चलीं और दो लोग और जमीन पर थे उनके सर की नशें गुच्छों में बहार निकल रही थीं।
एक वो हाथ में लगी गोली वाला और दूसरा वो आदमी था जो इन सब मुखिया मालुम पड रहा था वहीं जिंदा थे।
अनिल ने पास आकर उस गोली लगी आदमी के सर पर पांव रख कर फायर किये और ठीक जूते से एक इंच दूर वो तीन गोली जा घुसी और उसके माथे में एक सुरंग सी बन गई। पर तब ही उस आखरी आदमी ने अनिल के ऊपर बंदूक तानी ......जिस पर तीनों हसने लगे
"मादरचोद"...... अनिल एक दम से घुर्राया और ठीक उसके नाभी के नीचे गोली दाग दी और उस आदमी की चीख इतनी जोर की थी मानो चार कोस तक वो आवाज गई हो।
उसके बाद एक गोली उसके दिल पर तीसरी उसके माथे में।
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"अब बता ....देख अब मैं मारुंगा नहीं बताया तो"......अब राजीव और मयंक एक बार फिर अस्पताल के कमरे में थे और अनिल अभी भी वहां जंगल में उन लाशों को ठिकाने लगावा रहा था।
"लडकी से बात कर रहा था "....... मयंक ने लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।
"कौन लडकी"..... राजीव ने जगह से लगभग उछलते हुए कहा।
"बहन मेरी ..तेरी .....हम दोनों की बहन "....... मयंक ने राजीव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
"मयंक मजाक मत कर और बहन के नाम पर तो बिल्कुल नहीं जितना में जानता हूं विष्णु ताऊ के तू एक अकेला लडका और पापा के मैं और अपनी दीदी हैं......और इतना तो मैं जानता हूं ये बात दीदी की नहीं है साफ साफ बोल बात क्या है".......... राजीव ने मयंक की आंखों में आंख डालते हुए कहा।
मयंक -"ये बात तब की है जब तू अपने शहर से यहां इंदौर आ गया था ......
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"तो तू है रघु.......साले दो साल पहले मेरे से कट्टे खरीदता था और आज साले तू हमारे ही खिलाफ हो गया ......बताओ क्या जमाना है जिनको हम पाल रहे थे वही आज दो साल में हमारे सामने खडे हैं अब इसको क्या समझूं गुरु यानी मैं ज्यादा अच्छा था या तू मादरचोद था".........इस समय रघु बल्ली के घर में बंधा डला था और बल्ली उससे बाथ्त कर रहा था।
"बल्ली भइया मुझे नहीं पता था की आप एहलावत के साथ हो नहीं तो मैं कभी ये गलती नहीं करता "....... रघु ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा।
"कोई बात नहीं अब पता चल गया ना तो अब हमारे लिए शहीद होजा हाहा".......और इतना कहते ही बल्ली ने तलवार चलाई और रघु की गर्दन उसके शरीर से अलग हो गई दो पल उसका धड फडफडाया और अगले हीपल वो शांत हो गया ड्राइवर को तो रास्ते में ही निपटा कर नल्ले में फेंक चुके थे बल्ली के आदमी।
वहीं बल्ली ने अपने आदमियों को उस फेक्ट्री पर भेज दिया था जो शहर से तीन किलोमीटर बहार बनी थी ।.....

Nice and superb update.....Update 20
"मर गया या जिंदा है?"...... मयंक ने आराम से धीमी आवाज में राजीव को पूछा चूंकि दोनों पेड आमने-सामने थे जिनके पीछे वो चुपे हुए थे तो ये आवाज आराम से राजीव के कानों तक गई।
"इतनी जल्दी नहीं मरने वाला में टेंशन मत ले तू अपना देख साले".... राजीव ने मयंक को सीरियस आवाज में जबाब दिया।
राजीव -"तूने बताया नहीं कि तू किस से बात कर रहा था".....
मयंक -"भाई परिस्थिति देख के बोला कर साले अभी ये भी नहीं पता की जिंदा बचेंगे या नहीं"
राजीव -"परिस्थिति गई मा चुदाने... बता रहा है या नहीं"
मयंक -"भाई बता दुंगा बस कुछ देर रुकजा यहां से निकलने दे फिर बताता हूं.......वो देख एक अपनी तरफ आ रहा है और उसके हाथ में बंदूक भी है गये काम से"
इतना सुनते ही राजीव ने पेड की ओट से निकल कर देखा तो एक आदमी दोनों हाथ से बंदूक पकडे आगे बड रहा था इतना देखते ही राजीव के चेहरे पर मुस्कान आ गई......और जैसे ही वो पास आया राजीव ने एक पत्थर उठाया छोटा सा और मयंक जिस पैर (चोट जिसमें लगी थी) को सीधा करके बैठा था उसको निशाना बनाया और थोडा सा दम लगा के उस पैर में दिया ।
"आह्हहहह"....... मयंक की एक दबी सी चीज निकली जो ज्यादा दूर तो नहीं पर उस आदमी को भली-भांति सुनाई दी ये मयंक के लिए आश्चर्य करने वाला काम था वरना ये चीख भी ना निकलती पर अब क्या होता जैसे ही आदमी को आवाज सुनाई दी वो उस तरफ बड गया पेड को निशाना बनाकर।
वो आदमी पास आता जा रहा था और मयंक का दर्द बडता जा रहा था और जैसे ही आदमी मयंक वाले पेड की तरफ घूमा... पीछे से राजीव ने एक दम से छलांग लगाई और उसके मुंह को दबोच लिया जिससे आवाज ना निकले वो आदमी इस हमले से हाथ पैर चलाने लगा पर तब ही राजीव का हाथ चला और एक पेना लकडी का टुकडा उस आदमी की गर्दन में उतर गया वो टुकडा बहार निकला और एक बार फिर अंदर गुसा उस आदमी का शरीर बुरी तरह से फड़फड़ाने लगा और अगले ही पल उसका शरीर राजीव की पकड में झूल गया। पर इस सब में बाकी आदमियों में से दो का ध्यान इधर पड चुका था उन दोनों ने एक दूसरे को आंखों में इशारा किया और मयंक और राजीव की तरफ बड गये।
"लंगडे किसी काम तो आया तू हाहहा .....जब तक नहीं बतायेगा ऐसे ही मदद लुंगा तेरी "...... राजीव ने उस आदमी की दुनाली को खोलते हुए कहा दोनों छर्रे लगे हुऐ थे राजीव ने झटके से बंदूक को लगाया और मयंक के बगल से बैठते हुए एक बार उन दो आदमियों की तरफ देखा जो काफी पास आ चुके थे।
मयंक -"राजीव मेरे भाई यार मैंने मना थोडी की है बताने की और मुझे पता है तू ये सब जानने के लिए नहीं कर रहा बल्कि मैंने ये सब छुपाया इसलिए कर रहा है"
इतना सुनते ही राजीव ने एक बार मुस्कुराते हुए मयंक को देखाऔर आंख से इशारा किया अब देख ....
वो दोनों आदमी लगभग पेड के पास ही थे की तब ही उनमें से एक को मयंक का वो पैर दिख गया जो सीधा और दर्द की वजस से मयंक उसको मोड भी नहीं पा रहा था। और उस आदमी ने उस पर ही निशाना लगाया और ...औरर
"धांएएएएऐ"......उस छोटे से जंगल में दुनाली की भयंकर आवाज गूंज गयी।
ये गोली चलाई थी राजीव ने पर आश्चर्य वाली बात थी की गोली एक चली पर वो गुंडे दोनों घुटने बल धरती पर गिरे हुआ यूं की जैसे ही वो आदमी अपनी माउजर का एक राउंड फायर करने वाला था तब ही मयंक का पांव गायब हो गया और एक साथ राजीव और मयंक उस पेड के पीछे से निकले और मयंक ने वो लकडी का टुकडा निशाना बनाकर फेंका जो सीधा उस आदमी की गर्दन को फाडता हुआ आरपार हो गया और उधर दुनाली से राजीव ने दूसरे वाले के सर की चिथड़े उडाए। पर अब बाकी के छः लोग जान चके थे की मयंक और राजीव कहां है और जितने देर में वो लोग इधर आए उतनी देर में मयंक दूसरे वाले की दुनाली और राजीव उस माउसर पिस्टल को उठा चुका था।
"धांएएएएऐ..... धांएएएएऐ...... धांएएएएऐ".......एक के बाद एक दस बारह राउंड उस पेड पर फायर हुए पर एक भी बंदूक इतनी सक्षम नहीं थी की उस पेड के तना को चीर सके और पेड की ओट से वो दोनों निकले नहीं तो दोनों सही सलामत थे।
पर ये चूतिए लोग एक साथ ही अपनी बंदूकें खाली कर चुके थे। और जल्दी जल्दी गोलियां भरने लगे तब निकले मयंक और राजीव
"बोल क्या कहता है किधर मारू गोली माथे में या पोथे में"..... मयंक ने निशाना लगाते हुए पूछा
राजीव -"पापा ने क्या बोला था भूल गया माथे में....अगर माथे में छेद ना मिले तो डांट पड़ेगी "..... राजीव ने भी निशाना लगाते हुए कहा।
और एक साथ दो राउंड फायर होने की आवाज आई और दो आदमी खडे खडे ही स्वर्ग को प्रस्थान कर गये।
अभी राजीव और मयंक दूसरी गोली चलाते तब ही एक गुंडे का हाथ उठा जिसका निशाना मयंक था उसकी उंगली ट्रिगर को दबाने जा ही रही थी की तब ही .....
"डिछ्छ््छ"......एक साइलेंसर लगी पिस्टल चलने की आवाज आई और वो आदमी चीखने लगा उसकी बंदूक हाथ से दूर जाकर गिरी ।
और ये चलाने वाला कोई और नहीं अनिल था जो इन लोगों से 20 मीटर पीछे खडा था और उसके हाथ में थी M1911 जिसकी एक गोली चलने के बाद भी 7 बकी थी और आदमी बचे थे चार जिसमें बस तीन ही सही सलामत थे वो लोग कुछ बोल पाते उससे पहले मयंक और राजीव की बंदूके एक बार फिर चलीं और दो लोग और जमीन पर थे उनके सर की नशें गुच्छों में बहार निकल रही थीं।
एक वो हाथ में लगी गोली वाला और दूसरा वो आदमी था जो इन सब मुखिया मालुम पड रहा था वहीं जिंदा थे।
अनिल ने पास आकर उस गोली लगी आदमी के सर पर पांव रख कर फायर किये और ठीक जूते से एक इंच दूर वो तीन गोली जा घुसी और उसके माथे में एक सुरंग सी बन गई। पर तब ही उस आखरी आदमी ने अनिल के ऊपर बंदूक तानी ......जिस पर तीनों हसने लगे
"मादरचोद"...... अनिल एक दम से घुर्राया और ठीक उसके नाभी के नीचे गोली दाग दी और उस आदमी की चीख इतनी जोर की थी मानो चार कोस तक वो आवाज गई हो।
उसके बाद एक गोली उसके दिल पर तीसरी उसके माथे में।
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"अब बता ....देख अब मैं मारुंगा नहीं बताया तो"......अब राजीव और मयंक एक बार फिर अस्पताल के कमरे में थे और अनिल अभी भी वहां जंगल में उन लाशों को ठिकाने लगावा रहा था।
"लडकी से बात कर रहा था "....... मयंक ने लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।
"कौन लडकी"..... राजीव ने जगह से लगभग उछलते हुए कहा।
"बहन मेरी ..तेरी .....हम दोनों की बहन "....... मयंक ने राजीव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
"मयंक मजाक मत कर और बहन के नाम पर तो बिल्कुल नहीं जितना में जानता हूं विष्णु ताऊ के तू एक अकेला लडका और पापा के मैं और अपनी दीदी हैं......और इतना तो मैं जानता हूं ये बात दीदी की नहीं है साफ साफ बोल बात क्या है".......... राजीव ने मयंक की आंखों में आंख डालते हुए कहा।
मयंक -"ये बात तब की है जब तू अपने शहर से यहां इंदौर आ गया था ......
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"तो तू है रघु.......साले दो साल पहले मेरे से कट्टे खरीदता था और आज साले तू हमारे ही खिलाफ हो गया ......बताओ क्या जमाना है जिनको हम पाल रहे थे वही आज दो साल में हमारे सामने खडे हैं अब इसको क्या समझूं गुरु यानी मैं ज्यादा अच्छा था या तू मादरचोद था".........इस समय रघु बल्ली के घर में बंधा डला था और बल्ली उससे बाथ्त कर रहा था।
"बल्ली भइया मुझे नहीं पता था की आप एहलावत के साथ हो नहीं तो मैं कभी ये गलती नहीं करता "....... रघु ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा।
"कोई बात नहीं अब पता चल गया ना तो अब हमारे लिए शहीद होजा हाहा".......और इतना कहते ही बल्ली ने तलवार चलाई और रघु की गर्दन उसके शरीर से अलग हो गई दो पल उसका धड फडफडाया और अगले हीपल वो शांत हो गया ड्राइवर को तो रास्ते में ही निपटा कर नल्ले में फेंक चुके थे बल्ली के आदमी।
वहीं बल्ली ने अपने आदमियों को उस फेक्ट्री पर भेज दिया था जो शहर से तीन किलोमीटर बहार बनी थी ।.....