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Horror किस्से अनहोनियों के

Shetan

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Horror main aapke aas pass bhi koi nahi hai.

Ek story padhi thi jismain ek kamre main bhai or behen ko maar deta hai koi.wo bhi achhi thi par complete nahi thi.

Par aapki story to kamal ki hai.
बहोत बहोत धन्यवाद. पर हॉरर स्टोरी को टेडर्स नही मिलते
 
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Chalakmanus

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Update 11

कोमल और बलबीर दोनों कार से मुंबई के लिए रवाना हो चुके थे. अंधेरा हो चूका था. एकदम चिकने फ्लेट रोड पर गाड़ी भागने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. बलबीर ट्रक ड्राइवर ही था. इस लिए लम्बे रुट पर उसे ड्राइव करने में कोई दिक्कत नहीं थी.

कोमल अपने मोबाइल में लगी हुई थी. बिच बिच में उसकी वाकलती call आ रहे थे. कभी किसी नए केस के लिए वो अपनी फीस बताती. तो कभी किसी मुद्दे पर कोई खास चीज.

जब सब काम निपट गया तो कोमल को बलबीर की याद आई. वो गौर से बलवीर को देखने लगी. एकदम मासूम चहेरा. सारा ध्यान सिर्फ अपने काम पर. कोमल को ऐसे देखते हुए जब बलबीर को महसूस हुआ तो बलबीर भी पूछे बिना रुक नहीं पाया.


बलबीर : ऐसे क्यों देख रही हो??


कोमल पहले तो थोडा सा मुश्कुराई. फिर जैसे सोच में पड़ गई हो की पुछु या नहीं. लेकिन रुकते रुकते उसने पूछ ही लिया.


कोमल : तुम अचानक ऐसे बिना बताए कैसे आ गए. मतलब की...


कोमल के पूछने का मतलब बलबीर समझ गया.


बलबीर : तुमने कहा था ना. तुम्हारे बच्चों को अच्छी स्कूल में पढ़ाऊंगी. उन्हें बहोत बड़ा आदमी बनाउंगी. तो में आ गया.


कोमल : मतलब की तुम मेरे लिए नहीं आए.


कोमल का जैसे मूड ख़राब हो गया हो. पर बलबीर कोमल के नेचर में हुए बदलाव को महसूस कर रहा था.


बलबीर : ऐसा नहीं है की मै तुम्हारे लिए नहीं आया. बल्कि सिर्फ तुम्हारे भरोसे पर ही मै यहाँ आया हु.


कोमल के फेस पर स्माइल आ गई. और वो बलबीर की तरफ थोडा खिसक कर उसके कंधे पर अपना सर टेक देती है. बलबीर को भी ये अच्छा लगा. ऐसा कुछ पहले होता था. जब बलबीर और कोमल को नया नया प्यार हुआ था.


बलबीर : तुम अपने पति से अलग क्यों हुई.


कोमल बताना तो नहीं चाहती थी. पर बलबीर था इस लिए वो बता देती है.


कोमल : वो मेरे साथ खुश नहीं था. उसे मै बोझ लगती थी. अब बाकि जिंदगी एक दूसरे के साथ सिर्फ एक पहचान से निभाए इस से बहेतर की हम अलग हो जाए. हम ख़ुशी से अलग हुए.


बलबीर ने आगे कुछ पूछा नहीं रात भर ड्राइव करते हुए वो मुंबई पहोच गए. पलकेश का मुंबई में एक और फेल्ट था. और वो वही रहे रहा था. कोमल उस फ्लेट का पता जानती थी. वो दोनों उस फ्लेट पर पहोच गए. पलकेश का फ्लेट 4th फ्लोर पर था.

वो बल्डिंग 10 मंज़िला थी. कोमल और बलबीर दोनों डोर के सामने खड़े हो गए. कोमल ने बेल बजाई. पर कोई डोर नहीं खोल रहा था. और ना ही कोई आवाज आई. कोमल ने दूसरी बार बेल बजाई. तब भी किसी ने डोर नहीं खोला.

कोमल ने पलट कर बलबीर की तरफ देखा. जैसे कहना चाहती हो की कोई गड़बड़ तो नहीं. फिर कोमल ने बेल बजाते डोर का हैंडल भी पकड़ लिया.


कोमल : पलकेश......


पर कोमल के हैंडल पकड़ते ही डोर खुल गया. डोर खुलते ही एक गन्दी सी बदबू का जैसे भापका आया हो. कोमल ने तो अपने मुँह पर हाथ ही रख दिया.


कोमल : उफ्फ्फ... ये बदबू केसी है.


बलबीर हैरान था की ऐसी ही बदबू तो कोमल के फ्लेट से भी आ रही थी. उसे वहां क्यों फील नहीं हुई. वो दोनों अंदर गए. अंदर का नजारा बड़ा अजीब था. सारी विंडोज को कपडे से कवर किया हुआ था.

जैसे बाहर का उजाला रोकने की कोसिस हो. अंदर का माहौल एकदम चिल्ड था. जैसे ac ऑन कर रखा हो. फैन धीमे धीमे घूम कर आवाज कर रहा था. कोमल और बलबीर चारो तरफ नजरें घुमाकर सब देख रहे थे.

खाने के जुठे बर्तन भी जुठे जिसमे थोडा बहोत खाना भी पड़ा हुआ था. देखने से ही पता चल रहा था की खाना कम से कम 2 दिन बसा जरूर होगा. एक खुले हुए कार्टून बॉक्स मे आधे से ज्यादा पिज़्ज़ा पड़ा हुआ था. जिसमे कीड़े भी रेंग रहे थे.

पर पलकेश कहा है. ये समझ नहीं आ रहा था. कोमल भी ऐसी थी की उसे डर तो मानो लगता ही ना हो. वो पलकेश को आवाज देते अंदर जाने लगी.


कोमल : पलकेश..... पलकेश....


पर अंदर जाने से पहले ही एक पाऊ सोफे के निचे नजर आ गया. कोमल रुक गई. और उसने उस पाऊ को देखा. कोमल ने पलटकर बलबीर को भी देखा. वो भी वही देख रहा था. वो आगे आया और सोफे को खिंचता है. पलकेश बेहोश पड़ा हुआ था.

वो दोनों पलकेश को बाहर निकलते है. और उसे होश में लाने की कोसिस करते है. जब उसे निकला तो पलकेश की हालत कुछ अजीब सी थी. वो पूरा तो नंगा था. और उसके बदन से बहोत बदबू भी आ रही थी. जैसे नजाने कितने दिनों से वो नहाया ही ना हो.

हाथ पाऊ गले बहोत जगग घाव थे. जैसे किसी ने बड़े जोर से खरोचा हो. कोमल घुटनो पर बैठ कर पलकेश के गलो पर हलकी हलकी थपकी मरना शुरू करती है.


कोमल : पलकेश..... पलकेश आँखे खोलो पलकेश...


पलकेश की आंखे बड़ी मुश्किल से खुली. जैसे उसने किसी चरस या अफीम का नशा किया हुआ हो. पर आंखे खुलते जब उसने कोमल को देखा तो वो तुरंत ही कोमल को जोरो से बांहो में भर कर रोने लगा.


पलकेश : हाआआ... मुजे बचा लो कोमल प्लीज. वो मुजे मार डालेगा अअअअअ.... प्लीज कोमल मुजे बचा लो....


कोमल और बलबीर दोनों सॉक थे.


कोमल : कौन मार डालेगा तुम्हे??? बोलो??? बोलो.


पलकेश के तेवर एकदम से बदल गए. वो रोते हुए हसने लगा. रुक रुक कर हसने लगा. उसकी आंखे एकदम से बड़ी हो गई. पलकेश ही देखने में डरावना लगने लगा.


पलकेश : खीखीखी...... खीखीखी...... वो तुम्हे हर वक्त देखता है. वो सिर्फ तुम्हारे लिए यहाँ आया है.


कोमल ने सर घुमाकर एक बार बलबीर को देखा. फिर पलकेश को देखने लगी.


कोमल : कौन देखता है मुजे. वो कौन है.


पलकेश फटी फटी आँखों से कोमल को देखता है. फिर बलबीर को देखने लगा. और बलबीर से ही बोलने लगा. पर जो बोला वो सुनके बलबीर और कोमल दोनों के कान खड़े हो गए.


पलकेश : तू इस से अब भी प्यार करता हेना. पर ये तुजसे शादी नहीं करेगी.


बोलने के बाद पलकेश जोरो से पागलो की तरह हसने लगा. कोमल और बलबीर दोनों ने एक दूसरे को देखा. पलकेश एकदम से शांत हो गया.


पलकेश : जब मेरा फ़ोन आया. तब भी लगे हुए थे ना दोनों.


और बोलते के साथ फिर पागलो के जैसे हसने लगा. बसलबीर तो समझ गया की पलकेश को क्या हुआ है. पर कोमल को समझ नहीं आया. उसे लगा की फोन पर उसे एहसास हो गया होगा. कोई नई बात नहीं है. पर पलकेश फिर एक बार कोमल और बलबीर दोनों को चोका देता है.


पलकेश : तुम दोनों ने गांव में भी किया था. खेतो में. उसी आम के पेड़ के निचे. पूरलियो में.


बोलकर पलकेश जोरो से हसने लगा. पर अब कोमल को झटका लगा. कोमल ने पलकेश को ये बताया था की उसने किसी के साथ सेक्स किया. पर ये नहीं बताया की किसके साथ. कैसे. और कहा.

पर पलकेश तो वो सब बता रहा था. जो कोमल ने उसे नहीं बताया था. पलकेश फिर पागलो के जैसे हसने लगा.


पलकेश : वो तुम्हारे साथ वही खेल खेलना चाहता है. एक रूपए वाला. हा हा हा....


कोमल को याद आया वो क्या था. जब कोमल और पलकेश की नई नई शादी हुई थी. वो लोग अक्षर बाहर घूमने जाते थे. एक बार पलकेश के पास बाहर आउट साइड पर एक वेश्या आ गई. और उसे साथ चलने को कहने लगी. पलकेश नहीं गया. पर कोमल अचानक उसके पास पहोची और पूछा. वो क्या कहे रही थी. पलकेश ने बताया. वो एक वेश्या थी.

और पेसो के लिए अपने कपडे उतरने को तैयार थी. कोमल को हसीं आ गई. दोनों घूम फिर कर घर पहोचे. बेडरूम में पलकेश लेटा हुआ कोई बुक पढ़ रहा था. तभी कोमल उस रूम में आ गई. एक हॉट सेक्सी गाउन पहने. अपनी बीवी का हॉट लुक देख कर पलकेश मुश्कुराया.

कोमल ने कहा आज मै एक वेश्या हु. तुम पैसे फेको. मै तुम्हारे लिए अपने कपडे उतरूंगी. पलकेश ने एक कॉइन दिखाया. स्माइल किये बोला. मेरे पास तो बस एक ही रुपया है.

बोल कर वो एक रूपए का सिक्का कोमल की तरफ फेक देता है. उस कॉइन की खनक आज भी कोमल को याद थी. उस कॉइन के गिरते ही कोमल अपना गाउन उतर कर नंगी होने लगी. पर ये सारे मनोरंजक खेल नई नई शादी हुई थी.

तब कोमल और पलकेश ने खेले थे. पलकेश ने कहा की वो भी कोमल के साथ वही खेल खेलना चाहता है. कोमल को बुरा लगा. हसबैंड वाइफ के बिच की इन बातो को बलबीर के सामने ऐसे बोलना.

पर कोमल को अब भी एहसास ही नहीं था की पलकेश के साथ क्या हो रहा है. वो एकदम से बेहोश हो गया. कोमल ने बलबीर की तरफ देखा. उसने पलकेश को उठाकर सोफे पर रखने में कोमल की मदद की.


कोमल : तुम एक काम करो. हमें यही रुकना होगा तुम कुछ खाने पिने की चीज़े ले आओ. तब तक में थोड़ी जगह ठीक करती हु.


बलबीर चले गया. चाहे कुछ हो जाए. कोमल पलकेश को उसकी उस हालत मे छोड़ कर जाना नहीं चाहती थी. कोमल थोडा घर की साफ सफाई में लग गइ.

पर साफ सफाई करते उसकी नजर अचानक सोफे पर गई. जहापर उन्होंने पलकेश को लेटाया था. वो वहां नहीं था. कोमल सॉक हो गई. अचानक पलकेश कहा चले गया. कोमल उसे पहले तो घर में ही ढूढ़ने लगी.


कोमल : पलकेश... पलकेश... कहा हो तुम???? पलकेश.


पर पलकेश मिला बहोत ही जबरदस्त हालत में. वो किचन में था. फ्रिज के आगे बैठा हुआ. और फ्रिज का डोर एकदम खुला हुआ था. कोमल को हैरानी तब हुई जब वो पलकेश के करीब गई. पलकेश कुछ खा रहा था.

कोमल ने ध्यान से देखने की कोसिस की के पलकेश क्या खा रहा है. वो कच्चा चिकन खा रहा था. कोमल को एकदम से झटका लगा. उसके हाथ में पूरा चिकन था. और पलकेश उसे खींच खींच कर कच्चा ही खा रहा था.


कोमल : (सॉक) पलकेश तुम यहाँ क्या कर रहे हो??


पलकेश ने कोई जवाब नहीं दिया. वो जानवर के जैसे खाता ही रहा. पर कोमल को दूसरा झटका तब लगा जब उसका ध्यान खुले हुए फ्रिज पर गया. वो पूरा फ्रिज मीट से ही भरा हुआ था. जब की कोमल को पता था की पलकेश जैन है.

वो नॉनवेज नहीं खाता. हा शराब वो जरूर पिता था. कोमल ने पलकेश के कंधे पर हाथ रखा तो पलकेश ने एकदम से उसका हाथ झाटक दिया. कोमल एकदम से घबरा गई. और पीछे हो गई.

पलकेश एकदम से गर्दन घुमा कर कोमल को देखा. उसके मुँह में कच्चा मीट था. बोलते हुए उसके मुँह से मीट के छोटे छोटे टुकड़े भी गिर रहे थे.


पलकेश : (गुस्सा चिल्ला कर) ये सब तुम्हारी वजह से हो रहा है. वो तो तुम्हारे लिए ही आया था. पर अब मुजे परेशान करता है. कहता है मुजे मांश खाना है. उसे शराब पीना है. वो मुझसे लड़की भी मांगवाता है. पर मेरी ये हालत देख कर सब भाग जाती है. तुम उसकी भूख मिटा दो. वरना वो मुजे मार डालेगा.


बोलकर पलकेश एकदम से ही बेहोश हो गया. कोमल उसे उठाने गई. पर कोमल के बस की नहीं थी. कोमल ने उसे खींचना शुरू किया. और उसे खिंचते हुए सोफे तक ले गई. कोमल को अब ये तो समझ आ गया की गड़बड़ क्या है. पलकेश किसी और की बात कर रहा है.

सायद कोई भुत है. कोमल को भूतों की कहानियाँ बहोत पसंद थी. पर पलकेश के अंदर क्या है. भुत है या नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था. कोमल ने अपना फोन उठाया और दाई माँ को call किया. पर फोन स्विच ऑफ आ रहा था. कोमल एकदम से निराश हो गई.

फिर उसे याद आया की दाई माँ ने उसे एक कार्ड दिया था. जिसपर किसी प्रोफ़ेसर रुस्तम का नाम था. कोमल ने अपने पर्स में उस कार्ड को तलाशना शुरू किया. वो कार्ड उसे मिल गया. कोमल ने जल्दी से उस नंबर पर call किया. रिंग बज रही थी. पर किसी ने फोन पिक नहीं किया. कोमल ने दूसरी बार कोसिस की. 2 रिंग के बाद किसी ने call पिक किया.


रुस्तम : हेलो???


कोमल : हेलो में कोमल बोल रही हु. मुजे दाई माँ ने आप का कार्ड दिया था


रुस्तम : ओह्ह तो आप ही कोमल हो. पर call करने में इतना टाइम क्यों लगा दिया.


कोमल ने उसके साथ घाटी वो सारी बाते बता दी. प्रोफ़ेसर रुस्तम ध्यान से सारी बात सुनता है. पलकेश के उस call से लेकर अब तक की सारी घटना की उसे जानकारी हो गई.


रुस्तम : में फिलहाल तो मुंबई से बाहर हु. तुम आज रात निकाल लो. और हो सके तो उसे सुबह मेरे पास ले आओ.


कोमल : पर आज रात?????


रुस्तम : क्या डर लग रहा है. दाई माँ तो तुम्हारी बड़ी तारीफ कर रही थी. बस एक रात तो तुम्हे उसके साथ रुकना ही होगा. ओके.



कोमल ने call तो कट कर दिया. पर उसे एक रात वही रुकना था. वो यही सोचती रही की रात कैसे कटेगी.
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Dekhte hai iss jin se kaise bachte hai
 
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सिर्फ यह किस्सा मुझसे 25,000 मे माँगा गया. पर मेने नही दिया. क्यों की मुझे यहाँ से हटाने को कहा गया था.
 
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Update 13A


एक जबरदस्त सेटअप तैयार हो चूका था. हवनकुण्ड तो रेडिमेंट था. ब्लैक कलर लोहे का बना हुआ. हवन कुंड के पास सामने ही एक आसान पर डॉ रुस्तम बैठ गए. कुंड से बस डेढ़ हाथ पीछे. उनके आस पास कई चीजे ऐसी थी.

जो कोमल और बलबीर दोनों ने पागले कभी नहीं देखि थी. कई तो जदिबुटिया थी. और कई मृतक जानवर के अवशेष. हवन कुंड की दूसरी तरफ पलकेश था. जो बेहोश पड़ा हुआ था. कोमल और बलबीर उनके दए साइड कुछ दस पंद्रह कदम दूर थे.


जो दोनों की प्रतिक्रिया देख सकते थे. 2 कैमरामैन कैमरा लेकर सब कवर भी कर रहे थे. डॉ रुस्तम ने कोमल की तरफ देखा.


डॉ : देख रहे होना कोमलजी. मै उस NTT को बुला रहा हु.


कोमल : पर आप ने तो कहा था की कोई NTT यहाँ अंदर नहीं आ सकती.


डॉ रुस्तम ने अपना माथा पीटा.


डॉ : है भगवान.... ये लड़की एडवोकेट है या मीडिया रिपोर्टर.


इस बार तो कोमल को भी हसीं आ गई. उसने अपने मुँह पर अपना हाथ रख लिया. और नजरें घुमाकर कही और देखने लगी.


डॉ : वो नहीं आ सकती. पर हम उसे बुलाएंगे तो वो आएगी. हम उस NTT को आदेश दे रहे है.


एक लड़का आया और पलकेश के चारो तरफ एक बड़ा गोल दायरा बना ने लगा. कोमल बड़े ध्यान से उन्हें देख रही थी. डॉ मन्त्रजाप कर रहा था.


डॉ : अरे यार..... कोई इसे होश मे तो लाओ यार. क्या यार तुम इतने टाइम से काम कर रहे हो. और इतना भी ध्यान नहीं तुम्हे.


डॉ जिस तरह अपनी टीम को डांट रहा था. उस से लग ही रहा था की ऐसे काम वो और उसकी टीम कई बार कर चुकी होंगी. पटनायक आया. और पलकेश को होश मे लाने की कोसिस करने लगा. फेस पर पानी डाला थपकी मारी. पर वो होश मे नहीं आया.


पटनायक : नहीं उठ रहा. ऐसे ही शुरू कर दो ना. वो आएगा तो अपने आप उठ जाएगा.


डॉ तुरंत ही भड़क गया.


डॉ : ओय.... तू पागल है क्या. अगर कोई पावरफुल चीज हुई तो इसे सोए सोए मे ही ले जाएगी.


कोमल ये सुनकर हैरान हुई. पटनायक ने बहोत महेनत की. और तब जाकर पलकेश होश मे आया. वो जैसे शराब पी हो. और नशे मे हो. ऐसे बिहेव कर रहा था. वो बैठ गया. बदन झूल रहा था. बाल बिखर गए थे. वो कभी दए देखता फिर बाए देखता. और वो रोने लगा.

डॉ रुस्तम ने तो मंत्रो का जाप शुरू ही कर दिया. पलकेश की नजर रोते हुए कोमल पर गई. वो कोमल को ऐसे रोते हुए पुकारता है की कोमल के साथ साथ बलबीर का भी दिल बैठ गया.


पलकेश : हाआआआ..... कोमलललललल........


पलकेश की हालत पर कोमल को दया तो आ गई. फिर भी वो रोइ नहीं. कोमल बहोत कठोर दिल की थी. वो भी कोई ऐसे ही क्राइम स्पेशलिस्ट और प्रॉपर्टी डीलिंग स्पेशलिस्ट नहीं बनी थी. अपने पेशे मे उसने गलत काम भी किये थे.

गलत मालूम होने के बावजूद भी. काफ़ी देर हो गई. मगर पलकेश पर कोई भी पैरानॉर्मल एक्टिविटीज की असर नहीं दिख रही थी. खुद डॉ रुस्तम भी परेशान होकर रुक गए. और लम्बी शांस लेने लगे.


डॉ : ऐसे काम नहीं बन रहा है.


कोमल : क्या हुआ???


डॉ : वो NTT जो भी है. वो आ ही नहीं रही. हमें चीजे चाहिये.


कोमल : केसी चीजे???


डॉ : ऐसी चीजे जो उस NTT से जुडी हुई हो. या इस्तेमाल की हुई हो. जैसे की वो मांस का टुकड़ा. जिसे तुमने खाते देखा था. या फिर वो कपडे. जो उस वक्त पलकेश ने पहने हो. जो उस NTT ने इस्तेमाल मे ली हो.


कोमल : नहीं.... मेने सब साफ कर दिया. वो सारे गंदे कपडे और नॉनवेज मेने सब डस्टबिन मे फेक दिये थे.


डॉ : हमें उसे यहाँ लाना होगा.


कोमल बोलना तो नहीं चाहती थी. पर उसके पास एक चीज ऐसी थी. जो पलकेश की नहीं. उसी NTT की थी. वो सिक्के. जिन्हे पलकेश ने तो हाथ भी नहीं लगाया था.


कोमल : मेरे पास एक चीज है.


डॉ रुस्तम हैरानी से कोमल की तरफ देखते है. कोमल ने अपने बैग से एक बड़ी पॉलीथिन निकला. जिस से आर पर उन सिक्कों को देखा जा सकता था. ऐसी कुछ चीजे NTT से जुडी होती है. ऐसी जानकारी डॉ रुस्तम को थी.

वो खिलोने कॉइन, या कोई और सामान खास कर गुड्डा गुड़िया ज्यादा जिस से NTT जुडी हुई होती है. ऐसे केस का सामना डॉ रुस्तम कर चुके थे. पर इसके भी कोई कारण होते है. कभी कभी किसी केस मे वो कारण भी जान ना जरुरी होता है.


डॉ : (सॉक) ये क्या है???


कोमल : ये सिक्के उस भुत या NTT जो भी हो. उसके है.


डॉ : पर ये तुम्हारे पास कैसे है.


कोमल : क्या बताना जरुरी है???


डॉ : अगर ये सामान उस NTT का है. तो जरुरी है की मै उस कारण को जानू. तुम्हारे पास कैसे है. कहा मिले. सब कुछ.


कोमल : ये मै सब के सामने नहीं बता सकती.



डॉ रुस्तम की ऑफिस एक बड़ा सा हॉल था. जिसमे कसी कामों की अलग अलग केबिन थी. उसकी खुद की भी. पर सब ओपन ही थी. बस एक बड़ा सा हॉल जैसा किस्सा.

जो केबिन के सामने ही था. डॉ रुस्तम के हिसारे पर सब दूर हो गए. हलाकि सब देख सकते थे. पर सुन ना मुश्किल था. डॉ रुस्तम भी वापस खड़े होकर वापस अपने केबिन मे कोमल के पास आ गए.

कोमल ने बलबीर के कंधे पर हाथ रखा. और उसने भी कोमल की तरफ अपना सर घुमाया.



कोमल : बलबीर... प्लीज तुम भी जाओ.


कोमल वो बात बलबीर के सामने भी नहीं बोलना चाहती थी. जब की उसने वो किस्सा बलबीर को भी सुनाया हुआ था. कोमल और बलबीर दोनों आमने सामने बैठ गए. वो दोनों एक दूसरे के सामने देख रहे थे.


डॉ : अब बताओ??


वैसे तो कोमल ये किस्सा किसी को बताना नहीं चाहती थी. पर उसे लगा अगर नहीं बताएगी और बाद मे उसे ही कोई प्रॉब्लम हो गई तो. पर कोमल बोलने से पहले ही सर निचे कर लेती है. डॉ रुस्तम शांत ही रहा. और कोमल के बोलने का इंतजार करने लगा.


कोमल : वो सिक्के फेकने का एक मकशद है.


डॉ : पहले वही बताओ???


कोमल : वो जो भी NTT है. वो चाहती है की मै उन सिक्के के बदले मे अपने कपडे उतारू. नंगी हो जाऊ उसके सामने. उसके लिए. जैसे एक वेश्या करती है. पेसो के लिए.


डॉ : मतलब वो NTT मेल है. पुरुष.


कोमल हैरानी से डॉ की तरफ देखती है.


डॉ : देखो कई NTT बहोत बुरी होती है. इन्हे हर बुरी चीज चाहिये. अल्कोहल, नॉन वेज हवस बहोत कुछ. NTT एक नेगेटिव एनर्जी है. ये मनहूशीयत फैलाती है. ऐसे मे जो पाजेश है उनमे ये सारी बुराई आ जाती है. वो उस पाजेश इंसान से डील भी करने लगती है. उसकी बात ना मान ने पर वो उसे मार भी देती है. कैसे भी.

तो उसने तुमसे ये एक्सपेक्ट किया तो कई बड़ी बात नहीं. NTT की ब्लैक एनर्जी इतनी ज्यादा पवरफुल होती है की वो किसी का भी पास्ट फ्यूचर बता देती है.
उसने तुम्हारे भी कोई पास्ट को जानकर ही ऐसा किया होगा. मुजे वो नहीं जान ना. बस तुम्हारे पास ये कैसे आए. और क्या हुआ वो बताओ.


कोमल को लगा सायद सब बताना ही ठीक होगा. वैसे भी वो दोनों बहोत धीमे बात कर रहे थे तो किसी के सुन ने का भी कोई डर नहीं था. कोमल सब कुछ बता ही देती है.


कोमल : ये सब मै पलकेश के लिए करती थी. आखिर वो मेरा पति था. वो एक कॉइन फेकता और मै उसके लिए. पर कल रात.....


कोमल ने रात का पूरा किस्सा डॉ रुस्तम को बताया. कैसे उसके सामने बारी बारी लगातार वो कॉइन फेके जा रहे थे. उसने पलकेश को भी चेक किया. पर वो सो रहा था. उसके बाद वो किचन वाला सीन भी.


डॉ : देखो ये जो पैसे है. ये उसने तुम्हे दिए है. ये तुम्हारे लिए तो कोई नुकशान नहीं पहोंचाएंगे. पर ये जिस किसी के भी पास जाएंगे. उसे बर्बाद कर देंगे. ये पैसा मनहूस है. पर इस पेसो मे ब्लैक एनर्जी बहोत ज्यादा है. ये तुम्हे धनवान बना देगा. पर हम पहले पलकेश को देखते है.


डॉ रुस्तम ने उन सिक्कों वाले पॉलीथिन को हाथो मे लिया. और वापस उस हवन वाले एरिया मे चले गया. कोमल सब बड़े ध्यान से देख रही थी. एक बार फिर डॉ रुस्तम अपने कम मे लग चुके थे. पलकेश को सोने नहीं दिया जा रहा था.

वो दोनों टांगे पसारे निचे सर किये बस रोए जा रहा था. उसकी रोने की आवाज जैसे उसकी सांसे उखाड़ रही हो. पर डॉ रुस्तम लगातार मंत्रो का जाप किये जा रहे थे. हवन कुंड मे आग को थोड़ी तेज़ किया गया. उन सिक्कों को भी डॉ रुस्तम ने सामने ही रखे.

एक ताम्बे के बर्तन मे उन सिक्कों को रख कर लाल कुमकुम और कुछ चीजों को उनपर डाला गया. मंत्रो के जाप को लगातार चालू रखा गया. उन मंत्रो के उच्चारण मे एक अलग ही एनर्जी थी. जो मन मे पॉजिटिविटी बढ़ा रही थी.

ये तो उन मंत्रो के शब्दो की पॉजिटिविटी थी. जो वो ब्लैक एनर्जी बरदास नहीं कर पा रही थी. और उसे सामने आना ही पड़ा. पलकेश को जैसे कोई दौरा पड़ने लगा हो. जैसे मिर्गी का स्टॉक आया हो.

सायद वहां हर किसी को ऐसी चीजे देखने की आदत थी. पर कोमल पलकेश को ऐसे देख कर थोडा घबरा गई. क्यों की पलकेश अपने आप को ऐसे झटक रहा था की जैसे उसकी गर्दन टूट जाएगी या फिर हाथ पाऊ की कोई हड्डी ही टूट जाएगी.

डॉ रुस्तम ने एक कलश से पानी हाथो मे लिया और पलकेश के ऊपर जोरो से छिंटे मारे. तब जाकर कोमल को पलकेश का चहेरा नजर आया. बहोत ही अजीब और डरावना चहेरा.

आंखे एकदम काली. पूरा डार्क सर्किल बना हुआ. चहेरे की त्वचा बिलकुल ही सुख गई. चहेरे पर कोई मॉइसचर नहीं. होंठ भी सुख कर सफ़ेद पड़ गए थे. पर जोश इतना की हाथी की ताकत आ गई हो. जैसे ही डॉ रुस्तम ने उसपर पानी के छींटे मारे पलकेश एकदम से एक टांग आगे फॉल्ट और दूसरी पीछे की तरफ फॉल्ट कर के बैठ गया. थोडा सा आगे झूक कर जोर से चिल्लाया.


पलकेश : (चिल्लाकर) क्यों बुलाया मुझे......


डॉ रुस्तम भी थोडा मुश्कुराए. अब बारी थी उस NTT से बात करने की.


पलकेश : कौन है तू??? और इस लड़के के अंदर क्यों आया है.


पलकेश के अंदर की NTT कोई जवाब नहीं देती. डॉ रुस्तम फिर उसपर एक बार और पानी की बौछार की. वो बड़ी जोर से चिल्लाया. इतना जोर से की वहां डॉ रुस्तम की टीम के कई लोग कांप गए. वैसी ही ध्रुजारी कोमल को भी हुई.


NTT (पलकेश) : (बहोत जोर से चिल्लाकर) मत डालो मुझपर.


डॉ रुस्तम भी उसपर दबाव बनाते है.


डॉ रुस्तम : तो बता कौन है तू. और इसे क्यों परेशान कर रहा है.


NTT (पलकेश) : (गुस्सा) ये तू भी जानता है. मै एक जिन हु. और इसने मेरी बात नहीं मानी तो इसे मै अपने साथ ले जाऊंगा. जिन्दा नहीं बचेगा ये.


सायद डॉ रुस्तम का इतना एक्सपीरियंस होगा की वो समझ गया था. वो NTT एक जिन्न ही है. क्यों की डॉ रुस्तम को पलकेश की एक्टिविटी मे सारे लक्षण दिख रहे थे. जो एक जिन्न मे होते है. कोमल ने बताए किस्से मे भी आभास हो गया था की वो कोई जिन्न ही हो सकता है. कोमल भी हैरान थी. उसने तो कभी जिन्न जैसे शब्दो को भी नहीं सुना था. कोमल सारे किस्से को बड़े गोर से देख रही थी.


डॉ रुस्तम : तू इसके अंदर कैसे आया. कहा से आया है तू.


NTT (पलकेश) : मै इसके साथ थोड़ी ना आया. मुजे तो वो लाई है.


NTT (पलकेश) ने कोमल की तरफ हाथ बढाकर ऊँगली की. डॉ रुस्तम समझ गए की वो जिन्न कोमल के पीछे आया. पर कोमल के अंदर नहीं आया मतलब कोमल का aura स्टॉरंग होगा. तभी वो बस पीछे पीछे ही आ पाया. ये बार डॉ रुस्तम को तुरंत ही समझ आ गई.


डॉ : ये तुझे कहा मिली??? कहा से इसके पीछे लगा तू???


NTT (पलकेश) बहोत ही कामिनी हसीं से हसने लगा. और बलबीर की तरफ हाथ बढाकर हिशारा किया.


NTT (पलकेश) : ये उसके साथ सो रही थी.



NTT (पलकेश) ने कोमल की तरफ देखा. और बहोत कामिनी घिनौनी स्माइल की.


NTT (पलकेश) : मुजे इसकी खुसबू बहोत अच्छी लगी. मै इस से निकाह करूँगा. इसके साथ रहूँगा.


कोमल का गुस्सा सातवे आष्मान पर पहोच गया. उस NTT ने कोमल को सब के सामने बेपर्दा ही कर दिया. बलबीर के साथ किये सेक्स के बारे मे बता दिया. तब तक तो कोमल कंट्रोल कर गई. पर आगे जो उस NTT ने कोमल से शादी करने की और साथ रहने की मंशा जाहिर की तो कोमल भड़क ही गई.


कोमल : (गुस्सा) साले चप्पल से मरूंगी तुझे. भगजा साले. तू जानता नहीं मुजे अभी.


डॉ रुस्तम कोमल को देख कर दंग रहे गया. ऐसी औरत जो भुत से डरने की बजाय उसे ही धमकी दे रही हो. डॉ रुस्तम सोचने लगे की सायद जिन्न का मतलब कोमल को पता नहीं होगा. नहीं तो जिन्न को ऐसी धमकी ना देती. NTT (पलकेश) वैसी ही घिनौनी हसीं से हसने लगा. और जो धमकी उसने कोमल को दी. वो सुनकर कोमल की ही आंखे फटी रहे गई.


NTT (पलकेश) : (घिनौनी स्माइल) तेरी माँ रोज पंछियो को दाना डालने के लिए अपनी छत पर जाती है. कही वो सीडीयों से गिर गई तो??? तेरी बहन बड़े से हवाई जहाज को ठीक करती है. कही.....


डॉ : चुप हो जा..


डॉ रुस्तम ने तुरंत ही पानी के छींटे उसपर मारे. ताकि वो आगे धमकी ना दे सके. डॉ रुस्तम जानते थे की जब इन्शानि मनोबल मजबूत हो तो भविस्य दिखाकर वो इंसान को डरते है. कोई भी अपने परिवार या प्रियजनों पर बात आ जाए तो इंसान समझोते के लिए मान ही जाते है. वो NTT सिर्फ धमकी नहीं देती.

ऐसा कर भी देती है. बारी बारी पुरे परिवार को ख़तम तबाह कर देती है. और जो इंसान जिसे वो पाजेश करना चाहती हो. वो ब्लैकमेल होते होते उस NTT के जाल मे बुरी तरह फस चूका होता है. कोमल भी जब अपने परिवार की बात आई तो. वो चुप हो गई. बल्कि सॉक हो गई. जब डॉ रुस्तम ने उस जिन्न पर पानी के छींटे मारे तो वो फिर तड़प उठा. पलकेश के अंदर का जिन्न एकदम से भड़क गया.


NTT (पलकेश) : मत परेशान करो मुजे.


डॉ : जब मशला तेरा इस से (कोमल) है. तो तूने इस(पलकेश)

को क्यों तंग कर रहा है. उसने तेरा क्या बिगाड़ा???


NTT (पलकेश) फिर कनिनी हसीं से हसने लगा.


NTT (पलकेश) : (कामिनी हसीं) बिगाड़ा थोड़ी है. मदद की है. और वो जब तक मेरी मदद करेगा. तब तक ही वो मुझसे बचे रहेगा. वरना मै उसे मार डालूंगा.


डॉ : उसे छोड़ दे. और यहाँ से चले जा. तुझे और कुछ चाहिये तो बोल.


उस NTT(पलकेश) ने गर्दन घुमाकर कोमल की तरफ बड़ी घिनौनी तरीके से मुश्कुराकर देखा. और उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया. जैसे कहे रहा हो. मुजे वो चाहिये. कोमल भी परेशान बस उसे आंखे फाडे टेंशन मे देखती रही. जब परिवार को बचाने बात आई तो कोमल ने उस NTT के सामने हथियार डाल दिये. सायद परिवार के लिए वो खुद को कुर्बान कर देती. डॉ रुस्तम ने भी इस बार चिल्लाया. और चिल्लाते हुए पानी के छींटे बड़ी जोर से उस NTT(पलकेश) के मुँह पर मारे.


डॉ : (गुस्सा) वो नहीं मिलेगी तुझे. और नहीं मै इस लड़के को कुछ होने दूंगा.


पानी के छिटो से वो NTT (पलकेश) बहोत ज्यादा तिल मिला गया.


NTT (पलकेश) : (गुस्सा) मै कहता हु मत करो ये.....


अब तक तो डॉ रुस्तम अपना पवार दिखा रहा था. पर आगे उस NTT (पलकेश) ने अपना पावर दिखाया. हवन कुंड की आग एकदम से तेज़ हो गई. और इतनी उची की छत को टच कर गई. छत का वो हिस्सा काला पड़ने लगा. वो NTT(पलकेश) मुश्कुराने लगी.


NTT (पलकेश) : तुझे पता होना चाहिये की तेरे सामने एक जिन्न है. जिन्न. मुजे वो लड़की दे दो. मै तुम सब की जान बक्श दूंगा. और यहाँ से चले जाऊंगा.


कोमल ने पहेली बार घबराहट और डर दोनों एक साथ महसूस किया. वो एकदम से बलबीर के कंधे पर हाथ रख देती है. डर के कारण उसने बलबीर का कन्धा एकदम से मसल दिया. बलबीर ने भी कोमल के हाथ पर अपना हाथ रख कर ये जता दिया की वो उसके साथ है.

पर डॉ साहब भी जानते थे की ये नौबत आएगी. अब तक तो वो सिर्फ बाते करने के लिए प्रकोषण युस कर रहे थे. इस बार एक अलग की थाली से कुछ रई( सरसों ) के दाने को हाथ पर लिया. और उसे उस NTT (पलकेश) पर जोर से मारा. NTT (पलकेश) बुरी तरह से झल्ला गई.


NTT (पलकेश) : एएए.... तू भी मरेगा मेरे हाथो.


डॉ रुस्तम जानते थे की जिन्न मे बहोत ताकत होती है. पर ऐसे दावे वो नजाने कितनी NTT से सुन चुके थे. अब बारी थी पक्का इलाज करने की. डॉ रुस्तम ने हवन क्रिया तेज़ की. पहले तो गोले के आस पास कुछ रई और लॉन्ग के दाने फेके.

डॉ रुस्तम ने उस NTT को पलकेश के शरीर मे ही बांध लिया. ताकि वो वापिस ना जा सके. और फिर मंत्रो उच्चारण से उस जिन्न को मजबूर किया एक नारियल की नोक पर बैठने के लिए. वो NTT को डॉ रुस्तम ने मंत्रो उच्चारण से नारियल के साथ बांध दिया.

पलकेश एक बार फिर बेहोश हो गया. सारा कार्य संपन्न करने के बाद डॉ रुस्तम उस नारियल को एक लाल कपडे मे बाँधने लगे. उस जिन्न को निकलने की प्रक्रिया ताकरबन 4 घंटा चली.


डॉ : बहोत नुकसान कर दिया कोमल जी. इसने मेरा.


डॉ रुस्तम अपनी जगह से खड़े हुआ. कोमल रहे ना सकी और पूछ ही लेती है.


कोमल : (घबराहट) क्या ये अब ठीक है???


डॉ : (स्माइल) हा.... अब ये ठीक है. आप चाहो तो इसे लेजा सकते हो. पर याद रहे. इसे डॉक्टर के पास जरूर ले जाना.


कोमल ने राहत की सांस लेते हुए बलबीर की तरफ देखा. चहेरे पर अब भी लाचारी के भाव थे. बलबीर ने बस हलकी सी गर्दन हिलाकर ये जाहिर कर दिया की वो उसके साथ है. इतना ही कोमल को हिम्मत देने के लिए काफ़ी था.


डॉ : कोमलजी आप बैठिये. मै आपके साथ कुछ बाते करना चाहता हु.


कोमल बलबीर का चहेरा देखने लगी. वो उठकर जाने लगा तो डॉ रुस्तम ने उसे रोका.


डॉ : अरे नहीं नहीं. आप बैठिये. ऐसी कोई बात नहीं है. आप भी हमारे साथ ही बैठिये.


वो तीनो वापस अपनी उसी जगह पर बैठ गए. टेबल की एक तरफ डॉ रुस्तम और दूसरी तरफ बलबीर और कोमल.


डॉ : जब उस NTT ने आप को धमकी दी तो आप कमजोर क्यों पड़ गई. ये हमेशा याद रखिये. कभी भी इन पैरानार्मल NTTes के साथ कोई डील नहीं करना चाहिये. मेने आप जैसी हिम्मत वाली लड़की नहीं देखि. जो जिन्न को धमकी दे दे.


कोमल : मै क्या करती. मेरी माँ और सिस्टर्स के आलावा मेरा है ही कौन.


डॉ : क्या आप के घर पूजा पाठ होती है??? क्या भगवान को आप मानते हो???


कोमल : हा... मेरी मोम तो हर रोज पूजा पाठ करती है.


डॉ : आप उन्हें काल करिये. मै आप की मोम और आप का घर देखना चाहता हु.


कोमल को पता था की इस वक्त उसकी सिस्टर घर ही होंगी. कोमल ने अपनी बहन हेमा को वीडियो काल किया. कोमल ने फ़ोन के जरिये घर का पूरा नक्शा डॉ रुस्तम को दिखाया. कोमल की माँ जयश्री और हेमा को भी डॉ रुस्तम ने देखा. Call कट हुआ और वह वापिस चर्चा मे लग गए.


डॉ : आप के घर मे ज्यादा नहीं सिर्फ 3 बेडरूम है. घर का वास्तु बहोत बढ़िया है. सबसे खास आप के घर का एंट्रेंस है. ऊपर जो घोड़े की नल लटक रही है. वो अद्भुत है. आप के घर मे कोई भी नेगेटिव एनर्जी नहीं आ सकती. क्यों की सारी प्रिकॉशन वास्तु से ही बन रही है.
घर मे धुप उजाला कुदरती आ रहा है. और रही बात तुम्हारी बहन. तो उसके हाथो मे जो कलाई पर दाई माँ का जो धागा बंधा हुआ है. वो उसे हर बुरी चीज से बचाएगा.


कोमल हैरान रहे गई. दाई माँ के धागे को डॉ रुस्तम ने पहचान लिया.


कोमल : उसके गले मे भी तविज भी है. और मेरे पास.


बोलते हुए कोमल का हाथ अपने गले पर गया. मगर वो तविज उसके गले मे नहीं था. जो दाई माँ ने पुरे परिवार को पहेन ने के लिए दिया था. डॉ रुस्तम समझ गए की NTT ने पहले उस धागे को दूर किया होगा. और फिर पलकेश के जरिये कोमल को पाजेश करने की कोसिस की होंगी.


डॉ : कोई बात नहीं. हम दाई माँ से तुम्हारे लिए और बनवा देंगे. पर आप ये बताइये. क्या आप हमारे साथ काम करना चाहोगी??? इन पैरानॉर्मल एक्टिविटीज नोट करने मे.


कोमल : अममम... अभी मेरी हालत कुछ ठीक नहीं है. मै सोचकर बताउंगी.


डॉ : कोई बात नहीं. मेरा कार्ड है आप के पास. आप पलकेश जी को डॉ के पास जरूर लेजाना.


कोमल और बलबीर को बेहोशी की हालत मे ही वहां से ले गए. कोमल ने एक गलती की. उसने डॉ रुस्तम को वो घर दिखाया. जिसमे उसकी माँ और बहन रहते है. वो नहीं दिखाया जिसमे वो खुद रहती थी. जब पलकेश को डॉ के पास ले गए तो उसे हॉस्पिटल मे भर्ती करवाना पड़ा.


और पता चली की पलकेश को ब्लड कैंसर हो गया था. उस बुरी NTT उस जिन्न की ब्लैक एनर्जी के इफेक्ट के कारण सब हुआ. पलकेश की फॅमिली मुंबई मे ही रहती थी. कोमल ने उन्हें भी बुला लिया. उसकी फैमली कोमल से ही लड़ पड़ी.

कोमल वहां से निकाल गई. क्यों की वो अब पलकेंस की बीवी नहीं थी. वो कोमल की पलकेश से आखरी ही मुलाक़ात थी. फिर कभी कोमल पलकेश से नहीं मिली


*) दोस्तों कहानी मे अभी बहोत सी चीजे अभी भी क्लियर नहीं हुई. पर वो सारी भूतिया जानकारी आगे और अपदटेस जाएंगे. तब क्लियर होंगी. कृपया धीरज बनाए रखियेगा.


*) अब तक की कहानी मेरे पास लिखी हुई थी. आगे लिखना शुरू करुँगी. अभी मुजे saya 2 के भी अपडेट लिखने है. अब अपडेट देर से आएँगे. पर आधे किस्से नहीं. पुरे पुरे किस्से मिलेंगे. तों दोस्तों धीरज रखियेगा. और साथ बने रहिएगा.

*) ये कहानी हकीकत पे आधारित भूतिया किस्से से बनाई गाइ है. आप चाहो तों मेरी काल्पनिक भूतिया कहानी saya 1 भी पढ़ सकते हो. जिसे दिलचस्पी हो वो saya ट्राय करें.
Itna padh ke to ab or yakin ho gaya ki aap horror plus erotic sandar likhenge.

Plz start kijiye na.

2 month main ek update bhi chalega.
 
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Update 14B

कोमल और बलबीर दोनों अहमदाबाद पहोच गए. वो दोनों जैसे ही अपने अपार्टमेंट की बिल्डिंग तक पहोचे लिफ्ट उन्हें बंद मिली. एक तो पहले से ही सफर की थकान और दूसरा लिफ्ट बंद. कोमल का दिमाग़ ख़राब हो गया.


कोमल : (गुस्सा) क्या यार. लिफ्ट बंद है. और वॉचमैन का कही पता नहीं.


बलबीर : अरे कोई बात नहीं. चलो पैदल चलते है.


कोमल : 5th फ्लोर तक सीढिया चढ़कर. तुम्हारा दिमाग़ तो ख़राब नहीं है. तुम्हे पता है. मै कितना थक गई हु.


बलबीर : पर इसके सिवा कोई चारा भी नहीं है. अब चलो.


बलबीर तो चलने लगा. कोमल बच्चों जैसे रोने जैसा चहेरा बना लेती है.


कोमल : अरे रुको यार. मै भी आ रही हु.


कोमल भी बलबीर के साथ सीढिया चढ़ रही थी.


कोमल : (रोने वाला चहेरा) शिट यार. क्या मज़ाक है.


कोमल धीमे धीमे सीढिया चढ़ती बस अफ़सोस ही जाहिर कर रही थी. जब की बलबीर धीरज रखते बस हलका सा मुस्कुरा रहा था. वैसे तो कोमल फ़िल्मी नहीं थी. बस सीढिया चढने के लिए वो बलबीर को थोडा मस्का लगाने लगी.


कोमल : (रोने वाला चहेरा) ओओ मेरे हीरो... ओओ मेरे तेझाब के अनिल कपूर. कुछ तो रहेम कर इस फूल सी बची पर.


बलबीर ने घूम कर कोमल को देखा. वो दो सीडी निचे अपने घुटने पकड़ के झूकी हुई खड़ी बलबीर को ही देख रही थी.


बलबीर भी बस सीढ़ियों पर खड़ा उसे देख कर मुस्कुरा ही रहा था की कोमल ने और शरतत जारी रखी. वो गाना गाते हुए बलबीर की आँखों मे देखने लगी.


कोमल : (स्माइल) तू मेरा जानू है. तू..... मेरा दिलबर....
पर इस प्रेम ग्रन्थ के पन्नों पर...... तू मेरा हीरो...... है.
हो ओ.... हा हा हीरो है.....


ऐसा प्यारा चुतियापा करते पागली बार कोमल को मझा आ रहा था तो बलबीर भी मुश्कुराते निचे 5 सीढिया उतर आया. वो कोमल को झट से अपनी गोद मे उठा लेता है.


कोमल : साबास मेरे अनिल कपूर.


बलबीर : (स्माइल) इस गाने मे जैकी स्रोफ था. बेवकूफ.


दोनों ही हसने लगे. बलबीर गांव का मजबूत कद काठी वाला मर्द था. कोमल को वो किसी बच्चे की तरह गोद मे उठाए सीढिया चढने लगा. कोमल वैसे तो फ़िल्मी नहीं थी. पर बलबीर उसके लिए हीरो बन चूका था. वो जानती थी की ये सब चुतियापा है. पर ये चुतियापा करने मे कोमल को बड़ा मझा आ रहा था.

अपने हाथो की मला बलबीर के गले मे डाले वो उसे मुश्कुराते हुए देखती ही रही. वो दोनों अपने 5th फ्लोर अपने फ्लेट तक पहोच गए. बलबीर ने उसे निचे उतरा. कोमल बहोत खुश थी. ऐसा फ़िल्मी स्टंट पहेली बार उसके लिए किसी ने किया था. वो बलबीर की पीठ थप थपति है.


कोमल : (स्माइल) शाबाश मेरे हीरो.


बलबीर : अरे दरवाजा खोलो यार. एक तो खा खा के मोटी हो रही हो और.....


कोमल फिर लपक के बलबीर पर चढ़ गई.


कोमल : अच्छा मै मोटी हम्म्म्म....


बलबीर : अरे बाबा.... मै मै मज़ाक कर रहा था.


दोनों बहोत खुश थे. कोमल लॉक खोलने लगी. पर जैसे ही उसने लॉक खोला और डोर पुश किया. अंदर से बड़ी जोरो की बदबू का भाबका आया. कोमल तुरंत ही दूर चली गई. बलबीर ने भी अपनी नाक पर रुमाल दबा दिया. उस फ्लेट मे बहोत जबरदस्त गंध आ रही थी. कोमल का तो जी ख़राब हो गया.


कोमल : उफ्फ्फ... इतनी गन्दी बदबू......


एक बार फिर बलबीर हैरान रहे गया. क्यों की जब बलबीर पहेली बार कोमल के घर आया. तब भी यही बदबू थी. फिलहाल बहोत ज्यादा थी. और उस वक्त थोड़ी कम. मगर वही सैम बदबू तो पलकेश के घर आ रही थी. कोमल को अपने घर वो बदबू महसूस नहीं हुई.

पर पलकेश के घर महसूस हुई. और वापिस लौट ते ही कोमल को वही बदबू महसूस हो रही थी.
बदबू भी ऐसी जैसे की कोई मर गया हो. पर बलबीर कोई रिएक्ट नहीं करता. थोड़ी देर मे बदबू बस थोड़ी सी कम हुई. बलबीर अंदर फ्लेट मे घुसा और बारी बारी सारी विंडो खोल देता है. धीरे धीरे बदबू कम हो गई. लेकिन ख़तम नहीं हुई.


बलबीर : अब आ जाओ. बदबू कम हो गई है.


कोमल घर के अंदर आ गई. वो अपने ही घर को चारो तरफ ऐसे देख रही थी. जैसे अपना घर नहीं किसी और का घर हो.


कोमल : बड़ी घुटन सी हो रही है मुजे.


बलबीर : यही घुटन मुजे तुम्हारे इस घर मे तब से हो रही है. जब पहले दिन. मै तुम्हारे घर आया था.


कोमल : (सॉक) मतलब... मै समझी नहीं???


बलबीर : मतलब मै अपने बच्चों को यहाँ रोकने को क्यों राजी नहीं हुआ. मेने तो तुम्हे पहले दिन ही कहा था. यहाँ मुजे बहोत घुटन हो रही है.


कोमल को पहला दिन याद आया. जब बलबीर पहले दिन उसके घर आया था. वो अपने बच्चों को लेकर तुरंत घर से बहार निकल गया था.


बलबीर : ये घुटन से मै इतना तो समझ गया था की कुछ तो बुरा हो रहा है. और हुआ भी. यही बदबू तुम्हे यहाँ महसूस नहीं हो रही थी. मगर तुम्हारे पति के घर....


कोमल : वो नहीं है अब मेरा पति. पर तुम्हारी बात पर मुजे सोचने पर मजबूर कर रही है. पर फिर भी तुम मेरे लिए यहाँ रुके.


कोमल बहोत ही प्यार भरी नजरों से बलबीर को देखने लगी. कोई है जो हर मुशीबत मे उसके साथ खड़ा है.


बलबीर : उस डॉक्टर सहाब को फोन कर के देखो??


कोमल : अरे... बस इतनी सी बात पर फोन लगा दे. रुको अगर कुछ बुरा हो गया तो सीधा दाई माँ से ही बात करुँगी.


कोमल जानती थी. अगर उसपर कोई बात आई तो दाई माँ कैसे भी आ जाएगी.


कोमल : अच्छा ठीक है. पागले मै नाहा कर कुछ खाने को बना देती हु. फिर तुम नाहा लेना.


बलबीर : नहीं मे ज्यादा थक गया. पहले मुजे नहाने दो.


कोमल के फेस पर स्माइल आ गई. आखिर उसका हीरो उसे 5 मंजिल गोद मे जो उठाके लाया था.


कोमल : (स्माइल) ठीक है जाओ.


बलबीर बाथरूम मे घुस गया. कोमल बहार सोफे पर बैठी शावर से गिर रहे पानी की आवाज सुन रही थी. कोमल को बलबीर पर कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था. वो सब याद करने लगी. कुछ गलत होने के डर से बलबीर उसे छोड़ कर नहीं गया. बल्कि वही उसके साथ रहा.

होटल मे जब रात पुलिस आ गई. बलबीर डर गया. मगर फिर भी उसके साथ ही रहा. पलकेश के मशले मे तो उसका कोई लेना देना भी नहीं था.
वो सिर्फ कोमल के लिए ही सारी मुशीबते झेलता रहा. कोमल पूरी तरह से बलबीर के प्यार मे पड़ चुकी थी. मगर जितना बलबीर सीधा था. उतनी ही कोमल शरारती.

वो खड़ी हुई और अपनी टीशर्ट ट्राउजर पैंट उतरने लगी. उतारते ही कोमल ब्लैक ब्रा पैंटी मे क़यामत ही लग रही थी. कोमल का पूरा बदन भरा हुआ था. खूबसूरत चहेरा उन्नत व्रक्स पतली कमर और गोरा बदन. कोमल के पेट पर भी चर्बी नहीं थी. एकदम सुतवा पेट, पतली कमर. कोमल आगे बढ़ी और बाथरूम के डोर को नॉक करने लगी.



बलबीर : अब क्या हुआ???


कोमल पीछे हाथ लेजाकर अपनी ब्रा के स्ट्रिप खोल रही थी. वो जैसे ही खुले. ब्रा एकदम से उछाल कर आगे कोमल के बूब्स पर लटक गइ. कोमल बहार उतरने लगी.


कोमल : खोलो एक मिनट.


बलबीर : अरे यार अभी तो साबुन भी नहीं लगाया. थोडा तो सबर करो.


कोमल : बस एक मिनट के लिए. खोलो.


बलबीर ने डोर खोला तो कोमल सिर्फ एक पैंटी मे खड़ी थी. और झूक कर उसे भी उतरने लगी.


कोमल : (स्माइल) साथ मे नहा लेते है. जल्दी कम पूरा हो जाएगा.


कोमल का कामुख खुबशुरत रूप देख कर बलबीर के लोकल कंपनी वाले कच्छे मे तम्बू बन गया. कोमल अंदर गई. और डोर बंद हो गया. अहह... उफ्फ्फ्फ़ ससससस... ऐसी आवाजे उस बाथरूम से आ रही थी. जो काम होटल मे अधूरा रहे गया. वो वहां उस बाथरूम मे पूरा हो रहा था. ठन्डे पानी के बावजूद दोनों के बदन की गर्मी ठंडी नहीं हो पा रही थी. थोड़ी देर बाद बाथरूम का डोर खुला. और सिर्फ कोमल ही बहार निकली.

कोमल भीगा बदन सिर्फ पंजो से ही फर्श को गिला करती अपने रूम मे चली गई. झट से अलमारी खोली. टावल निकला बदन पोछा और एक टावल जैसे गाउन पहेन लिया. वो अलमारी से अपनी ब्रा पैंटी निकाल लेती है. ब्रा तो कोमल ने पहेन ली. पार पैंटी पहेन ने के लिए कोमल पीछे बेड पार बैठी. जो अलमारी मिरर से सिर्फ 3 कदम पीछे था. किनारे पार बैठते सिर्फ पैंटी मे एक पाऊ ही अंदर डाला. कोमल का ध्यान अपने बगल मे गया.

वो एकदम से हैरान रहे गई. पहले तो कोमल अपनी पैंटी पहेन लेती है. फिर अपने बगल मे ध्यान से देखने लगी.
उस बेड पर एक पैंटी रखी हुई थी. और ये वही ब्लैक पैंटी थी. जो कोमल ने बाथरूम मे घुसने से पहले बाथरूम के डोर पर उतरी थी. कोमल एकदम हैरान थी. पर ऐसी बात वो किसी को कैसे बोलती. कोमल ने वो बात किसी को भी नहीं बताई.
🙏🙏🙏🙏
 
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Itna padh ke to ab or yakin ho gaya ki aap horror plus erotic sandar likhenge.

Plz start kijiye na.

2 month main ek update bhi chalega.
मै हु लियाका saya की एक हॉरर स्टोरी स्टार्ट करने वाली हु. उसके आलावा saya 3 भी आने वाली है. इंतजार करें. 2, से 3 मंथ मे
 

Chalakmanus

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मै हु लियाका saya की एक हॉरर स्टोरी स्टार्ट करने वाली हु. उसके आलावा saya 3 भी आने वाली है. इंतजार करें. 2, से 3 मंथ मे
Kya ye erotic bhi hogi.

Karan ye hai ki erotica story ko bandhe rehti hai
 
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Kya ye erotic bhi hogi.

Karan ye hai ki erotica story ko bandhe rehti hai
फिर ऐसी बात है तो आप saya 2 दोबारा शुरू करो. और skip किए बिना पढ़ो. आप 100% बंधे रहोगे.
 
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