• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller कातिल (समाप्त)

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
Prime
11,389
35,647
244
#03

सुबह होते ही मेरे फ्लैट की बेल किसी जहांगीरी घँटे की मानिंद बजने लगी थी।

एक तो वैसे ही रात को देर से सोया था, उस पर से इतनी सर्दी में सुबह सुबह रजाई में से निकलने का सितम।

मैंने एक नजर अपनी दीवार घड़ी पर डाली, अभी सुबह के सात ही बजे थे, रागिनी ने तो नौ बजे आने के लिए बोला था, इस वक़्त इतनी सुबह कौन आया होगा, ये सोचते हुए मैं मन ही मन आने वाले को गली नुमा उपमा से नवाजता हुआ दरवाजे की ओर बढ़ गया।

दरवाजा खोलते ही मुझे सुबह सुबह उस मनहूस पुलिसिये देवप्रिय की शक्ल नजर आई।

मैंने कोतुहल से उसकी तरफ देखा। इतनी सुबह उसके आने का अभिप्राय मेरी समझ से बाहर था।

उसने एक कुटिल मुस्कान से मेरी तरफ देखा।

"चलो ! तुम्हे मेरे साथ चलना होगा, माहेश्वरी साहब भी तुम्हारा बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे है" देवप्रिय की वो मुस्कान बोलते हुए भी उसके चेहरे से लुप्त नही हुई थी।

"क्यो ऐसा क्या हो गया, जो इतनी सुबह सुबह पुलिस को इस नाचीज़ की याद आ गई" मैंने प्रत्यक्ष में देवप्रिय से पूछा।

"पुलिस को एक लड़की की लाश मिली है, और लड़की को गोली मारी गई है, तुम्हे उस लड़की की शिनाख्त करनी है कि क्या ये वही लड़की है, जो बकौल तुम्हारे, तुम्हारी पिस्टल चुराकर भागी थी" देवप्रिय ने इस बार गंभीर स्वर में बोला था।

"ओह्ह लाश कहाँ पर मिली है" मैंने पूछा।

"अब सारे सवालों के जवाब यही पर खड़े हुए चाहिये क्या? साथ चलिये! सब पता चल जाएगा" देवप्रिय फिर से अपनी रात वाली पुलिसिया अकड़ पर उतर आया था।

"कपडे बदलने का मौका तो दीजिये, दो मिनट इंतजार कीजिये आप" ये बोलकर मैं वापिस अंदर की तरफ मुड़ गया।

इस बार देवप्रिय ने कोई प्रतिवाद नही किया, और वही खड़े रहकर मेरे बाहर आने का इंतजार करने लगा।

उसका ये इंतजार कोई दस मिनट चला। इन दस मिनट में मैंने अपने कपङे बदले, आधा अधूरा फ्रेश हुआ और बाहर निकल कर अपने फ्लैट का ताला लगाया।

उसके बाद सुबह सुबह एक लाश की शिनाख्त करने जैसे मनहूस काम के लिये उस मनहूस इंसान के साथ रवाना हो गया।

अनजानी लाश-3

मैं एसआई देवप्रिय के साथ जिस जगह पर पहुंचा था, वो जगह सेक्टर 16 की एक पुलिया थी जो ईएसआई अस्पताल से थोड़ा सा आगे जाकर सेक्टर 16 को उस रोड से जोड़ती थी।

"बड़ी जल्दी आपकी जरूरत पड़ गयी रोमेश बाबू" थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर देवेंद्र माहेश्वरी ने मुझ पर नजर पड़ते ही बोला।

"कानून को जब भी इस बन्दे की दरकार होती है, बन्दा तो उसी वक़्त हाजिर हो जाता है" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ माहेश्वरी साहब को बोला।

"मेरे साथ आइए, और देखकर बताइये की कल रात को आपके घर मे घुसकर आपके पिस्टल को चुराने वाली यही लड़की थी क्या" माहेश्वरी साहब ने मेरी ओर देखकर बोला।

मैं धड़कते दिल के साथ उन झाड़ियों की तरफ बढ़ा, जिन झाड़ियों में उस लड़की की लाश पड़ी हई थी।

मैंने एक सरसरी नजर उस लड़की पर डाली और एक राहत की सांस ली।

"ये वो लड़की नही है जनाब" मैंने माहेश्वरी साहब की ओर देखकर घोषणा की।

"ध्यान से देखो, हो सकता है नींद की वजह से तुम्हारी आंखे अभी पूरी तरह से न खुली हो" माहेश्वरी साहब ने हल्के से विनोद भरे स्वर में बोला।

"जिस आदमी के दरवाजे को सुबह सुबह पुलिस खटखटाये, उस आदमी की नीदं खुलती नही है जनाब, बल्कि उड़ जाती है" मैंने माहेश्वरी साहब की बात का जवाब उन्ही के अंदाज में दिया।

"लेकिन जनाब मृतका के शरीर मे जो गोली का घाव नजर आ रहा है, वो बिल्कुल उसी पिस्टल से निकली गोली का हो सकता है, जिसकी गुमशुदगी की रपट रोमेश साहब ने कल रात को ही लिखवाई है" देवप्रिय ने मेरी ओर अपनी शक्की निग़ाहों को डालते हुए बोला।

".32 बोर की पिस्टल क्या पूरे हिंदुस्तान में सिर्फ एक ही शख्स के पास हो सकती है क्या, और बिना पिस्टल की बरामदगी के तुम ये कैसे साबित करोगे की मृतका को लगी गोली उसी पिस्टल से निकली है" मैने उस लड़की के सीने में लगी गोली के घाव को देखते हुए बोला।

"यही बात तो हमारी शक की सुई तुम्हारी और घुमा रही है रोमेश बाबू, आपने इस लड़की को मारने के लिये अपने जासूसी दिमाग का बखूबी इस्तेमाल किया है, पहले अपने पिस्टल के गुम होने की झूठी रिपोर्ट लिखवाई, और फिर उसी पिस्टल से इस लड़की को मारकर अब मासूम बनने का दिखावा कर रहे हो" देवप्रिय एक तरीके से मुझें क़ातिल साबित करने की पूरी थ्योरी बना चुका था।

"मैं खामख्वाह क्यो किसी लड़की को क्यो मारूंगा, मैं तो इस लड़की को जानता भी नही, मैं तो इस लड़की को पहली बार देख भी रहा हूँ तो इस मुर्दा हालत में" मैने देवप्रिय की बात का तुरन्त प्रतिवाद किया।

"तुम इस लड़की को जानते हो या नही, या इससे पहले इसे कभी देखा है या नहीं, ये सब अब हमारी जांच का विषय है रोमेश बाबू" देवप्रिय अब अपने पुलिसिया हथकंडों पर उतर आया था।

"फिर जांच करके पहले साबित कीजिये, साबित कीजिये कि मैं इस लडक़ी को जानता हूँ, साबित कीजिये कि इसको मारने के पीछे मेरा क्या उद्देशय रहा होगा, उसके बाद आप मुझे फांसी पर लटका देना, अगर मुझे इस लड़की को मारना ही होता तो क्या मैं इतना बेवकूफ था, की जिस हथियार से इसे मारूंगा, उसी की गुम होने की रिपोर्ट लिखवाकर पहले से ही खुद को पुलिस की नजर में ले आऊं, आप बताइये, अगर मैं रात को आपके पास रिपोर्ट लिखवाने न आया होता तो क्या आप सुबह सुबह मेरे घर पर आ सकते थे, क्या
आपको सपना आना था कि मैं इस लड़कीं को मारकर यहां डालकर अपने घर पर जाकर सो गया हूँ" मैं एक ही सांस में उस पुलिसिये की खबर लेता चला गया।

उसके पास इस वक़्त मेरी एक भी बात का जवाब नही था। उसने आहत नजरो से अपने साहब की तरफ देखा।

"रोमेश की बात में दम है देवप्रिय, पहले हमें इस लड़की के बारे में जानना चाहिए कि ये लड़की है कौन, यहां इसकों मारकर कौन डाल गया है" माहेश्वरी ने मेरा बचाव करते हुए कहा।

"लेकिन जनाब शक तो इस आदमी पर भी बनता ही है, इसे ऐसे ही कैसे जाने दे सकते है" देवप्रिय ने बुझे हुए स्वर में बोला।

"हम रोमेश को कभी भी पूछताछ के लिए तलब कर सकते है, इन पर इतना भरोसा तो हम कर ही सकते है कि ये पुलिसिया पूछताछ से बचने के लिये कही गायब नही होंगे" माहेश्वरी साहब देवप्रिय से ज्यादा मेरे बारे में ज्यादा जानते थे।

"आप इस बात से निश्चिन्त रहिये सर! इस केस को सुलझाने के लिए मैं साये की तरह से आपके साथ रहूंगा, मेरे गायब होने की बात तो भूल ही जाइये, इलाके के बीसी को सिर्फ हफ्ते में एक बार थाने में हाजिरी देने के लिए बोला जाता हैं, मैं रोज आपके दरबार मे हाजिरी लगाऊंगा" मैने माहेश्वरी साहब की ओर देखकर बोला।

"ठीक है अब तो, ये रोज तुम्हारी नजरो के सामने रहेंगे, जिस दिन भी इस केस में इसके खिलाफ कुछ भी मिले, उसी दिन इसे पकड़कर लॉकअप में डाल देना" ये बोलकर माहेश्वरी साहब अभी देवप्रिय की तरफ देख ही रहे थें, की फोरेंसिक की टीम, फ़ोटोग्राफर और एम्बुलेंस तीनो एक साथ वहां अपनी आमद दर्ज करवा चुके थे।

देवप्रिय मेरी और तीरछी निग़ाहों से घूरता हुआ, आगे की जरूरी कार्यवाही के लिये फोरेंसिक टीम की ओर बढ़ गया।

मैं वही माहेश्वरी साहब के साथ एक कोने में जाकर खड़ा हो गया था।

"वैसे एक बात सच सच बोलो, वाकई ये लड़की वो नही है, जो कल रात को तुम्हारे घर मे घुसी थी" माहेश्वरी साहब ने ये पूछकर ये सिद्ध कर दिया था कि पुलिस वाला आख़िरकार पुलिसवाला ही होता है, उसकी वर्दी पर चाहे कितने सितारे टंगे हो।

"वो लड़की इससे कई हजार गुना सुंदर थी, और जब वो मेरे घर मे घुसी थी तब वो बुरी तरह से भीगी हुई थी, उसके भीगे हुए कपडो से मेरे बेड की वो जगह अभी तक गीली होगी, जहां पर आकर वो लड़की बैठी थी, जबकि ये लड़की तो किसी भी एंगल से नही लग रही है कि ये रात को बरसात में बुरी तरह से भीगी होगी" मैंने एक नई थ्योरी से भी माहेश्वरी साहब को अवगत करवाया।

"तुम अपनी जगह सही हो रोमेश, लेकिन मेरा एक मशविरा है, जितनी जल्दी हो सके अपनी पिस्टल को बरामद कर लो, नही तो आने वाले समय मे कोई भी नई मुसीबत तुम्हारे सामने खड़ी हो सकती है, मैं हर बार अपने मातहत की बात को काटकर उसे नजरअंदाज नही कर सकता हूँ, अगर ये सब कर रहा हूँ तो, सिर्फ इसलिए, क्यो कि मै तुम्हारे ट्रैक को अच्छी तरह से जानता हूँ" माहेश्वरी साहब ने मुझे मेरा हितेषी बनकर अपनी सलाह से नवाजा था।

फोरेंसिक वालो के विदा होते ही मैं भी वहां से अपने फ़्लैट पर आ गया।

अभी दरवाजा खोलकर अंदर घुसा ही था कि रागिनी ने भी मेरे पीछे ही फ्लैट में प्रवेश किया।

"कहीं बाहर से आ रहे हो क्या" रागिनी ने अपना बैग टेबल पर रखते हुए बोला।

"सुबह सुबह एक लाश की शिनाख्त करके आ रहा हूँ, अब इस इलाके में जितने भी मर्डर होंगे, पुलिस सोचेगी की वो मेरी ही पिस्टल से हुए है, इसलिये अब जब तक मेरी पिस्टल नही मिल जाती, मुझे ऐसे ही परेशान करेगे" मैने तपे हुए स्वर में रागिनी को बोला।

"ये तो है, इसलिए पिस्टल को हमे जल्द से जल्द ढूंढना पड़ेगा" रागिनी भी चिंतित स्वर में बोली।

"लेकिन सवाल तो यही है कि कैसे ढूंढे" मैने रागिनी की ओर देखकर बोला।

"यहां आसपास कोई सीसी टीवी कैमरा लगा हुआ है क्या, क्या पता वो लड़की किसी कैमरे की पकड़ में आई हो" रागिनी ने सही दिशा में सोचा था।

"मैंने कभी ध्यान नही दिया है, लेकीन कैमरे आसपास लगे हुए तो जरूर होंगे" मैने रागिनी की बात से सहमती जताई।

"चलो फिर सबसे पहले उन कैमरों को ही ढूंढते है, फिर उनके मालिकों से उनकी फुटेज दिखाने की गुजारिश करते है" रागिनी ने अपनी जगह से उठते हुए बोला।

"अरे पहले कुछ खा पी तो लेने दो, सुबह सात बजे से भूखा प्यासा गया हुआ था" मैंने रागिनी को बोला।

"मैं लाई हूँ ब्रेकफास्ट घर से, तुम इतने फ्रेश हो जाओ, मैं तब तक काफी बनाती हूँ" रागिनी पहले से ही समझदारी वाला काम करके आई थी।

मैंने एक मुस्कराहट भरी नजर रागिनी पर डाली, और बाथरूम में घुस गया।


जारी रहेगा_____✍️
Ab lagata hai Maidaan me asli khel shuru ho chuka hai
Ab dekhte hai Romesh Babu kaise pata lagate hai apni pistol ka
Or sabse badi bat jis ladki ka katal hua hai kya wo such me Romesh ki pistol se hua hai ya nahi
.
JABARDAST UPDATE HAI BHAI
ESE HE SUSPENSE FULL DETE REHNA BHAI
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,419
82,834
304
Ab lagata hai Maidaan me asli khel shuru ho chuka hai
Ab dekhte hai Romesh Babu kaise pata lagate hai apni pistol ka
Or sabse badi bat jis ladki ka katal hua hai kya wo such me Romesh ki pistol se hua hai ya nahi
.
JABARDAST UPDATE HAI BHAI
ESE HE SUSPENSE FULL DETE REHNA BHAI
Pistol churane wali ko to romesh bhaiya dhoondh hi lenge, lekin wo mari hai jo wo kaun hai? Or kya sach me Romesh ki pistol se mari hai? Iska pata samay aane pe hi lagega :declare: and aap saath bNe raho sunny boy, update to aise hi aate rahenge 👍 Thank you so much for your wonderful review and support :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,419
82,834
304

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,419
82,834
304
#04

पड़ोस के दो मकानों में ही हमे सीसी टीवी कैमरे लगे हुए नजर आ गए थे। उसके बाद थोड़ी सी आगे जाकर जिस भोजनालय से मेरा टिफिन आता था, उस के बाहर भी मुझे एक कैमरा लगा हुआ मिला।

उन तीनों कैमरों को देखकर उस लड़की के बारे में जानने की कुछ उम्मीदों ने मन ही मन अंगड़ाई ली।

सबसे पहले मैंने उस भोजनालय से ही शुरुआत की।

भोजनालय के मालिक शर्मा जी मेरे अच्छे जानकार थे, इसलिए उन्होने अपने कैमरे की फुटेज दिखाने में कोई गुरेज नही किया।

मैंने करीब 7 बजे से फुटेज को देखना शुरू किया था। रागिनी भी पूरी तल्लीनता से टीवी स्क्रीन पर अपनी नजर लगाये हुए बैठी थी।

तकरीबन पौने आठ बजे के करीब एक नीले रंग की वलोनी कार आकर रुकी थी। उस कार से एक लड़की उतरी और बारिश से बचने के लिये मेरे फ्लैट की ओर तेजी से दौड़ी।

मैने एक नजर रागिनी की ओर उठा कर देखा। रागिनी ने भी मेरी ओर देखा।

"बादशाहों ये गड्डी तो कल रात को मेरे होटल के बाहर काफी देर तक खडी रही थी" शर्मा जी ने हल्के से पंजाबी लहजें में बोला था।

"इस गाड़ी से जो लड़की उतर कर मेरे फ्लैट की तरफ दौड़ती हुई गई थी, उस पर नजर पड़ी थी, क्या आपकी" मैंने शर्मा जी से पूछा।

"ना भईया ! पराई औरतों को देखने का कोई शौक नही रखता जी" :D शर्मा जी की ये बात सुनते ही रागिनी के चेहरे पर बरबस ही एक मुस्कान थिरक उठी थी।

"अब इस फुटेज को साढ़े आठ बजे के आसपास लेकर जाओ, इसी वक्त के आसपास वो लड़की मेरे फ्लैट से गायब हुई थी" मैंने रागिनी की मुस्कान से खिसिया कर उसे बोला।

"पूरी ही देख लेते है सर! क्या पता इस आधे घँटे में गाड़ी से भी कोई और बन्दा उतरा हो, या कोई और आया हो" रागिनी ने बोला तो मैंने भी सहमति में सिर को हिलाया।

"एक बात तो सिद्ध हों गई, की ये लड़की प्री प्लान आई थी, इसने अपनी जान पर खतरे की मुझें झूठी कहानी सुनाई, और किसी खास मकसद से उसने मेरी पिस्टल को भी चुराया" मैंने अभी तक की फुटेज को देखकर अपने आकलन बताया।

"इस बारे में घर पर चलकर बात करेगे" ये बोलकर रागिनी ने फिर से अपनी नजर स्क्रीन पर टिका दी।

अगले चालीस मिनट हमारे बहुत ही बोरिंग गुजरे थे, न तो कोई उस गाड़ी के पास आकर फटका था, और न ही कोई उस गाड़ी से कोई उतरा था।

कोई चालीस मिनट के बाद वहीं लड़की फिर से दौड़ती हुई आई और जैसे ही कार में बैठी, वैसे ही गाड़ी की हेडलाइट की रोशनी सड़क पर बिखर गई।

जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, गाड़ी की पिछली तरफ लगा हुआ नंबर प्लेट हमारे सामने नुमाया हो गया। जिसे मुझ से पहले ही रागिनी ने अपनी फोन की नोटबुक में लिख लिया।

हमने उस गाड़ी के वहाँ से रवाना होते ही उस फुटेज को फिर से रिवाइंड किया और जिस जिस जगह वो लड़की फुटेज में दिख रही थी, उस जगह की अपने मोबाइल से फोटो खींच कर सेव कर ली।

साथ ही उस पूरी फुटेज को डेटा केबल से अपने मोबाइल में भी ले ली।

उसके बाद हम शर्मा जी का धन्यवाद बोलकर उस भोजनालय से बाहर आ गए।

"चलो कोई तो सुराग मिला, उस लड़की का, कम से कम उसे ढूंढने की एक शुरुआत तो हो सकती है" रागिनी ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हाँ चलो अब बाकी दोनो सीसी टीवी कैमरो की फुटेज भी देख लेते है" मैंने रागिनी को बोला, और उन घरों की ओर बढ गए, जिन पर वे कैमरे लगे हुए थे।

लेकिन दोनो ही जगह से हमें ना उम्मीदी ही हाथ लगी थी। एक पड़ोसी ने तो अपना सीसी टीवी ही खराब बताया था, और दूसरे पड़ोसी दोनो ही मियां बीवी नौकरी पेशा थे, तो दोनो ही अपने काम पर जा चुके थे, और घर पर ताला लटका हुआ था।

मैने निराशा से रागिनी की ओर देखा।

"कोई नही !अभी हमारे पास आगे बढ़ने के लिये उसकी गाड़ी नंबर का क्लू तो है ही ! हम वही से शुरू करते है" रागिनी ने मेरी निराशा को भांपते हुए बोला।

"चलो फिर इस गाड़ी की डिटेल निकालते है, उसके बाद पकड़ते है इस लड़की को" ये बोलकर मै अब अपने फ्लैट की ओर बढ़ गया था।

आजकल किसी गाड़ी की डिटेल निकालना कुछ मिनिटों का ही काम था। गूगल बाबा ने दुनिया के काफी कामो को आसान बना दिया था।

लेकिन इस वक्त मुझे जिस बात ने ज्यादा बेचैन किया हुआ था, वो ये थी कि वो लड़की एक प्लान बनाकर मेरे घर मे घुसी थी।

इस वक़्त कौन बनेगा करोड़पति से भी बड़ा सवाल मेरे सामने खड़ा हो गया था, की इस शहर में मेरा ऐसा कौन सा खैरख्वाह पैदा हो गया था, जिसने मेरे खिलाफ कोई साजिस रचने की पहल मेरे ही घर से की थी। 🤔

वैसे आपके इस सेवक के दुश्मनों की तादाद बहुतायत में थी, अब इनमें से किसी एक दुश्मन को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूँढने के बराबर था।

रागिनी का आगमन-4

वो गाड़ी रोहिणी के ही सेक्टर ग्यारह के पते पर रजिस्टर्ड थी। गाड़ी किसी कुमार गौरव के नाम से रजिस्टर्ड थी।

सेक्टर ग्यारह का पता देखते मेरी उम्मीदों के पंखों को नए परवान मिल चुके थे, क्यो कि उस अनामिका नाम की लड़की ने मुझे यही बताया था कि वो रोहिणी के सेक्टर ग्यारह में ही रहती थी।

उस पते के मिलने के बाद हमारा सबसे पहला काम अब उस पते पर पहुंचने का ही था।

इस वक़्त रोमेश, रागिनी के साथ उसी पते पर खड़ा था। रागिनी ने उस घर की बेल बजाई।

दरवाजा किसी नौकरानी ने खोला था। मैंने उसे कुमार गौरव को बुलाने के लिए बोला तो, वो बिना कुछ बोले ही वापिस अंदर मुड़ गई।

कुछ देर में ही एक कोई तीस वर्षीय जवान मेरे सामने खड़ा था। बन्दे की बॉडी देखकर लग रहा था कि
वो जिम में जमकर पसीना बहा रहा है, और जमकर सप्लीमेंट के डिब्बे पर डिब्बे खाली किये जा रहा है।

"जी कहिये, कहाँ से आये है आप" उस शख्स ने मेरी ओर अनजान निगाहों से देखते हुए पूछा।

"आप ही कुमार गौरव है" मैने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

"जी मै ही कुमार गौरव हूँ, आपको मुझ से क्या काम है" उसने जिज्ञासा भरे स्वर में पूछा।

"वो नीले रंग की वेलिनो आप ही कि गाड़ी है" इस बार रागिनी ने पूछा।

"जी नीले रंग की वेलिनो मेरी ही गाड़ी है, आप जानते हो कुछ मेरी गाड़ी के बारे में" उसके इस सवाल ने मानो हमारे ऊपर कोई वज्रपात सा किया हो।

"जानते हो मतलब?" ये सवाल रोमेश ने किया।

"कल शाम से मेरी गाड़ी गायब है भाई, रात को थाने में रपट भी लिखवाकर आया हूँ, लेकिन अभी तक गाड़ी का कोई अता पता नही है" कुमार गौरव ने रुआंसे स्वर में बोला।

हमारी उम्मीदों पर तुषारापात हो चुका था।

"क्या हम लोग अंदर बैठकर बात कर सकतें है" तभी रागिनी ने बोला।

"जी ! लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप कौन हो" कुमार गौरव के लिए ये भी मुसीबत थी कि वो ऐसे ही किसी अनजान लोगों को अपने घर के अंदर नही घुसा सकता था।

मैने अपना कार्ड निकाल कर उसके हाथ मे दिया।

"आप डिटेक्टिव है, आप मेरी गाड़ी के बारे में कुछ जानते है क्या" कुमार साहब ने मेरा परिचय जानते ही पूछा।

"हमने आपकी गाड़ी में एक लड़की को कल रात को एक सीसी टीवी की फुटेज में देखा है" इस बार फिर से रागिनी ने बोला।

"आप लोग अंदर आइए" ये बोलकर कुमार साहब ने हमारे लिए दरवाजा छोड़ दिया।

हम उसके पीछे ही अंदर की तरफ बढ़ गए। कुछ ही पलों में हम उसके ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे।

ड्राइंग रूम में सन अस्सी के दशक के चॉकलेटी हीरो कुमार गौरव की उसकी फ़िल्म "लव स्टोरी" की एक बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी। मैं उस तस्वीर को देखकर मुस्करा दिया।

इस बन्दे की एकमात्र यही फ़िल्म थी, जिसने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था, और रातों रात ये बन्दा उस समय की नवयौवनाओं की दिलो की धड़कन बन गया था, लेकिन इस एक फ़िल्म के बाद ही इस बन्दे के सितारे डूबते चले गए।

"लगता है कुमार गौरव के बड़े जबरा फैन हो, जो नाम भी उनका रखा हुआ है और ड्राइंग रूम भी उन्ही की तस्वीरों से सजा रखा है" मै और रागिनी इस वक़्त दिलचस्प निग़ाहों से उस तस्वीर को देख रहे थे।

"जी मै नही मेरी मम्मी इनकी बड़ी जबरा फैन है, उन्ही ने मेरा नाम भी कुमार गौरव रखा था" कुमार साहब ने मुस्करा कर जवाब दिया।

"सही बोल रहे हो, वैसे आप तो बॉडी से तो सनी देओल के फैन लगते हो" मैने अपनी भूल सुधार की।

मेरी बात उसे पसंद आई थी, तभी वो ठठाकर हँस पड़ा था।

"आप जरा इस लड़की को देखिए! ये लड़की कल रात को आपकी गाड़ी में देखी गई है" मैने अपने मोबाइल की फोटो गैलरी खोलकर उसे पहले से ली गई फ़ोटो को दिखाया।

कुमार बाबू गौर से उस तस्वीर को देखने लगे।

"ये लड़की तो मल्लिका जैसी लग रही है" कुमार की बोली हुई इस बात ने मेरे कान खड़े कर दिए थे।

"आप जानते हो इस लड़की को" मैंने गौर से कुमार के चेहरे को देखते हुए पूछा।

"हाँ ! एक नंबर की फ्रॉड लड़की है, लेकिन ये तो जेल में थी, ये बाहर कब आई" कुमार ने अचंभित स्वर में बोला।

"जरा इसके बारे में खुलकर बताओ, ये कल रात को मेरे घर से एक कांड करके भागी है" मैंने उतावले स्वर में बोला।

"क्या कांड कर दिया इसने, वैसे ये कुछ भी कर सकती है, यहां तक कि किसी का खून भी" कुमार एक के बाद एक धमाके इस लड़की के बारे में किये जा रहा था।

"ये कल रात को तकरीबन आठ बजे के करीब मेरे फ़्लैट पर बदहवासी की हालत में आई, इसने मुझे बोला कि इसके पीछे कुछ लोग पड़े हुए है, और इसे जान से मारना चाहते है, मैने इंसानियत के नाते अपने घर मे इसे शरण दे दी, लेकिन ये तो मुझे ही सेन्धी लगाकर मेरे घर से फरार हो गई"

मैने देख़ा की मेरी इंसानियत वाली बात पर रागिनी अपनी हँसी रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

"क्या सेन्धी लगा दी इसने" कुमार बाबू अब अपनी कहने से ज्यादा मेरी सुनने के लिए ज्यादा लालायित थे।

"ये मेरी पिस्टल चुराकर भाग गई है, मैं कल रात से ही इस लड़की को ढूंढ रहा हूँ" मैंने अपनी पूरी आपबीती बता दी।

"मतलब इस खतरनाक लड़की के कब्जे में मेरी गाड़ी और आपकी पिस्टल है" कुमार मानो खुद से ही बोल रहा हो।

"और आज सुबह ही एक लड़की की लाश भी बरामद की है पुलिस ने, अभी ये नही पता चल पाया है कि उस लड़की को किसने मारा है" मैने कुमार की बात में अपनी बात जोड़ी।

"क्या पता उस लड़की को भी इसी मल्लिका ने मारा हो, मैने बताया न वो कुछ भी कर सकती है" कुमार उस लड़की से कुछ ज्यादा ही डरा हुआ था।

"कुमार! आपकी बातो से लग रहा है, की आप इस लड़की को काफी करीब से जानतें हो, जो कुछ भी इस लड़की के बारे में जानतें हो, वो हमें बता दो, ताकि हम इसे जल्दी से जल्दी पकड़ सके, नही तो पता नही ये किस किस की जान लेगी" रागिनी ने हमारी बातचीत के सिलसिले को तोड़ा।

"ये लड़की पहले मेरी ही कंपनी में काम करती थी, ये गजब की खूबसूरत लड़की है, इसकी खूबसूरती ही इसका सबसे बड़ा हथियार है, जो कोई इसे पहली बार देखता है, वो इसकी ओर खींचा जाता है, मैं भी उसके इस रूपजाल में फंस गया था, और ये मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थी" कुमार ने सुनी आंखों से शून्य में निहारते हुए बोला।

"फिर तो इसके बारे में सब कुछ गहराई से जानते होंगे" रागिनी ने अब पूछताछ की कमान अपने हाथ मे ले ली थी।

"ज्यादा नही जानता, इतना जानता हूँ कि मॉडल टाउन में रहती थी, इसने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड बनकर मुझे लाखों का चूना लगाया, और जब मैंने इसे पैसे देने से इनकार किया तो इसने मेरे साथ अपना ब्रेकअप कर लिया, बाद में मुझे पता चला कि उसका तो ये बिज़नेस है, हर कंपनी का मालिक उसका बॉयफ्रेंड होता है, और जब तक वो उस पर पैसे लुटाता रहता है, वो इस लड़की की गुडबुक में रहता है, उसको पूरी तरह से चूसने के बाद ये उसको टाटा बाई बाई करके उसकी जिन्दगी से निकल कर अपने नए शिकार की तलाश में निकल जाती है, बस इसमे एक ही अच्छी बात थी, की ये किसी को उसकी जिंदगी से जाने के बाद ब्लेकमेल नही करती" कुमार ने जो भी बताया था, वो काफी दिलचस्प था।

एक बात और थी कि इस लड़की को पकड़ने में चक्कर मे अभी कुमार जैसे कई लुटे पिटे आशिकों से मुलाकात होने वाली थी। :D

वो किसी के लिये अनामिका थी और किसी के लिये मल्लिका थी। न जाने कितने नाम और रूप थे, इस लड़की के...बहरहाल इतना तो कुमार की बातों से स्पष्ट था कि लड़की बहुत खतरनाक थी।

लेकिन इस खतरनाक लड़की ने इस बार एक गलती कर दी थी, की इसने अनजाने में रोमेश दी ग्रेट से पंगा ले लिया था। :roll3:

लेकिन क्या सच मे उसने अनजाने में मुझ से पंगा लिया था, सुबह तो मैं और रागिनी इस नतीजे पर पहुंचे
थे, की वो लड़की प्रीप्लान बनाकर मेरे घर में घुसी थी। वो जानती थी कि मैं भी उसकी खूबसूरती में उलझ जाऊंगा।

अभी मैं अपने तस्सवुर में उस लड़की के बारे में सोच ही रहा था, की कुमार का फोन बज उठा था।

कुमार ने फोरन से पेश्तर फोन को उठाया।

उसने कुछ देर फोन पर एक तरफ जाकर बात की, फिर तेज कदमों से हमारी तरफ आया।

"पुलिस को गाड़ी मिल गई है" कुमार ने उत्साहित स्वर में बोला।

"कहाँ पर" मेरा और रागिनी का सम्मिलित स्वर वहां गूंजा था।

"यही सैक्टर 6 में, अंबेडकर होस्पिटल की पीछे वाली रोड पर मिली है पुलिस को" कुमार ने मेरी ओर देखकर जवाब दिया।

"चलो फिर! आप हमारे साथ आओ, क्या पता आपकी गाड़ी से ही आगे के कोई सुराग मिल जाये।

मेरी बात सुनकर कुमार ने साथ चलने में कोई भी हिला हवाली नही की, और हमारे साथ बाहर की ओर चल पड़ा।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,419
82,834
304
Congratulations bro

Intejar hai 1st update ka bhai agar ho sake to background rural rakhna

Bhut bhut शुभकामनाएं

Bahut hi shandar shuruwat

Always welcome bro

Bhut hi shandar shuruwat kahani ki
Anamika to apne jasus babu ko hi chuna laga kar bhag gayi
Vese romesh ka style bhut funny hai

🥹🥹🥹
Congratulations for new thread....
Starting bahut hi badhiya huvi hai....


Bhai, update acha laga, Police station wala scene full intense aur real laga aur Ragini ke saath wali baatein mast light-hearted. Dialogues bahut real feel de rahe the...

Nice update.....

Super hit update

Nice update

Congratulations for new Stroy :congrats:

1 लाश से शुरूवात हो गयी .... ab देखो कितनी लाशें मिलती है और किन किन हालातों में????

Shaandar update

Ye kya hua pistol se nikli goli kisi ladki ki jaan le gyi aakhir kon hai ye ladki jiski laash mili hai , aakhir anamika ne us ladki ko kyu mara hoga , kya romesh babu bahut gehre fas chuke hai ya koi rasta niklega in sabse bachne ka bahut hi badhiya update next update ki pratiksha rahegi

Achcha hai

Gazab ki update he @rja_sharma Bhai

Romesh ke to laude laga diye the devpriy ne

vo to bhala maheshwari ka usne time par devpriya ki baat kaat di........

Ek jagah aapne Romesh ko Anuj likha he..............correction kar lena bhai

Keep rocking

congratulations ................. bro for new story

Padh ne ke bad review deta hu ...................

Super update and nice story

Ab lagata hai Maidaan me asli khel shuru ho chuka hai
Ab dekhte hai Romesh Babu kaise pata lagate hai apni pistol ka
Or sabse badi bat jis ladki ka katal hua hai kya wo such me Romesh ki pistol se hua hai ya nahi
.
JABARDAST UPDATE HAI BHAI
ESE HE SUSPENSE FULL DETE REHNA BHAI

:thanks:
Aise hi compliment Mujhe Review Likhne ki prena deta hai .
Napster
Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Update posted friends 👍
 

SKYESH

Well-Known Member
3,662
8,820
158
#01

बारिश: (रात 8 बजे!)

इस बार दिल्ली की सर्दियों में बारिश अपना अलग ही स्यापा कर रही थी।
कहने वाले तो कहने लगे थे कि, दिल्ली भी बारिश के मामले में अब मुम्बई बनती जा रही है।

एक तो जनवरी के पहले सप्ताह की कड़ाके की सर्दी और उस पर ये बारिश का कहर।

मैं उसी सर्दी की मार से बचने के लिए इस वक़्त अपने फ्लैट में अपने बेड पर और अपनी ही रजाई में लिपट कर अपनी सर्दी को दूर भगाने का प्रयास कर रहा था।

अब आप भी सोच रहे होंगे की ये कौन अहमक इंसान है,जो बेवजह दिल्ली के मौसम का आँखों देख़ा हाल सुना रहा है। :D

वैसे तो अभी तक आपने अपने इस सेवक को पहचान ही लिया होगा , लेकिन फिर भी मैं आपको बता दूं कि मैं “रोमेश!” दिल्ली में एक छोटा मोटा जासूसी का धंधा करता हूँ…न न मैं कोई राॅ का एजेंट नही हूँ,मैं तो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, जो सिर्फ कत्ल के केस में ही अपनी टांग घुसाता है। :yo:

जासूसी के बाकी धंधो मसलन, शक धोखा, पीछा, तलाक जैसे सड़क छाप धंधों से मैं दूर ही रहता हूँ।

बन्दे को बचपन से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक इस कदर था, की जिस उम्र में मुझें स्कूल की किताबें पढ़नी चाहिए थी,उस उम्र में मैं दिन रात जासूसी किस्से कहानिया पढ़ा करता था।:dazed:

इसी वजह से अपुन का मन भी सिर्फ जासूसी में ही अपना मुकाम बनाने का करने लगा था।

वैसे तो आपका ये सेवक जासूसी में दिल्ली से लेकर मेरठ आगरा ,मुम्बई और राजस्थान तक अपने झंडे गाड़ चुका था ,और आज किसी परिचय का मोहताज नही था , लेकिन मेरी एक नकचढ़ी सेक्रेटरी है,जिसका नाम रागिनी है, वो बन्दे की इस काबलियत की जरा भी कदर नही करती है,:beee: उसकी नजर में अपन आज भी घर की मुर्गी दाल बराबर है, लेकिन उसकी महिमा का बखान मैं बाद में करूँगा, इस वक़्त आपके इस जिल्ले-इलाही के फ्लैट को कोई बुरी तरह से पीट रहा था।

दरवाजा इतनी बेतरतीबी से पीटा जा रहा था कि, मानो कोई दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना चाहता हो, मैं हड़बड़ाकर अपनी रजाई में से निकला और दराज में से अपनी पिस्टल निकालकर अपने बरमूडा में फँसाई और तेज कदमो दरवाजे की ओर बढ़ा और दरवाजे के पास जाकर ठिठक गया।

"कौन है,क्यो दरवाजा तोड़ने पर आमादा हो "मैंने बन्द दरवाजे के पीछे से ही बोला।

"दरवाजा खोलो ! मैं बहुत बड़ी मुसिबत में हूँ" ये किसी लड़की की घबराई हुई आवाज थी।

अब एक तो लड़की और ऊपर से मुसीबतजदा, और ऊपर से गुहार भी उस इंसान से लगा रही थी,जो मुसीबतजदा लड़कियों का सबसे बड़ा खैरख्वाह था,:smarty: तो अब दरवाजा खोलना तो बनता था, सो मैंने दरवाजा खोला और फोरन से पेश्तर खोला।

दरवाजा खोलते ही मुझे यू लगा मानो कोई आंधी तूफान कमरे में घुस आया हो, वो लडकी डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से कमरे में घुसी और सीधा मेरे बेड पर बैठ गई।

मै किंककर्तव्यमूढ़ सा बस उस
लड़की की ओर देखता रहा, उस मोहतरमा में एक बार भी मुझ से अंदर आने के लिए पूछना गवांरा नही समझा था।

"दरवाजा बंद करो न, ऐसे क्या देख रहे हो, कभी कोई लडकी नही देखी क्या" उस लड़की की आवाज जैसे ही मेरे कानो में पड़ी, मैंने हड़बड़ा कर दरवाजे को बन्द कर दिया।

दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर उस लड़की पर पहली बार पूरी नजर पड़ी थी। लड़की उची लंबे कद
की बेइंतेहा खूबसूरत थी।

उसके कटीले नैन नक्श पर उसका मक्खन में सिंदूर मिला रंग तो कयामत ही ढा रहा था।

उसे ध्यान से देखते ही मेरे दिल की घण्टिया किसी मंदिर के घड़ियाल की तरह से बजने लगी थी।:love2:

पता नही साला ये अपनी उम्र का तकाजा था या अभी तक कुंवारा रहने का नतीजा था कि,आजकल अपुन को हर लड़की खूबसूरत लगती थी। :loveeyed2:

मुझे इस तरह से कुत्ते की तरह से अपनी तरफ घूरते हुए देखकर वो लड़की अब बेचैनी से अपना पहलू बदलने लगी थी।:D

"हो गया हो तो, अब इधर भी आ जाओ" उस लड़की को शायद ऐसी कुत्ती निग़ाहों का अच्छा खासा तजुर्बा था।

होता भी क्यो नही, जो जलवा उसकी खूबसूरती का था, उसके मद्देनजर तो जिसने भी डाली होगी मेरे जैसी कुत्ति नजर ही डाली होगी।

लेकिन आपके इस सेवक ने लड़की के बोलते ही अपनी इस छिछोरी हरकत पर ब्रेक लगाई,और चहलकदमी करता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

एक तो साला सर्दी का मौसम, ऊपर से कड़कड़ाती बरसात, और अब ये कहर बरपाती मेरे ही बेड पर बैठी हुई मोहतरमा, मेरी जगह कोई और होता तो अभी तक इस खूबसूरत बला के साथ पूरी रात की योजना अपने ख्यालों में बना चुका होता, लेकिन अपनी नजर भले ही कितनी भी कुत्ती हो, दिल शीशे की तरह से साफ है।:declare:

"कौन हो तुम, और इतनी बरसात में मेरे पास क्यो आई हो" मै अब उसकी सुंदरता के खुमार से कुछ कुछ निकलते हुए बोला।

"मेरी जान खतरे में है,मुझे कोई मारना चाहता है" उस लड़की की आवाज में फिर से घबराहट का पुट आ चुका था।

"लेकिन आपको मेरे बारे में किसने बताया कि मैं मुसीबतजदा हसीनाओं की मदद आधी रात को भी सिर के बल चल कर करता हूँ" मैं अब अपनी जासूस वाली फोम में आता जा रहा था।

"मैं आपको नही जानती, मेरे पीछे तो कुछ लोग लगे हुए थे, मैं तो उनसे बचने के लिए आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी थी" उन मोहतरमा ने जो बोला था, वो मेरे लिए अनपेक्षित था ।

ऐसे कोई जबकि सर्दियो के दिनों में आठ बजते ही आधी रात का आलम लगने लगता है, क्यो किसी अंजान के घर मे ऐसे घुसेगा और न सिर्फ घुसेगा बल्कि आकर आराम से आकर बेड पर भी बैठ जाएगा।

"आप हो कौन, और कौन लोग है जो आपकीं जान लेना चाहते है" मैंने एक स्वभाविक सवाल किया।

"मेरा नाम अनामिका है, मै यही आपके इलाके के सेक्टर ग्यारह में रहती हूँ, मैं इधर किसी काम से आई थी, लेकिन जब मैं घर वापिस जा रही थी, तो मैंने देखा कि चार लोग मेरा पीछा कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर घबरा गई और भागने लगी, तभी आपके फ्लैट पर नजर पड़ी, आपकी लाइट भी जली हुई थी, तो आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी" अनामिका ने बोला।

"उन लोगो को आपने पहले भी कभी अपने पीछे आते हुए देखा है, या आज ही देखा था" मै अब उससे सवाल जवाब करने के मूड में आ गया था।

"उन लोगो को तो मैंने आज ही देखा था, लेकिन मुझे कई दिनों से लग रहा है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है" अनामिका ने रहस्यमय तरीके से बोला।

"ऐसा लगने का कोई कारण भी तो होना चाहिए, क्या आपको किसी से अपनी जान का खतरा है" मैंने उसके जवाब में से ही सवाल ढूंढा।

"खतरा तो मेरी जान को बहुत है, मुझे नही पता कि मौत किस पल मेरा शिकार कर ले" अनामिका की आवाज से ही ये बोलते हुए उसका डर झलक रहा था।

"कौन लेना चाहता है तुम्हारी जान" मैंने फिर से उसी सवाल को घुमा फिरा कर पूछा।

"धीरज!पूरा नाम उसका धीरज खत्री है" अनामिका ने मुझे उस बन्दे का नाम बताया।

"आप धीरज को कैसे जानती है" मेरा ये पूछना स्वभाविक था।

"किसी समय वो मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन जल्दी ही मुझे ये एहसास ही गया कि मैंने गलत आदमी से प्यार कर लिया है, उसके बाद मैंने उससे अपने रिलेशन ख़त्म कर लिये, और दूसरी जगह शादी कर ली, उसके बाद से वो बन्दा मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" अनामिका ने पूरी बात बताई।

"देखिए मैं एक डिटेक्टिव हूँ… मेरा पाला हर रोज ऐसे लोगो से ही पड़ता है, आप मेरा ये कार्ड रख लीजिए, और कल मेरे आफिस आकर मुझे सभी कुछ डिटेल में बताइये, हो सकता है, इसके बाद आपका बॉयफ्रेंड फिर कभी आपको परेशान न करे" मैंने उसको विश्वास दिलवाने वाले शब्दो मे बोला।

"अगर आपने सच मे मेरा उस आदमी से पीछा छुड़ा दिया तो, आपको आपके वजन के बराबर नोट से तोल दूँगी" अनामिका ने उत्साहित स्वर में बोला।

"लेकिन मैडम इतना बता दीजिए कि वो नोट दस के होंगे या दो हजार के होंगे" मैंने उसकी बात का झोल पकड़ते हुए बोला।:D

मेरी बात सुनकर वो नाजनीन न केवल मुस्कराई बल्कि खिलखिलाकर हँस भी पड़ी।

"आप बहुत हाजिर जवाब हो रोमेश साहब" अनामिका ने मेरा नाम मेरे विजिटिंग कार्ड पर पढ़ते हुए बोला।

"चलिये अब मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ, वैसे भी रात अब गहरी होती जा रही है" मैंने अनामिका की तरफ देख कर बोला।

"काफी शरीफ आदमी मालूम पड़ते हो रोमेश साहब, वरना मौसम तो आशिकाना है" उस जालिम ने एकाएक ऐसी बात बोलकर मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया।

"इस मौसम की वजह से ही तो बोल रहा हूँ, आपके कपडे गीले हो चुके है, घर आपका पास में ही है, मैं अपको घर छोड़ देता हूँ, ताकि आप इन गीले कपड़ो से छुटकारा पा सको" मैंने अनामिका की बात को एक नया मोड़ दिया।

"लेकिन मैं अभी घर नही जाना चाहती हूँ, मेरे पति भी आज घर पर नही है, और मुझे ऐसे हालात में डर भी बहुत लगेगा"

अनामिका अब सीधे सीधे मेरे गले पड़ रही थी। जबकि मेरी छटी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी।

मुझे न जाने क्यो ये लडकी खुद को जो बता रही थी,वो नही लग रही थी।

लेकिन इस बार उसने जो बहाना बनाया था, उसने मुझे कुछ बोलने लायक नही छोड़ा था।

"लेकिन देवी जी, ये बन्दा यहां अकेला रहता है, कल को किसी को पता चलेगा तो आपकी बदनामी नही होगी" मैने वो बात बोली, जो आजकल के जमाने मे अपनी अहमियत खो चुकी थी।

मेरी इस बात को अनामिका की हँसी ने सही भी साबित कर दिया था।

"किस जमाने मे जी रहे हो रोमेश बाबू, आजकल किसके पास इतनी फुर्सत है कि कोई मेरी रातों का हिसाब रखें कि मैं अपनी रात कहाँ किसके साथ बिताकर आ रही हूँ.. यार अब ये फालतू की बाते बन्द करो, और अगर एक कप कॉफी पिला सकते हो तो पिला दो" अनामिका मेरे गले पड़ने में कामयाब हो चुकी थी।

मैं मरता क्या न करता के अंदाज में अपने किचन की ओर चल दिया।

कॉफी की जरूरत तो मुझे भी थी। इसलिए मैंने कॉफी के लिये कोई आना कानी नही की।

मैंने अपने बरमूडा से अपनी पिस्टस्ल को निकाल कर दराज में डाला और कॉफी बनाने के वास्ते किचन की ओर चल दिया।

मै कोई दस मिनट के बाद काफी बनाकर जब बैडरूम में पहुंचा तो अनामिका वहां नही थी।

मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई, लेकिन वो कहीं नजर नही आई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, उसका दरवाजा भी बाहर से ही लॉक था।

मैने दरवाजे पर नजर डाली, दरवाजा इस वक़्त हल्का सा खुला हुआ था। मुझे तत्काल इस बात का ध्यान हो आया कि दरवाजा मैंने अनामिका के घर मे घुसते ही बन्द कर दिया था।

अब दरवाजा खुला होने का मतलब था कि चिड़िया फुर्र हो चुकी थी।

मैंने दोनो कॉफी के कप टेबल पर रखे, और अपने बेड पर धम्म से बैठ गया।

मेरी समझ मे नही आ रहा था की मेरे फ्लैट में आने का उसका मकसद क्या था, और वो जिस तरह से एकाएक गायब हुई है, उसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।

अचानक ही मेरे दिमाग मे एक बिजली सी कौंधी और मै अपनी जगह से उछल कर खड़ा हो गया।

मैंने तत्काल कमरे में अपनी नजर घुमाई। घर की सभी चीजें अपने स्थान पर यथावत थी।

फिर मैंने दराजो को खंगालना शुरू किया। दराज में नजर पड़ते ही मेरे होश फाख्ता हो चुके थे।

आपके इस सेवक की पिस्टल दराज से गायब थी।


जारी रहेगा________✍️
bro.................. naya story ............. :love:
 
Top