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Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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:woohoo: :woohoo: :woohoo: :woohoo: :woohoo: :woohoo:
Lekhani ki jitni taarif ki jaaye kam hai !
Sirf ek hi afsos haio ki itna late kyu padhna shur kiya!
:thumbup:
Welcome to the story man, and thanks for your compliments :thanks:
 

Ajju Landwalia

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#17

"एक देवप्रिय नाम के साहब आये थे, लेकिन उन्होंने ज्यादा कुछ नही पूछा था" तान्या ने जवाब दिया।

"उसके बॉयफ्रेंड का नाम जानती हो" मैंने तान्या से पूछा।

"नही "तान्या ने इनकार में सिर को हिलाया।

"देविका का कभी इस रूम पर तुम्हारे पास आना हुआ है" मैने फिर से पूछा।

"हॉं शुरू में तीन महीने वो हमारे साथ ही यही रही थी, फिर अचानक से उसके पास काफी पैसा आ गया था, तो उसने रोहिणी के सेक्टर 24 में अपना एक फ्लैट खरीद लिया था" तान्या अब किसी भी सवाल का जवाब देने में अचकचा नही रही थी।

"संध्या का कत्ल कौन कर सकता है, ऐसा उसका कोई दुश्मन तुम्हारी नजर में है" मैंने फिर से पूछा।

"वो आजकल दिल्ली के एक गैंगस्टर के चक्कर मे फंसी हुई थी, वो गैंगस्टर कहीं बवाना की तरफ रहता है, कई बार वो उसे यहाँ रूम पर भी लेकर आई थी"

संध्या का किसी गैंगस्टर से रिश्ता होना मेरे लिए एक नई ख़बर थी, जिसके बहुत सारे मायने थे।

"उस गैंगस्टर का नाम बता सकती हो" मेरे लिए उसका नाम जानना भी जरूरी था।

"धीरज बवानिया" तान्या ने फिर से संक्षेप में जवाब दिया था।

"तुम भी मिली हो कभी उससे" मैने अगला सवाल किया।

"हाँ ! जब भी वो यहां आया है तो, उससे मुलाकात हो ही जाती थी" तान्या ने बताया।

"कभी ऐसा हुआ है कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड गौरव भी यहां हो और संध्या भी धीरज को लेकर यहां आई हो, और तुम दोनो के बॉयफ्रेंड की भी आपस मे मेल मुलाकात हो गई हो" मेरे इस सवाल पर तान्या थोड़ा सा अचकचा गई थी।

"जी हुआ तो है दो बार ऐसा" तान्या ने फंसे से स्वर में बोला।

"फिर कभी ऐसा कभी मन में नही आया कि तुम दोनो कपल एक साथ कही बाहर मौज मेले के लिए जाए, ऐसा अक्सर होता है, हम उम्र कपल में" मैने फिर से पूछा।

"नही ! ऐसा प्लान तो कभी नही बना, और न ही धीरज और गौरव आपस मे इतना खुले हुए थे" तान्या ने बताया।

"अपना फोन नंबर दीजिये, अगर दोबारा तुमसे बात करने की जरूरत महसूस हुई तो आपको फोन करके आ जायेगे" मैंने तान्या को बोला। तान्या ने बुझे दिल से अपना फोन नंबर मुझे दिया।

"अब आखिरी दो सवाल! संध्या को क्या डायरी लिखने का शौक था, और उसका गांव कौनसा था" मैंने चलने के अंदाज में उससे पूछा।

"डायरी वो हमेशा नही लिखती थी, कभी कभी शेरो-शायरी या ऐसी ही अपनी कोई याद उसे लिखनी होती थी तब वो लिखती थी, और गांव उसका राजस्थान में जयपुर के पास था...बावड़ी नाम था गांव का "तान्या ने अपनी याददाश्त पर जोर डालते हुए बोला।

"धीरज के लाइफ में आते ही उसने अपने गांव वाले बचपन के प्यार को भुला दिया था क्या "मेरे सवाल अभी खत्म नही हो रहे थे।

"शायद ! भुला ही दिया होगा, तभी धीरज उसकी लाइफ में आया होगा" तान्या ने जवाब दिया।

"संध्या का फोन नंबर भी तुम्हारे फोन में होगा, जरा वो भी मुझे दे दो, मुझे उसके बारे में कुछ जानकारी निकालनी है" मेरे बोलने के बाद ये एक और काम था, जो उसने बुझे दिल से किया था।

"इस केस से निबटने के बाद मुझ से आफिस में आकर मिलना, शायद तुम्हारी परेशानी कुछ कम कर दूं" सौम्या ने उस कमरे से बाहर निकलते हुए तान्या उसे बोला।

उसने अनुग्रहित नजरो से सौम्या को देखा। उसके बाद हम दोनों वहां से निकल आये थे, मुझे न जाने ऐसा
क्यो लग रहा था कि अभी बहुत सारे सवाल थे, जिनके उत्तर मुझें तान्या से लेने चाहिए थे, लेकिन दिमाग़ में अभी नया कुछ आ नही आ रहा था।

उस मकान से बाहर निकल कर सौम्या ने गाड़ी की ड्राइविंग सीट सम्हाल ली थी।

"अब किधर चले" सौम्या ने सवालिया निग़ाहों से मेरी ओर देखा। मैने अपनी कलाई घड़ी पर नजर डाली। रात के बारह से ऊपर का समय हो चुका था।

"अभी तो घर पर ही ले लो, आज रात को सोते हुए इस केस की सभी बिखरी हुई कड़ियों को जोड़ना है, हर कोई एक नई कहानी सुना रहा है सौम्या" मैने सौम्या की ओर देखते हुए बोला।

"ये कहानियां झूठी है या सच्ची" सौम्या ने पूछा।

"कुछ सच्ची है कुछ झूठी है, अब संध्या का एक गैंगस्टर से रिश्ता बताया जा रहा है, जो मुझे बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रहा है, हो सकता है संध्या और तान्या की तरह धीरज और गौरव में भी यहां आते जाते हुए गहरा याराना हो गया हो, गौरव पैसे वाला बन्दा था, और संध्या पैसो की पीर, उस पर गैंगस्टर लोग मानते ही है कि' पराया माल अपना'" मैने सौम्या की ओर देखते हुए बोला।

"ये तो एक नया ही एंगल पैदा हो गया, लेकिन इन सब मे देविका और मेघना और फिर रोमेश कहां से सम्मलित हो गया" सौम्या के जेहन में भी अब सवाल तैरने लगे थे।

"मत भूलो की देविका, संध्या और तान्या दोनो के ही संपर्क में रह चुकी है, और गौरव से तो उसका आशिकाना था ही, मतलब देविका और बाकी तीनो कॉमन फ्रेंड थे, फिर इन लोगो के साथ धीरज का मिलना कौन सी बड़ी बात थी" मैं अपने दिमाग को दौड़ाते हुए बोली।

"मेघना, इस तस्वीर में कहां फिट होती है" सौम्या ने अगला सवाल किया।

"मेघना के साथ तो देविका पहले से ही फिट है, उस एल्बम को भूल गई क्या तुम, जिसमे देविका और मेघना एक साथ फैमिली फ़ोटो में नजर आ रहे है" मैने सौम्या को ध्यान दिलाया।

"अब सवाल है कि संध्या और गौरव को क्यो मारा गया और उसमे रोमेश को कैसे फंसाया गया" सौम्या चलती हुई गाड़ी में ही क़ातिल तक पहुंच जाना चाहती थी।

"जब इतने सवालो की कड़ियाँ जुड़ चुकी है तो, बाकी की कड़ियाँ भी जुड़ ही जाएगी, कम से कम इस अंधेरी रात में इस केस में जो अंधकार छाया हुआ था, वो तो मिट गया, अब एक रास्ता तो नजर आया" मैने राहत भरे स्वर में कहा।

तभी सौम्या ने गाड़ी को अपने गेट पर रोका और उसके हॉर्न बजाने से पहले ही गार्ड के दौडतें हुए कदमो की आवाज सुनाई पड़ी और कुछ ही पल में गेट खुलता चला गया।

सौम्या ने गाड़ी को पोर्टिको में खड़ा किया और हम दोनों गाड़ी से उतरकर अंदर की ओर चल दी।

अगली सुबह होते ही मैंने जो सबसे पहला काम किया था वो था अपने खबरी को याद करना।

"आजकल दिल्ली शहर में मर्डर होने बन्द हो गए है क्या, जो इतने दिनों में मुझे याद किया" खबरी ने फोन उठाते ही शिकायती लहजें में बोला।

"तेरे गुरु तो खुद मर्डर के केस में थाने में हाजिरी बजा रहे है, तू कह रहा है कि मर्डर होने बन्द हो गए है" मैने खबरी को बोला।

"सुबह सुबह भांग खाली क्या रागिनी, गुरु क्यो किसी का मर्डर करने लगे" मुझे पता था कि मेरी तरह खबरी को भी इस बात पर विश्वास नही होने वाला था।

मैंने खबरी को शुरू से आखिर तक पूरी बात बताई।

"मतलब सारे पुराने पापी मिल कर गुरु को ठिकाने लगाने पर तुले हुए है" पूरी बात सुनने के बाद खबरी के मुंह से निकला।

"कुछ ऐसा ही है, लेकिन अभी हमारे सामने बहुत सारे काम बाकी है, जो सिर्फ मेरे अकेले के बस की करना नही हैं, क्यो कि मेरे पास समय बहुत कम है" मैंने खबरी को बोला।

"बोलो मुझे क्या करना है" खबरी ने व्यग्र स्वर में पूछा।

"तुम्हे अभी की अभी जयपुर रवाना होना है, जयपुर में एक गांव पड़ता है बावड़ी के नाम से, वहां जाकर इस संध्या नाम की लड़की की पूरी जन्मकुंडली निकाल कर लानी है, और संध्या को कोई उस गांव में कभी कोई प्रेमी भी हुआ करता था, उसका भी पूरा कच्चा चिट्ठा निकाल कर लाना है" मैने खबरी को बोला।

"ठीक है! मैं तैयार हो कर घँटे भर में जयपुर निकल जाता हूँ, और शाम होने से पहले ही वहां की पूरी खबर तुम्हे देता हूँ" ये बोलकर खबरी ने फोन रख दिया था।

कमाल की बात ये थी की आज उसने एक बार भी पैसो की बात नही की थी।

खबरी के फोन रखते ही मैंने देखा कि सौम्या भी उठ चुकी थी और मेरी तरफ ही गौर से देख रही थी।

"रात भर सोई नही थी क्या ! जो इतनी सुबह सुबह खबरी को भी उठा दिया।

"तुम तो अपने आफिस जाओगी ! मैं जरा सीधा देविका को उसके फ्लैट पर जाकर उसे एक बार फिर से बात करके देखती हूँ, तान्या की बातों से बहुत सारे नए सवाल फिर से खड़े हो गए है" मैने सौम्या की ओर देखते हुए बोला।

"आफिस तो बाद में जाउंगी, पहले रोमेश को सुबह का ब्रेकफास्ट और लंच भी तो देकर आना है" सौम्या ने बिस्तर को छोड़ते हुए बोला।

एक अरबपति महिला को अपने गुरु की इतनी फिक्र करते हुए देखकर गुरु के प्रति मन श्रद्धा से भर गया था। दिल्ली शहर की हसीनाओं में वाकई अपने गुरू का वेट था।

तभी राधा चाय की ट्राली के साथ कमरे में प्रवेश कर चुकी थी।

*********
गुरु को ब्रेकफास्ट और लंच देने के बाद भी सौम्या अपने आफिस नही गई थी, बल्कि वो मेरे साथ ही देविका के फ्लैट पर जा रही थी।

मुझे लगता था कि सौम्या अब गुरु के बाहर आने के बाद ही अपने आफिस में कदम रखने वाली थी।

हम थाने से कोई बीस मिनट में देविका के फ्लैट पर पहुंच चुके थे। दो दिनो से मेघना और देविका की कोई खोज ख़बर नही थी।

ऐसा लगता है कि वे दोनो सिर्फ उस पिस्टल को फिर से रोमेश के घर मे प्लांट करने के लिए ही हमारे सामने आए थे।

हम देविका के फ्लैट पर पहुंचे तो दरवाजे पर लगा हुआ एक बड़ा सा ताला हमारा मुंह चिढ़ा रहा था।

मैंने आहत नजरो से सौम्या की ओर देखा। उसके बाद हम वापस आकर गाड़ी में बैठ गए।

"अब किधर चले" सौम्या ने मुझ से पूछा।

"अब सेंट्रल जेल की तरफ़ ले लो" आज तुम्हारे पति देव से तुम्हे मिलाकर लाती हूँ" मैंने सौम्या की तरफ देखकर बोला।

"मुझे नही मिलना उस हरामी हस्बैंड से, उसकी तो शक्ल से भी नफरत है अब मुझे" सौम्या के चेहरे पर मैने पहली बार क्रोध देखा था।

"शक्ल तो देखनी पड़ेगी अभी, डिवोर्स फ़ाइल किया हुआ है, तो कोर्ट में तो जाना पड़ेगा" मैंने सौम्या को बोला।

"मेरे वकील सब सम्हाल लेंगे, मुझे तलाक तो घर बैठें मिल जायेंग़ा" सौम्या ने उसी लहजें में जवाब दिया।

"मुझे सेंट्रल जेल से एक जानकारी निकलवानी है कि जब से राजीव जेल में गया है, उससे किन किन लोगों ने मुलाकात की है, एक संभावना ये भी है कि उन मुलाकातियों में से ही कोई इस सारी प्लानिंग का सूत्रधार निकले" मैंने सौम्या को असल बात बताई।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Gangster ka bhi role aa gaya he story me

Kuch na kuch to bahut bada hone wala he..........

Keep rocking Bro
 

Raj_sharma

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Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Gangster ka bhi role aa gaya he story me

Kuch na kuch to bahut bada hone wala he..........

Keep rocking Bro
Dekhte jao bhaiya , kya kya hota hai aage 😎 sath bane rahiye, Thank you very much for your valuable review and support bhai :hug:
 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Ye chhoti si story me ye haal hai ju ka? Lavda agar ju supreme pe aaya hota to kam se kam 10 gaali baka hota mujhe :lol:
Multi plot addition, multivarsh, huge plot + huge character list. :chandu:
Yahi hota hai multiple wale me, har cheez ko justify karna padta hai, bole to mood ki maa bahan ho jati, :sigh:

Aur Isi liye raj rani restart nahi karta apan, ek to job ki vajah se waise hi time nahi milta, dusre kaun itne bade plot me bheja fry kare :D

Ju mean Sardi me garmi ka eahsaas wali baat? :shy:
Yeah! :approve:
 

Raj_sharma

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Yahi hota hai multiple wale me, har cheez ko justify karna padta hai, bole to mood ki maa bahan ho jati, :sigh:
Khopda kis liye hota man, use it :roll:
Aur Isi liye raj rani restart nahi karta apan, ek to job ki vajah se waise hi time nahi milta, dusre kaun itne bade plot me bheja fry kare :D
Ye bahane hain bachne ke liye:declare: Baaki job ko bolte ho to maan leta apun, ki uskme time lagta, but asambhav nahi hai wo :roll:
 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
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Khopda kis liye hota man, use it :roll:
As I said kaun bheja fry kare :dazed:
Ye bahane hain bachne ke liye:declare: Baaki job ko bolte ho to maan leta apun, ki uskme time lagta, but asambhav nahi hai wo :roll:
Agree! Asambhav nahi hai but...us story ko likhne ke liye ekdam fresh mood and time chahiye men, Kyoki usme aisi kai cheeze hain jise likhne ke liye waisa mood hona zaruri hai. Ju ne to read kiya hai use...usme fantasy drama magic ke sath sath love ka emotional angel bhi hai...rani poetry/ghazal likhti hai...just think ki kya wo itna easy hai :D
 

Raj_sharma

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As I said kaun bheja fry kare :dazed:

Agree! Asambhav nahi hai but...us story ko likhne ke liye ekdam fresh mood and time chahiye men, Kyoki usme aisi kai cheeze hain jise likhne ke liye waisa mood hona zaruri hai. Ju ne to read kiya hai use...usme fantasy drama magic ke sath sath love ka emotional angel bhi hai...rani poetry/ghazal likhti hai...just think ki kya wo itna easy hai :D
Sayri gazal apun ki thread se lelo, mood tumko banana hai, and baaki apun ko viswas hai ki ju manage kar sakta hai :roll3:
 
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Raj_sharma

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#18

मेरी बात सुनकर सौम्या ने सहमति में अपनी गर्दन हिलाई और गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।

अभी गाड़ी कुछ ही मीटर आगे बढ़ी थी कि एक साथ दो गाड़िया ठीक हमारे सामने आकर रुकी और उसमे से तकरीबन सात आठ लोग उतरकर हमारी गाड़ी की ओर बढ़े।

इतने लोगो को अपनी गाड़ी की तरफ आते हुए देखकर सौम्या के चेहरे पर भय के चिन्ह साफ देखे जा
सकते थे। लेकिन मेरी पिस्टल पर मेरी उंगलियां कस चुकी थी।

उनमे से एक लड़के ने आकर हमारी गाड़ी के शीशे पर खटखट की। सौम्या अभी भी भयभीत नजरो से उन लड़कों की ओर देख रही थी।

मैंने सौम्या की ड्राइविंग सीट पर ही बैठे रहने का इशारा किया और खुद दरवाजा खोलकर गाड़ी से बाहर आ गई।

"क्या तकलीफ है" मैंने उस लड़के की आँखों मे आँखे डाल कर पूछा।

"इतनी खूबसूरत लडकिया कभी इस इलाके में देखी नही थी, इसलिए रोकने का दिल कर गया" उसने बदतमीजी से मेरी तरफ अपने हाथ को बढ़ाकर मुझे छूने की कोशिश की, लेकिन मैं पलक झपकते ही उसकी पहुंच से दूर हो गई।

"सच बोलो ! किसके कहने पर हमे रोका है, नही तो एक भी बन्दा अपने पैरों पर वापिस नही जाएगा" मैंने उनकी तरफ देखते हुए बोला तो वो सब बाहुबली दांत चियार कर हँसने लगे थे।

शायद एक लड़की के मुंह से ऐसे शब्द उन शोहदों ने पहली बार सुने थे, लेकिन मुझे वे लोग शोहदे नही लग रहे थे, शोहदे दो गाड़ियों में इस तरह से लड़कियों को छेड़ने के लिये नही निकलते है।

आसानी से वे लोग मुझे बताने वाले लग नही रहे थे। उनसे कुछ उगलवाने के लिए उनकी खाल में भूसा भरना जरूरी था।

"बहुत हँसी आ रही हैं, मैने कोई जोक सुनाया था क्या" ये बोलकर मेरा एक पाँव हवा में लहराया और उस छपरी को अपने साथ लपेटते हुए सामने वाली दीवार से चिपका दिया।

इस वक़्त वो बन्दा दीवार से चिपका हुआ था और मेरा पाँव उसकी गर्दन पर था। ये मेरा पसंदीदा दांव था, लेकिन दिल्ली जैसे शहर में आजमाने का मौका कम ही मिलता था।

अपने साथी की ऐसी हालत हो जाने का तो बाकी लोगो को सपने में भी गुमान नही था।

तभी दो लड़कों ने एक साथ मुझ पर अपने हाथों के मुक्के बनाकर मेरी ओर चलाये, मेरी पाँव की फ्लाइंग किक अब उस बन्दे की गर्दन का त्याग करके उन दोनो लड़को की ओर घूमी, और यकीन मानिये पूरे डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से वो किक उन दोनों को एक साथ अपने साथ बहाकर ले गई।

वो सभी छिछोरे मेरी तरफ ऐसे देख रहे थे की मानो उनकी जिंदगी में कोई जलजला आ गया हो, अब एक साथ उन पांचों लड़को ने मुझें घेर लिया था, लेकिन तब तक सौम्या भी अपनी गाड़ी से बाहर निकल आई थी, और अपने बैग से अपनी पिस्टल निकाल कर उन लड़कों पर तान चुकी थी।

"सौम्या अभी इन्हें गोली मत मारना, ये साले सिर्फ लातो में ही अभी ढेर हो जायेगे" मेरे ये बोलते ही जैसे वहां कोई बिजली कौंधी हो।

मैंने अपने हाथ मे अपनी पॉकेट से निकाल कर पेन ले लिया था, और इस वक़्त मेरे पांव ही नही मेरे हाथ भी सिर्फ घुमते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें कोई देख नही पा रहा था, महज तीन मिनट में उन लोगो के चेहरों पर अनगनित निशान उस पेन से कटने की वजह से बन गए थे और वे सभी अपने चेहरों को अपने हाथों से छुपाए हुए दर्द से कराहते हुए जमीन पर लोट लगा रहे थे।

तभी मैंने उनमे से एक बन्दे को उसकी गिरेबान पकड़ कर उठाया और अपनी दो उंगलियों को उसकी आँखों के पास लहराया।

"अब दो सेकेण्ड में बता की किसके कहने पर यहां आए थे, नही तो तेरी दोनो आंखे अभी हमेशा के लिए बुझ जायेगी और तू अंधा होकर घूमेगा" मैंने बर्फ से भी सर्द स्वर में उसे बोला। तब तक सौम्या भी मेरे करीब आकर खड़ी हो चुकी थी।

"हमारे पास तो चंदन भाई का फोन आया था, की इस मकान में कोई भी आये तो उन्हें पकड़ कर उनसे पूछताछ करना कि वो यहां क्यो आये है" उस लड़के की अंधा होने के नाम से ही उसके पिछवाड़े से हवा निकल चुकी थी, इसलिए वो बिना रुके बोल रहा था।

"ये चंदन कौन है" मैंने उससे अगला सवाल किया।

"नांगलोई में रहता है जी, नजफगढ़ रोड पर एक कॉलोनी है, उसमे रहता है" उस लड़के ने फिर जवाब दिया।

"उसका पता ठिकाना बोल और वो नंबर बता जिस नंबर से उसका फोन आया था" उसने फोरन से पेश्तर मेरे इस सवाल का भी जवाब दिया।

"लेकिन इन लोगो को ऐसे छोड़कर जाएंगे तो ये पहले से ही उस चंदन को खबर कर देंगे" सौम्या मेरी ओर देखकर बोली।

"इस बात का जवाब मै गाड़ी में बैठकर दूँगी, अभी हम जिस काम के लिए जा रहे थे, वो काम ज्यादा जरूरी है, इन टटपुंजियो से तो कभी भी निबट लेंगे" मैने सौम्या को जवाब दिया।

"हॉं तो भाई लोगो ! तुम लोगो की इतनी सेवा ही काफी है या अभी और सेवा पानी करूँ तुम्हारी" मैं एक बार फिर से उन सभी की ओर मुखातिब हुई।

वे सभी इस तरह से बेदम पड़े थे, की बिना पानी पिलाये वे लोग होश में नही आने वाले थे।

"तुम्हारी गाड़ियों में पानी तो होगा न, इन्हे लाकर पिला दे, नही तो रागिनी के हाथ से मार ख़ाया हुआ इंसान चार घँटे से पहले होश में नही आता" मैंने उस लड़के को बोला, जो मेरे सवालो का जवाब दे रहा था, उसके बाद मैं गाड़ी की ओर बढ़ गई।

सौम्या भी फोरन से पेश्तर मेरे पीछे लपकी।

"अब जवाब दो ! इन लोगो को ऐसे ही क्यो छोड़ दिया" सौम्या ने एक बार फिर से ड्राइविंग सीट सम्हालते हुए पूछा।

"अगर ये हरामखोर एक दो होते तो इन्हे बांधकर डिक्की में भी डाल लेते, लेकिन इन आठ लोगो को एक साथ कैसे सम्हालते, इसलिए उनको यही छोड़ना ठीक लगा, अब ये अपने बाप को बोलेंगे की एक लड़की ने उनकी क्या हालत की है तो, अब वो फिर से ऐसी टुच्ची हरकत करनें से बाज आएंगे, दूसरी बात या तो देविका के मकान की निगरानी की जा रही है, या फिर हमारा पीछा किया जा रहा है, अब मैं सेंट्रल जेल के रास्ते तक ये देखना चाहती हूँ कि हमारे पीछे कौन आ रहा है" मैने एक साथ सारे कारण सौम्या को समझा दिए थे।

सौम्या मुरीद नजरो से मेरी ओर देखते हुए मुस्करा दी।

"तुम्हारे हाथ पांव ही नही बल्कि दिमाग भी तेज चलता है" सौम्या ने मुरीद स्वर में ही बोला।

"एक बात समझ नही आई कि ये साले कैसे बदमाश थे, जिनके पास न हथियार थे, न कुछ" सौम्या एक बार फिर से बोली।

"साइक्लोजिकल उन्होंने सोचा होगा कि दो लड़कियां ही तो है, आठ लड़के तो दो लड़कियों को चुटकियों में काबू कर लेंगे, इसलिए या तो वे हथियार लाये नही होंगे, और अगर लाये भी होंगे तो उन्हें मार खाते हुए साँस लेने की फुरसत तो मिल नही रही थी, हथियार निकालने की कहाँ से मिलती"

मेरी बात सुनते ही सौम्या की एक जोरदार खिलखिलाती हुई हँसी उस गाड़ी में गूँजी। लेकिन मेरी नजर अपने साइड मिरर में अपने पीछे आती हुई गाड़ी को ही ढूंढने की कोशिश कर रही थी।

सेंट्रल जेल तक पहुंचने में तकरीबन एक घन्टा लग गया था। राजीव बंसल के मुलाकातियों का डाटा निकलवाने के मेरे पास दो तरीक़े थे, एक तरीका था एक बार फिर से मैं एसीपी शर्मा जी को परेशान करती, जो कि मुझें इस बार गवांरा नही हुआ।

दूसरा रास्ता था कि मैं मुलाकाती कक्ष में जाकर गुरू की स्टाइल में कुछ चक्कर चलाऊँ और अपना काम निकाल लूं। इस समय मुझे गुरु की स्टाइल में इस काम को अंजाम देना सही लगा।

मैं सौम्या के साथ जेल के उस मुलाकाती कक्ष में पहुंची। वहाँ इस वक़्त उस दिन के मुलाकातियों का
तांता लगा हुआ था।

मेरी नजर किसी ऐसे काम के बन्दे को ढूंढ रही थी, जो मेरे काम को दिलचस्पी लेकर कर दे।

तभी एक सिपाही एक रजिस्टर को हाथ में थामे हुए मेरी बगल में से गुजरा। मैं पता नही क्या सोचकर उस सिपाही के पीछे चल पड़ी।

वो सिपाही कुछ लोगो के पास जाकर खड़ा हुआ, उन लोगो मे से एक बन्दे ने उस सिपाही का हाथ अपने हाथ मे पकड़ा और उसकी हथेली में एक नोट फंसाकर उसकी हथेली को बन्द करने लगा।

वो सिपाही गर्दन भले ही न में हिला रहा हो, लेकिन उसकी मुट्ठी लगातार उस नोट को भींचने में लगी हुई थी।

जिस प्रकार के बन्दे को मैं तलाश रही थी, वो मेरी नजर के सामने था, थोड़ी सी न नुकर का ड्रामा करके उस सिपाही ने उस नोट को अपनी जेब के हवाले किया और उन लोगो को कुछ बोलकर वापिस हमारी और ही आने लगा था।

जैसे ही वो मेरे पास से गुजरा, मैने उसकी पट्टिका पर लिखा हुआ नाम पढ़ा। जिस पर मोटे अक्षर में लालचंद लिखा हुआ था।

"लालचंद जी" उसका नाम पढ़ते ही मैने उसे आवाज लगा दी थी। जैसे ही उसके नाम की आवाज उसके कानों में पड़ी, उसके कदम जहाँ के तहाँ रुक गए।

उसने पलट कर हमारी और देखा, मैंने उसके देखते ही एक मतलबी मुस्कान उसकी तरफ फेंकी। उसने भी अपने पांव उलटे खिंचने में पल भर की भी देरी नही लगाई।

"जी मैडम!आपने ही मुझे पुकारा था" लालचंद ने अपने स्वर में मिश्री घोलते हुए कहा, जिसकी आमतौर पर पुलिसियो से अपेक्षा नही की जाती थी, क्यो कि वर्दी पहनते ही एक आम पुलिसिये की चाल में और आवाज में एक अजीब सा अक्खड़पन आ जाता है।

लेकिन इस वक़्त मेरा उस मिश्री जैसी आवाज का जवाब अपने स्वर में गुड़ की देशी मिठास घोलकर देना जरूरी थी।

"जी ! आपसे एक काम है, दो मिनट के लिए आपसे बात कर सकते है" मैने लालचंद को बोला।

"जी बोलये मैडम, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ" लालचंद अभी तक मिश्री की डली ही बना हुआ था।

"कही बैठकर बात हो सकती है क्या आपसे" मैंने अब दो मिनट से ज्यादा का कार्यक्रम उसे समझाया।

"मैडम मैं अभी पांच मिनट में एक आर्डर की कॉपी अपने साहब को देकर अभी हाजिर होता हूँ, फिर बात करते है" लालचंद ये बोलकर वहां रुका नही क्यो की अभी शायद उसी आर्डर के पहिये उन लोगो ने लगाए थे, जिनके पास से अभी नोट अपनी जेब मे डालकर आया था।

हमे कोई दस मिनट के बाद लालचंद ने ले जाकर एक कमरे में बैठा दिया और खुद भी एक कुर्सी खींचकर हमारे पास ही बैठ गया।

"बोलिये मैडम, क्या काम है आपको" लालचंद ने पूछा।

"एक उम्र कैदी की पिछले दो साल की जानकारी चाहिये कि उससे किस किस ने जेल में आकर मुलाकात की" मैंने बिना कोई भूमिका बनाये हुए ही सीधा बोला।

"आप कौन हो मैडम, ऐसा काम करने के लिए हमे आज पहली बार किसी ने बोला है" लालचंद ने असमंजस से मेरी ओर देखा।

"काम भले ही किसी ने पहली बार बोला है, लेकिन काम इतना मुश्किल भी नही है, तुम्हे बस दो साल के रजिस्टर ही चेक करने होंगे" मैंने लालचंद को बोला।

"अब रजिस्टर नही चेक करना पड़ता, सब कम्प्यूटर में चेक करना पड़ता है" लालचंद ने बिना पूछे ही बताया।

"ये तो और भी आसान है लालचंद जी, और इस आसान से काम के मै आपको पांच हजार रु दे सकती हूँ" मैंने उसके आगे चुग्गा फेंका।

"लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप हो कौन" लालचंद को फिर से अपना पुराना सवाल याद आ गया था।

"मैं एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, मुझे एक केस के सिलसिले में उस कैदी की डिटेल चाहिए" मैंने अपना वास्तविक परिचय दिया।

"केस क्या है" लालचंद को पूरी कहानी जाननी थी।

"यार तुम आम खाओ न, गुठलियां गिनने के चक्कर में क्यो पड़े हो" मैंने इस बार उसे हल्का सा हड़काया।

"मैंने अगर ये काम किया तो, जिंदगी में पहली बार ऐसा काम करूँगा, मैं ये जानना चाहता हूँ कि इस काम से मेरी नौकरी को तो कोई खतरा नही हैं" लालचंद को अपनी नौकरी के बारे में फिक्रमंद होना भी लाजिमी था।

"ये जो मैडम मेरे साथ बैठी है, इनके पति है वे, जिनकी डिटेल हमे निकलवानी है, वो एक मर्डर के केस में उम्रकैद की सजा पा चुके है, मैडम उनसे तलाक लेकर अपना घर फिर से बसाना चाहती है, अब तुम्ही बताओ एक क़ातिल की बीवी बनकर कैसे रहेगी ये मैडम समाज मे, क्या इसे अपनी जिंदगी जीने का अधिकार नही है, क्या इसे अपनी नई दुनिया बसाने का अधिकार नही है" मैंने एक भावपूर्ण कहानी उसे सुनाई।

मेरे बोलने के दौरान वो एकटक सौम्या की ओर ही देख रहा था, तभी सौम्या ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Always welcome bro

शाबाश :D

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

Nice update

:congrats: start new story

Awesome update and lovely story

Intresting, kahani har update ke baad aur rochak hoti jaa rahi hai, kamal likh raha hai Raju, ye bc dono choriya to romesh ki lene me lagi hue hai...
Dekhte hai kya hota hai.

रिव्यू की शुरुआत की जाए

कहानी में पुराने हथकंडे खुलते जा रहे हैं, क्या हुआ, किस वजह से, क्या हो रहा धीरे-धीरे सामने आता जा रहा है।

मैंने आख़िरी रिव्यू में कहा था कि जो लाश मिली है, उनसे रोमीश का कनेक्शन कुछ न कुछ ज़रूर होगा, वरना मर्डर के इल्ज़ाम रोमीश पर इतना आसानी से नहीं जाता।

अब वह लड़की जिसकी लाश मिली, वह रोमीश की परिचित तो नहीं लगती है। उसके ही जिस भी डायरी सामने आई, वह भी लग तो फ़ेक रही है। सोचने में कहीं न कहीं कुछ तो मिसिंग लग रहा है कि किसने वह फ़ेक सबूत प्लांट किया।

जिस तरह अभी भगवान सिंह के सुर बदले लग रहे हैं, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि दुश्मन खेमे की पहुँच आला अधिकारी तक है। क्योंकि पहले देवप्रिय, अब भगवान सिंह ये लोग किसी के दबाव में रोमीश को धरना चाहते हैं।

कुछ हद तक मेरा मानना है कि कुछ लोग रोमीश की पुलिस के ऊपर तक की पहुँच से जलते हैं। क्योंकि जो काम पुलिस का है, उसमें रोमीश नाम का प्राइवेट डिटेक्टिव आता है और केस सॉल्व कर देता है, जिससे स्वाभाविक है कि उच्च अधिकारी में पुलिस डिपार्टमेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मेरा एक कंसर्न है जिस तरह अपडेट के बीच में सीन टाइटल दिया गया है, उदाहरण: कुमार गौरव की लाश वह सस्पेंस खत्म कर देता है।

वैसे दिमाग में बात आई है कि जिस महिला की वजह से पूरा कांड हुआ, उसका तो ज़िक्र आया नहीं है। अशोक बंसल की आधी उम्र की लवर क्या सच में मर गई या वह अभी अंडरग्राउंड में ज़िंदा है। वैसे वह महिला 27–28 की होनी चाहिए। मुझे क्या लगता है, यह महिला हमें आगे देखने को मिलेगी, क्योंकि लेखक महोदय बड़ी चालाकी से उस महिला का विस्तार कम शब्दों में निपटा गए, तो इसलिए शक जायज़ है।

अब मुझे माजरा यह समझ नहीं आ रहा है कि रोमीश के ऊपर अगर कुमार की हत्या का इल्ज़ाम लगवाना है, तो वह कैसे लगेगा। क्योंकि रोमीश के अनुसार उसे कुमार ने अभी फ़ोन किया है, वह भी उस समय पुलिस स्टेशन में था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु समय बताया जाएगा और सीसीटीवी की मदद से रोमीश साबित कर देगा कि मैं तो पुलिस स्टेशन में था उस समय। साथ ही रोमीश की पिस्टल पुलिस कस्टडी में है। अगर कुमार की हत्या रोमीश की पिस्टल से की जाती है, तो डिपार्टमेंट पर सवाल उठेगा कि तुम्हारी कस्टडी से पिस्टल कैसे गायब हुई।

कुल मिलाकर बहुत कुछ हो रहा है।
अगले अपडेट का इंतज़ार

Raj_sharma

Waise ye wala Dialogue mast laga mujhe emoji ke sath 😂😂😂😂

Nice update....

कहानी को दिलचस्प बनाना आप के बाए हाथ का खेल है. कुमार गौरव की गाड़ी ले गई और रमेश की पिस्टल. चलो वो अनामिका दरसल मालिक्का है. यह तो पता चला. गौरव की गाड़ी तो मिल गई. अब पिस्टल कहा मिलेगी वह देखते है.

Kahani ki shuruaat achhi he laadle :applause:

Chupna kyu h i will DM you once done

Nice. Mast Update. :applause:

कुमार गौरव वाला एंगल तो मैं भूल ही गया था.


अच्छा हुआ याद आ गया. एकबार फिर से पढ़ूँगा उस पार्ट को. पता नहीं ऐसा क्यों लग रहा है की गौरव की मौत वाला चक्कर असल में कुछ और ही है.. अगर गौरव का कोई डुप्लीकेट निकल गया तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा.

देखते हैं कहानी में नयी लड़की के आने से झोल और बढ़ेगा या कुछ सुलझेगा भी? रागिनी का स्टाइल बहुत अच्छा लगा मेरे को. हमारे डिटेक्टिव महोदय को कुछ सीखना चाहिए अपनी असिस्टेंट से... साला चोदू..! 😏

50th page complete hone ki bhut bhut शुभकामनाएं

Nice update Bhai
Romesh ke to L lga diye dono ladkiyo ne ya Jo bhi iska mastermind h

Nice update

Shaandar update

Nice update....

kahani JOR pakad rahi hai ............... sarkar ..................... :happy:

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Ragini ko tanya se kuch jankari to mili
Dhekte hai ab centeral jail se kya jankari milti hai

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Gangster ka bhi role aa gaya he story me

Kuch na kuch to bahut bada hone wala he..........

Keep rocking Bro

As I said kaun bheja fry kare :dazed:

Agree! Asambhav nahi hai but...us story ko likhne ke liye ekdam fresh mood and time chahiye men, Kyoki usme aisi kai cheeze hain jise likhne ke liye waisa mood hona zaruri hai. Ju ne to read kiya hai use...usme fantasy drama magic ke sath sath love ka emotional angel bhi hai...rani poetry/ghazal likhti hai...just think ki kya wo itna easy hai :D
Update posted friends :declare:
 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Sayri gazal apun ki thread se lelo, mood tumko banana hai, and baaki apun ko viswas hai ki ju manage kar sakta hai :roll3:
Shayri ghazal apan khud hi likh leta hai, bole to badka wala shayar hai apan, but baat wahi hai time aur mood, pahle apan job nahi karta tha aur ghar ki koi responsibility bhi nahi thi to apan free mind se sab likh leta tha but ab dimag me duniya bhar ka tention ghus gayla hai is liye thoda uneasy ho gaya hai :dazed:
 
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