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Incest इंस्पेक्टर की बेटी

Ashokafun30

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आग लगा देते हो अशोक भाई
🔥 :sex: 🔥
हर शब्द में कामरस भर देने की विलक्षण प्रतिभा है आपमें और कोमल भाभी में
Apna to pata nahi par komaalrani ka to mai bhi bahut bada fan hu.
Keep reading and enjoy
 

Ashokafun30

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Mujhe is forum pe 8-9 saal ho gye
Par abhi tak mujhe ye nhi aata
Kisi member ke naam ko highlight kaise karte hain???
name se pehle @ ka sign lagao aur name likho fir, auto suggest me aa jayega name bhi, usko select kar lo...
 

Luckyloda

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Bh
फिर मैं उसकी तरफ सिर करके उसकी बाहों में लिपट गयी और धीरे से उसके कान में फुसफुसाई
“थॅंक यू श्रुति….फॉर दिस “
वो मुस्कुराइ और बोली : “थेंक्स टू यू मेरी जान….इतना मज़ा तो मुझे नितिन ने भी नही दिया जितना तूने आज दे दिया है….थेंक यू एंड लव यू …”
इतना कहते हुए उसने अपने वो गीले होंठ मेरे होंठो पर रखे और उन्हे चूसने लगी
यार……वो किस्स मैं कभी नही भूल सकती, मेरी ही चूत का रस उसके होंठो पर था, और साथ में उसके मुँह की मीठी लार भी, उन दोनो का किल्लर कॉंबिनेशन मुझे किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था
और ये एहसास भी दिला रहा था की अब मुझे भी अपने इस जवान जिस्म को वो मज़े दिलवाने चाहिए जिसका ये हकदार है
पर कैसे मिलेंगे वो मज़े ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा

***********
अब आगे
************

शाम को पापा के आने से पहले श्रुति अपने घर चली गयी, वो उन्हे फेस करना नही चाहती थी, क्योंकि वो भी तो थी क्लब में मेरे साथ
मैने भी एक बुक ले ली और ब्लैक कॉफी पीते-2 बाल्कनी में बैठकर उसका मज़ा लेने लगी

बाहर की बेल बजी तो मेरे दिल की धड़कन एकदम से ना जाने क्यों तेज हो गयी
पापा का यही ख़ौफ़ था बचपन से मेरे अंदर
जो उनके आने से मुझे अंदर तक हिला कर रख देता था

पर आज मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था
आख़िर हैं तो वो मेरे पापा ही ना
एक औलाद अपने माँ -बाप से ऐसे डरकर रहेगी तो कैसे चलेगा
अभी तो मेरी शादी होने में भी 5-7 साल का टाइम था
और उसके बाद भी मुझे आते रहना पड़ेगा अपने घर

इसका मतलब ये तो नही हुआ की पूरी जिंदगी उनसे डर कर ही निकाल देनी है
पर मैं डर क्यों रही हूँ उनसे

आज इसी बात का मंथन चल रहा था मेरे दिलो दिमाग़ में

एक तो वो शुरू से ही पुराने विचारों वाले थे
उपर से पुलिस में रहते हुए उन्हे दुनिया भर के ग़लत काम करने वाले लोगों से मिलना पड़ता था, उनके केस देखने पड़ते थे
गुंडे मवालियों की नज़रों में कितना कमीनापन होता है ये शायद उनसे बेहतर कोई और नही जानता होगा
और शायद इसलिए ही वो मुझे उन सबसे बचा कर रखना चाहते थे

ना तो मुझे ऐसे कपड़े पहनने देते जिन्हे देखकर बाहर के लोगो के मुँह से लार टपक जाए
और ना ही मुझे ये क्लब या सिनेमा जाने की छूट देते थे, जहाँ जाकर मेरे दिलो दिमाग़ में आजकल की नारी होने का घमंड आ जाए
वैसे अपने हिसाब से वो सही थे, एक पापा को इतना प्रोटेक्टिव तो होना ही चाहिए

पर हम बच्चो का नज़रिया भी तो मायने रखता है
मैं उन सिनेमा को देखकर या क्लब में जाकर बिगड़ ही जाऊं, ये तो मेरे उपर भी है ना
मैं खुद अपने हितों से समझोता करके नही रह सकती थी
बस यही बात पापा को समझानी थी
और ये कैसे होगा इसका आइडिया भी मुझे आ चुका था
मुझे उनका नज़रिया बदलना पड़ेगा
और कुछ नया दिमाग़ में आते ही मैं झट से उठी और अपनी अलमारी में रखे कपड़े इधर उधर करके एक ख़ास ड्रेस ढूँढने लगी

पापा घर आने के बाद नहा धोकर गेस्ट रूम में जाकर अपनी बार के सामने बैठ जाते थे और देर रात तक टीवी देखते हुए पीते रहते थे
ये लगभग रोज का नियम था उनका

माँ शुरू में तो उन्हे खाना देने के लिए जागती रहती थी
पर फिर शायद उन दोनो की सहमति से वो 10 बजे सोने चली जाती और बाद मे पापा खुद से खाना खाकर सो जाय करते थे

मैने 10 बजने का इंतजार किया ताकि माँ सोने चली जाए, तब तक मैं भी खाना खा चुकी थी
अब मेरा असली काम शुरू होने वाला था

मैने अपनी अलमारी से वो कपड़े निकाले जो मैने शाम को ढूँढ कर रखे थे
ये एक नाइट सूट था, जिसमें एक टाइट सी शर्ट और शॉर्ट्स थी

शर्ट थोड़ी छोटी थी , जिसमें मेरी नाभि दिखती थी
और ये मैने आज ढूँढ कर इसलिए निकाली थी क्योकि आज से करीब 2 साल पहले जब मैं ये कपड़े मार्केट से लेकर आई थी वो पापा ने मुझे उनमे देखते ही बहुत डाँटा था, वही मोरल लैक्चर वगेरह -2
पर आज फिर से उन्ही कपड़ों को पहनने की हिम्मत पता नही कहाँ से आ गयी थी मुझमे



मैने शर्ट के नीचे ब्रा भी नही पहनी थी, और पिछले 2 सालो में मेरी ब्रेस्ट का साइज़ थोड़ा बढ़ भी गया था
इसलिए वो शर्ट मुझे काफ़ी टाइट आ रही थी
उसमे मेरे बूब्स पर लगे निप्पल्स और भी ज़्यादा चमक बिखेरते हुए उजागर हो रहे थे

और यही हाल मेरी शॉर्ट का भी था
मुझे अच्छे से याद है की वो थोड़ी ढीली थी मुझे
पर आज पहन कर पता चला की मेरे नितंब उसमे काफ़ी मुश्किल से समा पाए
वैसे मुझे अपने हिप्स पर काफ़ी गुमान था
पुछले कुछ महीनों में उनपे जो माँस की परतें चढ़ी थी, उसे महसूस करके मुझे काफ़ी खुशी मिलती थी
ख़ासकर तब जब लड़के मेरा पिछवाड़ा देखकर आहें भरते थे

अब मैं एकदम टाइट से नाईट सूट में खड़ी थी
एक पल के लिए तो मुझे काफ़ी डर भी लगा की कही मेरा प्लान बेकफायर ना कर जाए
पर आज सुबह जिस अंदाज से पापा ने मुझे सोते हुए देखकर अपना लॅंड रगड़ा था, उसके हिसाब से तो मुझे अपना प्लान सफल होता दिख रहा था

मैने लंबी साँस ली और हिम्मत करके अपने कमरे से निकल कर बाहर आ गयी
ड्रॉयिंग रूम में फ्रिज रखा हुआ था, मैने दरवाजा खोलकर पानी की बॉटल निकाली और उसे उपर मुँह करके पीने लगी
मेरे दायीं तरफ ही गेस्ट रूम था और पापा ने मुझे वहां से पानी पीते हुए देख लिया था
मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी
मैं तिरछी नज़रों से उन्हे देख रही थी, वो दम साधे मुझे ही घूर रहे थे
कभी मेरे पिछवाड़े को और कभी मेरे उभरी हुई छातियों को

मेरे निप्पल्स एरेक्ट हो चुके थे, इसलिए जाहिर था की वो अलग से दिख रहे थे उन्हे
और तभी मुझे ध्यान आया की फ्रिज से आती हुई रोशनी के सामने मैं खड़ी थी
और दूर बैठे पापा को उस ड्रेस की महीन परत के पीछे से आ रही रोशनी की वजह से मेरे पूरे शरीर का उतार चढ़ाव सॉफ दिखाई दे रहा होगा

मैं उन्हे देख रही थी तो मेरा ध्यान पानी की बॉटल से हट गया और एकदम से काफ़ी सारा पानी मेरे चेहरे को भिगोता हुआ मेरे बूब्स पर आ गिरा

ठंडा पानी और गर्म एहसास
मेरा गर्म बदन जल सा उठा उस ठंडे पानी के छोंक से
जैसे गर्म तवे पर पानी की बूंदे दे मारी हो

और तभी पापा की आवाज़ मुझे आई : “सलोनी, अभी तक सोई नही….”

मैने हड़बड़ा कर उन्हे देखा तो वो हाथ में दारु का ग्लास लेकर मेरे बूब्स को ही देख रहे थे, शायद पारदर्शी हो गयी थी मेरी शर्ट

मैं : “वो….पापा…प्यास लगी थी…”

पापा : “हम्म ….एक ठंडे पानी की बॉटल मुझे भी देना ज़रा “

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी
शिकार ने चारा चुग लिया था

मैने वही बॉटल ली जिससे अभी पानी पिया था मैने और पापा की तरफ चल दी
पापा की भूखी नज़रें मुझे उपर से नीचे तक स्केन करने में लगी हुई थी
मैने उन्हे बॉटल दी और जाने लगी तो उन्होने मुझे रोका

“सुनो….ये कैसे कपड़े पहने है तुमने…”

उनकी नज़रें अभी भी मैं अपने बूब्स पर महसूस कर पा रही थी

मैने मासूमियत से भरा चेहरा बनाया और उनकी तरफ देखा

“क्यों , क्या परेशानी है इनमे पापा….”

पापा : “ये…..ये….इतने छोटे…मेरा मतलब है….देखो खुद ही…निक्कर कितनी छोटी है और ये शर्ट भी….त….तुम्हारी….तुम्हारी नाभि तक दिख रही है इसमे…”

उन्होने बोल तो दिया पर फिर खुद ही नज़रें चुराने लगे मुझसे

मैं : “पापा…ये तो मेरा नाइट सूट है…और वैसे भी ये सिर्फ़ घर पर ही तो पहना है….यहाँ आपके और माँ के सिवा कौन है जो मुझे देखेगा…आपके सामने तो ये पहन ही सकती हूँ ना…”

अब उनकी नज़रें मेरे चेहरे पर आ कर जम गयी
मेरे चेहरे पर मासूमियत भी थी और बचपना भी

और वो पिघल गये

“उम…हाँ ….. घर वालो के सामने ही ….मेरे सामने तो पहन ही सकती हो….”

मेरा चेहरा ये सुनते ही खिल सा गया

“थेंक यू पापा….मेरे अच्छे पापा”

और इतना कहते हुए मैं झट्ट से आगे गयी और उनकी गोद में बैठ गयी और उन्हे ज़ोर से हग कर लिया

ये मैने कैसे किया इसका तो मत ही पूछो

मुझे मेरी तो क्या , पापा के दिल की भी तेज धड़कनों की आवाज़ सॉफ सुनाई दे रही थी
उन्हे तो शायद उम्मीद भी नही थी की मैं ऐसी हरकत करूँगी
हाँ , बचपन मे मैं अक्सर उनकी गोद में चड़कर घंटो तक खेला करती थी
पर जवानी में ये मेरा पहली बार था
बहुत ही सोची समझी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है बेचारे inspector सहाब को......



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