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Thanks Premkumar65 bhaimast update. ab kuchh lesbian action hoga Renuka ke sath.
Thanks Ajju Landwalia bhaiBahut hi mast update he vakharia Bro
Mausam ki pehli barsat ka maja pehle piyush hi lene wala he............
Gazab Bhai
Keep rocking
Thanks Premkumar65 bhaisheela is just tooo sexyyyy.
sheela is just tooo sexyyyy.

bahut hi sexy update.पार्टी खत्म होने की कगार पर थी.. रेणुका ने सब को आखिरी बार संबोधित करते हुए कहा
"प्यारे परिवारजन, मेरे जन्मदिन को आप से सब ने अपनी उपस्थिति से यादगार बना दिया.. आप सब भविष्य में भी हमारे साथ जुड़े रहेंगे ऐसी अपेक्षा और विश्वास है.. अगली बर्थडे मैं बेंगकॉक में मनाना चाहती हूँ.. आप सब के साथ.. थेंक यू राजेश फॉर गीविंग मी सच अ मेमोरेबल पार्टी एंड थेंक यू एवरीबड़ी.. अगर किसी को भी कुछ तकलीफ हुई हो तो क्षमा चाहती हूँ.. इसके साथ ही आज की शानदार रात को यहीं खतम करते है.. आप सब अपने कमरे में जाकर आराम कीजिए.. कल सुबह साइट-सीइंग की लिए चलेंगे.. और दोपहर के बाद हम वापिस लौटने का सफर शुरू करेंगे.. गुड नाइट एंड स्वीट ड्रीम्स!!"
सब ने तालियों से पार्टी का समापन किया.. एक के बाद एक सब अपने कमरे की और जाने लगे.. सब के साथ कोई न कोई था.. सिर्फ वैशाली ही अकेली थी.. अपनी इस स्थिति से काफी व्यथित हो गई वैशाली.. सब के साथ कोई न कोई साथी था.. और वो यहाँ अकेली थी जब की संजय वहाँ किसी रांड की बाहों में पड़ा होगा..
साली कैसी कमबख्त ज़िंदगी है ये!!! आज संजय और मेरे बीच सब सही होता तो हम भी हाथ में हाथ डालकर डांस कर रहे होते.. पार्टी का अलग ही मज़ा आता.. बाकी कपल्स की तरह रूम में जाकर जबरदस्त चुदाई भी करते.. ऐसे खुले वातावरण में कितनी सारी इच्छाएं उठती है मन में!! पीयूष के साथ उतावला सेक्स और राजेश सर के साथ टॉइलेट में चुदाई ना करवानी पड़ती आज.. आराम से ए.सी. रूम में मुलायम बेड पर टांगें फैलाकर चुदवाती..!! सब निकल रहे थे और वैशाली इन खयालों के कारण उदास खड़ी हुई थी
"आप अभी भी यही खड़ी हो?? कमरे में चलना नही है क्या? सब चले गए.. " फाल्गुनी ने वैशाली का हाथ पकड़कर खींचा तब वैशाली अपने विचारों से बाहर आई.. वैशाली की आँखों के कोने में चमक रहें आंसुओं को देखकर वह समझ गई की कुछ तो गड़बड़ थी.. वरना इतनी शानदार पार्टी के बाद भला कोई उदास क्यों होगा!!
"इतनी उदास क्यों हो दीदी?" फाल्गुनी ने पूछा
"कुछ नही.. बस मेरे पति की याद आ गई थी.. "
"ओह्ह इतनी सी बात.. उदास क्यों हो रही हो.. फोन उठाओ और बात कर लो.. " नादान फाल्गुनी ने कहा
"नही फाल्गुनी.. मेरी समस्या गंभीर है.. तू नही समझेगी.. ज़िंदगी ने ऐसे अजीब मोड पर लाकर खड़ा कर दिया है की मुझे खुद ही नही पता आगे क्या होगा!!"
फाल्गुनी: "आपके हसबंड और आपके बीच झगड़ा हुआ है?" बड़ी ही निर्दोषता से उसने पूछा
"झगड़ा नही हुआ है.. जिंदगी ही खतम हो गई है.. पिछले दो सालों से हमारे बीच मनमुटाव है.. काफी समय से हम एक दूसरे से ठीक से बात भी नही करते.. यहाँ सब कपल्स को इन्जॉय करते देख मेरा दिल भर आया... दुख होना स्वाभाविक है!!"
पूरे हॉल में बस फाल्गुनी और वैशाली अकेले बचे थे..
"मैडम जी, अगर आपको यहाँ रुकना हो तो मैं हॉल बंद करने बाद में आऊँ?" मेनेजर ने उनसे पूछा
"अरे नही.. आप बंद कर दीजिए.. हम बस जा ही रहे है.. " वैशाली और फाल्गुनी बाहर निकल गए..
होटल के तीसरे माले पर कमरे की बालकनी में खड़े होकर आसमान में टिमटिमाते तारों को देखने लगी..
"अगर तुझे नींद आ रही हो तो सो जा.. मैं थोड़ी देर यहीं रुकूँगी.. " वैशाली ने फाल्गुनी से कहा.. मौसम, फाल्गुनी और वैशाली एक ही कमरे में रुके थे.. मौसम नाइटी पहनकर बेड पर लेटे हुए इन दोनों की बातें सुन रही थी.. उसे थोड़ी नींद आ रही थी इसलिए वो वहीं लेटी रही..
फाल्गुनी ने मौसम को सोते हुए देखकर कहा "बाहर बालकनी में चल.. दीदी के साथ बैठते है.. वापिस घर जाकर फिर सोना ही तो है.. यहाँ दोबारा कब आना होगा कीसे पता.. !!" फाल्गुनी ने बालकनी में दो कुर्सियाँ लगाते हुए कहा
"क्यों नही आएंगे वापिस?? शादी के बाद पति के साथ हनीमून पर यहीं तो आएंगे " फाल्गुनी को अपनी ओर खींचते हुए मौसम ने कहा
"तू आराम से सो जा.. और सपने में हनीमून मना ले.. हमे शांति से बैठने दे" कहते हुए फाल्गुनी खड़ी हो गई
"कोई बात नही.. तुझे हनीमून पर न जाना हो तो मुझे बता देना.. तेरे पति के साथ मैं चली जाऊँगी... और तू घर पर बैठे बैठे बातें करते रहना" खिलखिलाकर हँसते हुए मौसम ने कहा
इन दोनों की हंसी-ठिठोली सुनकर वैशाली की उदासी के बादल भी छट गए..
वैशाली: "तुम दोनों कब से हनीमून हनीमून लगे हुए है.. पर उसमें क्या होता है ये पता भी है?? हनीमून में क्या करते है ये जानती हो?"
"वो तो जब मौका मिलेगा तब सीख लेंगे.. आप भी तो जब गई होगी तब नई नई ही होंगी.. जैसे आप ने सीख लिया वैसे हम भी सीख लेंगे"
"नई नई थी या नही वो तुम्हें क्या पता??" वैशाली ने शरारती आंखो से कहा और हंस पड़ी "अपना पाप तो हम खुद ही जानते है.. वो तो हमारे पति को भी पता नही होता की जिस बच्चे को वो गोदी में लेकर खेल रहा है वो असल में उसका है भी या नही.. सिर्फ माँ ही जानती है.. मेरा बेटा, मेरा बेटा कहते हुए उछल रहे पति की आवाज सुनकर किचन में उसकी पत्नी मन ही मन मुस्कुरा रही होती है की जिसे तू अपनी औलाद समझ रहा है वह असल में मेरे पुराने प्रेमी की निशानी है.. " वैशाली ने जीवन के कटु सत्य को फाल्गुनी और मौसम के सामने उजागर किया..
तीनों बातों में मशरूफ़ थे.. वैशाली और फाल्गुनी कुर्सी पर बैठे हुए अपने पैर बालकनी की दीवार पर टिकाए हुए थे.. मौसम बेड पर पड़े पड़े तकिये को अपनी बाहों में लेकर बातें कर रही थी.. वैशाली ने भी कपड़े बदलकर छोटी सी नाइटी पहन ली थी.. पैर दीवार पर रखे होने के कारण उसकी छोटी सी नाइटी उसकी जांघों तक सरक गई थी.. और उसकी गोरी गदराई जांघें साफ नजर आ रही थी.. वैसे कमरे में तीनों लड़कियां ही थी इसलिए वह बेफिक्र थी.. अब मौसम भी उठकर तीसरी कुर्सी पर उन दोनों के साथ बैठ गई
मौसम: "आप दोनों को नींद नही आ रही? बारह बज रहे है.. बातें कर कर के मेरी भी नींद उड़ा दी आप लोगों ने..
वैशाली: "तू आराम से सो जा.. तुझे कौन रोक रहा है.. तेरे पति के साथ हनीमून पर आबू आएगी तब सोने को नसीब ही नही होगा.. याद रखना!!"
मौसम: "तभी तो कह रही हूँ.. उस वक्त जागना पड़ेगा इसलिए सो जाते है"
वैशाली: "तू चिंता मत कर.. उस समय अगर तुझे नींद आ भी गई तो तेरा पति छातियाँ दबाकर तुझे जगा देगा.. "
वैशाली की यह खुल्लमखुल्ला बातचीत से मौसम और फाल्गुनी.. दोनों के जिस्मों में सुरसुरी होने लगी.. वैसे मौसम ने कुछ घंटों पहले ही अपने जीजू से छातियाँ दबवाई थी.. इसलिए उसके शरीर में जो स्पंदन जग रहे थे वह वासना के थे.. फाल्गुनी के मन में वासना का भाव कम और जिज्ञासा का भाव ज्यादा था..
मौसम: "एक बात मुझे समझ नही आती वैशाली.. जब पुरुष का हाथ हमारी छाती को छूता है तब बहोत मज़ा आता है क्या?" जान कर भी अनजान बन रही थी मौसम..
वैशाली: "क्यों? तुझे अब तक ऐसा कोई अनुभव नही हुआ क्या??? सच सच बता.. बगैर दबवाये ही तेरे इतने बड़े हो गए क्या?? मुझे तो पक्का डाउट है.. किसी की मदद लिए बगैर इतने आकर्षक और परफेक्ट शेप में ये रह ही नही सकते.. और मौसम.. तेरे बबलों की ताजगी देखकर यही लगता है की तू जरूर किसी से दबवाती होगी.. !!"
फाल्गुनी: "सही बात है दीदी.. ये साली बड़ी छुपी रुस्तम है.. किसी को पता भी न चले वैसे मजे करने वाली.. मैं अच्छे से जानती हूँ ईसे"
मौसम: "साली.. मुझे क्यों बदनाम करती है.. !! पूरा दिन तो मैं तेरे साथ होती हूँ.. फिर मैं कहाँ किसी से ऐसा करवाने जा सकती हूँ? थोड़ा तो विश्वास रख मुझ पर"
वैशाली: "विश्वास? हा हा हा हा हा.. आज के जमाने में विश्वास सगे भाई पर भी नही रख सकते.. तू अखबारों में पढ़ती होगी.. जवान लड़की पर उसका भाई या बाप ही रेप करता है कई जगह.. "
मौसम: "वैशाली, तुम जो कह रही हो उसे बलात्कार कहते है.. अपनी मर्जी से दबवाने में और बलात्कार में जमीन आसमान का फरक है.. क्या तुम यह कहना चाहती हो की जबरदस्ती होने पर भी लड़की को मज़ा आता होगा?"
फाल्गुनी का चेहरा एकदम पीला पड़ गया "नही ऐसा कभी नही हो सकता.. किसी भी लड़की के लिए जबरदस्ती सहना बेहद यातनामय होता है" बोलकर फाल्गुनी एकदम चुप हो गई.. पर उसे एहसास हुआ की उसने बहोत बड़ी गलती कर दी ये बोलकर.. उसके कहने का मतलब ना समझ सके ऐसे मूर्ख नही थे वैशाली और मौसम
मौसम: "फाल्गुनी? तुझे पता भी है क्या बोल रही है? ये सब तुझे कैसे पता? क्या तेरे साथ कभी ऐसा कुछ??"
फाल्गुनी ने जवाब नही दिया
वैशाली ने बड़े ही प्यार और वात्सल्य से जांघ पर हाथ फेरते हुए कहा "मौसम की बात का जवाब दे फाल्गुनी"
फाल्गुनी: "नही यार ऐसा कुछ खास नही है"
फाल्गुनी की आवाज बदल गई.. उसकी आवाज में एक अजीब प्रकार का डर झलक रहा था.. वह नीचे देखते हुए बैठी रही
वैशाली: "सच सच बता फाल्गुनी.. मैं कल से देख रही हूँ.. इतने खुले और आजाद वातावरण में भी तुम किसी भी पुरुष के साथ ज्यादा बात नही करती.. मैं ये जानना चाहती हूँ की तू इतनी चुप चुप क्यों रहती है? प्लीज हमें बता"
मौसम: "बिल्कुल सही कहा तुमने वैशाली.. इस बात को तो मैंने भी नोटिस किया है.. सेक्स के बारे में जब भी बात होती है तब तू दूर ही भागती है.. कॉलेज में भी तू लड़कों से दूर रहती है.. मैं काफी समय से पूछना चाहती थी.. अच्छा हुआ आज ये बात निकली"
वैशाली: "देख फाल्गुनी, यहाँ पर हमारे अलावा और कोई नही है.. और हम दोनों तुझे वचन देते है की हम किसी को भी नही बताएंगे.. बता.. क्या हुआ था तेरे साथ?"
फाल्गुनी: "ऐसा भी कुछ नही हुआ था.. पर जब भी मैं सेक्स के बारे में सोचती हूँ.. मन में अजीब सा डर लगने लगता है.. पता नही क्यों.. रात को नींद में जब मैं उत्तेजित हो जाती हूँ तब सपने में एक भयानक चेहरा आँखों के सामने आ जाता है ओर वो मेरे साथ.. जबरदस्ती करने लगता है.. !!"
वैशाली और मौसम स्तब्ध होकर सुनते रहे..
वैशाली: "जबरदस्ती करने लगता है.. मतलब क्या करता है?"
फाल्गुनी: "प्लीज दीदी.. आगे मत पूछिए.. मुझे तो बताने में भी शर्म आती है" थरथर कांपती फाल्गुनी ने अपनी खुली हुई जांघें अचानक बंद कर दी..
थोड़ी देर के लिए तीनों चुप बैठे रहे
अब वैशाली कुर्सी से खड़ी होकर बोली "यहाँ आओ फाल्गुनी.. मेरे पास.. मौसम तू भी" मौसम तुरंत उठी और वैशाली के पास जाकर खड़ी हो गई.. लेकिन फाल्गुनी कुर्सी पर अब भी बैठी ही रही..
मौसम का हाथ पकड़कर वैशाली ने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर एक मस्त लेस्बियन किस कर दी.. मौसम इस हरकत के लिए तैयार नही थी.. उसे बड़ा अचरज हुआ.. पर वैशाली ने इस आश्चर्य को उत्तेजना में बदलते हुए मौसम के स्तनों को.. फाल्गुनी की नज़रों के सामने ही.. दबाना शुरू कर दिया..
ये देखते ही फाल्गुनी ऐसे थरथराने लगी जैसे उसने भूत देख लिया हो.. उसे इस तरह कांपते हुए देख वैशाली ने यह अंदाजा लगाया की जरूर कोई ऐसी घटना घाटी थी फाल्गुनी के साथ जिसके कारण उसके कोमल मन पर गंभीर असर किया था.. या तो फिर उसने कोई ऐसा खतरनाक मंज़र देखा था.. कुछ तो था जिसके कारण फाल्गुनी सेक्स से जुड़ी बातों से इतना डर रही थी..
वैशाली सोच रही थी की ऐसा क्या करूँ जिससे उसका यह डर गायब हो जाएँ.. !!
मौसम के स्तनों पर वैशाली का हाथ, ना उसने हटाने की कोशिश की और ना ही फाल्गुनी की नजर उसके स्तनों से..
वैशाली: "कैसा महसूस हो रहा है तुझे मौसम? सच सच बताना.. "
मौसम: "ओह वैशाली.. मज़ा ही आएगा ना.. जाहीर सी बात है!!"
वैशाली: "देख फाल्गुनी.. मौसम को कितना मज़ा आ रहा है.. देखा तूने!!" मौसम के स्तनों को मसलते हुए वैशाली ने फाल्गुनी की ओर देखकर कहा "तू बेकार ही डर रही है फाल्गुनी.. एक औरत होते हुए अगर मेरा स्पर्श मौसम को इतना मज़ा दे रहा हो.. तो सोच.. जब किसी पुरुष का मर्दाना हाथ पड़ेगा तब कितना जबरदस्त मज़ा आएगा!! सच कह रही हूँ फाल्गुनी.. तू अपने मन से सेक्स के प्रति घृणा और डर निकाल दे.. ये तो जीवन का सब से श्रेष्ठ आनंद है.. " वैशाली मौसम के अद्भुत वक्षों को धीरे धीरे मसलते हुए फाल्गुनी के डर को दूर करने की कोशिश कर रही थी.. मौसम भी वैशाली के इस प्रयास में पूर्ण सहयोग दे रही थी.. और उसे मज़ा भी आ रहा था.. जो की साइड इफेक्ट था..!!
मौसम की कुंवारी छाती पुरुष के मर्दाना स्पर्श को एक बार चख चुकी थी.. जैसे आदमखोर शेर एक बार इंसान का खून चख ले फिर उसे चैन नही पड़ता वैसे ही कुछ हाल मौसम का भी था.. जिन स्तनों को देखकर लड़के मूठ लगाते थे वही स्तनों को अभी दबाने वाले पुरुष की तलाश थी.. काफी सुंदर द्रश्य था.. माउंट आबू की शांत रात्री के माहोल में शराब पीकर सब सो रहे थे.. तब रात के साढ़े बारह बजे.. यह तीन लड़कियां एक दूसरे के अंगों को पुरुष से दबवाने के बारे में सोच रहे थे..
सीनियर शिक्षिका की तरह वैशाली अपना रोल बखूबी निभा रही थी.. आज के ही दिन वैशाली ने पीयूष और राजेश सर दोनों से अपनी मरवाई हुई थी.. अलग अलग लंड से चुदकर काफी बार जानदार ऑर्गजम का आनंद और चमक उसके चेहरे पर साफ छलक रही थी..
वैशाली: "फाल्गुनी.. एक समय था जब मैं भी सेक्स के मामले में तेरी तरह ही गंवार थी.. मुझे तो ये ही पता नही चल रहा था की कुदरत ने लड़कियों की छाती पर ये बबले आखिर बनाए क्यों थे!! इतनी ही समझ थी की आगे जाकर होने वाले बच्चे को दूध पिलाने की लिए ही इस व्यवस्था को बनाया गया होगा.. पर एक बार जब ये स्तन दबे.. तब मुझे एहसास हुआ की दूध पिलाने के लिए तो इसका उपयोग बाद में होगा.. इसका असली काम तो दबवाकर मजे लूटने का था.. तू मानेगी नही मौसम.. मुझे हमेशा ताज्जुब होता था की लड़के आखिर मेरी छातियों को हमेशा क्यों तांकते होंगे? मुझे भी सब कुछ संजय के साथ शादी करने के बाद ही पता चला.. शादी की पहली रात जब संजय ने मेरी छातियों को दबाया और चूसा.. तब मुझे पता चला की जीवन का असली मज़ा छाती को ब्रा के अंदर छुपाने में नही.. पर किसी के हाथों में सौंपने में था.. !!"
वैशाली की इस असखलित प्रवाह वाला लेक्चर फाल्गुनी बड़े ध्यान से सुन रही थी.. वैशाली दोनों के चेहरों की तरफ देख रही थी.. उसे लगा की दोनों को उसकी बातों में गहरी दिलचस्पी थी..
वैशाली: "फाल्गुनी.. एक बात पूछूँ.. तुम दोनों सच सच बताना.. !! मैं प्रोमिस करती हूँ की इस बात को मैं राज ही रखूंगी.. तू यहाँ आ फाल्गुनी मेरे पास.. घबरा मत.. यहाँ आ" फाल्गुनी धीरे से उठकर उन दोनों के पास गई.. तीनों इतने करीब खड़ी थी की अगर थोड़ा सा भी और नजदीक आती तो उनके स्तन आपसे में दब जाते..
फाल्गुनी के गोरे गालों पर वैशाली ने हल्के से हाथ फेर लिया.. और बड़े प्रेम से उसका हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा "फाल्गुनी, तूने कभी लिप किस की ही?" फाल्गुनी की हथेली कांप रही थी "बता न फाल्गुनी?.. मौसम तूने कभी.. ??" फाल्गुनी के साथ मौसम को भी घेरे में लिया वैशाली ने..
मौसम: "मैंने तो नही की.. " पर इतना बोलते ही मौसम को पीयूष के संग बिताएं वो हसीन पल याद आने लगे.. हल्की सी मुस्कान के साथ उसने कहा "वैशाली मुझे लिप किस अच्छी नही लगती यार.. एक दूसरे के मुंह में मुंह डालना मुझे नही पसंद.. घिन आती है.. "
फाल्गुनी ने धीमी आवाज में कहा "मैंने एक इंग्लिश मूवी में देखा तो है.. पर ट्राय नही किया कभी"
वैशाली: "ओके.. अब अगर तुम दोनों को दिक्कत न हो.. तो क्या हम एक दूसरे को किस करें? जब तुम्हारी शादी होगी और पति लिप किस करेगा तब तुम दोनों को यह अनुभव बहोत काम आएगा.. पर तुम्हारी इच्छा हो तो ही.. लिप किस भी एक कला है.. सीखना बहोत जरूरी है"
मौसम: "हाँ मुझे सिखाओ.. मैं सीखना चाहती हूँ" फाल्गुनी कुछ बोलने जा ही रही थी पर उससे पहले मौसम शुरू हो गई इसलिए वह चुप रही.. वैशाली ने फाल्गुनी का हाथ पकड़कर अपने एकदम नजदीक खींचते हुए कहा "मौसम.. पहले मैं फाल्गुनी को किस करूंगी.. फिर हम दोनों करेंगे.. ठीक है!!"
मौसम: "ओके डन.. पहले तुम दोनों करो.. मैं देखूँगी और सीखूँगी"
वैशाली: "फाल्गुनी, आर यू रेडी?"
डरी हुई फाल्गुनी कुछ बोल न पाई.. वैशाली ने फाल्गुनी की हथेली पकड़कर अपने स्तन पर रखते हुए दूसरा सवाल किया "कभी किसी ओर लड़की की ब्रेस्ट को दबाया है?" फाल्गुनी ने सर दायें बाएं हिलाकर "ना" कहा.. दोनों की हरकतें देखकर मौसम का हाथ अनजाने में ही खुद के स्तनों पर चला गया..
वैशाली ने फाल्गुनी की हथेली में अपना स्तन दे दिया.. और कहा "जरा जोर से दबा.. और देख कितना मज़ा आता है!!"
सहमी हुई फाल्गुनी मशीन की तरह वैशाली के स्तन को दबा रही थी.. ना ऊष्मा थी और ना ही वासना
वैशाली: "सहला क्या रही है.. जरा जोर से दबा.. तभी तो मज़ा आएगा" फाल्गुनी के गले में अपना हाथ डालकर अपने होंठों को उसके नाक तक लेकर वैशाली ने धीरे से चाट लिया.. फाल्गुनी ने ना ही विरोध किया और ना ही कुछ बोली.. अब वैशाली ने फाल्गुनी के स्तनों को अपने हाथों से बड़े जोर से मसल दिया
फाल्गुनी: "आह्ह.. दीदी.. धीरे से.. दर्द हो रहा है"
वैशाली: "अरे यार.. मैं तो ये कह रही हूँ की इस तरह दबा मेरे.. समझी.. जरा जोर से.. तेरे बॉल अभी अनछुए और कोरे है.. इसलिए दर्द हो रहा है.. मेरे तो अब अनुभवी हो गए है.. धीरे धीरे दबाने से मेरे स्तनों को कुछ महसूस ही नही होता इसलिए कह रही हूँ की जरा ताकत लगाकर दबा" इतना कहकर वैशाली ने फाल्गुनी के गालों को चूम लिया.. चूमने के बाद उसने अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके गाल को चाट लिया.. पूरा गीला कर दिया.. वैशाली को पता था की फाल्गुनी को इसमें मज़ा नही आ रहा था पर शुरुआत में ऐसा होना स्वाभाविक था..
अब वैशाली ने फाल्गुनी की हथेली को अपनी नाइटी के अंदर डालकर अपने नंगे चुचे का स्पर्श करवाया.. "आह्ह.. " यह द्रश्य देखकर ही मौसम की सिसकी निकल गई.. और वो दोनों हथेलियों से अपने स्तन दबाने लगी..
कुदरत के बक्शे हुए इन सुंदर यौवन कलशों को अब तक अनगिनत बार आईने में देखकर मसल चुकी मौसम.. फाल्गुनी के स्तनों को कभी छुआ नही था उसने.. हाँ कभी कभार अनजाने में हल्का सा स्पर्श जरूर हो जाता.. या फिर स्तन दब जाते तब एक दूसरे को हँसकर "सॉरी" बोल देते थे.. उस हंसी का मतलब ये होता था की भले ही गलती से दब गए हो.. पर स्तन का दबना ही उसका भविष्य होता है.. और दबने में ही स्तनों के अस्तित्व की सार्थकता थी..
लेकिन इन दोनों नादान लड़कियों का दिमाग इतना ज्यादा भी कलुषित नही हुआ था.. कभी कभार टीवी पर दिख जाती कोंडोम की एड.. या फिर किसी मूवी का उत्तेजक गाना या सीन.. देखकर उत्तेजित होती दोनों इतनी मासूम भी नही थी.. पर अन्य फॉरवर्ड और मॉडर्न लड़कियों के मुकाबले मौसम और फाल्गुनी सेक्स के मामले में बिल्कुल अनुभवहीन थे.. अब तक सेंकड़ों बार वो दोनों खुद के स्तनों को छु चुके थे पर आज तक कभी ऐसा एहसास नही हुआ था.. फाल्गुनी का पूरा शरीर वैशाली के स्तन का स्पर्श होते ही कांपने लगा.. वो ऐसे पेश आ रही थी जैसे काफी डरी हुई हो.. पर बिना इसकी परवाह कीये.. वैशाली ने फाल्गुनी के कान में कहा "कैसे लगे मेरे स्तन तुझे, फाल्गुनी?"
"ओह्ह प्लीज दीदी.. " फाल्गुनी सिर्फ इतना ही बोल पाई.. बालकनी के अंधेरे में अपना पूरा स्तन ही नाइटी से बाहर निकाल दिया वैशाली ने.. और फाल्गुनी के हाथ में थमाते हुए दबवाने लगी.. "और ये देख मेरी निप्पल.. कैसी लगी तुझे फाल्गुनी?" वैशाली के एक के बाद एक कामुक सवालों से फाल्गुनी के जवान कुँवारे जिस्म में बिजली सी दौड़ रही थी.. उसका कांपना अभी बंद नही हुआ था.. वैशाली अपने स्तनों पर चल रही ठंडी हवा को महसूस करते हुए सिहर रही थी.. उसने मौसम से कहा "अपनी नाइटी ऊपर कर के देख.. स्तनों पर जब ठंडी ठंडी हवा टकराती है तब कितना मज़ा आता है.. !!"
मौसम शरमा गई.. और बोली "मुझे लगता है.. की तुम काफी एक्साइटेड हो गई हो वैशाली"
"तो उसमें गलत भी क्या है मौसम? यहाँ होटल में हर कोई अपने पति या बॉयफ्रेंड को अपने बाहों में भरके उनके मस्त लंड से चुदवा रही होगी.. और यहाँ मैँ.. शादीशुदा होते हुए भी तड़प रही हूँ.. आप दोनों ने तो वो मज़ा लिया नहीं है इसलिए नही समझ पाओगे.. पर एक बार स्त्री पुरुष के स्पर्श को प्राप्त कर ले फिर वो उसकी जरूरत बन जाता है.. जब तक सिर्फ उंगलियों से मास्टरबेट ही किया हो तब तक असली पेनिस से करवाने के मजे के बारे में पता नही चलता.. बस ऐसा ही लगता है की उंगलियों में ही सारा सुख छुपा हुआ है.. पर एक बार जब छेद के अंदर मर्द का अंग घुसता है और अंदर बाहर होता है.. और उसकी सख्ती से रोम रोम जीवंत हो जाता है.. ओह्ह फाल्गुनी.. अब तुझे कैसे समझाऊँ.. अभी मुझे लंड की सख्ती बड़ी याद आ रही है.. मुझे ऐसा एहसास हो रहा है जैसे नीचे हजारों चींटियाँ एक साथ काट रही हो.. ऐसी खुजली हो रही है की मैं बता नही सकती.. मैं तो वो स्वाद काफी बार चख चुकी हूँ.. इसीलिए आधी रात को ऐसे मादक माहोल में मुझे याद आ रही है.. इसमे मेरी कोई गलती नही है"
कहते हुए वैशाली ने फाल्गुनी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके कुँवारे होंठों पर अपने होंठ रखकर फाल्गुनी को उसके जीवन की पहली लिप किस भेंट कर दी.. थरथर कांपती फाल्गुनी ने मुंह फेरते हुए इनकार करने की कोशिश की.. पर वह इनकार से ज्यादा इजहार का संकेत था.. वैशाली की उत्तेजना उसके शरीर को फाल्गुनी से भी ज्यादा बल दे रही थी.. एक तरफ फाल्गुनी की नादान उम्र और चढ़ती जवानी की चाह उसे शरण में आने की लिए मजबूर कर रही थी.. "दीदी प्लीज.... " अभी भी वो अशक्त विरोध कर रही थी.. लेकिन दूसरी तरफ वैशाली की चूत लंड मांग रही थी.. और लंड की अनुपस्थिति में वह सारी कसर फाल्गुनी पर निकाल रही थी..
जब वैशाली ने फाल्गुनी को बाहों में भर लिया तब फाल्गुनी के कडक स्तन वैशाली की छातियों पर चुभने लगे थे.. अब फाल्गुनी भी इन हरकतों से मजे लेने लगी थी..
वैशाली: "यार फाल्गुनी.. तेरी ब्रेस्ट कितनी कडक है.. !! मेरे बॉल पर तेरी दोनों निप्पल चुभ रही है मुझे!!"
यह गरमागरम सीन देखकर मौसम की जांघों के बीच में चुनचुनी होने लगी.. पीयूष ने उसके स्तन जिस तरह मसले थे.. उसे वो सीन याद आ गया.. उसने वैशाली के कंधे पर हाथ रखकर उसे दबाया.. अंधेरे में वैशाली को उसके हावभाव तो दिखे नही पर वो समझ गई की मौसम फाल्गुनी से भी अधिक उत्तेजित हो चुकी थी.. पर मौसम ने तो किसी और काम के लिए हाथ रखा था
मौसम: 'वैशाली.. वहाँ देखो.. !!"
मौसम ने वैशाली और फाल्गुनी के रोमांस के रंग में भंग करते हुए दोनों को सामने की तरफ के गेस्टहाउस के चौथे मजले के एक कमरे की आधी खुली खिड़की से दिख रहे द्रश्य की ओर निर्देश किया.. एक कपल की हरकतें खिड़की से साफ नजर आ रही थी.. तीनों की नजर वहीं चिपक गई..
वैशाली: "तुम दोनों देखती रहो.. अब इनका कार्यक्रम शुरू होगा"
खिड़की से दिख रहा था.. एक पुरुष और स्त्री आपस में चुम्मा-चाटी कर रहे थे..
"मैं अभी आई.. " कहते हुए वैशाली भागकर कमरे में गई और अपनी बेग से दूरबीन लेकर वापिस लौटी.. दूरबीन से से देखकर उसने फाल्गुनी को देते हुए कहा.. "तू थोड़ी देर देख फिर मौसम को देना और फिर वापिस मुझे.. सब मिलकर देखते है"
मौसम: "दूरबीन तो मैं भी लाई हूँ.. "
वैशाली: "तो जल्दी लेकर आ.. मुफ़्त में बी.पी. देखने का मौका मिला है.. जा जल्दी"
दूरबीन से देखते हुए फाल्गुनी ने कहा "वैशाली.. वो दोनों किस कर रहे है.. एकदम साफ साफ दिख रहा है यार.. " फाल्गुनी को अब मज़ा आ रहा था
"ला मुझे भी देखने दे.. " वैशाली ने कहा
"नही.. मुझे देखने दे पहले" फाल्गुनी ने दूरबीन नही दिया
दूरबीन से उस बेखबर और बिंदास कपल के हरकतों को देख रही फाल्गुनी के स्तनों पर हाथ रखकर वैशाली दूसरे हाथ से अपनी चूत को रगड़ने लगी.. तभी मौसम भी अपना दूरबीन ले आई.. और वैशाली के पीछे खड़े होकर देखने लगी.. मौसम के स्तन वैशाली की पीठ पर छु रहे थे..
मौसम: "देख देख फाल्गुनी.. वो आदमी बॉल दबा रहा है उस औरत के" रोमांचित होकर उसने फाल्गुनी से कहा
वैशाली फाल्गुनी के स्तनों को हल्के हल्के मसलते हुए अपनी क्लिटोरिस से खेल रही थी.. उसे उस कपल की हरकतें देखने में कोई दिलचस्पी नही थी क्योंकि उसके लिए ये कोई नई बात तो थी नही.. लेकिन फाल्गुनी और मौसम के लिए ये पहली बार था.. सेक्स का लाइव टेलीकास्ट देखने का मौका.. दोनों कुंवारी लड़कियां ये देखने के लिए आतुर थी की आगे ओर क्या होगा.. !! फाल्गुनी को ये सब देखने में पता ही नही चला की कब वैशाली ने उसकी नाइटी के सारे हुक खोल दीये और उसके दोनों उरोजों को बाहर निकालकर दबाने लगी.. मौसम भी उत्तेजित होकर अपने स्तनों को वैशाली की पीठ पर रगड़ने लगी थी
मौसम बालकनी के उस कामुक सीन को दूरबीन से देखते हुए.. कुछ घंटों पहले अपने जीजू के संग हुए संसर्ग को याद करते हुए गीली हो रही थी.. फाल्गुनी अभी नादान थी.. वो तो ये द्रश्य देखकर हतप्रभ से हो गई थी.. सामने दिख रहा सीन कुछ ऐसा था.. वह औरत खिड़की पकड़े खड़ी हुई थी और उसका पार्टनर पीछे से गर्दन और पीठ को चूम रहा था.. बाहर घनघोर अंधेरा था और कमरे की लाइट चालू थी इसलिए इन तीनों को वहाँ का नजर एकदम साफ साफ नजर आ रहा था..
कब से मौसम और फाल्गुनी दूरबीन पर ऐसे चिपकी थी जैसे गुड पर मक्खी.. अब वैशाली को भी इच्छा हो गई उस कपल की हरकतें देखने की.. किसी जोड़े को संभोग करते हुए देखना अपने आप में ही बड़ा अनोखा अनुभव होता है.. किसी कपल की विकृत काम हरकतों को देखकर वैसी ही प्रबल उत्तेजना होती है जो वास्तविक संभोग के दौरान होती है..
मौसम के हाथ से दूरबीन छीनते हुए वैशाली ने कहा "मुझे तो देखने दे.. !! तू तो कब से ऐसे देख रही है जैसे तुझे इस बारे में परीक्षा देनी हो और उसकी तैयारी कर रही हो.. " अब बिना दूरबीन के मौसम को साफ नजर तो नही आ रहा था.. फिर भी आँखें खींचकर वो देखने की कोशिश कर रही थी.. इस बात से बेखबर की उसके स्तन वैशाली की पीठ से दबकर बिल्कुल ही चपटे हो गए थे.. या तो फिर हो सकता है की उसे पता हो और उत्तेजना के मारे जान बूझकर उसने ही अपने स्तन वैशाली की पीठ से दबा दिए हो.. !!
"तुम दोनों में से किसी ने भी मर्द का पेनिस देखा है कभी?" वैशाली के इस बोल्ड और बिंदास प्रश्न से मौसम और फाल्गुनी की हालत खराब हो गई..
फाल्गुनी: "नही दीदी.. कभी नही.. "
मौसम ने कुछ जवाब नही दिया.. वो सोच रही थी की जीजू का लंड आज दिख ही जाने वाला था अगर वो थोड़ी सी और हिम्मत करती तो.. पर खुले बाजार के बीच वो ऐसा कैसे करती?
"कैसा होता है.. वैशाली?" मौसम ने अपने स्तन पीठ पर रगड़ते हुए वैशाली को पूछा
"देख.. देख.. वो औरत उस मर्द का चूस रही है" वैशाली ने मौसम के हाथों में दूरबीन थमाते हुए कहा.. मौसम ने दूरबीन लिया और वैशाली के पीछे से हटकर वो अब फाल्गुनी के पीछे खड़ी हो गई और देखने लगी..
वैशाली ने मौसम की गर्दन के पीछे एक हल्की सी किस कर दी और बोली "बहोत ही मस्त होता है यार.. मर्द का हथियार.. अब तुम दोनों को क्या बताऊँ.. !! हाथ में पकड़े तो छोड़ने का मन ही नही करता.. देखो वो कितने मजे से चूस रही है? देखा.. ??" वैशाली अब काफी उत्तेजित हो गई थी और उसके हाथ की हलचल इस बात का सबूत दे रहा था क्योंकि उसने फाल्गुनी के स्तनों को नाइटी के बाहर निकाल ही दिया था और अब वो मौसम के स्तनों से खेल रही थी..
मौसम की काँख के नीचे से दोनों हाथ अंदर डालकर वैशाली ने मौसम के दूरबीन पकड़े हाथों को पकड़ लिया.. अब उसने मौसम की नाइटी के अंदर हाथ डालकर जोर से उसके उरोजों को दबाया.. मौसम की हल्की चीख निकल गई.. "क्या कर रही हो यार? जरा धीरे धीरे दबा न.. ज्यादा गर्मी चढ़ रही हो तो चली जा सामने वाले उस कमरे में.. वो तैयार ही बैठा है "
वैशाली ने अपने दोनों स्तन बाहर निकालकर मौसम की पीठ से घिसते हुए उसकी चुत पर उंगली फेरी.. सीधा अपने प्राइवेट पार्ट पर वैशाली के हाथ का स्पर्श महसूस होते ही मौसम सहम गई और अपनी जांघें भींच ली.. "छी छी.. वैशाली.. इन दोनों को तो देख.. कैसा गंदा गंदा कर रहे है!! मुझे तो देखकर ही घिन आती है.. देख तो सही !!"
दूरबीन हाथ में लेकर वैशाली ने देखा.. वह पुरुष उस स्त्री की चूत के होंठों को फैलाकर चाट रहा था.. उस स्त्री की एक टांग खिड़की पर टिकी हुई थी और उसका पार्टनर अपनी जीभ अंदर तक फेर रहा था.. वैशाली ने हँसकर मौसम को अपनी ओर मोडाल और गले लगाते हुए कहा "यार यही तो सब से सर्वोत्तम सुख होता है.. जितना मज़ा लंड से चुदवाने में आता है.. उतना ही मज़ा अपनी चटवाने में भी आता है.. एक बार जीभ का स्पर्श नीचे चूत पर हो तब ऐसे झटके लगते है अंदर.. की तुम्हें क्या बताऊँ.. !!"
वैशाली के मुंह से "लंड" और "चूत" जैसे शब्द सुनकर फाल्गुनी और मौसम शर्म से लाल हो गए..
मौसम: "वैशाली.. तुमने अभी बताया ना की मर्द का पेनिस देखने लायक होता है.. !! तो मुझे वो देखना है.. !!"
वैशाली ने अन दोनों हाथ नाइटी के अंदर डालकर मौसम के दोनों जवान चुचे हाथ में पकड़ लिए और दबाने लगी..
वैशाली: "तू पागल है क्या मौसम!! मेरे पास लंड कहाँ है जो मैं तुम्हें दिखाऊँ.. !! मेरे पास तो बस तेरे जैसी चूत ही है.. देखना तो मुझे भी है पर अभी इस वक्त लंड कहाँ से लाऊँ??"
फाल्गुनी चुपचाप मौसम और वैशाली की कामुक बातें सुनते हुए दूरबीन से उस कपल की एक एक हरकत को बड़े ध्यान से देख रही थी..
वैशाली: "मौसम, तू एक हाथ से दूरबीन पकड़ और दूसरे हाथ से फाल्गुनी की चुची दबा.. तो उसे भी मज़ा आए.. "
मौसम ने तुरंत ही फाल्गुनी के मासूम स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए उसके गाल पर पप्पी कर दी.. और एक बार उसके गाल को चाट भी लिया.. गाल पर मौसम की जीभ का स्पर्श होते ही फाल्गुनी उत्तेजना से कराहने लगी.. तभी अचानक वो सामने दिख रहे कपल ने अपनी खिड़की बंद कर दी
फाल्गुनी निराश हो गई "खेल खतम और पैसा हजम"
Sheela is too smart to handle all situation.

Thanks Napster bhaiबहुत ही सुंदर लाजवाब और मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
सफर में तो सब अपने अपने तरीकें से मजा ले रहे हैं तो कुछ अपनी सेटींग करने के बारें में सोच रहे हैं
इधर शीला की जवानी उसके चड्डी में नहीं समा रही तो वो रुखी के घर पहुंच गयी
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
Sheela is too hot to handle.
