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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

vakharia

Supreme
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आप बहुत बेहतरीन लिख रहे हो। मैं अगर यहां पर हु तो सिर्फ आपकी वजह से। मेरे पसंदीदा लेखकों में से एक
आपका बहोत बहोत शुक्रिया मित्र.. ऐसा ही स्नेह बनाए रखें ♥️
 

Rajizexy

Love and let love
Supreme
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कविता जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लाए बैठी थी लेकिन किसी से बात नहीं कर रही थी.. मन में सोच रही थी "ये चूतिये पीयूष ने सारे मूड का सत्यानाश कर दिया कल रात को.. सब मजे कर रहे है पर मुझे कुछ अच्छा ही नहीं लग रहा" बोर होकर वो खड़ी हो गई और रेणुका के पास जाने लगी.. सीट से उठाते हुए उसका पैर पिंटू के पैर से टकरा गया.. अपने प्रियतम का स्पर्श होते ही वो खिल उठी..

तभी राजेश ने सब का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए यह घोषणा की

"साथियों, कल मेरी पत्नी का जन्मदिन है.. इसी खुशी में हम सब माउंट आबू जा रहे है.. कंपनी के सारे परिवारजनों के साथ साथ हमारे साथ तीन नए लोग भी शामिल है.. उनको हमारे साथ पराया न लगे ये सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है.. लेडिज एंड जेन्टलमेन, प्लीज वेलकम मिस वशाली, मिस मौसम एंड मिस फाल्गुनी"

सब ने ताली बजाते हुए उन्हे "हाई" कहा.. तीनों शर्मा गई और खड़ी होकर सबको थेंक्स कहने लगी.. मौसम का खिले गुलाब सा सौन्दर्य देखकर कई देखनेवालों की आहें निकल गई.. पूरी बस में जैसे सुंदरता का भूकंप आ गया जिसका एपीसेंटर थी मौसम.. !!!

सब से पहचान होते ही मौसम और फाल्गुनी अपने असली रंग में आ गई.. दोनों ने हंसी मज़ाक करते हुए पूरी बस में धूम मचा दी.. वैशाली भी अपने प्रॉब्लेम को भूलकर मौसम और फाल्गुनी के साथ जुड़ गई.. संजय की कड़वाहट भरी यादों को दूर हटाते हुए.. वह कुछ दिन आराम से जीना चाहती थी.. राजेश टीशर्ट और जीन्स में बहोत हेंडसम लग रहा था.. तो दूसरी तरफ रेणुका अपने गदराए जिस्म पर साड़ी ओढ़े बेहद सुंदर और परिपक्व लग रही थी..

एक बात वैशाली के ध्यान में आई.. कविता बार बार पिंटू की ओर देख रही थी.. वैसे उसके लिए ये अच्छा ही था.. कविता का ध्यान भटका हुआ रहेगा तभी तो वो पीयूष के साथ फ्लर्ट कर पाएगी.. !!!!

मौसम की कोयल जैसी आवाज से बस में बहार खिल गई थी.. उसकी कच्ची कुंवारी छातियाँ तो बस.. उफ्फ़.. कहर ढा रही थी.. बस में बैठे लोग अक्सर नजर चुराकर उन कच्चे अमरूदों का रसपान कर लेते थे.. पीयूष और पिंटू राजेश के साथ बैठकर आगे के कार्यक्रम के बारे में विचार-विमर्श कर रहे थे.. बड़ा ही मस्त माहोल था बस में.. रोमेन्टीक सा..

रेणुका सीट पर बैठे बैठे खिड़की से बाहर देख रही थी.. उसकी पारदर्शक साड़ी से नजर आती क्लीवेज को देखकर पीयूष ठंडी आहें भर रहा था.. बीच बीच में दोनों की नजर एक हो जाती तब एक प्यारी सी मुस्कान देकर रेणुका उसके और पीयूष के प्रेम सर्टिफिकेट को रीन्यु कर देती थी.. उस दिन पैसे लेने गया तब कितना मज़ा आया था रेणुका के साथ.. आह्ह.. जोरदार गरम चीज है मैडम तो.. !!

तभी पीयूष के मोबाइल पर मिसकोल आया.. वैशाली ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किया था.. पीयूष ने उसकी ओर देखा.. वैशाली के मांसल जिस्म को रेत के ढेर में फैलाकर जिस तरह चोदा था वह याद आते ही पीयूष का उस्ताद हरकत में आ गया..

बस तेज गति से सड़क पर सरपट दौड़ रही थी.. गति और स्मृति के बीच जरूर कोई गहरा संबंध है.. ऐसा क्यों होता है की बस या ट्रेन के सफर में ही सारी गुजरी बातें याद आने लगती है ???

मौसम और फाल्गुनी के साथ बैठकर गप्पे लड़ा रही कविता का सारा ध्यान अपने बंदर जैसे शरारती पति के ऊपर ही था.. वो देख रही थी कैसे पीयूष कभी रेणुका को देखकर मुसकुराता तो कभी वैशाली की गांड को देखकर अपनी लार टपकाता.. बहोत गुस्सा आ रहा था कविता को.. तभी उसने पिंटू को देखा.. गोरे चिट्टे क्लीन शेव पिंटू को देखकर उसके गालों को चूमने का मन कर रहा था कविता को.. काश अगर यहाँ शीला भाभी होती.. तो पिंटू के साथ उसका कुछ न कुछ सेटिंग जरूर करवा देती.. बहोत प्रेक्टिकल थी शीला भाभी.. कविता के ह्रदय में अपनी प्रेमी को लेकर ख्वाहिशें जागने लगी.. काश कभी मुझे और पिंटू को अकेले घूमने जाने का चांस मिल जाएँ .. !! एक सीट पर साथ साथ बैठकर.. हाथों में हाथ डालकर.. उसके कंधे पर सर रखकर सोने की कल्पना करते हुई कविता भारी सांसें लेने लगी.. कितना क्यूट लग रहा था पिंटू..!!

हाइवे पर सरपट दौड़ती बस एक होटल पर आकर रुक गई "हम सब थोड़ी देर रुकेंगे.. जिन्हे फ्रेश होना हो वह जल्दी निपटाए.. हम चाय पीकर तुरंत निकल जाएंगे ताकि पहुँचने में देरी न हो.. आगे थोड़ा सा ट्राफिक भी होगा"

सब फटाफट वॉशरूम में घुस गए.. मौसम और कविता लेडिज टॉइलेट में चले गए.. इन हाइवे हॉटेलों के टॉइलेट में कैसी गंदी गंदी बातें लिखी हुई होती है!!! मौसम पेशाब करते हुए सब पढ़ रही थी.. एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था और उसके नीचे लिखा था "पूरी रात चूत चटवाने के लिए मुझे कॉल करे.. " एक दूसरा वाक्य ऐसा था "मस्त चूत है आपकी.. मेरा लंड लोगी क्या?"

मौसम ने पहली दफा ऐसा सब पढ़ा था.. "लंड" शब्द बार बार पढ़ने का दिल कर रहा था उसका.. पेशाब कर लेने के बाद उसने बाकी सारी लिखाई भी पढ़ ली.. पूरे जिस्म में सुरसुरी चलने लगी उसके.. वो वापिस आकर बस में बैठ गई.. थोड़ी देर बाद फाल्गुनी भी आकर उसके पास बैठ गई.. पूरी बस खाली थी.. बस मौसम और फाल्गुनी ही थे बस में..

फाल्गुनी: "यार, लोगों में तमीज़ नाम की कोई चीज ही नहीं है.. !!"

मौसम: "क्यों? क्या हुआ?"

फाल्गुनी: "अरे बाथरूम गई तो रास्ते में एक आदमी बाहर खड़ा खड़ा ही पेशाब कर रहा था.. छोटा सा रास्ता था, मैं कैसे जाती? यार ये मर्द लोग न.. बिल्कुल बेशर्म होते है"

मौसम: "हाँ यार.. मैं भी अभी बाथरूम गई तब ऐसी गंदी गंदी बातें पढ़ी.. दीवार पर लिखी हुई"

तभी वैशाली आई और बातों में शामिल हो गई

वैशाली: "क्या हुआ? कौनसी गंदी बातों की बात चल रही है?"

मौसम और फाल्गुनी ने अपने अनुभवों के बारे में बताया.. वैशाली हंस पड़ी

वैशाली: "जो शब्द अभी तुम्हें गंदे लगते है.. वहीं शब्द बाद में तुम्हें बहोत रोमेन्टीक लगेंगे.. देखना तुम दोनों.. !! और फाल्गुनी.. तूने उस आदमी का देखा की नहीं?"

फाल्गुनी भोली बनकर बोली: "क्या देखा?"

वैशाली: "अरे उसका लंड यार.. और क्या? मर्दों की दोनों जांघों के बीच और क्या लटकता है?"

फाल्गुनी शर्मा गई "क्या दीदी आप भी.. !!"

गंदी गंदी बातें सुनकर मौसम और फाल्गुनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. जीवन में पहली बार ये सब बातें सुन रही थी वह दोनों.. वैशाली ने अपने अनुभव का ज्ञान उन दोनों के बीच बांटा..

वैशाली: "तुम दोनों अभी नादान हो.. पर एक बार लंड के संपर्क में आने के बाद उससे दूर नहीं रह पाओगी"

मौसम: "लगता है दीदी को जीजु की याद आ रही है"

फाल्गुनी हँसते हुए "हाँ दीदी.. अब क्या करोगी?"

वैशाली: "माउंट आबू जाकर कोई नया जीजु ढूंढ लूँगी.. और क्या.. हा हा हा हा हा.. !!"

थोड़ी देर में सब बस में वापिस आने लगे.. सब से पहले पीयूष आया.. उसे देखते ही वैशाली का मन ललचा गया.. उसके पीछे पीछे रेणुका बस में चढ़ी.. बस की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए रेणुका की चूचियाँ पीयूष की पीठ से दबकर रह गई.. पीयूष का दिल बाग बाग हो गया.. औरत के जिस्म का गरम स्पर्श.. और वो भी स्तनों का.. रेणुका ने पीयूष को सृष्टि का सबसे अप्रतिम सुख देकर मालामाल कर दिया था.. बस में बैठे किसी को भी इन दोनों के खेल के बारे में जरा सा भी अंदाजा नहीं था..

कविता पिंटू से बात करने का मौका ढूंढ रही थी.. यह ध्यान रखते हुए की पीयूष को उसके और पिंटू के बारे में भनक न लगे.. आज अगर शीला भाभी साथ होती.. तो अब तक उसकी और पिंटू की कोई न कोई सेटिंग तो करवा ही देती.. क्या करू? पिंटू अकेले घूम रहा है.. और मैं उसके साथ होने के लिए मर रही हूँ.. कल रात पीयूष ने दिमाग खराब कर दिया.. और अब ये समाज की लक्ष्मणरेखा मुझे पिंटू से दूर रखे हुए है.. मैं यहाँ नहीं आई होती तो अच्छा होता.. कम से कम पिंटू को सामने देखकर भी बात न कर पाने का दुख तो नहीं होता!!! प्रेमी के करीब होते हुए भी दूरी बनाए रखने की मजबूरी से बड़ा दुख कोई नहीं होता.. बस में सब मजे कर रहे थे.. सिर्फ कविता को छोड़कर.. पिछली सीट पर बैठे बैठे वैशाली.. मौसम और फाल्गुनी को सेक्स एज्युकेशन दे रही थी..

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शीला घर पर अकेली थी.. एकांत मिलते ही उसके दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी.. संजय सुबह ९ बजे तैयार होकर घर से निकला उसके बाद शीला ने सब से पहला फोन जीवा को किया.. पर हाय रे किस्मत.. !! जीवा काम से दूसरे शहर गया हुआ था.. शीला ने दूसरा फोन रूखी को किया.. रूखी शीला की आवाज सुनकर बहोत खुश हो गई..

रूखी: "कितने दिनों के बाद याद किया आपने भाभी.. आप तो जैसे मुझे भूल ही गए"

शीला: "ऐसा नहीं है रूखी.. मैं तो तुझे रोज याद करती हूँ.. पर घर पर सेटिंग भी तो होना चाहिए.. !! रूखी, मेरी हालत बहोत खराब है.. घर में इतने सारे झमेले है की क्या बताऊ!! अभी चार दिन का वक्त मिला है इसलिए तुझे फोन किया.. जीवा तो शहर से बाहर है.. मैं ये मौका गंवाना नहीं चाहती.. कोई दूसरा है तेरे ध्यान में?"

रूखी: "भाभी, अगर आप चाहे तो रसिक के बाबूजी के साथ.. "

शीला चोंक गई "तेरे ससुर के साथ.. ???"

रूखी: "हाँ हाँ.. रसिक का बाप मतलब मेरा ससुर ही.. और कौन!! मेरी और उनकी गाड़ी अब पूरे जोश के साथ निकल पड़ी ही.. जब घर में ही खूंटा मिल जाए तब भला बाहर ढूँढने की क्या जरूरत!!"

शीला: "रूखी नालायक.. एक नंबर की रंडी निकली तू तो.. अपने ससुर के साथ ही शुरू हो गई!! जीवा और रघु के लंड से जी नहीं भरता क्या तेरा??"

रुखी: "एक लोचा हो गया है भाभी.. मेरी सास कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई है.. मेरे ससुर उनके दोस्त के बेटे की शादी में गए हुए थे.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जीवा को फोन करके बुला लिया.. मैं टांगें खोलकर जीवा के लंड के धक्के ले रही थी तभी बूढ़ा आ टपका और हम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया उस चूतिये ने.. !!!"

शीला: "फिर क्या हुआ.. ??"

रूखी: "फिर क्या होना था.. जीवा को तो मैंने जैसे तैसे रवाना कर दिया.. पर बूढ़े ने कहा की मुझे चोदने दे.. वरना तेरा भंडा फोड़ दूंगा.. मैंने बहोत मना किया पर वो माना ही नहीं.. पर एक बात कहूँ भाभी.. बाहर के मर्दों को घर बुलाने में खतरा तो है.. आस-पड़ोस वाले देख लेते है.. हजार बातें होती है.. उससे अच्छा तो घर में ही जुगाड़ हो जाए वही बेहतर है.. ससुर बूढ़ा है पर है कमीना ताकतवर.. असली घी के जो बड़ा हुआ है"

शीला का गला सूखने लगा रूखी की बातें सुनकर.. "फिर क्या हुआ? बूढ़े के साथ मज़ा आया तुझे? जीवा जैसा मज़ा तो नहीं आया होगा !!"

रूखी: "भाभी, थोड़ा बहोत ऊपर नीचे चलता है.. पर इसमे पकड़े जाने का कोई डर नहीं.. पूरा दिन घर में जैसे मर्जी, जितनी मर्जी बस चुदवाते रहो.. कल तो मेरे ससुर ने पूरा दिन मुझे कपड़े ही नहीं पहनने दिए.. मुझे कहता है की "रूखी, तुझे नंगी देखना बहोत अच्छा लगता है.. कपड़े तेरे शरीर पर जचते ही नहीं है.. " और तो और भाभी, पूरा दिन जब में घर का काम करता हूँ तब वो यहाँ वहाँ उंगली करता रहता था.. सच कहूँ भाभी.. मुझे तो बहोत मज़ा आया"

शीला: "ये सब अभी के लिए तो ठीक है.. पर जब तेरी सास वापिस आ जाएगी फिर क्या करोगे तुम दोनों?"

रूखी: "अरे मेरी सास तो सुबह २ घंटे मंदिर जाती है तब मैं मेरे ससुर के साथ निपटा लूँगी.. ये सब करने के लिए वक्त चाहिए कितना.. एक घंटा तो बहोत हो गया मेरे लिए"

रूखी की बातें सुनकर शीला की चूत में खुजली होने लगी..

शीला: "यार रूखी, मुझे तो तुम दोनों को चोदते हुए देखना है.. अभी तेरा ससुर घर पर है क्या? मैं देखना चाहती हूँ.. ससुर और बहु के बीच का सेक्स.. करते हुए तुझे शर्म नहीं आई थी क्या?"

रूखी: "भाभी, वो अभी बाहर बीड़ी का बंडल लेने गया है.. आता ही होगा.. बीड़ी पीते पीते अपना लंड मेरे हाथ में दे देगा"

शीला: "मैं एक काम करती हूँ.. अभी तेरे घर पर आती हूँ.. जैसे ही तुम दोनों का कार्यक्रम शुरू हो जाए, तू मुझे मिसकोल कर देना.. और हाँ दरवाजा सिर्फ अटकाकर ही रखना.. कुंडी मत लगाना.. और तेरे ससुर को पूरा नंगा कर देना.. मैं अचानक दरवाजा खोलकर आऊँगी.. और तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लूँगी.. और फिर शामिल हो जाऊँगी.. जो दांव उसने तेरे और जीवा पर आजमाया वहीं दांव से हम बूढ़े को फँसायाएंगे"

रूखी: "मुझे कोई दिक्कत नहीं है भाभी.. आप आ जाइए"

शीला: "अरे मैंने तो घर को ताला भी लगा दिया.. थोड़ी ही देर में पहुँच जाऊँगी" शीला ने हाथ ऊपर कर रिक्शा को रोका और अंदर बैठ गई.. रिक्शा में बैठे बैठे उसने अपनी सुलगती चूत को घाघरे के ऊपर से ही मुठ्ठी में भरकर दबा दिया.. तब जाकर वह थोड़ी शांत हुई.. इतनी तेज खुजली हो रही थी.. रहा नहीं जा रहा था शीला से..

तभी रूखी का कॉल आया

रूखी: "भाभी, वो आ गए.. फोन रखती हूँ.. मेरा मिसकोल देखते ही आप अंदर चले आना"

अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..

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Auraton ki erotic,kaamuk baten aur Shila heroine ka new jugad.
✅✅✅✅✅✅✅
👌👌👌👌👌👌
💦💦💦💦💦
 

Bittoo

Member
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प्रिय पाठक और वाचक मित्रों,

नमस्कार!

सबसे पहले, मैं आप सभी का दिल से धन्यवाद करता हूँ कि आप मेरी कहानियों को पढ़ते हैं और उन्हें सराहते हैं। यह आपके समर्थन और प्रेम के बिना संभव नहीं होता। साथ ही साथ मैं आप सब से यह अनुरोध करना चाहता हूँ – कृपया अपनी टिप्पणियाँ और प्रतिक्रियाएँ अवश्य दे।

जब भी मैं लिखने बैठता हूँ, तो मेरी यह कोशिश होती है कि कुछ ऐसा लिखूँ जो आपको प्रभावित करे, आपके दिल को छुए, और साथ ही साथ आपका मनोरंजन भी करे। लेकिन एक लेखक के लिए सबसे बड़ा इनाम तब होता है जब उसके पाठक अपनी प्रतिक्रियाएँ और सुझाव साझा करते हैं। आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए केवल प्रतिक्रिया का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मेरी प्रेरणा का स्रोत भी हैं। आगे और अच्छा लिखने की ताकत प्रदान करती है.. पिछले दो महीनों में मैंने ३२ अपडेट्स दिए है.. मतलब औसतन हर दूसरे दिन एक अपडेट.. !! कोशिश यही रहती है की वाचकों को जल्द अपडेट देकर कहानी में उनकी रुचि को बनाया रखा जाएँ..

अंत में, मैं आप सभी से पुनः अनुरोध करता हूँ कि कृपया अपनी कमेंट्स और प्रतिक्रियाएँ अवश्य दे।

धन्यवाद..


वखारिया :love:
भाई वखारिया जी आपकी लिखनी ग़ज़ब है. हमे तो अपनी प्रतिक्रिया लिखने में भी सोच के लिखना पड़ता है और दो चार शब्दों में ही हमारा ज्ञान समाप्त हो जाता है। पर आप मानव मन की दुविधा परेशानियाँ मज़बूती आदि बड़े ही विस्तार से लिखते हैं. हाँ कुछ अतिशयोक्ति होती है जिसकी स्वतंत्रता लेखक लेता है। पर आप अद्भुत लिखते हैं। लगे राहिया । फोरम के बहुत अच्छे लेखकों में आपका नाम है।
साथ ही आप नियमित रूप से कहानी बढ़ाते रहते हैं। कुछ लेखकों की तरह नाराज़ नहीं होते कि प्रतिक्रिया नहीं है तो नहीं लिखूँगा।
👌👌
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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कविता जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लाए बैठी थी लेकिन किसी से बात नहीं कर रही थी.. मन में सोच रही थी "ये चूतिये पीयूष ने सारे मूड का सत्यानाश कर दिया कल रात को.. सब मजे कर रहे है पर मुझे कुछ अच्छा ही नहीं लग रहा" बोर होकर वो खड़ी हो गई और रेणुका के पास जाने लगी.. सीट से उठाते हुए उसका पैर पिंटू के पैर से टकरा गया.. अपने प्रियतम का स्पर्श होते ही वो खिल उठी..

तभी राजेश ने सब का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए यह घोषणा की

"साथियों, कल मेरी पत्नी का जन्मदिन है.. इसी खुशी में हम सब माउंट आबू जा रहे है.. कंपनी के सारे परिवारजनों के साथ साथ हमारे साथ तीन नए लोग भी शामिल है.. उनको हमारे साथ पराया न लगे ये सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है.. लेडिज एंड जेन्टलमेन, प्लीज वेलकम मिस वशाली, मिस मौसम एंड मिस फाल्गुनी"

सब ने ताली बजाते हुए उन्हे "हाई" कहा.. तीनों शर्मा गई और खड़ी होकर सबको थेंक्स कहने लगी.. मौसम का खिले गुलाब सा सौन्दर्य देखकर कई देखनेवालों की आहें निकल गई.. पूरी बस में जैसे सुंदरता का भूकंप आ गया जिसका एपीसेंटर थी मौसम.. !!!

सब से पहचान होते ही मौसम और फाल्गुनी अपने असली रंग में आ गई.. दोनों ने हंसी मज़ाक करते हुए पूरी बस में धूम मचा दी.. वैशाली भी अपने प्रॉब्लेम को भूलकर मौसम और फाल्गुनी के साथ जुड़ गई.. संजय की कड़वाहट भरी यादों को दूर हटाते हुए.. वह कुछ दिन आराम से जीना चाहती थी.. राजेश टीशर्ट और जीन्स में बहोत हेंडसम लग रहा था.. तो दूसरी तरफ रेणुका अपने गदराए जिस्म पर साड़ी ओढ़े बेहद सुंदर और परिपक्व लग रही थी..

एक बात वैशाली के ध्यान में आई.. कविता बार बार पिंटू की ओर देख रही थी.. वैसे उसके लिए ये अच्छा ही था.. कविता का ध्यान भटका हुआ रहेगा तभी तो वो पीयूष के साथ फ्लर्ट कर पाएगी.. !!!!

मौसम की कोयल जैसी आवाज से बस में बहार खिल गई थी.. उसकी कच्ची कुंवारी छातियाँ तो बस.. उफ्फ़.. कहर ढा रही थी.. बस में बैठे लोग अक्सर नजर चुराकर उन कच्चे अमरूदों का रसपान कर लेते थे.. पीयूष और पिंटू राजेश के साथ बैठकर आगे के कार्यक्रम के बारे में विचार-विमर्श कर रहे थे.. बड़ा ही मस्त माहोल था बस में.. रोमेन्टीक सा..

रेणुका सीट पर बैठे बैठे खिड़की से बाहर देख रही थी.. उसकी पारदर्शक साड़ी से नजर आती क्लीवेज को देखकर पीयूष ठंडी आहें भर रहा था.. बीच बीच में दोनों की नजर एक हो जाती तब एक प्यारी सी मुस्कान देकर रेणुका उसके और पीयूष के प्रेम सर्टिफिकेट को रीन्यु कर देती थी.. उस दिन पैसे लेने गया तब कितना मज़ा आया था रेणुका के साथ.. आह्ह.. जोरदार गरम चीज है मैडम तो.. !!

तभी पीयूष के मोबाइल पर मिसकोल आया.. वैशाली ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किया था.. पीयूष ने उसकी ओर देखा.. वैशाली के मांसल जिस्म को रेत के ढेर में फैलाकर जिस तरह चोदा था वह याद आते ही पीयूष का उस्ताद हरकत में आ गया..

बस तेज गति से सड़क पर सरपट दौड़ रही थी.. गति और स्मृति के बीच जरूर कोई गहरा संबंध है.. ऐसा क्यों होता है की बस या ट्रेन के सफर में ही सारी गुजरी बातें याद आने लगती है ???

मौसम और फाल्गुनी के साथ बैठकर गप्पे लड़ा रही कविता का सारा ध्यान अपने बंदर जैसे शरारती पति के ऊपर ही था.. वो देख रही थी कैसे पीयूष कभी रेणुका को देखकर मुसकुराता तो कभी वैशाली की गांड को देखकर अपनी लार टपकाता.. बहोत गुस्सा आ रहा था कविता को.. तभी उसने पिंटू को देखा.. गोरे चिट्टे क्लीन शेव पिंटू को देखकर उसके गालों को चूमने का मन कर रहा था कविता को.. काश अगर यहाँ शीला भाभी होती.. तो पिंटू के साथ उसका कुछ न कुछ सेटिंग जरूर करवा देती.. बहोत प्रेक्टिकल थी शीला भाभी.. कविता के ह्रदय में अपनी प्रेमी को लेकर ख्वाहिशें जागने लगी.. काश कभी मुझे और पिंटू को अकेले घूमने जाने का चांस मिल जाएँ .. !! एक सीट पर साथ साथ बैठकर.. हाथों में हाथ डालकर.. उसके कंधे पर सर रखकर सोने की कल्पना करते हुई कविता भारी सांसें लेने लगी.. कितना क्यूट लग रहा था पिंटू..!!

हाइवे पर सरपट दौड़ती बस एक होटल पर आकर रुक गई "हम सब थोड़ी देर रुकेंगे.. जिन्हे फ्रेश होना हो वह जल्दी निपटाए.. हम चाय पीकर तुरंत निकल जाएंगे ताकि पहुँचने में देरी न हो.. आगे थोड़ा सा ट्राफिक भी होगा"

सब फटाफट वॉशरूम में घुस गए.. मौसम और कविता लेडिज टॉइलेट में चले गए.. इन हाइवे हॉटेलों के टॉइलेट में कैसी गंदी गंदी बातें लिखी हुई होती है!!! मौसम पेशाब करते हुए सब पढ़ रही थी.. एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था और उसके नीचे लिखा था "पूरी रात चूत चटवाने के लिए मुझे कॉल करे.. " एक दूसरा वाक्य ऐसा था "मस्त चूत है आपकी.. मेरा लंड लोगी क्या?"

मौसम ने पहली दफा ऐसा सब पढ़ा था.. "लंड" शब्द बार बार पढ़ने का दिल कर रहा था उसका.. पेशाब कर लेने के बाद उसने बाकी सारी लिखाई भी पढ़ ली.. पूरे जिस्म में सुरसुरी चलने लगी उसके.. वो वापिस आकर बस में बैठ गई.. थोड़ी देर बाद फाल्गुनी भी आकर उसके पास बैठ गई.. पूरी बस खाली थी.. बस मौसम और फाल्गुनी ही थे बस में..

फाल्गुनी: "यार, लोगों में तमीज़ नाम की कोई चीज ही नहीं है.. !!"

मौसम: "क्यों? क्या हुआ?"

फाल्गुनी: "अरे बाथरूम गई तो रास्ते में एक आदमी बाहर खड़ा खड़ा ही पेशाब कर रहा था.. छोटा सा रास्ता था, मैं कैसे जाती? यार ये मर्द लोग न.. बिल्कुल बेशर्म होते है"

मौसम: "हाँ यार.. मैं भी अभी बाथरूम गई तब ऐसी गंदी गंदी बातें पढ़ी.. दीवार पर लिखी हुई"

तभी वैशाली आई और बातों में शामिल हो गई

वैशाली: "क्या हुआ? कौनसी गंदी बातों की बात चल रही है?"

मौसम और फाल्गुनी ने अपने अनुभवों के बारे में बताया.. वैशाली हंस पड़ी

वैशाली: "जो शब्द अभी तुम्हें गंदे लगते है.. वहीं शब्द बाद में तुम्हें बहोत रोमेन्टीक लगेंगे.. देखना तुम दोनों.. !! और फाल्गुनी.. तूने उस आदमी का देखा की नहीं?"

फाल्गुनी भोली बनकर बोली: "क्या देखा?"

वैशाली: "अरे उसका लंड यार.. और क्या? मर्दों की दोनों जांघों के बीच और क्या लटकता है?"

फाल्गुनी शर्मा गई "क्या दीदी आप भी.. !!"

गंदी गंदी बातें सुनकर मौसम और फाल्गुनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. जीवन में पहली बार ये सब बातें सुन रही थी वह दोनों.. वैशाली ने अपने अनुभव का ज्ञान उन दोनों के बीच बांटा..

वैशाली: "तुम दोनों अभी नादान हो.. पर एक बार लंड के संपर्क में आने के बाद उससे दूर नहीं रह पाओगी"

मौसम: "लगता है दीदी को जीजु की याद आ रही है"

फाल्गुनी हँसते हुए "हाँ दीदी.. अब क्या करोगी?"

वैशाली: "माउंट आबू जाकर कोई नया जीजु ढूंढ लूँगी.. और क्या.. हा हा हा हा हा.. !!"

थोड़ी देर में सब बस में वापिस आने लगे.. सब से पहले पीयूष आया.. उसे देखते ही वैशाली का मन ललचा गया.. उसके पीछे पीछे रेणुका बस में चढ़ी.. बस की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए रेणुका की चूचियाँ पीयूष की पीठ से दबकर रह गई.. पीयूष का दिल बाग बाग हो गया.. औरत के जिस्म का गरम स्पर्श.. और वो भी स्तनों का.. रेणुका ने पीयूष को सृष्टि का सबसे अप्रतिम सुख देकर मालामाल कर दिया था.. बस में बैठे किसी को भी इन दोनों के खेल के बारे में जरा सा भी अंदाजा नहीं था..

कविता पिंटू से बात करने का मौका ढूंढ रही थी.. यह ध्यान रखते हुए की पीयूष को उसके और पिंटू के बारे में भनक न लगे.. आज अगर शीला भाभी साथ होती.. तो अब तक उसकी और पिंटू की कोई न कोई सेटिंग तो करवा ही देती.. क्या करू? पिंटू अकेले घूम रहा है.. और मैं उसके साथ होने के लिए मर रही हूँ.. कल रात पीयूष ने दिमाग खराब कर दिया.. और अब ये समाज की लक्ष्मणरेखा मुझे पिंटू से दूर रखे हुए है.. मैं यहाँ नहीं आई होती तो अच्छा होता.. कम से कम पिंटू को सामने देखकर भी बात न कर पाने का दुख तो नहीं होता!!! प्रेमी के करीब होते हुए भी दूरी बनाए रखने की मजबूरी से बड़ा दुख कोई नहीं होता.. बस में सब मजे कर रहे थे.. सिर्फ कविता को छोड़कर.. पिछली सीट पर बैठे बैठे वैशाली.. मौसम और फाल्गुनी को सेक्स एज्युकेशन दे रही थी..

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शीला घर पर अकेली थी.. एकांत मिलते ही उसके दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी.. संजय सुबह ९ बजे तैयार होकर घर से निकला उसके बाद शीला ने सब से पहला फोन जीवा को किया.. पर हाय रे किस्मत.. !! जीवा काम से दूसरे शहर गया हुआ था.. शीला ने दूसरा फोन रूखी को किया.. रूखी शीला की आवाज सुनकर बहोत खुश हो गई..

रूखी: "कितने दिनों के बाद याद किया आपने भाभी.. आप तो जैसे मुझे भूल ही गए"

शीला: "ऐसा नहीं है रूखी.. मैं तो तुझे रोज याद करती हूँ.. पर घर पर सेटिंग भी तो होना चाहिए.. !! रूखी, मेरी हालत बहोत खराब है.. घर में इतने सारे झमेले है की क्या बताऊ!! अभी चार दिन का वक्त मिला है इसलिए तुझे फोन किया.. जीवा तो शहर से बाहर है.. मैं ये मौका गंवाना नहीं चाहती.. कोई दूसरा है तेरे ध्यान में?"

रूखी: "भाभी, अगर आप चाहे तो रसिक के बाबूजी के साथ.. "

शीला चोंक गई "तेरे ससुर के साथ.. ???"

रूखी: "हाँ हाँ.. रसिक का बाप मतलब मेरा ससुर ही.. और कौन!! मेरी और उनकी गाड़ी अब पूरे जोश के साथ निकल पड़ी ही.. जब घर में ही खूंटा मिल जाए तब भला बाहर ढूँढने की क्या जरूरत!!"

शीला: "रूखी नालायक.. एक नंबर की रंडी निकली तू तो.. अपने ससुर के साथ ही शुरू हो गई!! जीवा और रघु के लंड से जी नहीं भरता क्या तेरा??"

रुखी: "एक लोचा हो गया है भाभी.. मेरी सास कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई है.. मेरे ससुर उनके दोस्त के बेटे की शादी में गए हुए थे.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जीवा को फोन करके बुला लिया.. मैं टांगें खोलकर जीवा के लंड के धक्के ले रही थी तभी बूढ़ा आ टपका और हम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया उस चूतिये ने.. !!!"

शीला: "फिर क्या हुआ.. ??"

रूखी: "फिर क्या होना था.. जीवा को तो मैंने जैसे तैसे रवाना कर दिया.. पर बूढ़े ने कहा की मुझे चोदने दे.. वरना तेरा भंडा फोड़ दूंगा.. मैंने बहोत मना किया पर वो माना ही नहीं.. पर एक बात कहूँ भाभी.. बाहर के मर्दों को घर बुलाने में खतरा तो है.. आस-पड़ोस वाले देख लेते है.. हजार बातें होती है.. उससे अच्छा तो घर में ही जुगाड़ हो जाए वही बेहतर है.. ससुर बूढ़ा है पर है कमीना ताकतवर.. असली घी के जो बड़ा हुआ है"

शीला का गला सूखने लगा रूखी की बातें सुनकर.. "फिर क्या हुआ? बूढ़े के साथ मज़ा आया तुझे? जीवा जैसा मज़ा तो नहीं आया होगा !!"

रूखी: "भाभी, थोड़ा बहोत ऊपर नीचे चलता है.. पर इसमे पकड़े जाने का कोई डर नहीं.. पूरा दिन घर में जैसे मर्जी, जितनी मर्जी बस चुदवाते रहो.. कल तो मेरे ससुर ने पूरा दिन मुझे कपड़े ही नहीं पहनने दिए.. मुझे कहता है की "रूखी, तुझे नंगी देखना बहोत अच्छा लगता है.. कपड़े तेरे शरीर पर जचते ही नहीं है.. " और तो और भाभी, पूरा दिन जब में घर का काम करता हूँ तब वो यहाँ वहाँ उंगली करता रहता था.. सच कहूँ भाभी.. मुझे तो बहोत मज़ा आया"

शीला: "ये सब अभी के लिए तो ठीक है.. पर जब तेरी सास वापिस आ जाएगी फिर क्या करोगे तुम दोनों?"

रूखी: "अरे मेरी सास तो सुबह २ घंटे मंदिर जाती है तब मैं मेरे ससुर के साथ निपटा लूँगी.. ये सब करने के लिए वक्त चाहिए कितना.. एक घंटा तो बहोत हो गया मेरे लिए"

रूखी की बातें सुनकर शीला की चूत में खुजली होने लगी..

शीला: "यार रूखी, मुझे तो तुम दोनों को चोदते हुए देखना है.. अभी तेरा ससुर घर पर है क्या? मैं देखना चाहती हूँ.. ससुर और बहु के बीच का सेक्स.. करते हुए तुझे शर्म नहीं आई थी क्या?"

रूखी: "भाभी, वो अभी बाहर बीड़ी का बंडल लेने गया है.. आता ही होगा.. बीड़ी पीते पीते अपना लंड मेरे हाथ में दे देगा"

शीला: "मैं एक काम करती हूँ.. अभी तेरे घर पर आती हूँ.. जैसे ही तुम दोनों का कार्यक्रम शुरू हो जाए, तू मुझे मिसकोल कर देना.. और हाँ दरवाजा सिर्फ अटकाकर ही रखना.. कुंडी मत लगाना.. और तेरे ससुर को पूरा नंगा कर देना.. मैं अचानक दरवाजा खोलकर आऊँगी.. और तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लूँगी.. और फिर शामिल हो जाऊँगी.. जो दांव उसने तेरे और जीवा पर आजमाया वहीं दांव से हम बूढ़े को फँसायाएंगे"

रूखी: "मुझे कोई दिक्कत नहीं है भाभी.. आप आ जाइए"

शीला: "अरे मैंने तो घर को ताला भी लगा दिया.. थोड़ी ही देर में पहुँच जाऊँगी" शीला ने हाथ ऊपर कर रिक्शा को रोका और अंदर बैठ गई.. रिक्शा में बैठे बैठे उसने अपनी सुलगती चूत को घाघरे के ऊपर से ही मुठ्ठी में भरकर दबा दिया.. तब जाकर वह थोड़ी शांत हुई.. इतनी तेज खुजली हो रही थी.. रहा नहीं जा रहा था शीला से..

तभी रूखी का कॉल आया

रूखी: "भाभी, वो आ गए.. फोन रखती हूँ.. मेरा मिसकोल देखते ही आप अंदर चले आना"

अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..

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Kya gazab ki update post ki he aapne vakharia Bhai,

Har female character ki chut me aag lagi huyi he is update me..........

Har koi kisi bhi tarah apni aag bujhana chahta he........

Gazab Bhai

Keep Rocking Bro
 

Ek number

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कविता जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लाए बैठी थी लेकिन किसी से बात नहीं कर रही थी.. मन में सोच रही थी "ये चूतिये पीयूष ने सारे मूड का सत्यानाश कर दिया कल रात को.. सब मजे कर रहे है पर मुझे कुछ अच्छा ही नहीं लग रहा" बोर होकर वो खड़ी हो गई और रेणुका के पास जाने लगी.. सीट से उठाते हुए उसका पैर पिंटू के पैर से टकरा गया.. अपने प्रियतम का स्पर्श होते ही वो खिल उठी..

तभी राजेश ने सब का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए यह घोषणा की

"साथियों, कल मेरी पत्नी का जन्मदिन है.. इसी खुशी में हम सब माउंट आबू जा रहे है.. कंपनी के सारे परिवारजनों के साथ साथ हमारे साथ तीन नए लोग भी शामिल है.. उनको हमारे साथ पराया न लगे ये सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है.. लेडिज एंड जेन्टलमेन, प्लीज वेलकम मिस वशाली, मिस मौसम एंड मिस फाल्गुनी"

सब ने ताली बजाते हुए उन्हे "हाई" कहा.. तीनों शर्मा गई और खड़ी होकर सबको थेंक्स कहने लगी.. मौसम का खिले गुलाब सा सौन्दर्य देखकर कई देखनेवालों की आहें निकल गई.. पूरी बस में जैसे सुंदरता का भूकंप आ गया जिसका एपीसेंटर थी मौसम.. !!!

सब से पहचान होते ही मौसम और फाल्गुनी अपने असली रंग में आ गई.. दोनों ने हंसी मज़ाक करते हुए पूरी बस में धूम मचा दी.. वैशाली भी अपने प्रॉब्लेम को भूलकर मौसम और फाल्गुनी के साथ जुड़ गई.. संजय की कड़वाहट भरी यादों को दूर हटाते हुए.. वह कुछ दिन आराम से जीना चाहती थी.. राजेश टीशर्ट और जीन्स में बहोत हेंडसम लग रहा था.. तो दूसरी तरफ रेणुका अपने गदराए जिस्म पर साड़ी ओढ़े बेहद सुंदर और परिपक्व लग रही थी..

एक बात वैशाली के ध्यान में आई.. कविता बार बार पिंटू की ओर देख रही थी.. वैसे उसके लिए ये अच्छा ही था.. कविता का ध्यान भटका हुआ रहेगा तभी तो वो पीयूष के साथ फ्लर्ट कर पाएगी.. !!!!

मौसम की कोयल जैसी आवाज से बस में बहार खिल गई थी.. उसकी कच्ची कुंवारी छातियाँ तो बस.. उफ्फ़.. कहर ढा रही थी.. बस में बैठे लोग अक्सर नजर चुराकर उन कच्चे अमरूदों का रसपान कर लेते थे.. पीयूष और पिंटू राजेश के साथ बैठकर आगे के कार्यक्रम के बारे में विचार-विमर्श कर रहे थे.. बड़ा ही मस्त माहोल था बस में.. रोमेन्टीक सा..

रेणुका सीट पर बैठे बैठे खिड़की से बाहर देख रही थी.. उसकी पारदर्शक साड़ी से नजर आती क्लीवेज को देखकर पीयूष ठंडी आहें भर रहा था.. बीच बीच में दोनों की नजर एक हो जाती तब एक प्यारी सी मुस्कान देकर रेणुका उसके और पीयूष के प्रेम सर्टिफिकेट को रीन्यु कर देती थी.. उस दिन पैसे लेने गया तब कितना मज़ा आया था रेणुका के साथ.. आह्ह.. जोरदार गरम चीज है मैडम तो.. !!

तभी पीयूष के मोबाइल पर मिसकोल आया.. वैशाली ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किया था.. पीयूष ने उसकी ओर देखा.. वैशाली के मांसल जिस्म को रेत के ढेर में फैलाकर जिस तरह चोदा था वह याद आते ही पीयूष का उस्ताद हरकत में आ गया..

बस तेज गति से सड़क पर सरपट दौड़ रही थी.. गति और स्मृति के बीच जरूर कोई गहरा संबंध है.. ऐसा क्यों होता है की बस या ट्रेन के सफर में ही सारी गुजरी बातें याद आने लगती है ???

मौसम और फाल्गुनी के साथ बैठकर गप्पे लड़ा रही कविता का सारा ध्यान अपने बंदर जैसे शरारती पति के ऊपर ही था.. वो देख रही थी कैसे पीयूष कभी रेणुका को देखकर मुसकुराता तो कभी वैशाली की गांड को देखकर अपनी लार टपकाता.. बहोत गुस्सा आ रहा था कविता को.. तभी उसने पिंटू को देखा.. गोरे चिट्टे क्लीन शेव पिंटू को देखकर उसके गालों को चूमने का मन कर रहा था कविता को.. काश अगर यहाँ शीला भाभी होती.. तो पिंटू के साथ उसका कुछ न कुछ सेटिंग जरूर करवा देती.. बहोत प्रेक्टिकल थी शीला भाभी.. कविता के ह्रदय में अपनी प्रेमी को लेकर ख्वाहिशें जागने लगी.. काश कभी मुझे और पिंटू को अकेले घूमने जाने का चांस मिल जाएँ .. !! एक सीट पर साथ साथ बैठकर.. हाथों में हाथ डालकर.. उसके कंधे पर सर रखकर सोने की कल्पना करते हुई कविता भारी सांसें लेने लगी.. कितना क्यूट लग रहा था पिंटू..!!

हाइवे पर सरपट दौड़ती बस एक होटल पर आकर रुक गई "हम सब थोड़ी देर रुकेंगे.. जिन्हे फ्रेश होना हो वह जल्दी निपटाए.. हम चाय पीकर तुरंत निकल जाएंगे ताकि पहुँचने में देरी न हो.. आगे थोड़ा सा ट्राफिक भी होगा"

सब फटाफट वॉशरूम में घुस गए.. मौसम और कविता लेडिज टॉइलेट में चले गए.. इन हाइवे हॉटेलों के टॉइलेट में कैसी गंदी गंदी बातें लिखी हुई होती है!!! मौसम पेशाब करते हुए सब पढ़ रही थी.. एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था और उसके नीचे लिखा था "पूरी रात चूत चटवाने के लिए मुझे कॉल करे.. " एक दूसरा वाक्य ऐसा था "मस्त चूत है आपकी.. मेरा लंड लोगी क्या?"

मौसम ने पहली दफा ऐसा सब पढ़ा था.. "लंड" शब्द बार बार पढ़ने का दिल कर रहा था उसका.. पेशाब कर लेने के बाद उसने बाकी सारी लिखाई भी पढ़ ली.. पूरे जिस्म में सुरसुरी चलने लगी उसके.. वो वापिस आकर बस में बैठ गई.. थोड़ी देर बाद फाल्गुनी भी आकर उसके पास बैठ गई.. पूरी बस खाली थी.. बस मौसम और फाल्गुनी ही थे बस में..

फाल्गुनी: "यार, लोगों में तमीज़ नाम की कोई चीज ही नहीं है.. !!"

मौसम: "क्यों? क्या हुआ?"

फाल्गुनी: "अरे बाथरूम गई तो रास्ते में एक आदमी बाहर खड़ा खड़ा ही पेशाब कर रहा था.. छोटा सा रास्ता था, मैं कैसे जाती? यार ये मर्द लोग न.. बिल्कुल बेशर्म होते है"

मौसम: "हाँ यार.. मैं भी अभी बाथरूम गई तब ऐसी गंदी गंदी बातें पढ़ी.. दीवार पर लिखी हुई"

तभी वैशाली आई और बातों में शामिल हो गई

वैशाली: "क्या हुआ? कौनसी गंदी बातों की बात चल रही है?"

मौसम और फाल्गुनी ने अपने अनुभवों के बारे में बताया.. वैशाली हंस पड़ी

वैशाली: "जो शब्द अभी तुम्हें गंदे लगते है.. वहीं शब्द बाद में तुम्हें बहोत रोमेन्टीक लगेंगे.. देखना तुम दोनों.. !! और फाल्गुनी.. तूने उस आदमी का देखा की नहीं?"

फाल्गुनी भोली बनकर बोली: "क्या देखा?"

वैशाली: "अरे उसका लंड यार.. और क्या? मर्दों की दोनों जांघों के बीच और क्या लटकता है?"

फाल्गुनी शर्मा गई "क्या दीदी आप भी.. !!"

गंदी गंदी बातें सुनकर मौसम और फाल्गुनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. जीवन में पहली बार ये सब बातें सुन रही थी वह दोनों.. वैशाली ने अपने अनुभव का ज्ञान उन दोनों के बीच बांटा..

वैशाली: "तुम दोनों अभी नादान हो.. पर एक बार लंड के संपर्क में आने के बाद उससे दूर नहीं रह पाओगी"

मौसम: "लगता है दीदी को जीजु की याद आ रही है"

फाल्गुनी हँसते हुए "हाँ दीदी.. अब क्या करोगी?"

वैशाली: "माउंट आबू जाकर कोई नया जीजु ढूंढ लूँगी.. और क्या.. हा हा हा हा हा.. !!"

थोड़ी देर में सब बस में वापिस आने लगे.. सब से पहले पीयूष आया.. उसे देखते ही वैशाली का मन ललचा गया.. उसके पीछे पीछे रेणुका बस में चढ़ी.. बस की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए रेणुका की चूचियाँ पीयूष की पीठ से दबकर रह गई.. पीयूष का दिल बाग बाग हो गया.. औरत के जिस्म का गरम स्पर्श.. और वो भी स्तनों का.. रेणुका ने पीयूष को सृष्टि का सबसे अप्रतिम सुख देकर मालामाल कर दिया था.. बस में बैठे किसी को भी इन दोनों के खेल के बारे में जरा सा भी अंदाजा नहीं था..

कविता पिंटू से बात करने का मौका ढूंढ रही थी.. यह ध्यान रखते हुए की पीयूष को उसके और पिंटू के बारे में भनक न लगे.. आज अगर शीला भाभी साथ होती.. तो अब तक उसकी और पिंटू की कोई न कोई सेटिंग तो करवा ही देती.. क्या करू? पिंटू अकेले घूम रहा है.. और मैं उसके साथ होने के लिए मर रही हूँ.. कल रात पीयूष ने दिमाग खराब कर दिया.. और अब ये समाज की लक्ष्मणरेखा मुझे पिंटू से दूर रखे हुए है.. मैं यहाँ नहीं आई होती तो अच्छा होता.. कम से कम पिंटू को सामने देखकर भी बात न कर पाने का दुख तो नहीं होता!!! प्रेमी के करीब होते हुए भी दूरी बनाए रखने की मजबूरी से बड़ा दुख कोई नहीं होता.. बस में सब मजे कर रहे थे.. सिर्फ कविता को छोड़कर.. पिछली सीट पर बैठे बैठे वैशाली.. मौसम और फाल्गुनी को सेक्स एज्युकेशन दे रही थी..

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शीला घर पर अकेली थी.. एकांत मिलते ही उसके दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी.. संजय सुबह ९ बजे तैयार होकर घर से निकला उसके बाद शीला ने सब से पहला फोन जीवा को किया.. पर हाय रे किस्मत.. !! जीवा काम से दूसरे शहर गया हुआ था.. शीला ने दूसरा फोन रूखी को किया.. रूखी शीला की आवाज सुनकर बहोत खुश हो गई..

रूखी: "कितने दिनों के बाद याद किया आपने भाभी.. आप तो जैसे मुझे भूल ही गए"

शीला: "ऐसा नहीं है रूखी.. मैं तो तुझे रोज याद करती हूँ.. पर घर पर सेटिंग भी तो होना चाहिए.. !! रूखी, मेरी हालत बहोत खराब है.. घर में इतने सारे झमेले है की क्या बताऊ!! अभी चार दिन का वक्त मिला है इसलिए तुझे फोन किया.. जीवा तो शहर से बाहर है.. मैं ये मौका गंवाना नहीं चाहती.. कोई दूसरा है तेरे ध्यान में?"

रूखी: "भाभी, अगर आप चाहे तो रसिक के बाबूजी के साथ.. "

शीला चोंक गई "तेरे ससुर के साथ.. ???"

रूखी: "हाँ हाँ.. रसिक का बाप मतलब मेरा ससुर ही.. और कौन!! मेरी और उनकी गाड़ी अब पूरे जोश के साथ निकल पड़ी ही.. जब घर में ही खूंटा मिल जाए तब भला बाहर ढूँढने की क्या जरूरत!!"

शीला: "रूखी नालायक.. एक नंबर की रंडी निकली तू तो.. अपने ससुर के साथ ही शुरू हो गई!! जीवा और रघु के लंड से जी नहीं भरता क्या तेरा??"

रुखी: "एक लोचा हो गया है भाभी.. मेरी सास कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई है.. मेरे ससुर उनके दोस्त के बेटे की शादी में गए हुए थे.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जीवा को फोन करके बुला लिया.. मैं टांगें खोलकर जीवा के लंड के धक्के ले रही थी तभी बूढ़ा आ टपका और हम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया उस चूतिये ने.. !!!"

शीला: "फिर क्या हुआ.. ??"

रूखी: "फिर क्या होना था.. जीवा को तो मैंने जैसे तैसे रवाना कर दिया.. पर बूढ़े ने कहा की मुझे चोदने दे.. वरना तेरा भंडा फोड़ दूंगा.. मैंने बहोत मना किया पर वो माना ही नहीं.. पर एक बात कहूँ भाभी.. बाहर के मर्दों को घर बुलाने में खतरा तो है.. आस-पड़ोस वाले देख लेते है.. हजार बातें होती है.. उससे अच्छा तो घर में ही जुगाड़ हो जाए वही बेहतर है.. ससुर बूढ़ा है पर है कमीना ताकतवर.. असली घी के जो बड़ा हुआ है"

शीला का गला सूखने लगा रूखी की बातें सुनकर.. "फिर क्या हुआ? बूढ़े के साथ मज़ा आया तुझे? जीवा जैसा मज़ा तो नहीं आया होगा !!"

रूखी: "भाभी, थोड़ा बहोत ऊपर नीचे चलता है.. पर इसमे पकड़े जाने का कोई डर नहीं.. पूरा दिन घर में जैसे मर्जी, जितनी मर्जी बस चुदवाते रहो.. कल तो मेरे ससुर ने पूरा दिन मुझे कपड़े ही नहीं पहनने दिए.. मुझे कहता है की "रूखी, तुझे नंगी देखना बहोत अच्छा लगता है.. कपड़े तेरे शरीर पर जचते ही नहीं है.. " और तो और भाभी, पूरा दिन जब में घर का काम करता हूँ तब वो यहाँ वहाँ उंगली करता रहता था.. सच कहूँ भाभी.. मुझे तो बहोत मज़ा आया"

शीला: "ये सब अभी के लिए तो ठीक है.. पर जब तेरी सास वापिस आ जाएगी फिर क्या करोगे तुम दोनों?"

रूखी: "अरे मेरी सास तो सुबह २ घंटे मंदिर जाती है तब मैं मेरे ससुर के साथ निपटा लूँगी.. ये सब करने के लिए वक्त चाहिए कितना.. एक घंटा तो बहोत हो गया मेरे लिए"

रूखी की बातें सुनकर शीला की चूत में खुजली होने लगी..

शीला: "यार रूखी, मुझे तो तुम दोनों को चोदते हुए देखना है.. अभी तेरा ससुर घर पर है क्या? मैं देखना चाहती हूँ.. ससुर और बहु के बीच का सेक्स.. करते हुए तुझे शर्म नहीं आई थी क्या?"

रूखी: "भाभी, वो अभी बाहर बीड़ी का बंडल लेने गया है.. आता ही होगा.. बीड़ी पीते पीते अपना लंड मेरे हाथ में दे देगा"

शीला: "मैं एक काम करती हूँ.. अभी तेरे घर पर आती हूँ.. जैसे ही तुम दोनों का कार्यक्रम शुरू हो जाए, तू मुझे मिसकोल कर देना.. और हाँ दरवाजा सिर्फ अटकाकर ही रखना.. कुंडी मत लगाना.. और तेरे ससुर को पूरा नंगा कर देना.. मैं अचानक दरवाजा खोलकर आऊँगी.. और तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लूँगी.. और फिर शामिल हो जाऊँगी.. जो दांव उसने तेरे और जीवा पर आजमाया वहीं दांव से हम बूढ़े को फँसायाएंगे"

रूखी: "मुझे कोई दिक्कत नहीं है भाभी.. आप आ जाइए"

शीला: "अरे मैंने तो घर को ताला भी लगा दिया.. थोड़ी ही देर में पहुँच जाऊँगी" शीला ने हाथ ऊपर कर रिक्शा को रोका और अंदर बैठ गई.. रिक्शा में बैठे बैठे उसने अपनी सुलगती चूत को घाघरे के ऊपर से ही मुठ्ठी में भरकर दबा दिया.. तब जाकर वह थोड़ी शांत हुई.. इतनी तेज खुजली हो रही थी.. रहा नहीं जा रहा था शीला से..

तभी रूखी का कॉल आया

रूखी: "भाभी, वो आ गए.. फोन रखती हूँ.. मेरा मिसकोल देखते ही आप अंदर चले आना"

अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..

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Fantastic update
 
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