
एकदम सही कहा आपनेवाह मतलब तो अशली ध्यान तो कोमलिया का उसकी बहन को उसी के भाई अपने मरद से पेट से करवाने का है. नंदिता के ससुराल जाते ही पूछा जाए. कहा मुँह काला किया. नांदिया गर्व से बोलेगी. अपने भैया से.
एक तो कोमलिया का मरद भी है वीर्यवान. जब शादी से पहले ही कुंडली देख कर पता लग गया की शादी के बाद कोमलिया की टांगे ऊपर रहेगी. तो क्या अपनी बहन को बक्शेगे.
और जब कोमलिया ने अपनी बहन की दिलवा दी तो उनकी बहेनिया का भी तो भोग लगेगा. मज़ेदार शारारत भरा अपडेटेड.
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east bay community law center
इसीलिए तो आपकी कहानियों के माध्यम से गांव की रीतियों और रिवाज़ों का रसपान होता रहता है.......हल्दी सेरेमनी के इस सन्दर्भ में एक छोटा सा वीडियो मेरी तरफ से भीलेकिन कई बार जब गाँव की यादें आती है तो वो कहीं कहीं से मेरी कहानियों में रिस जाती हैं
इसीलिए तो आपकी कहानियों के माध्यम से गांव की रीतियों और रिवाज़ों का रसपान होता रहता है.......हल्दी सेरेमनी के इस सन्दर्भ में एक छोटा सा वीडियो मेरी तरफ से भी
आपके रिस्पांस इतने अच्छे होते हैं की अपडेट्स के साथ साथ हमारी प्रतिक्रिया पर आपके कमैंट्स का भी बेचैनी से इंतज़ार रहता है
एकदम, भौजी चाहे डाकटर हों या कुछ और ननद के लिए भौजी ही रहेंगी और डाक्टर मीता, शहर की सबसे बड़ी लेडी डाक्टर, अपनी ननद के लिए तो भौजी ही रहेंगी।डॉक्टर मीता.
वाह माझा ही आ गया. लो देख लो. पुरे अपडेटेड मै भाभी देवी की ही महिमा है. डॉ मीता का क्लिनिक तो रास्ते मे ही था. पर सहेली की भाभी ने क्या बताया. अब उसकी पहचान तो नहीं है. पर अपनी छिनार नांदिया की पूरी मदद करती है या नहीं. किसी के आगे चाहे टांग उठाए. कभी पेट फूलने नहीं दिया ना उलटी. अब भोजी ही तो ऐसे काले करतुतो को छुपा सकती है. सब भाभी देवी की महिमा है.
आखिर देख लो. मिश्राइन भाभी काम आई ना. देखा कैसे कैसे डॉ मीता भाभी से संगम करवा ही दिया. पहचान कैसे निकली. रीतवा से रीतू भाभी, और रीतू भाभी से मीता भाभी. सॉरी डॉ मीता भाभी.
और मीता भाभी ने तो सारा डर ही दूर कर दिया. सुना नहीं क्या कहा. यहाँ डॉ कौन है. भाभी और नांदिया. और इस वखत तू कोमलिया छिनार नांदिया है. भूलना मत.
और देख लो. खुलवा दिया ना मीता भाभी ने तेरी चुनमुनिया का नाड़ा. रिवाज़ तो रिवाज़ ही रहेगा. देवर हो या नांदिया छिनार पहले नाड़ा भोजी ही खोलेगी. नाथ भी वही उतारेगी.
माझा आ गया. फुल बाते शारारत से भरी पर जबरदस्त इरोटिक.
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इसलिए मैंने हल्दी की रस्म के वीडियो भी डाले हैं, गाँव में और बहुत सी जगहों पर अभी हल्दी लगाने में सिर्फ औरतें और हल्दी दुल्हन की पूरी देह पर लगती है, वीडियों जरूर देखियेगा। मैं कोशिश करती हूँ बीच बीच में गाँव की रीत रिवाज का जिक्र करती रहूं और कोई उसे सिर्फ कल्पना की उड़ान न समझे इसलिए असली यू ट्यूब वीडियो भी।वाह देखा. इसे कहते है भौजी. सॉरी डॉक्टर भौजो. खुलवादी दोनों टांगे. देख लिया कोमार्य का फूल कसी हुई तो है. समस्या दर्द खूब होगा. लेकिन भौजी की सलाह की दर्द का भी अपना माझा है. और 4 महीने की छोटी. कोई कंडोम की जरुरत नहीं है. सीधा नागा.
याद रखना हल्दी के मौके पार डॉक्टर भौजी ने क्या क्या कहा. और जोबन तो पहले भौजी ही मशलेगी. क्यों की हक तो पहला भौजी का ही होता है.
उन्होंने यों अपने नन्दोई से भी बता दिया. खुल के खेलो. 4 महीने की छुट्टी है. कोई खतरा नहीं है.
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अच्छा लगा की पोस्ट आपको अच्छी लगी, आभारवाह री कोमलिया मान गए. बचपन के माल के राज़ खुलवा दिये. अपनी ही जवान बहेनिया की ब्रा मै खूब माल गिराई. क्या क्या कल्पना कर कर के हिला रहे होंगे. अच्छा हुआ तूने मिलन करवा दिया.
और उनकी रंडी बहेना भी सब जानती थी. उसे पता था की उसकी ब्रा की कटोरियों मै कौन मलाई भर रहा है. मलाई से भरी कटोरियों को सीने से लगाकर अपनी ब्रा पहेन लेती. और चली जाती कॉलेज. अशली रंडी नांदिया मिली है तुझे.
पर ये तो बिलकुल अशली वाले मदरचोद भी है. अपनी महतरी की ब्रा कच्छी भी नहीं छोडी. अशली रंडी ससुराल मिला है तुझे.
बुलवा भी दिया. भाभी तुम पहले आ गई होती तो कब से तुम्हारी सौतन बन गई होती. बिना ब्याहे ही पेट फूलवा के कई सारे जन दी होती. अरे ससुराल रंडियो का है तो बिना ब्याहे सब चलता है.
खीर की बुँदे बिलकुल सही जगह टिप टीपाई है. अशली खेला शुरू हो गया. देखा भौजी का आशीर्वाद. सादा रंडी पाना करो. अपने भैया से और सब के भाइयो से पेट फूलवाती रहो..
दिल कर रहा था. थोडा और कन्वजशन हो. बहोत माझा आ रहा था.
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Amezing Komalji. Dehat ki shadi ka mahol hi dikha diya.हल्दी की रसम डाक्टर भौजी
" भौजी हँसते हुए बोलीं
“अरे मैं अपने लिए पूछ रही थी, हल्दी चुमावन सब रस्म होगी न, तो भौजाई हूँ तो जब हल्दी लगाउंगी, बिना ननद की चुनमुनिया में अच्छी तरह हल्दी पोते कहीं भौजाई की हल्दी की रस्म होती है। “
माँ को लग रहा था की डाकटर भौजी ऐसे ही, …जो इतनी बिजी हैं, सुबह से लेकर रात तक, दस दिन का अप्वाइंटमेंट मिलता है वो कहाँ गाँव वाली रस्म में
लेकिन डाक्टर भौजी आयीं न सिर्फ हल्दी और चुमावन में बल्कि माटी कोड़ने और बाकी रस्म में और रात में गाने में भी कई दिन सीधे क्लिनिक से,
हल्दी की रसम में भी मैं एक पियरी सिर्फ पहन के, कस के पकड़ के बैठी थी, पीछे नाउन की नयी नयी बहुरिया, मुझे पकड़ के, और सब भौजाई कोशिश तो कर ही रही थीं की हाथ पैर और गाल पे हल्दी लगाने क बाद साडी के अंदर हाथ डालने की, लेकिन मैं खूब कस के दबोच के बैठी थी, लेकिन डाक्टर भौजी तो,
गाल पर हल्दी लगाते हुए, मुझसे बोलीं, वो देख ऊपर कौन सी चिड़िया बैठी है, और जैसे ही मेरी नजर ऊपर, उनके हाथ साड़ी के अंदर दोनों जोबन पे और पूरी आधी कटोरी दोनों उभारों पर मलती बोलीं,
" छिनार, ननदोई से तो खूब हंस हंस के मिजवायेगी और हम भौजाइयों से छिपा रही है, यहाँ तो हल्दी लगाना सबसे जरूरी है।"
हल्दी के कुछ वीडियो मैंने प्रस्तुत किये ऊपर की दो पोस्टों में सिर्फ इस बात को बताने के लिए वो पुरानी परम्पराएं आंशिक रूप से ही सही जीवित है और रीत रिवाज निभाए भी जाते हैं
पहले जो रसम होती थी यानि करने का तरीका एक सामजिक मान्यता और परम्परा अब वह इवेंट में तब्दील हो गयी है और जो काम नाउन करती थी, घर की बुजुर्ग औरतें, बुआ और दादी करती थीं, भाभियाँ करती थी अब वह इवेंट मैनेजर करते हैं।
बस एक बात और इन वीडियों में एक बात और हम देख सकते हैं करीब करीब महिलाये ही हैं और असली बात है हल्दी पूरी देह पर लगनी चाहिए, और कुछ जगहों पर कैमरा भी थोड़ा सा लिहाज करता है यह दिखाते हुए की ये वॉयरिस्टिक डिलाइट नहीं है बल्कि रीत रिवाजों को जिन्दा रखने की एक भरपूर कोशिश है
हाँ लेकिन उसी में मजा भी छेड़छाड़ भी है, चिढ़ाना भी है और थोड़ा बहुत देह सुख भी, और फिर ननद भाभियाँ होगीं, ननद की हल्दी होगी तो भाभियाँ बिना छेड़े छोड़ेंगी थोड़े
अगला अपडेट इसी कहानी का-इंटरवल के बाद क्या हुआAmezing Komalji. Dehat ki shadi ka mahol hi dikha diya.