Update 5
इसी तरह लाइफ चलती रही और मैं इंजीनियरिंग के लास्ट सेमेस्टर में पहुच गया। मेरा रिजल्ट अच्छा हो रहा था। पढाई में कोई ढील नहीं दि। जब नाना नानी और माँ मेरा इतना ख्याल रखते है, इतना प्यार देते है, तोह में क्यों न उन लोगों को खुश होने का मौका दू !! मेरी पढाई से सब खुश थे।
पढाई का प्रेशर और रात की फैंटसी सेक्स वर्ल्ड के कारण मैं बाकि स्टूडेंट से थोड़ा मेचुरड लगता था। एकबार में माँ के साथ घर की कुछ शॉपिंग में माँ को हेल्प करने के लिए उनके साथ एक सुपर मार्किट गया था । वहाँ मेरा एक क्लासमैट मेरी माँ को मेरी बहन समझ के बात कर रहा था।

जब उसे बताया की यह मेरी माँ है, तो उसकी हालत क्या हुई थी , आज भी मुझे याद है। मेरा अच्छा ख़ासा मेनली अपीयरेंस के कारण कॉलेज में कुछ लड़कियां मेरे साथ क्लोज होने की कोशिश करती थी लेकिन मुझे मेरी माँ के अलावा कोई भी अच्छी नहीं लगती थी। इस लिए शायद में अपनी माँ के ही प्यार में पडा। पर ये मेरे मन की बात मन में ही रहती थी।
मुझे यह भी मालूम था की मुझे एक दिन किसी दूसरी लड़की से शादी करनी पडेगी। मुझे मालूम था की मैं मन में जो भी सोच के रोज खुश हो जाऊं, मुझे एक दिन एक लड़की को चुनना पड़ेगा को मेरी बीवी बनेगी । तब मुझे एक डर भी लगता था। क्युकी मेरा लोड़ा और बाकि सब के जैसा नही है। यह बहुत मोटा और आगे का कैप बहुत बड़ा राउंड शेप का है। फिर रस स्खलन के टाइम तो टोपा फूल के और भी बड़ा हो जाता है। मैं कैसे अपनी बीवी के साथ सेक्स करूँगा। यह सोच के में कभी कभी मायुस हो जाता था।
मेरे फाइनल एग्जाम से पहले मुझे जॉब मिल गया M.P. में। एक बहुत बड़ा इंजिनेअरिंग कंस्ट्रक्शन कम्पनी में। भारत की पुरानी कंपनी में से एक है। उस दिन घर में जब मैने यह न्यूज़ दिया , तो सब ख़ुशी से झूम उठे। इस लिए नहीं की मुझे सैलरी मिलेगी, वह लोग खुश इसलिए थे यह लडका, जिसका बाप बचपन में चल बसा, उसको उसके नाना नानी और माँ ने पाल के एक इंडिपेंडेंट आदमी बना दिया। नाना का पैर छुआ तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया। नानी का पैर छुए तो उन्होंने मेरे सर पे हाथ रख के अशीर्वाद दिया। नाना नानी बहुत भावूक हो चुके थे। ख़ुशी से आँख नम होक कर छल छल करने लगी। दोनों बहुत सारी बाते करे जा रहे थे। माँ एक साइड में खड़ी होके यह सब देख रही थी। जब में माँ के पास गया, माँ कुछ नहीं बोली। लेकिन उनकी आँखों मैने प्यार और ख़ुशी देखी।

मेने उनके पैर छुए तो वह मुझे पकड के गले मिल गई पर मैं 5'11'' का था , वह 5' 5'' कि, तो उनका सर मेरे गले के पास कंधे में टिक गया।
उन्होंने मुझे पकड़ के रखा कुछ मोमेन्ट्स। फिर छोड़ के मेरे दोनों गालो को दोनों हाथ से पकड के, आँखों में बहुत सारा प्यार लेके और होठो में ख़ुशी का स्माइल लेके मुझे देखा । फिर मुझे नाना ने बुलाया तो में उनके पास गया। माँ और नानी किचन में चली गयी मेरे लिए खीर बनाने के लिए। जब भी कुछ ख़ुशी की बात होती थी तो घर में खीर बनती थी। मैं खीर बहुत पसंद करता हू। आज भी मेरे घर में खीर की परंपरा जारी है।