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Incest माँ और बेटे ने घर बसाया(सच्ची घटनाओं पर आधारित)

Esac

Maa ka diwana
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Update 45 Posted
Next update soon...


if anyone have any ideas, they want me explore you are allowed to tell them


Note :- "Writer is busy that's why he was not able to update

Updates will be coming as soon as he gets time.
No one other than the writer is allowed to post updates on this thread. If you want to write, or feel you can write better than this writer, start your own thread and post updates there, not here. Everyone is free to write their own stories, but this thread is solely the domain of its writer. "

"लेखक अभी व्यस्त हैं, इसलिए वे अपडेट नहीं दे पाए हैं।
जैसे ही उन्हें समय मिलेगा, अपडेट आ जाएँगे।
इस थ्रेड पर लेखक के अलावा किसी और को अपडेट पोस्ट करने की अनुमति नहीं है। अगर आप लिखना चाहते हैं, या आपको लगता है कि आप इस लेखक से बेहतर लिख सकते हैं, तो अपना अलग थ्रेड शुरू करें और वहाँ अपडेट पोस्ट करें, यहाँ नहीं। हर कोई अपनी कहानियाँ लिखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह थ्रेड पूरी तरह से इसके लेखक का ही क्षेत्र है।"
 
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sandy4hotgirls

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Mazedaar shuruat..maa-bete ka pyar yunhi mamta aur kamukta ke saath parwan chadhe..bass ek request hai shadi ke baad bhi beta at least akele mein aur nana nani ke saamne bhi maa ko maa aur maa bete ko beta hi kahte huye kamuk pyar kare..
 
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Update 12


अगला दिन शनिवार था मुझे अब एक नई अनुभुति होने लगी. मेरा डिसीजन अब माँ भी जान चुकी होगी और घर पर सब को मालूम है की इस रिश्ते के लिए हम दोनों ने ही मंजूरी दे दि है. तो अब मैं सोचने लगा की अब कैसे इन सब को फेस करूंगा.
पहले की तरह इस बार भी मुझे घर पे वार्म वेलकम मिला. नाना नानी ने इस तरह मेरा स्वागत किया जैसे में कोई बाहर का रेस्पेक्टेड आदमी हूं. मैं यह सोच के थोड़ा शर्मा गया की वह लोग ऐसा शायद इसलिए कर रहे है क्युकी मैं कुछ दिन में उन लोगों का दमाद बनने जा रहा हु.. मैने माँ के रूम की तरफ देखा. यह सोच के रोमाँचित हो गया की मेरी होने वाली बीवी मेरे आस पास ही घूम रही है. मुझे माँ से मिलने की एक चाहत होने लगी पर अभी शायद वह नानी के साथ ही होगी. सो मैं सोचने लगा की उनसे कैसे, कहाँ थोड़ा अकेले में मिल पाऊंगा.
मै ड्राइंग रूम में आके नाना जी के पास बैठ के न्यूज़ देखने लगा. तभी नानी जी एक प्लेट में कुछ मिठाई मेरे सामने वाली सेंटर टेबल पे रखदी. अचानक आज इस तरह से मिठाई की प्लेट देख के मैने ऐसे ही कह दिया
" यह क्या.... अभी यह मिठाई-फिटाई कौन खायेगा नानी जी ?"
नानीजी पानी का गिलास आराम से रखते हुए बोली
" क्यूं....तुम खाओगे"

मैं केसुअली बोला
"अरे नानीजी मुझे यह मिठाई नही...अब एक गरम चाय चाहिए"
नानी मेरे तरफ देखके मुस्कुराके बोली
"चाय भी पिलायेंगे लेकिन उससे पहले यह खालो. अब यह घर तुम्हारा अपने घर के साथ साथ तुम्हारा ससुराल भी बनने जा रहा है तो शुरुवात मीठा खाके करोगे तो रिश्ते में मिठास बनी रहेंगी" बोलके चेहरे पे एक मुस्कराहट फैल गई. मैं एक दम ऐसे खुल्लम खुल्ला बाते सुनक, थोड़ा शरमाने लगा. नानाजी मेरे तरफ देखके स्माइल करके बोले
"खा लो"
मैं इस बात को यही समेटने ने के लिए चुप चाप प्लेट उठाके खाने लगा और टीवी की तरफ नज़र टीकाके सिचुएशन सहज करने की कोशिश करने लगा. .

कुछ देर बाद नानी फिर से आई और आके नाना के पास बैठ गयी फिर नानाजी टीवी ऑफ करके मुझसे बात करने लगे. वह लोग धीरे धीरे सीरियस होने लगे और मुझसे बहुत सारी चीज़ों में मेरी राय पुछने लगे. जैसे की शादी का प्रोग्राम कहाँ , कैसे किया जाए. हमारे ज्यादा रिश्तेदार नहीं थे और जो भी थे पिछले कुछ सालों मे न मिलने के कारण, सब बिछड गए सो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं है. प्रॉब्लम है हमारा मुहल्ला, पड़ोसी और कुछ दोस्तो को लेके. इन लोगों से हमें बचके सब कुछ करना पड़ेगा. इसलिए तय हुआ की यहाँ नही और कहीं जाके शादी का प्रोग्राम बनाना पड़ेगा. यानि की कोई दूर जगह जाके, जहाँ हमारे रिलेटिव्स वगेरा को कुछ भी मालूम न चले. तब नानी को याद आया की कुछ साल पहले नाना जी के बिज़नेस के कोई दोस्त की बेटी की शादी हम लोगो ने मिलके अटेंड कि थी मुंबई मे (एक्चुअली वो जगह मुंबई सिटी के अंदर नहीं था).


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मुंबई से कुछ किलोमीटर्स दूरी पे, मुंबई-गुजरात हाईवे के साइड में एक रिसोर्ट में शादी हुआ था. वहाँ की खास बात यह थी की वो जगह एकदम अकेले में है और शादी अटेंड करने वाले सब को रहने का आवास भी प्रदान करता है. साथ में जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है यानि की शादी की रसम का अरेंजमेंट--पंडित से लेके रजिस्टर्ड साहब तक, सब वह लोग देते है.

इन सब बातों के बीच मेरे दिमाग में यह चल रहा था की कैसे भी करके माँ से एक बार मुलाकात करनी है. मुझे यह भी मालूम था की माँ से ऐसे आसानी से मुलाकात नहीं हो पायेगा वह जानबूझ के मुझसे दूर रह रही है. बिलकुल कोई मौका नहीं दे रही है आमने सामने आने का इसलिए मैं उनका चेहरा ठीक से देख भी नहीं पा रहा हु. शादी की प्लानिंग तक शुरु हो गई और अभी तक दूल्हा और दुल्हन की एक बार बात भी नहीं हो पाई मुझे एक बार उनसे बात करनी है.

डिनर टेबल पे शादी को लेके कोई बात नहीं हुई बस मैं जो खाना पसंद करता हु वही चीजे नानी जी मुझे ज्यादा से ज्यादा दे रही है. मैं जानता था यह सब माँ ने मेरे लिए ही बनाया. आज वह सामने आने में शर्मा रही है, इसलिए नानी के हाथों से सब बार बार भेज रही है. मैं मना कर रहा हूं , पर नानी जी केवल बोल रही है "तुम्हारे लिए ही बनाई गयी है. क्यूँ नहीं खाओगे?" और फिर मेरे तरफ देखकर मुस्कुरा रही है.
"बस और कुछ दिन..... नानी के हाथ का खाना खा लो... फिर तो तुम्हे साँस के हाथ का खाना खाना पड़ेगा." बोल के थोड़ा हंस के किचन के तरफ चली गई. नाना जी भी इस बात से हसने लगे. मैं शर्म के मारे अंदर घुसे जा रहा था.

मैं डिनर के बाद नाना जी के रूम में बैठ के बात कर रहा था. नानाजी ने पूछा की अब मुझे नए घर पर शिफ़्ट करना है की उसी घर में रहना है, मैंने बताया की यह घर ही फिलहाल ठीक है. नानी जी बोलने लगी की अब तक तो मैं अकेला था, सब चल जाता था. लेकिन अब फेमिली रहेगी. तो उसके लिए सारे सामान का भी बंदोबस्त करना पडेगा. मैंने बोला की उस बात की कोई चिंता न करें वो सब मैं खुद ही संभल सकता हूं. मैं फ़टाफ़ट डिस्कशन को एन्ड करके नाना जी के रूम से बाहर आ गया और जैसे ही मैं ड्राइंग रूम की तरफ जाने लगा तब मुझे मेरे रूम की लाइट चालू दिखाई दि. मेरी छाती में झट से एक ऐसी फीलिंग हुई की जैसे मेरी छाती से कुछ निकल ने लगा हो और अचानक मेरी बॉडी हल्की हो गई.

मैंने डोर के पास जाते हि वो प्रजेंस फील कर ली. वह मेरे तरफ पीठ करके, थोड़ा झुक के, मच्छर दानी सही से चारो तरफ बिस्तर के साइड में घुसा रहे थी. मेरे आते ही वह अचानक वह सब बंद करके खड़ी हो गई उनका फुल बैक साइड मेरी तरफ है, मैं अपने रूम की तरफ चलने लगा. मुझे मालूम था जब मैं नहीं होता हूं तब माँ आके मेरा बिस्तर ठीक करके जाती है और इसलिए मैं डिनर करके नानाजी के रूम में उस मौके का इंतज़ार कर रहा था. मैं उनके जितना नजदीक जा रहा था, उतना ही नर्वस भी हो रहा था. एक अजीब अनुभुति भी हो रही थी और एक नशा भी. उनको देखके मैं कैसे रियेक्ट करूँगा या वह कैसे रियेक्ट करेंगी फिर भी मैं उनको एकबार सामने से देखना चाहता हु उनसे बात करना चाहता हु.




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एक हलके येलो कलर की प्रिंटेड साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहनी हुई थी. ब्लाउज के ऊपर गोरी गोरी, मुलायम और सुडौल गर्दन तथा पीठ का ऊपरी भाग नज़र आ रहा था साथ में बाल खुले थे. उनके बॉडी कर्व्स ढ़लान लेके दोनों साइड से आके उनकी पतली कमर में मिल रहे है. उनकी गान्ड उभरी हुई नजर आ रही है. आज तक जो चीज़ मेरी फेंटेसी की दुनिया में होती थी, आज पहली बार हकीकत में हो रही है. उनको देख कर उनके सामने ही, पजामे के अंदर मेरा लौड़ा सख्त होने लगा.
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मां उनके राईट हैंड से पलंग का स्टैंड पकड़ के स्थिर हो गयी. उनको सर झुका के खड़ी होते देख अचानक मेरे अंदर की सब घबराहट ग़ायब होने लगी और एक अजीब मदहोशी मुझमें छाने लगी. जो प्यार मैं उनके लिए पिछले कई सालों से छुपाके रखा था, आज वह प्यार, वह अनुभुति पहली बार मेरे दिल में इस वास्तव दुनिया में आने लगी. दिनभर बहुत कुछ सोचा था माँ के लिए, लेकिन अब जब वह सामने खड़ी है तो मैं सब कुछ भूल गया. केवल मेरे छाती में तरंग जैसे कुछ बहने लगी. मैं रूम के अंदर गया वह अपने राईट हैंड की थंब नेल से पलंग के स्टैंड के उप्पर रब करने लगी. मैंने उनको देखते हुए कहा


"मां...... एक्चुअली....... मैं तुमसे सच में बहुत प्यार करता हूं"
ये सुनते ही माँ शायद थोड़ा काँप उठी. फिर खुद को कंट्रोल करके वहां खड़ी रही. मैं धीरे धीरे चलके मेरे स्टडी टेबल के पास गया. वहाँ से उनका साइड प्रोफाइल नज़र आ रहा था उनके चेहरा पे शर्म छाई हुई है. नज़र झुकि हुई है. यहाँ से मुझे उनके पेट् का नज़र आ रहा है


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जो एक दम फ्लैट है. मैं उनके पेट को देख के सोचने लगा की इस पेट के अंदर से ही एक दिन मेरा बच्चा आएगा. मैं यह सोच के और भी रोमाँचित हो गया और पाजामे के अंदर मेरा लौड़ा सख्त हो गया. जैसे ही मैं डोर छोड़के अंदर आया मां फट से मुड़के तेज़ी से रूम से निकल गई. मैं उनका जाना देखने लगा. ऐसी एक सुन्दर औरत, जिसको में प्यार भी करता हु, रेस्पेक्ट भी करता हु, चाहता भी हु, उनके साथ ही में पूरी ज़िन्दगी बिताने वाला हु यह सोच के मेरे मन में खुशी छा गईं.

उस रात मैं आँखे बंध करके माँ के किये हुए बिस्तर में सोके उनका स्पर्श महसुस कर रहा था. लग रहा था जैसे वह मेरे एकदम पास, एक दम करीब है. बस कुछ दिन का फासला है. फिर वह सुन्दर, नरम, प्यारी औरत, हर रात मेरी बाँहों में रहेगी और में उनको बहुत प्यार करूंगा. मैं उनको कभी कुछ भी दुःख महसुस करने नहीं दूंगा. हमेशा उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा देखने चाहता हु. मैं एक अच्छे पति का धर्म निभाते हुए दुनिया की हर ख़ुशी उनके सामने लाकर दुंगा. उनके तन मन को हमेशा आनंद में रखुंगा. मैं इन सब बातों से गरम हो गया था. फिर भी मन ही मन कसम खाइ की आज से मेरे तन मन की हर ख़ुशी भी उनके साथ ही शेयर करूंगा. तो उस रात में मूठ मारके अकेले वह सुख लेना नहीं चाह रहा था अब मैं सब कुछ बस उनके साथ ही करना चाहता हु और मैं हमारी सुहागरात में उनको परिपूर्ण संतुष्टि देना चाहता हु. येे सब सोच के मेरी आंखो में नीद कब आकर मुझे एक ख़ुशी के सागर में बहाके ले गई, मुझे पता नहीं चला.



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my other story :- Maa meri ho gayi
Sexy story 😍
 
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मै हितेश। बचपन से मैं अपने नाना नानी और माँ के साथ रह के बड़ा हुआ । फादर न रहने के कारन मेरे नाना नानी ने कभी कोई कमी नहीं छोड़ी प्यार और सपोर्ट देने में। माँ ने हमेशा आपनी ममता और प्यार से मुझे पाला। नाना के पास पैसा होने के कारण मुझे कभी कुछ भी चीज़ की कमी महसुस करने नहीं हुई। मैं बहुत ही अच्छा स्टूडेंट था इस लिए सब लोग मुझे प्यार ही प्यार देते थे। मैं बदमाशी भी करता था पर इतना नहीं जो की बिगडे बच्चे करते है। छोटा मोटा शरारत करता वह अपनी तरीके से माफ़ किया कर देते थे। पर हाँ...मुझे हमेशा अच्चा वैल्यूज और मोरालिटी के साथ की पाला । बाहर ज़ादा लोगों के साथ मेरी दोस्ती भी नहीं थी। नाना नानी और माँ सब मेरे दोस्त भी थे और टीचर भी। डांटते भी थे , फिर सीखाते भी थे। हम चारों का एक स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग था। मेरे पिताजी के गुजर जाने के कुछ साल बाद , मेरे नाना नानी ने मेरी माँ की दोबारा शादी करवाने के लिए कोशिश कि थी। तब मेरी माँ 20-21 साल की थी।

Outfits
और आज भी वो 24 - २5 की ही लगती है । बहुत सुन्दर देखने में। स्लिम और गोरी, लम्बे बाल था , पान के पत्ते जैसा मुह का शेप। उनकी आँखे , आय ब्रोव्स , नाक, होठ सब कोई अर्टिस्ट का बना हुआ लगता है। Bsc तक पढ़ी है।
उसके बाद जिन्दगी में हदसा और बाद में मेरी देख भाल करने में जुट गई। मेरी और कोई मौसी या मामा नही है । सो नाना नानी की वही देख भाल करती थी। घर का काम भी करती थी , फिर मुझे पढाती भी थी और टाइम मिलता तो वह बड़े बड़े लेखको के नावेल स्टोरी पड़ने में उस्ताद थी। एक बेटी होने के कारण नाना नानी भी उनका घर में रहने का सब बंदोबस्त कर दिये थे। मेरे नानी भी इतने ओल्ड नहीं थे। पर मेरी माँ मेरे पिताजी का फॅमिली नहीं होने के कारण नाना नानी के फॅमिली को ही अपनी फॅमिली समझ के सब की देखभाल करती थी। शायद इस में उनको ख़ुशी मिलती थी और वक़्त भी गुजारने का तरीका मिला था। वह शांत स्वाभाव की थी पर हंसी की बातों से हस्ती और टीवी में दुःख दर्द भरी फिल्म देखके मायूस भी हो जाती थी।
Nayi kahani ki bhadhaai 🌹🌹. Achi suruvaat hai
 
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Update 2

कुछ लोग नाना जी के पास उनकी शादी का प्रपोजल भी लाए थे। पर मेरी माँ ने कैंसिल कर दिया। स्टार्टिंग में नाना नानी माँ पर गुस्सा करते थे । माँ के भविष्य के लिए वह बोलते थे की सारी ज़िन्दगी पड़ी है तेरी, कैसे गुजारेगी। और यह भी कहते थे की हितेश को भी तो एक बाप की इच्छा होती होगी। पर माँ का कहना था की अगर उन्होंने किसी से फिर से शादी कि तो वह आदमी अपना अधिकार दिखा कर हितेश का त्याग करने को कहेगा और नाना नानी को छोड़ के भी जाने लिए कहेंगा। अब इस सिचुएशन ये उनके लिए सम्भव नहीं था वह मुझ से दूर नहीं रह सकती थी, और नाना नानी को अकेले छोड़ के और किसी फॅमिली में जाके अपनी गृहस्थी नही बसा सकता थीं। माँ ने मेरा मुह देख के उनकी सब खुशियां विसर्जन कर देने का फैसला किया । नाना नानी धीरे धीरे उनकी बात मान ने लगे , पर अंदर ही अंदर फ्यूचर को लेके परेशान थे।

इसी बीच मैं बड़ा होते रहा. नाना नानी को में बहुत बहुत प्यार करता था. उन लोगों से दूर नहीं रह पाता . वह लोग मेरी दुनिया बन चुके थे. सबसे ज़ादा प्यार मैं माँ को करता था. उनका सब कुछ मुझे बहुत अच्छा लगता था. वह जो कहे, जो करे, जो खाना बनाये, जो कपडा ख़रीदे मेरे लिये..सब...सब कुछ मुझे अच्छा लगता था. इतनी अच्छी होने के बाद भी उनको ज़िन्दगी ने बहुत कुछ नही दिया . हम सब का ख्याल रखा, सब की जिम्मेदारी उठाना मेरे अंदर उनके लिए एक अद्भुत प्यार था . मैंने कभी उनको दुःख न देने की कसम खाई थी .
नाना का घर काफी बड़ा था. नाना नानी एक बड़ा से रूम में रहते थे मैं माँ के साथ रहता था दूसरे एक बड़े कमरे में. घर में और भी तीन रूम है. जो खाली पड़े है. पर मैं जैसे जैसे बड़ा होता गया मेरे लिए एक स्टडी रूम बना. फिर में अकेला सोने लगा.
मैने हमेशा एक डिफरेंस देखा. मेरे बाकि दोस्तोँ की माँ और मेरी माँ में बहुत अंतर है. वह सब एक भारी भरकम माँ जैसे होती थी, पर मेरी माँ उन लोगों की बेटी जैसे लगती थी.

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एक तो उम्र बहुत कम है. साथ में वह देखने में बहुत सुन्दर थी. उनको रास्ते में जाते हुए देंखे तो कॉलेज की लड़कियों की तरह लगती थी. पर किसको मालूम की उनको मेरे जैसा एक बेटा है और उनकी ज़िन्दगी में एक भयानक हदसा हो चुका है..
Nice update👍👍
 
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Update 4


मेरा लोड़ा बहुत मोटा और बड़ा है. और उसका अगला पोरशन सबसे ज्यादा मोटा और राउंड शेप का है.

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मेरे देखे हुये बाकि पेनिस की तरह छोटा नही हैं जब ओर्गास्म होता है तब उसके अगले भाग का कैप और भी फूल जाता है और मुठ्ठी की पकड़ में नही आ पता है. पर में ओर्गास्म के टाइम आंख बंध करके माँ के शरीर के अंदर मेरा सीमेन छोड़ने का सुख प्राप्त करने की सोचता हूं।


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Very nice update👍👍.
 
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Update 5



इसी तरह लाइफ चलती रही और मैं इंजीनियरिंग के लास्ट सेमेस्टर में पहुच गया। मेरा रिजल्ट अच्छा हो रहा था। पढाई में कोई ढील नहीं दि। जब नाना नानी और माँ मेरा इतना ख्याल रखते है, इतना प्यार देते है, तोह में क्यों न उन लोगों को खुश होने का मौका दू !! मेरी पढाई से सब खुश थे।
पढाई का प्रेशर और रात की फैंटसी सेक्स वर्ल्ड के कारण मैं बाकि स्टूडेंट से थोड़ा मेचुरड लगता था। एकबार में माँ के साथ घर की कुछ शॉपिंग में माँ को हेल्प करने के लिए उनके साथ एक सुपर मार्किट गया था । वहाँ मेरा एक क्लासमैट मेरी माँ को मेरी बहन समझ के बात कर रहा था।

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जब उसे बताया की यह मेरी माँ है, तो उसकी हालत क्या हुई थी , आज भी मुझे याद है। मेरा अच्छा ख़ासा मेनली अपीयरेंस के कारण कॉलेज में कुछ लड़कियां मेरे साथ क्लोज होने की कोशिश करती थी लेकिन मुझे मेरी माँ के अलावा कोई भी अच्छी नहीं लगती थी। इस लिए शायद में अपनी माँ के ही प्यार में पडा। पर ये मेरे मन की बात मन में ही रहती थी।

मुझे यह भी मालूम था की मुझे एक दिन किसी दूसरी लड़की से शादी करनी पडेगी। मुझे मालूम था की मैं मन में जो भी सोच के रोज खुश हो जाऊं, मुझे एक दिन एक लड़की को चुनना पड़ेगा को मेरी बीवी बनेगी । तब मुझे एक डर भी लगता था। क्युकी मेरा लोड़ा और बाकि सब के जैसा नही है। यह बहुत मोटा और आगे का कैप बहुत बड़ा राउंड शेप का है। फिर रस स्खलन के टाइम तो टोपा फूल के और भी बड़ा हो जाता है। मैं कैसे अपनी बीवी के साथ सेक्स करूँगा। यह सोच के में कभी कभी मायुस हो जाता था।


मेरे फाइनल एग्जाम से पहले मुझे जॉब मिल गया M.P. में। एक बहुत बड़ा इंजिनेअरिंग कंस्ट्रक्शन कम्पनी में। भारत की पुरानी कंपनी में से एक है। उस दिन घर में जब मैने यह न्यूज़ दिया , तो सब ख़ुशी से झूम उठे। इस लिए नहीं की मुझे सैलरी मिलेगी, वह लोग खुश इसलिए थे यह लडका, जिसका बाप बचपन में चल बसा, उसको उसके नाना नानी और माँ ने पाल के एक इंडिपेंडेंट आदमी बना दिया। नाना का पैर छुआ तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया। नानी का पैर छुए तो उन्होंने मेरे सर पे हाथ रख के अशीर्वाद दिया। नाना नानी बहुत भावूक हो चुके थे। ख़ुशी से आँख नम होक कर छल छल करने लगी। दोनों बहुत सारी बाते करे जा रहे थे। माँ एक साइड में खड़ी होके यह सब देख रही थी। जब में माँ के पास गया, माँ कुछ नहीं बोली। लेकिन उनकी आँखों मैने प्यार और ख़ुशी देखी।

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मेने उनके पैर छुए तो वह मुझे पकड के गले मिल गई पर मैं 5'11'' का था , वह 5' 5'' कि, तो उनका सर मेरे गले के पास कंधे में टिक गया।

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उन्होंने मुझे पकड़ के रखा कुछ मोमेन्ट्स। फिर छोड़ के मेरे दोनों गालो को दोनों हाथ से पकड के, आँखों में बहुत सारा प्यार लेके और होठो में ख़ुशी का स्माइल लेके मुझे देखा । फिर मुझे नाना ने बुलाया तो में उनके पास गया। माँ और नानी किचन में चली गयी मेरे लिए खीर बनाने के लिए। जब भी कुछ ख़ुशी की बात होती थी तो घर में खीर बनती थी। मैं खीर बहुत पसंद करता हू। आज भी मेरे घर में खीर की परंपरा जारी है।
Superb update.
 
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