- 6,326
- 9,715
- 174
Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

Last edited:

Super update BhaiUpdate - 40
पार्क से घर आकर मयंक ने राजीव खो फोन कर के कोचिंग का पूछा तो उसने कुछ देर में आने का बताते हुए फोन काट दिया जब तक मयंक नहाकर तैयार हो चुका था ।
बहार हार्न की आवाज सुनते ही वह बहार आया और घर के दरवाजे पर ताला लगाकर राजीव के सखथ बैठ गया ......
राजीव -"क्या हुआ ऐसा क्यूं लग रहा है जैसे किसी ने मार ली हो तेरी साले हाहहाहा "
"साले सुबह सुबह शुरू हो गया "........ मयंक ने पीछे से मुक्का मारते हुए कहा।
राजीव -"मिल आया जानवी से ?"
मयंक -"हां यार सब ठीक है उधर "
राजीव -"अगली बार मैं भी जाऊंगा और इस बार की तरह कुछ नहीं सुनने वाला"
मयंक -"अच्छा ये दद्दा को जानता है तू?"
राजीव -"दद्दा ? "
मयंक -"हां यार "
राजीव -"होगा किसी का दद्दा ..... मैं नहीं जानता"
मयंक -"अरे भोसडीके मैं किसी के दादा की बात नहीं कर रहा मैंने नाम तो सुना था इसका जब बलवीर के साथ था मैं ठीक से याद नहीं आ रहा "
राजीव -"पर तू क्यूं पूछ रहा है इसके बारे में?"
मयंक -"बलवीर को पता चल गया है मैं यहां हूं अब मारने की कोशिश करेगा पर कुछ दिन तक तो कोई हलचल नहीं होगी जितना मुझे अंदाजा है.....अब बात ये है की बलवीर के साथ ये दद्दा भी मिल गया है पर ये जानना होगा की इससे फायदा क्या होगा इसको मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं इससे पता लगाना पड़ेगा "
राजीव -"हां तो इसमें कौन सी बडी बात है पापा जरूर जानते होगे इस दद्दा को "
मयंक -"हां यार आज चाचा से मिलते हैं फिर "
बात करते हुए ये कोचिंग तक आ चुके थे और आज शायद टाइम पर भी थे ।और चुपचाप जाकर ये अपनी अपनी जगह बैठ गये पहला पीरियड बिना किसी परेशानी के गुजर गया और तीन और गुजर जाने के बाद जो ब्रेक टाइम मिला उसमें राजीव ने मयंक से कहा.....
"यार पंडत अब तुझे तो पता चल ही गया है तो तुझसे क्या छुपाना चल जरा सुट्टा मार के आते हैं"...... राजीव ने हाथ पकड कर कहा।
मयंक -"नहीं यार तू जा मैं नही जा रहा वैसे भी ज्योग्राफी वाली मैडम का है पीरियड है और वो कुछ कहेगी आज तो मेरा मूड भी नहीं है सुनने का ।"
राजीव -"फिर मैं भी नहीं जा रहा ..... वैसे दो मिनट लगती चलता तो"
मयंक -"चल "
मयंक को पता था राजीव कोंचा करता रहेगा इसलिए वो चल दिया राजीव के साथ बहार आ गया और नुक्कड़ पर छोटी सी दुकान पर आते ही राजीव दुकान में मौजूद छोटी सी जगह से भीतर की ओर बड गया और मयंक उसके पीछे अंदर आते ही एक बडी सी जगह थी जैसे ये जगह खास उसके लिए हो जो छुपकर सिगरेट पीता है।
"बताओ दुकान बैठने जितनी जगह में है और उसके पीछे रनिंग ट्रेक है"...... मयंक ने एक पत्थर पर बैठते हुए कहा।
राजीव -"भाई लडके लोग सिगरेट तो कहीं से भी लेले पर ऐसे छुपकर पीने के लिए जगह हर जगह नहीं है ना इसलिए यहां ज्यादा भीड होती है"
खैर कुछ देर बाद राजीव की सिगरेट खत्म हुई तो ये दोनों बहार की तरफ निकल चले क्लास की तरफ बढ़ते हुए मयंक क्लास के गेट तक पहुंचा तो सामने मैडम को खडे पाया और मयंक के पीछे राजीव के मुंह से आवाज निकली..... ",लग गये बहनचो"
"बहार क्या खडे हो अंद आओ दोनों".......मैडम ने राजीव और मयंक से कहा और दोनों अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब ही
मैडम -"ज्यादा लेट नहीं हो इसलिए अंदर आने दिया पर वहां क्या जा रहे हो यहां सबसे पहली पर बैठधा पडेगा क्योंकि मैं अपनी क्लास में कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं चाहिए"
राजीव और मयंक तो सोच चुके थे की अंदर जाने नहीं मिलेगा पर मैडम ने अंदर आने दिया वो उसी से खुश थे तो बिना कुछ कहे चुपचाप पहली डेस्क पर आ बैठे जहां सिर्फ इफ्तिका ही बैठी थी ।
इफ्तिका -"सब ठीक है ना मयंक"....... मयंक इफ्तिका के बगल से और राजीव मयंक के बगल से बैठा था अभी क्लास शुरू हुए दस मिनट हुए थे की तब ही ये सवाल इफ्तिका ने मयंक से किया ।
मयंक -"हां सब ठीक है....पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ?"
इफ्तिका -"बाजी ने हमसे कुछ कहा था सुबह आपके बारे में "
मयंक -"क्य क्क क्या कहा था बाजी ने?"
इफ्तिका -"हमें लगता है ये आप जानते हैं.....पर हम आपसे इतना ही कहेंगे आप हम पर विश्वास कर सकते हैं तो कोई भी दिक्कत हो तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं मन हल्का हो जाएगा आपका "
मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है इफ्तिका "
मयंक के इस सपाट लहजे को देखते हुए इफ्तिका ने आगे ज्यादा कुछ ना कहा और चुपचाप बस ध्यान क्लास में लगाए रखा ।
इसके बाद धीरे-धीरे बाकी क्लास भी खत्म हुई और राजीव और मयंक निकल गये कोचिंग से
"यार पहले मुझे छोड दे घर "....... मयंक ने राजीव को उसके घर की तरफ जाते हुए देख कहा।
राजीव -"मैं कौन सा तुझे किडनैप कर रहा हूं लोंडू खाना तो खाएगा ना यहा खाली पेट रहेगा "
मयंक -"मन नहीं है यार "
राजीव -"क्यूं अच्छी लुगाई के लिए उपवास रखने लगा है क्या ?"
इसके बाद मयंक ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वह समझ गया थ राजीव फुल मस्ती के मूड में था और वो कुछ भी कहेगा तो उसका मजाक ही बनाया जाएगा।
राजीव -"क्या हुआ पंडत तुझे कब से बुरा लगने.....याद है ना बुरा उसको ही लगता है जिसके बुर होती है "
मयंक -"अरे ऐसा कुछ नहीं है साले "
"लगता है ग्वालियर से प्लास्टिक वाली लगवाकर आया है "...... राजीव ने हंसते हुए कहा और राजीव की बात सुनकर मयंक की भी हसी निकल गई।
मयंक ने राजीव के यहां जाने से पहले अवनी और दीदी के लिए चाॅकलेट ली और घर जाकर अवनी के साथ खेला और वहां खाना खाकर राजीव उसको घर छोडकर चला गया।
अभी मयंक अपने कमरे में आया था और कपड़े चेंज कर ही रहा था की तब ही घर की बेल बजी तो वह तुरंत नीचे आया और जैसे ही गेट खोला तो सामने इफ्तिका खडी थी
"हटिए जरा ".......दरवाजा खुलते ही इफ्तिका ने मयंक से कहा
मयंक -"इफ्तिका इस वक्त यहां.....पर साक्षी का तो पता ही है वो घर नहीं है"
इफ्तिका -" हां पता है तब ही तो हम आए हैं चलिए आप हाथ मुंह धो लीजिए जब तक हम खाना लगाते हैं आपके लिए"
इफ्तिका मयंक के लिए खाना लेकर आई थी मयंक के लिए पर मयंक तो पहले ही चाची के यहां खाकर आया था ।
"आप खड़े क्यूं है बिरयानी ठंडी हो जाएगी जल्दी जाएं"....... इफ्तिका ने किचिन से बर्तन लाते हुए कहा।
"तुम से साक्षी ने कहा ये करने के लिए?"....... मयंक जैसे अपने मन की शंका को दूर करना चाह रहा था उसको लग रहा था की जरूर इफ्तिका से साक्षी ने कहा होगा
"ऐसा नहीं है!.....हमारा मतलब है की हमने पहले ही सोच लिया था खाना लाने का और शायद आपको पता नहीं होगा की हम कल भी आए थे पर घर पर ताला लगा हुआ था और साक्षी ने भी हमको फोन करके बोला था आपके लिए खाना लाने के लिए"......... इफ्तिका ने एक सांस में ही सब कह डाला ।
"पर मैं बिरयानी नहीं खा सकता "....... मयंक ने इफ्तिका की हालत को देखते हुए कहा।
"क्यूं भला हमने अपनी जिंदगी में किसी को बिरयानी के लिए मना करते हुए नहीं देखा है"....... इफ्तिका ने बडे ही आश्चर्य से पूछा
मयंक -"पर ये बात शाकाहारी पर लागू नहीं होती "
"है अल्** हम तो भूल ही गये थे ".......... इफ्तिका ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
अभी इन लोगों की बात चल ही रही थी की तब ही घर की घंटी एक बार और बजी और मयंक ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो सामने मैडम खडी थी टिफिन लिए हुए मयंक तो देखकर चौंक गया .....
"क्या हुआ मैं क्लास में आने नही देती तो बदला ले रहे हो ?"......जब मयंक दरवाजे पर खडा रहा तो रावी ने कहा।
"ऐसा नहीं है मेम आइए "..... मयंक ने दरवाजे से हटते हुए कहा।
पर जैसे ही रावी अंदर आई तो इफ्तिका को सोफे पर बैठा पाया पता नहीं क्यूं उसके शरीर में आग सी लग गई उसको गुस्सा क्यूं आया ये तो वह खुद नहीं जान पाई ।
रावी -"इफ्तिका तुम यहां"
इफ्तिका -"मेम हम मयंक के लिए खाना लेकर आए थे.....पर हमें याद नहीं रहा की मयंक मांसाहारी नहीं है और हम बिरयानी ले आए"
रावी -"मुझे पता नहीं था की तुम आ रही हो..... ये लो मयंक टिफिन "
रावी को ये सुनकर बडा ही अच्छा लगा की मयंक इफ्तिका का खाना नहीं खा पाएगा और उसने मयंक को टिफिन दिया पर एकदम से जाने क्या याद आ गया और एक बार फिर मन में क्रोध उमड आया और जल्दी से बहार निकल गई।......मेम के जाते ही मयंक सोफे के पास आया तो एक खाली प्लेट ,चाकू और सब्जियां रखी हुई थी।
मयंक -"ये सब क्या है"
"वो हमने सोचा आप ये तो खाएंगे नहीं तो कुछ बना ही देते हैं आपके लिए"........ इफ्तिका ने गर्दन झुकाते हुए कहा।
मयंक -"तुम्हें पता है राजीव मुझे पहले ही अपने घर ले गया था ठाने के लिए चाची ने बहुत खिला कर भेजा है"
इफ्तिका -"क्या ?.......और हम यूं ही इतनी महनत कर रहे थे वो भी खाली पेट "
मयंक -"इफ्तिका लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी ......ठीक है चलो तुम टेबल पर बैठो मैं खाना लगाता हूं ".
इफ्तिका -"नहीं अब तो हम घर जाकर ही खा लेंगे "
मयंक -"क्या यार मैडम खाना देकर ग ई हैं खाकर तो देखें ये खाना भी तीखा ही बनाती हैं जैसे खुद है "
इस बात को सुनकर इफ्तिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इफ्तिका -"फिर साथ में खाना पड़ेगा "
मयंक -"पर मैं...
इफ्तिका -"हम कुछ नहीं कर सकते इसमें खाना पडेगा और सबसे पहले नंबर दें अपना आपके चाहने वाले कुछ ज्यादा ही हैं पूछकर ही आपकी फिक्र करेंगे"
मयंक -"ठीक है फिर यही सही और चाहने वाले की बात है तो मेरा ऐसा मानना है की चाहने और ना चाहने वाले तो बहुत होते हैं पर शुकून तो तब ही है जब हम जिसको चाहते हैं वो चाहता हो ......
Nice and superb update....Update - 40
पार्क से घर आकर मयंक ने राजीव खो फोन कर के कोचिंग का पूछा तो उसने कुछ देर में आने का बताते हुए फोन काट दिया जब तक मयंक नहाकर तैयार हो चुका था ।
बहार हार्न की आवाज सुनते ही वह बहार आया और घर के दरवाजे पर ताला लगाकर राजीव के सखथ बैठ गया ......
राजीव -"क्या हुआ ऐसा क्यूं लग रहा है जैसे किसी ने मार ली हो तेरी साले हाहहाहा "
"साले सुबह सुबह शुरू हो गया "........ मयंक ने पीछे से मुक्का मारते हुए कहा।
राजीव -"मिल आया जानवी से ?"
मयंक -"हां यार सब ठीक है उधर "
राजीव -"अगली बार मैं भी जाऊंगा और इस बार की तरह कुछ नहीं सुनने वाला"
मयंक -"अच्छा ये दद्दा को जानता है तू?"
राजीव -"दद्दा ? "
मयंक -"हां यार "
राजीव -"होगा किसी का दद्दा ..... मैं नहीं जानता"
मयंक -"अरे भोसडीके मैं किसी के दादा की बात नहीं कर रहा मैंने नाम तो सुना था इसका जब बलवीर के साथ था मैं ठीक से याद नहीं आ रहा "
राजीव -"पर तू क्यूं पूछ रहा है इसके बारे में?"
मयंक -"बलवीर को पता चल गया है मैं यहां हूं अब मारने की कोशिश करेगा पर कुछ दिन तक तो कोई हलचल नहीं होगी जितना मुझे अंदाजा है.....अब बात ये है की बलवीर के साथ ये दद्दा भी मिल गया है पर ये जानना होगा की इससे फायदा क्या होगा इसको मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं इससे पता लगाना पड़ेगा "
राजीव -"हां तो इसमें कौन सी बडी बात है पापा जरूर जानते होगे इस दद्दा को "
मयंक -"हां यार आज चाचा से मिलते हैं फिर "
बात करते हुए ये कोचिंग तक आ चुके थे और आज शायद टाइम पर भी थे ।और चुपचाप जाकर ये अपनी अपनी जगह बैठ गये पहला पीरियड बिना किसी परेशानी के गुजर गया और तीन और गुजर जाने के बाद जो ब्रेक टाइम मिला उसमें राजीव ने मयंक से कहा.....
"यार पंडत अब तुझे तो पता चल ही गया है तो तुझसे क्या छुपाना चल जरा सुट्टा मार के आते हैं"...... राजीव ने हाथ पकड कर कहा।
मयंक -"नहीं यार तू जा मैं नही जा रहा वैसे भी ज्योग्राफी वाली मैडम का है पीरियड है और वो कुछ कहेगी आज तो मेरा मूड भी नहीं है सुनने का ।"
राजीव -"फिर मैं भी नहीं जा रहा ..... वैसे दो मिनट लगती चलता तो"
मयंक -"चल "
मयंक को पता था राजीव कोंचा करता रहेगा इसलिए वो चल दिया राजीव के साथ बहार आ गया और नुक्कड़ पर छोटी सी दुकान पर आते ही राजीव दुकान में मौजूद छोटी सी जगह से भीतर की ओर बड गया और मयंक उसके पीछे अंदर आते ही एक बडी सी जगह थी जैसे ये जगह खास उसके लिए हो जो छुपकर सिगरेट पीता है।
"बताओ दुकान बैठने जितनी जगह में है और उसके पीछे रनिंग ट्रेक है"...... मयंक ने एक पत्थर पर बैठते हुए कहा।
राजीव -"भाई लडके लोग सिगरेट तो कहीं से भी लेले पर ऐसे छुपकर पीने के लिए जगह हर जगह नहीं है ना इसलिए यहां ज्यादा भीड होती है"
खैर कुछ देर बाद राजीव की सिगरेट खत्म हुई तो ये दोनों बहार की तरफ निकल चले क्लास की तरफ बढ़ते हुए मयंक क्लास के गेट तक पहुंचा तो सामने मैडम को खडे पाया और मयंक के पीछे राजीव के मुंह से आवाज निकली..... ",लग गये बहनचो"
"बहार क्या खडे हो अंद आओ दोनों".......मैडम ने राजीव और मयंक से कहा और दोनों अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब ही
मैडम -"ज्यादा लेट नहीं हो इसलिए अंदर आने दिया पर वहां क्या जा रहे हो यहां सबसे पहली पर बैठधा पडेगा क्योंकि मैं अपनी क्लास में कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं चाहिए"
राजीव और मयंक तो सोच चुके थे की अंदर जाने नहीं मिलेगा पर मैडम ने अंदर आने दिया वो उसी से खुश थे तो बिना कुछ कहे चुपचाप पहली डेस्क पर आ बैठे जहां सिर्फ इफ्तिका ही बैठी थी ।
इफ्तिका -"सब ठीक है ना मयंक"....... मयंक इफ्तिका के बगल से और राजीव मयंक के बगल से बैठा था अभी क्लास शुरू हुए दस मिनट हुए थे की तब ही ये सवाल इफ्तिका ने मयंक से किया ।
मयंक -"हां सब ठीक है....पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ?"
इफ्तिका -"बाजी ने हमसे कुछ कहा था सुबह आपके बारे में "
मयंक -"क्य क्क क्या कहा था बाजी ने?"
इफ्तिका -"हमें लगता है ये आप जानते हैं.....पर हम आपसे इतना ही कहेंगे आप हम पर विश्वास कर सकते हैं तो कोई भी दिक्कत हो तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं मन हल्का हो जाएगा आपका "
मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है इफ्तिका "
मयंक के इस सपाट लहजे को देखते हुए इफ्तिका ने आगे ज्यादा कुछ ना कहा और चुपचाप बस ध्यान क्लास में लगाए रखा ।
इसके बाद धीरे-धीरे बाकी क्लास भी खत्म हुई और राजीव और मयंक निकल गये कोचिंग से
"यार पहले मुझे छोड दे घर "....... मयंक ने राजीव को उसके घर की तरफ जाते हुए देख कहा।
राजीव -"मैं कौन सा तुझे किडनैप कर रहा हूं लोंडू खाना तो खाएगा ना यहा खाली पेट रहेगा "
मयंक -"मन नहीं है यार "
राजीव -"क्यूं अच्छी लुगाई के लिए उपवास रखने लगा है क्या ?"
इसके बाद मयंक ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वह समझ गया थ राजीव फुल मस्ती के मूड में था और वो कुछ भी कहेगा तो उसका मजाक ही बनाया जाएगा।
राजीव -"क्या हुआ पंडत तुझे कब से बुरा लगने.....याद है ना बुरा उसको ही लगता है जिसके बुर होती है "
मयंक -"अरे ऐसा कुछ नहीं है साले "
"लगता है ग्वालियर से प्लास्टिक वाली लगवाकर आया है "...... राजीव ने हंसते हुए कहा और राजीव की बात सुनकर मयंक की भी हसी निकल गई।
मयंक ने राजीव के यहां जाने से पहले अवनी और दीदी के लिए चाॅकलेट ली और घर जाकर अवनी के साथ खेला और वहां खाना खाकर राजीव उसको घर छोडकर चला गया।
अभी मयंक अपने कमरे में आया था और कपड़े चेंज कर ही रहा था की तब ही घर की बेल बजी तो वह तुरंत नीचे आया और जैसे ही गेट खोला तो सामने इफ्तिका खडी थी
"हटिए जरा ".......दरवाजा खुलते ही इफ्तिका ने मयंक से कहा
मयंक -"इफ्तिका इस वक्त यहां.....पर साक्षी का तो पता ही है वो घर नहीं है"
इफ्तिका -" हां पता है तब ही तो हम आए हैं चलिए आप हाथ मुंह धो लीजिए जब तक हम खाना लगाते हैं आपके लिए"
इफ्तिका मयंक के लिए खाना लेकर आई थी मयंक के लिए पर मयंक तो पहले ही चाची के यहां खाकर आया था ।
"आप खड़े क्यूं है बिरयानी ठंडी हो जाएगी जल्दी जाएं"....... इफ्तिका ने किचिन से बर्तन लाते हुए कहा।
"तुम से साक्षी ने कहा ये करने के लिए?"....... मयंक जैसे अपने मन की शंका को दूर करना चाह रहा था उसको लग रहा था की जरूर इफ्तिका से साक्षी ने कहा होगा
"ऐसा नहीं है!.....हमारा मतलब है की हमने पहले ही सोच लिया था खाना लाने का और शायद आपको पता नहीं होगा की हम कल भी आए थे पर घर पर ताला लगा हुआ था और साक्षी ने भी हमको फोन करके बोला था आपके लिए खाना लाने के लिए"......... इफ्तिका ने एक सांस में ही सब कह डाला ।
"पर मैं बिरयानी नहीं खा सकता "....... मयंक ने इफ्तिका की हालत को देखते हुए कहा।
"क्यूं भला हमने अपनी जिंदगी में किसी को बिरयानी के लिए मना करते हुए नहीं देखा है"....... इफ्तिका ने बडे ही आश्चर्य से पूछा
मयंक -"पर ये बात शाकाहारी पर लागू नहीं होती "
"है अल्** हम तो भूल ही गये थे ".......... इफ्तिका ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
अभी इन लोगों की बात चल ही रही थी की तब ही घर की घंटी एक बार और बजी और मयंक ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो सामने मैडम खडी थी टिफिन लिए हुए मयंक तो देखकर चौंक गया .....
"क्या हुआ मैं क्लास में आने नही देती तो बदला ले रहे हो ?"......जब मयंक दरवाजे पर खडा रहा तो रावी ने कहा।
"ऐसा नहीं है मेम आइए "..... मयंक ने दरवाजे से हटते हुए कहा।
पर जैसे ही रावी अंदर आई तो इफ्तिका को सोफे पर बैठा पाया पता नहीं क्यूं उसके शरीर में आग सी लग गई उसको गुस्सा क्यूं आया ये तो वह खुद नहीं जान पाई ।
रावी -"इफ्तिका तुम यहां"
इफ्तिका -"मेम हम मयंक के लिए खाना लेकर आए थे.....पर हमें याद नहीं रहा की मयंक मांसाहारी नहीं है और हम बिरयानी ले आए"
रावी -"मुझे पता नहीं था की तुम आ रही हो..... ये लो मयंक टिफिन "
रावी को ये सुनकर बडा ही अच्छा लगा की मयंक इफ्तिका का खाना नहीं खा पाएगा और उसने मयंक को टिफिन दिया पर एकदम से जाने क्या याद आ गया और एक बार फिर मन में क्रोध उमड आया और जल्दी से बहार निकल गई।......मेम के जाते ही मयंक सोफे के पास आया तो एक खाली प्लेट ,चाकू और सब्जियां रखी हुई थी।
मयंक -"ये सब क्या है"
"वो हमने सोचा आप ये तो खाएंगे नहीं तो कुछ बना ही देते हैं आपके लिए"........ इफ्तिका ने गर्दन झुकाते हुए कहा।
मयंक -"तुम्हें पता है राजीव मुझे पहले ही अपने घर ले गया था ठाने के लिए चाची ने बहुत खिला कर भेजा है"
इफ्तिका -"क्या ?.......और हम यूं ही इतनी महनत कर रहे थे वो भी खाली पेट "
मयंक -"इफ्तिका लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी ......ठीक है चलो तुम टेबल पर बैठो मैं खाना लगाता हूं ".
इफ्तिका -"नहीं अब तो हम घर जाकर ही खा लेंगे "
मयंक -"क्या यार मैडम खाना देकर ग ई हैं खाकर तो देखें ये खाना भी तीखा ही बनाती हैं जैसे खुद है "
इस बात को सुनकर इफ्तिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इफ्तिका -"फिर साथ में खाना पड़ेगा "
मयंक -"पर मैं...
इफ्तिका -"हम कुछ नहीं कर सकते इसमें खाना पडेगा और सबसे पहले नंबर दें अपना आपके चाहने वाले कुछ ज्यादा ही हैं पूछकर ही आपकी फिक्र करेंगे"
मयंक -"ठीक है फिर यही सही और चाहने वाले की बात है तो मेरा ऐसा मानना है की चाहने और ना चाहने वाले तो बहुत होते हैं पर शुकून तो तब ही है जब हम जिसको चाहते हैं वो चाहता हो ......
Nice updateUpdate - 40
पार्क से घर आकर मयंक ने राजीव खो फोन कर के कोचिंग का पूछा तो उसने कुछ देर में आने का बताते हुए फोन काट दिया जब तक मयंक नहाकर तैयार हो चुका था ।
बहार हार्न की आवाज सुनते ही वह बहार आया और घर के दरवाजे पर ताला लगाकर राजीव के सखथ बैठ गया ......
राजीव -"क्या हुआ ऐसा क्यूं लग रहा है जैसे किसी ने मार ली हो तेरी साले हाहहाहा "
"साले सुबह सुबह शुरू हो गया "........ मयंक ने पीछे से मुक्का मारते हुए कहा।
राजीव -"मिल आया जानवी से ?"
मयंक -"हां यार सब ठीक है उधर "
राजीव -"अगली बार मैं भी जाऊंगा और इस बार की तरह कुछ नहीं सुनने वाला"
मयंक -"अच्छा ये दद्दा को जानता है तू?"
राजीव -"दद्दा ? "
मयंक -"हां यार "
राजीव -"होगा किसी का दद्दा ..... मैं नहीं जानता"
मयंक -"अरे भोसडीके मैं किसी के दादा की बात नहीं कर रहा मैंने नाम तो सुना था इसका जब बलवीर के साथ था मैं ठीक से याद नहीं आ रहा "
राजीव -"पर तू क्यूं पूछ रहा है इसके बारे में?"
मयंक -"बलवीर को पता चल गया है मैं यहां हूं अब मारने की कोशिश करेगा पर कुछ दिन तक तो कोई हलचल नहीं होगी जितना मुझे अंदाजा है.....अब बात ये है की बलवीर के साथ ये दद्दा भी मिल गया है पर ये जानना होगा की इससे फायदा क्या होगा इसको मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं इससे पता लगाना पड़ेगा "
राजीव -"हां तो इसमें कौन सी बडी बात है पापा जरूर जानते होगे इस दद्दा को "
मयंक -"हां यार आज चाचा से मिलते हैं फिर "
बात करते हुए ये कोचिंग तक आ चुके थे और आज शायद टाइम पर भी थे ।और चुपचाप जाकर ये अपनी अपनी जगह बैठ गये पहला पीरियड बिना किसी परेशानी के गुजर गया और तीन और गुजर जाने के बाद जो ब्रेक टाइम मिला उसमें राजीव ने मयंक से कहा.....
"यार पंडत अब तुझे तो पता चल ही गया है तो तुझसे क्या छुपाना चल जरा सुट्टा मार के आते हैं"...... राजीव ने हाथ पकड कर कहा।
मयंक -"नहीं यार तू जा मैं नही जा रहा वैसे भी ज्योग्राफी वाली मैडम का है पीरियड है और वो कुछ कहेगी आज तो मेरा मूड भी नहीं है सुनने का ।"
राजीव -"फिर मैं भी नहीं जा रहा ..... वैसे दो मिनट लगती चलता तो"
मयंक -"चल "
मयंक को पता था राजीव कोंचा करता रहेगा इसलिए वो चल दिया राजीव के साथ बहार आ गया और नुक्कड़ पर छोटी सी दुकान पर आते ही राजीव दुकान में मौजूद छोटी सी जगह से भीतर की ओर बड गया और मयंक उसके पीछे अंदर आते ही एक बडी सी जगह थी जैसे ये जगह खास उसके लिए हो जो छुपकर सिगरेट पीता है।
"बताओ दुकान बैठने जितनी जगह में है और उसके पीछे रनिंग ट्रेक है"...... मयंक ने एक पत्थर पर बैठते हुए कहा।
राजीव -"भाई लडके लोग सिगरेट तो कहीं से भी लेले पर ऐसे छुपकर पीने के लिए जगह हर जगह नहीं है ना इसलिए यहां ज्यादा भीड होती है"
खैर कुछ देर बाद राजीव की सिगरेट खत्म हुई तो ये दोनों बहार की तरफ निकल चले क्लास की तरफ बढ़ते हुए मयंक क्लास के गेट तक पहुंचा तो सामने मैडम को खडे पाया और मयंक के पीछे राजीव के मुंह से आवाज निकली..... ",लग गये बहनचो"
"बहार क्या खडे हो अंद आओ दोनों".......मैडम ने राजीव और मयंक से कहा और दोनों अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब ही
मैडम -"ज्यादा लेट नहीं हो इसलिए अंदर आने दिया पर वहां क्या जा रहे हो यहां सबसे पहली पर बैठधा पडेगा क्योंकि मैं अपनी क्लास में कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं चाहिए"
राजीव और मयंक तो सोच चुके थे की अंदर जाने नहीं मिलेगा पर मैडम ने अंदर आने दिया वो उसी से खुश थे तो बिना कुछ कहे चुपचाप पहली डेस्क पर आ बैठे जहां सिर्फ इफ्तिका ही बैठी थी ।
इफ्तिका -"सब ठीक है ना मयंक"....... मयंक इफ्तिका के बगल से और राजीव मयंक के बगल से बैठा था अभी क्लास शुरू हुए दस मिनट हुए थे की तब ही ये सवाल इफ्तिका ने मयंक से किया ।
मयंक -"हां सब ठीक है....पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ?"
इफ्तिका -"बाजी ने हमसे कुछ कहा था सुबह आपके बारे में "
मयंक -"क्य क्क क्या कहा था बाजी ने?"
इफ्तिका -"हमें लगता है ये आप जानते हैं.....पर हम आपसे इतना ही कहेंगे आप हम पर विश्वास कर सकते हैं तो कोई भी दिक्कत हो तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं मन हल्का हो जाएगा आपका "
मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है इफ्तिका "
मयंक के इस सपाट लहजे को देखते हुए इफ्तिका ने आगे ज्यादा कुछ ना कहा और चुपचाप बस ध्यान क्लास में लगाए रखा ।
इसके बाद धीरे-धीरे बाकी क्लास भी खत्म हुई और राजीव और मयंक निकल गये कोचिंग से
"यार पहले मुझे छोड दे घर "....... मयंक ने राजीव को उसके घर की तरफ जाते हुए देख कहा।
राजीव -"मैं कौन सा तुझे किडनैप कर रहा हूं लोंडू खाना तो खाएगा ना यहा खाली पेट रहेगा "
मयंक -"मन नहीं है यार "
राजीव -"क्यूं अच्छी लुगाई के लिए उपवास रखने लगा है क्या ?"
इसके बाद मयंक ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वह समझ गया थ राजीव फुल मस्ती के मूड में था और वो कुछ भी कहेगा तो उसका मजाक ही बनाया जाएगा।
राजीव -"क्या हुआ पंडत तुझे कब से बुरा लगने.....याद है ना बुरा उसको ही लगता है जिसके बुर होती है "
मयंक -"अरे ऐसा कुछ नहीं है साले "
"लगता है ग्वालियर से प्लास्टिक वाली लगवाकर आया है "...... राजीव ने हंसते हुए कहा और राजीव की बात सुनकर मयंक की भी हसी निकल गई।
मयंक ने राजीव के यहां जाने से पहले अवनी और दीदी के लिए चाॅकलेट ली और घर जाकर अवनी के साथ खेला और वहां खाना खाकर राजीव उसको घर छोडकर चला गया।
अभी मयंक अपने कमरे में आया था और कपड़े चेंज कर ही रहा था की तब ही घर की बेल बजी तो वह तुरंत नीचे आया और जैसे ही गेट खोला तो सामने इफ्तिका खडी थी
"हटिए जरा ".......दरवाजा खुलते ही इफ्तिका ने मयंक से कहा
मयंक -"इफ्तिका इस वक्त यहां.....पर साक्षी का तो पता ही है वो घर नहीं है"
इफ्तिका -" हां पता है तब ही तो हम आए हैं चलिए आप हाथ मुंह धो लीजिए जब तक हम खाना लगाते हैं आपके लिए"
इफ्तिका मयंक के लिए खाना लेकर आई थी मयंक के लिए पर मयंक तो पहले ही चाची के यहां खाकर आया था ।
"आप खड़े क्यूं है बिरयानी ठंडी हो जाएगी जल्दी जाएं"....... इफ्तिका ने किचिन से बर्तन लाते हुए कहा।
"तुम से साक्षी ने कहा ये करने के लिए?"....... मयंक जैसे अपने मन की शंका को दूर करना चाह रहा था उसको लग रहा था की जरूर इफ्तिका से साक्षी ने कहा होगा
"ऐसा नहीं है!.....हमारा मतलब है की हमने पहले ही सोच लिया था खाना लाने का और शायद आपको पता नहीं होगा की हम कल भी आए थे पर घर पर ताला लगा हुआ था और साक्षी ने भी हमको फोन करके बोला था आपके लिए खाना लाने के लिए"......... इफ्तिका ने एक सांस में ही सब कह डाला ।
"पर मैं बिरयानी नहीं खा सकता "....... मयंक ने इफ्तिका की हालत को देखते हुए कहा।
"क्यूं भला हमने अपनी जिंदगी में किसी को बिरयानी के लिए मना करते हुए नहीं देखा है"....... इफ्तिका ने बडे ही आश्चर्य से पूछा
मयंक -"पर ये बात शाकाहारी पर लागू नहीं होती "
"है अल्** हम तो भूल ही गये थे ".......... इफ्तिका ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
अभी इन लोगों की बात चल ही रही थी की तब ही घर की घंटी एक बार और बजी और मयंक ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो सामने मैडम खडी थी टिफिन लिए हुए मयंक तो देखकर चौंक गया .....
"क्या हुआ मैं क्लास में आने नही देती तो बदला ले रहे हो ?"......जब मयंक दरवाजे पर खडा रहा तो रावी ने कहा।
"ऐसा नहीं है मेम आइए "..... मयंक ने दरवाजे से हटते हुए कहा।
पर जैसे ही रावी अंदर आई तो इफ्तिका को सोफे पर बैठा पाया पता नहीं क्यूं उसके शरीर में आग सी लग गई उसको गुस्सा क्यूं आया ये तो वह खुद नहीं जान पाई ।
रावी -"इफ्तिका तुम यहां"
इफ्तिका -"मेम हम मयंक के लिए खाना लेकर आए थे.....पर हमें याद नहीं रहा की मयंक मांसाहारी नहीं है और हम बिरयानी ले आए"
रावी -"मुझे पता नहीं था की तुम आ रही हो..... ये लो मयंक टिफिन "
रावी को ये सुनकर बडा ही अच्छा लगा की मयंक इफ्तिका का खाना नहीं खा पाएगा और उसने मयंक को टिफिन दिया पर एकदम से जाने क्या याद आ गया और एक बार फिर मन में क्रोध उमड आया और जल्दी से बहार निकल गई।......मेम के जाते ही मयंक सोफे के पास आया तो एक खाली प्लेट ,चाकू और सब्जियां रखी हुई थी।
मयंक -"ये सब क्या है"
"वो हमने सोचा आप ये तो खाएंगे नहीं तो कुछ बना ही देते हैं आपके लिए"........ इफ्तिका ने गर्दन झुकाते हुए कहा।
मयंक -"तुम्हें पता है राजीव मुझे पहले ही अपने घर ले गया था ठाने के लिए चाची ने बहुत खिला कर भेजा है"
इफ्तिका -"क्या ?.......और हम यूं ही इतनी महनत कर रहे थे वो भी खाली पेट "
मयंक -"इफ्तिका लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी ......ठीक है चलो तुम टेबल पर बैठो मैं खाना लगाता हूं ".
इफ्तिका -"नहीं अब तो हम घर जाकर ही खा लेंगे "
मयंक -"क्या यार मैडम खाना देकर ग ई हैं खाकर तो देखें ये खाना भी तीखा ही बनाती हैं जैसे खुद है "
इस बात को सुनकर इफ्तिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इफ्तिका -"फिर साथ में खाना पड़ेगा "
मयंक -"पर मैं...
इफ्तिका -"हम कुछ नहीं कर सकते इसमें खाना पडेगा और सबसे पहले नंबर दें अपना आपके चाहने वाले कुछ ज्यादा ही हैं पूछकर ही आपकी फिक्र करेंगे"
मयंक -"ठीक है फिर यही सही और चाहने वाले की बात है तो मेरा ऐसा मानना है की चाहने और ना चाहने वाले तो बहुत होते हैं पर शुकून तो तब ही है जब हम जिसको चाहते हैं वो चाहता हो ......

Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....Update - 40
पार्क से घर आकर मयंक ने राजीव खो फोन कर के कोचिंग का पूछा तो उसने कुछ देर में आने का बताते हुए फोन काट दिया जब तक मयंक नहाकर तैयार हो चुका था ।
बहार हार्न की आवाज सुनते ही वह बहार आया और घर के दरवाजे पर ताला लगाकर राजीव के सखथ बैठ गया ......
राजीव -"क्या हुआ ऐसा क्यूं लग रहा है जैसे किसी ने मार ली हो तेरी साले हाहहाहा "
"साले सुबह सुबह शुरू हो गया "........ मयंक ने पीछे से मुक्का मारते हुए कहा।
राजीव -"मिल आया जानवी से ?"
मयंक -"हां यार सब ठीक है उधर "
राजीव -"अगली बार मैं भी जाऊंगा और इस बार की तरह कुछ नहीं सुनने वाला"
मयंक -"अच्छा ये दद्दा को जानता है तू?"
राजीव -"दद्दा ? "
मयंक -"हां यार "
राजीव -"होगा किसी का दद्दा ..... मैं नहीं जानता"
मयंक -"अरे भोसडीके मैं किसी के दादा की बात नहीं कर रहा मैंने नाम तो सुना था इसका जब बलवीर के साथ था मैं ठीक से याद नहीं आ रहा "
राजीव -"पर तू क्यूं पूछ रहा है इसके बारे में?"
मयंक -"बलवीर को पता चल गया है मैं यहां हूं अब मारने की कोशिश करेगा पर कुछ दिन तक तो कोई हलचल नहीं होगी जितना मुझे अंदाजा है.....अब बात ये है की बलवीर के साथ ये दद्दा भी मिल गया है पर ये जानना होगा की इससे फायदा क्या होगा इसको मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं इससे पता लगाना पड़ेगा "
राजीव -"हां तो इसमें कौन सी बडी बात है पापा जरूर जानते होगे इस दद्दा को "
मयंक -"हां यार आज चाचा से मिलते हैं फिर "
बात करते हुए ये कोचिंग तक आ चुके थे और आज शायद टाइम पर भी थे ।और चुपचाप जाकर ये अपनी अपनी जगह बैठ गये पहला पीरियड बिना किसी परेशानी के गुजर गया और तीन और गुजर जाने के बाद जो ब्रेक टाइम मिला उसमें राजीव ने मयंक से कहा.....
"यार पंडत अब तुझे तो पता चल ही गया है तो तुझसे क्या छुपाना चल जरा सुट्टा मार के आते हैं"...... राजीव ने हाथ पकड कर कहा।
मयंक -"नहीं यार तू जा मैं नही जा रहा वैसे भी ज्योग्राफी वाली मैडम का है पीरियड है और वो कुछ कहेगी आज तो मेरा मूड भी नहीं है सुनने का ।"
राजीव -"फिर मैं भी नहीं जा रहा ..... वैसे दो मिनट लगती चलता तो"
मयंक -"चल "
मयंक को पता था राजीव कोंचा करता रहेगा इसलिए वो चल दिया राजीव के साथ बहार आ गया और नुक्कड़ पर छोटी सी दुकान पर आते ही राजीव दुकान में मौजूद छोटी सी जगह से भीतर की ओर बड गया और मयंक उसके पीछे अंदर आते ही एक बडी सी जगह थी जैसे ये जगह खास उसके लिए हो जो छुपकर सिगरेट पीता है।
"बताओ दुकान बैठने जितनी जगह में है और उसके पीछे रनिंग ट्रेक है"...... मयंक ने एक पत्थर पर बैठते हुए कहा।
राजीव -"भाई लडके लोग सिगरेट तो कहीं से भी लेले पर ऐसे छुपकर पीने के लिए जगह हर जगह नहीं है ना इसलिए यहां ज्यादा भीड होती है"
खैर कुछ देर बाद राजीव की सिगरेट खत्म हुई तो ये दोनों बहार की तरफ निकल चले क्लास की तरफ बढ़ते हुए मयंक क्लास के गेट तक पहुंचा तो सामने मैडम को खडे पाया और मयंक के पीछे राजीव के मुंह से आवाज निकली..... ",लग गये बहनचो"
"बहार क्या खडे हो अंद आओ दोनों".......मैडम ने राजीव और मयंक से कहा और दोनों अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब ही
मैडम -"ज्यादा लेट नहीं हो इसलिए अंदर आने दिया पर वहां क्या जा रहे हो यहां सबसे पहली पर बैठधा पडेगा क्योंकि मैं अपनी क्लास में कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं चाहिए"
राजीव और मयंक तो सोच चुके थे की अंदर जाने नहीं मिलेगा पर मैडम ने अंदर आने दिया वो उसी से खुश थे तो बिना कुछ कहे चुपचाप पहली डेस्क पर आ बैठे जहां सिर्फ इफ्तिका ही बैठी थी ।
इफ्तिका -"सब ठीक है ना मयंक"....... मयंक इफ्तिका के बगल से और राजीव मयंक के बगल से बैठा था अभी क्लास शुरू हुए दस मिनट हुए थे की तब ही ये सवाल इफ्तिका ने मयंक से किया ।
मयंक -"हां सब ठीक है....पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ?"
इफ्तिका -"बाजी ने हमसे कुछ कहा था सुबह आपके बारे में "
मयंक -"क्य क्क क्या कहा था बाजी ने?"
इफ्तिका -"हमें लगता है ये आप जानते हैं.....पर हम आपसे इतना ही कहेंगे आप हम पर विश्वास कर सकते हैं तो कोई भी दिक्कत हो तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं मन हल्का हो जाएगा आपका "
मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है इफ्तिका "
मयंक के इस सपाट लहजे को देखते हुए इफ्तिका ने आगे ज्यादा कुछ ना कहा और चुपचाप बस ध्यान क्लास में लगाए रखा ।
इसके बाद धीरे-धीरे बाकी क्लास भी खत्म हुई और राजीव और मयंक निकल गये कोचिंग से
"यार पहले मुझे छोड दे घर "....... मयंक ने राजीव को उसके घर की तरफ जाते हुए देख कहा।
राजीव -"मैं कौन सा तुझे किडनैप कर रहा हूं लोंडू खाना तो खाएगा ना यहा खाली पेट रहेगा "
मयंक -"मन नहीं है यार "
राजीव -"क्यूं अच्छी लुगाई के लिए उपवास रखने लगा है क्या ?"
इसके बाद मयंक ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वह समझ गया थ राजीव फुल मस्ती के मूड में था और वो कुछ भी कहेगा तो उसका मजाक ही बनाया जाएगा।
राजीव -"क्या हुआ पंडत तुझे कब से बुरा लगने.....याद है ना बुरा उसको ही लगता है जिसके बुर होती है "
मयंक -"अरे ऐसा कुछ नहीं है साले "
"लगता है ग्वालियर से प्लास्टिक वाली लगवाकर आया है "...... राजीव ने हंसते हुए कहा और राजीव की बात सुनकर मयंक की भी हसी निकल गई।
मयंक ने राजीव के यहां जाने से पहले अवनी और दीदी के लिए चाॅकलेट ली और घर जाकर अवनी के साथ खेला और वहां खाना खाकर राजीव उसको घर छोडकर चला गया।
अभी मयंक अपने कमरे में आया था और कपड़े चेंज कर ही रहा था की तब ही घर की बेल बजी तो वह तुरंत नीचे आया और जैसे ही गेट खोला तो सामने इफ्तिका खडी थी
"हटिए जरा ".......दरवाजा खुलते ही इफ्तिका ने मयंक से कहा
मयंक -"इफ्तिका इस वक्त यहां.....पर साक्षी का तो पता ही है वो घर नहीं है"
इफ्तिका -" हां पता है तब ही तो हम आए हैं चलिए आप हाथ मुंह धो लीजिए जब तक हम खाना लगाते हैं आपके लिए"
इफ्तिका मयंक के लिए खाना लेकर आई थी मयंक के लिए पर मयंक तो पहले ही चाची के यहां खाकर आया था ।
"आप खड़े क्यूं है बिरयानी ठंडी हो जाएगी जल्दी जाएं"....... इफ्तिका ने किचिन से बर्तन लाते हुए कहा।
"तुम से साक्षी ने कहा ये करने के लिए?"....... मयंक जैसे अपने मन की शंका को दूर करना चाह रहा था उसको लग रहा था की जरूर इफ्तिका से साक्षी ने कहा होगा
"ऐसा नहीं है!.....हमारा मतलब है की हमने पहले ही सोच लिया था खाना लाने का और शायद आपको पता नहीं होगा की हम कल भी आए थे पर घर पर ताला लगा हुआ था और साक्षी ने भी हमको फोन करके बोला था आपके लिए खाना लाने के लिए"......... इफ्तिका ने एक सांस में ही सब कह डाला ।
"पर मैं बिरयानी नहीं खा सकता "....... मयंक ने इफ्तिका की हालत को देखते हुए कहा।
"क्यूं भला हमने अपनी जिंदगी में किसी को बिरयानी के लिए मना करते हुए नहीं देखा है"....... इफ्तिका ने बडे ही आश्चर्य से पूछा
मयंक -"पर ये बात शाकाहारी पर लागू नहीं होती "
"है अल्** हम तो भूल ही गये थे ".......... इफ्तिका ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
अभी इन लोगों की बात चल ही रही थी की तब ही घर की घंटी एक बार और बजी और मयंक ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो सामने मैडम खडी थी टिफिन लिए हुए मयंक तो देखकर चौंक गया .....
"क्या हुआ मैं क्लास में आने नही देती तो बदला ले रहे हो ?"......जब मयंक दरवाजे पर खडा रहा तो रावी ने कहा।
"ऐसा नहीं है मेम आइए "..... मयंक ने दरवाजे से हटते हुए कहा।
पर जैसे ही रावी अंदर आई तो इफ्तिका को सोफे पर बैठा पाया पता नहीं क्यूं उसके शरीर में आग सी लग गई उसको गुस्सा क्यूं आया ये तो वह खुद नहीं जान पाई ।
रावी -"इफ्तिका तुम यहां"
इफ्तिका -"मेम हम मयंक के लिए खाना लेकर आए थे.....पर हमें याद नहीं रहा की मयंक मांसाहारी नहीं है और हम बिरयानी ले आए"
रावी -"मुझे पता नहीं था की तुम आ रही हो..... ये लो मयंक टिफिन "
रावी को ये सुनकर बडा ही अच्छा लगा की मयंक इफ्तिका का खाना नहीं खा पाएगा और उसने मयंक को टिफिन दिया पर एकदम से जाने क्या याद आ गया और एक बार फिर मन में क्रोध उमड आया और जल्दी से बहार निकल गई।......मेम के जाते ही मयंक सोफे के पास आया तो एक खाली प्लेट ,चाकू और सब्जियां रखी हुई थी।
मयंक -"ये सब क्या है"
"वो हमने सोचा आप ये तो खाएंगे नहीं तो कुछ बना ही देते हैं आपके लिए"........ इफ्तिका ने गर्दन झुकाते हुए कहा।
मयंक -"तुम्हें पता है राजीव मुझे पहले ही अपने घर ले गया था ठाने के लिए चाची ने बहुत खिला कर भेजा है"
इफ्तिका -"क्या ?.......और हम यूं ही इतनी महनत कर रहे थे वो भी खाली पेट "
मयंक -"इफ्तिका लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी ......ठीक है चलो तुम टेबल पर बैठो मैं खाना लगाता हूं ".
इफ्तिका -"नहीं अब तो हम घर जाकर ही खा लेंगे "
मयंक -"क्या यार मैडम खाना देकर ग ई हैं खाकर तो देखें ये खाना भी तीखा ही बनाती हैं जैसे खुद है "
इस बात को सुनकर इफ्तिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इफ्तिका -"फिर साथ में खाना पड़ेगा "
मयंक -"पर मैं...
इफ्तिका -"हम कुछ नहीं कर सकते इसमें खाना पडेगा और सबसे पहले नंबर दें अपना आपके चाहने वाले कुछ ज्यादा ही हैं पूछकर ही आपकी फिक्र करेंगे"
मयंक -"ठीक है फिर यही सही और चाहने वाले की बात है तो मेरा ऐसा मानना है की चाहने और ना चाहने वाले तो बहुत होते हैं पर शुकून तो तब ही है जब हम जिसको चाहते हैं वो चाहता हो ......
Nice update....Update - 40
पार्क से घर आकर मयंक ने राजीव खो फोन कर के कोचिंग का पूछा तो उसने कुछ देर में आने का बताते हुए फोन काट दिया जब तक मयंक नहाकर तैयार हो चुका था ।
बहार हार्न की आवाज सुनते ही वह बहार आया और घर के दरवाजे पर ताला लगाकर राजीव के सखथ बैठ गया ......
राजीव -"क्या हुआ ऐसा क्यूं लग रहा है जैसे किसी ने मार ली हो तेरी साले हाहहाहा "
"साले सुबह सुबह शुरू हो गया "........ मयंक ने पीछे से मुक्का मारते हुए कहा।
राजीव -"मिल आया जानवी से ?"
मयंक -"हां यार सब ठीक है उधर "
राजीव -"अगली बार मैं भी जाऊंगा और इस बार की तरह कुछ नहीं सुनने वाला"
मयंक -"अच्छा ये दद्दा को जानता है तू?"
राजीव -"दद्दा ? "
मयंक -"हां यार "
राजीव -"होगा किसी का दद्दा ..... मैं नहीं जानता"
मयंक -"अरे भोसडीके मैं किसी के दादा की बात नहीं कर रहा मैंने नाम तो सुना था इसका जब बलवीर के साथ था मैं ठीक से याद नहीं आ रहा "
राजीव -"पर तू क्यूं पूछ रहा है इसके बारे में?"
मयंक -"बलवीर को पता चल गया है मैं यहां हूं अब मारने की कोशिश करेगा पर कुछ दिन तक तो कोई हलचल नहीं होगी जितना मुझे अंदाजा है.....अब बात ये है की बलवीर के साथ ये दद्दा भी मिल गया है पर ये जानना होगा की इससे फायदा क्या होगा इसको मेरी तो कोई दुश्मनी नहीं इससे पता लगाना पड़ेगा "
राजीव -"हां तो इसमें कौन सी बडी बात है पापा जरूर जानते होगे इस दद्दा को "
मयंक -"हां यार आज चाचा से मिलते हैं फिर "
बात करते हुए ये कोचिंग तक आ चुके थे और आज शायद टाइम पर भी थे ।और चुपचाप जाकर ये अपनी अपनी जगह बैठ गये पहला पीरियड बिना किसी परेशानी के गुजर गया और तीन और गुजर जाने के बाद जो ब्रेक टाइम मिला उसमें राजीव ने मयंक से कहा.....
"यार पंडत अब तुझे तो पता चल ही गया है तो तुझसे क्या छुपाना चल जरा सुट्टा मार के आते हैं"...... राजीव ने हाथ पकड कर कहा।
मयंक -"नहीं यार तू जा मैं नही जा रहा वैसे भी ज्योग्राफी वाली मैडम का है पीरियड है और वो कुछ कहेगी आज तो मेरा मूड भी नहीं है सुनने का ।"
राजीव -"फिर मैं भी नहीं जा रहा ..... वैसे दो मिनट लगती चलता तो"
मयंक -"चल "
मयंक को पता था राजीव कोंचा करता रहेगा इसलिए वो चल दिया राजीव के साथ बहार आ गया और नुक्कड़ पर छोटी सी दुकान पर आते ही राजीव दुकान में मौजूद छोटी सी जगह से भीतर की ओर बड गया और मयंक उसके पीछे अंदर आते ही एक बडी सी जगह थी जैसे ये जगह खास उसके लिए हो जो छुपकर सिगरेट पीता है।
"बताओ दुकान बैठने जितनी जगह में है और उसके पीछे रनिंग ट्रेक है"...... मयंक ने एक पत्थर पर बैठते हुए कहा।
राजीव -"भाई लडके लोग सिगरेट तो कहीं से भी लेले पर ऐसे छुपकर पीने के लिए जगह हर जगह नहीं है ना इसलिए यहां ज्यादा भीड होती है"
खैर कुछ देर बाद राजीव की सिगरेट खत्म हुई तो ये दोनों बहार की तरफ निकल चले क्लास की तरफ बढ़ते हुए मयंक क्लास के गेट तक पहुंचा तो सामने मैडम को खडे पाया और मयंक के पीछे राजीव के मुंह से आवाज निकली..... ",लग गये बहनचो"
"बहार क्या खडे हो अंद आओ दोनों".......मैडम ने राजीव और मयंक से कहा और दोनों अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब ही
मैडम -"ज्यादा लेट नहीं हो इसलिए अंदर आने दिया पर वहां क्या जा रहे हो यहां सबसे पहली पर बैठधा पडेगा क्योंकि मैं अपनी क्लास में कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं चाहिए"
राजीव और मयंक तो सोच चुके थे की अंदर जाने नहीं मिलेगा पर मैडम ने अंदर आने दिया वो उसी से खुश थे तो बिना कुछ कहे चुपचाप पहली डेस्क पर आ बैठे जहां सिर्फ इफ्तिका ही बैठी थी ।
इफ्तिका -"सब ठीक है ना मयंक"....... मयंक इफ्तिका के बगल से और राजीव मयंक के बगल से बैठा था अभी क्लास शुरू हुए दस मिनट हुए थे की तब ही ये सवाल इफ्तिका ने मयंक से किया ।
मयंक -"हां सब ठीक है....पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ?"
इफ्तिका -"बाजी ने हमसे कुछ कहा था सुबह आपके बारे में "
मयंक -"क्य क्क क्या कहा था बाजी ने?"
इफ्तिका -"हमें लगता है ये आप जानते हैं.....पर हम आपसे इतना ही कहेंगे आप हम पर विश्वास कर सकते हैं तो कोई भी दिक्कत हो तो हमारे साथ शेयर कर सकते हैं मन हल्का हो जाएगा आपका "
मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है इफ्तिका "
मयंक के इस सपाट लहजे को देखते हुए इफ्तिका ने आगे ज्यादा कुछ ना कहा और चुपचाप बस ध्यान क्लास में लगाए रखा ।
इसके बाद धीरे-धीरे बाकी क्लास भी खत्म हुई और राजीव और मयंक निकल गये कोचिंग से
"यार पहले मुझे छोड दे घर "....... मयंक ने राजीव को उसके घर की तरफ जाते हुए देख कहा।
राजीव -"मैं कौन सा तुझे किडनैप कर रहा हूं लोंडू खाना तो खाएगा ना यहा खाली पेट रहेगा "
मयंक -"मन नहीं है यार "
राजीव -"क्यूं अच्छी लुगाई के लिए उपवास रखने लगा है क्या ?"
इसके बाद मयंक ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वह समझ गया थ राजीव फुल मस्ती के मूड में था और वो कुछ भी कहेगा तो उसका मजाक ही बनाया जाएगा।
राजीव -"क्या हुआ पंडत तुझे कब से बुरा लगने.....याद है ना बुरा उसको ही लगता है जिसके बुर होती है "
मयंक -"अरे ऐसा कुछ नहीं है साले "
"लगता है ग्वालियर से प्लास्टिक वाली लगवाकर आया है "...... राजीव ने हंसते हुए कहा और राजीव की बात सुनकर मयंक की भी हसी निकल गई।
मयंक ने राजीव के यहां जाने से पहले अवनी और दीदी के लिए चाॅकलेट ली और घर जाकर अवनी के साथ खेला और वहां खाना खाकर राजीव उसको घर छोडकर चला गया।
अभी मयंक अपने कमरे में आया था और कपड़े चेंज कर ही रहा था की तब ही घर की बेल बजी तो वह तुरंत नीचे आया और जैसे ही गेट खोला तो सामने इफ्तिका खडी थी
"हटिए जरा ".......दरवाजा खुलते ही इफ्तिका ने मयंक से कहा
मयंक -"इफ्तिका इस वक्त यहां.....पर साक्षी का तो पता ही है वो घर नहीं है"
इफ्तिका -" हां पता है तब ही तो हम आए हैं चलिए आप हाथ मुंह धो लीजिए जब तक हम खाना लगाते हैं आपके लिए"
इफ्तिका मयंक के लिए खाना लेकर आई थी मयंक के लिए पर मयंक तो पहले ही चाची के यहां खाकर आया था ।
"आप खड़े क्यूं है बिरयानी ठंडी हो जाएगी जल्दी जाएं"....... इफ्तिका ने किचिन से बर्तन लाते हुए कहा।
"तुम से साक्षी ने कहा ये करने के लिए?"....... मयंक जैसे अपने मन की शंका को दूर करना चाह रहा था उसको लग रहा था की जरूर इफ्तिका से साक्षी ने कहा होगा
"ऐसा नहीं है!.....हमारा मतलब है की हमने पहले ही सोच लिया था खाना लाने का और शायद आपको पता नहीं होगा की हम कल भी आए थे पर घर पर ताला लगा हुआ था और साक्षी ने भी हमको फोन करके बोला था आपके लिए खाना लाने के लिए"......... इफ्तिका ने एक सांस में ही सब कह डाला ।
"पर मैं बिरयानी नहीं खा सकता "....... मयंक ने इफ्तिका की हालत को देखते हुए कहा।
"क्यूं भला हमने अपनी जिंदगी में किसी को बिरयानी के लिए मना करते हुए नहीं देखा है"....... इफ्तिका ने बडे ही आश्चर्य से पूछा
मयंक -"पर ये बात शाकाहारी पर लागू नहीं होती "
"है अल्** हम तो भूल ही गये थे ".......... इफ्तिका ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
अभी इन लोगों की बात चल ही रही थी की तब ही घर की घंटी एक बार और बजी और मयंक ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो सामने मैडम खडी थी टिफिन लिए हुए मयंक तो देखकर चौंक गया .....
"क्या हुआ मैं क्लास में आने नही देती तो बदला ले रहे हो ?"......जब मयंक दरवाजे पर खडा रहा तो रावी ने कहा।
"ऐसा नहीं है मेम आइए "..... मयंक ने दरवाजे से हटते हुए कहा।
पर जैसे ही रावी अंदर आई तो इफ्तिका को सोफे पर बैठा पाया पता नहीं क्यूं उसके शरीर में आग सी लग गई उसको गुस्सा क्यूं आया ये तो वह खुद नहीं जान पाई ।
रावी -"इफ्तिका तुम यहां"
इफ्तिका -"मेम हम मयंक के लिए खाना लेकर आए थे.....पर हमें याद नहीं रहा की मयंक मांसाहारी नहीं है और हम बिरयानी ले आए"
रावी -"मुझे पता नहीं था की तुम आ रही हो..... ये लो मयंक टिफिन "
रावी को ये सुनकर बडा ही अच्छा लगा की मयंक इफ्तिका का खाना नहीं खा पाएगा और उसने मयंक को टिफिन दिया पर एकदम से जाने क्या याद आ गया और एक बार फिर मन में क्रोध उमड आया और जल्दी से बहार निकल गई।......मेम के जाते ही मयंक सोफे के पास आया तो एक खाली प्लेट ,चाकू और सब्जियां रखी हुई थी।
मयंक -"ये सब क्या है"
"वो हमने सोचा आप ये तो खाएंगे नहीं तो कुछ बना ही देते हैं आपके लिए"........ इफ्तिका ने गर्दन झुकाते हुए कहा।
मयंक -"तुम्हें पता है राजीव मुझे पहले ही अपने घर ले गया था ठाने के लिए चाची ने बहुत खिला कर भेजा है"
इफ्तिका -"क्या ?.......और हम यूं ही इतनी महनत कर रहे थे वो भी खाली पेट "
मयंक -"इफ्तिका लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी ......ठीक है चलो तुम टेबल पर बैठो मैं खाना लगाता हूं ".
इफ्तिका -"नहीं अब तो हम घर जाकर ही खा लेंगे "
मयंक -"क्या यार मैडम खाना देकर ग ई हैं खाकर तो देखें ये खाना भी तीखा ही बनाती हैं जैसे खुद है "
इस बात को सुनकर इफ्तिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इफ्तिका -"फिर साथ में खाना पड़ेगा "
मयंक -"पर मैं...
इफ्तिका -"हम कुछ नहीं कर सकते इसमें खाना पडेगा और सबसे पहले नंबर दें अपना आपके चाहने वाले कुछ ज्यादा ही हैं पूछकर ही आपकी फिक्र करेंगे"
मयंक -"ठीक है फिर यही सही और चाहने वाले की बात है तो मेरा ऐसा मानना है की चाहने और ना चाहने वाले तो बहुत होते हैं पर शुकून तो तब ही है जब हम जिसको चाहते हैं वो चाहता हो ......
Thanks park bhaiNice and superb update....
Thanks yasasviNice updateper kabhi to thoda jyada likh de
hum baccho k liye

Yhi to hai jindagi koi jaata hai doosra aata hai ....रीत गई, इफ्तिका आई, रीवा को साथ लाई![]()
Sukriya parkas bhai .....Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and awesome update....
Nice update....
