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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

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Bohot hi shaandaar updateUpdate no. 37
"साहब बहुत दिनों बाद आए हो ".........इस सोसाइटी के मैन गेट पर बैठे चौकीदार ने मयंक को देखते ही खुश होते हुए पूछा।
मयंक -"कैसे हो काका ......घर में सब ठीक"
"सब ठीक है बेटा".......उस अधेड से कुछ बडी उम्र वाले व्यक्ति ने हाथ जोड़कर खुशी से कहा।
सुबह उठते ही सारे काम निपटाकर मयंक पैदल ही इस सोसाइटी पर आ पहुंचा था हालांकि जिस घर में वो रुका था वहां एक गाडी रखी थी पर पता नहीं क्यूं उसने पैदल जाना ठीक समझा ........
मैन गेट से अंदर आते ही दाहिनी तरफ बनी एक बिल्डिंग की तरफ बड गया और सीढियां चढ़ते हुए तीसरे फ्लोर पर आ पहुंचा और इस 10 नंबर लिखे फ्लैट की घंटी बजाई ......
जैसे ही उसे लगा गेट की तरफ कोई आ रहा है तो उसने गेट पर लगे उस छोटे से कांच पर हाथ रख लिया जिसमें से भीतर वाला इंसान बहार वाले को देख सकता है पता लगाने के लिए कि गेट पर कौन खडा है। गेट के पास आकर पैर की आहट बंद हो गई और कुछ देर रुकने के बाद आवाज आई....
"कौन है?".........
मयंक इस आवाज को आधी नींद में भी पहचान सकता था ये जानवी की आवाज थी एक बार आवाज और आई फिर धीरे से दरवाजा खुला और जानवी ने जैसे ही गेट खोला तो एक पल के लिए उसके होश हवा हो गये वो जगह पर जम गई क्योंकि उसके सामने जो खडा था वो आदमी मुंह पर कपडा बांधे और हाथ में पिस्तौल लिए खडा था और उसका निशाना जानवी पर ही था।
"कौन है जानवी ? "...........अंदर से एक आवाज और आई।
मयंक जो मुंह पर कपडा बांधे हुए था उसने पिस्तौल से ही जानवी को इशारा किया की चुप रहे और चुपचाप अंदर चले जानवी मुडती हुई चुप चाप अंदर जाने लगी और अंदर आते ही रीत की नजर भी जानवी पर गई और अगले पल ही रीत को मयंक दिखा जो इस वक्त ऐसे आया था की जानवी और रीत उसको पहचान ना सके रीत ने जैसे ही मयंक को देखा उसके मुंह से चीख निकल गई और मयंक ने जानवी से निशाना हटाते हुए रीत पर निशाना साधा तो वह चुप हो गई पर जानवी तो अंदर आते ही किचन की तरफ जा चुकी थी और अगले ही पल हाथ में पानी का ग्लास लिए बहार आई और मयंक की तरफ बढ़ा दिया रीत इस नजारे को देख कर जैसे पागल ही हो गई उसको समझ नहीं आ रहा था की जानवी उसको पानी क्यूं दे रही है और तो और जानवी की आंखों में बिल्कुल भी डर नहीं था वहीं रीत बहुत बुरी तरह डर रही थी।
"बस बहुत है भाई थक गये होगे कपडा कितना टाइट बांधा हुआ है मुंह पर सांस भी ठीक से नहीं आ रही होगी खोल लो क्योंकि प्लान तो फेल हो गया है आपका हीही ".......जानवी ने उस ग्लास को टेबल पर रखा और खुद मयंक के गले जा लगी ।
"ओए तुझे डर नहीं लगा देखते ही तो नहीं पहचाना होगा मुझे... थोडा टाइम तो लगा ही होगा ना "...... मयंक ने हंसते हुए कपडा हटाया और जानवी को गले लगा लिया ।
"तुम दोनों भाई बहन पागल हो पर कम से कम साधारण इंसानो का तो ख्याल करो एक पागलों जैसा मजाक करता है और दूसरी इतनी पागल है की डरने के टाइम पर डरती नहीं है".......रीत बनाबटी गुस्से से बोली और पांव पीटते हुए एक कमरे की तरफ चली गई।
"यार मैं तो मजाक कर रहा था मुझे नहीं पता था रीत गुस्सा हो जाएगी "....... मयंक ने पानी के ग्लास को उठाते हुए कहा।
"आप उसको मनाओ जब तक मैं नास्ता बनाती हूं.....फर ये गुस्सा करके मनाने का तरीक बहुत पसंद आया मुझे "......जानवी ने एक बार और खुशी से मयंक को गले लगाया और किचन में चली गई।
****************
"साहब नास्ता"........एक आदमी बलवीर के सामने प्लेट रखते हुए बोला।
"हट बहन*द मैंने नास्ता मांगा क्या ?"........प्लेट को फेंकते हुए कहा।
और बलवीर को गुस्सा होता देख वो आदमी चुपचाप वहां से चला गया पर बलवीर बहुत चिंता और गुस्से में था। आखिर जिन आदमियों को उसने मयंक का पीछा करने दद्दा से भिजवाया था उनमें से एक का भी फोन नहीं लग रहा था ......
"फोन उठाओ सालों"........फोन की घंटी जा रही थी पर सामने से फोन नहीं उठ रहा था।
हारकर उसने दद्दा को फोन लगाया .......
दद्दा -"हैलो "
बलवीर -"दद्दा जिन आदमियों के नंबर आपने दिए वो एक भी फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"क्या ?......ऐसा क्या हो गया आखरी बार बात कब की तूने"
बलवीर -"रात को सोते वख्त बात हुई थी और सुबह भी बात हुई जब वो लोग मयंक के घर के लिए निकल रहे थे जहां वो रात को रुका था फिर बात नहीं हुई उनसे और अभी मैं फोन लगा रहा हूं तो फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"रुक मैं देख के बताता हूं तुझे"
पर ये लोग जिन आदमियों की बात कर रहे थे वो तो .....
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"आह्हह भईया माफ करदो बचा लो खून बहुत बह रहा है मर जाऊंगा "........ये उन्ही पांच आदमियों में से एक था जिन्हें दद्दा और बलवीर ने मयंक के पीछे लगा रखा था और इसके चार साथी इसके बगल से बंधे पडे थे बेहोशी की हालत में और अलग अलग अंगों से खून बह रहा था।
"भोसडीके तोते कितेक बेर बोल दई की मोए बा इंसान को नाम बताए दे ताने मयंक पे नजर रखवे तोए भेजो है (तेरे से कितनी बार बोल चुका की उसका नाम बता जिसने तुझे मयंक का पीछा करने भेजा है)".......इस लंबे चौड़े युवक ने बडा सा चाकू हाथ में घुमाते हुए कहा।
"बताऊंगा भईया..... बताऊंगा बस मुझे बचा लो वो वो बलवीर और दद्दा के आदमी हैं हम...उसने ही हमको भेजा था मयंक पर नजर रखने अब अब हमको बचा लो भईया खून बह रहा है "......उस आदमी ने दर्द से तड़पते हुए कहा।
और इसके बाद इस युवक ने बगल से खडे आदमी को इशारा किया और पांच लोग आए और सभी को इस तलघर से बहार ले जाने लगे जो एक बडे अस्पताल के नीचे ही बना था। इसके बाद इस युवक ने मयंक को फोन मिलाया...
"हां चंद्र बोले क्या कुछ वो लोग ".......फोन उठाते ही मयंक ने धीरे से बोला जिस से किसी को सुनाई नि दे वो रीत के कमरे की तरफ जा रहा था तब ही चंद्र नामक इस युवक का फोन मयंक के फोन पर आया।
चंद्र -"हां बता दिया बलवीर और दद्दा दो नाम बताए इस आदमी ने"
इन नामों को सुनकर एक बार के लिए मयंक के चेहरे पर सिकन आई और मयंक शांत हो गया।
चंद्र -"का हेगो रे कोई दिक्कत.....और जी बता मिल कब रहो है ग्वालियर आया और बताया भी नहीं साले "
मयंक -"कोई दिक्कत नहीं है चंद्र.....और बताना क्या था यार बस आज के लिए आया हूं"
चंद्र -"तू भोसडीके एक घंटे के लिए आए चाहे आए एक साल के लिए बताएगा नहीं क्या?.......और जो बडा आदमी हो गया हो तो बता फिर तैसी "
"हाहहाहा ऐसी कोई बात नहीं है मेरे भाई.....इस बार माफ करदे और बुरा मान जाए तो भी कोई बात नहीं पर दस पंद्रह दिन में फिर आऊंगा तो फिर मिलेंगे तेरी सौगंध "........ मयंक ने हसते हुए कहा।
"फिर ऐसी ही ठीक मानी तेरी बात चल नेक साफ सफाई करा दूं सबूतों की "......और इतना कहते हुए चंद्र ने फोन काट दिया।
"भाई ये लडका कौन था ......जानवर से भी बुरा ऐसे कौन करता है सच बुलवाने की खातिर "....... चंद्र के एक साथी ने मयंक को संबोधित करते हुए कहा।
"जानवर नाने हैबान है हैबान और जो ऐसा ना होता मयंक तो मुझे दोस्त थोडी बनाता आखिर हैं तो हम एक जैसे ही......चल अब जल्दी ये साफ करो बिल्कुल नहीं तो चाचा हैबान ते बिलौटा बनाने में टाइम ना लगाने वाला "....... चंद्र ने उस आदमी से कहा और खुद बहार निकल चला इस तलघर से।
***********
"भईया आप कमरे के बहार खडे हो आपने रीत से माफी मांगी या नहीं".......जानवी किचन से थाली पकडे हुए निकली तो मयंक क़ो उस कमरे के दरवाजे पर ही खडा पाया ।
"Appointment फिक्स करुंगा तब बोल दूंगा"...... मयंक ने जानवी के हाथ थाली खींचते हुए कहा आखिर उसमें मयंक का पसंदीदा नास्ता जो था।
"आप पागल हो लड़कियों से Appointment के लिए पूछता है क्या कोई Date के लिए पूछते समझे आप कहो तो पूछूं मैं रीत से ".......जानवी ने मयंक से थाली वापस लेते हुए कहा जो बस चम्मच को मुंह तक ले ही जा रहा था की उसको भी जानवी ने वापस ले लिया।
मयंक-"यार नास्ता तो करने दे "
"पहले माफी मांगो रीत से फिर नास्ता "...... जैसे ही मयंक ने थाली वापस लेने हाथ बढाया तो जानवी ने थाली मयंक की पहुंच से दूर करते हुए कहा।
"तुम दोनों भाई बहन लडना बंद करो और माफी की कोई जरूरत नहीं है जानवी मैं गुस्से में नहीं हूं आओ साथ बैठकर नास्ता करते हैं"......रीत ने कमरे से बहार निकलर लिविंग एरिया की तरफ बढ़ते हुए कहा वो अभी नहाकर आई थी और अभी उसके गीले बाल तौलिए में बंधे थे।
मयंक-"देखा ना तूने जानवी वो गुस्सा नहीं है अब नास्ता दे मेरा "
जानवी-"जब लडकी बोलती है मैं गुस्से में नहीं हूं इसका मतलब वो गुस्से में है बुध्दू ......लो ठूसलो समझ में तो आता नहीं है कुछ तुम्हें "
ये कहते हुए जानवी भी रीत की तरफ जाने लगी और मयंक ज्यादा नही बस थोडे असमंजस के साथ जानवी के पीछे हो लिया ।
"भईया आप कहां से आ रहे हो वैसे".......जानवी ने खाते हुए पूछा।
और इसी सवाल के साथ मयंक का दिमाग पहुंच गया सुबह के छः बजे जब वो जाग रहा था की तब ही कमरे पर दस्तक हुई और घर की देखभाल करने वाला एक लडका मयंक के सामने खडा था।
"क्या हुआ छोटू?"......... मयंक ने अंगड़ाई लेते हुए कहा।
छोटू -"भईया मैं पंद्रह मिनट से देख रहा हूं कुछ लोग अपने घर पर नजर रखे हैं"
मयंक -"तुझे कैसे पता यार "....... मयंक ने चौंकते हुए पूछा
छोटू -"भईया वो कैमरे वाला कमरा है ना जहां टीवी में रिकॉर्डिंग चलती तो उधर ही था मैं की मैने देखा दो आदमी पंद्रह मिनट में दो बार अपने घर के सामने से गुजरे और उनकी नजरें अपने घर पर ही थी।"
मयंक -"लगता है काका ने तुझे सब सिखा दिया है छोटू पर तू ये सब छोड तेरा स्कूल जाने का टाइम होने वाला है ना जा तैयार हो और इस साल बारहवीं है एक भी दिन छुट्टी नहीं करना "
और इतना कहते हुए उसने छोटू के कंधे को थपथपाया और उसको अपना नीचे आने का बताते हुए भेज दिया।
और इसके बाद मयंक ने चंद्र को फोन लगाया जिससे वो उसको बुला सके वैसे तो चंद्र ग्वालियर के लगे एक गांव से था जहां के सरपंच चंद्र के पापा ही थे पर मयंक को यकीन था ग्वालियर में भी काम करवा देगा चंद्र.....पर जैसे ही चंद्र ने फोन उठाया
"हरामी ,साले ,कंजर ,नीच ,पापी ,दुष्ट..... क्या क्या बोलूं तुझे आज याद आई है और मेरे फोन क्यूं नहीं उठाता तू घर पर तो तू रहता ही नहीं है जो वहां बात हो सके विष्णु ताऊ से पता चला तू इंदौर चला गया तूने बताया भी नहीं "........जाने कितने दिन से भरा बैठा था चंद्र जो आज भडास निकाल रहा था मयंक पर ।
"ओ भोसडीके खसम बात तो सुनले मेरी जल्दी से मेरे ****नगर वाले बंगले पर आदमी भिजवा जरूरत है मुझे"...... मयंक ने चंद्र को शांत करते हुए कहा।
"मैं खुद आ जाउंगा भाई हुआ क्या है और एक मिनट बहनचो तुझे आदमियों की जरूरत कब से पड़ने लगी मजाक तो नहीं कर रहा मेरे साथ जिससे तुझ पर गुस्सा ना करूं"....... चंद्र ने पहले से ज्यादा गुस्से से कहा।
मयंक -"मेरे भाई अभी अस्पताल जाने का कतई मन नहीं है मेरा और मैं कोई सूपर हिरो हूं नहीं जो बंदों से लड़ूं और मुझे खंरोच भी ना आए और उससे भी बडी बात मुझे पता ही नहीं है की सामने वाले कितने है ......और तू रहा है का क्या मतलब है तू ग्वालियर है मुझे लगा गांव में होगा।"
चंद्र -"चाचा ने नया अस्पताल खोला है उस दिन नहीं आ पाया था तो कल आया था देखने तो रुक गया यहीं....आ रहा हूं पांच मिनट में पर अगर मजाक हुआ ना साले तो देखिए"
मयंक ने फोन काटा और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ बड गया। नहाने के बाद नीचे आया ओर सीधे उस कमरे में गया वहां अभी भी छोटू था बस फर्क ये था की अब वो स्कूल ड्रेस में था उसने छोटू को उस टाइम की रिकॉर्डिंग दिखाने को कहा छोटू ने वो रिकोर्डिंग चलाई और उन दोनों आदमियों को ध्यान से देखने के बाद डाइनिंग टेबल पर आ गया जहां आकर उसको पता चला नास्ता नहीं है। बीस मिनट से ज्यादा टाइम हो गया था बात किए पर अब तक चंद्र का कोई अता पता नहीं था मयंक फोन लगाने वाला था की तब ही मैंन गेट की घंटी बजी।
Nice update....Update no. 37
"साहब बहुत दिनों बाद आए हो ".........इस सोसाइटी के मैन गेट पर बैठे चौकीदार ने मयंक को देखते ही खुश होते हुए पूछा।
मयंक -"कैसे हो काका ......घर में सब ठीक"
"सब ठीक है बेटा".......उस अधेड से कुछ बडी उम्र वाले व्यक्ति ने हाथ जोड़कर खुशी से कहा।
सुबह उठते ही सारे काम निपटाकर मयंक पैदल ही इस सोसाइटी पर आ पहुंचा था हालांकि जिस घर में वो रुका था वहां एक गाडी रखी थी पर पता नहीं क्यूं उसने पैदल जाना ठीक समझा ........
मैन गेट से अंदर आते ही दाहिनी तरफ बनी एक बिल्डिंग की तरफ बड गया और सीढियां चढ़ते हुए तीसरे फ्लोर पर आ पहुंचा और इस 10 नंबर लिखे फ्लैट की घंटी बजाई ......
जैसे ही उसे लगा गेट की तरफ कोई आ रहा है तो उसने गेट पर लगे उस छोटे से कांच पर हाथ रख लिया जिसमें से भीतर वाला इंसान बहार वाले को देख सकता है पता लगाने के लिए कि गेट पर कौन खडा है। गेट के पास आकर पैर की आहट बंद हो गई और कुछ देर रुकने के बाद आवाज आई....
"कौन है?".........
मयंक इस आवाज को आधी नींद में भी पहचान सकता था ये जानवी की आवाज थी एक बार आवाज और आई फिर धीरे से दरवाजा खुला और जानवी ने जैसे ही गेट खोला तो एक पल के लिए उसके होश हवा हो गये वो जगह पर जम गई क्योंकि उसके सामने जो खडा था वो आदमी मुंह पर कपडा बांधे और हाथ में पिस्तौल लिए खडा था और उसका निशाना जानवी पर ही था।
"कौन है जानवी ? "...........अंदर से एक आवाज और आई।
मयंक जो मुंह पर कपडा बांधे हुए था उसने पिस्तौल से ही जानवी को इशारा किया की चुप रहे और चुपचाप अंदर चले जानवी मुडती हुई चुप चाप अंदर जाने लगी और अंदर आते ही रीत की नजर भी जानवी पर गई और अगले पल ही रीत को मयंक दिखा जो इस वक्त ऐसे आया था की जानवी और रीत उसको पहचान ना सके रीत ने जैसे ही मयंक को देखा उसके मुंह से चीख निकल गई और मयंक ने जानवी से निशाना हटाते हुए रीत पर निशाना साधा तो वह चुप हो गई पर जानवी तो अंदर आते ही किचन की तरफ जा चुकी थी और अगले ही पल हाथ में पानी का ग्लास लिए बहार आई और मयंक की तरफ बढ़ा दिया रीत इस नजारे को देख कर जैसे पागल ही हो गई उसको समझ नहीं आ रहा था की जानवी उसको पानी क्यूं दे रही है और तो और जानवी की आंखों में बिल्कुल भी डर नहीं था वहीं रीत बहुत बुरी तरह डर रही थी।
"बस बहुत है भाई थक गये होगे कपडा कितना टाइट बांधा हुआ है मुंह पर सांस भी ठीक से नहीं आ रही होगी खोल लो क्योंकि प्लान तो फेल हो गया है आपका हीही ".......जानवी ने उस ग्लास को टेबल पर रखा और खुद मयंक के गले जा लगी ।
"ओए तुझे डर नहीं लगा देखते ही तो नहीं पहचाना होगा मुझे... थोडा टाइम तो लगा ही होगा ना "...... मयंक ने हंसते हुए कपडा हटाया और जानवी को गले लगा लिया ।
"तुम दोनों भाई बहन पागल हो पर कम से कम साधारण इंसानो का तो ख्याल करो एक पागलों जैसा मजाक करता है और दूसरी इतनी पागल है की डरने के टाइम पर डरती नहीं है".......रीत बनाबटी गुस्से से बोली और पांव पीटते हुए एक कमरे की तरफ चली गई।
"यार मैं तो मजाक कर रहा था मुझे नहीं पता था रीत गुस्सा हो जाएगी "....... मयंक ने पानी के ग्लास को उठाते हुए कहा।
"आप उसको मनाओ जब तक मैं नास्ता बनाती हूं.....फर ये गुस्सा करके मनाने का तरीक बहुत पसंद आया मुझे "......जानवी ने एक बार और खुशी से मयंक को गले लगाया और किचन में चली गई।
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"साहब नास्ता"........एक आदमी बलवीर के सामने प्लेट रखते हुए बोला।
"हट बहन*द मैंने नास्ता मांगा क्या ?"........प्लेट को फेंकते हुए कहा।
और बलवीर को गुस्सा होता देख वो आदमी चुपचाप वहां से चला गया पर बलवीर बहुत चिंता और गुस्से में था। आखिर जिन आदमियों को उसने मयंक का पीछा करने दद्दा से भिजवाया था उनमें से एक का भी फोन नहीं लग रहा था ......
"फोन उठाओ सालों"........फोन की घंटी जा रही थी पर सामने से फोन नहीं उठ रहा था।
हारकर उसने दद्दा को फोन लगाया .......
दद्दा -"हैलो "
बलवीर -"दद्दा जिन आदमियों के नंबर आपने दिए वो एक भी फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"क्या ?......ऐसा क्या हो गया आखरी बार बात कब की तूने"
बलवीर -"रात को सोते वख्त बात हुई थी और सुबह भी बात हुई जब वो लोग मयंक के घर के लिए निकल रहे थे जहां वो रात को रुका था फिर बात नहीं हुई उनसे और अभी मैं फोन लगा रहा हूं तो फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"रुक मैं देख के बताता हूं तुझे"
पर ये लोग जिन आदमियों की बात कर रहे थे वो तो .....
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"आह्हह भईया माफ करदो बचा लो खून बहुत बह रहा है मर जाऊंगा "........ये उन्ही पांच आदमियों में से एक था जिन्हें दद्दा और बलवीर ने मयंक के पीछे लगा रखा था और इसके चार साथी इसके बगल से बंधे पडे थे बेहोशी की हालत में और अलग अलग अंगों से खून बह रहा था।
"भोसडीके तोते कितेक बेर बोल दई की मोए बा इंसान को नाम बताए दे ताने मयंक पे नजर रखवे तोए भेजो है (तेरे से कितनी बार बोल चुका की उसका नाम बता जिसने तुझे मयंक का पीछा करने भेजा है)".......इस लंबे चौड़े युवक ने बडा सा चाकू हाथ में घुमाते हुए कहा।
"बताऊंगा भईया..... बताऊंगा बस मुझे बचा लो वो वो बलवीर और दद्दा के आदमी हैं हम...उसने ही हमको भेजा था मयंक पर नजर रखने अब अब हमको बचा लो भईया खून बह रहा है "......उस आदमी ने दर्द से तड़पते हुए कहा।
और इसके बाद इस युवक ने बगल से खडे आदमी को इशारा किया और पांच लोग आए और सभी को इस तलघर से बहार ले जाने लगे जो एक बडे अस्पताल के नीचे ही बना था। इसके बाद इस युवक ने मयंक को फोन मिलाया...
"हां चंद्र बोले क्या कुछ वो लोग ".......फोन उठाते ही मयंक ने धीरे से बोला जिस से किसी को सुनाई नि दे वो रीत के कमरे की तरफ जा रहा था तब ही चंद्र नामक इस युवक का फोन मयंक के फोन पर आया।
चंद्र -"हां बता दिया बलवीर और दद्दा दो नाम बताए इस आदमी ने"
इन नामों को सुनकर एक बार के लिए मयंक के चेहरे पर सिकन आई और मयंक शांत हो गया।
चंद्र -"का हेगो रे कोई दिक्कत.....और जी बता मिल कब रहो है ग्वालियर आया और बताया भी नहीं साले "
मयंक -"कोई दिक्कत नहीं है चंद्र.....और बताना क्या था यार बस आज के लिए आया हूं"
चंद्र -"तू भोसडीके एक घंटे के लिए आए चाहे आए एक साल के लिए बताएगा नहीं क्या?.......और जो बडा आदमी हो गया हो तो बता फिर तैसी "
"हाहहाहा ऐसी कोई बात नहीं है मेरे भाई.....इस बार माफ करदे और बुरा मान जाए तो भी कोई बात नहीं पर दस पंद्रह दिन में फिर आऊंगा तो फिर मिलेंगे तेरी सौगंध "........ मयंक ने हसते हुए कहा।
"फिर ऐसी ही ठीक मानी तेरी बात चल नेक साफ सफाई करा दूं सबूतों की "......और इतना कहते हुए चंद्र ने फोन काट दिया।
"भाई ये लडका कौन था ......जानवर से भी बुरा ऐसे कौन करता है सच बुलवाने की खातिर "....... चंद्र के एक साथी ने मयंक को संबोधित करते हुए कहा।
"जानवर नाने हैबान है हैबान और जो ऐसा ना होता मयंक तो मुझे दोस्त थोडी बनाता आखिर हैं तो हम एक जैसे ही......चल अब जल्दी ये साफ करो बिल्कुल नहीं तो चाचा हैबान ते बिलौटा बनाने में टाइम ना लगाने वाला "....... चंद्र ने उस आदमी से कहा और खुद बहार निकल चला इस तलघर से।
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"भईया आप कमरे के बहार खडे हो आपने रीत से माफी मांगी या नहीं".......जानवी किचन से थाली पकडे हुए निकली तो मयंक क़ो उस कमरे के दरवाजे पर ही खडा पाया ।
"Appointment फिक्स करुंगा तब बोल दूंगा"...... मयंक ने जानवी के हाथ थाली खींचते हुए कहा आखिर उसमें मयंक का पसंदीदा नास्ता जो था।
"आप पागल हो लड़कियों से Appointment के लिए पूछता है क्या कोई Date के लिए पूछते समझे आप कहो तो पूछूं मैं रीत से ".......जानवी ने मयंक से थाली वापस लेते हुए कहा जो बस चम्मच को मुंह तक ले ही जा रहा था की उसको भी जानवी ने वापस ले लिया।
मयंक-"यार नास्ता तो करने दे "
"पहले माफी मांगो रीत से फिर नास्ता "...... जैसे ही मयंक ने थाली वापस लेने हाथ बढाया तो जानवी ने थाली मयंक की पहुंच से दूर करते हुए कहा।
"तुम दोनों भाई बहन लडना बंद करो और माफी की कोई जरूरत नहीं है जानवी मैं गुस्से में नहीं हूं आओ साथ बैठकर नास्ता करते हैं"......रीत ने कमरे से बहार निकलर लिविंग एरिया की तरफ बढ़ते हुए कहा वो अभी नहाकर आई थी और अभी उसके गीले बाल तौलिए में बंधे थे।
मयंक-"देखा ना तूने जानवी वो गुस्सा नहीं है अब नास्ता दे मेरा "
जानवी-"जब लडकी बोलती है मैं गुस्से में नहीं हूं इसका मतलब वो गुस्से में है बुध्दू ......लो ठूसलो समझ में तो आता नहीं है कुछ तुम्हें "
ये कहते हुए जानवी भी रीत की तरफ जाने लगी और मयंक ज्यादा नही बस थोडे असमंजस के साथ जानवी के पीछे हो लिया ।
"भईया आप कहां से आ रहे हो वैसे".......जानवी ने खाते हुए पूछा।
और इसी सवाल के साथ मयंक का दिमाग पहुंच गया सुबह के छः बजे जब वो जाग रहा था की तब ही कमरे पर दस्तक हुई और घर की देखभाल करने वाला एक लडका मयंक के सामने खडा था।
"क्या हुआ छोटू?"......... मयंक ने अंगड़ाई लेते हुए कहा।
छोटू -"भईया मैं पंद्रह मिनट से देख रहा हूं कुछ लोग अपने घर पर नजर रखे हैं"
मयंक -"तुझे कैसे पता यार "....... मयंक ने चौंकते हुए पूछा
छोटू -"भईया वो कैमरे वाला कमरा है ना जहां टीवी में रिकॉर्डिंग चलती तो उधर ही था मैं की मैने देखा दो आदमी पंद्रह मिनट में दो बार अपने घर के सामने से गुजरे और उनकी नजरें अपने घर पर ही थी।"
मयंक -"लगता है काका ने तुझे सब सिखा दिया है छोटू पर तू ये सब छोड तेरा स्कूल जाने का टाइम होने वाला है ना जा तैयार हो और इस साल बारहवीं है एक भी दिन छुट्टी नहीं करना "
और इतना कहते हुए उसने छोटू के कंधे को थपथपाया और उसको अपना नीचे आने का बताते हुए भेज दिया।
और इसके बाद मयंक ने चंद्र को फोन लगाया जिससे वो उसको बुला सके वैसे तो चंद्र ग्वालियर के लगे एक गांव से था जहां के सरपंच चंद्र के पापा ही थे पर मयंक को यकीन था ग्वालियर में भी काम करवा देगा चंद्र.....पर जैसे ही चंद्र ने फोन उठाया
"हरामी ,साले ,कंजर ,नीच ,पापी ,दुष्ट..... क्या क्या बोलूं तुझे आज याद आई है और मेरे फोन क्यूं नहीं उठाता तू घर पर तो तू रहता ही नहीं है जो वहां बात हो सके विष्णु ताऊ से पता चला तू इंदौर चला गया तूने बताया भी नहीं "........जाने कितने दिन से भरा बैठा था चंद्र जो आज भडास निकाल रहा था मयंक पर ।
"ओ भोसडीके खसम बात तो सुनले मेरी जल्दी से मेरे ****नगर वाले बंगले पर आदमी भिजवा जरूरत है मुझे"...... मयंक ने चंद्र को शांत करते हुए कहा।
"मैं खुद आ जाउंगा भाई हुआ क्या है और एक मिनट बहनचो तुझे आदमियों की जरूरत कब से पड़ने लगी मजाक तो नहीं कर रहा मेरे साथ जिससे तुझ पर गुस्सा ना करूं"....... चंद्र ने पहले से ज्यादा गुस्से से कहा।
मयंक -"मेरे भाई अभी अस्पताल जाने का कतई मन नहीं है मेरा और मैं कोई सूपर हिरो हूं नहीं जो बंदों से लड़ूं और मुझे खंरोच भी ना आए और उससे भी बडी बात मुझे पता ही नहीं है की सामने वाले कितने है ......और तू रहा है का क्या मतलब है तू ग्वालियर है मुझे लगा गांव में होगा।"
चंद्र -"चाचा ने नया अस्पताल खोला है उस दिन नहीं आ पाया था तो कल आया था देखने तो रुक गया यहीं....आ रहा हूं पांच मिनट में पर अगर मजाक हुआ ना साले तो देखिए"
मयंक ने फोन काटा और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ बड गया। नहाने के बाद नीचे आया ओर सीधे उस कमरे में गया वहां अभी भी छोटू था बस फर्क ये था की अब वो स्कूल ड्रेस में था उसने छोटू को उस टाइम की रिकॉर्डिंग दिखाने को कहा छोटू ने वो रिकोर्डिंग चलाई और उन दोनों आदमियों को ध्यान से देखने के बाद डाइनिंग टेबल पर आ गया जहां आकर उसको पता चला नास्ता नहीं है। बीस मिनट से ज्यादा टाइम हो गया था बात किए पर अब तक चंद्र का कोई अता पता नहीं था मयंक फोन लगाने वाला था की तब ही मैंन गेट की घंटी बजी।
Dil se sukriya raj bhaiInteresting. AwesomeGreat and amazing writinghe'll Strom. Super update. Ye Chandra ka name kuch suna suna sa lagta hai..![]()
Interesting. Awesome
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Nice and superb update.....

Nice update....Update no. 37
"साहब बहुत दिनों बाद आए हो ".........इस सोसाइटी के मैन गेट पर बैठे चौकीदार ने मयंक को देखते ही खुश होते हुए पूछा।
मयंक -"कैसे हो काका ......घर में सब ठीक"
"सब ठीक है बेटा".......उस अधेड से कुछ बडी उम्र वाले व्यक्ति ने हाथ जोड़कर खुशी से कहा।
सुबह उठते ही सारे काम निपटाकर मयंक पैदल ही इस सोसाइटी पर आ पहुंचा था हालांकि जिस घर में वो रुका था वहां एक गाडी रखी थी पर पता नहीं क्यूं उसने पैदल जाना ठीक समझा ........
मैन गेट से अंदर आते ही दाहिनी तरफ बनी एक बिल्डिंग की तरफ बड गया और सीढियां चढ़ते हुए तीसरे फ्लोर पर आ पहुंचा और इस 10 नंबर लिखे फ्लैट की घंटी बजाई ......
जैसे ही उसे लगा गेट की तरफ कोई आ रहा है तो उसने गेट पर लगे उस छोटे से कांच पर हाथ रख लिया जिसमें से भीतर वाला इंसान बहार वाले को देख सकता है पता लगाने के लिए कि गेट पर कौन खडा है। गेट के पास आकर पैर की आहट बंद हो गई और कुछ देर रुकने के बाद आवाज आई....
"कौन है?".........
मयंक इस आवाज को आधी नींद में भी पहचान सकता था ये जानवी की आवाज थी एक बार आवाज और आई फिर धीरे से दरवाजा खुला और जानवी ने जैसे ही गेट खोला तो एक पल के लिए उसके होश हवा हो गये वो जगह पर जम गई क्योंकि उसके सामने जो खडा था वो आदमी मुंह पर कपडा बांधे और हाथ में पिस्तौल लिए खडा था और उसका निशाना जानवी पर ही था।
"कौन है जानवी ? "...........अंदर से एक आवाज और आई।
मयंक जो मुंह पर कपडा बांधे हुए था उसने पिस्तौल से ही जानवी को इशारा किया की चुप रहे और चुपचाप अंदर चले जानवी मुडती हुई चुप चाप अंदर जाने लगी और अंदर आते ही रीत की नजर भी जानवी पर गई और अगले पल ही रीत को मयंक दिखा जो इस वक्त ऐसे आया था की जानवी और रीत उसको पहचान ना सके रीत ने जैसे ही मयंक को देखा उसके मुंह से चीख निकल गई और मयंक ने जानवी से निशाना हटाते हुए रीत पर निशाना साधा तो वह चुप हो गई पर जानवी तो अंदर आते ही किचन की तरफ जा चुकी थी और अगले ही पल हाथ में पानी का ग्लास लिए बहार आई और मयंक की तरफ बढ़ा दिया रीत इस नजारे को देख कर जैसे पागल ही हो गई उसको समझ नहीं आ रहा था की जानवी उसको पानी क्यूं दे रही है और तो और जानवी की आंखों में बिल्कुल भी डर नहीं था वहीं रीत बहुत बुरी तरह डर रही थी।
"बस बहुत है भाई थक गये होगे कपडा कितना टाइट बांधा हुआ है मुंह पर सांस भी ठीक से नहीं आ रही होगी खोल लो क्योंकि प्लान तो फेल हो गया है आपका हीही ".......जानवी ने उस ग्लास को टेबल पर रखा और खुद मयंक के गले जा लगी ।
"ओए तुझे डर नहीं लगा देखते ही तो नहीं पहचाना होगा मुझे... थोडा टाइम तो लगा ही होगा ना "...... मयंक ने हंसते हुए कपडा हटाया और जानवी को गले लगा लिया ।
"तुम दोनों भाई बहन पागल हो पर कम से कम साधारण इंसानो का तो ख्याल करो एक पागलों जैसा मजाक करता है और दूसरी इतनी पागल है की डरने के टाइम पर डरती नहीं है".......रीत बनाबटी गुस्से से बोली और पांव पीटते हुए एक कमरे की तरफ चली गई।
"यार मैं तो मजाक कर रहा था मुझे नहीं पता था रीत गुस्सा हो जाएगी "....... मयंक ने पानी के ग्लास को उठाते हुए कहा।
"आप उसको मनाओ जब तक मैं नास्ता बनाती हूं.....फर ये गुस्सा करके मनाने का तरीक बहुत पसंद आया मुझे "......जानवी ने एक बार और खुशी से मयंक को गले लगाया और किचन में चली गई।
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"साहब नास्ता"........एक आदमी बलवीर के सामने प्लेट रखते हुए बोला।
"हट बहन*द मैंने नास्ता मांगा क्या ?"........प्लेट को फेंकते हुए कहा।
और बलवीर को गुस्सा होता देख वो आदमी चुपचाप वहां से चला गया पर बलवीर बहुत चिंता और गुस्से में था। आखिर जिन आदमियों को उसने मयंक का पीछा करने दद्दा से भिजवाया था उनमें से एक का भी फोन नहीं लग रहा था ......
"फोन उठाओ सालों"........फोन की घंटी जा रही थी पर सामने से फोन नहीं उठ रहा था।
हारकर उसने दद्दा को फोन लगाया .......
दद्दा -"हैलो "
बलवीर -"दद्दा जिन आदमियों के नंबर आपने दिए वो एक भी फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"क्या ?......ऐसा क्या हो गया आखरी बार बात कब की तूने"
बलवीर -"रात को सोते वख्त बात हुई थी और सुबह भी बात हुई जब वो लोग मयंक के घर के लिए निकल रहे थे जहां वो रात को रुका था फिर बात नहीं हुई उनसे और अभी मैं फोन लगा रहा हूं तो फोन नहीं उठा रहे "
दद्दा -"रुक मैं देख के बताता हूं तुझे"
पर ये लोग जिन आदमियों की बात कर रहे थे वो तो .....
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"आह्हह भईया माफ करदो बचा लो खून बहुत बह रहा है मर जाऊंगा "........ये उन्ही पांच आदमियों में से एक था जिन्हें दद्दा और बलवीर ने मयंक के पीछे लगा रखा था और इसके चार साथी इसके बगल से बंधे पडे थे बेहोशी की हालत में और अलग अलग अंगों से खून बह रहा था।
"भोसडीके तोते कितेक बेर बोल दई की मोए बा इंसान को नाम बताए दे ताने मयंक पे नजर रखवे तोए भेजो है (तेरे से कितनी बार बोल चुका की उसका नाम बता जिसने तुझे मयंक का पीछा करने भेजा है)".......इस लंबे चौड़े युवक ने बडा सा चाकू हाथ में घुमाते हुए कहा।
"बताऊंगा भईया..... बताऊंगा बस मुझे बचा लो वो वो बलवीर और दद्दा के आदमी हैं हम...उसने ही हमको भेजा था मयंक पर नजर रखने अब अब हमको बचा लो भईया खून बह रहा है "......उस आदमी ने दर्द से तड़पते हुए कहा।
और इसके बाद इस युवक ने बगल से खडे आदमी को इशारा किया और पांच लोग आए और सभी को इस तलघर से बहार ले जाने लगे जो एक बडे अस्पताल के नीचे ही बना था। इसके बाद इस युवक ने मयंक को फोन मिलाया...
"हां चंद्र बोले क्या कुछ वो लोग ".......फोन उठाते ही मयंक ने धीरे से बोला जिस से किसी को सुनाई नि दे वो रीत के कमरे की तरफ जा रहा था तब ही चंद्र नामक इस युवक का फोन मयंक के फोन पर आया।
चंद्र -"हां बता दिया बलवीर और दद्दा दो नाम बताए इस आदमी ने"
इन नामों को सुनकर एक बार के लिए मयंक के चेहरे पर सिकन आई और मयंक शांत हो गया।
चंद्र -"का हेगो रे कोई दिक्कत.....और जी बता मिल कब रहो है ग्वालियर आया और बताया भी नहीं साले "
मयंक -"कोई दिक्कत नहीं है चंद्र.....और बताना क्या था यार बस आज के लिए आया हूं"
चंद्र -"तू भोसडीके एक घंटे के लिए आए चाहे आए एक साल के लिए बताएगा नहीं क्या?.......और जो बडा आदमी हो गया हो तो बता फिर तैसी "
"हाहहाहा ऐसी कोई बात नहीं है मेरे भाई.....इस बार माफ करदे और बुरा मान जाए तो भी कोई बात नहीं पर दस पंद्रह दिन में फिर आऊंगा तो फिर मिलेंगे तेरी सौगंध "........ मयंक ने हसते हुए कहा।
"फिर ऐसी ही ठीक मानी तेरी बात चल नेक साफ सफाई करा दूं सबूतों की "......और इतना कहते हुए चंद्र ने फोन काट दिया।
"भाई ये लडका कौन था ......जानवर से भी बुरा ऐसे कौन करता है सच बुलवाने की खातिर "....... चंद्र के एक साथी ने मयंक को संबोधित करते हुए कहा।
"जानवर नाने हैबान है हैबान और जो ऐसा ना होता मयंक तो मुझे दोस्त थोडी बनाता आखिर हैं तो हम एक जैसे ही......चल अब जल्दी ये साफ करो बिल्कुल नहीं तो चाचा हैबान ते बिलौटा बनाने में टाइम ना लगाने वाला "....... चंद्र ने उस आदमी से कहा और खुद बहार निकल चला इस तलघर से।
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"भईया आप कमरे के बहार खडे हो आपने रीत से माफी मांगी या नहीं".......जानवी किचन से थाली पकडे हुए निकली तो मयंक क़ो उस कमरे के दरवाजे पर ही खडा पाया ।
"Appointment फिक्स करुंगा तब बोल दूंगा"...... मयंक ने जानवी के हाथ थाली खींचते हुए कहा आखिर उसमें मयंक का पसंदीदा नास्ता जो था।
"आप पागल हो लड़कियों से Appointment के लिए पूछता है क्या कोई Date के लिए पूछते समझे आप कहो तो पूछूं मैं रीत से ".......जानवी ने मयंक से थाली वापस लेते हुए कहा जो बस चम्मच को मुंह तक ले ही जा रहा था की उसको भी जानवी ने वापस ले लिया।
मयंक-"यार नास्ता तो करने दे "
"पहले माफी मांगो रीत से फिर नास्ता "...... जैसे ही मयंक ने थाली वापस लेने हाथ बढाया तो जानवी ने थाली मयंक की पहुंच से दूर करते हुए कहा।
"तुम दोनों भाई बहन लडना बंद करो और माफी की कोई जरूरत नहीं है जानवी मैं गुस्से में नहीं हूं आओ साथ बैठकर नास्ता करते हैं"......रीत ने कमरे से बहार निकलर लिविंग एरिया की तरफ बढ़ते हुए कहा वो अभी नहाकर आई थी और अभी उसके गीले बाल तौलिए में बंधे थे।
मयंक-"देखा ना तूने जानवी वो गुस्सा नहीं है अब नास्ता दे मेरा "
जानवी-"जब लडकी बोलती है मैं गुस्से में नहीं हूं इसका मतलब वो गुस्से में है बुध्दू ......लो ठूसलो समझ में तो आता नहीं है कुछ तुम्हें "
ये कहते हुए जानवी भी रीत की तरफ जाने लगी और मयंक ज्यादा नही बस थोडे असमंजस के साथ जानवी के पीछे हो लिया ।
"भईया आप कहां से आ रहे हो वैसे".......जानवी ने खाते हुए पूछा।
और इसी सवाल के साथ मयंक का दिमाग पहुंच गया सुबह के छः बजे जब वो जाग रहा था की तब ही कमरे पर दस्तक हुई और घर की देखभाल करने वाला एक लडका मयंक के सामने खडा था।
"क्या हुआ छोटू?"......... मयंक ने अंगड़ाई लेते हुए कहा।
छोटू -"भईया मैं पंद्रह मिनट से देख रहा हूं कुछ लोग अपने घर पर नजर रखे हैं"
मयंक -"तुझे कैसे पता यार "....... मयंक ने चौंकते हुए पूछा
छोटू -"भईया वो कैमरे वाला कमरा है ना जहां टीवी में रिकॉर्डिंग चलती तो उधर ही था मैं की मैने देखा दो आदमी पंद्रह मिनट में दो बार अपने घर के सामने से गुजरे और उनकी नजरें अपने घर पर ही थी।"
मयंक -"लगता है काका ने तुझे सब सिखा दिया है छोटू पर तू ये सब छोड तेरा स्कूल जाने का टाइम होने वाला है ना जा तैयार हो और इस साल बारहवीं है एक भी दिन छुट्टी नहीं करना "
और इतना कहते हुए उसने छोटू के कंधे को थपथपाया और उसको अपना नीचे आने का बताते हुए भेज दिया।
और इसके बाद मयंक ने चंद्र को फोन लगाया जिससे वो उसको बुला सके वैसे तो चंद्र ग्वालियर के लगे एक गांव से था जहां के सरपंच चंद्र के पापा ही थे पर मयंक को यकीन था ग्वालियर में भी काम करवा देगा चंद्र.....पर जैसे ही चंद्र ने फोन उठाया
"हरामी ,साले ,कंजर ,नीच ,पापी ,दुष्ट..... क्या क्या बोलूं तुझे आज याद आई है और मेरे फोन क्यूं नहीं उठाता तू घर पर तो तू रहता ही नहीं है जो वहां बात हो सके विष्णु ताऊ से पता चला तू इंदौर चला गया तूने बताया भी नहीं "........जाने कितने दिन से भरा बैठा था चंद्र जो आज भडास निकाल रहा था मयंक पर ।
"ओ भोसडीके खसम बात तो सुनले मेरी जल्दी से मेरे ****नगर वाले बंगले पर आदमी भिजवा जरूरत है मुझे"...... मयंक ने चंद्र को शांत करते हुए कहा।
"मैं खुद आ जाउंगा भाई हुआ क्या है और एक मिनट बहनचो तुझे आदमियों की जरूरत कब से पड़ने लगी मजाक तो नहीं कर रहा मेरे साथ जिससे तुझ पर गुस्सा ना करूं"....... चंद्र ने पहले से ज्यादा गुस्से से कहा।
मयंक -"मेरे भाई अभी अस्पताल जाने का कतई मन नहीं है मेरा और मैं कोई सूपर हिरो हूं नहीं जो बंदों से लड़ूं और मुझे खंरोच भी ना आए और उससे भी बडी बात मुझे पता ही नहीं है की सामने वाले कितने है ......और तू रहा है का क्या मतलब है तू ग्वालियर है मुझे लगा गांव में होगा।"
चंद्र -"चाचा ने नया अस्पताल खोला है उस दिन नहीं आ पाया था तो कल आया था देखने तो रुक गया यहीं....आ रहा हूं पांच मिनट में पर अगर मजाक हुआ ना साले तो देखिए"
मयंक ने फोन काटा और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ बड गया। नहाने के बाद नीचे आया ओर सीधे उस कमरे में गया वहां अभी भी छोटू था बस फर्क ये था की अब वो स्कूल ड्रेस में था उसने छोटू को उस टाइम की रिकॉर्डिंग दिखाने को कहा छोटू ने वो रिकोर्डिंग चलाई और उन दोनों आदमियों को ध्यान से देखने के बाद डाइनिंग टेबल पर आ गया जहां आकर उसको पता चला नास्ता नहीं है। बीस मिनट से ज्यादा टाइम हो गया था बात किए पर अब तक चंद्र का कोई अता पता नहीं था मयंक फोन लगाने वाला था की तब ही मैंन गेट की घंटी बजी।
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update.....
Bohot hi shaandaar update![]()
Mayank ke ajube khel aur uske Dosto ki avam pyar karnewalion ki lambi list. Pratiksha agle rasprad update ki
Nice update....
Nice update
Thanks all of youNice update....

Bhai waiting for next updateThanks all of you![]()
Aaj mega updateBhai waiting for next update

Abhi tak mayank ko pta hi nhi tha ki balveer us par najar rakh rh hai par shayad is ghtna ke baad sab pta chal jaaye or phir seedha bakra halal hogaछोटू की चौकस नजरे और मयंक साहब के खैर - ख्वाहिशमंद नेटवर्क की वजह से एक बार फिर मयंक साहब ने अपने दुश्मनों पर नकेल कस दिया ।
लेकिन मयंक साहब डायरेक्ट बकरे की मां की गर्दन दबोचने की कोशिश क्यों नही करते ? न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी । बलवीर और दद्दा कभी भी इनका बड़ा भारी नुकसान पहुंचा सकते है ।
रीत के रूप मे एक और कदरदान लड़की मिली मयंक साहब को । लड़कियों की फेहरिस्त काफी लम्बी होती जा रही है । कितनो का दिल टूटेगा और कितने लड़कियों की हाय लगेगी , यह भगवान ही जानता है ! क्योंकि साहब के दिल मे कोई और ही बसी हुई है । पर कौन ? कौन है वह लड़की ? क्या अबतक उनकी एन्ट्री स्टोरी मे हुई है ?
जानवी के सुखद भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएँ सदैव ही रहेगी । लेकिन रीत के सच्चे दोस्ती के भी हम कायल हो गए । रीत ने एक सच्चे दोस्त की मिसाल पेश की । बढ़िया होता जानवी की याददाश्त वापस लौट आए और एक बहादुर लड़की की तरह जीवन जीए ।
बहुत ही बेहतरीन अपडेट भाई।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट।
