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Adultery खलिश

kas1709

Well-Known Member
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अध्याय - 19



"यार मेरी बात तो सुन".......जब राजीव ने मयंक को बात करते सुना और जैसे ही मयंक ने उसको देखा तो राजीव वो आइसक्रीम कप वहीं गिरा कर वापस जाने लगा तो मयंक ने पीछे से आवाज लगाई।





"आह्ह"...... जैसे ही मयंक जल्दबाजी में सीढ़ियों पर चढा तो उसकी चोट पर असर यशहुआ और दर्द की वजह से आगे बढ़ने की जगह गिर गया।





"साले तू मर जा तो बढिया है"..... जैसे ही मयंक की आवाज सुनी तो राजीव पीछे मुडा और मयंक को गिरा देखकर उसको गरियाते हुए उसकी तरफ बडा।





"अब भोसडीके भागा तो यही पटक के मारुंगा"...... राजीव जैसे ही मयंक‌ के पास आया तो उसको पकड़ते हुए बोला।





"किधर लगी"...... राजीव ने उसकी बात नजरंदाज करते हुए पूछा।





मयंक -"लंड लगी है मेरे .....और क्या साले लडकी जैसे रूठ रहा है......बता रहा हूं सुन तो ले"





राजीव -"मैंने तो कुछ पूछा ही नहीं.....बाकी अगर तूने बताना नहीं शुरू नहीं किया तो मेरे हाथ चलने शुरू हो जाएंगे "





और दोनों दोस्त सीढ़ियों पर बैठ गये और मयंक ने जैसे ही बताना शुरू किया तब ही राजीव का फोन बजा जो कि अनिल का था।





"हां पापा"....... फोन उठाते हुए राजीव ने कहा।





अनिल -" मयंक कहां है....... उसका फोन क्यों नहीं उठ रहा"




राजीव -"पापा वो मेरे साथ ही है....उसका फोन शायद कमरे में होगा अभी हम बगीचे में बैठे हैं"




अनिल -"उसको फोन‌ दो"




मयंक -"हां चाचा"





अनिल -"स्पीकर पर कर दे फोन और ध्यान से सुनो तुम दोनों को मारने आदमी आ रहें हैं और शायद पहुंच भी गये होंगे .... मयंक तुझे बंदूक दी थी ना मैंने जब आया था तो बस अगर लगे की बात जान पर आ गयी है तो माथे में छेद करने से कतराना मत बिल्कुल भी 20 मिनट बस बीस मिनट लगेंगे मुझे ध्यान रखना "





और अनिल का फोन‌ कट गया .......





"और साले निशाना खराब तो नहीं हो गया तेरा यहां आकर.... चाचा ने बीचों बीच गोली देने की कही है "....... मयंक ने अपने हाथ को पीछे कमर पर ले जाते हुए कहा जैसे अपनी रिवॉल्वर निकाल रहा हो।




पर रिवॉल्वर तो थी ही नहीं.....




राजीव - तूने सेक्सी साहित्यकार का दोहा नहीं सुना क्या ?




मयंक-"चल खडा हो पहले तो रिवॉल्वर कमरे में है चलते चलते बताना"



राजीव-"तो सुन ध्यान से


"लंड मरा ना लुल्ल हुआ, चूत से निकला मूत
फिर भी तृष्णा ना बुझी,चोद दिए सब चूत "

राजीव को सहारा देकर खडा करते हुए राजीव ने दोहा सुनाया।





मयंक -"है! काव्य की गांड मारने वाले... कृपया इस दोहे की व्याख्या तो करें "





राजीव -"तो सुनो वत्स यहां कवि कहना चाहते हैं की जैसे लंड कितनी भी च* मारले पर घिसता नहीं है उसी भांति जो आदमी रुपी प्राणी जब एक चीज को करना सीख जाए तो फिर भूलता नहीं है "





अभी ये दोनों सीढियां चढने ही वाले थे अपने कमरे में जाने के लिए तब ही बडी दूर एक आवाज इनके कानों में आई




"भाई वो छोकरा जिसको अपुन ढूंढ रहे हैं "





ये आवाज सुनते ही मयंक और राजीव ने अपनी गर्दन आवाज की तरफ घुमाई तो नौ-दस आदमी इन दोनों को ही देख रहे थे और इन को देखते ही राजीव ने फुडती से सीढ़ियों की तरफ कदम बढाए पर तब ही मयंक ने उसको पीछे से पकडा।





राजीव -"चिरांद है क्या साले छोड मुझे मैं गन लेकर आता हूं जल्दी"




मयंक -"ऊपर अगर ये मार भी जाएंगे तो बचाने नहीं आने वाला इसलिए ऊपर छोड बगीचे की तरफ भाग उसके पीछे जंगल है उधर अपनी गांड ना टूटे ऐसा हो सकता है यहां अस्पताल में कोई भी जगह जाएंगे तो ड्रिल मशीन डाल देंगे ये अपने भीतर "





और दोनों ही बगीचे की तरफ भागे और इनको भागता देख ही वो लोग भी इनकी तरफ भागे...





"आजा जल्दी"..... राजीव ने बगीचे और जंगल को अलग करने वाली दीवार पर चढ़ते हुए मयंक से कहा।





"तेरे कसम राजीव तू मेरे हाथ से ही मरेगा मैं क्या साले कोई सूपरमेन हूं दिख ना रहो तोए चलो पर ना रहो और तू दीवाल पर चढने कह रहा है"....... मयंक ने राजीव से कहा।





"ठीक है ठीक है चल अब चड"..... राजीव ने नीचे उतरकर मयंक को उठाया और उस सात फुट की दीवार को पार कराया और जैसे ही राजीव चडा तब तक वो गुंडे बगीचे तक। आ गये ।





"भागोगे कहां आज बच नहीं पाओगे"......उन लोगों को भागता देख गुंडों में एक चिल्लाया जो इनका मुखिया दिख रहा था।





"हा हाहा हहा "




"पागल हो गया क्या चूतिए..... दौड़ने पर ध्यान दे गिर गया तो बचाऊंगा‌ नहीं"...... मयंक को राक्षस जैसे हस्ता देख राजीव चिल्लाया.....दोनों भाग ही रहे थे की तब ही





"राजीव वो देख तू उधर जा "...... मयंक ने एक ओर इशारा करते हुए कहा जहां एक पुराना सा बरगद का पेड था और उसके पीछे एक ढलान थी जहां आसानी से चुपा जा सकता था।





राजीव- "तू जा साले लंगडे..... मैं तो ढूंढ लुंगा जगह".......




मयंक -"अबे वो‌ देख मैं वहां चुपुंगा"





******************




"जाओ बेटा खेलो .....वो देखो तुम्हारा पहला दोस्त तुमको कैसे देख रहा है"....... अनिल ने मयंक को गोद से उतारते हुए कहा।





आज मयंक का तीसरा जन्मदिन था और और आज उसका जन्मदिन अनिल अपनी कोठी पर मनाने वाला था इसलिए वो सुबह उठकर ही मयंक को उसके घर से ले आया था और यहां आकर अनिल उसको राजीव की तरफ इशारा करते हुए ये बात बोली थी।





और अपने पापा की गोद में एक नये शक्स को देख कर राजीव दौडता हुआ आया था अपने पापा के पास......





"पापा ये तोन है".....अपनी छोटी सी उंगली मयंक की तरफ करते हुए राजीव ने अनिल से पूछा।





"ये आपका भाई है राजीव तुम इस्से एक साल बड़े हो इसलिए इसका ख्याल हमेशा तुमको ही रखना है चाहे कुछ भी हो जाए ठीक है"..... अनिल ने राजीव के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।






"चाचा"........ अपने पापा की बात सुनकर राजीव ने गर्दन हां में हिला दी और मयंक की तरफ बडा पर अपनी तरफ अंजाने शक्स को आता देख मयंक जल्दी से अनिल से चिपक गया क्योंकि अनिल तो शुरू से ही उसके घर आता जाता रहा है तो मयंक उसको जानता था।






"अरे डरो नहीं मयंक "......और एक बार फिर अनिल ने मयंक को राजीव की तरफ घूमा दिया पर मयंक आगे नहीं बडा।





"रुको पापा अभी देखना"......इतना कहते ही मयंक अपने घर के किचन की तरफ भागा।।




किचन में......



"मम्मी मुझे समोसे चाहिए"........ किचन में घुसते ही चाची की साडी पकड़ते हुए राजीव ने कहा





"अच्छा रुको ".....चाची ने हस्ते हुए कहा।





"ये लो".....चाची ने आधा समोसा एक कटोरी में रखकर राजीव को पकडाते हुए कहा।





"अरे मम्मी पूरा समोसा दो"..... राजीव ने गुस्से से कहा।






"बेटा आप इतना भी नहीं खा पाते हो पहले इतना तो खाओ फिर ले जाना और जितना चाहिए"......चाची ने राजीव का गाल खींचते हुए कहा।





"नहीं मुझे पूरा समोसा चाहिए और मैं अब अकेला खाने वाला नहीं हूं"....... राजीव ने खुश होते हुए कहा।





"अच्छा चलो दिया पूरा समोसा लो ....अब बताओ और कौन है खाने वाला"...... चाची ने कहा





"मैं खाऊंगा और मेरा दोस्त खाएगा"..... राजीव ने खुश होकर उस कटोरी को उठाते हुए कहा।





"दोस्त तुम्हारा कौन दोस्त है ".....





राजीव -"हां मेरा दोस्त.....आओ बाहर ...पापा लेकर आए हैं उसको "





उसके बाद दोनों बहार आए तो मयंक अनिल की पीठ पर था और अनिल उसको घोडा बनकर खिला रहा था। उसके बाद राजीव दौड़ते हुए अनिल की पीठ पर बैठ गया और दोनों मयंक और राजीव खेलने लगे फिर राजीव ने एक समोसे का बहुत छोटा टुकड़ा मयंक के सामने किया जिसको मयंक ने आगे बढकर खा लिया और राजीव ने मयंक के लटके गालों को पकडकर थोडा सा खींच दिया जिसपर मयंक फिर रोने लगा।





एक वो दिन था और एक आज का दिन कभी भी मयंक और राजीव में झगडा नहीं हुआ पर इन दोनों ने बहुत झगडे किए हैं काफी किस्से हैं आगे हम सुनाएंगे और आप सुनना‌ :D



*************




"बस परम यहीं रोकले गाडी वो सामने चाय की टपरी है वहीं आएगा रघु रुपये का बैग लेने "......... बल्ली ने परम को सामने कुछ दूर पर बनी चाय की टपरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।





वैसे तो ये इलाका इंदौर के भीड़ वाले इलाके में आता है पर ये चाय की टपरी भीड से कुछ अलग होकर थी जहां चाय पीने वाले और बनाने वाला कहीं से भी शरीफ नहीं मालूम पडते थे।






यहां आए हुए दस मिनट ही हुए होंगे बल्ली को तब ही एक गाडी वहां आकर रुकी और उसमें से एक सामान्य कद काठी का आदमी उतरा ।






"ये ही है रघु बल्ली भईया"......उस आदमी को देखते ही परम ने बल्ली से कहा।






"अब ध्यान से सुनो जब ये रघु पैसे लेंने वाले से बात कर रहा होगा तब ही मैं और परम उसकी तरफ जाएंगे और तुम दोनों सिर्फ गाडी के टायर पर निशाना रखोगे समझे वैसे तो उसने हमको नहीं देखा है पर अगर वो गाडी से भागना चाहेगा तो भी नहीं भाग पाएगा और सबसे बडी बात जब तक वो‌ गाडी में ना बैठे बंदूक मत चलाना नहीं तो पैदल भागेगा ....... साइलेंसर लगाओ अपनी बंदूकों में जल्दी "....... बल्ली ने सबको समझाते हुए कहा।






और इतना कहते ही बल्ली और परम आगे बड गये उन्होंने सोचा रघु को टाइम लगेगा रुपये लेने में....पर रघु उतरा गाडी से और उसको देखते ही टपरी वाले ने एक बेग रख दिया सामने और रघु उसको जल्दी से उठाकर गाडी और सड गया और उसको गाडी में घुसता देख परम और बल्ली उसकी तरफ भागे लेकिन तबतक गाडी चालू हो गयी पर तब ही.....






"पप्पपाठ्ठठकाटक्क्क "........उस शांत माहौल में एक दम से ये धमाका हुआ और गाड़ी के पीछे वाले दोनों टायर फट गये तब तक बल्ली और परम पहुंच गये वहां तक परम ड्राइवर की तरफ गया और इधर रघु के तरफ का दरवाजा खुला और वो जैसे ही बहार निकला बल्ली ने एक लात उसकी पीठ में दी और रघु सीधे गाडी से टकराया और बल्ली ने बंदूक रघु के माथे पर रख दी।
Nice update.....
 
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Ajju Landwalia

Well-Known Member
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अध्याय - 19



"यार मेरी बात तो सुन".......जब राजीव ने मयंक को बात करते सुना और जैसे ही मयंक ने उसको देखा तो राजीव वो आइसक्रीम कप वहीं गिरा कर वापस जाने लगा तो मयंक ने पीछे से आवाज लगाई।





"आह्ह"...... जैसे ही मयंक जल्दबाजी में सीढ़ियों पर चढा तो उसकी चोट पर असर यशहुआ और दर्द की वजह से आगे बढ़ने की जगह गिर गया।





"साले तू मर जा तो बढिया है"..... जैसे ही मयंक की आवाज सुनी तो राजीव पीछे मुडा और मयंक को गिरा देखकर उसको गरियाते हुए उसकी तरफ बडा।





"अब भोसडीके भागा तो यही पटक के मारुंगा"...... राजीव जैसे ही मयंक‌ के पास आया तो उसको पकड़ते हुए बोला।





"किधर लगी"...... राजीव ने उसकी बात नजरंदाज करते हुए पूछा।





मयंक -"लंड लगी है मेरे .....और क्या साले लडकी जैसे रूठ रहा है......बता रहा हूं सुन तो ले"





राजीव -"मैंने तो कुछ पूछा ही नहीं.....बाकी अगर तूने बताना नहीं शुरू नहीं किया तो मेरे हाथ चलने शुरू हो जाएंगे "





और दोनों दोस्त सीढ़ियों पर बैठ गये और मयंक ने जैसे ही बताना शुरू किया तब ही राजीव का फोन बजा जो कि अनिल का था।





"हां पापा"....... फोन उठाते हुए राजीव ने कहा।





अनिल -" मयंक कहां है....... उसका फोन क्यों नहीं उठ रहा"




राजीव -"पापा वो मेरे साथ ही है....उसका फोन शायद कमरे में होगा अभी हम बगीचे में बैठे हैं"




अनिल -"उसको फोन‌ दो"




मयंक -"हां चाचा"





अनिल -"स्पीकर पर कर दे फोन और ध्यान से सुनो तुम दोनों को मारने आदमी आ रहें हैं और शायद पहुंच भी गये होंगे .... मयंक तुझे बंदूक दी थी ना मैंने जब आया था तो बस अगर लगे की बात जान पर आ गयी है तो माथे में छेद करने से कतराना मत बिल्कुल भी 20 मिनट बस बीस मिनट लगेंगे मुझे ध्यान रखना "





और अनिल का फोन‌ कट गया .......





"और साले निशाना खराब तो नहीं हो गया तेरा यहां आकर.... चाचा ने बीचों बीच गोली देने की कही है "....... मयंक ने अपने हाथ को पीछे कमर पर ले जाते हुए कहा जैसे अपनी रिवॉल्वर निकाल रहा हो।




पर रिवॉल्वर तो थी ही नहीं.....




राजीव - तूने सेक्सी साहित्यकार का दोहा नहीं सुना क्या ?




मयंक-"चल खडा हो पहले तो रिवॉल्वर कमरे में है चलते चलते बताना"



राजीव-"तो सुन ध्यान से


"लंड मरा ना लुल्ल हुआ, चूत से निकला मूत
फिर भी तृष्णा ना बुझी,चोद दिए सब चूत "

राजीव को सहारा देकर खडा करते हुए राजीव ने दोहा सुनाया।





मयंक -"है! काव्य की गांड मारने वाले... कृपया इस दोहे की व्याख्या तो करें "





राजीव -"तो सुनो वत्स यहां कवि कहना चाहते हैं की जैसे लंड कितनी भी च* मारले पर घिसता नहीं है उसी भांति जो आदमी रुपी प्राणी जब एक चीज को करना सीख जाए तो फिर भूलता नहीं है "





अभी ये दोनों सीढियां चढने ही वाले थे अपने कमरे में जाने के लिए तब ही बडी दूर एक आवाज इनके कानों में आई




"भाई वो छोकरा जिसको अपुन ढूंढ रहे हैं "





ये आवाज सुनते ही मयंक और राजीव ने अपनी गर्दन आवाज की तरफ घुमाई तो नौ-दस आदमी इन दोनों को ही देख रहे थे और इन को देखते ही राजीव ने फुडती से सीढ़ियों की तरफ कदम बढाए पर तब ही मयंक ने उसको पीछे से पकडा।





राजीव -"चिरांद है क्या साले छोड मुझे मैं गन लेकर आता हूं जल्दी"




मयंक -"ऊपर अगर ये मार भी जाएंगे तो बचाने नहीं आने वाला इसलिए ऊपर छोड बगीचे की तरफ भाग उसके पीछे जंगल है उधर अपनी गांड ना टूटे ऐसा हो सकता है यहां अस्पताल में कोई भी जगह जाएंगे तो ड्रिल मशीन डाल देंगे ये अपने भीतर "





और दोनों ही बगीचे की तरफ भागे और इनको भागता देख ही वो लोग भी इनकी तरफ भागे...





"आजा जल्दी"..... राजीव ने बगीचे और जंगल को अलग करने वाली दीवार पर चढ़ते हुए मयंक से कहा।





"तेरे कसम राजीव तू मेरे हाथ से ही मरेगा मैं क्या साले कोई सूपरमेन हूं दिख ना रहो तोए चलो पर ना रहो और तू दीवाल पर चढने कह रहा है"....... मयंक ने राजीव से कहा।





"ठीक है ठीक है चल अब चड"..... राजीव ने नीचे उतरकर मयंक को उठाया और उस सात फुट की दीवार को पार कराया और जैसे ही राजीव चडा तब तक वो गुंडे बगीचे तक। आ गये ।





"भागोगे कहां आज बच नहीं पाओगे"......उन लोगों को भागता देख गुंडों में एक चिल्लाया जो इनका मुखिया दिख रहा था।





"हा हाहा हहा "




"पागल हो गया क्या चूतिए..... दौड़ने पर ध्यान दे गिर गया तो बचाऊंगा‌ नहीं"...... मयंक को राक्षस जैसे हस्ता देख राजीव चिल्लाया.....दोनों भाग ही रहे थे की तब ही





"राजीव वो देख तू उधर जा "...... मयंक ने एक ओर इशारा करते हुए कहा जहां एक पुराना सा बरगद का पेड था और उसके पीछे एक ढलान थी जहां आसानी से चुपा जा सकता था।





राजीव- "तू जा साले लंगडे..... मैं तो ढूंढ लुंगा जगह".......




मयंक -"अबे वो‌ देख मैं वहां चुपुंगा"





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"जाओ बेटा खेलो .....वो देखो तुम्हारा पहला दोस्त तुमको कैसे देख रहा है"....... अनिल ने मयंक को गोद से उतारते हुए कहा।





आज मयंक का तीसरा जन्मदिन था और और आज उसका जन्मदिन अनिल अपनी कोठी पर मनाने वाला था इसलिए वो सुबह उठकर ही मयंक को उसके घर से ले आया था और यहां आकर अनिल उसको राजीव की तरफ इशारा करते हुए ये बात बोली थी।





और अपने पापा की गोद में एक नये शक्स को देख कर राजीव दौडता हुआ आया था अपने पापा के पास......





"पापा ये तोन है".....अपनी छोटी सी उंगली मयंक की तरफ करते हुए राजीव ने अनिल से पूछा।





"ये आपका भाई है राजीव तुम इस्से एक साल बड़े हो इसलिए इसका ख्याल हमेशा तुमको ही रखना है चाहे कुछ भी हो जाए ठीक है"..... अनिल ने राजीव के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।






"चाचा"........ अपने पापा की बात सुनकर राजीव ने गर्दन हां में हिला दी और मयंक की तरफ बडा पर अपनी तरफ अंजाने शक्स को आता देख मयंक जल्दी से अनिल से चिपक गया क्योंकि अनिल तो शुरू से ही उसके घर आता जाता रहा है तो मयंक उसको जानता था।






"अरे डरो नहीं मयंक "......और एक बार फिर अनिल ने मयंक को राजीव की तरफ घूमा दिया पर मयंक आगे नहीं बडा।





"रुको पापा अभी देखना"......इतना कहते ही मयंक अपने घर के किचन की तरफ भागा।।




किचन में......



"मम्मी मुझे समोसे चाहिए"........ किचन में घुसते ही चाची की साडी पकड़ते हुए राजीव ने कहा





"अच्छा रुको ".....चाची ने हस्ते हुए कहा।





"ये लो".....चाची ने आधा समोसा एक कटोरी में रखकर राजीव को पकडाते हुए कहा।





"अरे मम्मी पूरा समोसा दो"..... राजीव ने गुस्से से कहा।






"बेटा आप इतना भी नहीं खा पाते हो पहले इतना तो खाओ फिर ले जाना और जितना चाहिए"......चाची ने राजीव का गाल खींचते हुए कहा।





"नहीं मुझे पूरा समोसा चाहिए और मैं अब अकेला खाने वाला नहीं हूं"....... राजीव ने खुश होते हुए कहा।





"अच्छा चलो दिया पूरा समोसा लो ....अब बताओ और कौन है खाने वाला"...... चाची ने कहा





"मैं खाऊंगा और मेरा दोस्त खाएगा"..... राजीव ने खुश होकर उस कटोरी को उठाते हुए कहा।





"दोस्त तुम्हारा कौन दोस्त है ".....





राजीव -"हां मेरा दोस्त.....आओ बाहर ...पापा लेकर आए हैं उसको "





उसके बाद दोनों बहार आए तो मयंक अनिल की पीठ पर था और अनिल उसको घोडा बनकर खिला रहा था। उसके बाद राजीव दौड़ते हुए अनिल की पीठ पर बैठ गया और दोनों मयंक और राजीव खेलने लगे फिर राजीव ने एक समोसे का बहुत छोटा टुकड़ा मयंक के सामने किया जिसको मयंक ने आगे बढकर खा लिया और राजीव ने मयंक के लटके गालों को पकडकर थोडा सा खींच दिया जिसपर मयंक फिर रोने लगा।





एक वो दिन था और एक आज का दिन कभी भी मयंक और राजीव में झगडा नहीं हुआ पर इन दोनों ने बहुत झगडे किए हैं काफी किस्से हैं आगे हम सुनाएंगे और आप सुनना‌ :D



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"बस परम यहीं रोकले गाडी वो सामने चाय की टपरी है वहीं आएगा रघु रुपये का बैग लेने "......... बल्ली ने परम को सामने कुछ दूर पर बनी चाय की टपरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।





वैसे तो ये इलाका इंदौर के भीड़ वाले इलाके में आता है पर ये चाय की टपरी भीड से कुछ अलग होकर थी जहां चाय पीने वाले और बनाने वाला कहीं से भी शरीफ नहीं मालूम पडते थे।






यहां आए हुए दस मिनट ही हुए होंगे बल्ली को तब ही एक गाडी वहां आकर रुकी और उसमें से एक सामान्य कद काठी का आदमी उतरा ।






"ये ही है रघु बल्ली भईया"......उस आदमी को देखते ही परम ने बल्ली से कहा।






"अब ध्यान से सुनो जब ये रघु पैसे लेंने वाले से बात कर रहा होगा तब ही मैं और परम उसकी तरफ जाएंगे और तुम दोनों सिर्फ गाडी के टायर पर निशाना रखोगे समझे वैसे तो उसने हमको नहीं देखा है पर अगर वो गाडी से भागना चाहेगा तो भी नहीं भाग पाएगा और सबसे बडी बात जब तक वो‌ गाडी में ना बैठे बंदूक मत चलाना नहीं तो पैदल भागेगा ....... साइलेंसर लगाओ अपनी बंदूकों में जल्दी "....... बल्ली ने सबको समझाते हुए कहा।






और इतना कहते ही बल्ली और परम आगे बड गये उन्होंने सोचा रघु को टाइम लगेगा रुपये लेने में....पर रघु उतरा गाडी से और उसको देखते ही टपरी वाले ने एक बेग रख दिया सामने और रघु उसको जल्दी से उठाकर गाडी और सड गया और उसको गाडी में घुसता देख परम और बल्ली उसकी तरफ भागे लेकिन तबतक गाडी चालू हो गयी पर तब ही.....






"पप्पपाठ्ठठकाटक्क्क "........उस शांत माहौल में एक दम से ये धमाका हुआ और गाड़ी के पीछे वाले दोनों टायर फट गये तब तक बल्ली और परम पहुंच गये वहां तक परम ड्राइवर की तरफ गया और इधर रघु के तरफ का दरवाजा खुला और वो जैसे ही बहार निकला बल्ली ने एक लात उसकी पीठ में दी और रघु सीधे गाडी से टकराया और बल्ली ने बंदूक रघु के माथे पर रख दी।


Bahut hi badhiya update he Hell Strom Bhai,

Nice and beautiful............ Keep posting Bhai
 

Hell Strom

🦁
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है
अनिल ने मयंक और राजीव को गुंडों के बारे में बता दिया है लेकिन उनके सावधान होने से पहले ही वहा गुंडे आ गए दोनो जंगल की तरफ भाग गए हैं देखते हैं अनिल कितनी देर में पहुंचता है वही बल्ली ने रघु को पकड़ लिया है रघु का तो खेल खत्म होने वाला है अब तो हॉस्पिटल वाली फाइट का इंतजार है
Thanks sanju bhai :five:
 

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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