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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

Last edited:

Nice update
Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and lovely update....
आंटी जी गिर पड़ी, अब हीरो गोद में उठाएगा उनको
Nice update.....
Romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki
Kafi aacha gaya update per shayd ek din late per koi nanice job asa hi timely dete rahe
छोकरा और छोकरी दूसरे मुलाकात मे ही एक दूसरे के गर्लफ्रेंड और ब्वॉयफ्रेंड के बारे मे इन्क्वायरी करने लगे । यह शायद माडर्न जमाने का असर है।
लेकिन इन दोनो के बीच " इलू इलू " होने से पहले छोकरे की कहीं छोकरी की मम्मी से " गूलू गूलू " की सम्भावना न बन जाए ! हालात तो इसी ओर इशारे कर रहे है।
बहुत ही बेहतरीन अपडेट भाई।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट।
nice update.
mayan se dosti ho gai sakshi ki.
Koi na agle update me khayaal rakhiyaga..![]()
good
Bahut badiya update
Bahut hi behtareen update he Hell Strom Bhai,
Mayank ki gaadi to Ji JI par hi tak gayi he....................itna jhijhak raha he launda................
Ab ghar par kya bawal ho gaya..................
Agli update ka intezar rahega Bhai
good update. Sakshi is playing on Mayank's nerves.
Update posted guysNice update....
.... Do give your reviews 
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....अध्याय - 08
मयंक ने अंदर जाके देखा तो आंटी किचन में एक स्टूल पर चडी हुई थी और जब मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने कहा -
"मयंक अच्छा हुआ की तुम आ गए देखो तुम्हारे बिल्कुल पीछे एक बडा सा चूहा है "
और आंटी का इतना ही कहना था की एक बडा चूहा मेरे बगल से निकलता हुआ सीधे आंटी के स्टूल के पास पहुंचा और आंटी एक दम से हड़बड़ा गई जिससे उनका स्टूल बुरी तरह से हिला तब ही मयंक ने आगे बढ़ते हुए उनको पकडा पर जब तक उनका पैर मुड चुका था जहां आंटी को बहुत बुरा दर्द हो रहा था वहीं मयंक तो बिल्कुल भी इस दुनिया में नहीं था क्योंकि आंटी के बड़े बड़े स्तन उसकी छाती में गडे हुए थे और मयंक का लंड उनके स्पर्श से ही खडा होने लगा था।
जब आंटी की आह्हह की आवाज मयंक के कानों में गई तब उसे होश आया उसने आंटी को नीचे उतारा पर जैसे ही आंटी का पैर नीचे लगा तो उनको बहुत भयंकर दर्द हुआ तो मयंक ने उनको गोदी में उठाना ही ठीक समझा और जैसे ही रोमा को यह एहसास हुआ की वो मयंक की गोद में है और उसका एक हाथ उसकी गांड और दूसरा पीठ पर है उसकी दोनों टांगों के बीच एक झुरझुरी सी उठ गई उसको सुबह का वो दृश्य याद आ गया जब उसने मयंक का लंड देखा था वो यह सोच रही थी की उसको मयंक ने ऐसे उठा लिया था जैसे कोई मोम की मूर्ति हो .....अभी रोमा सोच ही थही थी तब तक वो अपने बिस्तर तक पहुंच चुकी थी।
"आंटी आपका पैर तो थोडा थोडा सूज रहा है"...... मयंक ने पैर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"लगता है मुडने की वजह से सूजन आ रही है बेटा ....... जरा ड्राॅवर में बाम रखा होगा वो देदो मैं लगा देती हूं "
"आंटी मुझे लगता है कडवे तेल की मालिश ज्यादा आराम पहुंचाएगी ......आप जरा रुको मैं अभी गरम करके लाता हूं।"
**************
"आंटी आप बाॅडी को ढीला छोड़ दो और खासकर अपने इस पैर को "....... मयंक ने बायां पैर अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ठीक है....पर मयंक आराम से करना बहुत दर्द हो रहा है "
"जी आंटी "
मयंक ने जैसे ही उस पैर को घुटने से मोडा तो साड़ी थोडी ऊपर को उठ गई और उनकी मांसल पिंडलियों पर मयंक की नजर पड़ी पर नजर अंदाज करते हुए उसने तेल पैर पर गिराते हुए एंकल की मालिश शुरू करदी वहीं रोमा को मयंक के उन सख्त हाथों का अहसास हो रहा था ।
धीरे धीरे मयंक ने अपने हाथों को थोडा ऊपर ले जाना शुरू किया वहीं अपनी पिंडलियों पर मयंक के हाथों का अहसास होते ही रोमा को भी गर्मी चढ़ने लगी वो खुद हैरान थी की वो इतनी जल्दी उत्तेजित क्यूं हो रही है (जब हम किसी व्यक्ति से ज्यादा प्यार करते हैं या किसी से ज्यादा आकर्षित हो जाते हैं तो यही होता है उसके छूने मात्र से ही कामुक विचार आने लगते हैं ऐसा ही रोमा के साथ हो रहा था वैसे तो मयंक से प्रभावित थी ही लेकिन जबसे उसने उसका उभार देखा था तब से ही मन के किसी कोने में वो उसका एहसास पाना चाहती थी)
"आंटी उस पैर की भी कर देता हूं "......कुछ देर एक पैर की मालिश करने के बाद मयंक ने रोमा से पूछा मयंक का हाल भी कुछ ऐसा ही था उसने आज तक किसी औरत के शरीर को महसूस नहीं किया था राजीव ने बहुत बार उसको ब्लू फिल्म देखने के लिए पूछा पर वो हर बार इंकार कर देता था आज पहली बार किसी औरत को छूना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था पर वो अपने चहरे पर उत्तेजना के भाव कदापि नहीं आने दे रहा और तो और उसका लंड भी ऐसे खडा था मानो लोवर से बहार ही आ जाएगा।
"नहीं मयंक लेकिन....व्व..वो मेरे"....
"बोलिए आंटी कहीं और भी लगी थी क्या .....आप बता दीजिए मैं उधर भी मालिश कर देता हूं।".....
"हां मेरी कमर से थोडा नीचे....."......रोमा ने पूरी हिम्मत जोडकर कहा हुआ यह था की मयंक के आने से पहले रोमा ने जब वह चूहा देखा तो हड़बड़ाहट में वो पीछे हुई और उसकी कमर का नीचे वाला हिस्सा किचन की स्लेव जो की मार्वल की थी उसमें लगा जिससे उधर भी दर्द हो रहा था हालांकि की उसने सोचा था की मयंक से सिर्फ पैर की मालिश ही कराएगी पर मयंक ने जिस तरह से पैर की मालिश की थी उससे उसे बहुत आराम मिला था और फिर कुछ मदहोशी भी चढने लगी थी उसको ।
"हां .... ठीक है आंटी तो आप हिचकिचा क्यूं रही है लाइए करे देता हूं बताइए जरा कहां है दर्द और पेट के बल लेट जाइए।"
रोमा ने भी कुछ नहीं कहा और पेट के बल लेट गई पर जब मयंक ने रोमा को उलटा लेटा हुआ देखा तो उसके लंड ने झटका सा मारा रोमा की गांड इतनी कामुक लग रही थी की मयंक की नजर ही नहीं हट रही थी तब ही उसने देखा की रोमा का हाथ पीछे आया और उसने साड़ी को नीचे किया जिसको देख कर तो मयंक भी पागल हो गया वो हिस्सा बहुत गोरा था और साडी नीचे हो जाने की वजह से उसकी चर्बी जो थी वो ऊपर को आने लगी क्योंकि पेटीकोट पहले से ही टाइट बधां था और जोर लगा कर जब रोमा ने उसको नीचे किया तो फस गया ।
"यहां लगी है मयंक"......इस अवाज से मयंक को होश आया और तब उसने देखा की रोमा ने हाथ बिल्कुल गांड पर रखा हुआ था
"आंटी पर यहां मालिश कैसे होगी आपको साडी निकालनी पड़ेगी"
"रुको ...." ,,,,, कुछ देर सोचने के बाद रोमा खडी हुई और उसने अपनी साड़ी को निकाल दिया .....और अपने पेटीकोट को थोडा ढीला करते हुए एक बार फिर उसी तरह लेट गई।
मयंक को तो होश ही नहीं रहा था कल जिन नितम्बों को उसने दूर से देखा था आज उनको ही वो छूने वाला था उसने एक लम्बी सांस छोडी और तेल की कटोरी लेते हुए रोमख के पास आया वहीं रोमा भी भीतर एक अलग रोमांच से भरी हुई थी
मयंक ने तेल उस जगह पर डाला और जैसे ही उसने उस जगह पर हाथ लगाया उसकी नशों मे एक अलग सा एहसास दौडने लगा ।
वहीं रोमा को अपने शरीर पर आशीष के अलावा पहली बार किसी और का एहसास हुआ था उत्तेजना के चलते उसकी तो हल्की चीख निकल गई जो उसने बडी मुश्किल से दबाई
मयंक ने अपना काम चालू कर दिया धीरे धीरे उन नितम्बों को सहलाने लगा और साथ ही साथ अपने हाथ को कमर पर भी चलाने लगा।
"आंटी ऐसे बैठ कर मालिश सही नहीं होगी मैं अपके पैरों के बीच में बैठता हूं और वहां से हाथ सही चल पाएंगें"
"हम्म"......बस इतनी ही आवाज रोमा के मूंह से निकली और उसने अपनी टांगें छोडी कर लीं
अब मयंक के लिए दृश्य और कामुक हो चला था वो घुटनों के बल बैठ गया और रोमा की मालिश करने लगा अब उसने अपने हाथ पूरी पीठ पर चलाना शुरू कर दिए थे।और इसका एहसास होते रोमा ने बिना कुछ कहे अपने बिलाउज को आगे से खोल दिया और इसी के साथ मयंक का हाथ पूरी पीठ पर चलने लगा और रोमा जो की बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी उसकी सिसकारियां भी अपने रुक नहीं रही थी मयंक के हाथ पीठ से होते हुए उसके चूचों तक पहुंच रहे....रोमा के स्तन इतने बड़े थे की आधे उल्टा लेटने की वजह से बगल से निकल आए थे।
मयंक भी पूरे जोश में आ चुका था उसके हाथ चूतड़ों से होते हुए कंधों तक जाने लगे थे और जैसे ही वो ऊपर तक मालिश के लिए आगे होता तो उसका लंड रोमा की गांड में दबता और रोमा भी इसको बहुत इंजोए कर रही थी उसको मयंक के लंड के साइज का अंदाजा हो चुका था वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी की जब मयंक नीचे की तरफ होता तो वो भी अपनी गांड को थोडा ऊपर कर देती ताकी लंड का एहसास पूरा हो सके ।
मयंक का लंड जब रोमा की गांड से लगता तो उसको ऐसा लगता मानो उसका लंड किसी गरम चीज से टच हुआ हो । और तब ही एक पल ऐसा आया की रोमा का शरीर अकडने लगा और उसके पांव खींचने लगे उसकी सिसकियां भी जोर पकडने लगी और एक आह्हह के साथ ही उसका शरीर डीला पढ गया वहीं जब मयंक ने यह नजारा देखा तो उसको समझ नहीं आया पर रोमा की यह तडपन ने उसकी आग में घी काम किया अब उसके हाथ गांड से और नीचे आने लगे और जांघों का स्पर्श उसको बहुत अच्छा लग रहा था ।
"आंटी आप सीधा लेट जाइए आगे से भी कंधे रह गए हैं ".....रोमा शांत हो चुकी थी पर उसने भी अब लंड लेने का मन बना लिया था ....वो भी चुपचाप सीधी हो गई।
और अब मयंक के सामने रोमा के दूध थे जिन्मे थोडा सा ढीलापन जरूर था पर वो भी जैसे उन्हें और सुंदर बना रहा था और जब मयंक की नजर और नीचे गई तो देखा आगे से रोमा का पेटीकोट पूरा भीग चुका था उसने अपने लोवर को उतारा और इस बार रोमा की टांगों को खुद चोडा किया और अपने आप को इतना आगे कर लिया की असके घुटने रोमा की चूत से लग गए और जब इस बार मयंक कंधों की मालिश के लिए आगे बढा तो उसका हाथ उन चूचियों से होते हुए गया जिनके चूचक भी मयंक के हाथ के साथ घिसे और मयंक के पूरे झुकते ही उसका घुटना एक तरह से चूत में ही घुस गया जब उसकी आंखें रोमा के चेहरे पर पडी तो रोमा के चेहरे के भाव देखकर उसके लंड से भी एक बूंद पानी(प्री कम) की निकल आई।
और यहां रोमा का सबर का बांध टूट गया और इस बार जैसे ही मयंक नीचे की तरफ गया तो रोमा ने मयंक का सर पकड कर अपने चूचों से लगा दिया ।
"चूसो इन्हें".....रोमा इतना ही कहे सकी और सुनते ही मयंक ने भी उंन दूग्ध कलशों को पीना शुरू कर दिया ।
"आह्हाआहहहह "........ जैसे ही मयंक ने रोमा के एक चूचक को काटा तो रोमा के शरीर में झुरझुरी दौड गई रोमा को जाने कितने दिन बाद ऐसा एहसास मिल रहा था क्योंकि की ऐसा प्यार करना तो आशीष कब का छोड चुका था..... भले ही रोमा की चूत ने कुछ देर पहले ही बहुत पानी छोडा था पर एक बार फिर उसकी चूत रिसने लगी थी। उसने मयंक का हाथ पकड कर अपने दूसरे चूचे पर रख लिया और खुद उसके हाथ को दबाने का इशारा किया मयंक ने भी किसी छोटे बच्चे की तरह दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया
"कपड़े उतारो मयंक"........ मयंक ने रोमा के दोनों चूचों को लाल कर दिया था दबा दबा कर और चूस चूस कर जब उन में दर्द होने लगा तो तो उसने मयंक को कहा।
और कुछ ही पल में दोनो बिल्कुल नंगे हो चुके थे।.....और पहली बार रोमा ने मयंक के नंगे लंड को देखा तो उसकी आंखों में उस लंड के लिए हवस साफ दिख रही थी यहां मयंक ने जब देखा तो पाया की रोमा की नजर उसके लंड पर ही थी इस वक्त मयंक एक नई रोमा को देख रहा था जो बिल्कुल भी ऐसी नहीं थी जिसे वो जानता था ।
रोमा ने आगे आते हुए लंड को पकडा जैसे उसकी लंबाई और चौड़ाई नाप रही हो और अगले ही पल लंड को मुंह में भर लिया जैसे ही उसने लंड के टोपे पर जीभ घुमाई तो मयंक के मूंह से भी एक सिसकी निकल गई और लंड को अच्छे से चूसने के बाद मयंक के सामने लेट गई और मयंक को अपने पास खींचा और अपनी चूत चूसने का इशारा किया पहले तो मयंक को अजीब लगा पास जाते हुए पर अब तक जितना मजा उसको आया था वो उसके लिए सबसे अलग था।
मयंक ने जैसे ही अपनी जीभ चूत से लगाई रोमा ने उसके सर पर जोर डालते हुए उसको और पास कर लिया और जोर जोर से उसकी सिसकियां निकलने लगी। ...... कुछ ही देर में मयंक खुद ही वहां से हट गया और इस बार उसने रोमा की गर्दन को चूमा जिससे रोमा सातवे आसमान पर पहुंच गई।
उसने खुद अपना हाथ नीचे से ले जाते हुए मयंक का लंड पकडा और अपनी चूत के मूंह पर रख लिया जैसे ही मयंक का लंड चूत से लगा उसके लंड को ऐसा लगा मानो उसके लिंग को किसी गरम चीज से लगा दिया हो पर उसने गर्दन चूसना बंद नहीं किया।
"मयंक इ्सृ्सस््ससस अब अपने लिंग को अंदर डालो आह्हह "
मयंक ने भी अपनी कमर पर जोर देते हुए आगे की तरफ जोर लगाया तो उसका सुपाडा चूत में चला गया और मयंक को जिस आंनद का एहसास हुआ वो उसके लिए ऐसा था मानो वो स्वर्ग में हो उसने एक धीमा ढक्का दिया और उसका लंड आधा अंदर चला गया अब मयंक को ऐसा लग रहा था था मानो उसके लिंग के चारों तरफ टेप लगा दिया हो ।
और वहीं रोमा के मूंह से भी जोर दार चीख निकल गई उसने मयंक के मूंह को पकडा और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये वहीं मयंक का सवर टूट गया उसने लंड थोडा पीछे खींच ते हुए दमदार ढक्का लगा दिया ऐसा होते ही रोमा ने मयंक का होंठ काट लिया और अपने नाखून उसकी पीठ में गाड दिए।
लेकिन बच्चेदानी से टकराने के बाद भी मयंक का लंड 2,3 cm बहार था जब मयंक की आंखे खुली तो उसने देखा रोमा की आंखों से आंसू निकल रहे थे रोमा ने अपना मुंह अलग करते हुए कहा....
"मयंक मेरे दूध चूसो आह्हह् काटना नहीं और इतना बडा भी भला किसी का होता है रुको थोडी देर बिल्कुल भी हिलना मत आह्हह "
मयंक ने भी वैसा ही किया कुछ देर में जब रोमा थोडी शांत हुई और उसने खुद कमर उचकाई तब जाकर मयंक ने अपने लंड को बहार खीचा उसके साथ ही रोम की सितकार उसके कानों में पडी अभी मुंह खुला ही था रोमा का तब ही मयंक ने फिर लंड अंदर डाल दिया और धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा कुछ देर ऐसे ही मयंक करता रहा उसको यह बहुत ही आंनद पहुंचा रहा था वहीं रोमा भी बहुत मजा ले रही थी
"रुको मयंक......और अब जोर जोर से अंदर बहार करना "......रोमा ने पोजिशन की और घोडी बनते हुए बिस्तर के किनारे पर आ गई मयंक भी नीचे खड़े हो गया और एक बार फिर रोमा ने लंड को छेद पर सेट किया पर इस बार मयंक ने अपना लंड एक बार में ही पूरा उतार दिया चूंकि लंड और चूत दोनों ही गीले थे तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।
"आह्हह इश््शश पूरा एक बार में नहीं डालना था .....जानवर हो पूरे तुम मयंक श्श्ससस््स कोई कुंवारी लडकी तुम्हारे नीचे आ गई तो मर ही जाएगी।"
"आंटी आपने ही तो कहा था "
और वहीं रोमा ने खुद अपनी गांड पीछे कर दी जैसे कह रही हो बात मत करो बस चोदते रहो और मयंक ने भी बोलना बंद करते हुए अपना काम जारी रखा ।
"आह्हाआहहहह मयंक इश्स््सस ऐसे ही चोदते रहो "..... मयंक का लंड किसी रौड की तरह अऔदर बहार होने लगा और 15 मिनट तक उस कमरे में सिसकयां और थपथप की आवाजें ही गूजती रही रोमा का शरीर अब तक दो बार अकड चुका था और आज वो अपने जीवन का सबसे रोमाचक मिलन कर रही थी वही मयंक भी आखरी ढक्के लगाते हुए चरमोत्कर्ष को पहुंचे गया उसको लगा जैसे उसके शरीर का पूरा खून लंड में आ गया और आखरी कुछ डक्के इतने जोर दार थे की रोमा की हड्डियां भी हिल गई और मयंक का वीर्य भी रोमा की चूत में भरता चला गया मयंक आंनद में जैसे ही रोमा के ऊपर गिरा तभी ..
"ट्रिन ट्रिन "..... लिविंग एरिया में रखे फोन की घंटी बजने लगी ।
Tholda sa jyda hi alg type update meko is type ke update pasnd nahi per ye thik tha apne jyada kharb nahi kiya sex seen ko nice..... waiting for your next updateअध्याय - 08
मयंक ने अंदर जाके देखा तो आंटी किचन में एक स्टूल पर चडी हुई थी और जब मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने कहा -
"मयंक अच्छा हुआ की तुम आ गए देखो तुम्हारे बिल्कुल पीछे एक बडा सा चूहा है "
और आंटी का इतना ही कहना था की एक बडा चूहा मेरे बगल से निकलता हुआ सीधे आंटी के स्टूल के पास पहुंचा और आंटी एक दम से हड़बड़ा गई जिससे उनका स्टूल बुरी तरह से हिला तब ही मयंक ने आगे बढ़ते हुए उनको पकडा पर जब तक उनका पैर मुड चुका था जहां आंटी को बहुत बुरा दर्द हो रहा था वहीं मयंक तो बिल्कुल भी इस दुनिया में नहीं था क्योंकि आंटी के बड़े बड़े स्तन उसकी छाती में गडे हुए थे और मयंक का लंड उनके स्पर्श से ही खडा होने लगा था।
जब आंटी की आह्हह की आवाज मयंक के कानों में गई तब उसे होश आया उसने आंटी को नीचे उतारा पर जैसे ही आंटी का पैर नीचे लगा तो उनको बहुत भयंकर दर्द हुआ तो मयंक ने उनको गोदी में उठाना ही ठीक समझा और जैसे ही रोमा को यह एहसास हुआ की वो मयंक की गोद में है और उसका एक हाथ उसकी गांड और दूसरा पीठ पर है उसकी दोनों टांगों के बीच एक झुरझुरी सी उठ गई उसको सुबह का वो दृश्य याद आ गया जब उसने मयंक का लंड देखा था वो यह सोच रही थी की उसको मयंक ने ऐसे उठा लिया था जैसे कोई मोम की मूर्ति हो .....अभी रोमा सोच ही थही थी तब तक वो अपने बिस्तर तक पहुंच चुकी थी।
"आंटी आपका पैर तो थोडा थोडा सूज रहा है"...... मयंक ने पैर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"लगता है मुडने की वजह से सूजन आ रही है बेटा ....... जरा ड्राॅवर में बाम रखा होगा वो देदो मैं लगा देती हूं "
"आंटी मुझे लगता है कडवे तेल की मालिश ज्यादा आराम पहुंचाएगी ......आप जरा रुको मैं अभी गरम करके लाता हूं।"
**************
"आंटी आप बाॅडी को ढीला छोड़ दो और खासकर अपने इस पैर को "....... मयंक ने बायां पैर अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ठीक है....पर मयंक आराम से करना बहुत दर्द हो रहा है "
"जी आंटी "
मयंक ने जैसे ही उस पैर को घुटने से मोडा तो साड़ी थोडी ऊपर को उठ गई और उनकी मांसल पिंडलियों पर मयंक की नजर पड़ी पर नजर अंदाज करते हुए उसने तेल पैर पर गिराते हुए एंकल की मालिश शुरू करदी वहीं रोमा को मयंक के उन सख्त हाथों का अहसास हो रहा था ।
धीरे धीरे मयंक ने अपने हाथों को थोडा ऊपर ले जाना शुरू किया वहीं अपनी पिंडलियों पर मयंक के हाथों का अहसास होते ही रोमा को भी गर्मी चढ़ने लगी वो खुद हैरान थी की वो इतनी जल्दी उत्तेजित क्यूं हो रही है (जब हम किसी व्यक्ति से ज्यादा प्यार करते हैं या किसी से ज्यादा आकर्षित हो जाते हैं तो यही होता है उसके छूने मात्र से ही कामुक विचार आने लगते हैं ऐसा ही रोमा के साथ हो रहा था वैसे तो मयंक से प्रभावित थी ही लेकिन जबसे उसने उसका उभार देखा था तब से ही मन के किसी कोने में वो उसका एहसास पाना चाहती थी)
"आंटी उस पैर की भी कर देता हूं "......कुछ देर एक पैर की मालिश करने के बाद मयंक ने रोमा से पूछा मयंक का हाल भी कुछ ऐसा ही था उसने आज तक किसी औरत के शरीर को महसूस नहीं किया था राजीव ने बहुत बार उसको ब्लू फिल्म देखने के लिए पूछा पर वो हर बार इंकार कर देता था आज पहली बार किसी औरत को छूना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था पर वो अपने चहरे पर उत्तेजना के भाव कदापि नहीं आने दे रहा और तो और उसका लंड भी ऐसे खडा था मानो लोवर से बहार ही आ जाएगा।
"नहीं मयंक लेकिन....व्व..वो मेरे"....
"बोलिए आंटी कहीं और भी लगी थी क्या .....आप बता दीजिए मैं उधर भी मालिश कर देता हूं।".....
"हां मेरी कमर से थोडा नीचे....."......रोमा ने पूरी हिम्मत जोडकर कहा हुआ यह था की मयंक के आने से पहले रोमा ने जब वह चूहा देखा तो हड़बड़ाहट में वो पीछे हुई और उसकी कमर का नीचे वाला हिस्सा किचन की स्लेव जो की मार्वल की थी उसमें लगा जिससे उधर भी दर्द हो रहा था हालांकि की उसने सोचा था की मयंक से सिर्फ पैर की मालिश ही कराएगी पर मयंक ने जिस तरह से पैर की मालिश की थी उससे उसे बहुत आराम मिला था और फिर कुछ मदहोशी भी चढने लगी थी उसको ।
"हां .... ठीक है आंटी तो आप हिचकिचा क्यूं रही है लाइए करे देता हूं बताइए जरा कहां है दर्द और पेट के बल लेट जाइए।"
रोमा ने भी कुछ नहीं कहा और पेट के बल लेट गई पर जब मयंक ने रोमा को उलटा लेटा हुआ देखा तो उसके लंड ने झटका सा मारा रोमा की गांड इतनी कामुक लग रही थी की मयंक की नजर ही नहीं हट रही थी तब ही उसने देखा की रोमा का हाथ पीछे आया और उसने साड़ी को नीचे किया जिसको देख कर तो मयंक भी पागल हो गया वो हिस्सा बहुत गोरा था और साडी नीचे हो जाने की वजह से उसकी चर्बी जो थी वो ऊपर को आने लगी क्योंकि पेटीकोट पहले से ही टाइट बधां था और जोर लगा कर जब रोमा ने उसको नीचे किया तो फस गया ।
"यहां लगी है मयंक"......इस अवाज से मयंक को होश आया और तब उसने देखा की रोमा ने हाथ बिल्कुल गांड पर रखा हुआ था
"आंटी पर यहां मालिश कैसे होगी आपको साडी निकालनी पड़ेगी"
"रुको ...." ,,,,, कुछ देर सोचने के बाद रोमा खडी हुई और उसने अपनी साड़ी को निकाल दिया .....और अपने पेटीकोट को थोडा ढीला करते हुए एक बार फिर उसी तरह लेट गई।
मयंक को तो होश ही नहीं रहा था कल जिन नितम्बों को उसने दूर से देखा था आज उनको ही वो छूने वाला था उसने एक लम्बी सांस छोडी और तेल की कटोरी लेते हुए रोमख के पास आया वहीं रोमा भी भीतर एक अलग रोमांच से भरी हुई थी
मयंक ने तेल उस जगह पर डाला और जैसे ही उसने उस जगह पर हाथ लगाया उसकी नशों मे एक अलग सा एहसास दौडने लगा ।
वहीं रोमा को अपने शरीर पर आशीष के अलावा पहली बार किसी और का एहसास हुआ था उत्तेजना के चलते उसकी तो हल्की चीख निकल गई जो उसने बडी मुश्किल से दबाई
मयंक ने अपना काम चालू कर दिया धीरे धीरे उन नितम्बों को सहलाने लगा और साथ ही साथ अपने हाथ को कमर पर भी चलाने लगा।
"आंटी ऐसे बैठ कर मालिश सही नहीं होगी मैं अपके पैरों के बीच में बैठता हूं और वहां से हाथ सही चल पाएंगें"
"हम्म"......बस इतनी ही आवाज रोमा के मूंह से निकली और उसने अपनी टांगें छोडी कर लीं
अब मयंक के लिए दृश्य और कामुक हो चला था वो घुटनों के बल बैठ गया और रोमा की मालिश करने लगा अब उसने अपने हाथ पूरी पीठ पर चलाना शुरू कर दिए थे।और इसका एहसास होते रोमा ने बिना कुछ कहे अपने बिलाउज को आगे से खोल दिया और इसी के साथ मयंक का हाथ पूरी पीठ पर चलने लगा और रोमा जो की बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी उसकी सिसकारियां भी अपने रुक नहीं रही थी मयंक के हाथ पीठ से होते हुए उसके चूचों तक पहुंच रहे....रोमा के स्तन इतने बड़े थे की आधे उल्टा लेटने की वजह से बगल से निकल आए थे।
मयंक भी पूरे जोश में आ चुका था उसके हाथ चूतड़ों से होते हुए कंधों तक जाने लगे थे और जैसे ही वो ऊपर तक मालिश के लिए आगे होता तो उसका लंड रोमा की गांड में दबता और रोमा भी इसको बहुत इंजोए कर रही थी उसको मयंक के लंड के साइज का अंदाजा हो चुका था वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी की जब मयंक नीचे की तरफ होता तो वो भी अपनी गांड को थोडा ऊपर कर देती ताकी लंड का एहसास पूरा हो सके ।
मयंक का लंड जब रोमा की गांड से लगता तो उसको ऐसा लगता मानो उसका लंड किसी गरम चीज से टच हुआ हो । और तब ही एक पल ऐसा आया की रोमा का शरीर अकडने लगा और उसके पांव खींचने लगे उसकी सिसकियां भी जोर पकडने लगी और एक आह्हह के साथ ही उसका शरीर डीला पढ गया वहीं जब मयंक ने यह नजारा देखा तो उसको समझ नहीं आया पर रोमा की यह तडपन ने उसकी आग में घी काम किया अब उसके हाथ गांड से और नीचे आने लगे और जांघों का स्पर्श उसको बहुत अच्छा लग रहा था ।
"आंटी आप सीधा लेट जाइए आगे से भी कंधे रह गए हैं ".....रोमा शांत हो चुकी थी पर उसने भी अब लंड लेने का मन बना लिया था ....वो भी चुपचाप सीधी हो गई।
और अब मयंक के सामने रोमा के दूध थे जिन्मे थोडा सा ढीलापन जरूर था पर वो भी जैसे उन्हें और सुंदर बना रहा था और जब मयंक की नजर और नीचे गई तो देखा आगे से रोमा का पेटीकोट पूरा भीग चुका था उसने अपने लोवर को उतारा और इस बार रोमा की टांगों को खुद चोडा किया और अपने आप को इतना आगे कर लिया की असके घुटने रोमा की चूत से लग गए और जब इस बार मयंक कंधों की मालिश के लिए आगे बढा तो उसका हाथ उन चूचियों से होते हुए गया जिनके चूचक भी मयंक के हाथ के साथ घिसे और मयंक के पूरे झुकते ही उसका घुटना एक तरह से चूत में ही घुस गया जब उसकी आंखें रोमा के चेहरे पर पडी तो रोमा के चेहरे के भाव देखकर उसके लंड से भी एक बूंद पानी(प्री कम) की निकल आई।
और यहां रोमा का सबर का बांध टूट गया और इस बार जैसे ही मयंक नीचे की तरफ गया तो रोमा ने मयंक का सर पकड कर अपने चूचों से लगा दिया ।
"चूसो इन्हें".....रोमा इतना ही कहे सकी और सुनते ही मयंक ने भी उंन दूग्ध कलशों को पीना शुरू कर दिया ।
"आह्हाआहहहह "........ जैसे ही मयंक ने रोमा के एक चूचक को काटा तो रोमा के शरीर में झुरझुरी दौड गई रोमा को जाने कितने दिन बाद ऐसा एहसास मिल रहा था क्योंकि की ऐसा प्यार करना तो आशीष कब का छोड चुका था..... भले ही रोमा की चूत ने कुछ देर पहले ही बहुत पानी छोडा था पर एक बार फिर उसकी चूत रिसने लगी थी। उसने मयंक का हाथ पकड कर अपने दूसरे चूचे पर रख लिया और खुद उसके हाथ को दबाने का इशारा किया मयंक ने भी किसी छोटे बच्चे की तरह दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया
"कपड़े उतारो मयंक"........ मयंक ने रोमा के दोनों चूचों को लाल कर दिया था दबा दबा कर और चूस चूस कर जब उन में दर्द होने लगा तो तो उसने मयंक को कहा।
और कुछ ही पल में दोनो बिल्कुल नंगे हो चुके थे।.....और पहली बार रोमा ने मयंक के नंगे लंड को देखा तो उसकी आंखों में उस लंड के लिए हवस साफ दिख रही थी यहां मयंक ने जब देखा तो पाया की रोमा की नजर उसके लंड पर ही थी इस वक्त मयंक एक नई रोमा को देख रहा था जो बिल्कुल भी ऐसी नहीं थी जिसे वो जानता था ।
रोमा ने आगे आते हुए लंड को पकडा जैसे उसकी लंबाई और चौड़ाई नाप रही हो और अगले ही पल लंड को मुंह में भर लिया जैसे ही उसने लंड के टोपे पर जीभ घुमाई तो मयंक के मूंह से भी एक सिसकी निकल गई और लंड को अच्छे से चूसने के बाद मयंक के सामने लेट गई और मयंक को अपने पास खींचा और अपनी चूत चूसने का इशारा किया पहले तो मयंक को अजीब लगा पास जाते हुए पर अब तक जितना मजा उसको आया था वो उसके लिए सबसे अलग था।
मयंक ने जैसे ही अपनी जीभ चूत से लगाई रोमा ने उसके सर पर जोर डालते हुए उसको और पास कर लिया और जोर जोर से उसकी सिसकियां निकलने लगी। ...... कुछ ही देर में मयंक खुद ही वहां से हट गया और इस बार उसने रोमा की गर्दन को चूमा जिससे रोमा सातवे आसमान पर पहुंच गई।
उसने खुद अपना हाथ नीचे से ले जाते हुए मयंक का लंड पकडा और अपनी चूत के मूंह पर रख लिया जैसे ही मयंक का लंड चूत से लगा उसके लंड को ऐसा लगा मानो उसके लिंग को किसी गरम चीज से लगा दिया हो पर उसने गर्दन चूसना बंद नहीं किया।
"मयंक इ्सृ्सस््ससस अब अपने लिंग को अंदर डालो आह्हह "
मयंक ने भी अपनी कमर पर जोर देते हुए आगे की तरफ जोर लगाया तो उसका सुपाडा चूत में चला गया और मयंक को जिस आंनद का एहसास हुआ वो उसके लिए ऐसा था मानो वो स्वर्ग में हो उसने एक धीमा ढक्का दिया और उसका लंड आधा अंदर चला गया अब मयंक को ऐसा लग रहा था था मानो उसके लिंग के चारों तरफ टेप लगा दिया हो ।
और वहीं रोमा के मूंह से भी जोर दार चीख निकल गई उसने मयंक के मूंह को पकडा और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये वहीं मयंक का सवर टूट गया उसने लंड थोडा पीछे खींच ते हुए दमदार ढक्का लगा दिया ऐसा होते ही रोमा ने मयंक का होंठ काट लिया और अपने नाखून उसकी पीठ में गाड दिए।
लेकिन बच्चेदानी से टकराने के बाद भी मयंक का लंड 2,3 cm बहार था जब मयंक की आंखे खुली तो उसने देखा रोमा की आंखों से आंसू निकल रहे थे रोमा ने अपना मुंह अलग करते हुए कहा....
"मयंक मेरे दूध चूसो आह्हह् काटना नहीं और इतना बडा भी भला किसी का होता है रुको थोडी देर बिल्कुल भी हिलना मत आह्हह "
मयंक ने भी वैसा ही किया कुछ देर में जब रोमा थोडी शांत हुई और उसने खुद कमर उचकाई तब जाकर मयंक ने अपने लंड को बहार खीचा उसके साथ ही रोम की सितकार उसके कानों में पडी अभी मुंह खुला ही था रोमा का तब ही मयंक ने फिर लंड अंदर डाल दिया और धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा कुछ देर ऐसे ही मयंक करता रहा उसको यह बहुत ही आंनद पहुंचा रहा था वहीं रोमा भी बहुत मजा ले रही थी
"रुको मयंक......और अब जोर जोर से अंदर बहार करना "......रोमा ने पोजिशन की और घोडी बनते हुए बिस्तर के किनारे पर आ गई मयंक भी नीचे खड़े हो गया और एक बार फिर रोमा ने लंड को छेद पर सेट किया पर इस बार मयंक ने अपना लंड एक बार में ही पूरा उतार दिया चूंकि लंड और चूत दोनों ही गीले थे तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।
"आह्हह इश््शश पूरा एक बार में नहीं डालना था .....जानवर हो पूरे तुम मयंक श्श्ससस््स कोई कुंवारी लडकी तुम्हारे नीचे आ गई तो मर ही जाएगी।"
"आंटी आपने ही तो कहा था "
और वहीं रोमा ने खुद अपनी गांड पीछे कर दी जैसे कह रही हो बात मत करो बस चोदते रहो और मयंक ने भी बोलना बंद करते हुए अपना काम जारी रखा ।
"आह्हाआहहहह मयंक इश्स््सस ऐसे ही चोदते रहो "..... मयंक का लंड किसी रौड की तरह अऔदर बहार होने लगा और 15 मिनट तक उस कमरे में सिसकयां और थपथप की आवाजें ही गूजती रही रोमा का शरीर अब तक दो बार अकड चुका था और आज वो अपने जीवन का सबसे रोमाचक मिलन कर रही थी वही मयंक भी आखरी ढक्के लगाते हुए चरमोत्कर्ष को पहुंचे गया उसको लगा जैसे उसके शरीर का पूरा खून लंड में आ गया और आखरी कुछ डक्के इतने जोर दार थे की रोमा की हड्डियां भी हिल गई और मयंक का वीर्य भी रोमा की चूत में भरता चला गया मयंक आंनद में जैसे ही रोमा के ऊपर गिरा तभी ..
"ट्रिन ट्रिन "..... लिविंग एरिया में रखे फोन की घंटी बजने लगी ।
ये कुछ ज्यादा जल्दी नही हो गया?अध्याय - 08
मयंक ने अंदर जाके देखा तो आंटी किचन में एक स्टूल पर चडी हुई थी और जब मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने कहा -
"मयंक अच्छा हुआ की तुम आ गए देखो तुम्हारे बिल्कुल पीछे एक बडा सा चूहा है "
और आंटी का इतना ही कहना था की एक बडा चूहा मेरे बगल से निकलता हुआ सीधे आंटी के स्टूल के पास पहुंचा और आंटी एक दम से हड़बड़ा गई जिससे उनका स्टूल बुरी तरह से हिला तब ही मयंक ने आगे बढ़ते हुए उनको पकडा पर जब तक उनका पैर मुड चुका था जहां आंटी को बहुत बुरा दर्द हो रहा था वहीं मयंक तो बिल्कुल भी इस दुनिया में नहीं था क्योंकि आंटी के बड़े बड़े स्तन उसकी छाती में गडे हुए थे और मयंक का लंड उनके स्पर्श से ही खडा होने लगा था।
जब आंटी की आह्हह की आवाज मयंक के कानों में गई तब उसे होश आया उसने आंटी को नीचे उतारा पर जैसे ही आंटी का पैर नीचे लगा तो उनको बहुत भयंकर दर्द हुआ तो मयंक ने उनको गोदी में उठाना ही ठीक समझा और जैसे ही रोमा को यह एहसास हुआ की वो मयंक की गोद में है और उसका एक हाथ उसकी गांड और दूसरा पीठ पर है उसकी दोनों टांगों के बीच एक झुरझुरी सी उठ गई उसको सुबह का वो दृश्य याद आ गया जब उसने मयंक का लंड देखा था वो यह सोच रही थी की उसको मयंक ने ऐसे उठा लिया था जैसे कोई मोम की मूर्ति हो .....अभी रोमा सोच ही थही थी तब तक वो अपने बिस्तर तक पहुंच चुकी थी।
"आंटी आपका पैर तो थोडा थोडा सूज रहा है"...... मयंक ने पैर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"लगता है मुडने की वजह से सूजन आ रही है बेटा ....... जरा ड्राॅवर में बाम रखा होगा वो देदो मैं लगा देती हूं "
"आंटी मुझे लगता है कडवे तेल की मालिश ज्यादा आराम पहुंचाएगी ......आप जरा रुको मैं अभी गरम करके लाता हूं।"
**************
"आंटी आप बाॅडी को ढीला छोड़ दो और खासकर अपने इस पैर को "....... मयंक ने बायां पैर अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ठीक है....पर मयंक आराम से करना बहुत दर्द हो रहा है "
"जी आंटी "
मयंक ने जैसे ही उस पैर को घुटने से मोडा तो साड़ी थोडी ऊपर को उठ गई और उनकी मांसल पिंडलियों पर मयंक की नजर पड़ी पर नजर अंदाज करते हुए उसने तेल पैर पर गिराते हुए एंकल की मालिश शुरू करदी वहीं रोमा को मयंक के उन सख्त हाथों का अहसास हो रहा था ।
धीरे धीरे मयंक ने अपने हाथों को थोडा ऊपर ले जाना शुरू किया वहीं अपनी पिंडलियों पर मयंक के हाथों का अहसास होते ही रोमा को भी गर्मी चढ़ने लगी वो खुद हैरान थी की वो इतनी जल्दी उत्तेजित क्यूं हो रही है (जब हम किसी व्यक्ति से ज्यादा प्यार करते हैं या किसी से ज्यादा आकर्षित हो जाते हैं तो यही होता है उसके छूने मात्र से ही कामुक विचार आने लगते हैं ऐसा ही रोमा के साथ हो रहा था वैसे तो मयंक से प्रभावित थी ही लेकिन जबसे उसने उसका उभार देखा था तब से ही मन के किसी कोने में वो उसका एहसास पाना चाहती थी)
"आंटी उस पैर की भी कर देता हूं "......कुछ देर एक पैर की मालिश करने के बाद मयंक ने रोमा से पूछा मयंक का हाल भी कुछ ऐसा ही था उसने आज तक किसी औरत के शरीर को महसूस नहीं किया था राजीव ने बहुत बार उसको ब्लू फिल्म देखने के लिए पूछा पर वो हर बार इंकार कर देता था आज पहली बार किसी औरत को छूना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था पर वो अपने चहरे पर उत्तेजना के भाव कदापि नहीं आने दे रहा और तो और उसका लंड भी ऐसे खडा था मानो लोवर से बहार ही आ जाएगा।
"नहीं मयंक लेकिन....व्व..वो मेरे"....
"बोलिए आंटी कहीं और भी लगी थी क्या .....आप बता दीजिए मैं उधर भी मालिश कर देता हूं।".....
"हां मेरी कमर से थोडा नीचे....."......रोमा ने पूरी हिम्मत जोडकर कहा हुआ यह था की मयंक के आने से पहले रोमा ने जब वह चूहा देखा तो हड़बड़ाहट में वो पीछे हुई और उसकी कमर का नीचे वाला हिस्सा किचन की स्लेव जो की मार्वल की थी उसमें लगा जिससे उधर भी दर्द हो रहा था हालांकि की उसने सोचा था की मयंक से सिर्फ पैर की मालिश ही कराएगी पर मयंक ने जिस तरह से पैर की मालिश की थी उससे उसे बहुत आराम मिला था और फिर कुछ मदहोशी भी चढने लगी थी उसको ।
"हां .... ठीक है आंटी तो आप हिचकिचा क्यूं रही है लाइए करे देता हूं बताइए जरा कहां है दर्द और पेट के बल लेट जाइए।"
रोमा ने भी कुछ नहीं कहा और पेट के बल लेट गई पर जब मयंक ने रोमा को उलटा लेटा हुआ देखा तो उसके लंड ने झटका सा मारा रोमा की गांड इतनी कामुक लग रही थी की मयंक की नजर ही नहीं हट रही थी तब ही उसने देखा की रोमा का हाथ पीछे आया और उसने साड़ी को नीचे किया जिसको देख कर तो मयंक भी पागल हो गया वो हिस्सा बहुत गोरा था और साडी नीचे हो जाने की वजह से उसकी चर्बी जो थी वो ऊपर को आने लगी क्योंकि पेटीकोट पहले से ही टाइट बधां था और जोर लगा कर जब रोमा ने उसको नीचे किया तो फस गया ।
"यहां लगी है मयंक"......इस अवाज से मयंक को होश आया और तब उसने देखा की रोमा ने हाथ बिल्कुल गांड पर रखा हुआ था
"आंटी पर यहां मालिश कैसे होगी आपको साडी निकालनी पड़ेगी"
"रुको ...." ,,,,, कुछ देर सोचने के बाद रोमा खडी हुई और उसने अपनी साड़ी को निकाल दिया .....और अपने पेटीकोट को थोडा ढीला करते हुए एक बार फिर उसी तरह लेट गई।
मयंक को तो होश ही नहीं रहा था कल जिन नितम्बों को उसने दूर से देखा था आज उनको ही वो छूने वाला था उसने एक लम्बी सांस छोडी और तेल की कटोरी लेते हुए रोमख के पास आया वहीं रोमा भी भीतर एक अलग रोमांच से भरी हुई थी
मयंक ने तेल उस जगह पर डाला और जैसे ही उसने उस जगह पर हाथ लगाया उसकी नशों मे एक अलग सा एहसास दौडने लगा ।
वहीं रोमा को अपने शरीर पर आशीष के अलावा पहली बार किसी और का एहसास हुआ था उत्तेजना के चलते उसकी तो हल्की चीख निकल गई जो उसने बडी मुश्किल से दबाई
मयंक ने अपना काम चालू कर दिया धीरे धीरे उन नितम्बों को सहलाने लगा और साथ ही साथ अपने हाथ को कमर पर भी चलाने लगा।
"आंटी ऐसे बैठ कर मालिश सही नहीं होगी मैं अपके पैरों के बीच में बैठता हूं और वहां से हाथ सही चल पाएंगें"
"हम्म"......बस इतनी ही आवाज रोमा के मूंह से निकली और उसने अपनी टांगें छोडी कर लीं
अब मयंक के लिए दृश्य और कामुक हो चला था वो घुटनों के बल बैठ गया और रोमा की मालिश करने लगा अब उसने अपने हाथ पूरी पीठ पर चलाना शुरू कर दिए थे।और इसका एहसास होते रोमा ने बिना कुछ कहे अपने बिलाउज को आगे से खोल दिया और इसी के साथ मयंक का हाथ पूरी पीठ पर चलने लगा और रोमा जो की बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी उसकी सिसकारियां भी अपने रुक नहीं रही थी मयंक के हाथ पीठ से होते हुए उसके चूचों तक पहुंच रहे....रोमा के स्तन इतने बड़े थे की आधे उल्टा लेटने की वजह से बगल से निकल आए थे।
मयंक भी पूरे जोश में आ चुका था उसके हाथ चूतड़ों से होते हुए कंधों तक जाने लगे थे और जैसे ही वो ऊपर तक मालिश के लिए आगे होता तो उसका लंड रोमा की गांड में दबता और रोमा भी इसको बहुत इंजोए कर रही थी उसको मयंक के लंड के साइज का अंदाजा हो चुका था वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी की जब मयंक नीचे की तरफ होता तो वो भी अपनी गांड को थोडा ऊपर कर देती ताकी लंड का एहसास पूरा हो सके ।
मयंक का लंड जब रोमा की गांड से लगता तो उसको ऐसा लगता मानो उसका लंड किसी गरम चीज से टच हुआ हो । और तब ही एक पल ऐसा आया की रोमा का शरीर अकडने लगा और उसके पांव खींचने लगे उसकी सिसकियां भी जोर पकडने लगी और एक आह्हह के साथ ही उसका शरीर डीला पढ गया वहीं जब मयंक ने यह नजारा देखा तो उसको समझ नहीं आया पर रोमा की यह तडपन ने उसकी आग में घी काम किया अब उसके हाथ गांड से और नीचे आने लगे और जांघों का स्पर्श उसको बहुत अच्छा लग रहा था ।
"आंटी आप सीधा लेट जाइए आगे से भी कंधे रह गए हैं ".....रोमा शांत हो चुकी थी पर उसने भी अब लंड लेने का मन बना लिया था ....वो भी चुपचाप सीधी हो गई।
और अब मयंक के सामने रोमा के दूध थे जिन्मे थोडा सा ढीलापन जरूर था पर वो भी जैसे उन्हें और सुंदर बना रहा था और जब मयंक की नजर और नीचे गई तो देखा आगे से रोमा का पेटीकोट पूरा भीग चुका था उसने अपने लोवर को उतारा और इस बार रोमा की टांगों को खुद चोडा किया और अपने आप को इतना आगे कर लिया की असके घुटने रोमा की चूत से लग गए और जब इस बार मयंक कंधों की मालिश के लिए आगे बढा तो उसका हाथ उन चूचियों से होते हुए गया जिनके चूचक भी मयंक के हाथ के साथ घिसे और मयंक के पूरे झुकते ही उसका घुटना एक तरह से चूत में ही घुस गया जब उसकी आंखें रोमा के चेहरे पर पडी तो रोमा के चेहरे के भाव देखकर उसके लंड से भी एक बूंद पानी(प्री कम) की निकल आई।
और यहां रोमा का सबर का बांध टूट गया और इस बार जैसे ही मयंक नीचे की तरफ गया तो रोमा ने मयंक का सर पकड कर अपने चूचों से लगा दिया ।
"चूसो इन्हें".....रोमा इतना ही कहे सकी और सुनते ही मयंक ने भी उंन दूग्ध कलशों को पीना शुरू कर दिया ।
"आह्हाआहहहह "........ जैसे ही मयंक ने रोमा के एक चूचक को काटा तो रोमा के शरीर में झुरझुरी दौड गई रोमा को जाने कितने दिन बाद ऐसा एहसास मिल रहा था क्योंकि की ऐसा प्यार करना तो आशीष कब का छोड चुका था..... भले ही रोमा की चूत ने कुछ देर पहले ही बहुत पानी छोडा था पर एक बार फिर उसकी चूत रिसने लगी थी। उसने मयंक का हाथ पकड कर अपने दूसरे चूचे पर रख लिया और खुद उसके हाथ को दबाने का इशारा किया मयंक ने भी किसी छोटे बच्चे की तरह दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया
"कपड़े उतारो मयंक"........ मयंक ने रोमा के दोनों चूचों को लाल कर दिया था दबा दबा कर और चूस चूस कर जब उन में दर्द होने लगा तो तो उसने मयंक को कहा।
और कुछ ही पल में दोनो बिल्कुल नंगे हो चुके थे।.....और पहली बार रोमा ने मयंक के नंगे लंड को देखा तो उसकी आंखों में उस लंड के लिए हवस साफ दिख रही थी यहां मयंक ने जब देखा तो पाया की रोमा की नजर उसके लंड पर ही थी इस वक्त मयंक एक नई रोमा को देख रहा था जो बिल्कुल भी ऐसी नहीं थी जिसे वो जानता था ।
रोमा ने आगे आते हुए लंड को पकडा जैसे उसकी लंबाई और चौड़ाई नाप रही हो और अगले ही पल लंड को मुंह में भर लिया जैसे ही उसने लंड के टोपे पर जीभ घुमाई तो मयंक के मूंह से भी एक सिसकी निकल गई और लंड को अच्छे से चूसने के बाद मयंक के सामने लेट गई और मयंक को अपने पास खींचा और अपनी चूत चूसने का इशारा किया पहले तो मयंक को अजीब लगा पास जाते हुए पर अब तक जितना मजा उसको आया था वो उसके लिए सबसे अलग था।
मयंक ने जैसे ही अपनी जीभ चूत से लगाई रोमा ने उसके सर पर जोर डालते हुए उसको और पास कर लिया और जोर जोर से उसकी सिसकियां निकलने लगी। ...... कुछ ही देर में मयंक खुद ही वहां से हट गया और इस बार उसने रोमा की गर्दन को चूमा जिससे रोमा सातवे आसमान पर पहुंच गई।
उसने खुद अपना हाथ नीचे से ले जाते हुए मयंक का लंड पकडा और अपनी चूत के मूंह पर रख लिया जैसे ही मयंक का लंड चूत से लगा उसके लंड को ऐसा लगा मानो उसके लिंग को किसी गरम चीज से लगा दिया हो पर उसने गर्दन चूसना बंद नहीं किया।
"मयंक इ्सृ्सस््ससस अब अपने लिंग को अंदर डालो आह्हह "
मयंक ने भी अपनी कमर पर जोर देते हुए आगे की तरफ जोर लगाया तो उसका सुपाडा चूत में चला गया और मयंक को जिस आंनद का एहसास हुआ वो उसके लिए ऐसा था मानो वो स्वर्ग में हो उसने एक धीमा ढक्का दिया और उसका लंड आधा अंदर चला गया अब मयंक को ऐसा लग रहा था था मानो उसके लिंग के चारों तरफ टेप लगा दिया हो ।
और वहीं रोमा के मूंह से भी जोर दार चीख निकल गई उसने मयंक के मूंह को पकडा और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये वहीं मयंक का सवर टूट गया उसने लंड थोडा पीछे खींच ते हुए दमदार ढक्का लगा दिया ऐसा होते ही रोमा ने मयंक का होंठ काट लिया और अपने नाखून उसकी पीठ में गाड दिए।
लेकिन बच्चेदानी से टकराने के बाद भी मयंक का लंड 2,3 cm बहार था जब मयंक की आंखे खुली तो उसने देखा रोमा की आंखों से आंसू निकल रहे थे रोमा ने अपना मुंह अलग करते हुए कहा....
"मयंक मेरे दूध चूसो आह्हह् काटना नहीं और इतना बडा भी भला किसी का होता है रुको थोडी देर बिल्कुल भी हिलना मत आह्हह "
मयंक ने भी वैसा ही किया कुछ देर में जब रोमा थोडी शांत हुई और उसने खुद कमर उचकाई तब जाकर मयंक ने अपने लंड को बहार खीचा उसके साथ ही रोम की सितकार उसके कानों में पडी अभी मुंह खुला ही था रोमा का तब ही मयंक ने फिर लंड अंदर डाल दिया और धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा कुछ देर ऐसे ही मयंक करता रहा उसको यह बहुत ही आंनद पहुंचा रहा था वहीं रोमा भी बहुत मजा ले रही थी
"रुको मयंक......और अब जोर जोर से अंदर बहार करना "......रोमा ने पोजिशन की और घोडी बनते हुए बिस्तर के किनारे पर आ गई मयंक भी नीचे खड़े हो गया और एक बार फिर रोमा ने लंड को छेद पर सेट किया पर इस बार मयंक ने अपना लंड एक बार में ही पूरा उतार दिया चूंकि लंड और चूत दोनों ही गीले थे तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।
"आह्हह इश््शश पूरा एक बार में नहीं डालना था .....जानवर हो पूरे तुम मयंक श्श्ससस््स कोई कुंवारी लडकी तुम्हारे नीचे आ गई तो मर ही जाएगी।"
"आंटी आपने ही तो कहा था "
और वहीं रोमा ने खुद अपनी गांड पीछे कर दी जैसे कह रही हो बात मत करो बस चोदते रहो और मयंक ने भी बोलना बंद करते हुए अपना काम जारी रखा ।
"आह्हाआहहहह मयंक इश्स््सस ऐसे ही चोदते रहो "..... मयंक का लंड किसी रौड की तरह अऔदर बहार होने लगा और 15 मिनट तक उस कमरे में सिसकयां और थपथप की आवाजें ही गूजती रही रोमा का शरीर अब तक दो बार अकड चुका था और आज वो अपने जीवन का सबसे रोमाचक मिलन कर रही थी वही मयंक भी आखरी ढक्के लगाते हुए चरमोत्कर्ष को पहुंचे गया उसको लगा जैसे उसके शरीर का पूरा खून लंड में आ गया और आखरी कुछ डक्के इतने जोर दार थे की रोमा की हड्डियां भी हिल गई और मयंक का वीर्य भी रोमा की चूत में भरता चला गया मयंक आंनद में जैसे ही रोमा के ऊपर गिरा तभी ..
"ट्रिन ट्रिन "..... लिविंग एरिया में रखे फोन की घंटी बजने लगी ।
Riky bhai training karwana jaruri thi hero ki nhi to phir aap bolte ...hero ko aata nhi tha to ye sab kaise kar rha hai .....or bhala jaldi kaise hua roma koi heroine thodi hai story ki ..ये कुछ ज्यादा जल्दी नही हो गया?
मतलब मयंक को इस घर में आए हफ्ता भी नही हुआ, और ये सब? थोड़ी शर्म, थोड़ा सेडक्शन तो दिखाना था।
Thanks parkas bhai ....Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update....
भाई, हीरोइन न सही, है तो भारतीय नारी ही न, टैबू ब्रेक करने में बहुत सोचना पड़ता है अपने यहां, ऊपर से ये समय उस समय का है तब हमारी सोसाइटी पर पश्चिम का इतना प्रभाव नहीं था कि ऐसे ही सब हो जाय।Riky bhai training karwana jaruri thi hero ki nhi to phir aap bolte ...hero ko aata nhi tha to ye sab kaise kar rha hai .....or bhala jaldi kaise hua roma koi heroine thodi hai story ki ..![]()
Nice and superb update....अध्याय - 08
मयंक ने अंदर जाके देखा तो आंटी किचन में एक स्टूल पर चडी हुई थी और जब मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने कहा -
"मयंक अच्छा हुआ की तुम आ गए देखो तुम्हारे बिल्कुल पीछे एक बडा सा चूहा है "
और आंटी का इतना ही कहना था की एक बडा चूहा मेरे बगल से निकलता हुआ सीधे आंटी के स्टूल के पास पहुंचा और आंटी एक दम से हड़बड़ा गई जिससे उनका स्टूल बुरी तरह से हिला तब ही मयंक ने आगे बढ़ते हुए उनको पकडा पर जब तक उनका पैर मुड चुका था जहां आंटी को बहुत बुरा दर्द हो रहा था वहीं मयंक तो बिल्कुल भी इस दुनिया में नहीं था क्योंकि आंटी के बड़े बड़े स्तन उसकी छाती में गडे हुए थे और मयंक का लंड उनके स्पर्श से ही खडा होने लगा था।
जब आंटी की आह्हह की आवाज मयंक के कानों में गई तब उसे होश आया उसने आंटी को नीचे उतारा पर जैसे ही आंटी का पैर नीचे लगा तो उनको बहुत भयंकर दर्द हुआ तो मयंक ने उनको गोदी में उठाना ही ठीक समझा और जैसे ही रोमा को यह एहसास हुआ की वो मयंक की गोद में है और उसका एक हाथ उसकी गांड और दूसरा पीठ पर है उसकी दोनों टांगों के बीच एक झुरझुरी सी उठ गई उसको सुबह का वो दृश्य याद आ गया जब उसने मयंक का लंड देखा था वो यह सोच रही थी की उसको मयंक ने ऐसे उठा लिया था जैसे कोई मोम की मूर्ति हो .....अभी रोमा सोच ही थही थी तब तक वो अपने बिस्तर तक पहुंच चुकी थी।
"आंटी आपका पैर तो थोडा थोडा सूज रहा है"...... मयंक ने पैर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"लगता है मुडने की वजह से सूजन आ रही है बेटा ....... जरा ड्राॅवर में बाम रखा होगा वो देदो मैं लगा देती हूं "
"आंटी मुझे लगता है कडवे तेल की मालिश ज्यादा आराम पहुंचाएगी ......आप जरा रुको मैं अभी गरम करके लाता हूं।"
**************
"आंटी आप बाॅडी को ढीला छोड़ दो और खासकर अपने इस पैर को "....... मयंक ने बायां पैर अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ठीक है....पर मयंक आराम से करना बहुत दर्द हो रहा है "
"जी आंटी "
मयंक ने जैसे ही उस पैर को घुटने से मोडा तो साड़ी थोडी ऊपर को उठ गई और उनकी मांसल पिंडलियों पर मयंक की नजर पड़ी पर नजर अंदाज करते हुए उसने तेल पैर पर गिराते हुए एंकल की मालिश शुरू करदी वहीं रोमा को मयंक के उन सख्त हाथों का अहसास हो रहा था ।
धीरे धीरे मयंक ने अपने हाथों को थोडा ऊपर ले जाना शुरू किया वहीं अपनी पिंडलियों पर मयंक के हाथों का अहसास होते ही रोमा को भी गर्मी चढ़ने लगी वो खुद हैरान थी की वो इतनी जल्दी उत्तेजित क्यूं हो रही है (जब हम किसी व्यक्ति से ज्यादा प्यार करते हैं या किसी से ज्यादा आकर्षित हो जाते हैं तो यही होता है उसके छूने मात्र से ही कामुक विचार आने लगते हैं ऐसा ही रोमा के साथ हो रहा था वैसे तो मयंक से प्रभावित थी ही लेकिन जबसे उसने उसका उभार देखा था तब से ही मन के किसी कोने में वो उसका एहसास पाना चाहती थी)
"आंटी उस पैर की भी कर देता हूं "......कुछ देर एक पैर की मालिश करने के बाद मयंक ने रोमा से पूछा मयंक का हाल भी कुछ ऐसा ही था उसने आज तक किसी औरत के शरीर को महसूस नहीं किया था राजीव ने बहुत बार उसको ब्लू फिल्म देखने के लिए पूछा पर वो हर बार इंकार कर देता था आज पहली बार किसी औरत को छूना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था पर वो अपने चहरे पर उत्तेजना के भाव कदापि नहीं आने दे रहा और तो और उसका लंड भी ऐसे खडा था मानो लोवर से बहार ही आ जाएगा।
"नहीं मयंक लेकिन....व्व..वो मेरे"....
"बोलिए आंटी कहीं और भी लगी थी क्या .....आप बता दीजिए मैं उधर भी मालिश कर देता हूं।".....
"हां मेरी कमर से थोडा नीचे....."......रोमा ने पूरी हिम्मत जोडकर कहा हुआ यह था की मयंक के आने से पहले रोमा ने जब वह चूहा देखा तो हड़बड़ाहट में वो पीछे हुई और उसकी कमर का नीचे वाला हिस्सा किचन की स्लेव जो की मार्वल की थी उसमें लगा जिससे उधर भी दर्द हो रहा था हालांकि की उसने सोचा था की मयंक से सिर्फ पैर की मालिश ही कराएगी पर मयंक ने जिस तरह से पैर की मालिश की थी उससे उसे बहुत आराम मिला था और फिर कुछ मदहोशी भी चढने लगी थी उसको ।
"हां .... ठीक है आंटी तो आप हिचकिचा क्यूं रही है लाइए करे देता हूं बताइए जरा कहां है दर्द और पेट के बल लेट जाइए।"
रोमा ने भी कुछ नहीं कहा और पेट के बल लेट गई पर जब मयंक ने रोमा को उलटा लेटा हुआ देखा तो उसके लंड ने झटका सा मारा रोमा की गांड इतनी कामुक लग रही थी की मयंक की नजर ही नहीं हट रही थी तब ही उसने देखा की रोमा का हाथ पीछे आया और उसने साड़ी को नीचे किया जिसको देख कर तो मयंक भी पागल हो गया वो हिस्सा बहुत गोरा था और साडी नीचे हो जाने की वजह से उसकी चर्बी जो थी वो ऊपर को आने लगी क्योंकि पेटीकोट पहले से ही टाइट बधां था और जोर लगा कर जब रोमा ने उसको नीचे किया तो फस गया ।
"यहां लगी है मयंक"......इस अवाज से मयंक को होश आया और तब उसने देखा की रोमा ने हाथ बिल्कुल गांड पर रखा हुआ था
"आंटी पर यहां मालिश कैसे होगी आपको साडी निकालनी पड़ेगी"
"रुको ...." ,,,,, कुछ देर सोचने के बाद रोमा खडी हुई और उसने अपनी साड़ी को निकाल दिया .....और अपने पेटीकोट को थोडा ढीला करते हुए एक बार फिर उसी तरह लेट गई।
मयंक को तो होश ही नहीं रहा था कल जिन नितम्बों को उसने दूर से देखा था आज उनको ही वो छूने वाला था उसने एक लम्बी सांस छोडी और तेल की कटोरी लेते हुए रोमख के पास आया वहीं रोमा भी भीतर एक अलग रोमांच से भरी हुई थी
मयंक ने तेल उस जगह पर डाला और जैसे ही उसने उस जगह पर हाथ लगाया उसकी नशों मे एक अलग सा एहसास दौडने लगा ।
वहीं रोमा को अपने शरीर पर आशीष के अलावा पहली बार किसी और का एहसास हुआ था उत्तेजना के चलते उसकी तो हल्की चीख निकल गई जो उसने बडी मुश्किल से दबाई
मयंक ने अपना काम चालू कर दिया धीरे धीरे उन नितम्बों को सहलाने लगा और साथ ही साथ अपने हाथ को कमर पर भी चलाने लगा।
"आंटी ऐसे बैठ कर मालिश सही नहीं होगी मैं अपके पैरों के बीच में बैठता हूं और वहां से हाथ सही चल पाएंगें"
"हम्म"......बस इतनी ही आवाज रोमा के मूंह से निकली और उसने अपनी टांगें छोडी कर लीं
अब मयंक के लिए दृश्य और कामुक हो चला था वो घुटनों के बल बैठ गया और रोमा की मालिश करने लगा अब उसने अपने हाथ पूरी पीठ पर चलाना शुरू कर दिए थे।और इसका एहसास होते रोमा ने बिना कुछ कहे अपने बिलाउज को आगे से खोल दिया और इसी के साथ मयंक का हाथ पूरी पीठ पर चलने लगा और रोमा जो की बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी उसकी सिसकारियां भी अपने रुक नहीं रही थी मयंक के हाथ पीठ से होते हुए उसके चूचों तक पहुंच रहे....रोमा के स्तन इतने बड़े थे की आधे उल्टा लेटने की वजह से बगल से निकल आए थे।
मयंक भी पूरे जोश में आ चुका था उसके हाथ चूतड़ों से होते हुए कंधों तक जाने लगे थे और जैसे ही वो ऊपर तक मालिश के लिए आगे होता तो उसका लंड रोमा की गांड में दबता और रोमा भी इसको बहुत इंजोए कर रही थी उसको मयंक के लंड के साइज का अंदाजा हो चुका था वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी की जब मयंक नीचे की तरफ होता तो वो भी अपनी गांड को थोडा ऊपर कर देती ताकी लंड का एहसास पूरा हो सके ।
मयंक का लंड जब रोमा की गांड से लगता तो उसको ऐसा लगता मानो उसका लंड किसी गरम चीज से टच हुआ हो । और तब ही एक पल ऐसा आया की रोमा का शरीर अकडने लगा और उसके पांव खींचने लगे उसकी सिसकियां भी जोर पकडने लगी और एक आह्हह के साथ ही उसका शरीर डीला पढ गया वहीं जब मयंक ने यह नजारा देखा तो उसको समझ नहीं आया पर रोमा की यह तडपन ने उसकी आग में घी काम किया अब उसके हाथ गांड से और नीचे आने लगे और जांघों का स्पर्श उसको बहुत अच्छा लग रहा था ।
"आंटी आप सीधा लेट जाइए आगे से भी कंधे रह गए हैं ".....रोमा शांत हो चुकी थी पर उसने भी अब लंड लेने का मन बना लिया था ....वो भी चुपचाप सीधी हो गई।
और अब मयंक के सामने रोमा के दूध थे जिन्मे थोडा सा ढीलापन जरूर था पर वो भी जैसे उन्हें और सुंदर बना रहा था और जब मयंक की नजर और नीचे गई तो देखा आगे से रोमा का पेटीकोट पूरा भीग चुका था उसने अपने लोवर को उतारा और इस बार रोमा की टांगों को खुद चोडा किया और अपने आप को इतना आगे कर लिया की असके घुटने रोमा की चूत से लग गए और जब इस बार मयंक कंधों की मालिश के लिए आगे बढा तो उसका हाथ उन चूचियों से होते हुए गया जिनके चूचक भी मयंक के हाथ के साथ घिसे और मयंक के पूरे झुकते ही उसका घुटना एक तरह से चूत में ही घुस गया जब उसकी आंखें रोमा के चेहरे पर पडी तो रोमा के चेहरे के भाव देखकर उसके लंड से भी एक बूंद पानी(प्री कम) की निकल आई।
और यहां रोमा का सबर का बांध टूट गया और इस बार जैसे ही मयंक नीचे की तरफ गया तो रोमा ने मयंक का सर पकड कर अपने चूचों से लगा दिया ।
"चूसो इन्हें".....रोमा इतना ही कहे सकी और सुनते ही मयंक ने भी उंन दूग्ध कलशों को पीना शुरू कर दिया ।
"आह्हाआहहहह "........ जैसे ही मयंक ने रोमा के एक चूचक को काटा तो रोमा के शरीर में झुरझुरी दौड गई रोमा को जाने कितने दिन बाद ऐसा एहसास मिल रहा था क्योंकि की ऐसा प्यार करना तो आशीष कब का छोड चुका था..... भले ही रोमा की चूत ने कुछ देर पहले ही बहुत पानी छोडा था पर एक बार फिर उसकी चूत रिसने लगी थी। उसने मयंक का हाथ पकड कर अपने दूसरे चूचे पर रख लिया और खुद उसके हाथ को दबाने का इशारा किया मयंक ने भी किसी छोटे बच्चे की तरह दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया
"कपड़े उतारो मयंक"........ मयंक ने रोमा के दोनों चूचों को लाल कर दिया था दबा दबा कर और चूस चूस कर जब उन में दर्द होने लगा तो तो उसने मयंक को कहा।
और कुछ ही पल में दोनो बिल्कुल नंगे हो चुके थे।.....और पहली बार रोमा ने मयंक के नंगे लंड को देखा तो उसकी आंखों में उस लंड के लिए हवस साफ दिख रही थी यहां मयंक ने जब देखा तो पाया की रोमा की नजर उसके लंड पर ही थी इस वक्त मयंक एक नई रोमा को देख रहा था जो बिल्कुल भी ऐसी नहीं थी जिसे वो जानता था ।
रोमा ने आगे आते हुए लंड को पकडा जैसे उसकी लंबाई और चौड़ाई नाप रही हो और अगले ही पल लंड को मुंह में भर लिया जैसे ही उसने लंड के टोपे पर जीभ घुमाई तो मयंक के मूंह से भी एक सिसकी निकल गई और लंड को अच्छे से चूसने के बाद मयंक के सामने लेट गई और मयंक को अपने पास खींचा और अपनी चूत चूसने का इशारा किया पहले तो मयंक को अजीब लगा पास जाते हुए पर अब तक जितना मजा उसको आया था वो उसके लिए सबसे अलग था।
मयंक ने जैसे ही अपनी जीभ चूत से लगाई रोमा ने उसके सर पर जोर डालते हुए उसको और पास कर लिया और जोर जोर से उसकी सिसकियां निकलने लगी। ...... कुछ ही देर में मयंक खुद ही वहां से हट गया और इस बार उसने रोमा की गर्दन को चूमा जिससे रोमा सातवे आसमान पर पहुंच गई।
उसने खुद अपना हाथ नीचे से ले जाते हुए मयंक का लंड पकडा और अपनी चूत के मूंह पर रख लिया जैसे ही मयंक का लंड चूत से लगा उसके लंड को ऐसा लगा मानो उसके लिंग को किसी गरम चीज से लगा दिया हो पर उसने गर्दन चूसना बंद नहीं किया।
"मयंक इ्सृ्सस््ससस अब अपने लिंग को अंदर डालो आह्हह "
मयंक ने भी अपनी कमर पर जोर देते हुए आगे की तरफ जोर लगाया तो उसका सुपाडा चूत में चला गया और मयंक को जिस आंनद का एहसास हुआ वो उसके लिए ऐसा था मानो वो स्वर्ग में हो उसने एक धीमा ढक्का दिया और उसका लंड आधा अंदर चला गया अब मयंक को ऐसा लग रहा था था मानो उसके लिंग के चारों तरफ टेप लगा दिया हो ।
और वहीं रोमा के मूंह से भी जोर दार चीख निकल गई उसने मयंक के मूंह को पकडा और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये वहीं मयंक का सवर टूट गया उसने लंड थोडा पीछे खींच ते हुए दमदार ढक्का लगा दिया ऐसा होते ही रोमा ने मयंक का होंठ काट लिया और अपने नाखून उसकी पीठ में गाड दिए।
लेकिन बच्चेदानी से टकराने के बाद भी मयंक का लंड 2,3 cm बहार था जब मयंक की आंखे खुली तो उसने देखा रोमा की आंखों से आंसू निकल रहे थे रोमा ने अपना मुंह अलग करते हुए कहा....
"मयंक मेरे दूध चूसो आह्हह् काटना नहीं और इतना बडा भी भला किसी का होता है रुको थोडी देर बिल्कुल भी हिलना मत आह्हह "
मयंक ने भी वैसा ही किया कुछ देर में जब रोमा थोडी शांत हुई और उसने खुद कमर उचकाई तब जाकर मयंक ने अपने लंड को बहार खीचा उसके साथ ही रोम की सितकार उसके कानों में पडी अभी मुंह खुला ही था रोमा का तब ही मयंक ने फिर लंड अंदर डाल दिया और धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा कुछ देर ऐसे ही मयंक करता रहा उसको यह बहुत ही आंनद पहुंचा रहा था वहीं रोमा भी बहुत मजा ले रही थी
"रुको मयंक......और अब जोर जोर से अंदर बहार करना "......रोमा ने पोजिशन की और घोडी बनते हुए बिस्तर के किनारे पर आ गई मयंक भी नीचे खड़े हो गया और एक बार फिर रोमा ने लंड को छेद पर सेट किया पर इस बार मयंक ने अपना लंड एक बार में ही पूरा उतार दिया चूंकि लंड और चूत दोनों ही गीले थे तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।
"आह्हह इश््शश पूरा एक बार में नहीं डालना था .....जानवर हो पूरे तुम मयंक श्श्ससस््स कोई कुंवारी लडकी तुम्हारे नीचे आ गई तो मर ही जाएगी।"
"आंटी आपने ही तो कहा था "
और वहीं रोमा ने खुद अपनी गांड पीछे कर दी जैसे कह रही हो बात मत करो बस चोदते रहो और मयंक ने भी बोलना बंद करते हुए अपना काम जारी रखा ।
"आह्हाआहहहह मयंक इश्स््सस ऐसे ही चोदते रहो "..... मयंक का लंड किसी रौड की तरह अऔदर बहार होने लगा और 15 मिनट तक उस कमरे में सिसकयां और थपथप की आवाजें ही गूजती रही रोमा का शरीर अब तक दो बार अकड चुका था और आज वो अपने जीवन का सबसे रोमाचक मिलन कर रही थी वही मयंक भी आखरी ढक्के लगाते हुए चरमोत्कर्ष को पहुंचे गया उसको लगा जैसे उसके शरीर का पूरा खून लंड में आ गया और आखरी कुछ डक्के इतने जोर दार थे की रोमा की हड्डियां भी हिल गई और मयंक का वीर्य भी रोमा की चूत में भरता चला गया मयंक आंनद में जैसे ही रोमा के ऊपर गिरा तभी ..
"ट्रिन ट्रिन "..... लिविंग एरिया में रखे फोन की घंटी बजने लगी ।