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Thriller 100 - Encounter !!!! Journey Of An Innocent Girl (Completed)

nain11ster

Prime
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अध्याय 26 भाग:- 4




नीरू मासी:- हां थोड़ी सी, लेकिन तुझसे नहीं तेरी मां से.. और तेरे बाप को तो कुछ कहने से रही.. वो तो यहां का शेर है..


बेचारी मेरी साक्षी... "नानी मुझे नहीं देखी क्या... सारा प्यार खाली वीडियो कॉल पर दिखाओगी क्या?"


नीरू मासी:- नहीं रे, सच पूछ तो यहां मै सिर्फ तेरे लिए आयी हूं.. जरा इनसे मिल लूं फिर वादे के मुताबिक तू मेरे साथ रहेगी.. मंजूर ना..


नीरू मासी ने जैसे ही कहा, साक्षी मेरे ओर देखने लगी.. मै मुस्कुराकर बस आखों से जैसे ही सहमति दी... "ये है जूनियर कनिका मिश्रा, आंखो से ही समझाने वाली... तेरी बुआ ने हां कह दिया अब तू जरा इंतजार कर मै अपने भाई से बात कर लूं, और इस नालायक उपासना से भी"…


उपासना आंटी:- नीरु दीदी मेरी ही बेटी की शादी है.. मुझे आज तो बख्श दो...


नीरू मासी हंसती हुई... "माफ करना अब ज्यादा हो जाएगा.. एक बार और माफी देर से पहुंचने के लिए.. मै अपनी बेटी की ही शादी में देर हो गई प्राची क्या सोचेगी कि एक तो मेरे पापा की मौसेरी बहन.. ऊपर से रोब झाड़कर आयी और कुछ घंटे रुककर चली गई"…


प्राची:- आप आ तो गई हो अपनी मर्जी से लेकिन अब आप थोड़े ना तय कर सकती है कि जाना कब है..


नीरू मासी:- हां तो कौन तय करेगा...


मै:- कनिका मिश्रा तय करेगी...


नीरू:- तेरी मां को बोल दी हूं रोकना मत, 8 महीने बाद रिटायर हो जाऊंगी, फिर मेरी सेकैंड लाइफ शुरू होगी.. घूमना और मिलना...


राजवीर अंकल:- दीदी चलो आपकी शिकायत हम दूर करते है...


वो सब निकल गए, लेकिन हर्ष वहीं पर खड़ा था... "अब क्या हम कपड़े उतारने लगेंगे तब अक्ल आएगा की यहां से जाना है"…


हर्ष:- ओह सॉरी.. वो उनकी पर्सनैलिटी देखकर सोचने लगा था कि इतनी लंबी औरत भी होती है क्या.. मुझसे भी एक इंच शायद लंबी लग रही थी...


प्राची:- आ बैठ भाई, गप्पे ही लड़ा लेते है..


हर्ष:- हां जा रहा हूं तुम ऐसे ताने तो ना दो...


प्राची:- चल-चल करिया मुझे सब पता है तू यहां क्यों रुकना चाहता है...


मै:- हां तो ठीक है ना.. हर्ष चलो, कुछ बात करनी थी..


हर्ष:- हम्मम ! चलो फिर..


मै हर्ष के साथ 4 कदम चलती हुई कहने लगी… "बेबी हम थोड़ा डिस्टेंस मेंटेन कर सकते है क्या? जबतक हम गांव में है"…


हर्ष:- इक्छा तो मेरी कतई ऐसी नहीं है, लेकिन उस दिन की घटना के बाद मै भी यही सोच रहा था... चिल मेमनी.. और स्माइल प्लीज… हां लेकिन तैयार होने के बाद एक सेल्फी मेरे साथ..


मै:- एक क्या पूरी फोन भर दूंगी.. खुश..


हर्ष:- बेहद खुश...


मै जबतक लौटी, नीरु मासी साक्षी को उसके कपड़े समेत ले गई थी और बोलकर गई की चिंता नहीं करने... हम 3 लोग थे वहां और मेरे पहुंचते ही दोनो मुझे घूरने लगी... "अब इसकी जरूरत है क्या.. कुछ छोटी-छोटी बातें होती है जो आपस की होती है"…


मेरी बात सुनकर दोनो ने अपने एक कदम मेरी ओर बढ़ा दिया.. "हां ठीक है उसे बस कहने गई थी थोड़ी डिस्टेंस मेंटेन कर ले.. अब मिल गई तसल्ली या बुला दूं हर्ष को ही"…


दोनो मुझे देखकर हंसने लगी.. साढ़े 4 बजे तक ब्यूटीशियन भी पहुंच गई थी... एक कमरे के अंदर दूसरा कमरा और अंदर जाकर वो लोग अपना काम करने लगी.. मै और गौरी वहां बैठकर बातें करने लगे...


5 बजे तक वहां कुछ अनजान चेहरों ने दरवाजे पर दस्तक दी, ना तो वो हमे जानती थी और ना मै उन्हे.. उनके पीछे कपिल खड़ा था.. सब को मै अंदर लेकर दरवाजा बंद कर दी.. एक छोटा से परिचय के बाद वो लोग आपस में बात करने लगे और मै गौरी के साथ बातें करने लगी..


उसके कुछ देर बाद ही अन्य ब्यूटीशियन भी वहां पहुंच गई.. वो जैसे ही वहां पहुंची दोनो लड़कियां पहले मै, पहले मै करती हुई वहां पहुंच गई.. उफ्फ क्या टषण था तैयार होने का... वो भी कपड़े पहनने मे जुट गई, और फिर ब्यूटीशियन उन्हे मेकअप करने लगी..


चेहरे पर तो मेकअप पोति ही, साथ ही साथ पेट और अपने सीने पर भी कमाल का मेकअप चढ़वाया था.. तभी उनमें से एक कहने लगी... "शालू आज तो तू एक दम बॉम्ब लग रही है, तुझे देखकर तो आज कोई ना कोई फट ही जाएगा"… "कम कमाल की तो तू भी नहीं लग रही सुप्रिया, लगता है होने वाले जीजाजी तुझे अपना नंबर आज दे ही देंगे"…. "मैंने सुना है जीजाजी की उम्र प्राची दीदी से कम है"… "अरे टीवी पर तो दोनो हम उम्र लग रहे थे..."…. "क्या जमाना आ गया है शालू आजकल लड़के अपनी उम्र छिपा रहे है"…


मै:- गौरी तुझे तैयार नहीं होना क्या?


तभी उनमें से एक लड़की, शालू... "तुम दोनो मे से उस बॉडीगार्ड कपिल की बेटी कौन है"


मै:- जी मै हूं दीदी..


शालू:- चुप कर, कहां से मै तुझे दीदी दिख रही हूं..


जैसी ही वो लड़की ये बात बोली, गौरी की हल्की हंसी निकल गई... उसके साथ वाली लड़की सुप्रिया... " तेरे साथ कौन है"…


मै:- ये भानु काकी की लड़की है गौरी..


सुप्रिया:- भानु कौन...


मै:- यहां जो उपासना चाची के घर में काम करती है...


सुप्रिया:- तुम दोनो ने तो बड़े महंगे कपड़े पहन रखे है.. कहीं चोरी वगैरह तो नहीं करती..


गौरी:- नहीं दीदी ये सब तो राजवीर चाचा ने दिए है...


शालू:- ओय हमे दीदी क्यों कहती है.. कहां से हम तुझे बड़ी लग रही..


गौरी:- छातियों से..


जैसे ही दोनो ने ये सुना हंसती हुई कहने लगी… "चुप कर बदमाश, ये फूफा ने भी अपने नौकरों को सर पर चढ़ा रखा है... अच्छा ये बता कैसी लग रही हूं मै.."


मै:- ये बात किसी लड़के से पूछती तो वो 4 दिन बाद होश मे आता.. हमे तो सुंदर लड़की ही दिख रही.. बाकी आपके रूप का विस्तृत विवरण तो कोई लड़का ही दे सकता है..


सुप्रिया:- स्मार्ट है तू.. मेरे यहां काम करेगी.. 1000 रुपया ज्यादा दूंगी..


गौरी:- दीदी काम क्या करना होगा..


शालू:- अरे दीदी मत बुला, मुझे शालू बुला और दोस्त समझ.. और उसे सुप्रिया बुला..


गौरी:- और शालू और सुप्रिया.. दोनो आज बिल्कुल कड़क दिख रही है...


गौरी की बात सुनकर तो मै भी हंसने लगी.. इतने में प्राची दीदी ब्रा में ही निकल आयी… उन्हे देखकर शालू कहने लगी.. "दीदी, सर के बाल छोड़कर सारे बाल हटवा दिए क्या, बिल्कुल चिकनी लग रही हो"…


प्राची:- तुझे भी करवाना है तो आ जा… वरना आराम से तैयार हो, मै तैयार होकर तुम दोनो से मिलती हूं.. और तुम दोनो (मै और गौरी) जो इस ख्याल मे हो की बैरत देर से आएगी.. तो सुन लो, बारात जलमासे पर लग गई है और 7 बजे दरवाजा लग जाएगा...


मै:- कोई बात नहीं है आप आराम से तैयार हो जाओ, हम भी तैयार हो लेते है...


मै चली गई वाशरूम और नहाकर बाहर निकली.. आकर अपना ड्रेस ली और तैयार होने लगी.. इतने में गौरी भी बाथरूम मे चली गई.. मै बाल ड्राई करने के बाद आराम से अपना लहंगा चोली निकालकर पहनी और एक बार आइने मे देखकर... "कमली (जान पहचान की पार्लर में काम करने वाली लड़की) ड्रेस फिट है"..


कमली:- प्राची दीदी ने मेरे सामने ही तो बुटीक वाली को बोली थी एक इंच ऊपर नीचे हुआ तो तुम्हारी दुकान को ऊपर नीचे कर दूंगी..


तभी वो दोनो चौंकती... "क्या इतनी महंगी ड्रेस इसे गिफ्ट मे मिली है"..


कमली, हमारे खेल मे सामिल होती.… "नहीं मैडम ये डिफेक्ट पीस था... मॉल मे कई दिनों से परा था तो बाबूजी ने इन्हे दिलवा दी"


शादी मे सब लाल रंग ही पहनकर आते, इसलिए मैंने अपने लिए कंट्रास्ट ब्लू लहंगा मगवाया था.. कमली की सीनियर जो खुद को नवसिखिया बताकर वहीं पीछे बैठी थी वो मेरे पास पहुंच गई और पीछे से चोली के धागे को मस्त स्टाइल से बांधने के बाद, वो मेरे आगे के 4 लेटो को कर्ली कर दी. बाल तो अब मैंने परमानेंट छोटे ही कर लिए थे, वो उसी बाल आरा तिरछा करके वो संवारने मे लग गई..


इतने में ही गौरी बाहर निकालकर आयी, और वो भी अपने बाल ड्राई करके अपनी ड्रेस पहन ली. जब हम दोनों पूरी तरह तैयार हो गई फिर मैंने प्राची का अलमारी खोलकर वहां से अपने जेवर के बॉक्स निकाले..


जैसे ही मैंने वो बॉक्स निकला, उन दोनों का मुंह खुला ही रह रह गया.. वो दोनो मुझे टोकती हुई पूछने लगी की मै क्या कर रही हूं.. तब मैंने भी बोल दिया, प्राची दीदी ने मुझे जाने से पहले अपने ये आर्टिफिशियल गहने देकर गई है.. चाहो तो तुम भी इस्तमाल कर सकती हो..


अंदर मेरे जेवर के कलेक्शन देखकर तो दिल उसका भी डोल गया लेकिन जब सुनी की सब आर्टिफिशियल है थी मुंह बनाकर कहने लगी… "नहीं तुम ही पहनो ये आर्टिफिशियल हम तो ओरिजनल गोल्ड से नीचे नहीं पहनते.."


खैर मैंने सबसे पहले गौरी को ही जेवर पहनना शुरू किया.. मैंने बहुत पहले मौसा जी से गौरी के लिए डायमंड सेट मंगवाए थे, लेकिन गौरी के गिफ्ट ना लेने की आदत ने मुझे देने नहीं दिया...


आज मै अपने हाथो से उसे पहना रही थी... दोनो हाथ में हीरे जड़े चूड़ियां, कान के बड़े-बड़े सोने के झुमके, जिसपर छोटे-छोटे हीरे लगे हुए थे.. ऐसे ही गले का भरी हार, जिसकी चेन तो गले से कुछ इंच नीचे थी लेकिन आगे का पुरा जड़ा हुआ सोना नीचे सीने तक आ रहा था और उसमें भी हीरे जरे हुए थे..


पूरे गहने पहनाकर जब मै गौरी को उसके हल्के मेकअप और कंट्रास्ट येलो लहंगा और रेड कॉम्बो चोली में उसे देखी तो बस मुंह से सिटी ही निकली थी...


उसके बाद मैंने भी उतने ही जेवर अपने ऊपर डाले.. और जब मै मुस्कुराती हुई पूछी.. कैसा लग रहा है, गौरी कुछ कहती उससे पहले ही उसके चेहरे के एक्सप्रेशन बता रहे थे कि कैसी लग रही हूं मै.. वो दोनो कजिन तो बस देखती ही रह गई और अंत में मुंह से यही निकला... "मांगे के कपड़े और गहने मे नौकर कहीं से दिख ही नहीं रही है"…


इतने में ही प्राची धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाती हम लोगों के नजदीक पहुंची.. ईशश क्या लग रही थी.. जब हम देखे तो देखते रह गए, फिर तो आज बेचारे मेरे भतीजे का क्या होता.. प्राची दीदी एक नजर उठाकर हम सबको देखी और शिकायती लहजे में बस इतना ही कही... "थोड़ा कम तैयार नहीं ही सकती थी"..


उनकी बात सुनकर मै और गौरी दोनो हंसने लगे.. मै उसके करीब जाकर उन्हें कहने लगी… पहले खुद को देख लेती फिर ये बात कहती, लेकिन कुछ तो कमी है... मै अपने गहने के बॉक्स से अपना वो सबसे प्यार 8 तोले का भारी सा हार निकाल ली..


मै पहले ही घर पर बता चुकी थी की मैंने इसे नकुल के पत्नी के लिए सोच रखा था. और जब मां ने सुना तो मेरे इस हार को मौसा के पास भिजवाकर कुछ रूबी और हीरे का काम ऊपर से करवाकर फिर परिवार की ओर से गिफ्ट किया था..


वो हार वाकई प्राची के ऊपर चार चांद लगा रहा था.. नजरे एक बार देखे तो बस गड़ जाए.. प्राची जब वो हार देखी तो अपनी बड़ी सी आखें किए... "ये तो तेरी फेवरेट है ना"


गौरी:- तो आप कौन सी फेवरेट नहीं हो..


इतने में ही वो दोनो कजिन टपक पड़ी.. "अरे बेवकूफ, जाहिल, गंवार नौकर कहीं के.. करोड़ों की ज्वेलरी पहनी है वो और उसे तुमने अपना वो घटिया सा आर्टिफिशियल हार पहना दिया..


कुछ देर पहले तो प्राची आश्चर्य से आंखें बड़ी की थी, लेकिन अब गुस्से से आखें बड़ी करती वो दोनो को देखने लगी.. इससे पहले कि मामला तुल पकड़ता, मै प्राची की कलाई पकड़कर कहने लगी.. "मै रहूंगी तो कपिल सिंह की बेटी ही ना और ये भानु काकी की बेटी.."


प्राची पुरा मामला भांप गई और कहने लगी... "जिसने इतनी सेवा की है उसका दिल तो रखूंगी ही ना.. मेनका अलमीरा का काम हो गया क्या?"


मै:- हां हो गया..


प्राची:- ठीक है फिर बॉक्स रखो अंदर और लॉक कर दो..


मै लॉक करके जैसे ही फ्री हुई तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.. खोलकर देखी तो हर्ष था.. "दीदी तैयार हो गई क्या"


मै:- हां तैयार हो गई.. क्या हुआ सो बारात कहां पहुंची..


हर्ष:- दरवाजे से 20 कदम दूर है..


मै:- हर्ष सर प्लीज मुझे ले चलो ना.. मुझे नाचना है..


हर्ष मेरी इस विनती पर हंसते हुए कहने लगा… "एक शर्त पर वहां मुझे मत खींच लेना नाचने के लिए, मै लड़की का भाई हूं"…
 

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अध्याय 26 भाग:- 5




प्राची:- ना ना तू तो खींच लेना.. खासकर तब जब नकुल नाचेंगे.. और दोनो के नाचने की तस्वीर चाहिए..


मै:- जैसा आप कहो.. चल गौरी..


सुप्रिया:- प्राची दीदी ये क्या बोल रही हो.. वो गांव की बारात है..


प्राची:- तो क्या हुआ अपने शौक भी ना पूरे करे क्या?


उन दोनों बहनों पर तो झटके पर झटका लग रहा हो जैसे. मै और गौरी जैसे ही जाने को हुए वो दोनो भी जाने को तैयार हो गई.. और यहां प्राची अकेली रह जाती.. मै हर्ष से बोली आंटी को भेज दो इधर, फिर हम चलते है और तबतक मै जरा फोटो-फोटो खेल लेती हूं...


हर्ष:- मेरे साथ चलो पहले, मै औरतों के बीच नहीं जाने वाला.. मम्मी को वहां से लेकर आओ फिर मै चलता हूं..


हां ये भी सही था मै हर्ष के साथ निकली लेकिन जैसे है एक कमरे से दूसरे कमरे के दरवाजे तक पहुंची.. हर्ष मुझे तेजी से अपने कमरे के अंदर खिंचते हुए.. "घबराने की जरूरत नहीं है.. लाइट का फोकस इस कमरे के चारो ओर ऐसा किया है कि 1 फिट दूर से देखा नहीं जा सकता"


मै:- अच्छा जी तो मेरे साथ क्लोज होने के लिए वो भी कमरे के अंदर... इतना बड़ा सेटअप लगाया गया है...


हर्ष:- तुम्हारे लिए नहीं तो क्या शैबा (हर्ष की जूनियर, ऑक्सफोर्ड मे) के लिए लगाऊंगा...


मै:- मुझे क्या पता, चलो हटो, बारात पहुंच जाएगी वरना..


हर्ष:- हुंह !! बारात का ख्याल है मेरा नहीं, ऊपर से तुम इतनी क्यूट और हॉट बनकर क्यों निकली हो.. जानती हो मेरा दिल क्या कर रहा है.. तुम्हारे कमर में हाथ डालकर कदम से कदम मिलाते हुए चलूं और सब लड़के मुझे देखकर जल जाए...


मै:- हर्ष प्लीज चलो ना प्लीज, डर के मारे मेरा कलेजा धक धक कर रहा है...


मेरी बात सुनकर हर्ष मेरे सीने पर अपने कान लगा दिया, मै उसे धक्का देती.. "अपने कान को क्या आला समझ रखा है.. अब चलते हो या मै पूरी शादी यहीं रुक जाऊं"..


मेरी बात सुनकर हर्ष मेरे सीने पर अपने कान लगा दिया, मै उसे धक्का देती.. "अपने कान को क्या आला समझ रखा है.. अब चलते हो या मै पूरी शादी यहीं रुक जाऊं .."


मै हर्ष को हरकाकर जैसे बाएं मुड़कर एक कदम ली, हर्ष ने मेरा हाथ पकड़कर ऐसे खींचा, मै सीधा उसके बाहों में.. उसकी ठंडी हथेली कमर के ठीक हल्का ऊपर थामे हुए थे, और दूसरा हाथ मेरे गर्दन के नीचे..


मेरा आधा बदन हर्ष से लगा हुआ था, और मै ना तो छुटने की कोशिश कर रही थी और ना ही रुकने की... मेरे भी तो साजन थे, भला मुझे कैसे ना प्यार आता... "हर्ष, चलो ना.. शादी का माहौल है"…


हर्ष मेरी बात सुनकर मुस्कुराया और आहिस्ते से अपने होंठ मेरे होंठ के ओर बढ़ा दिए... मध्यम सी श्वानसे चल रही थी और अंदर का गुदगुदा एहसास अपने जोड़ों पर.. मेरी पलकें बंद होती चली गई...


शुखे होंठ पर जीभ टकराकर गीला कर देते और फिर उसे खींचकर चूमने का एहसास ही एक उन्मोदक क्षण है, जो प्यार से लेकर व्यभिचार तक, हर कोई इजहार जताने के लिए होठों से ही शुरू करता है...


मुझे भी डूबना था लेकिन मै ही डूब गई तो फिर हर्ष को कौन संभालता.. मै अपने खुशी के पल से सर को कुछ इंच पीछे लेकर, लरजती आवाज में कहने लगी... "अब अगर यहां से नहीं गए तो चाहे आंधी आए या तूफान फिर मै इस कमरे से नहीं निकलूंगी"..


मै बोल ही रही थी और मेरे मोबाइल की घंटी बजने लगी, गौरी का कॉल था, हमे बता रही थी उपासना आंटी आ गई है... मै हर्ष के पूरे चेहरे पर एक बार हाथ फेरती हुई कहने लगी.. "चले डॉक्टर बाबू"…


प्यारी सी हंसी थी उसकी, हम दोनों बाहर आकर जैसे ही कमरे तक पहुंचे, प्राची मुझे अंदर बुलाकर धीमे से पूछ ली... "किस्स या स्मूच".. "धत बेशर्म, सच ही भाभी कहती है.. लड़की की जब शादी होती है, जुबान से लाज की द्वार हट जाती है"…


मै भी धीमे से कहती हुई वहां से तेजी से निकली.. बारात दरवाजे से 10 कदम की दूरी पर नाच रही थी और मै यहां क्या कर रही हूं... मै भी चली, गौरी मेरी चाल और खुशी को देखकर कहने लगी.. "अरे कहां पवन बसंती की तरह लहरा रही है"…


"जीजाजी तैयार हुए है ना.. पहले मै नचा लूं, फिर बाद में सारी उम्र तो प्राची दीदी ही नचाएगी"… मेरे पीछे साक्षी भी तेजी सी आयी, थोड़ी कंफ्यूज थी, मैंने धीमे से समझाते हुई चली.. "पीछे 2 लड़की के साथ हम नाटक कर रहे, साथ देना"..


साक्षी, प्यारा सा चेहरा बनाती, जरूर दीदी, हमेशा साथ हूं.. और हम दोनों आगे-आगे लहराते हुए, दरवाजे की भिड़ को किनारे करते हुए, आगे बढ़ने लगे. दरवाजा मैनेजमेंट पुरा कपिल का था, उसने हम तीनों को तो जाने दिया, लेकिन दोनो कजिन को दरवाजे पर ही रोकते, बारात में जाने से मना कर दिया... "कपिल भैया बहन की शादी में इतनी सजी है, मै अपनी जिम्मेदारी पर तो ले ही जा सकती हूं"..


मेरी तेज आवाज सुनकर उन्होंने दोनो का रास्ता छोड़ दिया. मै पहुंच चुकी थी और पुरा भिड़ खड़ा था बीच में हमारे भाईयो की टोली नाच रही थी और आगे आतिशबाजि.


मै बैंड वाले की गाड़ी से माईक उठाई और कहने लगी.. "चलो सब रास्ता दे दो जरा… सब नाच रहे और भतीजे को कार में छोड़ दिया"… मै पहुंच गई कार के दरवाजे पर, नकुल को बाहर निकली और हाथ पकड़ कर बीच मे लाई..


फिर बजा गाना और हमारा देशी ठुमका लगना.. मेरे साथ गौरी और साक्षी भी सामिल हुई.. मनीष भईया और महेश भईया.. साथ में मेरे तीसरे चौथे घर से भी भाईयो की टोली.. वरुण भईया, ऊपर से हमारे कुछ पिताजी के जेनरेशन के लोग भी तो थे जो नाचने का आंनद उठाते थे..


मै तो सबको घूरती और जो नहीं आते उन्हे इशारों ने कट्टी कर लेती, बेचारे हारकर आते ही.. सबसे ज्यादा मजा वैसे नकुल, गौरी, साक्षी और मनीष भईया के साथ ग्रुप डांस मे आया था... हम पांचों ने जब नाचना शुरू किया था तब लगभग पुरा गांव हूटिंग कर रहा था...


हम बारात के साथ बिल्कुल मुख्य द्वार तक पहुंच चुके थे और नकुल को सब कार में बैठने की हिदायत दे रहे थे.. मेरी नजर घूमकर उन दोनों कजिन शालू और सुप्रिया पर गई जिसके साथ हर्ष खड़ा था, मै चिल्लाकर बोली सब लोग जगह दे दो और कोई बीच मे नहीं कूदना.. जीजा के साथ नाचने साले और सलियो की टोली आयी है...


वो तीनो भी पहुंचे.. उफ्फ क्या ठुमके लगा रही थी दोनो बहन... शकीरा का डांस जैसे देखकर आयी हो.. अब मै क्या कहूंगी सबको किनारे होने, यहां तो हर कोई किनारे होकर उन्ही दोनो कजिन का डांस देख रहे थे, जो अपने होने वाले जीजा को बीच में लिए नाच रही थी और शादी को पूरा दिल से कैसे एन्जॉय करना कहते है, वो सीखा रही थी..


हां दोनो के व्यवहार में तो कहीं से भी कुछ ऐसा नहीं था जो कहा जा सके की अकडू और घमंडी है.. फिर बारी आयी जीजा साले की, हर्ष नकुल के गले लग गया.. दोनो कद कठी मे लगभग समान ही थे.. दोनो सांवले सलोने और द्वार पर जब मिले तो लगा ही नहीं की जीजा साला मिल रहे ऐसा लग रहा था 2 पुराने दोस्त मिल रहे थे...


कुछ देर बाद नकुल कार में चला गया और मेरी नजर राजवीर अंकल और कपिल पर थी.. दोनो के बेटी की शादी थी, ये लोग तो तैयारियों मे ही इतना व्यस्त रहते होंगे की नाचने का मौका कहां, ऊपर से थोड़ी प्रतिष्ठा भी होती है, जब तक कोई खींचे ना कैसे चले जाते.. तो वो खींचने का काम मैंने कर दिया...


इधर से होने वाले 2 समधी को और उधर से होने वाले 5 समधी को और फिर तो "पापा डांस" शुरू हो गया.. ईईईईईईई ये बड़े लोग.. बच्चे तो लोक लाज के चलते छुपाकर लिए थे. लेकिन ये लोग तो डांस मे ही शुरू हो गए.. गाना का मूड शराबियों वाला था और खाली आधा इंच कमर डुलाकर 1 पेग गटक रहे थे, जबकि बिहार में लगा था दारू पर प्रतिबंध और यहां थालियों में सर्व कि जा रहा था..


समधी मिलन का वक्त हो चला था इसलिए मै जितने लोगो के साथ गई, उतने लोगो के साथ वापस आ गई.. वापस जब पहुंची तो पूरी लेडीज मंडली ग्राउंड फ्लोर से पहले फ्लोर पर शिफ्ट कर गई थी, जहां ऊपर से वो लोग बाहर के डांस का लुफ़्त उठा रही थी..


मै उनके बीच जैसे ही पहुंची सबकी हूटिंग शुरू.. मै भी क्यों पीछे रहती, हर्ष को भी साथ खींच ली और दरवाजे से ही अमिताभ देखा ना है रे वाला हाथ का स्टाइल पोज से आगे बढ़ने लगी..


प्राची ने भी तुरंत वहां म्यूज़िक चला दिया.. हंगामे ही हंगामे और डांस ही डांस.. दोनो कजिन अंत में आकर कह ही दी... "तुम हो कौन और शुरू से कौन सा सस्पेंस बनाकर चल रही"…


गौरी ने फिर हंसते हुए सब कहानी जब बताई वो दोनो छोटा सा मुंह बनाती हुई कहने लगी... "अच्छा मज़ाक था, लेकिन हमारा पोपट हो गया.. वैसे इरादे नौकर जताने के तो तब भी ना थे लेकिन जो भी 1,2 बार निकला वो चिढ़ के कारन निकला था इसलिए दिल से माफी मांगती हूं"..


इतनी अच्छी बहने थी, माफी किस बात कि.. सब साथ में ही एन्जॉय करेंगे.. हां लेकिन आगे की कहानी में प्रैंक मेरे साथ हो गया, जयमाला स्टेज पर.. प्राची आंख दिखाती अपने ओर आने कहती और नकुल अपने ओर.. ये भी नहीं की इशारों में बुलाया, जोर से कह रहे थे.. इधर आओ..


अंत में हारकर मै ही बीच में बैठ गई... "दोनो चुपचाप जयमाला करो शादी करो, ये मुझे क्यों इधर आ, इधर आ कर रहे"… सहनाइयों और हंसी खुशी के बीच जयमाला की रश्म निभाई जा चुकी थी..


अब ना कोई इधर का रिश्ता ना कोई उधर का रिश्ता, जयमाला के बाद बचे कुछ खास लोग और अपने भाईयो के मंडली मे मै, गौरी और साक्षी बैठकर पुरा पंचायत कर रही थी... बीती शादियों के किस्से करने लगे... नकुल बेचारा ऐसा दूल्हा था जिसके कोई दोस्त नहीं होने की स्थिति में अपने मौसेरी बहन संगीता और जीजू के साथ एक किनारे बैठा था...


उसका चेहरा बता रहा था कि वो हमारे बीच आने के लिए मरा जा रहा है, लेकिन दुविधा थी वो आ नहीं सकता था.. वही फिर घूमते फिरते नीरू मासी भी पहुंच गई और मेरे भाइयों की बड़ी से महफिल ज्वाइन करती हुई कहने लगी.… "बाकी सारी लड़कियां अपने भाई को छोड़कर दुल्हन या लड़कियों के साथ शादी का आंनद ले रही है और तू अपने भाइयों को पकड़ कर बैठी है"..


तभी मनीष भईया खड़े होते हुए नीरू मौसी का हाथ पकड़कर कहने लगे.… "एक ओर पोता है दूसरे ओर भतीजी, फिर नाचना नहीं हुआ तो शर्म आनि चाहिए आपको.." नीरु मासी भी कहां पीछे हटने वाली थी.. उन्होंने मनीष भईया के है कमर ने हाथ डालकर खीच लिया... और हाथ से हाथ मिलाकर वो पार्टी डांस जो करते है उसे देशी स्टाइल में करने लगी...


"बिटवा, नाचती तो तेरी मासी कविता थी, वो यहां होती ना तो तुम जवानों की बोलती बंद हो जाती".. दोनो नाच भी रहे थे और पुरानी बातें.. और उनका विदेशी पार्टी डांस देशी स्टाइल में देखकर लोग हंस-हंस कर पागल हुए जा रहे थे.. कुछ देर नाचकर नीरू मासी हमारे बीच ही बैठी और पुराने दिनों के किससे शुरू हो गए..


पोल खोलने में तो ये मेरी मां से भी एक कदम आगे थी.. हां ये सच है कि हम पहली बार मिल रहे थे लेकिन मेरी मां और इनकी बात रोजाना होती थी... पहले लेटर बॉक्स के जरिए, जिसको मां ने बड़े प्यार से संजो कर रखा है और आज भी पढ़ती है...


याद रखने के लिए लेटर नंबर सिस्टम भी ईजाद किया था.. बाद में लैंडलाइन, फिर मोबाइल और जब से वीडियो कॉलिंग सुविधा हुई दोनो सखी को फिर एहसास ही नहीं हुआ की कहीं दूर बैठे है...


मेरी मां ने अपनी रिटायरमेंट योजना मुझे बता चुकी थी, मेरी शादी और नीरू मासी जब अपने ऑफिस से रिटायर होती, फिर इनके अपने है प्लान थे सेकंड लाइफ के.. पूरी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद एक और जिंदगी..


नीरू मासी ही कहती थी.. पुराने समय में बहुत कुछ जीना रह गया था, एक बार फिर से जीना शुरू करेंगे.. जिंदा इंसान है मेरी मां और नीरू मासी, जिनके शरीर भले थोड़े थक जाए उम्र की वजह से, लेकिन उत्साह कभी नहीं थका..


खैर महफिल सजी थी दूल्हा-दुल्हन भी मंडप मे बैठे थे, लेकिन तभी साक्षी का संदेश आया कि नकुल भईया सबको वहीं बुला रहे.. आप लोग यहां महफिल जमाए हो और वो वहां बेचारे अकेले.. अच्छा नहीं लग रहा..


मनीष भईया ने जवाब देते कहा कि बेटा उन्हे बोल चुपचाप शादी करे, दिमाग ना दौराए.. बिफर उठी मेरी लाडली और उंगली दिखाती हुई कहने लगी... "चुप चाप सब चलो वरना घर पर मेरा ड्रामा शुरू होगा"..


उसे सुनकर तो हम सब भी हसने लगे... मेरी भतीजी थी तो नकुल की वो पक्की चेली.. जबसे सोभा भाभी वापस लौटी थी, नकुल के देख रेख मे ही तो वो पल रही थी, उसके लिए तो आज अपने छोटे पापा को भी उंगली दिखाकर वार्निग दे दी.. घर की पहली संतान, हम सब की लाडली..


पूरी महफिल फिर मंडप के ही पास जमी.. छेड़छाड़ और हंसी मज़ाक के बीच पुरा विवाह का समापन हुआ.. विदाई और रोने की एक बहुप्रचित रश्म के बाद प्राची अपने ससुराल में थी और आगे के करक्रम की तैयारियां शुरू थी..


शादी के 3 दिन बाद मै दिल्ली वापस लौट रही थी, क्योंकि कॉलेज में कुछ सेमिनार और ऐनुअल फंक्शन्स का आयोजन होना था.. मेरी इक्छा तो नहीं थी अभी गांव से जाने की लेकिन मुझे आना परा...
 

ragish7357

MaSooM ReAdeR
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behatrin update bro..............shadi ka time aa gya.................or ye shakshi to bdi khatarnak hoti ja rhi h................gauri bhi phle to km boilti thi aajkl to wo bhi full mood m h...............
 

SHADOW KING

Supreme
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32,853
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अध्याय 26 भाग:- 2




मै:- ओके बहना.. वैसे मै समझ गई क्या करना चाह रही हो तुम...


गौरी:- कम से कम हम तुम अपने सहर के इतने असहाय की तो मदद कर ही सकते है... बाकी अगर हम जैसे कुछ लोग अपने अपने सहर मे खड़े हो गए तो कम से कम वो लोग जो जिंदगी भर जूझते रहे है, अंतिम वक्त मे कुछ सुकून तो बटोरकर अलविदा कहेंगे दुनिया को..


मै, गहरी श्वांस लेती... "मै अपनी बेटी को हर 3 महीने तेरे पास भेजूंगी, ताकि वो तेरी छाया बने".


गौरी:- क्यों बेटे को भेजने में कोई बुराई है.. कॉपी केट.. मै अपनी बेटी भेजूंगी तो तू भी बेटी ही भेज..


तभी बाहर से चिल्लाने की आवाज आयी.. "मेनका, गौरी.. मेनका, गौरी"… ये बड़ी मामी और ममेरे बड़े भैया चंचल की आवाज थी... दोनो चिल्लाए हम दोनों भागते हुए पहुंचे...


चंचल भईया काफी गुस्से में दिख रहे थे, और हमने जब उनका गुस्से से लालम लाल चेहरा देखा तो हंसी निकल आयी… झल्लाते हुए वो कहने लगे, ये सब क्या तरीका है, दरवाजे पर इतने भिकड़ी को ले आयी.. ऊपर से लड़की वाले आने वाले है.. कुछ भी करते रहती है"…


ओह शायद याद हो की ना, ये चंचल भईया, रूपाली दीदी से ठीक बड़े भाई और अपनी शादी होने का इंतजार कर रहे थे... बेचारे के साथ तो हमने कांड कर दिया। शायद लड़की वालों का ट्रेन लेट था इसलिए 6 या 7 बजे तक पहुंचते.. तभी कहुं की आज सरा इलाका इतना चकाचक क्यों है..


मै इन्हीं सब बातो को सोच रही थी कि तभी चंचल भईया ने एक वृद्ध पर झुंझलाकर जोड़ से बोल दिया.... खैर यह एक आम इंसान भावना थी. आप जब स्क्रीन पर ऐसे मार्मिक दृश्य देखते है या फिर कहीं कहानी मे पढ़ते है, तो लगता है कोई इनके साथ बुरा बर्ताव कर रहा है मतलब वो भी बिल्कुल बुरा होगा.. वैसे उनका चित्रण भी वैसा ही किया जाता है उन सब जगहों मे..


लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि हम सब किसी को एक 2 रुपया देकर पुण्य कमा लेते है और बाकियों को झुझकार देते है, क्योंकि अपनी हैसियत होती नहीं की सबके लिए कर सके और उनके मार्मिक लक्षण हमे विचलित कर जाते है, ऐसे में एक ही इंसानी भावना बाहर आती है वो है द्वेष और चिढ़ना..


फिलहाल मै तो इसे सामान्य रूप से ही देख रही थी, लेकिन आज तक कभी ऐसा रिकॉर्ड नहीं हुआ था कि गौरी पर कोई चिल्लाया हो.. आपको लगता है कि वो चिल्लाने लयाल कोई काम भी की होगी.. ज्यादातर घर में रहना और हमेशा दूसरों के प्रति दया दिखाना...


खैर गौरी का पुरा चेहरा उतर गया जो मुझसे बर्दास्त नहीं होना था... मै गौरी का हाथ थाम ली और बड़ी मामी से कहने लगी... "जहां से लेकर आए थे वहां छोड़ने जा रहे है"… हम दोनों जब वापस जा रहे थे तो छोटी मामी का उत्र चेहरा हम दोनों ने देखा जो अपनी जेठानी को कुछ भी जवाब देने में असमर्थ थी...


यहां की घटना में शुक्र है मेरे परिवार से या मेरे किसी मामा ने चंचल भईया को चिल्लाते हुए नहीं सुना वरना बेचारे की क्लास वहीं लग जाती...


मै उन सब वृद्ध को बस मे बिठाकर शहर के एक होटल में शिफ्ट करवा दी.. रास्ते में गौरी ने पूछा कि 7 करोड़ से 100 लोगों की देख रेख की जा सकती है.. मै उसके प्रस्ताव से खुश थी.. क्योंकि 7 करोड़ काफी थे उन्हे रहने से खाने तक सरा कुछ देखने के लिए…


फिर मैंने इन्वेस्टमेंट समझाया कि सहर मे कोई पुराना होटल होगा जो बनाया तो गया होगा लेकिन चलता नहीं होगा.. उसे हम आराम से कम लागत मे खरीद सकते है.. हफ्ते भर में उसे ठीक करवाकर उन 100 लोगों के लिए तुरंत ही रहने का इंतज़ाम हो जाएगा, इसमें करीब 2 करोड़ खर्च होंगे..


बचे 5 करोड़ बैंक को देंगे जो सालाना हमे लगभग 9 परसेंट का ब्याज देगा... जो की 45 लाख रुपया होता है.. अगर उसको 12 महीने से बांटे तो हुए 3 लाख 75 हजार.. 150 लोगों को इससे हम हर महीने खिलाने से लेकर मेडिकल तक देख सकते है... साथ मे 4 आदमी को साफ सफाई और देखभाल के लिए भी स्थाई रूप से रख सकते है...


गौरी:- पैसों के मामले में तुम्हारा दिमाग क्या तेज भागता है... चलो फिर इसिपर अमल करते है..


शाम हो गई तो उन वृद्ध को हमने वही एक होटल में आसरा दिया और अगले 1 हफ्ते में चुपके से ये सारा काम भी करवा चुके थे, बिना किसी जानकारी के.. मै बता नहीं सकती गौरी कितनी खुश थी.. और उसे खुश देखकर मै कितनी संतुष्ट थी..


कभी-कभी उसका चेहरा देखते हुए अचानक ही आशु भी छलक आते थे.. जिंदगी के शुरवात मे ही, इतनी प्यारी और दयालु लड़की के साथ किसी ने छल लिया.. मेरा तो सोचकर ही आज भी खून खौल जाता है.. बहरहाल वो सामान्य थी जैसा वो पहले हुआ करती थी, मेरी लिए इससे ज्यादा खुशी की और बात क्या हो सकती थी..


हां लेकिन इन एक हफ्तों में मैंने एक बार भी हर्ष से बात नहीं की थी.. थोड़ा बहुत टेक्स्ट-टेक्स्ट खेल लेती, लेकिन मै कुछ वक्त पूर्ण रूप से गौरी को देना चाहती थी इसलिए गांव में सबके साथ हूं ऐसा बहाना चल रहा था...


14 दिसंबर, शादी से 4 दिन पहले का वक्त.. मेरी और साक्षी की बहुत ही तीखी बहस चल रही थी... बहस इतनी सी बात पर की उसे मेरे साथ दिल्ली जाना था और मै उसे मार्च के बाद जहां चलना हो वहां चलने कह रही थी..


बस मेरी छुटकी लाडली इस बात पर मुझ पर पूरा भड़की हुई थी.. उलहाना और एक-एक बात तो वो उंगली पर गिना रही थी और मै हंसकर उसकी बातों का बस विरोध कर रही थी..


मै हंसती तो वो और भी ज्यादा चिढ़ जाती.. इतने गुस्से में थी कि मै उसे मनाने के लिए अपनी गले की चेन उसे पहना रही थी तो उसने झटक कर फेंक दिया.. वक्त लगा लेकिन उस मैंने किसी तरह मना ही लिया था...


तय यह हुआ कि मार्च बाद जब उसके 5th स्टैंडर्ड के एग्जाम खत्म हो जाएंगे तब मै उसे दिल्ली और बंगलौर घूमाने ले जाऊंगी.. हालांकि उसने तो अपने किताब के चारो महानगर के नाम गिनवा दिए थे.. जिसमे से मैंने कोलकाता और मुंबई के लिए फिर कभी कह दिया..


यहां मेरे और साक्षी के बीच द्वंद छिड़ा था और इस गौरी की बच्ची ने मेरे मोबाइल पर हर्ष के आए टेक्स्ट का रिप्लाइ कर दिया और 1 घंटा तक चिपकी रही टाइपिंग में... उल्टा इधर से ही लिख दी कॉल करो ना, प्लीज..


मै जब साक्षी से फुर्सत हुई और अपने फोन पर गौरी को किसी से बात करते हुए देखी तो पूछ बैठी किसका फोन है.. झल्ली को ध्यान ना रहा की वो आंगन में है और दूसरे लोग भी यहीं बैठे है.. जोर से कह दी... "जीजाजी से बात कर रही हूं"…


मेरी आंखें बड़ी हो गई.. हर कोई हैरानी से मुझे ही देख रहे थे तभी मां ने गौरी के हाथ से फोन छीनकर जैसे ही हेल्लो की, उधर से नकुल की आवाज आयी… "हां दादी... क्या हुआ"…


मां:- गौरी से तू क्या कह रहा था..


नकुल:- दादी मै कह रहा था कि प्राची शादी का जोड़ा शॉपिंग करना चाहती है तो उसी के साथ गौरी और मेनका भी चली आती और...


मां:- तेरी बीवी को बोल वो खुद शॉपिंग करे, मेरी बेटियां पहले से शॉपिंग कर चुकी है.. चल रख फोन और वापस आ जलदी... शादी को 4 दिन है और सहर जाकर शॉपिंग कर रहा है या अपनी बीवी को करवा रहा, मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा...


बहरहाल अभी मै ओवर रिएक्ट नहीं कर सकती थी, लेकिन मां को बहलाकर, मै, गौरी के साथ सहर के लिए निकली.. जैसे ही कार अपनी गली से बाहर गांव के सड़क पर गई.. सामने से दीप्ति हाथ हिलाती... "तेरे पास ही आ रही थी जल्दी चल"…. दीप्ति थोड़ी हड़बड़ाई और थोड़ी परेशान से दिख रही थी...


"हिहिहि.. बचा लिया दीप्ति ने.. वरना आज क्लास लगती"… गौरी हंसकर अपनी प्रतिक्रिया दी और दीप्ति पीछे बैठ गई... "क्या हुआ इतनी हड़बड़ी में..."


दीप्ति:- गाड़ी पहले मेरे घर के सामने लगा...


मैंने गाड़ी लगा दी.. दीप्ति की मां और दीप्ति जल्दी-जल्दी पीछे सामान रखने लगी.. पूछने पर पता चला कि पुष्पा कि डिलीवरी हो गई है.. यहां कोई है नहीं सब पता ना जरूरत के वक्त कहां निकल गए इसलिए दीप्ति को तेरे यहां ही भेजी थी.. चल बेटा जल्दी..


मै भी कार को भगाई, उन्हे हॉस्पिटल ड्रॉप किया.. आयी थी तो मैं भी भी पुष्पा दीदी से मिल ली.. बड़ा ही गोल मटोल क्यूट बेबी था, मै अपने गले की चैन जिसे साक्षी ने लेने से इंकार कर दिया था, उसे पहली मुलाकात के भेंट स्वरूप दे दी...


मेरे पीछे गौरी खड़ी थी, थोड़े से परिचय के बाद वो हिचकती हुई पूछने लगी, क्या मै बेबी को गोद में ले सकती हूं... बड़ी ही मासूम सी अर्जी थी, लेकिन अभी कुछ ही घंटे हुए थे इसलिए सब थोड़े मजबूर दिखे. पर बेबी की नानी, यानी की पुष्पा दीदी कि मां ने, गौरी को पलथी लगाकर बैठने बोली.. वो टॉवेल से लिपटे हुए बेबी को उठाकर गौरी की गोद में रखती हुई कहने लगी...


"तेरी (पुष्पा दीदी) डिलीवरी तो दाई करवाकर गई थी और 1 घंटे बाद तो तेरे बाबूजी ने तुझे पुरा घर घुमा दिया था... कितनी अरमान से वो मांग रही थी गोद में लेने और तुम लोगों को बस डॉक्टर की परी है... तेरा भांजा हुआ बेटा, अच्छे से इसे आशीर्वाद दे.. खूब तरक्की करे और सबका ख्याल रखे"…


पुष्पा दीदी कि मां डॉयलॉग दे रही थी और मेरी बहना उसे गोद में जैसे ही ली, उस बेबी का मासूम सा फेस देखकर भावना से उसके आशु चलने लगे... कुछ देर बाद हम वहां से निकल गए...


गौरी जैसे ही अकेली हुई मै उसे घूरती हुई पूछने लगी, मुझे फसाने के इरादे तो नहीं थे.. वो भी थोड़ी मजाकिया होती हुई कहने लगी... "तुम दोनो की शादी में मुझे ही तो ड्रामे करने होंगे.. तेरा लाडला तो 4 दिन बाद हो जाएगा पराया"..


मै:- हीहिहिहिहिहि… अरे वो तू अपनी दादी वाला डॉयलॉग तो बोल, जो वो मौसा के लिए कहती थी..


गौरी:- अचरा के हवा लागे त सब पराया हो जाए आ खाली पत्नी पियागर लगे.… (आंचल का जब हवा लगता है तो जग पराया और केवल पत्नी प्यारी हो जाती है)..


पुराना एपिक डॉयलॉग पर हम दोनों हंस रहे थे और पहुंच चुके थे हम 82 वृद्धों के सराय में.. जहां मेरे डॉक्टर बाबू पिछले 3 दिन से सबको दिल लगाकर चेक कर रहे थे और जिस काम के लिए डॉक्टर बने थे उसका पूरा लाभ लोगों की मिल रहा था, बिना किसी सिकायत के...


"निर्दई मेनका मिश्रा, पैसे बचाने के लिए अपने ही होने वाले से मजदूर टाइप मेहनत करवा रही है"… गौरी हर्ष को चेकअप करते देख कहने लगी...


मै:- उसने खुद ही ये इक्छा जाहिर की थी, वैसे भी 82 मरीज की ओपीडी वो 3 दिन मे ले रहा है.. बड़ा स्लो डॉक्टर है... गुप्ता जी तो 2 घंटे में 150 मरीज देखकर फुरसत हो जाते है...


गौरी मेरे सर पर मारती... "वो सर्दी बुखार देखते है और ये हड्डी, कुछ तो अंतर होगा ना"…


"दोनो वहीं खड़े मेरे बारे में बात कर रही हो क्या"… हर्ष हमारी ओर देखकर हंसते हुए कहने लगा.. मै मुस्कुराती हुई हर्ष के पास गई और गौरी सब लोगों के बीच पहुंचकर उनका हाल लेने लगी..


दिन व दिन इन बुड्ढे लोगो की डिमांड तो बढ़ती जा रही थी.. किसी को कुछ खाना था तो किसी को अपना मोबाइल चाहिए था, तो किसी को खुद के कमरे में टीवी, तो कोई अपना रूम पार्टनर बदलना चाहता था..


इतना सब कम था जो एक बूढ़े और बूढ़ी ने तो आपस में शादी की मांग कर दी.. वो भी बैंड बजा वाली, मै और गौरी तो उनको सुनकर हंस-हंस कर पागल हो गई.. हम तीनो को ही उनमें कोई बूढ़ा नहीं, बल्कि सब के सब साक्षी नजर आ रहे थे.. 10-11 साल के शरारती बच्चे..
nice update ..chanchal bhaiya ki shadi karne ki jaldi hai aur aaj ladki wale aa rahe hai isliye saare budhe logo ko dekhke naraj ho gaye aur menka par chillaye 😔..
aur ye gauri nakul se baat kar rahi thi aur boli jeeja se baat kar rahi hai 😁 mujhe laga aaj menka ka bhanda fut jayega ..
budhe logo ki demand badh rahi hai dekhte hai kaise poori karti hai menka aur gauri 🤔🤔🤔..
waise paise bank me rakhkar byaj lene ka idea sahi hai aur menka ka calculation bhi ki kaise paise kaam me laaye ..
 

nain11ster

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dhamakedar update 😍😍😍..aise hi badlaa liya jaata hai 😁😁..
dobara kangal ho gayi madhvi aur ab usko yaad aa raha hai ki wo rajveer ki badi behan hai aur apne bhanje ko daant sakti hai ..
par jail bhejna kaha ka sahi hai ..
ekdam sahi kiya rajveer ne madhvi ke saath 🤩🤩🤩..

harsh ka oxford me admission karana rajveer ko laga kahi delhi tak hi jana hai par wo to london me hai 🤣🤣..

Hahahaha ... Ise kahte hain jaise ko taisa aur usi ke bhasha me upchar ... Kyon pasnd aaya na Leon bhai...

Aur ye ho jata hai .. Oxford ke sath aksar ... Kyonki india me bhi to Oxford ke kayi branches khule huye hai na :laughing:
 

nain11ster

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nice update ..pehla wala gana bahut mast tha 😍😍..
to prachi ko nakul pasand aaya sangeeta ki shadi me jab usne rutu aur nakul ko saath dekha to chidh gayi thi aur nakul ko thappad bhi maar diya ..
na caste same hai aur nakul umr me 5 saal chhota tab bhi pyar kar baithi 🤩..
dekhte hai inka rishta kitna aage jaata hai ,,shadi hoti hai ya nahi ..
Aapne ek baat chhod diya likhna ... Inhi dono ke liye serial bhi bana hua tha... Ye rishta kya kahlata hai :D
 

nain11ster

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romantic update ...prachi aur nakul ne bathroom me sex kiya ..par ghar ka darwaja khula chhod diya tha jiski wajah se kaamwali ko inki raasleela ka pata chal gaya aur wo hans rahi hai 😁😁..
Hahahaha ... Ho jata hai kabhi kabhi log excited hokar aisi galti kar dete hai... Moral of the story is ghar ka door auto lock oar rakhe... Piche se jhatke se ek paun maara aur ghar lock :D
 

nain11ster

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nice update ..nakul ne menka ko kya batana hai aur kab ye sab sochke rakha tha ..

aur ye bua saasu shabd padhke ek kahani yaad aa gayi usme wo ladki bhi yahi bolti thi 🤩..

nakul achche se samajhata hai prachi ko aur wo usiki baat sunkar apne ghar gayi ..dono perfect match hai bhale umr me farak hai ..

Hahahaha... Koi nahi dono samjhte hai to dono ki shadi aapke aashirwad ke sath karwa rahe hain ... Var Vadhu ko dhudho nahao puto falo ka aashirwad de dijiyega :D
 

nain11ster

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nice update ..upasna menka ko apni bahu banane ka soch rahi hai par caste alag hai ..aur prachi ke liye apni hi caste ka ladka dhundkar rakha hai aur nakul ka matter jab prachi ne chheda to prachi ko keh dala ki uski shadi apne caste me hi hogi .
ab prachi nakul se dur rehne ka soch rahi hai ,par dekhte hai kitne waqt tak 🤔🤔..
Dekhiye bhi aur samjha bhi dijiye ki aisa na kare bechare ka dil toot jayega :D
 
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