अध्याय 18 भाग:- 3
1,2,3,4,5 सीढ़ियां चढ़ते मै स्टेज पर पहुंची और जैसे ही मै स्टेज पर पहुंची चारो ओर उजाला ही उजाला.. ऊपर से फुल, वो चमकने कुछ सिल्वर लाल गुलाबी पेपर, लगातार बरसते ही रहे...
मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरा रिजल्ट आ गया है.. सभी मेरे करीब ही थे मुझे घेरे... और मै सबके पाऊं छूने लगी.. लेकिन हर कोई मुझे गले लगाकर बस मेरे सर पर हाथ फेर रहे थे...
सब इतने खुश थे कि उन्हें खुश देखकर मेरी आंखें भर आयी.. वो जो राजवीर अंकल ने बताया था.. गौरव करने वाले क्षण, सब अभी वही मेहसूस कर रहे थे.. तभी टीवी ऑन किया गया.. भारत में रात के 12 बजे से ऊपर हो गए थे और नेशनल न्यूज पर आंनद जीजू और मुक्ता दीदी का इंटरव्यू आ रहा था..
दोनो मेरे बारे में बोल रहे थे... वो लोग भी काफी खुश थे.. फिर दिखे हमारे क्षेत्र के नए विधायक वरुण मिश्रा, बोलते-बोलते उनके आखों में आशु आ गए. दिल्ली से हमारे सांसद लियाकत अली भी मेरे लिए बोले.. मेरे घर के सारे लोग उन्हे सुनकर भाव विभोर हो गए...
तभी होटल वाला एक फोन लेकर देते हुए हमे कहने लगा इंडिया से फोन है.. फोन पर मुक्ता दीदी थी जिन्होंने लंदन रिजॉर्ट मे फोन करके पता लगवाया की हम कहां है...
मुझे बधाइयां देती हुई कहने लगी… "फीलिंग प्राउड, अब जल्दी से एक बार अपने सहर और गांव आओ, बहुत से लोग तुम्हे मिस कर रहे है"..
मैंने भी कह दिया बस एडमिशन करवाकर आती हूं वहां.. इससे ज्यादा मुझसे बोला नहीं गया.. मुक्ता दीदी भी कुछ देर पापा से बात करने के बाद फोन रख दी..
इस भावुक क्षण से निकलने मे हमे कुछ वक्त लग गया.. जब सब नॉर्मल हुआ, तब बात होने लगी कि काउंसलिंग कल से शुरू हो जाएगी और एडमिशन तो टॉप आईसीएसआई (ICAI) के कॉलेज में ही चाहिए..
मै सबका मन सुबह ही पढ़ चुकी थी और मै नहीं चाहती थी कि उनका यूरोप टूर बर्बाद हो, पता ना फिर ये बाल बच्चो वाले इंसान, दोबारा यहां आए की ना आए.. भरी सभा में मै खड़ी होती.…
"हेल्लो, हेल्लो, हेल्लो.. सब यहां ध्यान देंगे... मै गांव से पढ़ी, और अपने छोटे से सहर मे कोचिंग लेकर मैंने टॉप किया. सीए की पढ़ाई मै किसी भी इंस्टीट्यूट से कर सकती हूं. कॉलेज टॉप का हो या बॉटम का, सेलेब्स सबका एक जैसा होता है, और डिग्री पर एग्जामिनेशन बोर्ड का नाम होता है ना कि कॉलेज का"..
सब लोग एक साथ मुझे घूरते हुए... "अब ये क्या नया नाटक है.."..
मै:- आप लोग जैसा कॉलेज चाहते है वैसे कॉलेज में मै एडमिशन ले लूंगी.. लेकिन यहां दाव पर मेरी खुशियां लगी है..
मां:- नौटंकीबाज, जल्दी बोल अपनी खुशी..
बाकी सब भी पीछे से... "हां हां बताओ ना"..
मै:- मै यहां से अकेली निकलूंगी, आईसीएआई के कॉलेज में एडमिशन लूंगी... आप लोग हॉलिडे पुरा करके वापस लौटाना और मै आप लोगों के साथ गांव जाऊंगी.. जून से पहले मेरी क्लास शुरू नहीं होगी.. 15 से 20 यहां रहिए, 21 और 22 को फ्रांस घूमिए.. 23 और 24 लंदन में रहिए.. 25 को इंडिया, और 26 को गांव.. मै 26 मई से 29 मई तक गांव में रहूंगी और फिर वापस लौटकर दिल्ली अपने क्लास के लिए.. कोई चू तक ना बोले कि नकुल को लेती जाओ.. मेरी इस खुशी को आप पुरा करोगे और मै आप लोगों की खुशी को.. बोलो मंजूर..
मां:- हां री मेरी टॉपर बिटिया.. "नाउ सी बिकेम बिग गर्ल (now she became big girl)"… ठीक है जा.. अरे हर्ष बेटा तुम्हे कब इंडिया निकालना है..
"हे भगवान इसे तो मै भुल ही गई थी... हे छलिया ये क्या खेल रच दिए.. कहीं मै दिल ना हार जाऊं.. देख लेना अब सब आपके हाथ में है".. अंदर से ये ख्याल आया..
हर्ष:- जी आंटी मै वो अर्थो कॉन्फ्रेंस के लिए परसो इंडिया के लिए निकालने वाला हूं..
राजवीर अंकल:- हां तो तू कल ही मेनका को लेकर निकल जा..
हर्ष:- पापा मै परसो अपने ग्रुप के साथ निकलूंगा और इंडिया मतलब केवल दिल्ली नहीं होता.. पहला कॉन्फ्रेंस मुंबई में है, फिर हैदराबाद, उसके बाद बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी का कॉन्फ्रेंस होगा और अंत में ऐम्स का कॉन्फ्रेंस..
उपासना सिंह (प्राची दीदी कि मां)… यहां से कल तुम मेनका को लेकर दिल्ली जाओगे, उसे फ्लैट तक छोड़कर आओगे.. वहां से फिर मुंबई निकल लेना.. और बाकी मेरे लाल पुरा देश भ्रमण करना.. एक और बात.. तुम्हारा मुख्य कॉन्फ्रेंस तो ऐम्स का ही है.. बाकी जगह तो सुनने ही जाना है.. तो मेरे लाल हो सके तो तुम वीडियो कॉन्फ्रेंस कर लेना.. और मेनका के साथ ही रहना जब तक हम पहुंच ना जाए.. इज दैट क्लियर (Is that clear)..
हर्ष:- मै सिर्फ ड्रॉप करने जाऊंगा.. मंजूर हो तो बताओ.. और ये टिकट कैंसल और नए टिकट मे जो पैसा लगेगा उसे मै अपने पॉकेट से पेमेंट नहीं करूंगा..
प्राची दीदी:- कंजूस कहीं का.. चिंता मत कर वो पेमेंट मै दे दूंगी और अगर तू मेनका के साथ रहा तो हर दिन 100 यूरो दूंगी अलग से..
हर्ष:- नहीं 1000 यूरो..
प्राची दीदी:- 99 यूरो..
हर्ष:- 800 से कम नहीं लूंगा..
प्राची दीदी:- 95..
हर्ष:- मै नहीं जाऊंगा...
प्राची दीदी:- पॉकेट मनी बंद..
हर्ष:- ये तो गले पर चाकू रखकर काम करवाना हुआ..
मै:- बस भी करो दोनो, मै क्या दिल्ली में अकेली पहले कभी नहीं रही क्या? उसी दौरान मै टीवी पर भी आयी थी.. भुल गए क्या.. हर्ष मुझे छोड़कर कॉन्फ्रेंस अटेंड करेगा.. और प्राची दीदी उसे 100 यूरो रोज के हिसाब से देगी.. मै जा रही हूं टिकट बनाकर सोने.. हर्ष तुम अपनी डिटेल भेज देना...
हर्ष:- 10 मिनट यहीं रुको मै टिकट का काम करवा देता हूं..
उसने किसी ट्रैवल एजेंट को फोन किया.. सुबह 7 बजे लंदन, और शाम के 6 बजे लंदन से इंडिया की फ्लाइट टिकट कन्फर्म.. हां लेकिन उसके लिए मेरे अकाउंट से ढेर सारा धन खर्च कर दिया इन लोगों ने..
अगले दिन जब हम लंदन मे थे.. हर्ष को कुछ जरूरी पेपर और कुछ चीजें कॉन्फ्रेंस के लिए चाहिए थी, वो अपने रूम से कलेक्ट कर रहा था.. मै उसका कमरा देख रही थी.. 8 बाय 10 का छोटा सा कमरा था, जिसमे चारो ओर किताबे ही बिछी हुई थी. टेबल पर एक लैपटॉप रखा हुआ था जिसकी धूल बता रही थी कि वो इस्तमाल नहीं होती..
"बिहारी स्टूडेंट जहां भी होते है उनका पढ़ने का तरीका नहीं बदलता"… मेरे व्यंग भरे शब्द..
हर्ष, अपना काम करते.. "जो अपने मूल को छोड़ दे, फिर वो किसका होगा.. जब कोई कहता है कि मै बिहारी स्टूडेंट की तरह रहता हूं.. तुम सोच नहीं सकती कितना प्राउड फील होता है..."
उसके जवाब सुनकर मै मुस्कुराई.. और इधर-उधर बिखरी चीजों को समेटकर एक जगह रखने लगी… तभी हर्ष चिल्लाया... "प्लीज समेटो मत, वरना ढूंढने में दिक्कत होगी"..
मै:- कोई दिक्कत नहीं होगी.. कुछ ना मिले तो कॉल लगा लेना, मै बता दूंगी..
हर्ष:- रंडमली समेट कर रख रही हो और कहती हो की फोन लगा लो..
हर्ष अपनी चेयर से पीछे मुड़कर एक बार किताबों का जायजा लिया.. "अच्छा एबी एनाटॉमी की बुक दो".. मैंने उसे दे दी.. "अच्छा स्ट्रक्चरल यूनिट करके मैंने एक टॉपिक पर लिखा है, पन्ने पर ही हेडिंग"… बात पूरी भी नहीं हुई की सामान हाजिर... उसने ऐसे ही 3-4 टेस्ट लिए..
हम दोनों टेस्ट-टेस्ट खेल रहे थे, इसी बीच धराम से दरवाजा खुला और एक लड़की दरवाजा फाड़कर अंदर आयी. छोटा सा शॉर्ट्स, जिसमे उसके जांघ की पूरी मोटाई पता चल रही थी. ऊपर काले रंग का छोटा टॉप जो वी गला का था, जिसमे उस लड़की स्तन के किनारे के उभार और बीच की गहराई, उसके अति कामुक रूप का विवरण दे रहे थे.. इतना गोरा चेहरा होने के बावजूद भी इतना सारा मेकअप और लिपस्टिक, की लोगों की आखें उसके चेहरे और बदन को ताड़ने पर मजबूर हो जाए..
20-21 वर्षीय इस बाला को मै देख ही रही थी, तभी वो पीछे से, हर्ष के कंधे से अपना पूरा सिना चिपकाती… "क्या कर रहा है मेरा बेबी"..
"हिहिहिहिहिहिही… बेबी…." अनायास ही मेरे मुख से निकला. हर्ष की भी छोटी सी हंसी निकली.. वो लड़की अपने चेहरे पर गुस्से के भाव लाती... एक बार मुझे घूरकर, बड़े ही कामुक अंदाज में वो हर्ष के कानो के नीचे चूम ली.. हर्ष बिना उसपर ध्यान दिए... "शैबा क्या हुआ"..
शैबा:- ये लड़की कौन है, इसे बाहर कहो जाए, मुझे कुछ पर्सनल बातें करनी है...
हर्ष, अपना काम जारी रखते... "तुम यहां खड़ी हो, क्योंकि ये लड़की मेरे साथ मेरे स्टडी रूम मे है, नहीं तो मै अपने स्टडी रूम मे किसी को आने की अनुमति नहीं देता..
मै:- फेकू चंद..
हर्ष हंसते हुए मेरी ओर देखा और अपने दोनो हाथ जोड़ लिए.. इधर वो लड़की शैबा.. "अब जब तुम्हारे प्राइवेट एरिया में आ ही गई हूं तो कुछ प्राइवेट बातें कर लूं"..
हर्ष:- मै तो कब से कह रहा हूं कि कहो… तुम्हे ही मेनका की मौजूदगी खटक रही है...
शैबा:- आई लव यू..
हर्ष:- हाहाहाहाहा.. ये बात तो आजकल लोग माईक लगाकर पूरे कॉलेज के सामने करते है...
शैबा:- हां लेकिन उसके बाद का मुझे सबके सामने नहीं किया जायेगा...
हर्ष:- हम्मम ! 9XXXXXXX53 मेरे पापा का नंबर है, अपने पापा को बोलना बात कर लेने.. एक बार रिश्ता पक्का हो गया, फिर ये लंदन है बेबी.. जहां मर्जी वहां सेक्स करो.. सब एप्रिशिएट करेंगे...
शैबा:- व्हाट ???
हर्ष:- और कोई इंपॉर्टेंट बात करनी है क्या ?
मै:- थैंक्स हर्ष...
हर्ष:- दे कर देखो नंबर … मै भी हर्ष सिंह भदोरिया हूं..
शैबा:- ये तुम्हे अपने पापा का नंबर क्यों देगी...
हर्ष:- इसने तुम्हारे सामने अपनी प्राइवेट बात कह भी दी और खत्म भी हो गई बात... तुम क्यों दूसरों के प्राइवेट बात मे ज्यादा इंटरेस्टेड हो शैबा...
हर्ष अपनी जगह से उठकर उसके गाल को थपथपाते हुए... "चलो शैबा, यहां का काम हो गया.." हर्ष अपना बैग पैक करते हुए कहने लगा...
शैबा:- हर्ष, 2 मिनट जरा रुको ना..
मै:- हर्ष मै बाहर इंतजार कर रही हूं..
हर्ष:- रुक मै भी आया, शैबा, जल्दी से बोल दो क्या चाहिए वरना ये रूम लॉक हो गया तो दोबारा नहीं खुलेगा…
शैबा:- मुझे कुछ टॉपिक समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहे.. अगर वो टॉपिक क्लियर नहीं हुए तो मेरे ग्रेड नीचे आ जाएंगे..
हर्ष:- आज से अगले 15 दिन का पुरा समय उस लड़की का दिया हुआ है, यदि वो राजी होती है तो मै तुम्हे 2 घंटे दे सकता हूं...
शैबा:- कौन है ये लड़की...
हर्ष:- लगता है तुम कौन है और क्यों है, इसी पर अपना वक्त बिताने वाली हो… चलो मेनका हम चलते है, ये थोड़ी कंफ्यूज लग रही है...
जैसे ही हर्ष बाहर जाने वाला हुआ, शैबा, उसका हाथ पकड़कर रोकने लगी... मुझसे पूछने लगी कि क्या वो कुछ समय ले सकती है... मुझे क्या परेशानी हो सकती थी भला, मैंने भी कह दिया हां ठीक है ले लो…
मै बाहर जाने लगी तो हर्ष ने मुझे अपने घर की चाबी थामा दी, जो ठीक इस कमरे के बगल वाला कमरा था... मै उसके 1 बीएचके के छोटे से घर को देखने लगी.. ये लड़के भी ना कभी घर को घर नहीं रहने दे सकते.. पुरा कमरा बिखरा पड़ा था... हां लेकिन यहां मै नहीं समेटने वाली थी कुछ भी, पता चलता की कल को फोन करके पूछ रहा है मेरी अंडरवेयर कहा है.. हीहिहिहिहिही
चलते-चलते मै एक डेस्क के पास पहुंची, जहां एक खूबसूरत डायरी परी हुई थी... डायरी देखकर मेरी जिज्ञासा बढ़ने लगी और मैंने उसे खोल दिया... डायरी के पहले पन्ने पर इंट्रो मे लिखा था...
"मै अपनी जीवन गाथा नहीं लिख रहा जो इसे खोलकर पढ़ लिए और मेरे बारे में जान लिए.. उसके लिए मेरे साथ वक्त बिताना होगा.. बाकी रही बात इसके अंदर क्या लिखा है तो रख दीजिए. क्या लिखा है वो ना तो आपके लिए लिखा है और ना ही आपको समझ आएगा"
"अब तो लगता है खोलना ही होगा"… यही सोचकर मै आगे कर पन्ने पलटी और अंदर का लिखा देखकर मेरी इतनी ही प्रतिक्रिया थी... "हांय, ऐ की है"… दरसअल वो किस भाषा में लिखा हुआ था समझना मुश्किल था..
मैंने काजुअली एक पन्ने की तस्वीर लेकर उसे मुक्ता दीदी को भेज दिया और हर्ष से फोन मांगकर ले आयी.. कुछ देर इधर-उधर की बात करके, उनसे फिर वो तस्वीर की डिटेल पूछने लगी..
उन्होंने कुछ वक्त मांगा और तकरीबन एक घंटे बाद उन्होने कॉल बैंक किया... ये बड़े-बड़े अधिकारी भी ना कितना फॉर्मल होते है.. फोन करती ही मुक्ता दीदी कहने लगी "सॉरी बेटा मै काम मै व्यस्त हो गई इसलिए कॉल ही नहीं कर पाई"…
बताओ यहां सरकारी ऑफिस के चक्कर लगा लगाकर लोगों के चप्पलें घिस जाती है.. बड़ा बाबू आजकल-आजकल करके लोगों के धैर्य के साथ खेल जाता है और उन्हे यदि गलती से किसी ने झुंझलाकर उनका दिया वक्त याद दिला दिया, तब तो आयी शामत. बाबू साफ कह देगा काम नहीं होगा.. लो जी फिर उनके मिन्नतें भी करते रहो… कमाल का होता है ना ये सरकारी दफ्तर...
वैसे जिंदगी में मैंने बस एक ही सपना देखा है.. जैसे हम किसी शॉप मे जाते है और वहां के कर्मचारी कितने प्यार से हमे बिठाकर हमारी इक्छा जानते है और उसके बाद मनचाहे सामान की कितनी वरियटी दिखा देता है... हमारा सरकारी ऑफिस भी बिल्कुल ऐसा ही हो... स्वागत करते बाबू लोग खड़े रहे और पब्लिक को मनचाहे काम करवाने के लिए कई तरह के ऑप्शन हो…
हिहिहिहि मुक्ता दीदी को लाइन पर अटकाकर मै ये सब सोचने लगी और उधर से वो मुझे पुकार-पुकार कर थक गई... मै हड़बड़ी मे उन्हें जवाब दी और अपने खोने के पूरी कहानी बताती हुई कहने लगी.. इसका जवाब मत दीजिए अभी, वो मिलकर बता देना की सरकारी ऑफिस ऐसा क्यों नहीं हो सकता..
वो मेरी बात सुनकर हसने लगी और फिर मुझसे पूछने लगी कि कौन है जो मेरी बहन के आगे पीछे कर रहा इस वक्त... उनकी बात एक इशारा था कि उस पन्ने मे हर्ष ने कुछ मेरे बारे में ही लिखा हुआ था..
मैंने बहुत जिद की उनसे जानने की, कि पन्ने पर क्या पढ़ा, लेकिन वो साफ कहने लगी कि उन्हे पूरी डियारी की कॉपी चाहिए... बहस मे वो जीती और मै हारी.. अरे यार जिलाधिकारी होने का फायदा ले गई... पता ना इतने सारे सटीक लॉजिक कौन उनके दिमाग में डालता है.. बोलती बंद कर दी...
मामला यहां आकर सैटल हुआ कि मै उन्हे पूरी कॉपी भेज दूं, और ये सिक्रेट हम दोनों बहन के बीच रहेगा.. दिल्ली एयरपोर्ट पर मै जैसे ही अपना नेट ऑन करूंगी, वो पूरी डायरी मुझे पीडीएफ मे मिल जाएगी वो भी अपनी भाषा में..
मैंने भी इस होशियार हर्ष की पूरी डायरी चुरा ली, और मुक्ता दीदी को भेजकर आराम से टीवी देखने लगी... ये सब करते हुए तकरीबन 2-3 घंटे बीत गए..
कुछ देर बाद हर्ष भी पहुंच गया, और मै उसके साथ लंदन की शैर करने निकल गई... पहले वो अच्छा लगता था, अब उसके साथ घूमने अच्छा लगने लगा था.. उसकी प्यारी बातें दिल में कुछ-कुछ एहसास करवा रही थी..
बहरहाल हम लंदन से उड़ान भर चुके थे और दिल्ली एयरपोर्ट पर जैसे ही मेरा फोन ऑन हुआ, मुक्ता दीदी अपना काम कर चुकी थी... हर्ष आगे चल रहा था और मै पीछे.. जितने वक्त से हम साथ थे, और उसका एप्रोच मेरी ओर जिस हिसाब से था, प्यारा था.. उसके बाद जब मै उसके डायरी की चुपके से एक झलक मारी.. मुस्कुरा रही थी....
so yeh surprised tha... kya baat hai menka har mein ek step aur aage jaa rahi hai... waise prashansa ki dabedar toh hai woh itni chhoti si umar mein itne bade bade kaam...
so admission ke liye abhi jana... well menka ki request par baaki to tour jaari rahenge.. Par yeh kya... oh ho.. oh ho...akhir Kar kulta upashana bol hi padi..
Oh toh uske sur mein sur milayi hawas ki pujaran Prachi ne bhi...
aur is kutte harsh ko dekho... harami nautanki kar ke aisa dikha raha hai... jaise ushe koi dilachaspee hi nahi menka ko leke..
baat yahi nahi ruki... woh ladki sabi uske sath close hona... yeh bhi planning ki hi hissa hai... taki menka lage ki woh harsh kitna loyal hai... dairy bhi khulla am chhod diya kamine ne... taaki usme likhe jhuthi baat menka padh ke impressed ho jaaye us kutte se..
lekin andar ki baat yeh hai yeh pura Saryanta is kamine family ne hi racha hai.. aur sabse bada kamina woh rajveer..

kamina ushe toh chance mile toh menka ki moushi ki upor hi chhad jaaye sare aam...

Khair mujhe kya bhaad mein jaaye ye log...
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill
nain11ster ji
