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Thriller 100 - Encounter !!!! Journey Of An Innocent Girl (Completed)

SHADOW KING

Supreme
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अध्याय 23 भाग:- 2








अपनी बात कहकर जैसे ही वो कामवाली गई, प्राची नकुल पर अपने दोनो हाथ चलाती… "मै तो बहकी थी, तुम माहौल नहीं समझ सकते थे.. और घर भी खुला छोड़ दिया.."


नकुल:- अरे...


प्राची:- क्या अरे, क्या अरे हां...


नकुल:- बस भी करो, वो तुमसे ज्यादा समझदार है.. चिंता क्यों कर रही..


प्राची:- अच्छा और यही मेनका ने सब देखा होता..


नकुल:- बस.. ये बचकाना बात है... वैसे मेनका देखती तो हम झगड़ा बाद में करते, पहले उसके हाव-भाव लेने दौड़ते.. और समझने की कोशिश करते की वो कितना चिल्लाकर हमारी शादी जल्दी करवाएगी या हमारी विनती सुनकर मेरे ग्रेजुएशन के बाद...


प्राची:- मतलब हमारी शादी की सारी सेटिंग उसी को करनी होगी क्या?


नकुल:- हां बिल्कुल.. और कोई है जो ये कर सकता है..


प्राची:- और कहीं मेनका ही नहीं मानी तो..


नकुल:- उसे यदि पता चले कि हम दोनों शादी करना चाहते है तो वो हमे मिलाने के लिए जमीन आसमान एक कर देगी..


प्राची:- सच मे..


नकुल:- हा सच मे... और एक बात वो यदि पूछे.. जो कि पूछेगी ही... की जिंदगी में कौन चाहने वाला आ गया है तो झूट मत कहना की कोई नहीं आया और जिद पर मत अरी रहना..


प्राची:- मै समझी नहीं.. मेनका अगर हमारे बारे में पूछे तो सब बता दू..


नकुल:- इतनी अनजान, जान बूझकर बन रही हो या फिर दिमाग अपग्रेड के बदला डिग्रेड हो रहा जो बेवकूफी कर रही हो..


प्राची:- इतना बकवास से अच्छा सीधा समझा ही देते..


नकुल:- मेनका को सच बताना है.. लेकिन यह मत बताना की कौन है.. बस इतना कहना, नई अनुभव है काफी अच्छा लग रहा.. थोड़ा जी लेने दो, फिर पहले तुम्हे ही तो बताना है..


प्राची:- और साफ मुकड़ गई तो..


नकुल:- नेक्स्ट ईयर पहुंच रही है दिल्ली.. फिर तैयार हो जाना शादी के लिए.. क्योंकि तुम मुकड़ी तो उसे पता करने की जिज्ञासा बढ़ेगी... तुमने कबूल कर लिया तो वो खुश हो जाएगी और तुम्हे सपोर्ट करेगी.. इतनी सी बात है..


प्राची:- हां लेकिन उसे पता कैसे चलेगा..


नकुल:- "11th में गए उसे 2 महीने हुए थे.. तब वो 12th का सेलेब्स मे हाथ लगा चुकी थी.. मेरी हेल्प के लिए वो एग्रीकल्चर साइंस की बुक को वो 8th क्लास से पढ़ रही है.. शायद मेनका की कमांड इस विषय पर इतनी हो की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को पढ़ा दे.."

"कहने का मतलब है कि उसे बस किताब मिल जाए तो वो रेगिस्तान में भी जीवन काट लेगी.. उसके दिमाग में ऑटो टारगेट सेट होता है.. मुझे इतने समय में ये कवर कर लेना है और इतने समय मे इसको."

"नाउ प्वाइंट इज.. वो जब किताब में होती है तो बस किताब में होती है.. उस बीच वो मुझे महीनों बाद मिली.. मै खींचा हुआ सा दिखा.. मुझसे कुछ ज्यादा नहीं पूछी चुपचाप चली गई.. अगले दिन वो इतना कुछ भूमिका पहले से पता करके बैठी थी कि क्या बता दूं मै..


प्राची, उत्सुकता से.. "होनेवाले पतिदेव, शॉर्ट मे बता दीजिए ना बुआ सासू आपके के बारे में क्या पता करके आयी थी"..


नकुल:- शायद उसे नीलेश के बारे में पहले से पता था.. लेकिन वो जब नीतू का पता करने गई, तब नीतू और नीलेश की पूरी कहानी उसे पता चल गई.. फिर पक्का उसके दिल में यह आया होगा कि कहीं नीतू मुझे धोके मे तो नहीं रख रही.. और पूरे होमवर्क के बाद मेरे दिल का हाल लेने आयी थी..


प्राची:- धूर्त कहीं की.. बहुत बड़ी साइलेंट किलर है वो.. हम तो साथ रहकर, बात करके, या किसी के हाव भाव से परखते है कि इंसान कैसे है.. वो किलोमीटर दूर से समझ जाती है कि कौन कितना धूर्त है.. या कितना सीधा..


नकुल:- ऐसा कहने की वजह..


प्राची:- इतनी सी तो चुहिया जैसी थी, जब मिली थी.. मै उससे कुछ सवाल जवाब कर रही थी और मुझे मुंह पर बोल दी, मै उससे, उसके मन की बात ले रही..

एक दम खतरनाक था वो मंजर.. पहली बार फील हो रहा था कि उसकी हंसी और बेवकूफाना हरकत पर मत जाओ.. आखों मे एक्सरे मशीन लगा है और दिमाग में कंप्यूटर.. वैसे जानते हो एक बात..

नकुल:- क्या ?


प्राची:- तुम दोनो ही जीनियस हो, पर कभी-कभी अफ़सोस होता है कि जिन्हे पूरी दुनिया जानती, वो खुद गुमनामी का रास्ता पकड़े हुए है.. यार तुम्हे नहीं लगता कि भगवान ने तुम दोनों को बहुत खास बनाया है..


नकुल:- मेरे लिए तो सबसे खास तुम हो.. भगवान ने हम दोनों (नकुल और मेनका) में एक ही तो एबिलिटी दी है, अपने लोगो के चेहरे पर मुस्कान लाना.. सो ला रहे है.. कहां उनके दिए एबिलिटी का तिरस्कार कर रहे..


प्राची:- छोड़ो मै डिस्कस ही नहीं करना चाहती..


नकुल:- हां तो इसपर डिस्कस कर लो की हमारी पहली रोमांस कैसी रही..


प्राची नकुल को एक हाथ मारती... "धत उल्लू"..


नकुल:- एक बात बताओ वैसे ये पहला इन्विजन तो नहीं था.. फिर जब अंदर गया तो तुम ऐसे चिंखी क्यों?


प्राची:- बुद्धू.. वो 52-54 साल का था, और वो कभी डीप पेनिट्रेट नहीं किया...


नकुल:- इसलिए तो कहता हूं रोमांस डिस्कस कर लिया करो, ये डीप पेनेट्रेशन पहले से पता होता तो सब स्मूथली जाता...


प्राची:- ये क्या बार-बार रोमांस डिस्कस की बात लेकर बैठ गए.…


नकुल:- अगर रोमांस डिस्कस नहीं करोगी तो रोमांच से वंचित रह जाओगी. और एक बार रोमांस से यदि रोमांच चला गया तो फिर बचेगा एक ही काम..


प्राची:- क्या..


नकुल:- थोड़ा सा कपड़ा सरकाया, धक्कम धक्का किए और सब शांत..


प्राची:- हिहीहिहिहिहि.. पागल.. वैसे शुक्रिया इसपर खुलकर बात करने के लिए.. जब कुछ ऐसी रोमांचित करने वाली इक्छा होगी तो खुलकर जाहिर करूंगी.. फिलहाल मुझे रेगुलर रोमांस से तो बोर कर दो, तब सोचूं ना.. अभी तो तुम्हारे साथ होने मे ही रोमांच है...


नकुल सोफे पर बैठा था और प्राची उसके गोद में लेटी हुई थी. प्राची अपनी बात कह रही थी और नकुल अपने हाथ धीरे-धीरे प्राची के स्तन पर चलाने लगा..

प्राची झटके से उठकर बैठती हुई नकुल को घूरने लगी... "ये तुम क्या कर रहे हो"..


नकुल:- साइज चेक कर रहा..


प्राची:- 32 है.. और उन्हे 32 ही रहने दो..

नकुल:- पागल, तुम्हारे स्तन कह रहे की मुझे भी बड़ा होना है कब तक मै छोटी रहूं..


प्राची नकुल का गला दबाती हुई वहां से उठकर भागी.. और नकुल उसे देखकर हसने लगा.. 2011 के अंत में दोनो के प्यार का कारवां शुरू हुआ था.. और फिर दोनो ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा..


इस बीच दोनो ने मिलकर सबसे पहले तो "Yours" के एम्पायर को हंसते खेलते खड़े किए जा रहे थे.. इनकी एक के बाद एक मीटिंग कामयाब होती जा रही थी.. प्राची के बिजनेस प्लान और मॉल का प्रबंधन इतना शानदार था कि दिन-व-दिन मॉल मे ग्राहकों की संख्या में उछाल देखने मिलता..


वहीं दूसरी ओर नकुल काम करने वालों का प्रबंधन देख रहा था... उसके अपॉइंट किए गए लोग प्राची के प्रबंधन को इतना आसान कर चुके थे कि प्राची बस एक घंटे ऑफिस जाकर पूरे दिन का काम निपटा सकती थी..


और जब एक घंटा मे काम खत्म हो गया फिर बचता ही क्या था, सिवाय नकुल के आगोश में डूबकर उसी मे खो जाना... वर्ष 2012, श्रावण पूर्णिमा, राखी का दिन और काफी मायूसी के साथ प्राची ने नकुल को कॉल लगाकर कहा कि "प्लीज चले आओ, रोने जैसा दिल कर रहा है..."


नकुल को भी आश्चर्य लगा कि आज के ही दिन क्यों प्राची कॉल कर रही.. नकुल के लिए एक अच्छी बात थी कि मेनका किताबों में पूरी तरह से फोकस थी, और वर्मा सर के कारन वो गांव के श्रावण मेले में नहीं जा रही थी..


नकुल दिन का पुरा वक्त मेनका को दिया और फिर वहीं से दिल्ली के लिए निकल गया.. नकुल अगले दिन सुबह-सुबह ही फ्लैट पहुंचा.. जैसे ही प्राची ने सामने नकुल को देखा, वो दौड़कर नकुल से लिपट गई. लिपटकर सुकून से वो नकुल के बाहों में परी रही...


नकुल, प्राची के पीठ पर इस कदर हाथ फेरता रहा, मानो एहसास करवा रहा हो कि शांत हो जाओ, मै हूं ना यहां पर... "क्या हो गया प्राची दीदी को"..


प्राची नकुल के सीने से अलग होती अपनी छोटी सी आंख किए घूरती हुई... "तुम्हारी दीदी हूं मै.. ला फिर हाथ आगे बढ़ाओ, राखी बांध ही दूं"..


नकुल:- अब मुझे क्या पता अंदर फीलिंग क्या थी जो तुम मुझे राखी के दिन बेचैन होकर कॉल की..


प्राची:- मेरे पास कोई नहीं था.. मेरे पापा को छोड़कर सब मुझसे अनजानों की तरह व्यवहार करते है. यहां का सुनापन मुझे काट रहा है...


नकुल:- हम्मम ! हर्ष ने कल फोन नहीं उठाया या फोन पर कुछ कह दिया..


प्राची:- दुख तो इसी बात का है, वो फोन उठाया भी और कुछ कहा भी नहीं..


नकुल:- हम्मम ! मतलब खतरनाक तरीके से तुम पर वो गुस्सा है... इसकी वजह जान सकता हूं...


प्राची:- "हर्ष और मैंने लगभग साथ में अपना हायर एजुकेशन शुरू किया था... मैंने जबसे अपना हायर एजुकेशन शुरू किया, तब से मै लगभग सबको भुल ही गई थी... उस दौरान एक दिन में केवल 1 या 2 बार ही किसी का कॉल लेती थी, वो भी 15 से 20 सेकंड मैक्सिमम बात होती.."

"फिर धीरे-धीरे लोगों ने कॉल करना छोड़ दिया और मैंने भी ध्यान देना बंद कर दिया की वो कॉल करना क्यों बंद कर दिए... बस बिजनेस के सिलसिले में केवल पापा से लंबी बातें होती थी..."

"फिर अचानक एक दिन मुझे मेनका मिली... उसके एक संदेश ने मुझे आकर्षित किया और जब तुम दोनों मिले तो पता चला कि मै खुद को साबित करने के चक्कर में क्या खोती जा रही थी..."


नकुल:- पागल, इतना मायूस क्यों होना.. 3-4 साल का उनका दर्द है, तुम्हे क्या लगता है, 3-4 कोशिश में चला जाएगा क्या? कम से कम तुम कोशिश तो करो, मुझे यकीन है कि थोड़े समय में मामला सेट हो जाएगा...


नकुल की बात सुनकर प्राची एक प्यारी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाती... "सच मे ऐसा होगा क्या?"


नकुल:- हां सच मे ऐसा होगा, लेकिन रिश्तों मे इमोशन होने चाहिए ना कि किसी अपना बनाने का टारगेट.. समझी मिस..


प्राची:- लेकिन नकुल कुमार मिश्रा तो मेरा लक्ष्य था.. हिहिहिहि..


नकुल:- चलो इसी बात पर एक काम करो, जाओ एक हफ्ते की छुट्टी लो और घर घूमो… इस दौरान नो बिजनेस.. वो मै देख लूंगा...


प्राची:- आज तो तुम आए ही हो, कुछ दिन बाद छुट्टी ले लूंगी चलेगा क्या?


नकुल:- जी बिल्कुल भी नहीं चलेगा, आज के आज निकलो.. और हां नो फोन कॉल, किसी को भी नहीं.. बाहरी दुनिया से पूरी तरह से ब्लैंक होकर जाओ...


प्राची, नकुल के होंठ को चूमती…. "जैसा आप कहें सर, लेकिन क्या आज की रात रुक लूं मै.. प्लीज़जजजज..."


नकुल, प्राची का बचपना देखकर हंसते हुए कहने लगा... "लेकिन हम दोनो मे तो बच्चा मै हूं"…


प्राची:- जैसे मेनका के लिए तुम बड़े होकर भी छोटे हो, ठीक उसी प्रकार मै भी तुमसे बहुत बहुत बहुत छोटी हूं..


नकुल:- इतनी भी छोटी ना बन जाना की दूध पिलाना परे..


"वो तो मै पिला दूंगी.. आज गोद में लल्ला... हिहिहिहि"… प्राची आंख मारती हुई अपनी बात कह दी जिसे सुनकर नकुल हंसते हुए बस उसे पागल कहकर वहां से चला गया..


एक रात रुकने के बाद प्राची चली गई अपने घर... घर पहुंचकर वो पूरे एक हफ्ते केवल अपनी मम्मी के पास बिताई.. इस दौरान बहुत सी छोटी-छोटी चीजें थी जो वो अपने मां के साथ की.... जिसमे से साड़ी पहनना भी एक था जो प्राची ढंग से पहनना सीख गई थी...


उसे एहसास हो गया की परिवार के साथ कुछ वक्त बिताने मे क्या मज़ा है.. इस बीच वो अपनी मां के साथ ही केवल घूमी, उनके साथ शॉपिंग की.. यह पहला मौका था जब प्राची अपनी मां उपासना सिंह के साथ मेनका से मिलने गई...


थोड़ा सा अजीब माहौल तब हो गया जब प्राची की मां, मेनका के साथ बैठकर गप्पे लगाने लगी, तब दोनो प्राची को ही भुल गई... प्राची शिकायती नज़रों से देखती... "ये क्या है यहां दोनो के बीच की कड़ी मै हूं और मुझे भूलकर दोनो आपस में ही लगे हुए हो.. मै भी हूं यहां पर"..
nice update ..nakul ne menka ko kya batana hai aur kab ye sab sochke rakha tha ..

aur ye bua saasu shabd padhke ek kahani yaad aa gayi usme wo ladki bhi yahi bolti thi 🤩..

nakul achche se samajhata hai prachi ko aur wo usiki baat sunkar apne ghar gayi ..dono perfect match hai bhale umr me farak hai ..
 

SHADOW KING

Supreme
15,895
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259
अध्याय 23 भाग:- 3








उपासना:- साल भर में पहली बार तो खुलकर बात कर रही है मेनका वरना मुझे तो कुछ और समझ में आया था..


मेनका उपासना की बात सुनकर अपना बड़ा से मुंह खोलती... "आंटी ये तो गलत है.. आप खुद ही मुझे ऐसे देखती थी कि मुझ बेचारी को डर लग जाए… कितनी खतरनाक लुक रहती थी.. वैसे खतरनाक लुक तो अब भी है... अंकल इसी चांडलनी वाला रूप को देखकर मोह गए होंगे"…


जैसे ही मेनका अपनी बात पूरी की, वहां का पुरा माहौल ही खिखिखिखी की हंसी से गूंज गया. एक बात तो थी, प्राची जब भी मेनका की चुलबुली हरकत देखती और मज़ाक ही मज़ाक में बड़ी से बड़ी बात जब वो आसानी से कह देती, तो प्राची को यही लगता.… "काश मेनका के जैसे ये हंसते-हंसते लगा दे रस्ते वाले कला मुझमें भी होती"…


उसी शाम की बात है जब उपासना और प्राची घर पर बैठकर अकेले में अपनी भावनाएं साझा कर रहे थे... उपासना अचानक ही कहने लगी... "मेनका को देखती हूं तो दिल में यही ख्वाइश जागती है कि काश ये अपने कास्ट की होती तो हर्ष के लिए अभी जाकर हांथ मांग लेती"…


प्राची:- क्या तुम भी मां… इस जमाने में भी कास्ट को देख रही...


उपासना:- पागल, ले भगा शादी में ना लोगों को किसी तरह समझा बुझा लेंगे, लेकिन ये बिहार है, रिश्ता लेकर गए तो कास्ट मैच करनी चाहिए.…


प्राची:- हिहिहि... मतलब आप चाहती हो की हर्ष और मेनका के बीच...


उपासना:- तू कभी सोचे तब ना अपने भाई के बारे में..


प्राची:- सोचती हूं मां.. बस कुछ नाराज चल रहा है मेरा भाई.. इसलिए सरा ध्यान उसे मनाने पर है... गलती मेरी ही है.. जब उसे मेरी जरूरत थी, तब मै नहीं थी... और अब जब मुझे एहसास हुआ तो उसे मेरी जरूरत ही नहीं.. खुश है वो मेरे बिना..


उपासना:- "छोड़ तू दिल छोटा ना करी.. वैसे उसकी थोड़ी फिक्र रहती है... उसके अंदर अकेले जीने वाला गुण आते जा रहा है.. उसके जीवन में कोई हो तो ठीक, ना हो तो ज्यादा ठीक... बिल्कुल तेरी तरह.."

"तू तो नकुल और मेनका को देखकर सुधरी है, जिस वजह से ये दोनो भाई बहन मेरे दिल के इतने करीब है, जबकि देखा जाए तो मेनका से आज खुलकर बात हुई, हां नकुल से अपनी पक्की दोस्ती है.. बहुत प्यारा लड़का है.."


प्राची:- "कहीं नकुल को लेकर भी आपकी सेम फीलिंग तो ना हो गई... बेटी मिश्रा के घर दो और बहू मिश्रा के घर से लो…"


उपासना, प्राची को घूरती हुई.… "कुछ भी बकवास किए जा रही है... तेरी शादी तो मैंने फिक्स कर दी है.."


प्राची चौंकते हुए... "क्या????"


उपासना:- इसमें इतना चौंकने की क्या जरूरत है.. लड़का हैंडसम है, स्मार्ट है और अपनी खुद की दवा की कंपनी है.. समाज में अच्छा नाम भी है...


प्राची:- मां मुझे नहीं करनी अभी कोई शादी.. मुझसे पूछे वगैर कोई मीटिंग मत फिक्स कर देना...


उपासना:- कहीं तूने खुद कोई लड़का तो नहीं ढूंढ लिया.. जो इतना चिढ़ रही है... देख मुझे तेरी शादी को लेकर कोई ड्रामे नहीं चाहिए... लड़का अपनी कास्ट का है तो अभी बता दे, हम सब तय कर लेंगे.. दूसरी कास्ट का है तो अभी रिश्ता तोड़ दे.. बात आगे मत बढ़ाओ...


प्राची:- मै वादा करती हूं शादी आप लोगों की मर्जी से ही होगी.. आप इसपर ज्यादा ना सोचो.. पहले मै अपने भाई को मनाऊंगी.. साथ ही साथ अपनी कंपनी को बुलंदी पर लेकर जाऊंगी.. 3-4 सल और इतंजार कर लो..


उपासना:- 23-24 अच्छी उम्र है शादी की.. घर बसा ले.. तू और कितना पैसे कमाएगी…


प्राची:- पैसे कमाना लक्ष्य नहीं है मां.. मै चाहती हूं हर कोई काम करे, इसलिए अपने लोगो के लिए सुकून की नौकरी का जुगड़ में जुटी हूं.. किसी दिन पापा जब अपने गांव और आस पास के गांव की सुखी संपन्न देखे तो खुश हो जाएं..


उपासना:- हां तू तो अपनी पापा की ही बेटी होगी ना.. उन्हीं की खुशी, उन्हीं का सपना..


प्राची:- सेटअप मां.. आप ये ताने ना मारा करो.. बताओ आपका सपना क्या है..


उपासना, प्राची के सर पर हाथ फेरती... "मेरा सपना तो है कि उम्र के हर पड़ाव में बस तुम दोनो भाई बहन मेरा साथ कभी नहीं छोड़ो... एक वक्त था जब अंदर से वाकई चिढी सी रहती थी.. फिर नकुल जब तेरे पापा के साथ काम करता था तब वो मेरे पास बैठता.."

"बहुत प्यारा बच्चा है... उसने दूर से देखकर ही भांप लिया की मेरे दिल में क्या चल रहा है.. यहीं सोफे पर बैठकर मेरा हाथ थामकर कहा था... "आंटी आप चिंता मत करो, आपकी बेटी मुझे दिल्ली बुला रही है और मै उसको आपके पास भेज दूंगा, बिल्कुल वैसे जैसे आप की दिल की तमन्ना है".. तूने तो पूछ लिया नकुल ने तो मेहसूस किया मेरे सपने को और आज सच कर दिया... अब बस.."


प्राची:- अब बस क्या मां..


उपासना:- बस अब तेरा भाई हर्ष भी ये एहसास करवा दे की मै भी उसके लिए खास हूं..


प्राची:- आपको वो बहुत चाहता है मां, बस मेरे कारन से ये सब हो रहा है.. उसे पहले की तरह करके भेजता हूं...


उपासना:- "पहले भी तो वो वैसा ही था प्राची, क्या तुझे यह बात पता नहीं.. लगा कि बच्चा है अभी समझदारी नहीं इसलिए लोगों से घुलता मिलता नहीं.. और जब मै इंगलैंड मे उसके साथ थी तब पता चला कि वो तो अपने पास लोगों को ही नहीं देखना चाहता है..."

"पता ना हर्ष का क्या होगा.. यही हाल रहा तो वो केवल खुद पर केंद्रित होकर रह जाएगा... ऊपर से उसका प्रोफेशनल डॉक्टर वाला.. रोगियों के दर्द और चीख पुकार सुन सुनकर तो उनके इमोशन भी मर जाते है.."


प्राची:- चिंता क्यों करती हो मां.. अभी जबतक वो इंडिया नहीं लौट आता तबतक मै उसके पास जाते आते रहूंगी.. देखना कोशिश करेंगे तो उसे सबसे लगाव हो जाएगा.. चलो अब हंसो और हां.. अभी कोई शादी की बात नहीं प्लीज..


उपासना मुस्कुराकर प्राची को देखती... "ठीक है बेटा कोई शादी की बात नहीं, लेकिन हर्ष जब इंडिया वापस आ जाएगा फिर साल भर के अंदर तेरी शादी..


प्राची:- ठीक है मंजूर मुझे..


दोनो मां बेटी काफी खुश नजर आ रहे थे... प्राची जब रात को अकेली थी, अंदर की गहराइयों से बस इतना ही सोच रही थी... "सब कुछ पहले की तरह होता तो अपने घर से नकुल के लिए झगड़ा भी कर सकती थी... लेकिन अब"…


प्राची को वापस दिल्ली लौटने मे देर हो गई, और इधर तबतक नकुल दिल्ली से वापस लौट आया था... लगभग महीने दिन हो गए थे लेकिन प्राची लगभग नकुल से कटी हुई थी...


नकुल फोन करे या टेक्स्ट, जवाब एक ही आता... "लिटिल बिट बिज़ी, कॉन्टैक्ट यू लैटर…" नकुल को भी समझ में आ रहा था कि प्राची उसे खुद से दूर रखने की कोशिश कर रही है.. और यही बात सोचकर वो हसने लगता... खुद से ही कहता... "चीजें इतनी भी जटिल नहीं होती पागल, जितना खुद सोच सोचकर उसे हम जटिल बना देते है...


रैनी सीजन ही था.. बोले तो भादो का महीना.. काम धंधा लगभग मंदा ही था, तब प्राची ने कुछ दिन यूके घूमकर आने की सोची.. प्राची के पिता को जब यह बात पता चली तब उन्होंने कहा कि वो या उसकी मां अभी नहीं आ सकते इसलिए अकेले ना जाकर नकुल को साथ लिए जाओ..


प्राची बहुत कोशिश की नकुल को टालने की, लेकिन अंत में मजबूरन उसे हां कहना ही परा… फ्लाइट में दोनो ने साथ उड़ान तो भरी थी, लेकिन प्राची किसी कंपनी के मालकिन की तरह बिल्कुल अभिमानी अभिव्यक्ति जताती हुई, बिल्कुल ख़ामोश और मैगज़ीन में खुद को घुसाए हुई थी..


प्राची, नीचे ब्लैक कॉलर की महंगी लोअर, ऊपर स्लीवलेस छोटी व्हाइट टॉप, जिसमे उसके पेट 2 इंच तक दिख रहे थे और ऊपर एक ब्लैक कलर का जैकेट डाले हुई थी.. प्राची मैगज़ीन को आगे रखते अपने जैकेट उतारकर किनारे रख दी और आराम से अपनी आंखों पर पट्टी लगाकर लेट गई..


प्राची स्लीवलेस टॉप मे लेटी थी नकुल ठंडी आहें भरते, धीमे से कहा... "चेहरा छुपाकर जो भी दिखा रही है, बहुत मस्त है"…


बात इतनी जोड़ की थी कि प्राची के कानो तक पहुंच गई, आंखो की पट्टी हटाकर वो ऐसे घुरी की मानो अभी खा जाएगी... और बिना कुछ बोले अपना जैकेट उठाकर अपने सीने के ऊपर रखकर, आंख मूंदकर सो गई..


गहरी रात हो चुकी थी, सभी यात्री लगभग सो रहे थे.. प्राची को हल्की घुटन सी मेहसूस होने लगी और वो अपनी आंखे खोलकर पहले कुछ देर तक तो लंबी-लंबी श्वांस ली.. तभी प्राची की नजर नकुल पर गई, जो उसका हाथ अपने हाथ में थामे सुकून से सो रहा था..


कितना शांत और प्यारा दिख रहा था. प्राची आहिस्ते से अपना हाथ निकाली और कुछ पल तक उसे देखती रही.. नकुल को निहारते कब उसके हाथ उसके गालों पर चले गए उसे खुद भी नहीं पता..


लेकिन जैसे है नकुल, नींद में थोड़ी खलल के कारन अपना चेहरा हल्का हिलाया, प्राची झट से अपना हाथ हटा ली, उसका ध्यान टूटा और खुद मे ही "नो नो" कहती सीधा बाथरूम मे घुसी..


अंदर घुसते ही प्राची को लगा कि कोई उसके साथ घुसा.. वो झटके से पलटी, तभी नजरो के सामने नकुल... "बाहर जाओ अभी"… प्राची आखें दिखती हुई उससे धीमे से कहने लगी..


नकुल चुपचाप खड़ा रहा.. प्राची इस बार थप्पड़ मारकर कही बाहर जाओ.. नकुल फिर भी खड़ा रहा.. 4-5 बार वो नकुल के सीने पर हाथ चलाती हुई कहने लगी... नकुल उसके करीब गया और आहिस्ते से अपने होंठ आगे बढ़ाकर शांत खड़ा हो गया..


प्राची उसे मारती हुई शांत खड़ा देखती रही.. कुछ पल बाद जब नकुल की आंखे खुली तब प्राची वहां से गायब हो चुकी थी.. नकुल थोड़ा मायूस होकर बाहर आया तब पता चला कि प्राची निकालकर दूसरे वाले बाथरूम में पहुंच गई थी..


प्राची की ब्रा कुछ ज्यादा ही टाइट लग रही थी इसलिए उसे श्वांस लेने मे हल्की सी घुटन हो रही थी.. नकुल जब आंख मूंदकर खड़ा हुआ तब प्राची निकलकर दूसरे बाथरूम में घुस गई और फटाफट ब्रा के स्ट्रिप को पीछे से ढीला करके वापस अपनी जगह पर आ गई..


जब वो वापस आयी, उसके सीट पर एक पन्ना परा था जिसमे सॉरी लिखा हुआ था और नकुल अपने चेहरे को ढक कर लेटा हुआ था.. प्राची काफी देर तक नकुल के ओर ही मुड़ी रही लेकिन नकुल के ओर से कोई हरकत नहीं हो रही थी...
nice update ..upasna menka ko apni bahu banane ka soch rahi hai par caste alag hai ..aur prachi ke liye apni hi caste ka ladka dhundkar rakha hai aur nakul ka matter jab prachi ne chheda to prachi ko keh dala ki uski shadi apne caste me hi hogi .
ab prachi nakul se dur rehne ka soch rahi hai ,par dekhte hai kitne waqt tak 🤔🤔..
 

eternity

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अध्याय 16 भाग:- 1 (परिणाम और भागती जिंगदी)




सुबह के 5 बजे संगीता की विदाई हो गई। ठंड की सुबह लगभग रात सी ही दिखती है। संगीता के विदाई के साथ ही, उसके बंगलौर से आए सभी दोस्त भी निकल गए क्योंकि सबकी पटना से फ्लाइट थी..


सबसे आखरी में ऋतु ही निकली.. वो मुस्कुराती हुई पहले मुझसे गले मिली फिर प्राची दीदी से और सबसे अंत में नकुल के पास पहुंचकर... "मेनका"..


मै जैसे ही उन दोनों के ओर मुड़ी, ऋतु नकुल को टाईट हग करके, मुझे आंख मारी और मेरे ही सामने नकुल के होंठ को अपने होंठ से छुकर बाय-बाय करती निकल गई..


मेरा तो मुंह खुला का खुला ही रह गया. नकुल मुस्कुराते हुए... "दोनो मुंह बंद करो, मच्छर घुस जायेगा"…


जब मुड़कर देखी तो प्राची दीदी भी अपनी आखें बड़ी किए उसे देख रही थी... मै, नकुल को घूरती... "ओय ये सब क्या था"..


नकुल:- अब वो किस्स करके गई, और क्लास मेरी लगा रही.. जाने भी दो उसे.. तुम दोनो को चिढ़ा रही थी..


प्राची दीदी:- और तुझे मज़े दे रही थी, क्यों..


मै:- छोड़ो भी इन टेम्पररी गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड को, यहां ध्यान दो... मै आज बहुत खुश हूं.. भाई तू दूर क्यों खड़ा है पास आ ना..


जैसे ही नकुल मेरे पास आया उसे खींचकर ऐसा थप्पड़ दी कि प्राची दीदी के मुंह से "आव बेचारा" निकल गया और नकुल का गाल लाल. फिर दोनो के बीच आकर मैं दोनो के कंधे पर हाथ रखती, पहले नकुल के गाल को चूम ली, फिर प्राची दीदी के... "मै बहुत खुश हूं.. बहुत बहुत बहुत खुश हूं"..


प्राची दीदी... नकुल चाय पिलवा दे तो बड़ा मज़ा आ जाए..


नकुल वहां के हलवाई को बुलाकर उसे 100 का नोट दिया और वहां मौजूद सबके लिए चाय बनाने बोलकर, हमे विवाह मंडप वाले हॉल में लेकर चल दिया.. अंदर पहुंचने के बाद बाहर के ठंड का एहसास हुआ हमे...


जैसे ही हम तीनो बैठे, नकुल हंसते हुए कहने लगा… "अपने बदले के लिए तूने कितनों की लंका लगा दी मेनका"..


मै:- भुल गए क्या बोली थी, यदि इसी टॉपिक पर बात होनी है तो मै जा रही हूं...


प्राची दीदी:- नकुल, मेनका सही कह रही.. वैसे मेरी एक जिज्ञासा है प्लीज उसका जवाब दे दे बहन। क्या मेरे साथ कुछ ऐसा होता है जैसा नकुल के साथ हुआ, तो क्या तुम मेरे लिए भी इतना करोगी..


मै प्राची दीदी को मुस्कुराकर देखती हुई... "दीदी कोई मेरे भाई को इस स्थिति में ला खड़ा किया था, कि वो मुझसे दूर चला जाता... मेरा नकुल मुझसे दूर... इस बात को सही करने के लिए मै किसी भी दूरी को तय कर सकती हूं, और ये मै उन सबके लिए कर सकती हूं जिसे मै खुद से दूर जाते नहीं देख सकती"…


अपनी बात कहकर मैंने नकुल को फिर एक जोरदार थप्पड़ चिपका दी... एक बार फिर प्राची दीदी अपनी आखें सिकोड़ती "आव बेचारा" की.. और एक बार फिर नकुल का गाल लाल था... "मेनकाआआ, अब ये क्यों"


मै:- कुत्ता कहीं का, मुझे जब-जब ये बात याद आएगी की तूने शुरू से मुझसे सब कुछ छिपाया, और हमे छोड़कर भागने के फिराक में था, तब-तब थप्पड़ मारूंगी.. याद रख घर पर भी ये कहानी जब कहूंगी और मुझे ये बात फिर याद आएगी, तब तुझे मारूंगी...


प्राची दीदी:- बस भी कर ना रे.. तेरा तो लाडला भतीजा है ना..


मै:- लाड प्यार कुछ ज्यादा ही हो गया दीदी, इसलिए तो बिना सोचे कुछ भी करने जा रहा था... ये भी ना हुआ कि बात कर ले.. कितना अखड़ा था मुझे आपको अंदाजा भी है.. बस ये सदमे में था और मुझे बदला लेना था. इस बात के कारन कुछ कही नहीं तब..


नकुल:- अरे पागल मै कहीं नहीं भागने वाला था, बस उस वक्त कुछ सूझ नहीं रहा था.. अब जानती तो है कि जब दिमाग काम नहीं करता तो एक के बाद एक गलतियां हो ही जाती है..


मै:- एक थप्पड़ और मारना रह गया, एक और बात याद आ गई..


प्राची दीदी:- कौन सी...


मै:- ये कुता भरे कॉलेज ग्राउंड में मुझसे चिल्लाकर कहा था कि आज मेरे साथ क्लास बंक करके जा रही, कल किसी और के साथ जाओगी...


प्राची दीदी:- नकुल...


नकुल:- अरे हो गया छिलाई, अब माफ कर दे ना.. प्लीज प्लीज प्लीज..


वो मेरे गोद में सर रखकर मेरे पेट ने गुदगुदी करने लगा.. मै भी हंसती हुई बस-बस करने लगी.. तभी बाहर से एक लेबर चाय का जग लेकर पहुंच गया और कप मे चाय उरेलकर चलता बना...


हम तीनो भी पूरी रात के जागे थे, ऊपर से खूब नाचे.. चाय पीकर हम तीनों भी निकले.. प्राची दीदी हम दोनों से गले लगकर कहने लगी.. आज शाम मै भी दिल्ली के लिए निकल रही हूं... दोनो अपना ख्याल रखना.. और नकुल वादा तो याद है ना".. नकुल भी मुसकुराते हुए हां कहा और वहां से हम तीनो निकल लिए..


मै और नकुल गांव के रास्ते पर थे, तभी नकुल अपने पॉकेट से एक मोबाइल निकालकर, कार के डैशबोर्ड पर रखते... "जानती है ये किसका मोबाइल है"..


मै:- किसका..


नकुल:- उसी का, जिसका तूने सर फोड़ दिया..


मै:- हेय भगवान, तुने चोरी की..


नकुल:- नाह ! डकैती करवाई..


मै:- कैसे..


नकुल:- जब तू जयमाला स्टेज पर कहीं ना ऊपर देख कोई है तो नहीं। तभी मै समझ गया था कि कुछ तो बात है.. उसी के कुछ देर बाद वो लड़का जिसने तुझे छेड़ा था, अपना मोबाइल हाथ में घुमाते नीचे आया..

उसी समय मैंने अपने 2 लोगों को पैसे दिए और सीधा बोल दिया... मौका देखकर छीन लेना मोबाइल.. छीनते क्या, उसे हॉस्पिटल ले जाते वक्त गायब कर दिया..


मै:- तो डकैती कैसे हुई.. हुई तो चोरी ही ना..


नकुल:- हां लेकिन उन्हे मैंने पैसे तो डकैती के दिए, तो मेरे लिए डकैती ही हुई ना..


मै:- आह मज़ा आ गया अब तो... इस मोबाइल का सॉफ्टवेयर उड़ाकर ब्लैंक कर देना और फेंक देना मोबाइल..


नकुल:- वो सब रात को ही हो गया.. जीवक्ष (शॉपिंग मॉल का स्टाफ) के पास रात को ही भिजवाकर, उसके माथे दे दिया था काम.. विदाई से कुछ देर पहले मोबाइल मेरे हाथ में पुरा ब्लैंक होकर आया है..


मै:- हां तो मुहरत देख रहा है क्या? फेंक दे उस चोट्टे के मोबाइल को...


"हां बस अभी ही"… और इतना कहकर उसने मोबाइल फेंक दिया. कितना ख्याल रहता है ना नकुल को भी मेरी छोटी-छोटी बातों का... वैसे इतनी भी ज्यादा इमरजेंसी नहीं थी कि ठंड के समय 1 बजे रात को किसी के घर का दरवाजा खुलवाया जाए... फिर वो इंसान भी किसी दूसरे का दरवाजा खुलवाकर, आपका काम करवाए और सुबह के 4 बजे तक आपका काम हो जाए... यही नकुल है, काम खत्म करके चैन कि नींद सोने वाला...


वैसे रात भर के जागे हम दोनों ही थे, ऊपर से नाच नाचकर बदन पुरा टूट गया था.. मै तो गांव पहुंचते ही अपने कमरे में घुसी और सीधा 3 बजे दरवाजा खोली... भूख बहुत तेज लगी थी लेकिन अभी कुछ भी खाने को नहीं मिला..


कारन था कल रात को हुआ वाकया और उस कांड मे 2 लोग आत्महत्या कर चुके थे.. एक थे माखन मिश्रा, नीलेश के पिता.. और दूसरा प्रवीण मिश्रा, गिरीश के पिता.. माखन चाचा के सबसे बड़े बेटे मुकुल भैया को खबर मिल चुकी थी और वो मुंबई से कल तक लौटते. चिता को मुख अग्नि देने तक कुछ भी नहीं पकता..


घर में केवल सोभा भाभी थी, वो भी इसलिए क्योंकि मै घर पर थी... खैर उस परिवार के लिए मेरे कोई इमोशन बचे नहीं थे. नीलेश की हालात के पीछे उसके माता पिता का ही पुरा हाथ था, ऐसा मेरे मानना था...


बहरहाल मुझे भी आखरी विदाई तो देनी ही थी, इसलिए मै, सोभा भाभी के साथ नीलेश के घर पहुंची. कुछ देर रुककर मै वापस चली आयी.. नहाकर फ्रेश हुई ही थी कि दरवाजे पर आशा भाभी खड़ी थी...


चूंकि नकुल का परिवार बेटी पक्ष का था, इसलिए सभी घरों के लिए खाना नकुल के घर से ही आ रहा था.. आशा भाभी मुझे अपने घर ले जाकर खिलाई और बीती रात की अधूरी बात पूछने लगी कि मुझे संगीता और मिथलेश के बारे में क्या पता था..


"भाभी, आप खिलाने बुलाई हो या अपने सवाल से टॉर्चर करने"… मैं खाती हुई जवाब दी...


"हां खा ले चैन से खाना, पूछ क्या ली, तेरे लिए टॉर्चर हो गया.. तू जाग गई है तो सब पहुंच ही रहे होंगे..." भाभी ताने देते कहने लगी..


मै:- क्यों ?


आशा भाभी:- तू नहीं जानती है क्यों? सुबह से न्यूज भी नहीं देखी क्या... अपना ही जिला और अपना ही गांव पूरे चैनल पर छाया हुआ है... एक ही रात में 58 गिरफ्तारियां हुई है... मामला यहां के कोर्ट से सीधा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है... हर जगह केवल अपना डिस्ट्रिक्ट, अपना गांव और एसपी कुमार आनंद ही छाया हुआ है... सब उसे रियल सिंघम कहकर पुकार रहे...


मै:- हां तो जाकर सिंघम से मिलो ना...


मै बोलकर निवाला मुंह में ली ही थी कि पीछे से मां पहुंची... "तू यहां क्या कर रही है"…


मै नीचे बोरे पर बैठकर पल्थी लगाकर खा रही थी. हाथ में परे निवाले को प्लेट में डालकर खड़ी होती... "चलो कहां चलना है, यदि यहां नहीं होना चाहिए था तो मुझे"..


मां:- ऐसे खाना को बीच में छोड़कर उठ क्यों गई..


मै:- क्योंकि पागल हूं ना मै.. इसलिए उठ गई.. भेज दो रांची मुझे.. उससे भी ना हो तो आगरा भेज दो…


आशा भाभी:- तू इतना गुस्सा क्यों हो रही है.. तू आराम से खा हम रुके है…


मै:- नाह मै तबतक नहीं खाऊंगी जबतक दोनो मेरे नजरो के सामने से दूर ना हो जाओ... वैसे मेरा भाई कहां है..


मां:- किसकी बात कर रही है, महेश की या मनीष की..


मै:- माफ करना, मेरा प्यारा भतीजा कहां है..


मां:- वो नालायक फरार है.. जब भी फोन करूं तो कहता है कि दीदी जब जाग जाए तब बुलाना.. अकेले मै ये कहानी नहीं बता पाऊंगा.


बहरहाल हर किसी के दिल का हाल मै समझ रही थी.. सबको जानना था कि कल की हुए घटना मे हमारी क्या भागीदारी थी... शायद कहानी नकुल ने पहले से तैयार कर ली हो, क्योंकि हम ये कहानी पूरी उनको नहीं बता सकते थे...


खैर जब सब लोग जमा हो गए तो मै और नकुल ने मिलकर उनसे इतना ही बताया की अर्पिता की कहानी सुनकर हमने बस एसपी साहब को उन लड़कियों के फोटो दिए थे, जनके साथ नीलेश को देखा था हमने... बाकी की कहानी तो आप जानते ही हो...


सबने हमारी खूब प्रशंसा की लेकिन एक और घटना का भेद आशा भाभी ने सबके सामने खोल दिया... रात को हुई दिव्यांश के सर फोड़ने वाली घटना...


अब उसके जवाब में मै क्या कहूं.. मैंने उनसे बताया की वो लगातार बदतमीजी कर रहा था.. मुझे छेड़ रहा था. नकुल ने उसे वार्न किया, प्राची दीदी समझाई और जब वो नहीं माना और लगातार छेड़ता ही रहा, तब मजबूरन मुझे ये काम करना पड़ा..


पापा और महेश भैया तो तुरंत आशा भाभी को बोले, संगीता की मां को फोन लगाकर उसका पूरा पता लेने। लेकिन मनीष भैया सबको शांत करवाते हुए कहने लगे, मेनका ने उपचार कर दिया उसका.. ज्यादा खींचने की जरूरत नहीं है इस बात को....


अगले कुछ दिन तक पुरा ड्रामा चलता रहा.. एक ओर तो गांव का ड्रामा था, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. वहीं दूसरी ओर नीलेश और गिरीश को एक घंटा केवल उनके पिता के मुख अग्नि के वक्त शमशान लाया गया और फिर उन्हे दिल्ली ले जाया गया...


गांव के ड्रामे मे था नीलेश का उठाया हुआ एडवांस पैसा, जो उसने प्लाई फैक्टरी के कंपनी से लिया था.. जिसके बराबर हिस्सेदार था गिरीश और आंशिक हिस्सेदार था नंदू.. वहीं राजवीर अंकल से जमीन खरीदने के लिए भी 4 करोड़ का बाजार से कर्ज उठाया गया था, जिसके जमीन के पेपर और कर्ज के दस्तावेज कर्ज देने वालों के पास थे..


नंदू का सारा कर्ज तकरीबन 4 करोड़ का था, जिसे उसके घर वालों ने उसके हिस्से की जमीन और संपत्ति बेचकर चुका दी... फिर भी 1.60 करोड़ का शेष राशि बच गया था, जिसके लिए उनके घरवालों ने हाथ जोड़कर साफ कह दिया कि नंदू की संपति जितनी थी, उतना बेचकर कर्ज का पैसा चुका दिया, बाकी उससे समझ लीजिए...


नंदू का तो फिर भी कम था, नीलेश और गिरीश का कर्ज तो और लंबा लंबा था. क्योंकि दोनो ही 40% के पार्टनर थे और पुरा धंधा पिता के नाम रजिस्टर्ड कंपनी के नाम से ही कर रहे थे.. एक तो उसका प्लाई फैक्टरी का एडवांस पैसा और दूसरे जमीन के लिए कर्ज, कुल मिलाकर 10 करोड़ की राशि थी... इतनी बड़ी रकम पुरा करने के चक्कर में प्रवीण मिश्रा और माखन मिश्रा के बैंक अकाउंट सिज करना परा... नीलेश और गिरीश का अकाउंट सिज़ हुआ.. फिर पूरे जमीन का मूल्यांकन हुआ…


प्लाई फैक्टरी के एडवांस के पैसे तो प्रवीण मिश्रा और माखन मिश्रा के बैंक अकाउंट और साथ ही साथ उनके बेटे के अकाउंट से तो सैटल हो गया था, किन्तु राजवीर अंकल के जमीन के लिए उठाया गया पैसा, उनके जमीन और घर को बेचकर पुरा करना परा...


माखन चाचा के बाकी बेटे केवल अपना सिग्नेचर करके वापस अपने सहर को लौट गए. गांव में अब उनके लिए कुछ भी नहीं बचा था। वहीं माखन चाचा के बड़े भाई कुमोध चाचा, अपने रिटायरमेंट की जिंदगी गांव में बिताना चाहते थे, इसलिए कर्जदारों से वो अपने पुरखों की जमीन वापस लेकर, उसके पैसे का भुगतान कर दिया था...
Sarvpratham welcome back nain11ster bhai.
Khub surat parstuti. lekhani kamal ki hai lekin mera manana tha ki Menaka ka charector samay ke saath dire dhire mature hogi lekin mai shayad kathanak ko galat aank gaya. Menaka aur Nakul vastav mai genious hai aur is mayane mai aap ki ye story aapki anya story se milti julti hai.
Mai vastav mai aapke lekhani ka prashanshak hun.
Aap main lekhak hone ki sari khubiya hai. aage ke kisi story main mai chahunga ki aap general sadharn charector ke saath bhi story likhe.

Vastav mai jis taraha Menaka aur nakul ek dusare ko samajh rahe hai aur ek dusre ka support system hai vo dekha kar achchha laga. ye sambandh ab dhire dire chhote saharo main hi simit rah gaya hai.

Aapne jis taraha aapne girls charactor ko develop kiya hai uske liye SADHUVAAD...............................
 

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अध्याय 23 भाग:- 4








प्राची प्यार और मां के बात के बीच ऐसी उलझकर रह गई की नकुल को वो गले लगाकर चूमना भी चाहती थी और उससे दूर रहने की कोशिश भी कर रही थी... सुबह फ्लाइट लैंड हुई, नकुल अब भी मुंह की ढके हुआ था..


प्राची उसे 2-3 बार हिलाकर ऊपर से बैग उठाई और आगे चली गई... प्राची पैसेज से बाहर निकलकर नकुल के आने का इंतजार करने लगी.. और जब नकुल को आते देखी तो… "अब क्या शक्ल भी नहीं दिखाओगे"… नकुल अपने चेहरे को कवर किए हुए थे...


प्राची:- चेहरे से कवर हटाओ, ये एयरपोर्ट है..


नकुल प्राची की बातों को अनसुना करके आगे आगे चलने लगा.. उसी समय एयरपोर्ट सिक्योरिटी वहां पहुंचे और नकुल को घेर लिए... पीछे से प्राची जबतक पहुंचती, एयरपोर्ट सिक्योरिटी उसे अपने साथ लिए गए..


प्राची जाकर पता लगाई तब पता चला फॉर्मल सिक्योरिटी चेक के बाद ही नकुल आ पाएगा.. प्राची अपना और उसका लगेज कलेक्ट करके बाहर निकली.. वेटिंग लौंग मे हर्ष उसका पहले से इंतजार कर रहा था.. प्राची उसे देखकर उसके गले लगती... "कैसा है मेरा भाई"..


हर्ष:- छोड़ो ये सब दीदी, लगता है मेरी पॉकेट मनी बढ़ने वाली है.. सुना है पुणे और मुंबई में मॉल खोल रही, चलो अच्छा है कामयाबी की एक और सीढ़ी मुबारक हो...


हर्ष का व्यंग सुनकर उसका मुंह छोटा हो गया लेकिन वो कुछ बोली नहीं, बस पीछे मुड़कर नकुल के आने का इंतजार कर रही थी... "क्या हुआ ऐसे बार-बार पीछे मुड़कर क्यों देख रही हो"…


प्राची:- नकुल भी साथ आया है.. उसे मना की थी कि फेस कवर मत करो, नहीं माना.. उसे एयरपोर्ट सिक्योरिटी वाले उठाकर ले गए..


हर्ष:- हाहाहाहाहा … गंवार का गंवार ही रहेगा.. इससे अच्छा तो मेनका को साथ ले आती, कम से कम ये सिचुएशन तो पैदा ना होती.. वैसे चाय लोगी या कॉफी..


प्राची:- चाय ही पिला दे भाई..


हर्ष 2 कप चाय लेकर प्राची के साथ वहीं बैठा.. तकरीबन आधे घंटे बीत गए लेकिन नकुल नहीं आया.. तब हर्ष प्राची को टोकते... "चलो पता करके आए की उसे जेल हुई या सेक्योरिटीज वाले कब तक छोड़ेंगे..


प्राची:- गुस्सा मुझ पर है तो मुझे कहो ना जो कहना है.. फालतू मे उन सब को क्यों लपेट लेते हो जो मेरे साथ है...


हर्ष:- ऊप्स !!! सॉरी.. भुल ही गया वो भागने वालों में से नहीं है बल्कि 20 लाख 20 महीने में कवर करके पैसे लौटने वालों में से है... मुझसे बहुत अच्छा..


हर्ष उस वीडियो कॉन्फ्रेंस की बात बता रहा था जिसमे प्राची ने मज़ाक मै कहा था कि नकुल ने जो पैसे गवाए थे वो 1 से 2 साल मे कवर कर लेगा, जबकि हर्ष ऑक्सफोर्ड भाग गया था...


प्राची हर्ष से उलझकर अपना खून नहीं जलाना चाहती थी, फिलहाल इस वक्त तो नहीं ही.. इसलिए वो हर्ष को कुछ भी जवाब देने से अच्छा नकुल का पता करने पहुंच गई.. पता चला नकुल तो 5 मिनट बाद ही एयरपोर्ट से निकल गया था...


प्राची भारी चिंता मे और हर्ष हंसते हुए व्यंग करने लगा... "चिकनी टांगे पर ये मेरा दिल फिसल गया, डार्लिंग ये जादू तेरा मुझ पे चल गया... मस्त गाना है ये राउडी राठौड़ का, तुम सुनी की नहीं"..


प्राची, गुस्से में... "मै गाने नहीं सुनती.. चले हर्ष"…


दोनो भाई बहन फ्लैट पहुंचे.. हर्ष कुछ देर बात करके अपने क्लास के लिए निकल गया और प्राची एयरपोर्ट पोर्ट फोन करके थक गई लेकिन नकुल का पता नहीं चला.. प्राची खुद को ही कोसने लगी थी कि.…. "उसी के अंदेखेपन के कारन ये सब हुआ... नकुल कितनी हसरतों से मुझे देखता रहा और मै दूर करती रही... मुझे समझ में आ गया अचानक कुछ कहे बिना दूर जाना कितना तकलीफ दायक होता है.. नाह !! दूर जाना ही तकलीफदेह होता है.. प्लीज वापस लौट आओ, मै कहीं नहीं जाने दूंगी तुम्हे"…


रात हो चुकी थी, प्राची इस दौरान लंदन के चक्कर काटती रही, एयरपोर्ट के चक्कर काटे, लेकिन नकुल कहीं मिला नहीं.… थक हारकर वो रात के 1 बजे लौटी.. उसका चेहरा बता रहा था कि वो कितना परेशान है, उसके आंखे सुज गई थी रोते रोते, लेकिन जैसे ही वो फ्लैट पहुंची... "पागल हो दीदी तुम, कितना परेशान हूं मै कुछ खबर भी है आपको.. कहां चली गई थी... फोन करो तो फोन भी बंद आ रहा है"..


प्राची:- "तुम्हे फर्क परता है क्या, यदि मै मर भी गई तो.. हां गलती हुई मुझसे, पचता रही हूं कि मैंने अपने भाई को अनदेखा किया… कैरियर और खुद को साबित करने के दौर में सबको पीछे छोड़ गई, किन्तु पिछले एक साल से कोशिश कर रही हूं तुम्हे मनाने की.. लेकिन एक बार भी तुम्हे मेरी फीलिंग दिखी क्या हर्ष..."

"वो नकुल पापा के कहने पर यहां मेरे साथ आया था, और वो सुबह से गायब है.. क्या जवाब दूंगी मै सबको.. तुम बस स्वार्थ मे अंधे बने रहो.. तुम्हे क्या फर्क पड़ता है.. तुम्हे तो बस इस बात से लेना है की लोगों ने तुम्हारे साथ क्या किया.. तुम्हारी बहन ने तुम्हारे साथ क्या किया.. अरे दूसरे क्या करते है उसकी जाने दो.. तुम तो यहां केवल पढ़ने इसलिए आए थे ना की घर के लोग तकलीफ मे ना हो, फिर तुम्हे क्यों नहीं दिख रहा की हम सब अभी से तकलीफ मे है"…


हर्ष प्राची को समेटकर उसके सर को अपने सीने से लगाए... "शू शू शू.. शांत हो जाओ दीदी.. कुछ खायी की नहीं"….


प्राची, खुद को हर्ष से छुड़ाती... "पहले रुला दो, फिर पूछ लो खाना खाई की नहीं"..


हर्ष वापस प्राची को समेटकर उसके पीठ पर हाथ फेरते उसे शांत करने लगा... प्राची को कुछ सुकून सा लगा और उसके आशु वापस छलक आए... हर्ष उसके आशु पूछते... "उम्मीद से पड़े है प्राची सिंह का रोना.. शांत हो जाओ, तुम्हे छोड़कर सबको पता है नकुल के बारे में"..


प्राची हैरानी से हर्ष को देखती... "क्या?"..


हर्ष:- "हां, सच कह रहा हूं.. चाहो तो किसी से भी घर बात कर लो.. उसे ठुद्दी के नीचे बहुत बड़ा कट आ गया था, इसलिए वो मुंह कवर किए था.. एयरपोर्ट प्रबंधन उसे हॉस्पिटल ले गई. घंटे भर बाद जब वो लौटा तब हम वहां नहीं थे, और तुम आउट ऑफ कांटेक्ट हो चुकी थी."

"उसके पास हमारा एड्रेस नहीं था तो वो मुझे ढूंढते ऑक्सफोर्ड पहुंच गया, और वहां उसके कुछ दोस्त मिल गए. इसलिए वो अपने दोस्तों के साथ हफ्ते दिन रहने के बाद वापस आ जाएगा.. उसने मेनका को कॉल करके सारी बातें बता चुका है और वो हम सब को"…


प्राची:- पागल कहीं का.. मेरे साथ आया है तो मेरे साथ रहता ना, अपने दोस्तो से मिलना था तो पहले बता देता...


हर्ष:- छोड़ो भी.. जो 20 लाख अपने आशिक़ी मे चोरी करवा सकता है वो कितना लापरवाह होगा.. जाओ तुम नहा धो कर फ्रेश हो जाओ.. मै खाना गरम करता हूं..


प्राची, हर्ष की बात पर क्या जवाब देती, चुपचाप वहां से चली गई.. बुझे मन से वो खाना खा रही थी.. प्राची को खोए देख, हर्ष एक-एक निवाला उसे अपने ही हाथो से खिलाया... हर्ष का इस तरह से ख्याल रखना, उसे सुकून तो दे रहा था, लेकिन ध्यान नकुल पर ही अटका हुआ था..


10 दिन के प्राची का टूर था.. दूसरे दिन प्राची सोची नकुल से संपर्क किया जाए, लेकिन जिस नंबर से प्राची के मोबाइल पर संदेश आया था, उस नंबर पर जब प्राची ने कॉल की तो एक लड़का अपने परिचय देते हुए कहा कि...


"वो एंड्रयू बोल रहा है और कल एक लड़का हेल्प मांगने आया था, तब उसने अपना मोबाइल दे दिया था.. और अंत में यह भी कह दिया.. नकुल के नाम पर 18 कॉल आ चुके है.. कुछ कॉल तो लेट नाइट आए थे.. लोगों को इतना ना परेशान कीजिए की वो अगली बार से किसी की मदद ही ना करे.."


खैर अब कुछ किया भी नहीं जा सकता था.. प्राची मन मारकर रह गई.. उसकी मनोदशा वही समझ रही थी.. बस खुशी के एक ही बात थी कि हर्ष पहले से ज्यादा ख्याल रख रहा था तो उसे करीब पाकर वो खुश थी..


3 दिन जब निकल गए तब हर्ष ने भी अगले 6 दिन का न्यूनतम क्लास लेकर, वो ज्यादा से ज्यादा प्राची के साथ वक्त बिता रहा था... नकुल 1 हफ्ता बोलकर गया था, लेकिन आठवे दिन पुरा बीतने पर भी जब वो नहीं आया तब हर्ष प्राची को छेड़ते हुए कहने लगा...


"बड़ा ही काम काजी वाइस चेयरमैन ढूंढा है दीदी... यहां आई-कार्ड दिखाकर कहीं बिकनी स्टाफ अपॉइंट करने में तो नहीं लग गया"…


प्राची यूं तो अंदर ही अंदर कुढ़ गई, किन्तु ऊपरी भाव से वो जोड़ की हंसी दिखाती... "क्या पता मुझे, शायद तुझ से ही सभी गुण मिल रहे हो.. तुझे भी तो यहां आकर हमारा ख्याल ना रहा.. ओपन कल्चर मे तू तो यहीं का होकर रह गया"…


हर्ष:- हां बोल लो मुझे ही.. इतने दिन में देखी भी हो किसी को यहां.. वरना मुझ जैसे प्रचलित लड़के की तो कितनी गर्लफ्रेंड होती..


प्राची:- चल झुटे.. तेरे एफबी पोस्ट पर तो किसी लड़की के एक भी कॉमेंट आते ही नहीं.. और खुद को प्रचलित कहता है.


हर्ष:- मैंने अपने प्रोफाइल मे किसी को एड ही नहीं किया दीदी, कमेंट क्या करेंगी..


प्राची:- अच्छा मेनका को तो खुद तूने सामने से रिक्वेस्ट भेजी थी..


हर्ष:- अब पहचान वालों की एड ना करूं क्या.. वो मेरे साथ दिव्या पढ़ती थी, उसे भी तो मैंने खुद रिक्वेस्ट भेजी थी.. ये ग़लत है कि नहीं जिन्हे हम जानते ही उन्हे रिक्वेस्ट ना भेजे..


प्राची:- हां लेकिन पहले दिव्या एड होती तब ये बात तो मान भी लेती..


हर्ष प्राची को घूरते हुए... "आप मुझ पर नजर बनाए हो"..


प्राची:- नहीं तू जब नहीं मिलता ना तो तुम्हे एफबी और व्हाट्स एप पर ढूंढा करती थी.. शयाद यहां प्यार से बात कर ले मेरा भाई... बस इसी चक्कर में सब नोटिस होते चला गया...


हर्ष:- सॉरी दीदी.. अब छोड़ो भी..


दोनो भाई बहन बात करते हुए अपने संबंधों को सुधारते एक दूसरे से रूठने पर कितना कुछ मिस कर गए उसी पर मुस्कुराते हुए विचार करने लगे...


नौवे दिन, सुबह के 7 बज रहे होंगे, जब हर्ष के कॉलोनी के पार्क में कई लड़के लड़कियों की भिड़ लगी हुई थी.. भीर से किसी को क्या मतलब, लेकिन हर्ष जब अपने पार्क के ओर देख रहा था तभी उसकी नजर नकुल पर गई...


हर्ष चिल्लाकर प्राची को बुलाया.. प्राची भी बालकनी पर खड़ी होकर जब दाएं ओर के भिड़ पर नजर डाली, उसके आखों पर यकीन नहीं हुआ.. उस भीड़ में एक भी भारतीय नहीं था और केवल नकुल...


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नकुल पूरी तरह फिरंगी लुक में, फिरंगियों के बीच घिरा हुए था. इतने में देखते ही देखते एक लड़की ने जोड़ से हर्ष को हग करके उसके होंठ पर एक जोरदार चुम्मा लेकर, पीछे हटी.. पूरी भिड़ हूटिंग करने लगी...


हर्ष:- "मैंने झूट कहा था क्या? ये है इस लड़के के 9 दिन यूके मे... इसी केयरलेस की चिंता में तुम थी.. अरे किसी को इतनी अक्ल तक नहीं की गांव में उम्र भर खेती करने वाले लड़के का यूके में कौन सा पुराना दोस्त मिल गया.. और ऐसे आवारा से दोस्ती कौन करना चाहेगा..."

"ये सब तुम्हारी कंपनी के आई-कार्ड का कमाल है जिसके अनेथिकल इस्तमाल से ये भिड़ जुटाई है.. जाओ स्वागत करो अपने नए एंपोल्य का..."


हर्ष की बात जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, प्राची का पारा भी वैसे वैसे बढ़ता जा रहा था... तभी नकुल को लगा बाएं ओर बालकनी से प्राची देख रही, वो एक लड़की को किनारे करके झुककर प्राची को देखा... "दोस्तों, घर मिल गया है.. आप सब का शुक्रिया"…


एंड्र्यू, वही लड़का जिसके मोबाइल पर कॉल आया था... नकुल को गले लगाते... "थैंक्स हमारी बात मानने के लिए, हम टच में रहेंगे"…


नकुल ने उसे हां कहते हुए उसे छोड़ा, और फिर एक एक करके सब उससे गले मिलने लगे.. 4,5 लड़की नकुल से इतनी प्रभावित थी कि उसे प्रपोज करती हुई चूम ली, साथ मे कहती भी गई की "इन केस अगर उसका ब्रेकअप होता है तो उसे कंसीडर करे.."


प्राची तबतक पार्क में पहुंच चुकी थी.. एक बार वो स्टलिश कपड़ों में हॉट लड़कियों को देखी और एक बार खुद को.. वो अभी से डिप्रेशन में चली गई.. 1,2 लड़कियां तो ऐसी थी कि वो जिस लड़के के साथ हो, लड़के के अंदर खुद प्राउड वाली फीलिंग आ जाए.. इतनी खूबसूरत और हॉट गर्लफ्रेंड..


जैसे ही भिड़ छंटी.. प्राची और नकुल की नजरें मिल रही थी... प्राची नकुल का चेहरा लगातार घुर रही थी, और नकुल अपनी जगह खड़ा केवल मुस्कुरा रहा था… तभी उसे एक झन्नाटेदार थप्पड़ परी... "साला संस्कारहीन".. हर्ष ने थप्पड़ मारते हुए कहा..


नकुल की नजर घूमकर हर्ष पर गई... "तुम मेरे संस्कारों को सेर्टीफाय करने वाले कौन होते हो.. तुम्हारे थप्पड़ का जवाब नहीं दिया ये होता है संस्कार.. और भरी सभा में जो बिना किसी कारन जाने थप्पड़ उठा दे, उसे कहते है संस्कारहिन समझे कि नहीं"..


हर्ष:- साला तू मुझे संस्कार सिखाएगा.. 8 दिन तक जो बिना बताए नए लोगों के साथ घूम फिर रहा है..


नकुल:- जुबान संभाल कर जरा हर्ष.. और ये साला-साला क्या लगा रखा है... जाओ अपनी डॉक्टरी करो और पेशेंट कि गू गीजो..


हर्ष:- साले चुतीए, तुझे डॉक्टर और पैथोलॉजिस्ट में अंतर भी पता है..


प्राची:- कुत्तों की तरह झगड़ना बंद करोगे दोनो...


नकुल:- तुझसे बड़ा चुतिय भी कोई होगा, जो किसी के कैजुअल हग को और दूसरे जब अपने इमोशन ओपनली कह रहे हो, तो उसे संस्कारहीन कहता है... इसे कहो चुप रहने.. मेरे संस्कार पर सवाल ना करे..


हर्ष:- हां संस्कारी पुरुष जिसकी गर्लफ्रेंड लोगों को फसाती थी...


नकुल:- तेरी सोच ही घटिया है.. इससे ज्यादा क्या कह सकता हूं...


"क्या बोला तू"… कहते हुए हर्ष ने नकुल के गिरेबान पर हाथ डाल दिया.. नकुल वहां चुपचाप खड़ा रह गया और प्राची को देखते हुए... "जाकर अपनी बहन के आरती उतार लेना.. इतना होने के बाद भी चुप हूं तो सिर्फ उसकी वजह से.. जाकर हॉर्लिक्स पी, और जिम जाकर कुछ ताकत बढ़ा, फिर आना लड़ने.."…


नकुल, हर्ष का हाथ झटकते हुए चुपचाप वहां से फिर से वापस जाते हुए कहने लगा... "कल एयरपोर्ट पर ही मिलता हूं.. थोड़ा तरीका सिखाओ अपने भाई को"…
nice update ..nakul ko chot kaise lagi ..
aur ye harsh kuch jyada hi bol gaya nakul ko uske thappad ka jawab dena chahiye tha ..
 

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अध्याय 23 भाग:- 6








जैसी ही सेल्फी के फ्रेम में आए, नकुल ने प्राची के गालों को चूम लिया... थोड़ी सी नोक-झोंक के बाद नकुल ने बताना शुरू किया की प्राची जब उसे मार रही थी तब उसकी घरी से उसका चेहरा छिल गया था और ब्लीडिंग होने लगी थी..


जब वो एयरपोर्ट सिक्योरिटी के पास पहुंचा तो तुरंत नकुल को हॉस्पिटल भेज दिया गया.. वहां सब चेकअप और ट्रीटमेंट मे लगभग 1 घंटे लग गए.. वापस आया तो प्राची जा चुकी थी... नंबर पर कॉल लगाया तो स्विच ऑफ आ रहा था.. फिर नकुल सोचा कि हर्ष ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में है तो वहां पता लगाया जाए..


लेकिन जब वो हर्ष को ढूंढते यूनिवर्सिटी पहुंचा, तब कुछ अजीब ही उसके नजरो के सामने टकरा गया.. ग्राउंड के एक ओर टेबल के ऊपर 15 मिट्टी का गमला रखा हुआ था और उसके नीचे कई सारे पौधे. वहां लिखा हुआ था सॉइल टेस्ट करके सही पौधों को सही गमले में डाले..


उसी गमले से कुछ दूरी पर कई सारे टेबल लगे हुए थे और बहुत सारे स्टूडेंट मिट्टी को पतले फ्लास्क में डालकर तरह तरह का परीक्षण कर रहे थे... नकुल जब ये देखा तो हंसते हुए वहां पहुंचा और पौधों को उठाकर एक-एक करके सभी गमले मे डाल दिए...


प्रोफेसर और स्टूडेंट नकुल पर चिल्लाने लगे.. तब नकुल ने वहां कहा की "आप एक्सपेरिमेंट कर लो और यदि मैंने गलत पौधे गलत गमले में लगाए हो तो मै दोषी".. 2 घंटे बाद टेस्ट रिजल्ट आया जिसे देखकर सब शॉक्ड हो गए..


वहां के जितने रिसर्चर थे उन्होंने फिर नकुल से जानकारी लेनी शुरू की और नकुल ने अपना ज्ञान साझा किया... "जब किसान खेती करते है तो बहुत सी जगह लैब टेस्ट की व्यवस्था नहीं होती, इसलिए जो जानकर होते है उन्हे पता होता है कि मिट्टी में सल्फर कि कितनी मात्र है, मिट्टी कितनी टॉक्सिक है या नहीं है.. ये मात्र एक प्रेक्टिस की चीज है जो मिट्टी के खुस्बू और उसके अंदर और बाहर के रंग से पहचाना जा सकता है"..


उसकी बातें सुनकर सब हैरान थे और वहां के शिक्षक ने नकुल की डिग्री पूछी तो और भी हैरान ही गए.. उन लोगों ने बहुत रिक्वेस्ट की, नकुल अपना प्रेक्टिकल और थेरितिकल अनुभव साझा करे.. नकुल मान गया और तभी उसने 7 दिन वहां दे दिया...


उसके ज्ञान और अनुभव को देखते हुए ऑक्सफोर्ड बोर्ड के रिसर्चर ने उसे पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री दे दी और नेक्स्ट ईयर पीएचडी के प्रोग्राम के लिए ऑफर भी कर दिया, जिसे नकुल स्वीकार करके नेक्स्ट ईयर पीएचडी के लिए पेपर वर्क कंप्लीट करके, पैसे वाईगौरह जमा कर चुका था..


प्राची की हैरानी की कोई सीमा नहीं थी.. वो इंडियन एजुकेशन सिस्टम को आड़े हाथ लेते हुए कही भी.. "अपना यहां तो तुम्हे ऐसे डिग्री लेने के लिए कोर्ट से चैलेंज करना पड़ता और मुझे यकीन है कि अपने यहां उम्र और पिछले क्लास को ही ध्यान में रखते है.. ज्ञान कितना भी हो गया भाड़ में.."

"तभी क्रीम स्टूडेंट अपना टाइम भारत में बर्बाद नहीं करते.. ये लोग क्यों नहीं फ्री एग्जाम सिस्टम कर देते है... यदि आपको लगता है कि आप 10 साल की उम्र में ग्रेजुएट हो सकते है तो एग्जाम दीजिए.. सोचो ऐसे जीनियस स्टूडेंट तस्वीर मे कितने बड़ा बदलाव ला सकते है, जिन्हे बकवास रूल से उनके पूरे टैलेंट को ही खा जाते हैं"…


नकुल प्राची के आवेश को सुनकर केवल और केवल मुस्कुरा रहा था… लंबी चली इस बातचीत का नतीजा यह हुआ कि एयर होस्टेज को आकर कहना परा की प्लीज़ चुप हो जाइए, दूसरे पैसेंजर को परेशानी हो रही है...


बहरहाल समय रात के 11 बज गए थे. प्राची गुड नाईट बोलकर सो गई.. लेकिन तभी उसे लगा कि नकुल का हाथ उसके जांघ पर है... प्राची फुसफुसाती... "कुछ घंटे मे हम फ्लैट मे होंगे.. हाथ हटाओ"


नकुल अपना हाथ हटा लेता है.. लेकिन फिर कुछ देर बाद पता चलता है कि नकुल चुपके से उसके सीने पर रखे जैकेट के अंदर हाथ डाल चुका है.. "पागल हो गए हो क्या"…. "चुलबुली, बहुत दिन हो गए फिजिकल वर्क किए.. चलो कुछ मेहनत करते है"… "नो स्टुपिड.. सो जाओ"..


प्राची अंदर ही अंदर हंसती हुई नकुल को पागल कह रही थी.. साथ ही साथ रोमांचित भी हुई जा रही थी कि यदि इसने कहीं बाथरूम मे पकड़ लिया फिर क्या होगा..


कुछ समय बिता होगा जब नकुल के ओर से कोई हरकत नहीं हुई.. प्राची चैन की नींद ली और आखें मूंद ली.. लेकिन इतनी छेड़ छाड़ के बाद अंदर जो हुआ था.. बिना हल्का हुए जाता नहीं..


प्राची कुछ सोचकर कुछ देर इंतजार करने में ही अपनी भलाई समझी और कब उसकी आंख लग गई उसे पता भी नहीं चला.. कितना वक्त बिता वो तो पता नहीं, लेकिन जब आंख खुली तो वो बाथरूम जाने के लिए हड़बड़ा कर उठी..


हां लेकिन ऐतिहातन की नकुल जाग ना जाए.. जब वो कॉरिडोर के आखरी मे पहुंची, तब भी एक बार देखी जरूर की नकुल उसके पीछे तो नही आया.. नकुल पीछे नहीं आया था.. चैन की श्वांस लेकर वो अंदर गई और थोड़ी देर बाद जैसे ही दरवाजा खोला.. कलेजा धक से रह गया और अगले ही पल नकुल उसे धकेल के अंदर कर दिया... "नो नो नो नो.. नहीं नकुल, यहां नहीं"..


नकुल प्राची की बातों को अनसुना कर वापस से दोबारा अपनी आंखे मूंदकर होंठ आगे बढ़ा दिया.. बेचारी बड़ी दुविधा में फंसी, और अंत में अपनी ऐड़ियों को ऊंचा करके नकुल के गले में हाथ डालकर चूमने लगी..


नकुल भी उसके कमर में हाथ डालकर खुद से चिपकाते हुए होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगा.. तभी नकुल हाथ की तेजी दिखाते हुए, लोअर को पैंटी सहित खींच कर नीचे कर दिया.. खुमारी भरी किस्स को तोड़कर प्राची "नो नकुल" कहती, उससे पहले ही उसकी आवाज नकुल के किस्स मे दब गई और नकुल के हाथ प्राची की योनि पर..


प्राची किस्स तोड़कर "नहीं नकुल, नहीं नकुल" करने लगी लेकिन नकुल लगातार उसकी योनि को हाथ लगाते, उसके टॉप को ब्रा के साथ ही ऊपर किया और प्राची के मादक स्तन को मुंह में लेकर चूसते हुए, उसके निप्पल को जीभ से छेड़ने लगा... "आह बेबी नहीं ना.. ईशशशशशशशशश, प्लीज घर पर.. ओहहहहहहहह, आह्हहहहहहहहहह, नहींईईईईईईई, बेबी.. प्लीजजजजजज"..


प्राची बेबसी भरा इल्ट्जा करती रही लेकिन अरमान ने ऐसे पंख फैलाए की उसका विरोध और जिस्म दो विपरीत दिशा में काम कर रहे थे... फिर नकुल ने देर ना करते हुए अपने पैंट को नीचे करके अपने लिंग को निकाल लिया और योनि पर रगड़ते हुए, प्राची के बाएं पाऊं को अपने हाथ में थामकर, पाऊं को थोड़ा फैला दिया और अगले ही पल... "ऊम्मममममममममम, बेबी.. आह्हहहहहहहहह" जैसे ही जलते हुए योनि में पुरा लिंग घुसा.. तेज सिसकारियों के साथ प्राची ने स्वागत किया...


नकुल, प्राची के बाएं पाऊं को उठाए लगातार धक्के लगाता रहा.. दोनो पसीने से तर हो चले थे... "ईशशशशशशशशश, मेरा 2 बार हो गया नकुल.. उफ्फफफफ, ये कौन सा थेरेपी ले रहे हो, मेरी हालत खराब कर दी.. बबी.. मेरे पाऊं आह्हहहहहहहह, प्लीजजजजजज, नोओओओओओ"…


प्राची प्लीज कर रही थी बैठने के लिए उसी बीच नकुल ने निप्पल को दातों तले दबाकर ऐसा खींचा की चींख निकल गईं…


अगले ही पल नकुल ने प्राची को उठाकर वाश बेसिन के स्लैब पर बिठा दिया और खुद कमोड पर बैठ गया.. प्राची नकुल का चेहरा देखकर... "हट बेसब्रे, मेरी इतने दिन की प्यासी थी कि मेरा 2 बार हो गया.. तुम क्या गोली खाकर आए हो"…


नकुल:- अब आ भी जाओ.. बातें तो होती रहेगी..


"जाओ मै नहीं आती"… जैसे ही प्राची ने ऐसा कहा नकुल उसके पाऊं मे फसे लोअर और पेंटी को इतनी तेजी से खींचा की उसे लगा वो ऊपर से खिसकाकर गिरी, लेकिन अगले ही पल नकुल उसके नितम्बों को अपने हथली से थामकर इतना जोर से भींचा की उसकी श्वांस अटक गई.. उससे पहले की प्राची कुछ आवाज निकलती नकुल ने प्राची के होंठ को अपने होंठ मे कैद करके उसके स्तन को दोनो हाथ से मिजने लगा..


प्राची भी तेजी दिखती, नकुल के लंड को अपने हाथ से पकड़कर अपने चूत पर सेट की और उसके ऊपर बैठकर अपनी कमर जोर-जोर से हिलाने लगी..


प्राची अपने पीठ को कर्व करती, उपरी हिस्सा पीछे की.. नकुल भी होंठ को छोकर खुद सीधा है गया और प्राची के पीठ के दोनो किनारे को अपने पंजे ने थामकर तेज-तेज धक्का देने लगा..


उफ्फ योनि ने लिंग के घुसने का वो मादक अनुभव और ऊपर कर्व शरीर पर धक्कों के साथ स्तनों का हिलना.. नकुल पूर्ण जोश में आकर लिंग को योनि में पूरी मस्ती के साथ जड़ तक घुसकर पुरा आंनद उठाने लगा.. धीरे-धीरे प्राची का जोश वापस से चरम पर था.. वो तेज-तेज सिसकारी लेती हुई अपने चरम सुख को एक बार और भोगने को बेताब हो गई… वही हाल नकुल का भी था और उसके भी धक्के की रफ्तार कई गुना बढ़ चुकी थी..


देखते ही देखते कमर से कमर टकराने की थाप और भी जोर हो गई.. सिसकारी इतनी तेज थी कि उस कॉरिडोर के पास वाले सीट तक आवाज जा रही हो… तभी एक मादक चीख और दोनो साथ झड़ने लगे... नकुल ने तो आज पुरा चुर-चूर कर दिया प्राची को..


थोड़ी देर प्राची नकुल के गर्दन मे बांह लपेटे, अपने चरम सुख का आनंद उठा रही थी... फिर नकुल के ऊपर से हटकर उसे सावधानी से बाहर जाने बोली और खुद पहले टिशू से अपनी योनि साफ करके अपने कपड़े ठीक की और मुंह पर हाथ डालकर चुपचाप अपने सीट पर बैठ गई...


"हूह.. कितनी शर्मिंदगी सी मेहसूस हो रही है कुछ पता भी है.. ऊपर से आज क्या खाकर आए थे वो बताओ.. सच सच"…


"अरे यार कौन सा कोई हमे पहचानता है, स्काफ़ डाल लो चेहरे पर"…


"जी नहीं, तुम डालो स्काफ, कमीने हो तुम नकुल.. एक महीना तुम हिलो दिल्ली से फिर बताती हूं, और उन एक महीने में, मै तुम्हे पूरे महीने टीस करके नहीं छोड़ी फिर तुम कहना"…


"बेस्ट ऑफ़ लक, एंड गुड नाइट"…


नकुल अपनी बात कहकर अपनी आंखें मूंद लिया लेकिन प्राची उसके सीने और चेहरे पर अपना हाथ धीमे-धीमे फिराती रही..


अगले दिन दिल्ली लैंड हुए और प्राची ने सच मे नकुल को रोक लिया. जैसा प्राची ने कहा था ठीक वैसे ही उसने किया भी.. लगभग 20 दिनों तक प्राची लिंगरी मे ही मिलती, वो भी इतने सेक्सी की नकुल आहें भरने लगे, लेकिन प्राची हाथ ना आए..


उस टीज करने ने इतना मज़ा आने लगा था कि वो नकुल का झल्लाया चेहरा देखकर मज़ा ले रही थी. 20वें रात नकुल ने चिल्लाकर साफ कर दिया की आगे जो होगा उसके जिम्मेदार वो खुद होगी..


प्राची उसकी बात सुनकर बस "खीखीखीखी" करके हंसती हुई अंगूठे दिखा दी और ताल ठोककर कहने लगी कि जो होगा देख लेंगे... इक्कीस वे दिन.. नकुल ने दिन में ही घर के अंदर के दरवाजों कि छितकिनी और हैंडल लॉक निकलवा चुका था..


शाम को एक बार फिर नकुल ऑफिस में ही था और प्राची उसके ओर देखकर हंसती हुई बाय बाय की और चलते बनी… घर पहुंचकर उसने फिर से टीजिंग लिंगरी पहनी और नकुल का इंतजार करने लगी...


नकुल भी तो पूरे मूड से ही था आज, जिसके बारे में प्राची को कतई इल्म नहीं.. सोफे पर लिंगरी पहने वो नकुल का इंतजार कर रही थी... 8 बजे नकुल का गृह प्रवेश होना था, दरवाजे के बाहर आहट पाते ही प्राची अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ी हो गई.. आज नकुल ने दौड़ लगा दिया सीधा दरवाजा खोलकर अंदर..


प्राची ने जब हैंडल लॉक देखी तो अपना सर पीट ली.. फिर तो हीही और खीखी तबीयत से नकुल ने निकाल कर रख दी... हद तो तब कर दी नकुल ने जब प्राची को लगा कि ये तो ऐनल इंटरकोर्स करने वाला है..


बेचारी मिन्नते करती रही लेकिन नकुल भी नहीं माना.. अंत में जब प्राची बिल्कुल ख़ामोश हो गई, तब नकुल को भी लगा की ज्यादा ना हो जाए इसलिए छोड़ दिया.. प्राची मुस्कुराते हुए शुक्रिया की और दोनो पूरी रात मस्ती करते रहे..


हालांकि प्राची ने वादा किया कि नकुल की खुशी के किए वो ट्राय जरूर करेगी लेकिन थोड़ा वो खुद मेंटैली तैयार हो जाए.. और वक्त होगा सुहागरात की रात..


एक छोटे से उतार देखने के बाद दोनो ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.. मेनका को तो पहले साल मे ही पता चल गया था जब वो वर्मा सर के पास सीए की तैयारी कर रही थी.. की नकुल और प्राची को अपने हिसाब का लवर मिल चुका है हां केवल दोनो के बीच का ऐज डिफरेंस देखकर यह समझ ना पाई की दोनो को आपस में ही प्यार हो गया है..


हालांकि अंत में हुआ वहीं जो मेनका की इक्छा थी.. लेकिन सोच लेना एक बात होती है और जमीनी हकीकत के साथ उसे करना अलग बात.. प्राची और नकुल को उस हालत में देखकर मेनका के तो होश ही उड़ चुके थे.. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे...


ऊपर से हर्ष और नकुल के बीच का कोल्ड वॉर भी किसी से नहीं छिपा हुआ था.. नकुल के साथ पहली ही मुलाकात में हर्ष ने नकुल को इतने अपशब्द बोले थे की नकुल उसे एक बेवकूफ लड़का मानता था जो मेनका के लिए कहीं से भी कतई ठीक नहीं था ऐसा नकुल का मानना था..


और यही वजह थी कि पहली मुलाकात के बाद हर्ष जब भी मेनका के करीब होता नकुल किसी ना किसी बहाने से झगर ही लेता था..
nice update ..nakul ne sirf dekhkar mitti ki parakh kar di aur sabko hairan kar diya ..aur waha pe usko degree bhi di gayi ..
prachi ke saath aeroplane me sex mast tha 😁..
waise ye dono kahani bata rahe the kya menka ko apni ??? ..yaa sirf flashback tha ? .
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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अध्याय 18 भाग:- 3







1,2,3,4,5 सीढ़ियां चढ़ते मै स्टेज पर पहुंची और जैसे ही मै स्टेज पर पहुंची चारो ओर उजाला ही उजाला.. ऊपर से फुल, वो चमकने कुछ सिल्वर लाल गुलाबी पेपर, लगातार बरसते ही रहे...


मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरा रिजल्ट आ गया है.. सभी मेरे करीब ही थे मुझे घेरे... और मै सबके पाऊं छूने लगी.. लेकिन हर कोई मुझे गले लगाकर बस मेरे सर पर हाथ फेर रहे थे...


सब इतने खुश थे कि उन्हें खुश देखकर मेरी आंखें भर आयी.. वो जो राजवीर अंकल ने बताया था.. गौरव करने वाले क्षण, सब अभी वही मेहसूस कर रहे थे.. तभी टीवी ऑन किया गया.. भारत में रात के 12 बजे से ऊपर हो गए थे और नेशनल न्यूज पर आंनद जीजू और मुक्ता दीदी का इंटरव्यू आ रहा था..


दोनो मेरे बारे में बोल रहे थे... वो लोग भी काफी खुश थे.. फिर दिखे हमारे क्षेत्र के नए विधायक वरुण मिश्रा, बोलते-बोलते उनके आखों में आशु आ गए. दिल्ली से हमारे सांसद लियाकत अली भी मेरे लिए बोले.. मेरे घर के सारे लोग उन्हे सुनकर भाव विभोर हो गए...


तभी होटल वाला एक फोन लेकर देते हुए हमे कहने लगा इंडिया से फोन है.. फोन पर मुक्ता दीदी थी जिन्होंने लंदन रिजॉर्ट मे फोन करके पता लगवाया की हम कहां है...


मुझे बधाइयां देती हुई कहने लगी… "फीलिंग प्राउड, अब जल्दी से एक बार अपने सहर और गांव आओ, बहुत से लोग तुम्हे मिस कर रहे है"..


मैंने भी कह दिया बस एडमिशन करवाकर आती हूं वहां.. इससे ज्यादा मुझसे बोला नहीं गया.. मुक्ता दीदी भी कुछ देर पापा से बात करने के बाद फोन रख दी..


इस भावुक क्षण से निकलने मे हमे कुछ वक्त लग गया.. जब सब नॉर्मल हुआ, तब बात होने लगी कि काउंसलिंग कल से शुरू हो जाएगी और एडमिशन तो टॉप आईसीएसआई (ICAI) के कॉलेज में ही चाहिए..


मै सबका मन सुबह ही पढ़ चुकी थी और मै नहीं चाहती थी कि उनका यूरोप टूर बर्बाद हो, पता ना फिर ये बाल बच्चो वाले इंसान, दोबारा यहां आए की ना आए.. भरी सभा में मै खड़ी होती.…


"हेल्लो, हेल्लो, हेल्लो.. सब यहां ध्यान देंगे... मै गांव से पढ़ी, और अपने छोटे से सहर मे कोचिंग लेकर मैंने टॉप किया. सीए की पढ़ाई मै किसी भी इंस्टीट्यूट से कर सकती हूं. कॉलेज टॉप का हो या बॉटम का, सेलेब्स सबका एक जैसा होता है, और डिग्री पर एग्जामिनेशन बोर्ड का नाम होता है ना कि कॉलेज का"..


सब लोग एक साथ मुझे घूरते हुए... "अब ये क्या नया नाटक है.."..


मै:- आप लोग जैसा कॉलेज चाहते है वैसे कॉलेज में मै एडमिशन ले लूंगी.. लेकिन यहां दाव पर मेरी खुशियां लगी है..


मां:- नौटंकीबाज, जल्दी बोल अपनी खुशी..


बाकी सब भी पीछे से... "हां हां बताओ ना"..


मै:- मै यहां से अकेली निकलूंगी, आईसीएआई के कॉलेज में एडमिशन लूंगी... आप लोग हॉलिडे पुरा करके वापस लौटाना और मै आप लोगों के साथ गांव जाऊंगी.. जून से पहले मेरी क्लास शुरू नहीं होगी.. 15 से 20 यहां रहिए, 21 और 22 को फ्रांस घूमिए.. 23 और 24 लंदन में रहिए.. 25 को इंडिया, और 26 को गांव.. मै 26 मई से 29 मई तक गांव में रहूंगी और फिर वापस लौटकर दिल्ली अपने क्लास के लिए.. कोई चू तक ना बोले कि नकुल को लेती जाओ.. मेरी इस खुशी को आप पुरा करोगे और मै आप लोगों की खुशी को.. बोलो मंजूर..


मां:- हां री मेरी टॉपर बिटिया.. "नाउ सी बिकेम बिग गर्ल (now she became big girl)"… ठीक है जा.. अरे हर्ष बेटा तुम्हे कब इंडिया निकालना है..


"हे भगवान इसे तो मै भुल ही गई थी... हे छलिया ये क्या खेल रच दिए.. कहीं मै दिल ना हार जाऊं.. देख लेना अब सब आपके हाथ में है".. अंदर से ये ख्याल आया..


हर्ष:- जी आंटी मै वो अर्थो कॉन्फ्रेंस के लिए परसो इंडिया के लिए निकालने वाला हूं..


राजवीर अंकल:- हां तो तू कल ही मेनका को लेकर निकल जा..


हर्ष:- पापा मै परसो अपने ग्रुप के साथ निकलूंगा और इंडिया मतलब केवल दिल्ली नहीं होता.. पहला कॉन्फ्रेंस मुंबई में है, फिर हैदराबाद, उसके बाद बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी का कॉन्फ्रेंस होगा और अंत में ऐम्स का कॉन्फ्रेंस..


उपासना सिंह (प्राची दीदी कि मां)… यहां से कल तुम मेनका को लेकर दिल्ली जाओगे, उसे फ्लैट तक छोड़कर आओगे.. वहां से फिर मुंबई निकल लेना.. और बाकी मेरे लाल पुरा देश भ्रमण करना.. एक और बात.. तुम्हारा मुख्य कॉन्फ्रेंस तो ऐम्स का ही है.. बाकी जगह तो सुनने ही जाना है.. तो मेरे लाल हो सके तो तुम वीडियो कॉन्फ्रेंस कर लेना.. और मेनका के साथ ही रहना जब तक हम पहुंच ना जाए.. इज दैट क्लियर (Is that clear)..


हर्ष:- मै सिर्फ ड्रॉप करने जाऊंगा.. मंजूर हो तो बताओ.. और ये टिकट कैंसल और नए टिकट मे जो पैसा लगेगा उसे मै अपने पॉकेट से पेमेंट नहीं करूंगा..


प्राची दीदी:- कंजूस कहीं का.. चिंता मत कर वो पेमेंट मै दे दूंगी और अगर तू मेनका के साथ रहा तो हर दिन 100 यूरो दूंगी अलग से..


हर्ष:- नहीं 1000 यूरो..


प्राची दीदी:- 99 यूरो..


हर्ष:- 800 से कम नहीं लूंगा..


प्राची दीदी:- 95..


हर्ष:- मै नहीं जाऊंगा...


प्राची दीदी:- पॉकेट मनी बंद..


हर्ष:- ये तो गले पर चाकू रखकर काम करवाना हुआ..


मै:- बस भी करो दोनो, मै क्या दिल्ली में अकेली पहले कभी नहीं रही क्या? उसी दौरान मै टीवी पर भी आयी थी.. भुल गए क्या.. हर्ष मुझे छोड़कर कॉन्फ्रेंस अटेंड करेगा.. और प्राची दीदी उसे 100 यूरो रोज के हिसाब से देगी.. मै जा रही हूं टिकट बनाकर सोने.. हर्ष तुम अपनी डिटेल भेज देना...


हर्ष:- 10 मिनट यहीं रुको मै टिकट का काम करवा देता हूं..


उसने किसी ट्रैवल एजेंट को फोन किया.. सुबह 7 बजे लंदन, और शाम के 6 बजे लंदन से इंडिया की फ्लाइट टिकट कन्फर्म.. हां लेकिन उसके लिए मेरे अकाउंट से ढेर सारा धन खर्च कर दिया इन लोगों ने..


अगले दिन जब हम लंदन मे थे.. हर्ष को कुछ जरूरी पेपर और कुछ चीजें कॉन्फ्रेंस के लिए चाहिए थी, वो अपने रूम से कलेक्ट कर रहा था.. मै उसका कमरा देख रही थी.. 8 बाय 10 का छोटा सा कमरा था, जिसमे चारो ओर किताबे ही बिछी हुई थी. टेबल पर एक लैपटॉप रखा हुआ था जिसकी धूल बता रही थी कि वो इस्तमाल नहीं होती..


"बिहारी स्टूडेंट जहां भी होते है उनका पढ़ने का तरीका नहीं बदलता"… मेरे व्यंग भरे शब्द..


हर्ष, अपना काम करते.. "जो अपने मूल को छोड़ दे, फिर वो किसका होगा.. जब कोई कहता है कि मै बिहारी स्टूडेंट की तरह रहता हूं.. तुम सोच नहीं सकती कितना प्राउड फील होता है..."


उसके जवाब सुनकर मै मुस्कुराई.. और इधर-उधर बिखरी चीजों को समेटकर एक जगह रखने लगी… तभी हर्ष चिल्लाया... "प्लीज समेटो मत, वरना ढूंढने में दिक्कत होगी"..


मै:- कोई दिक्कत नहीं होगी.. कुछ ना मिले तो कॉल लगा लेना, मै बता दूंगी..


हर्ष:- रंडमली समेट कर रख रही हो और कहती हो की फोन लगा लो..


हर्ष अपनी चेयर से पीछे मुड़कर एक बार किताबों का जायजा लिया.. "अच्छा एबी एनाटॉमी की बुक दो".. मैंने उसे दे दी.. "अच्छा स्ट्रक्चरल यूनिट करके मैंने एक टॉपिक पर लिखा है, पन्ने पर ही हेडिंग"… बात पूरी भी नहीं हुई की सामान हाजिर... उसने ऐसे ही 3-4 टेस्ट लिए..


हम दोनों टेस्ट-टेस्ट खेल रहे थे, इसी बीच धराम से दरवाजा खुला और एक लड़की दरवाजा फाड़कर अंदर आयी. छोटा सा शॉर्ट्स, जिसमे उसके जांघ की पूरी मोटाई पता चल रही थी. ऊपर काले रंग का छोटा टॉप जो वी गला का था, जिसमे उस लड़की स्तन के किनारे के उभार और बीच की गहराई, उसके अति कामुक रूप का विवरण दे रहे थे.. इतना गोरा चेहरा होने के बावजूद भी इतना सारा मेकअप और लिपस्टिक, की लोगों की आखें उसके चेहरे और बदन को ताड़ने पर मजबूर हो जाए..


20-21 वर्षीय इस बाला को मै देख ही रही थी, तभी वो पीछे से, हर्ष के कंधे से अपना पूरा सिना चिपकाती… "क्या कर रहा है मेरा बेबी"..


"हिहिहिहिहिहिही… बेबी…." अनायास ही मेरे मुख से निकला. हर्ष की भी छोटी सी हंसी निकली.. वो लड़की अपने चेहरे पर गुस्से के भाव लाती... एक बार मुझे घूरकर, बड़े ही कामुक अंदाज में वो हर्ष के कानो के नीचे चूम ली.. हर्ष बिना उसपर ध्यान दिए... "शैबा क्या हुआ"..


शैबा:- ये लड़की कौन है, इसे बाहर कहो जाए, मुझे कुछ पर्सनल बातें करनी है...


हर्ष, अपना काम जारी रखते... "तुम यहां खड़ी हो, क्योंकि ये लड़की मेरे साथ मेरे स्टडी रूम मे है, नहीं तो मै अपने स्टडी रूम मे किसी को आने की अनुमति नहीं देता..


मै:- फेकू चंद..


हर्ष हंसते हुए मेरी ओर देखा और अपने दोनो हाथ जोड़ लिए.. इधर वो लड़की शैबा.. "अब जब तुम्हारे प्राइवेट एरिया में आ ही गई हूं तो कुछ प्राइवेट बातें कर लूं"..


हर्ष:- मै तो कब से कह रहा हूं कि कहो… तुम्हे ही मेनका की मौजूदगी खटक रही है...


शैबा:- आई लव यू..


हर्ष:- हाहाहाहाहा.. ये बात तो आजकल लोग माईक लगाकर पूरे कॉलेज के सामने करते है...


शैबा:- हां लेकिन उसके बाद का मुझे सबके सामने नहीं किया जायेगा...


हर्ष:- हम्मम ! 9XXXXXXX53 मेरे पापा का नंबर है, अपने पापा को बोलना बात कर लेने.. एक बार रिश्ता पक्का हो गया, फिर ये लंदन है बेबी.. जहां मर्जी वहां सेक्स करो.. सब एप्रिशिएट करेंगे...


शैबा:- व्हाट ???


हर्ष:- और कोई इंपॉर्टेंट बात करनी है क्या ?


मै:- थैंक्स हर्ष...


हर्ष:- दे कर देखो नंबर … मै भी हर्ष सिंह भदोरिया हूं..


शैबा:- ये तुम्हे अपने पापा का नंबर क्यों देगी...


हर्ष:- इसने तुम्हारे सामने अपनी प्राइवेट बात कह भी दी और खत्म भी हो गई बात... तुम क्यों दूसरों के प्राइवेट बात मे ज्यादा इंटरेस्टेड हो शैबा...


हर्ष अपनी जगह से उठकर उसके गाल को थपथपाते हुए... "चलो शैबा, यहां का काम हो गया.." हर्ष अपना बैग पैक करते हुए कहने लगा...


शैबा:- हर्ष, 2 मिनट जरा रुको ना..


मै:- हर्ष मै बाहर इंतजार कर रही हूं..


हर्ष:- रुक मै भी आया, शैबा, जल्दी से बोल दो क्या चाहिए वरना ये रूम लॉक हो गया तो दोबारा नहीं खुलेगा…


शैबा:- मुझे कुछ टॉपिक समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहे.. अगर वो टॉपिक क्लियर नहीं हुए तो मेरे ग्रेड नीचे आ जाएंगे..


हर्ष:- आज से अगले 15 दिन का पुरा समय उस लड़की का दिया हुआ है, यदि वो राजी होती है तो मै तुम्हे 2 घंटे दे सकता हूं...


शैबा:- कौन है ये लड़की...


हर्ष:- लगता है तुम कौन है और क्यों है, इसी पर अपना वक्त बिताने वाली हो… चलो मेनका हम चलते है, ये थोड़ी कंफ्यूज लग रही है...


जैसे ही हर्ष बाहर जाने वाला हुआ, शैबा, उसका हाथ पकड़कर रोकने लगी... मुझसे पूछने लगी कि क्या वो कुछ समय ले सकती है... मुझे क्या परेशानी हो सकती थी भला, मैंने भी कह दिया हां ठीक है ले लो…


मै बाहर जाने लगी तो हर्ष ने मुझे अपने घर की चाबी थामा दी, जो ठीक इस कमरे के बगल वाला कमरा था... मै उसके 1 बीएचके के छोटे से घर को देखने लगी.. ये लड़के भी ना कभी घर को घर नहीं रहने दे सकते.. पुरा कमरा बिखरा पड़ा था... हां लेकिन यहां मै नहीं समेटने वाली थी कुछ भी, पता चलता की कल को फोन करके पूछ रहा है मेरी अंडरवेयर कहा है.. हीहिहिहिहिही


चलते-चलते मै एक डेस्क के पास पहुंची, जहां एक खूबसूरत डायरी परी हुई थी... डायरी देखकर मेरी जिज्ञासा बढ़ने लगी और मैंने उसे खोल दिया... डायरी के पहले पन्ने पर इंट्रो मे लिखा था...


"मै अपनी जीवन गाथा नहीं लिख रहा जो इसे खोलकर पढ़ लिए और मेरे बारे में जान लिए.. उसके लिए मेरे साथ वक्त बिताना होगा.. बाकी रही बात इसके अंदर क्या लिखा है तो रख दीजिए. क्या लिखा है वो ना तो आपके लिए लिखा है और ना ही आपको समझ आएगा"


"अब तो लगता है खोलना ही होगा"… यही सोचकर मै आगे कर पन्ने पलटी और अंदर का लिखा देखकर मेरी इतनी ही प्रतिक्रिया थी... "हांय, ऐ की है"… दरसअल वो किस भाषा में लिखा हुआ था समझना मुश्किल था..


मैंने काजुअली एक पन्ने की तस्वीर लेकर उसे मुक्ता दीदी को भेज दिया और हर्ष से फोन मांगकर ले आयी.. कुछ देर इधर-उधर की बात करके, उनसे फिर वो तस्वीर की डिटेल पूछने लगी..


उन्होंने कुछ वक्त मांगा और तकरीबन एक घंटे बाद उन्होने कॉल बैंक किया... ये बड़े-बड़े अधिकारी भी ना कितना फॉर्मल होते है.. फोन करती ही मुक्ता दीदी कहने लगी "सॉरी बेटा मै काम मै व्यस्त हो गई इसलिए कॉल ही नहीं कर पाई"…


बताओ यहां सरकारी ऑफिस के चक्कर लगा लगाकर लोगों के चप्पलें घिस जाती है.. बड़ा बाबू आजकल-आजकल करके लोगों के धैर्य के साथ खेल जाता है और उन्हे यदि गलती से किसी ने झुंझलाकर उनका दिया वक्त याद दिला दिया, तब तो आयी शामत. बाबू साफ कह देगा काम नहीं होगा.. लो जी फिर उनके मिन्नतें भी करते रहो… कमाल का होता है ना ये सरकारी दफ्तर...


वैसे जिंदगी में मैंने बस एक ही सपना देखा है.. जैसे हम किसी शॉप मे जाते है और वहां के कर्मचारी कितने प्यार से हमे बिठाकर हमारी इक्छा जानते है और उसके बाद मनचाहे सामान की कितनी वरियटी दिखा देता है... हमारा सरकारी ऑफिस भी बिल्कुल ऐसा ही हो... स्वागत करते बाबू लोग खड़े रहे और पब्लिक को मनचाहे काम करवाने के लिए कई तरह के ऑप्शन हो…


हिहिहिहि मुक्ता दीदी को लाइन पर अटकाकर मै ये सब सोचने लगी और उधर से वो मुझे पुकार-पुकार कर थक गई... मै हड़बड़ी मे उन्हें जवाब दी और अपने खोने के पूरी कहानी बताती हुई कहने लगी.. इसका जवाब मत दीजिए अभी, वो मिलकर बता देना की सरकारी ऑफिस ऐसा क्यों नहीं हो सकता..


वो मेरी बात सुनकर हसने लगी और फिर मुझसे पूछने लगी कि कौन है जो मेरी बहन के आगे पीछे कर रहा इस वक्त... उनकी बात एक इशारा था कि उस पन्ने मे हर्ष ने कुछ मेरे बारे में ही लिखा हुआ था..


मैंने बहुत जिद की उनसे जानने की, कि पन्ने पर क्या पढ़ा, लेकिन वो साफ कहने लगी कि उन्हे पूरी डियारी की कॉपी चाहिए... बहस मे वो जीती और मै हारी.. अरे यार जिलाधिकारी होने का फायदा ले गई... पता ना इतने सारे सटीक लॉजिक कौन उनके दिमाग में डालता है.. बोलती बंद कर दी...


मामला यहां आकर सैटल हुआ कि मै उन्हे पूरी कॉपी भेज दूं, और ये सिक्रेट हम दोनों बहन के बीच रहेगा.. दिल्ली एयरपोर्ट पर मै जैसे ही अपना नेट ऑन करूंगी, वो पूरी डायरी मुझे पीडीएफ मे मिल जाएगी वो भी अपनी भाषा में..


मैंने भी इस होशियार हर्ष की पूरी डायरी चुरा ली, और मुक्ता दीदी को भेजकर आराम से टीवी देखने लगी... ये सब करते हुए तकरीबन 2-3 घंटे बीत गए..


कुछ देर बाद हर्ष भी पहुंच गया, और मै उसके साथ लंदन की शैर करने निकल गई... पहले वो अच्छा लगता था, अब उसके साथ घूमने अच्छा लगने लगा था.. उसकी प्यारी बातें दिल में कुछ-कुछ एहसास करवा रही थी..


बहरहाल हम लंदन से उड़ान भर चुके थे और दिल्ली एयरपोर्ट पर जैसे ही मेरा फोन ऑन हुआ, मुक्ता दीदी अपना काम कर चुकी थी... हर्ष आगे चल रहा था और मै पीछे.. जितने वक्त से हम साथ थे, और उसका एप्रोच मेरी ओर जिस हिसाब से था, प्यारा था.. उसके बाद जब मै उसके डायरी की चुपके से एक झलक मारी.. मुस्कुरा रही थी....
so yeh surprised tha... kya baat hai menka har mein ek step aur aage jaa rahi hai... waise prashansa ki dabedar toh hai woh itni chhoti si umar mein itne bade bade kaam...
so admission ke liye abhi jana... well menka ki request par baaki to tour jaari rahenge.. Par yeh kya... oh ho.. oh ho...akhir Kar kulta upashana bol hi padi..
Oh toh uske sur mein sur milayi hawas ki pujaran Prachi ne bhi...
aur is kutte harsh ko dekho... harami nautanki kar ke aisa dikha raha hai... jaise ushe koi dilachaspee hi nahi menka ko leke..
baat yahi nahi ruki... woh ladki sabi uske sath close hona... yeh bhi planning ki hi hissa hai... taki menka lage ki woh harsh kitna loyal hai... dairy bhi khulla am chhod diya kamine ne... taaki usme likhe jhuthi baat menka padh ke impressed ho jaaye us kutte se..
lekin andar ki baat yeh hai yeh pura Saryanta is kamine family ne hi racha hai.. aur sabse bada kamina woh rajveer.. :D kamina ushe toh chance mile toh menka ki moushi ki upor hi chhad jaaye sare aam... :mad2:
Khair mujhe kya bhaad mein jaaye ye log...
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nain11ster ji :yourock: :yourock:
 

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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अध्याय 19 भाग:- 1





इंदिरा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डा दिल्ली... हमारी फ्लैट लैंड हुई और मै मुक्ता दीदी के भेजे पीडीएफ पर नजर मारकर जैसे ही नजर ऊपर की, बड़े से कप में 2 कप कॉफी लेकर हर्ष ने एक मुझे दिया और एक खुद रखा. कॉफ़ी की चुस्की लेते हुए जैसे ही हर्ष एक कदम बढ़ा… "क्या है ये, जब इतनी भी फुरसत ना हो की बैठकर कुछ आराम से खा पी सको, तो रास्ते में खाने पीन का सामान मत लिया करो"…


मेरी बात सुनकर वो रुका और मुस्कुराते हुए मेरे करीब आकर बैठ गया... लंदन घूमने से लेकर भारत पहुंचने तक हर्ष बहुत ज्यादा बात नहीं कर रहा था, बल्कि मुस्कुराते हुए बस मुझे समझने की कोशिश में जुटा हुआ था...


"क्या है"… हर्ष को देखती हुई मै पूछने लगी..


हर्ष:- मै कुछ समझा नहीं..


मै:- वही तो मै भी समझ नहीं पा रही. यदि जब तुम बात ही नहीं करोगे तो तुम्हारे साथ आने का मतलब क्या है?


हर्ष:- तुमसे बात करता हूं तो तुम हर बात को कहीं और ही जोड़ देती हो.. इसलिए सोच लिया की बात ही नहीं करनी..


मै:- एक बात बताओ, तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुमने मुझे इंप्रेस करने की कोशिश ही ना किए हो..


हर्ष:- हद है फिर से शुरू...


मै:- तुम्हारा फोकस कहीं गायब हो गया है हर्ष.. जाने दो..


हर्ष:- क्या मतलब है तुम्हारा...


मै खड़ी होकर आगे एयरपोर्ट से बाहर मेट्रो के ओर चलने का इशारा करने लगी... हम साथ चलने लगे.. "अब बताओ भी"..


मै:- क्या बताना है...


हर्ष:- वही मेरा फोकस कहीं गायब कैसे हुआ..


मै:- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र हो और इतना नहीं समझ सकते... सोचो हर्ष सोचो..


हर्ष:- मै जा रहा हूं... साला ये पसंद की लड़की बहुत दर्द देती है... ये मेरे ही पापों कि सजा है, जो मुझे मिल रही.. मैंने दूसरी लड़कियों के परपोजल को माना किया इसलिए फुटबॉल की तरह भगवान मुझसे खेल रहे...


मै:- कर्म अपने और दोष भगवान को... अच्छी ईमानदारी है ये तो...


हर्ष सामने खड़े होकर अपने दोनो हाथ जोड़ते.... "मुझे बख्श दो…. नहीं करना तुम्हे इंप्रेस, मार दूंगा अपनी फीलिंग और पूरी उम्र साइंस की सेवा करूंगा"…


मै:- हिहिहिहि... गुड बॉय, अब जाओ और द्वारिका सेक्टर की टिकट ले आओ…


थोड़ी ही देर में हम फ्लैट के दरवाजे पर थे.. पूरे रास्ते हर्ष मुंह पर ताला लगाकर आया... जैसे ही वो दरवाजे पर पहुंचा... "ठीक है मै जा रहा हूं"…


मै, दरवाजा खोलती... "आपकी मर्जी है जी, यदि मेरी इक्छा समझते तो ऐम्स का ही कॉन्फ्रेंस अटेंड करते"..


उफ्फ !!! लड़के का चेहरा तो पुरा खिला खिला सा हो गया... क्या खिली सी मुस्कान आयी थी उसके चेहरे पर... बिल्कुल चॉकलेट की तरह दिख रहा था... हर्ष बिना कुछ कहे अंदर आ गया.. मै उसे कमरे में सैटल होकर फ्रेश होने बोली, जबतक बाहर से कुछ खाने का ऑर्डर करके, मै साफ सफाई मे लग गई...


आधे घंटे बाद मै, हर्ष के दरवाजे पर दस्तक दी और अंदर आने के बारे में पूछने लगी.. उसके सहमति के साथ ही मै अंदर आयी और कमरा साफ़ करने लगी… "काम वाली नहीं आयी क्या?"


मै:- कोई था नहीं तो उसे हमने कहा था पहुंचने एक दिन पहले बता देंगे..


हर्ष:- रहने देती ना.. कल वो आकर कर लेती..


मै:- फुल कुमारी नहीं जो थोड़े से काम से मुरझा जाऊंगी... गांव में इस फ्लैट से बड़ा तो मेरा आंगन है, और उसकी पूरी सफाई मै करती हूं.. हफ्ते में 2 दिन तो गोबर, मिट्टी से आंगन को पोतना भी परता है..


हर्ष:- तुम तो जनियस हो.. तुम तो कुछ भी हो सकती है मेनका...


मै:- और तुम बैठकर बातें बनाओ.. जाकर नहाते क्यों नहीं... 15 मिनट में हॉल में पहुंचो.. मै भी आती हूं नहा धो कर..


हर्ष:- दोनो एक ही काम करने जा रहे है, साथ करते है ना..


मै अपनी बड़ी सी आखें किए उसे घूरती हुई वहां से निकल गई.. बाहर आकर उसकी बात सोचकर ही मेरा चेहरा लाल पर गया… मै तुरंत अपने कमरे में गई और कुछ देर बाद हम खाने के लिए इकट्ठा हुए..


लगातार लंबे सफर के कारन मै खाने के बाद एक छोटी सी नींद लेना चाहती थी... लंबे समय तक फ्लाइट मे बैठे-बैठे ही किसी तरह सोना परा था...


शाम का वक्त था.. हॉल के सोफे पर बैठकर मै और हर्ष बातें कर रहे थे... तभी उसके स्टडी रूम मे हुई फ़ाइल को लेकर बात उठी, वो इतने कम वक्त में मैंने कैसे कर लिया.. अब मै क्या कहूं, ये सब मेरे पापा अनूप मिश्रा का सिखाया हुआ है...


जब मै छठी कक्षा में थी तब से ये बातें ज्यादा याद है.. कुछ भी पेपर ढूंढना हो तो सुबह से शाम लग जाती थी पेपर ढूंढने में.. सामने की रखी चीज भी ना मिले.. और तभी से मै फीइलिंग करना सीखी थी, अल्फाबेट और नंबर के हिसाब से.. उसके बाद कभी परेशानी नहीं हुई.. इस काम का मुझे तो लंबा अनुभव था..


हर्ष काफी प्रभावित दिखा लेकिन मेरे लिए सामान्य बात थी, ठीक उस बंदर कि तरह जिसकी इतनी प्रेक्टिस उसके मालिक करवाते है कि वो सोते हुए भी गुलाटी मारने लगे..


खैर, मै भी जरा सा छेड़ती हुई उससे पूछने लगी कि वो शैबा का क्या चक्कर है, जो लड़की स्टडी रूम के बारे में नहीं जानती वो सीधा आकर किस्स कर रही..


उसे लगा मै जलन के कारन ऐसा पूछ रही.. और यही वो कारन है कि मै ज्यादा पूछती ही नहीं.. लोग अपने मन के विचार ही सवाल के साथ जोड़ देते हैं... हर्ष भी उन्हीं में से एक था, जो सामने से कह दिया... "मुझे पता था तुम्हे जलन हुई लेकिन तुमने जाहिर नहीं होने दिया".. बेवकूफ कहीं का, बात करने का पुरा मूड ही ऑफ कर दिया...


काउंसलिंग की डेट आ चुकी थी, फर्स्ट काउंसिलिंग 17 मय से 20 मय तक कि थी.. हर्ष चूंकि अपने दोस्तों के साथ कॉन्फ्रेंस की बातें और शेड्यूल पूछ रहा था, इसलिए मै अकेली ही नोएडा आ गई...


मै सभी पेपर लेकर कॉलेज पहुंची, और पेपर जमा करके इंतजार कर रही थी... "मां कसम अब खुद को ही गाली देने की इक्छा हो रही है"… कानो मे जैसे ही ये आवाज गई, मेरे उखड़े से चेहरे पर मुस्कान आ गई...


"कुछ लोग तो पहले ही बेवफा हो गए, और बाद में दोस्ती तक नहीं निभा पाए... बेवफा से धोखेबाज तक का सफर, मिलिए रवि अग्रवाल जी से"…


रवि:- मै तो धोखेबाज जो एक फोन तक नहीं किया.. और ये एक साल में बॉम्ब बन चुकी मेनका मिश्रा, उसने मुझसे संपर्क तक नहीं किया.. तो वो दोस्ती की मिसाल हो गई..


मै:- छी, ऐसे घटिया उपमा दोगे तो मै बात नहीं करूंगी तुमसे... वो बॉम्ब वाली बात अच्छी नहीं लगी.. और हां मैं दोस्ती की मिसाल हूं.. मैं गई थी तुम्हारे ऑफिस कई बार, लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में रवि अग्रवाल नमक स्टाफ नहीं था... लोग मुझे छोड़ सकते है लेकिन मैं जिसे अपना मान लेती हूं, उसे नहीं छोड़ती..


रवि:- हां ठीक है, गलती मेरी ही है... मुझे लगा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ही देंगे, लेकिन मुझे सचिवालय मे डाल दिया..


मै, चौंकती हुई... "कहां, दिल्ली सेक्रेट्रिएट"


रवि:- इतना चौंक क्यों रही हो.. तुम जैसा सोच रही हो वैसा माल खाव डिपार्टमेंट नहीं है.. दिन भर फाइल देखते देखते दिमाग खराब हो जाता है..


मै:- चल झूटे, मै मान ही नहीं सकती.. वो नीलेश का चाचा, माधव मिश्रा, सेक्रेट्रिएट से रिटायर्ड आदमी, 20 से 30 करोड़ की संपत्ति बना चुका और तुम कहते हो माल ख़ाव डिपार्टमेंट नहीं...


रवि:- हर डिपार्टमेंट मलालामाल एक्सप्रेस नहीं होता, बाय दी वे कंग्रॅजुलेशन (by the way congratulations)…


मै:- हाथ हटाओ मै अपने गांव की लड़की हूं, लड़को से हाथ नहीं मिलती..


रवि:- एक बात जो कभी नहीं बदलती और वो हर जिनियस स्टूडेंट मे पाया जाता है..


मै:- क्या???


रवि:- सभी पागल होते है.. और तुम तो एक सर्टिफाइड पागल हो..


मै:- शुक्र करो कॉलेज है वरना क्या टूटता तुम्हारा, मुझे भी नहीं पता...


नवंबर 2011 के बाद आज लगभग डेढ़ साल बाद मै रवि को देख रही थी... पहले लड़का की तरह लगता था, लेकिन अब पुरा शरीर भरा हुआ था, और किसी ऑफिस के एम्प्लॉय कि तरह पुरा जवान मर्द नजर आ रहा था..


पूछने पर पता चला कि उसने अपना ग्रेजुएशन पुरा कर लिया और आईसीएआई मे डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम के लिए आया है.. सीए के फूल टाइम कोर्स की उसकी अपनी प्लांनिंग थी, और ग्रेजुएशन के बाद इंटरमीडिएट कोर्स में उसे एडमिशन के लिए बुलाया गया था..


हम दोनों ही एक बार फिर एक ही कॉलेज से एक ही क्लास में एडमिशन ले रहे थे, फर्क सिर्फ इतना था कि मुझे क्लास अटेंड करने पड़ते और उसे नहीं... खैर लंबे समय के बाद मिल रहे थे.. पूरे काउंसिलिंग मे वो साथ रहा उसके बाद हम कॉफी पीते हुए पुरानी बातें करने लगे..


मिलकर अच्छा लग रहा था रवि से.. तकरीबन शाम के 4 बजे वो अपने रास्ते और मै अपने रास्ते चल दी... लौटकर आयी तब हर्ष अपने कमरे में अपने आईपैड से चिपका हुआ किसी के भाषण सुन भी रहा था और कुछ लिख भी रहा था... "तुमने दिन का खाना खाया"..


हर्ष, बिना ध्यान भटकाते... "हां खा लिया, तुमने बाहर लंच नहीं ली हो तो किचेन से खाना गर्म करके खा लो, और जाते हुए दरवाजा लगा देना.."


मै उसके हाल पर छोड़कर किचेन में चल दी.. यूं तो कॉफी हाउस में मैंने कुछ-कुछ अल्पाहार लिया था, लेकिन हल्की हल्की भूख लग रही थी... "नॉट बैड हर्ष...".. लड़के ने किचेन मे खाना भी पकाया और हर सामान अपनी जगह रखी हुई थी..


खाना भी उसने अच्छा ही बनाया था... मै खाकर वापस हर्ष के कमरे में गई और बिना दिस्ट्रब किए.. "हर्ष, मै मॉल जा रही हूं, आने मे देर हो जाएगी, यदि मन ना लगे तो मॉल चले आना"..


मै इतना कहकर दरवाजा लगा दी और मॉल के लिए निकल गई.. पुरा हिसाब किताब और रिक्वायरमेंट की फ़ाइल देखने के बाद लगभग 8 बजे मेरा काम खत्म हो चुका था.. मै आराम से प्राची दीदी के ऑफिस में बैठकर बीते 10 दिनों के बारे में सोचने लगी..


हर्ष और उसका वो उतरा चेहरा.. मुझे मुस्कुराने पर मजबूर कर रहा था.. तभी याद आया हर्ष की डायरी.. पूरी डायरी ही उसने मेरे लिए लिखी थी.. जिसकी शुरवात उसने अपने पन्ने पर कुछ इस तरह से किया था...


जून, 2011.. एक नए अध्याय की शुरवात हो रही है मेरे जीवन में… ज़िन्दगी में पहली बार मेरी मां ने किसी लड़की का जिक्र करते हुए कहा... "मासूमियत और समझदारी का ऐसा मिश्रण बहुत ही दुर्लभ होता है, हमारी पहचान ना के बराबर है, लेकिन फिर भी मेनका मुझे बहुत भा गई... जिस लड़की के बारे में मेरी मां ने तारीफ कर दिया, वो सचमुच अद्भुत होगी... लगता है मिलने से पहले ही दिल मै उसके नाम कि गूंज हो रही है...


फिर कोई डेट नहीं था, केवल जिक्र थी.. पहली बार हमने प्राची दीदी के बर्थडे पर वीडियो कॉलिंग के जरिए उसे देखा था.. उस घटना के शंदर्व मे लिखता है...


कुछ ऐसे क्षण होते है जब दिल काबू में नहीं रहता, मेनका को पहली बार देख रहा था.. नकुल के लिए उसका प्यार देखकर मैं पहली बार अपनी मां को बेवकूफ समझ रहा था, क्योंकि उन्होंने मेनका के बारे में बहुत कम कहा.. मेरे पापा और प्राची दीदी इस मामले में काफी समझदार है, क्योंकि उन्होंने सही पहचाना मेनका को.. दिल की सिर्फ इतनी सी ख्वाइश है, बस उसके दिल में मेरे लिए चाहत जाग जाए"..


खुद की इतनी ज्यादा तारीफ मुझसे और नहीं पढ़ी गई, लेकिन उसके हर शब्द ऐसे थे, मानो दिल के अरमान खोलकर रख दिए हो.. मै काफी खिला-खिला मेहसूस कर रही थी.. फिर से सीने में मीठा-मीठा दर्द का एहसास हो रहा था.. दिल किया हर्ष से बात करके पूछूं की कहां है, यदि घूमने निकला होगा तो मै भी उसके साथ सामिल हो जाती...


मैंने उसे कॉल लगाया तो पता चला ऑफिस के बाहर ही बैठा है... मै भागती हुई बाहर निकली और जोर से चिल्लाने लगी... "कंवल, कंवल"..


कंवल:- येस मैम..


मै:- तुमने हर्ष को बाहर क्यों बिठा रखा है, और मुझे इन्फॉर्म तक नहीं किए..


कंवल:- मैम आपने ही हो कहा था कि मै अकाउंट्स देख रही हूं, किसी तरह की दखलंदाजी नहीं चाहिए..


मै:- हम्मम ! ठीक है जाओ...


उसके जाते ही मै हर्ष के ओर देखती... "सोओओओओओ सॉरी"..


हर्ष:- स्टुपिड, तुम काम कर रही थी, मै अंदर क्या करता. अब यहां रहकर इस बात में वक्त बिताना है कि मुझे बाहर बिठा कर रखा गया है या हम कहीं घूमने चले..


"बस 5 मिनट हां, फिर चलते है"….. थोड़े से एक्सक्यूज कि भावना चेहरे पर थी, क्योंकि उसे इंतजार करवाना मुझे अच्छा नहीं लगता... और हर्ष मेरे चेहरे को देखकर हंसने लगा... मै उसे साथ लेकर ही नीचे गई.. 2-3 लोगों से मिलकर उसका काम समझा दी और हर्ष के साथ कार में चली आयी… "और हर्ष बाबू, कहां चलना है"..
Kya naam uska Kamal.. bada ajibo garib naam hai.. :D
उफ्फ !!! लड़के का चेहरा तो पुरा खिला खिला सा हो गया... क्या खिली सी मुस्कान आयी थी उसके चेहरे पर...
kamina aise khush ho raha hai jaise ushe sex karne ko mauka mil gaya ho menka ke sath... kutta uske ghar bhi aa gaya..
हर्ष:- दोनो एक ही काम करने जा रहे है, साथ करते है ना..
Haan.... ishiki hi kami thi... aur kar double meaning baat :mad2:
मुझे पता था तुम्हे जलन हुई लेकिन तुमने जाहिर नहीं होने दिया".. बेवकूफ कहीं का, बात करने का पुरा मूड ही ऑफ कर दिया...
ush harami harsh se ummid hi kya ki jaaye.. woh toh apni tharak mitane menka ke piche para hai..
ab yehi baaki rah gaya tha yeh abhi ka bachha phir se aa gaya story mein :mad:
फिर से सीने में मीठा-मीठा दर्द का एहसास हो रहा था
abhi itni si umar mein heart problem...
nahi.. actually aise cases hote hai...
Par menka toh achhi bhali thi na...
kisi heart specialist ke paas jana chahiye....
Khair mujhe kya... :dazed:
let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill :applause: :applause:
 
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