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Thriller 100 - Encounter !!!! Journey Of An Innocent Girl (Completed)

nain11ster

Prime
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अध्याय 26 भाग:- 1




एक बरे से ड्रामे के समापन के बाद नकुल और प्राची दीदी क्या खिले से लग रहे थे... दोनो की जब से शादी तय हुई थी, बस नजरे हम पर ही थी और दोनो दुविधा में फसे..


हालांकि प्राची दीदी तो कतई दुविधा में नहीं थी, लेकिन नकुल, जो हमारे बारे में जानता था, वो मुझे और हर्ष को छोड़कर प्राची के साथ नाइटाउट के लिए जा नहीं सकता था और हमे साथ भी नहीं ले जा सकता था....


थोड़ा अजीब और खींचा सा माहौल मै भी मेहसूस कर रही थी, जहां नकुल के सामने हर्ष का होना, मुझे अनकम्फर्टेबल सा मेहसूस करवा रहा था... "क्या है.. कभी जोड़ से चिल्लाते हो, फिर ख़ामोश हो जाते हो, जिसकी जो इक्छा है वो जाहिर कर दे"। मै बीच हॉल में खड़ी होकर कहने लगी..


तभी पहले प्राची के विचार आए की इतनी बड़ी बात है तो उन्हे बाहर सेलिब्रेशन करने जाना है.. इस बात की प्रतिक्रिया मे नकुल बस मेरी ओर ऐसे देखा, मानो कह रहा हो सच्चाई जानने के बाद मै असमर्थ हूं तुम दोनो को अकेला छोड़ने के लिए. हां लेकिन मुंह से कुछ नहीं बोला...


मै:- क्यूं सेलिब्रेशन परिवार के साथ नहीं होती क्या? हम दोनों को भी ले चलो, थोड़ा दोनो परहेज कर लेना थोड़ा हम आंख मूंद लेंगे..


नकुल:- और तुम..


मै, नकुल के कंधे से लगकर उसके बाल बिखेरती... "अभी मेरी शादी थोड़े ना तय हो रही है, अभी तेरा खिला चेहरा देखना ज्यादा सुकून देगा..


नकुल मुस्कुराते हुए बस इतना ही कहा... "क्या हम भी अजीब दुविधा में फसे है. पारिवारिक समय ही मनाएंगे.. अभी तो बहुत से मौके है अकेले सेलिब्रेशन करने के"…


छोटी सी दुविधा को हम किनारे करते चल दिए.. काफी खुशनुमा सा समा था.. हम घूमते फिरते थोड़ा एन्जॉय किए.. मेरे भाई और बहू थोड़ा पीना चाहते थे, सो उन्हे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दिया और रात के 10 बजे हम सब एयरपोर्ट पर थे, घर वापसी के लिए...


अगली सुबह ही हम सब अपने सहर पहुंचे थे.. नकुल के आंगन में सभा लगी थी... हमारी गली के पाचों परिवार उनके सभी लोग.. करीब 25-30 लोग तो थे आंगन में…


सब लोग चाय पी रहे थे और कुछ-कुछ बात कर रहे थे.. मै सबको देखकर हंसती हुई कहने लगी... "आप लोग का क्या है, भोज की तैयारी करो... अरमान पर मेरे आज लग गए"..


आशा भाभी:- कैसे?


मै:- प्राची दीदी को मैंने बहन माना था, और उनकी शादी को लेकर मेरी क्या क्या योजनाएं थी.. ना शादी में ठुमके लगा पाऊंगी, ऊपर से नकुल को जीजाजी कहूं या प्राची दीदी को बहू उस धरम संकट में डाल दिया...


मेरी बात सुनकर सभी वहां हंसने लगे... फिर बहस का ताना बाना चलने लगा.. भाभियां चुटकी लेकर नकुल को जीजा बनाने कहने लगी तो वहीं उनकी सास उन्हे घूरती हुई कहती... हमेशा रिश्ता लड़का पक्ष से आंका जाता है.. शादी बाद वो प्राची मिश्रा होगी और इस लिहाज से मेनका बुआ सास.…


हिहिहिहिहिहिहि... बड़ा ही फनी सा माहौल था सुनने में मज़ा आ रहा था.. लेकिन इस मज़े के बीच नकुल पहुंच गया और भरी सभा में कहने लगा… "ये आप लोगों ने क्या कर दिया... अभी मेरी उम्र ही क्या थी.. मुझे ये रिश्ता मंजूर नहीं"…


"आव बेचारा मेरा भतीजा"… मेरी मां ने एक थप्पड़ जर दी.. गाल से अभी पहले थप्पड़ की लालिमा गई नहीं थी कि दूसरा थप्पड़ भी.. बेचारा दोनो गाल पकड़े मुझे ही घूरने लगा... उसकी आंखें बता रही थी कि वो कह रहा है "और ड्रामे करवा लो"


थोड़े से ड्रामे और कुछ सीरियस कन्वर्सेशन के बाद वो मान गया.. फिर थोड़ी छेड़-छाड़ चल ही रही थी, कि बीच में पांचवे घर, यानी नीलेश के घर रहने आए माधव चाचा की छोटी बेटी रश्मि, वो कहने लगी... "आप लोग एक बार भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और नकुल के डॉक्टर डिग्री पर उसे बधाई तक नहीं दे रहे... कोई मामूली काम नहीं करके आया है"…


स्नेहा भाभी.. तीसरे घर से... "डिग्री ही तो लिया है.. यूनिवर्सिटी होते किसलिए है.. मुद्दा तो ये है कि 21 साल का लड़का 25-26 साल की लड़की को कैसे संभालेगा, उसका कोर्स कोई यूनिवर्सिटी करवाता है तो बताओ... बेचारा हमारा भतीजा..."


स्नेहा भाभी की बात सुनकर नकुल तो वहां रुका ही नहीं, अलबत्ता बेचारी वो रश्मि दीदी जो गांव के लोगों को नकुल की उपलब्धि गिना रही थी, उल्टा उनका मज़ाक सुनकर पानी पानी हो गई...


शाम के वक्त लड़की वालों के यहां हमारा काफिला पहुंचा.. मै सबको छोड़कर सीधा प्राची दीदी के कमरे पहुंच गई.. आय हाय क्या शर्मा रही थी लड़की.. देखकर ही लग गया की मामला सब राजी खुशी चल रहा है... "क्या हुआ इतना शरमा क्यूं रही हो.. ड्रामे नहीं की क्या?"


प्राची:- तू हर बात बोलेगी और मै मान लूंगी क्या? मैंने कह दिया की नकुल मुझे बहुत, बहुत ज्यादा पसंद था, बस कुछ पारिवारिक बंदिश थी और उम्र का तकाजा, इसलिए किसी को कुछ नहीं बता पाई..


मै चौंकती हुई... "क्या बात कर रही हो… फिर रिएक्शन क्या थे"…


प्राची:- कुछ नहीं पापा और मम्मी ने भी कबूल किया की लड़का बिल्कुल हीरा है हीरा वो भी कोहिनूर वाला.. बस तुझे उम्र में छोटा है इसलिए ख्याल रहे की इस बात को लेकर तुम अपनी ना चलाने लगना.. सम्मान की भावना देना.. और खुद को एक पत्नी के रूप में ही रखना ना की कंपनी की मालकिन और औहदे में ऊंचा...


मै:- ओह हो इसलिए इतना शरमा रही हो.. आय हाय प्राची बहू ये गाल पर लाली लगाई है या फिर शर्म से लाल हुआ जा रहा है...


प्राची:- यह एक अजीब ही फीलिंग है जिसमे मै शर्माती जा रहीं हूं... प्लीज अब छेड़ना बंद कर..


मै:- चलो जरा मै सभा में चलती हूं.. वहां का भी हाल चाल ले ही लिया जाए जरा...


नीचे पहुंची तो सब बात तय हो चुकी थी… यूं तो कोई डिमांड नहीं थी लेकिन राजवीर अंकल ने डेढ़ करोड़ का दहेज ऑफर कर दिया था, बिना कुछ कहे...


मुक्ता दीदी और पंडित जी भी पहुंच गए थे.. आज छेका की रश्म होनी थी.. भारत के विभिन्न हिस्से में ये अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जिसे रोका भी कहते है.. या फिर सगुण देना.. जहां दोनो परिवार वाले लड़के और लड़की को परिणय सूत्र में बांधने की पहली रश्म निभाते है...


बैठकर शादी के विषय में चर्चा हो रही थी, यहां मै हंस्तछेप करती हुई कहने लगी... "मुझे डेस्टिनेशन वेडिंग चाहिए, जहां दोनो पक्ष यहां की कुल देवता की रश्म करने के बाद 7 दिन के छुट्टी पर चलेंगे और वही शादी होगी"…


अब था तो ये मेरा प्रस्ताव, लेकिन किसी ने सुना ही नहीं... बार-बार दोहराई तो मुझे चुप चाप बिठा दिया गया... राजवीर अंकल ने साफ कह दिया उनकी बेटी के शादी उनके अपने घर से होगी... शादी एक बड़ा यज्ञ होता है हमारा घर सुध होगा..


हम सब की सभी प्लांनिंग धरी की धरी रह गई... 18 दिसंबर की शादी थी इसलिए हम सबको एक हफ्ते का वक्त दे दिया गया की जाकर दिल्ली में जो भी काम हो निपटा लो… मुझे भला कौन सा काम था मै उन सबको बाय-बाय कहकर आ गई मासी के घर...


मासी के घर एक दिन रुककर मैंने गौरी को उठाया और अपने साथ ले आयी… हर्ष मे साथ ही केवल जीने के जो अवधि था, उसके समापन के बाद मै दिल से कुछ दिन गौरी से साथ बिताना चाहती थी...


यदि नकुल की शादी ना होती तो मै ये काम मार्च के बाद करती लेकिन कोई ना.. अब कर लेंगे... गौरी की देखकर मै बता नहीं सकती की कितनी खुश हुई। वो बिल्कुल पहले की तरह ही सामान्य थी.. मेरे हिसाब से पूरी सामान्य थी, जैसा वो बचपन से हुआ करती थी, हां बस बदलाव मे वो अब हल्का मेकअप करना जारी रखे हुए थी... प्यारी लग रही थी..


साथ रहने के दौरान गौरी अपनी इक्छा जाहिर करती हुई कहने लगी की.… "मै बहुत से लोगो के लिए बहुत कुछ करना चाहती है... खासकर उन लोगो के लिए जो वाकई खुद मे असहाय मेहसूस करते है.. वो वृद्ध लोग, जब सड़क पर अपनी असहाय हालत में देखती हूं तो दिल कांप जाता है.."..


मै:- हम्मम ! मै तुझ जैसी क्यों नहीं.. कितनी दया और करुणा है तेरे अंदर...


गौरी:- तुम हो तभी तो मेरे अंदर दया और करुणा बची हुई है वरना मुझ जैसो का लोग क्या हाल करते है, वो तुमसे छिपा तो नहीं.... जितना मुझ जैसों का होना जरूरी है उतना ही तुम जैसों का भी... छोड़ो मै भी क्या लेकर बैठ गई..


मै:- तू दिल्ली नहीं आयी पढ़ने...


गौरी:- मन नहीं करता पढ़ाई करने का.. उतना ही पढ़ती हूं, जितना पास हो जाऊं...


मै:- मेरी एक इक्छा पूरी करेगी...


गौरी बिल्कुल खिलखिलाती हुई मेरे गले लगती... "मुझे खुशी होगी"..


मै:- मेरे पास 7 करोड़ रुपए है जो मेरे किसी काम के नहीं.. बस परे है... क्या तुम उन्हे खर्च कर सकती हो, उन पर जिनको वाकई मदद की जरूरत है...


गौरी:- हम्मम ! मै ना चौकुंगी ना पूछूंगी कहां से आए पैसे.. मै बस हां कहूंगी कि मै उस पैसे को जरूरत मंदो तक पहुंचा दूंगी... खुश ना..


मै:- हां बहुत खुश..


गौरी:- तो मिस मेनका मिश्रा बताइए कैसा लग रहा है एक बार और गरीब बनकर...


मै:- मै क्यूं गरीब रहूं.. जब तक मेरे पास मेरी बहन है मै दिल से अमीर हूं... वैसे एक बात बताओ.. किसी लड़के को पसंद की है या वो भी मुझे ही ढूंढना होगा..


गौरी:- तुम ही ढूंढ लेना और थोड़ा मैच करके ढूंढना, वरना उसके लिए तो दया ही दिखाना जो मुझसे शादी करेगा...


मै:- हिहिहीहिहिहि… पागल कहीं की...


गौरी:- एक मै पागल एक तू पागल.. चल कुछ पागलपन करते है...


मै:- पक्का करेगी पागलपन..


गौरी:- हां पक्का लेकिन एक बात कहे देती हूं बीच मे पागलपन छोड़कर आने नहीं दूंगी..


मै:- आना भी कौन चाहता है...


मैंने हामी भरी और हमारी कार चल दी सड़क पर... सबसे पहले ट्रैवल वाले के पास जाकर 2 बस भारे पर लिए.. फिर दोनो बस धीमे-धीमे हमे फॉलो करने लगे... रास्ते से जितने भी बूढ़े मिलते गए, जो किसी मजबूरी के शिकार थे, गौरी उन्हे बस पर बिठाते गई...


हम लगभग गांव से लेकर सहर के सभी हिस्से से होते हुए वहीं अपने मामा के घर के ओर वाले हाईवे पर थे... दोनो बस मे कुल मिलाकर 64 वृद्ध लोग थे.. और आगे के रास्तों पर जितने भी मिलते चले गए. मामा के घर पहुंचते-पहुंचते हमे हो गई शाम और हमारे दोनो बस मे थी कुल 82 असहाय वृद्ध महिला और पुरुष...


मामा के घर के सामने हमारा काफिला रुका और हम दोनों चिर परिचित अंदाज में छोटी मामी के घर की ओर दौड़ लगा दिए.. छोटी मामी हमे देखकर बिल्कुल सरप्राइज़ थी और खुशी के मारे तो उनका चेहरा क्या खिला हुआ था... "लो मै क्या 2-3 साल ध्यान नहीं दी, ये तो भैंसी से हाथी बनने के प्रोसेस में है"…


मै छोटी मामी को देखकर कहने लगी... गौरी मामी को देखकर उनसे लिपट कर कहने लगी... "मामी पहले आधा पेट पकड़ मे भी आ जाता था आज कल तो वो नहीं नहीं आ रहा"…


मामी:- दिस इज व्हाट ओरिजनल इंडियन ब्यूटी.. अपने हसबैंड की मै ही दीपिका और मै ही अनुष्का हूं...


गौरी:- एक मामी मे 4 अनुष्का और 5 दीपिका समा जाए.. वैसे मामी फटाफट अब बाहर जाओ, हम अपने बहुत से दोस्तों के साथ आए है किसी को बोलकर उनके खाने का इंतजाम कर दो...


छोटी मामी:- हां हां क्यों नहीं अभी किए देती हूं.... लेकिन उससे पहले दीदी (बड़ी मामी) को बात दूं की तुम दोनो यहां आयी हो वरना मुझसे ही झगड़ा करेगी..


मामी के जाते ही... "इतने लोगों के रहने का इंतजाम कैसे होगा"…


गौरी:- अरे कुछ देर यहां ड्रामा करते है.. बाकी इनको फिलहाल सहर के होटल में शिफ्ट करवाओ, बाकी बाद मे बताउंगी...
 

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अध्याय 26 भाग:- 2




मै:- ओके बहना.. वैसे मै समझ गई क्या करना चाह रही हो तुम...


गौरी:- कम से कम हम तुम अपने सहर के इतने असहाय की तो मदद कर ही सकते है... बाकी अगर हम जैसे कुछ लोग अपने अपने सहर मे खड़े हो गए तो कम से कम वो लोग जो जिंदगी भर जूझते रहे है, अंतिम वक्त मे कुछ सुकून तो बटोरकर अलविदा कहेंगे दुनिया को..


मै, गहरी श्वांस लेती... "मै अपनी बेटी को हर 3 महीने तेरे पास भेजूंगी, ताकि वो तेरी छाया बने".


गौरी:- क्यों बेटे को भेजने में कोई बुराई है.. कॉपी केट.. मै अपनी बेटी भेजूंगी तो तू भी बेटी ही भेज..


तभी बाहर से चिल्लाने की आवाज आयी.. "मेनका, गौरी.. मेनका, गौरी"… ये बड़ी मामी और ममेरे बड़े भैया चंचल की आवाज थी... दोनो चिल्लाए हम दोनों भागते हुए पहुंचे...


चंचल भईया काफी गुस्से में दिख रहे थे, और हमने जब उनका गुस्से से लालम लाल चेहरा देखा तो हंसी निकल आयी… झल्लाते हुए वो कहने लगे, ये सब क्या तरीका है, दरवाजे पर इतने भिकड़ी को ले आयी.. ऊपर से लड़की वाले आने वाले है.. कुछ भी करते रहती है"…


ओह शायद याद हो की ना, ये चंचल भईया, रूपाली दीदी से ठीक बड़े भाई और अपनी शादी होने का इंतजार कर रहे थे... बेचारे के साथ तो हमने कांड कर दिया। शायद लड़की वालों का ट्रेन लेट था इसलिए 6 या 7 बजे तक पहुंचते.. तभी कहुं की आज सरा इलाका इतना चकाचक क्यों है..


मै इन्हीं सब बातो को सोच रही थी कि तभी चंचल भईया ने एक वृद्ध पर झुंझलाकर जोड़ से बोल दिया.... खैर यह एक आम इंसान भावना थी. आप जब स्क्रीन पर ऐसे मार्मिक दृश्य देखते है या फिर कहीं कहानी मे पढ़ते है, तो लगता है कोई इनके साथ बुरा बर्ताव कर रहा है मतलब वो भी बिल्कुल बुरा होगा.. वैसे उनका चित्रण भी वैसा ही किया जाता है उन सब जगहों मे..


लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि हम सब किसी को एक 2 रुपया देकर पुण्य कमा लेते है और बाकियों को झुझकार देते है, क्योंकि अपनी हैसियत होती नहीं की सबके लिए कर सके और उनके मार्मिक लक्षण हमे विचलित कर जाते है, ऐसे में एक ही इंसानी भावना बाहर आती है वो है द्वेष और चिढ़ना..


फिलहाल मै तो इसे सामान्य रूप से ही देख रही थी, लेकिन आज तक कभी ऐसा रिकॉर्ड नहीं हुआ था कि गौरी पर कोई चिल्लाया हो.. आपको लगता है कि वो चिल्लाने लयाल कोई काम भी की होगी.. ज्यादातर घर में रहना और हमेशा दूसरों के प्रति दया दिखाना...


खैर गौरी का पुरा चेहरा उतर गया जो मुझसे बर्दास्त नहीं होना था... मै गौरी का हाथ थाम ली और बड़ी मामी से कहने लगी... "जहां से लेकर आए थे वहां छोड़ने जा रहे है"… हम दोनों जब वापस जा रहे थे तो छोटी मामी का उत्र चेहरा हम दोनों ने देखा जो अपनी जेठानी को कुछ भी जवाब देने में असमर्थ थी...


यहां की घटना में शुक्र है मेरे परिवार से या मेरे किसी मामा ने चंचल भईया को चिल्लाते हुए नहीं सुना वरना बेचारे की क्लास वहीं लग जाती...


मै उन सब वृद्ध को बस मे बिठाकर शहर के एक होटल में शिफ्ट करवा दी.. रास्ते में गौरी ने पूछा कि 7 करोड़ से 100 लोगों की देख रेख की जा सकती है.. मै उसके प्रस्ताव से खुश थी.. क्योंकि 7 करोड़ काफी थे उन्हे रहने से खाने तक सरा कुछ देखने के लिए…


फिर मैंने इन्वेस्टमेंट समझाया कि सहर मे कोई पुराना होटल होगा जो बनाया तो गया होगा लेकिन चलता नहीं होगा.. उसे हम आराम से कम लागत मे खरीद सकते है.. हफ्ते भर में उसे ठीक करवाकर उन 100 लोगों के लिए तुरंत ही रहने का इंतज़ाम हो जाएगा, इसमें करीब 2 करोड़ खर्च होंगे..


बचे 5 करोड़ बैंक को देंगे जो सालाना हमे लगभग 9 परसेंट का ब्याज देगा... जो की 45 लाख रुपया होता है.. अगर उसको 12 महीने से बांटे तो हुए 3 लाख 75 हजार.. 150 लोगों को इससे हम हर महीने खिलाने से लेकर मेडिकल तक देख सकते है... साथ मे 4 आदमी को साफ सफाई और देखभाल के लिए भी स्थाई रूप से रख सकते है...


गौरी:- पैसों के मामले में तुम्हारा दिमाग क्या तेज भागता है... चलो फिर इसिपर अमल करते है..


शाम हो गई तो उन वृद्ध को हमने वही एक होटल में आसरा दिया और अगले 1 हफ्ते में चुपके से ये सारा काम भी करवा चुके थे, बिना किसी जानकारी के.. मै बता नहीं सकती गौरी कितनी खुश थी.. और उसे खुश देखकर मै कितनी संतुष्ट थी..


कभी-कभी उसका चेहरा देखते हुए अचानक ही आशु भी छलक आते थे.. जिंदगी के शुरवात मे ही, इतनी प्यारी और दयालु लड़की के साथ किसी ने छल लिया.. मेरा तो सोचकर ही आज भी खून खौल जाता है.. बहरहाल वो सामान्य थी जैसा वो पहले हुआ करती थी, मेरी लिए इससे ज्यादा खुशी की और बात क्या हो सकती थी..


हां लेकिन इन एक हफ्तों में मैंने एक बार भी हर्ष से बात नहीं की थी.. थोड़ा बहुत टेक्स्ट-टेक्स्ट खेल लेती, लेकिन मै कुछ वक्त पूर्ण रूप से गौरी को देना चाहती थी इसलिए गांव में सबके साथ हूं ऐसा बहाना चल रहा था...


14 दिसंबर, शादी से 4 दिन पहले का वक्त.. मेरी और साक्षी की बहुत ही तीखी बहस चल रही थी... बहस इतनी सी बात पर की उसे मेरे साथ दिल्ली जाना था और मै उसे मार्च के बाद जहां चलना हो वहां चलने कह रही थी..


बस मेरी छुटकी लाडली इस बात पर मुझ पर पूरा भड़की हुई थी.. उलहाना और एक-एक बात तो वो उंगली पर गिना रही थी और मै हंसकर उसकी बातों का बस विरोध कर रही थी..


मै हंसती तो वो और भी ज्यादा चिढ़ जाती.. इतने गुस्से में थी कि मै उसे मनाने के लिए अपनी गले की चेन उसे पहना रही थी तो उसने झटक कर फेंक दिया.. वक्त लगा लेकिन उस मैंने किसी तरह मना ही लिया था...


तय यह हुआ कि मार्च बाद जब उसके 5th स्टैंडर्ड के एग्जाम खत्म हो जाएंगे तब मै उसे दिल्ली और बंगलौर घूमाने ले जाऊंगी.. हालांकि उसने तो अपने किताब के चारो महानगर के नाम गिनवा दिए थे.. जिसमे से मैंने कोलकाता और मुंबई के लिए फिर कभी कह दिया..


यहां मेरे और साक्षी के बीच द्वंद छिड़ा था और इस गौरी की बच्ची ने मेरे मोबाइल पर हर्ष के आए टेक्स्ट का रिप्लाइ कर दिया और 1 घंटा तक चिपकी रही टाइपिंग में... उल्टा इधर से ही लिख दी कॉल करो ना, प्लीज..


मै जब साक्षी से फुर्सत हुई और अपने फोन पर गौरी को किसी से बात करते हुए देखी तो पूछ बैठी किसका फोन है.. झल्ली को ध्यान ना रहा की वो आंगन में है और दूसरे लोग भी यहीं बैठे है.. जोर से कह दी... "जीजाजी से बात कर रही हूं"…


मेरी आंखें बड़ी हो गई.. हर कोई हैरानी से मुझे ही देख रहे थे तभी मां ने गौरी के हाथ से फोन छीनकर जैसे ही हेल्लो की, उधर से नकुल की आवाज आयी… "हां दादी... क्या हुआ"…


मां:- गौरी से तू क्या कह रहा था..


नकुल:- दादी मै कह रहा था कि प्राची शादी का जोड़ा शॉपिंग करना चाहती है तो उसी के साथ गौरी और मेनका भी चली आती और...


मां:- तेरी बीवी को बोल वो खुद शॉपिंग करे, मेरी बेटियां पहले से शॉपिंग कर चुकी है.. चल रख फोन और वापस आ जलदी... शादी को 4 दिन है और सहर जाकर शॉपिंग कर रहा है या अपनी बीवी को करवा रहा, मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा...


बहरहाल अभी मै ओवर रिएक्ट नहीं कर सकती थी, लेकिन मां को बहलाकर, मै, गौरी के साथ सहर के लिए निकली.. जैसे ही कार अपनी गली से बाहर गांव के सड़क पर गई.. सामने से दीप्ति हाथ हिलाती... "तेरे पास ही आ रही थी जल्दी चल"…. दीप्ति थोड़ी हड़बड़ाई और थोड़ी परेशान से दिख रही थी...


"हिहिहि.. बचा लिया दीप्ति ने.. वरना आज क्लास लगती"… गौरी हंसकर अपनी प्रतिक्रिया दी और दीप्ति पीछे बैठ गई... "क्या हुआ इतनी हड़बड़ी में..."


दीप्ति:- गाड़ी पहले मेरे घर के सामने लगा...


मैंने गाड़ी लगा दी.. दीप्ति की मां और दीप्ति जल्दी-जल्दी पीछे सामान रखने लगी.. पूछने पर पता चला कि पुष्पा कि डिलीवरी हो गई है.. यहां कोई है नहीं सब पता ना जरूरत के वक्त कहां निकल गए इसलिए दीप्ति को तेरे यहां ही भेजी थी.. चल बेटा जल्दी..


मै भी कार को भगाई, उन्हे हॉस्पिटल ड्रॉप किया.. आयी थी तो मैं भी भी पुष्पा दीदी से मिल ली.. बड़ा ही गोल मटोल क्यूट बेबी था, मै अपने गले की चैन जिसे साक्षी ने लेने से इंकार कर दिया था, उसे पहली मुलाकात के भेंट स्वरूप दे दी...


मेरे पीछे गौरी खड़ी थी, थोड़े से परिचय के बाद वो हिचकती हुई पूछने लगी, क्या मै बेबी को गोद में ले सकती हूं... बड़ी ही मासूम सी अर्जी थी, लेकिन अभी कुछ ही घंटे हुए थे इसलिए सब थोड़े मजबूर दिखे. पर बेबी की नानी, यानी की पुष्पा दीदी कि मां ने, गौरी को पलथी लगाकर बैठने बोली.. वो टॉवेल से लिपटे हुए बेबी को उठाकर गौरी की गोद में रखती हुई कहने लगी...


"तेरी (पुष्पा दीदी) डिलीवरी तो दाई करवाकर गई थी और 1 घंटे बाद तो तेरे बाबूजी ने तुझे पुरा घर घुमा दिया था... कितनी अरमान से वो मांग रही थी गोद में लेने और तुम लोगों को बस डॉक्टर की परी है... तेरा भांजा हुआ बेटा, अच्छे से इसे आशीर्वाद दे.. खूब तरक्की करे और सबका ख्याल रखे"…


पुष्पा दीदी कि मां डॉयलॉग दे रही थी और मेरी बहना उसे गोद में जैसे ही ली, उस बेबी का मासूम सा फेस देखकर भावना से उसके आशु चलने लगे... कुछ देर बाद हम वहां से निकल गए...


गौरी जैसे ही अकेली हुई मै उसे घूरती हुई पूछने लगी, मुझे फसाने के इरादे तो नहीं थे.. वो भी थोड़ी मजाकिया होती हुई कहने लगी... "तुम दोनो की शादी में मुझे ही तो ड्रामे करने होंगे.. तेरा लाडला तो 4 दिन बाद हो जाएगा पराया"..


मै:- हीहिहिहिहिहि… अरे वो तू अपनी दादी वाला डॉयलॉग तो बोल, जो वो मौसा के लिए कहती थी..


गौरी:- अचरा के हवा लागे त सब पराया हो जाए आ खाली पत्नी पियागर लगे.… (आंचल का जब हवा लगता है तो जग पराया और केवल पत्नी प्यारी हो जाती है)..


पुराना एपिक डॉयलॉग पर हम दोनों हंस रहे थे और पहुंच चुके थे हम 82 वृद्धों के सराय में.. जहां मेरे डॉक्टर बाबू पिछले 3 दिन से सबको दिल लगाकर चेक कर रहे थे और जिस काम के लिए डॉक्टर बने थे उसका पूरा लाभ लोगों की मिल रहा था, बिना किसी सिकायत के...


"निर्दई मेनका मिश्रा, पैसे बचाने के लिए अपने ही होने वाले से मजदूर टाइप मेहनत करवा रही है"… गौरी हर्ष को चेकअप करते देख कहने लगी...


मै:- उसने खुद ही ये इक्छा जाहिर की थी, वैसे भी 82 मरीज की ओपीडी वो 3 दिन मे ले रहा है.. बड़ा स्लो डॉक्टर है... गुप्ता जी तो 2 घंटे में 150 मरीज देखकर फुरसत हो जाते है...


गौरी मेरे सर पर मारती... "वो सर्दी बुखार देखते है और ये हड्डी, कुछ तो अंतर होगा ना"…


"दोनो वहीं खड़े मेरे बारे में बात कर रही हो क्या"… हर्ष हमारी ओर देखकर हंसते हुए कहने लगा.. मै मुस्कुराती हुई हर्ष के पास गई और गौरी सब लोगों के बीच पहुंचकर उनका हाल लेने लगी..


दिन व दिन इन बुड्ढे लोगो की डिमांड तो बढ़ती जा रही थी.. किसी को कुछ खाना था तो किसी को अपना मोबाइल चाहिए था, तो किसी को खुद के कमरे में टीवी, तो कोई अपना रूम पार्टनर बदलना चाहता था..


इतना सब कम था जो एक बूढ़े और बूढ़ी ने तो आपस में शादी की मांग कर दी.. वो भी बैंड बजा वाली, मै और गौरी तो उनको सुनकर हंस-हंस कर पागल हो गई.. हम तीनो को ही उनमें कोई बूढ़ा नहीं, बल्कि सब के सब साक्षी नजर आ रहे थे.. 10-11 साल के शरारती बच्चे..
 

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अध्याय 26 भाग:- 3


आज तक तो सबको बिना मांगे गिफ्ट दी थी, लेकिन इन्होंने तो सामने से मांग लिया था.. खैर.. फिलहाल गौरी व्यस्त थी उन्हे सुनने में.… और हर्ष ने मुझे कहा कि एक मरीज काफी ज्यादा सीरियस है अगर हमने कुछ नहीं किया तो उन्हे बहुत कस्ट उठना पर सकता है...


ये एक होटल था जिसमे 96 कमरे थे... 5 करोड़ मे डील तय हुई थी, जिसका पेमेंट मैंने एक साथ किया था.. यहां बहुत ज्यादा रेनोवेशन का काम नहीं करना परा था.. रिसेप्शन एरिया को पूरा खाली करवा दिया था, जिसमे एक बड़ा सा हॉल बन गया था, जहां एक साथ 200 लोग बैठ सकते थे.. लेट सकते थी.. रिसेप्शन के बगल मे 2 बड़े बड़े चैंबर थे जिसे हमने डॉक्टर के लिए छोड़ दिया था.. विजिटिंग डॉक्टर आएगा और उनका चेकअप करके जाएगा..


मै थोड़े चिंता के साथ हर्ष के चेंबर मे दाखिल हुई और जैसे ही अंदर पहुंची, हर्ष मुझे खींचकर दीवार से चिपकाकर, मेरे कमर में हाथ डालते..


"तुम्हे कष्ट दिखा मरीज का"..

"हिहीहिहिहिहिहि,… ओ, मेरा बेबी मरीज हो गया.. बताओ क्या सेवा करूं फिर"…

"बस कुछ देर साथ रहे वहीं इलाज है"… हर्ष गहरी श्वांस खिंचते, खुद को थोड़ा मेरे करीब करते हुए कहने लगा..

"इक्छा तो मेरी भी कुछ ऐसी ही है हर्ष बाबू, लेकिन अभी वक्त साथ नहीं दे रहा"… मै हर्ष के आखों में झांकती हुई कहने लगी…

"वक्त जितना मिले उतने मे ही खुशियां बटोर लेंगे, कोई हर्ज है क्या"…


हर्ष अपनी बात कहते हुए अपने चेहरे को बिल्कुल मेरे करीब ले आया.. हम दोनों की श्वांस टकरा रही थी.. मेरे शब्द मेरे हलख के नीचे कहीं दब गए.. आंखें बंद होते चली गई और होंठ सुखकर बेताब हो चले थे हर्ष के होंठ से मिलने के लिए...


फिर तो गहरी श्वांस, मै खुद ही अंदर खींचने लगी.. धड़कने थोड़ी सी बेकाबू थी और तभी हर्ष के होंठ ने जब मेरे होंठ को स्पर्श किया... मेरे सुकून ने जैसे मेरे होंठ को स्पर्श कर दिया हो...


बेखयाली मे मैंने अपने हाथ हर्ष के गले में डालकर उसके चुम्बन मे पूर्ण रूप से खोती, उसका पूरा साथ देने लगी.. होंठ से होंठ का वो जुड़ाव ऐसा था जिसका रोमांच अंदर रूह तक मेहसूस कर रही थी...


"बस-बस इतनी ही छूट है मेरे ओर से चलो अब दूर हटो"… गौरी दरवाजे से खड़ी होकर कहने लगी.. हालांकि जब बस-बस कही तभी मै झटके से हटी थी और अंदर से काफी अनकम्फर्टेबल मेहसूस हो रहा था...


डॉक्टर बाबू तो मुंह छुपाकर वहां से तुरंत ही खिसक लिए और मै गौरी को देखकर बस नजरे इधर-उधर किए जा रही थी... "चले मेनका या यही खड़ी होकर, दीवार और टेबल देखती रहोगी"…


मै:- वो सॉरी मै थोड़ा सा..


गौरी:- पागल कहीं की, मुझे भी एक्सप्लेन कर रही है.. जब ज्यादा दिन हो जाता है तो कभी-कभी ऐसे लोग प्यार जाहिर कर देते हैं.. चल अब..


मै, थोड़ा सा अफ़सोस करती उसके साथ चल दी.. थोड़ा सा गिल्ट भी फील हो रहा था.. मै खुद मे कंफरटेबल मेहसूस नहीं कर रही थी.. तब गौरी ने उन वृद्ध लोगो की बाद शुरू की जिनके अजीब-अजीब मांग थी.. उनकी बात आते ही मेरा ध्यान उन पर गया और मैंने बोल दिया.…


"सबकी डिमांड पूरी तो होनी चाहिए लेकिन मामला ये फसा है की 2 करोड़ के इंट्रेस्ट से अभी काम चल रहा है और हर महीने इनपर खर्च करने के लिए मात्र डेढ़ लाख ही ब्याज के पैसे आ रहे है... मेरा पहला टारगेट है की इनके लिए 5 करोड़ तो खाते में हो, ताकि 3 लाख 75 हजार मे से जो कुछ पैसे बचेंगे उनको इमरजेंसी मे इलाज के लिए रखा जाए.. कभी भी इमरजेंसी पर सकती है.. और फिर इनकी ये डिमांड... मुझे कुछ वक्त दे मै सोचती हुं कुछ"..


गौरी:- ज्यादा मत सोचो... समस्या दिमाग में है तो समाधान के उपाय भी सामने आ ही जाएंगे... मै पापा और जीजू से बात करके इनके चेहरे पर स्माइल की जिम्मेदारी उठाती हूं और तुम वो अकाउंट का काम देख लो..


मै:- जिद मत करना, बस उन्हे बता देना.. अपनी मर्जी से देने और जिद करके लेने मे बहुत अंतर है..


गौरी:- कौन सा पूरी ईमानदारी का पैसा है.. सोनार और बेईमान ना हो, ऐसा हो सकता है क्या?


मै:- बेशर्म, ऐसे बोलेगी अपने पापा और जीजू के बारे में..


गौरी:- मै क्या खुद भी कहते है.. इलेक्शन टाइम जो पेटी भर-भर कर ले जाते है, उसकी भरपाई कहां से होगी..


मै:- हिहिहिहिहिही... बस रे, बस भी कर और जाने दे उन्हे.. कुछ हो सके तो ठीक नहीं तो तू लोड मत ले ज्यादा, मै हूं ना.. थोड़ा वक्त दे सब सैटल कर दूंगी... बस तू ये अच्छे काम जारी रख.. एक दिन के पागलपन से जब 82 लोगों को जोड़ सकते है.. फिर तो पागलपन कोई अंत ही नहीं करना है अब

जब 1 रूपए की जरूरत होती है तो लोग डेढ़ रुपए कमाते हैं... जैसे जरूरत बढ़ेगी, कमाने का ख्याल भी बढ़ेगा.. अपने दम पर जितना कर सकते है करेंगे, हाथ ना फैलाएंगे..


गौरी:- हट यार.. मुझे अपनी स्टडी जारी रखनी चाहिए थी.. 4 रुपया कमाऊंगी तब तो 3 रुपया खर्च करूंगी.. कोई सजेशन..


मै:- कुछ भी कर लो पैसे तो बिजनेसमैन ही कमाते है.. बाकी तो ज्यादा पैसा यानी ज्यादा करप्शन करना होगा..


गौरी:- हां ये भी सही है.. लेकिन एक प्रोफेशनल मे पैसा भी है और इज्जत भी.. और करप्शन मतलब केवल टैक्स चोरी..


मै:- कौन सा..


गौरी:- डॉक्टर.. एक ऑपरेशन 20 हजार एक मरीज देखो 500 से 1000 रूपए.. दिन मे 40 मरीज और 2 ऑपरेशन मे मै 100 लोगों को तो खिला ही सकती हूं..


मै:- इसमें कंपिटेशन भी तो है.. और फिर एक काबिल डॉक्टर बनने मे कम से कम 8 से 10 साल, तब तो लोग जानेगे.. हर्ष को देख ले.. ये 8 साल हो गया लगभग लेकिन अब भी जूनियर डॉक्टर है...


गौरी:- 10 साल बाद ही सही, कम से कम एक विजन तो है.. मैंने अभी तय कर लिया है.. क्या तू मदद करेगी..


मै:- मदद .. पागल मै खुश हूं.. बेहद खुश..


गौरी:- ठीक है तो मै मेडिकल निकलूंगी और तुम्हारे पास जब फिर से 100 लोगों लायक इन्वेस्टमेंट हो जाए तो इस बार हमारे सहर मे पागलपन करने निकलेंगे..


मै:- तूने कह दिया मतलब दिमाग में सेट हो गया.. जल्द ही शुरू करते है पागलपन..


बात करते-करते हम पहुंच चुके थे गांव.. दूसरे टॉपिक के आने से मेरी अंदर की गिल्ट से ध्यान तो हट गया था लेकिन तय कर चुकी थी की जबतक यहां हूं नो फिजिकल टच.. ये बात हर्ष को भी पहली फुर्सत मे समझाना था..


सारी रस्में और रिवाजों के बीच आ गया 18th दिसंबर.. नकुल और प्राची की शादी का दिन.. कोई मतलब ही नहीं था कपड़ों का, क्योंकि ठंड की वजह से फैशन के नाम पर बहुत कुछ किया तो नहीं जा सकता था, लेकिन प्राची ने मेरी ड्रेस पहले ही भिजवा दी थी और उसके साथ सभी मैचिंग एसेसरीज... उस डिज़ाइनर लहंगा चुन्नी और उसके साथ ठंड के वक्त और हॉल के लिए जो तैयारी थी, मै देखकर मुस्कुराइए बिना नहीं रह सकी..


उन्हे पता था कि गौरी भी मेरे साथ है, इसलिए उन्होंने गौरी और साक्षी के लिए भी ड्रेस भेजी थी.. वो भी उतनी ही क्यूट और मस्त.. हालांकि ये ड्रेस सिर्फ घर पर दिखाने के लिए ही थी बाकी तो मै 3 बजे तक वहीं प्राची दीदी के पास ही पहुंच रही थी...


सारी विधि और सारी रश्मों के बीच एक छोटा सा वक्त आया जब मै और नकुल साथ बैठे थे.. बिस्तर किनारे अपने पाऊं लटकाए.. बाहर ढोल बज रही थी.. हंसी और खिल खिलहट की आवाज गूंज रही थी.. और अंदर हम दोनों बिल्कुल ख़ामोश...


मै गहरी श्वांस अंदर खिंचते…. "तुम्हे नई जीवन में प्रवेश की मुबारकबाद... दोनो मे यदि चुनने का मौका आया तो तुम्हे पता है क्या करना है..."


नकुल:- हम्मम !!! जनता हूं मै, लेकिन किसी और के साथ विवाह होता तो शायद चुनने का वक्त आता.. प्राची के साथ ना के बराबर परिस्थिति आएगी...


मै:- हम दोनों ने शादी के बाद के बदलाव को देखा है.. इसलिए दिल छोटा ना करना... जुबान से कुछ भी निकले, दिल से हमेशा साथ रहूंगी..


नकुल:- मै भी... बस तू अपना ख्याल रखना.. डेढ़ करोड़ दहेज वाले, तेरे उन बुड्ढों के अकाउंट मे दे दिया है..


मै, धीमे से घूमकर एक बार नकुल के चेहरे को देखकर वापस सामने देखती... "वो पैसे तेरे पास रहते तो तू ज्यादा अच्छा करता"…


नकुल:- चिंता मत कर.. कौन सा वो मेरी मेहनत का पैसा था या फिर मेहनत से कमाया आखरी पैसा था.. तू रोती अच्छी नहीं लगती..


मै:- और तू भी.. चल आंसू साफ कर.. तेरी शादी में नाचूंगी, ऐसी मेरी इक्छा है.. चलेगा 1,2 ठुमके लगाने..


नकुल:- मै इंतजार मे ही था.. मुझे लगा काम मे भुल गई होगी..


मै:- तुझे यकीन था की मै भुल सकती हूं..


नकुल:- बिल्कुल नहीं..


मै अपने हाथ से नकुल के आशु साफ करती.. "तो फिर चल चलते है..."


नकुल मेरा हाथ थामकर बाहर लाया.. हम दोनों को देखकर आशा भाभी अपनी जगह से उठकर आयी और मुस्कुराती हुई कहने लगी... "एक गाना बजाओ मेरे बच्चों के लिए"..


आशा भाभी का उत्साह देखकर हम दोनों का उतरा चेहरा खिल गया.. फिर तो आधे घंटे हम दोनों नाचे.. नाचते-नाचते पाऊं दुखने लगे थे, श्वांस चढ़ गई पर उत्साह कम नहीं हुआ.. एक पल आया जब मै और नकुल एक दूसरे को देख रहे थे... और मेरी आंसू छलक आए..


जैसे मेरी भावनाएं थी ठीक उसकी भी थी.. मेरी नम आखें कह रही थी.. "तू मुझसे दूर जा रहा है"… और उसकी नम आखें मुझे भरोसा दिला रही थी कि... "मै हमेशा साथ हूं"…


नकुल के मै गले लग गई और वो मेरे आशु साफ करते हुए कहने लगा.. "इतना इमोशनल क्यों है.. शादी मे रोता हुआ दूल्हा अच्छा नहीं लगता"..


इतने में गौरी ने हम दोनों के आंसू साफ करती... "मै हूं दोनो की मेंटोर.. हरी चटनी और लाल चटनी खाओ और सारे बिगड़े काम बनाओ.. चलो मुस्कुराओ वरना रोने वाली सेल्फी पोस्ट कर दूंगी"….


इतने में ही संगीता और मिथलेश भी पहुंचे और संगीता कहने लगी… "रेयर कलेक्शन, दूल्हे की रोती फोटो.. काफी लाइक्स मिलेंगे"…


मै:- नो.. डिलीट करो वो तस्वीर.. मेरे भाई की रोती हुई तस्वीर कहीं पोस्ट नहीं होगी..


संगीता:- उसके बदले मुझे क्या मिलेगा..


संगीता के इस डायलॉग पर तो वहां मौजूद सब लोग हंसने लगे.. पीछे से मां कहने लगी... "छोड़ना मत, बहुत सबसे मांगी है"…


मै:- क्या चाहिए..


संगीता:- जयमाला स्टेज पर मेरे साथ ठुमके लगाएंगी ना..


मै:- हिहिहीहिहिहिहि.. मै भी लगाऊंगी और मेरे साथ गौरी भी लगाएगी.. कोई शक..


गौरी:- हां बिल्कुल.. चलिए अब डिलीट कीजिए तस्वीर..


एक छोटे से इमोशनल और हंसी मज़ाक के सेशन के बाद हम तीनो... मै, गौरी और साक्षी पहुंची प्राची के घर.. वैसे तो बाहर बहुत ही ज्यादा चहलकदमी थी लेकिन घर के अंदर केवल कुछ करीबी लोग ही थे बाकियों को ठीक सामने के 5-6 घरों में ठहरने कि व्यवस्था थी..


हम तीनो सीधा पहुंचे प्राची के कमरे में जहां आंटी यानी प्राची की मम्मी, राजवीर अंकल और मेरे वो थोड़े से भावुक पल बिता रहे थे... "लगता है विदाई मे कैसे रोना है उसका ग्रुप रेहसल हो रहा है क्यों?"..


मै पीछे से कहती हुई अंदर प्रवेश की.. मेरी बात सुनकर तीनो रोते रोते हंस दी.. प्राची आयी और मेरे गले लग गई.. गले लगकर वो अपने आशु पोच्छती हुई कहने लगी... "तू कह तो ऐसे रही है जैसे तू नहीं रोई है.. पापा इसे डर है कि मै इसके लाडले को दूर ले जा रही.. इसलिए उसके साथ आधे घंटे रो कर आयी है"…


मै:- हो ये घर का भेदी कौन है जो अंदर की खबर दे गया...


उपासना आंटी, प्राची की मा… "और कौन देगा, जिसे दूर ले जा रही है उसी ने दिया होगा"…


मै:- नाह आंटी नकुल ने नहीं दिया है.. मै जानती हूं कि ये किस शरीफ की शरारत है..


हर्ष:- तुम्हे कैसे पता की नकुल ने नहीं किया..


प्राची:- मतलब अब यही नहीं जानेगी नकुल के बारे में.. कहीं दूर वो खड़ा होगा जहां से नकुल, मेनका को धुंधला दिखाई दे, तब भी ये समझ जाएगी की वो क्या कहना चाह रहे है। पूरी भिड़ भी होगी तो भी बिना कुछ कहे ये दो दोनो पूरी भिड़ के बारे में डिस्कस कर लेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा...


साक्षी:- मेरी दीदी को रिटायर कर दो इस सर्विस से बुआ.. अब आप और नकुल भईया समझो.. मेरी दीदी अब मेरी हुई..


अरे छुटकी इतनी बड़ी हो गई.. उसको सुनकर तो हम सब हंसने लगे, तभी झट से गौरी बोल परी.. "और मै"..


साक्षी:- गौरी दीदी, आप तो बाएं ओर अब भी कब्जा जमाई हो, दाएं ओर नकुल भईया की जगह खाली है..


अरे बाप रे.. ये कुछ ज्यादा ही खतरनाक है.. मुझे आज भी याद है, लगभग यही उम्र मेरी भी रही होगी जब मेरे बड़े भैया महेश की शादी सोभा भाभी से हुई थी.. आज साक्षी की भी भाभी आ रही है.. पता ना मेरी साक्षी और उसकी भाभी की कैसी जमेगी.. मेरी भाभियां तो अपवाद केस है, जिन्होंने अन्य भाभी की तरह अपने ननद से रिश्ता नहीं बनाया...


मेरी प्यारी भतीजी ने संकेत दे दिए थे की वो अब प्यार, अपने लोग और पराए लोगों को समझने लगी थी.. अब यहां से मेरी जिम्मेदारी थी कि मै इसे समाज का कौन सा स्वरूप दिखाऊं, क्योंकि ये अपनी मां के बाद अब सबसे ज्यादा मेरी करीबी थी.. ऐसा कोई भी दिन नहीं बिता होगा जब साक्षी के डॉट 7 बजे शाम को मेरे पास कॉल ना आया हो...


मै अपनी सोच को विराम देती साक्षी के चेहरे पर प्यार से हाथ फेर और उसके गाल को चूमती.. "तू तो कनिका मिश्रा है, मेरी मां और अपनी दादी. बहरहाल लगता है दुल्हन की मां, बाबूजी और भाई को शादी में कोई काम नहीं इसलिए यहीं डेरा जमाए है.. और इस दुल्हन को तैयार होना है भी की नहीं...


तभी दरवाजे से 6 फिट हाइट बिल्कुल, भड़ा तंदरुस्त बदन, और प्रिसनलिटी ऐसी की दूर से ही देख लो तो कहने पर मजबूर हो जाओ की, ये औरत है या कोई रेसलर... पेश है नीरु मासी..


ये वही नीरु मासी है, मेरी मां की सबसे करीबी दोस्त, उन्हीं के गांव की और जिनके यहां राजवीर अंकल, उपासना आंटी को लाइन मारने जाते थे...


नीरू मासी आते ही कहने लगी.. "अरे, मेरा बेटा.. कैसी हो"…


प्राची दीदी... "अच्छी हूं मासी"..


नीरू मासी:- तुझ से कौन पूछ रहा है.. तू मेरे बारे में क्या जानती है बता.. मै क्या काम करती हूं..


प्राची दीदी जैसे ही गुम हुई सोचने मे, नीरू मासी चुटकी बजाती... "लौट आओ और मेरे बारे में जानना हो तो अपने होने वाले पति, और मेरे पोते नकुल से पूछ लेना"…


तभी उनकी नजर गौरी पर परी.. कुछ देर गौर से देखने के बाद... "तू तो कविता की बेटी है ना"..


गौरी:- हां मौसी..


नीरू:- तेरी मां का स्क्रू ठीक हुआ या अब भी पहले जैसा है..


प्राची दीदी:- मासी आप क्या नाराज हो हमसे..


नीरू मासी:- हां थोड़ी सी, लेकिन तुझसे नहीं तेरी मां से.. और तेरे बाप को तो कुछ कहने से रही.. वो तो यहां का शेर है..


बेचारी मेरी साक्षी... "नानी मुझे नहीं देखी क्या... सारा प्यार खाली वीडियो कॉल पर दिखाओगी क्या?"
 
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nain11ster

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nice update ..to gauri ko abhay blackmail kar raha tha aur apne kuch dosto ke saath sex karne ko bhi kehta tha ..isliye gauri pareshan thi ..
par nakul ne bahut saste me sabko chhod diya ..laga tha ki kuch bhayanak saja dega nakul 🤣🤣🤣..par sirf police se pitwaya ..
abhay ko to itne aasani se nahi jaane dena tha ...
koi baat nahi jo hua sahi hi hua 😁..

Haan ab Lagta Hai mamla samjh me aa gaya hai....Khair koi na na se kuch to achha ... Main focus to comouter aur mobile se deta gayab karne tha uske baad to ilaj abhi shuri hi hua tha...

Baki jane dijiye kabhi kabhi saste upchar bhi hote hain :D
 
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nain11ster

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nice update ..bahut din harsh se baat nahi kar paayi menka kyunki maa saath thi aur din me office ka kaam ..
ye prachi ke liye presentation dene gayi 5 star hotel me aur 52000 lootake chali aayi make up karne me 🤣🤣🤣..
charges ya fees kitni hai pehle dekh lena chahiye tha 😁..
aur rajneesh to mast kaam le raha hai menka se ...apne biwi ke saath maja kar raha hai aur saare kaam audit ke kaam menka se karwa raha hai 🤣🤣..

ab ravi ke baare me bata diya harsh ko ..kya wo is baat ko najarandaaj kar payega 🤔🤔..

Bechari bholi ladki ki mayusi par hanste huye galat baat hai... Ek to 52000 uske chale gaye uske baad aap hans rahe hain :D

Yahi hota hai jab kisi ko assistant mil jata hai ... Baki ranjeenish bhaiya ki jai ho :D

Is sawal ka jawab to next update me milega .. dekhiye harsh kya feel karta hai
 
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nain11ster

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nice update ..ye kya nakul aur prachi sex kar rahe the aur menka ne dekh liya 🤣🤣🤣..
isliye nakul ne pehle bataya nahi tha ki kaun gf hai uski ..
par menka ko itna shock kyu laga ,,rutu ke saath bhi to nakul kuch waqt tak pyar karta raha .
umar me badi hai prachi to kya hua agar wo nakul se sachcha pyar karti hai ..
Are umr se badi ke sath sath sachi uski jivan sangini hogi ye apne aap me shocking tha .. baharhaal jane dijiye .. ye to chintan ka vishay hai aur unhi ko karne dijiye :D... Hume ki aage badhte hain ... :D
 
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अध्याय 26 भाग:- 1




एक बरे से ड्रामे के समापन के बाद नकुल और प्राची दीदी क्या खिले से लग रहे थे... दोनो की जब से शादी तय हुई थी, बस नजरे हम पर ही थी और दोनो दुविधा में फसे..


हालांकि प्राची दीदी तो कतई दुविधा में नहीं थी, लेकिन नकुल, जो हमारे बारे में जानता था, वो मुझे और हर्ष को छोड़कर प्राची के साथ नाइटाउट के लिए जा नहीं सकता था और हमे साथ भी नहीं ले जा सकता था....


थोड़ा अजीब और खींचा सा माहौल मै भी मेहसूस कर रही थी, जहां नकुल के सामने हर्ष का होना, मुझे अनकम्फर्टेबल सा मेहसूस करवा रहा था... "क्या है.. कभी जोड़ से चिल्लाते हो, फिर ख़ामोश हो जाते हो, जिसकी जो इक्छा है वो जाहिर कर दे"। मै बीच हॉल में खड़ी होकर कहने लगी..


तभी पहले प्राची के विचार आए की इतनी बड़ी बात है तो उन्हे बाहर सेलिब्रेशन करने जाना है.. इस बात की प्रतिक्रिया मे नकुल बस मेरी ओर ऐसे देखा, मानो कह रहा हो सच्चाई जानने के बाद मै असमर्थ हूं तुम दोनो को अकेला छोड़ने के लिए. हां लेकिन मुंह से कुछ नहीं बोला...


मै:- क्यूं सेलिब्रेशन परिवार के साथ नहीं होती क्या? हम दोनों को भी ले चलो, थोड़ा दोनो परहेज कर लेना थोड़ा हम आंख मूंद लेंगे..


नकुल:- और तुम..


मै, नकुल के कंधे से लगकर उसके बाल बिखेरती... "अभी मेरी शादी थोड़े ना तय हो रही है, अभी तेरा खिला चेहरा देखना ज्यादा सुकून देगा..


नकुल मुस्कुराते हुए बस इतना ही कहा... "क्या हम भी अजीब दुविधा में फसे है. पारिवारिक समय ही मनाएंगे.. अभी तो बहुत से मौके है अकेले सेलिब्रेशन करने के"…


छोटी सी दुविधा को हम किनारे करते चल दिए.. काफी खुशनुमा सा समा था.. हम घूमते फिरते थोड़ा एन्जॉय किए.. मेरे भाई और बहू थोड़ा पीना चाहते थे, सो उन्हे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दिया और रात के 10 बजे हम सब एयरपोर्ट पर थे, घर वापसी के लिए...


अगली सुबह ही हम सब अपने सहर पहुंचे थे.. नकुल के आंगन में सभा लगी थी... हमारी गली के पाचों परिवार उनके सभी लोग.. करीब 25-30 लोग तो थे आंगन में…


सब लोग चाय पी रहे थे और कुछ-कुछ बात कर रहे थे.. मै सबको देखकर हंसती हुई कहने लगी... "आप लोग का क्या है, भोज की तैयारी करो... अरमान पर मेरे आज लग गए"..


आशा भाभी:- कैसे?


मै:- प्राची दीदी को मैंने बहन माना था, और उनकी शादी को लेकर मेरी क्या क्या योजनाएं थी.. ना शादी में ठुमके लगा पाऊंगी, ऊपर से नकुल को जीजाजी कहूं या प्राची दीदी को बहू उस धरम संकट में डाल दिया...


मेरी बात सुनकर सभी वहां हंसने लगे... फिर बहस का ताना बाना चलने लगा.. भाभियां चुटकी लेकर नकुल को जीजा बनाने कहने लगी तो वहीं उनकी सास उन्हे घूरती हुई कहती... हमेशा रिश्ता लड़का पक्ष से आंका जाता है.. शादी बाद वो प्राची मिश्रा होगी और इस लिहाज से मेनका बुआ सास.…


हिहिहिहिहिहिहि... बड़ा ही फनी सा माहौल था सुनने में मज़ा आ रहा था.. लेकिन इस मज़े के बीच नकुल पहुंच गया और भरी सभा में कहने लगा… "ये आप लोगों ने क्या कर दिया... अभी मेरी उम्र ही क्या थी.. मुझे ये रिश्ता मंजूर नहीं"…


"आव बेचारा मेरा भतीजा"… मेरी मां ने एक थप्पड़ जर दी.. गाल से अभी पहले थप्पड़ की लालिमा गई नहीं थी कि दूसरा थप्पड़ भी.. बेचारा दोनो गाल पकड़े मुझे ही घूरने लगा... उसकी आंखें बता रही थी कि वो कह रहा है "और ड्रामे करवा लो"


थोड़े से ड्रामे और कुछ सीरियस कन्वर्सेशन के बाद वो मान गया.. फिर थोड़ी छेड़-छाड़ चल ही रही थी, कि बीच में पांचवे घर, यानी नीलेश के घर रहने आए माधव चाचा की छोटी बेटी रश्मि, वो कहने लगी... "आप लोग एक बार भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और नकुल के डॉक्टर डिग्री पर उसे बधाई तक नहीं दे रहे... कोई मामूली काम नहीं करके आया है"…


स्नेहा भाभी.. तीसरे घर से... "डिग्री ही तो लिया है.. यूनिवर्सिटी होते किसलिए है.. मुद्दा तो ये है कि 21 साल का लड़का 25-26 साल की लड़की को कैसे संभालेगा, उसका कोर्स कोई यूनिवर्सिटी करवाता है तो बताओ... बेचारा हमारा भतीजा..."


स्नेहा भाभी की बात सुनकर नकुल तो वहां रुका ही नहीं, अलबत्ता बेचारी वो रश्मि दीदी जो गांव के लोगों को नकुल की उपलब्धि गिना रही थी, उल्टा उनका मज़ाक सुनकर पानी पानी हो गई...


शाम के वक्त लड़की वालों के यहां हमारा काफिला पहुंचा.. मै सबको छोड़कर सीधा प्राची दीदी के कमरे पहुंच गई.. आय हाय क्या शर्मा रही थी लड़की.. देखकर ही लग गया की मामला सब राजी खुशी चल रहा है... "क्या हुआ इतना शरमा क्यूं रही हो.. ड्रामे नहीं की क्या?"


प्राची:- तू हर बात बोलेगी और मै मान लूंगी क्या? मैंने कह दिया की नकुल मुझे बहुत, बहुत ज्यादा पसंद था, बस कुछ पारिवारिक बंदिश थी और उम्र का तकाजा, इसलिए किसी को कुछ नहीं बता पाई..


मै चौंकती हुई... "क्या बात कर रही हो… फिर रिएक्शन क्या थे"…


प्राची:- कुछ नहीं पापा और मम्मी ने भी कबूल किया की लड़का बिल्कुल हीरा है हीरा वो भी कोहिनूर वाला.. बस तुझे उम्र में छोटा है इसलिए ख्याल रहे की इस बात को लेकर तुम अपनी ना चलाने लगना.. सम्मान की भावना देना.. और खुद को एक पत्नी के रूप में ही रखना ना की कंपनी की मालकिन और औहदे में ऊंचा...


मै:- ओह हो इसलिए इतना शरमा रही हो.. आय हाय प्राची बहू ये गाल पर लाली लगाई है या फिर शर्म से लाल हुआ जा रहा है...


प्राची:- यह एक अजीब ही फीलिंग है जिसमे मै शर्माती जा रहीं हूं... प्लीज अब छेड़ना बंद कर..


मै:- चलो जरा मै सभा में चलती हूं.. वहां का भी हाल चाल ले ही लिया जाए जरा...


नीचे पहुंची तो सब बात तय हो चुकी थी… यूं तो कोई डिमांड नहीं थी लेकिन राजवीर अंकल ने डेढ़ करोड़ का दहेज ऑफर कर दिया था, बिना कुछ कहे...


मुक्ता दीदी और पंडित जी भी पहुंच गए थे.. आज छेका की रश्म होनी थी.. भारत के विभिन्न हिस्से में ये अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जिसे रोका भी कहते है.. या फिर सगुण देना.. जहां दोनो परिवार वाले लड़के और लड़की को परिणय सूत्र में बांधने की पहली रश्म निभाते है...


बैठकर शादी के विषय में चर्चा हो रही थी, यहां मै हंस्तछेप करती हुई कहने लगी... "मुझे डेस्टिनेशन वेडिंग चाहिए, जहां दोनो पक्ष यहां की कुल देवता की रश्म करने के बाद 7 दिन के छुट्टी पर चलेंगे और वही शादी होगी"…


अब था तो ये मेरा प्रस्ताव, लेकिन किसी ने सुना ही नहीं... बार-बार दोहराई तो मुझे चुप चाप बिठा दिया गया... राजवीर अंकल ने साफ कह दिया उनकी बेटी के शादी उनके अपने घर से होगी... शादी एक बड़ा यज्ञ होता है हमारा घर सुध होगा..


हम सब की सभी प्लांनिंग धरी की धरी रह गई... 18 दिसंबर की शादी थी इसलिए हम सबको एक हफ्ते का वक्त दे दिया गया की जाकर दिल्ली में जो भी काम हो निपटा लो… मुझे भला कौन सा काम था मै उन सबको बाय-बाय कहकर आ गई मासी के घर...


मासी के घर एक दिन रुककर मैंने गौरी को उठाया और अपने साथ ले आयी… हर्ष मे साथ ही केवल जीने के जो अवधि था, उसके समापन के बाद मै दिल से कुछ दिन गौरी से साथ बिताना चाहती थी...


यदि नकुल की शादी ना होती तो मै ये काम मार्च के बाद करती लेकिन कोई ना.. अब कर लेंगे... गौरी की देखकर मै बता नहीं सकती की कितनी खुश हुई। वो बिल्कुल पहले की तरह ही सामान्य थी.. मेरे हिसाब से पूरी सामान्य थी, जैसा वो बचपन से हुआ करती थी, हां बस बदलाव मे वो अब हल्का मेकअप करना जारी रखे हुए थी... प्यारी लग रही थी..


साथ रहने के दौरान गौरी अपनी इक्छा जाहिर करती हुई कहने लगी की.… "मै बहुत से लोगो के लिए बहुत कुछ करना चाहती है... खासकर उन लोगो के लिए जो वाकई खुद मे असहाय मेहसूस करते है.. वो वृद्ध लोग, जब सड़क पर अपनी असहाय हालत में देखती हूं तो दिल कांप जाता है.."..


मै:- हम्मम ! मै तुझ जैसी क्यों नहीं.. कितनी दया और करुणा है तेरे अंदर...


गौरी:- तुम हो तभी तो मेरे अंदर दया और करुणा बची हुई है वरना मुझ जैसो का लोग क्या हाल करते है, वो तुमसे छिपा तो नहीं.... जितना मुझ जैसों का होना जरूरी है उतना ही तुम जैसों का भी... छोड़ो मै भी क्या लेकर बैठ गई..


मै:- तू दिल्ली नहीं आयी पढ़ने...


गौरी:- मन नहीं करता पढ़ाई करने का.. उतना ही पढ़ती हूं, जितना पास हो जाऊं...


मै:- मेरी एक इक्छा पूरी करेगी...


गौरी बिल्कुल खिलखिलाती हुई मेरे गले लगती... "मुझे खुशी होगी"..


मै:- मेरे पास 7 करोड़ रुपए है जो मेरे किसी काम के नहीं.. बस परे है... क्या तुम उन्हे खर्च कर सकती हो, उन पर जिनको वाकई मदद की जरूरत है...


गौरी:- हम्मम ! मै ना चौकुंगी ना पूछूंगी कहां से आए पैसे.. मै बस हां कहूंगी कि मै उस पैसे को जरूरत मंदो तक पहुंचा दूंगी... खुश ना..


मै:- हां बहुत खुश..


गौरी:- तो मिस मेनका मिश्रा बताइए कैसा लग रहा है एक बार और गरीब बनकर...


मै:- मै क्यूं गरीब रहूं.. जब तक मेरे पास मेरी बहन है मै दिल से अमीर हूं... वैसे एक बात बताओ.. किसी लड़के को पसंद की है या वो भी मुझे ही ढूंढना होगा..


गौरी:- तुम ही ढूंढ लेना और थोड़ा मैच करके ढूंढना, वरना उसके लिए तो दया ही दिखाना जो मुझसे शादी करेगा...


मै:- हिहिहीहिहिहि… पागल कहीं की...


गौरी:- एक मै पागल एक तू पागल.. चल कुछ पागलपन करते है...


मै:- पक्का करेगी पागलपन..


गौरी:- हां पक्का लेकिन एक बात कहे देती हूं बीच मे पागलपन छोड़कर आने नहीं दूंगी..


मै:- आना भी कौन चाहता है...


मैंने हामी भरी और हमारी कार चल दी सड़क पर... सबसे पहले ट्रैवल वाले के पास जाकर 2 बस भारे पर लिए.. फिर दोनो बस धीमे-धीमे हमे फॉलो करने लगे... रास्ते से जितने भी बूढ़े मिलते गए, जो किसी मजबूरी के शिकार थे, गौरी उन्हे बस पर बिठाते गई...


हम लगभग गांव से लेकर सहर के सभी हिस्से से होते हुए वहीं अपने मामा के घर के ओर वाले हाईवे पर थे... दोनो बस मे कुल मिलाकर 64 वृद्ध लोग थे.. और आगे के रास्तों पर जितने भी मिलते चले गए. मामा के घर पहुंचते-पहुंचते हमे हो गई शाम और हमारे दोनो बस मे थी कुल 82 असहाय वृद्ध महिला और पुरुष...


मामा के घर के सामने हमारा काफिला रुका और हम दोनों चिर परिचित अंदाज में छोटी मामी के घर की ओर दौड़ लगा दिए.. छोटी मामी हमे देखकर बिल्कुल सरप्राइज़ थी और खुशी के मारे तो उनका चेहरा क्या खिला हुआ था... "लो मै क्या 2-3 साल ध्यान नहीं दी, ये तो भैंसी से हाथी बनने के प्रोसेस में है"…


मै छोटी मामी को देखकर कहने लगी... गौरी मामी को देखकर उनसे लिपट कर कहने लगी... "मामी पहले आधा पेट पकड़ मे भी आ जाता था आज कल तो वो नहीं नहीं आ रहा"…


मामी:- दिस इज व्हाट ओरिजनल इंडियन ब्यूटी.. अपने हसबैंड की मै ही दीपिका और मै ही अनुष्का हूं...


गौरी:- एक मामी मे 4 अनुष्का और 5 दीपिका समा जाए.. वैसे मामी फटाफट अब बाहर जाओ, हम अपने बहुत से दोस्तों के साथ आए है किसी को बोलकर उनके खाने का इंतजाम कर दो...


छोटी मामी:- हां हां क्यों नहीं अभी किए देती हूं.... लेकिन उससे पहले दीदी (बड़ी मामी) को बात दूं की तुम दोनो यहां आयी हो वरना मुझसे ही झगड़ा करेगी..


मामी के जाते ही... "इतने लोगों के रहने का इंतजाम कैसे होगा"…


गौरी:- अरे कुछ देर यहां ड्रामा करते है.. बाकी इनको फिलहाल सहर के होटल में शिफ्ट करवाओ, बाकी बाद मे बताउंगी...
lovely and shocking update ...
menka ki baat kisine nahi suni destination wedding ki ,,waise rajveer ki baat sahi hai ki shadi ghar me hi honi chahiye ,,,waise aajke waqt me gaon ko chhodke kahi jagah nahi hoti ki baarati rook sake 😔..

aur ye menka ne 7 crore gauri ko de diye garibo ki sewa aur madad karne ke liye ....aur gauri ne bhi apna kaam aaj hi shuru kar diya aur 84 budhe logo ko mami ke ghar le aayi ....
waise menka aur gauri ne sahi kaam kiya 🤩🤩🤩..
par 7 crore ko kahi achche se istemaal karke aur badhana chahiye ,,warna waqt ke saath wo paise khatm hi hote rahenge ..
 

nain11ster

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nice update ..madhvi ke ghamand ka matter sahi hai ,,paise aa jaaye to koi bhi madhvi ki tarah ki ghamand karega hi ..
waise madhvi ne apna ego satisfy kiya aur kamaal ne apna ..par aakhir jeet prachi ki huyi 😁..aur kamaal maafi maangne bhi aa gaya ..🤩.
Hahaha .. yahan sabke ego satisfy hone ke baad bhi jit kisi aur ki ho rahi ... Apne aap me kamal ho gaya ye to ... Pata nahi ye kaise ho gaya :D
 
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nain11ster

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nice update .prachi aur kamaal sir ka sex karna nashe me sahi hai par 18 saal ki prachi sharab kyu pee rahi thi aur kisine usko roka nahi 🤔🤔..
bura laga kamaal sir ki maut ka ...itni umr me josh badhanewali goli le rahe the kyunki prachi ke saath sex enjoy kar sake 😁😁..
waise prachi ko apna vaaris banakar achcha kiya ..

ab madhvi ke bure din shuru honge aisa lagta hai ..harsh par sex aur chori ka iljaam lagake jail bhej diya ..aur madhvi ke bhaiyo ne bhi usse rishta tod diya ..

Doston ke group me chupke se pi Lee.. jaise hum liye the sab ke bich na to kisi ne dekha tha aur na roka :D

Marna to tha hi kabhi na kabhi ... Mar gaye .. kahin bhi rahe shant rahe aur santusht rahe :D..

Baki action to hota hi rahta hai dekhiye aage kya hoga
 
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