अध्याय 14 भाग:- 4 (चंद मुट्ठी भर अच्छे इंसान)
बात यदि की जाए महादेव मिश्रा की सच्चाई की.. तो कुमार आंनद सर ने हम लोगों को, पहली मीटिंग के दूसरे दिन ही बता दिया था कि बिना कोई स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल बैकअप के नीलेश इतना ऊंचा नहीं उड़ सकता, इसलिए कोई भी व्यक्ति ना तो अर्पिता केस की चर्चा करेगा, ना ही नीलेश कैसे टेंडर हासिल करता है... केवल शो एन्जॉय कीजिए.. जब सबका भाग्य लिखा जा चुका होगा, तभी खुलासा होगा...
खैर अभी कुमार आंनद सर कहीं दूर-दूर तक नहीं दिख रहे थे लेकिन "आए हम बराती बारात लेकर" गाना बजते हुए करीब 8 बजे नीलेश दरवाजे पर बारात लेकर पहुंच चुका था..
समधी मिलन की रश्म बाहर दरवाजे पर हो रही थी. मै प्राची दीदी को 5 मिनट अंकल के साथ रुकने बोलकर, नकुल को साथ ली और चल दी मुख्य द्वार के ओर... आखों मे बचपन कि कई तस्वीर थी.. खासकर राखी और अन्य त्योहारों की.. बहुत छोटी थी, और चारो ओर मै अपने भाइयों से घिरी हुई...
मेरे लिए थोड़ा सा मुश्किल हो रहा था... मै एक बार नीलेश से मिलकर बस उसके गले लगना चाहती थी. बड़ी मुश्किल से आशु रोक पा रही थी.. शायद नकुल भी मेरे दिल की हालत जानता था.. या शायद हम दोनों ही एक दूसरे की हालात, क्योंकि आंसू वो भी छिपा रहा था..
भिड़ मे किसने हमसे क्या कहा हमने नहीं सुना... बारात में कौन किस नजर से उस माहोल में हमे देख रहा होगा, मुझे नहीं पता.. लेकिन थोड़ा अंदर गई तो वहां मेरे सारे भाई एक साथ खड़े थे, और उनके बीच से आ रहा था नीलेश..
नकुल को एहसास हो चला हो शायद की मै फुट फुटकर रोने वाली हूं... "मेनका मिलकर जल्दी चलते है"..
मुट्ठी भींचकर आशु किसी तरह तब रोकी, जब मेरे भाइयों ने मुझे देखा और मुझे घेरते हुए सेल्फी लेना शुरू कर दिया.. मै नीलेश को देखते ही नीलेश से लिपट गई और बस इतना ही कही की.. "भाभी के आने से हमे भुल ना जाना..." जुबान से कुछ भी निकला हो, लेकिन दिल जानता था कि मै नीलेश को आखरी विदाई देकर आयी हूं...
नकुल भी उसके गले लगा और फिर हम वहां रुक नहीं पाए. एकांत और वीराने मे हम दोनों बैठे हुए थे.. मै नकुल से लिपटकर सुबक रही थी और नकुल मुझे अपने बाहों में समेटकर, सर ऊपर करके रो रहा था...
"बाप रे, दोनो तो लिपटकर ऐसे रो रहे हो, जैसे मेनका की विदाई हो रही है"… मेरे पापा मेरे पास आकर बैठ गए...
मै, नकुल से अलग होकर पापा से लिपटकर रोने लगी.. पापा हर बात से अनजान, कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि हुआ क्या? उन्होंने हमे भिड़ से निकलते देखा और हमारे पीछे-पीछे चले आए थे... "क्या हो गया है मेरी बहदुर बेटी को. बारात में आए किसी अनजान लड़के ने कुछ किया है क्या"?
नकुल:- दादा, हम दोनों ठीक है, बस कुछ जो होने वाला है उसका आखरी नतीजा सोचकर हमे रोना आ गया था...
मेरे पापा हैरानी से देखते... "क्या किया है तुम दोनो ने"..
मैंने पहले अपने आंसू साफ किए, फिर रुमाल से नकुल का चेहरा साफ की, और मुस्कुराती हुई पापा से कहने लगी… "हमने कुछ ऐसा किया है, जिसका गर्व आपको होगा.. पूरी कहानी हम दोनों (मै और नकुल) पूरे परिवार के पास बताएंगे.. फिलहाल अंदर चलिए पापा..."
हम दोनों पापा के साथ अंदर आए. मै जैसे ही अंदर आयी, पहली बार गिरीश मुझसे बात करने पहुंचा.. मुझे धन्यवाद किया और कहने लगा… "क्या तुम मुझे जानती हो?"..
मै मुस्कुराती हुई... "मैंने आपके तरह सहर से पढ़ाई नहीं की, गांव से पढ़ी हूं, और अपने लगभग सभी रिश्तेदारों को पहचानती हूं"..
नकुल:- सर आप बड़े लोग है, आपके स्वागत मे कुछ मंगवाऊं क्या?
गिरीश:- हाहाहाहा, तू भी ना भतीजे, मम्मी नहीं आयी साथ नाचते...
मै:- गिरीश भैया आप लोग एन्जॉय करो, हम अभी लड़की वालों के ओर से है...
उसके पास से हम दोनों वापस अपने जगह पर लौट रहे थे. मै गहरी श्वांस लेती नकुल के पीछे से, उसके कंधे से लद गयी... "चल भाई, हमलोग जरा ऊंची जगह खड़े होते है.. मुख्य अतिथि, एसपी कुमार आनंद का आगमन होने ही वाला होगा..
माहौल जयमाला का, संगीता को डोली में उठाकर जयमाला स्टेज तक लाया जा रहा था... नीचे कुर्सियों पर लगभग सभी लोग बैठे.…. दुल्हन के साथ आती हुई तितलियां, खासकर बंगलोर वालियों को देखकर लड़के हूटिंग और कमेंट करने लगे...
जयमाला स्टेज पर भरा पूरा माहौल, नीचे लगभग 700 लोग, जिसमे सरकारी महकमे और गुंडों की संख्या लगभग 150 के करीब तो होगी ही, उससे कम नहीं होगा. दूल्हा दुल्हन स्टेज पर आमने सामने, हाथों में फूलों की मला लिए..
तभी अचानक वहां की लाइट भूक-भाक भुक-भक होने लगी... लोगों को लगा ये भी सजावट का कोई हिस्सा है, फिर पुरा अंधेरा.. तभी वहां डिस्को लाइट जलनी शुरू हो गई, और एक डायलॉग चारो ओर गूंजा... "स्वागत नहीं करोगे हमारा" .. और उस डायलॉग के बाद सिंघम थीम म्यूज़िक बजना शुरू हो गया...
जितने भी स्क्रीन वहां लगे थे, उसमे सबसे आगे कुमार आंनद अपने राउडी राठौड़ टाइप मूंछ पर ताव दिए, पीछे तकरीबन 200 सेंट्रल फोर्स के साथ, विवाह भवन में घुस रहे थे. पुरा अंधेरे में देखने के लिए किसी के पास कुछ नहीं था सिवाय स्क्रीन पर कुमार आंनद की एंट्री के..
कुमार आंनद आते ही सीधा स्टेज पर चढ़ गए... "दुल्हन से निवेदन है कि वो स्टेज से हटकर अपनी सखियों के साथ कुछ देर रहे, नीलेश कुमार जी आप महराजा कुर्सी पर विराजमान हो जाइए, और हम जरा यहां कुछ गिरफ्तारियां कर ले..."
मेरी आंखें बड़ी हो गई.. ऐसा लगा जैसे कोई फिल्म का सेट लगा हो यहां.. इतनी धांसू और ड्रामेटिक एंट्री, वाकई चौंकाने वाली थी... मै नकुल के ओर देख रही थी, और इधर ये दोनो (प्राची दीदी और नकुल) मुझे देख रहे थे, मानो मेरा ही सवाल मुझसे पूछना चाह रहे हो, "ये ऐसी एंट्री कब प्लान की"..
तभी संगीता हम तीनों के पास पहुंची और बताने लगी... "ये मिथलेश ने प्लान किया था. बंगलौर से जो प्रोफेशनल हायर किए थे उसने डीजे और लाइटिंग वालों के साथ मिलकर ये सब किया"…
संगीता को सुनने के बाद हम सबने सामने फोकस किया जहां ड्रामा शुरू था. सुपीरियर ऑफिसर, कमिश्नर, अपने से नीचे ओहदे वाले ऑफिसर को आंख दिखाते जवाब तलब करने लगा.. जिसके जवाब में कुमार आनंद ने इतना ही कहा कि... "सर मुझे ऑर्डर डीजीपी ऑफिस से आया है, बेहतर होगा कार्यवाही चलने दे".. फिर माईक मंगवाकर एसपी कुमार आंनद कहने लगे... "जबतक कुछ ऑफिसर और सेंट्रल की टीम नहीं पहुंचती, सोच रहा हूं आप लोगों का मनोरंजन कर दूं"..
मेरे अर्जी पर पहली ही वीडियो नीतू के रास लीला की शुरू हुई... कुछ भी ओपन नहीं दिखाया गया, लेकिन ऑडियो पुरा था और नीतू और उसके सेक्स राकेट गैंग की नई मार्केटिंग का चिर हरण करने बैठ गए कुमार आंनद... फिर तो नीलेश की कई सारे वीडियो स्क्रीन पर आने लगे और माईक पर कुमार आंनद... "दूल्हा रंगीन मिजाज का लगता है, अच्छा हुआ सही वक्त पर पहुंच गया मै"..
इधर जबतक ये सब हो रहा था, मैदान से बाकी लोगों को दूसरी ओर जाने के लिए कहा जाना लगा. 22 छोटे बड़े अधिकारी प्लस 12 गुंडों को उठाया जाना था, जिसके पीछे शुरवात से ही लोग खड़े थे, बाकियों को कुमार आंनद के साथ आयी सेंट्रल फोर्स मैनेज कर रही थी...
फिर वीडियो चलाया गया पोस्टमार्टम कर चुके उस डॉक्टर का, जिसने पोस्टमार्टम से पहले वीडियो शूट करके तीनो लड़कियों की लाश को पूरा दिखाया था.. उसके बदन के हर जख्म की कहानी को बयां किया... यहां कुछ भी ब्लर नहीं किया गया था...
फिर बिना चेहरा दिखाए डॉक्टर का बयान भी चलाया गया, जिसमे उसने बताया कि कैसे मरने तक एक लड़की को नोचा गया था. ये बिहार की जानता थी, जो गांव में मनचलों को पीटकर मार देती थी, यहां तो बेटी के साथ ऐसी बदसुलूकी हो चुकी, इसे तो हिंदुस्तान को जानता नहीं बर्दास्त करती..
इसी वीडियो के साथ पूरी लाइट ऑन हो गई.. कुर्सियां जहां रखी थी, उसके सबसे पीछे से माईक पकड़े कई लोग एक साथ सवाल पुछ रहे थे.. एक नहीं बल्कि एसपी कुमार आनंद ने पूरे मीडिया को यहां ला खड़ा किया था... मीडिया के सवाल जैसे आक्रोशित पब्लिक के सवाल थे, और सबकी नजर तो मानो नीलेश पर ही टिकी थी... "यही है वो हवसी दरिंदा"
किन्तु कुमार आंनद ने जैसे ही पहला लाइन बोला.. "इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला अपराधी, किंग मेकर के नाम से इस इलाके में जाना जाता है"… ठीक उसी वक्त एक गोली फायरिंग हुई और महादेव मिश्रा का ठंडा शरीर नीचे जमीन पर. वो खुद को गोली मार चुका था...
शायद वो भी समझ चुका था कि अब जीना मरने से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा और वो तुरंत ही फैसला कर चुका था. जैसे ही बुलेट फायर हुई, वहां माजूद लोगो के पाऊं तले से जैसे जमीन खिसक गई हो.. किसी के लिए यकीन कर पाना मुश्किल था कि इन सबके पीछे उसका हाथ था... आक्रोशित लोग चिल्लाते हुए कहने लगे... "साला आसान मौत मर गया वरना चौराहे पर टांग देते"..
एसपी कुमार आंनद अपने साथ आए सभी ऑफिसर और टीम को तुरंत ही आदेश दिए की सभी अभियुक्तों को तुरंत हथकड़ी पहनाई जाए. 33 लोगों के हाथ में जैसे ही हथकड़ी चढ़ी, वहां के माहौल मे सनसनी पैदा है गई.
मौजूद लोगो आक्रोशित होकर सब को यहीं के यहीं नंगा करके चीरने की मांग करने लगे. सबको लगा की लड़कियों के वैशिहना मौत के पीछे इतने लोगों का हाथ है... आंनद ने बताया कि बस कुछ लोग उस जघन्य अपराध में लिप्त है, बाकियों को हम अलग-अलग केस में उठा रहे है...
भीड़ को किसी तरह शांत करवाया गया और वहां से सभी दोषियों को भरकर ले जाया गया, जिसमे बड़े-बड़े सरकारी नाम मे, जिला कमिश्नर, एक मानसिक रोगी, एक्सक्यूटिव इंजिनियर, मानसिक रोगी. इसके अलावा डीएम, डेप्युटी डीएम, यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर और डेप्युटी एसपी था. इसके अलावा कई सरकारी अधिकारी, और 12 गुंडे..
और सबसे आखरी मे नाम आया इन सबको करप्ट बनाने के गिरोह का, जिसका मुख्य आरोपी नीलेश, गिरीश, नीतू, पूनम और फातिमा को बताया जा रहा था. नीतू को जब लेडी पुलिस लेकर जा रही थी, नकुल ने उसे रुकवा लिया.. एसपी ने भी इशारे मे रुकने कह दिया..
नकुल उसे देखकर जोर से हंसा.. उसकी ओर देखते हुए कहने लगा... "शायद तुम जल्दी छूट जाओ, गांव में तुम्हारा इंतजार करूंगा नीतू... अब तक गांव के मज़े लिए, अब जेल के मज़े लो"…
ओह हां एक प्यारी सी घटना तो नीलेश और गिरीश के साथ भी हो गई... उसके साथ तकरीबन 8 गनमैन पहुंचे थे.. जो बारात मे बुलेट फायर कर रहे थे, नीलेश उनको देखकर कहता है... फायरिंग शुरू करो"..
एक शूटर नीलेश को झन्नाटेदार थप्पड़ मारते... "साले यहां लोकल ऑफिसर नहीं है जो घुस देकर बहाल हुए है, सेंट्रल की फोर्स लेकर आए है, हमने चुं भी किया तो गोली मारकर निकल लेंगे.. ये लोग थोड़े ना जिले में, या बिहार में रुकने वाले है जो डरेंगे.. सर हम भी सरेंडर करते है, इलेगल वैपन और अर्म्स ऐक्ट मे डाल दो अंदर"..
हम सब उसकी बात सुन सकते थे, और हम सबकी हंसी निकल आयी. दरअसल मामला वो नहीं था जो उस शूटर ने कहा, बल्कि कुमार आंनद ने 5 करोड़ मे सेंट्रल होम मिनिस्ट्री मैनेज किया था और 2 करोड़ उन लोगों के पीछे बहा दिए जो मुख्य अभियुक्त के साथ, 10-20 हजार के लिए काम करते थे..
कमिश्नर ऑफिस बिका हुआ था, डीएम ऑफिस, ऐसे ही अलग-अलग ऑफिस के स्टाफ को भी खरीद लिया गया था. कच्चा खिलाड़ी नहीं था कुमार आंनद, वीडियो एविडेंस के अलावा उसने इस हाई प्रोफाइल केस में, 2 करोड़ मे 80 गवाह को खड़ा किया था.. ज्यादातर पैसों पर बिक गए थे, वहीं कुछ क्रिमिनल भी थे जो महादेव मिश्रा और उन जैसों की करतूत, ने उन्हे भी हिला रखा था. जिसमे सबसे मुख्य था नंदू, और उसके अलावा नीलेश के साथ काम कार रहे 2-3 क्रिमिनल... जो स्वैक्षा से सब गवाह बनने के लिए तैयार हो गए थे...
नंदू और कुछ क्रिमिनल लगातार मना करते रहे कि काम और मज़े के लिए जब हमारे पास लड़कियां है, फिर किसी के साथ जबरदस्ती क्यों.. लेकिन महादेव मिश्रा से मिली ताकत के नशे में, नीलेश और गिरीश ऐसा अंधा हुआ कि ना सिर्फ जबदस्ती लड़की उठाया, बल्कि महादेव मिश्रा के खेल मे सामिल भी हो गया...
खैर पुरा जुलुश निकल चुका था.. नीलेश के लिए मै पहले ही रो चुकी थी, इसलिए उसके लिए भावना बिल्कुल खत्म हो गई थी कि वो जिए या मरे… हम चारो.. मै, नकुल, प्राची दीदी और संगीता चारो खुशी से ग्रुप गले मिल लिए और ठीक उसी वक्त मेरे पापा अनूप मिश्रा वहां पहुंच गए.. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा... "गर्व का एहसास वाकई हुआ, बाकी पूरी कहानी घर पर सुनुगा... चलता हूं अभी."
जैसा कि मैंने तय किया था नीलेश की शादी में नीलेश और नीतू का पुरा जुलुश निकालना, वो हो चुका था. मेरा बदला पुरा हुआ, बाकी अपने कर्मों की सजा सबको खुद यहीं भुगतनी पड़ती है, सो उसके कर्मो की सजा वो जाने...
फिलहाल ये वक्त था एक ग्रैंड सेलिब्रेशन का... और अंत में एक बार फिर उनको दिल से धन्यवाद, जो इस केस की गहराई को पहले दिन समझा और दूसरा जिसने उस गहराई को बिना किसी लालच के भर दिया, और तीसरा जो बस इंसाफ के इंतजार में बैठे पूरी सच्चाई को संभाले बैठा था... कुमार आंनद, राजवीर सिंह, और पोस्टमार्टम कर चुके वो सरकारी डॉक्टर.... गिनती के 3 अच्छे लोग जब अपने ताऊ मे आए तो क्या हश्र हुआ कमीनो का...
महादेव मिश्रा....... बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें धन और शोहरत का नशा नहीं होता है मगर महादेव मिश्रा जी भी उन्हीं लोगों में शुमार थे जो कि अधिकांश लोगों में होता है ।
हम सभी नीलेश और उसके साथियों के साथ साथ गवर्मेंट के बड़े बड़े अफसरों को ही करप्ट समझ रहे थे मगर महादेव मिश्रा के बारे में किसी ने सोचा नहीं था ।
इन सभी का जो अंजाम हुआ वो पढ़कर बहुत अच्छा लगा ।
उन सारी लड़कियों के आत्मा को शांति मिलेगी और उनके पुरे परिवार की दुआएं मेनका को झोली भर के मिलेंगी ।
इस नकली शादी में भी मेनका , प्राची और संगीता के साथ साथ उन सबकी सहेलियों ने काफी जमकर लुत्फ उठाया ।
कपड़े पहनने से लेकर खान पान तक ।
वैसे फुचका ( गोलगप्पा ) और चाट मुझे बहुत पसंद है ।
नीलेश के साथ अंतिम बार मेनका और नकुल का मिलना बहुत बढ़िया लगा । खास तौर पर दोनों का सेंटीमेंट्स होना ।
चंद मुठ्ठी भर अच्छे इंसानों ने काले साम्राज्य का अंत कर दिया ।
सुपर साहब और मेनका को इसका श्रेय जाता है । मेनका के परिवार को उस पर गर्व होगा ।
बेहतरीन अपडेट नैन भाई ।
थोड़ा बहुत प्रोब्लम है जिसके चलते समय नहीं मिल पा रहा है । शायद कुछ दिन और लगेंगे ।