शाम को दीदी और शीतल घर आये उनके घर आते हैं मैंने दीदी को कसकर गले लगाया और फिर सबके सामने ही उनके होठों पर अपने होंठ रख के किस किया . जब मैंने दीदी को छोड़ा तब दीदी बोली “बदमाश कहीं के मेरी बेटी और मेरी मां के सामने ही मुझे किस कर रहा है “
मैंने कहा “आपकी बेटी और मां के सामने चोदूगां भी “ यह बात सुनकर दीदी का चेहरा पर लाल हो गया
दीदी माँ से बोली “ कितना कमीना हो गया है नीरज “
माँ कुछ बोले उससे पहले ही शीतल बोल उठी “ बहनचोद और माधरचोद भी बन गए है “ जिसे सुनकर सब हँसाने लगे और मैंने शीतल को पीछे से पकड़ लिया और कहा “ भांजीचोद भी बना हूँ “ और ऐसा कहते ही एक हाथ से उसकी चुची मसलने लगा और दूसरे हाथ se उसकी बुर सहलानें लगा ।
माँ और दीदी ये देखकर मुस्कुराने लगे ।
तब मैंने कहा “ दीदी आप चलो मै आपकी बेटी को समझाता हूँ की मै कितना बड़ा भांजीचोद हूँ “
और मै उसके स्कर्ट का बटन खोलने लगा तभी दीदी बोली “ बेटी से याद आया मेरी बिटिया कहा है, और कैसी है “
मै बोला “ मस्त है “
इतना सुनते शीतल बोल उठी “मामा मम्मी प्राची का पूछी प्राची की गांड नहीं “
यह बोलकर वह हसने लगी । वहा मम्मी और दीदी भी हसने लगे । हसते हुए माँ बोली “ हाँ गांड मस्त भी है और मोटा लण्ड भी ले ली है “
दीदी बोली " बिचारी मेरी बेटी , कैसे इतना मोटा लण्ड ली होगी गांड में " मैंने कहा दीदी "आराम से "
दीदी बोली " काश वो सीन मई देख पाती "
माँ " मैंने तो पूरा सीन देखा "
दीदी " प्राची आपके सामने ही "
माँ " अरे नहीं उसे तो पता नहीं था उसने आँखे जो बंद कर रखी थी, "
मै " उसे हमारे खेल के बारे में नहीं पता उसे मै अपने कमरे में ले जाकर सुलाऊगा और फिर हम मम्मी के कमरे में मस्ती करेंगे "
दीदी " मतलब , तू फिर से उसकी गांड मारेगा "
मै " नहीं दीदी , उसकी गांड में तो बहुत दर्द है आज दुबारा नहीं ले पायेगी मै तो सोच रहा था की "
तभी तपाक से शीतल बोल उठी " उसकी बुर फाड़ दूँ "
दीदी " नीरज क्या सच में तू आज उसकी बुर फाड़ेगा "
मै " दीदी , मै सोच रहा था की दोनों जगह का उद्घाटन एक ही दिन हो तो कैसा रहेगा "
दीदी " बहुत बड़ा चोदू बन गया है तू "
फिर सब ऐसी वैसी बाते हुयी और हम लोग रात का प्लान करने लगे। दीदी ने मुझसे कहा था की उसे प्राची की चुदाई की आवाजे सुननी है। तो मैंने कहा था की मै फ़ोन चालू कॉल लगाकर अंदर जाउगा आप लोग म्यूट करके सिर्फ आवजे सुन लेना। दीदी और शीतल को देखकर प्राची खुश हुयी।
रात को खाना खाने के टेबल पर मै खुद प्राची को लेकर आया जो थोड़ी लंगड़ा कर चल रही थी। मैंने उसे अपनी गॉड में ही बिठाया वो एक फ्रॉक पहनी थी सिर्फ। वो मेरे ही प्लेट में खाना खाने लगी। तभी मै उसके साथ मस्ती करने लगा जिसके लिए उसे गोद में बिठाया था।
मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघ सहलाते हुए सीधा फ्रॉक के अंदर डाला जहा पर चड्डी ना होने की वजह से प्राची की प्यारी सी चुत मेरे उंगलियों के चंगुल में फंस गयी।
प्राची डरने लगी पर वो मन नहीं कर पा रही थी। उसकी बुर को मैंने इतना रगड़ा की वो पूरी गीली हो गयी। टेबल पर सबको पता था की मेरा एक हाथ निचे क्या कर रहा है। पर सब अनजान बने हुए थे। फिर मैंने अपनी छोटी वाली ऊँगली थोड़ी घुसा दी वो चिहुँक उठी। सब बोले क्या हुआ।
प्राची सकपका गयी " बोली कुछ नहीं वो मुझे भूत वाली पिक्चर याद आ गयी तो दर गयी "
शीतल अपनी माँ की कान में फुसफुसाई " बहुत वाली पिक्चर नहीं, कोइरी चुत में ऊँगली का असर था "
दीदी मुस्करायी और उसे चुप रहने का इशारा की।
प्राची थोड़ा हिल रही थी ताकि मै अपनी ऊँगली निकाल लू पर मै तो ऊँगली पर दबाव बना कर रखा था जितना वो हिलती उतनी ही और अंदर ऊँगली घुस जाती, फिर मैंने अपनी ऊँगली तभी निकली जब तक वो पूरी घुस ना गयी। प्राची ने एक राहत की सांस ली और खाना खाने लगी पर उसकी राहत सिर्फ कुछ पालो का ही मेहमान थी क्युकी अब मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली उसके बुर में पेल दी।
वो तो फिर सिहर उठी। मेरी इस हरकत का सब लोग खूब मजा ले रहे थे सिर्फ प्राची थोड़ी असहज थी। जब तक हम खाना खाये मैंने उसकी बुर को ऊँगली से खूब चोदा वो झड़ भी गयी थी।
खाना खाने के बाद मैंने कहा की मै प्राची को अपने कमरे में सुलाऊगा आप लोग माँ के साथ सो जाओ।
मै फ़ोन कॉल लगाकर कमरे में आया। मुझे देखते ही प्राची बोली " मामा आप गंदे हो, मै आपसे बात नहीं करुँगी "
मैंने कहा " प्राची बेटा, इसमें मेरी कोई गलती नहीं। तुम और तुम्हारी मुनिया इतनी प्यारी है की मै खुद को रोक नहीं पाया "
प्राची " आप भी मामा कुछ भी बोलते हो "
मै " हाँ बेटी , तुम्हारे बिना बालो वाली चुत की कसम "
प्राची हैरत से " क्या वह भी बाल आते है "
मैंने कहा " हाँ बेटी। पर तुम हमेशा साफ़ ही रखना , जैसा अभी है "
"जरा दिखाना अपने मामा को थोड़ा प्यार कर लूँ " और मैंने प्राची को बीएड पर सुलाकर उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी चुत का रसपान करने लगा।
प्राची मजे में " मामा ऐसे ही चुसो और चाटो मेरी बुर आअह्ह्ह्हह.......... बहुत अच्छा लग रहा है.......... सीस्स्सस्स्स्स ........आअह्ह्ह्ह....... मामा और अंदर डालो जीभ...... बहुत अच्छा लग रहा है ..."
यहाँ माँ के कमरे में प्राची की कामुक आहे सुनकर तीनो पीढ़ियों की चुत कुलबुलाने लगी और तीनो माँ बेटी और नानी जन्मजात नंगी होकर एक दूसरे को चूमने लगी बिस्तर पर । दीदी माँ की बड़ी चुचिचिय चूस रही थी और उसकी बेटी अपनी माँ की।
जब प्राची पूरी तह से गरम हो गयी तो मै उसकी चुत चेतना छोड़ कर खड़ा हो गया। प्राची तो जैसे सवर्ग से सीधे निचे जमीं पर आ गयी हो ऐसा रिएक्शन देकर बोली " जल्दी जीभ अंदर डालो न मामा प्लीज "
मै बोलै "बेटी, अब जीभ नहीं दाल पाउगा वो दुःख रही है "
प्राची " मामा , प्लीज ऊँगली ही डालो न अब सहन नहीं हो रहा है। "
मै बोला " बेटी मेरी ऊँगली और जोभ दोनों दुखने लगे है, तू बोले तो कुछ और डाल दू "
प्राची कामुकता के नशे में बोली " हाँ , मामा कुछ भी डालो पर जल्दी डालो "
मै " ठीक है बेटी फिर मत कहना मुझे "
मै अपने मोटे तगड़े लण्ड को उसके बिना बालो वाली चुत पर रगड़ना लगा जिससे उसे मजा आने लगा और उसने आँखे बंद कर ली। मैंने भी सही मौका देकर उसके चुत के मुँह पर लण्ड रखा जिसे लेने के लिए प्राची ने खुद बी खुद अपने पैरो को और ज्यादा खोलकर चुत का मुँह खोला बस मैंने तो पहले से ही अपने लण्ड पर बहुत सारा थूक लगा लिया था और प्राची की चुत भी गीली थी। मैंने उसके दोनों पैरो को पकड़कर जोर का झटका मारा और और अपना आधा लण्ड सुपाड़ी सहित घुसा दिया। मेरा झटका इतना जोर का था की बेड के चरमराने की आवाज बाहर वाले कमरे तक साफ़ सुनाई दी साथ ही मेरी रंडियो को प्राची की चीख भी मोबाइल के बदले डायरेक्ट सुनाई दी।
प्राची ने कहा की "आअह्हह्ह्ह्ह ..............मामा दुःख रहा है.......... बहुत निकालो इसे जल्दी "
और वहा ये सब सुनते हुए शीतल बोल रही थी " मामा ने क्या शॉट लगाया है। काश इतना जोरो को शॉट मुझे लगता "
दीदी " मुझे तो लग रहा है आज नीरज धुआधार चुदाई के मूड में है "
माँ अपनी चुत को रगड़ते हुए बोली " धुआँधार नहीं बुरफाड चुदाई "
प्राची की बुर इतनी टाइट थी की मेरे लण्ड को भी जकड लिया था। मैंने जैसे ही अपने लण्ड को आधा इंच बाहर की तरफ खींचा तो प्राची को दर्द हुआ तो वो बोली " मत निकालो मामा "
जैसे ही मैंने ये सुना मैंने दुगने स्पीड से लण्ड अंदर पेल दिया और अब ५ इंच तक लण्ड उसके चुत में चला गया।
इस बार तो प्राची चिलायी "
आअह्हह्ह्ह्ह ...........फट गयी मामा ........ बहुत दर्द हो रहा है.......... निकाल लो "
मैंने फिर वही किया पर इस बार मैंने एक इंच लण्ड बाहर निकाल लिया ४ इंच अंदर ही था की प्राची दर्द से बोल उठी " अंदर ही रहने दो मामा "
मै ठीक है बेटी जैसा तुम कहो और अपनी पूरी ताक़त के साथ लण्ड अंदर कर दिया और इसी के साथ अपना ७ इंच का लण्ड पूरा उसकी बुर के गहराई तक उतार दिया और वही रुका कुछ समय तक। जब प्राची को दर्द काम हुआ तो वो बोली " मामा इतना दर्द हो रहा था तो आप अंदर क्यों डाले "
मै बोला " तुम ही तो बोली की डालो तब मैंने डाला फिर बोली निकालो तब मै निकालने लगा तो तुम बोली अंदर रहने दो तो मैंने अंदर कर दिया "
फिर मैंने पूछा "अब दर्द कैसा है " तो वो बोली अब थोड़ा काम है तो मैंने कहा मै धीरे धीरे अंदरद बाहर करूँगा तो तुम्हे आराम मिलेगा और अच्छा लगेगा " वो बोली "ठीक है "
बस फिर क्या था उसकी परमिशन मिलते ही मै धीरे धीरे लण्ड को आगे पीछे करने लगा करीब १५ मिनट के बाद उसे मजा आने लगा तो वो भी अपनी गांड हिलाकर मजे लेने लगी तब मैंने भी धक्को की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी। और २० मिनट के बाद उसके चुत में ही अपना माल छोड़ दिया।
उसके बाद मैं उठा उसकी चुत साफ़ की और उसे खड़ा किया तो बिचारी खड़ा चल ही नहीं पा रही थी तो मैंने उसे बिस्तर पर सुलाया और आराम करने को कहा।
मै उसे कहा " बेटी तुम आराम करो मै जरा दीदी और माँ से कुछ बात करके आता हूँ "
अपने रूम के बाहर आते ही नंगा हो गया और जैसे ही मै माँ के कमरे में आया। मेरी दीदी और शीतल मेरे दोनों तरफ से चिपक गए तो माँ को कुछः न मिला तो वो बैठ कर मेरे लण्ड को ही मुँह में लेकर चिपक गयी