Update:- 157
बाउंसर ने संपर्क किया और डिस्को का दरवाजा तुरंत खुल गया। वहां का मनाजिंग डारेक्टर खुद सिन्हा जी को लेने आया था। दोनो जैसे ही अंदर आए सिन्हा जी मैनेजर को वापस भेजते… "छोटे यहां तो घर की पार्टी लगती है। देख तो मेरा बेटा और बहू कितने प्यारे लग रहे है।".. (आरव और लावणी)
एक बड़े से सोफे के चारो ओर... आरव, ऐमी, कुंजल, लावणी, साची, ध्रुव, और कुंजल के कॉलेज के 1,2 फ्रेंड बैठे थे। किसी के हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक तो किसी के हाथ में हार्ड ड्रिंक पड़ी हुई थी।"… उन्हें देखकर अपस्यु कहने लगा.. "यहां हम दोनों आए है ना, फिर जो जिसके साथ आया है उसे एन्जॉय करने दो। चलो चलकर हम अपना एन्जॉय करते है।"..
दोनो बार काउंटर पर पहुंच चुके थे और बार टेंडर दोनो को ड्रिंक सर्व कर रहा था। इसी बीच आरव की नजर दोनो पर गई… "चलो कहीं और चलते है।"..
कुंजल:- क्या हुआ, यूं अचानक..
आरव:- बार काउंटर पर देखो, रहूं और केतु साथ में पहुंचे है। कुछ ही देर में यहां सॉलिड कचरा होने वाला है।
साची:- यार एक तो हमने दोनो में से किसी को पूछा नहीं, अब दोनो अपना एन्जॉय कर रहे हैं तो करने दो। तुम लोग ये नहीं हुआ कि यहां बुला ले, उल्टा उन्हें देखकर भागने का सोच रहे।
ऐमी:- तुमलोग रहो मै जा रही हूं। तंग आ गई हूं मै दोनो की नौटंकी से।
आरव:- पती को कंट्रोल में करने के बदले उल्टा भाग रही हो। बैठो चुपचाप।
ऐमी:- आरव मुझे रोकने की कोशिश मत कर, वरना अच्छा नहीं होगा।
अपस्यु उनकी ओर देखकर… "बापू बाकी समय तो ठीक है लेकिन आपकी ये बेटी जो है ना हमे साथ देखकर अपना मुंह काहे चढ़ा लेती है।"
सिन्हा जी एक जाम हवा में लहराते… "मुझे क्या पता आज उससे पूछकर ये मैटर सलट ही लेते है। चल..
"हां बापू चलो।"… कहते हुए अपस्यु खड़ा हुआ और ऐमी के ओर फ्लाइंग किस्स भेजते हुए वापस कहने लगा… "बापू, थोड़ी देर के लिए कान बंद कर लो, ऐमी को देखकर मेरा मूड रोमांटिक हो गया।"..
सिन्हा जी:- तू जा छोटे अपने प्यार का इजहार कर, तेरे बापू का आशीर्वाद है।
अपस्यु माईक का जुगाड करके, उसपर चिल्लाते हुए… "अरे ओ ऐमी, मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है, आज का वादा है देख मैं आ गया, तू भी जळी आ मुझे मत और तड़पा।
ऐमी अभी अपनी बात खत्म कर ही रही थी कि इतने में अपस्यु की फटी आवाज़ बजने लगी… ऐमी अपने हाथ से अपना चेहरे ढक्ती… "ये नहीं सुधरने वाले।"
कुंजल:- भाभी कुछ तो रेस्पॉन्स करो..
लावणी:- कितना चाहते है ऐमी दीदी तुम्हे। अब जाओ भी, देखो कैसे बुला रहे है।
ऐमी:- क्यों मेरे सब्र का इम्तिहान ले रहे हो। आरव चल तू डैड को लेकर जा और मै अपस्यु को। आरव..
आरव:- हां चल रहा हूं, चिल्ला क्यों रही हो भाभी।
ध्रुव:- किसी को अभी जाने की जरूरत नहीं है। जबतक कुछ ऐसा नहीं होता कि इन्हे ले जाने की जरूरत हो, तबतक रहने देते है फिर जब ऐसा लगेगा कि ओवर हो रहा है तो ले जाना, क्यों इतना रिएक्ट करके अपनी और उनकी दोनो की शाम बर्बाद कार रहे हो।
इधर अपस्यु का गाना जैसे ही खत्म हुआ मैनेजर भागता हुआ आया… "सर मुझे लगा आप कुछ अनाउंस करेंगे इसलिए माईक दिया था, लेकिन आप तो गाने लगे। सर ऐसी आवाज में गाएंगे तो हमारे पब की इज्जत चली जाएगी।
अपस्यु:- ले भाई, ले जा इस माईक को और अपनी इज्जत बचा ले। बापू कोई रेस्पॉन्स ही नहीं है।
सिन्हा जी:- आखिर बेटी किसकी है? मुझे तुम तीनो पर ना प्राउड टाइप फील होता है। जनता है मेरी दिल से इक्छा थी तू ही मेरा दामाद बने। उमाहहहह..
कहते हुए सिन्हा जी ने उसे किस्स कर लिया। अपस्यु सिन्हा जी को गले लगाते… "क्या यार बापू इमोशनल कर देते हो।"..
"अरे मेरा छोटा इमोशनल हो गया। ले तू इसे पी फिर पीकर इस ऐमी की खबर लेते है, इतने प्यार से तू गाना गाया और उसने रेस्पॉन्स ही नहीं किया।"..
इधर जबतक दोनो आपस में लगे थे और उधर ऐमी ध्रुव की बात मानते जैसे ही नॉर्मल होकर हसने लगी, और दोनो के किस्से शुरू से सुनने लगे इतने में ही… "हाई, क्या मै तुम लोगो को ज्वाइन कार सकता हूं।"..
आरव:- आप कहीं और जाइए सर, यहां फैमिली पार्टी चल रही है।
एक लड़का:- ओह कम ऑन यार, हम जारा भी परेशान नहीं करेंगे 2 को। 2 लड़की जो एक्स्ट्रा लाए हो, उन्हें हम दोनों बस कंपनी देंगे।
दूसरा लड़का:- फैमिली पार्टी होटल में की जाती है ना कि पब में। हम भी अपने दोस्तो के रूम में उसके कजिन बनकर रुकते है और खूब मज़े करते है।
ध्रुव खड़ा होकर जैसे ही कॉलर पकड़ा, ऐमी अपस्यु को देखने लगी। अपस्यु सिन्हा जी को गले से लगा रहा था, और उसे देखकर वो अंदर से खुश हो गई। .. ",सॉरी बेबी"… गिल्ट फील करती वो दिल में खुद से कहने लगी और अगले ही पल अपने टेबल पर ध्यान देती… "ध्रुव छोड़ो इन्हे, हां बताओ मुझे कौन कंपनी देने आ रहा है।"
एक लड़का आगे बढ़कर अपने दिल पर हाथ रखा और अपने हाथ उसके ओर बढ़ा दिया। ऐमी उसकी उंगली पकड़कर थोड़ा फोर्स लगाई और खींचकर एक थप्पड़ मारते… "मुझे तो मज़ा आ रहा है कंपनी का। आई लव इट।"..
इतने में दूसरा कड़का कुछ बोलने को हुआ, आरव उसके पाऊं में एक लात मारकर नीचे गिराया.. "आराम से लेटा रह भाई, अभी उसे तो कंपनी एन्जॉय करने दे। और इधर ऐमी जबतक उसका उंगली लगभग तोड़ने जितना दवाब बनती 5-6 झन्नाटेदार थप्पड़ खींच चुकी थी।.. "मज़ा आ रहा है मेरी कंपनी का।".. "सॉरी सिस्टर भुल हुई को जबरदस्ती घुसने चला आया, प्लीज मुझे छोड़ दो।"
ऐमी उसे छोड़कर पूछने लगी… "और किसे कंपनी चाहिए।"..
"मुझे"… अपस्यु पीछे से उसके कंधे पर लादकर कहने लगा.. तेज म्यूज़िक की वजह से ऐमी आवाज़ पर नहीं ध्यान दे पाई, लेकिन पीछे से कोई कंधे पर लटक रहा था… तेजी के साथ मुड़ी और एक झन्नाटेदार थप्पड़ खींचकर।
हर किसी का मुंह खुला का खुला ही रह गया। अपस्यु ऐमी को टुकुर टुकुर देखते… "सारे पैसे बर्बाद, एक ही तप्पड़ में पुरा नशा उतार दी। वैसे थप्पड़ मारने के लिए तो मैंने मना किया था न स्वीटी।"
ऐमी:- सॉरी बेबी मुझे लगा कोई अनजान लड़का मेरे कंधे पर हाथ दिए है।
अपस्यु:- एक झलक देख ही लेती कम से कम, खैर कोई नहीं, वो दोनो लड़के यहां परेशान तो नहीं कर रहे थे।
कुंजल:- भाई आप बैठो तो पहले..
अपस्यु:- नहीं हम तो बस बाय कहने आए थे। वो लगा ऐसा की हम कोई यहां ड्रामा ना करे ये सोचकर तुमलोग कहीं परेशान ना हो, इसलिए हम घर जा रहे है यही कहने आया था। चलो बापू…
अपस्यु आगे चला, उसके पीछे उठकर ऐमी भागी, उसके पीछे लड़खड़ाते सिन्हा जी।…. "ओ बूढ़उ, कहां चले।"
सिन्हा जी:- अपने साकी के पास जा रहा, वो अकेला बाहर गया है।
आरव:- वो अकेला बाहर नहीं गया है, पीछे से उसकी होने वाली पत्नी भी गई है। अब मियां बीवी के बीच में जाकर क्या करोगे।
सिन्हा जी:- फिर मै क्या करूं?
आरव:- जब वो वापस आकर चलने के लिए कहे, आराम से यहीं बैठे रहना और बोल देना आरव मुझे छोड़ देगा।
अपस्यु अपने कार तक पहुंचा, पीछे पीछे ऐमी भी… "बेबी सुनो तो।"..
अपस्यु:- क्या हुआ ऐमी?
ऐमी, अपनी कान पकड़ती… "सॉरी बेबी, तुम्हारे आने के ठीक पहले 2 लड़कों ने बहुत ही ज्यादा बदतमीजी की थी। एक को वार्निग दे दिया था, तभी तुमने अचानक से मेरे कंधे पर हाथ रखा और…"
अपस्यु:- हां मैं समझ गया, कोई बात नहीं। ये बापू किधर रह गए।
ऐमी:- बापू की बेटी को ले चलो कहां ले जा रहे, उन्हें शायद किसी और कि कंपनी पसंद आ रही हो।
बिना कोई जावाब दिए पब में गया। वहां जब पहुंचा तो सिन्हा जी सबके बीच बैठे आराम से दारू का मज़ा ले रहे थे। अपस्यु वापस आकर कार में बैठा जहां पहले से ऐमी बैठी हुई थी। अपस्यु बिना कुछ बोले ड्राइव करने लगा..
ऐमी:- अब कुछ बोलो भी, ऐसे चुप तो ना रहो।
अपस्यु:- आई लव यू
ऐमी:- लव यू टू बेबी। कुछ और बोलो ना।
अपस्यु:- लेकिन बोलना क्या है, तुम ही कुछ शुरवात क्यों नहीं करती?
"अकडू कहीं का, गुस्सा होना भी है, और गुस्सा दिखाना भी नहीं।"…. ऐमी अपने मन में सोचती हुई, अपस्यु का चेहरा देखने लगी। अपस्यु बिना कोई प्रतिक्रिया दिए ड्राइव करता रहा और कार अपार्टमेंट के पार्किंग में खड़ी करके, फ्लैट के ओर बढ़ने लगा।
"हद है मै साथ में हूं, और तुम आगे आगे भाग रहे।"… ऐमी पीछे से टोकती हुई कहने लगी। अपस्यु 4 कदम पीछे आकर ऐमी को देखकर मुस्कुराया और हाथ पकड़ कर.. "चले मिस।"..
दोनो साथ साथ चलने लगे, अपस्यु ख़ामोश "हां, हूं" में जवाब देते और ऐमी उससे तरह तरह के सवाल पूछती। थर्ड फ्लोर पर पहुंचते ही अपस्यु सीधा अपने फ्लैट ना जाकर उन लड़कियों के फ्लैट के दरवाजे पर था। बेल बजाकर अपस्यु वहीं बाहर खरा रहा… "तुम रात के 11.30 बजे इनके कमरे की बेल क्यों बजा रहे हो।"…
ऐमी जबतक ये सवाल पूछ रही थी, अंदर से दरवाजा खुला और साथ ही साथ पीछे से आवाज भी आयी… "कामिनी कहीं थी ना ये केवल गर्ल्स पार्टी है, फिर कौन अपने बॉयफ्रेंड को यहां बुला कर लाई।"..
इधर जबतक दरवाजे का छोटा सा हिस्सा खोलकर वहां रहने वाली 4 लड़कियों में से एक लड़की खुशी चिल्लाते हुए कहने लगी… "अरे शांत हो जाओ बाहर रूम ऑनर खड़े है।"
"हां तो उससे बोलो कल सुबह आएगा, अभी हम पार्टी कर रहे है।".. वापस से किसी दूसरी लड़की की आवाज आयी।… "क्या बात है मिस, सैटरडे नाईट का पुरा फायदा उठाया जा रहा है, 2 महीने बीते 1 महीना हो गया, फ्लैट का किराया अब तक नहीं आया।"..
ऐमी:- किराया काया वसूल लेगी, चलो भी बेबी अब यहां से, इनको पार्टी करने दो।
तभी खुशी पुरा दरवाजा खोलते… "अंदर अाए सर, मै पूरी बात बताती हूं।".. अंदर का नजारा देखकर तो ऐमी का मुंह खुला ही रह गया। 8-9 लड़कियां थी सभी लिंगरी में, और लगभग बहुत कुछ के बहुत कुछ दिख रहे थे। अपस्यु एक झलक सबको देखा… "पहले ऊपर ढंग के कपड़े डालो, फिर मै अंदर आता हूं।"..
"ये हैंडसम लड़का तेरा ऑनर है, मेरा ऐसा ऑनर होगा तो मै इसी के फ्लैट में शिफ्ट हो जाती।"… एक लड़की अपनी बात कही और खी खी खी करके हंसने लगी।
ऐमी:- इन्हे पार्टी करने दो अपस्यु, बाद में किराया ले लेना। (कमीना जान बुझ कर यहां बस टाइम पास कर रहा है। यहां के बाद पक्का ये काया के पास जाएगा।)
खुशी ने जबतक 2 मिनट के लिए रूम बंद किया और वापस से खोलकर अपस्यु और ऐमी को अंदर बुलाने लगी। दोनो आकर बैठ गई, तभी खुशी पूछने लगी… "सर कॉफी लेंगे या टी।"..
अपस्यु:- चाय ही पिला दो।..
एक लड़की मजाकिया अंदाज़ में… "लगता है गर्लफ्रेंड साथ में है इसलिए सारीफ बन रहे है तुम्हारे सर वरना अभी तो कुछ और ही पीने की डिमांड हो जाती।"..
ऐमी, कुछ नहीं बोली वो बस अपस्यु की प्रतिक्रिया को देख रही थी। अपस्यु इन सब बातो को दरकिनार करते… "खुशी, किराया टाइम पर नहीं आया, तुम्हे 2 महीने का एडवांस कहा गया था देने।"..
एक और रेंटर मालविका:- सर वो हम सबकी आर्थिक स्तिथि थोड़ी डाउन चल रही है।..
समय रात के 12… "ये भी ना यहां इसकी कहानी सुनकर आज 1 बजा देगा।"… ऐमी अपने मन में सोचती उनसे पूछने लगी… "कितना एडवांस देना था।"..
खुशी:- जी वो 60 हजार देना था।
ऐमी अपना मोबाइल निकालर जल्दी जल्दी हाथ चलाते… "बेबी तुम्हारे अकाउंट में 1 लाख 20 हजार पहुंच गया है। इनका 4 महीने का एडवांस मिल गया अब चलो।"
अपस्यु कुछ नहीं बोला सिर्फ एक बार उसने ऐमी को देखा और वहां से उठकर चल दिया। ऐमी भी उठकर जाने लगी तभी खुशी उसका हाथ पकड़कर… "1 लाख 20 हजार हमारा पे कर दिया।"..
ऐमी:- अभी 1 करोड़ 20 लाख भी पे कर सकती थी। तुमलोग एंजॉय करो पार्टी।
एक और रेंटेर निशा… "क्या हुआ सर कुछ ज्यादा ही रूठ गए क्या? लेकिन शक्ल देखकर लगता तो नहीं था। शायद हमे देखकर उनका मन हरा भरा हो गया हो इसलिए गुस्से वाले एक्सप्रेशन दिखे नहीं।"
ऐमी:- अच्छा भ्रम है कंटिन्यू रखो, मुझे अभी बहुत से काम है।
ऐमी वहां से निकल गई, उसके जाते ही खुशी कहने लगी… "एक तो उसने 4 मंथ का किराया भर दिया, उपर से उसे है उंगली कर रही हो निशा।"..
निशा:- कामिनी तो तू ही आ जा जल्दी से, तुझे उंगली करती हुं।
ऐमी वहां से निकलकर पता था कहां पहुंचना है। दरवाजा नॉक की और काया ने आवाज़ दिया खुला ही हुआ है। ऐमी को कोई लेना देना नहीं था कि वहां क्या चल रहा है, वो अपस्यु का हाथ पकड़ी और उसे चलने के लिए कहने लगी।
काया दोनो को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "अच्छा अब समझ में आया कि ये महाशय अचानक से रात में दर्शन देने कैसे चले आए।".
ऐमी:- आज कुछ ज्यादा ही रूठे है काया, जारा मै मना लू इन्हे वरना पता ना कब तक इन डायरेक्टली मुझ पर गुस्सा उतारते रहे।
अपस्यु:- जबरदस्ती कुछ भी समीक्षा कर रही हो। मुझे काया से अभी बात करनी है।
काया:- वो इतनी जरूरी बात भी नहीं है। मुझे नींद लग रही है और सुबह लिसा आएगी, कल दिन में बात करना जो भी करना हो, अब जाओ।
अपस्यु बाहर आते… "क्या बचपना है स्वीटी।"..
ऐमी:- अंदर चलो फिर मै बचपन से जवानी तक के सब दर्शन करवाऊंगी।
अपस्यु, ऐमी की बात पर हंस दिया, हंसते हुए दोनो फ्लैट में घुसे, और फ्लैट में घुसते ही ऐमी अपस्यु को दीवार से चिपकाते हुई कहने लगी…. "तुझ जैसे भौंरे को मैनें यहां मसल दिया ना, तो बाहर किसी को मुंह दिखने के लायक नहीं रहेगा। तेरा फटा हुए इज्जत फिर कवड़ियों के भाव नीलाम होगा।"…