• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance भंवर (पूर्ण)

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
1,966
3,399
159
Friday tak phone haath me hoga ... Friday night to Saturday morning... Saturaday morning to Saturday night ... Saturday night to Sunday morning ... Aur Sunday morning se jo edit karunga wo raat sunday ke shaam 5 baje tak chalegi...

Aab sab se anurodh hai .. sunday 18 October ko sham 5 baje se online rahen aur har page par main 2 update post karunga.. bus page change karne layak post kijiyega...

Aur haan main adhuri kahani nahi likhta ... Maine gape kitne bhi kiye ho update dene me .. har din ke ek update ke hisab se jod lijiyega .. aaj bhi jyada update milenge ...

Milte hain Sunday ko ... Tabtak apna khyal rakhe aur navratri ki shubhkamnaye
ab ki baar date or time to de diya bus year kaiko nahi likha :D
 
Last edited:

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
31,619
92,360
304
Update:-137





इधर अपस्यु, ऐमी और आरव बड़ा सा सूटकेस लेकर हेलीकॉप्टर से निकल गए। जैसे-जैसे वो अपने बचपन के ठिकाने पर पहुंचने लगे, तीनों की ही धड़कने काफी बढ़ी हुई थी, और सीने में दर्द सा उठने लगा था।….


जैसे-जैसे हेलीकॉप्टर नीचे आ रही थी, गुरुकुल की वो जगह देखकर तीनों के आखों से कब आशु आने लगे, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। आरव और ऐमी के लिए खुद को संभालना अब मुश्किल हो रहा था। दोनो अपस्यु के कंधे पर अपना सर डाले रोते रहे। रुवासी आवाज़ में अपस्यु कहने लगा… "हमने उन्हें आजमा लिया आरव, ऐमी.. कहीं दूर तक नहीं वो हमारे सामने टिक नहीं पाए। चलो अपनी तरप का बदला लिया जाए, उनको सजा दिया जाए।"…


लोकेश की जब आखें खुली तब वो जंगल के किसी इलाके में खुद को लेटा हुआ पाया। हाथ और पाऊं बंधे हुए थे, जिसका एक सिरा खूंटे से बंधा था। लेकिन खूंटा निकालने के लिए बेचारा कोशिश भी नहीं कर सकता था क्योंकि उसके दोनो हथेली फिलहाल तो काम करने से रहे।


पास में ही उसके पापा और प्रकाश जिंदल भी लेटा हुआ था। लोकेश उसे हिलाते और "पैं, पै" करते उठाने लगा। निम्मी के वार से जुबान ने भी काम करना बंद कर दिया था। 2 बार थोड़ी सी आवाज निकालने से ही दर्द का ऐसा आभाष हुआ कि उसने बोलना बंद करके, किसी तरह हिलाने लगा।


प्रकाश और विक्रम उठकर पहले लोकेश को देखे फिर चारो ओर देखने लगे। प्रकाश, लोकेश से पूछने लगा… "ये हमें कहां लेकर आया है?".. लोकेश इशारों में बताने लगा कि उसकी जुबान काम नहीं कर रही और वो कुछ बोलने कि हालात में नहीं है। तभी अचानक से प्रकाश तेज तेज चिंखने लगा… "नहीं, नहीं, नहीं.. ये नहीं हो सकता… नहीं।"..


प्रकाश:- क्या हुआ विक्रम?


विक्रम:- ये वही आश्रम है जिसे हमने प्लान बनाकर जला दिया था।


प्रकाश और लोकेश दोनो सवालिया नज़रों से विक्रम को देखने लगा। तभी पीछे से तीनों ताली बजाते हुए सामने आए… "7 साल पुरानी बात याद आ गई।"


विक्रम, काफी हैरानी से उन तीनों को देखते हुए… "कौन हो तुम लोग?"..


अपस्यु:- बस थोड़ी देर में ही पता चल जाएगा… हमने भी इस पल का बहुत लंबे अरसे से इंतजार किया है, थोड़ा तुम भी कर लो। आरव तीनों को लोड कर दे जरा।


आरव ने खुली ट्रूक में उन्हें किसी सामान की तरह लोड कर दिया। ऐमी और आरव ड्राइव करने लगे और अपस्यु विक्रम और प्रकाश को बिठाकर वो जगह दिखाते हुए… "ये सारा इलाका देख रहा है, कुछ दिन पहले ही तुम लोगों के हवाले के जो पैसे उड़ाए थे उससे ये सारी जमीन खरीद ली। कमाल है ना। अरे प्रकाश, विक्रम पहुंच गए यार..


जैसे ही विक्रम ने वो जगह देखी लड़खड़ा कर पीछे हो गया। वहां अब भी 20 फिट गहरा और तकरीबन 5 मीटर के रेडियस का गोलाकार बना हुआ था। आरव अपने आखों में खून उतारकर विक्रम का गला पकड़ते हुए कहने लगा… "क्या हुआ खुद का भी वहीं हाल सोचकर कलेजा दहल रहा है क्या? फिक्र मत कर तेरे लिए सजा तय हुई है मौत नहीं।"


वहां एक पिलर में लगे एक स्विच को ऐमी ने ऑन किया और नीचे का सरफेस ऊपर आने लगा। ऐमी प्रकाश के सर पर एक टाफ्ली मारती… "अबे देख क्या रहा है घोंचू, ये स्पेशल लिफ्ट है।


लिफ्ट की बनावट कुछ इस प्रकार थी कि गड्ढे के ऊपर जब वो आयी तो उसके उपरी सुरफेस और नीचे के बीच 7 फिट लोहे का का चादर लगा था। ऐमी उस लोहे के चादर पर अपनी हथेली लगाई और बीच से दरवाजा खुल गया… "देवर जी मेहमानों को अंदर ले आओ।"


ओह माय गॉड.. लिफ्ट जब ऊपर अाई तो उसके उपरी सरफेस पुरा धूल में डूबा था। सरफेस से नीचे तक जो 7 फिट की चादर थी वो जंग लगी, और जब अंदर दाखिल हुए तो पुरा फर्निश लुक। चारो ओर हार्ड फाइबर बिल्कुल चमचमाता हुआ। हर जगह डिजिटल लुक और तभी ऐमी ने अपने आवाज़ का कमांड दिया… "जारा चेहरा दिखाने के लिए आइना लगा दिया जाए, मेरी ननद स्वास्तिका ने कुछ कीड़ों के रूप को सवार दिया है।"


जैसे ही ऐमी ने कमांड दिया चारो ओर सीसे आ गए जिसमें विक्रम, जिंदल और लोकेश खुद को पाऊं से लेकर सर तक देख सकता था.. जैसे ही लोकेश ने अपना हुलिया देखा, आखें बड़ी करते… फिर से बोलने कि नाकाम कोशिश… "पै, पै".. और दो बार बोलकर अपना सर इधर उधर झटकने लगा।


लोकेश के साथ-साथ विक्रम और प्रकाश का भी वही हाल था। ऊपर सर के बाल ऐसे गायब हुए थे, जैसे वो कभी थे है नहीं। चेहरे से लेकर हाथों तक के बाल गायब। कपड़े उतारे नहीं, वरना शरीर से पुरा बाल गायब हो चुका था। हाथ और पाऊं के नाखून भी गायब हो चुके थे।


प्रकाश और विक्रम चिल्लाने लगे, बेबस होकर उनसे पूछने लगे…. "आखिर वो उनके साथ करने क्या वाले है?"..


अपस्यु मुसकुराते हुए…. "कई सारे सवालों के जवाब ढूंढ़ने में हमे वर्षों लग गए, थोड़ा धीरज रख सब पता चलेगा।"


लिफ्ट के रुकते ही ऐमी ने फिर से अपने हथेली का कमांड दिया और सामने से एक दरवाजा तो खुला, लेकिन कुछ नजर नहीं आ रहा था।… "भाभी आज पहला दिन है, जारा इनके नए घर को रौशन तो कर दो।"…. "ठीक है देवर जी, जैसा आप कहें।" .. ऐमी, आरव की बात मानकर लाइट का कमांड दी। दरवाजा से लगा 5 फिट का पैसेज नजर आने लगा जो तकरीबन 20 फिट लंबा था।


पैसेज का जब अंत हुआ तो अंदर की जगह काफी लंबी-चौड़ी और बड़ी थी। ऐसा लग रहा था किसी होटल के रिसेप्शन में खड़े है।… आरव, प्रकाश और विक्रम के सर कर हाथ मारते हुए कहने लगा… "मस्त बनी है ना जगह, तुम लोगों के हवाले के पैसे जो हमने गायब किए थे उसका पूरा इस्तमाल यहीं किया है। आओ अब कमरा में ले चलता हूं।"


ऐमी ने कमांड दिया और किनारे से 3 दरवाजे खुले। जैसे ही तीनों ने अंदर झांका, बड़ा ही अजीब सा बनावट था। नीचे कोई फर्श नहीं बल्कि रेत थी। तीन ओर की दीवार रस्सी और पुआल की बनी दीवार थी जिसके ऊपर जालीदार लगा कर पुरा टाईट किया गया था।


आरव:- भाभी इनका जीवन कैसा होना है जारा डेमो दे दिया जाए..


ऐमी मुस्कुराती हुई… "हां बिल्कुल देवर जी, क्यों नहीं। डालना शुरू करो अंदर।


पहले लोकेश को डाला जा रहा था एक दरवाजे के अंदर, वो प्रतिरोध तो कर रहा था लेकिन उसे खुद के शरीर में कुछ जान ही नहीं लग रहा था। जैसे ही वो गया, ऐमी ने उसका दरवाजा बंद कर दिया। ठीक यही सब एक के बाद एक प्रकाश और विक्रम के साथ भी हुआ।


तकरीबन 10 मिनट बाद ऐमी ने दरवाजा खोला। तीनों 10 मिनट में ही पागल की तरह बाहर आए। बाहर आते ही विक्रम, प्रकाश और लोकेश जमीन पर बैठ कर पाऊं पड़ने लगे।…. मात्र 10 मिनट अंधेरे में बिताया गया समय का असर था, जो तीनों भविष्य की कल्पना कर डर चुके थे।


प्रकाश:- तुम जो बोलोगे वो मै करूंगा, मेरे पास उम्मीद से बढ़कर पैसा है वो सब ले लो लेकिन मुझे जाने दो।


अपस्यु:- कितना पैसा है रे खजूर… यदि तू अपने 16000 करोड़ की बात कर रहा तो उसे मैंने उड़ा दिया। इसके अलावा है तो बता फिर तेरी रिहाई का सोचूंगा।


प्रकाश अपस्यु का गला पकड़ते…. "तूने मेरे सारे पैसे चोरी कर लिए।"..


अपस्यु ने बस नजर घुमा कर ऐमी और आरव के ओर देखा और दोनो के हाथ की पतली छड़ी उन पर बरसने लगी। विक्रम का भी पैसा गायब हो चुका था लेकिन प्रकाश के पीठ पर छड़ी के मार के छाले को देखकर उसने कुछ ना किया। दोनो में लोकेश चालाक निकला। उंगलियां चलाकर उसने अपना दूसरा अकाउंट ओपन किया और उस खाते के पैसे को देखकर तो आरव का मुंह खुला रह गया… "साला मामलामाल वीकली एक्सप्रेस, 30000 करोड़ इस खाते में भी हैं।"..


अपस्यु:- चल भाई लोकेश तू पीछे बैठ जा तेरी रिहाई का समय आ गया है। हां लेकिन बाप को ले जाने की बात करेगा तो जा नहीं पाएगा।


लोकेश अपने रिहाई की बात सुनकर खुश होते हुए एक किनारे बैठ गया। अपस्यु प्रकाश और विक्रम को देखकर कहने लगा… "यार तुम दोनो ने तो पैसे दिए नहीं, अच्छा चलो मेरे सवाल का जवाब दे दो और बदले में अपनी रिहाई ले लो। एक और बंपर ऑफर है, जवाब यदि काम का हुआ तो बदले में सारे केस हटवाकर खाते में 1000 करोड़ भी डलवा दूंगा, ताकि तुम्हारी बची जिंदगी आराम से कट सके। तो तैयार हो।"…. दोनो ने अपना सर हां में हिला दिया।


अपस्यु:- चन्द्रभान रघुवंशी के बच्चे के बारे में बताओ।


विक्रम:- चन्द्रभान रघुवंशी, तुम कैसे जानते हो?


चार छड़ी विक्रम की पीठ पर और छटपटा कर रह गया वो…. "सवालों के जवाब बस चाहिए, सवाल के बदले सवाल नहीं।"


ऐमी:- हुंह !


अपस्यु:- तुम्हे क्या हुआ स्वीटी.. अब ये गुस्सा क्यों?


ऐमी:- बेबी थोड़ा सा दे दो ना क्लैरिफिकेशन..


अपस्यु:- ऐमी ने कहा इसलिए बता देता हूं। हम तीनो इसी गुरुकुल के शिष्य है, और अपने 160 साथियों का बदला ले रहे है। विक्रम तुम्हारी सच्चाई जब मैंने नंदनी रघुवंशी से बताई तो वो मेरी हर बात मानती चली गई। उसे जो चाहिए था वो उसे मिला, और मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिला। इसके बाद अब कोई सवाल मत पूछना, वरना बिना जवाब लिए मै जाऊंगा और तुम्हारी पूरी जिंदगी नरक बाना दूंगा। चन्द्रभान रघुवंशी के बच्चे के बारे में बताओ।


विक्रम:- उसकी 2 शादियां थी। एक शादी उसकी देहरादून में हुई थी, अचार्य माहिदीप की बहन अनुप्रिया से, और दूसरी शादी उसकी राजस्थान में कहीं हुई थी। अनुप्रिया से उसके 3 बच्चे है… सबसे बड़ी बेटी कलकी राधाकृष्ण, उससे छोटा एक बेटा परमहंस राधाकृष्ण और सबसे छोटा युक्तेश्वर राधाकृष्ण। दूसरी पत्नी को वो विदेश में रखता था इसलिए उसके बारे में पता नहीं, बस एक बेटा था उस पत्नी से।


अपस्यु:- बड़ा पेंचीदा इतिहास है रे बाबा। पहले तो तू ये बता की क्या अनुप्रिया को चन्द्रभान कि दूसरी शादी के बारे में पता था, और क्या उसकी दूसरी पत्नी या उसके परिवार को चन्द्रभान कि पहली शादी के बारे में पता था?


प्रकाश:- चन्द्रभान की दूसरी पत्नी को चन्द्रभान के बारे में कुछ नहीं पता था, और ना ही उसके परिवार को। हालांकि उनके परिवार को शक था लेकिन उन्हें इस बात का कभी फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि वो किसी भी तरह से अपनी बेटी की ब्याहना चाहते थे। दहेज में काफी धन संपत्ति भी मिला था चन्द्रभान को। शुरू में दोनो जयपुर रहे लेकिन बाद में चन्द्रभान कि दूसरी पत्नी की बहन ने चन्द्रभान को यूरोप में बिजनेस शुरू करने के लिए काफी मदद कि और वो लोग वहीं सैटल हो गए। यूं समझ लो कि उसकी दूसरी पत्नी के कारन वो खुद को यूरोप में स्थापित कर चुका था।


अपस्यु:- इसकी पहली पत्नी अनुप्रिया के बारे में बता?


प्रकाश:- अनुप्रिया मोहिनी है, ऐसा रूप जिसमे हर कोई फंस जाय।


विक्रम:- साले ठीक से बता ना तेरे भी उसके साथ संबंध रहे है, और ये जो तू कुछ साल पहले तक उसे आंख बंद करके सपोर्ट जो करता था, वो क्यों करता था?


अपस्यु:- मैंने सोचा छड़ी का प्रयोग ना करू लेकिन तुम मजबुर कर रहे विक्रम…


प्रकाश:- "मै बताता हूं पूरी कहानी। यदि तुम इस गुरुकुल के शिष्य रहे हो तो ये लोग तुम्हारे सीनियर बैच के है। गुरु निशी के पहले शिष्य। अनुप्रिया मतलब यूं समझ लो कि हम सबकी बॉस, आचार्य माहीदीप उसका भाई और उसकी साम्राज्य का सबसे दमदार खिलाड़ी, उसे सेकंड बॉस मान लो। जब इनकी सिक्षा पूरी हुई थी, तब इन दोनों भाई बहन ने गुरु निशी के नक्शे पर चलने का फैसला लिया और गुरुकुल का प्रचार करते थे।"

"गुरु निशी नैनीताल में आश्रम बनाए हुए थे और उनका आश्रम देहरादून के आसपास था। आचार्य माहीदीप देहरादून में शिष्यों को शिक्षा देते थे। वहीं अनुप्रिया भ्रमण करके गुरुकुल की सीक्षा का प्रचार किया करती थी। इसके 2 साथी और थे, जो शुरू से छिपे है। हालांकि हम लोगों के बीच ये चर्चा आम थी कि अनुप्रिया के द्वारा ये 2 साथी केवल भ्रमाने के लिए बताए गए थे, वरना इनका कोई अस्तित्व नहीं।"

"अगर उस मनगढ़ंत कैरेक्टर को सच भी मान ले तो ये लोग कुल 4 साथी थे, जिनके अंदर पागलपन कि भूख सवार रहती थी। मेरे पापा यूएस में एक प्रोफेसर थे और हमारी आमदनी भी अच्छी थी। हमारी पहली मुलाकात यूएस में ही हुई थी, जब अनुप्रिया यहां गुरुकुल के प्रचार के लिए आयी थी।"

"मै अनुप्रिया को देखकर जैसे पागल सा हो गया था। फिर उसके प्रवचन सुनने लगा। इनकी टोली में सामिल हो गया और 3 महीने मुझे माहीदीप के पास रखकर इसने मुझे ढोंगी वाचक बनना सिखाया था। मै पहली बार इसके मकसद से रू बरु हो रहा था। अनुप्रिया ने उसी दिन मुझ से कहा था, यदि मै उसके बताए रास्ते पर चलूंगा तो कुछ सालों बाद यूएस की पॉलिटिक्स में मेरा बहुत बड़ा नाम होगा। "

"जैसा-जैसा वो बोलती गई, वैसा मैं करता गया। इंडियन कम्युनिटी में मेरा अच्छा नाम हुआ। इसके अलावा कई यूएस के सिटिज़न भी हम से जुड़ गए और देखते ही देखते वहां मेरा नाम होने लगा।"

आरव अपने सर का बाल नोचते, 4-5 छड़ी घुमा दिया… "चुटिया हम तुम्हारा भूतो और वर्तमान तो जानते ही है, ज्यादा बकवास की ना तो भविष्य भी यहीं लिख देंगे।"
are is beauty queen anupriya ki aisi ki taisi :bat: isiki wajah yeh sab ho raha hai... sab aag isiki hi jawani ne lagayi huyi hai... :bat: waise apsyu baar baar sabit kar deta hai ki woh apne dusmano se 10 kadam aage hai... waise yeh joh raaz khul rahe hai isike sath hi kahani aur dilchasp hoti jaa rahi hai...
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill :applause: :applause:
 

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
31,619
92,360
304
Update:-138





आरव अपने सर का बाल नोचते, 4-5 छड़ी घुमा दिया… "चुटिया हम तुम्हारा भूतो और वर्तमान तो जानते ही है, ज्यादा बकवास की ना तो भविष्य भी यहीं लिख देंगे।


ऐमी:- देवरजी, मै भी यहीं हूं, थोड़ा लहजा रखिए।


आरव:- सॉरी भाभी।


अपस्यु:- एक मिनिट थोड़ा शांत हो जाओ, और प्रकाश सर को बोलने दो। इतिहास के कुछ पन्ने शायद अछूते है, उन्हें जानने का मौका मिला है। प्रकाश सर आपके यूएस की कहानी पता है। पहले चिंदिगीरी करके भक्त बनाए, फिर एक गरीब पॉलिटीशियन की बेटी से शादी किए और बाद में उसके कुछ समाज सेवा और अपनी कुछ चिंदिगिरी से यूएस सीनेटर तक का सफर तय किया। ऑटोबायोग्राफी लिखने के लिए बहुत समय है अभी। इंट्रेस्टिंग पार्ट तो यह है कि तुमलोग से वो नकारा चन्द्रभान कैसे टकरा गया।


विक्रम:- "इसे यहां के बारे में कुछ पता हो तो ना। मै बताता हूं राजस्थान की कहानी। तब कुंवर सिंह और चन्द्रभान के पिता के बीच मूंछ की लड़ाई थी, हालांकि रघुवंशी परिवार की कोई आैकाद ही नहीं थी कुंवर के आगे, लेकिन समाज में जहां कहीं भी दोनो आमने-सामने होते, बस एक दूसरे पर तंज कसा करते थे। हालांकि मेरे चाचा कुंवर सिंह, चन्द्रभान और मेरे पिता को जोकर से ज्यादा कुछ नहीं समझते थे, इसलिए केवल अपने मनोरंजन के लिए उनकी बात सुना करते थे।"

"हम एक ही परिवार के थे लेकिन हमारी स्थिति भी रघुवंशी से ज्यादा अच्छी नहीं थी। कुंवर सिंह से मै भी खुन्नस खाए घूम रहा था और चन्द्रभान भी। बस ऐसे ही एक सामाजिक कार्यक्रम में हम दोनों की मुलाकात हुई, मकसद एक जैसे थे इसलिए जल्द ही हम में घनिष्ठता भी हो गई।"

"अभी तुमने अनुप्रिया और उसके 3 साथियों के बारे में सुने, कोई दो राय नहीं की ये चारो मिलकर आज पूरे देश की सरकार को ही चला रहे है, लेकिन चन्द्रभान रघुवंशी इन सब का भी बाप था। उसके दिमाग में अगले 20 साल तक का प्रोजेक्शन चलता था। उसी ने पहले मुझे सैटल किया। उसी के कहने पर मै कुंवर सिंह के करीब पहुंचा और भीख में अपनी संपत्ति बनाई थी।"

"वहीं चन्द्रभान अब भी बड़े मौके की तलाश में था और वो मौक अनुप्रिया बनकर आयी थी। अनुप्रिया प्रचार के सिलसिले में जयपुर पहुंची, वहीं पहली बार अनुप्रिया और चन्द्रभान कि मुलाकात हुई। मै भी था उस वक़्त चन्द्रभान के साथ। पहली मुलाकात में ही उसने अनुप्रिया से सामने से कहा था…. "तुम मेरी पत्नी बन जाओ, मै तुम्हारे हर सपने को साकार कर दूंगा।"

"अनुप्रिया अचंभित, उसके सेवक आक्रोशित लेकिन चन्द्रभान वहां अडिग खड़ा रहा। लंबी बहस के बाद अनुप्रिया ने कुछ सोचकर उसे बोलने का मौका दिया। फिर चन्द्रभान ने अपनी भविष्य नीति को बताया कि उसके और अनुप्रिया के मिलने से अगले 5 साल में वो कहां होगा, 10 साल में कहां पहुंचेगा और आने वाले 20 साल में वो कहां होंगे।"

"अनुप्रिया उससे इंप्रेस तो हुई, लेकिन उसने चन्द्रभान से खुद को साबित करने के लिए कही। चन्द्रभान ने अनुप्रिया का अपॉइंटमेंट राजस्थान के सीएम से लीया। उस मीटिंग में चन्द्रभान ने सीधे उस सीएम से कहा था कि वो उसके ट्रस्ट में इन्वेस्ट करे, कुछ ही दिनों में वो उसके ब्लैक को व्हाइट में बदल देगा।"

"सीएम ने साफ मना कर दिया और दोनो को निकाल दिया। सीएम तो हाथ नहीं लगा, लेकिन छोटे-छोटे पॉलिटीशियन जो अपना माल सीएम और पार्टी अध्यक्ष से छिपाकर जमा करते थे, उसके काम मिलने शुरू हो गए। साथ ही साथ उन लोगों ने पॉलिटिकल पार्टी के प्रचार का भी जिम्मा उठाया और अलग-अलग तरह के प्रचार के लिए अलग-अलग रेट तय हुआ।"

"खैर ये अनुप्रिया और चन्द्रभान कि मुलाकात का पहला साल था और पहले साल में ही चन्द्रभान ने खुद को सबसे काबिल साबित कार दिया था। अनुप्रिया चन्द्रभान चन्द्रभान का प्रस्ताव मानकर गुप्त विवाह कर ली। कहानी इनकी आगे बढ़ते रही और कमाल के दिमाग वाले समूह का एक मजबूत हिस्सा था चन्द्रभान।"

"उन्हीं दिनों चन्द्रभान के घर से उसके शादी का दवाब आने लगा। अनुप्रिया और चन्द्रभान अपनी शादी गुप्त रखने के लिए, अनप्रिया ने ही चन्द्रभान को शादी कर लेने के लिए कही और चन्द्रभान से शादी कर ली। इस शादी के बाद तो जैसे उसके स्लो विजन को रातों रात पंख मिल गए हो।"


प्रकाश:- हां पंख क्यों ना लगेंगे, क्योंकि प्रताप ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक प्रताप सिंह ने पूरी एक कंपनी खड़ी करके दी थी, वो भी अपनी पत्नी के कहने पर, उसकी छोटी बहन और जमाई को। कुछ समझे की नहीं विक्रम या साले अब भी अक्ल पर पर्दा परा है। ये दोनो चन्द्रभान के लड़के है। दोनो का दिमाग तो अपने बाप से भी 10 कदम आगे का है रे।


अपस्यु ने आरव के ओर देखा और दोनो पर छड़ी पड़ने शुरू हो गए…. "क्यों इतने एक्साइटेड हो रहे हो, मुझे तुम दोनो में कोई दिलचस्पी नहीं है, छूट जाओगे। अभी रिश्तेदारी निभाने का वक़्त नहीं है रे। बस मुझे कुछ समझना है वो समझा दो। गुरु निशी और उनके शिष्यों को मारना जरूरी था क्या? और क्या तुम्हे पता था कि चन्द्रभान के 2 बेटे है?


विक्रम और प्रकाश एक साथ… नाह ! हमे केवल इतना पता था कि चन्द्रभान का केवल 1 बेटा है और वो चन्द्रभान साल में एक बार जब अपनी पत्नी को भारत लाता था, तो वो उसे गुरू निशी के आश्रम में छोड़कर खुद माहीदीप के साथ वाले आश्रम में रहता था।


अपस्यु:- इस कहानी में भूषण रघुवंशी का रोल क्या था?


विक्रम:- उसे नंदनी के शादी के कारण अपने जान से हाथ धोना पड़ा था। एक लंबे प्लान के हिस्से के तहत चन्द्रभान ने भूषण को अपनी कंपनी में पार्टनरशिप दी थी और उसके दिमाग में मायलो ग्रुप टारगेट हो रहा था। लेकिन वो नेक्स्ट स्टेप प्लान था, क्योंकि एक पूरी रॉयल फैमिली को हटाने के लिए स्ट्रॉन्ग बैकअप और कंप्लीट प्लान की जरूरत पड़ती और हवाले का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा था, हमे पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव बैकअप मजबूत होता जा रहा था।


अपस्यु:- अबे कम अक्ल लोग तुम तो चन्द्रभान के बारे में डिटेल कर दिए, सवाल का पहले हिस्सा का जवाब कौन देगा?


प्रकाश:- गुरु निशी और उसके शिष्यों को साफ कर की प्लांनिंग यूएस में मेरे यहां ही हुई थी। हम पॉलिटिकली काफी स्ट्रॉन्ग हो चुके थे, ब्लैक मनी हमारे पास हद से ज्यादा थी, और मायलो ग्रुप पर कब्जे की पूर्ण तैयारी चल रही थी।


अपस्यु:- अबे "सी.ए.बी" कंपनी तो पहले से ही थी ना उसके पास, फिर मायलो ग्रुप।


प्रकाश:- "चन्द्रभान की कंपनी ब्लैक लिस्टेड हो गई थी क्योंकि बिना कोई माल बेचे ये कंपनी प्रोफिट में जा रही थी। खैर ये बहुत छोटा कारण था। दरअसल मायलो ग्रुप काफी दान करती थी, और हमारे अपने ब्लैक को व्हाइट करने का समय आ चुका था। तय ये हुआ कि मायलो ग्रुप के मालिक को साथ मिलाकर 4 साल का सपोर्ट लेंगे। पहले उनकी कंपनी को प्रोफिट करवाएंगे और बाद में उस प्रोफिट को हम दान के रूप लेंगे। वो दान के पैसे बिल्कुल व्हाइट मनी होते जिसे कहीं भी इन्वेस्ट करके उससे पैसे कमाए जाते।"

"कुंवर सिंह राठौड़ इस बात के लिए राजी नहीं हुआ, तब एक खेल रचा गया "टोटल कंट्रोल"। जिसकी प्लांनिंग मेरे घर पर हुई। चन्द्रभान की कंप्लीट प्लांनिंग का नतीजा है ये पुरा एम्पायर। विक्रम के हाथ आयी मायलो ग्रुप का कंट्रोल, और हमारी ब्लैक मनी आसानी से व्हाइट होनी शुरू हो गई।"

"गुरु निशी और उसके शिष्यों को हटाने की जरूरत ना होती, यदि गुरु निशी अरे नहीं होते। हमने उन्हें भी मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने तो युद्ध छेड़ने की बात कह दी। प्रस्ताव मै और विक्रम लेकर गए थे और गुरु निशी को पता तक नहीं था कि आस्तीन में उन्होंने कितने सांप पाले है। गुरु निशी हमारे खिलाफ जंग करने की तैयारी में थे और कानूनन उन्होंने ट्रस्ट माहीदीप के नाम कर दिया।"

"बुड्ढे की क्षमता को हम नजरंदाज नहीं कर सकते थे, क्योंकि उन्होंने अगर कुछ करने की ठान ली हो, फिर तो उसके रास्ते में भगवान क्यों ना आ जाए, वो उससे भी लड़कर जीत हासिल कर सकता था। इसलिए यहां भी कुंवर सिंह के परिवार की तरह, गुरु निशी और उसके समस्त परिवार को एक साथ साफ कर दिया। पूर्ण योजना थी गुरु निशी के भी केस में। हमे बस मॉनिटर करना था। सोच बहुत साफ थी हमारी, जिसने भी आवाज़ उठाया उसे गायब कर देना। क्योंकि इतने सारे लोग में कौन मरा कौन बचा, कौन हिसाब रखे। जो मिला उसे आग में झोंक दो, और बचे हुए लोग जब हल्ला करे तो उसे गायब कर दो।"

"लगभग 4 सालों तक अनुप्रिया अपने ब्लैक मनी मायलो के प्रोफिट में दिखाती रही। जितना भी रकम प्रोफिट में जाता, उसका 20% हिस्सा मुझे और विक्रम को मिलता, 10% हिस्सा कंपनी ग्रोथ में और 70% हिस्सा उनके ट्रस्ट को दान। 4 सालों में अनुप्रिया की जब खुद की कंप्लीट इंडस्ट्री तैयार हो गई, जहां वो खुद के ब्लैक पैसे को, खुद के ही इंडस्ट्री में प्रोफिट दिखाकर वापस उसे मार्केट में इन्वेस्ट कर सकती थी, तब उसने मायलो से रिश्ता तोड़ लिया। उसने हमे अपने धंधे के लिए स्वतंत्र कर दिया और वो खुद अपने धंधे में व्यस्त हो गई।


आरव:- अबे जब गुरु निशी ने ट्रस्टी माहीदीप को बनाया था, फिर मेघा के नाम मुख्य ट्रस्टी में क्यों रजिस्टर है?


प्रकाश:- लंबी योजना का एक छोटा सा हिस्सा था। जिस लीगल डॉक्यूमेंट पर गुरु निशी ने सिग्नेचर किए वहां मेघा का नाम डाला गया था। पैसे को घूमने की कमाल कि नीति। अनुप्रिया को अपने ब्लैक को जल्द से जल्द व्हाइट बनाना था, इसलिए आधे पैसे मायलो से व्हाइट होकर सीधा अनुप्रिया के ट्रस्ट में दान दिया जाता था। वहीं मेघा यूएस सिटिज़न थी, इसलिए ट्रस्ट को यूएस में लीगल किया गया और वहां के लॉ के हिसाब से हमे यहां आसानी हो गई। यहां तो सीधा ट्रस्ट के अकाउंट में पैसा आता था और गुरु निशी का विदेशी ट्रस्ट अपने देशी ट्रस्ट की स्तिथि मजबूत करने के लिए सीधा दान करती थी।


अपस्यु:- चलो बस एक छोटी सी गुत्थी थी, जो अब सुलझ गई। जल्द ही वो लोग भी यहां होंगे…


प्रकाश:- फूड इंडस्ट्री, शिपिंग इंडस्ट्री, फार्मास्यूटकल्स, होटल चेन, रिटेल मार्केटिंग चेन, फिल्म इंडस्ट्री में अपना प्रोडक्शन हाउस। दिल्ली एनसीआर में 40 एकर में फैला उसका शमशान घाट। हर दिन निम्मी जैसी लड़कि को जहां नोचा जाता हो। खुदाई करवाई वहां की तो ना जाने कितने कंकाल मिलेंगे। असेम्बली के दीगर नेता जहां अपने कपड़े उतारकर हवस मिटाते है, तुम्हारा मुंह बोला बाप जिसके किसी भी नाजायज मांग को ना नहीं कर सकता.. ऐसे लोग को तुम यहां लाओगे। मस्त खवाब है। जैसा कि तुम्हारे बाप ने अनुप्रिया से कहा था, अगले 25 से 30 सालों में वो पुरा पॉवर उसके कदमों में ला देगा, सो उसने कर दिखाया। तुम अगले 50 साल तक कोशिश कर लो, वो इतने मजबूत और संगठित है की अपनी ज़िंदगी जी कर वो मर जाएंगे, लेकिन तुम कभी उसे यहां तक नहीं ला पाओगे।


आरव:- यार काफी इंफॉर्मेशन जब इन लोगो ने हमे दी है, तो बदले में हम भी एक इंफॉर्मेशन दे देते है। विक्रम राठौड़ जिस लोकेश राठौड़ को तुम अपना बेटा मानते हो वो दरअसल माहीदीप अचार्य का बेटा है। शायद अब तुम समझ सकते हो कि क्यों तेरे गावर से परिवार में ये एक दिमाग वाला आ गया, और ऐसा क्या हो गया था जो तेरी पत्नी ने बोलना ही छोड़ दिया। वो इतने गहरे सदमे में थी कि कब ये लोकेश पैदा हो गया उसे होश ही नहीं था।


जबतक आरव यह झटका दे रहा था तब तक अपस्यु, लोकेश को भी खींचकर ले आया। तीनों को कैद में डालने से पहले, उन्हें देखकर हंसते हुए अपस्यु कहने लगा… "बड़बोला कहीं का, कुछ ज्यादा ही तारीफ कर गया हमारे दुश्मनों का।"…


तीनों के कर्म की सजा का वक़्त आ चुका था। खास अंधेरी कोठरी जिसके चारो ओर की दीवार, परत दर परत गद्दे का बना हुआ था, जिसका आखरी सरफेस पर पुआल और रस्सी के बंधे काम दिखते थे, लेकिन था वो भी गद्दा, जिसके ऊपर 2 जाली लगाकर टाईट किया गया था। नीचे फर्श पर रेत। बाल गायब नाखून गायब और साथ ही आत्महत्या कि जितनी भी कोशिश हो सकती थी वो सब गायब कर दिया गया था। लोकेश, प्रकाश और विक्रम के हिस्से की बची जिंदगी, जिसमें मरने कि इजाज़त नहीं थी बस अंधेरे में अकेले जिंदगी बितानी थी।


तीनों जब लिफ्ट के ओर बढ़ रहे थे तब ऐमी…. "बेबी यहां कौन से सवाल के जवाब ढूंढ़ने आए थे?"


इस से पहले को अपस्यु कुछ कहता, आरव कहने लगा…. "भाभी, मेरी मां जनवरी में आश्रम आती थी, उस साल जून में आयी थी। सवाल ये था कि क्या चन्द्रभान रघुवंशी किसी दबाव में आकर, अचानक उस आश्रम को जलाने आया था जहां उसके बीवी और बच्चे थे, या फिर अपने पूरे परिवार को ही खत्म करने की मनसा से वो सबको यहां लेकर आया था?


अपस्यु:- गुस्से में उसे फांसी देने का बहुत अफ़सोस हो रहा है आज मुझे… सामने से चैलेंज करने की इक्छा हो रही। खैर मुझे एक बात और जाननी थी, गुरु निशी के गुरुकुल में चन्द्रभान का बेटा था, यह बात इन लोगों को पता थी या नहीं। कमाल का प्लानर, वो शुरू से हम सब को मारना चाह रहा था, इसलिए उसने मुझे यहां छोड़ा, ताकि जब भी वो अपने फ्यूचर प्लान पर अमल करे, हम भी स्वाहा हो जाएं। चलो चला जाए, 4.45 यहीं हो गए, देर ज्यादा हुई तो नंदनी रघुवंशी हमारा खाल खींच लेगी…


ऐमी:- बेबी एक ट्विस्ट तो मुझे भी नहीं बताया, लोकेश वाकई आचार्य का बेटा है।


अपस्यु:- मुझे क्या पता, वो तो आरव के दिमाग की उपज थी, जो मुझे भी अभी अभी पता चली।


ऐमी:- हीहीहीहीही… देवर जी मस्त तीर मारा है। 4 साल में जिस लोकेश ने 46000 करोड़ बनाए हो, वो तो अनुप्रिया का भी बाप होगा। देखते है ये अनुप्रिया की लंका का विभीषण बनता है या नहीं।


तीनों वापस उस जगह से उड़ चले थे। आखों का विश्वास बता रहा था कि उन्होंने क्या हासिल करके यहां से निकले है। युद्ध की धुनकी तो कल रात से ही शुरू थी। एक आजमाइश हो गई थी, अब बस आखरी पड़ाव बाकी था…
Kuch log paise aur takat ke liye kis had tak gir sakte hai isi update se pata chale... sabhi ko bas apni hi jebe garam karni hai... unhe matlab nahi ki koi mare ya jiye.. aur koi ade aaye ya birudh kare toh jaan se hi maar diya jaaye chaahe apne ho ya paraye... Khair... inka toh yeh sab chalta rahega.. tulshi is sansar mein bhanti bhanti ke log... :dazed:
ऐमी:- देवरजी, मै भी यहीं हूं, थोड़ा लहजा रखिए
besharami ki hade paar karne wali aur ek masoom ki jindagi se khilwaad karne wali bole ki "thoda lahaja rakhiye"... dhikkar hai teri is jindagi par... ja, Jake kahi naale mein kud ke dub mar :dubmar:
waise aarav aur apsyu mein apne baap ke gun kut kut ke bhare hai.. :D

Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill :applause: :applause:
 
Last edited:
Top