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Romance भंवर (पूर्ण)

aman rathore

Enigma ke pankhe
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Update:- 112




सुबह के 7.30 बज रहे थे। फ्लैट की बेल जोड़ों से बज रही थी। अपस्यु ने जैसे ही दरवाजा खोला, एसपी के साथ पुलिस की पूरी टीम दरवाजे पर खड़ी थी। अपस्यु पुरा दरवाजा खोलते हुए… "सॉरी मै वो सो रहा था सर, आइये ना अंदर।"


अपस्यु सबको हॉल में बिठाकर, ऐमी को जगा दिया और वापस से उनके बीच चला आया। अपस्यु के आते ही एसपी ने सीधे सवाल करने शुरू कर दिए, मामला था इस अपार्टमेंट में हुए कल रात की वारदात और उसी वारदात का एक लिंक जगदीश राय के घर तक जाता था, क्योंकि चोरी कि गई कार इसी अपार्टमेंट के बाहर से उठाई गई थी और शक था कि जिसने यहां कत्ल किए है वही जगदीश राय के यहां भी गया होगा।


अपस्यु। के चेहरे पर घोर आश्चर्य के भाव थे और वह जिज्ञासावश पूछने लगा कि कल इस अपार्टमेंट में हुआ क्या था, क्योंकि कल शाम शॉपिंग मॉल की घटना से बाद उसकी अभी आंख खुल रही है।


एसपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अपस्यु से उसके साथ हुई कल शाम की घटना के बारे में पूछने लगा। बेहोश होने के पहले तक का अपस्यु ने बता दिया और उसके बाद सीधा उसकी आंख यही खुली।


इतने में ऐमी सबके लिए चाय ले आयी और सबको चाय देने के बाद आगे की घटना का जिक्र करती हुई पूरी बात बताई। कैसे फिर वहां पार्किंग में अजिंक्य और उनके थाने के लोग पहुंचे, सभी हमलावरों को अरेस्ट करने के बाद फिर वहां से अपस्यु को हॉस्पिटल लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया की घबराने वाली बात नहीं है, बस बेहोश किया गया है, उसी के साथ अजिंक्य सर ने डॉक्टर से अकेले में कुछ बात की और डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा लिखकर दी।


अजिंक्य सर खुद यहां आए थे। उनके हवलदार की मदद से हमने अपस्यु को लिटाया और फिर मुझे वो दावा खिलाकर यहां से चले गए। उसके कुछ देर बाद नींद आ गई और अभी जाग रही हूं। एसपी पुरा मामला सुनने के बाद क्रॉस चेक किया और अजिंक्य से पूरे मामले की जानकारी लेकर वहां से चलते बाना।


उनसब के जाते ही अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और किचेन में पहुंचकर, ऐमी के कमर में हाथ डालकर उसके गले को चूमने लगा… ऐमी गहरी श्वांस लेती अपने हाथ को किचेन स्लैब से टिका दी और अपनी आखें मूंद ली।


अपस्यु गले को चूमते हुए अपने हाथ धीमे से खिसकाते हुए लोअर के अंदर ले जाने लगा… "अम्मम ! बेबी अभी रुक जाओ ना प्लीज, काम बहुत परे है। खत्म तो कर लेने दो।"….. गले पर हल्के दातों का निशान देते हुए अपस्यु हाथ को धीमे से पैंटी के अंदर खिसकाते उसे चूमने लगा।


श्वांस दोनो की ही चढ़ आयी थी, तभी अपस्यु के फोन की घंटी बज गई। एक पूरी रिंग होकर कट गई लेकिन अपस्यु ने ध्यान नहीं दिया। वो धीरे-धीरे अपने हाथ चलाते, ऐमी की उत्तेजना को बढ़ाने में लगा था। तभी फिर से दोबारा रिंग होना शुरू हुआ।


ऐमी, अपस्यु को धक्का देकर दूर की…. "हद है फोन बज रहा है अपस्यु, उठाओ उसे पहले।"… अपस्यु गुस्से में फोन को घूरा और फोन उठाकर हॉल में चला आया…. "हां बोल भाई"..


आरव:- कहां था, पूरी घंटी हुई फिर भी कॉल नहीं उठाया।


अपस्यु:- कुछ काम कर रहा था। तू सुना कैसी चल रही है छुट्टियां।


आरव:- अरे यार तेरा कल रात का शो हमदोनो ने देखा, अब मैडम को भी इक्छा हो रही है, वैसे ही एक इजहार की।


अपस्यु:- हाहाहाहा.... प्यारी सी ख्वाइश है कर दे पूरी, इसमें इतना सोच क्यों रहा है। वो छोड़ तू आराम से रह और चिंता ना कर, समझा।


आरव:- कामिना, अब कौन मन की भाषा पढ़ रहा?


अपस्यु:- जुड़वा तो मरने के बाद भी जुड़वा होते है, फिर तू सोच कैसे लिया कि तेरी बात मै ना समझूं या तू मेरी ना समझेगा।


आरव:- हम्मम ! सो तो है, बस मन ना लग रहा तुम लोगों के बिना। तू और ऐमी यहां होते तो बात ही कुछ और होती।


अपस्यु:- अभी लावणी को समय दे समझा, और ज्यादा बहस नहीं।


आरव:- ठीक है गुरुजी समझ गया। चल मै फोन रखता हूं।


अपस्यु ने सोचा, "ये फोन बार-बार तंग ना करे इसलिए खुद ही सबको फोन लगा दूं"। अपस्यु ने फिर एक तरफ से सबको कॉल लगाना शुरू कर दिया। जब वो कुंजल को कॉल लगाया तब उसका फोन व्यस्त आ रहा था। अपस्यु किचेन में झांककर देखा तो ऐमी फोन पर लगी थी, वह समझ गया दोनो लगे हैं, इसलिए उससे छोड़ बाकी सबसे बात कर लिया।


कुछ देर बाद उखड़ा सा चेहरा बनाती ऐमी हॉल में आयी और टेढ़े मुंह अपस्यु को फोन देती कहने लगी… "कुंजल है लाइन पर बात कर लो"..


अपस्यु इशारों में अपने दोनो कान पकड़ते सॉरी कहने लगा… ऐमी फोन उसके पास रखकर रूम में चली गई। जबतक अपस्यु कुंजल से बात करता, ऐमी नहाकर, तैयार होकर कमरे से बाहर निकली। ऐमी को देखकर ही समझ में आ गया, आज इसका पारा फिर चढ़ा…. "कहीं बाहर जा रहे है क्या बेबी।".. अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बाहों में लेकर पूछने लगा।


ऐमी:- खाना ऑर्डर कर दिया है, 12.30 बजे तक आ जाएगा। मै घर का रही हूं।


अपस्यु, ऐमी के कानो के नीचे से बाल को किनारे करते चूमते हुए कहने लगा… "सॉरी बाबा, वो कॉल आ गया था।"


ऐमी:- कोई बात नहीं है अपस्यु, मै जा रहीं हूं तुम खाना खा लेना।


अपस्यु, ऐमी से अलग होकर उसको अपनी ओर घुमाया, और अपने दोनो कान पकड़ कर कहने लगा…. "गलती हो गई बाबा, मुझे मान जाना चाहिए था। तुम जब कही तब हट जाना चाहिए था। अब माफ भी करो और गुस्सा शांत करो।"


ऐमी, अपनी आखें शुकुड़ती…. "अगली बार ऐसे जिद तो नहीं करोगे ना, और कहूंगी अभी नहीं, तो मान जाओगे ना।"..


अपस्यु:- हां बाबा सच में। चलो अब गुस्सा छोड़ो और आराम से बैठ जाओ। आज मै तुम्हे अपने हाथों का बना खिलाऊंगा…


ऐमी:- येस ! यह अच्छा विचार है। वो चीज वाली आलू दम जो तुमने मियामी में खिलाई थी, वहीं बनाओ।


अपस्यु:- ठीक है फिर वो रेस्ट्रो के खाने का आर्डर कैंसल कर दो, और जबतक तुम बाजार से चीज ले आओ, मै बाकी का काम करके रखता हूं।


ऐमी:- प्रदीप को भेज दो ना, अब क्या बाजार भी मै ही जाऊं…


अपस्यु:- नाह ! उन गावरों को रहने दो, मुझे और भी कुछ याद आ गया है, मै खुद बाजार जाता हूं, जबतक तुम आलू छिलकर रखना और 8-10 प्याज काट लेना।


ऐमी:- जी सर जैसा आप कहें।


अपस्यु, ऐमी को काम समझकर निकल गया, वो जबतक किचेन में अपना काम समाप्त करती तबतक अपस्यु भी बाजार से लौट आया था। अपस्यु जब लौटकर आया, ऐमी किचेन में ही थी। अपस्यु किचेन में जाकर सारा समान रख दिया और पीछे से ऐमी को गले लगाते, उसके गाल को चूमते हुए…. "चलो अब तुम जाओ मैं सब रेडी करता हूं।


ऐमी मुस्कुराती वहीं किचेन स्लैब पर बैठती हुई कहने लगी…. "नाह ! तुम पकाओ और मै तुम्हे देखती रहूंगी।…


लगभग 8.30 से 10 बजने को आए थे। श्रेया और उसकी पूरी टीम उन दोनो पर नजर बनाए-बनाए पक से गए थे। रात को इतने बड़े काम की अंजाम देने के बाद भी सुबह उठकर एक शब्द की भी चर्चा नहीं। ना ही पुलिस उनके दरवाजे पर थी तो उनके हाव-भाव में कोई बदलाव।


सब के सब अपना सर पटक रहे थे और दोनो के बीच का रोमांस देखकर बस यही सोच रहे थे… "पागल है क्या दोनो, पूरी दिल्ली में पुलिस प्रशासन हिली हुई है। पूरा अपार्टमेंट पागल बना हुआ है, और इन्हे कोई फर्क ही नहीं पर रहा। आपस में ही लगे है।"


सादिक, श्रेया का साथी और जेन के भाई का किरदार निभाने वाले… "यार या तो ये बहुत ज्यादा होशियार है या लापरवाह। इतने बड़े कांड के बाद कुछ तो चर्चा होती ना।"


श्रेया:- यह भी तो हो सकता है कि उनके अनुसार उन लोगों ने पुरा मैटर रात को हो सॉल्व कर लिया हो, इसलिए कल के इजहार के बाद दोनो बस आपस में ही लगे है।


जेन:- हां लेकिन अब हम क्या करें, उनका रोमांस देखकर तो मुझे अंदर से कुछ रोमांटिक और कुछ एग्जॉटिक सी फीलिंग आने लगी है।


सादिक:- मेरा भी वही हाल है।


श्रेया:- हम्मम ! कहीं ऐसा तो नहीं कि इसने मुझे कल रात जित्तू के पास देख लिया था और शक हो की हम उसके घर में घुसपैठ करके उनपर नजर बनाए हुए हूं।


जेन:- प्वाइंट में दम तो है, लेकिन उनके प्रतिक्रिया इतने नेचुरल है कि कुछ समझ पाना नामुमकिन है। वैसे जिस हिसाब से दोनो के बीच का प्यार और रोमांस है, उसे देखकर तो यही लगता है कि, अगर वो तुम्हे कल सबके साथ देख लेता तो वहां 5 की जगह 6 लाश होती।


श्रेया:- हम्मम ! ठीक है, कुछ देर और वॉच पर रहो, मै कुछ सोचती हूं।


इधर ऐमी किचेन स्लैब पर बैठी अपस्यु को प्यार से खाना बनाते हुए देख रही थी। अपस्यु बड़े ही प्रेम से और पुरा ध्यान खाना पकाने पर दिए हुए था… "कुछ बोलो भी ऐमी, पास हो और इतनी ख़ामोश।"..


ऐमी:- नाह तुम्हे देखने का मज़ा ही कुछ और है। अपनी ये शर्ट क्यों नहीं उतार देते। जरा नजर भर तुम्हारे दिलकश बदन को देख लूं।


अपस्यु अपनी नजर ऐमी पर दिया, आंखों में शरारत और होटों पर कातिलाना हंसी… अपस्यु अपने होंठ आगे बढ़ाकर ऐमी के होठों को चूमते… "अब कौन रिझा रहा है।"..


ऐमी:- हीहीहीही… पहले शर्ट उतारो फिर बताती हूं।


अपस्यु:- तुम खाली बैठी हो, इतनी मेहनत तो तुम भी कर सकती हो।


ऐमी:- नाना, आज मै आलसी हूं, सब तुम्हे ही करना होगा…


"उफ्फ ! मार ही डाला।"… अपस्यु आंख मरते हुए अपनी शर्ट उतार लिया और उसे लपेटकर ऐमी के मुंह पर फेंक दिया। ऐमी, अपस्यु की इस हरकत पर हंसती हुई कहने लगी… "नजर ना लगे, इन्ना सोना। चलो अब अपने पैंट उतारो।"


अपस्यु, आश्चर्य में अपनी आखें बड़ी किए….. "क्या?"


ऐमी:- हीहीहीही.. पैंट उतारो।


अपस्यु:- हट पागल, मै कहता हूं तुम अपने ये जीन्स उतारो।


"पहले ही कहीं मै आज आलसी हूं, बाकी तुम्हारी मर्जी है, मुझे कोई ऐतराज नहीं।"… ऐमी हंसती हुई आंख मारते कहने लगी…


अपस्यु, हंसते हुए अपना सर झुका लिया और अपना काम करने लगा।… "बेबी, शर्ट की तरह पैंट भी फेको ना। प्लीज।"..


"आज पागल हो गई हो तुम।" .. अजीब शर्म सी हंसी हंसते हुए अपस्यु ने अपने पैंट उतरकर भी ऐमी के मुंह पर मरा। … "भिंगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा… मेरे इमरान हाशमी, अंदर तो काफी सेक्सी बॉक्सर पहन रखी है, कहीं और परफॉरमेंस तो नहीं देने वाले थे।"..


अपस्यु:- बस भी करो, अब खुश तो हो ना..


ऐमी:- नाह ! वो आखरी वस्त्र, बॉक्सर भी उतार कर दो।


अपस्यु:- पागल, सुंबह-सुबह कोई पोर्न तो नहीं देख ली।


ऐमी:- आय हाय लड़का तो शर्मा गया। अच्छा तुम्हारी लाज्जा को देखते हुए छोड़ती हूं। जाओ नहा लो, सब तो लगभग पक गया है।


अपस्यु:- बस 5 मिनट का रह गया है, जबतक ये पकता है, तबतक मैं तुम्हे भी निर्वस्त्र कर दूं।


ऐमी फाटक से किचेन स्लैब से नीचे उतरती…. "अभी कुछ देर पहले ही ना कान पकड़ कर बोल रहे थे, मै मना कर दूंगी तो मना हो जाओगे। तो चलो अब मना हो जाओ।"


अपस्यु खा जाने वाली नज़रों से घूरा .. "बहुत शरारत सूझ रही है मिस ऐमी, अभी बताता हूं तुम्हे।"… अपस्यु दौड़ा, ऐमी भागी.. भागते दौड़ते, सामान गिराते पीछा चालू था। ऐमी की खिल खिलहट पूरे घर में गूंज रही थी और अपस्यु उसके पीछे दौड़कर पकड़ने कि कोशिश में लगा था….


अंततः अपस्यु ऐमी को पकड़कर कमर से उठाया और तेजी से गोल घूमते हुए उसके कान के नीचे गले पर अपने दांत जोड़ से गड़ाते हुए कहने लगा… "मेरे तो सीधे-सीधे इमोशंस थे, लेकिन ये सुबह से जो तुम मुझे परेशान कर रही हो ना, अभी बताता हूं।"..


एमी:- क्या करोगे नहीं मानूंगी तो, रेप ही करोगे ना, और क्या.. हीहीहीही।


अपस्यु, ऐमी को उठाकर डायनिंग टेबल पर बिठाते हुए… "तुमने वो सुना है"..

ऐमी:- क्या ?


अपस्यु:- बोंडेज एंड डिसिप्लिन (Bondage and Discipline), डमिनेंस एंड सबमिशन (Dominance and Submission) सदोचिज्म एंड मसोचिज्म (Sadochism and Masochism).


ऐमी, अपनी दोनो आखें फाड़े अपस्यु को देखती हुई… "क्या बीडीएसएम (BDSM)"


अपस्यु:- येस । बिल्कुल यही, सही सुन रही हो।


ऐमी, अपस्यु के बालों पर प्यार से हांथ फेरती…. "बेबी ऐसा ना करो ना, प्लीज। एक बार और सोच लो ना बेबी। मूड तो मेरा भी बहुत हो रहा है, लेकिन ये…."

अपस्यु:- ई.. हा.. हा.. हा… अब तो यही फाइनल है।


ऐमी:- ठीक है फिर हंटर खाने तैयार रहना, मेरी तैयारी पूरी है। सबमिसिव और डिसिपिलन बनकर रहना।


इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
Behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
shreya and team to apasyu aur amy ka romance dekh dekh kar hi pagal ho rahi hai,
Ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 
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नैन भाई इस बार इंतेजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया। अब समय निकाल कर आ भी जाओ,
 

Adirshi

Royal कारभार 👑
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Update:-103





अपस्यु यूं तो लावणी को हौसला दे तो रहा था, लेकिन 2 हफ्ते से गायब कोई लड़का जिंदा हो, अपने आप में एक बड़ा सवाल था। एक अच्छे और सच्चे दोस्त का जाना क्या होता है, ये अपस्यु से बेहतर कौन जान सकता था। मन तो ना उम्मीद ही था लेकिन अपस्यु की प्रार्थना इतनी सी थी कि लावणी अपने दोस्त को ना खोए।


अपस्यु लावणी को शांत करके उससे मैक्स की डिटेल पूछने ही वाला था कि इतने में ऐमी का कॉल चला आया…. "काम हो गया क्या अपस्यु"


अपस्यु:- अपनी भुटकी थोड़ी परेशान है।


ऐमी:- क्या हुआ, कोई चिंता की बात है क्या ?


अपस्यु:- हां थोड़ी सी…


ऐमी:- ठीक है छोड़ दो अभी ड्रॉप करते है, पहले इसे देखते है। मुक्ता अपार्टमेंट आऊं क्या?


अपस्यु:- नहीं मै ही तुम्हारे पास आता हूं, इंतजार करो।


कुछ ही देर में तीनों साथ में थे। अपस्यु ने ऐमी को पूरा मामला बता दिया। ऐमी को भी थोड़ी चिंता हुई, लेकिन उसने भी मुस्कुराकर लावणी को सांत्वना देती हुई कहने लगी… "हम ढूंढ लेंगे मैक्स को"…


अपस्यु:- कोई ड्राइवर है क्या यहां, लावणी को घर छुड़वा दो।


ऐमी:- नहीं रहने दो। साथ में ही रखो, इसे भी अपने दोस्त के लिए कुछ कर लेने दो।


अपस्यु:- हां ये भी सही है। भुटकी तैयार है इन्वेस्टिगेशन के लिए।


लावणी:- हां भैय्या.. बस कैसे भी मेरे कानो में पर जाए की वो सुरक्षित है, फिर मुझे अच्छा लगेगा।


ऐमी, लावणी के पीठ थपथपाती… "ऐसे छोटे मुंह बनाकर और हौसला खोकर ढूंढने जाओगी, तो समझो तुमने पहले से उसे मरा हुआ मानकर खोज रही हो । इसलिए खुश रहो और विश्वास के साथ चलते हैं ढूंढने.. ठीक है हां..


लावणी, मुस्कुराती हुई… "थैंक्स दीदी, चलो चला जाए"


ऐमी लावणी से उसकी पूरी ऑनलाइन डिटेल, जैसे कि एफबी, व्हाट्स एप, ईमेल, और फोन नंबर लेकर अपने वर्क सेक्शन में चली गई। अपस्यु हॉल में ही बैठकर अजिंक्य को कॉल लगा दिया… "हां अपस्यु बोलो"


अपस्यु:- सर सेक्टर 10 के थाने का एक मामला है। लड़का एक हफ्ते से गायब है और थाने से कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं हो रही।


अजिंक्य:- किसी भी थाने में मिसिंग केस का वहीं हाल है। रोज 2 केस केवल मिसिंग के आते हैं। हम जबतक पिछला केस में लगे रहते है, तबतक 4 केस और दर्ज हो जाते है। यही कारन रहता है कि मिसिंग केस की प्रोग्रेस काफी स्लो रहती है।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है सर। अच्छा खुद से इन्वेस्टिगेशन करेंगे तो थाने से कोई हेल्प मिलेगी।


अजिंक्य:- मै साफ साफ बताता हूं। इंजन में तेल डाल दो, यदि गाड़ी सही पते पर पहुंचने वाली होगी, तो तुम्हे लग जाएगा कि सामान्य सी घटना हुई ह। तब तुम आराम से सुकून में रह सकते हो। अगर कहीं तुम्हे ऐसा लगे कि इंजन में तेज डालने के बाद भी, गाड़ी को केवल घुमा फिरा रहा है। तब तुम्हे जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी खुद से ही अपने काम खत्म करने की जरूरत है।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है मै समझ गया।


अभी अपस्यु की बात खत्म ही हुई थी कि ऐमी हॉल में आ गई… "कोई खबर"


ऐमी:- पूरी खबर है, चलो..


अपस्यु:- कहां ..


ऐमी:- पागल सोमेश के यहां।


लावणी:- कौन वो एमपी साहब।


अपस्यु:- हां वही। .. बैग ले लो, शायद जरूरत पर जाए…


ऐमी तुरंत ही बैग लेकर चली आयी। थोड़ी ही देर में तीनों एमपी के बंगलो के मुख्या दरवाजे पर थे। उनका गार्ड अपस्यु को देखकर तीनों को अंदर लिया और फोन से एमपी को बता दिया कि अपस्यु आ रहा है।


"अपस्यु, ऐमी .. बड़े दिनों बाद.. साथ में ये कौन है। ओह ये तो वही है ना लावणी, जिसकी शादी तय हुई है आरव के साथ"..


ऐमी:- अंकल वो लड़का मैक्स कहां है?


सोमेश:- कौन मैक्स.. कोई विदेशी लगता है।


अपस्यु:- ऐमी बैग खोलो ये ऐसे ना सुनने वाला..


सोमेश:- अरे यार ये बैग को अलग रखो और आराम से बैठकर बात करो। सच में मुझे नहीं पता ये मैक्स कौन है?


लावणी अपने मोबाइल से उसकी तस्वीर निकलती… "ये है मैक्स"..


सोमेश:- ये लड़का। मेरे ही पास है। सुरक्षित है, ऐसे घुरो मत दोनो, और पीछे ही बैठे रहो।


अपस्यु:- मुंह का शटर खोलकर बताओगे, आप ये आज कल पढ़ने लिखने वालों को क्यों उठा रहे हो।


सोमेश:- यार मै जन प्रतिनिधि हूं। इसके एरिया में गया तो कॉलर पकड़ कर गाली-गलौज पर उतर आया।


ऐमी:- कोई नई बात बताओ, ऐसे घटना से नेता को कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्य मुद्दा वो भी बिना घुमाए।


सोमेश:- उसके पास मेरे कुछ आपत्ति जनक वीडियो हाथ लग गए थे और मेरा राजनीतिक कैरियर दाव पर लग गया था, इसलिए मजबूरी में उठवाना परा।


अपस्यु:- वीडियो मिला..


सोमेश:- हां मिल गया….


अपस्यु:- फिर जिंदा रखने की वजह..


सोमेश:- मारने का मोटिव नहीं था कसम से। बस मुझे तो वो वीडियो निकलवाना था। ये जवान लोग ही तो टीआरपी देते है। पकड़ कर रख लिया, पिट दिया। अब जाएंगे रोकर मीडिया के पास। मै सुर्खियों में आऊंगा। मारने से क्या फायदा मिलता। लेकिन तुम्हे कैसे पता की वो यहां है।


ऐमी:- पागल और बेवकूफ का इतना बड़ा कंबो मैंने आज तक नहीं देखी। उसका मोबाइल लोकेशन यहीं आपके आवास के आसपास का है।


सोमेश:- वो नए लड़के थे ना ध्यान नहीं दिया होगा.. तुम लोग जाओ मै उसका इलाज करवाकर जैसे उठाया था ठीक वैसे ही भेज दूंगा।


अपस्यु:- वो जिंदल की फैक्टरी शुरू करवानी है। मुझे बापू ने 4-5 पेपर दिए है, उनको सिग्नेचर चाहिए।


सोमेश:- वहीं 2000 करोड़ वाला प्रोजेक्ट ना..


अपस्यु:- हां..


सोमेश:- 50 करोड़ दिलवा दे भाई, नेक्स्ट ईयर इलेक्शन आने वाले है।


अपस्यु:- ज्यादा है, बहुत ज्यादा है..


सोमेश:- समझा कर ना। वो पार्टी में 20 करोड़ देना भी है। नहीं दिया तो इस बार टिकिट भी ना दे कहीं।


अपस्यु:- 10 करोड़ दिलवा दूंगा। फिर आगे भी तो ऑफिस है, काम शुरू होने के बाद उन्हें भी मैनेज करना होगा ना।


सोमेश:- एक काम कर ना फिर 100 करोड़ दिलवा दे मैं सारा ऑफिस मैनेज कर लूंगा। मेरे पेटेशन के 10 करोड़ तो वैसे ही दे रहा है ना।


अपस्यु:- २% के काम का ५% मांग रहे हो, शर्म तो नहीं आयी होगी।


सोमेश:- अरे यार उस जिंदल को क्या कमी है। 400 करोड़ तो वो बर्बाद करके 2 साल से सोया हुआ ही था ना। ५% ले रहा हूं तो सब क्लियर करके पुरा प्रोजेक्ट चालू भी तो करवाकर दूंगा। पैसे देदो और कान में तेल डालकर सो जाओ।


अपस्यु:- तुम पर भरोसा ना है। चलो डील लॉक करते हैं। एक हफ्ते में क्लीयरेंस दिलवाओ तो 10 करोड़ और फैक्टरी का काम जैसे-जैसे क्लीयरेंस के साथ पूरा होता जाएगा, मैं वैसे-वैसे पैसे देता जाऊंगा। बोलो मंजूर…


सोमेश:- बस वो 10 करोड़ को 20 करोड़ कर दे, बाकी सब मंजूर है। कल किसी को भेज देता हूं। वो प्रोजेक्ट क्लीयरेंस वाला जो पेपर है दे देना…


अपस्यु:- ठीक है मंजूर.. लावणी, बेटा हैप्पी ना। तुम्हारे फ्रेंड सुरक्षित है और हफ्ते दिन में घर पहुंच जाएगा..


लावणी:- वेरी हैप्पी भईया.. मेरा तो दिल घबरा रहा था। आप को भी थैंक्स ऐमी दीदी..


अपस्यु:- कोई नहीं वैसे भी मैक्स को कुछ नहीं होना था..


सोमेश:- लावणी अपने दोस्त को थोड़ा समझना.. समाज सेवा अच्छी चीज है लेकिन अगर वो अपनी जान बचाकर कि जाए तो। अपस्यु और ऐमी थे तो यहां तक पहुंच भी गए, वरना प्रोसेस से आते तो महीनों लग जाते तब तक तो कहानी हिट हो जाती।


अपस्यु उसे घूरते हुए… "वोटर बना रहे हो क्या? हमारा नस्ता आया कि नहीं।"


सोमेश:- आ रहा है.. 20 मिनट का डिलीवरी टाइम है, आ जाएगा..


ऐमी:- ठीक है जबतक पिज़्ज़ा आता है तबतक उन बेवकूफों से मिलवा दो जो मोबाइल समेत लोगों को उठा रहे है।


सोमेश ने बाहर स्टाफ से 2 लड़के को बुलाने के लिए कहा.. दोनो सामने खड़े थे। ऐमी दोनो को अपने करीब बुलाई और खींचकर दोनो को 2 तमाचा मारती हुई… "अंकल पुराने लोग है तो ऐसे बेवकूफों को लीड करने क्यों भेजते हो।"..


सोमेश:- यही दोनो तो वो नायाब हीरे हैं, जिन्होने वीडियो का इंफॉर्मेशन दिया था।


अपस्यु:- और इसके इंफॉर्मेशन का सोर्स क्या है वो तो नहीं पूछे होगे। मोबाइल या लेपी से कैसे वीडियो निकलकर बाहर गई, उसकी कोई जांच पड़ताल की या नहीं।


सोमेश:- वह तो पहली प्राथमिकता थी। वो लड़का मैक्स ने जब मेरी कॉलर पकड़ी थी ना, उसी समय मेरे हाथ से मोबाइल गिरा था। यही दोनो ने तो ध्यान लगाया, तब पता चला था मोबाइल कहां गिरा था। जब तक दोनो पहुंचते तब तक उसने लॉक तुड़वाकर कांड कर लिया था।


अपस्यु:- ओह बंदा इंटेलिजेंट है बस थोड़ा अनुभव की कमी है। दोनो को इनाम दे देना और अच्छे से अनुभवी लोगो के पीछे रखो इनको, ताकि काम कि बारीकी को सीखे।


इतने में पिज़्ज़ा भी आ गया, तीनों ही वहां बैठकर पिज़्ज़ा का लुफ्त उठाने के बाद वहां से निकलने लगे.. तभी छन, छन, छन.. मधुर सी पायल की आवाज के साथ, भारतीय परिधान को बड़ी ही खूबसूरती के साथ पहने हुए एक कन्या अंदर आयी। उसे देखकर तो अपस्यु ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया… "नेता जी ये इतनी खूबसूरत लड़की कौन है।"


"लसिता बेटा यहां आओ देखो कुछ मेहमान आए है।"… अपनी बेटी को बुलाने के बाद कहने लगा… "मेरी बेटी शुरू से यूके में रहकर पढ़ी है। वो इंटेलिजेंट है स्मार्ट है और साथ ही साथ पूर्णतः भारतीय संस्कृति को मानने वाली"..


लासिता उनके बीच आकर सबको नमस्ते की और काम का नाम बताकर वहां से जाने लगी। इसी बीच अपस्यु… "तुम अगर यहां आकर बैठती हो तो "वी डांट माइंड" (we don't mind).. लिसा"।


आवाज़ सुनकर ही वो चौंक गई और अपना चेहरा उठाकर अपस्यु को देखने लगी। जिस चेहरे को अपने काम-लीला कि व्यस्ता के कारन तब नहीं देख पाई थी, वो अब देख रही थी।


लसीता घबराकर पानी पीती हुई… "जी मेरा नाम लासीता है। लिसा नहीं।"..


अपस्यु:- जी आप के चेहरा मेरी एक दोस्त जेन से मिलता है।


सोमेश:- अरे ये तो कमाल हो गया, लसिता के भी एक क्लोज फ्रेंड का नाम जेन है।


"ठीक है नेता जी अब हम चलते है। कल वो पेपर लेने किसी को भेज देना।"… सभा समाप्त करके तीनों वहां से निकल आए। लावणी काफी खुश लग रही थी। वो रह-रह कर दोनो को थैंक्स कह रही थी।


लावणी को उसके घर के सामने ड्रॉप कर करने के बाद ऐमी अपस्यु से कहने लगी… "मुक्ता अपार्टमेंट आ जाना 1 घंटे में, मैं इंतजार कर रही हूं।"


अपस्यु हंसते हुए गले लगाते…. "ठीक है, मैं भी पहुंचा उधर"..


अपस्यु नीचे उतर गया और ऐमी वहां से चली गई। अपस्यु आकर सबसे पहले पार्किंग में कार को ही चेक किया। अब भी ऑडी और लंबोर्गिनी गायब थी, बीएमडब्लू और कुंजल की लंबोर्गिनी लगी हुई थी।


अपस्यु ऊपर आया… "कहां चले गए थे, ऐसा भी क्या जरूरी काम था जो सबके साथ नहीं आ पाए।".. कुंजल गुस्सा होते हुई पूछने लगी।


अपस्यु:- सॉरी बाबा। अगली बार से ये गलती नहीं होगी। बाकी सब कहां है।


कुंजल:- दीदी और भाई कहीं बाहर निकले है। मां किचेन में श्रेया के साथ है।


अपस्यु:- गुफरान और प्रदीप कहां है?


कुंजल:- दोनो अपने क्वार्टर में ही है।


अपस्यु:- ठीक है जरा बुला ला दोनो को.. मै जबतक चेंज करके आया।


अपस्यु जब चेंज करके लौटा दोनो हॉल में ही बैठे हुए थे…. "ये बताओ मेरी ऑडी कहां है।"


प्रदीप:- सर वो गराज गई है।


अपस्यु:- 8082 लंबोर्गिनी कहां है?


गुफरान:- वो भी गराज में है।


अपस्यु:- 2 गाड़ी गराज में है, और तुम दोनो हॉस्पिटल में नहीं आश्चर्य है। ड्राइवर के साथ गाड़ी के मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ रहा है। ये तो कमाल हो गया, क्यों ?


गुफरान:- सॉरी सर, वो ऑडी मेरी बेवकूफी के वजह से गराज में है, और लंबर्घिनी मां जी को ड्राइविंग सीखाते वक़्त डैमेज हुई थी।


"क्यों इनकी क्लास ले रहा है.. जाओ तुम दोनों। आज सुबह से ऐमी से नहीं मिले, जो उनका गुस्सा इन दोनों पर उतार रहे।"… नंदनी पीछे से आती हुई कहने लगी।


अपस्यु:- कहने को 4 गाड़ी हो और काम के वक़्त एक भी ना मिले तो दिमाग खराब होता ही है मां। कैसी है डॉक्टर साहिबा.. लंबे समय के बाद मुलाकात हुई है।


श्रेया, अपना हाथ आगे बढ़ाती… "शादी की बधाइयां और हां मै श्रेया हूं और ये नाम मुझे सुनने में काफी प्यारा लगता है। वैसे आंटी यें तो चीटिंग हुई, अपस्यु को खाली समझकर, मै अपने प्यार का प्रस्ताव देने वाली थी। कुछ दिन चोरी छिपे मिलते फिर कुछ सालों बाद शादी की बात करते, आपने तो बीच से पत्ता है काट दिया।"


नंदनी:- हाहाहाहा… वो क्या है ना बेटा घर में पहले से 2 डॉक्टर है, लेकिन कोई सिंगर नहीं थी, इसलिए अपनी बहू के लिए ऐमी को चुन लिया।


श्रेया:- हाहाहाहा.. मतलब अपने परिवार को ही चलता फिरता मल्टी इंडस्ट्री बनाने की सोच रहे है, क्यों? एक ही छत के नीचे इंजिनियर, डॉक्टर, वकील, इकोनॉमिस्ट और हिस्टोरियन। ओह सॉरी साहित्यकार तो छूट ही गए जो अपने प्रवचन से लोगों का मार्गदर्शन करेंगे, और हम जैसे डॉक्टर्स के क्लीनिक को बंद करवा देंगे।


श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..

ye somesh naam ke nay character ki entry huyi hai kya pata ye bhi aage koi kaam hi aa jaye waise amy apasyu ne lavni ke dost ko dhundh hi liya par ye MP se aise kaun baat karta hai ye to aisa hua ke somesh ko MP apasyu ne hi banaya ho
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श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..


अपस्यु:- कैसी हेल्प श्रेया।


श्रेया:- बस 1 दिन के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बन जाओ, मेरे पीछे भूत परा है और उसी से पीछा छुड़ाना है।


अपस्यु:- कौन सा भूत पड़ा है।


श्रेया:- पहले बताओ हेल्प करोगे की नहीं।


अपस्यु:- मै फ्री सर्विस नहीं देता पता है कि नहीं।


श्रेया:- हां ठीक है चाय समोसे की पार्टी दे दूंगी। अब खुश।


अपस्यु:- नाह ! मै एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल पीने वाला हूं, उसी की पार्टी चाहिए।


श्रेया:- एक ड्रिंक कि कॉस्ट क्या पड़ती होगी..


अपस्यु:- हर जगह का अलग अलग है मै जहां पीता हूं वहां शायद 2500 रुपए लेता है।


श्रेया:- और कितनी ड्रिंक में तुम्हारा कोटा पुरा हो जाता है?


अपस्यु:- यही कोई 20 से 25 के बीच..


श्रेया:- पागल हो गए हो। हम जो पीती है वहीं पिलाएंगे.. 400 से 500 का फूल वोदका, और ये फाइनल है। नो बारगेनिंग..


अपस्यु:- ठीक है मंजूर है तुम बताओ कब चलना है।


श्रेया:- जल्द ही जब तुम्हे फ्री टाइम मिल जाए।


अपस्यु:- ठीक है, २-३ दिन थोड़ा व्यस्त हूं कल मै कॉल करके बता दूं तो चलेगा क्या?


श्रेया:- हां बिल्कुल.. और थैंक्स ए लौट .. ये एहसान रहा।


अपस्यु:- काम होने के बाद थैंक्स कहना। गुड नाईट..


श्रेया अपने कमरे चली गई और अपस्यु अंदर आ गया… "क्या कह रही थी वो".. नंदनी जिज्ञासावश पूछने लगी..


अपस्यु;- कोई लड़का उसे परेशान कर रहा है उसी के बारे में हेल्प मांग रही थी।


कुंजल:- अपनी परेशानी काम है क्या, जो दूसरे के फटे में जाओगे। मना कर दो, उसके भी तो भाई है, दोस्त है और भी कई सारे लोग हैं।


अपस्यु:- जी दीदी जी, और कोई आदेश..


कुंजल:- भाई देखो मेरी बात की मज़ाक में मत लो, जो कही वो सुनो।


नंदनी:- जाने दे, अब देखी तो मै भी थी, बेचारी की नानी मरी थी तब तो अकेली ही सब कर रही थी, अब नहीं होगा कोई उस लायक इसलिए जिसे लायक समझी उसे कह दी।


कुंजल:- हुंह ! पुलिस और प्रशासन क्यों है फिर…


अपस्यु:- कुंजल तेरा भाई समझदार है, अब तू चिंता मतकर और ये बता की तुम और स्वास्तिका कब निकल रहे हो मुंबई?।


कुंजल:- हम दोनों कल जा रहे है।


"कहां जाने की बात हो रही है।"…. पीछे से आरव आते हुए पूछने लगा।…


स्वास्तिका:- डफर वो हमारे जाने के बारे में पूछ रहा होगा.. क्यों अपस्यु..


अपस्यु:- तू एक बात बता आरव, गुप्ता ब्रदर्स वाला काम कब तक अटका कर रखेगा, जब काम नहीं करना था तो काम क्यों लिया।


आरव:- यार वो एंगेजमेंट और बाकी सब कामों में फसा रह गया, ध्यान ही नहीं दे पाया।

अपस्यु:- हम्मम ! कल ही गोवा जाओ और उनका काम खत्म करो।


आरव:- हम्मम ! ठीक है मै काम खत्म कर आता हूं।


अपस्यु:- एक काम कर, लावणी को भी ले जाना, तुमलोग भी थोड़ा घूम फिर लोगे….


आरव:- अब उसके लिए तो लंबा प्रोसीजर लगेगा। इसकी परमिशन उसकी परमिशन..


अपस्यु:- गर्लफ्रेंड् को घुमाने नहीं ले जा रहा है। अपनी होने वाली बीवी को घुमाने ले जा रहा है, और अगर किसी को ऐतराज होता है तो कल ही कोर्ट मैरिज करवा दूं क्या?


नंदनी:- मेरे दोनो बेटे कमाल के है। इस आरव को अपनी होने वाली के साथ घूमने जाना है और काम का बहाना ये दूसरा वाला बना रहा है। कमाल है.. और मै तो यहां बेवकूफ बैठी हूं जो कुछ समझ भी ना पाऊं। क्यों ?


अपस्यु:- ठीक है आरव गुप्ता ब्रूदर्स की फाइल मुझे देदे मै ही ये काम कर लूंगा, खुश मां..


नंदनी:- हां खुश..


अपस्यु:- अच्छा मां कल आप भी इन दोनों के साथ मुंबई चली जाना, वहां दीपेश से भी मिल लेना और 10 दिनों में सबको लेकर चली आना। स्वास्तिका का काम हो गया है। उसे बस वहां अब अपना एग्जाम देना है।


नंदनी:- क्या सच में ?


अपस्यु:- हां बाबा सच.. आरव तू वो फाइल ले आ, मै मुक्ता अपार्टमेंट जा रहा हूं बचे लोगों के काम के साथ इसे भी पुरा कर लूंगा।


कुछ ही देर में आरव वो फाइल लेकर चला आया.. नंदनी ने क्रॉस चेक के लिए वो फाइल सच में देखी और देखने के बाद…. "तू सच जह रहा था क्या?"


अपस्यु:- छोड़ो ना मां, अब मैंने काम अपने जिम्मे के लिए है ना.. वैसे भी जिसके साथ शादी होनी है, उसके साथ 4-5 दिन घूमने नहीं जा सकते, इससे अच्छा तो गर्लफ्रंड ही बनाए रखते। लड़की उधर से झूट बोलकर निकलती और लड़का उधर से। बेसिकली गार्डियन को झूट ही ज्यादा पसंद आता है।


नंदनी:- इधर आ तू..


अपस्यु:- नहीं आना मुझे..


नंदनी:- तू इधर आता है या मै वहां आऊं..


अपस्यु अपने दोनो गाल पर हाथ रखे नंदनी के पास आया.. "गाल से हाथ हटा और थोड़ा झुक जाओ।"… "सॉरी वो भावनाओ में निकल गया।"… "हाथ हटाओ अभी।"… अपस्यु हाथ हटाकर थोड़ा नीचे झुका और नंदनी खींचकर उसे 2 तमाचा मारती हुई… "जाकर बैठ जा, और ज्यादा ज्ञान मत दिया कर की गार्डियन को क्या करना चाहिए या क्या नहीं। ठीक है आरव, तू ये गुप्ता ब्रिदर्स के फाइल को निपटा बेटा और लावणी को भी साथ लिए जाना।"


अपस्यु सबसे बात करने के बाद खाना खाकर मुक्ता अपार्टमेंट निकला। हॉल में चेयर पर बैठकर ऐमी कुछ फाइल चेक कर रही थी। अपस्यु पीछे से उसे गले से लगाया, उसके गर्दन पर किस्स किया और सामने के पन्नों को देखकर कहने लगा… "इसका समय नजदीक आ रहा है। फाइल डंप कर दो"


ऐमी अपने हाथ ऊपर ले जाकर अपस्यु के गालों को सहलाती हुई… "हां सही कह रहे इस विक्रम में दम नहीं है। लेकिन आज कल संयोग भी कम नहीं। तुम्हे याद है वो डोनेशन वाली लड़की कुसुम।"..


अपस्यु, फिर से उसके गर्दन को चूमते हुए अपने हाथ उसके पेट पर ले जाते… "हां याद है ना कुसुम, परसो ही तो बाजार में मिली थी।"..


ऐमी अपस्यु में बढ़ते हाथों को दबोच कर पकड़ती… "वो तुम्हारी दूर कि कजिन हुई और विक्रम राठौड़ की छोटी बेटी।"..


अपस्यु, आश्चर्य होकर सामने लगे बड़े से राउंड टेबल पर बैठकर फैमिली डिटेल देखने लगा… "अरे यार ये भगवान को भी दुश्मनी है क्या.. ये जिंदल के यहां ध्रुव और अब ये विक्रम के यहां कुसुम। हर परिवार में ऐसे लोग है जिसके कारन हमे सोचना पड़ता है।"


ऐमी:- कमाल है अपस्यु ये सोचते-सोचते तुम्हारे पाऊं कहां चला आया?


अपस्यु, राउंड टेबल से उतर कर सीधा चेयर पर। अपने दोनो पाऊं फैलाकर ऐमी के उपर बैठकर उसके गर्दन पर चूमते… "लो पाऊं से परेशानी थी ना, अब तो कोई समस्या नहीं है ना।"


ऐमी अपस्यु को धक्के देकर टेबल से गिराती हुई… "5 दिन बोली वो नहीं तुमसे बर्दाश्त हो रहा। क्या करूं मै तुम्हारा कुछ समझ में नहीं आ रहा।"


अपस्यु:- एक किस्स तो कर लेने दो कम से कम..


ऐमी:- नाह ! अच्छी किस्स के बाद क्या होता है वो हम दोनों को पता है। इसलिए नो। अब आराम से बैठो क्योंकि पुरा रायता फैला है और कुछ समझ में नहीं आ रहा।


अपस्यु, ऐमी के पीछे जाते उसके गर्दन के नीचे चूमते हुए धीरे-धीरे कंधों से नीचे अपने हाथ के जाते… "रायता मै समेट लूंगा, अभी तुम मेरे अरमान समेटो।


बेल बजी और नजर सीसी टीवी पर गई तो बाहर आरव खड़ा था.. "हीहीहीही.. मज़ा आ गया".. ऐमी खिलखिलाकर हंसती हुई भागी और दरवाजा खोल दी। जैसे ही आरव अंदर आया ऐमी उसके गले लगती हुई कहने लगी.. "थैंक गॉड आ गए, वरना परेशान कर रखा था इसने।"..


आरव, दोनो को घूरते हुए… "तुम दोनो मुझे बस एक बात समझाओ अपने अपार्टमेंट में कुछ गड़बड़ी चल रही है क्या?"


तीनों ही आकर बैठे… "तुझे क्या लगा पहले वो बताओ"..


आरव:- नहीं, पहले तुम मेरे सवाल का जवाब दो, क्योंकि मुझे उस श्रेया एंड कंपनी पर शक तो पहले से था, लेकिन इतनी सारी रैंडम घटना एक साथ नहीं हो सकता।


अपस्यु:- कुछ घटना बताओ..


आरव:- "पहला तो ये की जिस दिन मै आया पूरी कॉलोनी का हमारे यहां आकर झगड़ा की, जबकि कुछ लोगो को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो दरअसल है कुछ और, और दिखा कुछ और रहे है। उसके अलावा आज अपस्यु ने कहा ना कार के बारे में, तब बातें दिमाग में और भी स्ट्राइक कर गई, मां का कार ऐक्सिडेंट बैंक टू बैंक।"

"फिर ये गुफरान और प्रदीप को देख लो.. कुंजल भी कह रही थी ये बात… "दोनो का व्यव्हार ड्राइवर जैसा नहीं है, बल्कि किसी ऑफिस का हाई क्लास ऑफिसर जैसा ऐटिट्यूड है। उसकी वो गर्लफ्रेंड देखो, जेन और लिसा। एक दिन में उनसे पट भी गई और पड़ोस में जो उसका बॉयफ्रेंड रहता है श्रेया का भाई, उसे कोई फर्क ही नहीं परा।"

"और सबसे ज्यादा गुस्सा तो तुम दोनो पर आ रहा है, ऐसा हो नहीं सकता कि तुम दोनो के पास उसकी डिटेल ना हो। बजाय इसके कि साथ बैठकर डिस्कस करो तो कितनी चालाकी से हम सबको दूर भेज दिया। तुम दोनो के दिमाग में पहले चल क्या रहा है वो बताओ। और हां मुझे सच जानना है।"


अपस्यु, ऐमी की आंखों में झाकने लगा। ऐमी उसका हाथ थामती अपने पलकें झुकाकर सहमति दी… "जिंदल और विक्रम सेकंड लास्ट टारगेट है।"


आरव ये सुनकर जैसे झटका खाया हो। आरव ने जाकर विष्की की बॉटल निकाली और जैसे ही बॉटल में मुंह लगाने लगा, अपस्यु बॉटल हाथ से पकड़कर उसके मुंह से अलग किया… "तू पागल है, ये बियर, वाइन या शैम्पेन नहीं है.. विष्की है, आराम से पेग बनाकर ले"


आरव गुस्से में उससे सीधा एक पंच दे दिया… "पागल मारने से पहले बता तो देता, ऐसे कौन मारता है यार।".. अपस्यु अपना नाक पकड़ते बोला।


"हां तो ठीक है बच, मै एक बार और मार रहा हूं"…. कहते हुए अपस्यु को एक लात जमा दिया और अपस्यु झटका खाकर पीछे हटा। इन दोनों के झगड़े के बीच ऐमी कब वो विश्की की बॉटल उड़ाई किसी को पता भी नहीं चला। वो आराम से तीनों के लिए पेग बनाई और अपना पेग उठाकर कहने लगी… "मार आरव मार.. तू बिना रहम किए मार. अपस्यु माय लव .. बेबी मार मत खाना बस बचते रहो।"…


दोनो अपना ध्यान ऐमी पर जमाते… "बेवरी कहीं की हमे उलझकर पीने भी लगी।"


ऐमी:- दारू जब बाहर आ जाए तो इंतजार नहीं करवाना चाहिए, वरना दारू बुरा मान जाती है।

ऐमी की बात सुनकर दोनो भाई हंसते हुए फिर से बैठ गए और टोस्ट करते हुए अपना-अपना जाम खींचने लगे…. "दिल तोड़ा है तुम दोनो ने। मतलब मुझे साइड करके तुम दोनो अलग ही प्लांनिंग में थे।"


ऐमी:- तुझे बताने के बाद भी तुझे साथ नहीं लेंगे, ये तो तय है। हां जानने का हक है और हम बताते भी। फर्क यही बस तुझे वक़्त से पहले बताना पड़ रहा है वो भी उस कामिनी श्रेया की वजह से।


आरव:- तुम दोनो पागल हो गए हो क्या। जानते हो ना 1 से भले 2 और 2 से भले 3।


अपस्यु:- आरव…. मां है, 120 बच्चे है, कुंजल है, स्वास्तिका है, लावणी है। हम तो सोच चुके है, तुझे सोचना है।


आरव:- यहां हर कोई अपनी किस्मत जीता है और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत लिखता है। हर किसी को एक ना एक दिन मारना है। इसके साथ यह भी सत्य है कि सब एक साथ मर जाए ये भी संभव नहीं। जो बचते है वो अपनो की अच्छी-बुरी यादों के साथ आगे बढ़ते है।


ऐमी, अपस्यु के ओर देखने लगी.. आरव भी अपस्यु के ओर देखने लगा.. दोनो को अपने ओर देखते हुए…. "क्या? मुझे ऐसे क्यों घुर रहे हो दोनो।"


ऐमी:- आरव साथ है..


अपस्यु:- हां ठीक है अब तीन लोगों के बीच क्या वोटिंग कर रहे हो।


आरव:- कमिने हो दोनो.. कितनी दूर से खेल जाते हो अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल होता है। पहले तो मुझे लगा था कि तुम दोनो पार्थ और स्वास्तिका को लेकर परेशान होगे और विक्रम का केस को भी हैंडल कर रहे होगे, मै तो यही सोचकर आया था.. लेकिन आज अगर मै नहीं आता यहां तो तुम दोनो सबकुछ प्लान करके निकल लेते और मुझे पता तक नहीं चलता।


अपस्यु:- वैसे ये सब मामला नहीं भी होता तो भी मै तुझे लावणी के साथ भेजता ही। आज दिन में मेरे कान में कह रही थी, हमारी शादी करवा दो जल्दी भईया।


आरव:- क्या बात कर रहा है। वैसे अरमान मेरे भी कुछ ऐसे ही थे। क्या है कुछ वक़्त उसे भी दे दूं.. कभी वक़्त ही नहीं दे पता। फिर ये भी रहता है कि दोनो परिवार इतने नजदीक है कि कुछ छिपता ही नहीं।


ऐमी:- कोई नहीं आराम से 10 दिन घूम आओ जबतक यहां सब क्लियर करते है। तुम लोग जबतक लौटोगे उससे पहले हम राठौड़ मेंशन में घुसने का प्लान कर चुके होंगे। लेकिन फिलहाल हमारे हर काम के बीच में ये श्रेया और उसकी टीम आ रही है। वो हमारे इतने अंदर तक घुस चुकी है कि दूर बैठकर वो लावणी के बेस्ट फ्रेंड को हमारे ही एक क्लोज कॉन्टैक्ट के हाथों उलझा दी।


"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"
bahut sahi bat boli hai kunjal ne ki dusre ke fate main taang na adani pehle apni pareshaniya niptao jabardast par baba apasyu kaha mannewale hai khair ab lagta hai main plan par kaam hone wala hai
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"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"


अपस्यु अपनी बात कहकर कुछ देर ख़ामोश रहा, ऐमी और आरव इंतजार में उसका चेहरा देख रहे थे.. दोनो को घूरते एक मिनट हो गया, दूसरा मिनट चलने लगा.... "अब बोल भी दो, 10 सेकंड का पॉज समझ में आता है, लेकिन ये तो लंबा होता जा रहा है।"..


अपस्यु:- तुम दोनो को विश्की में मजा आता है और मै अपने कॉकटेल को मिस कर रहा हूं।


ऐमी, अपस्यु को देखकर हंसती हुई नौटंकी कहने लगी और उठकर कॉकटेल का सारा सामान लेने चली गई.. इधर आरव उसे घूरते हुए… "थू.. बेवड़ा कहीं का, अच्छा होता तुझे लावणी जैसी बीवी मिलती। तुम दोनो दुश्मन के हाथों नहीं बल्कि शराब पीकर लीवर खराब होने से मारोगे।"


अपस्यु:- मै जब मारूं ना तो तू हंसते रहना, मरने का दर्द कम हो जाएगा। वरना आज तक तो तूने दर्द नहीं दिया लेकिन आखिरी वक़्त ने दर्द दे जाएगा और मै बेबस कुछ कर भी नहीं पाऊंगा..


आरव, अपना एक पेग खिंचते… "कमिना इमोशनल ना किया कर… अभी तो हम साथ मिलकर धमाल करेंगे.. ठीक से जिए ही कब है, सब खत्म हो जाए तो हम तीनो एक लंबा वैकेशन लेंगे"


ऐमी:- तीनों काहे.. सिर्फ हम दोनों.. तू लावणी के साथ जाना..


आरव:- हां तो चारो एक लंबा वैकेशन लेंगे..


ऐमी, अपस्यु को ड्रिंक देती… "बसंती जबतक तेरी ये जुबान चलेगी, मेरे ये हाथ चलेंगे।


अपस्यु.. अपना ड्रिंक लेने के बाद…


हां तो कहानी की सुरवात होती है जब मै साची को कंफ्यूज कर चुका था, तुमलोग सब यूएसए के लिए निकल गए थे, और अचानक ही उसी बीच एक लड़की की एंट्री होती है। शक की कोई गुंजाइश नहीं, समन्या रूप से मिली और कुछ बात करके चली गई। दिमाग में शक की सुई तब घूम गई जब मै अपने पाऊं में आयुर्वेद उपचार किए हुए था और वो बड़ी ही सफाई से उसका सैंपल ले गई।


आरव:- ओ तेरी, यानी वो अतीत के तार को जोड़ रही थी और श्रेया इस बात की जांच कर रही थी कि गुरु निशी का कोई शिष्य तो नहीं?


अपस्यु..……….


हां यही ख्याल मेरे मन में भी आया। मुझे लगा मै सबके सामने हूं, और बेझिझक सबसे यही कहता रहा हूं कि मै गुरुकुल से पढ़ा हुआ छात्र हूं, तो हो ना हो मुझ पर शक हुआ है। पहले अपनी पहचान छिपाने की जरूरत थी, इसलिए लैब जाकर मैंने उस सैंपल में कुछ एंटीबायोटिक्स के चूर्ण मिलाकर वापस चला आया।

दिमाग अब भी इसी प्वाइंट को सोच रहा था कि हमारी सच्चाई कों किसने पहले भांप लिया। मैंने श्रेया के बारे में पता करना शुरू किया। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। ना तो एक छोटी सी क्लू और ना ही कोई ऐसा लूप जहां से अंदर घुसा जाए। एक समन्य सी प्रोफाइल जो आम परिवार की होती है।

मैंने चीजों पर गौर किया और मुझे लगा की इस बीच एक ही ऐसा है, जिसे मैंने छेड़ा था, वो था होम मिनिस्टर और वही इकलौता ऐसा दिख भी रहा था जिसमें क्षमता हो की वो किसी को भी, कहीं भी प्लॉट कर सकता है।


आरव:- होम मिनिस्टर के होने का तो सवाल ही नहीं होता है, ये हम सब जानते हैं। मतलब एक बार और उसकी छानबीन किए और कुछ नतीजा नहीं निकला होगा।


ऐमी:- राइट, हमारे हाथ कुछ नहीं लगा..


अपस्यु…


हां हमारे हाथ कुछ नहीं लगा। ना तो कौन है श्रेया उसका कुछ पता लगा पाए थे, और ना ही उसका मकसद क्या है उसका कुछ भी अंदाज़ा था। फिर मैंने ऐमी से कहा इसपर से ध्यान हटाएं और हम अपने मिशन पर फोकस करते हैं।

अच्छी बात यह थी उस वक़्त की तुम में से कोई नहीं था यहां पर और मैंने सुलेखा आंटी से हेल्प मांगी थी कि किसी तरह तिकड़म भिड़ाकर वो मां को यूएसए ले जाए।

ओह हां सॉरी वो ड्राइवर और ऐक्सिडेंट वाली बात तो रहा ही गई। मां ने जब ऐक्सिडेंट किया था, तभी श्रेया की सो कॉल्ड मां ने, उनके दिमाग में ड्राइवर की बात डाली। कमाल की प्लैनिंग किसी अनजाने को घर में घुसाने कि। इंटरव्यू में आए सभी लोग उसी के आदमी थे।

सुनिश्चित करने के लिए मैंने मां को श्रेया के घर भेजा था और मै खुद इंटरव्यू ले रहा था और मेरा शक सही निकला। श्रेया का भाई वहां आकर, देखकर गया था कि मै ड्राइवर रखने में इंटरेस्टेड हूं या नहीं। मुझे पता था कि वो पूरे फ्लैट छानबीन शुरू करने वाले होंगे, इसलिए बड़ी ही सफाई से सारे सामान को यहां शिफ्ट करना परा और जितनी चीज़ें उन्हें मेरे घर से मिलनी चाहिए, उतनी चीजें छोड़ दिया।

जितना सोचा था उससे कहीं खरनाक इनकी टीम निकली इस बात का अंदाज़ा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है की मेरे पूरे वर्क सेक्शन को इन लोगों ने छेड़ा। वहां की पूरी जानकारी ली, लेकिन एक समान भी अपने जगह से एक इंच नहीं खिसकी थी। कंप्लीट परफेक्शन…


आरव:- कुछ समझ में नहीं आया थोड़ा डिटेल तो दे ना।


ऐमी:- हाई रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी।



अपस्यु.. …..


हां उन्होंने यही इस्तमाल किया था। पूरे कमरे की फोटोग्राफी की गई। हर चीज को चेक करने के बाद उसे बिल्कुल वैसा ही रखा गया। केवल यह भूल गए हमारे वर्किंग सेक्शन एंट्री टाइल्स के नीचे वेट मशीन लगा है जो सबका वजन रीड करके हमारे सिस्टम पर अपलोड कर देता है। खैर मै जो दिखाना चाहता था वो मै दिखा चुका था, और लौटने के बाद इंतजार में था कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है और मेरे लिए रणनीति क्या होगी।


ऐमी:- ओय हर बात इतनी डिटेल, तो यह भी बता दो कि अपनी क्या डिटेल छोड़े थे..


आरव:- बस कर पागल कितनी पिलाएगी। मेरा हो गया..

ऐमी:- 2 पेग ही तो लिए है.. इतने में तेरा क्या होगा..

आरव:- नाह ! मेरा हो गया। इतने में फुल..

अपस्यु:- अरे यार साथ बैठे है तो तेरा खाली ग्लास खटकेगा ना.. चल बेटा 1 पेग और लेले…

आरव:- नाह मै नहीं लूंगा मैंने लावणी से वादा किया है।

ऐमी:- होने वाली बीवी के लिए दोस्त की बात टाल रहा। अब तो तेरी भाभी हूं कमिने, तू मेरी बात टाल रहा है..

अपस्यु:- जाने दो ऐमी ये आजकल ज्यादा भाव खाने लगा है। अब हमारी बात क्यों सुनने लगा।

आरव झुंझलाते हुए…. "हद है कोई नहीं पीना चाहता उसे जबरदस्ती पिलाओ। मै नहीं पीता, जिद किए तो उठकर चला जाऊंगा।

अपस्यु:- जा तू जा .. अभी चला जा। मतलब हमें छोड़कर चला जाएगा। जब जाना ही था तो आया ही क्यों। हां अब तुम्हे इन कर लिया है ना तो सारी इंफॉर्मेशन भी दे दूंगा.. जा भाई तू जा।

ऐमी:- अब ले भी ले, पीने का मन तो तेरा भी होगा…

हाय रे मंडली की जबरदस्ती, ना चाहते हुए भी ग्लास फुल करना ही परा… छोटे से ब्रेक के बाद अपस्यु फिर से बोलना शुरू किया…


मुझे 2 बात क्लियर करनी थी… पहली तो ये की क्या कोई मुझे गुरु निशी के शिष्य के रूप में खोज रहा है या फिर ये कोई अचानक से टपका है, जो मेरे काम और कॉन्टैक्ट देखकर इंप्रेस हुआ है, और मुझे अपने साथ मिलाना चाहता है।

इस कन्फर्मेशन के लिए मैंने सिन्हा जी के साथ किए कुछ हाई प्रोफाइल काम कि फाइल वहां छोड़ आया था। साथ में हम अब होम मिनिस्टर के साथ काम कर रहे है उसका भी क्लू छोड़ा था, अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में।

मै जबसे वापस आया पुरा ध्यान बनाए था। अंदाज़ा हो चला था कि इस अपार्टमेंट में 30% अब उसके लोग है। सिन्हा जी के ऑफिस में लोग पहुंचे हुए है। वो सोमेश के घर भी पहुंच चुके थे। शक ये भी है कि अजिंक्य जो कि एक मजबूत कॉन्टैक्ट भी नहीं होगा, वहां भी पहुंच चुके होंगे।

मेरे आते ही ये लोग एक्टिव हुए और बस हमारा टेस्ट शुरू हो गया.. उन लोगों ने मामला उलझा दिया था मैक्स और एमपी के बीच। वो तो शुक्र है कि सोमेश में कुछ तो बुद्धि बाकी थी और उसने मैक्स को नहीं मारा। नहीं तो इन लोगों ने ऐसा जाल बुना था टेस्ट का, जिसमें देखना चाहते थे कि फैमिली फ्रेंड के लिए क्या कर सकते है, ताकि इस बात से अंदाज़ा लगा सके कि फैमिली फ्रेंड्स के लिए जब ये हदें है तो फैमिली के लिए कितनी हदें होंगी।

यानी इस घटना ने मकसद तो साफ कर दिया है कि कोई मेरा "डाय हार्ड फैन" (die hard fan) है जो मुझे अपने ओर करना चाहता है। और मकसद अपना काम करवाना नहीं ही है, क्योंकि इतनी शातिर टीम मैंने आज तक नहीं देखी। जिस हिसाब का ये टेस्ट था, उससे तो साफ है कि वो मुझे एक परफेक्ट एसाशियन (assissian) के रूप में देख रहे है, जो उनके टारगेट को सफाई से एलिमिनेट (eliminate) करे। मैं उनके टेस्ट में पास हो चुका हूं और श्रेया अब सीधा जाल बुनना शुरू कर चुकी है। यदि मै उनके जाल में फसा तो इनडायेक्टली श्रेया के जरिए मुझसे काम निकलवाएंगे, नहीं तो फिर फैमिली को उलझाकर अपना काम निकलवाएंगे। वो लोग अपने योजना के आखरी चरण में है और अपना काम निकलवाने के लिए इन 2 में से कोई भी रास्ता अपना सकते है।

मैंने उन्हें हर वो अनुकूल माहौल दिया जिसके तहत वो पुरा अंदर तक घुस सके। मैंने जान बूझकर यूएसए निकलने से पहले उन्हें प्लाई बोर्ड पर्टेशन दिया, ताकि घर में घुस सके। शार्प इतने है की जैसे हम सामने वाले को अपने हिसाब से काम के लिए राजी कर लेते हैं, ठीक वैसे ही ये लोग बड़ी दूर से खेलते आ रहे है। इनके पास हमारे हर फैमिली मेंबर कि प्रोफाइल है और उनके सभी क्लोज फ्रेंड्स की लिस्ट। और उन क्लोज फ्रेंड्स के पूरी फैमिली डिटेल।

जिस लिसा की बात आरव कर रहा है, वो और कोई नहीं बल्कि सोमेश की बेटी है। यूके में रह रही लड़की तक का डेटा ले लिया। उसके इंट्रेस्ट और सब कुछ। हम जैसे साची के लिए पूरे दूर से खेलकर आए थे, वैसे ही कोई मेरे लिए बहुत दूर से खेलते आ रहा है। श्रेया अचानक प्लॉट नहीं हुई, बल्कि पुरे होमवर्क के बाद आए है। बस सवाल ये है कि कौन.. कौन अपने सारे काम छोड़कर अपनी इतनी शातिर टीम को मुझे फसाने में लगाए है। अपना कोई लिस्टेड टारगेट में से कोई है, जो अनजाने में ही मेरे कॉन्टैक्ट और शार्प काम को देखकर इंप्रेस हुआ, या कोई थर्ड पार्टी है जो अचानक ही हमारे कुंडली में आ धमाका।


ऐमी:- कंप्लीट फेसबुक प्रोफाइल खंगाली गई है और वहां के डेटा के हिसाब से हर किसी पर नजर रखी गई है। जाहिर सी बात है उनके पास साइबर डिपार्टमेंट है, फिर जरूर हैकर भी होंगे.. छानबीन का तरीका और किसी भी बात में अपना प्वाइंट ना बताकर बल्कि माहौल ऐसा बना देना की उसकी भाषा सामने वाला बोले, साफ मतलब है कि सभी प्रशिक्षित लोग है। फिर ये बात आती है कि 20 से 25 साल के बीच के लोगों ने इतना प्रशिक्षण प्राप्त कहां से किया होगा। मतलब साफ है या तो अनाथों की टीम को कोई एक्स एजेंट ट्रेंड कर रहा है या फिर ये ट्रेंड एजेंट है, जो हमारे पीछे है।


अपस्यु:- पहला वाला अंदेशा ही सही है, क्योंकि सरकारी एजेंसी के इतने लोग किसी टारगेट को फसाकर अपना काम तो नहीं ही निकलवाते हैं। सो ये कोई ऑर्गनाइजेशन है और इनके पास ऐसे बच्चे है, जिन्हें ये शुरू से प्रशिक्षित कर रहे हैं। ट्रेंड कोई एक्स एजेंट ही कर रहा है जो जाल बिछाने और फसाने में माहिर है। और ऐसे एजेंट की कोई डिटेल नहीं मिल सकती क्योंकि गवर्नमेंट एजेंट की फाइल मेंटेन नहीं करते, बल्कि उन्हें जला देते है। हां लेकिन अपने सभी एक्स एजेंट पर नजर बनाए रखने के लिए एजेंसी की पूरी एक टीम रहती है। सो इन बातों से एक बात और साफ हो जाती है कि कोई विदेशी ट्रेनर है जो अपने काम में पुरा माहिर है।


ऐमी:- चक्कर तो वहीं है ना.. अब हम कुछ भी करेंगे, इनकी नजर हम पर ही बनी रहेगी। मनाकी हम शार्प प्लान करके, बिना नजर में आए अपना काम करते रहे है, लेकिन जब वो लोग नजर बनाए है तो क्या ऐसा कभी नहीं होगा की हमसे कोई गलती नहीं होगी..



आरव:- हाहाहाहा.. तो यहां भी चूहे बिल्ली का खेल शुरू है। बस हमारे लापरवाह रवैया ने हमे बचा लिया। अगर उन्हें भनक भी होती की हम टेक्निकली साउंड है फिर हम उन्हें समझ भी नहीं पाते। तुम दोनो शुरवात में कह रहे थे कि मै 10 दिनों के लिए जबतक बाहर जाऊंगा तबतक सब साफ करके हम राठौड़ मेंशन घुसने वाले होंगे।


ऐमी:- हां अपस्यु ने आज अचानक कहा कि प्लान री-शेड्यूल करना है और 3 महीने के बदले हमे डेढ़ से दो महीने में अब घुसना है।


अपस्यु:- हां, जैसा कि अभी ऐमी कह रही थी, क्या हमसे कभी कोई गलती नहीं होगी। बस यही बात मेरे दिमाग में है। श्रेया मुझे फंसाना चाहती है, तो मै फंसता जाऊंगा। उसका ध्यान बाकी लोगों से हटेगा। राठौड़ मेंशन में फैमिली शिफ्ट होने का मतलब है कि हम मां और कुंजल के ओर से बेफिक्र हो जाएंगे। यह डर नहीं रहेगा कि श्रेया उनके करीब बैठकर अतीत के पन्ने कुरेदे।


आरव:- ऐसा नहीं लग रहा की जिंदगी थोड़ी बोरिंग सी हो गई है और जिंदगी एक रूम में पैक होकर रह गई है। कोई भी आहट हो तो डर सा माहौल पैदा हो जाता है।
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आरव:- ऐसा नहीं लग रहा की जिंदगी थोड़ी बोरिंग सी हो गई है और जिंदगी एक रूम में पैक होकर रह गई है। कोई भी आहट हो तो डर सा माहौल पैदा हो जाता है।


ऐमी:- राइट … एग्जैक्टकली मेरा भी यही कहना था आज अपस्यु को..


अपस्यु:- समझ गया तुम दोनों क्या कहना चाह रहे हो। मुझे उम्मीद भी यही थी इसलिए तो तुम दोनो पर छोड़ा था कि क्या करना है। स्वास्तिका और पार्थ से अब हम कोई उम्मीद नहीं कर सकते.. उसे साइड लाइन में रखो। मां के आस पास इन दोनों के होने से हम थोड़े रिलैक्स होंगे.


आरव:- बोर मत कर.. जल्दी से राज खोल, ग्राउंड कैसे क्लियर करेंगे…


अपस्यु:- मै घुसकर पागल बनाता हूं श्रेया को.. ये साइडलाइन कहानी है, जो हमारे रेगुलर काम के साथ चलेगी। 10 दिन बाद जब तुम लौटोगे आरव, तब श्रेया की टीम पर बिजली गिरेगी… और उन्हें उलझाकर हम बीच उसी भी विक्रम को चौंकते हुए अंदर घुस जाएंगे….


तकरीबन 15 मिनट तक अपस्यु अपने योजना का पुरा विवरण सबको डेटा रहा। योजना काफी कारगर थी लेकिन इसी बीच ऐमी कहने लगी… "यह योजना है तो सही पर इसमें केवल श्रेया पर बिजली गिरेगी बस। हां विक्रम पर कहर बरसने वाला वाला है वो तो थी है लेकिन इस कामिनी और इसके टीम को सस्ते में क्यों छोड़ रहे। मै थोड़ा फर बदल करना चाहूंगी इसमें।".. ऐमी जब अपस्यु के योजना मै फर बदल कर बताने लगी, दोनो भाई के दिमाग की घंटी बज गई।


आरव:- ये सैतानी खोपड़ी अब चली है ना… पूरी डिटेल..


ऐमी लगभग 10 मिनट तक अपनी योजना को विस्तार रुप से बताई। अपस्यु और आरव के बीच बीच में सवाल आते रहे जिसके कुछ के जवाब तो ऐमी पहले से सोच चुकी थी लेकिन कुछ फसे मामले में आरव ने उसे पूरा करना का जिम्मा ले लिया। योजना पूर्णतः सामने आने के बाद तो जैसे दिमाग में पूरी कहानी ही सेट हो गई हो।


अपस्यु:- इतनी दूर की प्लैनिंग। तुमने तो श्रेया को पूरी तरह से लपेट लिया इसमें।


आरव:- योजना जटिल है, लेकिन इस एक प्लान से हम सबके आगे खड़े होंगे और सब हमारे पीछे। मैंने अपना माथा बहुत खपा लिया, अब तुम दोनो इस योजना की पूरी बारीकी को समझो। मै चला गोवा अपनी लावणी के साथ। वैसे देखा जाए तो तुम दोनो का भी हनीमून पीरियड ही माना जाएगा। कोई तो होगा नहीं, तो काम के साथ एन्जॉय करो।


अपस्यु:- काहे के मज़े .. यहां हरताल चल रहा है।


ऐमी खाली बॉटल उठाकर अपस्यु के हाथ पर मारती हुई…. "अति बेशर्मी तुममें घुस गई है। छोड़ो ये, कितने समय बाद हम सब साथ है, चलो कुछ तूफानी प्लान करते है।


अपस्यु:- नहीं मै सोने जा रहा हूं, तुम दोनो आराम से तूफानी बर्फानी सब करते रहो।


ऐमी आरव के ओर देखी और आरव चुपचाप वहां से निकल गया। जैसे ही अपस्यु कुछ दूर आगे बढ़ा होगा, छापक से उसके ऊपर पानी परा। वो गुस्से में पलटा और दोनो भाई कुछ देर तक उठापटक करने के बाद हंसते हुए खड़े हो गए।


तीनों अपने ये खूबसूरत से पल कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे थे। कभी अनारकली और सलीम का कॉमिक रोले प्ले किया जा रहा था तो कभी टूटे दिल देवदास का। तीनों के बीच मस्ती का सिलसिला जारी रहा।



अगली सुबह…


नंदनी सुबह सुबह ही अपने समधियाना यानी कि मिश्रा हाउस में दस्तक दे चुकी थी। सुलेखा, अनुपमा और नंदनी तीनों वहीं हॉल में बैठकर बातें कर रही थी। बातों की शुरवात ही लावणी के गोवा जाने से हुई। यूं तो थोड़ी असमंजस जैसी स्तिथि बनी थी, लेकिन नंदनी को ना कहने की हिम्मत उन दोनों में तो नहीं हुई, इसलिए सुलेखा ने राजीव को कॉल लगाया।


राजीव को भी कुछ समझ में नहीं आया क्या कहे, और नंदनी को मना करने की हिम्मत वो भी नहीं जुटा पाया, इसलिए बात को उसने फिर सुलेखा पर ही फेक दिया। होना क्या था, 5 मिनट तक जब कोई फैसला दोनो नहीं ले पाई, तब नंदनी ही दोनो को सारी बातें समझते हुए… "उन्हें घूमने देने जाने चाहिए"… ऐसा अपना प्रस्ताव रखकर फैसला उन्हीं दोनो पर छोड़ दिया…


साची जो थोड़ी दूर बैठकर उनकी सारी बातें सुन रही थी… "छोटी छोटी ख्वाहिशें होती है। यहां मायका और ससुराल इतने नजदीक में है कि बेचारे दोनो पीस कर रह जाते हैं। क्यों इतना सोच रहे है, अब जाने भी दो ना। या दोनो साथ होंगे तो दिमाग की सुई एक ही जगह अटक गई है। ऐसा है तो वो कहीं भी ही सकता है। बाहर निकलो अपने जहनी पुराने ख्यालतों से और आंख खोलकर देखोगे तो पता चलेगा इनके अलावा भी दुनिया होती है।"..


सुलेखा:- दीदी मुझे तो लगता है ये अपना रास्ता साफ कर रही है लावणी के बहाने।


साची:- छोटी मां मुझे घूमने जाना हो कहीं ध्रुव के साथ और आप सब ऐस रोड़ा आटकाओगे तो मै कोर्ट मैरिज करके चली जाऊंगी, लेकिन जाऊंगी जरूर।


नंदनी:- अपस्यु से तेरी बात हुई थी क्या, क्योंकि वो भी ऐसा ही कुछ बोल रहा था।


आगे फिर ताना बाना शुरू हो गया। एक ओर तीनों ही औरतें छोटे से शहर में उस वक़्त की तात्कालिक स्तिथि को बताने लगी कि उनके ज़माने में क्या होता था और साची आज के परिवेश में लड़कियों को कैसा होना चाहिए उसपर बात कर रही थी।


सभी बैठकर बातें कर ही रही थी कि लावणी हॉल में सबको नमस्ते करती हुई बाहर जाने लगी… "कॉलेज जा रही है लावणी, 2 मिनट सुन तो".. नंदनी, लावणी को पीछे से टोकती हुई कहने लगी।


लावणी:- जी मां…


नंदनी:- जा बैग पैक कर ले, कुछ दिनों के लिए तेरी कॉलेज से छुट्टी।


लावणी ने जैसे ही यह बात सुनी उसे अपस्यु की बात याद आ गई… "दोनो को साथ वक़्त बिताना है उसके लिए जल्दी शादी करवाने क्यों कह रही हो। तुम दोनो को कहीं बाहर भेजने का इंतजाम मै करता हूं।".. अपस्यु की बातों का ख्याल आते ही लावणी अंदर से गुदगुदा गयी। लेकिन बाहर से अपने इमोशन संभालती… "कहीं फैमिली टूर है क्या मां"..


सुलेखा:- देखो तो बदमाश को। कल शाम अपस्यु के साथ गई थी, वहीं दोनो भाई बैठकर यें प्लान किए होंगे और नाटक तो देखो, जैसे कुछ जानती ही नहीं।


नंदनी, सुलेखा की बात पर चौंकती हुई…. "आप तो ऐसे बता रही है जैसे दोनो भाई को काफी करीब से जानती हो।"


नंदनी की बात सुनकर सब लोग सुलेखा को ही देखने लगे…. "बस लगा की कहीं दोनो (लावणी और आरव) बात करे तो हम मना नर दें, इसलिए अपस्यु से मिलकर अपना काम करवाया हो।


लावणी:- क्या मां आप भी। मेरा दोस्त मैक्स, 2 हफ्ते से गायब था और उसके मम्मी पापा की हालत मुझसे देखी नहीं गई इसलिए मै भईया से उसके विषय में बात करने के लिए गई थी।


सभी लोग सुनकर अफ़सोस करने लगे। चिंता जताते हुए फिर पूछने लगे… "क्या हुआ कोई खबर मिली कि नहीं।"


लावणी:- कमाल के है अपस्यु भईया, और ऐमी दीदी भी। हालांकि दोनो किसी जरूरी काम के बारे में बात कर रहे थे, शायद इंडिया गेट पर कोई प्रोग्राम था, लेकिन मेरी समस्या सुनने के बाद सारे काम कैंसल करके मैक्स को ढूंढने में लग गए। और मैक्स को ढूंढ निकाला। बेस्ट है दोनो।


अनुपमा:- और आरव..


लावणी:- वो भी बेस्ट है, लेकिन कल आरव नहीं थे ना। मैंने कॉल किया था, पर वो सब लोगों के साथ थे, तो मैंने सोचा वापस आएंगे तब बता दूंगी।


साची:- हां ठीक है, लेकिन अब जा पैकिंग कर ले..


लावणी अरमान को बिल्कुल काबू किए तेजी से अपने कमरे पहुंची और उत्साह से वूहू वुहू करके उछालने और नाचने लगी।…. "गोवा पहुंच पर भी नाच सकती है, अभी पैकिंग कर ले।"… दरवाजे पर खड़ी साची कहने लगी और बाकी सभी औरतें पीछे खड़ी होकर लावणी का उत्साह देख रही थी। हर किसी को महसूस हो रहा था कि क्यों थोड़ी सी आज़ादी इन्हे भी देनी चाहिए।


लेकिन बेचारी लावणी, दरवाजे पर सबको खड़े देख कर शर्म से पानी-पानी हो गई। वो फाटक से दरवाजा बंद करके बस लज्जाए जा रही थी। आलम ये था कि पैकिंग के बाद तभी बाहर आयी जब आरव उसे लेने आया। आंखों पर काला चश्मा चढ़ा रखी थी, ताकि किसी से नजर ना मिले और आरव के पीछे वो छिप-छिप कर चल रही थी।


रात के लगभग 11.30 बज रहे होगे, सभी लोग उड़ान भर चुके थे और अपस्यु हॉल में बैठा गाना सुनते एक अंदाजन श्रेया के आने का इंतजार कर रहा था। इसी बीच घर कि घंटी बजी और दरवाजे पर गुफरान था।… "क्या काम है गुफरान।"..


गुफरान:- सर वो कुछ पैसे चाहिए थे।


अपस्यु:- कुछ पैसे मतलब कितने..


गुफरान:- सर वो 2000 रुपए चाहिए थे।


अपस्यु:- तुम रात में मुझसे पैसे मांगने आए हो।


गुफरान:- सर वो जरूरत तो रात की है, सुबह मै आपके पैसे लौटा दूंगा।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है सुन तू मेरे लिए कॉकटेल का पूरा सामान ले आना, एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल..


अपस्यु ने उसे उसके 2000 रुपए दिए और बाकी अपने सामान के 20k थमा दिया। तकरीबन 5 मिनट बाद गुफरान का फोन आया और वो दुकानदार को फोन दे दिया। उस दुकानदार ने कुछ सवाल किए और सारा सामान पैक करके दे दिया।


गुफरान आकर अपस्यु को सारा समान दिया और बचे हुए पैसे वापस करके वहां से जा ही रहा था कि… "अच्छा सुनो, मां से ये सब मत बताना".. "ओह हो तो आंटी से छिपकर कांड किया जा रहा है।"..


अपस्यु:- नाईट वाक, अच्छा है, अच्छी सेहत बनाओ। हम तो चले… गुड नाईट।


श्रेया:- अच्छा है, वैसे कोई कॉल करने वाला है पर कुछ याद भी हो तो ना।


अपस्यु:- मैम अगर आपको बात करनी है तो कृपया अंदर आ जाइए, अन्यथा सुभ रात्रि क्योंकि अब मै इंतजार नहीं कर सकता।


श्रेया:- हीहीहीही.. घर में कोई नहीं ..


अपस्यु श्रेया को बीच में ही रोककर…. "तू तब से यहां खड़ा होकर क्या कर रहा है? तेरा काम हो गया ना?


गुफरान:- हां भाई।


एक नपा तुला थप्पड़ परा.. "सर से सीधा भाई। जब क्लोज होंगे तब ये इस्तमाल करना। चलो अब जाओ। और सुन पैसे कल सुबह कब वापस करोगे।"


गुफरान:- सर वो 10 बजे तक कर दूंगा।


अपस्यु:- ठीक है जाओ… हां मिस आप जारी रखिए..


श्रेया:- भूल गए ना मेरा काम?


अपस्यु:- कुछ नहीं भुला हूं सब याद है, मुझे फिलहाल आप की इजाज़त हो तो जाऊं, बहुत दिनों बाद मौका मिला है।


श्रेया, गेट से अंदर ताक-झांक करती…. "अकेले हो फिर भी इतनी हड़बड़ी मची है पीने की।"…


अपस्यु:- मै दिल्ली में थोड़े ना रहता था जो मेरे यहां कोई ज्यादा दोस्त होंगे..


श्रेया:- अच्छा पड़ोस में तुम्हारी एक दोस्त है और तुम ज्यादा कम की बात कर रहे हो।


अपस्यु श्रेया का हाथ पकड़कर खिंचते हुए अंदर किया और दरवाजा बंद करते हुए…. "तो सीधा अंदर आओ ना। अब एक सिम्पल सवाल.. क्या तुम्हे मेरे साथ बैठकर लेना है, या जाना है।"..


श्रेया:- पीकर यहां लुढ़क भी गई तो कोई फर्क नहीं पड़ना, मेरे यहां भी कोई नहीं है।


अपस्यु:- जे हुई ना बात, चलो फिर तुम आराम से बैठो आज खिदमत में हाज़िर है एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल …


श्रेया:- देखना कहीं एटम फटे ना, वरना यहां भूचाल सा मच जाएगा…


दोनो इधर-उधर की बातें करते हुए ड्रिंक का मज़ा लेने लगे। 1 ड्रिंक पीने के बाद श्रेया ने खुद कॉकटेल बनना शुरू की और अपस्यु को बढ़ाते जाने लगी। महज आधे घंटे में वो अपस्यु को 15 पेग पिला चुकी थी और खुद अभी तक दूसरे ड्रिंक को पकड़ी हुई थी।


अपस्यु "एक्सक्यूज मी" करते हुए उठा और लड़खड़ाते हुए किसी तरह बाथरूम तक पहुंचा। काम खत्म करके आने के बाद अपस्यु फिर बैठा। श्रेया ने फिर से ड्रिंक देना शुरू की। 3 पेग और पिलाने के बाद… "अपस्यु आज तक तुमने बताया नहीं की तुम कौन से आश्रम में पढ़े हो।"..


अपस्यु, श्रेया को गौर से देखते… "वो क्या है ना बेबी तुमने कभी पूछा ही नहीं। वैसे एक बात कहूं तुम बहुत हॉट दिखती हो। बिल्कुल रेड चिली"


श्रेया:- हीहीहीही… ये नया अवतार अपस्यु बाबू का। चलो अब पूछ लिया, बता दो..


अपस्यु:- अम्म्म ! ठीक है मै सब बताऊंगा लेकिन एक शर्त पर..


श्रेया:- कैसी शर्त..


अपस्यु:- हम एक-एक सवाल करके खेलेंगे.. एक तुम पूछो एक मै..


श्रेया:- और यदि मुझे किसी सवाल का जवाब नहीं देना हुआ था…


अपस्यु:- सिम्पल, मुझे आकर एक जबरदस्त किस्स दे देना वो भी लिप टू लिप वाला।


श्रेया:- ये क्या बकवास है? तुम होश में तो हो..


अपस्यु:- रॉक सॉलिड होश में हूं। कुछ लोगों को पचती नहीं, लेकिन मै अभी 20 पेग और ले सकता हूं। मेरी छोड़ो तुम तो होश में हो ना..


श्रेया:- हीहीहीही.. पागल हो तुम। हां मै भी होश में हूं। लेकिन ये तो चीटिंग होगी ना। मैं तो ईमानदारी से खेलूंगी, नहीं मन हुआ जवाब देने का तभी ना कहूंगी, लेकिन तुम्हारा क्या भरोसा.. कहीं जान बूझकर मुझे किस्स करने का मन हो और तुम ना कह दो तो।


अपस्यु:- ओय शुक्र करो वो मस्त वाला खेल नहीं खेला, जिसमें एक जवाब ना देने पर कपड़े उतारने कहते है। वैसे भी ऐसा कोई सवाल नही जिसका जवाब मै ना दे सकूं, गूगल भी करना पड़े तो भी जवाब दूंगा.. अब जो नहीं आता सो नहीं आता, उसमे कुछ नहीं किया जा सकता.. भरोसा हो तो खेलो नहीं तो कोई बात नहीं।


(पापा को मै कबसे इस प्लान पर काम करने कह रही थी, लेकिन वो वक़्त मांग रहे थे। कितना मुश्किल होता है बिना सीधा सवाल किए हुए जवाब निकालना ये बात थोड़े ना समझ में आएगी। ये लो देखो, दारू अंदर गई नहीं की सारे राज बाहर आने शुरू)


(अभी तो तुझे पिलाते-पिलाते 12.30 ही बजे है। तुम्हे तो आज पूरी रात जगाऊंगा जानेमन। पूछ ले सवाल तू,आज तो मेरा अतीत जान कर ही चली जाना लेकिन बातों के दौरान तुम जरा बचकर चलना जानेमन, कहीं मुंह से कुछ निकल गया तेरे, तो मेरा राज जानने के चक्कर में अपने राज मत खोल देना)
O bete matlab ye shreya to mastermind nikli bhai. ander hi ander itna bada game khel rahi thi aur puri building main usi ke log hai..matlab jhol bahut bada lagta hai aur iske piche bahut hi powerful aadmi ka kaam lag raha hai waise sahi botal main utar raha hai use apasyu

Shaandaar Updates :applause:
 
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