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Romance भंवर (पूर्ण)

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Update:-103





अपस्यु यूं तो लावणी को हौसला दे तो रहा था, लेकिन 2 हफ्ते से गायब कोई लड़का जिंदा हो, अपने आप में एक बड़ा सवाल था। एक अच्छे और सच्चे दोस्त का जाना क्या होता है, ये अपस्यु से बेहतर कौन जान सकता था। मन तो ना उम्मीद ही था लेकिन अपस्यु की प्रार्थना इतनी सी थी कि लावणी अपने दोस्त को ना खोए।


अपस्यु लावणी को शांत करके उससे मैक्स की डिटेल पूछने ही वाला था कि इतने में ऐमी का कॉल चला आया…. "काम हो गया क्या अपस्यु"


अपस्यु:- अपनी भुटकी थोड़ी परेशान है।


ऐमी:- क्या हुआ, कोई चिंता की बात है क्या ?


अपस्यु:- हां थोड़ी सी…


ऐमी:- ठीक है छोड़ दो अभी ड्रॉप करते है, पहले इसे देखते है। मुक्ता अपार्टमेंट आऊं क्या?


अपस्यु:- नहीं मै ही तुम्हारे पास आता हूं, इंतजार करो।


कुछ ही देर में तीनों साथ में थे। अपस्यु ने ऐमी को पूरा मामला बता दिया। ऐमी को भी थोड़ी चिंता हुई, लेकिन उसने भी मुस्कुराकर लावणी को सांत्वना देती हुई कहने लगी… "हम ढूंढ लेंगे मैक्स को"…


अपस्यु:- कोई ड्राइवर है क्या यहां, लावणी को घर छुड़वा दो।


ऐमी:- नहीं रहने दो। साथ में ही रखो, इसे भी अपने दोस्त के लिए कुछ कर लेने दो।


अपस्यु:- हां ये भी सही है। भुटकी तैयार है इन्वेस्टिगेशन के लिए।


लावणी:- हां भैय्या.. बस कैसे भी मेरे कानो में पर जाए की वो सुरक्षित है, फिर मुझे अच्छा लगेगा।


ऐमी, लावणी के पीठ थपथपाती… "ऐसे छोटे मुंह बनाकर और हौसला खोकर ढूंढने जाओगी, तो समझो तुमने पहले से उसे मरा हुआ मानकर खोज रही हो । इसलिए खुश रहो और विश्वास के साथ चलते हैं ढूंढने.. ठीक है हां..


लावणी, मुस्कुराती हुई… "थैंक्स दीदी, चलो चला जाए"


ऐमी लावणी से उसकी पूरी ऑनलाइन डिटेल, जैसे कि एफबी, व्हाट्स एप, ईमेल, और फोन नंबर लेकर अपने वर्क सेक्शन में चली गई। अपस्यु हॉल में ही बैठकर अजिंक्य को कॉल लगा दिया… "हां अपस्यु बोलो"


अपस्यु:- सर सेक्टर 10 के थाने का एक मामला है। लड़का एक हफ्ते से गायब है और थाने से कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं हो रही।


अजिंक्य:- किसी भी थाने में मिसिंग केस का वहीं हाल है। रोज 2 केस केवल मिसिंग के आते हैं। हम जबतक पिछला केस में लगे रहते है, तबतक 4 केस और दर्ज हो जाते है। यही कारन रहता है कि मिसिंग केस की प्रोग्रेस काफी स्लो रहती है।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है सर। अच्छा खुद से इन्वेस्टिगेशन करेंगे तो थाने से कोई हेल्प मिलेगी।


अजिंक्य:- मै साफ साफ बताता हूं। इंजन में तेल डाल दो, यदि गाड़ी सही पते पर पहुंचने वाली होगी, तो तुम्हे लग जाएगा कि सामान्य सी घटना हुई ह। तब तुम आराम से सुकून में रह सकते हो। अगर कहीं तुम्हे ऐसा लगे कि इंजन में तेज डालने के बाद भी, गाड़ी को केवल घुमा फिरा रहा है। तब तुम्हे जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी खुद से ही अपने काम खत्म करने की जरूरत है।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है मै समझ गया।


अभी अपस्यु की बात खत्म ही हुई थी कि ऐमी हॉल में आ गई… "कोई खबर"


ऐमी:- पूरी खबर है, चलो..


अपस्यु:- कहां ..


ऐमी:- पागल सोमेश के यहां।


लावणी:- कौन वो एमपी साहब।


अपस्यु:- हां वही। .. बैग ले लो, शायद जरूरत पर जाए…


ऐमी तुरंत ही बैग लेकर चली आयी। थोड़ी ही देर में तीनों एमपी के बंगलो के मुख्या दरवाजे पर थे। उनका गार्ड अपस्यु को देखकर तीनों को अंदर लिया और फोन से एमपी को बता दिया कि अपस्यु आ रहा है।


"अपस्यु, ऐमी .. बड़े दिनों बाद.. साथ में ये कौन है। ओह ये तो वही है ना लावणी, जिसकी शादी तय हुई है आरव के साथ"..


ऐमी:- अंकल वो लड़का मैक्स कहां है?


सोमेश:- कौन मैक्स.. कोई विदेशी लगता है।


अपस्यु:- ऐमी बैग खोलो ये ऐसे ना सुनने वाला..


सोमेश:- अरे यार ये बैग को अलग रखो और आराम से बैठकर बात करो। सच में मुझे नहीं पता ये मैक्स कौन है?


लावणी अपने मोबाइल से उसकी तस्वीर निकलती… "ये है मैक्स"..


सोमेश:- ये लड़का। मेरे ही पास है। सुरक्षित है, ऐसे घुरो मत दोनो, और पीछे ही बैठे रहो।


अपस्यु:- मुंह का शटर खोलकर बताओगे, आप ये आज कल पढ़ने लिखने वालों को क्यों उठा रहे हो।


सोमेश:- यार मै जन प्रतिनिधि हूं। इसके एरिया में गया तो कॉलर पकड़ कर गाली-गलौज पर उतर आया।


ऐमी:- कोई नई बात बताओ, ऐसे घटना से नेता को कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्य मुद्दा वो भी बिना घुमाए।


सोमेश:- उसके पास मेरे कुछ आपत्ति जनक वीडियो हाथ लग गए थे और मेरा राजनीतिक कैरियर दाव पर लग गया था, इसलिए मजबूरी में उठवाना परा।


अपस्यु:- वीडियो मिला..


सोमेश:- हां मिल गया….


अपस्यु:- फिर जिंदा रखने की वजह..


सोमेश:- मारने का मोटिव नहीं था कसम से। बस मुझे तो वो वीडियो निकलवाना था। ये जवान लोग ही तो टीआरपी देते है। पकड़ कर रख लिया, पिट दिया। अब जाएंगे रोकर मीडिया के पास। मै सुर्खियों में आऊंगा। मारने से क्या फायदा मिलता। लेकिन तुम्हे कैसे पता की वो यहां है।


ऐमी:- पागल और बेवकूफ का इतना बड़ा कंबो मैंने आज तक नहीं देखी। उसका मोबाइल लोकेशन यहीं आपके आवास के आसपास का है।


सोमेश:- वो नए लड़के थे ना ध्यान नहीं दिया होगा.. तुम लोग जाओ मै उसका इलाज करवाकर जैसे उठाया था ठीक वैसे ही भेज दूंगा।


अपस्यु:- वो जिंदल की फैक्टरी शुरू करवानी है। मुझे बापू ने 4-5 पेपर दिए है, उनको सिग्नेचर चाहिए।


सोमेश:- वहीं 2000 करोड़ वाला प्रोजेक्ट ना..


अपस्यु:- हां..


सोमेश:- 50 करोड़ दिलवा दे भाई, नेक्स्ट ईयर इलेक्शन आने वाले है।


अपस्यु:- ज्यादा है, बहुत ज्यादा है..


सोमेश:- समझा कर ना। वो पार्टी में 20 करोड़ देना भी है। नहीं दिया तो इस बार टिकिट भी ना दे कहीं।


अपस्यु:- 10 करोड़ दिलवा दूंगा। फिर आगे भी तो ऑफिस है, काम शुरू होने के बाद उन्हें भी मैनेज करना होगा ना।


सोमेश:- एक काम कर ना फिर 100 करोड़ दिलवा दे मैं सारा ऑफिस मैनेज कर लूंगा। मेरे पेटेशन के 10 करोड़ तो वैसे ही दे रहा है ना।


अपस्यु:- २% के काम का ५% मांग रहे हो, शर्म तो नहीं आयी होगी।


सोमेश:- अरे यार उस जिंदल को क्या कमी है। 400 करोड़ तो वो बर्बाद करके 2 साल से सोया हुआ ही था ना। ५% ले रहा हूं तो सब क्लियर करके पुरा प्रोजेक्ट चालू भी तो करवाकर दूंगा। पैसे देदो और कान में तेल डालकर सो जाओ।


अपस्यु:- तुम पर भरोसा ना है। चलो डील लॉक करते हैं। एक हफ्ते में क्लीयरेंस दिलवाओ तो 10 करोड़ और फैक्टरी का काम जैसे-जैसे क्लीयरेंस के साथ पूरा होता जाएगा, मैं वैसे-वैसे पैसे देता जाऊंगा। बोलो मंजूर…


सोमेश:- बस वो 10 करोड़ को 20 करोड़ कर दे, बाकी सब मंजूर है। कल किसी को भेज देता हूं। वो प्रोजेक्ट क्लीयरेंस वाला जो पेपर है दे देना…


अपस्यु:- ठीक है मंजूर.. लावणी, बेटा हैप्पी ना। तुम्हारे फ्रेंड सुरक्षित है और हफ्ते दिन में घर पहुंच जाएगा..


लावणी:- वेरी हैप्पी भईया.. मेरा तो दिल घबरा रहा था। आप को भी थैंक्स ऐमी दीदी..


अपस्यु:- कोई नहीं वैसे भी मैक्स को कुछ नहीं होना था..


सोमेश:- लावणी अपने दोस्त को थोड़ा समझना.. समाज सेवा अच्छी चीज है लेकिन अगर वो अपनी जान बचाकर कि जाए तो। अपस्यु और ऐमी थे तो यहां तक पहुंच भी गए, वरना प्रोसेस से आते तो महीनों लग जाते तब तक तो कहानी हिट हो जाती।


अपस्यु उसे घूरते हुए… "वोटर बना रहे हो क्या? हमारा नस्ता आया कि नहीं।"


सोमेश:- आ रहा है.. 20 मिनट का डिलीवरी टाइम है, आ जाएगा..


ऐमी:- ठीक है जबतक पिज़्ज़ा आता है तबतक उन बेवकूफों से मिलवा दो जो मोबाइल समेत लोगों को उठा रहे है।


सोमेश ने बाहर स्टाफ से 2 लड़के को बुलाने के लिए कहा.. दोनो सामने खड़े थे। ऐमी दोनो को अपने करीब बुलाई और खींचकर दोनो को 2 तमाचा मारती हुई… "अंकल पुराने लोग है तो ऐसे बेवकूफों को लीड करने क्यों भेजते हो।"..


सोमेश:- यही दोनो तो वो नायाब हीरे हैं, जिन्होने वीडियो का इंफॉर्मेशन दिया था।


अपस्यु:- और इसके इंफॉर्मेशन का सोर्स क्या है वो तो नहीं पूछे होगे। मोबाइल या लेपी से कैसे वीडियो निकलकर बाहर गई, उसकी कोई जांच पड़ताल की या नहीं।


सोमेश:- वह तो पहली प्राथमिकता थी। वो लड़का मैक्स ने जब मेरी कॉलर पकड़ी थी ना, उसी समय मेरे हाथ से मोबाइल गिरा था। यही दोनो ने तो ध्यान लगाया, तब पता चला था मोबाइल कहां गिरा था। जब तक दोनो पहुंचते तब तक उसने लॉक तुड़वाकर कांड कर लिया था।


अपस्यु:- ओह बंदा इंटेलिजेंट है बस थोड़ा अनुभव की कमी है। दोनो को इनाम दे देना और अच्छे से अनुभवी लोगो के पीछे रखो इनको, ताकि काम कि बारीकी को सीखे।


इतने में पिज़्ज़ा भी आ गया, तीनों ही वहां बैठकर पिज़्ज़ा का लुफ्त उठाने के बाद वहां से निकलने लगे.. तभी छन, छन, छन.. मधुर सी पायल की आवाज के साथ, भारतीय परिधान को बड़ी ही खूबसूरती के साथ पहने हुए एक कन्या अंदर आयी। उसे देखकर तो अपस्यु ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया… "नेता जी ये इतनी खूबसूरत लड़की कौन है।"


"लसिता बेटा यहां आओ देखो कुछ मेहमान आए है।"… अपनी बेटी को बुलाने के बाद कहने लगा… "मेरी बेटी शुरू से यूके में रहकर पढ़ी है। वो इंटेलिजेंट है स्मार्ट है और साथ ही साथ पूर्णतः भारतीय संस्कृति को मानने वाली"..


लासिता उनके बीच आकर सबको नमस्ते की और काम का नाम बताकर वहां से जाने लगी। इसी बीच अपस्यु… "तुम अगर यहां आकर बैठती हो तो "वी डांट माइंड" (we don't mind).. लिसा"।


आवाज़ सुनकर ही वो चौंक गई और अपना चेहरा उठाकर अपस्यु को देखने लगी। जिस चेहरे को अपने काम-लीला कि व्यस्ता के कारन तब नहीं देख पाई थी, वो अब देख रही थी।


लसीता घबराकर पानी पीती हुई… "जी मेरा नाम लासीता है। लिसा नहीं।"..


अपस्यु:- जी आप के चेहरा मेरी एक दोस्त जेन से मिलता है।


सोमेश:- अरे ये तो कमाल हो गया, लसिता के भी एक क्लोज फ्रेंड का नाम जेन है।


"ठीक है नेता जी अब हम चलते है। कल वो पेपर लेने किसी को भेज देना।"… सभा समाप्त करके तीनों वहां से निकल आए। लावणी काफी खुश लग रही थी। वो रह-रह कर दोनो को थैंक्स कह रही थी।


लावणी को उसके घर के सामने ड्रॉप कर करने के बाद ऐमी अपस्यु से कहने लगी… "मुक्ता अपार्टमेंट आ जाना 1 घंटे में, मैं इंतजार कर रही हूं।"


अपस्यु हंसते हुए गले लगाते…. "ठीक है, मैं भी पहुंचा उधर"..


अपस्यु नीचे उतर गया और ऐमी वहां से चली गई। अपस्यु आकर सबसे पहले पार्किंग में कार को ही चेक किया। अब भी ऑडी और लंबोर्गिनी गायब थी, बीएमडब्लू और कुंजल की लंबोर्गिनी लगी हुई थी।


अपस्यु ऊपर आया… "कहां चले गए थे, ऐसा भी क्या जरूरी काम था जो सबके साथ नहीं आ पाए।".. कुंजल गुस्सा होते हुई पूछने लगी।


अपस्यु:- सॉरी बाबा। अगली बार से ये गलती नहीं होगी। बाकी सब कहां है।


कुंजल:- दीदी और भाई कहीं बाहर निकले है। मां किचेन में श्रेया के साथ है।


अपस्यु:- गुफरान और प्रदीप कहां है?


कुंजल:- दोनो अपने क्वार्टर में ही है।


अपस्यु:- ठीक है जरा बुला ला दोनो को.. मै जबतक चेंज करके आया।


अपस्यु जब चेंज करके लौटा दोनो हॉल में ही बैठे हुए थे…. "ये बताओ मेरी ऑडी कहां है।"


प्रदीप:- सर वो गराज गई है।


अपस्यु:- 8082 लंबोर्गिनी कहां है?


गुफरान:- वो भी गराज में है।


अपस्यु:- 2 गाड़ी गराज में है, और तुम दोनो हॉस्पिटल में नहीं आश्चर्य है। ड्राइवर के साथ गाड़ी के मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ रहा है। ये तो कमाल हो गया, क्यों ?


गुफरान:- सॉरी सर, वो ऑडी मेरी बेवकूफी के वजह से गराज में है, और लंबर्घिनी मां जी को ड्राइविंग सीखाते वक़्त डैमेज हुई थी।


"क्यों इनकी क्लास ले रहा है.. जाओ तुम दोनों। आज सुबह से ऐमी से नहीं मिले, जो उनका गुस्सा इन दोनों पर उतार रहे।"… नंदनी पीछे से आती हुई कहने लगी।


अपस्यु:- कहने को 4 गाड़ी हो और काम के वक़्त एक भी ना मिले तो दिमाग खराब होता ही है मां। कैसी है डॉक्टर साहिबा.. लंबे समय के बाद मुलाकात हुई है।


श्रेया, अपना हाथ आगे बढ़ाती… "शादी की बधाइयां और हां मै श्रेया हूं और ये नाम मुझे सुनने में काफी प्यारा लगता है। वैसे आंटी यें तो चीटिंग हुई, अपस्यु को खाली समझकर, मै अपने प्यार का प्रस्ताव देने वाली थी। कुछ दिन चोरी छिपे मिलते फिर कुछ सालों बाद शादी की बात करते, आपने तो बीच से पत्ता है काट दिया।"


नंदनी:- हाहाहाहा… वो क्या है ना बेटा घर में पहले से 2 डॉक्टर है, लेकिन कोई सिंगर नहीं थी, इसलिए अपनी बहू के लिए ऐमी को चुन लिया।


श्रेया:- हाहाहाहा.. मतलब अपने परिवार को ही चलता फिरता मल्टी इंडस्ट्री बनाने की सोच रहे है, क्यों? एक ही छत के नीचे इंजिनियर, डॉक्टर, वकील, इकोनॉमिस्ट और हिस्टोरियन। ओह सॉरी साहित्यकार तो छूट ही गए जो अपने प्रवचन से लोगों का मार्गदर्शन करेंगे, और हम जैसे डॉक्टर्स के क्लीनिक को बंद करवा देंगे।


श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..
 
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श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..


अपस्यु:- कैसी हेल्प श्रेया।


श्रेया:- बस 1 दिन के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बन जाओ, मेरे पीछे भूत परा है और उसी से पीछा छुड़ाना है।


अपस्यु:- कौन सा भूत पड़ा है।


श्रेया:- पहले बताओ हेल्प करोगे की नहीं।


अपस्यु:- मै फ्री सर्विस नहीं देता पता है कि नहीं।


श्रेया:- हां ठीक है चाय समोसे की पार्टी दे दूंगी। अब खुश।


अपस्यु:- नाह ! मै एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल पीने वाला हूं, उसी की पार्टी चाहिए।


श्रेया:- एक ड्रिंक कि कॉस्ट क्या पड़ती होगी..


अपस्यु:- हर जगह का अलग अलग है मै जहां पीता हूं वहां शायद 2500 रुपए लेता है।


श्रेया:- और कितनी ड्रिंक में तुम्हारा कोटा पुरा हो जाता है?


अपस्यु:- यही कोई 20 से 25 के बीच..


श्रेया:- पागल हो गए हो। हम जो पीती है वहीं पिलाएंगे.. 400 से 500 का फूल वोदका, और ये फाइनल है। नो बारगेनिंग..


अपस्यु:- ठीक है मंजूर है तुम बताओ कब चलना है।


श्रेया:- जल्द ही जब तुम्हे फ्री टाइम मिल जाए।


अपस्यु:- ठीक है, २-३ दिन थोड़ा व्यस्त हूं कल मै कॉल करके बता दूं तो चलेगा क्या?


श्रेया:- हां बिल्कुल.. और थैंक्स ए लौट .. ये एहसान रहा।


अपस्यु:- काम होने के बाद थैंक्स कहना। गुड नाईट..


श्रेया अपने कमरे चली गई और अपस्यु अंदर आ गया… "क्या कह रही थी वो".. नंदनी जिज्ञासावश पूछने लगी..


अपस्यु;- कोई लड़का उसे परेशान कर रहा है उसी के बारे में हेल्प मांग रही थी।


कुंजल:- अपनी परेशानी काम है क्या, जो दूसरे के फटे में जाओगे। मना कर दो, उसके भी तो भाई है, दोस्त है और भी कई सारे लोग हैं।


अपस्यु:- जी दीदी जी, और कोई आदेश..


कुंजल:- भाई देखो मेरी बात की मज़ाक में मत लो, जो कही वो सुनो।


नंदनी:- जाने दे, अब देखी तो मै भी थी, बेचारी की नानी मरी थी तब तो अकेली ही सब कर रही थी, अब नहीं होगा कोई उस लायक इसलिए जिसे लायक समझी उसे कह दी।


कुंजल:- हुंह ! पुलिस और प्रशासन क्यों है फिर…


अपस्यु:- कुंजल तेरा भाई समझदार है, अब तू चिंता मतकर और ये बता की तुम और स्वास्तिका कब निकल रहे हो मुंबई?।


कुंजल:- हम दोनों कल जा रहे है।


"कहां जाने की बात हो रही है।"…. पीछे से आरव आते हुए पूछने लगा।…


स्वास्तिका:- डफर वो हमारे जाने के बारे में पूछ रहा होगा.. क्यों अपस्यु..


अपस्यु:- तू एक बात बता आरव, गुप्ता ब्रदर्स वाला काम कब तक अटका कर रखेगा, जब काम नहीं करना था तो काम क्यों लिया।


आरव:- यार वो एंगेजमेंट और बाकी सब कामों में फसा रह गया, ध्यान ही नहीं दे पाया।

अपस्यु:- हम्मम ! कल ही गोवा जाओ और उनका काम खत्म करो।


आरव:- हम्मम ! ठीक है मै काम खत्म कर आता हूं।


अपस्यु:- एक काम कर, लावणी को भी ले जाना, तुमलोग भी थोड़ा घूम फिर लोगे….


आरव:- अब उसके लिए तो लंबा प्रोसीजर लगेगा। इसकी परमिशन उसकी परमिशन..


अपस्यु:- गर्लफ्रेंड् को घुमाने नहीं ले जा रहा है। अपनी होने वाली बीवी को घुमाने ले जा रहा है, और अगर किसी को ऐतराज होता है तो कल ही कोर्ट मैरिज करवा दूं क्या?


नंदनी:- मेरे दोनो बेटे कमाल के है। इस आरव को अपनी होने वाली के साथ घूमने जाना है और काम का बहाना ये दूसरा वाला बना रहा है। कमाल है.. और मै तो यहां बेवकूफ बैठी हूं जो कुछ समझ भी ना पाऊं। क्यों ?


अपस्यु:- ठीक है आरव गुप्ता ब्रूदर्स की फाइल मुझे देदे मै ही ये काम कर लूंगा, खुश मां..


नंदनी:- हां खुश..


अपस्यु:- अच्छा मां कल आप भी इन दोनों के साथ मुंबई चली जाना, वहां दीपेश से भी मिल लेना और 10 दिनों में सबको लेकर चली आना। स्वास्तिका का काम हो गया है। उसे बस वहां अब अपना एग्जाम देना है।


नंदनी:- क्या सच में ?


अपस्यु:- हां बाबा सच.. आरव तू वो फाइल ले आ, मै मुक्ता अपार्टमेंट जा रहा हूं बचे लोगों के काम के साथ इसे भी पुरा कर लूंगा।


कुछ ही देर में आरव वो फाइल लेकर चला आया.. नंदनी ने क्रॉस चेक के लिए वो फाइल सच में देखी और देखने के बाद…. "तू सच जह रहा था क्या?"


अपस्यु:- छोड़ो ना मां, अब मैंने काम अपने जिम्मे के लिए है ना.. वैसे भी जिसके साथ शादी होनी है, उसके साथ 4-5 दिन घूमने नहीं जा सकते, इससे अच्छा तो गर्लफ्रंड ही बनाए रखते। लड़की उधर से झूट बोलकर निकलती और लड़का उधर से। बेसिकली गार्डियन को झूट ही ज्यादा पसंद आता है।


नंदनी:- इधर आ तू..


अपस्यु:- नहीं आना मुझे..


नंदनी:- तू इधर आता है या मै वहां आऊं..


अपस्यु अपने दोनो गाल पर हाथ रखे नंदनी के पास आया.. "गाल से हाथ हटा और थोड़ा झुक जाओ।"… "सॉरी वो भावनाओ में निकल गया।"… "हाथ हटाओ अभी।"… अपस्यु हाथ हटाकर थोड़ा नीचे झुका और नंदनी खींचकर उसे 2 तमाचा मारती हुई… "जाकर बैठ जा, और ज्यादा ज्ञान मत दिया कर की गार्डियन को क्या करना चाहिए या क्या नहीं। ठीक है आरव, तू ये गुप्ता ब्रिदर्स के फाइल को निपटा बेटा और लावणी को भी साथ लिए जाना।"


अपस्यु सबसे बात करने के बाद खाना खाकर मुक्ता अपार्टमेंट निकला। हॉल में चेयर पर बैठकर ऐमी कुछ फाइल चेक कर रही थी। अपस्यु पीछे से उसे गले से लगाया, उसके गर्दन पर किस्स किया और सामने के पन्नों को देखकर कहने लगा… "इसका समय नजदीक आ रहा है। फाइल डंप कर दो"


ऐमी अपने हाथ ऊपर ले जाकर अपस्यु के गालों को सहलाती हुई… "हां सही कह रहे इस विक्रम में दम नहीं है। लेकिन आज कल संयोग भी कम नहीं। तुम्हे याद है वो डोनेशन वाली लड़की कुसुम।"..


अपस्यु, फिर से उसके गर्दन को चूमते हुए अपने हाथ उसके पेट पर ले जाते… "हां याद है ना कुसुम, परसो ही तो बाजार में मिली थी।"..


ऐमी अपस्यु में बढ़ते हाथों को दबोच कर पकड़ती… "वो तुम्हारी दूर कि कजिन हुई और विक्रम राठौड़ की छोटी बेटी।"..


अपस्यु, आश्चर्य होकर सामने लगे बड़े से राउंड टेबल पर बैठकर फैमिली डिटेल देखने लगा… "अरे यार ये भगवान को भी दुश्मनी है क्या.. ये जिंदल के यहां ध्रुव और अब ये विक्रम के यहां कुसुम। हर परिवार में ऐसे लोग है जिसके कारन हमे सोचना पड़ता है।"


ऐमी:- कमाल है अपस्यु ये सोचते-सोचते तुम्हारे पाऊं कहां चला आया?


अपस्यु, राउंड टेबल से उतर कर सीधा चेयर पर। अपने दोनो पाऊं फैलाकर ऐमी के उपर बैठकर उसके गर्दन पर चूमते… "लो पाऊं से परेशानी थी ना, अब तो कोई समस्या नहीं है ना।"


ऐमी अपस्यु को धक्के देकर टेबल से गिराती हुई… "5 दिन बोली वो नहीं तुमसे बर्दाश्त हो रहा। क्या करूं मै तुम्हारा कुछ समझ में नहीं आ रहा।"


अपस्यु:- एक किस्स तो कर लेने दो कम से कम..


ऐमी:- नाह ! अच्छी किस्स के बाद क्या होता है वो हम दोनों को पता है। इसलिए नो। अब आराम से बैठो क्योंकि पुरा रायता फैला है और कुछ समझ में नहीं आ रहा।


अपस्यु, ऐमी के पीछे जाते उसके गर्दन के नीचे चूमते हुए धीरे-धीरे कंधों से नीचे अपने हाथ के जाते… "रायता मै समेट लूंगा, अभी तुम मेरे अरमान समेटो।


बेल बजी और नजर सीसी टीवी पर गई तो बाहर आरव खड़ा था.. "हीहीहीही.. मज़ा आ गया".. ऐमी खिलखिलाकर हंसती हुई भागी और दरवाजा खोल दी। जैसे ही आरव अंदर आया ऐमी उसके गले लगती हुई कहने लगी.. "थैंक गॉड आ गए, वरना परेशान कर रखा था इसने।"..


आरव, दोनो को घूरते हुए… "तुम दोनो मुझे बस एक बात समझाओ अपने अपार्टमेंट में कुछ गड़बड़ी चल रही है क्या?"


तीनों ही आकर बैठे… "तुझे क्या लगा पहले वो बताओ"..


आरव:- नहीं, पहले तुम मेरे सवाल का जवाब दो, क्योंकि मुझे उस श्रेया एंड कंपनी पर शक तो पहले से था, लेकिन इतनी सारी रैंडम घटना एक साथ नहीं हो सकता।


अपस्यु:- कुछ घटना बताओ..


आरव:- "पहला तो ये की जिस दिन मै आया पूरी कॉलोनी का हमारे यहां आकर झगड़ा की, जबकि कुछ लोगो को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो दरअसल है कुछ और, और दिखा कुछ और रहे है। उसके अलावा आज अपस्यु ने कहा ना कार के बारे में, तब बातें दिमाग में और भी स्ट्राइक कर गई, मां का कार ऐक्सिडेंट बैंक टू बैंक।"

"फिर ये गुफरान और प्रदीप को देख लो.. कुंजल भी कह रही थी ये बात… "दोनो का व्यव्हार ड्राइवर जैसा नहीं है, बल्कि किसी ऑफिस का हाई क्लास ऑफिसर जैसा ऐटिट्यूड है। उसकी वो गर्लफ्रेंड देखो, जेन और लिसा। एक दिन में उनसे पट भी गई और पड़ोस में जो उसका बॉयफ्रेंड रहता है श्रेया का भाई, उसे कोई फर्क ही नहीं परा।"

"और सबसे ज्यादा गुस्सा तो तुम दोनो पर आ रहा है, ऐसा हो नहीं सकता कि तुम दोनो के पास उसकी डिटेल ना हो। बजाय इसके कि साथ बैठकर डिस्कस करो तो कितनी चालाकी से हम सबको दूर भेज दिया। तुम दोनो के दिमाग में पहले चल क्या रहा है वो बताओ। और हां मुझे सच जानना है।"


अपस्यु, ऐमी की आंखों में झाकने लगा। ऐमी उसका हाथ थामती अपने पलकें झुकाकर सहमति दी… "जिंदल और विक्रम सेकंड लास्ट टारगेट है।"


आरव ये सुनकर जैसे झटका खाया हो। आरव ने जाकर विष्की की बॉटल निकाली और जैसे ही बॉटल में मुंह लगाने लगा, अपस्यु बॉटल हाथ से पकड़कर उसके मुंह से अलग किया… "तू पागल है, ये बियर, वाइन या शैम्पेन नहीं है.. विष्की है, आराम से पेग बनाकर ले"


आरव गुस्से में उससे सीधा एक पंच दे दिया… "पागल मारने से पहले बता तो देता, ऐसे कौन मारता है यार।".. अपस्यु अपना नाक पकड़ते बोला।


"हां तो ठीक है बच, मै एक बार और मार रहा हूं"…. कहते हुए अपस्यु को एक लात जमा दिया और अपस्यु झटका खाकर पीछे हटा। इन दोनों के झगड़े के बीच ऐमी कब वो विश्की की बॉटल उड़ाई किसी को पता भी नहीं चला। वो आराम से तीनों के लिए पेग बनाई और अपना पेग उठाकर कहने लगी… "मार आरव मार.. तू बिना रहम किए मार. अपस्यु माय लव .. बेबी मार मत खाना बस बचते रहो।"…


दोनो अपना ध्यान ऐमी पर जमाते… "बेवरी कहीं की हमे उलझकर पीने भी लगी।"


ऐमी:- दारू जब बाहर आ जाए तो इंतजार नहीं करवाना चाहिए, वरना दारू बुरा मान जाती है।

ऐमी की बात सुनकर दोनो भाई हंसते हुए फिर से बैठ गए और टोस्ट करते हुए अपना-अपना जाम खींचने लगे…. "दिल तोड़ा है तुम दोनो ने। मतलब मुझे साइड करके तुम दोनो अलग ही प्लांनिंग में थे।"


ऐमी:- तुझे बताने के बाद भी तुझे साथ नहीं लेंगे, ये तो तय है। हां जानने का हक है और हम बताते भी। फर्क यही बस तुझे वक़्त से पहले बताना पड़ रहा है वो भी उस कामिनी श्रेया की वजह से।


आरव:- तुम दोनो पागल हो गए हो क्या। जानते हो ना 1 से भले 2 और 2 से भले 3।


अपस्यु:- आरव…. मां है, 120 बच्चे है, कुंजल है, स्वास्तिका है, लावणी है। हम तो सोच चुके है, तुझे सोचना है।


आरव:- यहां हर कोई अपनी किस्मत जीता है और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत लिखता है। हर किसी को एक ना एक दिन मारना है। इसके साथ यह भी सत्य है कि सब एक साथ मर जाए ये भी संभव नहीं। जो बचते है वो अपनो की अच्छी-बुरी यादों के साथ आगे बढ़ते है।


ऐमी, अपस्यु के ओर देखने लगी.. आरव भी अपस्यु के ओर देखने लगा.. दोनो को अपने ओर देखते हुए…. "क्या? मुझे ऐसे क्यों घुर रहे हो दोनो।"


ऐमी:- आरव साथ है..


अपस्यु:- हां ठीक है अब तीन लोगों के बीच क्या वोटिंग कर रहे हो।


आरव:- कमिने हो दोनो.. कितनी दूर से खेल जाते हो अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल होता है। पहले तो मुझे लगा था कि तुम दोनो पार्थ और स्वास्तिका को लेकर परेशान होगे और विक्रम का केस को भी हैंडल कर रहे होगे, मै तो यही सोचकर आया था.. लेकिन आज अगर मै नहीं आता यहां तो तुम दोनो सबकुछ प्लान करके निकल लेते और मुझे पता तक नहीं चलता।


अपस्यु:- वैसे ये सब मामला नहीं भी होता तो भी मै तुझे लावणी के साथ भेजता ही। आज दिन में मेरे कान में कह रही थी, हमारी शादी करवा दो जल्दी भईया।


आरव:- क्या बात कर रहा है। वैसे अरमान मेरे भी कुछ ऐसे ही थे। क्या है कुछ वक़्त उसे भी दे दूं.. कभी वक़्त ही नहीं दे पता। फिर ये भी रहता है कि दोनो परिवार इतने नजदीक है कि कुछ छिपता ही नहीं।


ऐमी:- कोई नहीं आराम से 10 दिन घूम आओ जबतक यहां सब क्लियर करते है। तुम लोग जबतक लौटोगे उससे पहले हम राठौड़ मेंशन में घुसने का प्लान कर चुके होंगे। लेकिन फिलहाल हमारे हर काम के बीच में ये श्रेया और उसकी टीम आ रही है। वो हमारे इतने अंदर तक घुस चुकी है कि दूर बैठकर वो लावणी के बेस्ट फ्रेंड को हमारे ही एक क्लोज कॉन्टैक्ट के हाथों उलझा दी।


"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"
 
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Naina

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Hahaha .. KK mila tha .. he is busy in university .. aur haan bechara ka break up ho gaya isliye usne break up wale update diye the.. waise aap ko mujhe kam se kam thanks kah dena chahiye .. kyonki maine aisa nahi kiya:D

Waiting for your thanks wala comment aur sath me kisi ko na mara aur na hi juda kiya uske liye 60 words explain bhi :D
us nalli imli aur nibbe apsyu baade mein padhu bhi aur revo bhi du. nebha
Par haan ab bhi waqt hai...... Bas sinha aur nandini ki shaadi karva dijiye.. aji dekhiye 150 plus k revos woh bhi bhar bhar ke is story pe :D baki ju ki marji.. :dazed:
 

Naina

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Naina isme angry emoji chipkane jaisa kya tha .. maine kya galat likha.. :?:
Kyunki aapne nandini aur Sinha ko ek hone se rok rahe hai... ho jane dijiye dono ki shaadi... kahe bis mein aa rahe hai aap :D
dua denge ju ko dono :D
 

nain11ster

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us nalli imli aur nibbe apsyu baade mein padhu bhi aur revo bhi du. nebha
Par haan ab bhi waqt hai...... Bas sinha aur nandini ki shaadi karva dijiye.. aji dekhiye 150 plus k revos woh bhi bhar bhar ke is story pe :D baki ju ki marji.. :dazed:

Last wala line hai na .. ju ki marji .. to fir wahi hoga .. :D .. baki 150 comment main aapke to jhel hi lene hai.. mere ek counter par fir aap bachon ki tarah na ruth jaye wahi dar kaga rahta hai :D isliye rahne dijiye .. koi ruthe acha na lagta :D
 
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Update:-62



जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।

अचानक से साची थोड़ी गंभीर होती हुई कुंजल से कहने लगी…. "थैंक्स यार, आज बहुत दिन के बाद लग रहा है जी रही हूं।"..

कुंजल:- चलो सुनकर मुझे सुकून मिला। वैसे आज ध्रुव के साथ गई थी, वहां क्या हुआ।

साची:- अच्छा है यार वो भी। मै सोच रही हूं कि कुछ दिन उसके साथ देखते है वक़्त कैसा बीतता हैं।

कुंजल:- मतलब तू हां कहने वाली है…

साची:- येस.. जैसे वो मुझसे बातें करता है, और मेरे लिए उसके फीलिंग है। मुझे लगता है वो एक मौका तो डिजर्व करता है। और हां तुम्हे अब मेरे साथ जबरदस्ती बात करना नहीं पड़ेगा।

कुंजल:- चढ़ गई है क्या तुम्हे… ये क्या बकवास कर रही हो।

साची:- सच ही कह रही हूं कुंजल। एक बार मैंने भी यही गलती कि थी, मेरे एक करीबी के साथ। तब उसके साथ मेरे इतने अच्छे रिलेशन नहीं थे और मै अचानक उसके साथ बैठकर मीठी-मीठी बातें करने लगी। वो समझ गया मुझे उससे कुछ काम निकलवाना है।

कुंजल:- हां तो फिर उसने किया की नहीं तुम्हारा काम।

साची:- उल्लू, ये मैंने उदहारण मारा था बस.. और तू है कि वहीं पहुंच गई।

कुंजल:- अच्छा सॉरी, हां तो आगे बता..

साची:- हुंह ! सब जान कर भी बात घुमा रही है। तुम अचानक क्यों मुझपर इतना मेहरबान हो गई उसका कारण अपस्यु है ना।

कुंजल:- येप । मुझे लगा मेरे भाई के वजह से तुमने हंसना छोड़ दिया, जीना छोड़ दिया। इसलिए एक छोटी सी भरपाई कह लो या तुम्हारी हंसी वापस लौटने की कोशिश।

साची:- ओय अब वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं रहा, इसलिए अब इस सोच के साथ मुझसे मत बात करना… और हां अगर वो मेरा दोस्त बनाना चाहे तो मुझे कोई ऐतराज नहीं।

कुंजल:- ठीक है मै उसको बोल दूंगी..

साची:- ना तू मत कहना, मै खुद उसे मिलकर बोल दूंगी।

बस इतने से गंभीर माहौल के बाद दोनों फिर से अपने बातों में रम गए और बात करते-करते सो गए… सुबह तीनों की देर से नींद खुली। इधर आरव सुबह से उस कमरे के कई चक्कर लगा चुका था, लेकिन लावणी अब तक सोकर नहीं उठी थी।

आरव के लिए ये पूरा दिन लगभग ऐसे ही गया। मिश्रा परिवार में खुशियों का माहौल चल रहा था क्योंकि आज साची ने हां कह दी था और आगे कि सारी बात तय करने शाम को प्रकाश जिंदल खुद आ रहे थे।

5 बजे की बात है जब ये कांड हो रहा था। लावणी बैंक्वेट के ओर जा रही थी तभी उसका हाथ पकड़कर आरव ने किनारे खींच लिया और उसके कमर में हाथ डालकर उसकी नज़रों से नजरें मिलाकर देख रहा था, तभी उसे सुलेखा और राजीव ने पकड़ लिया।

दोनों को वहां देख लावणी घबराहट से बिल्कुल सहम गई। आरव उसका हाथ थामा, मानो कह रहा हो की डरो मत कोई गलती नहीं की है। लावणी की आखों में देखकर वो उसे जाने के लिए बोल दिया। इधर राजीव पूरे आवेश में था, किन्तु सुलेखा भी उसे रोकते हुए कहने लगी "अभी नहीं, लोग आने वाले हैं"….

आरव उनकी ओर कुछ बोलने के लिए बढ़ा लेकिन कुछ बोलने से पहले ही राजीव मिश्रा बोलने लगे… "तुझे मै बाद में देखता हूं… एक बार इन लोगों को चले जाने दे"।

आरव समझ गया अब तो पक्का एक्शन होने वाला हैं। वो अपने कमरे में आया, वीरभद्र और कुंजल बैठ कर बातें कर रहे थे और आरव दोनों के बीच बैठकर कहने लगा… "तैयार हो जाओ, अब यहां एक्शन होने वाला है।"

वीरभद्र:- अरे इसके लिए तो कितने दिनों से इंतजार कर रहा था। कब और कहां होना है एक्शन।

आरव अपने दोनो हाथ जोड़ते:- बस वीरे बस… हर वक़्त मारपीट के लिए तैयार रहता है। समझ भी लिया कर बात को कभी।

कुंजल:- ठीक से समझाओगे तब ना समझे, क्यों वीरे जी..

आरव:- वेरी फनी… हमे सुलेखा और राजीव मिश्रा ने पकड़ लिया…

कुंजल बिस्तर पर खड़े होकर नाचने लगी… उस नाचते देख वीरभद्र पूछने लगा… "कुंजल जी, आप ये नाच क्यों रही है।"….. "आओ वीरे जी, अब तो हमारे घर में शहनाई बजने वाली है, अपने आरव की शादी तय होने वाली है।"… फिर क्या था वीरभद्र भी कुंजल के साथ एक दो ठुमके लगाते हुए कहने लगा…. "कुंजल जी शादी के लिए अभी ये बच्चा नहीं लग रहा।"

लगातार आरव के साथ दोनों छेड़-छाड़ कर रहे थे, इतने में नीरज वहां पहुंचा और दोनों भाई-बहन को अपने साथ चलने के लिए कहा। दोनों जब वहां पहुंचे पूरा मिश्रा परिवार आरव को ऐसे घूर रहा था मानो अभी खा जाएंगे। वहीं लावणी साची के पास बैठी रो रही थी।

आरव के लिए ये पहला अवसर था, जब वो लावणी को रोते हुए देख रहा था। आरव, लावणी के करीब तो जाना चाहता था लेकिन कुंजल उसका हाथ थामे उसे रोक रही थी…

तभी आरव के ओर कबीर तेजी से बढ़ा और उसके पेट ओर एक लात मारते हुए कुंजल को देखा और कहने लगा… "साला 2 कौड़ी के इंसान, सड़कछाप, हमारे घर की लड़की पर बुरी नजर डालता है।"….

कबीर का ऐसा करना था और इधर लावणी "नहीं" करती दौड़ गई अपने चचेरे भाई को रोकने। इसपर नीरज अपनी बहन को खींचकर वहां से हटाते हुए उसे थप्पड मारा और लाकर साची के पास बिठा दिया। आरव ये मंजर देखकर गुस्से में फुफकारने लगा.. उसकी नजरें कुंजल से मिली जो बिल्कुल सुलेखा के पास खड़ी थी। कुंजल हाथ जोड़ती उसे कुछ ना करने का इशारा करने लगी…

कबीर जैसे कुंजल का खुन्नस आरव से निकाल रहा हो। कहां मार रहा था, कैसे मार रहा था वो देख तक नहीं रहा था। आरव लगातार मार खाए जा रहा था लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं दे रहा था।

उसे इस तरह मार खाते देख कुंजल के भी आंसू निकलने लगे। साची से भी बर्दास्त कर पाना मुश्किल था। अंत में जब सब बर्दास्त के बाहर हो गया तब साची बोलने लगी…. "बस भी करो आप सब, क्यों पागलों कि तरह उसे मारे जा रहे हो। वो अगर उठकर मारने लगे ना, फिर कोई बर्दास्त भी नहीं कर पाएगा।"..

"चुप एकदम, ज्यादा जुबान मत चलाओ।" कबीर चिल्लाते हुए बोला और गुस्से में वहां परे एक फ्लॉवर पोट उठकर उसे मारने के लिए बढ़ा… आरव अपना कपड़ा झारते हुए उठा और कबीर का हाथ पकड़कर, उसे मरोड़ते हुए कहने लगा…. "अबे घोंचू, मै मार खा रहा इसका मतलब मुझे जान से ही मार देगा क्या? साला गधा, इतना भी नहीं देख पा रहा, इतनी खूबसूरत लड़कियां रो रही है और तू रुकने के बदले और हथियार उठा रहा।".. इतना कहकर आरव उसके गाल पर थप्पड लगाते अपने उंगलियों के छाप उसके गाल पर छोड़ दिया।

मनीष मिश्रा, अपने बेटे को मार खाते देख जोड़ से चिल्लाया…. "मार नीरज इसे, तेरे भाई को मार रहा है।"

"अच्छा तू आएगा मुझे मारने, साले तुझे समझ में नहीं आता कि उस लल्लू से मै अब तक मालिश करवा रहा था… ओ ससुर जी.. हां हां आप से ही बोल रहा हूं राजीव मिश्रा… जब बात खुल गई है तो मै सीधा कहता हूं … तुम्हारी बेटी से मुझे बेइंतहा प्यार है, और उससे शादी भी करूंगा… आगे फैसला तुम्हारा है। हंस के विदा करोगे अपनी बेटी को या गुस्से में"…. इतने में नीरज सामने से चिल्लाता हुआ आया। आरव ने कबीर को छोड़ा, वो अपना हाथ पकड़ कर बैठ गया। नीरज का भी वहीं स्वागत किया आरव ने, उसका भी हाथ मरोड़ा और 2 थप्पड देकर छोड़ दिया और अाकर बैठ गया राजीव और मनीष के बीच….

"देखो सर ना तो मै 2 कौड़ी का इंसान हूं और नाही मै लावणी के साथ कोई टाइम पास कर रहा। अब आप फैमिली ड्रामा करोगे, क्योंकि सिर्फ इस बात के लिए की पहले आप को पता चला कि मै आप की बेटी से प्यार कर रहा हूं। किंतु इसके ठीक विपरीत यदि मेरी मां आती बात करने और आप को हमारे बारे में पता चलता तो मुझे यकीन है कि आप जरूर हां कह देते।"…

मनीष:- लेकिन तुम्हारी मां तो नहीं बात कर रही है ना, यहां बुलाओ फिर उन्हें…

आरव, इससे पहले कि अपना फोन निकालता कुंजल तबतक नंदनी को फोन लगा भी चुकी थी। जब कुंजल ने आरव की शादी तय करनी है ऐसी बात कही नंदनी हल्की-बक्कि रह गई। उसके हिसाब से अभी तो उसका बच्चा 22 साल का ही है और 22 साल में शादी। नंदनी कुंजल को तुरंत फोन रखने बोली और अपना बैग पैक करना शुरू की।

नंदनी के पास केवल एक समस्या थी, वो थी यूएस की टिकिट आज के आज किसी तरह लेना, जो की मिलना थोड़ा मुश्किल हो रहा था और वो अपस्यु को ये सब बताना नहीं चाहती थी। इसी क्रम में उसने पूरा मामला सिन्हा जी को बता दी। अब उसके भी बेटे की शादी तय हो रही थी, भला सिन्हा जी कैसे शरीक ना होते.. उन्होंने भी 3 टिकिट बुक करवाई और उसी दिन उड़ चले यूएस।

23 जून को दोनों पहुंच चुके थे। कमरे में, कुंजल आरव के पास बैठकर बातें कर रही थी, और उसके चोट पर गरम पोटली डालकर सिकाई भी कर रही थी। वीरभद्र वहीं थोड़ी दूरी पर बैठकर टीवी देख रहा था, विन्नी और क्रिश एक दूसरे को अपने हाथ से अंगूर खिला रहे थे। नंदनी ने बेल बजाई और वीरभद्र दरवाजा खोलते हुए नंदनी से पूछने लगा…. "मां जी आप कौन है.. और क्या काम है।"..

नंदनी वीरभद्र को किनारे करती सीधा अंदर घुसी और वहां का माहौल देखी.... "तुम लोग क्या क्लब में हो। अनजान लड़का दरवाजा खोल रहा है। वहां वो दोनों लैला मजनू की तरह अंगूर खिला रहे और ये लड़का पता नहीं पीकर कौन से नाले में गिरा होगा, हर जगह चोट के निशान है। यहां चल क्या रहा है कोई बताएगा।

अब तक जो सब आपस में लगे हुए थे, नंदनी की धमाकेदार एंट्री के बाद सब के सब बिल्कुल ध्यान लगाए नंदनी को ही देख रहे थे। इतने में कुंजल अपने भाई की तरफदारी करती अपने मां के पास पहुंची… और एक थप्पड खाकर वापस अपनी जगह पर पहुंच गई।

आखें गुर्राती हुई नंदनी ने आरव को अपने पास बुलाया। आरव अपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए पहुंचा… "हाथ हटा गाल से और नीचे झुक"… आरव ने ठीक वैसे ही किया जैसे नंदनी ने कहा… 2 थप्पड नंदनी उसे रशीद करती… "पहले ये बताओ कि ये जो दोनों लड़के-लड़की एक दूसरे को अंगूर खिला रहे है, वो कौन है।"

"बहन ही समझो उस लड़की को, विनीता नाम है उसका।"…. "क्या कहा फिर से बोल जरा।"… "वो बहन जैसी है।"… नंदनी चार जोरदार थप्पड गाल पर मारती हुई… "बहन मानता है और कोई लड़का उसे तुम्हारे सामने अंगूर खिला रहा है और तू देख रहा है। मतलब इसके घरवालों ने इसे तुम्हारी जिम्मेदारी पर भेजा था और अच्छी जिम्मेदारी यहां निभाई जा रही है।"…. "सॉरी मां..."… "जोर से बोलो, क्या बोल रहे हो।"

"एक साथ 30-40 थप्पड मार ही लो ना, ये क्या अब हर प्वाइंट पर गिन-गिन कर थप्पड मार रही।".. आरव थोड़ा चिढ़कर बोलने लगा…

"नंदनी जी अब जाने भी दीजिए बच्चे ही तो है, और देखिए आरव ने यदि उसे बहन माना है और उन दोनों के रिश्ते में इसे कोई बुराई नहीं लग रही, मतलब लड़का तो अच्छा ही होगा ना।"…

नंदनी:- अनिरुद्ध जी .. आप अपने ये ओपन खयालात ना ही दे तो अच्छा होगा। प्यार जताने और बेशर्मी दिखाने में फर्क होता है। अब इस से ज्यादा मै नहीं बोल सकती बच्चे है यहां पर। और तू मुंह छिपाए क्यों खड़ा है…

कुंजल:- बस भी करो ना मां अब गुस्सा थूक भी दो।

नंदनी:- नालायक कहीं का, और क्या गुल खिलाया जो ये मिश्रा परिवार से मुझे रिश्ता जोड़ने आना पड़ा है। अभी 22 का है और शादी करने चला है। मुंह तो देखो इसका जरा.. बच्चा ही लगता है अभी तो। 3-4 साल तक रुका नहीं गया तुमसे…

आरव अपनी मां के गले लगकर उसके गालों को चूमते हुए कहने लगा…. "इतना गुस्सा करोगी तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाएगा। आप अभी आराम करो। बहुत दूर से आयी है, थक गई होंगी।"

थोड़ा मस्का, थोड़ा मनाना और नंदनी अपना गुस्सा समेट कर चली गई सफर का थकान मिटाने। नंदनी के जाते ही वैभव दौड़ कर आरव के गोद में कूदकर चढ़ गया और उसके गालों पर अपना हाथ फेरने लगा। बाकी के लोग नंदनी के जाते ही, अलग-अलग रूम में दुबक लिए।
बहुत मुश्किल होता है डायलॉग के द्वारा कहानियों में रीडर के दिल तक पहुंच बनाना........ डायलॉग के द्वारा पाठकों को हंसाना..... पाठकों को रूलाना....... पाठकों के सेंटीमेंट्स तक पहुंचना ।

आपकी कहानी का एक मजबूत पक्ष और भी है ..... आपने छोटी से छोटी घटनाओं को भी सिम्पल वे में पास नहीं किया है बल्कि एक आला दर्जे के लेखक की तरह विस्तार से.... बहुत ही उम्दा तरीके से कलमवद्ध किया है ।

इस कहानी के हर पात्र मेरी जेहन में है.... वो इसलिए कि आपने हर पात्रों पर मेहनत किया है..... अपस्यू , आरव , साची , लावणी , उनके गार्जियन , सिन्हा जी, ऐमी , स्वस्तिका , नंदनी , कुंजल , क्रिस , विन्नी , वीरभद्र......... सभी पर ।

शानदार ढंग से लिखा गया है..." भंवर " ।
 

Naina

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ऐमी:- ठीक है जबतक पिज़्ज़ा आता है तबतक उन बेवकूफों से मिलवा दो जो मोबाइल समेत लोगों को उठा रहे है।


सोमेश ने बाहर स्टाफ से 2 लड़के को बुलाने के लिए कहा.. दोनो सामने खड़े थे। ऐमी दोनो को अपने करीब बुलाई और खींचकर दोनो को 2 तमाचा मारती हुई… "अंकल पुराने लोग है तो ऐसे बेवकूफों को लीड करने क्यों भेजते हो।"..


सोमेश:- यही दोनो तो वो नायाब हीरे हैं, जिन्होने वीडियो का इंफॉर्मेशन दिया था।


अपस्यु:- और इसके इंफॉर्मेशन का सोर्स क्या है वो तो नहीं पूछे होगे। मोबाइल या लेपी से कैसे वीडियो निकलकर बाहर गई, उसकी कोई जांच पड़ताल की या नहीं।


सोमेश:- वह तो पहली प्राथमिकता थी। वो लड़का मैक्स ने जब मेरी कॉलर पकड़ी थी ना, उसी समय मेरे हाथ से मोबाइल गिरा था। यही दोनो ने तो ध्यान लगाया, तब पता चला था मोबाइल कहां गिरा था। जब तक दोनो पहुंचते तब तक उसने लॉक तुड़वाकर कांड कर लिया था।


अपस्यु:- ओह बंदा इंटेलिजेंट है बस थोड़ा अनुभव की कमी है। दोनो को इनाम दे देना और अच्छे से अनुभवी लोगो के पीछे रखो इनको, ताकि काम कि बारीकी को सीखे।
So dono criminals bhi hai....
I thought ki chalo yaar kuch toh achha kar rahe hai dono par nahi apni hi padi sabki... baaki sab jaaye bhaad mein...
So woh Larissa lalisha lisa whatever.. uski chori pakdi gayi... agar yahin kand mesk wajaye aarav ke sath hota toh.... tab toh uddham macha dete shayad..
सॉरी सर, वो ऑडी मेरी बेवकूफी के वजह से गराज में है, और लंबर्घिनी मां जी को ड्राइविंग सीखाते वक़्त डैमेज हुई थी।
alle alle budhiya ko Lamborghini mein car driving sikhni hai... badi josh hai budhiya mein aaj bhi... :lollypop:
"क्यों इनकी क्लास ले रहा है.. जाओ तुम दोनों। आज सुबह से ऐमी से नहीं मिले, जो उनका गुस्सा इन दोनों पर उतार रहे।"… नंदनी पीछे से आती हुई कहने लगी।
नंदनी:- हाहाहाहा… वो क्या है ना बेटा घर में पहले से 2 डॉक्टर है, लेकिन कोई सिंगर नहीं थी, इसलिए अपनी बहू के लिए ऐमी को चुन लिया।
lo excited budhiya bich mein kudi apsyu ka muh bandh karne :D
aur yeh do doctors kaha se aa gaye us ghar mein.. kya fenkti hai budhiya :bat:
श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"
are kam se kam ek ko toh baks de nibbe hawsi kahi ke :lollypop:
Khair
Kahani kaafi dilachasp mod pe hai.. kayi logo ki nazar toh ush 2k crores ki project par hi hai..
Let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nainu ji :applause: :applause:
 
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