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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

Prime
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Update:-19



दोनों बाहें फैलाए उसने अपनी आंखें मूंद ली और आशुओं की एक धारा चेहरे पर एक रेखा बनाती, धीरे-धीरे टपकने लगी। शायद जो इस वक़्त आरव मेहसूस कर रहा था वहीं अपस्यु भी। वो भी अपने बिस्तर पर लेटा-लेटा अपनी आखें मुंदे बस आशुओं की एक धारा बहा रहा था।

थोड़ी देर बाद वीरभद्र अपनी गिनती पूरी कर आया और साथ में 2 लोग बेचारे तड़प रहे थे, उनकी तड़प को भी शांत कर आया। जब वो वापस लौटा तब आरव को इस हाल में देखकर, वो जोड़-जोड़ से चिल्लाने लगा…. "गुरुदेव अभी तो हम मिले थे, इतनी जल्दी निकल लिए"…

वीरभद्र का चिल्लाना सुनकर आरव खुद को ठीक करता हुआ उठ खड़ा हुआ, उधर अपस्यु ने जब चिल्लाना सुना तो वो भी चिंतित होकर आरव-आरव करने लगा।

आरव:- कुछ नहीं हुआ ठीक हूं मैं।

अपस्यु:- फिर वो चिल्लाया क्यों?

आरव:- अरे कुछ नहीं बस कुछ याद आ गया था.. जैसे तुझे आया होगा।

अपस्यु:- हम्मम !! वो तो ठीक है लेकिन इतना बड़ा रायता जो फैला दिए हो उसका क्या?

अराव:- बेकार की चिंता कर रहा है। अब तू सो जा और सुबह उठ कर न्यूज देख लेना। मैं यहां अब सब पैक कर रहा हूं। कल मिलते हैं भाई।

अपस्यु:- जल्दी अा जा… तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा।

आरव ने कॉल काटा और वहां से सब समेटना शुरू किया। वीरभद्र भी उसके इस काम में मदद करने लगा। सब कुछ समेट कर आरव जबतक पैक कर रहा था, वीरभद्र ने पैसों से भड़ा बैग उसके पास पटकते हुए…. "आरव, सारे पैसे यहीं रह गए। डॉलर, रुपया, सब…. और इस पैसे के लिए ये सब लड़-भीड़ कर मर गए… हा हाहाहा"

आरव:- पैसा यहीं छोड़ दे वीरे। ये "ब्लड मनी" है। यह पैसा हमेशा अपने पीछे एक जहरीली खुशबू छोड़ता है। हम इसे यहां से ले गए ना तो इसकी जहरीली खुशबू सूंघते ना जाने कितने हमारे पीछे अा जाए।

वीरभद्र:- क्या मतलब पैसा यहीं छोड़ दे? अरे इतना सरा रुपया है। कोई पागल ही इसे छोड़ सकता है।

आरव:- तू वहां से किसी लाश का फोन उठा कर दे मुझे। तुझे अभी समझ नहीं आएगा कि इन पैसों को क्यों नहीं ले जा सकते।

वीरभद्र के तो आंखों में जैसे रुपया ही छप गया हो। इतना सरा रुपया देख कर तो वो होश में ही नहीं था। हां मन डोल तो उसका पूरा रहा था लेकिन इंसान बेईमान नहीं था। आरव ने जैसा कहा उसने फोन लाकर दे दिया, और एक बैग जिसमे केवल डिवाइस थी और कपड़े, वो लेकर उस खंडहर के बाहर अा गया।

आरव ने उदयपुर एसपी के लैंडलाइन पर कॉल लगाया, थोड़ा इंतजार और थोड़े बहाने के बाद एसपी फोन लाइन पर अा गए थे। आरव ने ज्यादा बात को ना घुमाते हुए सीधा कह दिया… "राज्य के शिक्षा मंत्री यहां फसे है और गैंगस्टर अंधाधुन गोलीबारी कर रहे है" ... इतना सुनते ही एसपी साहब के होश उड़ गए।

एसपी :- कौन हो तुम और कहां से बोल रहे हो?

आरव:- मैं पूरी जानकारी तभी दूंगा जब कॉन्फ्रेंस में सिटी पुलिस कमिश्नर भी होंगे।

इतना बड़ा बॉम्ब फटा था, सिटी कमिश्नर को तुरंत लाइन पर लेते हुए एसपी पूछने लगे…. "सर है लाइन पर, अब पूरी बात बताओ"

आरव:- एक ही बात बार-बार कहनी पड़ेगी क्या, सुन नहीं रहे कितनी भीषण गोलीबारी हो रही है। लोगों के मरने और चिंखने की आवाजें नहीं सुनाई दे रही क्या?

एसपी:- सर हमे वहीं चलना चाहिए।

कमिश्नर:- ठीक है, सभी को अलर्ट करो और पूरी फोर्स को पहुंचने बोलो। सुनो तुम जो कोई भी हो, हमे वहां का पता बताओ और वहीं रुकना।

आरव:- मैं बस पता बता कर निकल रहा हूं। मुझे नहीं मारना इस गोलीबारी में।

आरव ने पता बताया और दोनों, वीरभद्र और आरव वहां से निकल गए। कुछ दूर आगे चलकर दोनों ने अपने कपड़े बदले और पहने हुए कपड़े को वहीं जलाकर जॉगिंग करते हुए निकाल गए।

रास्ते में ही सामने से एसपी साहब की जीप आ रही थी, जो बिना रुके सीधे स्पॉट की ओर निकल गई। एसपी, कमिश्नर से… "लगता है कॉलर यही दोनों थे"… कमिश्नर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया…. "इतना चालक कॉलर मैंने आज तक नहीं देखा। जल्दी चलो वरना हम से पहले कहीं फोर्स ना पहुंच जाए"।

कमिश्नर और एसपी तुरंत मौके पर पहुंचे। वहां का नजारा देखकर दोनों को बहुत ज्यादा अचरज नहीं हुआ बस उनकी नजरें अपने काम की चीज ढूंढ़ने में लगी हुई थी। उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि सरा पैसा सामने ही परा था।

एसपी:- जितना बड़ा कांड उतनी ही बड़ी क़ीमत।

कमिश्नर:- कुछ पैसे यहीं छोड़ कर बाकी सरा पैसा जल्दी से जीप में छिपाओ।

एसपी, पैसे को जीप में रखने के बाद वापस आकर… "क्या लगता है ये कॉलर कोई अतंकवादी था"

कमिश्नर:- आईपीएस किसने बनाया तुम्हे। ये कोई निजी मामला लगता है। बहुत ही चालाकी से या तो सबको लड़ाया है या पैसे के चक्कर में सबको यहां बुला कर साफ़ कर दिया। उधर देखो वो स्मोक बॉम्ब, आया कुछ समझ में।

एसपी:- पैसे तो मिल ही गए हैं, और वो लड़का अतंकवादी भी नहीं तो ज्यादा सोचना क्या है क्लोज करते हैं सर केस। आप जाइए यहां का पंचनामा करने में शायद काफी वक़्त लग जाए।

कमिश्नर भूषण को एक लात मारकर:- हां कौन सा साला ये समाजसेवक था जो इसके लिए भागदौड़ करे। जगह ऐसा हो जाना चाहिए कि एनएसए, सीबीआई या फिर रॉ अा जाए, सब को बस अपनी ही कहानी के सबूत मिले। लग जाओ काम पर और एक अच्छी कहानी बनाओ जो पुलिस की इमेज को ऊंचा करे और हां यहां की पूरी टीम को 2 लाख का बोनस भी दे देना।

एसपी साहब जुट गए वहां अपने पैसे बचाने में, इधर आरव और वीरभद्र दोनों जॉगिंग करते हुए आगे बढ़ने लगे। सहर के थोड़े बाहर ही उन्हें एक ऑटोवाला भी मिल गया और दोनों सीधा बस स्टैंड पहुंच गए। एक चाय की टपरी से दोनों ने चाय लिया और वीरभद्र चुस्की लेते हुए…

वीरभद्र:- गुरुदेव आप से बहुत कुछ सीखा है मैंने। कभी कोई काम परे तो याद जरूर कीजिएगा।

आरव:- बस कर यार, तू मुझ से बड़ा दिखता है। मत कह गुरुदेव। अच्छा सुन यहां कौन कौन है तेरा।

वीरभद्र:- मां और छोटी बहन।

आरव:- ठीक है कुछ दिन यहीं रुक फिर सबको लेकर दिल्ली आ जाना। मेरे पास तेरे लिए बहुत से काम है।

वीरभद्र खुश होते हुए…. क्या बात कर रहे हो गुरुदेव, जल्दी मिलता हूं फिर।

आरव, वीरभद्र को अलविदा कहकर वापस लौट आया। इधर आरव से बात समाप्त करने के बाद अपस्यु के आखों में नींद कहां थी। उसकी नजर तो बस टीवी पर टिकी थी और न्यूज चैनल को बार-बार बदल रहा था।

इसी क्रम में कब उसे नींद अा गई उसे पता भी नही चला। सुबह जब आंख खुली और नजर टीवी पर गई तब उसका पूरा ध्यान न्यूज पर ही केन्द्रित हो गया। अभी की सुर्खियों में बस भूषण ही छाया हुआ था। और जो खबर निकालकर अा रही थी, उसे बड़े ही नाटकीय ढंग से आपसी मुठभेड़ का नाम दे दिया गया था। नाटकीय इसलिए क्योंकि हत्या के आरोपी गैंग, मौके पर ही पुलिस मुठभेड़ का शिकार हो गई और इसके बाकी साथियों की तलाश में जुटी है पुलिस।

अब कहीं जाकर चैन की सासें ली अपस्यु ने। इधर खबर सुनकर अपस्यु मुस्कुराया तो उधर सामने से उसकी खुशी चली आईं। आरव बैग पटक कर सीधा अपस्यु के पास पहुंचा और गले लग गया। दोनों भाई थोड़े खुश और आखें थोड़ी नम थी।

कुछ देर के बातचीत के बाद आरव वहां से उठा और जल्दी-जल्दी तैयार हों होकर निकलने लगा। अपस्यु उसकी हरकत को हैरानी से देखते हुए पूछा… "अबे ओ निशाचर, अब ये बन-ठन के कहां निकालने के तैयारी में है?

आरव:- तेरा तो मामला सेट हो गया, मेरा क्या? मैं चला कॉलेज, 3 दिनों से लावणी की सूरत नहीं देखी।

अपस्यु, हंसते हुए…. जा, तेरा मुंह तोड़ने के इंतजार में ही बैठी होगी।

आरव:- मुंह क्या पूरी हड्डियां तोड़ दे बस दिल ना तोड़े।

आरव बिल्कुल फ्रेश होकर निकला और उसकी फटफटी सीधा जाकर पार्किंग में रुकी। अब कभी वो कॉलेज आया हो तो ना पता हो कि कौन सी क्लास कहां है। उसे तो अपना विषय तक याद ना था कि वो किस विषय से स्नातक (ग्रेड्यूशन) कर रहा है, लावणी के विषय की जानकारी तो दूर की बात थी।

ढूंढते-ढूंढते लावणी तो नहीं मिली लेकिन साची जरूर मिल गई। कैंटीन में अकेली बैठी वो कहीं खोई सी थी। आरव चुटकी बजाकर उसका ध्यान अपनी ओर खींचता… "क्या हुआ मिस किन ख्यालों में खोई हुई है"..

आरव को देख कर साची मुस्कुराई और पूछने लगी… "कब पहुंचे आरव"

आरव:- आज ही सुबह पहुंचा हूं साची। लेकिन तुम कहां गुम हो।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाते हुई:- सुबह गई थी तुम्हारे भाई से मिलने, आधे घंटे बेल बजती रही लेकिन दरवाजा तक नहीं खोला।

आरव:- ओह तो इसलिए कैंटीन में बैठ कर सोच रही की उसका दरवाजा कैसा खुलवाया जाए।

साची:- हट बदमाश, ऐसा नहीं है। मेरी छोड़ो तुम आज ही पहुंचे और अा गए सीधा कॉलेज?

आरव:- अपनी जानेमन को ढूंढ रहा हूं, वो तो मिल ना रही, और यहां तुम मिल गई।

साची अपनी आखें दिखाती:- ज्यादा चू-चपर वाली बातें की ना तो मैं तुम्हारा जुबान कतर दूंगी?

आरव अपने हाथ जोड़ उसके सामने खड़ा हो गया…. "भूल हो गई, क्षमा माते। अब जरा लावणी का पता बता दीजिएगा।

साची जोर से हंसती हुई… अभी वो हिस्ट्री की क्लास में होगी।

आरव तेजी से वहां से निकला पर जाते-जाते कहता गया…. मैं तुम्हारी जगह होता ना तो अब तक क्लास बंक कर के पहुंच चुका होता खबर लेने की आखिर सुबह दरवाजा क्यों नहीं खोला? और हां 2 बातें.. पहली ये की मेरे अपार्टमेंट में प्रवेश के लिए 2 मुख्य द्वार हैं, और दूसरी ये की अपनी स्कूटी लिए जाना।

आरव तो वहां से लावणी के लिए निकल गया लेकिन जाते-जाते साची को उपाय बताते चला गया। बिना देर किए साची भी निकली, मस्त अपनी स्कूटी से, होटों पर गीत गुनगुनाए…. "तेरी गलियां…गलियां तेरी, गलियां……. मुझको भावें गलियां, तेरी गलियां"
 
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Yash420

👉 कुछ तुम कहो कुछ हम कहें 👈
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Party to hui kintu aap anupasthit rahe. Koi nahi nischint se apni upastithi jaroor darj karwate jaeyega.
भाई ओर्जिनल ?पार्टी था तो ? इसके लिए आप के
पार्टी को ज्वाइन नहीं कर सका
और इसके लिए में माफी चाहता हूं
 

Avi12

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Update:-19



दोनों बाहें फैलाए उसने अपनी आंखें मूंद ली और आशुओं की एक धारा चेहरे पर एक रेखा बनाती, धीरे-धीरे टपकने लगी। शायद जो इस वक़्त आरव मेहसूस कर रहा था वहीं अपस्यु भी। वो भी अपने बिस्तर पर लेटा-लेटा अपनी आखें मुंदे बस आशुओं की एक धारा बहा रहा था।

थोड़ी देर बाद वीरभद्र अपनी गिनती पूरी कर आया और साथ में 2 लोग बेचारे तड़प रहे थे, उनकी तड़प को भी शांत कर आया। जब वो वापस लौटा तब आरव को इस हाल में देखकर, वो जोड़-जोड़ से चिल्लाने लगा…. "गुरुदेव अभी तो हम मिले थे, इतनी जल्दी निकल लिए"…

वीरभद्र का चिल्लाना सुनकर आरव खुद को ठीक करता हुआ उठ खड़ा हुआ, उधर अपस्यु ने जब चिल्लाना सुना तो वो भी चिंतित होकर आरव-आरव करने लगा।

आरव:- कुछ नहीं हुआ ठीक हूं मैं।

अपस्यु:- फिर वो चिल्लाया क्यों?

आरव:- अरे कुछ नहीं बस कुछ याद आ गया था.. जैसे तुझे आया होगा।

अपस्यु:- हम्मम !! वो तो ठीक है लेकिन इतना बड़ा रायता जो फैला दिए हो उसका क्या?

अराव:- बेकार की चिंता कर रहा है। अब तू सो जा और सुबह उठ कर न्यूज देख लेना। मैं यहां अब सब पैक कर रहा हूं। कल मिलते हैं भाई।

अपस्यु:- जल्दी अा जा… तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा।

आरव ने कॉल काटा और वहां से सब समेटना शुरू किया। वीरभद्र भी उसके इस काम में मदद करने लगा। सब कुछ समेट कर आरव जबतक पैक कर रहा था, वीरभद्र ने पैसों से भड़ा बैग उसके पास पटकते हुए…. "आरव, सारे पैसे यहीं रह गए। डॉलर, रुपया, सब…. और इस पैसे के लिए ये सब लड़-भीड़ कर मर गए… हा हाहाहा"

आरव:- पैसा यहीं छोड़ दे वीरे। ये "ब्लड मनी" है। यह पैसा हमेशा अपने पीछे एक जहरीली खुशबू छोड़ता है। हम इसे यहां से ले गए ना तो इसकी जहरीली खुशबू सूंघते ना जाने कितने हमारे पीछे अा जाए।

वीरभद्र:- क्या मतलब पैसा यहीं छोड़ दे? अरे इतना सरा रुपया है। कोई पागल ही इसे छोड़ सकता है।

आरव:- तू वहां से किसी लाश का फोन उठा कर दे मुझे। तुझे अभी समझ नहीं आएगा कि इन पैसों को क्यों नहीं ले जा सकते।

वीरभद्र के तो आंखों में जैसे रुपया ही छप गया हो। इतना सरा रुपया देख कर तो वो होश में ही नहीं था। हां मन डोल तो उसका पूरा रहा था लेकिन इंसान बेईमान नहीं था। आरव ने जैसा कहा उसने फोन लाकर दे दिया, और एक बैग जिसमे केवल डिवाइस थी और कपड़े, वो लेकर उस खंडहर के बाहर अा गया।

आरव ने उदयपुर एसपी के लैंडलाइन पर कॉल लगाया, थोड़ा इंतजार और थोड़े बहाने के बाद एसपी फोन लाइन पर अा गए थे। आरव ने ज्यादा बात को ना घुमाते हुए सीधा कह दिया… "राज्य के शिक्षा मंत्री यहां फसे है और गैंगस्टर अंधाधुन गोलीबारी कर रहे है" ... इतना सुनते ही एसपी साहब के होश उड़ गए।

एसपी :- कौन हो तुम और कहां से बोल रहे हो?

आरव:- मैं पूरी जानकारी तभी दूंगा जब कॉन्फ्रेंस में सिटी पुलिस कमिश्नर भी होंगे।

इतना बड़ा बॉम्ब फटा था, सिटी कमिश्नर को तुरंत लाइन पर लेते हुए एसपी पूछने लगे…. "सर है लाइन पर, अब पूरी बात बताओ"

आरव:- एक ही बात बार-बार कहनी पड़ेगी क्या, सुन नहीं रहे कितनी भीषण गोलीबारी हो रही है। लोगों के मरने और चिंखने की आवाजें नहीं सुनाई दे रही क्या?

एसपी:- सर हमे वहीं चलना चाहिए।

कमिश्नर:- ठीक है, सभी को अलर्ट करो और पूरी फोर्स को पहुंचने बोलो। सुनो तुम जो कोई भी हो, हमे वहां का पता बताओ और वहीं रुकना।

आरव:- मैं बस पता बता कर निकल रहा हूं। मुझे नहीं मारना इस गोलीबारी में।

आरव ने पता बताया और दोनों, वीरभद्र और आरव वहां से निकल गए। कुछ दूर आगे चलकर दोनों ने अपने कपड़े बदले और पहने हुए कपड़े को वहीं जलाकर जॉगिंग करते हुए निकाल गए।

रास्ते में ही सामने से एसपी साहब की जीप आ रही थी, जो बिना रुके सीधे स्पॉट की ओर निकल गई। एसपी, कमिश्नर से… "लगता है कॉलर यही दोनों थे"… कमिश्नर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया…. "इतना चालक कॉलर मैंने आज तक नहीं देखा। जल्दी चलो वरना हम से पहले कहीं फोर्स ना पहुंच जाए"।

कमिश्नर और एसपी तुरंत मौके पर पहुंचे। वहां का नजारा देखकर दोनों को बहुत ज्यादा अचरज नहीं हुआ बस उनकी नजरें अपने काम की चीज ढूंढ़ने में लगी हुई थी। उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि सरा पैसा सामने ही परा था।

एसपी:- जितना बड़ा कांड उतनी ही बड़ी क़ीमत।

कमिश्नर:- कुछ पैसे यहीं छोड़ कर बाकी सरा पैसा जल्दी से जीप में छिपाओ।

एसपी, पैसे को जीप में रखने के बाद वापस आकर… "क्या लगता है ये कॉलर कोई अतंकवादी था"

कमिश्नर:- आईपीएस किसने बनाया तुम्हे। ये कोई निजी मामला लगता है। बहुत ही चालाकी से या तो सबको लड़ाया है या पैसे के चक्कर में सबको यहां बुला कर साफ़ कर दिया। उधर देखो वो स्मोक बॉम्ब, आया कुछ समझ में।

एसपी:- पैसे तो मिल ही गए हैं, और वो लड़का अतंकवादी भी नहीं तो ज्यादा सोचना क्या है क्लोज करते हैं सर केस। आप जाइए यहां का पंचनामा करने में शायद काफी वक़्त लग जाए।

कमिश्नर भूषण को एक लात मारकर:- हां कौन सा साला ये समाजसेवक था जो इसके लिए भागदौड़ करे। जगह ऐसा हो जाना चाहिए कि एनएसए, सीबीआई या फिर रॉ अा जाए, सब को बस अपनी ही कहानी के सबूत मिले। लग जाओ काम पर और एक अच्छी कहानी बनाओ जो पुलिस की इमेज को ऊंचा करे और हां यहां की पूरी टीम को 2 लाख का बोनस भी दे देना।

एसपी साहब जुट गए वहां अपने पैसे बचाने में, इधर आरव और वीरभद्र दोनों जॉगिंग करते हुए आगे बढ़ने लगे। सहर के थोड़े बाहर ही उन्हें एक ऑटोवाला भी मिल गया और दोनों सीधा बस स्टैंड पहुंच गए। एक चाय की टपरी से दोनों ने चाय लिया और वीरभद्र चुस्की लेते हुए…

वीरभद्र:- गुरुदेव आप से बहुत कुछ सीखा है मैंने। कभी कोई काम परे तो याद जरूर कीजिएगा।

आरव:- बस कर यार, तू मुझ से बड़ा दिखता है। मत कह गुरुदेव। अच्छा सुन यहां कौन कौन है तेरा।

वीरभद्र:- मां और छोटी बहन।

आरव:- ठीक है कुछ दिन यहीं रुक फिर सबको लेकर दिल्ली आ जाना। मेरे पास तेरे लिए बहुत से काम है।

वीरभद्र खुश होते हुए…. क्या बात कर रहे हो गुरुदेव, जल्दी मिलता हूं फिर।

आरव, वीरभद्र को अलविदा कहकर वापस लौट आया। इधर आरव से बात समाप्त करने के बाद अपस्यु के आखों में नींद कहां थी। उसकी नजर तो बस टीवी पर टिकी थी और न्यूज चैनल को बार-बार बदल रहा था।

इसी क्रम में कब उसे नींद अा गई उसे पता भी नही चला। सुबह जब आंख खुली और नजर टीवी पर गई तब उसका पूरा ध्यान न्यूज पर ही केन्द्रित हो गया। अभी की सुर्खियों में बस भूषण ही छाया हुआ था। और जो खबर निकालकर अा रही थी, उसे बड़े ही नाटकीय ढंग से आपसी मुठभेड़ का नाम दे दिया गया था। नाटकीय इसलिए क्योंकि हत्या के आरोपी गैंग, मौके पर ही पुलिस मुठभेड़ का शिकार हो गई और इसके बाकी साथियों की तलाश में जुटी है पुलिस।

अब कहीं जाकर चैन की सासें ली अपस्यु ने। इधर खबर सुनकर अपस्यु मुस्कुराया तो उधर सामने से उसकी खुशी चली आईं। आरव बैग पटक कर सीधा अपस्यु के पास पहुंचा और गले लग गया। दोनों भाई थोड़े खुश और आखें थोड़ी नम थी।

कुछ देर के बातचीत के बाद आरव वहां से उठा और जल्दी-जल्दी तैयार हों होकर निकलने लगा। अपस्यु उसकी हरकत को हैरानी से देखते हुए पूछा… "अबे ओ निशाचर, अब ये बन-ठन के कहां निकालने के तैयारी में है?

आरव:- तेरा तो मामला सेट हो गया, मेरा क्या? मैं चला कॉलेज, 3 दिनों से लावणी की सूरत नहीं देखी।

अपस्यु, हंसते हुए…. जा, तेरा मुंह तोड़ने के इंतजार में ही बैठी होगी।

आरव:- मुंह क्या पूरी हड्डियां तोड़ दे बस दिल ना तोड़े।

आरव बिल्कुल फ्रेश होकर निकला और उसकी फटफटी सीधा जाकर पार्किंग में रुकी। अब कभी वो कॉलेज आया हो तो ना पता हो कि कौन सी क्लास कहां है। उसे तो अपना विषय तक याद ना था कि वो किस विषय से स्नातक (ग्रेड्यूशन) कर रहा है, लावणी के विषय की जानकारी तो दूर की बात थी।

ढूंढते-ढूंढते लावणी तो नहीं मिली लेकिन साची जरूर मिल गई। कैंटीन में अकेली बैठी वो कहीं खोई सी थी। आरव चुटकी बजाकर उसका ध्यान अपनी ओर खींचता… "क्या हुआ मिस किन ख्यालों में खोई हुई है"..

आरव को देख कर साची मुस्कुराई और पूछने लगी… "कब पहुंचे आरव"

आरव:- आज ही सुबह पहुंचा हूं साची। लेकिन तुम कहां गुम हो।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाते हुई:- सुबह गई थी तुम्हारे भाई से मिलने, आधे घंटे बेल बजती रही लेकिन दरवाजा तक नहीं खोला।

आरव:- ओह तो इसलिए कैंटीन में बैठ कर सोच रही की उसका दरवाजा कैसा खुलवाया जाए।

साची:- हट बदमाश, ऐसा नहीं है। मेरी छोड़ो तुम आज ही पहुंचे और अा गए सीधा कॉलेज?

आरव:- अपनी जानेमन को ढूंढ रहा हूं, वो तो मिल ना रही, और यहां तुम मिल गई।

साची अपनी आखें दिखाती:- ज्यादा चू-चपर वाली बातें की ना तो मैं तुम्हारा जुबान कतर दूंगी?

आरव अपने हाथ जोड़ उसके सामने खड़ा हो गया…. "भूल हो गई, क्षमा माते। अब जरा लावणी का पता बता दीजिएगा।

साची जोर से हंसती हुई… अभी वो हिस्ट्री की क्लास में होगी।

आरव तेजी से वहां से निकला पर जाते-जाते कहता गया…. मैं तुम्हारी जगह होता ना तो अब तक क्लास बंक कर के पहुंच चुका होता खबर लेने की आखिर सुबह दरवाजा क्यों नहीं खोला? और हां 2 बातें.. पहली ये की मेरे अपार्टमेंट में प्रवेश के लिए 2 मुख्य द्वार हैं, और दूसरी ये की अपनी स्कूटी लिए जाना।

आरव तो वहां से लावणी के लिए निकल गया लेकिन जाते-जाते साची को उपाय बताते चला गया। बिना देर किए साची भी निकली, मस्त अपनी स्कूटी से, होटों पर गीत गुनगुनाए…. "तेरी गलियां…गलियां तेरी, गलियां……. मुझको भावें गलियां, तेरी गलियां"
Ek no. Guruji. Ab to ye janne ki icha utpann ho rahi ki akhir Bhushan aur Jamil se in dono bhaiyon ka kya lena dena tha aur in dono ka itihas kya hai, ummeed hai ki kahani ke agey badhte badhte saare raaz khulne lagenge. Ab shayad romance shuru hone wala hai?. Great going bro, keep posting
 

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
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mamala satela hogaya :)
ab lagata hai khani kuch alg mode legi.
aaj update dene main deri kiya or ek he updates diya tum ko sharam nhi aaye.
kuch to sharam karo nainu. :dazed:
 

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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So jaisa aarav ne socha tha wohi hua.. pure mamle ko hi palat diya...
Hmm.... ek tharki nikla lavnee ko milne ki as mein aur dusri aur saachi nikli gaddi leke apsyu se milne ke liye.. ab bas raste pe ek mod aa jaye aur sulekha ji ko sab kuch pata chal jaye...
Khair
Let's see what happens next
Brilliant update nainu ji... Great going :applause: :applause:
 
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