• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance भंवर (पूर्ण)

Chutiyadr

Well-Known Member
17,009
42,467
259
Update:-14



इधर कॉल डिस्कनेक्ट होते ही अपस्यु ने आरव से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन मजाल है कि कॉल लग जाए। भाई साहब का फोन लगातार 1 घंटे से बीजी बीजी बीजी…

आरव अपने घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही, रास्ते में परता हुआ उसके घर को देखते हुए एयरपोर्ट के ओर निकला। टैक्सी में बैठकर आरव लावणी के बारे में सोच कर मुस्कुराया और खुद से ही कहने लगा… "देखता हूं मेरी जानेमन क्या कर रही है".. फिर क्या था मिला दिया कॉल।

2 पूरी घंटी के बाद भी उसने कॉल नहीं उठाया। तीसरी घंटी में वो कॉल उठाती हुई पूछने लगी… "हां जी कौन"… उधर से आरव कहता है.. "जी हम आप के लवर बोल रहे हैं"।.. लवर का नाम सुनते ही वो हड़बड़ा गई, फोन हाथों से छूट कर नीचे गिरते-गिरते बचा। तभी बैकग्राउंड से आवाज़ अाई.. "किसका फोन है लावणी".. लावणी हड़बड़ाती हुई कहने लगी…. "सुषमा का फोन है मां".. और जल्दी से भागकर अपने कमरे में चली गई।

इधर आरव पीछे चल रही कहानी के मज़े ले रहा था… अपने कमरे में पहुंच कर लावणी फुसफुसाती हुई पूछने लगी… "तुम्हे मेरा नंबर कहां से मिला"

आरव:- बड़ा जल्दी समझ गई कि किसने कॉल किया है।

लावणी:- हद होती है किसी भी बात कि। पहले तुम ये बताओ कि मेरा नंबर कहां से मिला।

आरव:- किसी लड़की को लाइन मारने वाले लड़के के पास उसकी पूरी डिटेल होती है। तुम ना समझोगी, अभी बहुत कच्ची हो।

लावणी:- हां इसलिए दारू पीला कर पक्का बना रहे थे। तुम मिलो तो सही फिर बताती हूं।

आरव:- क्या बात है, मतलब काम निकल गया तो अब उल्टा हम ही दोषी हो गए.. क्यों?

लावणी:- तुम्हे तो में जूते से मारूंगी आरव, बस मौका नहीं मिल रहा। तुम्हारे वजह से कितना डर-डर कर जीना पड़ रहा है पता है। मेरी तो सोचते ही रूह कांप जाती है कि अगर इस कांड के बारे में पापा और मम्मी को पता चला तो मेरा क्या होगा।

आरव:- अरे इतना डरती क्यों हो। इस परिस्थिति से निकलने के लिए वहीं डोज बनेगा, 180ml पियो और शान से जियो।

लावणी:- ज्यादा बकवास की ना करो, मैं तुम्हारा मुंह तोड़ दूंगी आरव।

आरव:- इतना ही गुस्सा है तो बताओ कहां आना है निकाल लेना अपनी भड़ास।

लावणी:- ऊफ़ ओ !!! मुझे क्यों परेशान कर रहे हो। कोई काम है तो जल्दी बोलो, मां इधर ही नजर गड़ाए हुए हैं।

आरव:- चल झूठी। अभी तो अपनी मां से झूट बोलकर अपने कमरे में आई हो।

लावणी, चिढ़ती हुई कहने लगी… "देखो यदि मुझे परेशान किया ना तो मुझ से बुरा कोई ना होगा। चुपचाप फोन रख दो"।

आरव:- मुझ से इतनी ही चिढ़ है तो तुम्हारे पास भी लाल बटन है। इतनी बहस काहे कर रही हो। लेकिन… लेकिन… लेकिन … तुमने अगर अभी कॉल काटा तो एक बात याद रखना, जो बात मैं तुम्हे अभी बताने वाला हूं और तुम्हारे छोटे से रिक्वेस्ट पर उसे पूरा भी कर दूंगा। अगर तुमने कॉल डिस्कनेक्ट किया तो उसी काम के लिए तुम्हे पापड़ बेलने होंगे।

लावणी:- हो गई तुम्हारी बकवास खत्म.. बाय..

आरव हंसते हुए फोन को देखने लगा और खुद से ही कहने कहा… "लड़की में बहुत बदलाव अा गया है"। फिर गैलरी खोल कर कुछ तस्वीरें छांट ली। ये उसी दिन की तस्वीरें थी जिस दिन लावणी ने वोदका पिया था, और पीने के बाद आरव के गालों को चुमी थी।

इधर लावणी मोबाइल को हाथ में पकड़े बस इसी बात को सोच रही थी आखिर इसको मेरा नंबर कहां से मिला होगा। तभी एक के बाद एक व्हाट्स एप मैसेज आने शुरू हो गए। साची ने जब अपना एप खोला तो सबसे ऊपर में ही आरव के नाम से संदेश आने शुरू थे।… "इसका नंबर तो मेरे मोबाइल में भी सेव है"… फिर मैसेज ओपन की और सामने के स्क्रीन पर आए तस्वीरों को देखकर चौंकती हुई उसने वापस कॉल लगाया… "ये सब तस्वीरे तुम्हारे पास कैसे आए… कब खींची"

आरव:- ये डर भगाव दवा का असर था.. जब ये सरा कांड हो गया।

लावणी:- तुमने मेरे नशे का गलत फायदा उठाया..

आरव:- ओ मैडम जरा गौर से देखो, कौन किसको चूम रहा है। उल्टा जबरदस्ती तुमने मेरे साथ की और मुझे ही सुना रही हो।

मुद्दे पर वाद-विवाद होता रहा। कभी गुस्सा तो कभी मिन्नतें तो कभी ड्रामा ये सब बातों के दौरान चलता रहा। लेकिन आरव अपनी जिद पर अरा रहा… "तस्वीरें तभी डिलीट होंगी, जब वो फिर से होश में एक बार, ऐसे ही उसको चुम्मी देगी".. इसी बीच अपस्यु के कॉल भी उसे आते रहे लेकिन वो नजरअंदाज करता रहा।

लावणी से बात खत्म कर उसने सीधा फिर अपस्यु को कॉल मिलाया। अपस्यु ने अपने और जमील के बीच हुए बातचीत को बताते हुए पूछने लगा कि अब क्या करना चाहिए। आरव ने साफ कह दिया कि किसी के भी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, योजना के अनुसार चलेंगे। यदि जमील ने काम कर दिया तो अच्छा वरना हम तो तयारी से निकले ही है।

आरव फ्लाइट बोर्ड करने निकल चुका था और इधर अपस्यु को थोड़ी चिंता भी सता रही थी। हालांकि विश्वास तो पूर्ण रूप से था किन्तु दिल नहीं मान रहा था कि आरव सब अकेले कैसे करेगा।

रात के लगभग 8 बजे की बात होगी, जब साची और लावणी उसके फ्लैट की बेल बजा रही थी। दरवाजा खुलते ही दोनों बहने अंदर अाई और फिर दरवाजा बंद। धीमी रौशनी पूरे हॉल में थी जो देखने पर ऐसा लग रहा था मानो लगभग अंधेरा ही है ये पूरी जगह।

साची, अपस्यु के पास बैठते ही सबसे पहले उसने ये अंधेरा कायम रहे की स्थिति के बारे में ही पूछी.. अपस्यु उसके बात पर हंसते हुए पूरे घर में उजाला कर दिया। पूरी रौशनी में जब लावणी ने उस हॉल को देखा तो वो भी साची की तरह ही दंग रह गई और जिज्ञासा वस चारो ओर घूमकर सब देखने लगी… "अपस्यु क्या मैं इन्हे छु कर देख सकती हूं"..

अपस्यु.. अरे वो कांच के नहीं है.. छु कर क्या मन हो तो 2-4 सामान पटक कर भी देखो, टूटेगा नहीं..

अपस्यु, लावणी के ओर मुड़ कर बात कर रहा था और साची अपस्यु को निहार रही थी। बात पूरी होने के बाद जैसे ही अपस्यु मुड़ा, साची अपनी नजरें चुराती हुई, अपने उंगली को बिस्तर पर गोल-गोल घुमती पूछने लगी.. "अभी तबीयत कैसी है तुम्हारी"

अपस्यु:- अभी कुछ घंटे पहले ही तो देखी थी, इतने समय में कितना सुधार होगा।

साची:- हां ये भी है…. (कुछ पल की खामोशी… और नजरों का मिलना और झुकना, फिर नजाकत के साथ कहना)… अब से हम दोस्त।

अपस्यु, साची के चेहरे को गौर से देखते हुए… "ये दिल में कुछ और, और दिखा कुछ और रहे हैं, मुझ से नहीं हो पाएगा"।

साची अपनी नजर चुराती हुई धीमे स्वर में बोली…. "खाना खा लो"

अपस्यु:- अभी भूख नहीं लगी है बाद में खा लूंगा…

साची:- अभी खाने में क्या परेशानी है…

अपस्यु, हंसते हुए:- इतनी जल्दी खाऊंगा तो रात को दोबारा भूख लग जाएगी।

साची:- थोड़ा एक्स्ट्रा खाना लाई हूं, बाद में भूख लगे तो खा लेना।

अपस्यु:- एक्स्ट्रा तो तब समझूंगा ना जब तुम मेरा डाइट जानती हो।

साची, मुस्कुराती हुई… अभी खाना खा लो, तो डाइट भी जान जाऊंगी।

अपस्यु, कुछ सोचते हुए कहने लगा… "नहीं तुम चली जाओ, मैं बाद में खा लूंगा"

साची उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करती हुई कहने लगी… "खा लो मैं यहीं हूं"।

फिर से अपस्यु का यही जवाब आया,"मैं बाद में खा लूंगा"। किंतु इस बार साची उसे आंख दिखाती हुई कहने लगी… "बस कोई बहस नहीं, चुपचाप खाओ"… अपस्यु बेड को हल्का फोल्ड करते हुए टेक लगाया, तबतक साची ने आलू के पराठे थाली में लगा दिए। थोड़ी परेशानी के साथ वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर निवाला लेने कि कोशिश करने लगा।

साची को समझ में आ गया कि क्यों अपस्यु उसे जाने के लिए कहा। वो अपनी परेशानी जाहिर नहीं होने देना चाह रहा था। साची उसकी कलाई पकड़ कर निवाला अपने हाथो में ली और अपस्यु के मुंह की ओर बढ़ा दी। दोनों एक दूसरे का चेहरा बड़े प्यार से देख रहे थे, मानो नजरें कुछ कह रही हो । और साची बिना पलकें झपकाए, नजरों से नजरें मिलाए अपस्यु के ओर निवाला बढ़ाए जा रही थी।

खामोशी के कुछ पल थे और दोनों बड़े सुकून से एक दूसरे को देखे जा रहे थे, तभी गले की खराश की आवाज़ ने दोनों का ध्यान भंग किया। दोनों ने जब लावणी को देखा तो हड़बड़ा गए और जो वो कर रही थी उसे देखकर तो साची शर्मा कर भाग ही गई। दरअसल साची जब बिना पलकें झपकाए अपस्यु को निवाला बढ़ा रही थी तब निवाला मुंह के बदले नीचे गिर रहा था। लावणी ने जब ऐसा होते देखा तो वो नीचे थाली लगा कर वहीं बैठ गई।
pahle pyar ki najakat aur nokjhok , bahut badiya :superb:
aise 180 ml me kya hota hai , mujhe to pure 750ml bhi kam hi lagta hai :D :drunkman:
 

nain11ster

Prime
23,655
80,785
259
Update:-15


खामोशी के कुछ पल थे और दोनों बड़े सुकून से एक दूसरे को देखे जा रहे थे, तभी गले की खराश की आवाज़ ने दोनों का ध्यान भंग किया। दोनों ने जब लावणी को देखा तो हड़बड़ा गए और जो वो कर रही थी उसे देखकर तो साची शर्मा कर भाग ही गई। दरअसल साची जब बिना पलकें झपकाए अपस्यु को निवाला बढ़ा रही थी तब निवाला मुंह के बदले नीचे गिर रहा था। लावणी ने जब ऐसा होते देखा तो वो नीचे थाली लगा कर वहीं बैठ गई।

एक बार जो साची ने दौड़ लगाई फिर सीधा अपने कमने में जाकर रुकी। पीछे से लावणी भी पहुंची, कई बार उसके कमरे के दरवाजे को खटखटाई, आवाज़ भी दी किंतु साची समझती थी कि उसे लावणी के द्वारा छेड़ा जाना है इसलिए दरवाजे पर आकर सिर्फ इतना ही कही की आज दरवाजा नहीं खुलेगा।

काफी खुश लग रही थी और इसी खुशी को प्रत्यक्ष दर्शाती उसने सबसे पहले तो एक मधुर संगीत बजाया…

पल भर ठहर जाओ, दिल ये संभल जाए
कैसे तुम्हें रोका करूँ,
मेरी तरफ आता हर ग़म फिसल जाए
आँखों में तुम को भरूं, बिन बोले बातें तुमसे करूँ
गर तुम साथ हो, अगर तुम साथ हो..

फिर अपनी दोनों बाहें फैलाए गोल-गोल घुमाती वो बिस्तर पर जा गिरी। दोनों बाहें फैलाए, आखें खुली छत को निहारती, सासें मध्यम-मध्यम और अंदर एक खुशनुमा एहसास जिसमें वो अपस्यु के ख्यालों में डूबी रही। उसे याद करते-करते फिर दिल में मीठी चुभन का वो एहसास…. "उफ्फ !!! कितने प्यारे हो तुम"।

साची अपनी खुशी बांटना चाह रही थी और इसी क्रम में उसने अपना लैपटॉप खोला और एफबी में किसी को खुशी कि ढेर सारी स्माइली पोस्ट करके उसके संदेश वापस आने का इंतजार करने लगी।

तकरीबन 2 मिनट बाद… संदेश वापस आया…

_____________________________________________

Crazy boy:- Kya baat hai, itni jyada khushi. Feeling horney kya ???

Unknown girl (Sachi ki fake id name):- nope duffer, I think I am in love ???

Crazy boy:- Oh my god !!! Waise ladke se hi pyar hua na ??

Unknown girl :- ????

Crazy Boy:- ???

Unknown Girl:- ????

Crazy Boy :- Ok Solly to humari unknown madam ko kisi se pyar ho gaya hai

Unknown Girl:- Yassssssssssss Woohooooooo.. ☺️☺️☺️ m very excited crazy boy..

Crazy Boy:- excited ho to X-chat karen kya (X-chat=sex chat)

Unknown Girl:- Huhhh !!! ???

Crazy Boy:- Ab kya hua ???

Unknown Girl:-Tumhare sath Q karun X-chat.

Crazy Boy:- Mere sath hi to karti thi tum X-chat. Bhul gayi kya.... "oh I am feeling horney, chalo kuch dhamal karte hain"

Unknown Girl:- Tab main relationship me nahi thi aur apni fantasy jine ke liye puri azad thi. Lekin ab main relation me hun.

Crazy Boy:- Hmmm !! Samjh gaya. Matlab tum mujhe bye-bye kahne aayi ho.

Unknown Girl:- kya main kewal X-chat hi tumhare sath karne aati thi aur bhi to baten hua karti thi..

Crazy Boy:- Kab ??? Upar ke chat dekh lo tum… jab bhi aayi ho bas itna hi… feeling horney.. feeling horney.. feeling horney… wo main hi to hun jisne har bar tumhare horney feeling ko apne typing ke dum par orgasms me badla hai.

Unknown Girl… Aukkat mat bhulo tum… virtual friend ho virtual friend ki tarah behave karo, jyada close hone ki jaroorat nahi hai.

Crazy Boy:- Anjaan hi sahi par 2 salon se lagatar hum jisse baat karte hain unke sath bounding ho hi jati hai. Sorry mujhe aaena dikhane ke liye. Tum ek raat aati aur 10 raten gayab ho jati, lekin main har raat tumhara jag kar intzar karta. Kewal is khyal se ki kahin main so gaya aur tum aa gayi, to jo ek mauka mila tha itne dino me, wo bhi hath se gaya aur na jane agla mauka kab mile. Thank you so much… Byeeeee..

_____________________________________________

इधर उसने बाय कहा और उधर साची अपनी लैपी बंद करती हुई कहने लगी… "हुंह, बड़ा आया"… और फिर आराम से लेट कर, अपस्यु को याद करती, सात रंग के सपनों में खो गई।

जब से सुबह हुई, वो चहकती हुई इधर से उधर कर रही थी। कान बस अपनी मां के उस आवाज़ को सुनने के लिए तरस रहे थे जब अनुपमा उससे कहती की "बेटा उसे भी खाना देकर अा"…

इंतजार के बाद वो वक़्त भी अा ही गया जब अनुपमा उसे टिफिन देती हुई बोली… "जा उसे भी खाना दे अा"… अभी के लिए तो वो अपनी बाहर की उड़ान को अपने दिखावे के चादर तले ढक कर रखी थी, लेकिन जैसे ही वो अपार्टमेंट के लिफ्ट में पहुंची, बाहर से भी उतावली नजर आने लगी।

चहकती हुई वो अपस्यु के फ्लैट के ओर बढ़ रही थी, किंतु दरवाजे के निकट पहुंचने से पहले उसने एक बार फिर अपने अपने ऊपर एक दिखावा का चादर चढ़ाया और अपने हाव भाव को ठीक करती वो बेल बजाने लगी। दरवाजा खुला और साची अंदर।

दरवाजे के पास ही खड़ी होकर उसने एक पूरी नजर अपस्यु को देखा। उसका दिल किया की अभी उसके बगल में लेट कर उसे बाहों में भर लूं, लेकिन खुद के अंदर की झिझक और पहले अपस्यु के पहल के इंतजार ने उसके भावनाओ को बांधे रखा।

लेकिन वो होता है ना.. मन में किसी के लिए प्यार बसा हो या फिर नफरत चेहरे से समझ में आ ही जाती है, ठीक वही हो रहा था साची के साथ। लाख वो खुद के बंधे रखी थी किंतु उसके चेहरे की रौनक आज इतनी अलग थी कि अपस्यु दूर से ही उसे भांप गया।

एक बार फिर नजरों से नजरें मिलनी शुरू हुई लेकिन इस बार अपस्यु ने साची को यह कहकर जाने के लिए बोल दिया कि उसके कॉलेज जाने में देरी हो रही है। साची यूं तो जाना नहीं चाहती थी लेकिन रुक भी नहीं सकती थी। क्या कहती, तुम मुझे पसंद हो और मुझे तुम्हे छोड़ कर जाने का मन नहीं। दुविधा और विरोधाभास के साथ साची केवल ये सोच कर निकल गई की शाम को अाकर अच्छे से मिलूंगी।

साची के जाते ही अपस्यु, आरव से बात करना शुरू कर दिया। मामला ये था कि जब साची पहुंची उससे थोड़े समय पहले ही आरव ने कॉल लगाया था। अभी वो अपस्यु से उसके तबीयत की जानकारी लिया ही था कि साची अा गई जिस वजह से दोनों को बीच में ही बात रोकनी परी।

आरव:- कहे भगा दिया इतनी जल्दी बेचारी को..

अपस्यु:- कुत्ता कहीं का, तुझे जरा भी संस्कार नहीं। क्या तुझे पाया नहीं की, दूसरों की ना तो बातें सुनी जाती है और ना ही वो क्या कर रहे है उसे देखने में कोई रुचि होनी चाहिए। साला मनहूस कहीं का, मेरी खुशियों पर ग्रहण लगाए बैठा है। चुपचाप वहीं रुक और इंतजार कर, मैं किसी को कॉल करूंगा तो वो तुम्हारे पास 120 करोड़ पहुंचा देगा। फिर आगे क्या करना है वो मैं तुम्हे बाद ने बताऊंगा। चल अब फोन रख।

यदि बात करते-करते बातों में अचानक बदलाव अा जाए फिर चाहे बदलवा नफरत भड़ा हो या प्यार भड़ा, ये संकेत होता है कि कुछ गड़बड़ है। फिर उनके अपने डिकोडिंग के तरीके थे, जैसे कि अपस्यु का कहना .. "दूसरों की बातें सुनना और उनको देखने में रुचि दिखाना".. मतलब ये था कि कोई देख भी रहा है और सुन भी रहा है।

और बस संकेत को समझते ही आरव तुरंत ही कॉल डिस्कनेक्ट कर सीधा बाथरूम पहुंच गया और कानों में एयरपो्ट लगाकर अपस्यु को कॉल मिलाया और साथ ही अपना मैसेंजर खोल लिया….

अपस्यु:- 2 लोग तुझे देख और सुन रहे है।

आरव संदेश भेजते हुए… "ठीक है, लोकेशन बता"

अपस्यु:- एक तेरे लेफ्ट विंडो से 22 डिग्री नॉर्थ.. तकरीबन 400 मीटर की दूरी पर, पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से नजर दिए है। दूसरा वेस्ट में, तकरीबन 500 मीटर की दूरी पर, एक हॉल्ट स्टेशन की छत से तुझ पर नजर बनाए है। दोनों के
स्नाइपर रायफल वैपन ड्रागुनोव एस वी डी 7.62।

आरव:- ठीक है होलोग्राम इमेज क्रिएट कर, बाकी मैं इनका बंदोबस्त करता हूं।

अपस्यु:- वैसे कौन सा वैपन तुझे वहां डिलीवर हुआ है?

आरव:- SVLK-14S “Twilight” .408 Cheytac और एक Glock 17 Pistol

अपस्यु:- ठीक है तू चकमा देकर बाहर निकल वहां से, लेकिन याद रखना की उस रिजॉर्ट के कुछ लोग उनके खबरी भी हो सकते है। बाकी मै पूरी नजर बनाए हुए हूं।

आरव:- ठीक है भाई, अब तू बस देखता जा…

अपस्यु वहां पर लगातार नजर बनाए हुए था। आरव के कहे अनुसार अपस्यु ने होलोग्राम इमेज क्रिएट कर सब सेट कर चुका था। आरव अपने साथ लाए रिफ्लेक्टर डिवाइस को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) से कनेक्ट कर दिया। अब आरव का प्रतिबिंब पूरे कमरे में इधर से उधर भटक रहा था। इधर बाथरूम में ही आरव ने अपने हुलिया में थोड़ा बहुत बदलाव किया और रेंगते हुए दरवाजे से बाहर निकला।

आरव सबको चकमा दे कर बाहर आ चुका था। उसने किराए की कार को स्टार्ट किया और बड़े ही सावधानी से ठीक उस शूटर के लोकेशन के पीछे पहुंच गया जो पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से उसपर नजर दिए हुए था… आरव अब घूमकर ठीक उसके झोपड़ी के पीछे पहुंच चुका था और फुर्ती दिखाते हुए पीछे से ही झोपड़ी के अंदर प्रवेश किया..

जबतक वो शूटर स्कोप से अपनी नजर हटा कर हरकत में आया, तबतक आरव की पिस्तौल उसके कनपटी पर लग चुकी थी। आरव ने उसे कुछ ना बोलने का इशारा कर, उसके जेब से फोन लिया और उस पर चल रहे कॉल को डिस्कनेक्ट कर दिया।

शूटर:- तुम्हे क्या लगता है उन्हें पता नहीं चला होगा। मैंने कोई आवाज़ नहीं की पर तुम जो ये तोड़ते-फोड़ते अंदर घुसे हो, क्या उसकी आवाज़ उन तक नहीं पहुंची होगी…

तभी सायलेंसर में दबी गोली चलने की आवाज और आरव हंसता हुआ… "जब जान पर बन आती है तो ऐसे ही कहानियां बनने लगते है। जब उनसब का नंबर भी अा ही रहा है, तो मुझे क्यों इस बात की फ़िक्र की उन्हे शक हुआ या नहीं हुआ। उन्हें पता चला या नहीं चला.. ट्रिगर दबाव खेल खल्लास, अब अगले का नंबर आने दो"
 

Chutiyadr

Well-Known Member
17,009
42,467
259
Update:-15


खामोशी के कुछ पल थे और दोनों बड़े सुकून से एक दूसरे को देखे जा रहे थे, तभी गले की खराश की आवाज़ ने दोनों का ध्यान भंग किया। दोनों ने जब लावणी को देखा तो हड़बड़ा गए और जो वो कर रही थी उसे देखकर तो साची शर्मा कर भाग ही गई। दरअसल साची जब बिना पलकें झपकाए अपस्यु को निवाला बढ़ा रही थी तब निवाला मुंह के बदले नीचे गिर रहा था। लावणी ने जब ऐसा होते देखा तो वो नीचे थाली लगा कर वहीं बैठ गई।

एक बार जो साची ने दौड़ लगाई फिर सीधा अपने कमने में जाकर रुकी। पीछे से लावणी भी पहुंची, कई बार उसके कमरे के दरवाजे को खटखटाई, आवाज़ भी दी किंतु साची समझती थी कि उसे लावणी के द्वारा छेड़ा जाना है इसलिए दरवाजे पर आकर सिर्फ इतना ही कही की आज दरवाजा नहीं खुलेगा।

काफी खुश लग रही थी और इसी खुशी को प्रत्यक्ष दर्शाती उसने सबसे पहले तो एक मधुर संगीत बजाया…

पल भर ठहर जाओ, दिल ये संभल जाए
कैसे तुम्हें रोका करूँ,
मेरी तरफ आता हर ग़म फिसल जाए
आँखों में तुम को भरूं, बिन बोले बातें तुमसे करूँ
गर तुम साथ हो, अगर तुम साथ हो..

फिर अपनी दोनों बाहें फैलाए गोल-गोल घुमाती वो बिस्तर पर जा गिरी। दोनों बाहें फैलाए, आखें खुली छत को निहारती, सासें मध्यम-मध्यम और अंदर एक खुशनुमा एहसास जिसमें वो अपस्यु के ख्यालों में डूबी रही। उसे याद करते-करते फिर दिल में मीठी चुभन का वो एहसास…. "उफ्फ !!! कितने प्यारे हो तुम"।

साची अपनी खुशी बांटना चाह रही थी और इसी क्रम में उसने अपना लैपटॉप खोला और एफबी में किसी को खुशी कि ढेर सारी स्माइली पोस्ट करके उसके संदेश वापस आने का इंतजार करने लगी।

तकरीबन 2 मिनट बाद… संदेश वापस आया…

_____________________________________________

Crazy boy:- Kya baat hai, itni jyada khushi. Feeling horney kya ???

Unknown girl (Sachi ki fake id name):- nope duffer, I think I am in love ???

Crazy boy:- Oh my god !!! Waise ladke se hi pyar hua na ??

Unknown girl :- ????

Crazy Boy:- ???

Unknown Girl:- ????

Crazy Boy :- Ok Solly to humari unknown madam ko kisi se pyar ho gaya hai

Unknown Girl:- Yassssssssssss Woohooooooo.. ☺☺☺ m very excited crazy boy..

Crazy Boy:- excited ho to X-chat karen kya (X-chat=sex chat)

Unknown Girl:- Huhhh !!! ???

Crazy Boy:- Ab kya hua ???

Unknown Girl:-Tumhare sath Q karun X-chat.

Crazy Boy:- Mere sath hi to karti thi tum X-chat. Bhul gayi kya.... "oh I am feeling horney, chalo kuch dhamal karte hain"

Unknown Girl:- Tab main relationship me nahi thi aur apni fantasy jine ke liye puri azad thi. Lekin ab main relation me hun.

Crazy Boy:- Hmmm !! Samjh gaya. Matlab tum mujhe bye-bye kahne aayi ho.

Unknown Girl:- kya main kewal X-chat hi tumhare sath karne aati thi aur bhi to baten hua karti thi..

Crazy Boy:- Kab ??? Upar ke chat dekh lo tum… jab bhi aayi ho bas itna hi… feeling horney.. feeling horney.. feeling horney… wo main hi to hun jisne har bar tumhare horney feeling ko apne typing ke dum par orgasms me badla hai.

Unknown Girl… Aukkat mat bhulo tum… virtual friend ho virtual friend ki tarah behave karo, jyada close hone ki jaroorat nahi hai.

Crazy Boy:- Anjaan hi sahi par 2 salon se lagatar hum jisse baat karte hain unke sath bounding ho hi jati hai. Sorry mujhe aaena dikhane ke liye. Tum ek raat aati aur 10 raten gayab ho jati, lekin main har raat tumhara jag kar intzar karta. Kewal is khyal se ki kahin main so gaya aur tum aa gayi, to jo ek mauka mila tha itne dino me, wo bhi hath se gaya aur na jane agla mauka kab mile. Thank you so much… Byeeeee..

_____________________________________________

इधर उसने बाय कहा और उधर साची अपनी लैपी बंद करती हुई कहने लगी… "हुंह, बड़ा आया"… और फिर आराम से लेट कर, अपस्यु को याद करती, सात रंग के सपनों में खो गई।

जब से सुबह हुई, वो चहकती हुई इधर से उधर कर रही थी। कान बस अपनी मां के उस आवाज़ को सुनने के लिए तरस रहे थे जब अनुपमा उससे कहती की "बेटा उसे भी खाना देकर अा"…

इंतजार के बाद वो वक़्त भी अा ही गया जब अनुपमा उसे टिफिन देती हुई बोली… "जा उसे भी खाना दे अा"… अभी के लिए तो वो अपनी बाहर की उड़ान को अपने दिखावे के चादर तले ढक कर रखी थी, लेकिन जैसे ही वो अपार्टमेंट के लिफ्ट में पहुंची, बाहर से भी उतावली नजर आने लगी।

चहकती हुई वो अपस्यु के फ्लैट के ओर बढ़ रही थी, किंतु दरवाजे के निकट पहुंचने से पहले उसने एक बार फिर अपने अपने ऊपर एक दिखावा का चादर चढ़ाया और अपने हाव भाव को ठीक करती वो बेल बजाने लगी। दरवाजा खुला और साची अंदर।

दरवाजे के पास ही खड़ी होकर उसने एक पूरी नजर अपस्यु को देखा। उसका दिल किया की अभी उसके बगल में लेट कर उसे बाहों में भर लूं, लेकिन खुद के अंदर की झिझक और पहले अपस्यु के पहल के इंतजार ने उसके भावनाओ को बांधे रखा।

लेकिन वो होता है ना.. मन में किसी के लिए प्यार बसा हो या फिर नफरत चेहरे से समझ में आ ही जाती है, ठीक वही हो रहा था साची के साथ। लाख वो खुद के बंधे रखी थी किंतु उसके चेहरे की रौनक आज इतनी अलग थी कि अपस्यु दूर से ही उसे भांप गया।

एक बार फिर नजरों से नजरें मिलनी शुरू हुई लेकिन इस बार अपस्यु ने साची को यह कहकर जाने के लिए बोल दिया कि उसके कॉलेज जाने में देरी हो रही है। साची यूं तो जाना नहीं चाहती थी लेकिन रुक भी नहीं सकती थी। क्या कहती, तुम मुझे पसंद हो और मुझे तुम्हे छोड़ कर जाने का मन नहीं। दुविधा और विरोधाभास के साथ साची केवल ये सोच कर निकल गई की शाम को अाकर अच्छे से मिलूंगी।

साची के जाते ही अपस्यु, आरव से बात करना शुरू कर दिया। मामला ये था कि जब साची पहुंची उससे थोड़े समय पहले ही आरव ने कॉल लगाया था। अभी वो अपस्यु से उसके तबीयत की जानकारी लिया ही था कि साची अा गई जिस वजह से दोनों को बीच में ही बात रोकनी परी।

आरव:- कहे भगा दिया इतनी जल्दी बेचारी को..

अपस्यु:- कुत्ता कहीं का, तुझे जरा भी संस्कार नहीं। क्या तुझे पाया नहीं की, दूसरों की ना तो बातें सुनी जाती है और ना ही वो क्या कर रहे है उसे देखने में कोई रुचि होनी चाहिए। साला मनहूस कहीं का, मेरी खुशियों पर ग्रहण लगाए बैठा है। चुपचाप वहीं रुक और इंतजार कर, मैं किसी को कॉल करूंगा तो वो तुम्हारे पास 120 करोड़ पहुंचा देगा। फिर आगे क्या करना है वो मैं तुम्हे बाद ने बताऊंगा। चल अब फोन रख।

यदि बात करते-करते बातों में अचानक बदलाव अा जाए फिर चाहे बदलवा नफरत भड़ा हो या प्यार भड़ा, ये संकेत होता है कि कुछ गड़बड़ है। फिर उनके अपने डिकोडिंग के तरीके थे, जैसे कि अपस्यु का कहना .. "दूसरों की बातें सुनना और उनको देखने में रुचि दिखाना".. मतलब ये था कि कोई देख भी रहा है और सुन भी रहा है।

और बस संकेत को समझते ही आरव तुरंत ही कॉल डिस्कनेक्ट कर सीधा बाथरूम पहुंच गया और कानों में एयरपो्ट लगाकर अपस्यु को कॉल मिलाया और साथ ही अपना मैसेंजर खोल लिया….

अपस्यु:- 2 लोग तुझे देख और सुन रहे है।

आरव संदेश भेजते हुए… "ठीक है, लोकेशन बता"

अपस्यु:- एक तेरे लेफ्ट विंडो से 22 डिग्री नॉर्थ.. तकरीबन 400 मीटर की दूरी पर, पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से नजर दिए है। दूसरा वेस्ट में, तकरीबन 500 मीटर की दूरी पर, एक हॉल्ट स्टेशन की छत से तुझ पर नजर बनाए है। दोनों के
स्नाइपर रायफल वैपन ड्रागुनोव एस वी डी 7.62।

आरव:- ठीक है होलोग्राम इमेज क्रिएट कर, बाकी मैं इनका बंदोबस्त करता हूं।

अपस्यु:- वैसे कौन सा वैपन तुझे वहां डिलीवर हुआ है?

आरव:- SVLK-14S “Twilight” .408 Cheytac और एक Glock 17 Pistol

अपस्यु:- ठीक है तू चकमा देकर बाहर निकल वहां से, लेकिन याद रखना की उस रिजॉर्ट के कुछ लोग उनके खबरी भी हो सकते है। बाकी मै पूरी नजर बनाए हुए हूं।

आरव:- ठीक है भाई, अब तू बस देखता जा…

अपस्यु वहां पर लगातार नजर बनाए हुए था। आरव के कहे अनुसार अपस्यु ने होलोग्राम इमेज क्रिएट कर सब सेट कर चुका था। आरव अपने साथ लाए रिफ्लेक्टर डिवाइस को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) से कनेक्ट कर दिया। अब आरव का प्रतिबिंब पूरे कमरे में इधर से उधर भटक रहा था। इधर बाथरूम में ही आरव ने अपने हुलिया में थोड़ा बहुत बदलाव किया और रेंगते हुए दरवाजे से बाहर निकला।

आरव सबको चकमा दे कर बाहर आ चुका था। उसने किराए की कार को स्टार्ट किया और बड़े ही सावधानी से ठीक उस शूटर के लोकेशन के पीछे पहुंच गया जो पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से उसपर नजर दिए हुए था… आरव अब घूमकर ठीक उसके झोपड़ी के पीछे पहुंच चुका था और फुर्ती दिखाते हुए पीछे से ही झोपड़ी के अंदर प्रवेश किया..

जबतक वो शूटर स्कोप से अपनी नजर हटा कर हरकत में आया, तबतक आरव की पिस्तौल उसके कनपटी पर लग चुकी थी। आरव ने उसे कुछ ना बोलने का इशारा कर, उसके जेब से फोन लिया और उस पर चल रहे कॉल को डिस्कनेक्ट कर दिया।

शूटर:- तुम्हे क्या लगता है उन्हें पता नहीं चला होगा। मैंने कोई आवाज़ नहीं की पर तुम जो ये तोड़ते-फोड़ते अंदर घुसे हो, क्या उसकी आवाज़ उन तक नहीं पहुंची होगी…

तभी सायलेंसर में दबी गोली चलने की आवाज और आरव हंसता हुआ… "जब जान पर बन आती है तो ऐसे ही कहानियां बनने लगते है। जब उनसब का नंबर भी अा ही रहा है, तो मुझे क्यों इस बात की फ़िक्र की उन्हे शक हुआ या नहीं हुआ। उन्हें पता चला या नहीं चला.. ट्रिगर दबाव खेल खल्लास, अब अगले का नंबर आने दो"
:o
bada research karke likh rahe ho lag raha hai :good:
x chat karne wala apsyu hi hoga akhir hacker ho hai :approve:
dono bhai milkar kya game khel rahe hai , dekhte hai aage :waiting:
 

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
1,966
3,399
159
kahe pe nigahai kahe pe nishana. :D

ye ghar par bethe bethe kona sa tear chalaya hai is ne ki aarav ke upar kon nazar rakha raha hai use pata hai :bat:

baki ka update kaha gol kar gaye ye bhi bata do ab :bat:
 

Avi12

Active Member
860
2,343
138
Bhai Nain ji aap ko shat shat naman??
Kuch saal pehle Pyar gham ya khushi padhi thi aapki, kai baar poori story padhi hai mene kam se kam 30 baar. Itna prabhavit tha me apki lekhni se. Aaj apki is story ko padh raha hu, sach me apki lekhni ko naman hai mera. Story bahut khoob likhi ja sir ji. Bas daily update dete rahiye
 
Top