Update:-15
खामोशी के कुछ पल थे और दोनों बड़े सुकून से एक दूसरे को देखे जा रहे थे, तभी गले की खराश की आवाज़ ने दोनों का ध्यान भंग किया। दोनों ने जब लावणी को देखा तो हड़बड़ा गए और जो वो कर रही थी उसे देखकर तो साची शर्मा कर भाग ही गई। दरअसल साची जब बिना पलकें झपकाए अपस्यु को निवाला बढ़ा रही थी तब निवाला मुंह के बदले नीचे गिर रहा था। लावणी ने जब ऐसा होते देखा तो वो नीचे थाली लगा कर वहीं बैठ गई।
एक बार जो साची ने दौड़ लगाई फिर सीधा अपने कमने में जाकर रुकी। पीछे से लावणी भी पहुंची, कई बार उसके कमरे के दरवाजे को खटखटाई, आवाज़ भी दी किंतु साची समझती थी कि उसे लावणी के द्वारा छेड़ा जाना है इसलिए दरवाजे पर आकर सिर्फ इतना ही कही की आज दरवाजा नहीं खुलेगा।
काफी खुश लग रही थी और इसी खुशी को प्रत्यक्ष दर्शाती उसने सबसे पहले तो एक मधुर संगीत बजाया…
पल भर ठहर जाओ, दिल ये संभल जाए
कैसे तुम्हें रोका करूँ,
मेरी तरफ आता हर ग़म फिसल जाए
आँखों में तुम को भरूं, बिन बोले बातें तुमसे करूँ
गर तुम साथ हो, अगर तुम साथ हो..
फिर अपनी दोनों बाहें फैलाए गोल-गोल घुमाती वो बिस्तर पर जा गिरी। दोनों बाहें फैलाए, आखें खुली छत को निहारती, सासें मध्यम-मध्यम और अंदर एक खुशनुमा एहसास जिसमें वो अपस्यु के ख्यालों में डूबी रही। उसे याद करते-करते फिर दिल में मीठी चुभन का वो एहसास…. "उफ्फ !!! कितने प्यारे हो तुम"।
साची अपनी खुशी बांटना चाह रही थी और इसी क्रम में उसने अपना लैपटॉप खोला और एफबी में किसी को खुशी कि ढेर सारी स्माइली पोस्ट करके उसके संदेश वापस आने का इंतजार करने लगी।
तकरीबन 2 मिनट बाद… संदेश वापस आया…
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Crazy boy:- Kya baat hai, itni jyada khushi. Feeling horney kya ???
Unknown girl (Sachi ki fake id name):- nope duffer, I think I am in love ???
Crazy boy:- Oh my god !!! Waise ladke se hi pyar hua na ??
Unknown girl :- ????
Crazy Boy:- ???
Unknown Girl:- ????
Crazy Boy :- Ok Solly to humari unknown madam ko kisi se pyar ho gaya hai
Unknown Girl:- Yassssssssssss Woohooooooo.. ☺☺☺ m very excited crazy boy..
Crazy Boy:- excited ho to X-chat karen kya (X-chat=sex chat)
Unknown Girl:- Huhhh !!! ???
Crazy Boy:- Ab kya hua ???
Unknown Girl:-Tumhare sath Q karun X-chat.
Crazy Boy:- Mere sath hi to karti thi tum X-chat. Bhul gayi kya.... "oh I am feeling horney, chalo kuch dhamal karte hain"
Unknown Girl:- Tab main relationship me nahi thi aur apni fantasy jine ke liye puri azad thi. Lekin ab main relation me hun.
Crazy Boy:- Hmmm !! Samjh gaya. Matlab tum mujhe bye-bye kahne aayi ho.
Unknown Girl:- kya main kewal X-chat hi tumhare sath karne aati thi aur bhi to baten hua karti thi..
Crazy Boy:- Kab ??? Upar ke chat dekh lo tum… jab bhi aayi ho bas itna hi… feeling horney.. feeling horney.. feeling horney… wo main hi to hun jisne har bar tumhare horney feeling ko apne typing ke dum par orgasms me badla hai.
Unknown Girl… Aukkat mat bhulo tum… virtual friend ho virtual friend ki tarah behave karo, jyada close hone ki jaroorat nahi hai.
Crazy Boy:- Anjaan hi sahi par 2 salon se lagatar hum jisse baat karte hain unke sath bounding ho hi jati hai. Sorry mujhe aaena dikhane ke liye. Tum ek raat aati aur 10 raten gayab ho jati, lekin main har raat tumhara jag kar intzar karta. Kewal is khyal se ki kahin main so gaya aur tum aa gayi, to jo ek mauka mila tha itne dino me, wo bhi hath se gaya aur na jane agla mauka kab mile. Thank you so much… Byeeeee..
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इधर उसने बाय कहा और उधर साची अपनी लैपी बंद करती हुई कहने लगी… "हुंह, बड़ा आया"… और फिर आराम से लेट कर, अपस्यु को याद करती, सात रंग के सपनों में खो गई।
जब से सुबह हुई, वो चहकती हुई इधर से उधर कर रही थी। कान बस अपनी मां के उस आवाज़ को सुनने के लिए तरस रहे थे जब अनुपमा उससे कहती की "बेटा उसे भी खाना देकर अा"…
इंतजार के बाद वो वक़्त भी अा ही गया जब अनुपमा उसे टिफिन देती हुई बोली… "जा उसे भी खाना दे अा"… अभी के लिए तो वो अपनी बाहर की उड़ान को अपने दिखावे के चादर तले ढक कर रखी थी, लेकिन जैसे ही वो अपार्टमेंट के लिफ्ट में पहुंची, बाहर से भी उतावली नजर आने लगी।
चहकती हुई वो अपस्यु के फ्लैट के ओर बढ़ रही थी, किंतु दरवाजे के निकट पहुंचने से पहले उसने एक बार फिर अपने अपने ऊपर एक दिखावा का चादर चढ़ाया और अपने हाव भाव को ठीक करती वो बेल बजाने लगी। दरवाजा खुला और साची अंदर।
दरवाजे के पास ही खड़ी होकर उसने एक पूरी नजर अपस्यु को देखा। उसका दिल किया की अभी उसके बगल में लेट कर उसे बाहों में भर लूं, लेकिन खुद के अंदर की झिझक और पहले अपस्यु के पहल के इंतजार ने उसके भावनाओ को बांधे रखा।
लेकिन वो होता है ना.. मन में किसी के लिए प्यार बसा हो या फिर नफरत चेहरे से समझ में आ ही जाती है, ठीक वही हो रहा था साची के साथ। लाख वो खुद के बंधे रखी थी किंतु उसके चेहरे की रौनक आज इतनी अलग थी कि अपस्यु दूर से ही उसे भांप गया।
एक बार फिर नजरों से नजरें मिलनी शुरू हुई लेकिन इस बार अपस्यु ने साची को यह कहकर जाने के लिए बोल दिया कि उसके कॉलेज जाने में देरी हो रही है। साची यूं तो जाना नहीं चाहती थी लेकिन रुक भी नहीं सकती थी। क्या कहती, तुम मुझे पसंद हो और मुझे तुम्हे छोड़ कर जाने का मन नहीं। दुविधा और विरोधाभास के साथ साची केवल ये सोच कर निकल गई की शाम को अाकर अच्छे से मिलूंगी।
साची के जाते ही अपस्यु, आरव से बात करना शुरू कर दिया। मामला ये था कि जब साची पहुंची उससे थोड़े समय पहले ही आरव ने कॉल लगाया था। अभी वो अपस्यु से उसके तबीयत की जानकारी लिया ही था कि साची अा गई जिस वजह से दोनों को बीच में ही बात रोकनी परी।
आरव:- कहे भगा दिया इतनी जल्दी बेचारी को..
अपस्यु:- कुत्ता कहीं का, तुझे जरा भी संस्कार नहीं। क्या तुझे पाया नहीं की, दूसरों की ना तो बातें सुनी जाती है और ना ही वो क्या कर रहे है उसे देखने में कोई रुचि होनी चाहिए। साला मनहूस कहीं का, मेरी खुशियों पर ग्रहण लगाए बैठा है। चुपचाप वहीं रुक और इंतजार कर, मैं किसी को कॉल करूंगा तो वो तुम्हारे पास 120 करोड़ पहुंचा देगा। फिर आगे क्या करना है वो मैं तुम्हे बाद ने बताऊंगा। चल अब फोन रख।
यदि बात करते-करते बातों में अचानक बदलाव अा जाए फिर चाहे बदलवा नफरत भड़ा हो या प्यार भड़ा, ये संकेत होता है कि कुछ गड़बड़ है। फिर उनके अपने डिकोडिंग के तरीके थे, जैसे कि अपस्यु का कहना .. "दूसरों की बातें सुनना और उनको देखने में रुचि दिखाना".. मतलब ये था कि कोई देख भी रहा है और सुन भी रहा है।
और बस संकेत को समझते ही आरव तुरंत ही कॉल डिस्कनेक्ट कर सीधा बाथरूम पहुंच गया और कानों में एयरपो्ट लगाकर अपस्यु को कॉल मिलाया और साथ ही अपना मैसेंजर खोल लिया….
अपस्यु:- 2 लोग तुझे देख और सुन रहे है।
आरव संदेश भेजते हुए… "ठीक है, लोकेशन बता"
अपस्यु:- एक तेरे लेफ्ट विंडो से 22 डिग्री नॉर्थ.. तकरीबन 400 मीटर की दूरी पर, पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से नजर दिए है। दूसरा वेस्ट में, तकरीबन 500 मीटर की दूरी पर, एक हॉल्ट स्टेशन की छत से तुझ पर नजर बनाए है। दोनों के
स्नाइपर रायफल वैपन ड्रागुनोव एस वी डी 7.62।
आरव:- ठीक है होलोग्राम इमेज क्रिएट कर, बाकी मैं इनका बंदोबस्त करता हूं।
अपस्यु:- वैसे कौन सा वैपन तुझे वहां डिलीवर हुआ है?
आरव:- SVLK-14S “Twilight” .408 Cheytac और एक Glock 17 Pistol
अपस्यु:- ठीक है तू चकमा देकर बाहर निकल वहां से, लेकिन याद रखना की उस रिजॉर्ट के कुछ लोग उनके खबरी भी हो सकते है। बाकी मै पूरी नजर बनाए हुए हूं।
आरव:- ठीक है भाई, अब तू बस देखता जा…
अपस्यु वहां पर लगातार नजर बनाए हुए था। आरव के कहे अनुसार अपस्यु ने होलोग्राम इमेज क्रिएट कर सब सेट कर चुका था। आरव अपने साथ लाए रिफ्लेक्टर डिवाइस को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) से कनेक्ट कर दिया। अब आरव का प्रतिबिंब पूरे कमरे में इधर से उधर भटक रहा था। इधर बाथरूम में ही आरव ने अपने हुलिया में थोड़ा बहुत बदलाव किया और रेंगते हुए दरवाजे से बाहर निकला।
आरव सबको चकमा दे कर बाहर आ चुका था। उसने किराए की कार को स्टार्ट किया और बड़े ही सावधानी से ठीक उस शूटर के लोकेशन के पीछे पहुंच गया जो पहाड़ पर बने एक झोपड़ी से उसपर नजर दिए हुए था… आरव अब घूमकर ठीक उसके झोपड़ी के पीछे पहुंच चुका था और फुर्ती दिखाते हुए पीछे से ही झोपड़ी के अंदर प्रवेश किया..
जबतक वो शूटर स्कोप से अपनी नजर हटा कर हरकत में आया, तबतक आरव की पिस्तौल उसके कनपटी पर लग चुकी थी। आरव ने उसे कुछ ना बोलने का इशारा कर, उसके जेब से फोन लिया और उस पर चल रहे कॉल को डिस्कनेक्ट कर दिया।
शूटर:- तुम्हे क्या लगता है उन्हें पता नहीं चला होगा। मैंने कोई आवाज़ नहीं की पर तुम जो ये तोड़ते-फोड़ते अंदर घुसे हो, क्या उसकी आवाज़ उन तक नहीं पहुंची होगी…
तभी सायलेंसर में दबी गोली चलने की आवाज और आरव हंसता हुआ… "जब जान पर बन आती है तो ऐसे ही कहानियां बनने लगते है। जब उनसब का नंबर भी अा ही रहा है, तो मुझे क्यों इस बात की फ़िक्र की उन्हे शक हुआ या नहीं हुआ। उन्हें पता चला या नहीं चला.. ट्रिगर दबाव खेल खल्लास, अब अगले का नंबर आने दो"