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Bhai.
Thanks so much.
I will definetely read it as I have started to get some time.
Purane episode bhi padhne hain aur un par apni prtikriya bhi deni hai.
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
अब आगे..
दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...
दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.
ऋतू: किस तरह.
दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.
फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.
ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.
फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....
और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.
दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?
लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?
दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.
दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.
लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?
दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?
लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.
दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?
लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.
कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?
दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.
फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....
क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.
दीपू: मैं समझा नहीं.
वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.
फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.
रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.
दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.
दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.
कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.
दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.
दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...
कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?
दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?
कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?
दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.
कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .
इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.
3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.
दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.
दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.
दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.
ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.
दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.
तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.
कविता: एक बात कहूँ.
वसु: बोल.
कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.
कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...
दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?
कविता: मतलब?
वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?
कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...
दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.
दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?
वसु: तो तुझे याद है वो बात.
कविता: कौनसी बात?
इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.
दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.
वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.
दीपू: हाँ याद है.
कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?
वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.
दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?
वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.
तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?
कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.
दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.
जन्मदिन
कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.
सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.
जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.
वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.
दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.
२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.
दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?
वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.
दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.
वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.
वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.
दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.
वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?
दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?
वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.
फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.
वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.
फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.
खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.
खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.
तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.
दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...
दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.
दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.
दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.
कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.
दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.
कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.
ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.
तोहफा
दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...
दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.
कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.
दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.
कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.
कविता: याने तुम आज रात को...
दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.
कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.
दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.
कविता: मतलब?
दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.
कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.
दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.
कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.
वसु: क्यों बुलाया है?
कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.
वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?
कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.
कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.
वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.
कमरे में:
कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.
वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.
दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.
वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.
जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.
पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.
दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.
दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.
वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.
दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.
वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.
5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?
वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.
दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.
दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.
वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.
दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.
वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.
देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.
कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.
10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.
आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.
दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.
दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.
दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.
वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.
दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.
दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.
वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.
दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.
वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.
वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.
दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.
वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.
5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.
कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.
वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.
दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.
वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.
थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.
इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.
१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.
अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...
वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.
दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.
Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
अब आगे..
दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...
दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.
ऋतू: किस तरह.
दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.
फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.
ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.
फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....
और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.
दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?
लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?
दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.
दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.
लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?
दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?
लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.
दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?
लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.
कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?
दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.
फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....
क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.
दीपू: मैं समझा नहीं.
वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.
फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.
रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.
दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.
दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.
कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.
दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.
दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...
कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?
दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?
कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?
दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.
कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .
इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.
3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.
दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.
दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.
दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.
ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.
दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.
तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.
कविता: एक बात कहूँ.
वसु: बोल.
कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.
कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...
दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?
कविता: मतलब?
वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?
कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...
दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.
दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?
वसु: तो तुझे याद है वो बात.
कविता: कौनसी बात?
इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.
दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.
वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.
दीपू: हाँ याद है.
कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?
वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.
दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?
वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.
तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?
कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.
दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.
जन्मदिन
कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.
सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.
जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.
वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.
दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.
२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.
दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?
वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.
दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.
वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.
वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.
दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.
वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?
दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?
वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.
फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.
वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.
फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.
खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.
खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.
तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.
दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...
दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.
दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.
दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.
कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.
दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.
कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.
ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.
तोहफा
दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...
दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.
कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.
दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.
कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.
कविता: याने तुम आज रात को...
दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.
कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.
दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.
कविता: मतलब?
दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.
कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.
दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.
कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.
वसु: क्यों बुलाया है?
कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.
वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?
कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.
कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.
वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.
कमरे में:
कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.
वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.
दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.
वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.
जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.
पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.
दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.
दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.
वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.
दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.
वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.
5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?
वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.
दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.
दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.
वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.
दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.
वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.
देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.
कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.
10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.
आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.
दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.
दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.
दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.
वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.
दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.
दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.
वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.
दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.
वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.
वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.
दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.
वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.
5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.
कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.
वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.
दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.
वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.
थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.
इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.
१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.
अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...
वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.
दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.
Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.
very very............................................................................................................................................................Nice Waiting for next update
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
अब आगे..
दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...
दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.
ऋतू: किस तरह.
दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.
फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.
ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.
फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....
और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.
दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?
लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?
दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.
दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.
लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?
दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?
लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.
दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?
लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.
कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?
दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.
फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....
क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.
दीपू: मैं समझा नहीं.
वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.
फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.
रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.
दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.
दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.
कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.
दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.
दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...
कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?
दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?
कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?
दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.
कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .
इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.
3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.
दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.
दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.
दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.
ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.
दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.
तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.
कविता: एक बात कहूँ.
वसु: बोल.
कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.
कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...
दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?
कविता: मतलब?
वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?
कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...
दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.
दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?
वसु: तो तुझे याद है वो बात.
कविता: कौनसी बात?
इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.
दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.
वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.
दीपू: हाँ याद है.
कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?
वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.
दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?
वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.
तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?
कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.
दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.
जन्मदिन
कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.
सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.
जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.
वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.
दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.
२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.
दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?
वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.
दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.
वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.
वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.
दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.
वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?
दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?
वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.
फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.
वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.
फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.
खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.
खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.
तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.
दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...
दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.
दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.
दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.
कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.
दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.
कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.
ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.
तोहफा
दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...
दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.
कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.
दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.
कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.
कविता: याने तुम आज रात को...
दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.
कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.
दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.
कविता: मतलब?
दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.
कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.
दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.
कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.
वसु: क्यों बुलाया है?
कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.
वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?
कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.
कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.
वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.
कमरे में:
कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.
वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.
दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.
वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.
जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.
पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.
दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.
दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.
वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.
दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.
वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.
5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?
वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.
दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.
दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.
वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.
दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.
वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.
देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.
कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.
10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.
आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.
दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.
दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.
दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.
वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.
दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.
दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.
वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.
दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.
वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.
वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.
दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.
वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.
5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.
कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.
वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.
दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.
वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.
थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.
इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.
१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.
अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...
वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.
दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.
Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
अब आगे..
दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...
दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.
ऋतू: किस तरह.
दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.
फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.
ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.
फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....
और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.
दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?
लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?
दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.
दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.
लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?
दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?
लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.
दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?
लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.
कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?
दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.
फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....
क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.
दीपू: मैं समझा नहीं.
वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.
फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.
रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.
दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.
दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.
कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.
दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.
दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...
कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?
दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?
कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?
दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.
कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .
इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.
3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.
दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.
दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.
दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.
ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.
दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.
तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.
कविता: एक बात कहूँ.
वसु: बोल.
कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.
वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.
कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...
दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?
कविता: मतलब?
वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?
कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...
दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.
दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?
वसु: तो तुझे याद है वो बात.
कविता: कौनसी बात?
इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.
दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.
वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.
दीपू: हाँ याद है.
कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?
वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.
दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?
वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.
तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?
कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.
दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.
जन्मदिन
कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.
सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.
जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.
वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.
दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.
२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.
दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?
वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.
दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.
वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.
वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.
दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.
वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?
दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?
वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.
फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.
वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.
फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.
खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.
खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.
तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.
दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...
दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.
दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.
दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.
कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.
दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.
कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.
ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.
तोहफा
दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...
दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.
कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.
दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.
कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.
कविता: याने तुम आज रात को...
दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.
कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.
दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.
कविता: मतलब?
दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.
कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.
दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.
कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.
वसु: क्यों बुलाया है?
कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.
वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?
कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.
कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.
वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.
कमरे में:
कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.
वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.
दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.
वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.
जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.
पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.
दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.
दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.
वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.
दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.
वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.
5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?
वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.
दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.
दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.
वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.
दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.
वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.
देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.
कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.
10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.
आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.
दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.
दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.
दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.
वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.
दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.
दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.
वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.
दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.
वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.
वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.
दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.
वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.
5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.
कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.
वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.
दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.
वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.
थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.
इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.
१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.
अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...
वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.
दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.
Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.