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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Should I include a thriller part in the story or continue with Romance only?

  • 1) Have a thriller part

    Votes: 58 38.9%
  • 2) Continue with Romance Only.

    Votes: 101 67.8%

  • Total voters
    149

Mass

Well-Known Member
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259
Mass bhai aapke next update ka wait kar rahe hai besabri se... Please jaldi update de do yaar
Bhai, thoda busy hoon...lekin Sunday tak mostly update post kar doonga. Much Thanks for waiting...

Prince1326
 

Gurdep

Well-Known Member
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33rd Update (सेक्सी मालिश और प्यार सास बहु के बीच)



दीपू: मत पुछा.. बहुत मजा आया. अब दीपू को भी अच्छा लगने लगता है और उसका मन भी अब हल्का हो जाता है जो इतने दिनों से भारी था. अब वो अपने पुराने रूप में आ गया था... और वो सोचता है की वो कल ही निशा से बात करेगा और सब कुछ ठीक कर देगा…. अब उसके मन में कोई उलझन या दुविधा नहीं थी….

अब आगे..

अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की दिव्या पूरी नंगी उसे पकड़ कर मस्त गहरी नींद में सो रही है. उसको देख कर दीपू को बड़ा प्यार आता है और फिर प्यार से उसका माथा चूम कर बाथरूम चला जाता है. आज उसका मन बहुत हल्का और अच्छा लग रहा था क्यूंकि पिछली रात दिव्या ने उसको चूस चूस कर हल्का कर दिया था. नाहा धो कर फ्रेश होने के बाद वो निशा के कमरे में जाता है तो देखता है की निशा भी गहरी नींद में है. उसे रात भी ठीक से नींद नहीं आयी थी तो वो काफी देर बाद रात में सोई थी. वो निशा को उस हालत में देख कर कमरे से बाहर आ जाता है और किचन में जाता है जहाँ वसु सब के लिए चाय बना रही थी.

वो वसु के पीछे जाकर उसे पीछे से अपनी बाहों में लेता है और कहता है चाय से पहले उसे थोड़ा मीठा चाहिए. वसु उसकी बात का मतलब समझ जाती है और पीछे मुड़ते हुए उसको देख कर कहती है... आज मेरा बेटा मुझे पुराने रूप में दिख रहा है और दीपू को बाहों में लेकर रोती है. दीपू भी बात को समझते हुए वसु को जोर से पकड़ कर उसे दिलासा देता है और कहता है की वो सब ठीक कर देगा. वसु को इस हालत में देख कर उसने जो बात १ Min पहले कहा था.... वो भूल जाता है और उसके आंसूं पोछता है. वसु भी फिर अपने आंसूं पॉच कर कहती है... क्यों मीठा नहीं चाहिए क्या?

दीपू मना कर देता है क्यूंकि इस हालत को अच्छे से समझता है. इतने में वहां कविता भी आ जाती है और वो भी वसु को गले लग कर रोती है. दीपू दोनों को अपनी बाहों में लेता है और उसकी आँखों में भी आंसू आ जाते है. फिर थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को संभालती है क्यूंकि वो अब इस घर की सबसे बड़ी थी और उसे ही अब घर को संभालना था. फिर सब चाय पी कर बातें करते है.

थोड़ी देर बाद दीपू फिर से निशा के कमरे में जाता है तो वो तभी फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आती है और दीपू को देख कर वो दौड़ कर उसके गले लग जाती है और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है. आज काफी दिनों बाद दोनों मिले थे और निशा अपने आप को रोक नहीं पाती और दीपू की बाहों में रोती रहती है.

दीपू: चुप हो जा निशा.... मुझे पता है हो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ. लेकिन अब हम कुछ नहीं कर सकते.

निशा की रोने की आवाज़ सुन कर बाकी लोग भी कमरे में आ जाते है और दोनों को देख कर उनकी आँखें भी भर आती है.

निशा: ये सब कैसे हुआ भाई? मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ होगा. इस दुनिया में मैं सिर्फ २ लोगों से ही प्यार करती हूँ और भगवान् ने मुझसे एक को छीन लिया है और रोते रहती है.

दीपू: चुप हो जा. मैं हूँ ना.... सब ठीक कर दूंगा. अगर तू ही ऐसे रहेगी तो आंटी और माँ कैसे ठीक से रह पाएगी.

अब आंटी को तुझे ही संभालना है. दिनेश तेरा पति था तो वो आंटी का बेटा भी था. सोच उनके ऊपर क्या गुज़र रही होगी. इन सब बातों में वहां का वातावरण और भी दुःखमयी हो जाता है.

दीपू फिर निशा को अलग कर के उसे बिस्तर पे बिठा देता है. निशा अपनी आँखें साफ़ करते हुए दीपू से पूछती है की सब कैसे हुए. दीपू को लगता है की उसे सब बता देना चाहिए और उस एक्सीडेंट के बारे में थोड़ा उसे और सब को बता देता है.

दीपू की बातें सुनकर किसी को कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती. फिर दीपू ही बात शुरू करता है.

दीपू: सुन निशा जैसे माँ ने बताया है अब आंटी भी रोज़ ऑफिस आएगी और मेरा साथ देगी. दिनेश भी यही चाहता था की हम अपने कंपनी को और आगे बढाए जो मैं उसे पूरा करने वाला हूँ. हो सके तो तुम भी कभी कभी आ जाना. तेरे लिए भी अच्छा रहेगा. और दीपू ये बात बोलते हुए वो ऋतू की तरफ देखता है. वो कुछ नहीं कहती तो वसु उसकी तरफ से हाँ कह देती है.

फिर निशा भी अपने आप को संभालती है और क्या करना है उसके बारे में सोचती रहती है. उस दिन और कुछ नहीं होता और सब अपने काम में बिजी हो जाते है.

दो दिन बाद ऋतू वसु से कहती है

ऋतू: वसु अब हम अपने घर चले जाएंगे. यहाँ अब बहुत दिन से रह रहे है. जैसे दीपू ने कहा अब जो हो गया उसे तो बदला नहीं जा सकता लेकिन ज़िन्दगी भी रुक नहीं सकती.

ऋतू के इस बात पे वसु कुछ नहीं कह पाती और कहती है की १- २ दिन और रुक जाए उनके घर. लेकिन ऋतू कहती है की २ दिन बाद तो जाना ही होगा तो आज ही क्यों नहीं. ऋतू फिर निशा को भी बता देती है तो वो भी तैयार हो जाती है. वसु दीपू को भी ये बात बताती है तो १- २ घंटे बाद सब लोग उनको छोडने उनके घर जाते है. ऋतू के घर के अंदर जाते है ऋतू और निशा को दिनेश की फिर याद आती है क्यूंकि आज वो अपने घर काफी दिनों बाद आये थे) तो फिर से उनकी आँखें नम हो जाती है. इस बार कविता ऋतू को संभालती है तो दिव्या निशा को. फिर एक घंटे बाद दीपू और बाकी लोग वहां से निकल जाते है और रह जाते है ऋतू और निशा अपने घर में....

कुछ दिन ऐसे ही बीत जाते है और अब धीरे धीरे सब नार्मल होने लगता है. जहाँ दीपू वसु और बाकी लोग भी थोड़ा सामान्य हो जाते है वहीँ ऋतू और निशा अभी भी दिनेश की याद में ही रहते है. उनके जाने के बाद ऋतू निशा से कहती है की वो भी उसके साथ ही सो जाए लेकिन निशा थोड़ा शर्माती है और कहती है की कुछ दिन उसे समय दे. जब वो भी थोड़ा नार्मल हो जायेगी तो वो खुद उनके कमरे में सोने आएगी. दोनों ऋतू और निशा अपने अपने कमरे में रोज़ रात को सोते है लेकिन एक दुसरे के जाने बिना दोनों अपनी गर्मी में तड़पते रहते है. जहाँ निशा दिनेश को याद करके अपनी चूत मसलते हुए अपनी गर्मी निकालने की कोशिश करती है वहीँ ऋतू भी अपनी बरसों से दबी हुई प्यास को रोक नहीं पाती और वो भी अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की काश वो अभी इस वक़्त एक मर्द की बाहों में हो...

वहीँ दीपू के घर में भी अब नार्मल हो जाता है और दीपू भी अब रोज़ रात को मजे करता है और लेता भी है. वसु कविता और दिव्या भी अब रोज़ उसके लंड पे झूलते रहते है लेकिन रह जाती है तो मीना और एक तरह से लता भी. उसे (मीना ) भी अब यहाँ आये हुए काफी दिन हो गए थे लेकिन यहाँ के हालत ही ऐसे थे की उसके मन में भी सेक्स की भावना नहीं आयी थी. लेकिन जब ऋतू और निशा वापस चले गए और सब नार्मल हो गया और घर के बाकी लोग भी मजे कर रहे है तो अब फिर से मीना के मन में भी अब वो भावनाएं जागने लगी थी लेकिन वो अपनी माँ कविता से कहने से शर्माती थी भले ही सब को पता था की मीना वहां क्यों है. पिछले दिनों में घर का माहौल ही ऐसा था की किसी की उस पर ज़्यादा नज़र भी नहीं गयी थी और ये नार्मल से बात थी जिसे मीना भी समझती थी.

वही हाल लता का भी था. वो तो पिछली बार दिव्या और दीपू को देखी थी मजे करते हुए. और अब तो रोज़ उनको सुबह देख कर थोड़ी सी जलन भी होती थी उसको क्यूंकि दीपू की तीनो पत्नियों के चेहरे पर एक अलग ही चमक नज़र आती थी क्यूंकि दीपू तो उन्हें बहुत खुश रखता था. लता ने सोचा की एक बार वो इस बारे में वसु से बात करेगी...

एक दिन रात को निशा को प्यास लगती है तो वो देखती है की उसके कमरे में उस दिन पानी नहीं रखा था तो वो पानी पीने किचन में जाती है. पानी पीकर जब वो अपने कमरे में जा रही थी तो वो ऋतू के कमरे में जाकर उनको एक बार देख कर अपने कमरे में वापिस जाने की सोचती है और यही सोच के साथ वो ऋतू के कमरे की तरफ चली जाती है. ऋतू को इस बात का कभी एसएस नहीं था की निशा उसके कमरे के तरफ कभी आएगी.... इसीलिए उसने कमरे का दरवाज़ा सिर्फ बंद किया था लेकिन अंदर से उसने कुंडली नहीं लगाई थी.

निशा जब वो दरवाज़े के पास आकर उसको थोड़ा खोलने की कोशिश करती है तो दरवाज़ा खुल जाता है और अंदर नाईट लैंप की रौशनी में कमरे में थोड़ी रौशनी थी और निशा अंदर का नज़ारा देख कर मन में सोचती है “हम दोनों की हालत एक जैसे ही है... दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है....” क्यूंकि ऋतू अपनी आँखें बंद किये हुए अपनी Nighty को कमर तक उठाये अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत मसल रही थी और बड़बड़ाये जा रही थी.

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निशा वो नज़ारा देख कर चुपके से बहार आकर दरवाज़ा बंद कर देती है लेकिन वो नज़ारा देख कर वो भी बहक जाती है और बगल में कड़ी होकर वो भी अपनी चूत मसलते रहती है. थोड़ी देर में जब उसको थोड़ा होश आता है तो वो अपने आप को ठीक कर के मन में ही हस्ती है लेकिन फिर उसे एक बात का ख्याल आता है की वो तो दिनेश की बारे में सोच कर गरमा जाती है और अपनी चूत मसलते रहती है.... लेकिन माजी का क्या... किसके बारे में वो सोच रही है....

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कुछ दिन बाद जैसे दीपू ने कहा था ऋतू भी अब ऑफिस जाना शुरू कर दिया था. ऋतू को ऑफिस में देख कर दीपू को भी बहुत अच्छा लगा. क्यूंकि ऋतू काफी दिनों बाद ऑफिस आयी थी तो दीपू उसे अपने ऑफिस में जो कुछ भी हुआ था (जो दिनेश और दीपू ने इन पिछले महीनो में काम किया था) वो ऋतू को बताता है.

ऋतू: बहुत अच्छा दीपू. तुम दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है.

दीपू: हाँ आंटी... जैसा मैंने और दिनेश ने सोचा था वैसे ही और आगे काम होगा और अपना बिज़नेस बढ़ेगा. ऋतू ये बात सुनकर खुश हो जाती है और अपना काम करने लगती है.


कुछ दिन बाद:

कुछ दिन बाद निशा अपने घर को सफाई के चलते झाड़ू पोछा करती है और किचन में अपना काम करती रहती है.

उस वक़्त ऋतू ऑफिस से हर आती है और निशा को बुलाती है... निशा बेटी...वो इतना ही बोल पाती है की उसके पैर फिसल जाते है और ज़मीन पे धड़ाम से गिर जाती है. वो इसलिए की ज़मीन अभी भी थोड़ी गीली थी निशा के पोछने से जिसका ऋतू को पता नहीं था. ज़ोर की आवाज़ की वजह से निशा दौड़ते हुए बाहर आती है तो उसे थोड़ी घबराहट होती है क्यूंकि ऋतू नीचे फर्श पे पड़ी हुई थी और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी.

निशा: माँ क्या हुआ? मुझे पता नहीं था की आप आ रही हो... अभी मैंने घर पोछा था और फर्श थोड़ी गीली थी. ऋतू को अब भी थोड़ा दर्द हो रहा था तो निशा आकर उसे उठाती है और सोफे पे बिठा देती है. ऋतू के गिरने से उसकी कमर और पेट की जगह पर दर्द हो रहा था.

ऋतू अपने आप को संभालती है और फिर निशा उसे पानी देती है. ऋतू को थोड़ा आराम मिलता पर ज़्यादा नहीं. वो थोड़ी मुश्किल में रहती है लेकिन निशा को बताती नहीं. फिर निशा अपना काम करती है और रात को दोनों खाना खाने के बाद दोनों अपने कमरे में सोने चले जाते है. (क्यूंकि ऋतू ने निशा को नहीं बताया था निशा को पता नहीं लगा की ऋतू को अब भी कमर और पेट में दर्द कम नहीं हुआ है). जब ऋतू को दर्द कम नहीं होता तो वो निशा को अपने कमरे में बुलाती है. निशा भी थोड़ी परेशानी में आकर पूछती है की क्या हुआ है?

ऋतू: बेटा मैंने तुम्हे बताया नहीं लेकिन मुझे कमर और पेट में अब भी दर्द कर रहा है शाम को गिरने से.

निशा: माँ आपने पहले क्यों नहीं बताया? हम डॉक्टर के पास हो आते.

ऋतू: मुझे लगा था की दर्द कम हो जाएगा. इसीलिए तुम्हे बताया नहीं और डॉक्टर के पास नहीं गए. बेटा थोड़ा Jhandu बाम लगा दे... शायद थोड़ा आराम मिल जाए.

निशा: क्यों नहीं माँ... अगर आप पहले बता देते तो मैं आपको पहले ही बाम लगा देती.

निशा फिर थोड़ी मुश्किल से अपना हाथ निशा की कमर और पेट पे ले जाकर बाम लगाती है. कुछ देर उसे ठीक लगता है लेकिन फिर से ऋतू को थोड़ा दर्द महसूस होता है और वो निशा से कहती है की एक और बार फिर से बाम लगा दे.

निशा: माँ जी आप बुरा ना माने तो फिर से बाम लगाने से अच्छा है की मैं आपकी कमर को एक बार मालिश कर दूँ. मालिश करने से आपको थोड़ा आराम भी मिल जाएगा और आज रात मैं आपके पास ही सोती हूँ.

ऋतू को समझ नहीं आता की वो निशा को क्या जवाब दे. निशा नहीं मानती और कहती है की वो ऋतू की कमर की मालिश करेगी.

ऋतू: वो तो ठीक है बेटा लेकिन मालिश कैसे करोगी?

निशा: आप अपना मैक्सी उतार दे... मैं थोड़ा तेल हलकी सी गरम करके लाती हूँ और फिर तेल से अच्छी मालिश करती हूँ.. ऋतू मना करती है लेकिन निशा मानती नहीं तो आखिर में ऋतू कहती है: बेटा वो तो ठीक है लेकिन मैंने मैक्सी के अंदर कुछ नहीं पहना है.

निशा: धीरे से उसके कान में: तो क्या हुआ माँ जी... आपके पास जो है... ऐसा बोल कर निशा रुक जाती है.

ऋतू: लेकिन बेटा मुझे थोड़ी शर्म आती है.

निशा: मैं समझ सकती हूँ माँ जी. लेकिन अब इस घर में हु दोनों के सिवा और कोई नहीं है तो फिर आपको मुझसे क्या शर्माना? अगर आपको फिर भी शर्म आती है तो मैं आपको एक टॉवल दे देती हूँ. आप उसे ओढ़ लीजिये.

तब तक मैं तेल भी ले आती हूँ और निशा किचन में चली जाती है तेल लाने के लिए. उसके जाते ही ऋतू भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो आगे जाकर अपने आपको आईने में एक बार देख कर हस देती है की उस बदन इस उम्र में भी एकदम गदराया हुआ है. काले लम्बे बाल जो उसकी कमर तक आते थे.. उसकी चूचियां अभी भी एकदम ठोस थी और उनमें अभी भी कोई लचक नहीं थी. उसका पेट एकदम सपाट था जिसमें कोई चर्बी नहीं थी. एकदम गहरी और कामुक नाभि और उसकी टांगों के बीच एकदम पतली से लकीर के माफिक एकदम बंद चूत जो बहुत दिनों से चुदी या खुली नहीं थी.

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वो फिर एक बार पीछे मुड कर देखती है तो पाती है की उसकी गांड भी एकदम मस्त उठी हुई है. फिर वो हस्ते हुए बिस्तर पे लेट जाती है और अपना टॉवल कमर पे धक् लेती है. वो ऊपर से नंगी ही थी लेकिन अपनी गांड और पैरों को टॉवल से ओढ़ ली थी. वो अभी भी थोड़ी असहामन्जस में थी लेकिन उसका दर्द बी ही कम नहीं हुआ था तो वो वैसे ही लेट कर निशा का इंतज़ार करती है.

निशा फिर थोड़ी देर बाद एक कटोरे में तेल लेकर आती है लेकिन वो कमरे में आने से पहले वो भी अपने कपडे बदल लेती है और वो भी एक मैक्सी पहन कर आती है और वो भी ऋतू की तरह अंदर और कुछ नहीं पहना था.


तेल मालिश

कमरे में आते ही निशा ऋतू को देखती है तो उसके चेहरे पे हलकी सी हसी आ जाती है.

ऋतू: आ गयी बेटा?

निशा: हाँ माँ तेल लेकर आयी हूँ. आपकी अच्छे से मालिश कर दूँगी तो आपका दर्द भी दूर हो जाएगा.

ऋतू: मैं भी यही चाहती हूँ बेटा की ये दर्द जल्दी चला जाए. मुझे सोने में भी मुश्किल हो रही है.

निशा: आप चिंता मत करिये. आपको जल्दी ही आराम मिलेगा. निशा फिर ऋतू के पीछे आती है और अपने दोनों पैर अलग कर के ऋतू के जाँघों के बीच आकर थोड़ा तेल को अपने हाथ में मलती है और थोड़ा तेल को ऋतू के कमर पे डालती है.

निशा: यहीं ना माँ?

ऋतू: हाँ बीटा... वहां से थोड़ा नीचे तक.

निशा: ठीक है.

और निशा धीरे धीरे ऋतू की कमर पे हाथ फेरते हुए मलती है. जब निशा ऐसा कर रही थी तो ऋतू को बड़ा सुकून मिल रहा था और वो अपने मुँह से हलकी सी सिसकारी भी लेती है.

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निशा धीरे धीरे मालिश करती रहती है और इसमें ऋतू को भी अब थोड़ा आराम मिल रहा था. निशा अपने हाथ को और थोड़ा नीचे ले जाती है मालिश करते वक़्त तो उसे टॉवल बीच में आ जाता है और ठीक से वो ऋतू की कमर को मल नहीं पाती.

निशा कुछ सोचती है और कहती है: माँ थोड़ा नीचे मालिश करना है तो ये टॉवल बीच में आ रहा है. इसे निकाल दूँ क्या?

ऋतू को जब ये मालिश थोड़ा अच्छा लग रहा था तो वो निशा की बात सुनकर अपना सर उठा कर कहती है.

ऋतू: बेटा अगर तू इसे निकल देगी तो कैसे... इतना बोल कर रुक जाती है जैसे कहना चाहती हो की वो पूरी नंगी हो जायेगी.

लेकिन ऋतू को थोड़ा डर था की अगर निशा उसे पूरी नंगी कर देगी तो उसे उसकी चूत भी दिख जायेगी जो की निशा की मालिश की वजह से वो भी थोड़ी उत्तेजित हो गयी थी और अनजाने में ही उसकी चूत ने थोड़ा पानी बहाना शुरू कर दिया था. बात ये तो ही बहुत सालों बाद किसीने ऋतू को इस तरह छुआ था और वो भी थोड़ी कामुक तरीके से.

निशा समझ जाती है और झुक कर उसके कान में कहती है: यहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं है. मैं तो आपकी बेटी की तरह ही हूँ. मुझसे क्या शर्माना. और वैसे भी जब मैं आपकी कमर मालिश कर रही हूँ तो इसी तरह से आपके पैर भी मालिश कर देती हूँ. ऋतू इस बात से कुछ नहीं कह पाती और हाँ कह देती है क्यूंकि वो भी थोड़ी थकी हुई थी और पैरों की मालिश की बात सुनकर वो हाँ कह देती है.

ऋतू के हाँ कहने के साथ ही निशा उसका टॉवल निकल कर वो ऋतू को पूरा नंगा कर देती है और उसकी उठी हुई गांड को देख कर मन में सोचती है: क्या मस्त गांड है...वो फिर से तेल लेकर इस बार और अच्छे से मालिश करती है और वो अब कमर से लेकर गांड से होते हुए पैरों की भी मालिश करने लगती है. ऋतू को पहले थोड़ा अलग लगा लेकिन अब उसे भी अब मजा आने लगा क्यूंकि उसे भी अब बहुत सुकून मिल रहा था.

निशा ऐसे ही मालिश करते हुए उसकी जाँघों को भी मालिश करती है और ऐसा करने के साथ ही उसका हाथ उसके चूत के बहुत करीब पहुँच जाता है.

उसका हाथ वहां आते ही ऋतू भी एक सिसकारी लेती है और भले ही वो हलकी थी लेकिन कमरे के सुनसान माहौल में वो आवाज़ निशा को भी सुनाई देती है.

निशा: कैसे लग रहा है माँ?

ऋतू: बहुत अच्छा लग रहा है बेटा. मुझे नहीं पता था की तू इतनी अच्छी मालिश भी करती है. इस बात पे निशा कुछ नहीं कहती और निशा मालिश करते हुए वो ऋतू की गांड को भी अच्छे से मालिश करती है.

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वहां करते वक़्त उसे वहां का भूरा सिकुड़ा हुआ छेड़ दीखता है जो थोड़ा बंद और खुल रहा था जो इस बात का प्रमाण था की ऋतू को भी अपनी गांड पे मालिश अच्छी लग रही है और साथ ही ऋतू भी धीमी गति से आंहें भर रही थी.

जब वो ऋतू की जाँघों पे अपना हाथ रख कर मालिश करती है तो उसके हाथ में कुछ चिपचिपा लगता है. ये और कुछ नहीं बल्कि ऋतू की चूत का पानी था जिसे निशा बहुत अच्छे से पहचान गयी क्यूंकि वो भी ऐसे पानी से बहुत वाकिफ थी लेकिन कुछ नहीं बोली. वो फिर से इस बार ऋतू का पूरा पीछे का बदन को अच्छे से मालिश करती है... कन्धों से लेकर पैर तक. जब वो कन्धों और गले के पीछे मालिश करती है तो ऋतू कहती है... तूने तो सच में मुझे बहुत आराम दिया है बेटी. ऐसे ही मालिश थोड़ी और कर दो. मुझे भी बड़ा सुकून मिलेगा.

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निशा: आप चिंता मत कीजिये माँ... आज के बाद आप मुझे रोज़ मालिश करने को बोलोगी और हस देती है. इस बात पे ऋतू भी हस देती है.

10 -15 Min तक ऐसे ही मालिश करती है और इस बीच निशा भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो भी नंगी ही ऋतू की मालिश करती है. क्यूंकि ऋतू का चेहरा दूसरी तरफ था वो देख नहीं पाती की निशा भी पूरी नंगी हो गयी है.

निशा: माँ जी अब पलट जाईये. आपके पेट पे भी अच्छे से मालिश कर देती हूँ. आपको और अच्छा लगेगा.

ऋतू ये बात सुनकर कहती है... इसकी ज़रुरत नहीं है बेटा. कमर तक ही ठीक है.

निशा: ऐसे कैसे माँ जी? मुझे पता है जब आप गिरी थी तो आपको कमर और पेट में दर्द हो रहा था. मैं आपकी पेट भी मालिश कर देती हूँ तो आपको अच्छा लगेगा. ऋतू कुछ नहीं कह पाती तो निशा उसके बदन से उठ कर थोड़ा अलग हो जाती है जिससे ऋतू को पलटने में आसानी हो जाती है.

जब वो पलट कर निशा को देखती है तो उसे बहुत आश्चर्य होता है की निशा भी उसकी तरह नंगी है.

ऋतू: बेटा तुमने कपडे क्यों निकल दिए?

निशा: अगर मैं कपड़ों में रह कर मालिश करती तो मेरे कपडे भी तेल की वजह से खराब हो जाते. आप चिंता मत करिये. आपका दर्द अब जल्दी ही निकल जाएगा.

ऋतू फिर निशा के सामने पलट कर पीठ के बल लेट गयी तो उसकी आँखों में एकदम शर्म थी जिसकी वजह से वो अपनी आँखें नीचे कर लेती है क्यूंकि दोनों को पता था की ऋतू की मस्त ठोस चूचियां उसके उत्तेजित होने से एकदम तन गए है और उसके गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे जैसे कह रहे हो को कोई इसको मुँह में लेकर अच्छे से चूसो और काटो..

निशा ये बात समझ जाती है लेकिन कुछ नहीं करती. निशा फिर तेल लेकर उसकी मस्त गहरी नाभी पे डालती है मालिश करने के लिए और जैसे ही निशा ऐसे करती है ऋतू अपने आप को रोक नहीं पाती और ज़ोर से सिसकी लेती है.

निशा: अनजान बनते हुए भले ही उसको पता था... क्या हुआ माँ?

ऋतू: कुछ नहीं बेटा... और शर्म से चुप हो जाती है.

निशा फिर ऋतू के पेट और नाभि को अच्छे से मालिश करते हुए ऊपर आती है उसकी चूची की तरफ. ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा अपना हाथ उसके चूची के ऊपर से ले जाकर गले और कंधे और गले पे मालिश करती है जिसकी उम्मीद ऋतू को नहीं थी. ऋतू को लगा था की निशा उसकी चूचियां मालिश करेगी. निशा के ऐसे मालिश करने से अब ऋतू को भी बहुत अच्छा लग रहा था.

वहां पे अच्छे से मालिश करने के बाद निशा फिर से अपने हाथ में तेल दाल कर इस बार उसकी चुहियों की तरफ बढ़ती है तो ऋतू को पता चल जाता है तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ पे रख कर मना करने की कोशिश करती है लेकिन वो भी धीरे से. जैसे वो एक दिखावा हो. निशा समझ जाती है और वो ऋतू का हाथ हटा कर अपने हाथ को ऊपर लेकर उसकी चूची पे तेल डाल के अच्छे से मसलती है. अब ऋतू से भी रहा नहीं जाता तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ के ऊपर रख कर खुद ही ज़ोर से उसकी चूची दबा देती है.


मालिश बदल गया प्यार में…

ऋतू: हाँ बेटा अच्छे से मसलो. बहुत सालों बाद किसीने इसे छुआ है. निशा एक हाथ से उसकी एक चूची को दबाती और मसलती है तो वो अपने दुसरे हाथ को नीचे ले जा कर उसकी चूत को छूती है जो रस से बह रहा था और वो रस निशा के उँगलियों पे लग जाता है.

निशा वो उंगलियां निकाल कर ऋतू की आँखों में देखते हुए वो उंगलियां देखती है जो पूरी गीली थी और उसे अपने मुँह में लेकर चाट लेती है. ऋतू की आँखें तो शर्म से एकदम लाल हो जाती है और अपनी आँखें बड़ी करती हुई वो निशा को देखती रहती है.

ऋतू थोड़ा शर्माते हुए: तू क्या कर रही है?

निशा: वही जो दिनेश हमेशा मेरे साथ करता है और हस देती है ….लेकिन इसमें शर्माने की कोई बात नहीं हैं.

निशा ऋतू की तरफ देखती है तो ऋतू की आंखों में थोड़ी बेबसी और वासना भी नज़र आती है जैसे कह रही हो की वो भी बहुत प्यार के लिए तरस रही है.

निशा झुक कर अपने होंठ ऋतू के होंठों से मिलाती है तो ऋतू को थोड़ी शर्म आती है और होंठ बंद ही रखती है.

निशा: लगता है बहुत सालों से आपने किसी को चूमा नहीं है.

ऋतू अपनी आँखें अभी भी बंद करते हुए... कौन होगा जिसे मैं चूमू... दिनेश के पिता तो बहुत सालों पहले मुझे छोड़ के चले गए थे.

निशा: आपकी बात भी सही है. मैं आपको बताती हूँ की कैसे चूमते है. आप अपनी आँखें खोले और अब हम दोनों के बीच में कोई शर्म नहीं रेहनी चाहिए. हम दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है. आप भी जानती है की हम दोनों बहुत प्यासी है ख़ास कर के जब से दिनेश चला गया है.

निशा ऐसे बोलते हुए फिर से वो ऋतू को चूमती है तो इस बार ऋतू उसका साथ देती है और दोनों पहले धीरे धीरे लेकिन 1 Min के अंदर ही दोनों एक प्रगढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों अपनी जुबां एक दुसरे के मुँह में डाल कर अपना रस आदान प्रदान करते है.

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निशा ऋतू को चूमते हुए अपने हाथ से इस बार उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाती है तो ऋतू के मुँह से सिसकारी निकलती है लेकिन वो निशा के मुँह में ही दब जाती है.

5 Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपनी सांसें संभालते हुए अलग होते है तो इस बार निशा ऋतू की आँखों में एक नया ख़ुशी का अहसास देखती है.

ऋतू: बहुत सालों बाद किसीने मुझे इतने अच्छे से चूमा हैं बेटा.

निशा: ये तो कुछ भी नहीं है माजी. आज आपको और मज़ा दूँगी. आपक देखते रहो.

ऋतू को इस बात का पता चल जाता है और आँखों से जैसे पूछती है की आगे और क्या हो सकता है. अब दोनों के चेहरे एक दुसरे के बहुत पास थे और निशा ऋतू से कहती है...

निशा: एक राज़ की बात बताओं.

ऋतू: क्या?

निशा: आपको दीपू के बारे में क्या पता है?

ऋतू: इसमें क्या है. वो बहुत होनहार लड़का है और अपनी बीवियों को बहुत खुश रखता है.

निशा: आपकी बात तो सही है लेकिन उसने किस से शादी की है?

ऋतू: वो तो तुम्हारी मम्मी और मौसी से शादी की है. तो इसमें राज़ की क्या बात है?

निशा: राज़ ये है की जब मैं और दिनेश हनीमून पे गए थे तो उसने मुझे बताया था की उसने आपको बहुत तड़पते हुए देखा है.... ख़ास कर के प्यार और जिस्म के प्यार की तड़प.

ऋतू निशा की ये बात सुनकर कुछ नहीं कहती.

निशा: और दिनेश भी दीपू की तरह आपसे शादी करना चाहता था और वो मुझसे ये बात बतायी और मुझसे मेरी तरफ से जैसे परमिशन मांग रहा था की वो आपसे शादी करेगा और हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाएंगे.

ऋतू जब निशा के मुँह से ये बात सुनती है तो एकदम आश्चर्य से निशा की तरफ अपना मुँह खोले देखती रहती है.

निशा: हाँ माँ मैं सच कह रही हूँ. बस आपकी बदकिस्मती हैं की वो ये काम नहीं कर सका और हमें छोड़ के चला गया.

निशा के ऐसे बोलने से ऋतू की आँखों में आंसू आ जाते है और कहती है... क्या वो सच में मुझसे इतना प्यार करता था की वो मुझसे शादी करना चाहता था?

निशा: हाँ माँ. लेकिन आप चिंता मत करो. मैं हूँ ना... मैं उसकी कमी तो हर तरह से पूरी नहीं कर सकती लेकिन मैं भी आपको उतना ही प्यार दूँगी जो आप बरसों से छा रही थी और ऐसा बोलते हुए वो फिर से ऋतू को चूमने लगती है.

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इस बार ऋतू पूरे जोश के साथ निशा को चूमती है और एक तरह से उसके होंठ काट लेती है. इसमें दोनों को मज़ा आता है और २ min बाद निशा कहती है: जैसा बेटा वैसे माँ.

ऋतू: मतलब:

निशा: मतलब ये की दिनेश भी मुझे पूरी जोश और शिद्दत के साथ मुझे चूमता था और कभी कभी जैसे अभी आपने किया मेरे होंठ भी काट देता था... और ऐसा बोलते हुए निशा हस देती है.

निशा फिर ऋतू की गर्दन चूमते हुए नीचे आती और एक हाथ से उसकी मदमस्त चूची दबाते हुए दुसरे दुसरे को मुँह में लेकर चूसती रहती है. उसके बड़े बड़े चूचियों के ऊपर गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे। निशा ने उसकी एक चूची को पकड़ के जोर से दबाया. निशा उसके चुच्ची को दबाके जीभ से चूचकों के साथ खिलवाड़ करने लगा। ऋतू चूचक के साथ छेड़छाड़ होते ही मस्त होने लगी। उसके मुंह से सिसकारी फूट पड़ी। ऋतू के मुंह से सिर्फ उफ़्फ़फ़फ़, आहहहहह... की आवाज़ें निकलने लगी… ऋतू ने निशा का सर पकड़ लिया और उसके मुंह में चूचक घुसेड़ने लगी क्यूंकि निशा की इस हरकत से ऋतू भी अब बहुत गरम हो गयी थी और उसकी उत्तेजना धीरे धीरे उसके सर पे सवार हो रही थी . निशा ऋतू के चूचियों को मुंह में भरकर चूसे जा रही था जिसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था.

निशा बारी बारी से दोनों चूकियों का मर्दन कर रही थी और ऋतू की सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थी. ५ min बाद जब निशा ने ऋतू की तरफ देखा तो उसके चेहरे पे हसी आ गयी क्यूंकि इस वक़्त ऋतू सच में बहुत कामुक और आकर्षक लग रही थी.

निशा के चूची मर्दन से ना जाने कितनी बार ऋतू ने अपना पानी छोड़ दिया था और अब तक तो निशा नीचे भी नहीं गयी थी. निशा फिर थोड़ी देर बाद उसके पेट और नाभि को चूमते हुए नीचे जाकर उसकी मस्त जाँघों को चूमती है. ऋतू की तो एक तरह से हालत उत्तेजना के मारे एकदम बत्तर हो गयी थी. आखिर में ऋतू से भी रहा नहीं जाता और बोल ही देती है. निशा क्यों तड़पा रही हो मुझे? कुछ करो ना..

निशा ऋतू को छेड़ते हुए... क्या करून माँ?

ऋतू: तू इतनी भी सयानी नहीं है. तुझे पता है क्या करना है.

निशा एकदम भोली बनते हुए कहती है मुझे पता नहीं क्या करना है. आप मुझे बताये ना क्या करना है. मुझे आपके मुँह से सुन्ना है.

ऋतू: तू नहीं मानेगी... तो सुन... तूने मेरी जिस्म में जो आग भरी है उसे बुझा दे और ऐसा कहते हुए ऋतू थोड़ा उठते हुए निशा का सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबा देती है.

निशा को भी लगता है की उसे ऋतू को और तड़पाना नहीं चाहिए और वो भी बड़ी शिद्दत से ऋतू की चूत को ऊपर से नीचे तक चाटने लगती है और अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत में डालने की कोशिश करती है लेकिन वो उसमें सफल नहीं हो पाती क्यूंकि ऋतू की चूत कहा जाए तो बहुत सालों से बंद थी और अब तो वो जैसे एक कुंवारी बन गयी थी.

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निशा फिर ऋतू की चूत के दाने को छेड़ती है तो ऋतू से रहा नहीं जाता और ज़ोर से उफ़्फ़फ़फ़ आहहहहह... की आवाज़ें निकालते हुए निशा का सर अपनी चूत पे और ज़ोर से दबा देती है.

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ऋतू से भी अब रहा नहीं जाता और वो अपना पानी निकल देती है जिसे निशा बड़े चाव से पी जाती है और ऋतू की तरफ देख कर कहती है... आपका पानी तो बहुत स्वादिष्ट है. ऋतू झड़ कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भर्ती रहती है क्यूंकि कई सालों बाद उसे किसीने झडाया था.

वो अलग बात है की कभी कभी वो अपने आपको अपने उँगलियों से ही संतुष्ट करती रहती थी लेकिन वो संतुष्टि की ख़ुशी अभी किसी और ने दिया था... और वो कोई और नहीं उसकी खुद की बहु थी.

ऋतू जब अपने आपको संभालती रहती है तो निशा उसके ऊपर आकर उसकी आँखों में देखते हुए फिर से उसके होंठों पे चूमती है तो इस बार ऋतू बड़े प्यार से निशा के होंठ चूमती है जैसे वो उसका धन्यवाद कर रही हो.

निशा: माँ जी आपका पानी तो बड़ा मस्त है. आप मेरा पानी नहीं चखना चाहोगे? निशा के इस बात पे ऋतू हस देती है और फिर से उसे चूमते हुए उसे पलटा कर अब वो निशा के ऊपर आ जाती है.

पिछले आधे घंटे से हो रहे काम में निशा की हालत भी बुरी थी. उसकी चूचियां भी एकदम तन गयी थी और उसके चूचक भी पूरे खड़े हो गए थे. ऋतू भी उसकी एक चूची को मुँह में लेकर मस्त चूसती रहती है और कहती है... तेरी चूची भी बहुत अच्छी है निशा. काश अगर दिनेश होता तो जल्दी ही इसमें दूध भी आ जाता. इस बात पे निशा की आँखों में आंसूं आ जाते है लेकिन कहती है... ये तो किस्मत की बात है माँ और फिर निशा भी ऋतू की तरह अपना हाथ उसके सर पे रख कर उसे अपनी चूचियों पे दबा देती है. शायद ये ऋतू का पहली बार था की उसने किसी औरत की चूची को चूसा है लेकिन वो भी काफी अनुभवी थी और ऐसा नहीं लग रहा था की वो पहली बार ही किसीकी चूची चूस रही हो. निशा को भी अब इसमें मजा आ रहा था और वो भी सिसकारियां लेने लगती है.

ऋतू भी अपना अनुभव दिखाते हुए कभी कभी वो निशा की चूची को काट भी लेती है ख़ास कर के उसके उठे हुए चूचक को. निशा ने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था और वो तो जैसे सातवें आसमान में पहुँच गयी थी.

ऋतू फिर नीचे जाती है और इस बार वो उसकी नाभि को चूमती है और उसकी जुबां से उसको छेड़ती है. ऐसा करने से निशा एकदम मचल जाती है और अपना हाथ ऋतू के सर के ऊपर रख कर ज़ोर से उसकी नाभि पे दबा देती है. उसके नाभि को छेड़ने से ही निशा फिर से एक और बार झड़ जाती है और बिस्तर को एक तरह से गीला कर देती है.

निशा: माँ तुमने ये सब कहाँ से सीखा है? आप तो मुझे जन्नत पे पहुंचा रही हो.

ऋतू: क्यों तू अकेली ही है क्या जो मुझे मज़ा दे सकती है और ऐसा बोल कर वो हस देती है. थोड़ी देर बाद जब वो और नीचे उसकी टांगों के बीच आती है तो वहां का नज़ारा देख कर ऋतू के मुँह में भी पानी आ जाता है. निशा अपनी दोनों टांगें उठा कर ऋतू को उसकी फूली हुई और रस से भीगी हुई चूत का दर्शन कराती है और साथ में उसकी मस्त उठी हुई चूचियां भी ऋतू को नज़र आती है. उसकी चूत एकदम गुलाबी और रस से भरी हुई थी और अभी भी कुछ बूँदें उसकी चूत से गिर कर उसकी गांड पे गिर रही थी.

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ऋतू भी उस नज़ारे को देख कर रह नहीं पाती और उसकी गुलाबी चूत पे टूट पड़ती है और अपनी जुबां पूरी अंदर डाल कर उसकी चूत को अपने मुँह से चोदते रहती है. निशा तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और ना जाने क्या बड़बड़ा रही थी. ऋतू उसकी चूत को अच्छे से चाट कर अपनी २ उंगलियां उसमें घुसा देती है और क्यूंकि निशा की चूत कुछ दिन पहले ही दिनेश ने खोला था... तो आराम से ऋतू की उंगलियां उसमें घुस जाती है और फिर लगातार अपने मुँह और उँगलियों से उसकी चूत पे दोहरा हुम्ला करती है.

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निशा: हाँ माँ..... ऐसे ही मेरी चूत को खा जाओ.... मुझे भी बहुत दिनों से इसने परेशान कर रखा था..... हाँ... ऐसे ही... उफ्फ उफ़्फ़्फ़ करते हुए निशा ऋतू के सर को अपनी चूत पे दबाती रहती है. आखिर में निशा सेह नहीं पाती और जल्दी ही वो अपनी चरम सुख पे पहुँच जाती है और अपना पानी छोड़ देती है जिसे ऋतू पूरा निगल लेती है.

अब निशा को भी थोड़ी राहत मिलती है अपना चरम सुख पा कर और फिर ऋतू उसके ऊपर आकर उसको चूमती है और खुद का रस उसे पिलाती है.

ऋतू: क्यों कैसे लगा तुम्हारा रस?

निशा इस बात से शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती. दोनों फिर एक दुसरे की बाहों में लेटे रहते है.

ऋतू: मैंने सोचा नहीं था की तुम्हारी मालिश इतनी अच्छी होगी.

निशा हस हुए: मैं तो पूछना ही भूल गयी. अब तो आपकी कमर और पेट का दर्द कम हो गया है ना?

ऋतू: हाँ बेटी वो दर्द तो कम हो गया है और उसको देखते हुए कहती है... एक दर्द कम कर दिया है और दूसरा दर्द और बढ़ा दिया है और उसके होंठ को प्यार से चूम लेती है.

निशा: आपका वो दूसरा दर्द तो कभी भी कम हो सकता है मा जी.. और हस देती है.

ऋतू: वैसे बेटा अभी मेरा मन नहीं भरा है. बहुत सालों बाद तुमने मुझे ये फिर से एहसास दिलाया है की मेरी भी कुछ ज़रूरतें है जो मैं अब तक अपने से ही सिम्मट के राखी हुई थी.

निशा: मैं जानती हूँ माँ... क्या पता आगे हम दोनों की ज़िन्दगी में क्या लिखा है. वैसे मेरा भी मन नहीं भरा है. क्यों ना हम एक दुसरे को ही फिर से जन्नत की सैर कराये.

ऋतू: मतलब?

निशा: मतलब ये की मैं आपको खुश करून और आप मुझे... दोनों एक साथ.

ऋतू: वो कैसे?

निशा: वो ऐसे... और ऐसे बोल कर निशा ऋतू को सुलाती है और निशा उसके ऊपर आ जाती है ऋतू निशा की मखमली रस बहाती चूत को अपने सामने फिर से देख कर रह नहीं पाती और उसकी चूत को चूसने और चाटने लग जाती है. निशा भी वैसे ही करती है और दोनों ६९ पोजीशन में आ जाते है. फिर और क्या था...

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दोनों एक दुसरे की चूत पे टूट पड़ते है और अगले १० Min तक ना जाने दोनों एक दुसरे का पनाइ निकाल देते है. आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे की बाहों में फिर से आ जाते है.

ऋतू: मैंने ये कभी नहीं सोचा था की तुम मुझे इतनी ख़ुशी दोगी. और हाँ अगर दिनेश मुझसे शादी करने की बात करता तो शायद उसके बारे में सोचती और शायद हाँ भी कर देती. जैसे तुमने कहा जब से दीपू ने वसु से शादी किया है मैंने देखा है की वसु भी बहुत खुश रहती है और उसके चेहरे पे एक चमक सी आ गयी है. और हस्ते हुए हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाते.

निशा: माँ आप ठीक कह रही हो. जितने दिन मैं घर में थी शादी के बाद एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब मैं रात को अपने आप को ऊँगली करती थी उनकी आवाज़ सुन कर... ये सोच कर की दिनेश भी मुझे भी उतना ही प्यार करेगा जितना दीपू माँ से करता है. हम दोनों एक दुसरे की सौतन ना बने लेकिन प्यार तो कर सकते है ना... और इस बार निशा ऋतू के होंठ चूम लेती है और इस बार दोनों बड़ी कामुकता के साथ एक दुसरे की जुबां चूसने लगते है...

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और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...

Note: apologies for the delay...काम से बहुत Busy था. This is my longest update till date (6500+ words). लिखने में बहुत मेहनत और सोच लगी. आशा है आप भी इस अपडेट को उतना ही प्यार, Likes और कमैंट्स देंगे. धन्यवाद. On a lighter note..hope the comment would not be "looking for next update"... ;)
NICE UPDATE BHAI
 
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Kya hua bhaiya update ka
I know...Maine bataaya tha ki aaj update de doonga. But unplanned issues came up and I am out of my house. Will update soon once I am back home.
 
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34th Update (जन्मदिन का तोहफा) (माँ - बेटा स्पेशल) (Mega Update)



और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...

अब आगे..

दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...

दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.

ऋतू: किस तरह.

दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.

फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.

ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.

फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....

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और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.

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दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?

लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?

दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.

दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.

लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?

दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?

लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.

दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?

लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.

कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?

दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.

फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....

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क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.

दीपू: मैं समझा नहीं.

वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.

फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.

रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.

दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

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दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.

कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.

दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.

दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...

कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?

दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?

कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?

दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.

कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .

इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.

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3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.

दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.

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दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.

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दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.

ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.

दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.

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तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.

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कविता: एक बात कहूँ.

वसु: बोल.

कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.

कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...

दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?

कविता: मतलब?

वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?

कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...

दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.

दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?

वसु: तो तुझे याद है वो बात.

कविता: कौनसी बात?

इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.

दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.

वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.

दीपू: हाँ याद है.

कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?

वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.

दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?

वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.

तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?

कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.

दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.

जन्मदिन

कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.

सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.

जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.

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वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.

दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.

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२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.

दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?

वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.

दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.

वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.

वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.

दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.

वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?

दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?

वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.

फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.

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वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.

फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.

खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.

खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.

तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.

दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...

दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.

दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.

दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.

कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.

दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.

ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.

तोहफा

दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...

दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.

कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.

दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.

कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.

कविता: याने तुम आज रात को...

दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.

कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.

दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.

कविता: मतलब?

दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.

कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.

दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.

कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.

वसु: क्यों बुलाया है?

कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.

वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?

कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.

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कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.

वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.

कमरे में:

कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.

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वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.

दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.

वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.

जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.

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पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.

दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.

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दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.

वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.

दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.

वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.

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5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?

वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.

दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.

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दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.

वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.

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दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.

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वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.

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देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.

कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.

10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.

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आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.

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दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.

दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.

दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.

वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.

दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.

दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.

वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.

दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.

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वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.

वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.

दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.

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वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.

5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.

कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.

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वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.

दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.

वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.

थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.

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इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.

१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.

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अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...

वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.

दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.

Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.
 

Mass

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