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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Pervert boy

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#184.

पंचमुख महानदेव:
(17.01.2002, गुरुवार, रुद्रलोक, हिमालय)

हनुका के रक्त भैरवी की डिबिया ले जाने के बाद, नीलाभ फिर से शि…वलिंग के सामने बने असंख्य त्रिशूलों पर जाकर आसन की मुद्रा में बैठ गया। कुछ देर तक उसने माया के बारे में सोचा और फिर अपनी साधना में लीन हो गया।

नीलाभ को पता था कि उसकी साधना का यह अंतिम चरण है, इसके बाद देव को उन्हें वरदान देने आना ही होगा।

कुछ घंटों के बाद नीलाभ ने अपने मंत्रोच्चारण की आखिरी आहुति को, देव को समर्पित कर दिया। अब नीलाभ ने अपनी आँखें खोलकर, अपने चारो ओर देखा और फिर खड़े होकर उन त्रिशूलों के ऊपर ही तांडव करना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में नीलाभ के पैरों से निकलता खून, त्रिशूल के मध्य से होकर शिवमलिंग की ओर बढ़ा, पर इससे पहले कि अंजाने में वह खून शिवमलिंग तक पहुंचता, वातावरण में तेज डमरु की आवाज सुनाई दी, जो कि देव के प्रकट होने का द्योतक था।

हवा में एक ऊर्जा द्वार उत्पन्न हुआ, जिससे निकलकर देव, नीलाभ के समक्ष आ खड़े हुए।

महानदेव ने नीलाभ के पैरों से रिसते खून को देखा, देव के देखते ही खून का रिसाव बंद हो गया। नीलाभ ने त्रिशूल से उतरकर देव के सम्मुख दंडवत प्रणाम किया।

देव ने अपना वरदहस्त आशीर्वाद की मुद्रा में उठा दिया।


“बताओ नीलाभ, तुम इस प्रकार की कठिन साधना क्यों कर रहे हो? तुम्हें भला किस चीज की कामना है? देव ने नीलाभ से पूछा।

"आप तो अंतर्यामी है देव।” नीलाभ हाथ जोड़कर देव के सामने घुटनों के बल बैठ गया- “आप तो जानते हैं, कि मुझे मनुष्यों के कल्याण के लिये, कुछ पलों के लिये आपकी कुछ शक्तियों का वरण करना है। इसलिये हे महादेव, मुझे ये वरदान दीजिये कि मैं कुछ विषम परिस्थितियों के समय, कुछ क्षणों के लिये, आपकी कुछ शक्तियों को धारण कर सकूँ। मैंने ब्र…देव के कहे अनुसार, आपकी शक्तियों को धारण करने के लिये, अपना शरीर भी उन शक्तियों के लायक कर लिया है।'

यह सुनकर म..देव ने आगे बढ़कर नीलाभ का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले कि नीलाभ कुछ भी समझ पाता, उसे अपना शरीर ब्रह्मांड के करोड़ों आकाशगंगाओं के मध्य दिखाई दिया।

चारो ओर अरबों-खरबों अलग-अलग रंग के सितारे फैले हुए थे। करोड़ों आकाशगंगाएं अपनी धुरी पर घूम रहीं थीं। ब्लैक होल कुछ आकाशगंगाओं को अपने अंदर समाहित कर रहे थे।

कुछ न्यूट्रान स्टार अपने ही ताप से, एक धमाके के साथ फट रहे थे। कुछ आकाशगंगाएं आपस में विलय होकर, नयी आकाशगंगा का निर्माण कर रहीं थीं।

कुल मिलाकर उस स्थान पर मनुष्य तो क्या, किसी भी आकाशगंगा का अस्तित्व भी नगण्य दिखाई दे रहा था। चारो ओर अनंत ब्रह्मांड, अनवरत समय के साथ गतिमान था।

नीलाभ ने आज से पहले कभी भी इस प्रकार का दृश्य नहीं देखा था, इसलिये वह घबराकर ..देव को याद करने लगा।

तभी उस अनंत ब्रह्मांड में सितारों और आका शगंगाओं के मध्य देव का 5 मुखों वाला शरीर प्रकट हुआ।

उसमें पूर्व मुख-पीत वर्ण, पश्चिम मुख-श्वेत वर्ण, उत्तर मुख-कृष्ण वर्ण, दक्षिण मुख-नीलवर्ण और ऊर्ध्व मुख-ईशान दुग्ध के समान प्रतीत हो रहा था। नीलाभ, देव के इस दिव्य दर्शन को देख अविभूत होने लगा।

“हे देव, मैं आपके इस पंचमुखी दर्शन से, ब्रह्मांड के सारे कष्टों को भूल चुका हूं। अब कृपया मुझे इस दिव्य दर्शन का सार समझाइये देव?" नीलाभ ने अपने आँखों में उस अद्भुत दृश्य को भरते हुए कहा।

नीलाभ के शब्द सुन देव की आवाज वातावरण में उभरी- “नीलाभ, मैं तुम्हें ईश्वर का सार समझाने की चेष्टा कर रहा हूं। ईश्वर अनंत और निराकार हैं, तुम जिस रुप में उन्हें देखने की इच्छा करोगे, वो तुम्हें उस रुप में दर्शन देंगे। तुमने हमसे हमारी शक्तियों का वरण करने का वरदान मांगा, इसलिये ही हमने तुम्हें इस पंचमुख से दर्शन दिये। हम तुम्हें इस पंचमुख के माध्यम से बताना चाहते हैं, कि हम स्वयं अपने पंचभूत की शक्तियों से निर्मित हैं। अब अगर हम तुम्हें यह वरदान दे भी दें, तब भी तुम हमारे, इन पंचरुपों के आशीर्वाद के बिना, हमारी शक्तियों को नियंत्रित नहीं कर पाओगे। तो बताओ नीलाभ क्या तुम इन पंचभूतों से आशीर्वाद प्राप्त करने के इच्छुक हो?....परंतु ध्यान रखना, इन्हें प्रसन्न करना इतना भी आसान नहीं होगा।"

“अवश्य ..देव, आप मुझे वरदान प्रदान करिये। मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूं कि बिना इन पंचभूतों के आशीर्वाद के, मैं आपकी उन शक्तियों का वरण नहीं करूंगा।” नीलाभ ने म..देव को विश्वास दिलाते हुए कहा।

“तथास्तु। तुम्हारा कल्याण हो नीलाभ।” यह कहकर महादेव अपने स्थान से अंतर्ध्यान हो गये।

तभी रोशनी का एक तेज झमाका हुआ, जिसकी वजह से नीलाभ की आँखें बंद हो गईं। परंतु जब नीलाभ ने अपनी आँखें खोलीं, तो उसने अपने आपको रुद्रलोक के उसी मं..दिर के बाहर पाया, जहां रहकर वह इतने समय से तपस्या कर रहा था।

इस समय नीलाभ के चेहरे पर अत्यंत प्रसन्नता के भाव थे। अब नीलाभ देव के पहले रुप को प्रसन्न करने के लिये चल पड़ा, जो कि वीरभद्र थे और वह रुद्रलोक के ही किसी अज्ञात स्थान पर थे।

चैपटर-3

ब्लैकून:
(20 वर्ष पहले.......डेल्फानो ग्रह, एरियन आकाशगंगा)

पृथ्वी से 12 लाख प्रकाशवर्ष दूर, एरियन आकाशगंगा में एक बहुत ही खूबसूरत ग्रह है, जिसका नाम है- डेल्फानो।

वैसे तो इस ग्रह का इतिहास मात्र 5000 वर्ष ही पुराना है, परंतु अपने इस छोटे से इतिहास में भी, डेल्फानो ने अनेकों अभूतपूर्व अविष्कार करके, पूरी एरियन आकाशगंगा को चकित करके रखा था।

कहने को तो यह ग्रह छोटा है, परंतु डेल्फानो ग्रह विज्ञान की तकनीक के हिसाब से, बहुत विकसित ग्रह माना जाता रहा है। कहते हैं कि इस ग्रह के लोगों का मस्तिष्क अत्यंत विकसित होता है।

यहां के वैज्ञानिक नित नये शोध करते रहते हैं। यहां के लोग देखने में बिल्कुल पृथ्वी वासियों के जैसे ही हैं, सिर्फ उनकी औसत आयु 10,00 वर्ष की होती है।

डेल्फानो एक शांति प्रिय ग्रह होने की वजह से, इतना आधुनिक तकनीक होने के बाद भी, हथियारों का निर्माण सबसे कम मात्रा में करता है।

डेल्फानो के राजा गिरोट स्वयं भी एक निपुण वैज्ञानिक हैं, जो कि अपना ज्यादा से ज्यादा समय अपनी प्रयोगशाला ‘ब्लैकून' को देते हैं।

कहते हैं कि गिरोट ने ही देवता नोवान का आशीर्वाद प्राप्त कर, 5,000 वर्ष पहले इस ग्रह को बसाया था। देवता नोवान के ही आशीर्वाद से गिरोट पिछले 5,000 वर्षों से वैसे ही जवान है, जैसा कि इस ग्रह के निर्माण के समय हुआ करता था।

गिरोट ने अपनी पूरी जिंदगी डेल्फानो को विकसित करने में लगा दी थी। डेल्फानो को विकसित करने में वह इतना पागल हो गया कि उसे कभी अपने विवाह का ख्याल भी नहीं आया।

आखिरकार एक रात उसे डेल्फानों के वारिस की चिंता हुई, इसलिये हजारों वर्षों के बाद गिरोट ने अपने ग्रह की ही एक साधारण सी लड़की से विवाह कर लिया।

विवाह के उपरांत, युवराज ओरस को जन्म देते हुए, गिरोट की पत्नि का स्वर्गवास हो गया। अब गिरोट के पास अपने पुत्र युवराज ओरस के सिवा कुछ भी नहीं था।

सुबह का समय था, डेल्फानो के दोनों सूर्य उदय हो चुके थे। सूर्य की पीली किरणें चारो ओर फैल गईं थीं।

इस समय गिरोट अपने महल से ब्लैकून के लिये निकलने ही वाला था, कि तभी 'कमांडर कीमोन' ने गिरोट के कक्ष में प्रवेश किया।
कीमोन को देख गिरोट की आँखों में आश्चर्य के भाव उभर आये।

“क्या हुआ कीमोन? इतनी सुबह-सुबह आने का कोई विशेष कारण है क्या?” गिरोट ने कीमोन से पूछा।

“महाराज, गुप्तचरों से समाचार मिला है, कि एंड्रोवर्स आकाशगंगा के, फेरोना ग्रह के राजा एलान्का को, आपके नये अविष्कार ‘समयचक्र' का पता लग गया है और वह किसी भी कीमत पर हमसे यह समयचक्र छीनना चाहता है।” कीमोन ने गंभीर भाव से कहा।

"एंड्रोवर्स आकाशगंगा के लोग?" गिरोट ने आश्चर्य से कहा- “उनके पास तो स्वयं एक ग्रह से दूसरे ग्रह में जाने की शक्ति है, फिर वह हमारे समयचक्र में इतनी रुचि क्यों ले रहे हैं?"

“वह अपनी शक्तियों से 2 ग्रहों के बीच द्वार बना सकते हैं महाराज, पर वह आकाशगंगा की अनन्त गहराइयों में, एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकते और ना ही समय को रोक और चला सकते हैं, इसी लिये उन्हें आपका समयचक्र चाहिये महाराज।” कीमोन ने कहा।

"पर समयचक्र के प्रयोग को तो हमने बहुत ही गुप्त रखा था, फिर उन्हें इस समयचक्र की जानकारी कैसे हुई?” गिरोट के चेहरे पर अब चिंता के भाव उभर आये।

“जिस प्रकार हमारे गुप्तचर हर स्थान पर हैं, मुझे लगता है कि उनके गुप्तचर भी हमारे ग्रह पर होंगे? उन्हीं के माध्यम से एंड्रोवर्स आकाशगंगा के लोगों को हमारे समयचक्र का पता चला होगा। इसलिये महाराज से निवेदन है, कि वह सदैव अपने और अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखें। मैं तब तक सेना को भी एलर्ट पर डाल देता हूं।" इतना कहकर कीमोन शांत हो गया और गिरोट के अगले आदेश की प्रतीक्षा करने लगा।

गिरोट ने इशारे से कीमोन को जाने का आदेश दिया और स्वयं कक्ष में रखी एक कुर्सी पर बैठकर समयचक्र के बारे में सोचने लगे।

“समयचक्र का निर्माण तो पूरा हो गया है, पर इसे किसी भी प्रकार से सुरक्षित रखना होगा? पर कैसे? इतने बड़े ब्लैकून को हम किसी की नजरों से छिपा भी नहीं सकते.... क्या करूं?.....हे देवता नोवान हमारी मदद करो।” गिरोट मन ही मन अपने देवता को याद करने लगा।

तभी अचानक वह खुशी से उछल पड़ा- “अरे वाह मुझे पहले 'ज़ेप्टो नाइजर' का ध्यान क्यों नहीं आया? ...हां ...उससे मेरी समस्या हल हो सकती है।"

अभी गिरोट यह सब सोच ही रहा था कि तभी 5 वर्षीय नन्हें युवराज ‘ओरस' ने कक्ष में प्रवेश किया।

“आप क्या कर रहे हैं पिताजी?" ओरस ने अपने छोटे से यान नुमा खिलौने को हाथों से घुमाते हुए कहा।

"हम तो अपने नये प्रयोग के बारे में सोच रहे थे युवराज।” गिरोट ने मुस्कुराकर अपनी बांहें फैलाते हुए कहा - “आप बताओ, आप अपने इस नन्हें से यान से, कहां की सैर कर रहे हो?"

गिरोट को बांहें फैलाते देख, नन्हा ओरस दौड़कर उनकी बांहों में समा गया।

“मैं तो अपने यान से आकाशगंगा के, दूसरे छोर की सैर कर रहा था पिताजी।" ओरस ने अपनी कल्पनाओं को उड़ान देते हुए कहा- “पर मुझे ये बताइये कि आपका यह नया प्रयोग क्या है? जिसके बारे में आप मुझसे भी ज्यादा सोचते हो।" ओरस की बात सुन गिरोट के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“अभी तुम उस प्रयोग के बारे में जानने के लिये बहुत छोटे हो युवराज, समय आने पर मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा।” गिरोट ने ओरस को फुसलाते हुए कहा।

“मैं इतना भी छोटा नहीं हूं। मैं आकाशगंगा की सारी जानकारी रखता हूं। आप चाहो तो मेरे ज्ञान का परीक्षण कर सकते हो?” ओरस ने किसी ज्ञानी की तरह ज्ञान देते हुए कहा।

“अच्छा, तो बताओ कि नेबुला क्या होता है?" गिरोट सच में ही ओरस की परीक्षा लेने लगा। वैसे गिरोट को पता था, कि ओरस इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पायेगा।

"जब कोई सितारा अपनी आयु का पूरा करने के बाद फटकर कणों में बिखर जाता है, तो उससे बने गैस और धूल के बादलों को नेबुला कहते हैं।” ओरस ने अपना यान उड़ाते हुए कहा।

ओरस का उत्तर सुन गिरोट हैरान रह गया क्यों कि ओरस ने शत-प्रतिशत सही कहा था।

“अच्छा अब बताओ कि सुपरनोआ क्या होता है?" ओरस ने अपने प्रश्न को थोड़ा और कठिन कर दिया।

“जब नेबुला के बहुत से कण आपस में संकुचित हो कर मिलते हैं, तो वह एक सितारे यानि की सूर्य का निर्माण करते हैं। वह सितारा 75 प्रतिशत तक हाइड्रोजन से बना होता है। यानि की हाइड्रोजन उस सूर्य में ईधन का काम करता है। धीरे-धीरे जब उस सितारे का पूरा हाईड्रोजन खत्म होकर, हीलीयम में परिवर्तित हो जाता है, इस स्थिति में वह सितारा अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षण को संभाल नहीं पाता और एक महा विस्फोट के साथ फट जाता है, जिसे सुपरनोवा कहते हैं।” ओरस ने भोलेपन से कहा।

गिरोट अब आश्चर्य से ओरस की ओर देख रहा था।

“क्या तुम 'न्यूट्रान स्टार' और 'ब्लैक होल' के बारे में भी जानते हो?” गिरोट ने अब क्लास 1 के बच्चे से ग्रेजुएशन का प्रश्न पूछ लिया था।

"जब सुपरनो वा विस्फोट होता है, तो सितारे का सबसे बड़ा टुकड़ा, जो सबसे ज्यादा घनत्व लिये होता है, वह एक गोलाकार आकृति लेकर एक न्यूट्रान स्टार में परिवर्तित हो जाता है। यह न्यूट्रान स्टार जब संकुचन की अधिकतक सीमा तक पहुंच जाता है, तो यह छोटा होकर अदृश्य हो जाता है। इसी अदृश्य पिंड को ब्लैक होल कहते हैं।" इस प्रकार क्लास 1 के बच्चे ने ग्रेजुएशन में सर्वोत्तम अंक प्राप्त कर, अध्यापक को हतप्रभ कर दिया।

“ये सब ज्ञान तुम्हें किसने दिया?” गिरोट ने आश्चर्य से ओरस से पूछा।

ओरस ने मुस्कुराते हुए, कक्ष में रखी एक प्रतिमा की ओर इशारा किया। वह प्रतिमा डेल्फानो के देवता नोवान की थी।

ओरस का इशारा देख गिरोट और भी ज्यादा आश्चर्यचकित हो गया। उसने ओरस को अपने गले से लगा लिया।

“चलो ओरस, आज मैं तुम्हें अपने उस नये प्रयोग को दिखाता हूं।” गिरोट ने खड़े होते हुए कहा।

"पर आप तो कह रहे थे कि मैं अभी छोटा हं और मैं उस प्रयोग को समझ नहीं पाऊंगा?" ओरस ने अपनी भोली जुबान में कहा।

“मैं गलत था युवराज, आप नहीं छोटे हो, मेरी मानसिकता छोटी थी, जो मैं यह सोच रहा था कि आपको कुछ समझ नहीं आयेगा? आओ, अब चलते हैं ब्लैकून की ओर, जहां मेरा प्रयोग बेसब्री से आपका इंतजार कर रहा है।

यह कहकर गिरोट ने नन्हें वैज्ञानिक को अपनी गोद में उठाया और हवा में उड़ने वाले एक यान में बैठकर ब्लैकून के पास जा पहुंचा।

ब्लैकून लगभग 3 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली, एक बहुत बड़ी प्रयोगशाला थी, जिसका आकार बिल्कुल गोल और काले रंग का था। दूर से देखने पर वह एक बड़े से काले मोती के समान प्रतीत हो रही थी। गिरोट, ओरस को लेकर ब्लैकून के पास पहुंच गया।


“ब्लैकून में प्रवेश करने का प्रवेश द्वार तो है ही नहीं पिताजी। फिर हम इसमें प्रवेश कैसे करेंगे?" ओरस ने कहा।

“ब्लैकून का पूरा नियंत्रण अंदर मौजूद एक कंप्यूटर 'जेनिक्स' करती है। वह हमें देखते ही स्वयं द्वार खोल देगी। तभी ब्लैकून में एक स्थान पर एक द्वार खुलता दिखाई देने लगा।

“क्या यह मुझे देखकर भी द्वार खोल देगी?” ओरस ने अपनी जिज्ञासा शांत करते हुए कहा।

“हां पुत्र, ज़ेनिक्स में डेल्फानों के राजवंश के, किसी भी व्यक्ति के शरीर को सेंस करने की अद्भुत क्षमता है।" ओरस ने कहा।

गिरोट और ओरस उस द्वार से अंदर प्रवेश कर गये। ब्लैकून में एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था, पूरा सिस्टम ज़ेनिक्स के हवाले था।

अंदर प्रवेश करते ही ओरस को पूरा ब्लैकून, किसी एक छोटे ब्रह्मांड के समान प्रतीत हुआ। चारो ओर निहारिकाएं (नेबुला) फैली हुई थी, जिसके आसपास अनेकों ग्रह घूम रहे थे।

चूंकि ओरस पहली बार ब्लैकून में आया था, इसलिये वह आश्चर्य से सभी चीजों को निहार रहा था।

“यह कैसी प्रयोगशाला है पिताजी? यहां पर कोई मशीन तो दिखाई ही नहीं दे रही है?” ओरस ने कहा।

“ब्लैकून कुल 4 भागों में बंटा है पुत्र, कुछ देर प्रतीक्षा करो, अभी तुम्हें सबकुछ पता चल जायेगा।...यह तो अभी ब्लैकून का प्रथम भाग है, इस भाग में हम तारों और नक्षत्रों की उत्पत्ति का अध्ययन करते हैं।" गिरोट ने कहा।

उस भाग को पार करने के बाद, ओरस एक ऐसे भाग में पहुंचा, जहां पर देवता नोवान की एक बड़ी सी प्रतिमा लगी थी। देवता नोवान के कंधे पर एक फीनीक्स पक्षी बैठा था। उस भाग में और कुछ भी नहीं था।

यह ब्लैकून का दूसरा भाग था। देवता की प्रतिमा के नीचे, सामने की ओर एक गोल काँच का पारदर्शी केबिन बना था। उसे देख ओरस ने पूछ ही लिया।


जारी रहेगा_____✍️
Nice update
 
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Raj_sharma

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Raj_sharma vikram varuni ka Jikar sabse pehle konse update me huwa
Us update me jab suyas samay yatra karke himalay gaya tha and waha use pahli baar pata laga tha ko Aryan ka hi dusra janm hai wo. :declare:
 

Raj_sharma

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Varuni se capsure konse update me mila thaa
Ab yaar update no. Bhi yaad rakhu kya? Wo jab mila tha jab wo tilisma se casper cloud me gaya tha, nakshatra lok ke pas
 

Evaran Eternity

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रिव्यू की शुरुआत की जाए

इंट्रेस्टिंग इंट्रेस्टिंग सोचा नहीं था इतना डीप में चले जाएंगे हम, मतलब देव लोक की सभा तक का वर्णन दिया है, कमाल है इमैजिनेशन का खेल भी निराला है।

सो चलो थोड़ा समझें आखिर राज़ क्या क्या बाहर आए हैं, पहले बात स्टोरी का उद्देश्य समझ आ गया है, सारे पात्र जुड़ने से अब कहानी का महसूस हो रहा है, धीरे धीरे सारे कैरेक्टर का क्या योगदान है वो भी सामने आने आया है।

सो ज्यादा बात की गहराई में नहीं जाकर आगे बढ़ते हैं।तलवार ढाल का महत्व अब समझ आया क्योंकि इस युद्ध में उसकी अहम भूमिका है।

सोच लो देवराज इंद्र तक को उस तलवार ढाल को वापस पाना है यानी कुछ गहरे राज़ समेटे हुए हैं वो तलवार और ढाल।

वैसे ये वत्रा कौन है, मरने के बाद भी इसका नाम आया मतलब ये एक महापराक्रमी शक्तिशाली तो जरूर होगा, क्या ये विधुम्ना से संबंधित तो नहीं, मुझे तो लगता है संबंधित होगा वरना देवा दी देव वत्रा की तलवार का जिक्र क्यों करते।

वैसे सवाल मन में आ रहा है ये ढाल अर्काडिया यान के बाहर क्या कर रही थी क्या वहां शलाका विश्राम में थी तब कुछ घटित हुआ जिसमें ये ढाल वहां रह गई।
इसके संबंधित तलवार भी ऐसे क्या वजह कि वो तलवार सेनोर राज्य में है, शायद सुनेरा के पास है वो तलवार।

ऐसे कौन आ गया था जिसने इंद्र से ढाल तलवार चुरा कर यहां छोड़ दिया।

वैसे जिस तरह हमने इंद्र के बारे में किसी कहानी में पढ़ा है उससे ये लगता है आगे चलकर कुछ न कुछ जरूर कांड करने वाले हैं, साथ ही आखिर के रिएक्शन बयान कर दिया था इंद्र के मन में कुछ चल रहा है जो आगे चलकर घातक होगा।

आगे चलकर मुझे ये पता भी चल गया कि आखिर किसके पास कौन सी शक्तियां हैं।
शलाका आर्यन – सूर्य और अग्नि शक्ति।
धरा मयूर – धरा कांड।
रुद्र शिवन्या – हिम शक्तियां।
कौस्तुभ धनुषा – जल शक्तियां (एक अपडेट में बताया गया है कौस्तुभ के पास समुद्र की शक्तियां हैं इससे अंदाजा लग चुका है)।
पिनाक शरंग – शायद नागराज वासुकी की शक्तियां।
विक्रम वरुणी – मुझे क्लियर आंसर तो नहीं पता लेकिन जितना समझा है मानसिक शक्ति जो कि शनि देव की शक्तियों में से एक है।
त्रिशल कालिका – प्रकाश – ध्वनि शक्ति।
हनुका – गुरुत्व तत्व।
केश्वर – निर्माण शक्ति।
मेगना – जीव शक्ति और दूसरे वृक्ष शक्ति।
अब कुछ शक्तियां बची हैं जैसे वर्षीकरण शक्ति और वायु शक्ति वो किसके पास हैं कहां छिपी हैं वो शक्तियां।

मुझे एक और डाउट है कि मेगना के पास शायद उसकी जीव और वृक्ष शक्ति है कि नहीं।
क्योंकि अगर ध्यान से स्टोरी को समझो तो मेगना की शक्तियां की रचना वृक्ष शक्ति जिससे महावृक्ष बना था।

वो महावृक्ष ही स्रोत है युगाका की शक्तियों का।
साथ ही लुफासा और वीनस के पास जीव शक्तियों के अवशेष हैं, जिन्होंने ध्यान से नहीं समझा उन्हें तो पल्ले भी नहीं पड़ेगा कि मैंने कितना पुराना चीज को ध्यान में रखकर लिखा है रिव्यू।

क्या संभव है मेगना के मरने के पश्चात वो शक्तियां वापस से वातावरण में विलीन हो गए और एक शक्ति महावृक्ष में, तो एक शक्तियां किसी गुफा के पास रखी थी।

वैसे जैसा मैंने ऊपर जिक्र किया वशीकरण शक्तियों का क्या वो संभव है कि वेगा के पास वही शक्तियां हैं, क्योंकि जहां तक मुझे लगता है कुछ वेगा को लेकर अभी भी बचा है, हम वेगा को सिर्फ क्लाट के बच्चे की तरह सीमित नहीं रख सकते।

अब यहां अगर जीव शक्ति ने अपना अधिकारी लुफासा वीनस को चुना है मतलब सच धर्म की राह पर हैं ये दोनों, इससे एक और बात को समझना चाहिए कि यहां लड़ाई समारा सेनोर के बीच नहीं है असली लड़ाई धरतीवासी और बुरी ताकतों के बीच है।

मुझे अब समझ आया ये नागलोक, और जहां जहां शक्तियां रखी थी वो जगह का निर्माण तो माया ने किया उसके निर्माण शक्ति से किया, एक और बात क्या वो अमरत्व मिलने वाले जगह का निर्माण माया ने किया।

आगे चलकर नीलाभ के बारे में बात करेंगे सोचो जिस नीलाभ का यहां कोई जिक्र भी नहीं कर रहा था वो नीलाभ अब हमारे हिसाब से इस युद्ध का सबसे बड़ा योद्धा है, वैसे नीलाभ की तपस्या अभी पूर्ण नहीं हुई, उल्टा अब देवा दी देव के पंच मुख की तपस्या करना है। वैसे नीलाभ का रोल शायद निर्धारित करेगा कि किस पक्ष की विजय होगी।

मतलब आप इमैजिनेशन को ध्यान दें जैसा भगवान खुद यहां दिव्य दर्शन नहीं देते हैं उसके स्थान पर वे अवतार लेकर मनुष्य का रूप धारण करते हैं ताकि लोगों में सीख दें।

ठीक उसी तरह का कॉन्सेप्ट उतारा है यहां लेकिन फर्क इतना है यहां अवतार की बजाय उनकी शक्तियों का मात्र अंश को काबिल मनुष्य को दिया गया है।
कम शब्दों में देवा दी देव ने गहराई की बात बोल दी, हमारे खुद के अंदर पंच तत्व सब कुछ मौजूद हैं कि हमें किसी शक्तियों की जरूरत नहीं है, हमें बस अपने आप को पहचानना है बस।

आगे चलकर आकाशगंगा की एक नाम मात्र की एक झलक दिख गई है जिसमें कुछ ग्लिम्प्स से पता चल गया है कि डेल्फोना ग्रह में कुछ महत्वपूर्ण घटना घटने वाले हैं, शायद डेल्फोना ग्रह पर फोरेना वाले विजय प्राप्त कर लेंगे।

क्या समय चक्र ही मल्टीवर्स का दरवाजा है, क्या काला डायमंड तिलिस्म से भी ये समय चक्र इंपोर्टेंट है,वेट वेट ओएमजी 😱 कुछ हिट किया मुझे माइंड में, कहीं ऐसा तो नहीं काला डायमंड और समयचक्र में कनेक्शन तो नहीं, ऐसा हो सकता है, या समय चक्र का तोड़ ही काला मोती हो, ये जरूर होगा क्योंकि सारे चीज कनेक्टेड हैं तो इन चीजों में संबंध बैठाना जायज है।

वैसे ओरस एक जीता जागता प्राणी है मेरे अगर जैसा कहा गया है कि ओरस धरती पे आया है, तो सवाल उठता है ओरस है कहां, नक्षत्र और ओरस कनेक्टेड हैं लेकिन ओरस अलग व्यक्ति है, वैसे जेनिथ को बचाने वाला तिलिस्म में जो आया था क्या वो ओरस हो सकता है।

अब इस रिव्यू में एक ऐसे चीज रिवील करूंगा जिससे सुन अगर रीडर लोग बेहोश न हो जाएं तो कहना, समय चक्र ने जेनिथ को क्यों चुना इसका मुझे अंदाजा लग गया है, क्योंकि जेनिथ इंसान नहीं है वो शायद एक एलियन या कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम है, एक और चीज मेरा अनुमान मजबूत करता है वो है जेनिक्स गिरोट के राज वंश से संबंधित चीजें सेंस कर सकता है और वो समय चक्र यानी नक्षत्र खुद गिरोट का आविष्कार है ऐसे में मेरा तर्क यहां मजबूत है।
एक और तर्क है मेरा जब जेनिथ का लगा कि मरने वाले हैं तब उसे बचाने आया ओरस कुछ शक्ति जेनिथ को दे तो नहीं गया जिससे नक्षत्र जेनिथ को जेनिक्स के रहा।

वैसे मैं पहले वाले तर्क पर ज्यादा विश्वास रखता हूं क्योंकि जेनिथ और जेनिक्स नाम सेम हैं।
अब अगर आकाशगंगा की दुनिया में चले तो हमने एरियन के एंडोर्स ग्रह और डेल्फोना ग्रह उसके अलावा टाइटन्स के बारे में जानते हैं।
टाइटन्स के बारे पिछले किस्से सुने हैं वो समझते हैं कि टाइटन्स आएंगे जरूर आखिर रोल उनका महत्वपूर्ण होने वाला है।

एंडोर्स ग्रह से लगता है ये अधर्म की साइड हैं इनके इरादे नेक तो लगते नहीं।

ये कहानी अटलांटिक से चालू हुई है लेकिन राज आकाशगंगा तक के समेटे हुए।

वैसे ये ज़ेप्टो निजर कौन आ गया, जिसका नाम आते ही गिरोट की समस्या हल हो चुके थे। नोवान का भी क्या आगे रोल होगा क्या।

अगर किसी का ध्यान से सोचा कि हमारे देव और ग्रीक और एलियन लोगो के देव का आमना सामना नहीं हुआ, जस्ट इमैजिन ऐसा हो तो एब्सोल्यूट सिनेमा मोमेंट होगा।

आगे तिलिस्म में भाग।
इस तिलिस्म में सुयश शेफाली जेनिथ सबका कंट्रीब्यूशन है, लेकिन सबसे इंपोर्टेंट तौफिक का, तौफिक ने सेंस नहीं लगाया होता तो रह जाते सब, वैसे ये सब कहां से सोच लेते हो, तितली पर बैठा के शेफाली को उड़ा दिया, पत्थर पे चढ़ कर तौफिक निशानेबाजी कर देता है।

वैसे इस तिलिस्म में मुझे थोड़ा प्रेडिक्टेबल लगा, मतलब रंग भरना ये मोमेंट प्रेडिक्ट कर लिया था कि तितली है मतलब इस पर उड़ कर रंग भर लेंगे।
बाकी सब बढ़िया जा रहा है, तिलिस्म में जो चुनौती लंबी लंबी होते जा रही हैं,

वैसे कितना बचा है तिलिस्म।

कुल मिलाकर शानदार जा रहा है।
नया चैप्टर मस्त वाइब दे रहा है।

कुछ गायब हुआ लेकिन एक अच्छी बात हुई एक आध रीडर शायद इस कहानी से जुड़े हैं।
परवर्ट बॉय हैं शायद।

बाकी मैंने वादा किया है कि एंडिंग तक इस स्टोरी से जुड़ा रहूंगा मतलब जुड़ा रहूंगा रिव्यू फ्रीक्वेंसी स्लो हो सकती है बाकी बंद नहीं होगी।

Raj_sharma इतना काफी हैं या और चाहिए।
 

Raj_sharma

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रिव्यू की शुरुआत की जाए

इंट्रेस्टिंग इंट्रेस्टिंग सोचा नहीं था इतना डीप में चले जाएंगे हम, मतलब देव लोक की सभा तक का वर्णन दिया है, कमाल है इमैजिनेशन का खेल भी निराला है।

सो चलो थोड़ा समझें आखिर राज़ क्या क्या बाहर आए हैं, पहले बात स्टोरी का उद्देश्य समझ आ गया है, सारे पात्र जुड़ने से अब कहानी का महसूस हो रहा है, धीरे धीरे सारे कैरेक्टर का क्या योगदान है वो भी सामने आने आया है।

सो ज्यादा बात की गहराई में नहीं जाकर आगे बढ़ते हैं।तलवार ढाल का महत्व अब समझ आया क्योंकि इस युद्ध में उसकी अहम भूमिका है।

सोच लो देवराज इंद्र तक को उस तलवार ढाल को वापस पाना है यानी कुछ गहरे राज़ समेटे हुए हैं वो तलवार और ढाल।

वैसे ये वत्रा कौन है, मरने के बाद भी इसका नाम आया मतलब ये एक महापराक्रमी शक्तिशाली तो जरूर होगा, क्या ये विधुम्ना से संबंधित तो नहीं, मुझे तो लगता है संबंधित होगा वरना देवा दी देव वत्रा की तलवार का जिक्र क्यों करते।

वैसे सवाल मन में आ रहा है ये ढाल अर्काडिया यान के बाहर क्या कर रही थी क्या वहां शलाका विश्राम में थी तब कुछ घटित हुआ जिसमें ये ढाल वहां रह गई।
इसके संबंधित तलवार भी ऐसे क्या वजह कि वो तलवार सेनोर राज्य में है, शायद सुनेरा के पास है वो तलवार।

ऐसे कौन आ गया था जिसने इंद्र से ढाल तलवार चुरा कर यहां छोड़ दिया।

वैसे जिस तरह हमने इंद्र के बारे में किसी कहानी में पढ़ा है उससे ये लगता है आगे चलकर कुछ न कुछ जरूर कांड करने वाले हैं, साथ ही आखिर के रिएक्शन बयान कर दिया था इंद्र के मन में कुछ चल रहा है जो आगे चलकर घातक होगा।

आगे चलकर मुझे ये पता भी चल गया कि आखिर किसके पास कौन सी शक्तियां हैं।
शलाका आर्यन – सूर्य और अग्नि शक्ति।
धरा मयूर – धरा कांड।
रुद्र शिवन्या – हिम शक्तियां।
कौस्तुभ धनुषा – जल शक्तियां (एक अपडेट में बताया गया है कौस्तुभ के पास समुद्र की शक्तियां हैं इससे अंदाजा लग चुका है)।
पिनाक शरंग – शायद नागराज वासुकी की शक्तियां।
विक्रम वरुणी – मुझे क्लियर आंसर तो नहीं पता लेकिन जितना समझा है मानसिक शक्ति जो कि शनि देव की शक्तियों में से एक है।
त्रिशल कालिका – प्रकाश – ध्वनि शक्ति।
हनुका – गुरुत्व तत्व।
केश्वर – निर्माण शक्ति।
मेगना – जीव शक्ति और दूसरे वृक्ष शक्ति।
अब कुछ शक्तियां बची हैं जैसे वर्षीकरण शक्ति और वायु शक्ति वो किसके पास हैं कहां छिपी हैं वो शक्तियां।

मुझे एक और डाउट है कि मेगना के पास शायद उसकी जीव और वृक्ष शक्ति है कि नहीं।
क्योंकि अगर ध्यान से स्टोरी को समझो तो मेगना की शक्तियां की रचना वृक्ष शक्ति जिससे महावृक्ष बना था।

वो महावृक्ष ही स्रोत है युगाका की शक्तियों का।
साथ ही लुफासा और वीनस के पास जीव शक्तियों के अवशेष हैं, जिन्होंने ध्यान से नहीं समझा उन्हें तो पल्ले भी नहीं पड़ेगा कि मैंने कितना पुराना चीज को ध्यान में रखकर लिखा है रिव्यू।

क्या संभव है मेगना के मरने के पश्चात वो शक्तियां वापस से वातावरण में विलीन हो गए और एक शक्ति महावृक्ष में, तो एक शक्तियां किसी गुफा के पास रखी थी।

वैसे जैसा मैंने ऊपर जिक्र किया वशीकरण शक्तियों का क्या वो संभव है कि वेगा के पास वही शक्तियां हैं, क्योंकि जहां तक मुझे लगता है कुछ वेगा को लेकर अभी भी बचा है, हम वेगा को सिर्फ क्लाट के बच्चे की तरह सीमित नहीं रख सकते।

अब यहां अगर जीव शक्ति ने अपना अधिकारी लुफासा वीनस को चुना है मतलब सच धर्म की राह पर हैं ये दोनों, इससे एक और बात को समझना चाहिए कि यहां लड़ाई समारा सेनोर के बीच नहीं है असली लड़ाई धरतीवासी और बुरी ताकतों के बीच है।

मुझे अब समझ आया ये नागलोक, और जहां जहां शक्तियां रखी थी वो जगह का निर्माण तो माया ने किया उसके निर्माण शक्ति से किया, एक और बात क्या वो अमरत्व मिलने वाले जगह का निर्माण माया ने किया।

आगे चलकर नीलाभ के बारे में बात करेंगे सोचो जिस नीलाभ का यहां कोई जिक्र भी नहीं कर रहा था वो नीलाभ अब हमारे हिसाब से इस युद्ध का सबसे बड़ा योद्धा है, वैसे नीलाभ की तपस्या अभी पूर्ण नहीं हुई, उल्टा अब देवा दी देव के पंच मुख की तपस्या करना है। वैसे नीलाभ का रोल शायद निर्धारित करेगा कि किस पक्ष की विजय होगी।

मतलब आप इमैजिनेशन को ध्यान दें जैसा भगवान खुद यहां दिव्य दर्शन नहीं देते हैं उसके स्थान पर वे अवतार लेकर मनुष्य का रूप धारण करते हैं ताकि लोगों में सीख दें।

ठीक उसी तरह का कॉन्सेप्ट उतारा है यहां लेकिन फर्क इतना है यहां अवतार की बजाय उनकी शक्तियों का मात्र अंश को काबिल मनुष्य को दिया गया है।
कम शब्दों में देवा दी देव ने गहराई की बात बोल दी, हमारे खुद के अंदर पंच तत्व सब कुछ मौजूद हैं कि हमें किसी शक्तियों की जरूरत नहीं है, हमें बस अपने आप को पहचानना है बस।

आगे चलकर आकाशगंगा की एक नाम मात्र की एक झलक दिख गई है जिसमें कुछ ग्लिम्प्स से पता चल गया है कि डेल्फोना ग्रह में कुछ महत्वपूर्ण घटना घटने वाले हैं, शायद डेल्फोना ग्रह पर फोरेना वाले विजय प्राप्त कर लेंगे।

क्या समय चक्र ही मल्टीवर्स का दरवाजा है, क्या काला डायमंड तिलिस्म से भी ये समय चक्र इंपोर्टेंट है,वेट वेट ओएमजी 😱 कुछ हिट किया मुझे माइंड में, कहीं ऐसा तो नहीं काला डायमंड और समयचक्र में कनेक्शन तो नहीं, ऐसा हो सकता है, या समय चक्र का तोड़ ही काला मोती हो, ये जरूर होगा क्योंकि सारे चीज कनेक्टेड हैं तो इन चीजों में संबंध बैठाना जायज है।

वैसे ओरस एक जीता जागता प्राणी है मेरे अगर जैसा कहा गया है कि ओरस धरती पे आया है, तो सवाल उठता है ओरस है कहां, नक्षत्र और ओरस कनेक्टेड हैं लेकिन ओरस अलग व्यक्ति है, वैसे जेनिथ को बचाने वाला तिलिस्म में जो आया था क्या वो ओरस हो सकता है।

अब इस रिव्यू में एक ऐसे चीज रिवील करूंगा जिससे सुन अगर रीडर लोग बेहोश न हो जाएं तो कहना, समय चक्र ने जेनिथ को क्यों चुना इसका मुझे अंदाजा लग गया है, क्योंकि जेनिथ इंसान नहीं है वो शायद एक एलियन या कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम है, एक और चीज मेरा अनुमान मजबूत करता है वो है जेनिक्स गिरोट के राज वंश से संबंधित चीजें सेंस कर सकता है और वो समय चक्र यानी नक्षत्र खुद गिरोट का आविष्कार है ऐसे में मेरा तर्क यहां मजबूत है।
एक और तर्क है मेरा जब जेनिथ का लगा कि मरने वाले हैं तब उसे बचाने आया ओरस कुछ शक्ति जेनिथ को दे तो नहीं गया जिससे नक्षत्र जेनिथ को जेनिक्स के रहा।

वैसे मैं पहले वाले तर्क पर ज्यादा विश्वास रखता हूं क्योंकि जेनिथ और जेनिक्स नाम सेम हैं।
अब अगर आकाशगंगा की दुनिया में चले तो हमने एरियन के एंडोर्स ग्रह और डेल्फोना ग्रह उसके अलावा टाइटन्स के बारे में जानते हैं।
टाइटन्स के बारे पिछले किस्से सुने हैं वो समझते हैं कि टाइटन्स आएंगे जरूर आखिर रोल उनका महत्वपूर्ण होने वाला है।

एंडोर्स ग्रह से लगता है ये अधर्म की साइड हैं इनके इरादे नेक तो लगते नहीं।

ये कहानी अटलांटिक से चालू हुई है लेकिन राज आकाशगंगा तक के समेटे हुए।

वैसे ये ज़ेप्टो निजर कौन आ गया, जिसका नाम आते ही गिरोट की समस्या हल हो चुके थे। नोवान का भी क्या आगे रोल होगा क्या।

अगर किसी का ध्यान से सोचा कि हमारे देव और ग्रीक और एलियन लोगो के देव का आमना सामना नहीं हुआ, जस्ट इमैजिन ऐसा हो तो एब्सोल्यूट सिनेमा मोमेंट होगा।

आगे तिलिस्म में भाग।
इस तिलिस्म में सुयश शेफाली जेनिथ सबका कंट्रीब्यूशन है, लेकिन सबसे इंपोर्टेंट तौफिक का, तौफिक ने सेंस नहीं लगाया होता तो रह जाते सब, वैसे ये सब कहां से सोच लेते हो, तितली पर बैठा के शेफाली को उड़ा दिया, पत्थर पे चढ़ कर तौफिक निशानेबाजी कर देता है।

वैसे इस तिलिस्म में मुझे थोड़ा प्रेडिक्टेबल लगा, मतलब रंग भरना ये मोमेंट प्रेडिक्ट कर लिया था कि तितली है मतलब इस पर उड़ कर रंग भर लेंगे।
बाकी सब बढ़िया जा रहा है, तिलिस्म में जो चुनौती लंबी लंबी होते जा रही हैं,

वैसे कितना बचा है तिलिस्म।

कुल मिलाकर शानदार जा रहा है।
नया चैप्टर मस्त वाइब दे रहा है।

कुछ गायब हुआ लेकिन एक अच्छी बात हुई एक आध रीडर शायद इस कहानी से जुड़े हैं।
परवर्ट बॉय हैं शायद।

बाकी मैंने वादा किया है कि एंडिंग तक इस स्टोरी से जुड़ा रहूंगा मतलब जुड़ा रहूंगा रिव्यू फ्रीक्वेंसी स्लो हो सकती है बाकी बंद नहीं होगी।

Raj_sharma इतना काफी हैं या और चाहिए।
Or aane do 😎 baaki aaram se padh ke review ka jabaab deta hu 👍
 
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