• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller कातिल (समाप्त)

SKYESH

Well-Known Member
3,681
8,861
158
#04

पड़ोस के दो मकानों में ही हमे सीसी टीवी कैमरे लगे हुए नजर आ गए थे। उसके बाद थोड़ी सी आगे जाकर जिस भोजनालय से मेरा टिफिन आता था, उस के बाहर भी मुझे एक कैमरा लगा हुआ मिला।

उन तीनों कैमरों को देखकर उस लड़की के बारे में जानने की कुछ उम्मीदों ने मन ही मन अंगड़ाई ली।

सबसे पहले मैंने उस भोजनालय से ही शुरुआत की।

भोजनालय के मालिक शर्मा जी मेरे अच्छे जानकार थे, इसलिए उन्होने अपने कैमरे की फुटेज दिखाने में कोई गुरेज नही किया।

मैंने करीब 7 बजे से फुटेज को देखना शुरू किया था। रागिनी भी पूरी तल्लीनता से टीवी स्क्रीन पर अपनी नजर लगाये हुए बैठी थी।

तकरीबन पौने आठ बजे के करीब एक नीले रंग की वलोनी कार आकर रुकी थी। उस कार से एक लड़की उतरी और बारिश से बचने के लिये मेरे फ्लैट की ओर तेजी से दौड़ी।

मैने एक नजर रागिनी की ओर उठा कर देखा। रागिनी ने भी मेरी ओर देखा।

"बादशाहों ये गड्डी तो कल रात को मेरे होटल के बाहर काफी देर तक खडी रही थी" शर्मा जी ने हल्के से पंजाबी लहजें में बोला था।

"इस गाड़ी से जो लड़की उतर कर मेरे फ्लैट की तरफ दौड़ती हुई गई थी, उस पर नजर पड़ी थी, क्या आपकी" मैंने शर्मा जी से पूछा।

"ना भईया ! पराई औरतों को देखने का कोई शौक नही रखता जी" :D शर्मा जी की ये बात सुनते ही रागिनी के चेहरे पर बरबस ही एक मुस्कान थिरक उठी थी।

"अब इस फुटेज को साढ़े आठ बजे के आसपास लेकर जाओ, इसी वक्त के आसपास वो लड़की मेरे फ्लैट से गायब हुई थी" मैंने रागिनी की मुस्कान से खिसिया कर उसे बोला।

"पूरी ही देख लेते है सर! क्या पता इस आधे घँटे में गाड़ी से भी कोई और बन्दा उतरा हो, या कोई और आया हो" रागिनी ने बोला तो मैंने भी सहमति में सिर को हिलाया।

"एक बात तो सिद्ध हों गई, की ये लड़की प्री प्लान आई थी, इसने अपनी जान पर खतरे की मुझें झूठी कहानी सुनाई, और किसी खास मकसद से उसने मेरी पिस्टल को भी चुराया" मैंने अभी तक की फुटेज को देखकर अपने आकलन बताया।

"इस बारे में घर पर चलकर बात करेगे" ये बोलकर रागिनी ने फिर से अपनी नजर स्क्रीन पर टिका दी।

अगले चालीस मिनट हमारे बहुत ही बोरिंग गुजरे थे, न तो कोई उस गाड़ी के पास आकर फटका था, और न ही कोई उस गाड़ी से कोई उतरा था।

कोई चालीस मिनट के बाद वहीं लड़की फिर से दौड़ती हुई आई और जैसे ही कार में बैठी, वैसे ही गाड़ी की हेडलाइट की रोशनी सड़क पर बिखर गई।

जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, गाड़ी की पिछली तरफ लगा हुआ नंबर प्लेट हमारे सामने नुमाया हो गया। जिसे मुझ से पहले ही रागिनी ने अपनी फोन की नोटबुक में लिख लिया।

हमने उस गाड़ी के वहाँ से रवाना होते ही उस फुटेज को फिर से रिवाइंड किया और जिस जिस जगह वो लड़की फुटेज में दिख रही थी, उस जगह की अपने मोबाइल से फोटो खींच कर सेव कर ली।

साथ ही उस पूरी फुटेज को डेटा केबल से अपने मोबाइल में भी ले ली।

उसके बाद हम शर्मा जी का धन्यवाद बोलकर उस भोजनालय से बाहर आ गए।

"चलो कोई तो सुराग मिला, उस लड़की का, कम से कम उसे ढूंढने की एक शुरुआत तो हो सकती है" रागिनी ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हाँ चलो अब बाकी दोनो सीसी टीवी कैमरो की फुटेज भी देख लेते है" मैंने रागिनी को बोला, और उन घरों की ओर बढ गए, जिन पर वे कैमरे लगे हुए थे।

लेकिन दोनो ही जगह से हमें ना उम्मीदी ही हाथ लगी थी। एक पड़ोसी ने तो अपना सीसी टीवी ही खराब बताया था, और दूसरे पड़ोसी दोनो ही मियां बीवी नौकरी पेशा थे, तो दोनो ही अपने काम पर जा चुके थे, और घर पर ताला लटका हुआ था।

मैने निराशा से रागिनी की ओर देखा।

"कोई नही !अभी हमारे पास आगे बढ़ने के लिये उसकी गाड़ी नंबर का क्लू तो है ही ! हम वही से शुरू करते है" रागिनी ने मेरी निराशा को भांपते हुए बोला।

"चलो फिर इस गाड़ी की डिटेल निकालते है, उसके बाद पकड़ते है इस लड़की को" ये बोलकर मै अब अपने फ्लैट की ओर बढ़ गया था।

आजकल किसी गाड़ी की डिटेल निकालना कुछ मिनिटों का ही काम था। गूगल बाबा ने दुनिया के काफी कामो को आसान बना दिया था।

लेकिन इस वक्त मुझे जिस बात ने ज्यादा बेचैन किया हुआ था, वो ये थी कि वो लड़की एक प्लान बनाकर मेरे घर मे घुसी थी।

इस वक़्त कौन बनेगा करोड़पति से भी बड़ा सवाल मेरे सामने खड़ा हो गया था, की इस शहर में मेरा ऐसा कौन सा खैरख्वाह पैदा हो गया था, जिसने मेरे खिलाफ कोई साजिस रचने की पहल मेरे ही घर से की थी। 🤔

वैसे आपके इस सेवक के दुश्मनों की तादाद बहुतायत में थी, अब इनमें से किसी एक दुश्मन को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूँढने के बराबर था।

रागिनी का आगमन-4

वो गाड़ी रोहिणी के ही सेक्टर ग्यारह के पते पर रजिस्टर्ड थी। गाड़ी किसी कुमार गौरव के नाम से रजिस्टर्ड थी।

सेक्टर ग्यारह का पता देखते मेरी उम्मीदों के पंखों को नए परवान मिल चुके थे, क्यो कि उस अनामिका नाम की लड़की ने मुझे यही बताया था कि वो रोहिणी के सेक्टर ग्यारह में ही रहती थी।

उस पते के मिलने के बाद हमारा सबसे पहला काम अब उस पते पर पहुंचने का ही था।

इस वक़्त रोमेश, रागिनी के साथ उसी पते पर खड़ा था। रागिनी ने उस घर की बेल बजाई।

दरवाजा किसी नौकरानी ने खोला था। मैंने उसे कुमार गौरव को बुलाने के लिए बोला तो, वो बिना कुछ बोले ही वापिस अंदर मुड़ गई।

कुछ देर में ही एक कोई तीस वर्षीय जवान मेरे सामने खड़ा था। बन्दे की बॉडी देखकर लग रहा था कि
वो जिम में जमकर पसीना बहा रहा है, और जमकर सप्लीमेंट के डिब्बे पर डिब्बे खाली किये जा रहा है।

"जी कहिये, कहाँ से आये है आप" उस शख्स ने मेरी ओर अनजान निगाहों से देखते हुए पूछा।

"आप ही कुमार गौरव है" मैने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

"जी मै ही कुमार गौरव हूँ, आपको मुझ से क्या काम है" उसने जिज्ञासा भरे स्वर में पूछा।

"वो नीले रंग की वेलिनो आप ही कि गाड़ी है" इस बार रागिनी ने पूछा।

"जी नीले रंग की वेलिनो मेरी ही गाड़ी है, आप जानते हो कुछ मेरी गाड़ी के बारे में" उसके इस सवाल ने मानो हमारे ऊपर कोई वज्रपात सा किया हो।

"जानते हो मतलब?" ये सवाल रोमेश ने किया।

"कल शाम से मेरी गाड़ी गायब है भाई, रात को थाने में रपट भी लिखवाकर आया हूँ, लेकिन अभी तक गाड़ी का कोई अता पता नही है" कुमार गौरव ने रुआंसे स्वर में बोला।

हमारी उम्मीदों पर तुषारापात हो चुका था।

"क्या हम लोग अंदर बैठकर बात कर सकतें है" तभी रागिनी ने बोला।

"जी ! लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप कौन हो" कुमार गौरव के लिए ये भी मुसीबत थी कि वो ऐसे ही किसी अनजान लोगों को अपने घर के अंदर नही घुसा सकता था।

मैने अपना कार्ड निकाल कर उसके हाथ मे दिया।

"आप डिटेक्टिव है, आप मेरी गाड़ी के बारे में कुछ जानते है क्या" कुमार साहब ने मेरा परिचय जानते ही पूछा।

"हमने आपकी गाड़ी में एक लड़की को कल रात को एक सीसी टीवी की फुटेज में देखा है" इस बार फिर से रागिनी ने बोला।

"आप लोग अंदर आइए" ये बोलकर कुमार साहब ने हमारे लिए दरवाजा छोड़ दिया।

हम उसके पीछे ही अंदर की तरफ बढ़ गए। कुछ ही पलों में हम उसके ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे।

ड्राइंग रूम में सन अस्सी के दशक के चॉकलेटी हीरो कुमार गौरव की उसकी फ़िल्म "लव स्टोरी" की एक बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी। मैं उस तस्वीर को देखकर मुस्करा दिया।

इस बन्दे की एकमात्र यही फ़िल्म थी, जिसने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था, और रातों रात ये बन्दा उस समय की नवयौवनाओं की दिलो की धड़कन बन गया था, लेकिन इस एक फ़िल्म के बाद ही इस बन्दे के सितारे डूबते चले गए।

"लगता है कुमार गौरव के बड़े जबरा फैन हो, जो नाम भी उनका रखा हुआ है और ड्राइंग रूम भी उन्ही की तस्वीरों से सजा रखा है" मै और रागिनी इस वक़्त दिलचस्प निग़ाहों से उस तस्वीर को देख रहे थे।

"जी मै नही मेरी मम्मी इनकी बड़ी जबरा फैन है, उन्ही ने मेरा नाम भी कुमार गौरव रखा था" कुमार साहब ने मुस्करा कर जवाब दिया।

"सही बोल रहे हो, वैसे आप तो बॉडी से तो सनी देओल के फैन लगते हो" मैने अपनी भूल सुधार की।

मेरी बात उसे पसंद आई थी, तभी वो ठठाकर हँस पड़ा था।

"आप जरा इस लड़की को देखिए! ये लड़की कल रात को आपकी गाड़ी में देखी गई है" मैने अपने मोबाइल की फोटो गैलरी खोलकर उसे पहले से ली गई फ़ोटो को दिखाया।

कुमार बाबू गौर से उस तस्वीर को देखने लगे।

"ये लड़की तो मल्लिका जैसी लग रही है" कुमार की बोली हुई इस बात ने मेरे कान खड़े कर दिए थे।

"आप जानते हो इस लड़की को" मैंने गौर से कुमार के चेहरे को देखते हुए पूछा।

"हाँ ! एक नंबर की फ्रॉड लड़की है, लेकिन ये तो जेल में थी, ये बाहर कब आई" कुमार ने अचंभित स्वर में बोला।

"जरा इसके बारे में खुलकर बताओ, ये कल रात को मेरे घर से एक कांड करके भागी है" मैंने उतावले स्वर में बोला।

"क्या कांड कर दिया इसने, वैसे ये कुछ भी कर सकती है, यहां तक कि किसी का खून भी" कुमार एक के बाद एक धमाके इस लड़की के बारे में किये जा रहा था।

"ये कल रात को तकरीबन आठ बजे के करीब मेरे फ़्लैट पर बदहवासी की हालत में आई, इसने मुझे बोला कि इसके पीछे कुछ लोग पड़े हुए है, और इसे जान से मारना चाहते है, मैने इंसानियत के नाते अपने घर मे इसे शरण दे दी, लेकिन ये तो मुझे ही सेन्धी लगाकर मेरे घर से फरार हो गई"

मैने देख़ा की मेरी इंसानियत वाली बात पर रागिनी अपनी हँसी रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

"क्या सेन्धी लगा दी इसने" कुमार बाबू अब अपनी कहने से ज्यादा मेरी सुनने के लिए ज्यादा लालायित थे।

"ये मेरी पिस्टल चुराकर भाग गई है, मैं कल रात से ही इस लड़की को ढूंढ रहा हूँ" मैंने अपनी पूरी आपबीती बता दी।

"मतलब इस खतरनाक लड़की के कब्जे में मेरी गाड़ी और आपकी पिस्टल है" कुमार मानो खुद से ही बोल रहा हो।

"और आज सुबह ही एक लड़की की लाश भी बरामद की है पुलिस ने, अभी ये नही पता चल पाया है कि उस लड़की को किसने मारा है" मैने कुमार की बात में अपनी बात जोड़ी।

"क्या पता उस लड़की को भी इसी मल्लिका ने मारा हो, मैने बताया न वो कुछ भी कर सकती है" कुमार उस लड़की से कुछ ज्यादा ही डरा हुआ था।

"कुमार! आपकी बातो से लग रहा है, की आप इस लड़की को काफी करीब से जानतें हो, जो कुछ भी इस लड़की के बारे में जानतें हो, वो हमें बता दो, ताकि हम इसे जल्दी से जल्दी पकड़ सके, नही तो पता नही ये किस किस की जान लेगी" रागिनी ने हमारी बातचीत के सिलसिले को तोड़ा।

"ये लड़की पहले मेरी ही कंपनी में काम करती थी, ये गजब की खूबसूरत लड़की है, इसकी खूबसूरती ही इसका सबसे बड़ा हथियार है, जो कोई इसे पहली बार देखता है, वो इसकी ओर खींचा जाता है, मैं भी उसके इस रूपजाल में फंस गया था, और ये मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थी" कुमार ने सुनी आंखों से शून्य में निहारते हुए बोला।

"फिर तो इसके बारे में सब कुछ गहराई से जानते होंगे" रागिनी ने अब पूछताछ की कमान अपने हाथ मे ले ली थी।

"ज्यादा नही जानता, इतना जानता हूँ कि मॉडल टाउन में रहती थी, इसने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड बनकर मुझे लाखों का चूना लगाया, और जब मैंने इसे पैसे देने से इनकार किया तो इसने मेरे साथ अपना ब्रेकअप कर लिया, बाद में मुझे पता चला कि उसका तो ये बिज़नेस है, हर कंपनी का मालिक उसका बॉयफ्रेंड होता है, और जब तक वो उस पर पैसे लुटाता रहता है, वो इस लड़की की गुडबुक में रहता है, उसको पूरी तरह से चूसने के बाद ये उसको टाटा बाई बाई करके उसकी जिन्दगी से निकल कर अपने नए शिकार की तलाश में निकल जाती है, बस इसमे एक ही अच्छी बात थी, की ये किसी को उसकी जिंदगी से जाने के बाद ब्लेकमेल नही करती" कुमार ने जो भी बताया था, वो काफी दिलचस्प था।

एक बात और थी कि इस लड़की को पकड़ने में चक्कर मे अभी कुमार जैसे कई लुटे पिटे आशिकों से मुलाकात होने वाली थी। :D

वो किसी के लिये अनामिका थी और किसी के लिये मल्लिका थी। न जाने कितने नाम और रूप थे, इस लड़की के...बहरहाल इतना तो कुमार की बातों से स्पष्ट था कि लड़की बहुत खतरनाक थी।

लेकिन इस खतरनाक लड़की ने इस बार एक गलती कर दी थी, की इसने अनजाने में रोमेश दी ग्रेट से पंगा ले लिया था। :roll3:

लेकिन क्या सच मे उसने अनजाने में मुझ से पंगा लिया था, सुबह तो मैं और रागिनी इस नतीजे पर पहुंचे
थे, की वो लड़की प्रीप्लान बनाकर मेरे घर में घुसी थी। वो जानती थी कि मैं भी उसकी खूबसूरती में उलझ जाऊंगा।

अभी मैं अपने तस्सवुर में उस लड़की के बारे में सोच ही रहा था, की कुमार का फोन बज उठा था।

कुमार ने फोरन से पेश्तर फोन को उठाया।

उसने कुछ देर फोन पर एक तरफ जाकर बात की, फिर तेज कदमों से हमारी तरफ आया।

"पुलिस को गाड़ी मिल गई है" कुमार ने उत्साहित स्वर में बोला।

"कहाँ पर" मेरा और रागिनी का सम्मिलित स्वर वहां गूंजा था।

"यही सैक्टर 6 में, अंबेडकर होस्पिटल की पीछे वाली रोड पर मिली है पुलिस को" कुमार ने मेरी ओर देखकर जवाब दिया।

"चलो फिर! आप हमारे साथ आओ, क्या पता आपकी गाड़ी से ही आगे के कोई सुराग मिल जाये।

मेरी बात सुनकर कुमार ने साथ चलने में कोई भी हिला हवाली नही की, और हमारे साथ बाहर की ओर चल पड़ा।


जारी रहेगा_____✍️
good going BRO ......................

:happy:

aage dekhte hai ...kya hota hai ..........
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
48,309
83,253
304

parkas

Well-Known Member
33,524
71,167
303
#04

पड़ोस के दो मकानों में ही हमे सीसी टीवी कैमरे लगे हुए नजर आ गए थे। उसके बाद थोड़ी सी आगे जाकर जिस भोजनालय से मेरा टिफिन आता था, उस के बाहर भी मुझे एक कैमरा लगा हुआ मिला।

उन तीनों कैमरों को देखकर उस लड़की के बारे में जानने की कुछ उम्मीदों ने मन ही मन अंगड़ाई ली।

सबसे पहले मैंने उस भोजनालय से ही शुरुआत की।

भोजनालय के मालिक शर्मा जी मेरे अच्छे जानकार थे, इसलिए उन्होने अपने कैमरे की फुटेज दिखाने में कोई गुरेज नही किया।

मैंने करीब 7 बजे से फुटेज को देखना शुरू किया था। रागिनी भी पूरी तल्लीनता से टीवी स्क्रीन पर अपनी नजर लगाये हुए बैठी थी।

तकरीबन पौने आठ बजे के करीब एक नीले रंग की वलोनी कार आकर रुकी थी। उस कार से एक लड़की उतरी और बारिश से बचने के लिये मेरे फ्लैट की ओर तेजी से दौड़ी।

मैने एक नजर रागिनी की ओर उठा कर देखा। रागिनी ने भी मेरी ओर देखा।

"बादशाहों ये गड्डी तो कल रात को मेरे होटल के बाहर काफी देर तक खडी रही थी" शर्मा जी ने हल्के से पंजाबी लहजें में बोला था।

"इस गाड़ी से जो लड़की उतर कर मेरे फ्लैट की तरफ दौड़ती हुई गई थी, उस पर नजर पड़ी थी, क्या आपकी" मैंने शर्मा जी से पूछा।

"ना भईया ! पराई औरतों को देखने का कोई शौक नही रखता जी" :D शर्मा जी की ये बात सुनते ही रागिनी के चेहरे पर बरबस ही एक मुस्कान थिरक उठी थी।

"अब इस फुटेज को साढ़े आठ बजे के आसपास लेकर जाओ, इसी वक्त के आसपास वो लड़की मेरे फ्लैट से गायब हुई थी" मैंने रागिनी की मुस्कान से खिसिया कर उसे बोला।

"पूरी ही देख लेते है सर! क्या पता इस आधे घँटे में गाड़ी से भी कोई और बन्दा उतरा हो, या कोई और आया हो" रागिनी ने बोला तो मैंने भी सहमति में सिर को हिलाया।

"एक बात तो सिद्ध हों गई, की ये लड़की प्री प्लान आई थी, इसने अपनी जान पर खतरे की मुझें झूठी कहानी सुनाई, और किसी खास मकसद से उसने मेरी पिस्टल को भी चुराया" मैंने अभी तक की फुटेज को देखकर अपने आकलन बताया।

"इस बारे में घर पर चलकर बात करेगे" ये बोलकर रागिनी ने फिर से अपनी नजर स्क्रीन पर टिका दी।

अगले चालीस मिनट हमारे बहुत ही बोरिंग गुजरे थे, न तो कोई उस गाड़ी के पास आकर फटका था, और न ही कोई उस गाड़ी से कोई उतरा था।

कोई चालीस मिनट के बाद वहीं लड़की फिर से दौड़ती हुई आई और जैसे ही कार में बैठी, वैसे ही गाड़ी की हेडलाइट की रोशनी सड़क पर बिखर गई।

जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, गाड़ी की पिछली तरफ लगा हुआ नंबर प्लेट हमारे सामने नुमाया हो गया। जिसे मुझ से पहले ही रागिनी ने अपनी फोन की नोटबुक में लिख लिया।

हमने उस गाड़ी के वहाँ से रवाना होते ही उस फुटेज को फिर से रिवाइंड किया और जिस जिस जगह वो लड़की फुटेज में दिख रही थी, उस जगह की अपने मोबाइल से फोटो खींच कर सेव कर ली।

साथ ही उस पूरी फुटेज को डेटा केबल से अपने मोबाइल में भी ले ली।

उसके बाद हम शर्मा जी का धन्यवाद बोलकर उस भोजनालय से बाहर आ गए।

"चलो कोई तो सुराग मिला, उस लड़की का, कम से कम उसे ढूंढने की एक शुरुआत तो हो सकती है" रागिनी ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हाँ चलो अब बाकी दोनो सीसी टीवी कैमरो की फुटेज भी देख लेते है" मैंने रागिनी को बोला, और उन घरों की ओर बढ गए, जिन पर वे कैमरे लगे हुए थे।

लेकिन दोनो ही जगह से हमें ना उम्मीदी ही हाथ लगी थी। एक पड़ोसी ने तो अपना सीसी टीवी ही खराब बताया था, और दूसरे पड़ोसी दोनो ही मियां बीवी नौकरी पेशा थे, तो दोनो ही अपने काम पर जा चुके थे, और घर पर ताला लटका हुआ था।

मैने निराशा से रागिनी की ओर देखा।

"कोई नही !अभी हमारे पास आगे बढ़ने के लिये उसकी गाड़ी नंबर का क्लू तो है ही ! हम वही से शुरू करते है" रागिनी ने मेरी निराशा को भांपते हुए बोला।

"चलो फिर इस गाड़ी की डिटेल निकालते है, उसके बाद पकड़ते है इस लड़की को" ये बोलकर मै अब अपने फ्लैट की ओर बढ़ गया था।

आजकल किसी गाड़ी की डिटेल निकालना कुछ मिनिटों का ही काम था। गूगल बाबा ने दुनिया के काफी कामो को आसान बना दिया था।

लेकिन इस वक्त मुझे जिस बात ने ज्यादा बेचैन किया हुआ था, वो ये थी कि वो लड़की एक प्लान बनाकर मेरे घर मे घुसी थी।

इस वक़्त कौन बनेगा करोड़पति से भी बड़ा सवाल मेरे सामने खड़ा हो गया था, की इस शहर में मेरा ऐसा कौन सा खैरख्वाह पैदा हो गया था, जिसने मेरे खिलाफ कोई साजिस रचने की पहल मेरे ही घर से की थी। 🤔

वैसे आपके इस सेवक के दुश्मनों की तादाद बहुतायत में थी, अब इनमें से किसी एक दुश्मन को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूँढने के बराबर था।

रागिनी का आगमन-4

वो गाड़ी रोहिणी के ही सेक्टर ग्यारह के पते पर रजिस्टर्ड थी। गाड़ी किसी कुमार गौरव के नाम से रजिस्टर्ड थी।

सेक्टर ग्यारह का पता देखते मेरी उम्मीदों के पंखों को नए परवान मिल चुके थे, क्यो कि उस अनामिका नाम की लड़की ने मुझे यही बताया था कि वो रोहिणी के सेक्टर ग्यारह में ही रहती थी।

उस पते के मिलने के बाद हमारा सबसे पहला काम अब उस पते पर पहुंचने का ही था।

इस वक़्त रोमेश, रागिनी के साथ उसी पते पर खड़ा था। रागिनी ने उस घर की बेल बजाई।

दरवाजा किसी नौकरानी ने खोला था। मैंने उसे कुमार गौरव को बुलाने के लिए बोला तो, वो बिना कुछ बोले ही वापिस अंदर मुड़ गई।

कुछ देर में ही एक कोई तीस वर्षीय जवान मेरे सामने खड़ा था। बन्दे की बॉडी देखकर लग रहा था कि
वो जिम में जमकर पसीना बहा रहा है, और जमकर सप्लीमेंट के डिब्बे पर डिब्बे खाली किये जा रहा है।

"जी कहिये, कहाँ से आये है आप" उस शख्स ने मेरी ओर अनजान निगाहों से देखते हुए पूछा।

"आप ही कुमार गौरव है" मैने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

"जी मै ही कुमार गौरव हूँ, आपको मुझ से क्या काम है" उसने जिज्ञासा भरे स्वर में पूछा।

"वो नीले रंग की वेलिनो आप ही कि गाड़ी है" इस बार रागिनी ने पूछा।

"जी नीले रंग की वेलिनो मेरी ही गाड़ी है, आप जानते हो कुछ मेरी गाड़ी के बारे में" उसके इस सवाल ने मानो हमारे ऊपर कोई वज्रपात सा किया हो।

"जानते हो मतलब?" ये सवाल रोमेश ने किया।

"कल शाम से मेरी गाड़ी गायब है भाई, रात को थाने में रपट भी लिखवाकर आया हूँ, लेकिन अभी तक गाड़ी का कोई अता पता नही है" कुमार गौरव ने रुआंसे स्वर में बोला।

हमारी उम्मीदों पर तुषारापात हो चुका था।

"क्या हम लोग अंदर बैठकर बात कर सकतें है" तभी रागिनी ने बोला।

"जी ! लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप कौन हो" कुमार गौरव के लिए ये भी मुसीबत थी कि वो ऐसे ही किसी अनजान लोगों को अपने घर के अंदर नही घुसा सकता था।

मैने अपना कार्ड निकाल कर उसके हाथ मे दिया।

"आप डिटेक्टिव है, आप मेरी गाड़ी के बारे में कुछ जानते है क्या" कुमार साहब ने मेरा परिचय जानते ही पूछा।

"हमने आपकी गाड़ी में एक लड़की को कल रात को एक सीसी टीवी की फुटेज में देखा है" इस बार फिर से रागिनी ने बोला।

"आप लोग अंदर आइए" ये बोलकर कुमार साहब ने हमारे लिए दरवाजा छोड़ दिया।

हम उसके पीछे ही अंदर की तरफ बढ़ गए। कुछ ही पलों में हम उसके ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे।

ड्राइंग रूम में सन अस्सी के दशक के चॉकलेटी हीरो कुमार गौरव की उसकी फ़िल्म "लव स्टोरी" की एक बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी। मैं उस तस्वीर को देखकर मुस्करा दिया।

इस बन्दे की एकमात्र यही फ़िल्म थी, जिसने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था, और रातों रात ये बन्दा उस समय की नवयौवनाओं की दिलो की धड़कन बन गया था, लेकिन इस एक फ़िल्म के बाद ही इस बन्दे के सितारे डूबते चले गए।

"लगता है कुमार गौरव के बड़े जबरा फैन हो, जो नाम भी उनका रखा हुआ है और ड्राइंग रूम भी उन्ही की तस्वीरों से सजा रखा है" मै और रागिनी इस वक़्त दिलचस्प निग़ाहों से उस तस्वीर को देख रहे थे।

"जी मै नही मेरी मम्मी इनकी बड़ी जबरा फैन है, उन्ही ने मेरा नाम भी कुमार गौरव रखा था" कुमार साहब ने मुस्करा कर जवाब दिया।

"सही बोल रहे हो, वैसे आप तो बॉडी से तो सनी देओल के फैन लगते हो" मैने अपनी भूल सुधार की।

मेरी बात उसे पसंद आई थी, तभी वो ठठाकर हँस पड़ा था।

"आप जरा इस लड़की को देखिए! ये लड़की कल रात को आपकी गाड़ी में देखी गई है" मैने अपने मोबाइल की फोटो गैलरी खोलकर उसे पहले से ली गई फ़ोटो को दिखाया।

कुमार बाबू गौर से उस तस्वीर को देखने लगे।

"ये लड़की तो मल्लिका जैसी लग रही है" कुमार की बोली हुई इस बात ने मेरे कान खड़े कर दिए थे।

"आप जानते हो इस लड़की को" मैंने गौर से कुमार के चेहरे को देखते हुए पूछा।

"हाँ ! एक नंबर की फ्रॉड लड़की है, लेकिन ये तो जेल में थी, ये बाहर कब आई" कुमार ने अचंभित स्वर में बोला।

"जरा इसके बारे में खुलकर बताओ, ये कल रात को मेरे घर से एक कांड करके भागी है" मैंने उतावले स्वर में बोला।

"क्या कांड कर दिया इसने, वैसे ये कुछ भी कर सकती है, यहां तक कि किसी का खून भी" कुमार एक के बाद एक धमाके इस लड़की के बारे में किये जा रहा था।

"ये कल रात को तकरीबन आठ बजे के करीब मेरे फ़्लैट पर बदहवासी की हालत में आई, इसने मुझे बोला कि इसके पीछे कुछ लोग पड़े हुए है, और इसे जान से मारना चाहते है, मैने इंसानियत के नाते अपने घर मे इसे शरण दे दी, लेकिन ये तो मुझे ही सेन्धी लगाकर मेरे घर से फरार हो गई"

मैने देख़ा की मेरी इंसानियत वाली बात पर रागिनी अपनी हँसी रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

"क्या सेन्धी लगा दी इसने" कुमार बाबू अब अपनी कहने से ज्यादा मेरी सुनने के लिए ज्यादा लालायित थे।

"ये मेरी पिस्टल चुराकर भाग गई है, मैं कल रात से ही इस लड़की को ढूंढ रहा हूँ" मैंने अपनी पूरी आपबीती बता दी।

"मतलब इस खतरनाक लड़की के कब्जे में मेरी गाड़ी और आपकी पिस्टल है" कुमार मानो खुद से ही बोल रहा हो।

"और आज सुबह ही एक लड़की की लाश भी बरामद की है पुलिस ने, अभी ये नही पता चल पाया है कि उस लड़की को किसने मारा है" मैने कुमार की बात में अपनी बात जोड़ी।

"क्या पता उस लड़की को भी इसी मल्लिका ने मारा हो, मैने बताया न वो कुछ भी कर सकती है" कुमार उस लड़की से कुछ ज्यादा ही डरा हुआ था।

"कुमार! आपकी बातो से लग रहा है, की आप इस लड़की को काफी करीब से जानतें हो, जो कुछ भी इस लड़की के बारे में जानतें हो, वो हमें बता दो, ताकि हम इसे जल्दी से जल्दी पकड़ सके, नही तो पता नही ये किस किस की जान लेगी" रागिनी ने हमारी बातचीत के सिलसिले को तोड़ा।

"ये लड़की पहले मेरी ही कंपनी में काम करती थी, ये गजब की खूबसूरत लड़की है, इसकी खूबसूरती ही इसका सबसे बड़ा हथियार है, जो कोई इसे पहली बार देखता है, वो इसकी ओर खींचा जाता है, मैं भी उसके इस रूपजाल में फंस गया था, और ये मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थी" कुमार ने सुनी आंखों से शून्य में निहारते हुए बोला।

"फिर तो इसके बारे में सब कुछ गहराई से जानते होंगे" रागिनी ने अब पूछताछ की कमान अपने हाथ मे ले ली थी।

"ज्यादा नही जानता, इतना जानता हूँ कि मॉडल टाउन में रहती थी, इसने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड बनकर मुझे लाखों का चूना लगाया, और जब मैंने इसे पैसे देने से इनकार किया तो इसने मेरे साथ अपना ब्रेकअप कर लिया, बाद में मुझे पता चला कि उसका तो ये बिज़नेस है, हर कंपनी का मालिक उसका बॉयफ्रेंड होता है, और जब तक वो उस पर पैसे लुटाता रहता है, वो इस लड़की की गुडबुक में रहता है, उसको पूरी तरह से चूसने के बाद ये उसको टाटा बाई बाई करके उसकी जिन्दगी से निकल कर अपने नए शिकार की तलाश में निकल जाती है, बस इसमे एक ही अच्छी बात थी, की ये किसी को उसकी जिंदगी से जाने के बाद ब्लेकमेल नही करती" कुमार ने जो भी बताया था, वो काफी दिलचस्प था।

एक बात और थी कि इस लड़की को पकड़ने में चक्कर मे अभी कुमार जैसे कई लुटे पिटे आशिकों से मुलाकात होने वाली थी। :D

वो किसी के लिये अनामिका थी और किसी के लिये मल्लिका थी। न जाने कितने नाम और रूप थे, इस लड़की के...बहरहाल इतना तो कुमार की बातों से स्पष्ट था कि लड़की बहुत खतरनाक थी।

लेकिन इस खतरनाक लड़की ने इस बार एक गलती कर दी थी, की इसने अनजाने में रोमेश दी ग्रेट से पंगा ले लिया था। :roll3:

लेकिन क्या सच मे उसने अनजाने में मुझ से पंगा लिया था, सुबह तो मैं और रागिनी इस नतीजे पर पहुंचे
थे, की वो लड़की प्रीप्लान बनाकर मेरे घर में घुसी थी। वो जानती थी कि मैं भी उसकी खूबसूरती में उलझ जाऊंगा।

अभी मैं अपने तस्सवुर में उस लड़की के बारे में सोच ही रहा था, की कुमार का फोन बज उठा था।

कुमार ने फोरन से पेश्तर फोन को उठाया।

उसने कुछ देर फोन पर एक तरफ जाकर बात की, फिर तेज कदमों से हमारी तरफ आया।

"पुलिस को गाड़ी मिल गई है" कुमार ने उत्साहित स्वर में बोला।

"कहाँ पर" मेरा और रागिनी का सम्मिलित स्वर वहां गूंजा था।

"यही सैक्टर 6 में, अंबेडकर होस्पिटल की पीछे वाली रोड पर मिली है पुलिस को" कुमार ने मेरी ओर देखकर जवाब दिया।

"चलो फिर! आप हमारे साथ आओ, क्या पता आपकी गाड़ी से ही आगे के कोई सुराग मिल जाये।

मेरी बात सुनकर कुमार ने साथ चलने में कोई भी हिला हवाली नही की, और हमारे साथ बाहर की ओर चल पड़ा।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
48,309
83,253
304

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
Prime
11,435
35,682
244
#04

पड़ोस के दो मकानों में ही हमे सीसी टीवी कैमरे लगे हुए नजर आ गए थे। उसके बाद थोड़ी सी आगे जाकर जिस भोजनालय से मेरा टिफिन आता था, उस के बाहर भी मुझे एक कैमरा लगा हुआ मिला।

उन तीनों कैमरों को देखकर उस लड़की के बारे में जानने की कुछ उम्मीदों ने मन ही मन अंगड़ाई ली।

सबसे पहले मैंने उस भोजनालय से ही शुरुआत की।

भोजनालय के मालिक शर्मा जी मेरे अच्छे जानकार थे, इसलिए उन्होने अपने कैमरे की फुटेज दिखाने में कोई गुरेज नही किया।

मैंने करीब 7 बजे से फुटेज को देखना शुरू किया था। रागिनी भी पूरी तल्लीनता से टीवी स्क्रीन पर अपनी नजर लगाये हुए बैठी थी।

तकरीबन पौने आठ बजे के करीब एक नीले रंग की वलोनी कार आकर रुकी थी। उस कार से एक लड़की उतरी और बारिश से बचने के लिये मेरे फ्लैट की ओर तेजी से दौड़ी।

मैने एक नजर रागिनी की ओर उठा कर देखा। रागिनी ने भी मेरी ओर देखा।

"बादशाहों ये गड्डी तो कल रात को मेरे होटल के बाहर काफी देर तक खडी रही थी" शर्मा जी ने हल्के से पंजाबी लहजें में बोला था।

"इस गाड़ी से जो लड़की उतर कर मेरे फ्लैट की तरफ दौड़ती हुई गई थी, उस पर नजर पड़ी थी, क्या आपकी" मैंने शर्मा जी से पूछा।

"ना भईया ! पराई औरतों को देखने का कोई शौक नही रखता जी" :D शर्मा जी की ये बात सुनते ही रागिनी के चेहरे पर बरबस ही एक मुस्कान थिरक उठी थी।

"अब इस फुटेज को साढ़े आठ बजे के आसपास लेकर जाओ, इसी वक्त के आसपास वो लड़की मेरे फ्लैट से गायब हुई थी" मैंने रागिनी की मुस्कान से खिसिया कर उसे बोला।

"पूरी ही देख लेते है सर! क्या पता इस आधे घँटे में गाड़ी से भी कोई और बन्दा उतरा हो, या कोई और आया हो" रागिनी ने बोला तो मैंने भी सहमति में सिर को हिलाया।

"एक बात तो सिद्ध हों गई, की ये लड़की प्री प्लान आई थी, इसने अपनी जान पर खतरे की मुझें झूठी कहानी सुनाई, और किसी खास मकसद से उसने मेरी पिस्टल को भी चुराया" मैंने अभी तक की फुटेज को देखकर अपने आकलन बताया।

"इस बारे में घर पर चलकर बात करेगे" ये बोलकर रागिनी ने फिर से अपनी नजर स्क्रीन पर टिका दी।

अगले चालीस मिनट हमारे बहुत ही बोरिंग गुजरे थे, न तो कोई उस गाड़ी के पास आकर फटका था, और न ही कोई उस गाड़ी से कोई उतरा था।

कोई चालीस मिनट के बाद वहीं लड़की फिर से दौड़ती हुई आई और जैसे ही कार में बैठी, वैसे ही गाड़ी की हेडलाइट की रोशनी सड़क पर बिखर गई।

जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, गाड़ी की पिछली तरफ लगा हुआ नंबर प्लेट हमारे सामने नुमाया हो गया। जिसे मुझ से पहले ही रागिनी ने अपनी फोन की नोटबुक में लिख लिया।

हमने उस गाड़ी के वहाँ से रवाना होते ही उस फुटेज को फिर से रिवाइंड किया और जिस जिस जगह वो लड़की फुटेज में दिख रही थी, उस जगह की अपने मोबाइल से फोटो खींच कर सेव कर ली।

साथ ही उस पूरी फुटेज को डेटा केबल से अपने मोबाइल में भी ले ली।

उसके बाद हम शर्मा जी का धन्यवाद बोलकर उस भोजनालय से बाहर आ गए।

"चलो कोई तो सुराग मिला, उस लड़की का, कम से कम उसे ढूंढने की एक शुरुआत तो हो सकती है" रागिनी ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हाँ चलो अब बाकी दोनो सीसी टीवी कैमरो की फुटेज भी देख लेते है" मैंने रागिनी को बोला, और उन घरों की ओर बढ गए, जिन पर वे कैमरे लगे हुए थे।

लेकिन दोनो ही जगह से हमें ना उम्मीदी ही हाथ लगी थी। एक पड़ोसी ने तो अपना सीसी टीवी ही खराब बताया था, और दूसरे पड़ोसी दोनो ही मियां बीवी नौकरी पेशा थे, तो दोनो ही अपने काम पर जा चुके थे, और घर पर ताला लटका हुआ था।

मैने निराशा से रागिनी की ओर देखा।

"कोई नही !अभी हमारे पास आगे बढ़ने के लिये उसकी गाड़ी नंबर का क्लू तो है ही ! हम वही से शुरू करते है" रागिनी ने मेरी निराशा को भांपते हुए बोला।

"चलो फिर इस गाड़ी की डिटेल निकालते है, उसके बाद पकड़ते है इस लड़की को" ये बोलकर मै अब अपने फ्लैट की ओर बढ़ गया था।

आजकल किसी गाड़ी की डिटेल निकालना कुछ मिनिटों का ही काम था। गूगल बाबा ने दुनिया के काफी कामो को आसान बना दिया था।

लेकिन इस वक्त मुझे जिस बात ने ज्यादा बेचैन किया हुआ था, वो ये थी कि वो लड़की एक प्लान बनाकर मेरे घर मे घुसी थी।

इस वक़्त कौन बनेगा करोड़पति से भी बड़ा सवाल मेरे सामने खड़ा हो गया था, की इस शहर में मेरा ऐसा कौन सा खैरख्वाह पैदा हो गया था, जिसने मेरे खिलाफ कोई साजिस रचने की पहल मेरे ही घर से की थी। 🤔

वैसे आपके इस सेवक के दुश्मनों की तादाद बहुतायत में थी, अब इनमें से किसी एक दुश्मन को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूँढने के बराबर था।

रागिनी का आगमन-4

वो गाड़ी रोहिणी के ही सेक्टर ग्यारह के पते पर रजिस्टर्ड थी। गाड़ी किसी कुमार गौरव के नाम से रजिस्टर्ड थी।

सेक्टर ग्यारह का पता देखते मेरी उम्मीदों के पंखों को नए परवान मिल चुके थे, क्यो कि उस अनामिका नाम की लड़की ने मुझे यही बताया था कि वो रोहिणी के सेक्टर ग्यारह में ही रहती थी।

उस पते के मिलने के बाद हमारा सबसे पहला काम अब उस पते पर पहुंचने का ही था।

इस वक़्त रोमेश, रागिनी के साथ उसी पते पर खड़ा था। रागिनी ने उस घर की बेल बजाई।

दरवाजा किसी नौकरानी ने खोला था। मैंने उसे कुमार गौरव को बुलाने के लिए बोला तो, वो बिना कुछ बोले ही वापिस अंदर मुड़ गई।

कुछ देर में ही एक कोई तीस वर्षीय जवान मेरे सामने खड़ा था। बन्दे की बॉडी देखकर लग रहा था कि
वो जिम में जमकर पसीना बहा रहा है, और जमकर सप्लीमेंट के डिब्बे पर डिब्बे खाली किये जा रहा है।

"जी कहिये, कहाँ से आये है आप" उस शख्स ने मेरी ओर अनजान निगाहों से देखते हुए पूछा।

"आप ही कुमार गौरव है" मैने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

"जी मै ही कुमार गौरव हूँ, आपको मुझ से क्या काम है" उसने जिज्ञासा भरे स्वर में पूछा।

"वो नीले रंग की वेलिनो आप ही कि गाड़ी है" इस बार रागिनी ने पूछा।

"जी नीले रंग की वेलिनो मेरी ही गाड़ी है, आप जानते हो कुछ मेरी गाड़ी के बारे में" उसके इस सवाल ने मानो हमारे ऊपर कोई वज्रपात सा किया हो।

"जानते हो मतलब?" ये सवाल रोमेश ने किया।

"कल शाम से मेरी गाड़ी गायब है भाई, रात को थाने में रपट भी लिखवाकर आया हूँ, लेकिन अभी तक गाड़ी का कोई अता पता नही है" कुमार गौरव ने रुआंसे स्वर में बोला।

हमारी उम्मीदों पर तुषारापात हो चुका था।

"क्या हम लोग अंदर बैठकर बात कर सकतें है" तभी रागिनी ने बोला।

"जी ! लेकिन आपने अभी तक नही बताया कि आप कौन हो" कुमार गौरव के लिए ये भी मुसीबत थी कि वो ऐसे ही किसी अनजान लोगों को अपने घर के अंदर नही घुसा सकता था।

मैने अपना कार्ड निकाल कर उसके हाथ मे दिया।

"आप डिटेक्टिव है, आप मेरी गाड़ी के बारे में कुछ जानते है क्या" कुमार साहब ने मेरा परिचय जानते ही पूछा।

"हमने आपकी गाड़ी में एक लड़की को कल रात को एक सीसी टीवी की फुटेज में देखा है" इस बार फिर से रागिनी ने बोला।

"आप लोग अंदर आइए" ये बोलकर कुमार साहब ने हमारे लिए दरवाजा छोड़ दिया।

हम उसके पीछे ही अंदर की तरफ बढ़ गए। कुछ ही पलों में हम उसके ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे।

ड्राइंग रूम में सन अस्सी के दशक के चॉकलेटी हीरो कुमार गौरव की उसकी फ़िल्म "लव स्टोरी" की एक बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी। मैं उस तस्वीर को देखकर मुस्करा दिया।

इस बन्दे की एकमात्र यही फ़िल्म थी, जिसने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था, और रातों रात ये बन्दा उस समय की नवयौवनाओं की दिलो की धड़कन बन गया था, लेकिन इस एक फ़िल्म के बाद ही इस बन्दे के सितारे डूबते चले गए।

"लगता है कुमार गौरव के बड़े जबरा फैन हो, जो नाम भी उनका रखा हुआ है और ड्राइंग रूम भी उन्ही की तस्वीरों से सजा रखा है" मै और रागिनी इस वक़्त दिलचस्प निग़ाहों से उस तस्वीर को देख रहे थे।

"जी मै नही मेरी मम्मी इनकी बड़ी जबरा फैन है, उन्ही ने मेरा नाम भी कुमार गौरव रखा था" कुमार साहब ने मुस्करा कर जवाब दिया।

"सही बोल रहे हो, वैसे आप तो बॉडी से तो सनी देओल के फैन लगते हो" मैने अपनी भूल सुधार की।

मेरी बात उसे पसंद आई थी, तभी वो ठठाकर हँस पड़ा था।

"आप जरा इस लड़की को देखिए! ये लड़की कल रात को आपकी गाड़ी में देखी गई है" मैने अपने मोबाइल की फोटो गैलरी खोलकर उसे पहले से ली गई फ़ोटो को दिखाया।

कुमार बाबू गौर से उस तस्वीर को देखने लगे।

"ये लड़की तो मल्लिका जैसी लग रही है" कुमार की बोली हुई इस बात ने मेरे कान खड़े कर दिए थे।

"आप जानते हो इस लड़की को" मैंने गौर से कुमार के चेहरे को देखते हुए पूछा।

"हाँ ! एक नंबर की फ्रॉड लड़की है, लेकिन ये तो जेल में थी, ये बाहर कब आई" कुमार ने अचंभित स्वर में बोला।

"जरा इसके बारे में खुलकर बताओ, ये कल रात को मेरे घर से एक कांड करके भागी है" मैंने उतावले स्वर में बोला।

"क्या कांड कर दिया इसने, वैसे ये कुछ भी कर सकती है, यहां तक कि किसी का खून भी" कुमार एक के बाद एक धमाके इस लड़की के बारे में किये जा रहा था।

"ये कल रात को तकरीबन आठ बजे के करीब मेरे फ़्लैट पर बदहवासी की हालत में आई, इसने मुझे बोला कि इसके पीछे कुछ लोग पड़े हुए है, और इसे जान से मारना चाहते है, मैने इंसानियत के नाते अपने घर मे इसे शरण दे दी, लेकिन ये तो मुझे ही सेन्धी लगाकर मेरे घर से फरार हो गई"

मैने देख़ा की मेरी इंसानियत वाली बात पर रागिनी अपनी हँसी रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

"क्या सेन्धी लगा दी इसने" कुमार बाबू अब अपनी कहने से ज्यादा मेरी सुनने के लिए ज्यादा लालायित थे।

"ये मेरी पिस्टल चुराकर भाग गई है, मैं कल रात से ही इस लड़की को ढूंढ रहा हूँ" मैंने अपनी पूरी आपबीती बता दी।

"मतलब इस खतरनाक लड़की के कब्जे में मेरी गाड़ी और आपकी पिस्टल है" कुमार मानो खुद से ही बोल रहा हो।

"और आज सुबह ही एक लड़की की लाश भी बरामद की है पुलिस ने, अभी ये नही पता चल पाया है कि उस लड़की को किसने मारा है" मैने कुमार की बात में अपनी बात जोड़ी।

"क्या पता उस लड़की को भी इसी मल्लिका ने मारा हो, मैने बताया न वो कुछ भी कर सकती है" कुमार उस लड़की से कुछ ज्यादा ही डरा हुआ था।

"कुमार! आपकी बातो से लग रहा है, की आप इस लड़की को काफी करीब से जानतें हो, जो कुछ भी इस लड़की के बारे में जानतें हो, वो हमें बता दो, ताकि हम इसे जल्दी से जल्दी पकड़ सके, नही तो पता नही ये किस किस की जान लेगी" रागिनी ने हमारी बातचीत के सिलसिले को तोड़ा।

"ये लड़की पहले मेरी ही कंपनी में काम करती थी, ये गजब की खूबसूरत लड़की है, इसकी खूबसूरती ही इसका सबसे बड़ा हथियार है, जो कोई इसे पहली बार देखता है, वो इसकी ओर खींचा जाता है, मैं भी उसके इस रूपजाल में फंस गया था, और ये मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थी" कुमार ने सुनी आंखों से शून्य में निहारते हुए बोला।

"फिर तो इसके बारे में सब कुछ गहराई से जानते होंगे" रागिनी ने अब पूछताछ की कमान अपने हाथ मे ले ली थी।

"ज्यादा नही जानता, इतना जानता हूँ कि मॉडल टाउन में रहती थी, इसने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड बनकर मुझे लाखों का चूना लगाया, और जब मैंने इसे पैसे देने से इनकार किया तो इसने मेरे साथ अपना ब्रेकअप कर लिया, बाद में मुझे पता चला कि उसका तो ये बिज़नेस है, हर कंपनी का मालिक उसका बॉयफ्रेंड होता है, और जब तक वो उस पर पैसे लुटाता रहता है, वो इस लड़की की गुडबुक में रहता है, उसको पूरी तरह से चूसने के बाद ये उसको टाटा बाई बाई करके उसकी जिन्दगी से निकल कर अपने नए शिकार की तलाश में निकल जाती है, बस इसमे एक ही अच्छी बात थी, की ये किसी को उसकी जिंदगी से जाने के बाद ब्लेकमेल नही करती" कुमार ने जो भी बताया था, वो काफी दिलचस्प था।

एक बात और थी कि इस लड़की को पकड़ने में चक्कर मे अभी कुमार जैसे कई लुटे पिटे आशिकों से मुलाकात होने वाली थी। :D

वो किसी के लिये अनामिका थी और किसी के लिये मल्लिका थी। न जाने कितने नाम और रूप थे, इस लड़की के...बहरहाल इतना तो कुमार की बातों से स्पष्ट था कि लड़की बहुत खतरनाक थी।

लेकिन इस खतरनाक लड़की ने इस बार एक गलती कर दी थी, की इसने अनजाने में रोमेश दी ग्रेट से पंगा ले लिया था। :roll3:

लेकिन क्या सच मे उसने अनजाने में मुझ से पंगा लिया था, सुबह तो मैं और रागिनी इस नतीजे पर पहुंचे
थे, की वो लड़की प्रीप्लान बनाकर मेरे घर में घुसी थी। वो जानती थी कि मैं भी उसकी खूबसूरती में उलझ जाऊंगा।

अभी मैं अपने तस्सवुर में उस लड़की के बारे में सोच ही रहा था, की कुमार का फोन बज उठा था।

कुमार ने फोरन से पेश्तर फोन को उठाया।

उसने कुछ देर फोन पर एक तरफ जाकर बात की, फिर तेज कदमों से हमारी तरफ आया।

"पुलिस को गाड़ी मिल गई है" कुमार ने उत्साहित स्वर में बोला।

"कहाँ पर" मेरा और रागिनी का सम्मिलित स्वर वहां गूंजा था।

"यही सैक्टर 6 में, अंबेडकर होस्पिटल की पीछे वाली रोड पर मिली है पुलिस को" कुमार ने मेरी ओर देखकर जवाब दिया।

"चलो फिर! आप हमारे साथ आओ, क्या पता आपकी गाड़ी से ही आगे के कोई सुराग मिल जाये।

मेरी बात सुनकर कुमार ने साथ चलने में कोई भी हिला हवाली नही की, और हमारे साथ बाहर की ओर चल पड़ा।


जारी रहेगा_____✍️
WOW iska matlab sahi kaha tha Baba BABU Rao ne
.
Ladki ka CHKKAR bada DANGER hota hai re baba
.
Kitni ko chunnaa laga chuki hai ye ladki lekin ek achi bat ye pata chle ki ye sab karne ke bad Blackmail nahi karti kisi ko
.
Ab sawal ye hai ki Romesh ke ghar aake uski pistol lene ka kya matlab ho sakta hai is ladki ka kafi Interesting hoti ja rahe hai kahani
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
48,309
83,253
304
WOW iska matlab sahi kaha tha Baba BABU Rao ne
.
Ladki ka CHKKAR bada DANGER hota hai re baba
.
:laugh:
Kitni ko chunnaa laga chuki hai ye ladki lekin ek achi bat ye pata chle ki ye sab karne ke bad Blackmail nahi karti kisi ko
lagta to aisa hi hai, khair dekhte hai aage kya nikalta hai 😅
Ab sawal ye hai ki Romesh ke ghar aake uski pistol lene ka kya matlab ho sakta hai is ladki ka kafi Interesting hoti ja rahe hai kahani
Maksad seedha hai, Romesh Babu ke loye lagana :yes2:
Per sawaal ye hai ki kha wo aisa kar payegi?? Khair, thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
46,008
124,025
304
Shaandar update
 
Top