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Aryan Arya

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Update 3


अब तक अंधेरा भी हो चुका था। मगर मैं तो जैसे अपने विचारों में ही खोया हुआ था। मुझे ये भी पता नहीं चला कि कब मां रानी को लेके छत पर आई। मेरी तंद्रा तब टूटी जब मां ने मुझे कहा "ऐसे ही टहलता रहेगा या बहु से कुछ बात भी करेगा।" मां की आवाज सुनते ही मैने उनकी तरफ देखा तो पाया मां के साथ रानी भी खड़ी है। उसने अभी तक वही दुल्हन वाले कपड़े ही पहन रखे थे और उसके हाथ में एक बड़ा बैग भी था। शायद उसके कपड़े होंगे। मगर उसके चेहरे पे वो नई नवेली दुल्हन वाली रौनक नहीं दिख रही थी। दिख रहा था तो बस एक उदास चेहरा। इतना तो मैं समझ ही चुका था कि रानी के उदासी का कारण मै हु। आखिर कौन दुल्हन पहले दिन ही अपने पति से थप्पड़ खाकर खिलखिला सकती है। मैं नहीं चाहता था कि मां को किसी भी तरह का कोई संदेह हो या वो कोई stress ले। इसलिए मैने अपने चेहरे पे नकली मुस्कान का मुखौटा पहन लिया मगर कहा कुछ नहीं। मां रानी को लेके मेरे कमरे में ले गई और उससे बताने लगी कि आज से वो और आर्यन(यानी मै) इसी कमरे में रहेंगे, वगैरा वगैरा। रानी भी मां की बात बड़े गौर से सुन रही थी। अब तक मैं भी कमरे में दाखिल हो चुका था। मेरे कमरे में एक नॉर्मल साइज बेड के अलावा एक बार सा सोफा और एक गोदरेज है जिसपे बड़ा सा सीसा(Mirror) भी लगा हुआ है। थोड़ा बहुत इधर उधर की बात रानी को बताने के बाद मां अपने चेहरे पे एक मुस्कान के साथ मेरे कमरे मेरा मतलब है हमारे कमरे से निकल गई। अब कमरे में रानी के साथ मै अकेला था। एक तो मैं शर्मीले स्वभाव का दूसरा शाम में जो हुआ और साथ ही साथ जो विचार या कहे ख्वाहिश मेरे मन में रानी के प्रति थे उसके साथ रानी से बात तो दूर मुझ रानी से आंख भी नहीं मिलाया जा रहा था। रानी का हाल तो मुझसे भी बुरा था। मैं तो सोफे पे बैठा हुआ भी था। मगर वो तो अब भी वही खड़ी थी जहां मां की बात सुनते वक्त वो खड़ी थी। अब किसी को तो पहल करनी ही थी। सो मैने रानी की तरह देखते हुए कड़क आवाज में (ऐसे मैने जानबुझकर कड़क आवाज नहीं निकली बल्कि मेरी आवाज ही कड़क है) "इधर आओ"। ये पहले शब्द थे जो मैने उससे कहे थे क्योंकि शादी की सारी बात मां ने ही की थी और शादी में भी मैने बिना मतलब का कुछ नहीं बोला था। रानी छोटे छोटे कदमों के सहारे मेरे सामने आके खड़ी हो गई। मगर उसकी आंखे अभी भी नीचे ही झुकी हुई थी। वैसे मुझे तो पता ही था फिर भी मैने उससे पूछा "क्या नाम है तुम्हारा?" उसने पता नहीं कुछ बोला भी या सिर्फ अपने होंठ हिलाए। मगर मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दिया।
मैं "खाना नहीं खाया? ज़ोर से बोलो"
रानी "रा...रा...नी"
मैं "इतना डर क्यों रही हो"
वो कुछ नहीं बोली। उसकी चुपी का कारण मै समझ रहा था। क्योंकि नीचे हॉल में जब उसने बोलने की कोशिश की थी तभी मैने उसके कान के नीचे एक बजाया था।
मैं "अपने बारे में बताओ"
रानी के चेहरे के भाव बता रहे थे कि उससे मेरे सवाल का जवाब समझ में नहीं आया कि वो अपने बारे में मुझे क्या बताए।
मैं "अच्छा छोड़ो ये बताओ तुम्हारे घर में कौन कौन है?"
रानी "मम्मी, पापा, राहुल, काजल और मै"
मैं "तुमने कहा तक पढ़ाई की है?"
रानी "जी हमारे गांव में 5वीं तक ही सकूल है तो मैने 5वीं तक ही पढ़ाई की है"
मैं मन ही मन सोचने लगा ये मां ने मेरी शादी किस गंवार के साथ कर दी जिससे ठीक से स्कूल भी बोलना नहीं आ रहा है। कहा शहर में पढ़ी लिखी लड़कियों के रिश्ते मैने ठुकरा दिया और कहा ये 6ती फेल मेरे गला लटक गई। मुझे अपने आप पे बहुत गुस्सा आ रहा। क्यों मैने उन शहर की लड़कियों में से किसी एक को भी पसंद नहीं किया। उसके साथ कम से कम मुझे जीरो से तो शुरू नहीं करना पड़ता।


शेष अगले भाग में, आपको ये update कैसा लगा हमें बताए? और भाई लोग और उनकी दीदियों update अच्छा लगे तो Like कर देना।


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malikarman

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अब तक अंधेरा भी हो चुका था। मगर मैं तो जैसे अपने विचारों में ही खोया हुआ था। मुझे ये भी पता नहीं चला कि कब मां रानी को लेके छत पर आई। मेरी तंद्रा तब टूटी जब मां ने मुझे कहा "ऐसे ही टहलता रहेगा या बहु से कुछ बात भी करेगा।" मां की आवाज सुनते ही मैने उनकी तरफ देखा तो पाया मां के साथ रानी भी खड़ी है। उसने अभी तक वही दुल्हन वाले कपड़े ही पहन रखे थे और उसके हाथ में एक बड़ा बैग भी था। शायद उसके कपड़े होंगे। मगर उसके चेहरे पे वो नई नवेली दुल्हन वाली रौनक नहीं दिख रही थी। दिख रहा था तो बस एक उदास चेहरा। इतना तो मैं समझ ही चुका था कि रानी के उदासी का कारण मै हु। आखिर कौन दुल्हन पहले दिन ही अपने पति से थप्पड़ खाकर खिलखिला सकती है। मैं नहीं चाहता था कि मां को किसी भी तरह का कोई संदेह हो या वो कोई stress ले। इसलिए मैने अपने चेहरे पे नकली मुस्कान का मुखौटा पहन लिया मगर कहा कुछ नहीं। मां रानी को लेके मेरे कमरे में ले गई और उससे बताने लगी कि आज से वो और आर्यन(यानी मै) इसी कमरे में रहेंगे, वगैरा वगैरा। रानी भी मां की बात बड़े गौर से सुन रही थी। अब तक मैं भी कमरे में दाखिल हो चुका था। मेरे कमरे में एक नॉर्मल साइज बेड के अलावा एक बार सा सोफा और एक गोदरेज है जिसपे बड़ा सा सीसा(Mirror) भी लगा हुआ है। थोड़ा बहुत इधर उधर की बात रानी को बताने के बाद मां अपने चेहरे पे एक मुस्कान के साथ मेरे कमरे मेरा मतलब है हमारे कमरे से निकल गई। अब कमरे में रानी के साथ मै अकेला था। एक तो मैं शर्मीले स्वभाव का दूसरा शाम में जो हुआ और साथ ही साथ जो विचार या कहे ख्वाहिश मेरे मन में रानी के प्रति थे उसके साथ रानी से बात तो दूर मुझ रानी से आंख भी नहीं मिलाया जा रहा था। रानी का हाल तो मुझसे भी बुरा था। मैं तो सोफे पे बैठा हुआ भी था। मगर वो तो अब भी वही खड़ी थी जहां मां की बात सुनते वक्त वो खड़ी थी। अब किसी को तो पहल करनी ही थी। सो मैने रानी की तरह देखते हुए कड़क आवाज में (ऐसे मैने जानबुझकर कड़क आवाज नहीं निकली बल्कि मेरी आवाज ही कड़क है) "इधर आओ"। ये पहले शब्द थे जो मैने उससे कहे थे क्योंकि शादी की सारी बात मां ने ही की थी और शादी में भी मैने बिना मतलब का कुछ नहीं बोला था। रानी छोटे छोटे कदमों के सहारे मेरे सामने आके खड़ी हो गई। मगर उसकी आंखे अभी भी नीचे ही झुकी हुई थी। वैसे मुझे तो पता ही था फिर भी मैने उससे पूछा "क्या नाम है तुम्हारा?" उसने पता नहीं कुछ बोला भी या सिर्फ अपने होंठ हिलाए। मगर मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दिया।
मैं "खाना नहीं खाया? ज़ोर से बोलो"
रानी "रा...रा...नी"
मैं "इतना डर क्यों रही हो"
वो कुछ नहीं बोली। उसकी चुपी का कारण मै समझ रहा था। क्योंकि नीचे हॉल में जब उसने बोलने की कोशिश की थी तभी मैने उसके कान के नीचे एक बजाया था।
मैं "अपने बारे में बताओ"
रानी के चेहरे के भाव बता रहे थे कि उससे मेरे सवाल का जवाब समझ में नहीं आया कि वो अपने बारे में मुझे क्या बताए।
मैं "अच्छा छोड़ो ये बताओ तुम्हारे घर में कौन कौन है?"
रानी "मम्मी, पापा, राहुल, काजल और मै"
मैं "तुमने कहा तक पढ़ाई की है?"
रानी "जी हमारे गांव में 5वीं तक ही सकूल है तो मैने 5वीं तक ही पढ़ाई की है"
मैं मन ही मन सोचने लगा ये मां ने मेरी शादी किस गंवार के साथ कर दी जिससे ठीक से स्कूल भी बोलना नहीं आ रहा है। कहा शहर में पढ़ी लिखी लड़कियों के रिश्ते मैने ठुकरा दिया और कहा ये 6ती फेल मेरे गला लटक गई। मुझे अपने आप पे बहुत गुस्सा आ रहा। क्यों मैने उन शहर की लड़कियों में से किसी एक को भी पसंद नहीं किया। उसके साथ कम से कम मुझे जीरो से तो शुरू नहीं करना पड़ता।


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Aryan Arya

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Update 4


खैर, अब क्या ही किया जा सकता था। सो मैने उससे पूछा "तुम्हारे पापा क्या करते है?" वैसे मुझे पता था कि उसका बाप, उसका भाई राहुल और उसकी मां मजदूर है और दूसरों की खेतों में काम करते है। मगर फिर भी मैं ये सवाल करके उसे उसकी औकात मेरे घर में दिखाना चाहता था। रानी एक बार फिर से चुप रही। आखिर वो अपने बैंक मैनेजर पति को क्या ही बताती की उसका बाप एक मजदूर है और दूसरे के खेतों में अपने साथ साथ अपनी पत्नी और अपने बेटे को मेहनत करवा कर कुछ पैसे जोड़ता है। जिससे उसका परिवार किसी तरह अपना भरन पोषण कर सके। रानी की चुप्पी ने मेरे गुस्से की आग में घी का काम किया।
मैं गुस्से में "मै जो पूंछू उसका जवाब मुझे एक बार में मिलना चाहिए नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा"
रानी के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो कितनी डरी सहमी हुई थी। उसने धीमी आवाज में कहा "खेतों पे काम करते है"
वैसे मैं रानी के प्रति ज्यादा कठोर नहीं होना चाहता था मगर गुस्से में और अपने dominating व्यक्तित्व को सिद्ध करने हेतु मुझे थोड़ा कठोर होना पड़ा। मैं और सवाल पूछकर न तो अपना मूड और खराब करना चाहता था और न ही सुहागरात। आखिर जिंदगी में एक ही तो सुहागरात होती है। अब क्यों खामखां अपनी इकलौती सुहागरात तो खराब करना।
मैंने रानी को ऊपर से नीचे तक गौर से देखा। शादी के लाल जोड़े में सजी रानी बेहद मासूम लग रही थी। उसकी उम्र अभी ज़्यादा नहीं थी—पिछले ही साल उसने अपनी जवानी में कदम रखा था। वह भले ही बहुत खूबसूरत न हो, लेकिन उसका गोरा रंग उसे अलग पहचान दे रहा था। शायद इसी वजह से माँ ने उसे मेरे लिए चुना था। रानी ने लाल रंग की साड़ी के साथ उसी रंग का हाफ ब्लाउज़ पहन रखा था। कुछ गहने भी थे, जो उसे मेरी माँ ने ही दिए थे। उसने साड़ी को ऐसे पहन रखा था जैसे लपेटा हो। साड़ी से उसके पेट या पीठ का कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था। मगर उसके छाती के उभारों से ये अनुमान लगाया जा सकता था कि उसके उभार अभी उभर ही रहे है। बाद में मुझे पता चला कि उसकी चूचियों की नाप 32 इंच ही है। मैंने रानी को अपने पास बुलाया। वह नन्हे–नन्हे कदमों से चलते हुए मेरे करीब आकर खड़ी हो गई।
मैं "आओ मेरे पास बैठो"
मगर रानी अपनी जगह से हिली तक नहीं। उसके मन में शायद मेरा डर रहा होगा। रानी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखा कर मैंने उसका हाथ थामा और हल्के से अपनी ओर खींचा, ताकि वह आकर मेरी गोद में बैठ जाए। किसी रोबोट की तरह वो मेरी गोद में आके गिरी। मगर मेरे गोद में बैठते ही वो उठने को चटपटे लगी। मैं कोई जबरदस्ती नहीं चाहता था। मगर फिर भी मेरी सुहागरात थी ऐसे कैसे अपनी बीवी को अपने गोद से उठने दे देता। सो मैने भी अपने दोनों हाथों की पकड़ मजबूत कर दी।
मैं "मुझे डरो मत मै तुम्हारा पति हु। और जहां तक मैं समझता हु ये मेरा हक है"
मेरा शब्दों का उसपर असर हुआ और उसका विद्रोह अब ठंडा पड़ गया। मगर एक विद्रोह था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था। दरअसल रानी को अपनी गोद में बैठाने का ही असर था कि मेरे लन्ड ने बगावत कर दी थी। वैसे रानी के गान्ड में मांसपेशियों की कमी मुझे साफ महसूस हो रही थे। ऐसा लग रहा था जिसे उसकी गन्दा में मांसपेशियों की जगह सिर्फ हड्डियां ही भरी है। मगर फिर भी अब पहली बार मैने किसी मादा को अपनी गोद में बैठाया था तो उत्तेजना तो स्वाभाविक थी। मेरा लन्ड रानी के गान्ड पे लगातार ठोकर मार रहा था। जिसका प्रमाण उसके बदलते भाव दे रहे थे कि वो कितना असहज महसूस कर रही है। मैं कुछ भी जबरदस्ती या एकाएक नहीं करना चाहता था बल्कि बड़े प्यार से करना चाहता था ताकि उससे ये न लगे कि उसका पति उसका साथ किसी तरह की जोर जबरदस्ती कर रहा है।


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Playboy_raj

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Update 1


दोस्तो जैसा को आप सभी जानते है मेरा नाम आर्यन है। मैं 26 साल का हु और मुंगेर नेशन बैंक में मैनेजर हूं। दुनिया की नजरों में मै काफी शर्मीला इंसान हू मगर तबियत से मै काफी रंगीन मिजाज का हु। वैसे तो आज तक मैने किसी को चोदा नहीं है ना ही किसी औरत को नंगा देखा है हालांकि मोबाइल पे देख है अपने भी देखा ही होगा। मगर फिर भी मुझे BDSM सेक्स पसंद है। इसका पूरा श्रेय आप Xforum जैसी कई site को भी दे सकते है। मैं दिखना में न ज्यादा Handsome हु और न ही बदसूरत। और नहीं ही मेरा लन्ड कोई 10 इंच 12 इंच का है। बल्कि मैं एक सामान्य का दिखने वाला और सामान्य लन्ड साइज (6 इंच) वाला शर्मीला इंसान हू।

मेरे घर में मेरे अलावा सिर्फ मेरी मां है। जिनका ज्यादा तर समय दो ही कामों में गुजरता है। एक पूजा पाठ में दूसरा मेरे लिए एक सुंदर सुशील पत्नी ढूंढने में।

अभी तक मैं बहुत सारी लड़कियों से शादी के लिए मिल चुका हूं। मगर एक भी मुझे मेरे काबिल नहीं लगी। या यू काहू की मेरे ख्वाहिशों को पूरा करने के काबिल नहीं लगीं। वैसे मैने किसी से direct तो नहीं पूछ की आपको किस तरह का सेक्स पसंद है? आपको BDSM सेक्स पसंद है? सभी को मैने केवल अपने अनुमान से ही reject किया है। और यह सिलसिला शायद चलता ही रहता अगर पिछले महीने मेरी मां को heart attack नहीं आया होता। जिसमें मां को कुछ हुआ तो नहीं मगर डॉक्टर ने मुझे सलाह दी कि मैं मां को कोई stress न लेने दूं। अब मैं डॉक्टर को क्या बताता कि मेरी मां को सबसे ज्यादा stress मेरी वजह से ही होता है मतलब मेरी शादी की चिंता ही उन्हें अंदर ही अंदर कमजोर करती जा रही है। खैर, मैने मां को हस्पताल से डिस्चार्ज करवा कर घर लगा। रास्ते में ही मैने सोच लिया था इस बार मां जिस भी लड़की को मुझे दिखाएगी उससे से मै शादी के लिए हा बोल दूंगा।

दो तीन दिनों के बाद मां ने एक और लड़की को मेरे लिए पसंद किया था। मां ने मुझे लड़की की फोटो भी दिखाई। लड़की देखने में ज्यादा सुंदर तो नहीं थी मगर गोरी थी। और उसकी उम्र कुछ 18–19 ही होगी। बातों बातों में पता चला कि लड़की का नाम रानी है। उसका एक छोटा भाई और एक छोटी बहन है और उसका परिवार गांव में रहता है। गांव वाली बात सुनकर एक बार को तो मेरा मन किया कि इससे भी शादी के लिए मना कर दु। आप ही बताओ दोस्तो अब गांव की लड़की को BDSM सेक्स के बारे में क्या ही पता होगा। मां के heart attack से पहले अगर इसका रिश्ता मेरे लिए आया होता तो मैं मना भी कर देता मगर मैने अपने ख्वाहिशों को ताख पे रख शादी के लिए हा कर दिया। मेरे हा करते ही मां के चेहरे का रंग की खिल गया। मां को मैने इतना खुश आज से पहले कभी नहीं देखा था। मैं जल्दी से जल्दी शादी करना चाहता था ऐसा नहीं था कि मुझे बस चुदाई‌ करनी थी बल्कि मैं चाहता था कि मेरी मां को कुछ हो उससे पहले मैं शादी कर लू।

एक महीने बाद आज मेरी शादी है। मैने शादी को simple ही रखा। वैसे भी मेरे परिवार में मेरा अपना कहने वाला कोई था नहीं। कुछ 3–4 दोस्त है मगर वो बाहर में जॉब करते है। इसलिए आज शादी के दिन ही आए है और आज ही जाने का प्लान भी है। शादी मंदिर से हुए। थोड़ा बहुत खाना पीना हुआ फिर सभी गेस्ट घर चले गए। मैं, रानी और मेरी मां ही बचे थे। मैने अपनी मारुति सुजुकी निकली और मां और रानी के साथ चल पड़ा घर की तरफ। घर पहुंचते पहुंचते शाम हो चुका था। मां रानी को अपने साथ पूजा रूम में ले गई और मैं चल दिया अपने रूम में सोने।



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Mast suruwat hai 🤩
 

Playboy_raj

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Update 4


खैर, अब क्या ही किया जा सकता था। सो मैने उससे पूछा "तुम्हारे पापा क्या करते है?" वैसे मुझे पता था कि उसका बाप, उसका भाई राहुल और उसकी मां मजदूर है और दूसरों की खेतों में काम करते है। मगर फिर भी मैं ये सवाल करके उसे उसकी औकात मेरे घर में दिखाना चाहता था। रानी एक बार फिर से चुप रही। आखिर वो अपने बैंक मैनेजर पति को क्या ही बताती की उसका बाप एक मजदूर है और दूसरे के खेतों में अपने साथ साथ अपनी पत्नी और अपने बेटे को मेहनत करवा कर कुछ पैसे जोड़ता है। जिससे उसका परिवार किसी तरह अपना भरन पोषण कर सके। रानी की चुप्पी ने मेरे गुस्से की आग में घी का काम किया।
मैं गुस्से में "मै जो पूंछू उसका जवाब मुझे एक बार में मिलना चाहिए नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा"
रानी के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो कितनी डरी सहमी हुई थी। उसने धीमी आवाज में कहा "खेतों पे काम करते है"
वैसे मैं रानी के प्रति ज्यादा कठोर नहीं होना चाहता था मगर गुस्से में और अपने dominating व्यक्तित्व को सिद्ध करने हेतु मुझे थोड़ा कठोर होना पड़ा। मैं और सवाल पूछकर न तो अपना मूड और खराब करना चाहता था और न ही सुहागरात। आखिर जिंदगी में एक ही तो सुहागरात होती है। अब क्यों खामखां अपनी इकलौती सुहागरात तो खराब करना।
मैंने रानी को ऊपर से नीचे तक गौर से देखा। शादी के लाल जोड़े में सजी रानी बेहद मासूम लग रही थी। उसकी उम्र अभी ज़्यादा नहीं थी—पिछले ही साल उसने अपनी जवानी में कदम रखा था। वह भले ही बहुत खूबसूरत न हो, लेकिन उसका गोरा रंग उसे अलग पहचान दे रहा था। शायद इसी वजह से माँ ने उसे मेरे लिए चुना था। रानी ने लाल रंग की साड़ी के साथ उसी रंग का हाफ ब्लाउज़ पहन रखा था। कुछ गहने भी थे, जो उसे मेरी माँ ने ही दिए थे। उसने साड़ी को ऐसे पहन रखा था जैसे लपेटा हो। साड़ी से उसके पेट या पीठ का कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था। मगर उसके छाती के उभारों से ये अनुमान लगाया जा सकता था कि उसके उभार अभी उभर ही रहे है। बाद में मुझे पता चला कि उसकी चूचियों की नाप 32 इंच ही है। मैंने रानी को अपने पास बुलाया। वह नन्हे–नन्हे कदमों से चलते हुए मेरे करीब आकर खड़ी हो गई।
मैं "आओ मेरे पास बैठो"
मगर रानी अपनी जगह से हिली तक नहीं। उसके मन में शायद मेरा डर रहा होगा। रानी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखा कर मैंने उसका हाथ थामा और हल्के से अपनी ओर खींचा, ताकि वह आकर मेरी गोद में बैठ जाए। किसी रोबोट की तरह वो मेरी गोद में आके गिरी। मगर मेरे गोद में बैठते ही वो उठने को चटपटे लगी। मैं कोई जबरदस्ती नहीं चाहता था। मगर फिर भी मेरी सुहागरात थी ऐसे कैसे अपनी बीवी को अपने गोद से उठने दे देता। सो मैने भी अपने दोनों हाथों की पकड़ मजबूत कर दी।
मैं "मुझे डरो मत मै तुम्हारा पति हु। और जहां तक मैं समझता हु ये मेरा हक है"
मेरा शब्दों का उसपर असर हुआ और उसका विद्रोह अब ठंडा पड़ गया। मगर एक विद्रोह था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था। दरअसल रानी को अपनी गोद में बैठाने का ही असर था कि मेरे लन्ड ने बगावत कर दी थी। वैसे रानी के गान्ड में मांसपेशियों की कमी मुझे साफ महसूस हो रही थे। ऐसा लग रहा था जिसे उसकी गन्दा में मांसपेशियों की जगह सिर्फ हड्डियां ही भरी है। मगर फिर भी अब पहली बार मैने किसी मादा को अपनी गोद में बैठाया था तो उत्तेजना तो स्वाभाविक थी। मेरा लन्ड रानी के गान्ड पे लगातार ठोकर मार रहा था। जिसका प्रमाण उसके बदलते भाव दे रहे थे कि वो कितना असहज महसूस कर रही है। मैं कुछ भी जबरदस्ती या एकाएक नहीं करना चाहता था बल्कि बड़े प्यार से करना चाहता था ताकि उससे ये न लगे कि उसका पति उसका साथ किसी तरह की जोर जबरदस्ती कर रहा है।


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खैर, अब क्या ही किया जा सकता था। सो मैने उससे पूछा "तुम्हारे पापा क्या करते है?" वैसे मुझे पता था कि उसका बाप, उसका भाई राहुल और उसकी मां मजदूर है और दूसरों की खेतों में काम करते है। मगर फिर भी मैं ये सवाल करके उसे उसकी औकात मेरे घर में दिखाना चाहता था। रानी एक बार फिर से चुप रही। आखिर वो अपने बैंक मैनेजर पति को क्या ही बताती की उसका बाप एक मजदूर है और दूसरे के खेतों में अपने साथ साथ अपनी पत्नी और अपने बेटे को मेहनत करवा कर कुछ पैसे जोड़ता है। जिससे उसका परिवार किसी तरह अपना भरन पोषण कर सके। रानी की चुप्पी ने मेरे गुस्से की आग में घी का काम किया।
मैं गुस्से में "मै जो पूंछू उसका जवाब मुझे एक बार में मिलना चाहिए नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा"
रानी के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो कितनी डरी सहमी हुई थी। उसने धीमी आवाज में कहा "खेतों पे काम करते है"
वैसे मैं रानी के प्रति ज्यादा कठोर नहीं होना चाहता था मगर गुस्से में और अपने dominating व्यक्तित्व को सिद्ध करने हेतु मुझे थोड़ा कठोर होना पड़ा। मैं और सवाल पूछकर न तो अपना मूड और खराब करना चाहता था और न ही सुहागरात। आखिर जिंदगी में एक ही तो सुहागरात होती है। अब क्यों खामखां अपनी इकलौती सुहागरात तो खराब करना।
मैंने रानी को ऊपर से नीचे तक गौर से देखा। शादी के लाल जोड़े में सजी रानी बेहद मासूम लग रही थी। उसकी उम्र अभी ज़्यादा नहीं थी—पिछले ही साल उसने अपनी जवानी में कदम रखा था। वह भले ही बहुत खूबसूरत न हो, लेकिन उसका गोरा रंग उसे अलग पहचान दे रहा था। शायद इसी वजह से माँ ने उसे मेरे लिए चुना था। रानी ने लाल रंग की साड़ी के साथ उसी रंग का हाफ ब्लाउज़ पहन रखा था। कुछ गहने भी थे, जो उसे मेरी माँ ने ही दिए थे। उसने साड़ी को ऐसे पहन रखा था जैसे लपेटा हो। साड़ी से उसके पेट या पीठ का कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था। मगर उसके छाती के उभारों से ये अनुमान लगाया जा सकता था कि उसके उभार अभी उभर ही रहे है। बाद में मुझे पता चला कि उसकी चूचियों की नाप 32 इंच ही है। मैंने रानी को अपने पास बुलाया। वह नन्हे–नन्हे कदमों से चलते हुए मेरे करीब आकर खड़ी हो गई।
मैं "आओ मेरे पास बैठो"
मगर रानी अपनी जगह से हिली तक नहीं। उसके मन में शायद मेरा डर रहा होगा। रानी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखा कर मैंने उसका हाथ थामा और हल्के से अपनी ओर खींचा, ताकि वह आकर मेरी गोद में बैठ जाए। किसी रोबोट की तरह वो मेरी गोद में आके गिरी। मगर मेरे गोद में बैठते ही वो उठने को चटपटे लगी। मैं कोई जबरदस्ती नहीं चाहता था। मगर फिर भी मेरी सुहागरात थी ऐसे कैसे अपनी बीवी को अपने गोद से उठने दे देता। सो मैने भी अपने दोनों हाथों की पकड़ मजबूत कर दी।
मैं "मुझे डरो मत मै तुम्हारा पति हु। और जहां तक मैं समझता हु ये मेरा हक है"
मेरा शब्दों का उसपर असर हुआ और उसका विद्रोह अब ठंडा पड़ गया। मगर एक विद्रोह था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था। दरअसल रानी को अपनी गोद में बैठाने का ही असर था कि मेरे लन्ड ने बगावत कर दी थी। वैसे रानी के गान्ड में मांसपेशियों की कमी मुझे साफ महसूस हो रही थे। ऐसा लग रहा था जिसे उसकी गन्दा में मांसपेशियों की जगह सिर्फ हड्डियां ही भरी है। मगर फिर भी अब पहली बार मैने किसी मादा को अपनी गोद में बैठाया था तो उत्तेजना तो स्वाभाविक थी। मेरा लन्ड रानी के गान्ड पे लगातार ठोकर मार रहा था। जिसका प्रमाण उसके बदलते भाव दे रहे थे कि वो कितना असहज महसूस कर रही है। मैं कुछ भी जबरदस्ती या एकाएक नहीं करना चाहता था बल्कि बड़े प्यार से करना चाहता था ताकि उससे ये न लगे कि उसका पति उसका साथ किसी तरह की जोर जबरदस्ती कर रहा है।


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Good update ☺️
 
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