बात तो तुम सही कह रही हो। एक पति पत्नी के बीच शर्म नाम का परदा ही बेडरूम में दोनों को खुल के सेक्स का आनंद नहीं लेने देता। एक दूजे से संकोच के कारण वो खुल के अपनी इच्छाएं बता नहीं पाते और फिर वही खुशी या मजा वो दूजे मर्द या औरत से पूरा करना चाहते हैं।
लेकिन इस चीज़ का एक पहलू और भी है। घर की दाल खा खा एक जब बोर हो जाते है तो बाहर फिर चिकन बिरयानी का मन करता है. पहले औरत कमजोर होती थी, मर्द जब चाहे अपने बिस्तर पे लाकर मसल देते थे, पर आजकल की औरत independent होती है और मर्दों को उरूनकी औकात में रखती है.
सम्भोग जीवन का सत्य हैं एक औरत कितनी प्यासी कितनी कामवासनाओं से भरी है एक औरत अपने मन के अश्लील और कामुक विचार को सिर्फ बिस्तर पर किसी मर्द की बाहों में लिपट कर आपने अदाओं से व्यक्त करती है जो मर्द उसकी इन अदाओ को समझ जाता है सिर्फ वही मर्द चरमसुख पाने का हकदार होता है.
एक प्यासी औरत को जब एक घोड़े जैसा मर्द मिल जाता हैं,तो फिर वो सब कुछ भूल कर चूतड़ों को उठा कर उस मर्द के मूसल पर यू उछल उछल कर साथ देती हैं मानों बरसों से प्यासी हो. वो मर्द उसका पति है या कोई बाहर वाला उसे कोई फर्क नहीं पड़ता
आरूषी जी , पहले तो यह बता दूं कि मै मैच्योर पुरुष हूं ना कि महिला
आप को मेरे कमेन्ट पर रिस्पांस करते देख बहुत अच्छा लगा । आप ने जब फोरम से हटने की बात कही थी तब राजी मैडम और कोमल रानी जी की तरह मुझे भी काफी दुख हुआ था । हम सभी आपके इरोटिक कविता को बहुत ज्यादा मिस करते ।
और जहां बात है सेक्सुअल तृप्ति की , औरत के बारे मे आप बेहतर जान सकती है लेकिन मर्द के कैरेक्टर के बारे मे मै जरूर कुछ कहना चाहता हूं ।
मर्द के लिए पत्नी तो पत्नी है , वो उसे हमेशा हासिल होती है । लेकिन हसबैंड को उससे जिन्सी रिश्तेदारी कायम करके उस फतह का एहसास नही होता जो उसे किसी पड़ोस की औरत का मान मर्दन करके , यहां तक कि घर मे आने वाली धोबिन या , बर्तन मांजने वाली तक से हमबिस्तर होकर होता है ।
सेक्स के मामले मे मर्द सरासर कुते की जात होता है । घर की मलाई छोड़कर भी वह नुक्कड की जूठन चाटने जरूर जाएगा । दो टके की छिनाल औरत के सामने वह बिछ - बिछ जाएगा लेकिन घर मे मौजूद अपनी सर्वगुण सम्पन्न बीबी से वह यूं बेजार होकर दिखाएगा जैसे उसे फांसी लग रही हो ।
