wittywizard
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Bhai ekdum top class writing.
Bisexual aur likhte rahna, maza aa raha he.
Bisexual aur likhte rahna, maza aa raha he.
Bahut jabardast start hai bhai bas ab hero form me aa jaye aur sabki faad ke rakh deUpdate 2
ठंड के दिन शुरू हो चुके थे। स्कूल-कॉलेज गुरपुरब की वजह से बंद थे। सुबह का खाना खाकर सिमर चादर लेकर अपनी छत वाली मंजी पर लेट गया। उसकी मम्मी नहाने बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी भी छत पर दुपहरे में बाल सुखाने आ गई।
कोमल अपने कमरे में टीवी देख रही थी।
सिमर को अभी नींद नहीं आई थी कि मम्मी के पैरों की आवाज से उसकी नींद खुल गई। उसने चादर हल्का सा हटा कर देखा – मम्मी ने दुपट्टा नहीं लिया था। हरे रंग का सलवार-सूट पहना था। 36 के मम्मे जब हिलते तो कमाल लगते।
तभी पड़ोसी के दरवाजे खुले और हैपी पड़ोसी का लड़का 32-33 साल का आ गया। वह भी छत पर आ गया। हैपी भी खेती करता था। उसकी शादी को 5 साल हो गए थे।
गाँव की काफी भाभियाँ उसके साथ सेट थीं। जो औरत एक बार उसके काबू में आ जाती, उसकी खूब तसल्ली करता। भले नशा करने से उसका शरीर सूख गया था, लेकिन सेक्स के मामले में आज भी कायम था।
गुजारा मुश्किल से चलता था और घर पुराने टाइप का खुला था। सेक्स में पूरा हरामी था। जब अपनी बीवी की सील तोड़ रहा था तब उसकी चीखें पूरे मोहल्ले ने सुनी थीं।
गाँव वालों को पता था – शाम 7 बजे के बाद गाँव में शांति हो जाती है। इसलिए उसकी बीवी की चीखें सुबह 4 बजे तक सुन-सुन कर मोहल्ले की हर औरत उस रात अपने पति से चुद चुकी होती।
कुलवंत बातें करते-करते उस तरफ चली गई।
हैपी – “क्यों चाची, क्या हाल है? मनाया जा रहा गुरपुरब?”
कुलवंत – “हाँ, अभी घर का काम करके फ्री हुई हूँ। बस गुरुद्वारे जाने की तैयार हूँ। तेरी मम्मी कहाँ है, गुरुद्वारे चली गई?”
हैपी – “हाँ सब कब के चले गए। कह रहे थे गुरुद्वारे सेवा करनी है।”
कुलवंत – “हाँ मैं भी लेट हो गई। घर के काम खत्म करते-करते। मैं भी जाना था सेवा करने, लेकिन घर के काम कभी खत्म नहीं होते।”
हैपी – “अब तो चाची बहुत लेट हो गई। इधर ही आ जाना, दीवार फाँद कर मेरी सेवा कर दे। बहुत अकेला लग रहा है।”
हैपी के साथ भी कुलवंत की पुरानी दोस्ती थी। दीवार फाँद कर वह दिन में भी कई बार आ जाता जब मौका मिलता।
कुलवंत हँसते हुए – “हट बेशर्म कुत्ते। धीरे बोल, पीछे मेरा बेटा सो रहा है। वह सुन न ले। और नीचे मेरी बेटी है, टीवी देख रही होगी, ऊपर न आ जाए।”
हैपी – “कोई नहीं, यह नहीं उठेगा। सोते-सोते हम काम निबटा लेंगे। किसी को पता नहीं लगेगा। तू टेंशन न ले, तू तो डरपोक है। दिल भी करता होगा न। चल ज्यादा नखरे न कर, आ जा छत वाले कमरे में। मेरे घर वाले भी जल्दी नहीं आएँगे। गुरुद्वारे के बाद सीधे खेत चले जाएँगे।”
कुलवंत ने मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखा और धीरे से आवाज लगाई। सिमर ने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे यकीन हो गया कि वह सो गया है। कुलवंत ने हैपी की तरफ इशारा किया और 3 फुट ऊँची दीवार फाँद कर दूसरी तरफ चली गई। हैपी ने जाते ही उसे बाँहों में लिया और किस करने लगा। साथ ही उसके चिताड़ को मसलने लगा।
कुलवंत अभी भी हल्की टेंशन में थी। बीच-बीच में हैपी को किस करती और मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखने लगती कि कहीं वह उठ न जाए। कभी सिसकी लेने लगती। आखिर हमेशा की तरह उसकी अंदर की आग जीत गई और बेटे वाला प्यार थोड़े समय के लिए हार गया।
फिर कुलवंत और हैपी दोनों छत वाले कमरे में आ गए। कमरा स्टोर जैसा था जहाँ घर का फालतू सामान पड़ा था। छत पर बैठने के लिए 2-3 कुर्सियाँ और एक लंबा मेजा रखा था। कमरे में आते ही कुलवंत को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर रस चूसने लगा।
कुलवंत वैसी ही औरत थी जिसका रस पीने को पूरा गाँव तरसता था, लेकिन यह रस सिर्फ कुछ खास लोगों को ही मिलता था। पता नहीं कितनी देर दोनों किस करते रहे। जब कुलवंत का साँस लेना मुश्किल हो गया तब उसने हैपी को जोर से धक्का मारा और जोर-जोर से साँस लेने लगी।
कुलवंत – “मुझे मार डालेगा हरामी… जान ही निकाल दी।”
हैपी हँसते हुए – “जान तो तेरी जरूर निकालूँगा लेकिन तुझे चोद कर।”
हैपी ने कुलवंत के सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।
कुलवंत – “यह क्या कर रहा है? मुझे पूरी नंगी क्यों कर रहा है? कोई आ जाएगा। सिर्फ सलवार नीचे कर और चूत मार जल्दी से।”
हैपी – “कोई नहीं आएगा। तू क्यों टेंशन लेती है। मेरी मम्मी और बीवी खेत चली जाएँगी। कोई नहीं आएगा।”
कुलवंत को भी पता था हैपी के इरादे का। हैपी ने अफीम खा रखी थी, आँखें लाल थीं। इसे जल्दी जाने नहीं था। यही सोच कर आज गुरुद्वारे भी नहीं जाना था। उसने फोन निकाला और अपने पति को लैंडलाइन पर फोन किया। बेटी ने फोन उठाया। उसने कहा कि वह अपनी स्कूल की सहेली के साथ बाजार जा रही है, शाम तक आएगी।
अब वह खुल कर मजा लेने लगी। उसे कोई टेंशन नहीं रही। इस बात से अनजान कि उसका बेटा जो पहले लेटा था, अब दीवार फाँद कर कमरे के बाहर छुप कर देख रहा था। उसे पता था – मम्मी अब जल्दी बाहर नहीं आने वाली।
सिमर अब दरवाजे के पास पहुँच चुका था और अंदर झाँकने लगा। तभी कमरे से कुछ गिरने की आवाज आई।
सिमर ने आगे झाँक कर देखा तो छत पर मम्मी का सलवार-कमीज़ और पैंटी पड़ी थी। ब्रा उन कपड़ों में नहीं दिखी। उसने सावधानी से बिखरे कपड़ों को उठा कर देखा – ब्रा नहीं थी।
हैपी पूरा कमीना था। औरत को काबू में कैसे करना, उसे अच्छे से आता था। सिमर ने अंदर झाँक कर देखा – हैपी भी नंगा हो चुका था और मम्मी के साथ लिपटा हुआ था।
सिमर को यह देख कर पता नहीं क्यों बहुत सुकून सा मिला। हैपी कुलवंत के भरे हुए शरीर का दीवाना था। कुलवंत वैसी ही थी। हैपी उसके गालों पर किस करता हुआ नीचे निप्पलों पर आ गया।
उसके निप्पल मुँह में लेकर खींचने लगा। जिससे कुलवंत के अंदर दर्द और मजा दोनों की लहर दौड़ गई। उसने हैपी के सिर को जोर से पकड़ लिया। हैपी कुलवंत के मम्मों के साथ मस्ती करता रहा।
कभी निप्पल चूसता, कभी मुँह से खींचता, और दूसरे हाथ से कभी-कभी पूरा जोर लगा कर निप्पल मसल देता। जिससे कुलवंत के शरीर में दर्द की लहर दौड़ जाती। कुलवंत को दर्द भी होता लेकिन मजा भी आता।
आधा घंटा और मम्मों के साथ खेलने के बाद वह पेट को चूमता हुआ नीचे बैठ गया और चूत चूसने लगा। सिमर कमरे के बाहर खड़ा चुपचाप सब देख रहा था और मजा ले रहा था।
यह सब कुछ पहले भी पता नहीं कितनी बार देख चुका था। अपनी माँ की चूत देख कर उसने अपने सूखे लंड पर जीभ फेरी। उसे पता था मम्मी अपनी चूत पूरी तरह साफ रखती है।
अपनी माँ की चूत पर उसने कभी बाल नहीं देखे। कुलवंत अपनी चूत का पूरा खयाल रखती थी। कई ब्यूटी क्रीम, दूध की मलाई और कई चीजें लगाती थी।
कुलवंत ज्यादा देर खड़ी नहीं रह सकी। उसकी लतें जवाब दे गईं। उसका पानी निकलने वाला था। वह पास पड़ी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर पैर फैला कर बैठ गई।
कुर्सी की बाजुएँ नहीं थीं इसलिए कुलवंत के पैर फैलाने में हैपी को कोई दिक्कत नहीं हुई। वह उसके पैरों में बैठ गया और चूत चूसने लगा। चूत के दाने को मुँह में भर कर ऐसे चूस रहा था जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ के निप्पल चूसता है।
थोड़ी ही देर में कुलवंत का पानी निकलने लगा। हैपी ने थोड़ा सा चाटा और पीछे हट गया। कुलवंत लगभग बेहोश हो गई थी। हैपी उसके बालों को देख कर हँसता हुआ अपना कोई 7.5 इंच का लंड हिला रहा था।
उसने कुलवंत को थोड़ी देर साँस लेने दिया और फिर दीवार से पकड़ कर उसका सिर ऊपर करके अपना लंड उसके दाने के पास कर दिया।
सिमर ने देखा – मम्मी ने बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर हैपी का लंड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। सिमर ने देखा कैसे मम्मी पूरी एक्सपर्ट है। एक हाथ से बेस पकड़ रखा था और चूसे मार रही थी।
कुछ 2-3 मिनट ही चूसे मारे थे कि हैपी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और कुलवंत को कुर्सी के सहारे झुका दिया। चूत में एक जोरदार झटका मारते हुए अपना लंड पूरा सिमर की माँ की चूत में पेल दिया।
सिमर की माँ की पतली कमर पकड़ कर हैपी ने थोड़े अपने पैर फैला कर पोजिशन सेट की और तूफानी झटकों से सिमर की माँ को चोदने लगा।
झटकों की स्पीड बहुत तेज थी। इतनी कि कुलवंत के दर्द और मजा वाली चीखें निकलने लगीं। उसके दिमाग में अब अपने बेटे का कोई खयाल नहीं था। वह तो मजा ले कर चुद रही थी।
हैपी के पट्ट जब पूरे जोर से कुलवंत के गोल-मटोल भरे हुए गोरे चिताड़ से टकराते तो जो आवाज पैदा होती, वह हैपी का जोश और बढ़ा देती। हैपी फिर टॉप तक लंड बाहर निकाल कर पूरे जोर से झटका मारता। बाहर खड़ा सिमर अपना लंड मसलते पूरा मजा ले रहा था अपनी माँ को चुदते देख कर।
कुछ 10 मिनट हैपी ने पूरे जोर से इसी पोजिशन में ठोक कर कुलवंत को चोदा। झटके मारते-मारते ही पास पड़े तकिए को नीचे डाल दिया। जिसे देख कर कुलवंत को एक सेकंड भी नहीं लगा समझने में कि हैपी क्या करना चाहता है।
जैसे ही हैपी ने लंड बाहर निकाला, कुलवंत नीचे घोड़ी बन गई। गांड ऊपर कर ली। तकिया अपने घुटनों के नीचे रख लिया ताकि घुटने छिल न जाएँ। वैसे तो फर्श पर मार्बल लगा था, फिर भी इतने जोर के झटके पड़ने वाले थे कि तकिया न होता तो घुटने लाल हो जाते।
हैपी सिमर की माँ की गांड के पीछे आया और 4-5 थप्पड़ पूरे जोर से मारे। जिनकी आवाज भी काफी आई और कुलवंत को दर्द भी काफी हुआ लेकिन वह बोली कुछ नहीं। कुलवंत के गोरे चिताड़ 5 थप्पड़ों में ही पूरी तरह लाल हो गए।
हैपी का यही स्टाइल था। इससे एक तो वह रिलैक्स हो जाता क्योंकि एक ही पोजिशन में चोदता तो 2-4 मिनट में उसका काम हो जाता। उसने कुलवंत जो सीधी घोड़ी बनी थी उसका सिर नीचे की तरफ कर दिया और दोबारा पूरे जोर से चोदने लगा। माँ अंदर लंड ले कर मजा ले रही थी, बेटा बाहर खड़ा देख कर मजा ले रहा था।
10-15 मिनट बाद हैपी ने कुलवंत कौर को सीधा किया और उसके पैर उठा कर अपने कंधों पर रख लिए और उसके ऊपर पूरा झुक गया। अब कुलवंत के घुटने उसके कंधों से लगभग टच हो रहे थे। हैपी ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया था।
हैपी ने अपने पीछे की दीवार से पैर टिका लिए। सिमर यह पोजिशन देख कर एक बार तो घबरा गया। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई क्योंकि अब मम्मी पूरी तरह हैपी के काबू में थी। यह वो पोजिशन थी जिसमें से बचना अब मुमकिन नहीं था।
इस पोजिशन में हैपी सिर्फ 10 मिनट ही टिक सका लेकिन जितने झटके मारे, कुलवंत की बस करवा दी। कुलवंत के मुँह से भी निकलने लगा था – “हाय हैपी छोड़ दे बस कर… मम्मी हाय आह्ह्ह… सीईई…” और जब हैपी का काम हुआ तो कुलवंत ने सुकून की साँस ली। हैपी साइड में गिर पड़ा। कुलवंत कौर भी पैर फैला कर थोड़ी देर ऐसे ही पड़ी रही।
कुलवंत 5 मिनट बाद उठी और हैपी के ढीले पड़े लंड से कंडोम उतार कर पास प्लास्टिक बैग में डाल दिया।
तभी सीढ़ियों की आवाज आई। सिमर ने देखा हैपी का जीजा सुक्खा पोर्च में चढ़ आया। “वाह भाभी मजा आ गया।” सुक्खा हैपी का बड़ा जीजा था। वह कुलवंत को भाभी कहता था।
सिमर का दिल घबरा गया। पूरी तरह कि मम्मी नंगी पड़ोसी के लड़के के साथ पकड़ी गई। लेकिन मम्मी को नंगी पकड़े जाने से ज्यादा अच्छा लगा कि उसका लंड देख कर मम्मी का पानी निकल गया।
कुलवंत पूरी तरह घबरा गई थी। उसका रोना निकल गया। सिसकते हुए बोली, “प्लीज पाजी किसी को मत बताना, मुझे माफ कर दो।” उसने मुड़ कर हैपी की तरफ देखा – वह तो बस मुस्कुरा रहा था। कुलवंत समझ गई कि यह साजिश दोनों ने मिल कर रची है।
कुलवंत – “हैपी कुत्ते मुझे जान से नहीं मारता तो मैं चिल्ला देती।”
हैपी – “चिल्ला दे, तेरे कपड़े बाहर पूरी छत पर बिखरे पड़े हैं। नंगी तू यहाँ खड़ी है। क्या कहेगी लोगों को?”
हैपी देख चाची ज्यादा पाखंड न कर। वैसे भी अब तू कुछ कर नहीं सकती।
कुलवंत भी समझ गई कि अब बहस करने से कोई फायदा नहीं। वक्त उसके खिलाफ चल रहा था आज। सेक्स तो उसे बहुत पसंद था लेकिन आज जो हैपी ने किया वह गलत था।
इसके बाद सिमर ने देखा – पूरी दोपहर मम्मी ठुकती रही। हैपी और उसके जीजा ने पूरी रूह से कुलवंत को चोदा। सुक्खा का लंड कुछ खास नहीं था लेकिन टाइमिंग ठीक थी। कभी चूत में कभी गांड में – यह काम शाम 7 बजे तक चलता रहा।
कुलवंत जब बाहर आने लगी तो सिमर वहाँ से खिसक लिया। जब वापस मुड़ा तो देखा कोमल उसके पीछे खड़ी थी। हैपी जैसी ही पूरी पसीने से भीगी हुई। उसका हाथ उसकी सलवार में था। पता नहीं कब से वह वहाँ खड़ी थी।
सिमर ने उसकी हालत देखी और समझ गया कि उसने भी खुद पर काबू पा लिया था। जल्दी से आगे हो कर उसका ढीला नाड़ा बाँध दिया – “दीदी तू नीचे चली जा जल्दी, मम्मी बाहर आ रही है।”
कोमल ने सिर्फ सिर हिलाया और नीचे चली गई। वह असल में सिमर को देखने आई थी कि कब से सो रहा है, उसे उठा दे। लेकिन जब सिमर को पड़ोसी की दीवार से सटा देखा तो वह भी पीछे आकर देखने लगी।
हैपी और उसका जीजा नीचे चले गए थे। सिमर ने देखा शायद कोई और पड़ोसी की औरत ऊपर आने लगी थी। अपनी माँ के बिखरे कपड़े उसने इकट्ठे किए। आगे हो कर अपनी माँ जो पूरी दोपहर चुदाई के बाद नंगी ही बाहर आ रही थी, उसके सामने आ गया।
इससे पहले कुलवंत कुछ समझ पाती या बोल पाती, सिमर बोला – “मम्मी तेरे पास कपड़े पहनने का टाइम नहीं, जल्दी यह चादर लपेट ले। नीमल आंटी ऊपर आ रही है, मैंने उन्हें सीढ़ी चढ़ते देखा।”
कुलवंत ने जल्दी से वैसा ही किया और नीचे चली गई। शर्म तो उसे बहुत आई लेकिन सिमर की समझदारी देख कर राहत की साँस ली। उसने एक बार मुड़ कर देखा – सिमर उसके कपड़े उठा कर नीचे आ रहा था।
नीचे आ कर कुलवंत अपने कमरे में चली गई। आज उसे कई दिनों बाद बुरा लगा सेक्स कर के। उसने कभी सेक्स के लिए मना नहीं किया जब कोई ठीक तरीके से कहता था।
ऐसा नहीं था कि वह हर आने वाले के लिए सलवार उतार कर लेट जाती। उसका अपना स्टेटस था गाँव में, स्कूल में। हर कोई उसे हाँजी-जी कह कर बुलाता। इसलिए उसने हमेशा दिमाग से काम लिया।
उसके पति को भी कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वह खुद कई बार ले कर जाता था। उसे पता था कि वह कुलवंत कौर को ठंडा नहीं कर सकता।
इसलिए कई बार जब कुलवंत को शहर के होटल में अपने यार से मिलना होता तो वह खुद कार में ड्रॉप करता और खुद ले कर आता। कुलवंत भी अपने पति को पूरी इज्जत देती। कभी ऊँचा नहीं बोलती, कभी बुरा फील नहीं करवाती।
Ab lagta hai Simar Happy aur uski family ki chut faadne wala hai but ye Komal baher muh na marle kahiUpdate 3
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इसलिए कई बार जब कुलवंत को शहर के होटल में अपने यार से मिलना होता तो वह खुद कार में ड्रॉप करता और खुद ले कर आता। कुलवंत भी अपने पति को पूरी इज्जत देती। कभी ऊँचा नहीं बोलती, कभी बुरा फील नहीं करवाती।
Ab next
सिमर को यह सुन कर बड़ा झटका लगा कि उसके पापा को सब पता है और उन्होंने ही कहा है ऐसा करने को।
कुलवंत – “लेकिन आज जो हुआ वह मुझे बिल्कुल मंजूर नहीं। एक तो मुझे ब्लैकमेल किया, दूसरा मेरे साथ गलत बोला। यह मुझे बिल्कुल मंजूर नहीं।”
सिमर यह सुन कर गुस्से में आ गया और गाली निकाल कर बोला – “उन दोनों की माँ चोद दूँ मम्मी, तू अभी बता मैं दोनों की लतें-बाँहें तोड़ दूँ।”
कुलवंत – “तेरा हर दिमाग लड़ाई-झगड़े में क्यों रहता है।”
सिमर – “वो मुझे नहीं पता लेकिन हाँ इन दोनों की सेवा तो मैं जरूर करूँगा।” अपनी जेब से फोन निकालते हुए किसी को फोन लगाने लगा।
कुलवंत – “यह क्या कर रहा है? किस को फोन लगा रहा है? देख तुझे कहती हूँ तू उन दोनों को कुछ नहीं करेगा। मैं नहीं चाहती तू किसी पुलिस केस में फँसे। अगर बदला लेना ही है तो जैसा मैं कहूँ वैसा कर बस।” और उसके कान के पास जा कर कुछ फुसफुसाने लगी (उसने क्या प्लान बनाया यह आने वाले टाइम में पता चल जाएगा)।
सिमर की आँखें फटी की फटी रह गईं यह सुन कर और वह घबरा भी गया जैसे उसके ऊपर परमाणु बम गिरा हो।
कुलवंत – “डरपोक क्यों है? मुझे पता है तेरी प्रॉब्लम का। मैं तेरी माँ हूँ। अपने घर में कौन क्या कर रहा है, सब पता है मुझे।”
सिमर – “क…क…क्या मतलब तुम्हें सब पता है।”
कुलवंत – “यही कि तेरा हथियार ठीक नहीं है। तू जल्दी पानी छोड़ देता है।”
सिमर सिर नीचे करके – “तुम्हें पता है… फिर भी तुम ऐसा प्लान बना रही हो। और मैं तो अब तक सिर्फ देखता रहा हूँ, किया नहीं। देखने और करने में बहुत फर्क है।”
कुलवंत – “कोई नहीं मैं सब ठीक कर दूँगी। तेरा अच्छा टाइम आज से शुरू। बस मेरी बात मान और तेरी इस बार की सजा भी माफ।”
सिमर अपनी माँ की तरफ देखने लगा – “तुम्हें क्या लगता मुझे पता नहीं जो तुम कॉलेज में 2 दिन पहले झगड़ा किया था, तेरे प्रिंसिपल का फोन आया था। वैसे तो मैं कुछ और सोच रही थी तेरी सजा के बारे में क्योंकि तेरे झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन कोई न कोई पंगा खड़ा कर देता है तू।”
और फिर कुलवंत बेड से नीचे कोई 2.5 फुट लंबी और एक उँगली से थोड़ी मोटी टूटी हुई कड़ी उठा कर बोली – “यह देख ले, यह बनवाई है तुम दोनों भाई-बहन के लिए।”
और फिर सिमर को अपने पास बुलाया। सिमर अपनी माँ के पास आ गया। कुलवंत ने सिमर का पजामा और कच्छा नीचे किया और उसे बेड पर झुकने को कहा।
सिमर को पता था इसका मतलब। दोनों भाई-बहन बहुत बार यह सब कर चुके थे। ज्यादातर तब होता जब एग्जाम का रिजल्ट, कोई लड़ाई-झगड़ा या कोई बुरी आदत।
सिमर – “मम्मी तुमने तो कहा था माफ कर दिया, अब यह क्या?”
कुलवंत – “इस बार की सजा तो माफ बस तुझे तेरे नए दोस्त से मिलवा दूँगी तो आगे से ध्यान रखना और फिर सिमर के दाहिने तरफ आते हुए अपनी बाँह कंधे तक ऊपर उठाते हुए सिमर ने 2 बार टूटी कड़ी से वार किए। सिमर 2 बार में ही लगभग रो पड़ा। उसकी आँखें गीली हो गईं। कुलवंत के कहने पर उसने अपनी गांड मसलते खड़ा हुआ और पजामा-कच्छा ऊपर कर लिया।
कुलवंत – “मिल लिया अपने नए दोस्त से। अब आगे से कोई गलती नहीं। आज से घूम फिर आ जा घूमना। आज से मेरे साथ सोएगा तू और अपनी बहन को भेज दे अंदर, उसे भी मिलवा दूँ। उसके भी आजकल पैर गंदे लग रहे हैं। घर में बहुत घूमती फिरती है।”
सिमर आँखें साफ करता बाहर कोमल को ढूँढने उसके कमरे में चला गया जहाँ वह अपनी सहेली से फोन पर बातें कर रही थी। सिमर को अपने कमरे में देखा तो पहले इग्नोर किया। जब उसे पीठ मसलते देखा तो समझ गई उसकी मुरम्मत हुई है।
कोमल – “क्या हुआ क्या कर दिया तूने? अब इधर बैठ मेरे पास।” उसे प्यार से बुलाया।
सिमर – “कुछ नहीं दीदी… लेकिन तुम यह फोन रखो और मम्मी के कमरे में चलो, तुम्हें बुला रही हैं।”
कोमल की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह समझ गई मम्मी के कमरे में बुलाने का मतलब। वह चुपचाप खड़ी हुई। उसे पता था कोई बचाव का रास्ता नहीं। और उसे पता था मम्मी ने बुलाया है तो जरूर कोई गलती की होगी। इसलिए वह जाने ही वाली थी कि सिमर ने उसे रोक लिया।
सिमर – “दीदी मेरे हिसाब से तुम्हें कपड़े चेंज कर लेने चाहिए। जैसा मम्मी ने तुम्हें बुलाया है, कमीज़ तो ठीक है लेकिन तुम्हारी टाइट पजामी बाद में मुश्किल कर देगी।”
कोमल ने सिमर के माथे पर किस किया और पजामा उठा कर बाथरूम में चली गई। वहाँ चेंज करके सीधे अपनी मम्मी के कमरे में चली गई।
सिमर वहीं बैठा अपनी बहन का इंतजार करने लगा। कुछ 5 मिनट तक कोई आवाज नहीं आई फिर “हायyyy आआआआईईईई मम्मी मैं मर गई”
कुछ 5 सेकंड बाद फिर एक आवाज आई – “मम्मी प्लीज छोड़ दो आगे से कोई गलती नहीं करूँगी।” उसके बाद कुछ 5 सेकंड के फर्क से 5 बार और उसके गोरे भरे चिताड़ पर वार पड़े। कोमल रोने लगी थी एक बार में ही।
कुलवंत ने कोमल को गले लगाया और उसके माथे पर किस किया और उसे अपने कमरे में भेज दिया। कोमल को अपनी माँ से कोई गुस्सा नहीं था। गलती कोमल की ही थी कि किसी लड़के के साथ पार्क में घूमते देख लिया गया था।
कमरे में जब कोमल आई सिमर अभी भी वहीं बैठा था। कोमल आते ही बेड पर गिर पड़ी और पेट के बल लेट कर एक हाथ से अपनी गांड मसलने लगी और दूसरे हाथ से मुँह ढक लिया।
सिमर ने बेड के ड्रॉअर से एलोवेरा क्रीम निकाली और कोमल के पास रख दी – “ले दीदी मैं बाहर जाता हूँ, तुम लगा लो नहीं तो दर्द जल्दी कम नहीं होगा।”
कोमल – “तू लगा दे यार दर्द बहुत हो रहा है।”
सिमर अपनी बहन का पजामा नीचे करके उसके गोरे चिताड़ को देखने लगा। जहाँ एक के बाद एक 6 लाइनें पड़ी हुई थीं। उसने क्रीम दोनों हाथों से मली और अपनी बहन की गांड पर लगा दी।
कोमल अपने छोटे भाई के हाथ अपनी गांड पर लगते ही सिसक पड़ी। सिमर काफी देर अपनी बहन के चिताड़ को धीरे-धीरे मसलता रहा और फिर बोला – “दीदी वैसे तुमने क्या किया था?”
कोमल – “बाद में बताऊँगी तू जा अब अपने कमरे में, मुझे सोने दे।”
दोनों का यही रूटीन था। वैसे तो यह काम कोमल को ज्यादा करना पड़ता था। जब भी सिमर माँ से कुटाई खा कर आता, कोमल उसके लिए क्रीम लगाती। क्योंकि कोमल को कम ही पड़ती थी। उनकी माँ ने कभी उनके चेहरे पर या शरीर के किसी और हिस्से पर नहीं मारा। कुलवंत हमेशा दोनों की गांड पर ही मारती।
यह तरीका उसने एक गोरे से सीखा था। जब वह गोवा घूमने गई थी अपने एक बॉयफ्रेंड और पति के साथ। एक कमरे का दरवाजा खुला था और कमरे में एक गोरा अपनी गर्लफ्रेंड या बीवी को ऐसे ही पेट के बल लेटा कर उसकी गांड पर पहले जोर-जोर के थप्पड़ मार रहा था और कुछ 5 मिनट बाद उसने जूती उठाई और 10 मिनट उसे मारता रहा। बाद में दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और बातें करने लगे। कुलवंत को यह तरीका बहुत अच्छा लगा।
अगले दिन कोई 11 बजे कुलवंत ने सिमर को तैयार होने को कहा कि हम शहर जाना है।
सिमर – “मम्मी लेकिन जाना क्या है और मेरी क्या जरूरत है।”
कुलवंत – “कुछ जरूरी काम है। पता चल जाएगा। चल तैयार हो जा जल्दी।”
कुलवंत सिमर को ले कर शहर में एक घर पहुँची जहाँ उसका एक जानकार रहता था। शहर में काफी नाम था उसका। थोड़े दिन पहले ही उसे किसी से पता चला था इसके बारे में – देसी दवाई वाला, हर रोग की। पहले तो उसने कोई जरूरत नहीं समझी लेकिन हैपी और उसके जीजा को सबक सिखाने के लिए उसके बेटे का बहुत बड़ा रोल होना था।
सिमर बाहर कुर्सी पर बैठ गया और कुलवंत उस आदमी के पास अंदर चली गई जिसकी उम्र कोई 45 साल थी। दरवाजा उन्होंने बंद नहीं किया। सिमर को सिर्फ वह आदमी नजर आ रहा था। माँ दूसरी तरफ बैठी थी।
अंदर कुलवंत ने उस हकीम को अपने बेटे की सारी प्रॉब्लम बता दी। उसने भी सब ध्यान से सुना और 2 दिन में दवाई तैयार करने को कहा। कुलवंत के पाँव पर हाथ फेरते हुए।
कुलवंत के लिए यह नई बात नहीं थी। वैसे भी उसे अब इसकी जरूरत थी। वह खड़ी हुई और अपनी सलवार नीचे करती बोली – “आ जाओ जल्दी, पीछे मेरा बेटा बाहर वेट कर रहा है, हमें घर भी जाना है।” इतनी सुंदर औरत को सलवार नीचे करते देख उसका लंड भी पूरा टाइट हो चुका था।
सिमर ने देखा मम्मी जिस पर वह आदमी बैठा था उसे पकड़ कर झुक गई। पूरा तो नहीं देख सकता था कि अंदर क्या हो रहा है। उसे सिर्फ मम्मी की पीठ तक झुकी हुई नजर आ रही थी।
सिमर ने अपनी माँ को अपने होंठों के टुकड़े करते देखा। दोनों में कोई 10 फुट का फासला था। उसकी आँखें लाल हो गईं। थोड़ी ही देर में सिमर को मम्मी हिलती नजर आई जैसे पीछे से कोई उसे धक्के मार रहा हो।
फिर सिमर समझ गया सब कुछ। वह भी आज लगातार कमरे की तरफ देखता रहा। कुलवंत भी अपने बेटे की आँखों में आँखें डाल कर देखती जा रही थी। आज उसे एक अलग ही सुरूर था।
सिमर के लिए तो आज यह बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल था। अपनी माँ को नंगा तो बहुत बार देख चुका था लेकिन आज बात अलग थी। आज दोनों को पता था कि अंदर क्या हो रहा है। एक-दूसरे की तरफ देखते जा रहे थे। सिमर के लिए तो आज बहुत हार्ड था। कुछ 20 मिनट उसकी माँ उसकी आँखों के सामने चुद रही थी।
वह आदमी तो खुश था ही कुलवंत को चोद कर। औरतें तो उसने काफी चोदी थीं लेकिन सरदारनी कुलवंत कौर थी, बात ही अलग थी।
“मजा आ गया सरदारनी तूने तो आज स्वाद चखा दिया। 2 दिन बाद अपने बेटे को कहना मेरे पास से अपना सामान ले जाए। ऐसा सामान बना कर दूँगा कि तू याद रखेगी। तू कहती थी कुछ कर नहीं सकता, 1 महीने में ही तो बिस्तर तोड़ेगा।”
कुलवंत यह सुन कर बहुत खुश हुई और बोली – “अगर यह बात है तो मैं भी वादा करती हूँ आपको भी इनाम मिलता रहेगा।”
“चल उठ चलें काम हो गया” कुलवंत कमरे से बाहर आते हुए अपनी सलवार का नाड़ा बाँधते सिमर से बोली।
कुलवंत – “2 दिन बाद यहाँ आ कर इसके पास से दवाई ले जाना और खाने का तरीका भी समझ लेना।”
वहाँ से फ्री हो कर कुलवंत और सिमर सीधे घर आ गए। शाम हो चुकी थी। माँ को घर उतार कर सिमर अपनी आदत के मुताबिक जिम चला गया और कुलवंत और उसकी बेटी रोटी बनाने लगीं।
रात का खाना खा कर फ्री हुए तो कुलवंत ने सिमर को अपने साथ ही सुलाने को कह दिया। कुलवंत का पति भी वापस आ चुका था। सिमर को यह था कि वह उनके कमरे में सो कर क्या करेगा, डैडी तो वापस आ गए। वह तो अपने मोबाइल पर गेम या हिंदी डब मूवीज देखना पसंद करता था। लेकिन मम्मी के कहने पर मना नहीं किया। असल में हुआ यह था कि जब सिमर जिम गया था तब कुलवंत ने अपने पति को भी सब बता दिया था कि उसके साथ क्या हुआ और उसके बेटे में भी क्या प्रॉब्लम है और आगे वह क्या करना चाहती है। पहले तो पति ने इसका विरोध किया लेकिन कुलवंत कहाँ मानने वाली थी। विरोध का नतीजा यह था कि रात का खाना उसने खड़े हो कर ही खाया। उसकी गांड इतनी लाल कर दी थी कुलवंत ने। कुलवंत की बेटी ने यह देख लिया था। वह भी हैरान-परेशान थी। बार-बार वही सीन दिमाग में फिल्म की तरह घूम रहा था।
कोमल अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी पढ़ाई कर रही थी। नॉर्मली तो वह शाम को घर में पजामा पहन कर रहती थी। लेकिन ज्यादातर उसके सारे पजामे टाइट फिटिंग वाले थे और मम्मी से पिटाई खा कर आज भी उसकी गांड हल्की लाल थी। इसलिए वह सिर्फ लंबी कमीज़ पहने नीचे नंगी ही सॉफ्ट तकिए पर बैठी हुई थी। कभी पढ़ाई तो कभी सेक्स के बारे में सोचने लग जाती क्योंकि बैठे नहीं जा रही थी। सेक्स करने का मन कर रहा था लेकिन कोई यार नहीं था अभी तक। अभी तक अपनी उँगली से ही काम चलाती थी। कई लड़के उस पर लाइन मारते थे लेकिन सब उसके भाई से डरते थे।
Bahut badhiya ab hero ka lund pehle se bhi bada aur majbut ho gaya hai aur ab aadhi training bhi ho gayi bas final exam baki haiUpdate 4
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अभी तक अपनी उँगली से ही काम चलाती थी। कई लड़के उस पर लाइन मारते थे लेकिन सब उसके भाई से डरते थे।
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यही सब करती हुई अचानक कुछ आवाजें आने लगीं। इन आवाजों से वह अनजान नहीं थी। नंगे चिताड़ पर पड़ते थप्पड़ की आवाज। वह कैसे क्योंकि उसका भाई तो घर पर नहीं था। वह जल्दी से पास पड़ी खुली पटियाला सलवार उठा कर पहन कर धीरे-धीरे कदमों से बाहर अपनी माँ के कमरे के पास आई और खिड़की से झाँकने की कोशिश करने लगी। पर्दा हमेशा साइड में ही रहता था। सब कुछ आराम से दिख जाता था। अक्सर वह और उसका भाई यहीं से अंदर देखते थे। जैसे ही अंदर देखा तो अंदर का सीन उसके लिए किसी एटम बम के झटके से कम नहीं था। उसकी माँ और उसके डैडी अंदर नंगे थे और जो अंदर हो रहा था वह सोच भी नहीं सकती थी कि यह पॉसिबल है। अंदर उसकी माँ आधी नंगी बेड के किनारे पर बैठी हुई थी और उसकी माँ की गोद में उसके पापा पेट के बल लेटे हुए थे। उसके पापा के सिर पर भी काले परने के अलावा कुछ नहीं था। शायद अभी-अभी शुरू किया था मारना इसलिए अभी इतनी लाली नहीं आई थी। कोमल अभी भी हैरान थी कि उसके पापा ऐसा कैसे कर सकते हैं। अंदर कुलवंत अपना काम कर रही थी। कुछ 5 मिनट हाथ से मारने के बाद जब उसने देखा कि चिताड़ गर्म हो गए तो उसने नीचे पड़ी जूती उठा ली। कोमल बाहर आँख फाड़े सब देख रही थी। पहले तो उसे अपने पापा पर तरस आया कि मम्मी कितनी बुरी है जो अपने पति पर ऐसे मार रही है। लेकिन उसके दिमाग में फिर बात आई कि अगर उसके डैडी चाहते तो बड़ी आसानी से रोक सकते थे मम्मी को। 6 फुट से 2 इंच ज्यादा उसके डैडी की हाइट, अच्छा मेहनती शरीर। लेकिन उसके डैडी तो आराम से लेटे हुए थे। एक हाथ से बेड की चादर पकड़े और दूसरे हाथ से मम्मी की लत पकड़ कर आराम से थप्पड़ खा रहे थे। जूती उठा कर उसने पहले पोजिशन हल्का सा चेंज किया। अपनी एक लत उठा कर उसने अपनी गोद में लेटे पति की दोनों लतों के ऊपर रख ली। इससे सरदार अब पूरी तरह कुलवंत की पकड़ में था। जूती की चोट ज्यादा लगती है और इधर-उधर लतें न मार सके इसलिए कुलवंत ने दोनों लतों से लॉक कर लिया और पास पड़ी अपनी सफेद फूलों वाली पैंटी अपने पति की तरफ कर दी जिसे उसके पति ने मुँह में रख कर जोर से काट लिया। इसके बाद अगले 20 मिनट लगातार कुलवंत कौर अपने पति की गांड पर जूती से मारती रही। इस काम में वह अब काफी एक्सपर्ट हो चुकी थी। अपने बच्चों की किसी बड़ी गलती पर वह हमेशा ऐसा ही करती और अपने पति के साथ जब भी दोनों का मन करता। कोमल यह बिना पलक झपकाए देखती रही। कोमल को अब समझ आ गया कि क्यों कभी उसने अपने माँ-पापा को लड़ते नहीं देखा। हर टाइम प्यार रहते हैं वो।
कुछ 20 मिनट बाद कुलवंत कौर ने जब देखा कि चिताड़ अब पूरी तरह लाल हो चुके हैं तो जूती नीचे डाल दी। उसका पति उठ कर कमरे में तेजी से इधर-उधर चलने लगा। अपने चिताड़ मसलने लगा। इसका असर अगले 4-5 दिन रहने वाला था। बैठना उसके लिए मुश्किल होने वाला था। उसका 5-6 इंच का लंड जो खास मोटा नहीं था वह हर बार की तरह अब भी खड़ा हो गया था। विग्रा से ज्यादा असरदार थी कुलवंत कौर की जूती की मार। पता नहीं क्यों जब भी वह अपनी बीवी के पट्टों पर लेट कर मार खाता तो उसमें सेक्स बहुत बढ़ जाता और नॉर्मली न खड़ा होने वाला लंड जवानी के रूप में आ जाता।
कुलवंत कौर वहीं बैठी-बैठी पीछे की तरफ लेट गई और अपनी लतें फैला दीं। उसका पति उसकी लतों में आ कर उसके पट्टे को चूमता हुआ उसकी चूत चूसने लगा। कुलवंत कौर भी अपनी लतों से उसका सिर दबाते हुए मजा लेने लगी। चूत चुसवा कर ही उसका 2 बार पानी निकल चुका था।
कुलवंत – “चलो बस करो अब” नीचे लेट जाओ सरदार जी।
अब उसका सारा गुस्सा दूर हो गया था। बाहर खड़ी कोमल सब देखती रही। कैसे उसकी माँ मजा ले रही है। वह साफ-साफ देख सकती थी नीचे लेटने में उसके पापा को दिक्कत हो रही है। लेकिन वह दाँत पीस कर आँखें बंद कर मम्मी के गोरे चिताड़ मसलते मजा ले रहा था। कुछ 5 मिनट बाद उसका काम हो गया। कुलवंत साइड में लेट गई। कुलवंत के लंड से उतरते ही उसका पापा एकदम उछल कर अपने पेट के बल लेट गया। कुलवंत यह देख हँस पड़ी। कुलवंत ने तुरंत अपनी चुन्नी से चूत साफ की और बेड से खड़ी होते हुए नंगी ही एक कोने में पड़ी कोल्ड क्रीम ले आई और अपने पति के पास बैठ कर उसकी सारी लाल हुई गांड पर लगा दी। कोमल ने देखा काम अब खत्म हो चुका है। उसने वहाँ से खिसकना ही बेहतर समझा।
कुछ 10:30 बजे सिमर अपने माँ-पापा के कमरे में आ गया। बेड काफी बड़ा था इसलिए 3 आदमी सोने में कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाली। वह जा कर लेट गया।
कुलवंत – “आ गया मेरा बेटा” नरम हल्की आवाज में बोली।
सिमर – “हाँजी बस टीवी देख रहा था।” वह भी अपनी माँ की तरफ मुँह कर साइड लेते हुए बहुत धीरे बोला।
कुलवंत – “कोई नहीं तू आराम से बात कर। इतना डरने की जरूरत नहीं। तेरे पापा सुबह से पहले नहीं उठेंगे। भले जितना मर्जी यहाँ रोला डाल दे।”
कुलवंत को वैसे भी कोई परवाह नहीं थी कि उसका पति जाग रहा है या सो गया।
कुलवंत ने अपनी एक लत उठा कर सिमर के ऊपर रख ली – “तेरी दवाई तैयार हो गई होगी। कल जा कर ले आना और खाने का तरीका भी समझ लेना।”
सिमर ने खुश हो कर अपनी माँ को गले लगा लिया। गले लगाते ही उसे झटका लगा। कमरे में अंधेरा था पूरी तरह इसलिए उसे पता नहीं था कि रोज की तरह आज भी मम्मी बिना कपड़ों के लेटी हुई है।
पहले कमरे में अंधेरा ज्यादा होने की वजह से चादर ले कर उसे पता नहीं लगा कि वह अपनी नंगी माँ के साथ लेट रहा है। उसने घबराकर अपना हाथ पीछे खींच लिया। लेकिन कुलवंत औरत के नंगे शरीर की झिझक दूर करना चाहती थी। इसलिए ही आज उसने यह सब किया था और अपने बेटे को साथ सुलाया था।
कुलवंत ने सिमर का हाथ उठा कर अपने चिताड़ पर रख दिया और बोली – “कोई नहीं अब तो हमारे बीच सब कुछ ओपन होने वाला है। क्यों डरता है?” इतनी बार तो देख चुका है मुझे नंगी, मुझे मजा करते। तेरा ऊपर-ऊपर जो मन करता है तू कर बस आखिरी काम तब करवाऊँगी जब तू मेरी बेइज्जती का बदला ले लेगा जैसा मैंने तुझे कहा है। सिमर धीरे से – “हाँजी मम्मी, एक कमी थी तुमने उसका तो हल कर दिया” देखते जाओ तुम्हारा बेटा क्या-क्या करता है और अपनी माँ के चिताड़ मसलता रहा। कभी चूत को छेड़ता कभी गांड को। तब तक खेलता रहा जब तक उसका मन न भर गया और कब उसे नींद आ गई पता नहीं चला।
अगली सुबह ठीक 9 बजे सिमर उठा और जहाँ उसकी मम्मी उसे ले कर गई थी, उसी हकीम के पास पहुँच गया। हकीम ने सिमर को अच्छे से दवाई खाने का तरीका समझाया और एक तेल की बोतल भी उसे दे दी। सिमर बहुत खुश हो गया। हाँ, उस हकीम ने कई चीजें बताई थीं जो वह नहीं खा सकता था – जैसे खट्टी चीजें, तली हुई चीजें। लेकिन वह फिर भी बहुत खुश था।
घर आ कर उसने सब कुछ अपनी मम्मी को बता दिया। उसकी मम्मी ने उसे शाबाशी दी और पूरा परहेज करने को कहा। अब उसने जिम का टाइम भी बढ़ा दिया था। अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखता – जूस, दूध, दलिया, काजू, दही, मुरब्बा और बाकी फल बहुत ध्यान से खाने लगा। लगभग 2-3 महीने में उसने पूरा कोर्स खत्म कर लिया था। और इसका असर भी दिखाई देने लगा था। पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया था। जिम में उसकी बॉडी देख कर हर कोई हैरान रह जाता। उसका लंड भी पहले से अब 2 इंच लंबा और पहले से मोटा हो गया था – मालिश और दवाई के असर से। कई बार उसका मन करता था मुठ मारने को लेकिन वह खुद पर कंट्रोल रखता था।
इन्हीं 2-3 महीनों में उसने अपनी नई ताकत की आजमाइश के लिए 2 लड़कियाँ भी ढूँढ ली थीं। एक तो उसके घर के पास ही रहती थी। उसी उम्र की, बहुत सुंदर-सुडौल लड़की थी। नाम था उसका दिलप्रीत कौर। दिलप्रीत अभी 24 साल की हुई थी
और अभी-अभी कॉलेज जाना शुरू किया था। पतली-पतंगी, देखने में बहुत प्यारी लगती थी।
और दूसरी उसकी ही कजिन थी – तनवीर कौर, उम्र 18 साल।
तनवीर ने ही दिलप्रीत और सिमर की जान-पहचान करवाई थी। लड़कियाँ तो उस पर पहले भी बहुत मारती थीं लेकिन वह ध्यान नहीं देता था, डर जाता था। अब दवाई खा कर उसके अंदर बहुत जोश आ गया था, जिससे उसका झिझक दूर हो गया था। और इन्हीं दिनों में सुबह-शाम जब भी वह और उसकी मम्मी अकेले होते, तब उसकी मम्मी उसे सेक्स के बारे में बताती। औरत को कैसे खुश रखना है – कुलवंत कौर ने डिटेल में अपने बेटे को समझाया। कौन-सी पोजिशन में औरत को दर्द होता है और किसमें मजा – सब कुछ समझा दिया था।
दोपहर का खाना खा कर ऐसे ही एक दिन कुलवंत और सिमर लेटे हुए थे। कोमल अपनी मौसी की बेटी के साथ शहर कपड़े लेने गई थी, उन्हें लेट आने वाला था और सज्जन सिंह हमेशा की तरह बाहर किसी काम पर थे। लेटे-लेटे सिमर का ध्यान बार-बार सेक्स की तरफ जा रहा था। उसका लंड पजामे में तंबू बनाए बैठा था। 3 महीने से ऊपर हो गए थे उसे मुठ मारने को। इन 3 महीनों में उसका लंड पहले से मोटा और लंबा हो गया था। वह सेक्स तो करना चाहता था, लड़कियाँ भी थीं लेकिन अपनी मम्मी से पूछे बिना कोई कदम नहीं उठाना चाहता था। उसे पता था – मम्मी को पता लग गया तो जूते से गांड कुट देंगी।
कुलवंत को भी चुदे काफी दिन हो गए थे। हैपी उसके पास कई बार माफी माँगने आया था लेकिन उसने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया था। कुलवंत ने अपने बेटे की तरफ देखा जो इधर-उधर करवटें बदल रहा था। लंड उसके पजामे में खड़ा था। एक बार तो वह भी देख कर हैरान रह गई – इतना बड़ा लंड उसने अभी तक नहीं लिया था।
कुलवंत – “क्या हुआ बेटा, क्यों तप रहा है?”
सिमर – “अब तुमसे क्या छुपाना, तुम्हें तो पता ही है सब। यह देखो क्या हाल हो गया है।” उसने पजामा नीचे सरका दिया।
कुलवंत के हाथ खुद-ब-खुद उसके मुँह पर चले गए। सच में उस हकीम ने बहुत अच्छा सामान बना कर दिया था। सिमर का लंड उसकी मुट्ठी जितना मोटा हो गया था – जो एक अच्छी-भली औरत की भी चीखें निकलवा सकता था।
कुलवंत सिमर की तरफ करीब सरकते हुए उसके लंड पर हाथ फेरने की कोशिश की जो उसकी मुट्ठी में पूरा नहीं आ रहा था। उसने आगे हो कर उसके लंड पर किस किया और बोली – “लगता है टाइम आ गया। अब तू पूरी तरह तैयार हो गया।”
सिमर खुशी से उछल पड़ा। आखिरकार उसने अपनी मम्मी को बाँहों में ले लिया और बेड पर इधर-उधर घूमते हुए चूमने लगा।
कुलवंत हँसते हुए – “अच्छा जोर दिखाने के लिए माँ ही मिली है।”
सिमर भी आगे बढ़ा – “हाँजी, यह सब तुम्हारे कारण ही हुआ है। 3 महीने से ज्यादा टाइम हो गया कुछ नहीं किया। आज मुझे मत रोकना।”
कुलवंत – “नहीं रोकूँगी। चल फिर शुरू हो जा, दिखा मुझे तेरे में कितना दम है। जो इतना कुछ मैंने तुझे सिखाया है, तेरे किसी काम आया या नहीं। फिर अपनी हुई बेइज्जती का बदला भी लेना है हमें।”
सिमर बड़े आराम से अपनी मम्मी के पास आया और सबसे पहले उसने अपनी माँ के पैरों पर सिर रख कर माथा टेका और फिर पैरों को चूमा जैसे वह उससे आशीर्वाद माँग रहा हो। फिर उसने उसकी चुन्नी उतार कर साइड में फेंक दी। कभी कुलवंत की गर्दन पर किस करता, कभी उसके माथे को चूमता। बड़े हौसले से काम ले रहा था। सेक्स की सबसे बड़ी बात जो उसने पहले बना ली थी कि जितना खाली करोगे उतना कम मजा आएगा। काफी देर वह किस करता रहा कुलवंत के सूट के ऊपर से ही उसके मम्मों को मसलता रहा। कुलवंत भी गर्म होने लगी थी।
कुलवंत को भी चुदे काफी टाइम हो गया था। दिल तो उसका बहुत करता था कि हैपी को या किसी को बुला ले लेकिन उसने कंट्रोल किया हुआ था। आखिर उसका सब्र का बाँध टूट ही गया। उसने सिमर को पीछे किया और बेड पर बैठ गई। अपने कमीज़ के कोने पकड़ कर उतार दिया और हाथ पीछे करके फट से अपनी ब्रा भी उतार दी। जिससे उसके मम्मे उछल कर बाहर आ गए। आज भी उसके शरीर में पूरी कसावट थी।
अपनी सलवार का नाड़ा खींचने ही लगी थी कि सिमर ने उसे रोक दिया। कुलवंत ने उसकी तरफ देखा तो सिमर बोला – “अपनी माँ की सलवार का नाड़ा आज मैं खुद ढीला करूँगा। आज तक पराए ही यह काम करते आए हैं, आज यह काम करूँ।” और उसने अपनी माँ की सलवार का नाड़ा खींच दिया। जिससे गांड खुल गई और कुलवंत ने हाथों से सलवार ढीली की और अपनी गांड बेड से ऊपर उठा कर रख ली। हैपी ने पैरों से सलवार पकड़ कर खींच कर उतार दी। कुलवंत ने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी।
कुलवंत के कहने पर सिमर ऊपर 69 पोजिशन में लेट गया और दोनों एक-दूसरे का रस पीने लग पड़े। कुलवंत अपनी चूत चटवा कर मजा ले रही थी। बहुत कम यार थे उसके जो चूत चूसते थे। वह बड़े अच्छे तरीके से चूसे मार रही थी। पूरी कोशिश कर के सिमर का लंड उसके मुँह में आ रहा था। अपने बेटे के टट्टों पर हाथ फेरती सहलाती उसके लंड के टोपे पर जीभ फेरती – वह उसे पागल कर रही थी। सिमर भी उसका जवाब उसी जोरदार तरीके से चूत में अपना सिर देकर चूस कर दे रहा था। चूत के अंदर तक जीभ मारता, कभी चूत के दाने को अपने होंठों से पकड़ कर चूसता, धीरे-धीरे चूत को खींचता – कुलवंत को पूरा स्वाद दे रहा था।
जब सिमर को लगा उसका निकलने वाला है तो उसने अपनी माँ को सावधान किया – बोला “आह्ह्ह… हायyyy… सीईईई… छोड़ दो मेरा निकलने वाला है।” कुलवंत मुँह से निकाल कर हिलाती हुई – “कोई नहीं बेटा निकाल दे। ताकि अगले राउंड में ठीक से ठोक सके। कोई नहीं आने दे बेटा घबरा नहीं।” यह कहते हुए अपने मुँह तेज-तेज चलाने लगी और सिमर भी अपनी माँ के मुँह को चोदने लगा। अगले ही पल 3-4 अच्छी पिचकारियाँ उसने अपनी माँ के गले में मार दीं। कुलवंत अपने बेटे का सारा माल अंदर ही गटक गई। कुछ 5 मिनट दोनों शांत पड़े रहे।
कुलवंत – “क्यों बेटा अब खुश है?”
Bahut badhiya ache se badla le liya hero aur uski maa ne Happy se aur use ek kuwari chut bhi mil gayi aur but abhi jeeja baki haiUpdate 5
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कुलवंत अपने बेटे का सारा माल अंदर ही गटक गई। कुछ 5 मिनट दोनों शांत पड़े रहे।
कुलवंत – “क्यों बेटा अब खुश है?”
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सिमर इसके जवाब में कुछ नहीं बोला बस अपनी माँ की लतें खोल कर फिर उसकी चूत चाटने लगा। धीरे-धीरे पट्टे को चूमता जीभ फेरता मजा लेने लगा। बहुत खुश था पहली बार चूसे मारवा कर अपनी माँ से सिमर आज।
ऐसे ही कब उसका लंड फिर खड़ा हो गया उसे खुद पता नहीं चला। उसने अपनी माँ की लतें कंधों पर रख लीं और अगले आधे घंटे तक सिमर ने पोजिशन बदल-बदल कर कुलवंत कौर की अच्छी रेल बना दी। जिम जाने वाला गबरू जवान था सिमर। कभी घोड़ी बना कर, कभी अपनी माँ को लंड पर बिठा कर काफी देर लगाता रहा। यहाँ तक कि कुलवंत कौर भी रो पड़ी जब सिमर ने चूत मारते वक्त अपनी माँ को बाँहों में हवा में उठा लिया। इससे कुलवंत के पट्टे खुल गए। लंड के झटके उसके लिए भी सहने मुश्किल हो गए थे। ऐसा उसे आज तक किसी ने भी नहीं चोदा था। कोई सेक्स पोजिशन इतना दर्द देने वाली भी हो सकती है – यह कुलवंत को आज पता चला। वह कहती रही – “बेटा नीचे उतार दे मुझे, बस कर। कोई और तरीके से कर ले। मेरे पट्टों में चींटियाँ पड़ रही हैं… हाय बस कर मार गई मैं।” लेकिन सिमर तो अपने ही होश में लगा हुआ था। और जब उसका पानी कुलवंत की इतने महीनों से प्यासी पड़ी चूत में निकला तो उसने सुकून की साँस ली। जब सिमर ने अपनी माँ को नीचे उतारा तो कुलवंत के भी पैर डगमगा गए। एक पल के लिए तो उसकी लतें बाहर ही नहीं सहन कर पाईं और वह वहीं बेड पर लेट गई।
सिमर लंबी-लंबी साँसें लेता हुआ – “क्या कहते हो, कैसा लगा? अब तो खुश हो न? अपने बेटे से क्या लगता है बदला लेने के लिए तैयार है तुम्हारा बेटा?”
कुलवंत – “बिल्कुल तैयार है। अब आओ स्वाद देखो उस कानजर हैपी को कैसे पंगा लेना पड़ता है ऐसे का सबक सिखाना बेटा, याद रखना।” और फिर उसके थप्पड़ मारते हुए – “हरामी और तू मुझसे किस बात का गुस्सा निकाल रहा था? जान ही निकाल दी मेरी। तूने तो पूरे शरीर की बैंड बजा दी 1 ही बार में…”
सिमर – “ले 1 बार में ही बैंड बज गई। अभी तो और करना है तुम्हारे साथ।”
कुलवंत – “चल बस कर अब मैं कहीं नहीं भागी। मैं यहीं रहूँगी। तू तैयारी कर कल की। कल हैपी का कांडा काटना है।”
अगले दिन 11 बजे ही घर में कोई नहीं था। कोमल शहर किसी काम से गई हुई थी और सज्जन सिंह को कुलवंत ने खुद बाहर भेज दिया था यह कह कर कि आज शाम तक वह बाहर ही रहे। सज्जन सिंह बिना पूछे अपने दोस्तों के पास चला गया था।
अपनी आदत और प्लान के मुताबिक कुलवंत नहा कर ऊपर चली गई जहाँ बेकार हैपी खड़ा था। कुलवंत को पता था हैपी उसे जरूर बुलाएगा और हुआ भी उसका ही। जैसे ही कुलवंत छत पर गीले कपड़े पहन कर मुड़ी तो हैपी ने फिर बुला लिया।
हैपी – “चाची क्या बात है, आजकल मिलती ही नहीं। कहाँ रहती है।”
कुलवंत – “बस जानता है कहाँ। कुछ कामों में बिजी थी। कुछ लोग बड़े ऊपर उड़ते हैं, उन्हें अक्ल सिखानी है।”
हैपी – “क्या कह रही है चाची, किसकी बात कर रही है। चल छोड़, बड़े दिन हो गए तेरे साथ। कहीं न चल प्लीज आज करने दे।”
कुलवंत – हँसते हुए “चल आ जा, बड़े दिन हो गए मेरे भी आग लगी हुई है। लेकिन हमारे वाले आ जा, मैं तेरे घर नहीं आना।”
हैपी – खुश होते हुए “बाले चाची तू कितनी अच्छी है।” उसने आस-पास देखा, दीवार फाँद कर आ गया।
उसने आगे बढ़ कर कुलवंत को गले लगाने की कोशिश की लेकिन कुलवंत ने उसका हाथ झटक दिया और चुपचाप आगे-आगे चल पड़ी और हैपी उसके पीछे।
कमरे में आ कर हैपी ने कुलवंत को घूट कर गले लगा लिया और उसकी गर्दन पर किस करता उसके चिताड़ मसलने लगा।
कुलवंत को अब उसके साथ पहले वाला लगाव तो नहीं था फिर भी वह यह सोच कर मस्त होने लगी कि आज हैपी को पता चल जाएगा सब।
हैपी ने काफी देर कुलवंत के होंठ चूसने के बाद उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार नीचे गिर पड़ी। कुलवंत ने नीचे काले रंग की कच्छी पहनी हुई थी। हैपी ने फिर उसकी कमीज़ उतार दी। नीचे ब्रा नहीं थी कुलवंत की। हैपी ने दोनों हाथों से कुलवंत के मम्मे पकड़ लिए और निप्पलों पर खींचने लगा। कुलवंत भी हाथ लगते मस्त हो गई। उसकी चूत से पानी रिसने लगा था। हैपी ने फिर उसे बेड पर लिटा दिया और उसके पैरों में आ कर उसके पट्टे चूमता चाटता स्वाद लेने लगा। काफी देर दोनों की यह खेल चलती रही। आखिर कोई 30-35 मिनट चूसने के बाद उसने कुलवंत की लतें कंधों पर रख लीं और जोरदार झटके मारने शुरू कर दिए। पोजिशन बदल-बदल कर कुलवंत को चोद वह मस्त हो गया था। लेकिन आज कुलवंत कौर ज्यादा खुश थी उसके जोश को देख। हैपी भी हैरान था। आखिर में जब कुलवंत ने देखा हैपी का लंड फूलने लगा है उसकी चूत में तो उसने हैपी को नीचे उतार दिया और खुद उसके लंड पर उसकी तरफ पीठ कर के चढ़ गई। हैपी उसके तक पूरे चरम पर था लेकिन कुलवंत के उतरने से उसका टाइम डिले हो गया।
कुलवंत ने पीछे मुड़ कर देखा हैपी की आँखें मजा से बंद हैं तो उसने गांड हिलाते-हिलाते ही पास पड़े अपने फोन से सिमर को मैसेज कर दिया कि मौका आ गया भाई, सात मारने के लिए तैयार हो जा। सिमर जो दूसरे कमरे में अपनी सहेली के साथ लगा पड़ा था वह भी अपनी माँ के ऐसे मैसेज की वेट कर रहा था। उसका लंड काफी देर से खड़ा था। अपनी सहेली को कोई पिछले 1 घंटे से चूस-चूस कर उसने पागल कर दिया था। पहली बार आई थी उसकी सहेली। पहले तो डर रही थी लेकिन पिछले 1 घंटे में चूस-चूस चूम-चूम उसके अंदर की आग इतनी भड़क चुकी थी कि वह पागल हो रही थी। बार-बार उसके मुँह से निकल रहा था – “और कितना तड़पाएगा, पा दे अब। इस गर्मी का कुछ कर। इसने मुझे साढ़ देना है।” लेकिन सिमर उसकी चूत को चूसता उसके चूत के दाने पर जीभ फेरता उसे तंग करता पड़ा था।
उधर दूसरे कमरे में जब हैपी ने नीचे से कुलवंत की गांड पकड़ कर झटके मारने शुरू किए तो कुलवंत समझ गई अब काम होने वाला है तो उसने जोरदार गांड हिलाते हुए हैपी का पानी निकालने लगी और कुछ ही पलों में हैपी का काम हो गया। कुलवंत नीचे उतर कर उसकी साइड में लेट गई और हैपी का कंडोम उतार कर साइड में डस्टबिन में फेंक दिया।
हैपी – “बाले चाची तू स्वाद लिया देती है। तेरे जितना मजा कोई नहीं दे सकता। गाँव में कई औरतें चोदीं लेकिन तेरी बात ही अलग है। लेकिन इस बार तू बड़े दिनों बाद आई नीचे।”
कुलवंत – “ह्हहहहा ठीक है कोई बात नहीं। आगे से इतना टाइम नहीं लगाऊँगी। और अब तो आना-जाना लगा ही रहना। शायद पहले से भी ज्यादा।”
हैपी – “क्या गूँजिया बातें कर रही है। मुझे समझ नहीं आया तेरा मतलब।”
कुलवंत – “कोई नहीं समझ जाएगा बेटा जल्दी।”
हैपी – “ठीक है” और इतना कह कर उठ कर वह बाथरूम की तरफ चल पड़ा। वह बाथरूम का दरवाजा खोलने ही लगा था कि उसके कानों में ऊँची आवाज में चीख सुनाई दी – “हायyyy मैं मर गई मम्मी।” आवाज थोड़ी दूर से आई थी।
हैपी – “चाची तू तो कह रही थी घर में कोई नहीं है। यह कैसी आवाज आ रही है घर में। और कौन है। जहाँ तक मुझे पता तेरा बेटा तो कुछ करता नहीं। जिम में बढ़िया रहता हर टाइम।”
कुलवंत – “जानबूझ कर अनजान बन रहा है। पहले तो नहीं था कोई। घर तो है ही। तुझे यहाँ ले कर आई हूँ अब का पता नहीं।”
हैपी – हैपी जैसी आवाजें आ रही थीं लड़की चीखें मार रही थी। उसे सुन उसका लंड फिर हरकत करने लगा था। “उठ चाची आ जा देखें किसका उद्घाटन हो रहा है तेरे घर में। जैसी लड़की रो रही है, खासा हथियार संभाले बैठा तेरा बेटा। आ जा देखें कहीं लड़की को मार न दे।”
कुलवंत – उठते हुए “चल चल देखें। खुशी किस्मत वाली है जिस पर सिमर चढ़ा हुआ है।”
दोनों धीरे-धीरे कदम रखते हुए सिमर के कमरे के पास आ गए। कमरे में खिड़की खुली पड़ी थी। हैपी कुलवंत के पीछे खड़ा हो गया और कुलवंत की नंगी गांड से लग कर मजा लेते हुए अंदर देखने की कोशिश करने लगा।
अंदर उन्होंने देखा कुलवंत का बेटा सिमर ने किसी लड़की की लतें कंधों पर रखी हुई थीं। लड़की गोरी-चिटी, भरे हुए शरीर की मालकिन थी। लड़की ने अपने मुँह में कोई कपड़ा ठूँस रखा था और अपने मुँह पर 1 हाथ रखी अपनी चीखें दबाने की कोशिश कर रही थी।
सिमर का लंड देख कर हैपी की आँखें फटी की फटी रह गईं। लंड उसके लंड से बहुत मोटा लग रहा था और अभी आधे से ज्यादा वह लड़की की चूत से बाहर था। हैपी ने बड़ी कोशिश की लेकिन वह लड़की का चेहरा नहीं देख पा रहा था। क्योंकि सिमर के शरीर के नीचे वह लड़की लगभग दब पड़ी थी।
हैपी – धीरे से “चाची तेरा बेटा तो घोड़ा है। लंड तो देख तेरे बेटे का कितना मोटा है। लेकिन यह साली लड़की है कौन।”
कुलवंत – “चुपचाप देख, रोला न डाल। उसके मजा में भंग न डाल दे।”
हैपी चुप हो गया और अंदर देखने लगा। सिमर ने अगले कुछ ही पलों में अपना पूरा लंड लड़की की चूत में धँसा दिया था। लड़की की उठी हुई गांड और चूत में घुसा लंड बड़े कमाल के लग रहे थे। हैपी बार-बार लड़की के सुंदर रूप देख परेशान होता जा रहा था। लड़की की सेक्सी लतें और गांड ही इतनी सेक्सी थीं।
ऊपर से लड़की की चूत से रिस रहा खून यह साबित कर रहा था कि लड़की पहली बार मारवा रही है।
कुछ 20 मिनट ऐसे ही हैपी बाहर खड़ा लड़की को रोते देखता रहा। लड़की की चीखें इतनी थीं कि हैपी को बहुत तरस आ रहा था उस लड़की पर।
अचानक सिमर रुक गया और बेड से नीचे उतर गया। हैपी ने देखा उसका लंड कोई 8.5 इंच का था और उस लड़की के खून से भरा काफी भयानक लग रहा था। इसे सिमर ने लड़की को लतों से खींच कर बेड के किनारे ला कर पट्टे से पकड़ कर पलट कर घोड़ी बना दिया।
जैसे ही वह लड़की घोड़ी बनी और उसका चेहरा दरवाजे की तरफ आया तो ऐसा लगा जैसे आसमान गिर पड़ा हो हैपी पर। क्योंकि जिस लड़की की चीखें और रोने की आवाजें पिछले 30-35 मिनट से सुन रहा था, जिसकी सेक्सी लतें और गांड देख-देख उसका लंड खड़ा हो गया था, जिस लड़की की चूत से सिमर ने अपना मोटा लंड डाल कर खून निकाला था, वह लड़की कोई और नहीं – वह लड़की दिलप्रीत कौर थी उसकी छोटी बहन जिसका आज जन्मदिन भी था। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसका दिल कर रहा था वह सिमर को जान से मार दे जिसने उसकी फूलों जैसी बहन को पिछले 1 घंटे से इतनी बुरी तरह मसला था।
कुलवंत ने जब देखा हैपी ने उसकी बहन का चेहरा देख लिया है और गुस्से में लाल-पीला होता जा रहा है तो उसने उसे गले लगा कर लंड पकड़ कर खींचते हुए अपने कमरे में ले आई।
हैपी अभी भी गुस्से में और साथ ही साथ सदमे में था। उसकी बहन दिलप्रीत कौर हँसती-खेलती रहने वाली सिम्पल जैसी लड़की थी। बाकी लड़कियों जैसी वह भी पढ़ाई में बहुत होशियार थी। भोला-भाला चेहरा, हल्के उस पर ग्लासेस लगाती थी फिर बहुत सुंदर लगती थी। वह सिमर जैसे जानवर के नीचे कैसे आ गई अभी भी उसकी समझ से बाहर था। आज तक उसने कई लड़कियाँ और भाभियाँ चोदी थीं लेकिन आज अनजाने में अपनी छोटी बहन की उसके जन्मदिन वाले दिन सील टूटती देख कर बहुत निराश और गुस्से में था।
हैपी – “चाची यह सिमर ने अच्छा नहीं किया। मैं इसे जान से मार दूँगा। मेरी बहन के साथ धोखा कर के अच्छा नहीं किया।”
कुलवंत – “क्यों इतना गुस्से में आ जाता है, बैठ जा आराम से।”
हैपी – “तेरा दिमाग खराब हो गया। कह रही है आराम से बैठ जा। बेहचोद मैं इसे जान से मार दूँगा। सुन रही है तू अभी भी लगा पड़ा है मेरी प्यारी बहन के साथ। सुन नहीं रही तू कैसे चीखें मार रही है, रो रही है।”
कुलवंत – “तू तो ऐसा कर रहा है जैसे खुद बहुत संत आदमी है। इतना ही संत है तो यहाँ क्या कर रहा था। क्या करने आया था मेरे घर में।”
हैपी – “च…च…” हैपी की अब जबान लड़खड़ा रही थी।
कुलवंत – “क्यों बोलता नहीं अब। गाँव की इतनी औरतों से तेरे रिलेशनशिप हैं। याद है जब तेरी लुल्ली खड़ी होना शुरू हुई थी तो तुझे मैंने मौका दिया था। तुझे सब सिखाया था। तू फिर भी मेरा क्या साथ दिया। मैं तुझे अपने साथ करने देती थी, तू तो मुझे अपने जीजा के आगे भी लिटा दिया और मुझे ब्लैकमेल किया।”
हैपी – “मुझे माफ कर दे चाची, मुझे नहीं पता था तुझे गुस्सा लगेगा।”
कुलवंत – “अगर मेरे बेटे को हाथ भी लगाया तो देख लेना अपना हिसाब। अभी तो हमारे में भी कहीं बाहर पता लग गया गाँव में तो तुझे पता ही है क्या होना है।”
हैपी – “ठीक है नहीं कहूँगा कुछ भी। फिर भी चाची अगर तुझे पता था सिमर मेरी बहन के साथ कुछ करने लगा तो तू रोक देती। और देखा नहीं कैसे लगा था सिमर मेरी बहन के साथ। बेचारी कैसे रो रही थी। ऊपर से हाय सिमर का इतना मोटा और लंबा।”
कुलवंत – “ले तू भी कमाल करता है। अब ज्यादा सोच न ओके। और अगर तेरी बहन सिमर के नीचे आई है चुदने तो होगी ही। और उसका आज पहली बार था इसलिए रो रही थी। अगली बार से दर्द नहीं मजा लेगी।”
हैपी – “क्या मतलब अगली बार मजा लेगी। मैं यह काम फिर नहीं होने दूँगा।”
कुलवंत – “बैठ जा बैठ जा। तू आज तक जिस भी रंडी को चोदा वह दोबारा तेरे लंड के नीचे तो आती-जाती रहती है। अब तेरी बहन कैसे बच जाएगी। वह भी सिमर की सहेली बन कर रहेगी अब भी और शादी के बाद भी। अब जितनी जल्दी आदत डाल ले तो अच्छी बात है।”
हैपी बस चुपचाप कुलवंत की हर बात पर हाँ में हाँ मिला रहा था। वह अब कर भी क्या सकता था।
कुलवंत – “चल अब कपड़े पहन ले और तू जा जा। किसी ने देख लिया तो पंगे हो जाएँगे। अपनी बहन की फिकर न कर। वह आप आ जाएगी। अभी तो 1 बार चोदी है तेरी बहन सिमर ने। आज शाम तक यहीं रहने दे। तेरी बीवी या मम्मी कोई पूछे तो कह देना अपनी सहेली के साथ बाहर गई है या मेरे साथ शहर है। आज सारा दिन चुदेगी तो सारी जिंदगी याद रहेगी तेरी बहन को उसकी यह पहली सील टूटने की।”
हैपी कपड़े पहनता हुआ – “ठीक है मुझे पता है पहली बार में कोई भी 1 बार चोद कर तो छोड़ता नहीं। मैं भी नहीं छोड़ता। अब सिमर कैसे छोड़ेगा। लेकिन साली यह समझ नहीं आया दिलप्रीत 24 साल की और सिमर अभी 19 का हुआ होगा। यह मैच कैसे बन गया। यह क्या गेम है।”
कुलवंत – “सिमर के शरीर पर डाल गया होगा। छोड़ इन बातों को तू जा यहाँ से।”
हैपी सीधा घर आ गया और बाहर बरामदे में ही बैठ कर दिलप्रीत की वेट करने लगा।
उसका दिल बार-बार बैठा जा रहा था सोच-सोच कर। जिस बंदे को पता हो उसकी बहन चूत मारवा रही हो वह कुछ नहीं कर सकता। उसकी बीवी और मम्मी ने पूछा भी बेटा दिलप्रीत कहाँ गई तो उसने बहाना मार दिया कि वह शहर गई है अपनी सहेली के साथ कॉलेज का प्रोजेक्ट का सामान खरीदने।
कुछ शाम के 7:30 हुए तो उसे गेट खुलने की आवाज आई तो दौड़ कर बाहर की तरफ भागा। उसने देखा उसकी बहन दिलप्रीत हाथ में 2 बैग पकड़े धीरे-धीरे लंगड़ाती चलती अंदर आ रही थी। शायद दर्द ज्यादा था क्योंकि वह चलती-चलती बीच-बीच में रुक भी जाती थी। उसने आगे हो कर बैग पकड़ लिए – “क्या हुआ तुझे ऐसे क्यों चल रही है।”
दिलप्रीत – “क्यों पूछ के मजा ले रहे हो ओ पाजी। देख के स्वाद नहीं आया था। जो अब पूछ रहे हो।”
हैपी – “क्या मतलब? तेरा क्या बोल रही है तू यह??”
दिलप्रीत – “वीर मैंने तुझे देख लिया था जब तुम सिमर की मम्मी के साथ रंगरेलियाँ मना रहे थे। मैं जब सिमर के घर पहुँची थी तो तुझे देखा था कैसे लगे हुए थे।”
“और मैंने तुझे देख लिया था जब मैं घोड़ी बनी थी और मेरा चेहरा विंडो की तरफ था। मैंने तुझे उस वक्त देख लिया था। तुम तो रोके भी नहीं बल्कि अपनी बहन को उसके यार के पास चढ़ा कर घर वापस आ गए। मेरी चीखें सुन-सुन मजा लेते हो तुम।”
“चलो छोड़ो वीर जी मुझे पेन किलर दो। मेरा सारा शरीर बहुत दर्द कर रहा है। सिमर छोड़ता ही नहीं था। बैंड बजा दी। कुत्ते ने थोड़ी बहन की 4 बार बजाई। हायyyy पट्टों में जान ही नहीं बची।”
हैपी – “तमीज में रह। यह न भूल मैं बड़ा हूँ तेरे से।”
दिलप्रीत हँसते हुए अंदर चली गई। भले उसकी दर्द से निकल जा रही थी लेकिन वह बहुत खुश थी। अपने भाई को सबक सिखा कर। उसका भाई हमेशा उस पर पाबंदियाँ लगाता था लेकिन खुद नई से नई लड़की के साथ रिलेशन रखता था।
दूसरी तरफ सिमर और उसकी माँ भी खुश थे। उनका बदला पूरा हो गया था।
(यह भाग पूरा हो गया। कहानी का बदला पूरा होने के साथ एक नया ट्विस्ट आया। )
Lagta hai ek aur chut fatne wali haiUpdate 6
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अपने भाई को सबक सिखा कर। उसका भाई हमेशा उस पर पाबंदियाँ लगाता था लेकिन खुद नई से नई लड़की के साथ रिलेशन रखता था।
दूसरी तरफ सिमर और उसकी माँ भी खुश थे। उनका बदला पूरा हो गया था।
Ab next
हैपी को गुस्सा तो बहुत आ रहा था फिर भी वह कुछ नहीं कर सकता था। उसके सामने बैठी बड़े आराम से टीवी देख रही थी। उसने अपने पट्टों के नीचे तकिया रखा हुआ था। हैपी ने काफी कुंवारी लड़कियाँ चोदी थीं। उसे पता था उसकी बहन की क्या हालत है – पट्टों में चूत में दर्द रह रहा होगा अब 1-2 दिन। आज तक उसने दूसरों की औरतें चोदी थीं। आज अपनी खुद की बहन चुद कर घर आई थी तो उसे बुरा लग रहा था। वह हैरान भी था कि उसने रोका क्यों नहीं सिमर को जब सिमर उसकी छोटी बहन को चोद रहा था। अभी यही सोच में घूम था कि उसके फोन पर दिलप्रीत का मैसेज आया – “प्लीज वीर सोचना बंद करो। मैं पेन किलर लिया कर दे दो। बहुत दर्द हो रही है और आगे के लिए सॉरी। तुम्हारे साथ ठीक तरह बात नहीं की। मुझे गुस्सा आ गया था। एक तो दर्द हो रही थी पूरे शरीर में। सिमर ने जान ही निकाल दी आज तो।”
हैपी – “कोई बात नहीं लेकिन आगे से ध्यान से। जबान को कंट्रोल में रख। कोई सुन लेता तो फिर…”
दिलप्रीत – “अच्छा जी ठीक है अब जाओ भी। और डॉक्टर से पेन किलर्स के साथ पिल्स ले आओ जो रेगुलर लेने की होती हैं प्रेग्नेंसी रोकने के लिए। सिमर कंडोम यूज नहीं करता। वह कहता है मजा नहीं आता। मुझे नहीं लगता आगे भी वह कंडोम यूज करेगा।”
हैपी – “क्या मतलब तेरा? अगली बार भी वह नहीं करेगा। तू फिर जाने वाली है उसके पास। और तू तो कह रही थी उसने बहुत बुरी तरह किया तेरे साथ।”
दिलप्रीत – “ले तुम भी कमाल करते हो वीर जी। यह तो होता ही है। तुम्हें तो ज्यादा पता – इतनी औरतों से तुम्हारे रिलेशन हैं। आज पहली बार थी तुम्हारी बहन का – इतना दर्द तो होना ही था। और तुम रोके न। जब तक मेरा विवाह नहीं होता तब तक तुम सिमर को ही अपना जीजा मान कर चलो।” इससे उसने स्माइलिंग वाली इमोजी अपने बड़े भाई को भेज दी।
हैपी – “मुझे पता है तू मानना तो है नहीं। लत ही ऐसी लग जाती है। एक बार लग गई फिर नहीं छूटती। बाकी ध्यान रख। बात बाहर न जाए। चल अच्छा मैं आया बाजार से ले कर।”
इतना कह कर हैपी मार्केट चला गया। वहाँ अपने मेडिकल स्टोर वाले दोस्त से पेन किलर और यह कह कर प्रेग्नेंसी रोकने वाली गोलियाँ ले लीं कि अपनी बीवी के लिए हैं – कंडोम से मजा नहीं आता और अभी बच्चा नहीं करना।
ऐसे ही दिन गुजरते गए। सिमर भी अब खुल कर हैपी के सामने आ गया था। हैपी भी अपनी हार मान चुका था। वह खुद घर-परिवार वाला आदमी था। कोई गलत कदम तो उठा नहीं सकता था जिससे वह कोई मुसीबत में फँसे। इसलिए वह भी हैपी और अपनी बहन का साथ देने लग पड़ा था। बल्कि उसे मजा भी आने लगा था।
पहले-पहले तो ठीक था लेकिन अब दिलप्रीत बहुत खुलती जा रही थी। उसके अंदर सेक्स की आग दिनोदिन कंट्रोल से बाहर होती जा रही थी। चूत मारवाए बिना उसे नींद नहीं आती थी। जैसे नशा करने वाले का हाल होता है – वही हाल दिलप्रीत का था। 7-8 दिन से सिमर भी बाहर गया था। जब वह घर आया ही था हैपी ने उसे घर आते देख लिया। पिछले 7-8 दिनों में अपनी बहन की बुरी हालत हैपी से भी देखी नहीं गई। उसने जा कर दिलप्रीत के कमरे में देखा तो उसकी बहन बेड पर लेटी पड़ी थी। पास ही बेड पर कपड़े बिखरे पड़े थे। बाल उसके खुले पड़े थे। शायद नहा कर निकली थी। उसने दिलप्रीत को हिलाया तो आगे बढ़ कर वह टूट कर पड़ गई – “क्या हुआ क्यों तंग कर रहा है। नींद न खराब कर वीर प्लीज जा। मैं ठीक नहीं हूँ।”
हैपी आगे बढ़ कर गुस्से की जगह प्यार से उसके सिर और माथे पर हाथ फेरता – “मुझे पता चल अपनी हालत। ठीक कर ले जल्दी। मैं थोड़ी देर पहले ही जीजा जी को घर आते देखा।”
दिलप्रीत ने जब यह सुना तो झटके से वह उठ कर बेड पर खड़ी हो गई – “क्या कहा वीर? एक बार फिर बोल।”
हैपी उसके माथे पर हल्का सा थप्पड़ मारता – “एक बार सुन तो लिया। मैंने कहा मेरी बहन तेरा यार आ गया। मैंने उन्हें घर आते देखा।”
दिलप्रीत – “वीर तुम्हें सच में बुरा नहीं लगा? मैं तो तुम्हें इतना रूड भी बोली हूँ। ऊपर से यह सब।” वह भी अब थोड़ी इमोशनल जैसी हो गई थी।
हैपी – “बुरा तो लगता है। यह कैसे हो सकता मुझे बुरा न लगे। लेकिन यह भी सच है यह सब मेरे बुरे कामों का फल है। दूसरा तुझे मैं तो रोका जो मैं खुद ठीक हो जाऊँ। चल छोड़ तू उन्हें फोन कर के अपनी मोटर पर बुला ले। वहाँ सेफ रहोगे।”
दिलप्रीत ने फोन निकाला और सिमर को अपनी मोटर पर बुला लिया। सिमर भी खुश हो गया। वह भी इतने दिनों का बिना चूत के शहर फँसा पड़ा था अपनी जमीन के केस में।
दिलप्रीत बाथरूम में गई और तैयार हो गई। पीले रंग का सूट में बहुत जच रही थी। मोटर उनके गाँव से बाहर थी।
दिलप्रीत मुँह नीचे कर के अपने होंठ टुकड़ते हुए – “वीर तुम्हारी मोटर गाँव से काफी दूर है। मैं वहाँ कैसे जाऊँ प्लीज मुझे छोड़ आओ प्लीज।”
हैपी – “चल ठीक है।”
हैपी दिलप्रीत को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर मोटर पर ले गया जहाँ सिमर पहले से ही उनकी वेट कर रहा था। अजीब वक्त चल रहा था – एक भाई खुद अपनी बहन चुदवाने के लिए अपने यार के पास ले कर आया था।
पहले 2 मिनट सब चुपचाप खड़े रहे। कौन पहले करे – किसी को समझ नहीं आ रहा था। आखिर हैपी ही बोल पड़ा – “जाओ यार तुम कब तक ऐसे खड़े रहोगे।” सिमर ने दिलप्रीत का हाथ पकड़ा और उसे ले कर मोटर वाले कमरे की तरफ चल पड़ा। दिलप्रीत सिर नीचे कर के पीछे-पीछे उसके चल पड़ी। हैपी को ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका कोई खिलौना कोई छीन ले गया हो और वह कुछ नहीं कर सकता। हैपी वहाँ से जाना चाहता था लेकिन उसे वेट करना पड़ रहा था अपनी छोटी बहन को वापस भी ले कर जाना था। क्योंकि सिमर पीछे बैठे देख लेते तो पंगा हो जाता।
हैपी पास ही पानी वाले पक्के ठिकाने पर बैठ गया।
अंदर जाते ही दिलप्रीत सिमर से चिपक गई। इतने दिनों की वह तड़पी पड़ी थी लंड लेने को। चुन्नी उतार कर उसने साइड में फेंक दी। मोटर वाले कमरे में 1 प्लास्टिक की कुर्सी और एक लंबा मंजा पड़ा था। बाकी खेती के सैंड सामान पड़े थे। जैसे आम मोटर वाले कमरे होते हैं। कमरे को हवादार बनाने के लिए दीवार में मोरी बनी हुई थी। 2 खिड़कियाँ लगी थीं जो टाइम के साथ टूट चुकी थीं।
हैपी ने देखा उसकी बहन ने अपना कमीज़ उतार दिया था। वह उसकी नंगी कमर और सलवार में खड़ी देख रहा था। बैठने की कोशिश करता अपने फोन में ध्यान लगाता कई और कोशिशें करता लेकिन जब सामने बहन चुद रही हो ध्यान और किसी तरफ कैसे जा सकता था।
अंदर दोनों एक-दूसरे को चूमते चूसते जा रहे थे। सिमर अभी जवान था – 19वें साल में ही था। उसका जोश दिख भी रहा था। चूमता चूसता दिलप्रीत की पीठ पर हाथ फेरता कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मार देता। अपने से 5 साल बड़ी लड़की को सिमर बड़े अच्छे तरीके से कंट्रोल करता था। यह बात तो हैपी भी मान गया था। सिमर ने उम्र का इतना फर्क था – दिलप्रीत 25वें साल में पीक वाली थी लेकिन अपने से छोटे यार के नीचे लगी उसकी गुलाम हो पड़ी थी। चूमते चूसते सिमर नंगा हो गया। ज्यादा एक्सरसाइज करने कर के मसल्स और ताकत नजर आ रहे थे। सिमर ने दिलप्रीत को नीचे अपने पैरों में बिठा दिया। दिलप्रीत अभी भी सलवार और काले रंग की ब्रा में थी। वह चुपचाप बैठ गई। पहले सिमर के लंड को मेहंदी वाले हाथों में पकड़ कर 2-4 बार हिलाया जो ढीला भी 4-5 इंच से ज्यादा लग रहा था। दिलप्रीत के पतले हाथों में आ कर हरकत में आने लगा। दिलप्रीत ने ढीला लंड ही अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लग पड़ी जो थोड़ी ही देर में इतना फूल गया कि उसके मुँह में भी नहीं आ रहा था। हैपी ने देखा कैसे उसकी बहन को सिमर एक रंडी जैसी इस्तेमाल कर रहा था। उसके वाले को पकड़ कर अपने लंड के चूसे मारवा रहा था। दिलप्रीत के मुँह से लार निकल रही थी। आँखों में पानी निकल रहा था लेकिन वह सिमर को रोक नहीं रही थी।
आखिर सिमर ने दिलप्रीत को खड़ा किया। उसकी ब्रा को पकड़ कर हल्के से खींचा तो उसकी ब्रा के हुक टूट गए। सिमर खड़े-खड़े उसके निप्पलों को बच्चे जैसा चूसने लगा। उसके निप्पल चूसता दाँतों से खींचते उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार पैरों में गिर पड़ी। अपनी कच्छी उतारने में दिलप्रीत ने कोई इंतजार नहीं किया और खुद ही अपनी कच्छी नीचे खिसका दी।
सिमर ने दिलप्रीत को कुर्सी पकड़ कर झुक जाने को कहा। दिलप्रीत जैसा सिमर कहता वैसा करती जा रही थी। बाहर हैपी अपना लंड मसलता अपनी बहन को मजा लेते देख रहा था। सिमर उसकी बहन के पीछे घुटनों पर बैठ गया और उसकी बड़ी गोरी-चिटी गांड में मुँह टून लिया। जैसे उसकी बहन की गांड सूँघ रहा हो। हैपी चूत तो चूसता था लेकिन यह सब उसने कभी नहीं किया था। सिमर तो दिलप्रीत के गोरे चिताड़ का दीवाना था। किधर-किधर जीभ फेरता चाट रहा था – उसे खुद नहीं पता था। हैपी अब समझ गया क्यों उसकी बहन सिमर के इतने नीचे लगी है। उसने सुना हुआ था अच्छे से चूसी औरत बंदे की गुलाम रहती है – यह अब वह खुद देख रहा था। दिलप्रीत को भी कुर्सी पकड़ कर खड़े रहना मुश्किल हो गया था। वह हैपी को परे करती दीवार से हाथ लगा कर झुक गई और पीछे मुँह कर के बोली – “बस कर अब आ जा। और सब्र नहीं होता।” और दोबारा मुँह आगे कर लिया। अचानक उसकी नजर दाहिने तरफ खिड़की वाली पड़ी। उसने देखा तो उसका बड़ा भाई कमरे वाली ही देख रहा था – कोई 40 फीट का फासला था। दिलप्रीत के 34B के झुके होने से झूलते मम्मे उसके भाई को साफ दिख रहे थे। अभी दोनों एक-दूसरे की तरफ देख ही रहे थे कि दिलप्रीत को पीछे से एक झटका लगा – सिमर के लंड का टोपा अंदर घुसते ही उसकी पहले एक चीख निकली और फिर उसने अपनी आँखों पर मुठ्ठी घूँसा ले लिया। उसने देखा लंड तो उसकी चूत में घुसा था। झटका उसके वजह से था लेकिन ऐसा लगता था यह झटके बाहर बैठा उसका बड़ा भाई भी महसूस कर सकता था। दिलप्रीत अभी नई-नई चुदने लगी थी। पहले 4-5 मिनट उसे दर्द होता रहा। जब पहली बार उसका पानी निकला तो चूत और गीली हो गई। बाद में तो उसे मजा ही आने लगा। वह खुद भी अपनी गांड पीछे कर के सिमर की मदद करने लग पड़ी। खड़े-खड़े झटके बर्दाश्त करती दिलप्रीत ने हैपी को आँखों से सिर से मंजे वाली इशारा किया। सिमर उसे लंड बाहर निकाले बिना ही मंजे पर ले आया। अब बाहर बैठे हैपी को सब दिखाई नहीं दे रहा था। वह सिर्फ हवा में ऊपर अपनी बहन की लतें देख सकता था जो सिमर के झटकों से लगातार हिल रही थीं और कभी पसीने से लथपथ सिमर जब वह उसकी बहन की लतें अपने कंधों पर रख स्पीड से हिल रहा था।
हैपी बड़े आराम से लंड मसलता यह सब देख रहा था कि उसके मूड पर ठप्पी लगी। जब घबराया ने पीछे मुड़ कर देखा तो पीछे उसकी अपनी बीवी मंजीत कौर उसके पीछे खड़ी उसकी तरफ गुस्से से देख रही थी।
जैसे आम होता है – जिस बंदे का बाहर वाली पर ज्यादा ध्यान हो वह घर में अपनी का खयाल नहीं रखता। यही बात मंजीत के साथ भी थी। हैपी ने हमेशा उसके साथ ऐसा किया था। कभी प्यार से 2 बातें नहीं। हर टाइम दूसरी औरतों पर ध्यान। मंजीत के साथ सेक्स बहुत कम हो गया था। वह बेचारी इस आग में तड़पती रहती और हैपी बाहर ऐश करता। 30 साल की उम्र, हल्का साँवला रंग, भरा हुआ शरीर था मंजीत का।
कहते हैं जवानी की आग बहुत खतरनाक होती है लेकिन यह कम ही मशहूर है कि औरत में सेक्स की असली आग 30 साल में भड़कती है।
मंजीत – “कुत्ते दस दिया है तेरी करतूतें गाँव में। ठा ठा मुँह मारता तू। आज आया तू नीचे। मुझे गल्लाँ काढ़ दा ज कुछ कहा तो हाथ चुकण लगे। मिनट नहीं लौंदा इथे बहन चुद दी देख रहा। चल घर तेरा काढ़ दी है जलूस।”
हैपी को समझ ही नहीं लगी यह हो क्या गया। उसने जल्दी से दरवाजा खोला जहाँ सिमर अब नीचे लेटा पड़ा था। उसके हाथ दिलप्रीत के मम्मों पर थे और दिलप्रीत उसके लंड पर बैठी तेजी से उछल रही थी।
अचानक ऐसे अपने भाई को देख सिमर को तो कोई फर्क नहीं पड़ा। दिलप्रीत एकदम डर गई और घबरा गई।
दिलप्रीत – “वीर यह क्या कर रहे हो? क्या हो गया तुम्हें अंदर क्यों आ गए?” और हाथों से अपने मम्मे ढक लिए।
हैपी – “पंगा हो गया यार। चल जल्दी कपड़े पहन घर जाना पड़ेगा। तेरी भाभी यहाँ आ गई थी। उसने सब देख लिया।”
सिमर – “तू जा। इसे मैं घर छोड़ दूँगा। ऐसे नहीं जा सकती। मेरा काम अभी नहीं हुआ।”
दिलप्रीत को पता था वह सिमर को नाराज नहीं करना चाहती थी। वह भी सिमर की हाँ में हाँ मिलाती – “तू घर जा वीर। भाभी को मना। कोई गलत कदम न चुके। बस प्यार से बात करी। आह्ह्ह्ह… सीईईई… ओवेई… प्लीज सिमर रुक जा 1 मिनट। हाँ तू नास ऐसा कर वीर। बाकी मैं मना लूँ भाभी को।” हैपी बौखलाया हुआ सिर हिलाता चला गया। सारे रास्ते यही सोचता रहा जिस औरत को उसने अपनी जूती के नीचे रखा था कभी रिस्पेक्ट नहीं दी उसे कैसे मनाए।
उधर सिमर को यह सब से कोई लेना-देना नहीं था। वह बस लगा हुआ था। दिलप्रीत कई बार उसे रिक्वेस्ट करती कि उसे घर जाने दे लेकिन बेटा पराया कहाँ मानने वाला था। नीचे आई रंडी बिना ठोके कैसे जाने देता। 2-3 घंटे पोजिशन बदल-बदल कर अच्छे से दिलप्रीत की तसल्ली करवाई और जब उसने गाँव के बाहर उसे बाइक से उतारा तो दिलप्रीत के पट्टों में चूत में खिंच रही थी। उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। जिसे एक्सपर्ट आँखें समझ सकती थीं। और यही कारण था कि उसकी भाभी को शक हुआ था और यही शक का पीछा करती वह मोटर पर आ गई थी। यह हैपी की किस्मत ही थी जब वह अपनी बहन के लिए पेनकिलर्स और एंटी प्रेग्नेंसी की गोलियाँ ले रहा था मंजीत भी मार्केट आई थी। वह तो सीधा मेडिकल स्टोर में चली गई लेकिन जब तक वह सड़क क्रॉस कर के वहाँ जाती हैपी निकल गया था और बातों-बातों में उसे हैपी के दोस्त जो मंजीत को भी जानता था उसने बता दिया कि हैपी क्या ले कर गया।
दिलप्रीत लंगड़ाती लंगड़ाती घर पहुँची तो उसे बाहर कोई नजर नहीं आया। वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
दिलप्रीत को जाते ही नींद आ गई। चूत मारवाने के बाद शरीर में हो रहे दर्द के साथ बहुत गहरी नींद सोई पड़ी थी कि उसे किसी ने हिलाया तो वह उठ पाई। उसने आँखें मलीं तो सामने उसकी भाभी खड़ी थी। हाथ में उसके चाय का कप था।
दिलप्रीत भाभी को ऐसे अपने सामने खड़ी देख कर घबरा गई। उसे समझ ही नहीं आ रहा था वह क्या करे क्या बोले। फिर डरते-डरते – “भ…भाभी तुम…यहाँ”
भाभी – “क्यों क्या हुआ नहीं आ सकती?”
दिलप्रीत – “नहीं ऐसा कोई बात नहीं…” फिर कुछ सोचते हुए भाभी के पैर पकड़ लिए – “मुझे माफ कर दो प्लीज किसी को न बताना। आगे से घर से बाहर नहीं जाती लेकिन प्लीज एक बार छोड़ दो।”
दोनों की आपस में काफी बनती थी नॉर्मली। उसने भी ज्यादा तंग नहीं किया और हँस पड़ी और बोली – “नहीं बताती। अगर बताना होता तो अब तक बता देती और तेरी यह गांड अब तक मार-मार डैडी जी ने लाल की होती। मैं तो तुझे चाय देने आई थी और उठाने आई थी कि उठ पहले ऐसे सोई रही तो शक हो जाएगा मम्मी को।” और तेरे तो मुझे सगो शुक्र करना चाहिए। तेरे कारण तेरा भाई मेरे नीचे आ गया। नहीं तो तुझे पता ही है कैसा है तेरा भाई।
दिलप्रीत – “हाँ भाभी मुझे पता है। बाहर मुँह मारता रहता है। तुम्हारी तरफ कभी ध्यान नहीं देता।”
भाभी – “हाँ। लेकिन आज तो आते ही तरले डालने लग पड़ा कि कोई पंगा न डाल जो कहूँगी करेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। अब बताओ इसे।”
फिर दोनों काफी देर बातें करने लग पड़ीं। दिलप्रीत ने भी सारी बात बता दी कि कैसे उसने सिमर से चूत मारवाई है और भाई बाहर देख रहा था।
भाभी – “तू भी बहुत तेज है। वैसे भोला-भाला लड़का अपने पीछे लगा लिया। मैं तो सुनी थी वह किसी लड़की की तरफ देखता भी नहीं। दूसरा तेरे से कितना छोटा है उम्र में।”
दिलप्रीत – “मैंने भी यही सुना था लेकिन जब उस दिन अपने घर ही साढ़ लिया। मैं भी चली गई यह सोच कर घर खराब कुछ करेगा। मेरी कई फ्रेंड्स जो उसके कॉलेज जाती हैं बताती थीं कि वह लड़कियों की तरफ कभी ध्यान नहीं देता। लड़ाई-झगड़े में आगे होता है। कोई लड़की बात करती भी है तो वहाँ से जान बचा कर भाग लेता। लेकिन कुत्ते ने घर बुला कर ऐसी रेल बना दी कि कानों को हाथ लगवा दिए। मसल ही पीर घसीट दी घर आई मैं दीवार का सहारा ले कर। ऊपर से भाई जी भी वहीं थे उसकी मम्मी के साथ। मुझे नहीं पता था इस सब का क्या-क्या चल रहा है। मैंने भी कोई परवाह नहीं की। सोचा कपड़े तो उतर ही चुके हैं जो होना है देखी जाए।” फिर दिलप्रीत उसे उस दिन से ले कर आज तक की सारी बात बताती गई।
दिलप्रीत – “अच्छा भाभी तुम मोटर से बहुत गुस्से में आई थीं। क्या कहता है भाई तुम्हें?”
भाभी – “कहना क्या था। माफियाँ माँगता था। पता था इसे कि अगर मैंने किसी को बता दिया तो यह बाहर मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। जो मैं चाहूँगी वही होगा। सबके सामने तो नहीं लेकिन बेडरूम में अब यह गुलाम ही रहेगा सारी उम्र। तुझे नहीं पता कितना दुखी किया है इस बंदे ने। कई बार बाहर का गुस्सा मेरे पर ही निकालता था। रात को नंगी कर के पीठ पर मुक्के मारता। जब चांस कोई घर न हो तो जूते से भी कूटता था मुझे। शराब पी कर, आवाज न कर सकूँ मुँह भी बंद कर देता यहने। कई बार तो बेड पर मेरा मूत निकल जाता था लेकिन यह बंदा नहीं सुधरा। अब सुधरेगा। मैं करूँगी ऐसा इलाज।”
दिलप्रीत – “जैसा तुम्हें अच्छा लगे भाभी उसका करो। बस मेरा खयाल जरूर रखना।”
“हा हा तू घबरा न। तू जो दिल करता करिया कर सेक्स के मामले में।” इतना कहते हुए वह चाय का कप उठा कर रसोई में चली गई।
दूसरी तरफ एक और तूफान चल रहा था जिसका सिमर को अता-पता भी नहीं था। उसके दोस्त गोपी के घर आज भी उसकी बड़ी बहन कर के कलेश पड़ा हुआ था। गोपी की बड़ी बहन संदीप जिसका विवाह कोई 1.5 साल पहले हुआ था फिर अपनी सास से लड़ कर घर आ गई थी। उसकी सास ने उसका जितना मुश्किल किया हुआ था। गोपी के पापा ने जमीन और पैसा देख कर अपनी बेटी संदीप का विवाह उससे बड़ी उम्र के लड़के से कर दिया था। संदीप खुद 27 साल की थी अब और उसका पति 36 साल का था। दिमाग से बिल्कुल पेडल। 2 बार नशा छुड़ाने सेंटर भी रह कर आया था। सेक्स के मामले में भी ठीक था। इतना चाहता नहीं था लेकिन फिर भी हफ्ते में 2-4 बार चोद ही लेता था संदीप को। अब वह अंदर से अंदर काफी पछताता था कि क्यों नशे की दलदल में फँस गया वह। संदीप की तरफ देख कर तरस भी आता था लेकिन चुप ही रहता था अपनी माँ के विरोध में साथ नहीं देता था।
काफी कोशिश कर चुके थे लेकिन अभी तक संदीप को प्रेग्नेंट नहीं कर पाया था वह। संदीप की सास ने तो विवाह के 2 महीने बाद ही उससे बच्चे की रट फाड़ ली थी। अब उसका सब्र टूटता जा रहा था। संदीप के साथ वह हर टाइम लड़ाई पड़ी रखती थी। संदीप को ले कर डॉक्टरों के पास घुमाती लेकिन अपने बेटे को कभी उसने कुछ नहीं कहा था। नॉर्मल अनपढ़ जट्ट फैमिली थी जो आम लोगों जैसी अभी भी यही मानते थे कि लड़के में कोई कमी नहीं हो सकती, जबकि असल में चिट्टे और और नशे कर के उसके स्पर्म इतने कमजोर थे कि प्रेग्नेंसी के चांस बहुत कम थे। बस जमीन ज्यादा होने कर के पैसों की कमी नहीं थी इसलिए वह ज्यादा चंबले हुए थे। बात अब बढ़ कर तलाक तक पहुँच गई थी।
गोपी उसके माँ-पापा उसकी दोनों बहनें सारा टबार परेशान हुआ पड़ा था। ऐसे ही रात का खाना खा कर माँ-बेटी दोनों 1 ही बेड पर लेटी पड़ी हल्की आवाज में गल्ल बातें कर रही थीं। गोपी टीवी देखता देखता पास ही सो गया था।
गोपी की माँ – “क्या सोचा कब जाना वापस ससुराल तू। यहाँ ऐसे कितने दिन बैठी रहेगी। कोई गड़बड़ न कर दें तेरी सास-ससुराल वाले। तेरा पापा भी कई बार पूछ चुका है।”
संदीप – “मेरा वापस जाने का दिल नहीं करता। वहाँ हर टाइम कलेश पड़ी रहती है वह।”
“तो फिर अब यहाँ थोड़ी बैठी रहना सारी उम्र” उसकी माँ खीज कर बोल पड़ी। उसका तो खाना नहीं लगता था जिसकी जवान बेटी घर बैठ जाए उसे टेंशन न होती।
फिर अचानक उसके दिमाग में खयाल आया। एक अजीब शैतानी स्माइल जैसी आ गई उसके होंठों पर। संदीप भी यह देख “क्या हुआ अब” लगता है कोई हल मिल गया तुम्हें।
“हाँ मिल गया हल। कहते हैं सीधी उँगली से न निकले तो टेढ़ी ही सही। और तेरे ससुराल वाले संत महात्मा हैं” संदीप की माँ बोली। इन बातों लगातार चलती पड़ी थीं कि गोपी भी उठ चुका था।
संदीप – “हाँ ठीक है लेकिन इसमें मेरा क्या लेना-देना। मेरा बच्चा कैसे होगा?”
“सब होगा तू देखी चल…” यह बता तेरा पुराना यार कहाँ है। कभी कोई फोन वगैरह पर बात हुई या नहीं जो तेरा खास था उसे मिल कर अपना काम करवा ले। किसी को पता लगना बस लड़का कोई जट्ट का ही हो। तेरा रंग साफ है लड़का काला जीसा न हो।” गोपी की माँ एक ही साँस में अपनी दिल की बात बोल गई।
अपनी माँ की बात सुन संदीप – “यह क्या कह रही हो। मेरा कोई यार नहीं है। नॉर्मल दोस्त होते थे लेकिन वह कोई जॉब करता कोई अब्रॉड चले गए हैं।” वैसे भी जो तुम्हारे दिमाग में अब आया मैं वह सोच चुकी हूँ। मुझे भी ऐसा कोई नहीं मिला। और बच्चे के लिए कम से कम उसके साथ 15-20 दिन सोना पड़ेगा। ऐसा कोई मेरे को नहीं पता।
“तू बस तैयार रह। लड़का तो ढूँढ लाऊँगी। जो न हुआ तो तेरे भाई का कोई दोस्त ही चल जाएगा। तू बस कल सुबह फोन कर के कह दे कि तू अगले महीने वापस आ रही है।” हँसते हुए कुलजीत कौर बोली। पढ़ी-लिखी थी वह भी सिमर की माँ के साथ टीचर थी लेकिन अब नहीं जॉब करती थी। उसे सब पता था कुलवंत और उसके यारों का उसकी सेक्स लाइफ का। कैसे कुलवंत आज तक गाँव में इज्जतदार बनी बैठी है और अपनी सेक्स लाइफ छुपा कर रखी है – इस बात का वह बड़ा लोहा मानती थी। पहले भी कोई प्रॉब्लम होती तो वह कुलवंत के पास ही जाती थी क्योंकि बात कोई भी हो उसका हल हमेशा उसकी सहेली के पास तैयार होता था। “कोई न कर दी। बात सुबह यह काम में होगी है। एक तो उसे सब पता होता है वह सब हल निकाल देगी। तू बस अपने ससुराल फोन कर दे सुबह।”
गोपी यह सोच कर सारी रात न सो सका कि उसका ही कोई यार कोई बगाना बेटा उसकी बहन को चोद कर प्रेग्नेंट करेगा। फिर यह सोच कर खुद को दिलासा दिया कि नेट पर कितना पढ़ा है कि बहन-भाई सेक्स तो कर सकते हैं लेकिन बच्चा पैदा करेंगे तो वह ठीक पैदा नहीं होते। ऐसे ही खुद को दिलासा दे कर शांत करता रहा वह।
कुलवंत और कुलजीत दोनों काफी सालों से एक-दूसरे को जानती थीं। जब कुलजीत ने अपनी बेटी की प्रॉब्लम कुलवंत को बताई तो उसने भी वही सलाह दी जो रात कुलजीत कौर के दिमाग में आई थी।
कुलवंत – “तू घबरा न। किसी को कुछ पता नहीं लगता। तू घर जा कर अपनी बेटी को सादी बाहर वाली मोटर पर भेज दे या हमारे घर छोड़ जावे। बाकी मैं देख लूँगी। पक्की जगह का इंतजाम मैं बाद में करवा लूँगी। रोज मोटर पर जाना ठीक नहीं रहेगा।”
कुलजीत ने पूछा भी कि लड़का कौन है लेकिन कुलवंत ने यह कह कर बात टाल दी कि टाइम आएगा तो बता दूँगी या तू अपनी बेटी से पूछ लेना। तू बस घर जा और जो कहा वह कर। बेटी का आज पहली बार है मोटर पर खुल कर करवा लूँगी। आवाजें सुनने वाला कोई नहीं होना वहाँ।
कुलजीत – “लड़का ठीक तो है न। कहीं बेटी को बाद में तंग न करे उसे ब्लैकमेल न करे। देख संदीप तेरी बेटी जैसी है। किसी गलत बंदे के नीचे न लग जाए।”
कुलवंत – “बंदा नहीं है 18-19 साल का जवान लड़का है। अपने गोपी जैसा जवान। पूरी आग में है। आज तो अपनी बेटी भेज जा। तेरा दिल करता बाद में तेरे ऊपर भी चढ़ा दूँगी उसे। वैसे भी पाजी की भी उम्र हो गई है। कहीं मजा देते होते तुझे अपनी तरफ देख लिया फिटी पड़ी है पूरी।”
कुलजीत – “दफा हो कुट्टी मजाक करती है। इधर मेरा दिल घबरा पड़ा है।” इतना कह कर वह अपने घर की तरफ चल पड़ी।
घर के अंदर गोपी भी बेचैन हुआ पड़ा था रात का सोच-सोच कर। जब पता हो बहन जीजा से अलावा किसी और के नीचे पड़ी है वह भी उसके किसी दोस्त के नीचे – टिकाई कहाँ लगनी थी। अपनी माँ की बातें सुन उसे यह पक्का यकीन था कि बहन को चुदवाने लगे उसकी माँ ज्यादा टाइम नहीं लगाएगी।
हुआ भी ऐसा ही। जब उसकी माँ घर आई तो उसने संदीप को कुछ कहा और संदीप अंदर चली गई।
कुलजीत – “बेटा मैं तेरी बहन को बस तक छोड़ने चली हूँ। उसे डॉक्टर के पास जाना है।”
गोपी – “मम्मी मैं ले जाना दीदी को अपनी मोटरसाइकिल पर। बस में कटो जाना।”
कुलजीत – “नहीं बस में ठीक रहेगा उसे। देर हो जानी। तू कहाँ उसके साथ परेशान होता रहेगा।”
इतने में संदीप अंदर से तैयार हो कर आ गई। अपनी आदत मुताबिक उसने आज भी पजामी सूट पहना हुआ था। ऑरेंज पजामी और हरे रंग का कुर्ता उसके ऊपर बहुत जच रहा था। नीचे सफेद ब्रा थी शायद यह गोपी ने अंदाजा लगाया क्योंकि शोल्डर से ब्रा की स्ट्रैप थोड़ी सी बाहर थी। लड़कों के लिए लड़कियों को स्कैन करना बड़ी बात नहीं होती। 1 मिनट में लड़की की तरफ देख कर बता देते हैं नीचे क्या पहना हुआ है। शायद बाल ज्यादा खुले थे इसलिए उसने रबर बैंड लगा लिया था। हाथ में छोटा पर्स था उसके। दोनों माँ-बेटी जल्दबाजी में घर से चली गईं।
कुछ 5 मिनट बैठा रहा गोपी। ऐसा लग रहा था उसे जैसे कोई उसका कोई खिलौना ले गया हो। फिर ऐसे ही एकदम झटके से उठा और मोटरसाइकिल पर बाहर निकल गया। मुँह पर उसने अपना परना आगे कर लिया था। 2 गलियाँ आगे उसे अपनी माँ अकेली वापस आती दिखाई दी। संदीप नहीं थी उसके साथ। उसने मोटरसाइकिल अपने गाँव के बस अड्डे वाली तरफ मोड़ ली। वहाँ अभी भी लोग खड़े बस की वेट कर रहे थे लेकिन संदीप वहाँ नहीं थी। इस बेचैनी में वह मोटरसाइकिल इधर-उधर घुमाने लग पड़ा। उसे समझ ही नहीं लगी कि इतनी जल्दी संदीप को कहाँ छोड़ आई उसकी माँ। हर आधे घंटे बाद जब वह घर की तरफ जा रहा था तो उसे मोटरसाइकिल पर जाती जोड़ी दिखाई दी। मोटरसाइकिल दूर थी साफ तो नजर नहीं आ रही थी लेकिन पीछे बैठी लड़की का सूट उसने पहचान लिया था या कह लो शक हो गया था दिमाग में। बाइक काफी तेज स्पीड में थी। जल्दी ही वह उसकी नजरों से भी दूर हो गई। काफी कोशिश की उसने लेकिन गोपी की मोटरसाइकिल उसका पीछा नहीं कर पाई।
अचानक ही उसके दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई जैसे इंजन चल रहा हो। उसने मोटरसाइकिल गाँव से बाहर वाली तरफ मोड़ ली और प्रार्थना करने लगा कि रब्बा हाथ जोड़ता जो दिमाग में अभी आया सच न हो। एक जगह जा कर उसने बाइक अपनी साइड में लगा दी। अभी भी उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। हाथ उसके काँपने लग गए थे। वह डब्बे पैर चल पड़ा। गाँव से काफी दूर थी यह जगह। घाट ही आते-जाते थे लोग यहाँ। वही हुआ जिसका उसे डर था। वही मोटरसाइकिल हवेली के अंदर लगी पड़ी थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि जो आज होने जा रहा था।
Ek aur chut hero ne apni gulam bana li aur Happy aur uski maa ki bhi pyas bhuj gayi isi bahaaneUpdate 7
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घाट ही आते-जाते थे लोग यहाँ। वही हुआ जिसका उसे डर था। वही मोटरसाइकिल हवेली के अंदर लगी पड़ी थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि जो आज होने जा रहा था।
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दोनों को अंदर गए हुए कोई 30-35 मिनट हो चुके थे। लेकिन गोपी अभी भी डरता हुआ हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। आखिर अपना शक दूर करने के लिए धीरे कदम रखता आगे हो गया। इस जगह के बारे में वह अच्छे से जानता था। कई बार अपनी सहेली को यहीं ला कर ठोकता हुआ था वह। जैसे उसे पता था कमरे की कोने वाली खिड़की टूटी हुई है और बाहर से सब देखा जा सकता है। उसने अपनी बॉडी दीवार पीछे कर ली और सिर आगे कर के देखा तो अंदर सिमर बैठा हुआ था। उसके कपड़े साइड में पड़े हुए थे। उसकी गोद में एक औरत उसके दोनों तरफ लतें कर के बैठी हुई थी। हरे रंग का कमीज़ पहने उसकी पजामी और सफेद रंग पर लाल दिल वाली पैंटी पास ही सिमर के कपड़ों में पड़ी हुई थी। लड़की के गोल गोरे चिताड़ थोड़े-थोड़े पसीने से चमक रहे थे। दोनों ने होंठों में होंठ डाल रखे थे। जब साँस लेने के लिए दोनों अलग हुए तो गोपी को कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उसे पता ही था। वह तो अपने दिल को दिलासा जैसा दे रहा था। गोपी को पहचान तो उस वक्त ही ले ली थी जब वह उनका पीछा कर रहा था। यह बात उसके दिल में रड़क रही थी कि सिमर ने 1 बार भी मना नहीं किया। मैं उसका पक्का यार हूँ यह मेरी ही बहन के साथ लगा पड़ा है। फिर उसने जेब से अपना फोन निकाला और सिमर को फोन मिला दिया। 3 रिंग के बाद सिमर ने फोन उठा लिया।
सिमर – “हैलो हाँ 22 कैसा?”
गोपी – “कहाँ है तू? तेरे साथ एक काम था। मैं तेरे घर भी गया था…”
सिमर – माथे पर हाथ रखी और संदीप को उठाने का इशारा करता हुआ… संदीप उसकी गोद से उठ पड़ी।
गोपी को सिमर का लंड देख 1 करारा धक्का लगा। सिमर ने उसे थोड़े दिन पहले बताया था कि वह ठीक हो गया है और हैपी की बहन उसकी सहेली है अब लेकिन गोपी ने उसका यकीन नहीं किया था। उसे लगा ऐसे मजाक करता है। ऐसा कैसे हो सकता। उसकी नजर अभी भी लंड पर टिकी हुई थी। काला शा और 8 इंच से ऊपर सिमर के पट्टे से लिशक रहा था। गोपी समझ गया कि शायद सिमर ने उसकी बहन संदीप को उस वक्त से नंगी कर के अपनी गोद में बिठा रखा था और चूस रहा था।
गोपी – इसे फिर बोलता नहीं कहाँ मर गया…
सिमर – “क…क…कुछ नहीं यार वह थोड़ा मम्मी ने एक काम दिया था वही करने आया था बाहर। मुझे टाइम लग जाना। तू बोल जो मेरी जरूरत ज्यादा तो मैं आ जाना?”
गोपी – “कैसा काम इतना जरूरी हो गया? सब ठीक है मेरी जरूरत तो नहीं?”
सिमर – “नहीं यार एक्चुअली तेरी मम्मी हमारे घर आई थी कह रही थी तू घर नहीं है बाहर गया है। इसलिए संदीप को डॉक्टर के पास ले जा। मैं वहाँ आया था। तुझे पता इन कामों में टाइम लग जाता है।”
गोपी – “हाँ यार उस वक्त बाहर था सहेली के पास बैठा था। मैं अभी आया वापस। सोचा आज बाहर चलते हैं घूमने तो फोन किया था।”
गोपी ने देखा सिमर की बात सुन कर उसकी बहन का मुँह उतर गया था। पहले जो उसके चेहरे पर सेक्स था वह एकदम खत्म हो गया। वह तो बच्चा चाहती थी और कुछ नहीं। और कोई उसे भी दिखाई नहीं दे रहा था जो उसे माँ बना सके। बच्चे के लिए वह इतनी ज्यादा परेशान हुई पड़ी थी कि वह किसी के आगे भी लेटने को तैयार थी। ऊपर से सिमर हाय भी जवान था और नाले उसका लंड उसके पति से कहीं ज्यादा लंबा मोटा और ज्यादा हार्ड था। उसने अनमने जैसे मन से साइड में पड़ी अपनी पैंटी उठा ली। गोपी बाहर यह देख एकदम – “चल अच्छा 22 तू खयाल रखना संदीप दीदी का। मैं फिर कॉल करूँगा।” इतना कह कर उसने अपने हेडफोन को कान से बाहर निकाल दिया और सिर पर हाथ रख कर बैठ गया। उसे भी पता था कि एक भाई अपनी बहन चोद तो सकता है लेकिन जो बच्चा पैदा करेगा तो 99% चांस हैं कि उन बच्चों में कोई कमी होगी चाहे शारीरिक हो या दिमागी।
सिमर – “संदीप दीदी तुम्हें क्या हुआ तुम्हारा मुँह क्यों उतर गया और यह कच्छी क्यों उठा ली तुमने। जो काम करने आए थे वह करना नहीं।”
संदीप – “तू भी कमाल करता है। गोपी का फोन क्यों उठा लिया। वह ऊँची आवाज में सिमर को पड़ गई।
बाहर गोपी जो अपनी मोटरसाइकिल पर घर जा रहा था वापस उसे हेडफोन्स में ही कुछ आवाज का आनी पड़ी। उसने दोबारा हेडफोन को कान में लगाया और जेब से फोन निकाल कर देखा तो सिमर का फोन अभी भी चलता पड़ा था। शायद उसने गलती से फोन साइड में रख दिया था। जैसे नॉर्मली होता है कई बार हम सीधा फोन ऐसे सोच कर जेब में डाल देते हैं कि अगला खुद फोन डिसकनेक्ट कर देगा। अब भी किस्मत से ऐसा ही हुआ था। उसने फोन अपनी तरफ से म्यूट कर दिया और चुपचाप उनकी बातें सुनने लग पड़ा।
सिमर – “क्यों गुस्सा करते हो आपको भी पता तुम्हारा छोटा भाई मेरा यार ही नहीं भाई है। उसका फोन कैसे कट दिया। और मुझे पहले से ऐसा लग रहा था जैसे मैं यार मार रहा हूँ उसकी बहन मेरे साथ है।”
संदीप – “ठंडी पड़ती और आगे हो कर उसके गले में बाँहें डालते हुए तो ही तुझे चुना मैंने। अब पक्का सोच लिया गोपी को मामा तू ही बनेगा। तुम दोनों में कितनी अच्छी यारी दोस्ती है। मुझे पक्का यकीन है तू मुझे ब्लैकमेल या तंग नहीं करेगा। तू परफेक्ट है इस काम के लिए। और तुझे कैसे लगेगा यह सोच कर मुझे कोई और माँ बनाए।”
सिमर – “हाँजी लेकिन यह सोच कर डर लगता है कि गोपी को पता लग गया तो क्या होगा।”
संदीप – “चल तू टेंशन न ले। उसे भी देख लूँगी। मुझे अब तू परेशान न कर। नहीं तो याद है न तुम दोनों ने कितनी कुटाई खाई हुई है मेरे से हहहहह” इतना कह कर उसने हँसते हुए अपना कमीज़ उतार दिया।
सिमर – “हहहहहहह हाँजी पता मुझे सारा। तुम बहाने ढूँढते थे। कभी स्कूल रिपोर्ट से कभी खेल के लेट आने उस वक्त। हर बात पर तुम्हारा थप्पड़ तैयार होता था। आज देखोगे तुम्हें। आज लूँगा बदला सारे थप्पड़ों का।” यह बात सुन गोपी भी हँस पड़ा। संदीप और सिमर की मम्मी दोनों आप सबको पढ़ाती थीं। जब कुलवंत घर न होती तो यह ड्यूटी संदीप की होती। दोनों ही बहुत सख्त थीं। सिमर नाल ही आगे होता था और उसकी ब्रा भी खोल देता था। संदीप नंगी बहुत सुंदर लग रही थी। अब उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। सिमर का लंड सामने का नजारा देख कर ही फिर अपनी औकात में आ गया था। नंगी संदीप हूर परी से कम नहीं थी। कान डबल बनवाए हुए टॉप्स के वाले पहन रखे थे, गले में गोल्ड की चेन थी उसकी। दोनों बाँहों में कुछ गोल्ड की और रंग बिरंगी चूड़ियाँ पहन रखी थीं। पैरों में पहनी झांझर जब वह चलती तो बहुत सुंदर आवाज पैदा करती थी। जिस आवाज इस टाइम गोपी भी फोन पर सुन रहा था। भरा हुआ शरीर। विवाह के बाद उसका शरीर भर गया था जैसा हर लड़की के साथ होता। मम्मे 32 के 34 हो गए थे। कमर और गांड थोड़ी फैल गई थी। पट्टे पहले से बेहतर शेप में आ गए थे। घर का काम अपने हाथी करती थी इसलिए पूरी फिट थी। सेक्स टाइम उसका पति हमेशा नशे का मारा थक जाता था लेकिन संदीप कभी नहीं थकती थी।
संदीप – “हाँ तुम दोनों गल्लाँ काढ़ते होते तो ही मेरी लाइफ ठीक नहीं चलती पड़ी है और मेरे बच्चे नहीं हुए अभी।” फिर साथ ही हँसते हुए मूड हल्का करते हुए “चल अब हो जा शुरू नहीं तो कूटूँगी तुझे बच्चे मैं तेरे से बड़ी हूँ।”
सिमर आगे हो कर संदीप को गले लगा उसके होंठ चूसने लगा। होंठों का रस पीता उसके हाथ संदीप की पीठ पर घूम रहे थे। बाहर निकली हुई गांड के रग भर्न का स्वाद ही भला था। दूसरा वह लड़की जिसे वह बहन मानता था बचपन से जानता था अब वह उसके आगे अल्फ नंगी खड़ी थी। काफी देर सिमर संदीप के होंठों का रस चूसता रहा। बीच-बीच में वह संदीप के चिताड़ पर सटाक कर थप्पड़ भी मार देता जिससे संदीप उसे घूट कर गले लगा लेती लेकिन रोकती नहीं थी। थप्पड़ की आवाज संदीप के भाई गोपी को भी हिला देती थी। सिमर को कोई डर नहीं था किसी का भी। उसकी चारों उँगलियाँ देसी घी में थीं। अब तो वह गोपी के घर जा कर संदीप को चोद सकता था। थोड़ी देर बाद सिमर – “दीदी वह सामने कुर्सी पर लतें चौड़ी कर के बैठ जाओ।” संदीप वैसे ही वहाँ पड़ी कुर्सी पर तांगे चौड़ी कर के बैठ गई। सिमर उसकी लतों में जमीन पर बैठ गया। उसकी गोरियाँ चिटियाँ लतें देख वह पागल होता जा रहा था। उसके घुटनों को किस करता वह ऊपर की तरफ आता गया। सिमर का संदीप के पट्टे को चूमना पट्टे पर जीभ फेरना उसे पागल कर जा रहा था। संदीप की चूत में जैसे हार आ गया हो। वह चूमने चूसने से ही 2 बार झड़ चुकी थी। उसके पति ने कभी इतना नहीं चूसा था उसे आज तक। वह तो संदीप के मम्मों को चूस कर पट्ट के झटके मार फ्री हो जाता था। जब कि सिमर का उसके पट्टे के अंदर तक चूमिया ले रहा था। अभी तो वह चूत के आस-पास उसके चढ़े में ही चूमी चूसी जाता पड़ा था। आखिर जब सिमर उसकी चूत पर आया तो ऐसा लगा जैसे वह पागल हो जाना। जैसे सिमर उसकी चूत चूस रहा था ऐसा तो उसने सेक्सी मूवीज में भी नहीं देखा था। पहले तो उसका ही जीभ फेरता रहा लेकिन बाद में उसकी चूत के दाने को चूसने लगा और साथ ही 1 उँगली अंदर डाल देता साथ ही चूत चूस रहा था वह। जब संदीप झड़ने वाली होती तो वह सिमर का सिर अपनी लतों में घूटने लगती तो वह रुक जाता। संदीप का पानी नहीं निकलने दे रहा था उसे तड़पा रहा था वह काफी देर ऐसे ही चलता रहा। उधर फोन पर गोपी अपनी बहन की सिसकारियाँ सुन रहा था। भले वह घर पहुँच गया था और अपनी माँ के साथ बैठा था लेकिन हेडफोन्स में सब पता लग रहा था। संदीप की आवाजें हायyyy मम्मी हायyyy सीईईई आह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फ बस कर सिमर हायyyy यह क्या कर दिया तू। कुछ कर प्लीज कितनी देर ऐसे चूस कर तड़पाता रहेगा। हायyyy मैं मर गई मेरी चूत में आग लगी पड़ी है रब्बा बचाओ दिया लगातार आती आवाजें गोपी को भी पागल कर जा रही थीं। आखिर सिमर का जब संदीप को चूस कर दिल भर गया जितना कुछ उसने अपनी माँ से सीखा था सब कुछ उसने संदीप पर वार्त लिया था। उसे पूरा यकीन था जितनी रूह से उसने अपने यार गोपी की बहन चूसी है वह वापस जरूर आएगी। उसने संदीप को वहीं दीवार से झुका दिया।
सिमर – “दीदी जीजा जी का लंड लंड कैसा है?”
संदीप – “उसकी बात छोड़ उसे इस वाले याद करी जाता??”
सिमर – एक थप्पड़ सटाक का मारता हुआ गांड पर “मैं तो पूछता मेरा बड़ा है या जीजा जी का?”
संदीप – “उसका तो तेरे नाले आधा भी नहीं लंबाई और मोटाई में। ध्यान से हौले कर जरा लंड तेरा हायyyy बहुत ज्यादा मोटा है। मैं घर भी जाना। मुझे पता चल बदल देनी तू लेकिन फिर भी खयाल रखना।”
सिमर बस तुम अपने होंठ जरा घूट लाओ। वेहंदा हुआ पानी और लंड अपना रास्ता खुद बना लेंगे होते हैं। यह कह कर सिमर ने जो झटका मारा और जो उसकी चीख निकली वह सुन कर घर बैठा गोपी भी अपनी सीट से खड़ा हो गया। हाथ में फड़ी चाय भी उछल गई। संदीप को भी ऐसा लगा जैसे गर्म लोहे का मोटा सरिया उसकी चूत में टून दिया हो। लंड इतना हार्ड और गर्म था। सिमर ने उसे सेट होने का मौका ही नहीं दिया और झटकों की रेल बना दी। संदीप “हायyyy प्लीज हौले कर जरा लंड तेरा हायyyy बड़ा मोटा है” हाय मम्मी बचा ले इसने मार देना हायyyy कितना मोटा है बाहर निकाल ले मेरी फट गई” पता नहीं क्या-क्या बोली जा रही थी। 2 साल हो गए थे चुदे हुए लेकिन सिमर का लंड उसे तारे दिखा रहा था। सिमर चोद ही ऐसे रहा था। खड़े-खड़े उसके बाल पकड़ कर चोदने लग पड़ता। गोपी भी अपनी बहन की बातें और सिसकारियाँ सुन पागल होता जा रहा था। काफी देर ऐसे ही चोदने के बाद जब सिमर ने खड़े-खड़े ही संदीप की दोनों बाँहें पीछे कर के पकड़ कर चोदना शुरू किया तो संदीप का भला मुश्किल हो गया था। वह हैरान थी कि इतनी छोटी उम्र में सिमर ने इतना सब कैसे सीख लिया। लगभग 10 साल बड़ी थी वह सोच रही थी यह वही लड़का है जो कल तक बच्चा था। अपने छोटे भाई गोपी और इसे साथ अपने हाथी खड़ाती हुई थी। आज वही छोटा बच्चा उसे रुला रहा था चोद रहा था और चोद भी ऐसे रहा था कि 27-28 साल की संदीप का खड़े रहना मुश्किल हो गया था। झटके इतने तेज थे उसके। यह खेल कोई आधा घंटा चलती रही और संदीप की सिसकारियाँ निकलती रही। उसका गला सूख गया था चीख-चीख कर लेकिन सिमर तो लगा था अपनी धुन में। उसकी हर एक बात संदीप को हैरान करती थी जो पोज वह वार्त रहा था। जब संदीप को उसने अपनी बाँहों में उठा लिया और अपने लंड पर बिठा कर झटके लगाए तो संदीप के पट्टे फट गए। उसकी आँखों में आँसू आ गए दर्द और मजा के मिले-जुले। सिमर को पता था उसका माल संदीप की चूत में गिरना जरूरी है। लास्ट में उसने संदीप के घुटने उसके कंधों से लगा कर चोदना शुरू कर दिया और अपना पूरा जोर अपने यार गोपी को मामा बनाने में लगा दिया और जब सिमर की पिचकारियाँ संदीप की चूत में गिराई तो उसे ऐसा लगा जैसे आग पर पानी डाल दिया हो। सिमर पीछे हटने लगा तो संदीप ने उसे रोक लिया – “थोड़ी देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटा पड़ा रह। इस पोज में लतें ऊपर हवा में ही रहने दे मेरी। मेरे में इतनी हिम्मत नहीं कि मैं खुद लतें ऊपर रख सकूँ। तू तो सारी जान ही निचोड़ ले।” यह सुन कर गोपी ने भी फोन कट कर दिया। उसे पता था कि सिमर का ध्यान कभी भी उसके मोबाइल की तरफ जा सकता।
सिमर – “सॉरी दीदी तुम इतने सुंदर। मैं खुद पर कंट्रोल नहीं रख सका। रियली सॉरी दीदी।”
संदीप – “अब माफी माँगता पड़ा। पहले नहीं पता था मैं तेरे दोस्त की बहन हूँ। कैसे लगा था पागल जैसे मैं रंडी हूँ। वैसे यह सब कहाँ से सीखा?”
सिमर – “कहीं से भी नहीं। मेरा पहली बार है” और साथ ही हँस पड़ा।
संदीप – उसके मूड पर थप्पड़ मारते हुए “मुझे बेवकूफ समझता। वैसे बड़ा कमाल का चोदा तूने। ऐसे तो तेरा जीजा शुगात में नहीं कर सका था।”
दोनों काफी देर ऐसे ही लगे रहे। संदीप ने भी उसे अपने से उतरने नहीं दिया। वह तो सिमर के माल का एक भी कतरा बाहर नहीं गिरने देना चाहती थी। कोई आधे घंटे बाद संदीप और सिमर दोनों ने कपड़े पहन लिए और सिमर और वह गाँव आ गए। सिमर गोपी के घर के बाहर – “चलो दीदी मैं चलता हूँ।” संदीप हाँ ठीक है रात को आ जाना टाइम नाल घर हमारे।
सिमर – “लेकिन दीदी गोपी का क्या करना? उसे क्या कहना। मेरा यार है वह। हम दोनों ने कुछ किया मैं समझता लेकिन पता नहीं वह कैसे रिएक्ट करेगा।”
संदीप – “तू घबरा न घर जा टेंशन न ले। मैं खुद समझा लूँ उसे।” इतना कह संदीप लंगड़ाती अंदर चली गई जहाँ बाहर ही मंजे पर उसकी माँ और भाई बैठे हुए थे। उसकी माँ अपनी बेटी की बदली चाल देख समझ गई कि काम हो गया।
कुलजीत – “बेटा ठीक है तू क्या हुआ तुझे?”
जानबूझ कर अपने बेटे सामने नाटक करती हुई।
संदीप – “हाँ मम्मी मैं ठीक हूँ बस नस चढ़ गई लत की। वह सिमर ने बड़ी मदद की आज।” जान कर माँ को बहाने से बताने लगी।
कुलजीत – “कौन सिमर…? अपना सिमर अपनी कुलवंत का बेटा?”
संदीप – “हाँजी मम्मी…”
कुलजीत – हैरानी से अपने मन में “वह तो बच्चा अभी… नहीं नहीं बच्चा नहीं देख हाय कैसे संदीप की चाल बिगाड़ दी उसने।” फिर बोली – “ठीक है बेटा जा आराम कर ले थक गई होगी।”
गोपी पता नहीं क्यों संदीप से आँखें नहीं मिला पा रहा था।
संदीप – “गोपी मेरे साथ चल तेरे साथ एक काम है।” गोपी अपनी बहन के साथ अंदर उसके कमरे की तरफ चल पड़ा चुपचाप। दोनों बहन-भाई अंदर चले गए और दरवाजा बंद कर लिया।
संदीप – “आ जा बैठ जा तेरे साथ जरूरी बात करनी है।”
गोपी – “हाँजी दीदी बताओ।”
दूसरी तरफ सिमर भी घर पहुँच गया। घर उसकी माँ ने उसकी डाइट पहले से ही उसके लिए तैयार कर के रखी हुई थी। जिसे खा कर वह लेट गया और सो गया। उसकी नींद कोई शाम के 8 बजे खुली जब उसकी माँ ने हिला कर जगाया कि उठ बेटा बाहर गोपी तुझे लेने आया। सिमर उठ कर कच्चा जैसा मुँह हाथ धो बाहर आ गया। गोपी बाहर बैठा था।
गोपी – “चल चलिए यार तू सोता पड़ा घोड़े बेच के। मैं तुझे फोन कर रहा था तू उठाता नहीं था। मुझे खुद आना पड़ा तुझे लेने। मैं आंटी को बता चुका तू आज हमारे वाले रुकेगा आज मैच देखना है हमें टीवी पर साथ।”
सिमर सिर खुजाता उसके साथ चल पड़ा।
सिमर – “गोपी यार एक बात थी तुझे बतानी।”
गोपी – “चल पहले घर तो चल। वहाँ कर लेंगे बात जो करनी।
दोनों चुपचाप घर की तरफ चल पड़े। सिमर – “गाँव जब ठेके के आगे से गुजरते हुए अंदर से 2 बीयर लेता है।” बीयर पीते हुए सिमर – “अब चुप रह और मेरी बात सुन ले। तुझे कब से बताने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन साली समझ नहीं आ रही थी कैसे बताऊँ। उस वक्त दिमाग फट जाता है। यह सब इतनी जल्दी हुआ। मैं फँस गया और यह सब किया या कह ले करना पड़ा।”
गोपी – “22 जो तू यह बताने की कोशिश कर रहा है कि आज सुबह मेरी बड़ी बहन तेरे साथ थी या कह ले तेरे नीचे थी – वह मुझे पता है।”
सिमर बीयर का जो घूँट उसके मुँह में था वह बाहर आ गया और वह अंदर-अंदर उसके मुँह की तरफ झाँकने लगा और फिर – “तुझे कैसे पता? और देख मैं कोई जानबूझ कर नहीं किया न मैंने अपनी दोस्ती में गलत किया। जो नहीं यकीन तो संदीप दीदी से पूछ ले।”
गोपी हँसते हुए – “ओ भोले पंछी रिलैक्स हो जा।” क्यों इतना बौखलाया पड़ा है। तू लड़कियों के मामले में कितना बड़ा फट्टू है मुझे पता। बाकी यह जान कर खुशी भी हुई कि तुझे और मेरी बहन दोनों को मेरी फिकर है। दूसरा आज जब मैंने तुझे सुबह फोन किया था उस वक्त तू फोन साइड में ऐसे ही रख दिया जिससे जो तू मेरी बहन के साथ किया सब सुनता रहा मैं।
गोपी दोबारा साइड में पड़ी बीयर उठा उसे देता है और खड़के दोनों एक ही घूँट बची हुई बीयर खींच जाते हैं। गोपी – “बेंचोड तेरी टूट्टी कब ठीक हुई साले तेरी टूट्टी तो ऐसे ही लीक हो जाती थी।”
सिमर भी अब शर्म और डर से बाहर निकल चुका था – हँसते हुए “साला कुत्ता मजाक करता है। संदीप दीदी से पूछ ले काम करती है या नहीं।”
गोपी – “हहहहहहहहह मुझे पता है। वह तो दीदी को जब चढ़ कर गया था उस वक्त ही पता लग गया था। मुँह से सारा मेकअप उतरा हुआ था। आँखें लाल हुई पड़ी थीं। चुन्नी ली हुई थी फिर भी गालों पर चक मार के निशान थे और सबसे बड़ी बात चाल में गड़बड़ थी। जब चलती थी पता लग जाता था मुँह से कि दीदी को दर्द हो रही है। दूसरा बहुत हौले-हौले चल रही थी और चलते हुए बीच-बीच में रुक भी जाती थी। यह तो मैं खुद नोटिस किया था। फिर बाकी यह सब क्यों किया यह दीदी ने खुद आप मुझे बता दिया था।”
सिमर – “सच दीदी ने बताया…?”
हाँ जब दीदी घर आई तो गोपी सिमर के हाथों से दूसरी बीयर फाड़ते हुए बताने लगता है उसके साथ उसकी बहन में हुई बात।
कमरे के अंदर जा संदीप दरवाजा बंद कर लेती है और टीवी का रिमोट कंट्रोल गोपी को देते हुए कोई मूवी लगा ले अपनी पसंद की। गोपी वैसे ही करता है। पहले का सारा सेक्स अब उसके दिमाग से निकल चुका था। आज तो पहले दीदी के कमरे में जाने का मतलब होता था सजा। कई बार जब मम्मी घर के काम में बिजी होती तो वह संदीप को गोपी की स्टडी, होमवर्क या रिजल्ट चेक करने को बोल देती। जो रिजल्ट या होमवर्क ठीक न होता तो संदीप उसके मुँह पर थप्पड़ मार देती या मुर्गा बना देती हुई थी। जो बात एग्जाम की होती तो संदीप के बेड के नीचे 1 सोटी भी पड़ी थी। जैसे स्कूल टीचर जैसी गोपी के हाथों पर खूब वारती थी। कई बार मुर्गा बने कपड़ों के ऊपर ही गांड पर भी मार देती थी।
गोपी भोला जैसा मुँह बना सिर नीचे कर के – “आज मैंने क्या किया आज कभी सजा देने लगी हो?”
संदीप – “ओ माय गॉड… मेरे प्यारे वीर ऐसी कोई बात नहीं।” तुझे कूटने नहीं लगी। तुझे बताना था कुछ मैं तो कर के कमरे में ले कर आई हूँ।
संदीप – “तुझे पता ही है मेरे ससुराल में कितनी प्रॉब्लम चल रही है। वह चुन्ने ने कि मैं जल्दी कोई बच्चा जमा पर कई बार कोशिश कर चुके हैं लेकिन अभी तक हुई नहीं कुछ भी।”
गोपी – “हाँजी दीदी मैं कल रात भी तुम्हारी बातें सुन रहा था जब तुम मम्मी के साथ लगी थीं।”
फिर सिर नीचे कर के जो तुम प्लान किया था उसका भी पता मुझे। मैं इतना बच्चा भी नहीं। और शायद तुम यह बताने के लिए मुझे ले कर आई हो अंदर ताकि बता सको कि तुम्हें प्रेग्नेंट सिमर मेरा दोस्त करेगा।
संदीप – “बाकी तो ठीक है लेकिन तुझे कैसे पता यह सब?”
फिर गोपी उसे सब कुछ बता देता है कैसे उसने मोटरसाइकिल पर दोनों को देखा और पीछा किया। कैसे गलती से चलते फोन में सब कुछ सुन लिया।
संदीप – “तुझे बुरा नहीं लगा? जो तू चाहता मुझे रोक भी तो सकता था?”
गोपी – “दीदी मैं तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता। मुझे पता तुम यह सब अपनी सेक्स की आग के लिए नहीं बल्कि बच्चे के लिए कर रहे हो। सिमर को इस काम के लिए तुमने चुना यह भी अच्छी बात है। उसे यह काम मैं कर सकता तो तुम्हें किसी और के नीचे नंगा न देखना पड़ता लेकिन मुझे पता बच्चे के लिए अपना सगा भाई नहीं और कोई चाहिए होता। तुम घर में रहो। सिमर आ जाया करो रोज रात को यहाँ तुम्हारे साथ सोने। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। मेरी बहन खुश रहे और क्या चाहिए।”
सिमर – “वाह 22 अपनी बहन के लिए इतना प्यार। किस्मत वाली है संदीप जिसे तेरे जैसा और मुझे ऐसा ही यार मिला। तू कुछ भी कहेगा माँगेगा दूँगा।”
गोपी – “मुझे सिर्फ भांजा या भांजी चाहिए और कुछ नहीं। चल चलिए घर काफी टाइम हो गया यहाँ बैठे।”
घर आते तो देखते हैं दोनों माँ-बेटी बैठी हुई थीं एक ही मंजे पर बातें कर रही थीं। सिमर जाते ही गोपी की माँ के पैर हाथ लगाता माथा टेकता है। और पास ही पड़ी मंजी पर बैठ जाता है। कोई 5 मिनट जब कोई नहीं बोलता तो हार कर कुलजीत ही बोली – “सिमर जा बेटा यहाँ कब तक बैठे रहोगे। मुझे पता है यह सब का। जा संदीप मेरे वाले कमरे में चल जा सिमर के साथ वह बेड बढ़िया है।” संदीप और सिमर दोनों उठ कर उसकी मम्मी के कमरे में चले जाते हैं।
कुलजीत – “तुझे पता है न सिमर क्यों आया?”
गोपी – “हाँजी मम्मी मुझे पता कोई बात नहीं घबराओ नहीं तुम। आओ मेरे कमरे में चलते हैं। वे दोनों तो सुबह तक नहीं आने। बाहर तुम कब तक यहाँ बैठी रहोगी।”
कुलजीत – “हाँ ठीक कहता तू।”
और दोनों कमरे में आ जाते हैं और एक ही बेड पर लेट जाते हैं। कुलजीत ने रोज की तरह आज भी पुराना घिसा हुआ रात वाला सूट पहन रखा था। नीचे उसने ब्रा और कच्छी नहीं पहनी हुई थी। कुलवंत कौर जैसी वह भी सिरे की रंडी थी। बस फर्क इतना था कि कुलजीत का नाड़ा उसके पति के अलावा किसी ने नहीं खोला था। दोनों एक-दूसरे की तरफ पीठ कर के लेटे पड़े थे। पास के कमरे से बातों की आवाजें आती पड़ी थीं। गाँव वाला माहौल जैसा होता है खिड़की खुली थी जिससे आवाजें सुनती पड़ी थीं।
हौले-हौले बातों की आवाजें बंद हो गईं और आह्ह्ह सीईई हाय ओ माय गॉड की आवाजें पास के कमरे से आने लग पड़ीं। कुलजीत अपने बेड पर हलचल देख मुड़ी तो देखा गोपी बहुत परेशान हुआ पड़ा था। कुलजीत सीधी सिर के नीचे बाँह रख लेट गई। लेकिन गोपी से तो 1-1 मिनट काटना मुश्किल हो रहा था। सुबह से ज्यादा बर्दाश्त करना मुश्किल हुआ पड़ा था। एक तो अब उसकी बहन और उसका यार पास के कमरे में थे। दूसरा रात का टाइम था जो होता ही सेक्स का टाइम है। जब सेक्स का भूत हर एक के सिर पर चढ़ बोलता है। पास पड़े ठंडे पानी सा सारा जग उसने पी लिया था लेकिन कोई फायदा नहीं। लंड पर दिमाग दोनों काबू से बाहर थे अब इस वक्त। उसकी बहन की सिसकारियाँ और सिसक-सिसक कर बोलते शब्द उसे पागल कर जा रहे थे।
आखिर उसने घर से बाहर निकलने का फैसला किया। वह और अपनी बड़ी बहन की चीखें नहीं सुन सकता था। अभी उठ कर उसने चप्पल ही पहनी थी कि कुलजीत बोल पड़ी – “कहाँ चला इस टाइम। चल लेट जा चुपचाप।” कुलजीत को थोड़ा गुस्सा तो करना पड़ा। वह सब समझ रही थी पास के कमरे में काम पूरे जोर पर था। पट्टे पर पड़ते पट्टे की आवाज और बीच-बीच में ही सटाक की आवाज से सब पता लगता था कि सिमर उसकी बेटी को घोड़ी बना कर ठोक रहा है। कमरे में उनके बाहर से हल्की-हल्की चाँद की रोशनी आ रही थी। घाट ही दिखाई दे रहा था लेकिन फिर भी वह बेटे के पजामे में बना तंबू उसे दिखाई दे रहा था जो वह हाथ से बार-बार एडजस्ट करी जाता था।
इतने में गोपी को बेड पर कुछ फील हुआ। एक तो बाद दूसरा झटका था यह। एक तो पास के कमरे में उसकी बहन उसके यार से चुद रही है। दूसरा उसे फील हुआ कि पास ही पड़ी उसकी माँ कपड़े उतारती पड़ी है। पहले जब गांड ऊपर कर सलवार खिसका कर और पैरों में फँसा कर उतार दी और फिर बेड पर बैठ अपनी कमीज़ भी उतार कर फेंक दी। वह सब कुछ फील करता पड़ा था। अच्छे से दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन अंदाजा लगता था जब बॉडी हिलती थी।
उसकी माँ ऐसे क्यों कर रही है उसे समझ नहीं आया। लंड उसका पहले ही खड़ा था अपनी बहन की चूत मारवाने की आवाजें सुन कर। बहन के चिताड़ पर पड़ते थप्पड़ सुन कर लेकिन यह नया झटका उसके लिए और बड़ा था। इतने में उसे अपने पजामे पर हाथ महसूस हुआ और पजामे का नाड़ा खींच दिया। पजामा खुल गया। कुलजीत ने साइड से अपने बेटे का पजामा खींचा और नीचे करने की कोशिश की। गोपी भी कुछ नहीं बोला और अपनी गांड ऊपर उठा कर उसकी माँ ने उसे भी नीचे नंगा कर दिया। यह सब क्यों कर रही थी उसकी माँ वह पूछना चाहता था लेकिन उसके में हिम्मत नहीं थी। उसका शरीर उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। शायद उसने बोलने की कोशिश भी की थी लेकिन उसके मुँह से कुछ निकला ही नहीं।
कुलजीत खुद हैरान थी कि यह सब क्या करने लग पड़ी है। उसने आज तक किसी को हाथ भी नहीं लगाने दिया था। कई साल हो गए उसके पति ने उसे नहीं चोदा था। लंड घाट ही खड़ा होता था अब गोपी के पापा का। अभी कि उसकी सहेली कुलवंत उसे कई बार कह चुकी थी कि आज शहर चल किसी जवान बंदे के नीचे तुझे लिटवा दूँ लेकिन वह कभी नहीं मानी थी। अच्छी-भली सरदारनी दोनों टाइम पूजा पाठ करने वाली गुरुद्वारे जाने वाली धार्मिक औरत थी वह। उसे कुछ समझ नहीं आया था सब कुछ अपने आप वह करती गई जब गोपी बाहर जाना चाहता था अपनी बहन की चीखें सुन कर। कब वह नंगी हुई उसे खुद पता नहीं लगा। वह नहीं चाहती थी कि गोपी के दिमाग पर कोई असर पड़े। उसकी बेटी को अगले 20-25 दिन सिमर के नीचे सोना पड़ना था ताकि उसके प्रेग्नेंट होने के चांस हों। इतने टाइम में अपनी बहन को अपने यार के नीचे देख गोपी से सहन नहीं होना यह सोच कर वह यह सब कर गई।
ऊपर टीशर्ट गोपी ने खुद ही उतार दी और चुपचाप लेट गया। जोर से धड़कता दिल और डर से उसे पसीना आ रहा था। कुलजीत के शरीर पर भी अब उसकी चूड़ियाँ गले में गनी के अलावा कुछ नहीं था। वह भी गोपी के साथ लेट गई और उसका लंड हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी। अपने बेटे के लंड पर हाथ लगते ही वह काँप उठा। आँख बंद करी बस मजा ले रहा था अब। पास के कमरे में उसकी बहन चुद रही है यह अब उसके दिमाग से निकल चुका था। हाँ बीच-बीच में जब सिमर थप्पड़ मारता उसकी बहन के तो गोपी की भी सिसकी निकल जाती। ऐसे ही थोड़ी देर बाद गोपी को अपने लंड पर गीला-गीला फील हुआ। उसने देखा कि उसकी माँ ने उसका लंड मुँह में डाल रखा था और सिर को ऊपर-नीचे कर रही थी। कुलजीत कौर ने आज तक अपने पति का लंड भी बहुत कम चूसा था। वह उसके तरले करता था चूसे मारवाने के लिए लेकिन वह मना कर देती। लेकिन जब अपने बेटे का लंड हाथ में फाड़ा तो उसे पता लग गया कि उसके पति से उसके बेटे का लंड कोई 2 इंच ज्यादा लंबा और मोटाई भी ज्यादा है और वह अपने आप ही उसके लंड पर झुक गई और मुँह में डाल लिया। कुलजीत वह सब कर रही थी जो उसने आज तक नहीं किया था।
अपने बेटे के लंड मुँह में डालते और कभी सीधा तो जीभ फेरने लग जाती और कभी उसके टट्टों के साथ खेलने लगती। जब उसे फील हुआ कि उसके बेटे का लंड पूरा हार्ड हो चुका है तो उसने और देर करना अच्छा न समझा।
फिर कुछ सोच कर वह हल्की सी बोली – “बेटा आज बेड पर नींद नहीं आ रही आ जा नीचे लेटते हैं।”
“ठीक है” गोपी के मुँह से भी इतना ही निकला।
वह समझ गया कि बेड उसका पुराना है। इस बेड पर वह करते तो पूरे मोहल्ले में आवाज जाती। दोनों जल्दी ही खड़े हो गए और गोपी ने रजाई उठा कर जमीन पर बिछा दी और साथ 2 तकिए 1 सिर वाले पास फेंक दिए और 1 साइड में। जब कुलजीत हल्के अंधेरे में नंगी खड़ी थी तो उसके शरीर की बनावट देख गोपी से भी रहा न गया और जल्दी से दोनों फिर लेट गए। गोपी में अभी तक कोई पहल करने की हिम्मत नहीं थी। वह तो बस अपनी माँ जैसा करती वैसा साथ देता पड़ा था। कुलजीत को चूत मारवाए काफी टाइम हो गया था। अब कई बार उँगली कर लेती थी वह लेकिन ज्यादा नहीं। उसने अपना हाथ पर जितना हो सकता था थूक लिया और अपनी चूत पर लगा लिया। उसे पता था दर्द तो जरूर होगा चूत में लंड गए हुए 5-7 साल हो गए थे। ऊपर लंड हाय भी बड़ा और मोटा।
कुलजीत पहले गोपी के पेट पर बैठ गई। जब उसकी माँ नंगी उसके ऊपर बैठी तो गोपी के लिए यह पल यादगार था। कई लड़कियाँ चोदी थीं लेकिन ऐसा मजा नहीं आया था। फिर कुलजीत ने 1 हाथ अपने बेटे की छाती पर रखा और दूसरे हाथ से लंड पकड़ कर अपनी चूत पर टिका कर हौले-हौले उसके ऊपर बैठने लगी। जैसे ही टोपा उसकी गर्म चूत में घुसा तो उसकी चूत में खिंच जैसी पड़ी। लंड पूरा हार्ड था लोहे की रॉड जैसा। जैसे-जैसे वह बैठती जा रही थी अपने बेटे के लंड पर उसका दर्द बढ़ता जा रहा था। कई सालों से बंद पड़ी चूत का दरवाजा आज उसका बेटा फिर खोल रहा था। दर्द तो होना ही था। ऊपर कितने उसके पापा का ढीला लंड और कितने बेटे की लोहे की रॉड। आधे से जब ज्यादा लंड उसके अंदर चला गया तो कुलजीत की हिम्मत भी उसका साथ छोड़ गई। वह ऊपर उठने लगी थी। और दर्द उसके लिए मुश्किल था। अभी हल्का सा ही ऊपर उठी थी कि उसने अपने चिताड़ पर अपने बेटे के हाथ महसूस किए। उसने हल्का सा बाहर नीचे वाली तरफ पाया तो उसकी माँ उसके लंड पर गिर पड़ी और एक ही झटके में बाकी का बचा लंड अंदर घुस गया। वह डर के मारे चीख भी न सकी। ऐसा लगा जैसे चूत को चाकू से चीर दिया हो। 2 बच्चे जन्म कर के भी आज कुंवारी जैसी रो रही थी चूत मारवाने लगे। वह बस आगे हो अपने बेटे पर लेट गई। गोपी हौले-हौले नीचे से झटके मारता गया। जब कुलजीत की चूत लंड के हिसाब से एडजस्ट हो गई तो वह भी अब पूरे जोर से अपनी गांड हिलाने लगी। गोपी तो जैसे स्वर्ग में था। माँ के भरे हुए चिताड़ के रग भर के मजा लेता पड़ा था। ऐसे घूट रहा था गांड को जैसे आटा गूँध रहा हो। उसके हाथ उसकी माँ के पतले भरे हुए चिताड़ में ऐसे घुसते जा रहे थे। कभी वह उसके मम्मे पकड़ लेता उसका काफी हद तक दर्द निकल गया था अब। जब दोनों नंगे हुए थे एक भी शब्द नहीं बोला था दोनों ने। कुलजीत कोई 10 मिनट में थक गई। उसके में और हिम्मत नहीं थी बेटे के लंड पर हिलाने की। जब वह लंड से उतर कर नीचे लेट गई और गोपी भी उसकी लतों में आ गया और लतें उठा कर कंधों पर रख लीं। रखने से पहले उसने अपनी माँ के पैरों को माथे से लगाया और चूमा। कुलजीत के चेहरे पर स्माइल आ गई जो गोपी नहीं देख सकता था। माँ से ही माँ को चोदने का आशीर्वाद जैसा ले कर अगले 20 मिनट गोपी ने कुलजीत की ऐसी ठुकाई की कि जो आज तक की नहीं हुई थी। इतने जोश इतनी ताकत से झटके बजा रहा था कि उसकी चूत से कई बार पानी निकल गया था और अब उसके लिए झटकों की मार सहनी भी मुश्किल हो गई थी। वह चाहती थी कि जल्दी उसके बेटे का पानी निकल जाए। उसने हल्के हाथों से गोपी को पीछे भी धक्का दिया लेकिन अगले 5 मिनट की और जबरदस्त मार के बाद उसकी पिचकारियाँ कुलजीत की कई साल से बंद पड़ी चूत में बजाई तो वह लगभग मजा से बेहोश ही हो गई। ऊपर इतना माल गोपी ने उसके अंदर बहाया कि उसकी चूत से निकल कर गांड तक जा रहा था। गोपी अपनी माँ से उतर साइड में लेट गया। दोनों लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे।
पास के कमरे से भी कोई आवाज नहीं आ रही थी। ऐसा मतलब सिमर भी उसकी बहन की 1 बार चूत मार कर वेहला हो चुका था। कुछ 5 मिनट ऐसे ही लेटे रहने के बाद वह पास ही पड़ी अपनी कमीज़ पहन कर बाथरूम में चूत धोने और पेशाब करने के लिए चली गई। चलते उसके लतें लड़खड़ा रही थीं। चूत में पड़ रही खिंच और दर्द उसके पट्टे तक जा रही थी। पेशाब करती भी हल्की सी जलन हुई उसे। उसने अपनी चूत धोती और मुँह पर पानी मारा और वापस कमरे में आ गई। आते हुए दिमाग में कुछ आया तो वापस जा कर तेल की बोतल भी साथ ही ले आई। शायद इस बात का अंदाजा था कि रात अभी खत्म नहीं हुई बहुत लंबी होने वाली है यह रात।
गोपी भी फिर अपना कच्छा का कर बाथरूम में आ गया। पेशाब के बाद मुँह धो कर बाहर निकल रसोई से पानी पीने के लिए आया तो वहाँ संदीप खड़ी थी। उसने अपनी कमीज़ पहन रखी थी। शायद नीचे सलवार नहीं थी। लतें नंगी थीं संदीप की। वह दूध गर्म कर रही थी सिमर के लिए। संदीप सिमर का पूरा खयाल रख रही थी। संदीप को पीछे मुड़ कर देखा तो गोपी एक टक लगाए उसके तरफ देख रहा था अपने किसी खयाल में गुम।
संदीप – “क्या हुआ चिआड़ा तुझे कुछ क्या लेने आया? मुझे बता दे किस खयाल में गुम है?”
गोपी – हड़बड़ा कर “ओ सॉरी दीदी मैं पानी पीने आया था गला सूख रहा… बाले दूध वह भी बादाम काजू इलायची डाल कर इतना खयाल मेरे यार का हहहहहह।”
संदीप – “क्या करना अब तुझे मामा बनाने के लिए तेरे यार का खयाल तो रखना पड़ेगा।”
इतने में जब संदीप पूरी तरह गोपी की तरफ मुड़ी और उसने देखा संदीप की बाई गाल पर उँगलियों के निशान छपे थे।
गोपी अपनी बहन की गाल पर हाथ लगा कर अच्छे से देखते हुए – “दीदी यह क्या उसने हाथ उठाया तुम पर? करता मैं बात उसके साथ वह सादी मजबूरी का ऐसा फायदा नहीं उठा सकता वह तुम्हें थप्पड़ कैसे मार सकता मुँह पर वह भी।”
संदीप – प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते “तू जा सो जा। यह छोटी सी बात है यह सब। और यह न भूल मुझे वैही को 2 साल हो गए हैं। तेरा जीजा भी रोज चढ़ता मेरे पर मुझे आदत है बेटा। हाँ वह बात अलग है तेरा यार में जोश बड़ा। लक दुखाने ला दिया।”
फिर दूध जग में डाल कर चल मैं चलती हूँ सिमर वेट कर रहा होगा। इतना कह कर लक मटकाती कमरे में चली गई। गोपी ने देखा अभी भी उसकी बहन की चाल लड़खड़ा रही थी। लेकिन चेहरे पर खुशी थी उसके।
कमरे में आ कर गोपी ने देखा तो उसकी माँ ने दोबारा नंगी नीचे लेटी पड़ी थी और जब वह उसके साथ लेटा तो तकिए के पास सरों के तेल की बोतल पड़ी हुई थी। ऐसा मतलब साफ था। सारी रात दोनों कमरों में माँ और बेटी चुदती रही। गोपी और कुलजीत तो 3 राउंड के बाद थक कर सो गए। कुलजीत जैसी औरत की तसल्ली कर के गोपी भी थक गया था। मजा दोनों को बहुत आया था। जब उसने माँ की चूत पर तेल लगा कर लंड डाला तो लंड तिलक-तिलक कर अंदर जाता तो कुलजीत मजा से काँप जाती। कुलजीत कई सालों बाद अपनी तसल्ली करवा कर इतनी संतुष्ट हो कर सोई थी क्योंकि आज जो लंड उसके अंदर गया था वह उसके पति के लंड जैसा ढीला नहीं था। दूसरे कमरे में सिमर तो लगा हुआ था। उसने 4 राउंड संदीप पर लगाए। आखिरी राउंड में तो संदीप रोने लग पड़ी। लंड की मार उसके से सहन नहीं हो रही थी। लेकिन अब सिमर का कंट्रोल था उसके पर। जैसे वह कहता वैसे करती थी संदीप। भले उम्र में बड़ी थी संदीप लेकिन अब अपने से कई साल छोटे सिमर को जब बुलंदी तो पूरी रिस्पेक्ट देती थी। जैसे सुनेगा प्लीज रुक जाओ या 1 मिनट बात सुनेगा।
सुबह पहले कुलजीत उठी कोई 9 बजे। नॉर्मली तो वह जल्दी उठ पड़ती थी और गुरुद्वारे जाती थी लेकिन राती 3 बार की ठुकाई के बाद नहीं जा सकी। अभी भी उसके शरीर में थकावट थी लेकिन उठना तो पड़ना था। वैसे भी रब ने औरत को यह ताकत दी है सारा दिन घर का काम चूल्हे आगे और रात को लुले आगे फिर सुबह जल्दी तैयार। उसके बाद गोपी भी उठ पड़ा। जब वह बाथरूम से नहा धो कर निकला तो अभी भी आवाजें आ रही थीं। सिमर अभी भी उसकी बहन संदीप को बजा रहा था। जब वह उनके कमरे के आगे से रसोई में चाय लेने के लिए गुजरा तो उसने देखा संदीप सिमर के लंड पर बैठी उछल रही थी। उसके मम्मे सिमर के हाथों में थे और उसकी बहन बहुत स्पीड से अपनी गोरी गांड हिला रही थी। गोपी हैरान था कि सिमर अभी भी लगा हुआ। वह उसके स्टेमिना देख खुश था। जब वह किचन में चाय लेने के लिए गया तो अभी भी थोड़ा परेशान था कि मम्मी कैसे रिएक्ट करेगी। वह उसका सामना कैसे करे। लेकिन जब वह अपनी माँ सामने हुआ तो कुलजीत ने ऐसे रिएक्ट किया जैसे राती कुछ हुआ ही नहीं और बोली – “यह ले चाय और बिस्किट्स।” जिसे ले कर वह चुपचाप बाहर आ गया और इंतजार करने लगा सिमर का जो अभी भी उसकी बहन को चोद रहा था |
Dosto agar kuch mistake hua ho to undekha kar dena aur samjh lena
Chalo acha hai Sandeep maa banne wali hai aur baki sab bhi thik chal raha hai but ye Happy ki biwi kab chudegiUpdate 8
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यह ले चाय और बिस्किट्स।” जिसे ले कर वह चुपचाप बाहर आ गया और इंतजार करने लगा सिमर का जो अभी भी उसकी बहन को चोद रहा था |
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करीब 15 मिनट बाद पहले सिमर और फिर लंगड़ाती हुई तथा धीरे-धीरे चलती हुई उसकी बहन संदीप भी आ गई। उसने अब नहा लिया था। उसके बाल खुले हुए थे। उसने कोई परफ्यूम नहीं लगाया था लेकिन गोपी को उससे बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। सिमर चाय पीकर जल्दी से वहाँ से निकलना चाहता था। जब वह जाने के लिए अभी उठा ही था कि संदीप ने उसे पीछे से आवाज दी – “एक मिनट रुक जरा” और फिर बोली – “आज रात का खाना भी हमारे यहाँ खा लेना…”
सिमर वहाँ से निकल गया। घर पहुँचा तो उसकी माँ और बहन कोमल वहाँ ही बैठी हुई थीं। उसने आकर दोनों को सत श्री अकाल कहा और अंदर चला गया। नहाया तो वह गोपी के घर से आया था। बस कपड़े बदलने थे। इतने में कोमल भी उसके पीछे आ गई।
कोमल – “बहुत व्यस्त रहने लगा है, अपनी सगी बड़ी बहन की कोई चिंता नहीं। उसे मिलता नहीं और दूसरों की मदद करता फिरता है तू। वाह मेरे शेर भाई। लोग भलाई तो तेरे से सीखें हा हा हा हा।”
सिमर – “तुम्हें तो मम्मी ने सब कुछ बता दिया। मैं कहाँ गया था और क्यों…?”
कोमल – “हाँ, मम्मी ने बता दिया और यह भी बता दिया कि तूने उस कमीने हैपी से बदला भी ले लिया हमारी माँ की बेइज्जती का। अच्छा किया तूने। मुझे भी पसंद नहीं था वह। बड़ा घूरता रहता था कुत्ता मुझे। अब पता चला होगा जब उसकी अपनी बहन मेरे भाई के नीचे लेटी पड़ी थी। मैं तो कहती हूँ उसकी बीवी को भी अपने नीचे दबा ले।”
सिमर – “शांत हो जा लेडी भीम… शांत।”
कोमल – “ओके, मुझे पता है तेरे और मम्मी के दिमाग में कुछ चल रहा है। वैसे भी देखा है वह कुछ सोचती रहती है पता नहीं क्या? यहाँ तक कि मैं रात को देर से आई थी तो मम्मी ने कुछ कहा ही नहीं। उसका तो तुझे पता है कि अगर 12 बजे से देर हो जाए तो पीट पड़ती थी।”
सिमर थोड़ा नाराज और गुस्से में – “क्यों, कहाँ गई थी तुम? इतनी देर तक घर से बाहर?”
कोमल – “हम्म, सॉरी, टाइम का पता नहीं चला। दोस्तों के साथ व्यस्त हो गई थी। फोन करना भी याद नहीं रहा…”
सिमर – “हम्म, गलत बात है कि आजकल मम्मी कुछ नहीं कहतीं तो तुम गलत फायदा उठा रही हो। मुझे मम्मी ने भेजा था तो मैं गया था। पहले 2 दिन तुम्हारे पर्स में सिगरेट भी निकालकर मैं फेंक चुका हूँ कि मम्मी ने पकड़ लिया तो मार पड़ जाती तुम्हें।”
कोमल – “ओह, तूने फेंका था वह। मैं सोच रही थी पैकेट गया कहाँ।” और सिर नीचे करके खड़ी हो गई।
सिमर – “तुम्हारी गांड पूरी लाल कर देनी थी अगर मम्मी का मूड पहले जैसा होता।”
कोमल – “हाँ, सही बात है। वैसे भी एक बात बता, अपने आप को बुरा लगता था। यही मार के डर से कोई गलत काम नहीं करते थे हम दोनों। तू तो ठीक है लेकिन मेरा काम मुश्किल होता जा रहा था, पहले सिगरेट, रात को ड्रिंक भी की है।”
सिमर – “कोई नहीं, मैं मम्मी से बात करता हूँ। उन्हें क्या टेंशन है। बाकी तुम मुझे रात को मिलो और सलवार-सूट नहीं, पजामा-टीशर्ट पहनकर आना मेरे कमरे में।”
कोमल – “तू अब हुकुम चलाना सीख गया। पहले कितना घर में शांत और मम्मी से कितना डरकर रहता था। मम्मी को देखकर तेरी टट्टी अपने आप निकल जाती थी, याद है न। अब तो मम्मी भी तेरे नीचे। तुझे पूछकर करती हैं कोई काम करना हो तो।”
सिमर – “पता नहीं, यह सब तो अपने आप आ गया।”
दूसरी तरफ संदीप बहुत खुश थी। उसका सारा शरीर टूट रहा था। रात में सिमर ने उसे इतना रगड़ा था। उसकी हालत ऐसी थी जैसी वह अपनी सहेलियों से सुनती थी कि सुहागरात में उनके पति ने 4 बार चोदा। कोई 5 बताती थी। कैसे उनकी सहेलियों ने बताया कि अगले दिन उनका शरीर दर्द करता था। भले उनके पति ने भी 2 बार चोदा था लेकिन वह दम नहीं था। झटके मारता जल्दी थक जाता था। दूसरी तरफ पूरा मर्द था सिमर। जब 1-2 बार वह नखरे करने लगी थी तो गांड के साथ-साथ दोनों गालों पर थप्पड़ मार देता था। जब थप्पड़ उसके मुँह पर पड़ता तो एक बार तो उसका दिल उछल पड़ता कि सिमर जैसा लड़का हर लड़की चाहती है जो राज करे, प्यार करे, उसकी इज्जत करे लेकिन जब नंगी करे तो सब भूल जाए। औरत को अपनी गुलाम कैसे बनाना है यह वह पूरी तरह सीख गया था अब सिमर ने।
इतना कहकर वह बाहर घूमने अपने खेत की तरफ चल पड़ा जहाँ उसका डैडी काम में लगा हुआ था। उसने पापा को दूर से ही हाथ हिला दिया। मंजे पर बैठा था कि उसका पापा भी आ गया और साइड में बैठ गया।
सज्जन – “क्यों, क्या हुआ, आज कॉलेज नहीं गया?”
सिमर – “नहीं डैडी, वह आज थोड़ा थकान जैसी थी, मन नहीं किया जाने का…”
सज्जन सिंह – “हाँ, रात तेरी माँ ने थी। तू कुलवंत की बेटी चोदने गया, उसका पेट करने के लिए वह भी उनके घर… मुझे लगता है अब हमारे घर में कोई छुपाना नहीं होना चाहिए। मेरे से ज्यादा अब तू हमारे घर का सरदार है। जैसे तूने अपनी माँ को काबू में किया और इस घर को जहाँ ले जा रहा है, मुझे खुशी है। जो जवानी में मैं न कर सका वह मेरा बेटा करेगा।”
सिमर – “हम्म” उसके मुँह से सिर्फ इतना ही निकला।
सज्जन – “मुझसे कट्टू झिझकता है। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे इस बात की खुशी है कि तू मेरे जैसा नहीं निकला और ठीक हो गया। हमेशा तेरी माँ मेरी कमजोरी करके दूसरों के नीचे पड़ती थी। उसे भी इस बात का बुरा लगता इसलिए गुस्से में आकर मुझे पीटती थी। लेकिन कभी किसी के सामने उसने मुझे बुरा नहीं कहा। जो उसने अपनी सेक्स की आग शांत की है तो चोरी-छुपे करके ताकि सादी इज्जत बनी रहे। अब तू आ गया, अपनी माँ को संभाल लेना, अब वह बाहर नहीं भटकेगी।”
सिमर – “हाँ जी, मुझे पता है। लेकिन एक बात बताओ, तुम्हें बुरा नहीं लगता था जब तुम्हें पता होता था कि मम्मी बाहर गई हैं चुदवाने? और तुम चुपचाप क्यों पीट खाते थे?”
सज्जन – “हम्म, बुरा नहीं लगता था। इस चीज का भी मजा आने लगा था जब कोई तेरी माँ को चोदता था। कई बार मेरे सामने चोदता और कई बार वह चली जाती, मुझे बता देती कि मैं जा रही हूँ अपने यार से चुदवाने, घर वापस आकर मुझे अपनी चोदी हुई चूत दिखाती और चटवाती। सेक्स तू अभी शुरू किया है, अभी तेरी उम्र 19 साल हुई है। तू अभी काफी कुछ सीखना बाकी है। बाकी मुझे पता था मेरे से उसकी तसल्ली नहीं हो पाती इसलिए दूसरी बात रही पीटाई की, वह सिर्फ पीठ पर मारती थी। बहुत कम होता कि मुँह पर थप्पड़ मार दे। मजा आता था जब तेरी माँ नंगी होकर मुझे अपने पैरों पर लिटाती, पहले थप्पड़ मारकर लाल करती फिर जूते से पीटती। अभी भी बेल्ट से मारती है लेकिन कम। तेरी माँ को जूते से मारने में मजा आता है। सेक्स की दुनिया बहुत बड़ी है। इसमें जितना खुलकर मजा करेगा उतना स्वाद आएगा।”
सिमर – “हाँ जी, जैसा तुम कहो। मेरा दिल का बोझ हल्का हो गया। पहले बड़ा अजीब सा लगता था। ऐसे लगता था जैसे तुम मम्मी के डर से चुप रहते हो और मैं कोई बड़ा गलत काम कर रहा हूँ। तुम आज अपने दिल की बात बताकर बहुत अच्छा किया।”
सज्जन – “हा हा हा हा, चल तू घर जा, मैं भी तेरे पीछे आता हूँ।”
सिमर घर आ गया। कोमल अपने कमरे में बैठी थी। वह कुछ खाने के लिए ढूँढता हुआ रसोई में मम्मी के पास चला गया। कुलवंत दोपहर की रोटी बना रही थी। सिमर ने जाकर उसे पीछे से गले लगा लिया और अपना ढीला हुआ लंड उसके दोनों चूतड़ों में फँसाकर पीछे से घूटकर पकड़ लिया।
कुलवंत – “क्या कर रहा है, मुझे काम करने दे। माँ के साथ इतना प्यार कैसे आ जाता है आज दिन ढलते-ढलते।”
सिमर – “क्या मतलब दिन ढलते। मैं तो तुम्हें हमेशा प्यार करता हूँ, अब बात थोड़ी अलग है। और क्या बात है, तुम अब कभी टेंशन में हो। हैपी से बदला ले लिया, उसकी बहन चोदकर रह गया, उसका जीजा, उसकी बेटी तो मेरे साथ दिलप्रीत से पहले की सेट है। उसने ही तो मेरी दिलप्रीत से बात करवाई थी। वह तो मेरे नीचे कब की आ जाती, मैं ही उसे मना कर देता था।”
कुलवंत – “अच्छा, तूने मुझे बताया ही नहीं इसके बारे में। मुझे लगा तू भूल गया और अब तुझे अपनी बुढ़ी माँ की क्या जरूरत, सब कुछ मिल गया तुझे।”
सिमर अपनी माँ को अपनी तरफ घुमाकर, हाथ अभी भी उसके चूतड़ मसल रहे थे – “ऐसा कैसे भूल जाऊँ। देखा जाए कैसे उसे भी रगड़ता हैपी और उसके जीजा सामने, बस कोई बढ़िया मौका आने दे। और कोमल को तुम्हारे एक डोज की जरूरत है। कल भी देर से आई थी वह घर और थोड़े दिन पहले उसे मैंने सिगरेट का पैकेट फाड़ दिया था।”
कुलवंत – “हाँ, मुझे पता है। मेरा दिमाग ही सेट नहीं था, हैपी के जीजा के बारे में सोचती रहती थी। ह्म्म, उसे डोज दिए ज्यादा टाइम हो गया। तू एक काम कर, उसे मेरे कमरे में भेज दे, उसके साथ अभी डील करनी है क्योंकि कुलजीत बहनजी का फोन आया था, आज संदीप यहाँ आएगी, उनके गाँव से कोई आया है मिलने।”
सिमर – “ह्म्म, ठीक है लेकिन प्लीज ज्यादा सख्ती न दिखाना। तुम्हें पता है कितना दर्द होता है।”
कुलवंत – “बेटा, मुझे पता है दर्द होता है और बाद में 2-4 दिन बैठने में भी दर्द होता है। दर्द होना भी जरूरी है बेटा, नहीं तो जैसे ड्रग्स लेने वाले लड़कियाँ-लड़के अपनी लाइफ खराब कर लेते हैं। आज शराब पीने लगी है और सिगरेट, कल को और करेगी। तू जाकर भेज दे उसे।”
सिमर वहाँ से कोमल के कमरे में चला गया जहाँ वह बैठी अपनी किसी सहेली से फोन पर बात कर रही थी और सिमर का मुँह उतरा देखकर फोन साइड में रख दिया – “क्या हुआ, तेरा मुँह ऐसे क्यों उतरा हुआ है, क्या बात हुई अब।”
सिमर – “दीदी, कपड़े बदल लो। मम्मी अपने कमरे में तुम्हारा इंतजार कर रही हैं।”
कोमल – मतलब साफ था, कपड़े बदलना का हिंट पीटाई का होता था। तो मुँह लटकाकर खड़ी हो गई, तू क्यों उदास हुआ। मुझे पता मैंने गलत किया, बस अब रिजल्ट तो भुगतना पड़ेगा मुझे बेटा जी। और उसके बालों में हाथ फेरते हुए माथे पर एक किस किया और अपनी अलमारी से ढीला पजामा और टीशर्ट निकालने लगी।
सिमर – “हाँ जी, लेकिन तुम इस बार बच सकती थीं। मैं ही गया था मम्मी से पूछने कि क्या बात हुई, क्यों परेशान हैं और बीच में तुम्हारी गलतियों की बात छिड़ गई वहाँ।”
कोमल और सिमर भले लड़ते रहते थे एक-दूसरे से लेकिन प्यार भी काफी था। दूसरा शुरू से घर का माहौल ऐसा ही रहा कि दोनों बड़े क्लोज भी थे।
कोमल – “तू मुझे प्यार करता है न…? मेरी बात का जवाब दे।” साथ-साथ ही वह सिमर के सामने कपड़े बदलने लगी जो बड़ी बात नहीं थी। कमीज़ उतारकर उसने टीशर्ट पहन ली और सलवार और नीचे पैंटी उतारकर पजामा पहन लिया। पैंटी का कोई मतलब नहीं था। मम्मी हमेशा सलवार या पजामा नीचे करके गांड नंगी करके मारती थीं।
सिमर – “हाँ, इसमें क्या पूछने वाली बात है। तुम्हें पता है।”
कोमल – “तो फिर तू यह चाहता है कि मैं ड्रग्स करने लग जाऊँ या और गलत कामों में पड़ जाऊँ… नहीं न। सो इसलिए रिलैक्स हो जा या फिर एक काम कर, उतनी देर हेडफोन्स लगाकर पबजी गेम खेल। मैं आधे घंटे में आती हूँ।” और इतना कहकर वह अपनी माँ के कमरे की तरफ चली गई।
उसे पता था अगला आधा घंटा उसके लिए बहुत लंबा होने वाला था। अपनी गांड पर वह ऐसे ही हाथ फेरने लगी। उसे पता था वापस आने के समय उसकी गांड पर लातों का पिछला हिस्सा पूरा लाल होगा। 24 साल से ऊपर हो गई थी लेकिन अभी भी उसे कोई समस्या नहीं थी इसमें, पता था यह उसके भले के लिए है।
जब वह कमरे में गई तो कुलवंत कौर बेड के कोने में बैठी हुई थीं और पास ही लेदर सोल वाली सख्त जूती थी। कोमल की आँखों से पहले से आँसू आ गए थे लेकिन कुलवंत पर ऐसा कोई असर नहीं था। कुलवंत ने अपने पैर पर हल्का हाथ मारते हुए अपनी बेटी को इशारा किया तो कोमल अपना पजामा उतारकर साइड में रखकर अपनी माँ की गोद में लेट गई। एक हाथ से बेड की चादर और दूसरे से अपनी मम्मी की टांग घूटकर पकड़ ली। अगले करीब 20-25 मिनट कुलवंत कौर ने अपनी बेटी के चूतड़ों की खूब सेवा की। पहले हाथ से करीब 10 मिनट धीरे शुरू करते हुए वह धीरे-धीरे ताकत बढ़ाती गईं। दाहिने-बाएँ चूतड़ का कोई भी हिस्सा नहीं छोड़ती थीं।
जब कोमल वापस आई तो उसके दिमाग में यही था कि आज के बाद हाथ नहीं लगाना कि जिससे फिर मार पड़े। उसके चूतड़ थप्पड़ों और जूते से इतने गर्म हो गए थे कि उसका दिल करता था वह बर्फ वाले पानी में बैठ जाए। तवे से ज्यादा गर्म थी उसकी गांड। भले रोटी सेंक लो, उसे ऐसा लग रहा था।
जब वह कमरे में पहुँची तो सिमर वहीं था। अभी भी हेडफोन्स लगाए बैठा था, ऊँची आवाज में गाना सुन रहा था। अपनी बहन की रोने की आवाजें और उसके चूतड़ों पर पड़ते थप्पड़ों की आवाजें नहीं सुनना चाहता था वह। उसने आगे होकर गले लगा लिया और फिर माफी माँगने लगा लेकिन कोमल ने उसके होंठों पर किस करके उसे चुप करवा दिया – “बेटा, क्यों माफी माँगता है, आज के बाद कोई गलती नहीं करूँगी तेरी बहन।” मुझे पता है तुझे भी बुरा लगता है। दोनों काफी देर फिर किस करते रहे। सिमर ने कोमल को बेड पर पेट के बल लिटा दिया और उसका पजामा नीचे कर दिया। नीचे अपनी बहन के लाल सूजे चूतड़ देखकर उसे भी बुरा लगा। नॉर्मली तो वह सिर्फ कोल्ड क्रीम लगा देता था लेकिन आज पता नहीं क्या हुआ कि वह अपनी बहन के चूतड़ों के पास मुँह करके हल्का-हल्का फूंक मारने लगा जैसे उसका दर्द कम करने की कोशिश कर रहा हो। और कभी वह अपनी बहन की गांड पर धीरे-धीरे चूमने लगा। उसे खुद नहीं पता था क्या हो रहा है। कोमल भी सिसकियाँ लेती कुछ नहीं बोल रही थी। यह सब आज से पहले नहीं हुआ था। सिमर के होंठ जब उसकी गांड पर लगे तो उसकी आँखें मजा से बंद हो गईं। वह पेट के बल लेटी तकिया पकड़े रही। सिमर काफी देर चूमता रहा फिर हल्के से उसने कोमल की टांगें खोल दीं और खुद टांगों में लेट गया उसके पीछे ही। और कोमल की चूत पर जीभ रख दी। उसके मार से लाल हुए चूतड़ों को भी पकड़ थोड़ा अलग करके अपना मुँह अपनी बहन की गांड में डाल दिया। यह काम उसने अभी तक सिर्फ अपनी माँ के साथ किया था जिसे वह जान से ज्यादा प्यार करता था। कोमल को दर्द होने लगा जब सिमर के सख्त हाथ उसकी गांड पर लगे लेकिन अगले ही पल उसे गीला-गीला महसूस हुआ तो वह मजा से सिसक कर रह गई।
सिमर ने अभी तक अपनी बहन की गांड से अपना मुँह बाहर नहीं निकाला था जब तक कई बार चूत से पानी न निकल गया। वह तो जैसे कोमल को पीटाई का दर्द भुला देना चाहता था, हाँ यही तो वजह थी। इसलिए तो उसकी जीभ चूत से लेकर गांड की छेद तक जाती। चूत के अंदर तक जाती जीभ और निकलता रस, उसे कोई परवाह नहीं थी। जब साँस लेने के लिए थोड़ा रुकता तो गांड पर किस करने लग जाता। अभी तक वह लगा हुआ था जब तक कोमल को नींद न आ गई।
वह काफी थक भी गई थी बेचारी, पहले जूते से पीटी और फिर चूत की आग को उसके छोटे भाई ने अपनी जीभ से ही बुझा दी थी। कोमल तो सो गई, चादर के कोने में उसका कमरा बंद करके वह बाहर आ गया।
बाहर उसकी माँ बैठी थीं। कुलवंत – “सो गई कोमल?”
सिमर – “हाँ जी, नींद आ गई उसे, वह सो गई है।”
इतने में बाहर से अंदर आता सज्जन – “क्यों, क्या हुआ, आज मेरी बेटी इतनी जल्दी सो गई?”
कुलवंत – “कुछ नहीं, उसे डोज देना था जूते वाला, वह दिया आज।”
सज्जन – “ओ, जैसे तुझे ठीक लगे।” इतना कहकर वह अंदर जाकर टीवी पर न्यूज लगाकर बैठ गया।
रोटी-पानी खाकर रात के सारे काम निपटाकर टीवी देख रहे थे कि बाहर से मोटरसाइकिल के हॉर्न की आवाज आई। जब सिमर बाहर दरवाजा खोला तो संदीप और गोपी थे। संदीप चुपचाप अंदर चली गई। गोपी भी सिर नीचे करके – “अच्छा जी, मैं चलता हूँ, सुबह कॉलेज में मिलते हैं।”
सिमर – “आज अंदर रोटी-पानी खा ले जा। 1-1 बीयर लगानी है तो वह भी पड़ी है ठंडी।”
गोपी – “नहीं यार, फिर कभी। मैं तो बस दीदी को छोड़ने आया था। घर नाना आया हुआ है किसी जमीन के काम के लिए।”
सिमर – “चल ठीक है, मैं या डैडी छोड़ जाएँगे संदीप दीदी को, तू टेंशन न ले।”
अंदर जाकर संदीप कुलवंत से मिलकर सिमर के कमरे में चली गई और बाद में उसके पीछे, जहाँ पिछली रात जैसी सिमर ने सारी रात संदीप की चूत मारी।
अगले 40-45 दिन सिमर ने अपने यार गोपी की बहन संदीप को बड़े आराम से चोदा। कभी वह उनके घर चला जाता, कभी अपने घर या मोटर पर बुला लेता। जब भी फ्री होना होता तो गोपी को फोन कर देता। गोपी वहीं लेकर आ जाता। इतनी मेहनत का फल तो मिलना ही था। अगली डेट संदीप की मिस हो गई। फिर भी वह सिमर से चुदती रही। बाद में डॉक्टर ने भी कन्फर्म कर दिया कि वह प्रेग्नेंट हो गई है। जब यह खबर उसके सास-ससुर और घरवालों ने सुनी तो वह तो पागल ही हो गए। संदीप ने तो पहले ही अपने पति को बता दिया था लेकिन डॉक्टर की रिपोर्ट की प्रतीक्षा थी सबको जो बाद में कन्फर्म करवाई गई।
ऐसे ही जब मिठाई का डब्बा लेकर कुलजीत सिमर के घर गई तो दोनों बातें करने बैठ गईं।
कुलजीत चाय का घूँट भरते हुए – “तूने तो मेरी बेटी का घर बचा लिया।”
कुलवंत – “मेरी भी तो लगती है वह कुछ। और अपना क्या गया, घर की बात घर में रह गई। बेटी प्रेग्नेंट भी हो गई और किसी को पता भी नहीं चला।” क्यों, क्या कहती है।
कुलजीत – “हाँ, यह तो है, तूने सिमर को चुनकर बहुत अच्छा किया। वैसे है तेरा लड़का जानवर, कैसे मालिक बनाकर फिरता था मेरी बेटी का, उसे हुकुम तो ऐसे करता था जैसे महाराजा पटरानी हो। मैं कई बार देखा था, दरवाजा बंद भी नहीं करता था, संदीप को इतना पागल है तेरा लड़का सेक्स के पीछे।”
कुलवंत – “अच्छा, देख ले जा, कहती है तेरे पर चढ़ा दूँ उसे हा हा हा हा…”
कुलजीत – “नहीं, रहने दे, मुझे जरूरत नहीं।”
कुलवंत – “वैसे एक बात बता, मैंने देखा तेरे में भी बहुत बदलाव आ गया। मुझे दिखाई दे रहा है। कौन है वह, देख पाजी का मुझे पता वह तेरे साथ कुछ नहीं करते, फिर यह सब कैसे। बहुत अच्छी बात है तू भी कोई ढूँढ लिया, अब देख कैसे निखर गई है, शरीर भी कैसे टाइट लग रहा है।”
कुलजीत – “बड़ी कुट्टी है तू। तेरे से कुछ नहीं छुप सकता, हाँ होगा कोई, टाइम आए तो बता दूँगी।” वह कैसे बताती कि जब से सिमर उसकी बेटी को चोद रहा है, उस दिन से उसका बेटा गोपी उसके ऊपर भी रोज चढ़ता है। रात होते ही वह माँ से उसकी रंडी बन जाती है। 2 महीने से ज्यादा हो गया था, रोज गोपी उसे नंगी करता था। आगे और पीछे दोनों तरफ चोदता था। जो काम उसके पति ने नहीं किया था, उसके बेटे ने कर दिया था, उसकी गांड भी फाड़ दी थी। उसे दर्द तो बहुत हुआ था लेकिन मजा भी खूब आया था जब गोपी का मोटा लंड उसकी गांड में घुसा था। ऊपर जब गोपी उसकी मांस से भरी गांड पर थप्पड़ मारता तो वह पागल ही हो जाती। जब घोड़ी बनाकर गोपी अपनी माँ को बालों से पकड़कर एक हाथ से और दूसरे हाथ से उसकी गांड पर थप्पड़ मारता तो उसकी धक्के कुलजीत के अंदर तक जातीं।
अब तो उसे खुद आदत पड़ गई थी गांड में लंड लेने की। ऊपर गोपी का तरीका भी ऐसा था जहाँ उसके पति ने स्तनों के अलावा कभी और कुछ चूसा नहीं था, उसका बेटा जब उसे नंगी कर लेता तो सिर से लेकर पैरों तक चूसता, उसके शरीर के हर अंग पर जीभ फेरता, वहाँ चूमता, मुँह में लेकर चूसता। लेकिन सुबह होते ही दोनों ऐसे एक-दूसरे के सामने आते कि जैसे कुछ हुआ ही न हो। वैसे ही गोपी उसकी इज्जत करता, कोई गलत बात न करता और न ही कभी गलत जगह पर हाथ फेरता। दिन में गुस्से वाली, छोटी सी बात पर चिड़चिड़ाने वाली, गालियाँ काढ़ने वाली अपनी मम्मी का रात को राज करके बैंड बजाता। जो किसी दिन ज्यादा गालियाँ पड़ जातीं तो उस दिन अपनी माँ की छाती पर बैठ जाता और स्तन चुसवाता उसके से। उस दिन कुलजीत की हालत बुरी हो जाती, इतना रफ हो जाता गोपी। सुबह उठने तक उसकी बैंड बजी होती।
“चल, मैं चलती हूँ, गोपी घर वेट कर रहा होगा।” उसकी चूत फिर लीक होने लगी थी।
अगले कुछ दिन दोनों घरों में सब कुछ सामान्य ही चलता रहा। गोपी की बहन वापस अपने ससुराल जा चुकी थी और बहुत खुश थी। सास तो बस बच्चा ही चाहती थी। उनमें से किसी को भी कोई शक नहीं हुआ था। टाइमिंग इतनी परफेक्ट थी। गोपी भी चक्कर लगाता रहता था वहाँ, अपनी बहन के फूले हुए पेट को देखकर वह भी उत्साहित हो जाता। संदीप भी जब अकेली होती थी अपने छोटे भाई के साथ तो उसे तंग करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। अक्सर वह उसे कहती, "देख ले गोपी, तेरे यार का कमाल, उसका तो कितना छोटा है उम्र में, पर देख तेरी बहन का पेट कैसे फुला दिया।"
जिधर गोपी रोज अपनी मम्मी को चोदता, उधर सिमर अपनी माँ को। कुलजीत भी आँख बचाकर जब उसका पति सो जाता तो वह चुपचाप आकर गोपी के साथ लंबी पड़ जाती, जहाँ सारी रात उसकी टांगें अपने बेटे के कंधों पर रहतीं। पहले हर बात पर चिड़चिड़ जाने वाली कुलजीत अब शांत रहती थी। अपना पूरा ख्याल रखती थी, अब वह रोज चूत साफ करती, उसे पता था कि उसके बेटे को उसकी माँ की टांगों के बीच लंबा पड़ना कितना अच्छा लगता है।
सिमर के घर में माहौल वैसा नहीं था। वह तो राजा बना हुआ था। यह नहीं कि घर उसने रंडीखाना बना रखा था। अपने पिता की इज्जत करता था, पर सेक्स के मामले में हरामी हो गया था। अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखता, रोज जिम जाने की आदत तो पहले से ही थी। पर अब उसने डाइट भी ठीक कर ली थी। ऑयली और फ्राइड चीजों से दूर रहता। दूध, दही, अंडे, फल और भी कई ताकत वाली देसी चीजें उसकी डाइट का हिस्सा थीं।
ऐसे ही एक दिन दोपहर की रोटी खाकर आम की तरह सब अपने-अपने कमरे में लंबे पड़े हुए थे। सज्जन सिंह रोज की तरह गली में ताश खेलने चले गए थे। पिछले 4-5 दिनों से सिमर ने भी चूत नहीं मारी थी। दिलप्रीत अपनी फैमिली के साथ बाहर गई हुई थी। मम्मी के साथ करने का मौका ही नहीं मिला था उसे। वैसे भी मम्मी के साथ सेक्स की आग और खिंचाव बनाए रखने के लिए हमेशा नए-नए काम करता रहता, कभी उसे मोटर पर ले जाकर चोदता, कभी कार में।
आज जब दोपहर में देखा कि कोमल भी अपने कमरे में लंबी पड़ी है तो वह चुपचाप अपनी माँ के पास जाकर लंबा पड़ गया। कुलवंत कौर हल्की-हल्की नींद में थीं। सिमर जाकर अपनी मम्मी को चिढ़ाते हुए हिलाते हुए बोला, "मम्मी उठो, लंबे पड़ते ही नींद आ गई तुम्हें?"
कुलवंत: आँखें मलती हुई सीधी लंबी पड़ी हुई, "नहीं बेटा, क्या हुआ तुझे?" सोने की घड़ी।
सिमर अपनी मम्मी की सलवार के नाड़े को अंदर से बाहर खींचते हुए, "हम्म, नहीं सोना नहीं, चलो आओ 1-1 राउंड हो जाए।"
कुलवंत उसके माथे को चूमकर उसे अपने ऊपर खींचते हुए, "ओके वो तो ठीक है, पर तेरा डैडी और कोमल कहाँ हैं?"
सिमर: "डैडी तो बाहर ताश खेलने चले गए और कोमल सो रही है।"
कुलवंत उठते हुए अपना कमीज़ और नीचे ब्रा उतार देती है। नाड़ा तो उसके बेटे ने पहले ही ढीला कर दिया था, उसने कूल्हे ऊपर करके सलवार के साथ-साथ अपनी पैंटी भी उतार दी। मांसल शरीर की मालकिन पूरी नंगी पड़ी थी, जिसे देखते ही लंड फुंकारे मारने लग जाता। ऐसी ही औरत जिसे जप्ही डालकर भी मजा आता, भरा हुआ शरीर था उसका।
सिमर अपनी माँ को ऐसे पूरी नंगी टांगें चौड़ी करके पड़ी देख मूड में आ गया। अपने शरीर का ख्याल भी पूरा रखती थी, कभी शरीर पर बाल नहीं होने देती थी, चाहे चूत हो, गांड, टांगें या शरीर का कोई भी हिस्सा। चूत तो ऐसे गंजी की थी जैसे उसके गाल हों। गांड उसकी पर एक भी निशान नहीं था, न कोई पिंपल, पूरी गोरी-चिट्टी बिना किसी दाग के।
सिमर बिना टाइम गँवाए सीधा अपनी माँ पर टूट पड़ा। उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे हाथ से उसकी चूत मसलने लगा। यह दोहरा हमला मजा दे रहा था। जैसे ही सिमर कुलवंत के निप्पल चूसता, फिर होंठों में लेकर खींचता और साथ ही उसकी चूत में 2 उँगलियाँ डाल हल्की सी टेढ़ी करके अंदर चूत के दाने को छेड़ता तो कुलवंत उसे अपने सीने में घुट लेती।
करीब 5 मिनट में ही सिमर ने अपनी माँ की चूत के दाने को छेड़-छेड़कर उसका पानी निकाल दिया। कुलवंत अभी साँस ही ले रही थी कि सिमर उसके ऊपर चढ़कर 69 पोजिशन में उसके मुँह में अपना लंड ठूँस दिया और खुद उसकी टांगें चौड़ी करके चूत और चूत के आसपास चूमने लगा। दोनों माँ-बेटे काफी देर ऐसे ही एक-दूसरे के शरीर से खेलते रहे। करीब 30-40 मिनट एक-दूसरे को खुशी-खुशी चूसने के बाद कुलवंत ने अपनी टांगें अपने बेटे के कंधों पर रख लीं। सिमर ने भी लंड चूत पर रगड़ते हुए धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू कर दिया। इतनी बार ले चुका था फिर भी उसे अपनी माँ की चूत टाइट ही महसूस होती थी।
कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद कुलवंत सिमर के ऊपर आकर गांड हिलाने लगी। सिमर उसके स्तन पकड़-पकड़कर खींचता नीचे से धक्के मार रहा था। इस पोजिशन में हमेशा उसकी चूत में खिंचाव पैदा होता था पर फिर भी उसे लंड पर चढ़ना पड़ता था। उस दिन वह हार गई जब सिमर ने उसे बेड पर लंबा किया, हल्की सी टेढ़ी करके उसकी एक टांग उठाकर कंधे पर रख ली, दूसरी टांग नीचे ही थी और उसके पैरों पर बैठकर लंड उसकी चूत में पूरी तरह घुसेड़ दिया।