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Kon sa language me likhu batao aap sab jispar 5 vote aa jayega uspar likhunga

  • Hindi

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  • Hinglish

    Votes: 45 68.2%
  • Khanai pasand aa raha hai ki nahi

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bruttleking

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Bhai ye suru me he hai aage incest hai aage simar apni maa ka badla lega jabardasti karne par
Suru ka padh ke to kahi se bhi nahi laga ki Kulwant ke saath jabardasti hui ho mujhe story se koi pareshani nahi hai agar tag incest+adultery ka hota to mai na padhta agar koi baat buri lagi ho to uske liye sorry
 
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bruttleking

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♣️ Update 2 ♣️

ठंड के दिन शुरू हो चुके थे। स्कूल-कॉलेज गुरपुरब की वजह से बंद थे। सुबह का खाना खाकर सिमर चादर लेकर अपनी छत वाली मंजी पर लेट गया। उसकी मम्मी नहाने बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी भी छत पर दुपहरे में बाल सुखाने आ गई।

कोमल अपने कमरे में टीवी देख रही थी।

सिमर को अभी नींद नहीं आई थी कि मम्मी के पैरों की आवाज से उसकी नींद खुल गई। उसने चादर हल्का सा हटा कर देखा – मम्मी ने दुपट्टा नहीं लिया था। हरे रंग का सलवार-सूट पहना था। 36 के मम्मे जब हिलते तो कमाल लगते।

तभी पड़ोसी के दरवाजे खुले और हैपी पड़ोसी का लड़का 32-33 साल का आ गया। वह भी छत पर आ गया। हैपी भी खेती करता था। उसकी शादी को 5 साल हो गए थे।

गाँव की काफी भाभियाँ उसके साथ सेट थीं। जो औरत एक बार उसके काबू में आ जाती, उसकी खूब तसल्ली करता। भले नशा करने से उसका शरीर सूख गया था, लेकिन सेक्स के मामले में आज भी कायम था।

गुजारा मुश्किल से चलता था और घर पुराने टाइप का खुला था। सेक्स में पूरा हरामी था। जब अपनी बीवी की सील तोड़ रहा था तब उसकी चीखें पूरे मोहल्ले ने सुनी थीं।

गाँव वालों को पता था – शाम 7 बजे के बाद गाँव में शांति हो जाती है। इसलिए उसकी बीवी की चीखें सुबह 4 बजे तक सुन-सुन कर मोहल्ले की हर औरत उस रात अपने पति से चुद चुकी होती।

कुलवंत बातें करते-करते उस तरफ चली गई।

हैपी – “क्यों चाची, क्या हाल है? मनाया जा रहा गुरपुरब?”

कुलवंत – “हाँ, अभी घर का काम करके फ्री हुई हूँ। बस गुरुद्वारे जाने की तैयार हूँ। तेरी मम्मी कहाँ है, गुरुद्वारे चली गई?”

हैपी – “हाँ सब कब के चले गए। कह रहे थे गुरुद्वारे सेवा करनी है।”

कुलवंत – “हाँ मैं भी लेट हो गई। घर के काम खत्म करते-करते। मैं भी जाना था सेवा करने, लेकिन घर के काम कभी खत्म नहीं होते।”

हैपी – “अब तो चाची बहुत लेट हो गई। इधर ही आ जाना, दीवार फाँद कर मेरी सेवा कर दे। बहुत अकेला लग रहा है।”

हैपी के साथ भी कुलवंत की पुरानी दोस्ती थी। दीवार फाँद कर वह दिन में भी कई बार आ जाता जब मौका मिलता।

कुलवंत हँसते हुए – “हट बेशर्म कुत्ते। धीरे बोल, पीछे मेरा बेटा सो रहा है। वह सुन न ले। और नीचे मेरी बेटी है, टीवी देख रही होगी, ऊपर न आ जाए।”

हैपी – “कोई नहीं, यह नहीं उठेगा। सोते-सोते हम काम निबटा लेंगे। किसी को पता नहीं लगेगा। तू टेंशन न ले, तू तो डरपोक है। दिल भी करता होगा न। चल ज्यादा नखरे न कर, आ जा छत वाले कमरे में। मेरे घर वाले भी जल्दी नहीं आएँगे। गुरुद्वारे के बाद सीधे खेत चले जाएँगे।”

कुलवंत ने मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखा और धीरे से आवाज लगाई। सिमर ने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे यकीन हो गया कि वह सो गया है। कुलवंत ने हैपी की तरफ इशारा किया और 3 फुट ऊँची दीवार फाँद कर दूसरी तरफ चली गई। हैपी ने जाते ही उसे बाँहों में लिया और किस करने लगा। साथ ही उसके चिताड़ को मसलने लगा।

कुलवंत अभी भी हल्की टेंशन में थी। बीच-बीच में हैपी को किस करती और मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखने लगती कि कहीं वह उठ न जाए। कभी सिसकी लेने लगती। आखिर हमेशा की तरह उसकी अंदर की आग जीत गई और बेटे वाला प्यार थोड़े समय के लिए हार गया।

फिर कुलवंत और हैपी दोनों छत वाले कमरे में आ गए। कमरा स्टोर जैसा था जहाँ घर का फालतू सामान पड़ा था। छत पर बैठने के लिए 2-3 कुर्सियाँ और एक लंबा मेजा रखा था। कमरे में आते ही कुलवंत को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर रस चूसने लगा।

कुलवंत वैसी ही औरत थी जिसका रस पीने को पूरा गाँव तरसता था, लेकिन यह रस सिर्फ कुछ खास लोगों को ही मिलता था। पता नहीं कितनी देर दोनों किस करते रहे। जब कुलवंत का साँस लेना मुश्किल हो गया तब उसने हैपी को जोर से धक्का मारा और जोर-जोर से साँस लेने लगी।

कुलवंत – “मुझे मार डालेगा हरामी… जान ही निकाल दी।”

हैपी हँसते हुए – “जान तो तेरी जरूर निकालूँगा लेकिन तुझे चोद कर।”

हैपी ने कुलवंत के सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

कुलवंत – “यह क्या कर रहा है? मुझे पूरी नंगी क्यों कर रहा है? कोई आ जाएगा। सिर्फ सलवार नीचे कर और चूत मार जल्दी से।”

हैपी – “कोई नहीं आएगा। तू क्यों टेंशन लेती है। मेरी मम्मी और बीवी खेत चली जाएँगी। कोई नहीं आएगा।”

कुलवंत को भी पता था हैपी के इरादे का। हैपी ने अफीम खा रखी थी, आँखें लाल थीं। इसे जल्दी जाने नहीं था। यही सोच कर आज गुरुद्वारे भी नहीं जाना था। उसने फोन निकाला और अपने पति को लैंडलाइन पर फोन किया। बेटी ने फोन उठाया। उसने कहा कि वह अपनी स्कूल की सहेली के साथ बाजार जा रही है, शाम तक आएगी।

अब वह खुल कर मजा लेने लगी। उसे कोई टेंशन नहीं रही। इस बात से अनजान कि उसका बेटा जो पहले लेटा था, अब दीवार फाँद कर कमरे के बाहर छुप कर देख रहा था। उसे पता था – मम्मी अब जल्दी बाहर नहीं आने वाली।

सिमर अब दरवाजे के पास पहुँच चुका था और अंदर झाँकने लगा। तभी कमरे से कुछ गिरने की आवाज आई।

सिमर ने आगे झाँक कर देखा तो छत पर मम्मी का सलवार-कमीज़ और पैंटी पड़ी थी। ब्रा उन कपड़ों में नहीं दिखी। उसने सावधानी से बिखरे कपड़ों को उठा कर देखा – ब्रा नहीं थी।

हैपी पूरा कमीना था। औरत को काबू में कैसे करना, उसे अच्छे से आता था। सिमर ने अंदर झाँक कर देखा – हैपी भी नंगा हो चुका था और मम्मी के साथ लिपटा हुआ था।

सिमर को यह देख कर पता नहीं क्यों बहुत सुकून सा मिला। हैपी कुलवंत के भरे हुए शरीर का दीवाना था। कुलवंत वैसी ही थी। हैपी उसके गालों पर किस करता हुआ नीचे निप्पलों पर आ गया।

उसके निप्पल मुँह में लेकर खींचने लगा। जिससे कुलवंत के अंदर दर्द और मजा दोनों की लहर दौड़ गई। उसने हैपी के सिर को जोर से पकड़ लिया। हैपी कुलवंत के मम्मों के साथ मस्ती करता रहा।

कभी निप्पल चूसता, कभी मुँह से खींचता, और दूसरे हाथ से कभी-कभी पूरा जोर लगा कर निप्पल मसल देता। जिससे कुलवंत के शरीर में दर्द की लहर दौड़ जाती। कुलवंत को दर्द भी होता लेकिन मजा भी आता।

आधा घंटा और मम्मों के साथ खेलने के बाद वह पेट को चूमता हुआ नीचे बैठ गया और चूत चूसने लगा। सिमर कमरे के बाहर खड़ा चुपचाप सब देख रहा था और मजा ले रहा था।

यह सब कुछ पहले भी पता नहीं कितनी बार देख चुका था। अपनी माँ की चूत देख कर उसने अपने सूखे लंड पर जीभ फेरी। उसे पता था मम्मी अपनी चूत पूरी तरह साफ रखती है।

अपनी माँ की चूत पर उसने कभी बाल नहीं देखे। कुलवंत अपनी चूत का पूरा खयाल रखती थी। कई ब्यूटी क्रीम, दूध की मलाई और कई चीजें लगाती थी।

कुलवंत ज्यादा देर खड़ी नहीं रह सकी। उसकी लतें जवाब दे गईं। उसका पानी निकलने वाला था। वह पास पड़ी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर पैर फैला कर बैठ गई।

कुर्सी की बाजुएँ नहीं थीं इसलिए कुलवंत के पैर फैलाने में हैपी को कोई दिक्कत नहीं हुई। वह उसके पैरों में बैठ गया और चूत चूसने लगा। चूत के दाने को मुँह में भर कर ऐसे चूस रहा था जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ के निप्पल चूसता है।

थोड़ी ही देर में कुलवंत का पानी निकलने लगा। हैपी ने थोड़ा सा चाटा और पीछे हट गया। कुलवंत लगभग बेहोश हो गई थी। हैपी उसके बालों को देख कर हँसता हुआ अपना कोई 7.5 इंच का लंड हिला रहा था।

उसने कुलवंत को थोड़ी देर साँस लेने दिया और फिर दीवार से पकड़ कर उसका सिर ऊपर करके अपना लंड उसके दाने के पास कर दिया।

सिमर ने देखा – मम्मी ने बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर हैपी का लंड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। सिमर ने देखा कैसे मम्मी पूरी एक्सपर्ट है। एक हाथ से बेस पकड़ रखा था और चूसे मार रही थी।

कुछ 2-3 मिनट ही चूसे मारे थे कि हैपी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और कुलवंत को कुर्सी के सहारे झुका दिया। चूत में एक जोरदार झटका मारते हुए अपना लंड पूरा सिमर की माँ की चूत में पेल दिया।

सिमर की माँ की पतली कमर पकड़ कर हैपी ने थोड़े अपने पैर फैला कर पोजिशन सेट की और तूफानी झटकों से सिमर की माँ को चोदने लगा।

झटकों की स्पीड बहुत तेज थी। इतनी कि कुलवंत के दर्द और मजा वाली चीखें निकलने लगीं। उसके दिमाग में अब अपने बेटे का कोई खयाल नहीं था। वह तो मजा ले कर चुद रही थी।

हैपी के पट्ट जब पूरे जोर से कुलवंत के गोल-मटोल भरे हुए गोरे चिताड़ से टकराते तो जो आवाज पैदा होती, वह हैपी का जोश और बढ़ा देती। हैपी फिर टॉप तक लंड बाहर निकाल कर पूरे जोर से झटका मारता। बाहर खड़ा सिमर अपना लंड मसलते पूरा मजा ले रहा था अपनी माँ को चुदते देख कर।

कुछ 10 मिनट हैपी ने पूरे जोर से इसी पोजिशन में ठोक कर कुलवंत को चोदा। झटके मारते-मारते ही पास पड़े तकिए को नीचे डाल दिया। जिसे देख कर कुलवंत को एक सेकंड भी नहीं लगा समझने में कि हैपी क्या करना चाहता है।

जैसे ही हैपी ने लंड बाहर निकाला, कुलवंत नीचे घोड़ी बन गई। गांड ऊपर कर ली। तकिया अपने घुटनों के नीचे रख लिया ताकि घुटने छिल न जाएँ। वैसे तो फर्श पर मार्बल लगा था, फिर भी इतने जोर के झटके पड़ने वाले थे कि तकिया न होता तो घुटने लाल हो जाते।

हैपी सिमर की माँ की गांड के पीछे आया और 4-5 थप्पड़ पूरे जोर से मारे। जिनकी आवाज भी काफी आई और कुलवंत को दर्द भी काफी हुआ लेकिन वह बोली कुछ नहीं। कुलवंत के गोरे चिताड़ 5 थप्पड़ों में ही पूरी तरह लाल हो गए।

हैपी का यही स्टाइल था। इससे एक तो वह रिलैक्स हो जाता क्योंकि एक ही पोजिशन में चोदता तो 2-4 मिनट में उसका काम हो जाता। उसने कुलवंत जो सीधी घोड़ी बनी थी उसका सिर नीचे की तरफ कर दिया और दोबारा पूरे जोर से चोदने लगा। माँ अंदर लंड ले कर मजा ले रही थी, बेटा बाहर खड़ा देख कर मजा ले रहा था।

10-15 मिनट बाद हैपी ने कुलवंत कौर को सीधा किया और उसके पैर उठा कर अपने कंधों पर रख लिए और उसके ऊपर पूरा झुक गया। अब कुलवंत के घुटने उसके कंधों से लगभग टच हो रहे थे। हैपी ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया था।

हैपी ने अपने पीछे की दीवार से पैर टिका लिए। सिमर यह पोजिशन देख कर एक बार तो घबरा गया। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई क्योंकि अब मम्मी पूरी तरह हैपी के काबू में थी। यह वो पोजिशन थी जिसमें से बचना अब मुमकिन नहीं था।

इस पोजिशन में हैपी सिर्फ 10 मिनट ही टिक सका लेकिन जितने झटके मारे, कुलवंत की बस करवा दी। कुलवंत के मुँह से भी निकलने लगा था – “हाय हैपी छोड़ दे बस कर… मम्मी हाय आह्ह्ह… सीईई…” और जब हैपी का काम हुआ तो कुलवंत ने सुकून की साँस ली। हैपी साइड में गिर पड़ा। कुलवंत कौर भी पैर फैला कर थोड़ी देर ऐसे ही पड़ी रही।

कुलवंत 5 मिनट बाद उठी और हैपी के ढीले पड़े लंड से कंडोम उतार कर पास प्लास्टिक बैग में डाल दिया।

तभी सीढ़ियों की आवाज आई। सिमर ने देखा हैपी का जीजा सुक्खा पोर्च में चढ़ आया। “वाह भाभी मजा आ गया।” सुक्खा हैपी का बड़ा जीजा था। वह कुलवंत को भाभी कहता था।

सिमर का दिल घबरा गया। पूरी तरह कि मम्मी नंगी पड़ोसी के लड़के के साथ पकड़ी गई। लेकिन मम्मी को नंगी पकड़े जाने से ज्यादा अच्छा लगा कि उसका लंड देख कर मम्मी का पानी निकल गया।

कुलवंत पूरी तरह घबरा गई थी। उसका रोना निकल गया। सिसकते हुए बोली, “प्लीज पाजी किसी को मत बताना, मुझे माफ कर दो।” उसने मुड़ कर हैपी की तरफ देखा – वह तो बस मुस्कुरा रहा था। कुलवंत समझ गई कि यह साजिश दोनों ने मिल कर रची है।

कुलवंत – “हैपी कुत्ते मुझे जान से नहीं मारता तो मैं चिल्ला देती।”

हैपी – “चिल्ला दे, तेरे कपड़े बाहर पूरी छत पर बिखरे पड़े हैं। नंगी तू यहाँ खड़ी है। क्या कहेगी लोगों को?”

हैपी देख चाची ज्यादा पाखंड न कर। वैसे भी अब तू कुछ कर नहीं सकती।

कुलवंत भी समझ गई कि अब बहस करने से कोई फायदा नहीं। वक्त उसके खिलाफ चल रहा था आज। सेक्स तो उसे बहुत पसंद था लेकिन आज जो हैपी ने किया वह गलत था।

इसके बाद सिमर ने देखा – पूरी दोपहर मम्मी ठुकती रही। हैपी और उसके जीजा ने पूरी रूह से कुलवंत को चोदा। सुक्खा का लंड कुछ खास नहीं था लेकिन टाइमिंग ठीक थी। कभी चूत में कभी गांड में – यह काम शाम 7 बजे तक चलता रहा।

कुलवंत जब बाहर आने लगी तो सिमर वहाँ से खिसक लिया। जब वापस मुड़ा तो देखा कोमल उसके पीछे खड़ी थी। हैपी जैसी ही पूरी पसीने से भीगी हुई। उसका हाथ उसकी सलवार में था। पता नहीं कब से वह वहाँ खड़ी थी।

सिमर ने उसकी हालत देखी और समझ गया कि उसने भी खुद पर काबू पा लिया था। जल्दी से आगे हो कर उसका ढीला नाड़ा बाँध दिया – “दीदी तू नीचे चली जा जल्दी, मम्मी बाहर आ रही है।”

कोमल ने सिर्फ सिर हिलाया और नीचे चली गई। वह असल में सिमर को देखने आई थी कि कब से सो रहा है, उसे उठा दे। लेकिन जब सिमर को पड़ोसी की दीवार से सटा देखा तो वह भी पीछे आकर देखने लगी।

हैपी और उसका जीजा नीचे चले गए थे। सिमर ने देखा शायद कोई और पड़ोसी की औरत ऊपर आने लगी थी। अपनी माँ के बिखरे कपड़े उसने इकट्ठे किए। आगे हो कर अपनी माँ जो पूरी दोपहर चुदाई के बाद नंगी ही बाहर आ रही थी, उसके सामने आ गया।

इससे पहले कुलवंत कुछ समझ पाती या बोल पाती, सिमर बोला – “मम्मी तेरे पास कपड़े पहनने का टाइम नहीं, जल्दी यह चादर लपेट ले। नीमल आंटी ऊपर आ रही है, मैंने उन्हें सीढ़ी चढ़ते देखा।”

कुलवंत ने जल्दी से वैसा ही किया और नीचे चली गई। शर्म तो उसे बहुत आई लेकिन सिमर की समझदारी देख कर राहत की साँस ली। उसने एक बार मुड़ कर देखा – सिमर उसके कपड़े उठा कर नीचे आ रहा था।

नीचे आ कर कुलवंत अपने कमरे में चली गई। आज उसे कई दिनों बाद बुरा लगा सेक्स कर के। उसने कभी सेक्स के लिए मना नहीं किया जब कोई ठीक तरीके से कहता था।

ऐसा नहीं था कि वह हर आने वाले के लिए सलवार उतार कर लेट जाती। उसका अपना स्टेटस था गाँव में, स्कूल में। हर कोई उसे हाँजी-जी कह कर बुलाता। इसलिए उसने हमेशा दिमाग से काम लिया।

उसके पति को भी कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वह खुद कई बार ले कर जाता था। उसे पता था कि वह कुलवंत कौर को ठंडा नहीं कर सकता।

इसलिए कई बार जब कुलवंत को शहर के होटल में अपने यार से मिलना होता तो वह खुद कार में ड्रॉप करता और खुद ले कर आता। कुलवंत भी अपने पति को पूरी इज्जत देती। कभी ऊँचा नहीं बोलती, कभी बुरा फील नहीं करवाती।
Isme kahi se bhi nahi lag raha hai ki Kulwant ke saath jabardasti hui hai jabki Kulwant ek number ki rundy hai jisme uska pati bhi uska saath deta tha usko uske yaar se chudwane le jata tha jise aapne jabardasti majboori ka naam diya hai
 
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tera hero

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Isme kahi se bhi nahi lag raha hai ki Kulwant ke saath jabardasti hui hai jabki Kulwant ek number ki rundy hai jisme uska pati bhi uska saath deta tha usko uske yaar se chudwane le jata tha jise aapne jabardasti majboori ka naam diya hai
Bhai aap phele pura story padh lo uske baad bolna kya galat hai kabhi bhi adha audhra gyan dangerous hota hai isliye phele story padh lo
 
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tera hero

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Update 19

घर आके जब उसने सारी बात अपनी बहन Tanu को बताई तो वो भी खूब हँसी...
Tanu: Hehehe hum toh tujhe dar ke maare nahi bataye the, humein toh darr tha pata nahi tu kaisa react karega.
Aman: Nahi yaar mujhe toh pehle se pata tha jab chacha aata tha mummy ko chodne... sorry...
Tanu: Arre nahi nahi koi gal nahi, jab akela hota hai toh jaise marzi baat kar sakta hai tu...
Aman: Theek hai main toh har baar sorry bolta nahi toh tera thappad taiyaar rehta hai...
Tanu: Nahi marti tere aaj toh... haan agar kisi ke saamne kuch galat bola toh fir mauke ke hisaab se pad jaati tere...
Tanu: Chal aa ja hum roti kha lete hain, daddy ne toh chacha ke saath jaana hai... woh toh aaj chachi ke haath ki fresh malai wali khaayenge...
Aman: Haan chal... chacha toh khud ready baitha hoga... woh toh khud daddy ko bula rahe the.
Tanu: Haan mujhe pata hai yeh first time nahi hai... yeh log toh roz aate-jaate rehte hain ek-doosre ke ghar... jab daddy bol ke jaate the ki aaj motor pe sona hai, raat ko paani lagana hai toh woh sirf bahana hota tha ek-doosre ke ghar jaane ka.
Rasoi mein teeno roti khaane baith gaye. Tanveer jaan-bujh ke apni maa ko Aman ke saamne chhedti hui...
Tanu: Mummy kal tera beta teri nanad se milne ja raha hai, zara desi ghee daal ke de do isko daal mein...
Jaspreet: Haan daal dungi mere puttar ko strong banana hai humein... aur yeh achhi baat hai ek-doosre se milenge toh dono mein understanding aur badhegi...
Tanu: Haan woh toh hai par saath uske saale sahab bhi aa rahe hain, teri nanad bol rahi thi main akeli nahi aaungi... agar tera bhi dil kare toh tu bhi saath chali ja kal, uski saali ko tu busy kar dena, yeh kaam nikaal dena utni der...
Aman dono ki baatein sunke sharma gaya, uske ghar mein kabhi itni openly baat nahi hoti thi "Didi kya yaar" bolke fir sar jhuka ke phone mein lag gaya...
Jaspreet: Arre kyun tang kar rahi hai mere munde ko... aur main wahan jaake kya karungi... tu chali ja...
Tanu: Haan ab itni toh qurbani deni padegi apne chhote bhai ke liye...
Aman jo ab poori baat samajh gaya tha ki apni chalak behan aur uske saale se hi gaand marwa chuki maa ke saamne shareef ban ke nahi chalega, woh bhi rang mein aa ke bol pada "Achha ji mere kandhon pe bandook kyun chala rahi ho didi... tum dono maa-beti badi tez ho, us din mere bahane se mummy ko mere saale se takkar lagwa aayi, kal tum chalna ve... mujhe toh meri aali haath nahi lagne deti aaj tak."
Jaspreet: Koi na chala lene de, tere hi fayde rahenge isme bhi...
Udhhar dono bhai sharaab peene baith gaye the... chachi ke pair toh zameen pe nahi lag rahe the, kitne din ho gaye the aise ghar mein aaram se chudwane ke... motor pe chudna use bilkul pasand nahi tha, motor pe pichhe baith ke dhool-mitti chilla deti thi...
Chachi rasoi se chacha ko awaaz deti "Ah suno aur chicken le aao main fry kar deti hoon aur..."
Chacha jab rasoi se fry chicken lene aaya toh chachi usko rok ke boli "Tum khud bhale laga lo par paji ko zyada sharaabi mat bana dena, nashe mein theek se malish nahi hogi un se..."
Chacha: Haan theek hai jaise tu kahe meri sarkar... chacha ko nasha chadhne laga tha...
Chacha: Saara kaam set hai, tu gas band kar de, ja naha le taiyaar ho ja... fir andar kamre mein chalte hain... bachchiyan so gayi hain kya?
Chachi: Haan apne kamre mein hain, roti kha li hai... par tum motor pe mat jaana aaj...
Chacha: Nahi udhar aaj line clear nahi hai...
Chachi: Okay dekh lo teri marzi, agar mana karna hai toh kar de...
Chacha: Nahi koi gal nahi, agar meri baat nahi bani udhar toh Aman ka viaah aa gaya ve, paji ko fir time nahi milega... main 2 peg zyada laga leta hoon uske saath neend aa jayegi, tu tension free hoke malish karwa le...
Chachi: Haan yeh better rahega, nahi toh tere se meri cheekhein sun nahi hongi... tujhe pata hai tere bhai kitni buri tarah malish karte hain. Unka haath tere se bhari hai, jab lagate hain toh poori ragad dete hain.
Chacha: Haan par awaaz kam rakh... achha hai bachchiyan upar so gayi hain.
Aisa bol ke woh chicken ki plate leke bahar aa gaya... ek baar upar dekha, dusri manzil pe lights band thi matlab bachchiyan so gayi hain...
Mintu: Kya hua aaj kyun thanda piya...
Chacha: Haha aisa bol ke woh paas baith ke apna peg strong bana liya...
Mintu: Mere wala kam rakh, main aaj jagna hai jo kaam karne aaya woh bhi toh karna... aur tu aaj ghar hi ruk ja... Aman ka mood set nahi hai aaj...
Chacha: Haha koi na... tum befikr raho...
Aise hi dono baatein karte rahe aur peg peete rahe. Aadhe ghante baad Aman ki chachi naha ke taiyaar ho aayi. Usne naha ke white fulla suit pehna tha. Neeche jaan-bujh ke tang karne ke liye black matching bra-panty set pehna tha ab.
Paramjeet (Aman ki chachi): Chal ab bas karo, aur kitni peeni hai...
Mintu: Uske taraf dekh ke apne lips pe jeebh pherte hue haha bas ho gaye... tu chicken bahut tasty banati hai, roti kha ke swad aa gaya...
Paramjeet: Haha mardon ki yahi problem hai, dusri aurat ka sab swad lagta hai apni biwi ka nahi...
Mintu: Hahaha yeh le uske taraf peg aage kar, laga le ek thakaan utar jaaye...
Paramjeet apne husband ki taraf dekh ke peg le leti hai, jo ab tak poora dhutt ho chuka tha, aankhein band ho rahi thi...
Ek hi ghunt mein saara peg kheench leti hai... aur jaldi se Mintu ke haath se fry chicken ki taang leke khaane lagti hai...
Paramjeet: Chal ise andar hi leta dete hain, nahi toh yahin so jayega...
Aur Paramjeet apne pati ko andar le jaati hai...
Side mein bed pe leta ke jeth ko gale lagati hai aur baahon mein jakad leti "Kya baat bhool gaye, kitne din ho gaye aaye hi nahi... mera dil bhar gaya tera."
Mintu: Kya baat karti hai, tere se dil kab bhar sakta... aisa bol ke uske suit ko kone se pakad upar kar utaar deta hai...
Isse pehle woh kuch karta Paramjeet khud haath peeche karke bra utaar deti hai "Nahi nahi yeh bra ka hook mat tod dena" teri buri aadat hai, drawer mein kitni bra padi hain jinke hook tode tune...
Mintu has has ke usko nipple se pakad apni taraf kheench leta... jisse Paramjeet ki dard-maza bhari siskari nikal jaati hai...
"Owww ahhh... see ouch" ahhh hayyy dheere meri jaan itni zor se mat maslo dard hota hai...
Mintu bina bole uske mummon pe kheench thappad maarta "Achha maza nahi aata piya."
Thappad ke saath woh uchal gayi... yeh sab ki aadi thi woh... jaan-bujh ke dard ka drama kar rahi thi jeth ko aur josh dene ke liye... itna ki dard toh woh aaram se seh leti thi... aage bhi jab jeth raat bhar lagata tha toh subah tak nipples itne suje rehte ki bra bhi nahi pehan paati...
Thodi der khade rehne ke baad dono kapde utar ke bed pe aa gaye, jahan ek taraf Mintu ka bhai behosh soya pada tha...
Paramjeet: Aaj ise ghar nahi bheja, yahan kyun rok liya... aur fir lund muh mein leke chusne lagi...
Mintu: Usi ka kal Aman bahar ja raha hai apni hone wali se milne, isliye jab aaya sab jaag rahe the...
Mintu: Seee bas kar aa ja ab tu upar mere muh pe baith ja... teri chhoti chut chusne de...
Paramjeet has has ke dono taangein dono taraf karke chaati pe baith jaati hai aur Mintu usko kheench muh pe bitha leta hai...
Paramjeet sharaarat karte hue jeth ke muh pe gaand hilati "3 bachchon ki maa hokar ab kahan reh gayi meri chhoti chut" ahh see aur maza lete hue gaand halka hilane lagi...
Mintu ko hamesha Paramjeet ko chod ke alag maza aata tha. Kyunki woh khud lamba-chauda tha, kad 6 feet se upar... aur jab bhai ki biwi ko neeche leta toh lagta jaise 18 saal ki ladki ko chod raha ho...
Uska shareer Jaspreet se zyada patla tha. Jaanghon pe haath pherte hue lagta jaise jawan mutiyar ke saath khel raha ho.
Paramjeet jab jeth ke muh pe baithi chut-gaand chuswa rahi thi aur lund se khel rahi thi, tab nazar pati pe padi jo ab aankhein khol chuka tha. 1 ghante mein nasha kam ho gaya tha, waise bhi woh sharabi hone ka drama karta tha. Kabhi-kabhi aisa hota tha woh natak karta aur paas baithi biwi ko chudte dekhta.
Paramjeet pati ko dekh has padi aur aankh maar ke muh fulla ke boli "Tere lund se zyada mota ve tere bade bhai ka lund."
Thodi der baad Mintu ne usko utaar ghodi banaya, peeche aa ke chuttad pe kheench thappad maarta mast karta, lund set kar ek jhatke mein andar dhakel diya... Paramjeet ki cheekh nikal gayi... raat hone se awaaz unchi lagi, paas soye pati ko bhi... pati ne biwi ka haath ghutne se pakad liya...
Paramjeet bina parwah "Ahhh hayyy kheench-kheench ke maro dhakke tere bhai se nahi bajte ab mere pe, uska lund toh Jaspreet behanji ki chut dekh ke hi khada hota hai."
Woh jaan-bujh ke rishte yaad dila rahi thi, Mintu naam sun ke josh mein aa gaya...
Patle kamar pakad dhakke maarta "Haan koi na teri tasalli ke liye main hoon aaj behenchod, tere shaadi ke baad aaj tak chooda nahi lahaya aur tu mere lund pe tapti thi yaad aata hai?"
Paramjeet gaand peeche dhakelti "Ahhhh seeee uffff ahh ha hayyy yaad aata tujhe mere mehndi wale haath mein lund dena achha lagta tha" ahh kai baar shak padta badi ladki Simi kahin teri toh nahi... ahh yeh toh condom pehan ke thokte the aur tum jaan apna paani andar sutte the.
Paas soya pati biwi ki baatein sun hairaan tha... biwi hamesha chudai mein aisi hi bolti thi par yeh Simi wala saap aaj nikaala tha, aisa nahi pata tha... haan pehle din se pata tha biwi aur bhai ka... kunware mein bhabhi chodta tha toh kai baar dekha bhai kuch nahi kehta, jaan-bujh ke bahar chala jata... isliye rola kaise paata ki jab motor pe gaya tha toh dopahar garmi mein biwi (mehndi abhi nahi utri) bhai ke lund pe tap rahi thi... aaj bhi yaad scene – bhai chaare wali khurli pe baitha, Paramjeet ko lund pe bitha baahon mein utha ke uchaal raha tha jaise bachchi ho... weight kam tha, bhai shareerik taur pe usse zyada tha. Ek baat aaj tak samajh nahi aayi na Paramjeet ne bataya ki itni jaldi biwi bhai se set kaise ho gayi. Use saalon lage the bhabhi set karne mein... khul ke baatein time baad shuru hui par pehle bhi chhupati nahi thi, chud ke aati toh maal laga rehta, jaan-bujh ke saaf nahi karti chut... taaza chudai ke baad chut saaf karne mein use bhi swad aane laga tha...
Soch tooti jab haath pe dard mehsoos hua... aankhein kholi toh Paramjeet ne neeche honth daanton tale dabaya tha, aankhein band, shayad kaam chal raha tha aur gaand pe tez dhakke se pata chalta tha bhai ka bhi kaam hone wala... hua bhi waisa hi, agle pal bhai ne saara maal andar ugal diya... kaam ke baad bhi utni der dhakke maarta raha jab tak lund chhota nahi ho gaya...
Kaam ke baad woh let gaya, gharwali ne halki light band ki aur sir jeth ki chaati pe rakh ke lambe saans lene lagi...
2 minute baad bed pe halchal, Paramjeet ne mud ke dekha pati uth chappal pehan raha tha "Kya hua kahan chale?"
"Kuch nahi paayi reh tu main peshaab karne chala" pati ne bola...
Paramjeet: Achha theek... wapas aate doodh wala jug bhar laana maine banaya tha...
Mintu: Badi cheez hai tu bhi kya puthe kaam karwati hai, bolne ki kya zarurat thi chup reh...
Paramjeet: Pata nahi kya hai tum dono bhaiyon mein ek-doosre ki biwi thokte saal ho gaye par khul ke baat nahi karte is baare mein...
Mintu: Haan aise hi hai chal chup kar ja woh aa gaya...
Baari-baari dono ne doodh piya... Mintu thodi der sustane let gaya, poori raat baaki thi...
Paramjeet pati ki taraf mud ke "Itna time bathroom mein, kya hilne lag gaye the?"
Parminder: Dil toh bahut karta tha par nahi hila...
Paramjeet: Tere bhai ne toh ab ghanta sona ve aa ja...
Parminder: Nahi tu bhi aaram kar le, paji fir uth padega yeh pehla round tha jaldi chadh gaya tujhe... baad mein tu roti hai mera shareer dukhta hai jaangh fatakti hain...
Paramjeet: Hayyy gharwala ho toh tere jaisa itni badi qurbani muh se kar deti hoon, tujhe naraaz nahi karna...
Parminder: Nahi hota main naraaz, chal ja pakhand mat kar aaram kar le ghadi 2.
Paramjeet: Achha naraaz nahi toh subah nahane se pehle meri taangein mal denge komal tel se...
Parminder: Haan meri maa jo kahegi kar denge chup ho ja so lene de...
Paramjeet has has ke daant dikha ke fir jeth se chipak ke pati ki taraf gaand karke let gayi...
Raat 3 baar Mintu ne uski band bajai poori jaan se... jitni der Paramjeet thukti rahi na soi na pati ko sone diya...
Subah 4 baje gate khol ke Mintu ghar gaya toh koi nahi tha jo aaj bhi hairaan...

Hindi

घर आकर जब उसने सारी बात अपनी बहन तनु को बताई तो वह भी बहुत हँसी...
तनु: हेहेहे हम तो तुझे डरते नहीं बताए थे, हमें तो डर था पता नहीं तू कैसा व्यवहार करेगा।
अमन: नहीं मुझे तो पता था जब चाचा आता था मम्मी को वजाने... सॉरी...
तनु: नहीं-नहीं कोई बात नहीं, जब अकेले होते हैं तो जैसे मर्ज़ी बात कर सकता है तू...
अमन: ठीक है मैं तो ही पहले सॉरी बोलता नहीं तो तेरा थप्पड़ तैयार रहता हर समय...
तनु: नहीं मारती तेरे आज तो... हाँ अगर किसी के सामने कुछ गलत बोलता तो फिर मौके के हिसाब से पड़ जाती तेरे...
तनु: चल आजा हम रोटी खाते हैं, डैडी ने तो चाचा के साथ जाना है... वो तो आज चाची के हाथ की ताज़ा मलाई वाली खाएँगे...
अमन: हाँ चल... चाचा तो खुद तैयार बैठा होगा... वो तो खुद डैडी को बुला रहे थे।
तनु: हाँ मुझे पता है ये पहली बार नहीं है... ये तो अक्सर आते-जाते रहते हैं एक-दूसरे के घर... जब डैडी कहकर जाते थे कि आज मैं मोटर पर सोना वे रात को पानी लगाना वे तो बहाना होता था एक-दूसरे के घर जाने का।
रसोई में तीनों रोटी-पानी खाने बैठ गए। तनवीर जानकर अपनी माँ को अमन के सामने चिढ़ाते हुए...
तनु: मम्मी कल तेरा बेटा तेरी ननद से मिलने जा रहा है, जरा देसी घी डालकर दे दो इसे दाल में...
जसप्रीत: हाँ डाल दूँगी मेरे पुत्तर को ताकतवर बनाना है हमें... और ये अच्छी बात है एक-दूसरे से मिलेंगे दोनों में समझदारी बढ़ेगी...
तनु: हाँ वो तो है पर साथ उसके साले साब भी आ रहे हैं, तेरी ननद कह रही है मैं अकेली नहीं आऊँगी... अगर तेरा भी दिल करे तो तू भी साथ चली जा कल, उसके साली को तू बिज़ी कर दे, ये काम काढ़ दे उतनी देर...
अमन दोनों की बातें सुनकर शर्मा गया, उसके घर में कभी इतनी खुली बात नहीं हुई थी "दीदी क्या है यार" और फिर सिर झुकाकर फोन में लग गया...
जसप्रीत: अरे क्यों तंग कर रही है मेरे मुंडे को... और मैं जाकर क्या करूँ वहाँ... तू चली जा...
तनु: हाँ अब इतनी तो कुर्बानी देनी पड़ेगी अपने छोटे भाई के लिए...
अमन जो अब बात समझ गया था कि अपनी चालाक बहन और उसके अपने साले से ही गांड परवा चुकी माँ के सामने शरीफ बनकर नहीं बनेगा, वो भी रंग में आकर बोल ही पड़ा "अच्छा जी मेरे कंधों पर बंदूक क्यों चला रही हो दीदी... तुम दोनों माँ-बेटी बड़ी चालाक हो, उस दिन मेरे बहाने से मम्मी मेरे साले से टक्कर लगवा आई, कल तुम चलना वे... मुझे तो मेरे अली हाथ नहीं लगने देती आज तक।"
जसप्रीत: कोई नहीं चला लेने दे तेरे ही फायदे रहेंगे इसमें भी...
उधर दोनों भाई शराब पीने बैठ गए थे... चाची के तो पैर नहीं लग रहे थे ज़मीन पर कितने दिन हो गए थे ऐसे अपने घर में आराम से चुदवाने के... मोटर पर चुदना उसे खास अच्छा नहीं लगता था, मोटर पर पिया मंजा उसकी धूल चिल्ला देता था...
चाची रसोई में चाचा को आवाज़ मारते हुए "अह सुनो और चिकन ले जाओ मैं फ्राई कर दूँ और..."
चाचा जब रसोई से फ्राई चिकन लेने आया तो चाची उसे टोकते हुए बोली "तुम खुद भले लगा लो पर पाजी को शराबी ना बना दो, नशे में ठीक से मालिश नहीं होगी उनसे..."
चाचा: हाँ ठीक है जैसे तू कहे मेरी सरकार... चाचा को नशा होना शुरू हो गया था...
चाचा: सारा काम सेट है तू गैस वगैरह बंद कर दे जा नहा ले तैयार हो जा... फिर मैं अंदर कमरे में चलते हैं हम... बच्चियाँ सो गई हैं क्या नहीं...
चाची: हाँ अपने कमरे में हैं, रोटी तो खा ली है... पर तुम मोटर पर नहीं जाना आज...
चाचा: नहीं उधर आज लाइन क्लियर नहीं होगी...
चाची: ओके देख लो तेरी मर्ज़ी है, अगर मना करना तो मना कर दे...
चाचा: नहीं कोई बात नहीं, अगर मेरी गल नहीं बनी उधर फिर अमन का विवाह आ गया वे पाजी को फिर समय नहीं मिलना... मैं 2 पेग ज़्यादा लगा लेता हूँ उसके साथ नींद आ जाएगी तू टेंशन फ्री होकर मालिश करवा ले...
चाची: हाँ ये ठीक रहेगा नहीं तो तेरे से मेरी चीखें सुन नहीं होंगी... तुझे पता ही है तेरे भाई कितनी बुरी तरह मालिश करते हैं। उनका हाथ भी तेरे से भारी वे जब भी लगाते रगड़ देते हैं पूरी तरह।
चाचा: हाँ पर आवाज़ कम रख... ये अच्छा है कि बच्चियाँ ऊपर सोने लग गई हैं।
ऐसा कहकर वो चिकन वाली प्लेट लेकर बाहर आ गया... एक बार ऊपर देखने लगा दूसरी मंजिल पर कमरों की लाइट्स बंद थीं मतलब बच्चियाँ सो गई हैं...
मिंटू: क्या हुआ आज क्यों ठंडा पिया...
चाचा: हा हा ऐसा कहकर वो पास बैठकर पेग बनाने लगा, अपना पेग ताकड़ा डाल लिया उसने...
मिंटू: मेरे वाला कम रख मैं आज जागना हूँ जो काम करने आया वो भी तो करना... और तू आज घर ही रुक जा... अमन का मूड सेट नहीं आज...
चाचा: हा हा कोई नहीं... तुम बेफिक्र रहो...
ऐसे ही दोनों बातें करते रहे और शराब पीते रहे। कोई आधे घंटे बाद अमन की चाची भी नहाकर तैयार हो आई। उसने नहाकर सफेद फुल्ला वाला सूट पहन रखा था। नीचे जान-बूझकर तंग करने के लिए काले रंग का मैचिंग ब्रा-पैंटी सेट पहन रखा था उसने अब।
परमजीत (अमन की चाची): चलो अब बस करो और कितनी पीनी है...
मिंटू: उसके तरफ देखकर अपने होंठों पर जीभ फेरते हा हा बस हो गए... तू चिकन बहुत अच्छा बनाती है रोटी खाकर स्वाद आ गया...
परमजीत: हा हा बंदों की यही बुरी आदत है दूसरी की औरत का सब स्वाद लगता है अपनी घरवाली का नहीं...
मिंटू: हाहाहा ये ले उसके तरफ पेग आगे कर दे लगा ले एक थकान उतर जाए...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ देखकर पेग ले लेती है जो अब तक पूरा नशे में धुत्त हो गया था उसकी आँखें बंद हो रही थीं...
एक ही घूँट में वो सारा पेग खींच लेती है... और जल्दी से अपने जेठ मिंटू के हाथ से फ्राई मुर्गे की टांग लेकर खाने लगती है...
परमजीत: चलो आओ इसे अंदर ही लेटा देते हैं नहीं तो यहीं सो जाएगा...
और परमजीत अपने घरवाले को अंदर ले जाती है...
साइड में बेड पर लेटाकर पास ही अपने जेठ को गले लगाती है और अपनी बाहों में जकड़ "क्या बात भूल गए कितने दिन हो गए आए ही नहीं... मेरे तो दिल भर गया तेरा।"
मिंटू: क्या बात करती है तेरे से दिल कब भर सकता ऐसा कहकर वो उसके सूट को कोने से पकड़ ऊपर कर उतार देता है... और
इससे पहले वो कुछ करता परमजीत खुद अपने हाथ पीछे करके ब्रा उतार देती है "नहीं-नहीं ये ब्रा का हुक भी मत तोड़ देना" तेरी बुरी आदत है ड्रॉअर में कितनी ब्रा पड़ी हैं जिनके हुक तोड़े हैं तुमने...
मिंटू हँसते हुए उसे निप्पल से पकड़ अपनी तरफ खींच लेता... जिससे परमजीत की दर्द और मज़े से भरी सिसकारी निकल जाती है...
"ओव्व्व अह्ह... सी ओउच" अह्ह हायyyy धीरे मेरी जान इतनी जोर से मत मसलो दर्द होता है...
मिंटू बिना कुछ बोले उसके मम्मों पर खींच थप्पड़ मारता "अच्छा मज़ा नहीं आता पिया।"
थप्पड़ के साथ वो अपने पर उछल-सी गई... ये सब की आदी थी वो... वही जान-बूझकर दर्द होने का नाटक कर रही थी अपने जेठ को और जोश दिलाने के लिए... इतना कि दर्द तो वो आराम से सह जाती थी... आगे भी जब उसका जेठ रात भर लगाता था तो सुबह तक उसके निप्पल इतने सूजे रहते कि वो ब्रा तक नहीं पहन पाती...
ऐसे ही थोड़ी देर खड़े रहने के बाद दोनों अपने कपड़े उतार बेड पर आ गए जहाँ एक तरफ मिंटू का भाई बेहोश बेखबर सोया पड़ा था...
परमजीत: आज इसे अपने घर नहीं भेजा यहाँ क्यों रोक लिया... और फिर तो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी...
मिंटू: उसी का कल वो अमन ने बाहर जाना है अपनी होने वाली घरवाली से मिलने इसलिए जब आया सब जाग रहे थे...
मिंटू: सीसीसी बस कर आजा अब तू ऊपर मेरे मुंह पर बैठ जा... तेरी छोटी-सी चूत चूसने दे...
परमजीत हँसते हुए अपनी दोनों टाँगें अपने जेठ के दोनों तरफ करके छाती पर बैठ जाती है और मिंटू फिर उसे खींच अपने मुंह पर बिठा लेता है...
परमजीत जान-बूझकर शरारत करते हुए अपने जेठ के मुंह पर गांड हिलाती हुई "3 बच्चों की माँ होकर अब कहाँ रह गई मेरी छोटी-सी चूत" अह्ह सी और मज़ा लेते हुए अपनी गांड हल्का-हल्का हिलाने लगी...
मिंटू को हमेशा परमजीत को चोदकर स्वाद आता था। क्योंकि वो खुद लंबा-चौड़ा अच्छे शरीर का मालिक था और कद से भी 6 फीट से थोड़ा ऊपर ही था... और हमेशा जब वो अपने भाई की घरवाली को अपने नीचे लेटाता तो उसे ऐसा लगता जैसे कोई 18 साल की जवान लड़की को चोद रहा हो...
उसका शरीर जसप्रीत से कहीं ज़्यादा पतला था। जब उसके जाँघों पर हाथ फेरता खेलता तो ऐसा लगता जैसे जवान मुटियार के साथ खेल रहा हो।
परमजीत जब अपने जेठ के मुंह पर बैठी अपनी चूत और गांड चुसवा रही थी और लंड से खेल रही थी उसकी नज़र अपने घरवाले पर पड़ी जो अब आँखें खोल चुका था। क्योंकि 1 घंटे में उसका नशा पहले से कम हो गया था वैसे भी वो शराबी होने का नाटक करता था। कभी-कभी ऐसा होता था वो शराबी होने का नाटक करता और पास बैठी अपनी घरवाली को चुदते देखता।
परमजीत अपने घरवाले को देख हँस पड़ी और आँखों से और मुँह फुलाकर अपने घरवाले से कहने लगी "तेरे लंड से ज़्यादा मोटा वे तेरे बड़े भाई का लंड।"
थोड़ी देर बाद मिंटू ने उसे अपने ऊपर से उतार घोड़ी बना लिया और उसके पीछे आ चूतड़ पर खींच थप्पड़ मारता उसे मस्त करता अपना लंड सेट कर एक झटके में अंदर धकेल दिया... परमजीत की चीख निकल गई... रात का समय होने से आवाज़ काफी ऊँची लगी पास पड़े उसके घरवाले को भी कि वो रिएक्ट कर दे उसके घरवाले ने अपनी घरवाली का हाथ घुटने से पकड़ लिया...
परमजीत बिना परवाह किए "अह्ह हायyyy खींच-खींच के मारो धक्के तेरे भाई से नहीं बजते अब मेरे पर धक्के उसका लंड तो जसप्रीत बहनजी की चूत देखकर ही खड़ा होता है अब।"
वो जान-बूझकर दोनों के रिश्ते को याद दिला रही थी हमेशा की तरह मिंटू अपनी जाननी का नाम सुन जोश में आ गया...
उसके पतले कमर को पकड़ धक्के मारता "हाँ कोई नहीं तेरी तसल्ली के लिए मैं हूँ आज बहनचोद तेरे विवाह के बाद आज तक चूड़ा भी नहीं लहाया था और तू मेरे लंड पर तपती थी याद आता है क्या नहीं।"
परमजीत भी अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलते "आह्ह्ह सीई उफ्फ अह्ह हा हायyyy याद आता तुझे मेरे मेहंदी वाले हाथ में अपना लंड देना अच्छा लगता था" अह्ह कई बार शक पड़ता बड़ी लड़की सिमी कहीं तेरी तो नहीं... अह्ह ये तो निरोध पहनकर ठोकते थे और तुम जान-जान अपना पानी मेरे अंदर सुतते थे।
पास पड़ा उसका घरवाला अपनी घरवाली की बातें सुन हैरान था... उसकी घरवाली हमेशा चुदाई के समय पुठा-सीधा बोलती गल्लाँ काढ़ती थी ये उसकी आदत थी पर जो ये बड़ी लड़की सिमी वाला साँप उसने आज काढ़ा था ऐसा नहीं पता था उसे... हाँ पता तो उसे पहले दिन से ही था अपनी घरवाली और उसके भाई का... क्योंकि जब वो कुंवारे थे अपनी भाभी को चोदता था तो कई बार उसने देखा था कि उसका भाई उसे कुछ नहीं कहता कई बार जान-बूझकर बाहर चला जाता... इसलिए वो कैसे रोला पा सकता था कि जब वो एक दिन अपनी मोटर पर गया था तो सिखर दोपहर गर्मी में उसकी घरवाली जिसकी आज मेहंदी भी नहीं उतरी थी उसके भाई के लंड पर तप रही थी... आज भी याद है उसे वो सीन उसका भाई मज़े के चारे वाली खुरली पर बैठा हुआ था और परमजीत को उसने अपने लंड पर बिठा बाहों में उठा रखा था और अपने लंड पर बिठाकर ऐसे उछाल रहा था जैसे वो कोई बच्ची हो... वैसे भी उसकी घरवाली का वजन इतना भी नहीं था ऊपर से उसका भाई शारीरिक रूप से उससे थोड़ा ज़्यादा था। एक बात की उसे आज तक समझ नहीं आई थी न परमजीत ने उसे बताया था कि इतनी जल्दी उसकी घरवाली उसके भाई से कैसे सेट हो गई। जबकि उसे कितने साल लगे थे अपनी भाभी को सेट करने में... खुलकर बातें तो काफी समय बाद होने लगी थीं पर पहले भी वो छुपाती नहीं थी कुछ भी अहने-बहने सब साफ कर दिया होता था जब चुदकर वापस आती तो भाई का रिश्ता हुआ माल आज भी लगा रहता था जान-बूझकर साफ न करती थी वो अपनी चूत... ताज़ा चुदकर आई अपनी घरवाली की चूत को साफ करने में उसे भी स्वाद आने लगा था...
उसकी सोच की लड़ी टूटी जब उसे अपने हाथ पर दर्द महसूस हुआ... आँखें खोलकर देखा तो परमजीत ने अपना नीचे वाला होंठ दाँतों तले रखा था आँखें घुटकर बंद थीं शायद उसका काम हो रहा था और उसकी गांड पर बजते तेज़-तेज़ धक्कों से ये पता लगता था कि उसके भाई का भी काम होने वाला है... हुआ भी ऐसा ही अगले ही कुछ पलों में उसके भाई ने अपना सारा माल अंदर उगल दिया... काम होने के बाद भी वो उतनी देर धक्के मारता रहा जब तक लंड सिकुड़कर छोटा नहीं हो गया...
काम होने के बाद वो बेड पर लेट गया और उसकी घरवाली ने हल्की रोशनी वाला बल्ब भी बंद कर दिया और अपना सिर अपने जेठ की छाती पर रख लेटकर लंबे-लंबे साँस लेने लगी...
कोई 2 मिनट बाद ही बेड पर हलचल हुई परमजीत ने मुड़कर देखा उसका घरवाला उठकर चप्पल पहन रहा था "क्या हुआ तुम कहाँ चले।"
"कुछ नहीं कुछ नहीं पाई रह तू मैं पेशाब करने चला" उसके घरवाले ने जवाब दिया...
परमजीत: अच्छा ठीक है... वापस आते समय दूध वाला जग भर लाना मैंने बनाया था...
मिंटू: बड़ी चीज़ है तू भी क्या पुठे काम करवाती है क्या ज़रूरत थी बोलने की चुप करके पड़ी रहती...
परमजीत: पता नहीं क्या है तुम दोनों भाइयों में एक-दूसरे की औरतें ठोकते इतने साल हो गए पर खुलकर कभी बात नहीं करते तुम दोनों इस बारे में...
मिंटू: हाँ ऐसे ही है चल चुप कर जा वो आ गया...
बारी-बारी मिंटू और परमजीत दोनों ने दूध पी लिया... मिंटू तो कुछ देर सुस्ताने के लिए लेट गया पूरी रात बाकी थी आज तो...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ मुड़कर "इतना समय लगा बाथरूम में क्या बात हिलने लग गए थे।"
परमिंदर (परमजीत का घरवाला): दिल तो बहुत करता था पर नहीं हिला...
परमजीत: तेरे भाई ने तो अब घंटा सोना वे आ जाओ तुम...
परमिंदर: नहीं तू भी आराम कर ले पाजी फिर उठ पड़ेगा ये तो पहला राउंड था जल्दी चढ़ गया तुझे... बाद में तू रोती है मेरा शरीर दुखता है वे जाँघ फटकते हैं...
परमजीत: हायyyy घरवाला हो तो तेरे जैसा इतनी बड़ी कुर्बानी आ मुंह से कर देती हूँ तुझे नाराज़ नहीं करना...
परमिंदर: नहीं होता मैं नाराज़ चल जा पाखंड मत कर आराम कर ले घड़ी 2।
परमजीत: अच्छा जी नाराज़ नहीं हो तो सुबह नहाने से पहले मेरी टाँगें मल देंगे कोमल तेल से...
परमिंदर: हाँ मेरी माँ जो कहेगी कर देंगे चुप हो जा सोने दे मुझे...
परमजीत हँसती दाँत काढ़ दी फिर तो अपने जेठ से चिपककर अपने घरवाले की तरफ गांड करके लेट गई...
रात 3 बार मिंटू ने उसकी बंद बजाई पूरी रूह से... जितनी देर परमजीत ठुकती रही न तो खुद सोई न अपने घरवाले को सोने दिया...
सुबह 4 बजे जब बाहर वाला गेट खोलकर मिंटू अपने घर गया तो कोई नहीं था जो आज भी हैरान...
 

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Update 19

घर आके जब उसने सारी बात अपनी बहन Tanu को बताई तो वो भी खूब हँसी...
Tanu: Hehehe hum toh tujhe dar ke maare nahi bataye the, humein toh darr tha pata nahi tu kaisa react karega.
Aman: Nahi yaar mujhe toh pehle se pata tha jab chacha aata tha mummy ko chodne... sorry...
Tanu: Arre nahi nahi koi gal nahi, jab akela hota hai toh jaise marzi baat kar sakta hai tu...
Aman: Theek hai main toh har baar sorry bolta nahi toh tera thappad taiyaar rehta hai...
Tanu: Nahi marti tere aaj toh... haan agar kisi ke saamne kuch galat bola toh fir mauke ke hisaab se pad jaati tere...
Tanu: Chal aa ja hum roti kha lete hain, daddy ne toh chacha ke saath jaana hai... woh toh aaj chachi ke haath ki fresh malai wali khaayenge...
Aman: Haan chal... chacha toh khud ready baitha hoga... woh toh khud daddy ko bula rahe the.
Tanu: Haan mujhe pata hai yeh first time nahi hai... yeh log toh roz aate-jaate rehte hain ek-doosre ke ghar... jab daddy bol ke jaate the ki aaj motor pe sona hai, raat ko paani lagana hai toh woh sirf bahana hota tha ek-doosre ke ghar jaane ka.
Rasoi mein teeno roti khaane baith gaye. Tanveer jaan-bujh ke apni maa ko Aman ke saamne chhedti hui...
Tanu: Mummy kal tera beta teri nanad se milne ja raha hai, zara desi ghee daal ke de do isko daal mein...
Jaspreet: Haan daal dungi mere puttar ko strong banana hai humein... aur yeh achhi baat hai ek-doosre se milenge toh dono mein understanding aur badhegi...
Tanu: Haan woh toh hai par saath uske saale sahab bhi aa rahe hain, teri nanad bol rahi thi main akeli nahi aaungi... agar tera bhi dil kare toh tu bhi saath chali ja kal, uski saali ko tu busy kar dena, yeh kaam nikaal dena utni der...
Aman dono ki baatein sunke sharma gaya, uske ghar mein kabhi itni openly baat nahi hoti thi "Didi kya yaar" bolke fir sar jhuka ke phone mein lag gaya...
Jaspreet: Arre kyun tang kar rahi hai mere munde ko... aur main wahan jaake kya karungi... tu chali ja...
Tanu: Haan ab itni toh qurbani deni padegi apne chhote bhai ke liye...
Aman jo ab poori baat samajh gaya tha ki apni chalak behan aur uske saale se hi gaand marwa chuki maa ke saamne shareef ban ke nahi chalega, woh bhi rang mein aa ke bol pada "Achha ji mere kandhon pe bandook kyun chala rahi ho didi... tum dono maa-beti badi tez ho, us din mere bahane se mummy ko mere saale se takkar lagwa aayi, kal tum chalna ve... mujhe toh meri aali haath nahi lagne deti aaj tak."
Jaspreet: Koi na chala lene de, tere hi fayde rahenge isme bhi...
Udhhar dono bhai sharaab peene baith gaye the... chachi ke pair toh zameen pe nahi lag rahe the, kitne din ho gaye the aise ghar mein aaram se chudwane ke... motor pe chudna use bilkul pasand nahi tha, motor pe pichhe baith ke dhool-mitti chilla deti thi...
Chachi rasoi se chacha ko awaaz deti "Ah suno aur chicken le aao main fry kar deti hoon aur..."
Chacha jab rasoi se fry chicken lene aaya toh chachi usko rok ke boli "Tum khud bhale laga lo par paji ko zyada sharaabi mat bana dena, nashe mein theek se malish nahi hogi un se..."
Chacha: Haan theek hai jaise tu kahe meri sarkar... chacha ko nasha chadhne laga tha...
Chacha: Saara kaam set hai, tu gas band kar de, ja naha le taiyaar ho ja... fir andar kamre mein chalte hain... bachchiyan so gayi hain kya?
Chachi: Haan apne kamre mein hain, roti kha li hai... par tum motor pe mat jaana aaj...
Chacha: Nahi udhar aaj line clear nahi hai...
Chachi: Okay dekh lo teri marzi, agar mana karna hai toh kar de...
Chacha: Nahi koi gal nahi, agar meri baat nahi bani udhar toh Aman ka viaah aa gaya ve, paji ko fir time nahi milega... main 2 peg zyada laga leta hoon uske saath neend aa jayegi, tu tension free hoke malish karwa le...
Chachi: Haan yeh better rahega, nahi toh tere se meri cheekhein sun nahi hongi... tujhe pata hai tere bhai kitni buri tarah malish karte hain. Unka haath tere se bhari hai, jab lagate hain toh poori ragad dete hain.
Chacha: Haan par awaaz kam rakh... achha hai bachchiyan upar so gayi hain.
Aisa bol ke woh chicken ki plate leke bahar aa gaya... ek baar upar dekha, dusri manzil pe lights band thi matlab bachchiyan so gayi hain...
Mintu: Kya hua aaj kyun thanda piya...
Chacha: Haha aisa bol ke woh paas baith ke apna peg strong bana liya...
Mintu: Mere wala kam rakh, main aaj jagna hai jo kaam karne aaya woh bhi toh karna... aur tu aaj ghar hi ruk ja... Aman ka mood set nahi hai aaj...
Chacha: Haha koi na... tum befikr raho...
Aise hi dono baatein karte rahe aur peg peete rahe. Aadhe ghante baad Aman ki chachi naha ke taiyaar ho aayi. Usne naha ke white fulla suit pehna tha. Neeche jaan-bujh ke tang karne ke liye black matching bra-panty set pehna tha ab.
Paramjeet (Aman ki chachi): Chal ab bas karo, aur kitni peeni hai...
Mintu: Uske taraf dekh ke apne lips pe jeebh pherte hue haha bas ho gaye... tu chicken bahut tasty banati hai, roti kha ke swad aa gaya...
Paramjeet: Haha mardon ki yahi problem hai, dusri aurat ka sab swad lagta hai apni biwi ka nahi...
Mintu: Hahaha yeh le uske taraf peg aage kar, laga le ek thakaan utar jaaye...
Paramjeet apne husband ki taraf dekh ke peg le leti hai, jo ab tak poora dhutt ho chuka tha, aankhein band ho rahi thi...
Ek hi ghunt mein saara peg kheench leti hai... aur jaldi se Mintu ke haath se fry chicken ki taang leke khaane lagti hai...
Paramjeet: Chal ise andar hi leta dete hain, nahi toh yahin so jayega...
Aur Paramjeet apne pati ko andar le jaati hai...
Side mein bed pe leta ke jeth ko gale lagati hai aur baahon mein jakad leti "Kya baat bhool gaye, kitne din ho gaye aaye hi nahi... mera dil bhar gaya tera."
Mintu: Kya baat karti hai, tere se dil kab bhar sakta... aisa bol ke uske suit ko kone se pakad upar kar utaar deta hai...
Isse pehle woh kuch karta Paramjeet khud haath peeche karke bra utaar deti hai "Nahi nahi yeh bra ka hook mat tod dena" teri buri aadat hai, drawer mein kitni bra padi hain jinke hook tode tune...
Mintu has has ke usko nipple se pakad apni taraf kheench leta... jisse Paramjeet ki dard-maza bhari siskari nikal jaati hai...
"Owww ahhh... see ouch" ahhh hayyy dheere meri jaan itni zor se mat maslo dard hota hai...
Mintu bina bole uske mummon pe kheench thappad maarta "Achha maza nahi aata piya."
Thappad ke saath woh uchal gayi... yeh sab ki aadi thi woh... jaan-bujh ke dard ka drama kar rahi thi jeth ko aur josh dene ke liye... itna ki dard toh woh aaram se seh leti thi... aage bhi jab jeth raat bhar lagata tha toh subah tak nipples itne suje rehte ki bra bhi nahi pehan paati...
Thodi der khade rehne ke baad dono kapde utar ke bed pe aa gaye, jahan ek taraf Mintu ka bhai behosh soya pada tha...
Paramjeet: Aaj ise ghar nahi bheja, yahan kyun rok liya... aur fir lund muh mein leke chusne lagi...
Mintu: Usi ka kal Aman bahar ja raha hai apni hone wali se milne, isliye jab aaya sab jaag rahe the...
Mintu: Seee bas kar aa ja ab tu upar mere muh pe baith ja... teri chhoti chut chusne de...
Paramjeet has has ke dono taangein dono taraf karke chaati pe baith jaati hai aur Mintu usko kheench muh pe bitha leta hai...
Paramjeet sharaarat karte hue jeth ke muh pe gaand hilati "3 bachchon ki maa hokar ab kahan reh gayi meri chhoti chut" ahh see aur maza lete hue gaand halka hilane lagi...
Mintu ko hamesha Paramjeet ko chod ke alag maza aata tha. Kyunki woh khud lamba-chauda tha, kad 6 feet se upar... aur jab bhai ki biwi ko neeche leta toh lagta jaise 18 saal ki ladki ko chod raha ho...
Uska shareer Jaspreet se zyada patla tha. Jaanghon pe haath pherte hue lagta jaise jawan mutiyar ke saath khel raha ho.
Paramjeet jab jeth ke muh pe baithi chut-gaand chuswa rahi thi aur lund se khel rahi thi, tab nazar pati pe padi jo ab aankhein khol chuka tha. 1 ghante mein nasha kam ho gaya tha, waise bhi woh sharabi hone ka drama karta tha. Kabhi-kabhi aisa hota tha woh natak karta aur paas baithi biwi ko chudte dekhta.
Paramjeet pati ko dekh has padi aur aankh maar ke muh fulla ke boli "Tere lund se zyada mota ve tere bade bhai ka lund."
Thodi der baad Mintu ne usko utaar ghodi banaya, peeche aa ke chuttad pe kheench thappad maarta mast karta, lund set kar ek jhatke mein andar dhakel diya... Paramjeet ki cheekh nikal gayi... raat hone se awaaz unchi lagi, paas soye pati ko bhi... pati ne biwi ka haath ghutne se pakad liya...
Paramjeet bina parwah "Ahhh hayyy kheench-kheench ke maro dhakke tere bhai se nahi bajte ab mere pe, uska lund toh Jaspreet behanji ki chut dekh ke hi khada hota hai."
Woh jaan-bujh ke rishte yaad dila rahi thi, Mintu naam sun ke josh mein aa gaya...
Patle kamar pakad dhakke maarta "Haan koi na teri tasalli ke liye main hoon aaj behenchod, tere shaadi ke baad aaj tak chooda nahi lahaya aur tu mere lund pe tapti thi yaad aata hai?"
Paramjeet gaand peeche dhakelti "Ahhhh seeee uffff ahh ha hayyy yaad aata tujhe mere mehndi wale haath mein lund dena achha lagta tha" ahh kai baar shak padta badi ladki Simi kahin teri toh nahi... ahh yeh toh condom pehan ke thokte the aur tum jaan apna paani andar sutte the.
Paas soya pati biwi ki baatein sun hairaan tha... biwi hamesha chudai mein aisi hi bolti thi par yeh Simi wala saap aaj nikaala tha, aisa nahi pata tha... haan pehle din se pata tha biwi aur bhai ka... kunware mein bhabhi chodta tha toh kai baar dekha bhai kuch nahi kehta, jaan-bujh ke bahar chala jata... isliye rola kaise paata ki jab motor pe gaya tha toh dopahar garmi mein biwi (mehndi abhi nahi utri) bhai ke lund pe tap rahi thi... aaj bhi yaad scene – bhai chaare wali khurli pe baitha, Paramjeet ko lund pe bitha baahon mein utha ke uchaal raha tha jaise bachchi ho... weight kam tha, bhai shareerik taur pe usse zyada tha. Ek baat aaj tak samajh nahi aayi na Paramjeet ne bataya ki itni jaldi biwi bhai se set kaise ho gayi. Use saalon lage the bhabhi set karne mein... khul ke baatein time baad shuru hui par pehle bhi chhupati nahi thi, chud ke aati toh maal laga rehta, jaan-bujh ke saaf nahi karti chut... taaza chudai ke baad chut saaf karne mein use bhi swad aane laga tha...
Soch tooti jab haath pe dard mehsoos hua... aankhein kholi toh Paramjeet ne neeche honth daanton tale dabaya tha, aankhein band, shayad kaam chal raha tha aur gaand pe tez dhakke se pata chalta tha bhai ka bhi kaam hone wala... hua bhi waisa hi, agle pal bhai ne saara maal andar ugal diya... kaam ke baad bhi utni der dhakke maarta raha jab tak lund chhota nahi ho gaya...
Kaam ke baad woh let gaya, gharwali ne halki light band ki aur sir jeth ki chaati pe rakh ke lambe saans lene lagi...
2 minute baad bed pe halchal, Paramjeet ne mud ke dekha pati uth chappal pehan raha tha "Kya hua kahan chale?"
"Kuch nahi paayi reh tu main peshaab karne chala" pati ne bola...
Paramjeet: Achha theek... wapas aate doodh wala jug bhar laana maine banaya tha...
Mintu: Badi cheez hai tu bhi kya puthe kaam karwati hai, bolne ki kya zarurat thi chup reh...
Paramjeet: Pata nahi kya hai tum dono bhaiyon mein ek-doosre ki biwi thokte saal ho gaye par khul ke baat nahi karte is baare mein...
Mintu: Haan aise hi hai chal chup kar ja woh aa gaya...
Baari-baari dono ne doodh piya... Mintu thodi der sustane let gaya, poori raat baaki thi...
Paramjeet pati ki taraf mud ke "Itna time bathroom mein, kya hilne lag gaye the?"
Parminder: Dil toh bahut karta tha par nahi hila...
Paramjeet: Tere bhai ne toh ab ghanta sona ve aa ja...
Parminder: Nahi tu bhi aaram kar le, paji fir uth padega yeh pehla round tha jaldi chadh gaya tujhe... baad mein tu roti hai mera shareer dukhta hai jaangh fatakti hain...
Paramjeet: Hayyy gharwala ho toh tere jaisa itni badi qurbani muh se kar deti hoon, tujhe naraaz nahi karna...
Parminder: Nahi hota main naraaz, chal ja pakhand mat kar aaram kar le ghadi 2.
Paramjeet: Achha naraaz nahi toh subah nahane se pehle meri taangein mal denge komal tel se...
Parminder: Haan meri maa jo kahegi kar denge chup ho ja so lene de...
Paramjeet has has ke daant dikha ke fir jeth se chipak ke pati ki taraf gaand karke let gayi...
Raat 3 baar Mintu ne uski band bajai poori jaan se... jitni der Paramjeet thukti rahi na soi na pati ko sone diya...
Subah 4 baje gate khol ke Mintu ghar gaya toh koi nahi tha jo aaj bhi hairaan...

Hindi

घर आकर जब उसने सारी बात अपनी बहन तनु को बताई तो वह भी बहुत हँसी...
तनु: हेहेहे हम तो तुझे डरते नहीं बताए थे, हमें तो डर था पता नहीं तू कैसा व्यवहार करेगा।
अमन: नहीं मुझे तो पता था जब चाचा आता था मम्मी को वजाने... सॉरी...
तनु: नहीं-नहीं कोई बात नहीं, जब अकेले होते हैं तो जैसे मर्ज़ी बात कर सकता है तू...
अमन: ठीक है मैं तो ही पहले सॉरी बोलता नहीं तो तेरा थप्पड़ तैयार रहता हर समय...
तनु: नहीं मारती तेरे आज तो... हाँ अगर किसी के सामने कुछ गलत बोलता तो फिर मौके के हिसाब से पड़ जाती तेरे...
तनु: चल आजा हम रोटी खाते हैं, डैडी ने तो चाचा के साथ जाना है... वो तो आज चाची के हाथ की ताज़ा मलाई वाली खाएँगे...
अमन: हाँ चल... चाचा तो खुद तैयार बैठा होगा... वो तो खुद डैडी को बुला रहे थे।
तनु: हाँ मुझे पता है ये पहली बार नहीं है... ये तो अक्सर आते-जाते रहते हैं एक-दूसरे के घर... जब डैडी कहकर जाते थे कि आज मैं मोटर पर सोना वे रात को पानी लगाना वे तो बहाना होता था एक-दूसरे के घर जाने का।
रसोई में तीनों रोटी-पानी खाने बैठ गए। तनवीर जानकर अपनी माँ को अमन के सामने चिढ़ाते हुए...
तनु: मम्मी कल तेरा बेटा तेरी ननद से मिलने जा रहा है, जरा देसी घी डालकर दे दो इसे दाल में...
जसप्रीत: हाँ डाल दूँगी मेरे पुत्तर को ताकतवर बनाना है हमें... और ये अच्छी बात है एक-दूसरे से मिलेंगे दोनों में समझदारी बढ़ेगी...
तनु: हाँ वो तो है पर साथ उसके साले साब भी आ रहे हैं, तेरी ननद कह रही है मैं अकेली नहीं आऊँगी... अगर तेरा भी दिल करे तो तू भी साथ चली जा कल, उसके साली को तू बिज़ी कर दे, ये काम काढ़ दे उतनी देर...
अमन दोनों की बातें सुनकर शर्मा गया, उसके घर में कभी इतनी खुली बात नहीं हुई थी "दीदी क्या है यार" और फिर सिर झुकाकर फोन में लग गया...
जसप्रीत: अरे क्यों तंग कर रही है मेरे मुंडे को... और मैं जाकर क्या करूँ वहाँ... तू चली जा...
तनु: हाँ अब इतनी तो कुर्बानी देनी पड़ेगी अपने छोटे भाई के लिए...
अमन जो अब बात समझ गया था कि अपनी चालाक बहन और उसके अपने साले से ही गांड परवा चुकी माँ के सामने शरीफ बनकर नहीं बनेगा, वो भी रंग में आकर बोल ही पड़ा "अच्छा जी मेरे कंधों पर बंदूक क्यों चला रही हो दीदी... तुम दोनों माँ-बेटी बड़ी चालाक हो, उस दिन मेरे बहाने से मम्मी मेरे साले से टक्कर लगवा आई, कल तुम चलना वे... मुझे तो मेरे अली हाथ नहीं लगने देती आज तक।"
जसप्रीत: कोई नहीं चला लेने दे तेरे ही फायदे रहेंगे इसमें भी...
उधर दोनों भाई शराब पीने बैठ गए थे... चाची के तो पैर नहीं लग रहे थे ज़मीन पर कितने दिन हो गए थे ऐसे अपने घर में आराम से चुदवाने के... मोटर पर चुदना उसे खास अच्छा नहीं लगता था, मोटर पर पिया मंजा उसकी धूल चिल्ला देता था...
चाची रसोई में चाचा को आवाज़ मारते हुए "अह सुनो और चिकन ले जाओ मैं फ्राई कर दूँ और..."
चाचा जब रसोई से फ्राई चिकन लेने आया तो चाची उसे टोकते हुए बोली "तुम खुद भले लगा लो पर पाजी को शराबी ना बना दो, नशे में ठीक से मालिश नहीं होगी उनसे..."
चाचा: हाँ ठीक है जैसे तू कहे मेरी सरकार... चाचा को नशा होना शुरू हो गया था...
चाचा: सारा काम सेट है तू गैस वगैरह बंद कर दे जा नहा ले तैयार हो जा... फिर मैं अंदर कमरे में चलते हैं हम... बच्चियाँ सो गई हैं क्या नहीं...
चाची: हाँ अपने कमरे में हैं, रोटी तो खा ली है... पर तुम मोटर पर नहीं जाना आज...
चाचा: नहीं उधर आज लाइन क्लियर नहीं होगी...
चाची: ओके देख लो तेरी मर्ज़ी है, अगर मना करना तो मना कर दे...
चाचा: नहीं कोई बात नहीं, अगर मेरी गल नहीं बनी उधर फिर अमन का विवाह आ गया वे पाजी को फिर समय नहीं मिलना... मैं 2 पेग ज़्यादा लगा लेता हूँ उसके साथ नींद आ जाएगी तू टेंशन फ्री होकर मालिश करवा ले...
चाची: हाँ ये ठीक रहेगा नहीं तो तेरे से मेरी चीखें सुन नहीं होंगी... तुझे पता ही है तेरे भाई कितनी बुरी तरह मालिश करते हैं। उनका हाथ भी तेरे से भारी वे जब भी लगाते रगड़ देते हैं पूरी तरह।
चाचा: हाँ पर आवाज़ कम रख... ये अच्छा है कि बच्चियाँ ऊपर सोने लग गई हैं।
ऐसा कहकर वो चिकन वाली प्लेट लेकर बाहर आ गया... एक बार ऊपर देखने लगा दूसरी मंजिल पर कमरों की लाइट्स बंद थीं मतलब बच्चियाँ सो गई हैं...
मिंटू: क्या हुआ आज क्यों ठंडा पिया...
चाचा: हा हा ऐसा कहकर वो पास बैठकर पेग बनाने लगा, अपना पेग ताकड़ा डाल लिया उसने...
मिंटू: मेरे वाला कम रख मैं आज जागना हूँ जो काम करने आया वो भी तो करना... और तू आज घर ही रुक जा... अमन का मूड सेट नहीं आज...
चाचा: हा हा कोई नहीं... तुम बेफिक्र रहो...
ऐसे ही दोनों बातें करते रहे और शराब पीते रहे। कोई आधे घंटे बाद अमन की चाची भी नहाकर तैयार हो आई। उसने नहाकर सफेद फुल्ला वाला सूट पहन रखा था। नीचे जान-बूझकर तंग करने के लिए काले रंग का मैचिंग ब्रा-पैंटी सेट पहन रखा था उसने अब।
परमजीत (अमन की चाची): चलो अब बस करो और कितनी पीनी है...
मिंटू: उसके तरफ देखकर अपने होंठों पर जीभ फेरते हा हा बस हो गए... तू चिकन बहुत अच्छा बनाती है रोटी खाकर स्वाद आ गया...
परमजीत: हा हा बंदों की यही बुरी आदत है दूसरी की औरत का सब स्वाद लगता है अपनी घरवाली का नहीं...
मिंटू: हाहाहा ये ले उसके तरफ पेग आगे कर दे लगा ले एक थकान उतर जाए...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ देखकर पेग ले लेती है जो अब तक पूरा नशे में धुत्त हो गया था उसकी आँखें बंद हो रही थीं...
एक ही घूँट में वो सारा पेग खींच लेती है... और जल्दी से अपने जेठ मिंटू के हाथ से फ्राई मुर्गे की टांग लेकर खाने लगती है...
परमजीत: चलो आओ इसे अंदर ही लेटा देते हैं नहीं तो यहीं सो जाएगा...
और परमजीत अपने घरवाले को अंदर ले जाती है...
साइड में बेड पर लेटाकर पास ही अपने जेठ को गले लगाती है और अपनी बाहों में जकड़ "क्या बात भूल गए कितने दिन हो गए आए ही नहीं... मेरे तो दिल भर गया तेरा।"
मिंटू: क्या बात करती है तेरे से दिल कब भर सकता ऐसा कहकर वो उसके सूट को कोने से पकड़ ऊपर कर उतार देता है... और
इससे पहले वो कुछ करता परमजीत खुद अपने हाथ पीछे करके ब्रा उतार देती है "नहीं-नहीं ये ब्रा का हुक भी मत तोड़ देना" तेरी बुरी आदत है ड्रॉअर में कितनी ब्रा पड़ी हैं जिनके हुक तोड़े हैं तुमने...
मिंटू हँसते हुए उसे निप्पल से पकड़ अपनी तरफ खींच लेता... जिससे परमजीत की दर्द और मज़े से भरी सिसकारी निकल जाती है...
"ओव्व्व अह्ह... सी ओउच" अह्ह हायyyy धीरे मेरी जान इतनी जोर से मत मसलो दर्द होता है...
मिंटू बिना कुछ बोले उसके मम्मों पर खींच थप्पड़ मारता "अच्छा मज़ा नहीं आता पिया।"
थप्पड़ के साथ वो अपने पर उछल-सी गई... ये सब की आदी थी वो... वही जान-बूझकर दर्द होने का नाटक कर रही थी अपने जेठ को और जोश दिलाने के लिए... इतना कि दर्द तो वो आराम से सह जाती थी... आगे भी जब उसका जेठ रात भर लगाता था तो सुबह तक उसके निप्पल इतने सूजे रहते कि वो ब्रा तक नहीं पहन पाती...
ऐसे ही थोड़ी देर खड़े रहने के बाद दोनों अपने कपड़े उतार बेड पर आ गए जहाँ एक तरफ मिंटू का भाई बेहोश बेखबर सोया पड़ा था...
परमजीत: आज इसे अपने घर नहीं भेजा यहाँ क्यों रोक लिया... और फिर तो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी...
मिंटू: उसी का कल वो अमन ने बाहर जाना है अपनी होने वाली घरवाली से मिलने इसलिए जब आया सब जाग रहे थे...
मिंटू: सीसीसी बस कर आजा अब तू ऊपर मेरे मुंह पर बैठ जा... तेरी छोटी-सी चूत चूसने दे...
परमजीत हँसते हुए अपनी दोनों टाँगें अपने जेठ के दोनों तरफ करके छाती पर बैठ जाती है और मिंटू फिर उसे खींच अपने मुंह पर बिठा लेता है...
परमजीत जान-बूझकर शरारत करते हुए अपने जेठ के मुंह पर गांड हिलाती हुई "3 बच्चों की माँ होकर अब कहाँ रह गई मेरी छोटी-सी चूत" अह्ह सी और मज़ा लेते हुए अपनी गांड हल्का-हल्का हिलाने लगी...
मिंटू को हमेशा परमजीत को चोदकर स्वाद आता था। क्योंकि वो खुद लंबा-चौड़ा अच्छे शरीर का मालिक था और कद से भी 6 फीट से थोड़ा ऊपर ही था... और हमेशा जब वो अपने भाई की घरवाली को अपने नीचे लेटाता तो उसे ऐसा लगता जैसे कोई 18 साल की जवान लड़की को चोद रहा हो...
उसका शरीर जसप्रीत से कहीं ज़्यादा पतला था। जब उसके जाँघों पर हाथ फेरता खेलता तो ऐसा लगता जैसे जवान मुटियार के साथ खेल रहा हो।
परमजीत जब अपने जेठ के मुंह पर बैठी अपनी चूत और गांड चुसवा रही थी और लंड से खेल रही थी उसकी नज़र अपने घरवाले पर पड़ी जो अब आँखें खोल चुका था। क्योंकि 1 घंटे में उसका नशा पहले से कम हो गया था वैसे भी वो शराबी होने का नाटक करता था। कभी-कभी ऐसा होता था वो शराबी होने का नाटक करता और पास बैठी अपनी घरवाली को चुदते देखता।
परमजीत अपने घरवाले को देख हँस पड़ी और आँखों से और मुँह फुलाकर अपने घरवाले से कहने लगी "तेरे लंड से ज़्यादा मोटा वे तेरे बड़े भाई का लंड।"
थोड़ी देर बाद मिंटू ने उसे अपने ऊपर से उतार घोड़ी बना लिया और उसके पीछे आ चूतड़ पर खींच थप्पड़ मारता उसे मस्त करता अपना लंड सेट कर एक झटके में अंदर धकेल दिया... परमजीत की चीख निकल गई... रात का समय होने से आवाज़ काफी ऊँची लगी पास पड़े उसके घरवाले को भी कि वो रिएक्ट कर दे उसके घरवाले ने अपनी घरवाली का हाथ घुटने से पकड़ लिया...
परमजीत बिना परवाह किए "अह्ह हायyyy खींच-खींच के मारो धक्के तेरे भाई से नहीं बजते अब मेरे पर धक्के उसका लंड तो जसप्रीत बहनजी की चूत देखकर ही खड़ा होता है अब।"
वो जान-बूझकर दोनों के रिश्ते को याद दिला रही थी हमेशा की तरह मिंटू अपनी जाननी का नाम सुन जोश में आ गया...
उसके पतले कमर को पकड़ धक्के मारता "हाँ कोई नहीं तेरी तसल्ली के लिए मैं हूँ आज बहनचोद तेरे विवाह के बाद आज तक चूड़ा भी नहीं लहाया था और तू मेरे लंड पर तपती थी याद आता है क्या नहीं।"
परमजीत भी अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलते "आह्ह्ह सीई उफ्फ अह्ह हा हायyyy याद आता तुझे मेरे मेहंदी वाले हाथ में अपना लंड देना अच्छा लगता था" अह्ह कई बार शक पड़ता बड़ी लड़की सिमी कहीं तेरी तो नहीं... अह्ह ये तो निरोध पहनकर ठोकते थे और तुम जान-जान अपना पानी मेरे अंदर सुतते थे।
पास पड़ा उसका घरवाला अपनी घरवाली की बातें सुन हैरान था... उसकी घरवाली हमेशा चुदाई के समय पुठा-सीधा बोलती गल्लाँ काढ़ती थी ये उसकी आदत थी पर जो ये बड़ी लड़की सिमी वाला साँप उसने आज काढ़ा था ऐसा नहीं पता था उसे... हाँ पता तो उसे पहले दिन से ही था अपनी घरवाली और उसके भाई का... क्योंकि जब वो कुंवारे थे अपनी भाभी को चोदता था तो कई बार उसने देखा था कि उसका भाई उसे कुछ नहीं कहता कई बार जान-बूझकर बाहर चला जाता... इसलिए वो कैसे रोला पा सकता था कि जब वो एक दिन अपनी मोटर पर गया था तो सिखर दोपहर गर्मी में उसकी घरवाली जिसकी आज मेहंदी भी नहीं उतरी थी उसके भाई के लंड पर तप रही थी... आज भी याद है उसे वो सीन उसका भाई मज़े के चारे वाली खुरली पर बैठा हुआ था और परमजीत को उसने अपने लंड पर बिठा बाहों में उठा रखा था और अपने लंड पर बिठाकर ऐसे उछाल रहा था जैसे वो कोई बच्ची हो... वैसे भी उसकी घरवाली का वजन इतना भी नहीं था ऊपर से उसका भाई शारीरिक रूप से उससे थोड़ा ज़्यादा था। एक बात की उसे आज तक समझ नहीं आई थी न परमजीत ने उसे बताया था कि इतनी जल्दी उसकी घरवाली उसके भाई से कैसे सेट हो गई। जबकि उसे कितने साल लगे थे अपनी भाभी को सेट करने में... खुलकर बातें तो काफी समय बाद होने लगी थीं पर पहले भी वो छुपाती नहीं थी कुछ भी अहने-बहने सब साफ कर दिया होता था जब चुदकर वापस आती तो भाई का रिश्ता हुआ माल आज भी लगा रहता था जान-बूझकर साफ न करती थी वो अपनी चूत... ताज़ा चुदकर आई अपनी घरवाली की चूत को साफ करने में उसे भी स्वाद आने लगा था...
उसकी सोच की लड़ी टूटी जब उसे अपने हाथ पर दर्द महसूस हुआ... आँखें खोलकर देखा तो परमजीत ने अपना नीचे वाला होंठ दाँतों तले रखा था आँखें घुटकर बंद थीं शायद उसका काम हो रहा था और उसकी गांड पर बजते तेज़-तेज़ धक्कों से ये पता लगता था कि उसके भाई का भी काम होने वाला है... हुआ भी ऐसा ही अगले ही कुछ पलों में उसके भाई ने अपना सारा माल अंदर उगल दिया... काम होने के बाद भी वो उतनी देर धक्के मारता रहा जब तक लंड सिकुड़कर छोटा नहीं हो गया...
काम होने के बाद वो बेड पर लेट गया और उसकी घरवाली ने हल्की रोशनी वाला बल्ब भी बंद कर दिया और अपना सिर अपने जेठ की छाती पर रख लेटकर लंबे-लंबे साँस लेने लगी...
कोई 2 मिनट बाद ही बेड पर हलचल हुई परमजीत ने मुड़कर देखा उसका घरवाला उठकर चप्पल पहन रहा था "क्या हुआ तुम कहाँ चले।"
"कुछ नहीं कुछ नहीं पाई रह तू मैं पेशाब करने चला" उसके घरवाले ने जवाब दिया...
परमजीत: अच्छा ठीक है... वापस आते समय दूध वाला जग भर लाना मैंने बनाया था...
मिंटू: बड़ी चीज़ है तू भी क्या पुठे काम करवाती है क्या ज़रूरत थी बोलने की चुप करके पड़ी रहती...
परमजीत: पता नहीं क्या है तुम दोनों भाइयों में एक-दूसरे की औरतें ठोकते इतने साल हो गए पर खुलकर कभी बात नहीं करते तुम दोनों इस बारे में...
मिंटू: हाँ ऐसे ही है चल चुप कर जा वो आ गया...
बारी-बारी मिंटू और परमजीत दोनों ने दूध पी लिया... मिंटू तो कुछ देर सुस्ताने के लिए लेट गया पूरी रात बाकी थी आज तो...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ मुड़कर "इतना समय लगा बाथरूम में क्या बात हिलने लग गए थे।"
परमिंदर (परमजीत का घरवाला): दिल तो बहुत करता था पर नहीं हिला...
परमजीत: तेरे भाई ने तो अब घंटा सोना वे आ जाओ तुम...
परमिंदर: नहीं तू भी आराम कर ले पाजी फिर उठ पड़ेगा ये तो पहला राउंड था जल्दी चढ़ गया तुझे... बाद में तू रोती है मेरा शरीर दुखता है वे जाँघ फटकते हैं...
परमजीत: हायyyy घरवाला हो तो तेरे जैसा इतनी बड़ी कुर्बानी आ मुंह से कर देती हूँ तुझे नाराज़ नहीं करना...
परमिंदर: नहीं होता मैं नाराज़ चल जा पाखंड मत कर आराम कर ले घड़ी 2।
परमजीत: अच्छा जी नाराज़ नहीं हो तो सुबह नहाने से पहले मेरी टाँगें मल देंगे कोमल तेल से...
परमिंदर: हाँ मेरी माँ जो कहेगी कर देंगे चुप हो जा सोने दे मुझे...
परमजीत हँसती दाँत काढ़ दी फिर तो अपने जेठ से चिपककर अपने घरवाले की तरफ गांड करके लेट गई...
रात 3 बार मिंटू ने उसकी बंद बजाई पूरी रूह से... जितनी देर परमजीत ठुकती रही न तो खुद सोई न अपने घरवाले को सोने दिया...
सुबह 4 बजे जब बाहर वाला गेट खोलकर मिंटू अपने घर गया तो कोई नहीं था जो आज भी हैरान...
 
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Update 19

घर आके जब उसने सारी बात अपनी बहन Tanu को बताई तो वो भी खूब हँसी...
Tanu: Hehehe hum toh tujhe dar ke maare nahi bataye the, humein toh darr tha pata nahi tu kaisa react karega.
Aman: Nahi yaar mujhe toh pehle se pata tha jab chacha aata tha mummy ko chodne... sorry...
Tanu: Arre nahi nahi koi gal nahi, jab akela hota hai toh jaise marzi baat kar sakta hai tu...
Aman: Theek hai main toh har baar sorry bolta nahi toh tera thappad taiyaar rehta hai...
Tanu: Nahi marti tere aaj toh... haan agar kisi ke saamne kuch galat bola toh fir mauke ke hisaab se pad jaati tere...
Tanu: Chal aa ja hum roti kha lete hain, daddy ne toh chacha ke saath jaana hai... woh toh aaj chachi ke haath ki fresh malai wali khaayenge...
Aman: Haan chal... chacha toh khud ready baitha hoga... woh toh khud daddy ko bula rahe the.
Tanu: Haan mujhe pata hai yeh first time nahi hai... yeh log toh roz aate-jaate rehte hain ek-doosre ke ghar... jab daddy bol ke jaate the ki aaj motor pe sona hai, raat ko paani lagana hai toh woh sirf bahana hota tha ek-doosre ke ghar jaane ka.
Rasoi mein teeno roti khaane baith gaye. Tanveer jaan-bujh ke apni maa ko Aman ke saamne chhedti hui...
Tanu: Mummy kal tera beta teri nanad se milne ja raha hai, zara desi ghee daal ke de do isko daal mein...
Jaspreet: Haan daal dungi mere puttar ko strong banana hai humein... aur yeh achhi baat hai ek-doosre se milenge toh dono mein understanding aur badhegi...
Tanu: Haan woh toh hai par saath uske saale sahab bhi aa rahe hain, teri nanad bol rahi thi main akeli nahi aaungi... agar tera bhi dil kare toh tu bhi saath chali ja kal, uski saali ko tu busy kar dena, yeh kaam nikaal dena utni der...
Aman dono ki baatein sunke sharma gaya, uske ghar mein kabhi itni openly baat nahi hoti thi "Didi kya yaar" bolke fir sar jhuka ke phone mein lag gaya...
Jaspreet: Arre kyun tang kar rahi hai mere munde ko... aur main wahan jaake kya karungi... tu chali ja...
Tanu: Haan ab itni toh qurbani deni padegi apne chhote bhai ke liye...
Aman jo ab poori baat samajh gaya tha ki apni chalak behan aur uske saale se hi gaand marwa chuki maa ke saamne shareef ban ke nahi chalega, woh bhi rang mein aa ke bol pada "Achha ji mere kandhon pe bandook kyun chala rahi ho didi... tum dono maa-beti badi tez ho, us din mere bahane se mummy ko mere saale se takkar lagwa aayi, kal tum chalna ve... mujhe toh meri aali haath nahi lagne deti aaj tak."
Jaspreet: Koi na chala lene de, tere hi fayde rahenge isme bhi...
Udhhar dono bhai sharaab peene baith gaye the... chachi ke pair toh zameen pe nahi lag rahe the, kitne din ho gaye the aise ghar mein aaram se chudwane ke... motor pe chudna use bilkul pasand nahi tha, motor pe pichhe baith ke dhool-mitti chilla deti thi...
Chachi rasoi se chacha ko awaaz deti "Ah suno aur chicken le aao main fry kar deti hoon aur..."
Chacha jab rasoi se fry chicken lene aaya toh chachi usko rok ke boli "Tum khud bhale laga lo par paji ko zyada sharaabi mat bana dena, nashe mein theek se malish nahi hogi un se..."
Chacha: Haan theek hai jaise tu kahe meri sarkar... chacha ko nasha chadhne laga tha...
Chacha: Saara kaam set hai, tu gas band kar de, ja naha le taiyaar ho ja... fir andar kamre mein chalte hain... bachchiyan so gayi hain kya?
Chachi: Haan apne kamre mein hain, roti kha li hai... par tum motor pe mat jaana aaj...
Chacha: Nahi udhar aaj line clear nahi hai...
Chachi: Okay dekh lo teri marzi, agar mana karna hai toh kar de...
Chacha: Nahi koi gal nahi, agar meri baat nahi bani udhar toh Aman ka viaah aa gaya ve, paji ko fir time nahi milega... main 2 peg zyada laga leta hoon uske saath neend aa jayegi, tu tension free hoke malish karwa le...
Chachi: Haan yeh better rahega, nahi toh tere se meri cheekhein sun nahi hongi... tujhe pata hai tere bhai kitni buri tarah malish karte hain. Unka haath tere se bhari hai, jab lagate hain toh poori ragad dete hain.
Chacha: Haan par awaaz kam rakh... achha hai bachchiyan upar so gayi hain.
Aisa bol ke woh chicken ki plate leke bahar aa gaya... ek baar upar dekha, dusri manzil pe lights band thi matlab bachchiyan so gayi hain...
Mintu: Kya hua aaj kyun thanda piya...
Chacha: Haha aisa bol ke woh paas baith ke apna peg strong bana liya...
Mintu: Mere wala kam rakh, main aaj jagna hai jo kaam karne aaya woh bhi toh karna... aur tu aaj ghar hi ruk ja... Aman ka mood set nahi hai aaj...
Chacha: Haha koi na... tum befikr raho...
Aise hi dono baatein karte rahe aur peg peete rahe. Aadhe ghante baad Aman ki chachi naha ke taiyaar ho aayi. Usne naha ke white fulla suit pehna tha. Neeche jaan-bujh ke tang karne ke liye black matching bra-panty set pehna tha ab.
Paramjeet (Aman ki chachi): Chal ab bas karo, aur kitni peeni hai...
Mintu: Uske taraf dekh ke apne lips pe jeebh pherte hue haha bas ho gaye... tu chicken bahut tasty banati hai, roti kha ke swad aa gaya...
Paramjeet: Haha mardon ki yahi problem hai, dusri aurat ka sab swad lagta hai apni biwi ka nahi...
Mintu: Hahaha yeh le uske taraf peg aage kar, laga le ek thakaan utar jaaye...
Paramjeet apne husband ki taraf dekh ke peg le leti hai, jo ab tak poora dhutt ho chuka tha, aankhein band ho rahi thi...
Ek hi ghunt mein saara peg kheench leti hai... aur jaldi se Mintu ke haath se fry chicken ki taang leke khaane lagti hai...
Paramjeet: Chal ise andar hi leta dete hain, nahi toh yahin so jayega...
Aur Paramjeet apne pati ko andar le jaati hai...
Side mein bed pe leta ke jeth ko gale lagati hai aur baahon mein jakad leti "Kya baat bhool gaye, kitne din ho gaye aaye hi nahi... mera dil bhar gaya tera."
Mintu: Kya baat karti hai, tere se dil kab bhar sakta... aisa bol ke uske suit ko kone se pakad upar kar utaar deta hai...
Isse pehle woh kuch karta Paramjeet khud haath peeche karke bra utaar deti hai "Nahi nahi yeh bra ka hook mat tod dena" teri buri aadat hai, drawer mein kitni bra padi hain jinke hook tode tune...
Mintu has has ke usko nipple se pakad apni taraf kheench leta... jisse Paramjeet ki dard-maza bhari siskari nikal jaati hai...
"Owww ahhh... see ouch" ahhh hayyy dheere meri jaan itni zor se mat maslo dard hota hai...
Mintu bina bole uske mummon pe kheench thappad maarta "Achha maza nahi aata piya."
Thappad ke saath woh uchal gayi... yeh sab ki aadi thi woh... jaan-bujh ke dard ka drama kar rahi thi jeth ko aur josh dene ke liye... itna ki dard toh woh aaram se seh leti thi... aage bhi jab jeth raat bhar lagata tha toh subah tak nipples itne suje rehte ki bra bhi nahi pehan paati...
Thodi der khade rehne ke baad dono kapde utar ke bed pe aa gaye, jahan ek taraf Mintu ka bhai behosh soya pada tha...
Paramjeet: Aaj ise ghar nahi bheja, yahan kyun rok liya... aur fir lund muh mein leke chusne lagi...
Mintu: Usi ka kal Aman bahar ja raha hai apni hone wali se milne, isliye jab aaya sab jaag rahe the...
Mintu: Seee bas kar aa ja ab tu upar mere muh pe baith ja... teri chhoti chut chusne de...
Paramjeet has has ke dono taangein dono taraf karke chaati pe baith jaati hai aur Mintu usko kheench muh pe bitha leta hai...
Paramjeet sharaarat karte hue jeth ke muh pe gaand hilati "3 bachchon ki maa hokar ab kahan reh gayi meri chhoti chut" ahh see aur maza lete hue gaand halka hilane lagi...
Mintu ko hamesha Paramjeet ko chod ke alag maza aata tha. Kyunki woh khud lamba-chauda tha, kad 6 feet se upar... aur jab bhai ki biwi ko neeche leta toh lagta jaise 18 saal ki ladki ko chod raha ho...
Uska shareer Jaspreet se zyada patla tha. Jaanghon pe haath pherte hue lagta jaise jawan mutiyar ke saath khel raha ho.
Paramjeet jab jeth ke muh pe baithi chut-gaand chuswa rahi thi aur lund se khel rahi thi, tab nazar pati pe padi jo ab aankhein khol chuka tha. 1 ghante mein nasha kam ho gaya tha, waise bhi woh sharabi hone ka drama karta tha. Kabhi-kabhi aisa hota tha woh natak karta aur paas baithi biwi ko chudte dekhta.
Paramjeet pati ko dekh has padi aur aankh maar ke muh fulla ke boli "Tere lund se zyada mota ve tere bade bhai ka lund."
Thodi der baad Mintu ne usko utaar ghodi banaya, peeche aa ke chuttad pe kheench thappad maarta mast karta, lund set kar ek jhatke mein andar dhakel diya... Paramjeet ki cheekh nikal gayi... raat hone se awaaz unchi lagi, paas soye pati ko bhi... pati ne biwi ka haath ghutne se pakad liya...
Paramjeet bina parwah "Ahhh hayyy kheench-kheench ke maro dhakke tere bhai se nahi bajte ab mere pe, uska lund toh Jaspreet behanji ki chut dekh ke hi khada hota hai."
Woh jaan-bujh ke rishte yaad dila rahi thi, Mintu naam sun ke josh mein aa gaya...
Patle kamar pakad dhakke maarta "Haan koi na teri tasalli ke liye main hoon aaj behenchod, tere shaadi ke baad aaj tak chooda nahi lahaya aur tu mere lund pe tapti thi yaad aata hai?"
Paramjeet gaand peeche dhakelti "Ahhhh seeee uffff ahh ha hayyy yaad aata tujhe mere mehndi wale haath mein lund dena achha lagta tha" ahh kai baar shak padta badi ladki Simi kahin teri toh nahi... ahh yeh toh condom pehan ke thokte the aur tum jaan apna paani andar sutte the.
Paas soya pati biwi ki baatein sun hairaan tha... biwi hamesha chudai mein aisi hi bolti thi par yeh Simi wala saap aaj nikaala tha, aisa nahi pata tha... haan pehle din se pata tha biwi aur bhai ka... kunware mein bhabhi chodta tha toh kai baar dekha bhai kuch nahi kehta, jaan-bujh ke bahar chala jata... isliye rola kaise paata ki jab motor pe gaya tha toh dopahar garmi mein biwi (mehndi abhi nahi utri) bhai ke lund pe tap rahi thi... aaj bhi yaad scene – bhai chaare wali khurli pe baitha, Paramjeet ko lund pe bitha baahon mein utha ke uchaal raha tha jaise bachchi ho... weight kam tha, bhai shareerik taur pe usse zyada tha. Ek baat aaj tak samajh nahi aayi na Paramjeet ne bataya ki itni jaldi biwi bhai se set kaise ho gayi. Use saalon lage the bhabhi set karne mein... khul ke baatein time baad shuru hui par pehle bhi chhupati nahi thi, chud ke aati toh maal laga rehta, jaan-bujh ke saaf nahi karti chut... taaza chudai ke baad chut saaf karne mein use bhi swad aane laga tha...
Soch tooti jab haath pe dard mehsoos hua... aankhein kholi toh Paramjeet ne neeche honth daanton tale dabaya tha, aankhein band, shayad kaam chal raha tha aur gaand pe tez dhakke se pata chalta tha bhai ka bhi kaam hone wala... hua bhi waisa hi, agle pal bhai ne saara maal andar ugal diya... kaam ke baad bhi utni der dhakke maarta raha jab tak lund chhota nahi ho gaya...
Kaam ke baad woh let gaya, gharwali ne halki light band ki aur sir jeth ki chaati pe rakh ke lambe saans lene lagi...
2 minute baad bed pe halchal, Paramjeet ne mud ke dekha pati uth chappal pehan raha tha "Kya hua kahan chale?"
"Kuch nahi paayi reh tu main peshaab karne chala" pati ne bola...
Paramjeet: Achha theek... wapas aate doodh wala jug bhar laana maine banaya tha...
Mintu: Badi cheez hai tu bhi kya puthe kaam karwati hai, bolne ki kya zarurat thi chup reh...
Paramjeet: Pata nahi kya hai tum dono bhaiyon mein ek-doosre ki biwi thokte saal ho gaye par khul ke baat nahi karte is baare mein...
Mintu: Haan aise hi hai chal chup kar ja woh aa gaya...
Baari-baari dono ne doodh piya... Mintu thodi der sustane let gaya, poori raat baaki thi...
Paramjeet pati ki taraf mud ke "Itna time bathroom mein, kya hilne lag gaye the?"
Parminder: Dil toh bahut karta tha par nahi hila...
Paramjeet: Tere bhai ne toh ab ghanta sona ve aa ja...
Parminder: Nahi tu bhi aaram kar le, paji fir uth padega yeh pehla round tha jaldi chadh gaya tujhe... baad mein tu roti hai mera shareer dukhta hai jaangh fatakti hain...
Paramjeet: Hayyy gharwala ho toh tere jaisa itni badi qurbani muh se kar deti hoon, tujhe naraaz nahi karna...
Parminder: Nahi hota main naraaz, chal ja pakhand mat kar aaram kar le ghadi 2.
Paramjeet: Achha naraaz nahi toh subah nahane se pehle meri taangein mal denge komal tel se...
Parminder: Haan meri maa jo kahegi kar denge chup ho ja so lene de...
Paramjeet has has ke daant dikha ke fir jeth se chipak ke pati ki taraf gaand karke let gayi...
Raat 3 baar Mintu ne uski band bajai poori jaan se... jitni der Paramjeet thukti rahi na soi na pati ko sone diya...
Subah 4 baje gate khol ke Mintu ghar gaya toh koi nahi tha jo aaj bhi hairaan...

Hindi

घर आकर जब उसने सारी बात अपनी बहन तनु को बताई तो वह भी बहुत हँसी...
तनु: हेहेहे हम तो तुझे डरते नहीं बताए थे, हमें तो डर था पता नहीं तू कैसा व्यवहार करेगा।
अमन: नहीं मुझे तो पता था जब चाचा आता था मम्मी को वजाने... सॉरी...
तनु: नहीं-नहीं कोई बात नहीं, जब अकेले होते हैं तो जैसे मर्ज़ी बात कर सकता है तू...
अमन: ठीक है मैं तो ही पहले सॉरी बोलता नहीं तो तेरा थप्पड़ तैयार रहता हर समय...
तनु: नहीं मारती तेरे आज तो... हाँ अगर किसी के सामने कुछ गलत बोलता तो फिर मौके के हिसाब से पड़ जाती तेरे...
तनु: चल आजा हम रोटी खाते हैं, डैडी ने तो चाचा के साथ जाना है... वो तो आज चाची के हाथ की ताज़ा मलाई वाली खाएँगे...
अमन: हाँ चल... चाचा तो खुद तैयार बैठा होगा... वो तो खुद डैडी को बुला रहे थे।
तनु: हाँ मुझे पता है ये पहली बार नहीं है... ये तो अक्सर आते-जाते रहते हैं एक-दूसरे के घर... जब डैडी कहकर जाते थे कि आज मैं मोटर पर सोना वे रात को पानी लगाना वे तो बहाना होता था एक-दूसरे के घर जाने का।
रसोई में तीनों रोटी-पानी खाने बैठ गए। तनवीर जानकर अपनी माँ को अमन के सामने चिढ़ाते हुए...
तनु: मम्मी कल तेरा बेटा तेरी ननद से मिलने जा रहा है, जरा देसी घी डालकर दे दो इसे दाल में...
जसप्रीत: हाँ डाल दूँगी मेरे पुत्तर को ताकतवर बनाना है हमें... और ये अच्छी बात है एक-दूसरे से मिलेंगे दोनों में समझदारी बढ़ेगी...
तनु: हाँ वो तो है पर साथ उसके साले साब भी आ रहे हैं, तेरी ननद कह रही है मैं अकेली नहीं आऊँगी... अगर तेरा भी दिल करे तो तू भी साथ चली जा कल, उसके साली को तू बिज़ी कर दे, ये काम काढ़ दे उतनी देर...
अमन दोनों की बातें सुनकर शर्मा गया, उसके घर में कभी इतनी खुली बात नहीं हुई थी "दीदी क्या है यार" और फिर सिर झुकाकर फोन में लग गया...
जसप्रीत: अरे क्यों तंग कर रही है मेरे मुंडे को... और मैं जाकर क्या करूँ वहाँ... तू चली जा...
तनु: हाँ अब इतनी तो कुर्बानी देनी पड़ेगी अपने छोटे भाई के लिए...
अमन जो अब बात समझ गया था कि अपनी चालाक बहन और उसके अपने साले से ही गांड परवा चुकी माँ के सामने शरीफ बनकर नहीं बनेगा, वो भी रंग में आकर बोल ही पड़ा "अच्छा जी मेरे कंधों पर बंदूक क्यों चला रही हो दीदी... तुम दोनों माँ-बेटी बड़ी चालाक हो, उस दिन मेरे बहाने से मम्मी मेरे साले से टक्कर लगवा आई, कल तुम चलना वे... मुझे तो मेरे अली हाथ नहीं लगने देती आज तक।"
जसप्रीत: कोई नहीं चला लेने दे तेरे ही फायदे रहेंगे इसमें भी...
उधर दोनों भाई शराब पीने बैठ गए थे... चाची के तो पैर नहीं लग रहे थे ज़मीन पर कितने दिन हो गए थे ऐसे अपने घर में आराम से चुदवाने के... मोटर पर चुदना उसे खास अच्छा नहीं लगता था, मोटर पर पिया मंजा उसकी धूल चिल्ला देता था...
चाची रसोई में चाचा को आवाज़ मारते हुए "अह सुनो और चिकन ले जाओ मैं फ्राई कर दूँ और..."
चाचा जब रसोई से फ्राई चिकन लेने आया तो चाची उसे टोकते हुए बोली "तुम खुद भले लगा लो पर पाजी को शराबी ना बना दो, नशे में ठीक से मालिश नहीं होगी उनसे..."
चाचा: हाँ ठीक है जैसे तू कहे मेरी सरकार... चाचा को नशा होना शुरू हो गया था...
चाचा: सारा काम सेट है तू गैस वगैरह बंद कर दे जा नहा ले तैयार हो जा... फिर मैं अंदर कमरे में चलते हैं हम... बच्चियाँ सो गई हैं क्या नहीं...
चाची: हाँ अपने कमरे में हैं, रोटी तो खा ली है... पर तुम मोटर पर नहीं जाना आज...
चाचा: नहीं उधर आज लाइन क्लियर नहीं होगी...
चाची: ओके देख लो तेरी मर्ज़ी है, अगर मना करना तो मना कर दे...
चाचा: नहीं कोई बात नहीं, अगर मेरी गल नहीं बनी उधर फिर अमन का विवाह आ गया वे पाजी को फिर समय नहीं मिलना... मैं 2 पेग ज़्यादा लगा लेता हूँ उसके साथ नींद आ जाएगी तू टेंशन फ्री होकर मालिश करवा ले...
चाची: हाँ ये ठीक रहेगा नहीं तो तेरे से मेरी चीखें सुन नहीं होंगी... तुझे पता ही है तेरे भाई कितनी बुरी तरह मालिश करते हैं। उनका हाथ भी तेरे से भारी वे जब भी लगाते रगड़ देते हैं पूरी तरह।
चाचा: हाँ पर आवाज़ कम रख... ये अच्छा है कि बच्चियाँ ऊपर सोने लग गई हैं।
ऐसा कहकर वो चिकन वाली प्लेट लेकर बाहर आ गया... एक बार ऊपर देखने लगा दूसरी मंजिल पर कमरों की लाइट्स बंद थीं मतलब बच्चियाँ सो गई हैं...
मिंटू: क्या हुआ आज क्यों ठंडा पिया...
चाचा: हा हा ऐसा कहकर वो पास बैठकर पेग बनाने लगा, अपना पेग ताकड़ा डाल लिया उसने...
मिंटू: मेरे वाला कम रख मैं आज जागना हूँ जो काम करने आया वो भी तो करना... और तू आज घर ही रुक जा... अमन का मूड सेट नहीं आज...
चाचा: हा हा कोई नहीं... तुम बेफिक्र रहो...
ऐसे ही दोनों बातें करते रहे और शराब पीते रहे। कोई आधे घंटे बाद अमन की चाची भी नहाकर तैयार हो आई। उसने नहाकर सफेद फुल्ला वाला सूट पहन रखा था। नीचे जान-बूझकर तंग करने के लिए काले रंग का मैचिंग ब्रा-पैंटी सेट पहन रखा था उसने अब।
परमजीत (अमन की चाची): चलो अब बस करो और कितनी पीनी है...
मिंटू: उसके तरफ देखकर अपने होंठों पर जीभ फेरते हा हा बस हो गए... तू चिकन बहुत अच्छा बनाती है रोटी खाकर स्वाद आ गया...
परमजीत: हा हा बंदों की यही बुरी आदत है दूसरी की औरत का सब स्वाद लगता है अपनी घरवाली का नहीं...
मिंटू: हाहाहा ये ले उसके तरफ पेग आगे कर दे लगा ले एक थकान उतर जाए...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ देखकर पेग ले लेती है जो अब तक पूरा नशे में धुत्त हो गया था उसकी आँखें बंद हो रही थीं...
एक ही घूँट में वो सारा पेग खींच लेती है... और जल्दी से अपने जेठ मिंटू के हाथ से फ्राई मुर्गे की टांग लेकर खाने लगती है...
परमजीत: चलो आओ इसे अंदर ही लेटा देते हैं नहीं तो यहीं सो जाएगा...
और परमजीत अपने घरवाले को अंदर ले जाती है...
साइड में बेड पर लेटाकर पास ही अपने जेठ को गले लगाती है और अपनी बाहों में जकड़ "क्या बात भूल गए कितने दिन हो गए आए ही नहीं... मेरे तो दिल भर गया तेरा।"
मिंटू: क्या बात करती है तेरे से दिल कब भर सकता ऐसा कहकर वो उसके सूट को कोने से पकड़ ऊपर कर उतार देता है... और
इससे पहले वो कुछ करता परमजीत खुद अपने हाथ पीछे करके ब्रा उतार देती है "नहीं-नहीं ये ब्रा का हुक भी मत तोड़ देना" तेरी बुरी आदत है ड्रॉअर में कितनी ब्रा पड़ी हैं जिनके हुक तोड़े हैं तुमने...
मिंटू हँसते हुए उसे निप्पल से पकड़ अपनी तरफ खींच लेता... जिससे परमजीत की दर्द और मज़े से भरी सिसकारी निकल जाती है...
"ओव्व्व अह्ह... सी ओउच" अह्ह हायyyy धीरे मेरी जान इतनी जोर से मत मसलो दर्द होता है...
मिंटू बिना कुछ बोले उसके मम्मों पर खींच थप्पड़ मारता "अच्छा मज़ा नहीं आता पिया।"
थप्पड़ के साथ वो अपने पर उछल-सी गई... ये सब की आदी थी वो... वही जान-बूझकर दर्द होने का नाटक कर रही थी अपने जेठ को और जोश दिलाने के लिए... इतना कि दर्द तो वो आराम से सह जाती थी... आगे भी जब उसका जेठ रात भर लगाता था तो सुबह तक उसके निप्पल इतने सूजे रहते कि वो ब्रा तक नहीं पहन पाती...
ऐसे ही थोड़ी देर खड़े रहने के बाद दोनों अपने कपड़े उतार बेड पर आ गए जहाँ एक तरफ मिंटू का भाई बेहोश बेखबर सोया पड़ा था...
परमजीत: आज इसे अपने घर नहीं भेजा यहाँ क्यों रोक लिया... और फिर तो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी...
मिंटू: उसी का कल वो अमन ने बाहर जाना है अपनी होने वाली घरवाली से मिलने इसलिए जब आया सब जाग रहे थे...
मिंटू: सीसीसी बस कर आजा अब तू ऊपर मेरे मुंह पर बैठ जा... तेरी छोटी-सी चूत चूसने दे...
परमजीत हँसते हुए अपनी दोनों टाँगें अपने जेठ के दोनों तरफ करके छाती पर बैठ जाती है और मिंटू फिर उसे खींच अपने मुंह पर बिठा लेता है...
परमजीत जान-बूझकर शरारत करते हुए अपने जेठ के मुंह पर गांड हिलाती हुई "3 बच्चों की माँ होकर अब कहाँ रह गई मेरी छोटी-सी चूत" अह्ह सी और मज़ा लेते हुए अपनी गांड हल्का-हल्का हिलाने लगी...
मिंटू को हमेशा परमजीत को चोदकर स्वाद आता था। क्योंकि वो खुद लंबा-चौड़ा अच्छे शरीर का मालिक था और कद से भी 6 फीट से थोड़ा ऊपर ही था... और हमेशा जब वो अपने भाई की घरवाली को अपने नीचे लेटाता तो उसे ऐसा लगता जैसे कोई 18 साल की जवान लड़की को चोद रहा हो...
उसका शरीर जसप्रीत से कहीं ज़्यादा पतला था। जब उसके जाँघों पर हाथ फेरता खेलता तो ऐसा लगता जैसे जवान मुटियार के साथ खेल रहा हो।
परमजीत जब अपने जेठ के मुंह पर बैठी अपनी चूत और गांड चुसवा रही थी और लंड से खेल रही थी उसकी नज़र अपने घरवाले पर पड़ी जो अब आँखें खोल चुका था। क्योंकि 1 घंटे में उसका नशा पहले से कम हो गया था वैसे भी वो शराबी होने का नाटक करता था। कभी-कभी ऐसा होता था वो शराबी होने का नाटक करता और पास बैठी अपनी घरवाली को चुदते देखता।
परमजीत अपने घरवाले को देख हँस पड़ी और आँखों से और मुँह फुलाकर अपने घरवाले से कहने लगी "तेरे लंड से ज़्यादा मोटा वे तेरे बड़े भाई का लंड।"
थोड़ी देर बाद मिंटू ने उसे अपने ऊपर से उतार घोड़ी बना लिया और उसके पीछे आ चूतड़ पर खींच थप्पड़ मारता उसे मस्त करता अपना लंड सेट कर एक झटके में अंदर धकेल दिया... परमजीत की चीख निकल गई... रात का समय होने से आवाज़ काफी ऊँची लगी पास पड़े उसके घरवाले को भी कि वो रिएक्ट कर दे उसके घरवाले ने अपनी घरवाली का हाथ घुटने से पकड़ लिया...
परमजीत बिना परवाह किए "अह्ह हायyyy खींच-खींच के मारो धक्के तेरे भाई से नहीं बजते अब मेरे पर धक्के उसका लंड तो जसप्रीत बहनजी की चूत देखकर ही खड़ा होता है अब।"
वो जान-बूझकर दोनों के रिश्ते को याद दिला रही थी हमेशा की तरह मिंटू अपनी जाननी का नाम सुन जोश में आ गया...
उसके पतले कमर को पकड़ धक्के मारता "हाँ कोई नहीं तेरी तसल्ली के लिए मैं हूँ आज बहनचोद तेरे विवाह के बाद आज तक चूड़ा भी नहीं लहाया था और तू मेरे लंड पर तपती थी याद आता है क्या नहीं।"
परमजीत भी अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलते "आह्ह्ह सीई उफ्फ अह्ह हा हायyyy याद आता तुझे मेरे मेहंदी वाले हाथ में अपना लंड देना अच्छा लगता था" अह्ह कई बार शक पड़ता बड़ी लड़की सिमी कहीं तेरी तो नहीं... अह्ह ये तो निरोध पहनकर ठोकते थे और तुम जान-जान अपना पानी मेरे अंदर सुतते थे।
पास पड़ा उसका घरवाला अपनी घरवाली की बातें सुन हैरान था... उसकी घरवाली हमेशा चुदाई के समय पुठा-सीधा बोलती गल्लाँ काढ़ती थी ये उसकी आदत थी पर जो ये बड़ी लड़की सिमी वाला साँप उसने आज काढ़ा था ऐसा नहीं पता था उसे... हाँ पता तो उसे पहले दिन से ही था अपनी घरवाली और उसके भाई का... क्योंकि जब वो कुंवारे थे अपनी भाभी को चोदता था तो कई बार उसने देखा था कि उसका भाई उसे कुछ नहीं कहता कई बार जान-बूझकर बाहर चला जाता... इसलिए वो कैसे रोला पा सकता था कि जब वो एक दिन अपनी मोटर पर गया था तो सिखर दोपहर गर्मी में उसकी घरवाली जिसकी आज मेहंदी भी नहीं उतरी थी उसके भाई के लंड पर तप रही थी... आज भी याद है उसे वो सीन उसका भाई मज़े के चारे वाली खुरली पर बैठा हुआ था और परमजीत को उसने अपने लंड पर बिठा बाहों में उठा रखा था और अपने लंड पर बिठाकर ऐसे उछाल रहा था जैसे वो कोई बच्ची हो... वैसे भी उसकी घरवाली का वजन इतना भी नहीं था ऊपर से उसका भाई शारीरिक रूप से उससे थोड़ा ज़्यादा था। एक बात की उसे आज तक समझ नहीं आई थी न परमजीत ने उसे बताया था कि इतनी जल्दी उसकी घरवाली उसके भाई से कैसे सेट हो गई। जबकि उसे कितने साल लगे थे अपनी भाभी को सेट करने में... खुलकर बातें तो काफी समय बाद होने लगी थीं पर पहले भी वो छुपाती नहीं थी कुछ भी अहने-बहने सब साफ कर दिया होता था जब चुदकर वापस आती तो भाई का रिश्ता हुआ माल आज भी लगा रहता था जान-बूझकर साफ न करती थी वो अपनी चूत... ताज़ा चुदकर आई अपनी घरवाली की चूत को साफ करने में उसे भी स्वाद आने लगा था...
उसकी सोच की लड़ी टूटी जब उसे अपने हाथ पर दर्द महसूस हुआ... आँखें खोलकर देखा तो परमजीत ने अपना नीचे वाला होंठ दाँतों तले रखा था आँखें घुटकर बंद थीं शायद उसका काम हो रहा था और उसकी गांड पर बजते तेज़-तेज़ धक्कों से ये पता लगता था कि उसके भाई का भी काम होने वाला है... हुआ भी ऐसा ही अगले ही कुछ पलों में उसके भाई ने अपना सारा माल अंदर उगल दिया... काम होने के बाद भी वो उतनी देर धक्के मारता रहा जब तक लंड सिकुड़कर छोटा नहीं हो गया...
काम होने के बाद वो बेड पर लेट गया और उसकी घरवाली ने हल्की रोशनी वाला बल्ब भी बंद कर दिया और अपना सिर अपने जेठ की छाती पर रख लेटकर लंबे-लंबे साँस लेने लगी...
कोई 2 मिनट बाद ही बेड पर हलचल हुई परमजीत ने मुड़कर देखा उसका घरवाला उठकर चप्पल पहन रहा था "क्या हुआ तुम कहाँ चले।"
"कुछ नहीं कुछ नहीं पाई रह तू मैं पेशाब करने चला" उसके घरवाले ने जवाब दिया...
परमजीत: अच्छा ठीक है... वापस आते समय दूध वाला जग भर लाना मैंने बनाया था...
मिंटू: बड़ी चीज़ है तू भी क्या पुठे काम करवाती है क्या ज़रूरत थी बोलने की चुप करके पड़ी रहती...
परमजीत: पता नहीं क्या है तुम दोनों भाइयों में एक-दूसरे की औरतें ठोकते इतने साल हो गए पर खुलकर कभी बात नहीं करते तुम दोनों इस बारे में...
मिंटू: हाँ ऐसे ही है चल चुप कर जा वो आ गया...
बारी-बारी मिंटू और परमजीत दोनों ने दूध पी लिया... मिंटू तो कुछ देर सुस्ताने के लिए लेट गया पूरी रात बाकी थी आज तो...
परमजीत अपने घरवाले की तरफ मुड़कर "इतना समय लगा बाथरूम में क्या बात हिलने लग गए थे।"
परमिंदर (परमजीत का घरवाला): दिल तो बहुत करता था पर नहीं हिला...
परमजीत: तेरे भाई ने तो अब घंटा सोना वे आ जाओ तुम...
परमिंदर: नहीं तू भी आराम कर ले पाजी फिर उठ पड़ेगा ये तो पहला राउंड था जल्दी चढ़ गया तुझे... बाद में तू रोती है मेरा शरीर दुखता है वे जाँघ फटकते हैं...
परमजीत: हायyyy घरवाला हो तो तेरे जैसा इतनी बड़ी कुर्बानी आ मुंह से कर देती हूँ तुझे नाराज़ नहीं करना...
परमिंदर: नहीं होता मैं नाराज़ चल जा पाखंड मत कर आराम कर ले घड़ी 2।
परमजीत: अच्छा जी नाराज़ नहीं हो तो सुबह नहाने से पहले मेरी टाँगें मल देंगे कोमल तेल से...
परमिंदर: हाँ मेरी माँ जो कहेगी कर देंगे चुप हो जा सोने दे मुझे...
परमजीत हँसती दाँत काढ़ दी फिर तो अपने जेठ से चिपककर अपने घरवाले की तरफ गांड करके लेट गई...
रात 3 बार मिंटू ने उसकी बंद बजाई पूरी रूह से... जितनी देर परमजीत ठुकती रही न तो खुद सोई न अपने घरवाले को सोने दिया...
सुबह 4 बजे जब बाहर वाला गेट खोलकर मिंटू अपने घर गया तो कोई नहीं था जो आज भी हैरान...
Sandarr
 
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