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Kon sa language me likhu batao aap sab jispar 5 vote aa jayega uspar likhunga

  • Hindi

    Votes: 22 37.3%
  • Hinglish

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  • Khanai pasand aa raha hai ki nahi

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Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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♣️ Update 5 ♣️

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कुलवंत अपने बेटे का सारा माल अंदर ही गटक गई। कुछ 5 मिनट दोनों शांत पड़े रहे।
कुलवंत – “क्यों बेटा अब खुश है?”

Ab next

सिमर इसके जवाब में कुछ नहीं बोला बस अपनी माँ की लतें खोल कर फिर उसकी चूत चाटने लगा। धीरे-धीरे पट्टे को चूमता जीभ फेरता मजा लेने लगा। बहुत खुश था पहली बार चूसे मारवा कर अपनी माँ से सिमर आज।
ऐसे ही कब उसका लंड फिर खड़ा हो गया उसे खुद पता नहीं चला। उसने अपनी माँ की लतें कंधों पर रख लीं और अगले आधे घंटे तक सिमर ने पोजिशन बदल-बदल कर कुलवंत कौर की अच्छी रेल बना दी। जिम जाने वाला गबरू जवान था सिमर। कभी घोड़ी बना कर, कभी अपनी माँ को लंड पर बिठा कर काफी देर लगाता रहा। यहाँ तक कि कुलवंत कौर भी रो पड़ी जब सिमर ने चूत मारते वक्त अपनी माँ को बाँहों में हवा में उठा लिया। इससे कुलवंत के पट्टे खुल गए। लंड के झटके उसके लिए भी सहने मुश्किल हो गए थे। ऐसा उसे आज तक किसी ने भी नहीं चोदा था। कोई सेक्स पोजिशन इतना दर्द देने वाली भी हो सकती है – यह कुलवंत को आज पता चला। वह कहती रही – “बेटा नीचे उतार दे मुझे, बस कर। कोई और तरीके से कर ले। मेरे पट्टों में चींटियाँ पड़ रही हैं… हाय बस कर मार गई मैं।” लेकिन सिमर तो अपने ही होश में लगा हुआ था। और जब उसका पानी कुलवंत की इतने महीनों से प्यासी पड़ी चूत में निकला तो उसने सुकून की साँस ली। जब सिमर ने अपनी माँ को नीचे उतारा तो कुलवंत के भी पैर डगमगा गए। एक पल के लिए तो उसकी लतें बाहर ही नहीं सहन कर पाईं और वह वहीं बेड पर लेट गई।
सिमर लंबी-लंबी साँसें लेता हुआ – “क्या कहते हो, कैसा लगा? अब तो खुश हो न? अपने बेटे से क्या लगता है बदला लेने के लिए तैयार है तुम्हारा बेटा?”
कुलवंत – “बिल्कुल तैयार है। अब आओ स्वाद देखो उस कानजर हैपी को कैसे पंगा लेना पड़ता है ऐसे का सबक सिखाना बेटा, याद रखना।” और फिर उसके थप्पड़ मारते हुए – “हरामी और तू मुझसे किस बात का गुस्सा निकाल रहा था? जान ही निकाल दी मेरी। तूने तो पूरे शरीर की बैंड बजा दी 1 ही बार में…”
सिमर – “ले 1 बार में ही बैंड बज गई। अभी तो और करना है तुम्हारे साथ।”
कुलवंत – “चल बस कर अब मैं कहीं नहीं भागी। मैं यहीं रहूँगी। तू तैयारी कर कल की। कल हैपी का कांडा काटना है।”
अगले दिन 11 बजे ही घर में कोई नहीं था। कोमल शहर किसी काम से गई हुई थी और सज्जन सिंह को कुलवंत ने खुद बाहर भेज दिया था यह कह कर कि आज शाम तक वह बाहर ही रहे। सज्जन सिंह बिना पूछे अपने दोस्तों के पास चला गया था।
अपनी आदत और प्लान के मुताबिक कुलवंत नहा कर ऊपर चली गई जहाँ बेकार हैपी खड़ा था। कुलवंत को पता था हैपी उसे जरूर बुलाएगा और हुआ भी उसका ही। जैसे ही कुलवंत छत पर गीले कपड़े पहन कर मुड़ी तो हैपी ने फिर बुला लिया।
हैपी – “चाची क्या बात है, आजकल मिलती ही नहीं। कहाँ रहती है।”
कुलवंत – “बस जानता है कहाँ। कुछ कामों में बिजी थी। कुछ लोग बड़े ऊपर उड़ते हैं, उन्हें अक्ल सिखानी है।”
हैपी – “क्या कह रही है चाची, किसकी बात कर रही है। चल छोड़, बड़े दिन हो गए तेरे साथ। कहीं न चल प्लीज आज करने दे।”
कुलवंत – हँसते हुए “चल आ जा, बड़े दिन हो गए मेरे भी आग लगी हुई है। लेकिन हमारे वाले आ जा, मैं तेरे घर नहीं आना।”
हैपी – खुश होते हुए “बाले चाची तू कितनी अच्छी है।” उसने आस-पास देखा, दीवार फाँद कर आ गया।
उसने आगे बढ़ कर कुलवंत को गले लगाने की कोशिश की लेकिन कुलवंत ने उसका हाथ झटक दिया और चुपचाप आगे-आगे चल पड़ी और हैपी उसके पीछे।
कमरे में आ कर हैपी ने कुलवंत को घूट कर गले लगा लिया और उसकी गर्दन पर किस करता उसके चिताड़ मसलने लगा।
कुलवंत को अब उसके साथ पहले वाला लगाव तो नहीं था फिर भी वह यह सोच कर मस्त होने लगी कि आज हैपी को पता चल जाएगा सब।
हैपी ने काफी देर कुलवंत के होंठ चूसने के बाद उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार नीचे गिर पड़ी। कुलवंत ने नीचे काले रंग की कच्छी पहनी हुई थी। हैपी ने फिर उसकी कमीज़ उतार दी। नीचे ब्रा नहीं थी कुलवंत की। हैपी ने दोनों हाथों से कुलवंत के मम्मे पकड़ लिए और निप्पलों पर खींचने लगा। कुलवंत भी हाथ लगते मस्त हो गई। उसकी चूत से पानी रिसने लगा था। हैपी ने फिर उसे बेड पर लिटा दिया और उसके पैरों में आ कर उसके पट्टे चूमता चाटता स्वाद लेने लगा। काफी देर दोनों की यह खेल चलती रही। आखिर कोई 30-35 मिनट चूसने के बाद उसने कुलवंत की लतें कंधों पर रख लीं और जोरदार झटके मारने शुरू कर दिए। पोजिशन बदल-बदल कर कुलवंत को चोद वह मस्त हो गया था। लेकिन आज कुलवंत कौर ज्यादा खुश थी उसके जोश को देख। हैपी भी हैरान था। आखिर में जब कुलवंत ने देखा हैपी का लंड फूलने लगा है उसकी चूत में तो उसने हैपी को नीचे उतार दिया और खुद उसके लंड पर उसकी तरफ पीठ कर के चढ़ गई। हैपी उसके तक पूरे चरम पर था लेकिन कुलवंत के उतरने से उसका टाइम डिले हो गया।
कुलवंत ने पीछे मुड़ कर देखा हैपी की आँखें मजा से बंद हैं तो उसने गांड हिलाते-हिलाते ही पास पड़े अपने फोन से सिमर को मैसेज कर दिया कि मौका आ गया भाई, सात मारने के लिए तैयार हो जा। सिमर जो दूसरे कमरे में अपनी सहेली के साथ लगा पड़ा था वह भी अपनी माँ के ऐसे मैसेज की वेट कर रहा था। उसका लंड काफी देर से खड़ा था। अपनी सहेली को कोई पिछले 1 घंटे से चूस-चूस कर उसने पागल कर दिया था। पहली बार आई थी उसकी सहेली। पहले तो डर रही थी लेकिन पिछले 1 घंटे में चूस-चूस चूम-चूम उसके अंदर की आग इतनी भड़क चुकी थी कि वह पागल हो रही थी। बार-बार उसके मुँह से निकल रहा था – “और कितना तड़पाएगा, पा दे अब। इस गर्मी का कुछ कर। इसने मुझे साढ़ देना है।” लेकिन सिमर उसकी चूत को चूसता उसके चूत के दाने पर जीभ फेरता उसे तंग करता पड़ा था।
उधर दूसरे कमरे में जब हैपी ने नीचे से कुलवंत की गांड पकड़ कर झटके मारने शुरू किए तो कुलवंत समझ गई अब काम होने वाला है तो उसने जोरदार गांड हिलाते हुए हैपी का पानी निकालने लगी और कुछ ही पलों में हैपी का काम हो गया। कुलवंत नीचे उतर कर उसकी साइड में लेट गई और हैपी का कंडोम उतार कर साइड में डस्टबिन में फेंक दिया।
हैपी – “बाले चाची तू स्वाद लिया देती है। तेरे जितना मजा कोई नहीं दे सकता। गाँव में कई औरतें चोदीं लेकिन तेरी बात ही अलग है। लेकिन इस बार तू बड़े दिनों बाद आई नीचे।”
कुलवंत – “ह्हहहहा ठीक है कोई बात नहीं। आगे से इतना टाइम नहीं लगाऊँगी। और अब तो आना-जाना लगा ही रहना। शायद पहले से भी ज्यादा।”
हैपी – “क्या गूँजिया बातें कर रही है। मुझे समझ नहीं आया तेरा मतलब।”
कुलवंत – “कोई नहीं समझ जाएगा बेटा जल्दी।”
हैपी – “ठीक है” और इतना कह कर उठ कर वह बाथरूम की तरफ चल पड़ा। वह बाथरूम का दरवाजा खोलने ही लगा था कि उसके कानों में ऊँची आवाज में चीख सुनाई दी – “हायyyy मैं मर गई मम्मी।” आवाज थोड़ी दूर से आई थी।
हैपी – “चाची तू तो कह रही थी घर में कोई नहीं है। यह कैसी आवाज आ रही है घर में। और कौन है। जहाँ तक मुझे पता तेरा बेटा तो कुछ करता नहीं। जिम में बढ़िया रहता हर टाइम।”
कुलवंत – “जानबूझ कर अनजान बन रहा है। पहले तो नहीं था कोई। घर तो है ही। तुझे यहाँ ले कर आई हूँ अब का पता नहीं।”
हैपी – हैपी जैसी आवाजें आ रही थीं लड़की चीखें मार रही थी। उसे सुन उसका लंड फिर हरकत करने लगा था। “उठ चाची आ जा देखें किसका उद्घाटन हो रहा है तेरे घर में। जैसी लड़की रो रही है, खासा हथियार संभाले बैठा तेरा बेटा। आ जा देखें कहीं लड़की को मार न दे।”
कुलवंत – उठते हुए “चल चल देखें। खुशी किस्मत वाली है जिस पर सिमर चढ़ा हुआ है।”
दोनों धीरे-धीरे कदम रखते हुए सिमर के कमरे के पास आ गए। कमरे में खिड़की खुली पड़ी थी। हैपी कुलवंत के पीछे खड़ा हो गया और कुलवंत की नंगी गांड से लग कर मजा लेते हुए अंदर देखने की कोशिश करने लगा।
अंदर उन्होंने देखा कुलवंत का बेटा सिमर ने किसी लड़की की लतें कंधों पर रखी हुई थीं। लड़की गोरी-चिटी, भरे हुए शरीर की मालकिन थी। लड़की ने अपने मुँह में कोई कपड़ा ठूँस रखा था और अपने मुँह पर 1 हाथ रखी अपनी चीखें दबाने की कोशिश कर रही थी।
सिमर का लंड देख कर हैपी की आँखें फटी की फटी रह गईं। लंड उसके लंड से बहुत मोटा लग रहा था और अभी आधे से ज्यादा वह लड़की की चूत से बाहर था। हैपी ने बड़ी कोशिश की लेकिन वह लड़की का चेहरा नहीं देख पा रहा था। क्योंकि सिमर के शरीर के नीचे वह लड़की लगभग दब पड़ी थी।
हैपी – धीरे से “चाची तेरा बेटा तो घोड़ा है। लंड तो देख तेरे बेटे का कितना मोटा है। लेकिन यह साली लड़की है कौन।”
कुलवंत – “चुपचाप देख, रोला न डाल। उसके मजा में भंग न डाल दे।”
हैपी चुप हो गया और अंदर देखने लगा। सिमर ने अगले कुछ ही पलों में अपना पूरा लंड लड़की की चूत में धँसा दिया था। लड़की की उठी हुई गांड और चूत में घुसा लंड बड़े कमाल के लग रहे थे। हैपी बार-बार लड़की के सुंदर रूप देख परेशान होता जा रहा था। लड़की की सेक्सी लतें और गांड ही इतनी सेक्सी थीं।
ऊपर से लड़की की चूत से रिस रहा खून यह साबित कर रहा था कि लड़की पहली बार मारवा रही है।
कुछ 20 मिनट ऐसे ही हैपी बाहर खड़ा लड़की को रोते देखता रहा। लड़की की चीखें इतनी थीं कि हैपी को बहुत तरस आ रहा था उस लड़की पर।
अचानक सिमर रुक गया और बेड से नीचे उतर गया। हैपी ने देखा उसका लंड कोई 8.5 इंच का था और उस लड़की के खून से भरा काफी भयानक लग रहा था। इसे सिमर ने लड़की को लतों से खींच कर बेड के किनारे ला कर पट्टे से पकड़ कर पलट कर घोड़ी बना दिया।
जैसे ही वह लड़की घोड़ी बनी और उसका चेहरा दरवाजे की तरफ आया तो ऐसा लगा जैसे आसमान गिर पड़ा हो हैपी पर। क्योंकि जिस लड़की की चीखें और रोने की आवाजें पिछले 30-35 मिनट से सुन रहा था, जिसकी सेक्सी लतें और गांड देख-देख उसका लंड खड़ा हो गया था, जिस लड़की की चूत से सिमर ने अपना मोटा लंड डाल कर खून निकाला था, वह लड़की कोई और नहीं – वह लड़की दिलप्रीत कौर थी उसकी छोटी बहन जिसका आज जन्मदिन भी था। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसका दिल कर रहा था वह सिमर को जान से मार दे जिसने उसकी फूलों जैसी बहन को पिछले 1 घंटे से इतनी बुरी तरह मसला था।
कुलवंत ने जब देखा हैपी ने उसकी बहन का चेहरा देख लिया है और गुस्से में लाल-पीला होता जा रहा है तो उसने उसे गले लगा कर लंड पकड़ कर खींचते हुए अपने कमरे में ले आई।
हैपी अभी भी गुस्से में और साथ ही साथ सदमे में था। उसकी बहन दिलप्रीत कौर हँसती-खेलती रहने वाली सिम्पल जैसी लड़की थी। बाकी लड़कियों जैसी वह भी पढ़ाई में बहुत होशियार थी। भोला-भाला चेहरा, हल्के उस पर ग्लासेस लगाती थी फिर बहुत सुंदर लगती थी। वह सिमर जैसे जानवर के नीचे कैसे आ गई अभी भी उसकी समझ से बाहर था। आज तक उसने कई लड़कियाँ और भाभियाँ चोदी थीं लेकिन आज अनजाने में अपनी छोटी बहन की उसके जन्मदिन वाले दिन सील टूटती देख कर बहुत निराश और गुस्से में था।
हैपी – “चाची यह सिमर ने अच्छा नहीं किया। मैं इसे जान से मार दूँगा। मेरी बहन के साथ धोखा कर के अच्छा नहीं किया।”
कुलवंत – “क्यों इतना गुस्से में आ जाता है, बैठ जा आराम से।”
हैपी – “तेरा दिमाग खराब हो गया। कह रही है आराम से बैठ जा। बेहचोद मैं इसे जान से मार दूँगा। सुन रही है तू अभी भी लगा पड़ा है मेरी प्यारी बहन के साथ। सुन नहीं रही तू कैसे चीखें मार रही है, रो रही है।”
कुलवंत – “तू तो ऐसा कर रहा है जैसे खुद बहुत संत आदमी है। इतना ही संत है तो यहाँ क्या कर रहा था। क्या करने आया था मेरे घर में।”
हैपी – “च…च…” हैपी की अब जबान लड़खड़ा रही थी।
कुलवंत – “क्यों बोलता नहीं अब। गाँव की इतनी औरतों से तेरे रिलेशनशिप हैं। याद है जब तेरी लुल्ली खड़ी होना शुरू हुई थी तो तुझे मैंने मौका दिया था। तुझे सब सिखाया था। तू फिर भी मेरा क्या साथ दिया। मैं तुझे अपने साथ करने देती थी, तू तो मुझे अपने जीजा के आगे भी लिटा दिया और मुझे ब्लैकमेल किया।”
हैपी – “मुझे माफ कर दे चाची, मुझे नहीं पता था तुझे गुस्सा लगेगा।”
कुलवंत – “अगर मेरे बेटे को हाथ भी लगाया तो देख लेना अपना हिसाब। अभी तो हमारे में भी कहीं बाहर पता लग गया गाँव में तो तुझे पता ही है क्या होना है।”
हैपी – “ठीक है नहीं कहूँगा कुछ भी। फिर भी चाची अगर तुझे पता था सिमर मेरी बहन के साथ कुछ करने लगा तो तू रोक देती। और देखा नहीं कैसे लगा था सिमर मेरी बहन के साथ। बेचारी कैसे रो रही थी। ऊपर से हाय सिमर का इतना मोटा और लंबा।”
कुलवंत – “ले तू भी कमाल करता है। अब ज्यादा सोच न ओके। और अगर तेरी बहन सिमर के नीचे आई है चुदने तो होगी ही। और उसका आज पहली बार था इसलिए रो रही थी। अगली बार से दर्द नहीं मजा लेगी।”
हैपी – “क्या मतलब अगली बार मजा लेगी। मैं यह काम फिर नहीं होने दूँगा।”
कुलवंत – “बैठ जा बैठ जा। तू आज तक जिस भी रंडी को चोदा वह दोबारा तेरे लंड के नीचे तो आती-जाती रहती है। अब तेरी बहन कैसे बच जाएगी। वह भी सिमर की सहेली बन कर रहेगी अब भी और शादी के बाद भी। अब जितनी जल्दी आदत डाल ले तो अच्छी बात है।”
हैपी बस चुपचाप कुलवंत की हर बात पर हाँ में हाँ मिला रहा था। वह अब कर भी क्या सकता था।
कुलवंत – “चल अब कपड़े पहन ले और तू जा जा। किसी ने देख लिया तो पंगे हो जाएँगे। अपनी बहन की फिकर न कर। वह आप आ जाएगी। अभी तो 1 बार चोदी है तेरी बहन सिमर ने। आज शाम तक यहीं रहने दे। तेरी बीवी या मम्मी कोई पूछे तो कह देना अपनी सहेली के साथ बाहर गई है या मेरे साथ शहर है। आज सारा दिन चुदेगी तो सारी जिंदगी याद रहेगी तेरी बहन को उसकी यह पहली सील टूटने की।”
हैपी कपड़े पहनता हुआ – “ठीक है मुझे पता है पहली बार में कोई भी 1 बार चोद कर तो छोड़ता नहीं। मैं भी नहीं छोड़ता। अब सिमर कैसे छोड़ेगा। लेकिन साली यह समझ नहीं आया दिलप्रीत 24 साल की और सिमर अभी 19 का हुआ होगा। यह मैच कैसे बन गया। यह क्या गेम है।”
कुलवंत – “सिमर के शरीर पर डाल गया होगा। छोड़ इन बातों को तू जा यहाँ से।”
हैपी सीधा घर आ गया और बाहर बरामदे में ही बैठ कर दिलप्रीत की वेट करने लगा।
उसका दिल बार-बार बैठा जा रहा था सोच-सोच कर। जिस बंदे को पता हो उसकी बहन चूत मारवा रही हो वह कुछ नहीं कर सकता। उसकी बीवी और मम्मी ने पूछा भी बेटा दिलप्रीत कहाँ गई तो उसने बहाना मार दिया कि वह शहर गई है अपनी सहेली के साथ कॉलेज का प्रोजेक्ट का सामान खरीदने।
कुछ शाम के 7:30 हुए तो उसे गेट खुलने की आवाज आई तो दौड़ कर बाहर की तरफ भागा। उसने देखा उसकी बहन दिलप्रीत हाथ में 2 बैग पकड़े धीरे-धीरे लंगड़ाती चलती अंदर आ रही थी। शायद दर्द ज्यादा था क्योंकि वह चलती-चलती बीच-बीच में रुक भी जाती थी। उसने आगे हो कर बैग पकड़ लिए – “क्या हुआ तुझे ऐसे क्यों चल रही है।”
दिलप्रीत – “क्यों पूछ के मजा ले रहे हो ओ पाजी। देख के स्वाद नहीं आया था। जो अब पूछ रहे हो।”
हैपी – “क्या मतलब? तेरा क्या बोल रही है तू यह??”
दिलप्रीत – “वीर मैंने तुझे देख लिया था जब तुम सिमर की मम्मी के साथ रंगरेलियाँ मना रहे थे। मैं जब सिमर के घर पहुँची थी तो तुझे देखा था कैसे लगे हुए थे।”
“और मैंने तुझे देख लिया था जब मैं घोड़ी बनी थी और मेरा चेहरा विंडो की तरफ था। मैंने तुझे उस वक्त देख लिया था। तुम तो रोके भी नहीं बल्कि अपनी बहन को उसके यार के पास चढ़ा कर घर वापस आ गए। मेरी चीखें सुन-सुन मजा लेते हो तुम।”
“चलो छोड़ो वीर जी मुझे पेन किलर दो। मेरा सारा शरीर बहुत दर्द कर रहा है। सिमर छोड़ता ही नहीं था। बैंड बजा दी। कुत्ते ने थोड़ी बहन की 4 बार बजाई। हायyyy पट्टों में जान ही नहीं बची।”
हैपी – “तमीज में रह। यह न भूल मैं बड़ा हूँ तेरे से।”
दिलप्रीत हँसते हुए अंदर चली गई। भले उसकी दर्द से निकल जा रही थी लेकिन वह बहुत खुश थी। अपने भाई को सबक सिखा कर। उसका भाई हमेशा उस पर पाबंदियाँ लगाता था लेकिन खुद नई से नई लड़की के साथ रिलेशन रखता था।
दूसरी तरफ सिमर और उसकी माँ भी खुश थे। उनका बदला पूरा हो गया था।
(यह भाग पूरा हो गया। कहानी का बदला पूरा होने के साथ एक नया ट्विस्ट आया। )
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tera hero

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♣️ Update 6 ♣️

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अपने भाई को सबक सिखा कर। उसका भाई हमेशा उस पर पाबंदियाँ लगाता था लेकिन खुद नई से नई लड़की के साथ रिलेशन रखता था।
दूसरी तरफ सिमर और उसकी माँ भी खुश थे। उनका बदला पूरा हो गया था।

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हैपी को गुस्सा तो बहुत आ रहा था फिर भी वह कुछ नहीं कर सकता था। उसके सामने बैठी बड़े आराम से टीवी देख रही थी। उसने अपने पट्टों के नीचे तकिया रखा हुआ था। हैपी ने काफी कुंवारी लड़कियाँ चोदी थीं। उसे पता था उसकी बहन की क्या हालत है – पट्टों में चूत में दर्द रह रहा होगा अब 1-2 दिन। आज तक उसने दूसरों की औरतें चोदी थीं। आज अपनी खुद की बहन चुद कर घर आई थी तो उसे बुरा लग रहा था। वह हैरान भी था कि उसने रोका क्यों नहीं सिमर को जब सिमर उसकी छोटी बहन को चोद रहा था। अभी यही सोच में घूम था कि उसके फोन पर दिलप्रीत का मैसेज आया – “प्लीज वीर सोचना बंद करो। मैं पेन किलर लिया कर दे दो। बहुत दर्द हो रही है और आगे के लिए सॉरी। तुम्हारे साथ ठीक तरह बात नहीं की। मुझे गुस्सा आ गया था। एक तो दर्द हो रही थी पूरे शरीर में। सिमर ने जान ही निकाल दी आज तो।”
हैपी – “कोई बात नहीं लेकिन आगे से ध्यान से। जबान को कंट्रोल में रख। कोई सुन लेता तो फिर…”
दिलप्रीत – “अच्छा जी ठीक है अब जाओ भी। और डॉक्टर से पेन किलर्स के साथ पिल्स ले आओ जो रेगुलर लेने की होती हैं प्रेग्नेंसी रोकने के लिए। सिमर कंडोम यूज नहीं करता। वह कहता है मजा नहीं आता। मुझे नहीं लगता आगे भी वह कंडोम यूज करेगा।”
हैपी – “क्या मतलब तेरा? अगली बार भी वह नहीं करेगा। तू फिर जाने वाली है उसके पास। और तू तो कह रही थी उसने बहुत बुरी तरह किया तेरे साथ।”
दिलप्रीत – “ले तुम भी कमाल करते हो वीर जी। यह तो होता ही है। तुम्हें तो ज्यादा पता – इतनी औरतों से तुम्हारे रिलेशन हैं। आज पहली बार थी तुम्हारी बहन का – इतना दर्द तो होना ही था। और तुम रोके न। जब तक मेरा विवाह नहीं होता तब तक तुम सिमर को ही अपना जीजा मान कर चलो।” इससे उसने स्माइलिंग वाली इमोजी अपने बड़े भाई को भेज दी।
हैपी – “मुझे पता है तू मानना तो है नहीं। लत ही ऐसी लग जाती है। एक बार लग गई फिर नहीं छूटती। बाकी ध्यान रख। बात बाहर न जाए। चल अच्छा मैं आया बाजार से ले कर।”
इतना कह कर हैपी मार्केट चला गया। वहाँ अपने मेडिकल स्टोर वाले दोस्त से पेन किलर और यह कह कर प्रेग्नेंसी रोकने वाली गोलियाँ ले लीं कि अपनी बीवी के लिए हैं – कंडोम से मजा नहीं आता और अभी बच्चा नहीं करना।
ऐसे ही दिन गुजरते गए। सिमर भी अब खुल कर हैपी के सामने आ गया था। हैपी भी अपनी हार मान चुका था। वह खुद घर-परिवार वाला आदमी था। कोई गलत कदम तो उठा नहीं सकता था जिससे वह कोई मुसीबत में फँसे। इसलिए वह भी हैपी और अपनी बहन का साथ देने लग पड़ा था। बल्कि उसे मजा भी आने लगा था।
पहले-पहले तो ठीक था लेकिन अब दिलप्रीत बहुत खुलती जा रही थी। उसके अंदर सेक्स की आग दिनोदिन कंट्रोल से बाहर होती जा रही थी। चूत मारवाए बिना उसे नींद नहीं आती थी। जैसे नशा करने वाले का हाल होता है – वही हाल दिलप्रीत का था। 7-8 दिन से सिमर भी बाहर गया था। जब वह घर आया ही था हैपी ने उसे घर आते देख लिया। पिछले 7-8 दिनों में अपनी बहन की बुरी हालत हैपी से भी देखी नहीं गई। उसने जा कर दिलप्रीत के कमरे में देखा तो उसकी बहन बेड पर लेटी पड़ी थी। पास ही बेड पर कपड़े बिखरे पड़े थे। बाल उसके खुले पड़े थे। शायद नहा कर निकली थी। उसने दिलप्रीत को हिलाया तो आगे बढ़ कर वह टूट कर पड़ गई – “क्या हुआ क्यों तंग कर रहा है। नींद न खराब कर वीर प्लीज जा। मैं ठीक नहीं हूँ।”
हैपी आगे बढ़ कर गुस्से की जगह प्यार से उसके सिर और माथे पर हाथ फेरता – “मुझे पता चल अपनी हालत। ठीक कर ले जल्दी। मैं थोड़ी देर पहले ही जीजा जी को घर आते देखा।”
दिलप्रीत ने जब यह सुना तो झटके से वह उठ कर बेड पर खड़ी हो गई – “क्या कहा वीर? एक बार फिर बोल।”
हैपी उसके माथे पर हल्का सा थप्पड़ मारता – “एक बार सुन तो लिया। मैंने कहा मेरी बहन तेरा यार आ गया। मैंने उन्हें घर आते देखा।”
दिलप्रीत – “वीर तुम्हें सच में बुरा नहीं लगा? मैं तो तुम्हें इतना रूड भी बोली हूँ। ऊपर से यह सब।” वह भी अब थोड़ी इमोशनल जैसी हो गई थी।
हैपी – “बुरा तो लगता है। यह कैसे हो सकता मुझे बुरा न लगे। लेकिन यह भी सच है यह सब मेरे बुरे कामों का फल है। दूसरा तुझे मैं तो रोका जो मैं खुद ठीक हो जाऊँ। चल छोड़ तू उन्हें फोन कर के अपनी मोटर पर बुला ले। वहाँ सेफ रहोगे।”
दिलप्रीत ने फोन निकाला और सिमर को अपनी मोटर पर बुला लिया। सिमर भी खुश हो गया। वह भी इतने दिनों का बिना चूत के शहर फँसा पड़ा था अपनी जमीन के केस में।
दिलप्रीत बाथरूम में गई और तैयार हो गई। पीले रंग का सूट में बहुत जच रही थी। मोटर उनके गाँव से बाहर थी।
दिलप्रीत मुँह नीचे कर के अपने होंठ टुकड़ते हुए – “वीर तुम्हारी मोटर गाँव से काफी दूर है। मैं वहाँ कैसे जाऊँ प्लीज मुझे छोड़ आओ प्लीज।”
हैपी – “चल ठीक है।”
हैपी दिलप्रीत को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर मोटर पर ले गया जहाँ सिमर पहले से ही उनकी वेट कर रहा था। अजीब वक्त चल रहा था – एक भाई खुद अपनी बहन चुदवाने के लिए अपने यार के पास ले कर आया था।
पहले 2 मिनट सब चुपचाप खड़े रहे। कौन पहले करे – किसी को समझ नहीं आ रहा था। आखिर हैपी ही बोल पड़ा – “जाओ यार तुम कब तक ऐसे खड़े रहोगे।” सिमर ने दिलप्रीत का हाथ पकड़ा और उसे ले कर मोटर वाले कमरे की तरफ चल पड़ा। दिलप्रीत सिर नीचे कर के पीछे-पीछे उसके चल पड़ी। हैपी को ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका कोई खिलौना कोई छीन ले गया हो और वह कुछ नहीं कर सकता। हैपी वहाँ से जाना चाहता था लेकिन उसे वेट करना पड़ रहा था अपनी छोटी बहन को वापस भी ले कर जाना था। क्योंकि सिमर पीछे बैठे देख लेते तो पंगा हो जाता।
हैपी पास ही पानी वाले पक्के ठिकाने पर बैठ गया।
अंदर जाते ही दिलप्रीत सिमर से चिपक गई। इतने दिनों की वह तड़पी पड़ी थी लंड लेने को। चुन्नी उतार कर उसने साइड में फेंक दी। मोटर वाले कमरे में 1 प्लास्टिक की कुर्सी और एक लंबा मंजा पड़ा था। बाकी खेती के सैंड सामान पड़े थे। जैसे आम मोटर वाले कमरे होते हैं। कमरे को हवादार बनाने के लिए दीवार में मोरी बनी हुई थी। 2 खिड़कियाँ लगी थीं जो टाइम के साथ टूट चुकी थीं।
हैपी ने देखा उसकी बहन ने अपना कमीज़ उतार दिया था। वह उसकी नंगी कमर और सलवार में खड़ी देख रहा था। बैठने की कोशिश करता अपने फोन में ध्यान लगाता कई और कोशिशें करता लेकिन जब सामने बहन चुद रही हो ध्यान और किसी तरफ कैसे जा सकता था।
अंदर दोनों एक-दूसरे को चूमते चूसते जा रहे थे। सिमर अभी जवान था – 19वें साल में ही था। उसका जोश दिख भी रहा था। चूमता चूसता दिलप्रीत की पीठ पर हाथ फेरता कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मार देता। अपने से 5 साल बड़ी लड़की को सिमर बड़े अच्छे तरीके से कंट्रोल करता था। यह बात तो हैपी भी मान गया था। सिमर ने उम्र का इतना फर्क था – दिलप्रीत 25वें साल में पीक वाली थी लेकिन अपने से छोटे यार के नीचे लगी उसकी गुलाम हो पड़ी थी। चूमते चूसते सिमर नंगा हो गया। ज्यादा एक्सरसाइज करने कर के मसल्स और ताकत नजर आ रहे थे। सिमर ने दिलप्रीत को नीचे अपने पैरों में बिठा दिया। दिलप्रीत अभी भी सलवार और काले रंग की ब्रा में थी। वह चुपचाप बैठ गई। पहले सिमर के लंड को मेहंदी वाले हाथों में पकड़ कर 2-4 बार हिलाया जो ढीला भी 4-5 इंच से ज्यादा लग रहा था। दिलप्रीत के पतले हाथों में आ कर हरकत में आने लगा। दिलप्रीत ने ढीला लंड ही अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लग पड़ी जो थोड़ी ही देर में इतना फूल गया कि उसके मुँह में भी नहीं आ रहा था। हैपी ने देखा कैसे उसकी बहन को सिमर एक रंडी जैसी इस्तेमाल कर रहा था। उसके वाले को पकड़ कर अपने लंड के चूसे मारवा रहा था। दिलप्रीत के मुँह से लार निकल रही थी। आँखों में पानी निकल रहा था लेकिन वह सिमर को रोक नहीं रही थी।
आखिर सिमर ने दिलप्रीत को खड़ा किया। उसकी ब्रा को पकड़ कर हल्के से खींचा तो उसकी ब्रा के हुक टूट गए। सिमर खड़े-खड़े उसके निप्पलों को बच्चे जैसा चूसने लगा। उसके निप्पल चूसता दाँतों से खींचते उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार पैरों में गिर पड़ी। अपनी कच्छी उतारने में दिलप्रीत ने कोई इंतजार नहीं किया और खुद ही अपनी कच्छी नीचे खिसका दी।
सिमर ने दिलप्रीत को कुर्सी पकड़ कर झुक जाने को कहा। दिलप्रीत जैसा सिमर कहता वैसा करती जा रही थी। बाहर हैपी अपना लंड मसलता अपनी बहन को मजा लेते देख रहा था। सिमर उसकी बहन के पीछे घुटनों पर बैठ गया और उसकी बड़ी गोरी-चिटी गांड में मुँह टून लिया। जैसे उसकी बहन की गांड सूँघ रहा हो। हैपी चूत तो चूसता था लेकिन यह सब उसने कभी नहीं किया था। सिमर तो दिलप्रीत के गोरे चिताड़ का दीवाना था। किधर-किधर जीभ फेरता चाट रहा था – उसे खुद नहीं पता था। हैपी अब समझ गया क्यों उसकी बहन सिमर के इतने नीचे लगी है। उसने सुना हुआ था अच्छे से चूसी औरत बंदे की गुलाम रहती है – यह अब वह खुद देख रहा था। दिलप्रीत को भी कुर्सी पकड़ कर खड़े रहना मुश्किल हो गया था। वह हैपी को परे करती दीवार से हाथ लगा कर झुक गई और पीछे मुँह कर के बोली – “बस कर अब आ जा। और सब्र नहीं होता।” और दोबारा मुँह आगे कर लिया। अचानक उसकी नजर दाहिने तरफ खिड़की वाली पड़ी। उसने देखा तो उसका बड़ा भाई कमरे वाली ही देख रहा था – कोई 40 फीट का फासला था। दिलप्रीत के 34B के झुके होने से झूलते मम्मे उसके भाई को साफ दिख रहे थे। अभी दोनों एक-दूसरे की तरफ देख ही रहे थे कि दिलप्रीत को पीछे से एक झटका लगा – सिमर के लंड का टोपा अंदर घुसते ही उसकी पहले एक चीख निकली और फिर उसने अपनी आँखों पर मुठ्ठी घूँसा ले लिया। उसने देखा लंड तो उसकी चूत में घुसा था। झटका उसके वजह से था लेकिन ऐसा लगता था यह झटके बाहर बैठा उसका बड़ा भाई भी महसूस कर सकता था। दिलप्रीत अभी नई-नई चुदने लगी थी। पहले 4-5 मिनट उसे दर्द होता रहा। जब पहली बार उसका पानी निकला तो चूत और गीली हो गई। बाद में तो उसे मजा ही आने लगा। वह खुद भी अपनी गांड पीछे कर के सिमर की मदद करने लग पड़ी। खड़े-खड़े झटके बर्दाश्त करती दिलप्रीत ने हैपी को आँखों से सिर से मंजे वाली इशारा किया। सिमर उसे लंड बाहर निकाले बिना ही मंजे पर ले आया। अब बाहर बैठे हैपी को सब दिखाई नहीं दे रहा था। वह सिर्फ हवा में ऊपर अपनी बहन की लतें देख सकता था जो सिमर के झटकों से लगातार हिल रही थीं और कभी पसीने से लथपथ सिमर जब वह उसकी बहन की लतें अपने कंधों पर रख स्पीड से हिल रहा था।
हैपी बड़े आराम से लंड मसलता यह सब देख रहा था कि उसके मूड पर ठप्पी लगी। जब घबराया ने पीछे मुड़ कर देखा तो पीछे उसकी अपनी बीवी मंजीत कौर उसके पीछे खड़ी उसकी तरफ गुस्से से देख रही थी।
जैसे आम होता है – जिस बंदे का बाहर वाली पर ज्यादा ध्यान हो वह घर में अपनी का खयाल नहीं रखता। यही बात मंजीत के साथ भी थी। हैपी ने हमेशा उसके साथ ऐसा किया था। कभी प्यार से 2 बातें नहीं। हर टाइम दूसरी औरतों पर ध्यान। मंजीत के साथ सेक्स बहुत कम हो गया था। वह बेचारी इस आग में तड़पती रहती और हैपी बाहर ऐश करता। 30 साल की उम्र, हल्का साँवला रंग, भरा हुआ शरीर था मंजीत का।
कहते हैं जवानी की आग बहुत खतरनाक होती है लेकिन यह कम ही मशहूर है कि औरत में सेक्स की असली आग 30 साल में भड़कती है।
मंजीत – “कुत्ते दस दिया है तेरी करतूतें गाँव में। ठा ठा मुँह मारता तू। आज आया तू नीचे। मुझे गल्लाँ काढ़ दा ज कुछ कहा तो हाथ चुकण लगे। मिनट नहीं लौंदा इथे बहन चुद दी देख रहा। चल घर तेरा काढ़ दी है जलूस।”
हैपी को समझ ही नहीं लगी यह हो क्या गया। उसने जल्दी से दरवाजा खोला जहाँ सिमर अब नीचे लेटा पड़ा था। उसके हाथ दिलप्रीत के मम्मों पर थे और दिलप्रीत उसके लंड पर बैठी तेजी से उछल रही थी।
अचानक ऐसे अपने भाई को देख सिमर को तो कोई फर्क नहीं पड़ा। दिलप्रीत एकदम डर गई और घबरा गई।
दिलप्रीत – “वीर यह क्या कर रहे हो? क्या हो गया तुम्हें अंदर क्यों आ गए?” और हाथों से अपने मम्मे ढक लिए।
हैपी – “पंगा हो गया यार। चल जल्दी कपड़े पहन घर जाना पड़ेगा। तेरी भाभी यहाँ आ गई थी। उसने सब देख लिया।”
सिमर – “तू जा। इसे मैं घर छोड़ दूँगा। ऐसे नहीं जा सकती। मेरा काम अभी नहीं हुआ।”
दिलप्रीत को पता था वह सिमर को नाराज नहीं करना चाहती थी। वह भी सिमर की हाँ में हाँ मिलाती – “तू घर जा वीर। भाभी को मना। कोई गलत कदम न चुके। बस प्यार से बात करी। आह्ह्ह्ह… सीईईई… ओवेई… प्लीज सिमर रुक जा 1 मिनट। हाँ तू नास ऐसा कर वीर। बाकी मैं मना लूँ भाभी को।” हैपी बौखलाया हुआ सिर हिलाता चला गया। सारे रास्ते यही सोचता रहा जिस औरत को उसने अपनी जूती के नीचे रखा था कभी रिस्पेक्ट नहीं दी उसे कैसे मनाए।
उधर सिमर को यह सब से कोई लेना-देना नहीं था। वह बस लगा हुआ था। दिलप्रीत कई बार उसे रिक्वेस्ट करती कि उसे घर जाने दे लेकिन बेटा पराया कहाँ मानने वाला था। नीचे आई रंडी बिना ठोके कैसे जाने देता। 2-3 घंटे पोजिशन बदल-बदल कर अच्छे से दिलप्रीत की तसल्ली करवाई और जब उसने गाँव के बाहर उसे बाइक से उतारा तो दिलप्रीत के पट्टों में चूत में खिंच रही थी। उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। जिसे एक्सपर्ट आँखें समझ सकती थीं। और यही कारण था कि उसकी भाभी को शक हुआ था और यही शक का पीछा करती वह मोटर पर आ गई थी। यह हैपी की किस्मत ही थी जब वह अपनी बहन के लिए पेनकिलर्स और एंटी प्रेग्नेंसी की गोलियाँ ले रहा था मंजीत भी मार्केट आई थी। वह तो सीधा मेडिकल स्टोर में चली गई लेकिन जब तक वह सड़क क्रॉस कर के वहाँ जाती हैपी निकल गया था और बातों-बातों में उसे हैपी के दोस्त जो मंजीत को भी जानता था उसने बता दिया कि हैपी क्या ले कर गया।
दिलप्रीत लंगड़ाती लंगड़ाती घर पहुँची तो उसे बाहर कोई नजर नहीं आया। वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
दिलप्रीत को जाते ही नींद आ गई। चूत मारवाने के बाद शरीर में हो रहे दर्द के साथ बहुत गहरी नींद सोई पड़ी थी कि उसे किसी ने हिलाया तो वह उठ पाई। उसने आँखें मलीं तो सामने उसकी भाभी खड़ी थी। हाथ में उसके चाय का कप था।
दिलप्रीत भाभी को ऐसे अपने सामने खड़ी देख कर घबरा गई। उसे समझ ही नहीं आ रहा था वह क्या करे क्या बोले। फिर डरते-डरते – “भ…भाभी तुम…यहाँ”
भाभी – “क्यों क्या हुआ नहीं आ सकती?”
दिलप्रीत – “नहीं ऐसा कोई बात नहीं…” फिर कुछ सोचते हुए भाभी के पैर पकड़ लिए – “मुझे माफ कर दो प्लीज किसी को न बताना। आगे से घर से बाहर नहीं जाती लेकिन प्लीज एक बार छोड़ दो।”
दोनों की आपस में काफी बनती थी नॉर्मली। उसने भी ज्यादा तंग नहीं किया और हँस पड़ी और बोली – “नहीं बताती। अगर बताना होता तो अब तक बता देती और तेरी यह गांड अब तक मार-मार डैडी जी ने लाल की होती। मैं तो तुझे चाय देने आई थी और उठाने आई थी कि उठ पहले ऐसे सोई रही तो शक हो जाएगा मम्मी को।” और तेरे तो मुझे सगो शुक्र करना चाहिए। तेरे कारण तेरा भाई मेरे नीचे आ गया। नहीं तो तुझे पता ही है कैसा है तेरा भाई।
दिलप्रीत – “हाँ भाभी मुझे पता है। बाहर मुँह मारता रहता है। तुम्हारी तरफ कभी ध्यान नहीं देता।”
भाभी – “हाँ। लेकिन आज तो आते ही तरले डालने लग पड़ा कि कोई पंगा न डाल जो कहूँगी करेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। अब बताओ इसे।”
फिर दोनों काफी देर बातें करने लग पड़ीं। दिलप्रीत ने भी सारी बात बता दी कि कैसे उसने सिमर से चूत मारवाई है और भाई बाहर देख रहा था।
भाभी – “तू भी बहुत तेज है। वैसे भोला-भाला लड़का अपने पीछे लगा लिया। मैं तो सुनी थी वह किसी लड़की की तरफ देखता भी नहीं। दूसरा तेरे से कितना छोटा है उम्र में।”
दिलप्रीत – “मैंने भी यही सुना था लेकिन जब उस दिन अपने घर ही साढ़ लिया। मैं भी चली गई यह सोच कर घर खराब कुछ करेगा। मेरी कई फ्रेंड्स जो उसके कॉलेज जाती हैं बताती थीं कि वह लड़कियों की तरफ कभी ध्यान नहीं देता। लड़ाई-झगड़े में आगे होता है। कोई लड़की बात करती भी है तो वहाँ से जान बचा कर भाग लेता। लेकिन कुत्ते ने घर बुला कर ऐसी रेल बना दी कि कानों को हाथ लगवा दिए। मसल ही पीर घसीट दी घर आई मैं दीवार का सहारा ले कर। ऊपर से भाई जी भी वहीं थे उसकी मम्मी के साथ। मुझे नहीं पता था इस सब का क्या-क्या चल रहा है। मैंने भी कोई परवाह नहीं की। सोचा कपड़े तो उतर ही चुके हैं जो होना है देखी जाए।” फिर दिलप्रीत उसे उस दिन से ले कर आज तक की सारी बात बताती गई।
दिलप्रीत – “अच्छा भाभी तुम मोटर से बहुत गुस्से में आई थीं। क्या कहता है भाई तुम्हें?”
भाभी – “कहना क्या था। माफियाँ माँगता था। पता था इसे कि अगर मैंने किसी को बता दिया तो यह बाहर मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। जो मैं चाहूँगी वही होगा। सबके सामने तो नहीं लेकिन बेडरूम में अब यह गुलाम ही रहेगा सारी उम्र। तुझे नहीं पता कितना दुखी किया है इस बंदे ने। कई बार बाहर का गुस्सा मेरे पर ही निकालता था। रात को नंगी कर के पीठ पर मुक्के मारता। जब चांस कोई घर न हो तो जूते से भी कूटता था मुझे। शराब पी कर, आवाज न कर सकूँ मुँह भी बंद कर देता यहने। कई बार तो बेड पर मेरा मूत निकल जाता था लेकिन यह बंदा नहीं सुधरा। अब सुधरेगा। मैं करूँगी ऐसा इलाज।”
दिलप्रीत – “जैसा तुम्हें अच्छा लगे भाभी उसका करो। बस मेरा खयाल जरूर रखना।”
“हा हा तू घबरा न। तू जो दिल करता करिया कर सेक्स के मामले में।” इतना कहते हुए वह चाय का कप उठा कर रसोई में चली गई।
दूसरी तरफ एक और तूफान चल रहा था जिसका सिमर को अता-पता भी नहीं था। उसके दोस्त गोपी के घर आज भी उसकी बड़ी बहन कर के कलेश पड़ा हुआ था। गोपी की बड़ी बहन संदीप जिसका विवाह कोई 1.5 साल पहले हुआ था फिर अपनी सास से लड़ कर घर आ गई थी। उसकी सास ने उसका जितना मुश्किल किया हुआ था। गोपी के पापा ने जमीन और पैसा देख कर अपनी बेटी संदीप का विवाह उससे बड़ी उम्र के लड़के से कर दिया था। संदीप खुद 27 साल की थी अब और उसका पति 36 साल का था। दिमाग से बिल्कुल पेडल। 2 बार नशा छुड़ाने सेंटर भी रह कर आया था। सेक्स के मामले में भी ठीक था। इतना चाहता नहीं था लेकिन फिर भी हफ्ते में 2-4 बार चोद ही लेता था संदीप को। अब वह अंदर से अंदर काफी पछताता था कि क्यों नशे की दलदल में फँस गया वह। संदीप की तरफ देख कर तरस भी आता था लेकिन चुप ही रहता था अपनी माँ के विरोध में साथ नहीं देता था।
काफी कोशिश कर चुके थे लेकिन अभी तक संदीप को प्रेग्नेंट नहीं कर पाया था वह। संदीप की सास ने तो विवाह के 2 महीने बाद ही उससे बच्चे की रट फाड़ ली थी। अब उसका सब्र टूटता जा रहा था। संदीप के साथ वह हर टाइम लड़ाई पड़ी रखती थी। संदीप को ले कर डॉक्टरों के पास घुमाती लेकिन अपने बेटे को कभी उसने कुछ नहीं कहा था। नॉर्मल अनपढ़ जट्ट फैमिली थी जो आम लोगों जैसी अभी भी यही मानते थे कि लड़के में कोई कमी नहीं हो सकती, जबकि असल में चिट्टे और और नशे कर के उसके स्पर्म इतने कमजोर थे कि प्रेग्नेंसी के चांस बहुत कम थे। बस जमीन ज्यादा होने कर के पैसों की कमी नहीं थी इसलिए वह ज्यादा चंबले हुए थे। बात अब बढ़ कर तलाक तक पहुँच गई थी।
गोपी उसके माँ-पापा उसकी दोनों बहनें सारा टबार परेशान हुआ पड़ा था। ऐसे ही रात का खाना खा कर माँ-बेटी दोनों 1 ही बेड पर लेटी पड़ी हल्की आवाज में गल्ल बातें कर रही थीं। गोपी टीवी देखता देखता पास ही सो गया था।
गोपी की माँ – “क्या सोचा कब जाना वापस ससुराल तू। यहाँ ऐसे कितने दिन बैठी रहेगी। कोई गड़बड़ न कर दें तेरी सास-ससुराल वाले। तेरा पापा भी कई बार पूछ चुका है।”
संदीप – “मेरा वापस जाने का दिल नहीं करता। वहाँ हर टाइम कलेश पड़ी रहती है वह।”
“तो फिर अब यहाँ थोड़ी बैठी रहना सारी उम्र” उसकी माँ खीज कर बोल पड़ी। उसका तो खाना नहीं लगता था जिसकी जवान बेटी घर बैठ जाए उसे टेंशन न होती।
फिर अचानक उसके दिमाग में खयाल आया। एक अजीब शैतानी स्माइल जैसी आ गई उसके होंठों पर। संदीप भी यह देख “क्या हुआ अब” लगता है कोई हल मिल गया तुम्हें।
“हाँ मिल गया हल। कहते हैं सीधी उँगली से न निकले तो टेढ़ी ही सही। और तेरे ससुराल वाले संत महात्मा हैं” संदीप की माँ बोली। इन बातों लगातार चलती पड़ी थीं कि गोपी भी उठ चुका था।
संदीप – “हाँ ठीक है लेकिन इसमें मेरा क्या लेना-देना। मेरा बच्चा कैसे होगा?”
“सब होगा तू देखी चल…” यह बता तेरा पुराना यार कहाँ है। कभी कोई फोन वगैरह पर बात हुई या नहीं जो तेरा खास था उसे मिल कर अपना काम करवा ले। किसी को पता लगना बस लड़का कोई जट्ट का ही हो। तेरा रंग साफ है लड़का काला जीसा न हो।” गोपी की माँ एक ही साँस में अपनी दिल की बात बोल गई।
अपनी माँ की बात सुन संदीप – “यह क्या कह रही हो। मेरा कोई यार नहीं है। नॉर्मल दोस्त होते थे लेकिन वह कोई जॉब करता कोई अब्रॉड चले गए हैं।” वैसे भी जो तुम्हारे दिमाग में अब आया मैं वह सोच चुकी हूँ। मुझे भी ऐसा कोई नहीं मिला। और बच्चे के लिए कम से कम उसके साथ 15-20 दिन सोना पड़ेगा। ऐसा कोई मेरे को नहीं पता।
“तू बस तैयार रह। लड़का तो ढूँढ लाऊँगी। जो न हुआ तो तेरे भाई का कोई दोस्त ही चल जाएगा। तू बस कल सुबह फोन कर के कह दे कि तू अगले महीने वापस आ रही है।” हँसते हुए कुलजीत कौर बोली। पढ़ी-लिखी थी वह भी सिमर की माँ के साथ टीचर थी लेकिन अब नहीं जॉब करती थी। उसे सब पता था कुलवंत और उसके यारों का उसकी सेक्स लाइफ का। कैसे कुलवंत आज तक गाँव में इज्जतदार बनी बैठी है और अपनी सेक्स लाइफ छुपा कर रखी है – इस बात का वह बड़ा लोहा मानती थी। पहले भी कोई प्रॉब्लम होती तो वह कुलवंत के पास ही जाती थी क्योंकि बात कोई भी हो उसका हल हमेशा उसकी सहेली के पास तैयार होता था। “कोई न कर दी। बात सुबह यह काम में होगी है। एक तो उसे सब पता होता है वह सब हल निकाल देगी। तू बस अपने ससुराल फोन कर दे सुबह।”
गोपी यह सोच कर सारी रात न सो सका कि उसका ही कोई यार कोई बगाना बेटा उसकी बहन को चोद कर प्रेग्नेंट करेगा। फिर यह सोच कर खुद को दिलासा दिया कि नेट पर कितना पढ़ा है कि बहन-भाई सेक्स तो कर सकते हैं लेकिन बच्चा पैदा करेंगे तो वह ठीक पैदा नहीं होते। ऐसे ही खुद को दिलासा दे कर शांत करता रहा वह।
कुलवंत और कुलजीत दोनों काफी सालों से एक-दूसरे को जानती थीं। जब कुलजीत ने अपनी बेटी की प्रॉब्लम कुलवंत को बताई तो उसने भी वही सलाह दी जो रात कुलजीत कौर के दिमाग में आई थी।
कुलवंत – “तू घबरा न। किसी को कुछ पता नहीं लगता। तू घर जा कर अपनी बेटी को सादी बाहर वाली मोटर पर भेज दे या हमारे घर छोड़ जावे। बाकी मैं देख लूँगी। पक्की जगह का इंतजाम मैं बाद में करवा लूँगी। रोज मोटर पर जाना ठीक नहीं रहेगा।”
कुलजीत ने पूछा भी कि लड़का कौन है लेकिन कुलवंत ने यह कह कर बात टाल दी कि टाइम आएगा तो बता दूँगी या तू अपनी बेटी से पूछ लेना। तू बस घर जा और जो कहा वह कर। बेटी का आज पहली बार है मोटर पर खुल कर करवा लूँगी। आवाजें सुनने वाला कोई नहीं होना वहाँ।
कुलजीत – “लड़का ठीक तो है न। कहीं बेटी को बाद में तंग न करे उसे ब्लैकमेल न करे। देख संदीप तेरी बेटी जैसी है। किसी गलत बंदे के नीचे न लग जाए।”
कुलवंत – “बंदा नहीं है 18-19 साल का जवान लड़का है। अपने गोपी जैसा जवान। पूरी आग में है। आज तो अपनी बेटी भेज जा। तेरा दिल करता बाद में तेरे ऊपर भी चढ़ा दूँगी उसे। वैसे भी पाजी की भी उम्र हो गई है। कहीं मजा देते होते तुझे अपनी तरफ देख लिया फिटी पड़ी है पूरी।”
कुलजीत – “दफा हो कुट्टी मजाक करती है। इधर मेरा दिल घबरा पड़ा है।” इतना कह कर वह अपने घर की तरफ चल पड़ी।
घर के अंदर गोपी भी बेचैन हुआ पड़ा था रात का सोच-सोच कर। जब पता हो बहन जीजा से अलावा किसी और के नीचे पड़ी है वह भी उसके किसी दोस्त के नीचे – टिकाई कहाँ लगनी थी। अपनी माँ की बातें सुन उसे यह पक्का यकीन था कि बहन को चुदवाने लगे उसकी माँ ज्यादा टाइम नहीं लगाएगी।
हुआ भी ऐसा ही। जब उसकी माँ घर आई तो उसने संदीप को कुछ कहा और संदीप अंदर चली गई।
कुलजीत – “बेटा मैं तेरी बहन को बस तक छोड़ने चली हूँ। उसे डॉक्टर के पास जाना है।”
गोपी – “मम्मी मैं ले जाना दीदी को अपनी मोटरसाइकिल पर। बस में कटो जाना।”
कुलजीत – “नहीं बस में ठीक रहेगा उसे। देर हो जानी। तू कहाँ उसके साथ परेशान होता रहेगा।”
इतने में संदीप अंदर से तैयार हो कर आ गई। अपनी आदत मुताबिक उसने आज भी पजामी सूट पहना हुआ था। ऑरेंज पजामी और हरे रंग का कुर्ता उसके ऊपर बहुत जच रहा था। नीचे सफेद ब्रा थी शायद यह गोपी ने अंदाजा लगाया क्योंकि शोल्डर से ब्रा की स्ट्रैप थोड़ी सी बाहर थी। लड़कों के लिए लड़कियों को स्कैन करना बड़ी बात नहीं होती। 1 मिनट में लड़की की तरफ देख कर बता देते हैं नीचे क्या पहना हुआ है। शायद बाल ज्यादा खुले थे इसलिए उसने रबर बैंड लगा लिया था। हाथ में छोटा पर्स था उसके। दोनों माँ-बेटी जल्दबाजी में घर से चली गईं।
कुछ 5 मिनट बैठा रहा गोपी। ऐसा लग रहा था उसे जैसे कोई उसका कोई खिलौना ले गया हो। फिर ऐसे ही एकदम झटके से उठा और मोटरसाइकिल पर बाहर निकल गया। मुँह पर उसने अपना परना आगे कर लिया था। 2 गलियाँ आगे उसे अपनी माँ अकेली वापस आती दिखाई दी। संदीप नहीं थी उसके साथ। उसने मोटरसाइकिल अपने गाँव के बस अड्डे वाली तरफ मोड़ ली। वहाँ अभी भी लोग खड़े बस की वेट कर रहे थे लेकिन संदीप वहाँ नहीं थी। इस बेचैनी में वह मोटरसाइकिल इधर-उधर घुमाने लग पड़ा। उसे समझ ही नहीं लगी कि इतनी जल्दी संदीप को कहाँ छोड़ आई उसकी माँ। हर आधे घंटे बाद जब वह घर की तरफ जा रहा था तो उसे मोटरसाइकिल पर जाती जोड़ी दिखाई दी। मोटरसाइकिल दूर थी साफ तो नजर नहीं आ रही थी लेकिन पीछे बैठी लड़की का सूट उसने पहचान लिया था या कह लो शक हो गया था दिमाग में। बाइक काफी तेज स्पीड में थी। जल्दी ही वह उसकी नजरों से भी दूर हो गई। काफी कोशिश की उसने लेकिन गोपी की मोटरसाइकिल उसका पीछा नहीं कर पाई।
अचानक ही उसके दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई जैसे इंजन चल रहा हो। उसने मोटरसाइकिल गाँव से बाहर वाली तरफ मोड़ ली और प्रार्थना करने लगा कि रब्बा हाथ जोड़ता जो दिमाग में अभी आया सच न हो। एक जगह जा कर उसने बाइक अपनी साइड में लगा दी। अभी भी उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। हाथ उसके काँपने लग गए थे। वह डब्बे पैर चल पड़ा। गाँव से काफी दूर थी यह जगह। घाट ही आते-जाते थे लोग यहाँ। वही हुआ जिसका उसे डर था। वही मोटरसाइकिल हवेली के अंदर लगी पड़ी थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि जो आज होने जा रहा था।
 

tera hero

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Bhai Kulwant ne apne bete se bhi chudwa liya. Aur ek kunwari chut bhi dilwa di. Ab aise hi kahi sardarniya mil jaye. To maja aa jaye. Aur sardarniya ke liye beautiful Punjabi model ke photo bhi rakho. Aur komal ko heroine bana do. Simar bhai hero Komal behen heroine maja aayega. Ab us sir ki behen bhi chode us master ke samne. Aur happy ki biwi bhi chudni chahiye. Kyonki happy ne Kulwant ko choda to sabse badi chot happy ke liye uski biwi Simar ke niche aayegi tab hogi.
Bro bas tum dekhte jao kya kya hota hai aur like comment karte raho
Update posted
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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♣️ Update 6 ♣️

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अपने भाई को सबक सिखा कर। उसका भाई हमेशा उस पर पाबंदियाँ लगाता था लेकिन खुद नई से नई लड़की के साथ रिलेशन रखता था।
दूसरी तरफ सिमर और उसकी माँ भी खुश थे। उनका बदला पूरा हो गया था।

Ab next

हैपी को गुस्सा तो बहुत आ रहा था फिर भी वह कुछ नहीं कर सकता था। उसके सामने बैठी बड़े आराम से टीवी देख रही थी। उसने अपने पट्टों के नीचे तकिया रखा हुआ था। हैपी ने काफी कुंवारी लड़कियाँ चोदी थीं। उसे पता था उसकी बहन की क्या हालत है – पट्टों में चूत में दर्द रह रहा होगा अब 1-2 दिन। आज तक उसने दूसरों की औरतें चोदी थीं। आज अपनी खुद की बहन चुद कर घर आई थी तो उसे बुरा लग रहा था। वह हैरान भी था कि उसने रोका क्यों नहीं सिमर को जब सिमर उसकी छोटी बहन को चोद रहा था। अभी यही सोच में घूम था कि उसके फोन पर दिलप्रीत का मैसेज आया – “प्लीज वीर सोचना बंद करो। मैं पेन किलर लिया कर दे दो। बहुत दर्द हो रही है और आगे के लिए सॉरी। तुम्हारे साथ ठीक तरह बात नहीं की। मुझे गुस्सा आ गया था। एक तो दर्द हो रही थी पूरे शरीर में। सिमर ने जान ही निकाल दी आज तो।”
हैपी – “कोई बात नहीं लेकिन आगे से ध्यान से। जबान को कंट्रोल में रख। कोई सुन लेता तो फिर…”
दिलप्रीत – “अच्छा जी ठीक है अब जाओ भी। और डॉक्टर से पेन किलर्स के साथ पिल्स ले आओ जो रेगुलर लेने की होती हैं प्रेग्नेंसी रोकने के लिए। सिमर कंडोम यूज नहीं करता। वह कहता है मजा नहीं आता। मुझे नहीं लगता आगे भी वह कंडोम यूज करेगा।”
हैपी – “क्या मतलब तेरा? अगली बार भी वह नहीं करेगा। तू फिर जाने वाली है उसके पास। और तू तो कह रही थी उसने बहुत बुरी तरह किया तेरे साथ।”
दिलप्रीत – “ले तुम भी कमाल करते हो वीर जी। यह तो होता ही है। तुम्हें तो ज्यादा पता – इतनी औरतों से तुम्हारे रिलेशन हैं। आज पहली बार थी तुम्हारी बहन का – इतना दर्द तो होना ही था। और तुम रोके न। जब तक मेरा विवाह नहीं होता तब तक तुम सिमर को ही अपना जीजा मान कर चलो।” इससे उसने स्माइलिंग वाली इमोजी अपने बड़े भाई को भेज दी।
हैपी – “मुझे पता है तू मानना तो है नहीं। लत ही ऐसी लग जाती है। एक बार लग गई फिर नहीं छूटती। बाकी ध्यान रख। बात बाहर न जाए। चल अच्छा मैं आया बाजार से ले कर।”
इतना कह कर हैपी मार्केट चला गया। वहाँ अपने मेडिकल स्टोर वाले दोस्त से पेन किलर और यह कह कर प्रेग्नेंसी रोकने वाली गोलियाँ ले लीं कि अपनी बीवी के लिए हैं – कंडोम से मजा नहीं आता और अभी बच्चा नहीं करना।
ऐसे ही दिन गुजरते गए। सिमर भी अब खुल कर हैपी के सामने आ गया था। हैपी भी अपनी हार मान चुका था। वह खुद घर-परिवार वाला आदमी था। कोई गलत कदम तो उठा नहीं सकता था जिससे वह कोई मुसीबत में फँसे। इसलिए वह भी हैपी और अपनी बहन का साथ देने लग पड़ा था। बल्कि उसे मजा भी आने लगा था।
पहले-पहले तो ठीक था लेकिन अब दिलप्रीत बहुत खुलती जा रही थी। उसके अंदर सेक्स की आग दिनोदिन कंट्रोल से बाहर होती जा रही थी। चूत मारवाए बिना उसे नींद नहीं आती थी। जैसे नशा करने वाले का हाल होता है – वही हाल दिलप्रीत का था। 7-8 दिन से सिमर भी बाहर गया था। जब वह घर आया ही था हैपी ने उसे घर आते देख लिया। पिछले 7-8 दिनों में अपनी बहन की बुरी हालत हैपी से भी देखी नहीं गई। उसने जा कर दिलप्रीत के कमरे में देखा तो उसकी बहन बेड पर लेटी पड़ी थी। पास ही बेड पर कपड़े बिखरे पड़े थे। बाल उसके खुले पड़े थे। शायद नहा कर निकली थी। उसने दिलप्रीत को हिलाया तो आगे बढ़ कर वह टूट कर पड़ गई – “क्या हुआ क्यों तंग कर रहा है। नींद न खराब कर वीर प्लीज जा। मैं ठीक नहीं हूँ।”
हैपी आगे बढ़ कर गुस्से की जगह प्यार से उसके सिर और माथे पर हाथ फेरता – “मुझे पता चल अपनी हालत। ठीक कर ले जल्दी। मैं थोड़ी देर पहले ही जीजा जी को घर आते देखा।”
दिलप्रीत ने जब यह सुना तो झटके से वह उठ कर बेड पर खड़ी हो गई – “क्या कहा वीर? एक बार फिर बोल।”
हैपी उसके माथे पर हल्का सा थप्पड़ मारता – “एक बार सुन तो लिया। मैंने कहा मेरी बहन तेरा यार आ गया। मैंने उन्हें घर आते देखा।”
दिलप्रीत – “वीर तुम्हें सच में बुरा नहीं लगा? मैं तो तुम्हें इतना रूड भी बोली हूँ। ऊपर से यह सब।” वह भी अब थोड़ी इमोशनल जैसी हो गई थी।
हैपी – “बुरा तो लगता है। यह कैसे हो सकता मुझे बुरा न लगे। लेकिन यह भी सच है यह सब मेरे बुरे कामों का फल है। दूसरा तुझे मैं तो रोका जो मैं खुद ठीक हो जाऊँ। चल छोड़ तू उन्हें फोन कर के अपनी मोटर पर बुला ले। वहाँ सेफ रहोगे।”
दिलप्रीत ने फोन निकाला और सिमर को अपनी मोटर पर बुला लिया। सिमर भी खुश हो गया। वह भी इतने दिनों का बिना चूत के शहर फँसा पड़ा था अपनी जमीन के केस में।
दिलप्रीत बाथरूम में गई और तैयार हो गई। पीले रंग का सूट में बहुत जच रही थी। मोटर उनके गाँव से बाहर थी।
दिलप्रीत मुँह नीचे कर के अपने होंठ टुकड़ते हुए – “वीर तुम्हारी मोटर गाँव से काफी दूर है। मैं वहाँ कैसे जाऊँ प्लीज मुझे छोड़ आओ प्लीज।”
हैपी – “चल ठीक है।”
हैपी दिलप्रीत को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर मोटर पर ले गया जहाँ सिमर पहले से ही उनकी वेट कर रहा था। अजीब वक्त चल रहा था – एक भाई खुद अपनी बहन चुदवाने के लिए अपने यार के पास ले कर आया था।
पहले 2 मिनट सब चुपचाप खड़े रहे। कौन पहले करे – किसी को समझ नहीं आ रहा था। आखिर हैपी ही बोल पड़ा – “जाओ यार तुम कब तक ऐसे खड़े रहोगे।” सिमर ने दिलप्रीत का हाथ पकड़ा और उसे ले कर मोटर वाले कमरे की तरफ चल पड़ा। दिलप्रीत सिर नीचे कर के पीछे-पीछे उसके चल पड़ी। हैपी को ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका कोई खिलौना कोई छीन ले गया हो और वह कुछ नहीं कर सकता। हैपी वहाँ से जाना चाहता था लेकिन उसे वेट करना पड़ रहा था अपनी छोटी बहन को वापस भी ले कर जाना था। क्योंकि सिमर पीछे बैठे देख लेते तो पंगा हो जाता।
हैपी पास ही पानी वाले पक्के ठिकाने पर बैठ गया।
अंदर जाते ही दिलप्रीत सिमर से चिपक गई। इतने दिनों की वह तड़पी पड़ी थी लंड लेने को। चुन्नी उतार कर उसने साइड में फेंक दी। मोटर वाले कमरे में 1 प्लास्टिक की कुर्सी और एक लंबा मंजा पड़ा था। बाकी खेती के सैंड सामान पड़े थे। जैसे आम मोटर वाले कमरे होते हैं। कमरे को हवादार बनाने के लिए दीवार में मोरी बनी हुई थी। 2 खिड़कियाँ लगी थीं जो टाइम के साथ टूट चुकी थीं।
हैपी ने देखा उसकी बहन ने अपना कमीज़ उतार दिया था। वह उसकी नंगी कमर और सलवार में खड़ी देख रहा था। बैठने की कोशिश करता अपने फोन में ध्यान लगाता कई और कोशिशें करता लेकिन जब सामने बहन चुद रही हो ध्यान और किसी तरफ कैसे जा सकता था।
अंदर दोनों एक-दूसरे को चूमते चूसते जा रहे थे। सिमर अभी जवान था – 19वें साल में ही था। उसका जोश दिख भी रहा था। चूमता चूसता दिलप्रीत की पीठ पर हाथ फेरता कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मार देता। अपने से 5 साल बड़ी लड़की को सिमर बड़े अच्छे तरीके से कंट्रोल करता था। यह बात तो हैपी भी मान गया था। सिमर ने उम्र का इतना फर्क था – दिलप्रीत 25वें साल में पीक वाली थी लेकिन अपने से छोटे यार के नीचे लगी उसकी गुलाम हो पड़ी थी। चूमते चूसते सिमर नंगा हो गया। ज्यादा एक्सरसाइज करने कर के मसल्स और ताकत नजर आ रहे थे। सिमर ने दिलप्रीत को नीचे अपने पैरों में बिठा दिया। दिलप्रीत अभी भी सलवार और काले रंग की ब्रा में थी। वह चुपचाप बैठ गई। पहले सिमर के लंड को मेहंदी वाले हाथों में पकड़ कर 2-4 बार हिलाया जो ढीला भी 4-5 इंच से ज्यादा लग रहा था। दिलप्रीत के पतले हाथों में आ कर हरकत में आने लगा। दिलप्रीत ने ढीला लंड ही अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लग पड़ी जो थोड़ी ही देर में इतना फूल गया कि उसके मुँह में भी नहीं आ रहा था। हैपी ने देखा कैसे उसकी बहन को सिमर एक रंडी जैसी इस्तेमाल कर रहा था। उसके वाले को पकड़ कर अपने लंड के चूसे मारवा रहा था। दिलप्रीत के मुँह से लार निकल रही थी। आँखों में पानी निकल रहा था लेकिन वह सिमर को रोक नहीं रही थी।
आखिर सिमर ने दिलप्रीत को खड़ा किया। उसकी ब्रा को पकड़ कर हल्के से खींचा तो उसकी ब्रा के हुक टूट गए। सिमर खड़े-खड़े उसके निप्पलों को बच्चे जैसा चूसने लगा। उसके निप्पल चूसता दाँतों से खींचते उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार पैरों में गिर पड़ी। अपनी कच्छी उतारने में दिलप्रीत ने कोई इंतजार नहीं किया और खुद ही अपनी कच्छी नीचे खिसका दी।
सिमर ने दिलप्रीत को कुर्सी पकड़ कर झुक जाने को कहा। दिलप्रीत जैसा सिमर कहता वैसा करती जा रही थी। बाहर हैपी अपना लंड मसलता अपनी बहन को मजा लेते देख रहा था। सिमर उसकी बहन के पीछे घुटनों पर बैठ गया और उसकी बड़ी गोरी-चिटी गांड में मुँह टून लिया। जैसे उसकी बहन की गांड सूँघ रहा हो। हैपी चूत तो चूसता था लेकिन यह सब उसने कभी नहीं किया था। सिमर तो दिलप्रीत के गोरे चिताड़ का दीवाना था। किधर-किधर जीभ फेरता चाट रहा था – उसे खुद नहीं पता था। हैपी अब समझ गया क्यों उसकी बहन सिमर के इतने नीचे लगी है। उसने सुना हुआ था अच्छे से चूसी औरत बंदे की गुलाम रहती है – यह अब वह खुद देख रहा था। दिलप्रीत को भी कुर्सी पकड़ कर खड़े रहना मुश्किल हो गया था। वह हैपी को परे करती दीवार से हाथ लगा कर झुक गई और पीछे मुँह कर के बोली – “बस कर अब आ जा। और सब्र नहीं होता।” और दोबारा मुँह आगे कर लिया। अचानक उसकी नजर दाहिने तरफ खिड़की वाली पड़ी। उसने देखा तो उसका बड़ा भाई कमरे वाली ही देख रहा था – कोई 40 फीट का फासला था। दिलप्रीत के 34B के झुके होने से झूलते मम्मे उसके भाई को साफ दिख रहे थे। अभी दोनों एक-दूसरे की तरफ देख ही रहे थे कि दिलप्रीत को पीछे से एक झटका लगा – सिमर के लंड का टोपा अंदर घुसते ही उसकी पहले एक चीख निकली और फिर उसने अपनी आँखों पर मुठ्ठी घूँसा ले लिया। उसने देखा लंड तो उसकी चूत में घुसा था। झटका उसके वजह से था लेकिन ऐसा लगता था यह झटके बाहर बैठा उसका बड़ा भाई भी महसूस कर सकता था। दिलप्रीत अभी नई-नई चुदने लगी थी। पहले 4-5 मिनट उसे दर्द होता रहा। जब पहली बार उसका पानी निकला तो चूत और गीली हो गई। बाद में तो उसे मजा ही आने लगा। वह खुद भी अपनी गांड पीछे कर के सिमर की मदद करने लग पड़ी। खड़े-खड़े झटके बर्दाश्त करती दिलप्रीत ने हैपी को आँखों से सिर से मंजे वाली इशारा किया। सिमर उसे लंड बाहर निकाले बिना ही मंजे पर ले आया। अब बाहर बैठे हैपी को सब दिखाई नहीं दे रहा था। वह सिर्फ हवा में ऊपर अपनी बहन की लतें देख सकता था जो सिमर के झटकों से लगातार हिल रही थीं और कभी पसीने से लथपथ सिमर जब वह उसकी बहन की लतें अपने कंधों पर रख स्पीड से हिल रहा था।
हैपी बड़े आराम से लंड मसलता यह सब देख रहा था कि उसके मूड पर ठप्पी लगी। जब घबराया ने पीछे मुड़ कर देखा तो पीछे उसकी अपनी बीवी मंजीत कौर उसके पीछे खड़ी उसकी तरफ गुस्से से देख रही थी।
जैसे आम होता है – जिस बंदे का बाहर वाली पर ज्यादा ध्यान हो वह घर में अपनी का खयाल नहीं रखता। यही बात मंजीत के साथ भी थी। हैपी ने हमेशा उसके साथ ऐसा किया था। कभी प्यार से 2 बातें नहीं। हर टाइम दूसरी औरतों पर ध्यान। मंजीत के साथ सेक्स बहुत कम हो गया था। वह बेचारी इस आग में तड़पती रहती और हैपी बाहर ऐश करता। 30 साल की उम्र, हल्का साँवला रंग, भरा हुआ शरीर था मंजीत का।
कहते हैं जवानी की आग बहुत खतरनाक होती है लेकिन यह कम ही मशहूर है कि औरत में सेक्स की असली आग 30 साल में भड़कती है।
मंजीत – “कुत्ते दस दिया है तेरी करतूतें गाँव में। ठा ठा मुँह मारता तू। आज आया तू नीचे। मुझे गल्लाँ काढ़ दा ज कुछ कहा तो हाथ चुकण लगे। मिनट नहीं लौंदा इथे बहन चुद दी देख रहा। चल घर तेरा काढ़ दी है जलूस।”
हैपी को समझ ही नहीं लगी यह हो क्या गया। उसने जल्दी से दरवाजा खोला जहाँ सिमर अब नीचे लेटा पड़ा था। उसके हाथ दिलप्रीत के मम्मों पर थे और दिलप्रीत उसके लंड पर बैठी तेजी से उछल रही थी।
अचानक ऐसे अपने भाई को देख सिमर को तो कोई फर्क नहीं पड़ा। दिलप्रीत एकदम डर गई और घबरा गई।
दिलप्रीत – “वीर यह क्या कर रहे हो? क्या हो गया तुम्हें अंदर क्यों आ गए?” और हाथों से अपने मम्मे ढक लिए।
हैपी – “पंगा हो गया यार। चल जल्दी कपड़े पहन घर जाना पड़ेगा। तेरी भाभी यहाँ आ गई थी। उसने सब देख लिया।”
सिमर – “तू जा। इसे मैं घर छोड़ दूँगा। ऐसे नहीं जा सकती। मेरा काम अभी नहीं हुआ।”
दिलप्रीत को पता था वह सिमर को नाराज नहीं करना चाहती थी। वह भी सिमर की हाँ में हाँ मिलाती – “तू घर जा वीर। भाभी को मना। कोई गलत कदम न चुके। बस प्यार से बात करी। आह्ह्ह्ह… सीईईई… ओवेई… प्लीज सिमर रुक जा 1 मिनट। हाँ तू नास ऐसा कर वीर। बाकी मैं मना लूँ भाभी को।” हैपी बौखलाया हुआ सिर हिलाता चला गया। सारे रास्ते यही सोचता रहा जिस औरत को उसने अपनी जूती के नीचे रखा था कभी रिस्पेक्ट नहीं दी उसे कैसे मनाए।
उधर सिमर को यह सब से कोई लेना-देना नहीं था। वह बस लगा हुआ था। दिलप्रीत कई बार उसे रिक्वेस्ट करती कि उसे घर जाने दे लेकिन बेटा पराया कहाँ मानने वाला था। नीचे आई रंडी बिना ठोके कैसे जाने देता। 2-3 घंटे पोजिशन बदल-बदल कर अच्छे से दिलप्रीत की तसल्ली करवाई और जब उसने गाँव के बाहर उसे बाइक से उतारा तो दिलप्रीत के पट्टों में चूत में खिंच रही थी। उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। जिसे एक्सपर्ट आँखें समझ सकती थीं। और यही कारण था कि उसकी भाभी को शक हुआ था और यही शक का पीछा करती वह मोटर पर आ गई थी। यह हैपी की किस्मत ही थी जब वह अपनी बहन के लिए पेनकिलर्स और एंटी प्रेग्नेंसी की गोलियाँ ले रहा था मंजीत भी मार्केट आई थी। वह तो सीधा मेडिकल स्टोर में चली गई लेकिन जब तक वह सड़क क्रॉस कर के वहाँ जाती हैपी निकल गया था और बातों-बातों में उसे हैपी के दोस्त जो मंजीत को भी जानता था उसने बता दिया कि हैपी क्या ले कर गया।
दिलप्रीत लंगड़ाती लंगड़ाती घर पहुँची तो उसे बाहर कोई नजर नहीं आया। वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
दिलप्रीत को जाते ही नींद आ गई। चूत मारवाने के बाद शरीर में हो रहे दर्द के साथ बहुत गहरी नींद सोई पड़ी थी कि उसे किसी ने हिलाया तो वह उठ पाई। उसने आँखें मलीं तो सामने उसकी भाभी खड़ी थी। हाथ में उसके चाय का कप था।
दिलप्रीत भाभी को ऐसे अपने सामने खड़ी देख कर घबरा गई। उसे समझ ही नहीं आ रहा था वह क्या करे क्या बोले। फिर डरते-डरते – “भ…भाभी तुम…यहाँ”
भाभी – “क्यों क्या हुआ नहीं आ सकती?”
दिलप्रीत – “नहीं ऐसा कोई बात नहीं…” फिर कुछ सोचते हुए भाभी के पैर पकड़ लिए – “मुझे माफ कर दो प्लीज किसी को न बताना। आगे से घर से बाहर नहीं जाती लेकिन प्लीज एक बार छोड़ दो।”
दोनों की आपस में काफी बनती थी नॉर्मली। उसने भी ज्यादा तंग नहीं किया और हँस पड़ी और बोली – “नहीं बताती। अगर बताना होता तो अब तक बता देती और तेरी यह गांड अब तक मार-मार डैडी जी ने लाल की होती। मैं तो तुझे चाय देने आई थी और उठाने आई थी कि उठ पहले ऐसे सोई रही तो शक हो जाएगा मम्मी को।” और तेरे तो मुझे सगो शुक्र करना चाहिए। तेरे कारण तेरा भाई मेरे नीचे आ गया। नहीं तो तुझे पता ही है कैसा है तेरा भाई।
दिलप्रीत – “हाँ भाभी मुझे पता है। बाहर मुँह मारता रहता है। तुम्हारी तरफ कभी ध्यान नहीं देता।”
भाभी – “हाँ। लेकिन आज तो आते ही तरले डालने लग पड़ा कि कोई पंगा न डाल जो कहूँगी करेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। अब बताओ इसे।”
फिर दोनों काफी देर बातें करने लग पड़ीं। दिलप्रीत ने भी सारी बात बता दी कि कैसे उसने सिमर से चूत मारवाई है और भाई बाहर देख रहा था।
भाभी – “तू भी बहुत तेज है। वैसे भोला-भाला लड़का अपने पीछे लगा लिया। मैं तो सुनी थी वह किसी लड़की की तरफ देखता भी नहीं। दूसरा तेरे से कितना छोटा है उम्र में।”
दिलप्रीत – “मैंने भी यही सुना था लेकिन जब उस दिन अपने घर ही साढ़ लिया। मैं भी चली गई यह सोच कर घर खराब कुछ करेगा। मेरी कई फ्रेंड्स जो उसके कॉलेज जाती हैं बताती थीं कि वह लड़कियों की तरफ कभी ध्यान नहीं देता। लड़ाई-झगड़े में आगे होता है। कोई लड़की बात करती भी है तो वहाँ से जान बचा कर भाग लेता। लेकिन कुत्ते ने घर बुला कर ऐसी रेल बना दी कि कानों को हाथ लगवा दिए। मसल ही पीर घसीट दी घर आई मैं दीवार का सहारा ले कर। ऊपर से भाई जी भी वहीं थे उसकी मम्मी के साथ। मुझे नहीं पता था इस सब का क्या-क्या चल रहा है। मैंने भी कोई परवाह नहीं की। सोचा कपड़े तो उतर ही चुके हैं जो होना है देखी जाए।” फिर दिलप्रीत उसे उस दिन से ले कर आज तक की सारी बात बताती गई।
दिलप्रीत – “अच्छा भाभी तुम मोटर से बहुत गुस्से में आई थीं। क्या कहता है भाई तुम्हें?”
भाभी – “कहना क्या था। माफियाँ माँगता था। पता था इसे कि अगर मैंने किसी को बता दिया तो यह बाहर मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगा। अब आया मेरी लत के नीचे। जो मैं चाहूँगी वही होगा। सबके सामने तो नहीं लेकिन बेडरूम में अब यह गुलाम ही रहेगा सारी उम्र। तुझे नहीं पता कितना दुखी किया है इस बंदे ने। कई बार बाहर का गुस्सा मेरे पर ही निकालता था। रात को नंगी कर के पीठ पर मुक्के मारता। जब चांस कोई घर न हो तो जूते से भी कूटता था मुझे। शराब पी कर, आवाज न कर सकूँ मुँह भी बंद कर देता यहने। कई बार तो बेड पर मेरा मूत निकल जाता था लेकिन यह बंदा नहीं सुधरा। अब सुधरेगा। मैं करूँगी ऐसा इलाज।”
दिलप्रीत – “जैसा तुम्हें अच्छा लगे भाभी उसका करो। बस मेरा खयाल जरूर रखना।”
“हा हा तू घबरा न। तू जो दिल करता करिया कर सेक्स के मामले में।” इतना कहते हुए वह चाय का कप उठा कर रसोई में चली गई।
दूसरी तरफ एक और तूफान चल रहा था जिसका सिमर को अता-पता भी नहीं था। उसके दोस्त गोपी के घर आज भी उसकी बड़ी बहन कर के कलेश पड़ा हुआ था। गोपी की बड़ी बहन संदीप जिसका विवाह कोई 1.5 साल पहले हुआ था फिर अपनी सास से लड़ कर घर आ गई थी। उसकी सास ने उसका जितना मुश्किल किया हुआ था। गोपी के पापा ने जमीन और पैसा देख कर अपनी बेटी संदीप का विवाह उससे बड़ी उम्र के लड़के से कर दिया था। संदीप खुद 27 साल की थी अब और उसका पति 36 साल का था। दिमाग से बिल्कुल पेडल। 2 बार नशा छुड़ाने सेंटर भी रह कर आया था। सेक्स के मामले में भी ठीक था। इतना चाहता नहीं था लेकिन फिर भी हफ्ते में 2-4 बार चोद ही लेता था संदीप को। अब वह अंदर से अंदर काफी पछताता था कि क्यों नशे की दलदल में फँस गया वह। संदीप की तरफ देख कर तरस भी आता था लेकिन चुप ही रहता था अपनी माँ के विरोध में साथ नहीं देता था।
काफी कोशिश कर चुके थे लेकिन अभी तक संदीप को प्रेग्नेंट नहीं कर पाया था वह। संदीप की सास ने तो विवाह के 2 महीने बाद ही उससे बच्चे की रट फाड़ ली थी। अब उसका सब्र टूटता जा रहा था। संदीप के साथ वह हर टाइम लड़ाई पड़ी रखती थी। संदीप को ले कर डॉक्टरों के पास घुमाती लेकिन अपने बेटे को कभी उसने कुछ नहीं कहा था। नॉर्मल अनपढ़ जट्ट फैमिली थी जो आम लोगों जैसी अभी भी यही मानते थे कि लड़के में कोई कमी नहीं हो सकती, जबकि असल में चिट्टे और और नशे कर के उसके स्पर्म इतने कमजोर थे कि प्रेग्नेंसी के चांस बहुत कम थे। बस जमीन ज्यादा होने कर के पैसों की कमी नहीं थी इसलिए वह ज्यादा चंबले हुए थे। बात अब बढ़ कर तलाक तक पहुँच गई थी।
गोपी उसके माँ-पापा उसकी दोनों बहनें सारा टबार परेशान हुआ पड़ा था। ऐसे ही रात का खाना खा कर माँ-बेटी दोनों 1 ही बेड पर लेटी पड़ी हल्की आवाज में गल्ल बातें कर रही थीं। गोपी टीवी देखता देखता पास ही सो गया था।
गोपी की माँ – “क्या सोचा कब जाना वापस ससुराल तू। यहाँ ऐसे कितने दिन बैठी रहेगी। कोई गड़बड़ न कर दें तेरी सास-ससुराल वाले। तेरा पापा भी कई बार पूछ चुका है।”
संदीप – “मेरा वापस जाने का दिल नहीं करता। वहाँ हर टाइम कलेश पड़ी रहती है वह।”
“तो फिर अब यहाँ थोड़ी बैठी रहना सारी उम्र” उसकी माँ खीज कर बोल पड़ी। उसका तो खाना नहीं लगता था जिसकी जवान बेटी घर बैठ जाए उसे टेंशन न होती।
फिर अचानक उसके दिमाग में खयाल आया। एक अजीब शैतानी स्माइल जैसी आ गई उसके होंठों पर। संदीप भी यह देख “क्या हुआ अब” लगता है कोई हल मिल गया तुम्हें।
“हाँ मिल गया हल। कहते हैं सीधी उँगली से न निकले तो टेढ़ी ही सही। और तेरे ससुराल वाले संत महात्मा हैं” संदीप की माँ बोली। इन बातों लगातार चलती पड़ी थीं कि गोपी भी उठ चुका था।
संदीप – “हाँ ठीक है लेकिन इसमें मेरा क्या लेना-देना। मेरा बच्चा कैसे होगा?”
“सब होगा तू देखी चल…” यह बता तेरा पुराना यार कहाँ है। कभी कोई फोन वगैरह पर बात हुई या नहीं जो तेरा खास था उसे मिल कर अपना काम करवा ले। किसी को पता लगना बस लड़का कोई जट्ट का ही हो। तेरा रंग साफ है लड़का काला जीसा न हो।” गोपी की माँ एक ही साँस में अपनी दिल की बात बोल गई।
अपनी माँ की बात सुन संदीप – “यह क्या कह रही हो। मेरा कोई यार नहीं है। नॉर्मल दोस्त होते थे लेकिन वह कोई जॉब करता कोई अब्रॉड चले गए हैं।” वैसे भी जो तुम्हारे दिमाग में अब आया मैं वह सोच चुकी हूँ। मुझे भी ऐसा कोई नहीं मिला। और बच्चे के लिए कम से कम उसके साथ 15-20 दिन सोना पड़ेगा। ऐसा कोई मेरे को नहीं पता।
“तू बस तैयार रह। लड़का तो ढूँढ लाऊँगी। जो न हुआ तो तेरे भाई का कोई दोस्त ही चल जाएगा। तू बस कल सुबह फोन कर के कह दे कि तू अगले महीने वापस आ रही है।” हँसते हुए कुलजीत कौर बोली। पढ़ी-लिखी थी वह भी सिमर की माँ के साथ टीचर थी लेकिन अब नहीं जॉब करती थी। उसे सब पता था कुलवंत और उसके यारों का उसकी सेक्स लाइफ का। कैसे कुलवंत आज तक गाँव में इज्जतदार बनी बैठी है और अपनी सेक्स लाइफ छुपा कर रखी है – इस बात का वह बड़ा लोहा मानती थी। पहले भी कोई प्रॉब्लम होती तो वह कुलवंत के पास ही जाती थी क्योंकि बात कोई भी हो उसका हल हमेशा उसकी सहेली के पास तैयार होता था। “कोई न कर दी। बात सुबह यह काम में होगी है। एक तो उसे सब पता होता है वह सब हल निकाल देगी। तू बस अपने ससुराल फोन कर दे सुबह।”
गोपी यह सोच कर सारी रात न सो सका कि उसका ही कोई यार कोई बगाना बेटा उसकी बहन को चोद कर प्रेग्नेंट करेगा। फिर यह सोच कर खुद को दिलासा दिया कि नेट पर कितना पढ़ा है कि बहन-भाई सेक्स तो कर सकते हैं लेकिन बच्चा पैदा करेंगे तो वह ठीक पैदा नहीं होते। ऐसे ही खुद को दिलासा दे कर शांत करता रहा वह।
कुलवंत और कुलजीत दोनों काफी सालों से एक-दूसरे को जानती थीं। जब कुलजीत ने अपनी बेटी की प्रॉब्लम कुलवंत को बताई तो उसने भी वही सलाह दी जो रात कुलजीत कौर के दिमाग में आई थी।
कुलवंत – “तू घबरा न। किसी को कुछ पता नहीं लगता। तू घर जा कर अपनी बेटी को सादी बाहर वाली मोटर पर भेज दे या हमारे घर छोड़ जावे। बाकी मैं देख लूँगी। पक्की जगह का इंतजाम मैं बाद में करवा लूँगी। रोज मोटर पर जाना ठीक नहीं रहेगा।”
कुलजीत ने पूछा भी कि लड़का कौन है लेकिन कुलवंत ने यह कह कर बात टाल दी कि टाइम आएगा तो बता दूँगी या तू अपनी बेटी से पूछ लेना। तू बस घर जा और जो कहा वह कर। बेटी का आज पहली बार है मोटर पर खुल कर करवा लूँगी। आवाजें सुनने वाला कोई नहीं होना वहाँ।
कुलजीत – “लड़का ठीक तो है न। कहीं बेटी को बाद में तंग न करे उसे ब्लैकमेल न करे। देख संदीप तेरी बेटी जैसी है। किसी गलत बंदे के नीचे न लग जाए।”
कुलवंत – “बंदा नहीं है 18-19 साल का जवान लड़का है। अपने गोपी जैसा जवान। पूरी आग में है। आज तो अपनी बेटी भेज जा। तेरा दिल करता बाद में तेरे ऊपर भी चढ़ा दूँगी उसे। वैसे भी पाजी की भी उम्र हो गई है। कहीं मजा देते होते तुझे अपनी तरफ देख लिया फिटी पड़ी है पूरी।”
कुलजीत – “दफा हो कुट्टी मजाक करती है। इधर मेरा दिल घबरा पड़ा है।” इतना कह कर वह अपने घर की तरफ चल पड़ी।
घर के अंदर गोपी भी बेचैन हुआ पड़ा था रात का सोच-सोच कर। जब पता हो बहन जीजा से अलावा किसी और के नीचे पड़ी है वह भी उसके किसी दोस्त के नीचे – टिकाई कहाँ लगनी थी। अपनी माँ की बातें सुन उसे यह पक्का यकीन था कि बहन को चुदवाने लगे उसकी माँ ज्यादा टाइम नहीं लगाएगी।
हुआ भी ऐसा ही। जब उसकी माँ घर आई तो उसने संदीप को कुछ कहा और संदीप अंदर चली गई।
कुलजीत – “बेटा मैं तेरी बहन को बस तक छोड़ने चली हूँ। उसे डॉक्टर के पास जाना है।”
गोपी – “मम्मी मैं ले जाना दीदी को अपनी मोटरसाइकिल पर। बस में कटो जाना।”
कुलजीत – “नहीं बस में ठीक रहेगा उसे। देर हो जानी। तू कहाँ उसके साथ परेशान होता रहेगा।”
इतने में संदीप अंदर से तैयार हो कर आ गई। अपनी आदत मुताबिक उसने आज भी पजामी सूट पहना हुआ था। ऑरेंज पजामी और हरे रंग का कुर्ता उसके ऊपर बहुत जच रहा था। नीचे सफेद ब्रा थी शायद यह गोपी ने अंदाजा लगाया क्योंकि शोल्डर से ब्रा की स्ट्रैप थोड़ी सी बाहर थी। लड़कों के लिए लड़कियों को स्कैन करना बड़ी बात नहीं होती। 1 मिनट में लड़की की तरफ देख कर बता देते हैं नीचे क्या पहना हुआ है। शायद बाल ज्यादा खुले थे इसलिए उसने रबर बैंड लगा लिया था। हाथ में छोटा पर्स था उसके। दोनों माँ-बेटी जल्दबाजी में घर से चली गईं।
कुछ 5 मिनट बैठा रहा गोपी। ऐसा लग रहा था उसे जैसे कोई उसका कोई खिलौना ले गया हो। फिर ऐसे ही एकदम झटके से उठा और मोटरसाइकिल पर बाहर निकल गया। मुँह पर उसने अपना परना आगे कर लिया था। 2 गलियाँ आगे उसे अपनी माँ अकेली वापस आती दिखाई दी। संदीप नहीं थी उसके साथ। उसने मोटरसाइकिल अपने गाँव के बस अड्डे वाली तरफ मोड़ ली। वहाँ अभी भी लोग खड़े बस की वेट कर रहे थे लेकिन संदीप वहाँ नहीं थी। इस बेचैनी में वह मोटरसाइकिल इधर-उधर घुमाने लग पड़ा। उसे समझ ही नहीं लगी कि इतनी जल्दी संदीप को कहाँ छोड़ आई उसकी माँ। हर आधे घंटे बाद जब वह घर की तरफ जा रहा था तो उसे मोटरसाइकिल पर जाती जोड़ी दिखाई दी। मोटरसाइकिल दूर थी साफ तो नजर नहीं आ रही थी लेकिन पीछे बैठी लड़की का सूट उसने पहचान लिया था या कह लो शक हो गया था दिमाग में। बाइक काफी तेज स्पीड में थी। जल्दी ही वह उसकी नजरों से भी दूर हो गई। काफी कोशिश की उसने लेकिन गोपी की मोटरसाइकिल उसका पीछा नहीं कर पाई।
अचानक ही उसके दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई जैसे इंजन चल रहा हो। उसने मोटरसाइकिल गाँव से बाहर वाली तरफ मोड़ ली और प्रार्थना करने लगा कि रब्बा हाथ जोड़ता जो दिमाग में अभी आया सच न हो। एक जगह जा कर उसने बाइक अपनी साइड में लगा दी। अभी भी उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। हाथ उसके काँपने लग गए थे। वह डब्बे पैर चल पड़ा। गाँव से काफी दूर थी यह जगह। घाट ही आते-जाते थे लोग यहाँ। वही हुआ जिसका उसे डर था। वही मोटरसाइकिल हवेली के अंदर लगी पड़ी थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि जो आज होने जा रहा था।
Shaandar update
 
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