
Update 4
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अभी तक अपनी उँगली से ही काम चलाती थी। कई लड़के उस पर लाइन मारते थे लेकिन सब उसके भाई से डरते थे।
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यही सब करती हुई अचानक कुछ आवाजें आने लगीं। इन आवाजों से वह अनजान नहीं थी। नंगे चिताड़ पर पड़ते थप्पड़ की आवाज। वह कैसे क्योंकि उसका भाई तो घर पर नहीं था। वह जल्दी से पास पड़ी खुली पटियाला सलवार उठा कर पहन कर धीरे-धीरे कदमों से बाहर अपनी माँ के कमरे के पास आई और खिड़की से झाँकने की कोशिश करने लगी। पर्दा हमेशा साइड में ही रहता था। सब कुछ आराम से दिख जाता था। अक्सर वह और उसका भाई यहीं से अंदर देखते थे। जैसे ही अंदर देखा तो अंदर का सीन उसके लिए किसी एटम बम के झटके से कम नहीं था। उसकी माँ और उसके डैडी अंदर नंगे थे और जो अंदर हो रहा था वह सोच भी नहीं सकती थी कि यह पॉसिबल है। अंदर उसकी माँ आधी नंगी बेड के किनारे पर बैठी हुई थी और उसकी माँ की गोद में उसके पापा पेट के बल लेटे हुए थे। उसके पापा के सिर पर भी काले परने के अलावा कुछ नहीं था। शायद अभी-अभी शुरू किया था मारना इसलिए अभी इतनी लाली नहीं आई थी। कोमल अभी भी हैरान थी कि उसके पापा ऐसा कैसे कर सकते हैं। अंदर कुलवंत अपना काम कर रही थी। कुछ 5 मिनट हाथ से मारने के बाद जब उसने देखा कि चिताड़ गर्म हो गए तो उसने नीचे पड़ी जूती उठा ली। कोमल बाहर आँख फाड़े सब देख रही थी। पहले तो उसे अपने पापा पर तरस आया कि मम्मी कितनी बुरी है जो अपने पति पर ऐसे मार रही है। लेकिन उसके दिमाग में फिर बात आई कि अगर उसके डैडी चाहते तो बड़ी आसानी से रोक सकते थे मम्मी को। 6 फुट से 2 इंच ज्यादा उसके डैडी की हाइट, अच्छा मेहनती शरीर। लेकिन उसके डैडी तो आराम से लेटे हुए थे। एक हाथ से बेड की चादर पकड़े और दूसरे हाथ से मम्मी की लत पकड़ कर आराम से थप्पड़ खा रहे थे। जूती उठा कर उसने पहले पोजिशन हल्का सा चेंज किया। अपनी एक लत उठा कर उसने अपनी गोद में लेटे पति की दोनों लतों के ऊपर रख ली। इससे सरदार अब पूरी तरह कुलवंत की पकड़ में था। जूती की चोट ज्यादा लगती है और इधर-उधर लतें न मार सके इसलिए कुलवंत ने दोनों लतों से लॉक कर लिया और पास पड़ी अपनी सफेद फूलों वाली पैंटी अपने पति की तरफ कर दी जिसे उसके पति ने मुँह में रख कर जोर से काट लिया। इसके बाद अगले 20 मिनट लगातार कुलवंत कौर अपने पति की गांड पर जूती से मारती रही। इस काम में वह अब काफी एक्सपर्ट हो चुकी थी। अपने बच्चों की किसी बड़ी गलती पर वह हमेशा ऐसा ही करती और अपने पति के साथ जब भी दोनों का मन करता। कोमल यह बिना पलक झपकाए देखती रही। कोमल को अब समझ आ गया कि क्यों कभी उसने अपने माँ-पापा को लड़ते नहीं देखा। हर टाइम प्यार रहते हैं वो।
कुछ 20 मिनट बाद कुलवंत कौर ने जब देखा कि चिताड़ अब पूरी तरह लाल हो चुके हैं तो जूती नीचे डाल दी। उसका पति उठ कर कमरे में तेजी से इधर-उधर चलने लगा। अपने चिताड़ मसलने लगा। इसका असर अगले 4-5 दिन रहने वाला था। बैठना उसके लिए मुश्किल होने वाला था। उसका 5-6 इंच का लंड जो खास मोटा नहीं था वह हर बार की तरह अब भी खड़ा हो गया था। विग्रा से ज्यादा असरदार थी कुलवंत कौर की जूती की मार। पता नहीं क्यों जब भी वह अपनी बीवी के पट्टों पर लेट कर मार खाता तो उसमें सेक्स बहुत बढ़ जाता और नॉर्मली न खड़ा होने वाला लंड जवानी के रूप में आ जाता।
कुलवंत कौर वहीं बैठी-बैठी पीछे की तरफ लेट गई और अपनी लतें फैला दीं। उसका पति उसकी लतों में आ कर उसके पट्टे को चूमता हुआ उसकी चूत चूसने लगा। कुलवंत कौर भी अपनी लतों से उसका सिर दबाते हुए मजा लेने लगी। चूत चुसवा कर ही उसका 2 बार पानी निकल चुका था।
कुलवंत – “चलो बस करो अब” नीचे लेट जाओ सरदार जी।
अब उसका सारा गुस्सा दूर हो गया था। बाहर खड़ी कोमल सब देखती रही। कैसे उसकी माँ मजा ले रही है। वह साफ-साफ देख सकती थी नीचे लेटने में उसके पापा को दिक्कत हो रही है। लेकिन वह दाँत पीस कर आँखें बंद कर मम्मी के गोरे चिताड़ मसलते मजा ले रहा था। कुछ 5 मिनट बाद उसका काम हो गया। कुलवंत साइड में लेट गई। कुलवंत के लंड से उतरते ही उसका पापा एकदम उछल कर अपने पेट के बल लेट गया। कुलवंत यह देख हँस पड़ी। कुलवंत ने तुरंत अपनी चुन्नी से चूत साफ की और बेड से खड़ी होते हुए नंगी ही एक कोने में पड़ी कोल्ड क्रीम ले आई और अपने पति के पास बैठ कर उसकी सारी लाल हुई गांड पर लगा दी। कोमल ने देखा काम अब खत्म हो चुका है। उसने वहाँ से खिसकना ही बेहतर समझा।
कुछ 10:30 बजे सिमर अपने माँ-पापा के कमरे में आ गया। बेड काफी बड़ा था इसलिए 3 आदमी सोने में कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाली। वह जा कर लेट गया।
कुलवंत – “आ गया मेरा बेटा” नरम हल्की आवाज में बोली।
सिमर – “हाँजी बस टीवी देख रहा था।” वह भी अपनी माँ की तरफ मुँह कर साइड लेते हुए बहुत धीरे बोला।
कुलवंत – “कोई नहीं तू आराम से बात कर। इतना डरने की जरूरत नहीं। तेरे पापा सुबह से पहले नहीं उठेंगे। भले जितना मर्जी यहाँ रोला डाल दे।”
कुलवंत को वैसे भी कोई परवाह नहीं थी कि उसका पति जाग रहा है या सो गया।

कुलवंत ने अपनी एक लत उठा कर सिमर के ऊपर रख ली – “तेरी दवाई तैयार हो गई होगी। कल जा कर ले आना और खाने का तरीका भी समझ लेना।”
सिमर ने खुश हो कर अपनी माँ को गले लगा लिया। गले लगाते ही उसे झटका लगा। कमरे में अंधेरा था पूरी तरह इसलिए उसे पता नहीं था कि रोज की तरह आज भी मम्मी बिना कपड़ों के लेटी हुई है।

पहले कमरे में अंधेरा ज्यादा होने की वजह से चादर ले कर उसे पता नहीं लगा कि वह अपनी नंगी माँ के साथ लेट रहा है। उसने घबराकर अपना हाथ पीछे खींच लिया। लेकिन कुलवंत औरत के नंगे शरीर की झिझक दूर करना चाहती थी। इसलिए ही आज उसने यह सब किया था और अपने बेटे को साथ सुलाया था।
कुलवंत ने सिमर का हाथ उठा कर अपने चिताड़ पर रख दिया और बोली – “कोई नहीं अब तो हमारे बीच सब कुछ ओपन होने वाला है। क्यों डरता है?” इतनी बार तो देख चुका है मुझे नंगी, मुझे मजा करते। तेरा ऊपर-ऊपर जो मन करता है तू कर बस आखिरी काम तब करवाऊँगी जब तू मेरी बेइज्जती का बदला ले लेगा जैसा मैंने तुझे कहा है। सिमर धीरे से – “हाँजी मम्मी, एक कमी थी तुमने उसका तो हल कर दिया” देखते जाओ तुम्हारा बेटा क्या-क्या करता है और अपनी माँ के चिताड़ मसलता रहा। कभी चूत को छेड़ता कभी गांड को। तब तक खेलता रहा जब तक उसका मन न भर गया और कब उसे नींद आ गई पता नहीं चला।
अगली सुबह ठीक 9 बजे सिमर उठा और जहाँ उसकी मम्मी उसे ले कर गई थी, उसी हकीम के पास पहुँच गया। हकीम ने सिमर को अच्छे से दवाई खाने का तरीका समझाया और एक तेल की बोतल भी उसे दे दी। सिमर बहुत खुश हो गया। हाँ, उस हकीम ने कई चीजें बताई थीं जो वह नहीं खा सकता था – जैसे खट्टी चीजें, तली हुई चीजें। लेकिन वह फिर भी बहुत खुश था।
घर आ कर उसने सब कुछ अपनी मम्मी को बता दिया। उसकी मम्मी ने उसे शाबाशी दी और पूरा परहेज करने को कहा। अब उसने जिम का टाइम भी बढ़ा दिया था। अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखता – जूस, दूध, दलिया, काजू, दही, मुरब्बा और बाकी फल बहुत ध्यान से खाने लगा। लगभग 2-3 महीने में उसने पूरा कोर्स खत्म कर लिया था। और इसका असर भी दिखाई देने लगा था। पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया था। जिम में उसकी बॉडी देख कर हर कोई हैरान रह जाता। उसका लंड भी पहले से अब 2 इंच लंबा और पहले से मोटा हो गया था – मालिश और दवाई के असर से। कई बार उसका मन करता था मुठ मारने को लेकिन वह खुद पर कंट्रोल रखता था।

इन्हीं 2-3 महीनों में उसने अपनी नई ताकत की आजमाइश के लिए 2 लड़कियाँ भी ढूँढ ली थीं। एक तो उसके घर के पास ही रहती थी। उसी उम्र की, बहुत सुंदर-सुडौल लड़की थी। नाम था उसका दिलप्रीत कौर। दिलप्रीत अभी 20 साल की हुई थी

और अभी-अभी कॉलेज जाना शुरू किया था। पतली-पतंगी, देखने में बहुत प्यारी लगती थी।
और दूसरी उसकी ही कजिन थी – तनवीर कौर, उम्र 18 साल।

तनवीर ने ही दिलप्रीत और सिमर की जान-पहचान करवाई थी। लड़कियाँ तो उस पर पहले भी बहुत मारती थीं लेकिन वह ध्यान नहीं देता था, डर जाता था। अब दवाई खा कर उसके अंदर बहुत जोश आ गया था, जिससे उसका झिझक दूर हो गया था। और इन्हीं दिनों में सुबह-शाम जब भी वह और उसकी मम्मी अकेले होते, तब उसकी मम्मी उसे सेक्स के बारे में बताती। औरत को कैसे खुश रखना है – कुलवंत कौर ने डिटेल में अपने बेटे को समझाया। कौन-सी पोजिशन में औरत को दर्द होता है और किसमें मजा – सब कुछ समझा दिया था।
दोपहर का खाना खा कर ऐसे ही एक दिन कुलवंत और सिमर लेटे हुए थे। कोमल अपनी मौसी की बेटी के साथ शहर कपड़े लेने गई थी, उन्हें लेट आने वाला था और सज्जन सिंह हमेशा की तरह बाहर किसी काम पर थे। लेटे-लेटे सिमर का ध्यान बार-बार सेक्स की तरफ जा रहा था। उसका लंड पजामे में तंबू बनाए बैठा था। 3 महीने से ऊपर हो गए थे उसे मुठ मारने को। इन 3 महीनों में उसका लंड पहले से मोटा और लंबा हो गया था। वह सेक्स तो करना चाहता था, लड़कियाँ भी थीं लेकिन अपनी मम्मी से पूछे बिना कोई कदम नहीं उठाना चाहता था। उसे पता था – मम्मी को पता लग गया तो जूते से गांड कुट देंगी।
कुलवंत को भी चुदे काफी दिन हो गए थे। हैपी उसके पास कई बार माफी माँगने आया था लेकिन उसने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया था। कुलवंत ने अपने बेटे की तरफ देखा जो इधर-उधर करवटें बदल रहा था। लंड उसके पजामे में खड़ा था। एक बार तो वह भी देख कर हैरान रह गई – इतना बड़ा लंड उसने अभी तक नहीं लिया था।

कुलवंत – “क्या हुआ बेटा, क्यों तप रहा है?”
सिमर – “अब तुमसे क्या छुपाना, तुम्हें तो पता ही है सब। यह देखो क्या हाल हो गया है।” उसने पजामा नीचे सरका दिया।
कुलवंत के हाथ खुद-ब-खुद उसके मुँह पर चले गए। सच में उस हकीम ने बहुत अच्छा सामान बना कर दिया था। सिमर का लंड उसकी मुट्ठी जितना मोटा हो गया था – जो एक अच्छी-भली औरत की भी चीखें निकलवा सकता था।
कुलवंत सिमर की तरफ करीब सरकते हुए उसके लंड पर हाथ फेरने की कोशिश की जो उसकी मुट्ठी में पूरा नहीं आ रहा था। उसने आगे हो कर उसके लंड पर किस किया और बोली – “लगता है टाइम आ गया। अब तू पूरी तरह तैयार हो गया।”
सिमर खुशी से उछल पड़ा। आखिरकार उसने अपनी मम्मी को बाँहों में ले लिया और बेड पर इधर-उधर घूमते हुए चूमने लगा।
कुलवंत हँसते हुए – “अच्छा जोर दिखाने के लिए माँ ही मिली है।”
सिमर भी आगे बढ़ा – “हाँजी, यह सब तुम्हारे कारण ही हुआ है। 3 महीने से ज्यादा टाइम हो गया कुछ नहीं किया। आज मुझे मत रोकना।”
कुलवंत – “नहीं रोकूँगी। चल फिर शुरू हो जा, दिखा मुझे तेरे में कितना दम है। जो इतना कुछ मैंने तुझे सिखाया है, तेरे किसी काम आया या नहीं। फिर अपनी हुई बेइज्जती का बदला भी लेना है हमें।”
सिमर बड़े आराम से अपनी मम्मी के पास आया और सबसे पहले उसने अपनी माँ के पैरों पर सिर रख कर माथा टेका और फिर पैरों को चूमा जैसे वह उससे आशीर्वाद माँग रहा हो। फिर उसने उसकी चुन्नी उतार कर साइड में फेंक दी। कभी कुलवंत की गर्दन पर किस करता, कभी उसके माथे को चूमता। बड़े हौसले से काम ले रहा था। सेक्स की सबसे बड़ी बात जो उसने पहले बना ली थी कि जितना खाली करोगे उतना कम मजा आएगा। काफी देर वह किस करता रहा कुलवंत के सूट के ऊपर से ही उसके मम्मों को मसलता रहा। कुलवंत भी गर्म होने लगी थी।
कुलवंत को भी चुदे काफी टाइम हो गया था। दिल तो उसका बहुत करता था कि हैपी को या किसी को बुला ले लेकिन उसने कंट्रोल किया हुआ था। आखिर उसका सब्र का बाँध टूट ही गया। उसने सिमर को पीछे किया और बेड पर बैठ गई। अपने कमीज़ के कोने पकड़ कर उतार दिया और हाथ पीछे करके फट से अपनी ब्रा भी उतार दी। जिससे उसके मम्मे उछल कर बाहर आ गए। आज भी उसके शरीर में पूरी कसावट थी।

अपनी सलवार का नाड़ा खींचने ही लगी थी कि सिमर ने उसे रोक दिया। कुलवंत ने उसकी तरफ देखा तो सिमर बोला – “अपनी माँ की सलवार का नाड़ा आज मैं खुद ढीला करूँगा। आज तक पराए ही यह काम करते आए हैं, आज यह काम करूँ।” और उसने अपनी माँ की सलवार का नाड़ा खींच दिया। जिससे गांड खुल गई और कुलवंत ने हाथों से सलवार ढीली की और अपनी गांड बेड से ऊपर उठा कर रख ली। हैपी ने पैरों से सलवार पकड़ कर खींच कर उतार दी। कुलवंत ने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी।

कुलवंत के कहने पर सिमर ऊपर 69 पोजिशन में लेट गया और दोनों एक-दूसरे का रस पीने लग पड़े। कुलवंत अपनी चूत चटवा कर मजा ले रही थी। बहुत कम यार थे उसके जो चूत चूसते थे। वह बड़े अच्छे तरीके से चूसे मार रही थी। पूरी कोशिश कर के सिमर का लंड उसके मुँह में आ रहा था। अपने बेटे के टट्टों पर हाथ फेरती सहलाती उसके लंड के टोपे पर जीभ फेरती – वह उसे पागल कर रही थी। सिमर भी उसका जवाब उसी जोरदार तरीके से चूत में अपना सिर देकर चूस कर दे रहा था। चूत के अंदर तक जीभ मारता, कभी चूत के दाने को अपने होंठों से पकड़ कर चूसता, धीरे-धीरे चूत को खींचता – कुलवंत को पूरा स्वाद दे रहा था।
जब सिमर को लगा उसका निकलने वाला है तो उसने अपनी माँ को सावधान किया – बोला “आह्ह्ह… हायyyy… सीईईई… छोड़ दो मेरा निकलने वाला है।” कुलवंत मुँह से निकाल कर हिलाती हुई – “कोई नहीं बेटा निकाल दे। ताकि अगले राउंड में ठीक से ठोक सके। कोई नहीं आने दे बेटा घबरा नहीं।” यह कहते हुए अपने मुँह तेज-तेज चलाने लगी और सिमर भी अपनी माँ के मुँह को चोदने लगा। अगले ही पल 3-4 अच्छी पिचकारियाँ उसने अपनी माँ के गले में मार दीं। कुलवंत अपने बेटे का सारा माल अंदर ही गटक गई। कुछ 5 मिनट दोनों शांत पड़े रहे।
कुलवंत – “क्यों बेटा अब खुश है?”
सिमर इसके जवाब में कुछ नहीं बोला बस अपनी माँ की लतें खोल कर फिर उसकी चूत चाटने लगा। धीरे-धीरे पट्टे को चूमता जीभ फेरता मजा लेने लगा। बहुत खुश था पहली बार चूसे मारवा कर अपनी माँ से सिमर आज।
कुलवंत के कहने पर सिमर फिर ऊपर 69 पोजिशन में लेट गया और दोनों एक-दूसरे का रस पीने लग पड़े। कुलवंत अपनी चूत चटवा कर मजा ले रही थी। बहुत कम यार थे उसके जो चूत चूसते थे। वह बड़े अच्छे तरीके से चूसे मार रही थी। पूरी कोशिश कर के सिमर का लंड उसके मुँह में आ रहा था। अपने बेटे के टट्टों पर हाथ फेरती सहलाती उसके लंड के टोपे पर जीभ फेरती – वह उसे पागल कर रही थी। सिमर भी उसका जवाब उसी जोरदार तरीके से चूत में अपना सिर देकर चूस कर दे रहा था। चूत के अंदर तक जीभ मारता, कभी चूत के दाने को अपने होंठों से पकड़ कर चूसता, धीरे-धीरे चूत को खींचता – कुलवंत को पूरा स्वाद दे रहा था।
जब सिमर को लगा उसका निकलने वाला है तो उसने अपनी माँ को सावधान किया – बोला “आह्ह्ह… हायyyy… सीईईई… छोड़ दो मेरा निकलने वाला है।” कुलवंत मुँह से निकाल कर हिलाती हुई – “कोई नहीं बेटा निकाल दे। ताकि अगले राउंड में ठीक से ठोक सके। कोई नहीं आने दे बेटा घबरा नहीं।” यह कहते हुए अपने मुँह तेज-तेज चलाने लगी और सिमर भी अपनी माँ के मुँह को चोदने लगा। अगले ही पल 3-4 अच्छी पिचकारियाँ उसने अपनी माँ के गले में मार दीं। कुलवंत अपने बेटे का सारा माल अंदर ही गटक गई। कुछ 5 मिनट दोनों शांत पड़े रहे।
कुलवंत – “क्यों बेटा अब खुश है?”