Update 14: finally sil break.
पापा अपने फुल सी बेटी को चूमते जा रहे थे । होठ में होठ मिल रहे थे । पापा का लौड़ा सलामी देने लगा था शेरवानी के पजामे के नीचे ही । पूरा माहौल ही मादक हों गया था । प्राची सुध-बुद्ध खो चुकी थी और पापा को अपना बदन सौंपने को तैयार थी। वो उसी दिशा में बह जाना चाहती थी जिस दिशा में पापा उसको बहा ले जाना चाहते थे । वो एकदम बेजान जी हो के पापा के बाहों में सिमट के रह गई थी , घबराहट से उसके टांगे कांप रहे थे । पापा ने एक एक कर के सारी ज्वेलरी अपने बेटी के चेहरे और गले से उतर दिया था।
पापा ने हाथ अपनी बेटी के उजोरो के तरफ सरका दिया धीरे से और कपड़े के ऊपर से ही प्राची के छोटे छोटे संतरों का गोलियां का अनुमान लगाने लगे । उसकी चूची अभी तक अनछुई थी । पापा के हाथ लगते ही वो बुरी थरथरा उठी।
पापा: क्या हुआ मेरी बाबू।
प्राची :पापा आपका हाथ लगने से कुछ कुछ हो रहा है।
पापा: तुझे अच्छा नहीं लग रहा है क्या मेरी रानी।
प्राची : नहीं पापा, ऐसी बात नहीं है। मुझे तो बहुत मजा आ रहा है । मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ पहले ।
पापा: आज से हर रात होगा बेटी ये तेरे साथ। आज से तेरी कच्ची उमर की चूत, मेरे लण्ङ के नाम हो गई है। अब हर दिन ये तेरे योनि में, अपना ठिकाना ढूंढेगा । तुम्हारी गहराई नापेगा बेटी और मुझे पे विश्वास रख , तुझे चरम सुख की प्राप्ति कराऊंगा मेरी बाबू।
प्राची मादक नजरों से पापा की ओर बस देखती सी रह गई। पापा आज उसे अपना बना के ही दम लेने वाले थे ।
पापा ने देर ना करते हुए, अपनी 17 साल की कच्ची काली बेटी, के दोनों चूची को अपने दोनों हाथ के हथेली में भर लिया, और जी भर के मसलने लगे ।
बेचारी प्राची कसमसा सी गई। उसके मुंह से सीईईईई...की आवाज निकल गई । पापा अब रुकने का विचार में नहीं थे। प्राची की काम अग्नि भी अब भड़क चुका था ।
पापा ने अब ब्लाउज में कैद छोटी छोटी चूचियों को आजाद कर देने का सोचा और प्राची का ब्लाउज के अंदर हाथ घुसा दिया। प्राची सीसीआ...के रह गई। पापा धीरे धीरे ब्लाउज़ का बटन खोल रहे थे । क्या समा था वो , एक बाप अपने ही बेटी का स्तनों को देखने और उसे चूसने की लालसा में था। ब्लाउज़ खुल गया और पापा ने देर ना करते हुए चूचियों को पूरा नंगा कर देना चाहते थे। उन्होंने प्राची से बोला : बाबू अपना पीठ जरा सा उठा ।
प्राची किसी आज्ञाकारी शिष्या की तरह पापा की हर बात मानती जा रही थी। वो थोड़ा सा उठी और पापा ने अपने हाथों को पीछे ले जा के ब्रा का हुक खोल दिया , ब्रा झटके से खुल गया और आगे से ढीला हो गया । अब चूचियों का अवलोकन पापा करने वाले थे ।प्राची वापस लेट चुकी थी और ब्रा को पापा ने खींच के पूरी तरह बेटी के स्तनों को आजाद कर दिया ।
पापा के मुंह से एक आह निकल गया , हाय क्या खूबसूरत , क्या गोलाई, क्या टाइट , क्या सख्त था प्राची का चूची। पापा अपने हाथों में चूची को भर सा लिया ।
प्राची तो अपने पापा का हाथ उसके नंगी चुचियों पे लगते ही पिघल गई। उसके जांघें थरथराने लगे और होंठ भी कंपकपाने लगी । ये उसका किसी पुरुष के हाथ से चूची का पहला छुअन था।
पापा अब बेरहमी से एक नवयौवना की स्तनों से खेलने लगे । पापा अपना काबू, अपने ऊपर से खो दिया था और कस कस के अपने बेटी का चूची दबाने लगे ।
पापा ने एक बार तो इतना कस के दबा दिया कि प्राची चित्कार उठी : आह पापा , थोड़ा धीरे दबाइए न , दर्द हो रहा है।
पापा को प्राची के टोकने से थोड़ा होस आया ।
पापा: अरे ओह बाबू , सॉरी , थोड़ा जोश में आ गया था और भूल ही गया था कि मैं एक कुंवारी लड़की का स्तन मर्दन कर रहा हु। अब से धीरे से दबाऊंगा ।
पापा ने अब अपनी बेटी का चूची अपने मुंह में भर लिया और पीने लगे । चुसाई चालू कर दिए।
पापा लगभग २० मिनट तक चूचियों से खेलते रहे । कभी होंठो को भी बीच बीच में चूस लेते ।
और फिर से चूची चुसाई चालू कर देते ।
प्राची बस पापा का साथ दे रही थी । उसका रोम रोम अब पापा का नाम ले रहा था पापा के प्यार करने से वो पागल सी हो रही थी और उसकी चूत भी अब पानीयने लगी थी। चूत में अब उसे लग रहा था, जैसे चींटियों काट रही हो।
पापा लगभग आधे घंटे चुसाई करने के बाद अब आगे बढ़ना चाह रहे थे ।पापा ने धीरे से प्राची के कान में कहा : बेटी आज में तुझे पूरी नंगी देखना चाहता हु । तेरे बदन पे एक सुत भी नहीं चाहिए बाबू।
प्राची : शर्माती हुई , जी पापा , आप जैसा ठीक समझे ,मैं तो आपकी हो ही चुकी हु।
पापा एक 17 साल की लड़की को इतनी समझदारी वाली बाते करने से बहुत खुश हुए ।
पापा ने झटके से अपना कपड़ा उतार दिया और पापा को कपड़े उतारते देख के प्राची ने अपनी आंखे बंद कर ली।
पापा ने नीचे से प्राची का लहंगा भी खींच के उतर दिया । अब लाल पैंटी में, एक टीनएजर्स लड़की, बला की मादक लग रही थी।
पापा ने पैंटी भी खींच के उतार दिया । प्राची पूरी नंगी हो चुकी थी।
पापा प्राची से सट के उसके नग्न बदन से खेलने लगे ।
प्राची शर्म से पानी पानी हो रही थी। उसके पापा उसके नंगे बदन के स्वामी हो चुके थे । प्राची का बदन एकदम दूधिया सा था । चूची गोल गोल , चूत कसा हुआ लग रहा था , चूत पे रेशम से हल्के हल्के बाल जो अभी ठीक से उगे भी नहीं थे ,वो बहुत मादक लग रहे थे। पापा प्राची को ऊपर से नीचे तक चाटने और चूसने लगे , प्राची घबराहट से थरथरा रही थी। उसे अब उस पल का इंतजार था और थोड़ा डर भी था, जब पापा उसकी योनि में अपना लौड़ा डालते । पापा से वो इतनी शर्मा रही थी कि पापा के नंगे होने के बावजूद भी उनके लण्ङ के तरफ नहीं देख रही था । अभी भी पापा के लिंग का असली मोटाई और लंबाई उसे पता नहीं चला था। उसने पापा को मूठ मारते देखा तो था लेकिन दूर से और थोड़ा सा ही देखने से उसे, असली लौड़ा के साइज का अनुमान नहीं हुआ था।
पापा अब नीचे बढ़ के योनि के पास पहुंच गए और अपने हाथों से उसके चूत से खेलने लगे ।

प्राची मदहोश हो चुकी थी । उसके आंखे बंद होने लगे और वो अपने पापा के सामने अपनी टांगे खोल के लेटी थी । पापा उसके योनि द्वार पे अपनी उंगली फिराने लगे और प्राची का जोश बढ़ाता ही जा रहा था । अभी वो पूरे दुनिया में सबसे विश्वासी मर्द को अपना यौवन परोस रही थी। उसे पापा पे पूरा यकीन हो चला था । एक लड़की को सबसे ज्यादा, अपने पिता या पति पे, विश्वास होता है और यह तो दोनों एक ही मर्द थे प्राची के लिए । इसीलिए तो वो टांगे खोल पाई । पापा को अपना चुत छूने दिया।
पापा उसके योनि को बाहर से ही उपर से नीच तक सहला रहे थे , वो जानते थे कि एक वर्जिन लड़की को एक उंगली भी दर्द दे सकता है, अगर चूत में घुसाया जाए तो। वो प्राची के चूत की झिल्ली को अपने लन्ड से ही तोड़ना चाहते थे । उन्होंने प्राची का चूत थोड़ा अपने उंगलियों से खोल के देखा । अंदर का नजारा उन्हें खुश कर गया ,चूत का छिद्र इतना छोटा था कि उसका मुहाना एक दम बंद था। इस मुहाने से अब सुरंग पापा को अपने हथियार से ही बनाना था।अंदर से गुलाबी, रस से भरी हुई एक दम रसीला चूत थी प्राची की। पापा अपने लाइफ में पहली बार एक 17 साल की लड़की का चूत देख रहे थे।

उन्हें कोई भी चूत मारे, 2 साल से ऊपर हो चुका था और कोई टाइट चूत मारे, तो अरसा हो गया था । प्राची की मां का चूत तो प्राची के जन्म होने के बाद से ही ढीला हो गया था और वो मजा नहीं देता था। आज पापा को अर्से बाद एक कुंवारी योनि में प्रवेश करने का मौका मिला था। पापा अब अपनी प्राची को थोड़ा और गर्म करना चाहते थे , ताकि वो लिंग लेने में आनाकानी न करे । वो प्राची के चूत की बाहरी चमरी को नीचे से ऊपर तक सहलाने लगे ।

और अपना मुंह भी प्राची के चूत चूसने के लिए बढ़ा दिया ।
प्राची को इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि पापा ऐसा कुछ करेंगे । वो अपने मुंह में उसकी योनि को भर लेंगे । वो तो सिसक के रह गई । उसे परम आनंद आने लगा । उसे तो पता ही नहीं था कि एक छोटी सी चूत, जिसे वो गंदा मानती थी, वो उसे इतना मजा दे सकता है। और पापा पे तो उसे इतना प्यार आ रहा था कि क्या कहना । पापा को अब वो अपने अंदर समा लेना चाहती थी। पापा ने अब एक और दांव खेला जिसकी प्राची को कोई उम्मीद नहीं थी , पापा ने प्राची के चूत के दाने को अपने उंगली से मसलना शुरू किया । ये तो उसे परम आनंद से भी ज्यादा आनंद देने वाला था । उसे इतना ज्यादा मजा आया कि वो पापा का सर पकड़ के इनके बालों को नोचने लगी।
पापा कभी उसका चुत चूसते, तो कभी उसके दाने को रगड़ देते ,तो कभी चूत के लकीर को छेड़ते। प्राची अब इतना जोश से भर गई थी कि अब उसे एक मूसल भी मिल जाता तो अपने योनि में डाल लेती। उसकी चूत एकदम पनिया गई थी।
अब पापा समझ गए थे कि लोहा गरम हो गया था और हथौड़ा मारना चाहिए । पापा का मन, अपने बेटी के मुंह में, अपना लन्ड भी देने का था, पर अब वो देर करते तो ठीक नहीं होता । शायद इतना जोश में प्राची को दुबारा लाने के लिए भी उन्हें एक घंटे का मेहनत और करना पड़ता ।
उन्होंने मन बना लिया कि अब अपनी बेटी की चूत में प्रवेश कर जाना है।
पापा : बेटी , वक्त आ गया है कि इस सुहागरात को हम फरमान चढ़ाए और मै तेरी योनि में प्रवेश करूं बेटी।
प्राची का दिल धक-धकाने लगा । वो आने वाले पल को लेके एक दम से सहम गई।
प्राची : पापा , क्या बहुत दर्द होगा ?
पापा : नहीं बेटी, मुझ पे भरोसा रख अब अच्छे से होगा । मैं आराम से करूंगा ।
पापा ने एक झूठा दिलासा प्राची को दिया क्योंकि एक अनाड़ी भी कह सकता था कि सब ४० साल के एक आदमी का मोटा लन्ड एक १७ साल की लड़की के योनि में जाएगा तो उस लड़की को कितना दर्द होगा।
प्राची पापा के तरफ मादक नजरों से देखने लगी कि पापा कितना प्यार करते है उससे , उसे दर्द वो नहीं दें चाहते ।

प्राची अरमानों भरे नजरों से अपने पिता को देखते हुए ।
पापा ने उसे चित लेट जाने को बोला और लन्ड चूत में डालने के लिए पोजीशन बनाने लगे ।
पापा : बेटी मै आराम से करूंगा तू घबराना मत।
प्राची इतना शर्मा रही थी कि उसे पापा के तरफ देख पाना वो दुभर हो रहा था । लन्ड तो देखने की उसकी हिम्मत वो नहीं थी। ये भी ठीक ही था क्योंकि अगर वो पापा का लन्ड देख लेती तो हो सकता है बिंदक भी सकती थी, चोदवाने से ।
पापा पोजिशन में आ गए और प्राची के चूत पे चढ़ाई करने की तैयारी कर दी । उन्होंने चूत पे लन्ड को सटाया और परफेक्ट छेद में जाने का ऐंगल तलास करने लगे । पापा ने योनि द्वार पे लन्ड लगा के थोड़ा दबाव बनाया । योनि से लन्ड छिटक गया । फिर दुबारा प्रयास किया , लन्ड फिर छिटक गया।
अचानक उन्हें दादी का दिया हुआ विचार का याद आया । वो भूल ही गए थे कि उन्होंने लुब्रिकेशन क्रीम भी लाया था इसी पल के लिए । और दादी ने भी वो नारियल का तेल दिया था । पापा ने उसे अपने बेड के दराज में ही रखा हुआ था । उन्होंने दराज खोला और क्रीम निकला । प्राची बस आंखे बंद कर के पड़ी हुई थी । उसे आने वाले पल से बहुत डर लग रहा था । पापा ने क्रीम का दक्कन खोला और अंजुल से भर के क्रीम प्राची के चूत के मुहाने पे चपोर दिया।
पापा अपने लन्ड पे भी दादी की दी हुई नारियल तेल से मालिश कर लिया । लन्ड चमकने लगा था। प्राची का योनि अब इतनी चिकनी हो चुकी थी कि प्रवेश करना बहुत आसान सा लग रहा था । एक तो चूत, उसके ही चूतरस से गीली, ऊपर से क्रीम की चिकनाई।
पापा ने फिर से वही पोजीशन बनाया और लौड़ा को अपनी सगी पत्नी बनी बेटी के चूत में ठेलने लगे।
लन्ड योनि के मुहाने को थोड़ा सा खोल गया पापा के एक करारा धक्के के साथ । प्राची छटपटाने लगी । और सी सी करने लगी । अभी तो बस झिल्ली को पापा का सुपारा बस स्पर्श ही हुआ था और उसे इतना दर्द हो रहा था । पूरा लन्ड अंदर पेसा जाएगा तो क्या होगा , पापा ये सोच एक दहल गए । पर सुहागरात को मुकम्मल तरह से निभाने के लिए लिंग का योनि में घुसना जरूरी नहीं, बहुत जरूरी था।
पापा ने अपने मन पे थोड़ा काबू किया और बेटी के योनि पे अपने लन्ड से थोड़ा और जोर लगने का सोच ।
पापा ने ताव में आके एक जबरदस्त धक्का प्राची के चूत पे मारा । लन्ड पक्क की आवाज के साथ प्राची के चूत में आधा प्रवेश के गया । पापा के लन्ड का सुपारा ,प्राची के चूत की झिल्ली चीर चुका था।
प्राची को एक असहनीय दर्द का अनुभव हुआ। वो तो आंखे बंद कर पापा पे भरोसा कर आराम से लेटी थी ,अपने पापा के सामने टांगे फैलाए । उसे पता नहीं था कि पापा उसका ये हाल करेंगे ।
वो एकदम से चीत्कार उठी। उसकी जबर्दस्त चीख निकल गई ।
उसने जोर से चिल्ला दिया : आअआआआअह.... हुह्ह्ह्ह्हःहःहः....पापाआअआआ....बहुततत.... दर्द.....हो...रहा....है....पापा......।
चीख इतना जोरदार था कि अगर उनके परोस में वो किसी का घर होता तो उसको वी सुनाई देता।
पापा घबरा गए कि कोई सुन ना ले और उन्हें कुछ न सुझा। वो कस के प्राची के मुंह पे अपना हाथ डाल दिया और दबा दिया, ताकि वो फिर से न चीखे।
मगर जो होना था, वो तो हो चुका । चीख जोरदार था। और दादी और प्रज्ञा के कानों तक पहुंच गया । प्रज्ञा ने सोचा , अरे दीदी को क्या हुआ , उसे दर्द क्यों हो रहा है। कही उसे कुछ हो तो नहीं गया।
उधर दादी समझ गई कि प्राची अब कुंवारी काली से एक औरत बन गई है, यानि उसकी योनि खुल चुकी है , ओर खोलने वाला ओर कोई नहीं उसका अपना सगा बाप ही है। दादी घबरा गई । लेकिन उसे तो पता ही था कि ये होना ही था।
इधर प्रज्ञा भागते हुए दादी के पास आई : दादी दादी, प्राची दीदी को कुछ हो गया है , वो अभी बहुत कस के चीख रही थी।
दादी ने सोचा अरे प्रज्ञा अगर कही पापा के कमरे के दरवाजे पे पहुंच गई और पापा को प्राची के चूदाई के बीच में ही डिस्टर्ब कर दिया तो अच्छा बात नहीं होगा । अभी अभी तो मेरे बेटे ने मेरे पोती के चूत में लन्ड फंसाई होगी , अभी तो ठीक से चूदाई स्टार्ट भी नहीं हुआ होगा मेरे बेटे का । प्रज्ञा को कुछ तो समझा ही देना होगा ।
दादी: अरे कुछ नहीं बेटी , आपके पापा और दीदी का सुहागरात है ना। पापा ने अपना नुनु शायद दीदी के गुगु में डाला है, इसलिए उसे थोड़ा दर्द हुआ है।
प्रज्ञा बहुत जिज्ञासा ले के अब दादी से सब सवालों का जवाब चाहती थी। इस दादी और प्रज्ञा के बीच हुए बातचीत पे हम बाद में आयेंगे।
अभी पापा के रूम में चलते है , जहां पापा का सुपारा उनके बेटी के योनि में गर चुका था । और प्राची असहनीय दर्द में थी।
पापा ने उसे किस करना स्टार्ट कर दिया , थोड़ा चूची भी दवाएं लगे ताकि प्राची थोड़ा और जोशीया जाए और पापा लगभग ५ मिनट तक प्राची का मुंह दबा के रखा , वो रो रही थी । उसका सील टूट चुका था। पापा ने देखा कि अगर वो रुक के फिर से थोड़े देर बाद एक ओर धक्का मारेंगे पूरा लन्ड योनि में प्रवेश के लिए तो फिर से प्राची को दर्द होगा ,तो क्यों न एक बार में ही पूरा लौड़ा बेटी के चूत में उतर दिया जाए। पापा ने पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लिया , प्राची के होठों के अपने होठों से बंद किया और कच से एक ओर जबरदस्त धक्का मार के अपने बेटी के योनि में पूरी तरह दाखिल हो गए।
प्राची कस के फिर चीखीं पर इस बार उसकी चीख दब के रह गई। बस एक , उम्ममम उह.... जैसी ही आवाज उसके मुंह से निकल सकी । वो पूरी जोर लगा के पापा को अपने हाथों से धक्का देके अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी , पर एक नन्ही सी 17 साल की जान एक 40 साल के आदमी के बल से कैसे जीत पाती। पापा ने अपने पूरा का पूरा लन्ड जड़ तक प्राची के बुर में धंआस दिया था। वो पैर फैलाए, बस अंशु ही बहाते हुए लेटी थी और पापा उसको कस के जकड़ के, पकड़े हुए थे, और उसके योनि में अपना लौड़ा डाले उसके ऊपर पड़े हुए थे।
पापा अभी अपने बेटी को ऐसे उपयोग कर रहे थे जैसे वो उसका रेप कर रहे हो । उसकी एक नहीं सुन रहे थे ।प्राची रोती जा रही थी, उसके अंशु पापा को दिख जरूर रहे थे । पर वो जानते थे कि एक बार प्राची के चूत से अगर अभी उन्होंने लन्ड निकाला तो फिर वो दुबारा घुसाने नहीं देगी। पापा बस इंतजार करते रहे, लिंग को अपनी बेटी के योनि में डाले, ऐसे ही उसके बदन पे लेटे रहे ।
लगभग 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद पापा को लगा कि प्राची की सीसकरी थोड़ी धीरे हुए है, उसके अंशु भी रुक चुके थे। और इनको थोड़ा सा प्राची का गांड़ भी उचकता महसूस हुआ । वो समझ गए कि, अब बेटी की चूदाई स्टार्ट की जा सकती है। वो धीरे धीरे अपना कमर उठा के प्राची के बूर पे बजार देते। थोड़ा थोड़ा अपने लिंग को योनि में अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करने लगे और अब प्राची का मुंह भी खोल दिया था । वो चीत्कार मार रही थी , उसके पापा के इस तरह के हमला से अभी वो उभर नहीं पाई थी। बस वो बेबस सी पारी हुई थी। अभी भी उसको दर्द हो रह था।
पापा ने पूछा : बेटी ,मुझे माफ करना ,ये बहुत जरूरी था बेटी , अगर में अभी बेरहमी नहीं दिखता, तो शायद आज तेरे भीतर, मै अपना लिंग प्रवेश नहीं कर पाता बाबू। पहली बार था न तेरा , चुत का सील टूटने में थोड़ा दर्द तो होता ही है। ये दर्द तो हर लड़की को सहना पड़ता है बेटी । आज तू अपने पापा की हो गई है। ओर मै तेरा ।
प्राची अभी भी कुछ बोलने की हालत में नहीं थी।
पापा ने भी सोचा अब धक्के थोड़े तेज कर देता हु । चूदाई रफ़्तार पकड़ेगी तो प्राची खुद गरम होके लन्ड लेने लगेगी आराम से । पाप ने अचानक से अब रफ्तार बढ़ा दिया धक्कों का।
प्राची दबी सी आवाज में बड़बड़ाने लगी : aahhhhhhh....ahhhh.... पापा.... छोड़ दीजिए ....रहम करिए अपने बेटी पे.....मै मर जाऊंगी पापा...बहुत मोटा है आपका ...पापा... ahhhhhhhhhhhh....उम्ह्ह्ह...
पापा को तो टाइट चूत का जन्नत मिल गया था वो कहा रुकने वाले थे। वो प्राची की बात को अनसुना कर के चूदाई जारी रखे हुए थे । उनका हर एक धक्का प्राची के बच्चेदानी को स्पर्श कर रहा था। वो जानते थे कि अगर थोड़ी देर वो प्राची के योनि का मर्दन करते रहेंगे, तो योनि में उनके लिंग का रास्ता जरूर बन जायेगा, और प्राची को फूल जोश भी जरूर आयेगा ।
पापा के हर धक्के के साथ प्राची के चूत के अंदरूनी चमड़ी बाहर , लन्ड को जकड़े , आ जाती थी और ठेलने के साथ ही चूत में अंदर की ओर चली जाती थी। प्राची का चुत था ही इतना टाईट।
खैर लगातार धक्के लगाने से प्राची का जोश थोड़ा जग गया , अब भी उसको थोड़ा दर्द हो रहा था पर अब उसको ये दर्द थोड़ा मीठा सा लग रहा था ।
पापा ने एक बार फिर लन्ड को बाहर खींचा और प्राची के चूत पे बहुत सारा लुब्रिकेशन वाला क्रीम लगाया । चूत अब फूल चिकनी हो चुकी थी । पापा ने देखा कि थोड़ा सा खून भी सील तुरई के कारण, प्राची के योनि से रिस के बेड शीट पे गिर गया है, और उनके लन्ड पे भी ,प्राची के योनि का रस और कुछ से मिला मिश्रण, लगा है। पापा ने लन्ड पे लगे खून को साफ किया और फिर नारियल तेल चपोरा थोड़ा सा। और इस बार बिना किसी विरोध के वो प्राची के चूत में समा गए।
चिकनाई के कारण अब चूत लौड़ा को अपने अंदर आने के लिए कम विरोध कर रहा था।
पापा योनि मर्दन किए जा रहे थे । उनका सुपारा प्राची के बच्चेदानी पर दस्तक देता जा रहा था।
पापा शॉर्ट पे शॉर्ट लगाए जा रहे थे और प्राची के तरफ से अब जवाब आने लगा था । यानि प्राची चूदाई के रंग में रंगने लगी थी। कमरे की दीवारें आज एक बाप बेटी के यौन संबंध का साक्षी बना हुआ था। ठप ठप थापा ठप चूदाई हो रही थी। कमरे में फच फच की आवाज , प्राची के पायल की छन छन की आवाज के साथ मिल के एक अलग ही संगीत सुना रही थी। चूत का रस भी अब पापा को, थोड़ा मदद कर रहा था। प्राची का चुत भी अब पूरा चिकना गया था और लन्ड आराम से पाचा पच अंदर बाहर हो रहा था। प्राची मदहोश हो गई ओर अब उसके मुंह से विरोध के नहीं, चूदाई के सहमति के बोल निकलने लगे : Aaahhh aahhhh uahhhhhh uhhh पापा चोदिए ना और जोर से ।
पापा भी अब दुगुना जोश में आ चुके थे । और पूल स्पीड से बुर मर्दन कर रहे थे अपने 17 साल के नवयौवना बेटी का।
उधर दादी और प्रज्ञा को, पापा के रूम से, उठ रहे तूफान की हर गरज सुनाई दे रही थी । अब तक प्रज्ञा को तो, दादी चूदाई और सुहागरात की हर क्रिया, से वाक़िफ करा चुकी थी। पलंग का चोई चोई भी दोनों दादी और पोती को सुनाई दे रहा था।
प्रज्ञा : दादी, पापा बहुत जोर से दीदी को चोद रहे है ना।
दादी : हां बेटी तेरे दीदी को आज पापा जन्नत दिखा कर ही मानेंगे ।
प्रज्ञा : नादानी से : दादी मुझे भी चाहिए पापा से चूदाई , देखो न दीदी कितनी खुश लग रही है, अजीब अजीब आहे निकला रही है दादी। कितना मजा आ रहा होगा दीदी को।
दादी चौक सी गई : ये क्या कह रही है पगली , दीदी की पापा के साथ शादी हुई है ना। फिर तो उसकी चोदई कर रहे है पापा। तू कैसे के सकती है ये?
प्रज्ञा : तो मेरी भी कर दो पापा से शादी , और वैसे वी दीदी पापा की घरवाली है तो मैं उनकी साली मतलब ,आधी घरवाली हु ना। पापा ने ही कहा था ये मुझे ।
दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसने लगी : धत्त पगली , एक आदमी के २ बीवी थोड़ी होती है।
दादी और पोती का ऐसे ही संवाद चलता रहा।
उधर प्राची मदहोशी से पापा के लन्ड के नीचे लेटी, चूत का मर्दन करवा रही थी , पसीने पसीने हो गए थे दोनों बाप बेटी ।
प्राची को अब इतना आनंद आ रहा था कि उसकी आंखें बंद हो गई थी और पापा का मोटा लौड़ा अपने बच्चेदानी में महसूस कर रही थी।
पापा को बेटी के यौवन को भोगते हुए लगभग 25 मिनट हो गया था । पापा लगभग 2 साल से चुत के प्यासे थे । आज बेटी की टाइट चूत ने उनके अरमान पूरे कर दिए । पापा अब बहुत तेज तेज धक्के मारने लगे । प्राची का भी बदन अब तीसरी बार अकरने लगा । प्राची 2 बार पहले भी झर चुकी थी, पापा के लौड़े के चोट से। अब वो तीसरी बार झाड़ने वाली थी। पापा भी अब अपने बेटी के टाइट चूत के सामने नहीं टिक पाते । पापा को अब बहुत जोर का अकरन सा महसूस हुआ और वो झटके खाते हुए अपने बेटी के चुत को अपने लन्ड के पानी से भरने लगे । उधर प्राची भी पापा के साथ ही झरी । पापा ने अपने बेटी के बच्चेदानी को अपने बीज से भर दिया । प्राची का चुत भी लूप लूप कर के पापा का लिंग रस पीने लगी । प्राची 17 साल की जरूर थी ,मगर उसके बच्चेदानी में अंडे का, पापा के बीज से सिंचाई हो चुका था । प्राची एक मादा थी और एक नर का बीज एक मादा के बच्चेदानी में पर चुके थे । प्राची के पीरियड आए भी 15 दिन हो चुके थे , यानि प्रजनन के लिए एक दम सही वक्त ।
पापा अपना लन्ड, प्राची के योनि में, एकदम गहराई में, तब तक पेल के रखें, जब तक उनके बीज का आखरी बूंद तक प्राची के चूत में ना गिर गया।
2 मिनिट बाद पापा जब आसावत हो गए कि सारा पानी बेटी के चूत में, वो गिरा चुके है , तब उन्होंने लन्ड बाहर खींचा। पापा का लौड़ा, पुच्च के आवाज के साथ सगी 17 साल की बेटी के योनि से निकल गया । योनि द्वार पापा के सुपारा से फैल चुका था ।
पापा : मेरी जान , तुमने मुझे बहुत मजा दिया मेरी बाबू। I love You मेरी बाबू।
प्राची : पापा आप अभी इतने प्यार से बोल रहे है,पर उस वक्त, कितने बेरहमी से मुझे चोदा अपने । इतना दर्द हुआ मुझे ।
पापा : अच्छा मजा नहीं आया क्या बाद में ?
प्राची : मुस्कुराते हुए , आया मेरे सैया जी।
पापा: फिर क्या , अब तो रोज चूदाई होगी आपकी।
प्राची : नहीं मुझे दर्द होगा ।
पापा : अरे पागल रोज थोड़ी इतना दर्द होगा , आज तो तुम्हारा पहला दिन था , सील टूटा था ,इसलिए दर्द हुआ इतना , अब तो बस मजे ही मजे आयेगा तुमको।
प्राची: पापा ,अंत में वो गरम गरम सा पानी आपके लौड़ा से जो निकला वो बीज था ना?
पापा: हां बेटी ,वो तेरे पापा का वीर्य था, जो आज मैने तेरे अंदर ही डाल दिया ।
प्राची : पापा मैने बायोलॉजी में पढ़ा था । अगर पीरियड के 10-12 दिन बाद बीज योनि में जाता है तो लड़की प्रेगनेंट हो सकती है।
पापा: हां बेटी , मै तो विचार में था कि कॉन्डम यूज़ कर लूं ,पर तेरी दादी ने मना किया था । वो इस घर में किलकारी गूंजता देखना चाहती है।
प्राची एकदम से शर्मा गई। वो जानती थी कि अगर अब ठीक रहा और बीज बच्चेदानी में भरा है इतना , तो वो प्रेग्नेंट हो सकती है।
वो अब कर भी क्या सकती थी। वो पापा की सुहागन तो हो ही गई थी। अगर अब पापा ही उसे प्रेगनेंट करना चाह रहे है तो वो क्या कर सकती थी।
वो पापा को बस मुस्कुरा कर देखने लगी। उसके चुत से अब भी मादक सुगंध आ रहा था। उसके योनि से पापा का रस भी टपक रहा था ,ये उसके और उसके पापा के बीच हुए , सुहागरात की निशानी थी।
प्राची का चुत अब खुल चुका था और जबरदस्त चुदाई के कारण थोड़ा फूल गया था और लाल हो गया था। पापा का लन्ड फिर से खड़ा हो गया ।
पापा: बेटी आ जा ,एक बार फिर से तुझे प्यार करूं।
पापा फिर चालू हो गए ।
उस रात, देर रात तक पापा और बेटी का सुहागरात चलता रहा , 17साल की नन्ही जान को, उसके पापा, रात को 5 राउंड चूदाई ओर कर चुके थे । उसमें अब सहने की शक्ति नहीं बची, तब जा के पापा ने छोड़ा उसे । ऐसे चोदा था उसके पापा ने उसे, जैसे वो उसका रेप कर दिए हो। पर अब क्या फरक पड़ता है ,बेटी अब हो भी तो गई थी अपने पापा की ही। सुहागरात इतना जबरदस्त हुआ था कि शायद कल प्राची चल भी न पाए अच्छे से । ऊपर से पापा ने हर राउंड के बाद अपने लन्ड का गरम पानी और बीज प्राची के बच्चेदानी में ही डाला था । बिना कांडोम के ही पापा ने पूरी रात चूदाई की अपनी बेटी की।
रात के 3 बज चुके थे और अब प्राची पापा के बांहों में लिपट के नंग धरंग ही सो गई।