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Update 30:
पापा और प्राची एक सुखमय जीवन का भरपूर आनंद ले रहे थे । प्राची की राते पापा के साथ रंगीन हो रही थी और जब भी पापा का मौका मिलता प्राची के संग मिलन करते थे। उनका एक रूल बन चुका था , वो कमरे के दरवाजा बंद होते ही अपने कपड़े उतार देते थे, और प्राची भी उस रूल में शामिल थी । भले ही वो चूदाई ना भी करे , जो सिर्फ प्राची के मासिक के दिनों में ही नहीं होता था , उनके बदन पे एक भी सूत नहीं होता था।
लाइफ बढ़िया चल रही थी । दादी प्राची सी बहु पा के खुश थी और घर में किलकारी गूंजने का इंतजार में थी। उनको थोड़ा आश्चर्य तो हो रहा था कि प्राची के साथ उनका बेटा रोज लगभग मिलन कर रहा है लेकिन अब तक वो पेट से नहीं हुई थी।
उधर प्रज्ञा के एग्जाम खत्म हो गए थे । एक दिन रात को खाने के वक्त पापा ने प्रज्ञा से बोला : प्रज्ञा , अब तो तुम्हारे एग्जाम खत्म हो गए है , बताओ छुट्टियों में क्या करोगी?

प्रज्ञा : पापा, छुट्टी में तो कुछ प्लान नहीं किया , सोच रही ही थोड़ी पेंटिंग सीखू और साथ में दादी का भी थोड़ा काम ने हाथ बताउंगी , और उनसे खाना बनाना सीखूंगी।

प्रज्ञा को पेंटिंग का सौंख था । और उसे अब तक दादी ने कभी भी किचेन में आने नहीं दिया था, लेकिन वो खाने बनाना भी सीखना चाहती थी। प्राची शादी के बाद ही किचेन में जाने लगी थी ।

पापा: चलो बढ़िया है, तब कितने दिन में रिजल्ट आ जाएगा ।

प्रज्ञा : पापा लगभग 20-25 दिन तो लग हो जाएगा ।

पापा: वाह तब तो सही है। छुट्टियां एंजॉय करो।

प्रज्ञा : पापा एक बात बोलूं ?

पापा: बोल मेरी बच्ची।

प्रज्ञा : पापा अपने दीदी से शादी के बाद हनीमून पे तो उसे ले के ही नहीं गए ।

दादी और प्राची भी वही खाना खा रहे थे । वो इस सवाल को सुन के पापा के जवाब की प्रतीक्षा करने लगे ।

पापा : हां , बात तो तुमने सही कहा बेटा । लेकिन तेरी दीदी ने मुझे ऐसा कुछ कहा ही नहीं कि उसे हनीमून पे जाना है।

प्रज्ञा : आप भी एक नंबर के बुद्धू हो पापा। दीदी ने तो आपको सुहागरात को दर्द देने भी नहीं कहा था , पर अपने उनके बिना बोले ही सुहागरात तो मनाई ना ।

प्रज्ञा थोड़ी बातूनी थी और चुलबुली भी तो वो बोलते बोलते कुछ भी बोल देती थी । दादी और प्राची उसकी बात सुनके एकदम चौक गए ।

दादी : अरे , ऐसे बात करते है पापा से । उनकी शादी हुई है न प्राची से तो सुहागरात तो मनाएंगे ही ना। उसमें प्राची के बताने वाली क्या बात है। उसे अपने पति का ख्याल रखना है ना। बेटी हो के अपने पापा से ऐसे बात नहीं करना चाहिए।

प्रज्ञा थोड़े हंसते हुए: दादी मै पापा की बेटी भी हु और साली भी , मै ऐसे बात कर सकती हु। मैं तो बस बोल रही हु पापा दीदी को हनीमून पे अभी तक नहीं ले गए , मैने तो मूवीज में देखा है कि शादी के बाद हीरो और हीरोइन हनीमून पे जाते है।

प्राची : चल बस कर पगली , कुछ भी बोलती रहती है तू।

पापा: ओके साली साहिबा , तुम बोलती हो तो तुम्हारे दीदी को मै हनीमून पे ले जाऊंगा , बस?

प्रज्ञा : वाह पापा , दीदी तो खुश हो जाएगी।
सब उसकी बातों से हंसने लगे।

खाने के बाद प्रज्ञा सोफे में बैठी थी पर पापा के साथ टीवी देख रही थी ।प्राची और दादी किचेन में बर्तन धो रहे थे और रात का दूध तैयार कर रहे थे ।

प्रज्ञा : तो पापा कब ले जा रहे दीदी को हनीमून पे ।

पापा: देख बेटा , अभी तो शादी में कुछ ज्यादा ही ऑफिस का छुट्टी हो गया था , तो छुट्टी में थोड़ी प्रॉब्लम होगी , पर मैं बात करूंगा ।

प्रज्ञा : पर पापा आपके ओर दीदी के हनीमून के बहाने मै भी थोड़ा घूम लूंगी ना , मेरी तो अभी छुट्टी है बाद में क्लास शुरू हो जाएगा ।

पापा को मजरा समझ में आ गया , प्रज्ञा खुद घूमने के लिए हनीमून के बारे में बोल रही थी ।

पापा प्रज्ञा की टांग खींचते हुए : अच्छा जी , पर हनीमून में तो सिर्फ पति पत्नी जाते है , तुम कहा बीच में जाने की सोच रही हो ?

प्रज्ञा : पर पापा मुझे भी जाना है ।

पापा: वो तुम अपने पति के साथ जाना । हा हा हा ।

प्रज्ञा : ऊँहू , पापा आप मेरा मजाक उड़ा रहे ।
पापा हंसते हुए : अरे मै मजाक कहा उड़ा रहा हु । हनीमून पे अपनी पत्नी के साथ, कौन किसी और को भी ले जाता है?

प्रज्ञा : अरे पापा, मै आपको साली हु, अपने कहा था साली आधी घरवाली होती है । तो मैं कुछ नहीं जानती मेरी अभी छुट्टी चल रही है , मैं भी जाऊंगी।

पापा के लिंग में , प्रज्ञा की आधी घरवाली वाले बात का थोड़ा असर हुआ और एक झटके के साथ थोड़ा टनक सा गया।

पापा: अच्छा मेरी साली , पर हनीमून कोई फैमिली ट्रिप थोड़े होता है । उसमे तो सिर्फ पति पत्नी जाते है।

प्रज्ञा बस हनीमून के बारे में इतना ही जानती थी कि शादी के बाद पति और पत्नी हनीमून पे जाते है। उसे पता नहीं था को हनीमून पे एक पति बस अपनी पत्नी के साथ मजे ही करता है। वो सोच रही थी , इसी बहाने वो भी कही घूम लेगी।

प्रज्ञा : मुझे वो साथ ले चलो ना पापा, आप ओर दीदी अकेले घूमेंगे और मैं घर पे बोर होती रहूंगी।

पापा प्रज्ञा के साथ मजाक के मूड में थे : पर हनीमून पे तो पति अपने पत्नी के साथ ही घूमता है। तुम तो कवाब में हड्डी बन जाओगी ।

प्रज्ञा : ऊँह , मै कबाब में हड्डी ही आपके लिए ? पापा मै आपकी बेटी हु।

पापा : तो कौन अपने बेटी को हनीमून पे ले जाता है?

प्रज्ञा: तो सबके बेटी वी तो नहीं होते शादी के टाइम । वो तो बाद में होती है। आप लक्की है कि आपकी बेटी है और मां और पापा के साथ बेटी कैसे नहीं जा सकती है।

पापा: पर तुम तो मेरी साली भी हो , साली को कौन ले जाता है ? हनीमून पे कोई साली को नहीं ले जाता , क्या पता , कही बीवी से ध्यान हट के साली पे ही चला जाए ।

पापा डबल मीनिंग में बात कह रहे थे कि कही बीवी को छोड़ साली को ही न चोद दे आदमी , अगर साली को वी हनीमून पे ले जाए तो। प्रज्ञा पापा के इस डबल मीनिंग बात को ठीक से समझी नहीं ।

प्रज्ञा : तो क्या हुआ , बीवी के साथ साली का भी ध्यान रख लीजिएगा ।

पापा: अच्छा , और साली का ध्यान कुछ ज़्यादा ही रख लिया तो ? बीवी क्या करेगी ? वो तो नाराज़ हो जाएगी।

प्रज्ञा : आप मेरा ख्याल रखेंगे तो दीदी क्यों नाराज़ होगी ? वो तो मुझसे कितना प्यार करती है।

पापा : अच्छा ऐसा है और तुम्हारे दीदी को कोई एतराज नहीं है तो मैं वी तुम्हारा अच्छे से ख्याल रख लूंगा ।

पापा थोड़ा शरारती तरीके से मुस्कुराने लगे ।
इतने में दादी आ गई: कौन किसका ख्याल रख रहा है ?

पापा: मां, मुझे प्रज्ञा से ऑर्डर मिला है कि उसके दीदी के साथ उसका भी ख्याल रखु। वो भी हनीमून पे हमारे साथ जाना चाहती है ।
पापा प्रज्ञा की खिंचाई कर रहे थे।

दादी : हाय राम , ये क्या बोल रही ये लड़की, एकदम ही नादान है तू।

प्रज्ञा: मैने ऐसा क्या बोल दिया दादी ?
दादी : कुछ भी नहीं, छोड़ उसे ।

दादी पापा से : अच्छा बेटा तुझे सच में हनीमून पे जाना चाहिए । प्राची के भी कुछ अरमान होंगे । उसे पूरा करना तेरा फ़र्ज़ है बेटा । ले जा उसे हनीमून पे।

दादी जानती थी , हनीमून पे एक कपल बस दिन रात सेक्स ही करता है और मजे से घूमता है। उस सिचुएशन में लड़कियां भी आजाद फील करती है। और प्राची जितना अपने पापा के पास रहेगी और बिना किसी रोक टोक के , आजाद मन से पापा का साथ देगी , उतना ही जल्दी उसका गर्भ ठहर सकता है। तो दादी को प्रज्ञा की इडिया पसंद आई थी।

पापा मुस्कुराते हुए : पर दादी , मेरी साली साहिबा बेटी भी जाना चाहती है हमारे साथ हनीमून पे।

दादी : हाय ये क्या बोल रही है प्रज्ञा । दीदी और पापा की शादी हुई है ना। उनको हनीमून मनाना है । तू क्यों जाना चाहती है ।

प्रज्ञा : पर इनके साथ मै भी हनीमून मना लूंगी ना। मैं भी थोड़ा घूम लूंगी।

पापा का के हस पड़े , दादी भी नादानी पे हस पड़ी।

दादी : अरे पागल ये क्या बोल रही है , हनीमून क्या होता है पता भी है तुझे या ऐसे ही कही से सुन लिया और कुछ भी बोल रही है।

प्रज्ञा अपना सर खींचने सी लगी थी : दादी आप लोग हस क्यों रहे हो ? हनीमून में सब घूमने जाते है ना।

दादी : अरे नादान लड़की , घूमने नहीं जाते , हनीमून सिर्फ वो जाते है जिनकी शादी होती है । हनीमून में वो घूमते भी है और जी भर के प्यार भी करते है एक दूसरे को । और वैसे ही मिलन करते है जैसे पापा और दीदी रात को करते है । तू उसमें क्या करेगी ?


प्रज्ञा को अपनी गलती का एहसास हुआ और अपनी नादानी पे वो थोड़ा शर्मा भी गई। वो समझ गई कि पापा उसकी खिंचाई कर रहे थे।

पापा: आरे कोई नहीं मां, मेरी बेटी की खिंचाई मै इतना कर चुका हु तुम मत करो। मैं सोच रहा हु कि एक फैमिली ट्रिप पे ही चलते है। हमारा हनीमून भी हो जाएगा और आप दोनों भी थोड़ा घूम लेना । वैसे भी घर का ऐसा खराब समय था कि २-३ साल से हम जिंदगी जीना ही भूल गए थे ।

दादी : अरे नहीं बेटा , अगर तू जाना चाहता है तो जा प्राची को लेके , प्रज्ञा को मै समझा दूंगी । हनीमून तुम दोनों का होना ही चाहिए ।

पापा: अरे मा हनीमून तो हम मनाएंगे ही । साथ में आप लोगों को घुमा भी दूंगा , प्रज्ञा की भी छुट्टी है , मै भी छुट्टी का जुगार लगता हु।

दादी: ठीक है बेटा , अगर प्राची को कोई एतराज नहीं होगा तो चल सकते है।

प्रज्ञा खुशी से : ये…ह , दादी मजा आएगा । मैं रेडी हु।

पापा: हां पर मै सिर्फ अपने पत्नी के साथ हो हनीमून मनाऊंगा , साली के साथ नहीं। हा हा हा।

प्रज्ञा: अरे सॉरी पापा, मुझे पता नहीं था ।

दादी : तो तपाक से पापा से ये सब मत बोला कर , मुझ से पूछ लिया कर ।

पापा: आरे रहने दो ना मां, बच्ची है अभी ये । मेरी बेटी अभी बड़ी हो रही है धीरे धीरे और सब सीख जाएगी जल्दी ही।

दादी : ठीक है बेटा एक बार प्राची से इस बारे में बात कर लेना । फिर जैसा तुम्हारा विचार करे।

पापा: ठीक है मां ,मै बात करूंगा प्राची से ।

सब अपने कमरे में चले गए । प्राची भी अपने कमरे में पापा के लिए दूध ले के आ गई ।

अब जैसा पापा का रुटिन था । पापा ने दूध पिया और फिर प्राची के साथ मिलन को तैयार ।

पापा: आजा मेरी लाडो, थोड़ा अब अपना दूध नहीं पिलाएगी ।

प्राची : अजी , आपको तो हर दिन मेरा ही दूध पीना रहता है । पर मेरे चूची में दूध है कहा ?

पापा: मेरी जान , एक बार तेरे गर्भाशय में मेरे बीज पलने लगा । तुम्हारी दोनों चूचियां दूध से भर जाएगी मेरी बेटी।

प्राची : अच्छा , तो आपका ये प्लान है दूध पीने का , मुझे प्रेग्नेंट आप बस मेरा दूध पीने के लिए बनाना चाहते है क्या ?

पापा: हम्ममम...शायद तुम्हारे प्रेग्नेंट होने से मुझे ये सुख तो मिल ही जायेगा ।

प्राची : हट बदमाश कही के । कैसी गंदी बाते करते हो आप जी।

पापा: कोई गंदी बात नहीं , बस प्यार करता हु। आओ ना मेरी जान , अब रहा नहीं जा रहा । देख कैसे मचल रहा है ये (अपने लोअर उतरते हुए और अपने लिंग के तरफ इशारा करते हुए ) तेरे गुप्तांग में बीज छोड़ने के लिए । ये तुझे प्रेगनेंट करेगा तभी को तेरा दूध पीने का मौका मिलेगा ।

पापा का लन्ड टनटना गया था । प्राची अब अच्छे से जान गई थी कि पापा के मचलते लिंग को सुकून कैसा देना है। पापा लिंग प्रदर्शन के रहे थे और थोड़ा हिला भी रहे थे और प्राची उनके भारी और बड़े अंडकोष को सहलाने लगी ।


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प्राची: हाय मेरे पापा, क्या मुलायम लग रही है आपकी अंडकोष। लग रहा है पूरा माल से भरा है ।

पापा: यस माई डार्लिंग। ये मूसल डाल के जब तुझे चोदूंगा तो ये अंडकोष गाढ़ा माल बनाएगा । और फिर तेरे योनि में जायेगा।
पापा ने प्राची को पकड़ के अपने ऊपर सुला लिया । और होठों को चूसने लगे ।
होठ चूसा , नंगी किया , चूची चूसा, फिर गीली नरम और गरम चूत का स्वाद भी पापा ने लिया ।


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पापा प्राची को चुंबन लेते हुए ।

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पापा अपने बेटी का मुलायम चूची दबाते हुए।

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पापा प्राची की चूची चूसते हुए । sali ki chut chati
पापा प्राची की चूत चाटते हुए ।


फिर पापा ने प्राची को अपना लन्ड चूसने का इशारा किए । बेटी आज्ञाकारी लड़की के जैसे लिंग चूसने लगी । गोक गोक की आवाज ओर पापा की कराहती आवाज से कमरा गुलज़ार होने लगा ।

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प्राची पापा का लिंग चूसती हुई ।

एक अच्छी १० मिनट के लिंग चुसाई के बाद , पापा अपने बेटी में समाने को बेताब हो गए , अपनी बेटी के योनि पे अपना लिंग रगड़ने लगे । अच्छे से पूरा चूत के चिरान पे ऊपर से नीचे तक अपना लौड़ा रगड़ते रहे।
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पापा अपना लौड़ा प्राची की योनि पे घिसते हुए।

प्राची को लगा वो इस तरह पापा के रगड़ने से तुरंत झर जाएगी ,वो आज पापा के लिंग जब चूत में रहे तभी झरना चाहती थी । उसे भी पापा के लौड़े के आदत सी हो गई थी । वो छटपटाने सी लगी और अब उसकी इंतजार करने की क्षमता खत्म हो गई । उसने हाथ बढ़ा के अपने पापा का लिंग को थम लिया । और अन्दर चूत में घुसने के लिए लिंग को तैयार करने लगी । वो अपने पापा का लौरा को अपने हाथो से पकड़ के मिलने लगी और फिर योनि द्वार पे लगा दिया ।

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प्राची अपने पापा का लन्ड चूत में लेने के लिए तैयार करती हुई।

पापा ने योनि द्वार पे अपने लिंग से सुपारा को पाते ही , चूत में प्रवेश कर जाने का सोचा ओर एक धक्के में प्रवेश कर गए और जड़ तक लिंग को अपने पत्नी बनी बेटी के योनि में घुस गए।

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प्राची पापा के लिंग को अपने योनि पे सेट करते हुए ओर पापा प्राची में प्रवेश करते हुए।

फिर वही ,पति पत्नी की जोरदार चूदाई होने लगी । प्राची मदहोश होने लगी । पापा भी टाइट योनि के खिंचाव से आनंदित होके आहें भरने लगे । लगभग १० मिनट ऐसे ही प्राची को भोगते रहे।
पापा ने फिर पोजिशन चेंज किया और उन्होंने उसे एक करवट कर के लेटाया और खुद प्राची के पीठ के पीछे लेट गए । ओर पोजीशन बना के उसके योनि में फिर से अपना लौड़ा घुसेड़ कर चोदने लगे ।


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पापा अपना लिंग योनि में घुसते हुए ।

हर दिन की तरह आज भी बाप बेटी की जबर्दस्त चूदाई होने लगी । प्राची अब बर्दास्त नहीं कर पाई और झटके खाते झरने लगी । उनसे पापा ले लन्ड को अपने पानी से नहला दिया । पापा के लिए चोदना अब और मजेदार हो गया , वो अपनी बेटी को फ़ज़ा फच चोदने लगे । और 15-20 मिनट और छोड़ने के बाद वो भी झटके खाते हुए प्राची के छूट में रास्खलित हो गए।

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पापा प्राची के चूत में झरते हुए और अपना माल अंदर ही छोड़ते हुए।

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पापा अपना पानी प्राची के योनि को पिला चुके थे और प्राची की भी प्यास बुझ चुकी थी।
झरते हुए उनका एक वीर्य का फव्वारा बाहर प्राची के जांघों पे भी जा गिरा था।

पापा ने फिर से अपना लिंग प्राची के योनि में ही घुसा दिया और अभी भी लन्ड प्राची के गुप्तांग में ही दिए लेटे थे । उनकी तो आदत ही हो गई थी, जब तक उनका लन्ड सिकुड़ कर बाहर नहीं आ जाता वो प्राची के योनि में ही घुसा रहता । वो कभी भी खुद से अपना लन्ड प्राची के चुत में चुने के बाद नहीं निकलते थे।
पापा और प्राची अब तेरा रिलेक्स लग रहे थे। जबर्दस्त चूदाई के बाद का सुकून एक अलग शांति देता है ।

पापा: प्राची , मेरे जीवन को तुमने बहार से भर दिया है मेरी प्यारी बीवी।

प्राची : आपने भी तो मेरी जिंदगी में हरियाली का दी है पापा।

पापा : हम्ममम, हा बेटी मै तेरी जीवन को खुशियों से भर दूंगा । तेरा दिया हुआ यौन सुख मुझे इतना मदहोश कर देता है कि मैं अपने पे काबू ही नहीं कर पाता मेरी रानी । आई लव यू ,मेरी बेटी , मेरी प्राची , आई लव यू।

प्राची : मै भी आपसे बहुत प्यार करती हु मेरे पतिदेव। थैंक्यू आप जो मुझे इतना अच्छा चोदते है।

पापा: हां प्राची ,अब एक प्यार की निशानी भी देदो मुझे । एक नन्हा मुन्ना निशानी।

प्राची : पापा मै प्रयास तो कर रही हु । मासिक भी समय से आता है । और आप इतना गाढ़ा वीर्य भी हर दिन पिला रहे है मेरे योनि को ।फिर भी गर्भवती नहीं हो पा रही हु।

पापा: अरे, विश्वास रखो , सब ठीक हो जाएगा , मै कोशिश कर रहा हु । अभी तुम्हारी उम्र भी तो कम है। जल्दी ही हमारा प्यार रंग लाएगा ।

प्राची : जी पापा।

पापा: प्राची ,एक बात पूछनी थी , क्या तुम मेरे साथ हनीमून पे जाना चाहोगी , तुमने प्रज्ञा को सुना ही होगा। मां और मैने भी फैसला किया है कि हनीमून पे ले जाऊं मैं तुम्हे , मगर मैं चाहता हु के मां और प्राची को भी साथ ले लेते है, तो एक फैमिली ट्रिप ही हो जाएगा । इतने दिनों से हमारे घर ने सुख नहीं देखा था । अब सबको उसमें शामिल करना चाहिए ।

प्राची: हां पापा, मुझे कोई एतराज नहीं । दादी के वजह से ही तो आप मुझे मिले है । उनको तो सब पता है , वो साथ रहेगी तो मुझे भी अच्छा लगेगा ।

पापा: और प्रज्ञा , वो भी चल सकती है ना।
प्राची : वो तो आपकी आधी घरवाली है ना, आप जानो।

पापा समझ गए , प्राची उनकी खिंचाई कर रही थी ।

पापा: अरे नही, वो तो नादान बच्ची है , कुछ भी बोलती है।

प्राची : नहीं नहीं , आधी घरवाली तो आप बोल ही चुके है उसे , कभी आपका मन करेगा तो पूरी भी बना लेंगे ना ?

पापा हंसते हुए : अरे इतना जलन अपने छोटी बहन से । नहीं यार मेरी घरवाली तुम ही हो और तुम ही रहोगी ।

प्राची : नहीं मुझे क्यों जलन होगी । आप अपने आधी घरवाली से बात करेंगे तो ।

पापा: अरे बस करो बाबा, ऐसा कुछ नहीं है, वो मेरी चूलबुली बेटी है, साथ में साली भी है, इतना मजाक तो चलता है ना ।

प्राची : ओके ओके , आप जाने और आपकी आधी घरवाली जाने ये सब मजाक।

पापा: चलो गुस्सा नहीं । बताओ , प्रज्ञा को भी ले लेना फैमिली ट्रिप पे।

प्राची : ये भी कोई पूछने की बात है पापा। प्रज्ञा तो हमारी प्यारी बेटी है। वो नहीं जाएगी तो मुझे ही अच्छा नहीं लगेगा ।

पापा: वाह, आज बनी न तुम प्रज्ञा की मां। चलो मैं सारा अर्जेंजमेट करता हु और जगह भी डिसाइड करता हूं।

प्राची : ओक पापा।

पापा: वैसे एक बात तो है , प्रज्ञा के कच्चे नींबू और कच्ची काली बुर होगी तो जबरदस्त कसी हुई ।

प्राची समझ गई पापा मजाक कर रहे है( वो भी झूठा गुस्सा दिखाते हुए) : हट बदमाश , उसकी भी सील तोड़ देंगे क्या आप , जैसे मेरा तोड़ा था?

पापा हंसते हुए : अब आधी घरवाली तो वो है , तोरने को मिल जाए तो मजा आ जाए । हा हा हा ...।

प्राची : हट आप बहुत गंदे है , अपनी बीवी होते हुए दूसरी लड़की को चोदना चाहते है।
पापा: नहीं मेरी रानी मै तो मजाक कर रहा था । मै तो बस अपने प्राची को प्यार करना चाहता हूं।

इतने गरम बातों के कारण पापा का लन्ड सिकुड़ के प्राची के योनि से निकलने के बजाए उसके चूत में घुसे हुए ही टनटनाने लगा ।

पापा: आह मेरी माल , देख न फिर तुझे प्यार करने का मन कर रहा है।


प्राची : आह आह हम्ममम...हां पापा ,मुझे भी महसूस हो रहा है । आप को मैने रोका कब है।

पापा : आह, तेरी यही अदा, आह.... तो मुझे पागल बना देता है मेरी बेटी।

पापा फिर से प्राची के साथ संभोग शुरू कर दिए । चूत पे धक्के लगाने लगे और प्राची को फिर से चोदने लगे ।


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कमरा प्राची के चीत्कार से गूंज उठा , आह्ह्ह्ह.... ऊह.....आह्ह्ह....मेरे सैया जी....आह...मै आपके लौड़ा के बिना नहीं रह सकती पापा, उसके बिना मै मर जाऊंगी... अभ्य्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः... आह्ह्ह... चोदिए पापा... आह्ह्ह...

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माहौल पूरा मादक हो गया था । प्राची की गूंज कमरे के बाहर जा रही थी और दादी का नींद भी तोड़ दी थी । दादी मन में : कितनी प्यास है दोनों की बुझती ही नहीं , पूरी रात दोनों लगे रहते है। कितना चूदाई करते है दोनों । जानवरों की तरह एक दूसरे को भोगते रहते है। चलो अच्छा ही है ,मेरा बेटा को एक गरम चूत वाली लड़की तो मिली जो उसे कभी मना नहीं करती। अच्छा है। बस अब मेरा बेटा उसको गर्भवती भी जल्दी कर दे , मुझे और कुछ नहीं चाहिए ।

इधर पापा और बेटी की काम क्रीड़ा जोरो पर थी। जबरदस्त धक्के लग रहे थे योनि पे। जबरदस्त चीत्कार से कमरा गूंज रहा था । साथ ही उन धक्कों की आवाज थप थप कर के शोर मचा रही थी ।


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पापा अब बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे और उनके लिंग से एक गाढ़ा वीर्य का झरना निकलने लगा ।

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पापा ने प्राची के योनि को लबालब पूरी तरह से दिया। उनका वीर्य इतना निकला कि प्राची के योनि से ओवरफ्लो सा होने लगा ।

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प्राची की बच्चेदानी में पूरा एक एक बूंद पापा टपकते रहे और फिर कुछ ही देर में इनका लौड़ा,नुनु बन गया और प्राची के चूत से बाहर आ गया ।

पापा: मेरी जान आज पूरी गहराई में गया है मेरा माल ,जरा दिखा तो चूत अपना।

पापा के आदेश से प्राची ने अपना योनि पापा के सामने फैला दिया । पापा ने योनि का दोनों द्वार पे लगी पतली चमड़ी को पकड़ के चीर दिया और अंदर अवलोकन करने लगे ।

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चूत वीर्य से चिपचिपी हो गई थी । और पापा का माल अंदर तक चला गया था ।

पापा संतुष्ट थे ।

पापा: बेटी , किस्मत अच्छा रहा तो आज के संभोग के बाद तुम गर्भावस्था को प्राप्त हो जाओगी ।

प्राची शर्मा के अपना सर दूसरी और गुमा लिया । पापा ने नंगे ही प्राची का आलिंगन करते हुए उससे लिपट गए । और थोड़े देर के बाद दोनों थके हुए पति पत्नी गहरी नींद में सो गए ।
✍️✍️✍️
 
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Update 31:

अगली ही सुबह,पापा ने तय किया कि एक फैमिली वेकेशन तो होना ही चाहिए । पापा ने प्लानिंग शुरू कर दी । ऑफ़िस में बैठे हुए वो सोच रहे थे कि कौन सा जगह ठीक रहेगा ,जहां वो पूरे परिवार के साथ जा सकते है , और प्राची के साथ भरपूर आनंद वो उठा सकते है। पापा ने सोचा क्यों ना गोवा या शिमला की वादियों में चला जाए। लेकिन वो फाइनल डिसीजन नहीं ले पा रहे थे । उन्होंने सोचा क्यों ना घर में ही सभी से पूछ के फाइनल किया जाए ।

रात डिनर करने के समय पापा ने अपना प्रस्ताव सबके सामने रखने का सोचा। दादी ने डिनर लगवा दिया और सभी डिनर टेबल पे बैठ गए ,खाना खाने के लिए।

पापा: ( खाने का पहला निवाला मुंह में लेते हुए ) वाह मां खाना तो बहुत टेस्टी बना है ।

दादी : हम्ममम...तेरी धर्म पत्नी ने जो बनाया है । हाहाहाहाहा...

पापा: ओह प्राची ने बनाया है , तभी मैं कहूं कि आज स्वाद इतना अलग सा क्यों लग रहा है। बहुत अच्छा बना है प्राची ।

प्राची : थैंक्यू पापा।

प्रज्ञा : वाह पापा , आप तो दीदी को खुश कर दिए । उसके खाने का बराई कर के ।

पापा: अब क्या करूं ,तेरी दीदी है ही ऐसी ।

प्रज्ञा : और मेरे बारे में भी तो कुछ बोलिए पापा , मैने आज सबेरे चाय बनाई थी , अपने तो चुप चाप पी लिया ।

सब हंसने लगे । पापा ने बोला : अरे मेरी बेटियां रानी , बहुत अच्छी चाय बनाई थी तुमने । एक दम करक था।

प्रज्ञा : हां , आपको तो सिर्फ दीदी का मेहनत दिखता है , मेरा तो दिखता ही नहीं । बोलने पर बोल रहे है कि अच्छी बनी थी चाय ।

दादी : अरे, जरूरी थोड़ी है कि पापा कर बार तुम बराई ही करेंगे , नहीं भी बोले फिर भी वो अच्छा ही रहता है , बस तुझको मुंह फूलना रहता है ।

पापा: देख प्रज्ञा , सच में अच्छा था सबेरे का चाय , अभी तो सबलोग साथ में खा रहे है बैठ के तो मैने सोचा बोल ही देता हु । उस समय तो तू पास में थी नहीं , नहीं तो उसी समय तुझे बता देता ।

प्रज्ञा : चलो थैंक्यू पापा

पापा: दादी से : मां तुमने जो हनीमून वाली बात बोली थी , मै उसके बारे में सोच रहा था ।

प्रज्ञा तपाक से बोल परी : पापा मैने बोला था हनीमून वाली बात , ये मेरा आडिया था ।

पापा: हां हां , सॉरी तेरा ही आडिया था ।

प्रज्ञा : देखो ,इसी लिए गुस्सा होती हु मै , मुझे कभी क्रेडिट नहीं देते है आप ।

पापा: अरे मेरी मां , थैंक्यू , तेरी ही आडिया था । मुझसे गलती हो गई । मुझपे अब गुस्सा मत होना , अपने प्यारी बेटी का गुस्सा मै कैसे झेल पाऊंगा ।

प्रज्ञा : चलिए नहीं हो रही ,गुस्सा बस क्रिडिट दिया करिए मेरी बात का भी मुझे ।

दादी और प्राची हंसने लगे ।

पापा: ओके , मा , तो उसके बारे में मै सोचा और सोच रहा हु , शिमला या गोवा , जाने का । आप लोग बताइए कहा चलना है सबको फैमिली ट्रिप पे।

दादी : बेटा मै तो ये सब ना जानती , मुझे तो किसी मंदिर वाली जगह पे ले चल ।

प्रज्ञा : अरे दादी , आप क्या बोल रही हो , पापा ने कितना अच्छा जगह चुना है । आप मंदिर वाली जगह बोल रही हो।

दादी : मुझे ये सब जगहों का पता नहीं है , मै नहीं गई कभी , मंदिर वाले जगह ही घूमने जाती थी तेरे दादा जी के साथ ।

प्रज्ञा : वो अलग टाइम था दादी , आज हनीमून डेस्टिनेशन गोवा या शिमला को ही माना जाता है, मंदिर वाली जगह अगली बार चले जायेंगे पापा ।

दादी : हम्ममम...मै भी जानती ये सब ,तुम लोग ही आपस में सोच लो।

प्रज्ञा : पापा मुझे तो गोवा से ज्यादा शिमला पसंद है ।

पापा: हम्ममम... और तुम बताई प्राची।

प्राची तो जानती ही थी कि जगह कोई सी भी हो , पापा तो उसके साथ प्यार ही करेंगे बस । तो जगह से उसे क्या फरक पड़ता है । उसने बोला : जो प्रज्ञा को पसंद है पापा, वही ठीक है। शिमला अच्छा रहेगा । वैसे भी दादी को गोवा उतना पसंद नहीं आयेगा ।

दादी : क्यों नहीं आएगा .

प्रज्ञा : हंसते हुए , दादी वहां लोग कुछ ज्यादा ही ओपन हो जाते है।

दादी प्रज्ञा का इशारा समझ गई : अच्छा फिर शिमला हो ठीक है बेटे ।

पापा: चलो , तब मैं फैमिली ट्रिप का तैयारी करता हु । कल ही सारा बुकिंग स्टार्ट कर दूंगा ।

अब लोग खुश हो गए । बहुत दिन बाद इस घर में इतनी खुशी आई थी ।

पापा ने खाना खाने के बाद बेडरूम में गए , ओर अपनी पत्नी का इंतजार करने लगे । प्राची सर काम निपटा के गई । और हर दिन की तरह ही , पापा को यौन सुख दिया ।

जम के चूदाई किया पापा ने उसकी उस रात भी।



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और आधी रात तक चूदाई करने के बाद दिनों सो गए ।
✍️🔥🔥🔥
 
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sexsarkar

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Update 34:
Note: iss episode me GIF ka prayog kiya gya hai jiska size thora jayda hai or load hone me samay lag sakta hai . Kahani ka luft bina GIF ka nhi aayega, to use load hone de phir badhe.

महिलाएं जल्दी जल्दी किचेन का काम निपटा रही थी , प्राची पापा का दूध तैयार कर रही थी। वही प्रज्ञा अपने कमरे में जा चुकी थी । दादी बरतनों को दोने के बाद उनको स्टैंड में लगा रही थी । पापा रात की न्यूज टीवी में देख रहे थे । पर पापा का मन टीवी देखने पे लग नहीं रहा था । उनको रात के खाने के बाद जब तक प्राची रात का काम निपटा नहीं लेती थी तब तक रूम में आती नहीं थी, तब तक इंतज़ार करना पड़ता था । उनको ये प्राची का इंतजार करना ,बिल्कुल पसंद नहीं था। उनको ये इंतजार एक लंबे समय जैसा लगता था । खैर आज पापा के मुख पे एक अलग खुशी सा था । उनको आज का इंतजार उतना चुभ नहीं रहा था । वो प्राची के साथ रात को एक नया खेल खेलने वाले थे ।

प्राची और दादी दोनों ही किचेन का काम खत्म कर के जल्दी ही निकल गए । दादी ने पापा को अभी भी हॉल में बैठा पाया ।

दादी : क्या हुआ मेरे लाल , आज सोना नहीं है ?

पापा: हां मां,बस अभी गया । आज सोचा थोड़ा न्यूज देख लूं।

दादी : हां जा जल्दी सोने..., वैसे तू सोएगा तो नहीं ही अभी, प्राची के साथ प्रेम के पल जो गुजरने है । जा प्राची, पापा संग प्यार करना अच्छे से ।

प्राची शर्माते हुए : जी दादी ।

दादी : प्राची , मेरी बच्ची, तू कितनी सुशील है री, मेरी बात कभी नहीं कटती।

दादी पापा से : मेरी फूल सी बच्ची का सदा ऐसे ही ख्याल रखना मेरे बच्चे, हमेशा प्यार करना ।

पापा: जी मां, आप निश्चिंत रहिए , एकदम, प्राची को मै कभी दुखी नहीं होने दूंगा । और सही बोला आपने प्राची जैसी सुशील बेटी और पत्नी मुझे कही ओर नहीं मिलती , इतनी सुशील सी लड़की है ये । बहुत ख्याल रखूंगा में आपकी पोती का।

दादी : बस बेटा मै यही चाहती हु कि मेरी बेटी पर तेरे प्यार की बरसात होती रहे और जल्दी ही वो फलने फूलने लगे( दादी का इशारा प्राची के गर्भवती होने से था।)

पापा: हां मां,अब तो सबको उसी पल का इंतज़ार है। प्राची को बस अच्छे से मै प्यार करता रहूंगा , अब आगे ऊपर वाले की मर्जी । अपने बोला था तो कल एक बार डॉक्टर से भी दिखा दूंगा ।

दादी : शाबाश मेरे बच्चे , ले जा अब अपनी बीवी को सहवास के लिए । अच्छे से रात गुजरे तुम दोनों की । और आवाज थोड़ा कम किया करो तुम दोनों , मेरा तो ठीक है ,पर घर में एक और जवान होती हुई बेटी है, जो अभी अभी यौवन युक्त हुई है। उसे इन सब में अभी बहुत ज्यादा उत्सुकता होती होगी। तुम दोनों का आवाज उसके यौवन को हमेशा झकझोर देता होगा । तो इसलिए थोड़ा संभल के ।

पापा और प्राची को पता था दादी प्रज्ञा की बात कर रही है।

पापा: जी मां, हम ध्यान रखेंगे। पर प्रज्ञा समझदार लड़की है मां , उसे पता है कि अब उसकी दीदी पापा की पत्नी बन गई है और पति पत्नी में प्यार तो होता ही है। फिर भी हम ध्यान देंगे कि आवाज से उसे किसी तरह की डिसटर्बएंस ना हो।


दादी: हां समझ दार तो है ,लेकिन एक कुंवारी लड़की नहीं है। उसे भी अब ये सब जानने की उत्सुकता होगी ,की दीदी और पापा ऐसा क्या करते है कि दीदी को इतना मजा या दर्द होता है। तो बस थोड़ा सा संभल के।

पापा: ठीक है मां।

दादी : चल में सोने चली , प्राची को ले जा सहवास के लिए ।

प्राची शर्मीली सी लड़की की तरह बस नजरें नीचे किए हुए दादी की आदेश सुनते ही पापा के साथ चल पड़ी ।

दादी अपने रूम में चली गई थी । पापा ने प्राची के कमर में हाथ डाला और अपने कमरे में ले जाने लगे : आजा मेरी प्राची बेटी , पापा का मन बहुत बदमाशी करने का हो रहा है तेरे साथ मेरी लाडो।

प्राची अपने कदम बढ़ाते हुए : पापा मेरी जान , आपकी बदमाशी ही तो मेरे दिल को भा स गया है। मुझे पता नहीं था कि शादी करने के बाद मुझे आपसे इतना आनंद मिलेगा पापा। आप बहुत अच्छे है। आपको बदमाशी करने से कोई नहीं रोक रहा ।

पापा कमरे में अन्दर दाखिल होते हुए : बेटी , तू जो मेरा साथ देती है मुझे बड़ा अच्छा लगता है । मन करता है , काम धंधा सब छोड़ दूं और तेरे साथ बस बदमाशी ही करता रहूँ पूरा दिन।

प्राची : दरवाजा बंद करते हुए : पापा अच्छा आप कुछ गिफ्ट का पूछ रहे थे ना , मुझे तब से जानना है कि ऐसा क्या है जो आपको मुझसे चाहिए , मुझे तो सारा गिफ्ट तो आप ही ले कर देते है ना।

पापा: बेटी , वो गिफ्ट बहुत स्पेशल है मेरे लिए जो सिर्फ तू दे सकती है मेरी बेटी।

प्राची : ओके पर वो गिफ्ट है क्या पापा।

पापा: वो तो मैं तुझे जी भर के प्यार करने के बाद ही बताऊंगा । आजा मेरी रानी मेरी बांहों में।


उन्होंने प्राची को अपने मजबूत बांहों में भर लिया और उसे उठा के बेड की ओर चल परे ।

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पापा ने अपनी बेटी को उस बंद कमरे में भोगना चालू कर दिया । फिर तो वही 30 मिनट तक पापा और बेटी की सम्भोग क्रिया चलती रही।
उन्होंने एक जबर्दस्त फॉरप्ले के बाद ये क्रिया शुरू किया था ।

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प्राची अब भावनात्मक रूप से पापा के संग सहवास का आनंद उठाती थी। वो पापा से अब पूरी तरह प्यार कर बैठी थी और उनको अपना पति दिल से मान लिया था । एक बार कोई लड़की किसी मर्द को अपना पति दिल से मान लिया तो समझो उसपे अपना जो जान लुटा देती है।

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पापा जब भी उसे छुटे तो उसे एक अलग एहसास होता था । वो पिघलने लगती थी पापा के स्पर्श मात्र से ही।

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पापा जम कर प्राची के स्तनों को चूसते और प्राची को एक अलग आनंद मिलता हर बार ही।
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और जब पापा प्राची के चप-चपाती योनि में अपना लिंग डालते तो उसको एक अलग ही परम आनंद मिलने लगता था ।

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वो इस दुनिया से जुदा से हो जाती । उसे खुद का होश नहीं रहता जब पापा का लिंग अपने गहराई में वो महसूस करती ।


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उसका संभोग क्रिया लंबा चलता , कभी प्राची पापा के लौड़े पे बैठ कर चूत भेदन करवाती ...


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तो कभी पापा अपनी लाडली बेटी को चित लेटा के एकदम गहराई में लिंग घुसा के लंबे धक्के मारते।

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और पापा प्राची को तब तक रगड़ के चोदते रहते जब तक अपना गढ़ा, गरम, सफेद क्रीम प्राची के चूत में ना चोर देते ।

उस रात भी वही हुआ । प्राची को उसके बाप ने खूब जम के भोगा । और दोनों पसीने से लथपत हो गए और हांफने लगे ।

प्राची को यौन सुख की अब लत लगती जा रही थी।
 
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sexsarkar

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Any guess ki papa kya gift mang sakte hai apni beti se....answer me in comments.. I will continue the stories only if I get some good comments.. otherwise if no one find this story erotic or intresting, I will end this story after one or two updates .
 
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rajeev13

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Any guess ki papa kya gift mang sakte hai apni beti se....answer me in comments.. I will continue the stories only if I get some good comments.. otherwise if no one find this story erotic or intresting, I will end this story after one or two updates .
मेरा अनुमान है की Papa Prachi से ये special gift मांग सकते हैं कि वो उसकी छोटी बहन प्रज्ञा को भी इस रिश्ते में शामिल करने की consent दे, या फिर प्रज्ञा को धीरे-धीरे तैयार करने में मदद करे।
क्योंकि दादी पहले ही प्रज्ञा के यौवन और उत्सुकता का जिक्र कर चुकी हैं, और घर में अब "एक और जवान बेटी" है। Papa का मन "badmashi" वाला है, तो वो शायद Prachi से चाहते होंगे कि वो अपनी छोटी बहन को भी पापा की "दूसरी लाडली" बनाने में साथ दे। या फिर gift ये हो कि Prachi खुद पापा को प्रज्ञा के साथ खेलने की इजाजत दे और कभी-कभी participate भी करे।

दूसरा strong possibility anal gift (पहली बार गांड मारने की पूरी आजादी) या फिर impregnation fantasy (Prachi से कहना कि आज वो बिना रोकटोक गर्भवती होने के लिए fully surrender कर दे)। लेकिन story के flow और दादी के dialogue को देखते हुए family expansion वाला angle ज्यादा fit लग रहा है!
 

rajeev13

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भाई, इतनी जल्दी हार मत मानिये आपकी story में eroticism अच्छा है। Foreplay, emotions, dialogue, power dynamic सब मौजूद है। Prachi का पापा को "पति" मान लेना और emotional surrender वाला part अच्छा लिखा है। Dadi का character भी बहुत strong है वो openly बात कर रही है, जो इस कहानी में मसाले को और बढ़ाता है।

लेकिन आप चाहो तो थोड़ा और sensory details डाल सकते हो जैसे sounds, smells, sweat, trembling, eye contact, Prachi की inner feelings को और गहराई देना जैसे शर्म, प्यार, guilt, lust का मिश्रण, Dialogue में और थोड़ी dirty talk बढ़ा सकते है, लेकिन natural way में ही रखना ज्यादा बेहतर होगा
अंत में Cliffhanger भी अच्छा लगा।

मुझे तो story erotic और interesting लगी, काफी समय से इस कहानी का review पोस्ट करना था लेकिन ऑफिस के कार्यों में व्यस्त होने के कारण मुझे ज्यादा समय मिल नहीं रहा था!

अगले अपडेट की प्रतीक्षा रहेगी... :)
 
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