• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller 100 - Encounter !!!! Journey Of An Innocent Girl (Completed)

nain11ster

Prime
23,655
80,785
259
दूसरी घटना… भाग 1




अगले दिन सुबह से ही हॉस्पिटल में देखने आने वालों की भीड़ लगने लगी थी, हर कोई बस गुस्से मै एक ही सवाल पूछ रहा था, गोली चलाई किसने. महेश भईया इन मामलों में काफी समझदार व्यक्ति थे। वो हर किसी के सवाल का जवाब बस इतना ही कहकर देते, बस छोटा सा हादसा था और ये बाहर की जगह है इसलिए यहां फालतू के सवाल कोई नहीं करेगा.


उनके समझदारी का हिसाब किताब आप इन बातो से लगा सकते है कि वो जब सहर, हॉस्पिटल के लिए निकल रहे थे तब मुरली और वंशी को वहीं छोड़ आए थे. वो तो बस दोनो को नहीं लेकर अाए क्योंकि लोगों को जैसे ही पता चलता घर में कोई नहीं था और ये दोनो रखवाली कर रहे थे, तब घटना के पीछे की सच्चाई को समझने से पहले ही पूरे गांव में अफवाह का बाजार गरम हो जाता। हालांकि सच ही होता लेकिन महेश भईया ये बात थोड़े ना जानते थे.


दिन के 2 बजे तक भाभी को होश आ गया था और मां ने सबको आईसीयू के गेट पर ही खड़ा करके, मुझे बुलाई और अपने साथ अंदर लेकर पहुंची. भाभी को आईसीयू में रखा गया था, बिल्कुल किसी फिल्मी दृश्य की तरह वहां का माहौल था, जहां उनके नाक पर ऑक्सीजन मास्क लगे थे। हाथों में स्लाइन पाइप, पास में एक नर्स बैठी हुई थी और भाभी आखें मूंदे परी हुई थी.


मै और मां उनके पास पहुंचे, और पास लगे स्टूल पर बैठ गए. भाभी अपनी आंख खोलती हम दोनों को देखने लगी, देखते ही देखते उनके आखों से आशु की धारा छलक आयी. ये आशु शायद मुझे देखकर निकले थे, ये बात हम दोनों ही केवल जानते थे.


मेरे अंदर उनके लिए जो भी द्वेष और नफरत थी वो अपनी जगह थी, लेकिन बचपन से साथ था उनका, उन्हें दर्द में तो नहीं ही देख सकती थी. मैंने अपने हाथ से उनके आशु पोंछ दिए और धीमे से उनके कान में कहने लगी… "मैंने किसी को कुछ नहीं बताया है, और ना ही बताउंगी. इसलिए ये उल्टे सीधे पागलपन मत करो, जो भी रहेगा वो हमारे बीच रहेगा, ऊपर से किसी को कुछ नहीं पता चलेगा". ..


मैं अपनी बात कहने के बाद उठकर वहां से जाने लगी, तभी भाभी ने अपने उल्टे हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया. उनके आंख से आशु भी बह रहे थे और चेहरे पर मुस्कान भी थी. हमे देखकर मां मुझसे पूछने लगी… "तुम दोनो के बीच क्या हुआ था मेनका, तेरी बात सुनकर रुपा, रोते रोते हंस क्यूं दी."


मै:- हम दोनों के बीच क्या होगा मां. ये तो आप लोगो की दिमागी उपज है. मै क्या महेश भईया के यहां नहीं जा सकती, और जाऊंगी तो आप लोग कोई भी बात सोच लोगे क्या?


मां:- क्यों ना सोचे? तेरे जाते ही इतना बड़ा कांड हो गया. किसी को समझ में आने लायक छोड़ा है तुम दोनो ने मिलकर. रूपा को बंद कमरे में आखिर खुद पर गोली चलाने की जरूरत ही क्या थी?


भाभी, अपना ऑक्सीजन मास्क उतारकर किसी तरह गहरी श्वांस ली. पास बैठी नर्स ने उठकर मना किया, लेकिन भाभी अपने हाथ के इशारे से उसे रुकने कहीं और आंख के इशारे से हमे अपना चेहरा नजदीक लाने को कहा… "मै.. पिस्तौल को साफ कर रही थी. पता ना किसने उसका लॉक खुला छोड़ दिया था, गलती से फायर हो गई."


इतना कहकर भाभी ने वापस से मास्क पहन लिया और सीधी लेट गई. मै क्या बाहर निकलती, मां ही गुस्से में तमतमाई बाहर निकली और मनीष भईया को एक थप्पड़ लगा दी. किसी को कुछ समझ में नहीं आया. बहुत भीड़ थी उस बीच मनीष भईया को थप्पड़ पड़ी, इस बात से वो भी थोड़ा चिढ़ गए… "मुझे क्यों थप्पड़ मार रही हो."


मां:- तेरा पिस्तौल वो साफ कर रही थी, और उसका लॉक खुला हुआ था. तू अपनी चीजों का ध्यान क्यों नहीं रखता है. इन फालतू के काम के लिए कभी मेरी बहू को कहा ना तो अगली बार तुझे ही गोली मार कर लिटा दूंगी.


पिस्तौल का लॉक खुला हुआ था ये बात सुनकर पिताजी भी गुस्से में आ गए और उन्होंने भी 2 थप्पड़ जड़ दिए भईया को. मुद्दा ये नहीं था कि मेरे मा या पिताजी को अपनी बहू की हालत पर बहुत ज्यादा दया आ रही थी. वो दोनो तो यही सोच रहे होंगे कि अंदर ही मर गई होती तो 2 आंसू बहाकर कुछ भी कह देते. बंद कमरे में बहू ने खुद को क्यों गोली मार ली केवल इस बात की चिंता ने दोनों को इतना आवेशित किया था.


यही एक ख्याल शायद भाभी के मन में भी रहा होगा. फांसी लगाकर या जहर खा कर मरी, तो मरने के बाद शासुराल से लेकर मायके तक में में बदनामी होगी. यदि गोली लगने से मरी तो कोई कुछ भी आसानी से जवाब बना सकता है.


खैर हमारे घर में इंसानी भावना तो बहुत ज्यादा थी, लेकिन हमेशा इज्जत और प्रतिष्ठा का दायरा सबसे ऊपर रहा है और इंसानी भावना उसके नीचे ही रही है और सदैव रहेगी. और यही एक मात्र सत्य भी था. फिर मैंने भी तो भाभी की घटना को पहले इज्जत और प्रतिष्ठा के नजरिए से देखा. भाभी ने भी खुद के जान लेने पहले इन बातो का ध्यान रखा. महेश भईया ने भी वही किया और मां पिताजी की भी चिंता मैंने तब खत्म होते देखी, जब उनको पूर्ण संतुष्टि मिली की पूरे घटना में इज्जत प्रतिष्ठा जाने जैसी कोई बात नहीं.


बहरहाल जैसे ही हर किसी कि चिंता खत्म हुई, वहां से धीरे-धीरे भिड़ भी छटने लगी. पापा को काम याद आ गया, मां महेश भईया के साथ सहर वाली कोठी पर सबके लिए खाना बनाने चली गई. मिलने आने जाने वाले तो आते रहे और जाते रहे। आखिर में केवल मै, मनीष भईया, भाभी की मां, उनका छोटा भाई और मेरे लिए आश्चर्य का केंद्र नकुल वहां रुका था जिसे कोई काम नहीं था.


भाभी ठीक थी इस बात से मै राहत कि श्वांस ले रही थी, बाकी हमारा अंदरुनी मामला तो शुरू ही हुआ था, जो फिलहाल खत्म होने वाला नहीं था. मैं भईया के कंधे पर हाथ देती… "ढीट है आपकी बीवी, इतनी जल्दी मरेगी नहीं, सबको ले जाकर कुछ खिला पीला दो, मै और नकुल है यहां पर."


मनीष भईया:- नहीं मेरी इक्छा नहीं है खाने की. शायद उसकी ये हालत मेरे वजह से है. मुझे ध्यान देना चाहिए था रुपा पर. तुम लोग को भूख लगी है तो जाकर कुछ खा आओ.


मै:- अब जाओ भी भईया, जबतक आप खा-पीकर आओगे, तबतक भाभी भी दोबारा मिलने के लिए तैयार हो जाएगी. फिर आप लोग उनके सामने ऐसे बदहाल सूरत लेकर जाओगे क्या?


मेरी बात शायद भईया के छोटे साले अनुज को समझ में आ गई. वो अपनी मां और जीजा का हांथ खींचकर वहां से ले गया. उनके जाते ही मैंने नकुल को अपने पास बुलाया… "क्यों भाई तुम्हे कोई काम नहीं है क्या? और तेरे चेहरे की हवाइयां क्यों उड़ी है?"..


मै वेटिंग चेयर पर बैठी थी, मेरी बात सुनकर नकुल ठीक मेरे आगे अपने दोनों पाऊं पर बैठ गया और मेरा हाथ पकड़ कर… "मेनका मै बुरा फसा हूं, प्लीज मुझे बचा ले"..


उसके सर पर एक हाथ मारती… "तू पहले ऊपर आकर बैठ, और ठीक से समझा कि कहना क्या चाह रहा है"..


नकुल:- मेनका मुझे 20 हजार रूपए चाहिए, प्लीज दे ना. 1,2 महीने में मै लौटा दूंगा.


मै:- हां तो इसमें इतना परेशान होने वाली कौन सी बात है. रुक मै पिताजी से बात करके अभी दिलवाती हुल. 20 हजार ही चाहिए ना, और तो जरूरत नहीं है.


नकुल:- क्या कर रही है, दादा (मेरे पापा) से पैसे के लिए कहना होता तो मै अपने पापा से नहीं मांग लेता. तू अपने पैसे दे ना.


मै:- हां मै अपने पैसे ही दूंगी, लेकिन पिताजी को बता तो दूं?


नकुल:- इसमें दादा को क्यों बताना है, तुम मुझे दोगी और मै तुम्हे वापस कर दूंगा.


मै:- मुझे नहीं पड़ना इन झमेलों में. पिछली बार भरोसा करके तुझे 500 दिए थे, क्या कहा था तुमने, मेनका कल दे देता हूं. उस कल को बीते साल भर हो गए. मै तेरे बातों में नहीं आने वाली, पिताजी को पता रहेगा तो मेरे पैसे वसूल हो जाएंगे, वरना 20 हजार का झटके से मै खटिया पकड़ लूंगी.


नकुल, थोड़ा गुस्सा दिखते… "8 लाख 42 हजार है तो तेरे अकाउंट पर, उसमे से 20 हजार चले भी गए तो क्या फर्क पड़ेगा।"..


मै:- मेरे पैसों पर नजर ना लगा नकुल. पेट काट-काट कर मैंने बचपन से ये पैसे जोड़े है. तुझे और पिताजी को छोड़कर तो किसी को पता भी नहीं की मेरे अकाउंट पर कितने पैसे है. तू राज जानने का फायदा नत उठा. क्रेडिट खो चुका है तू.


नकुल:- मतलब नहीं दोगी..


मै:- नाह ! कितने भी ड्रामे कर ले मुझसे पैसे नहीं निकलवा सकता. तुझे दिए तो मेरे पैसे डूब जाएंगे. वैसे एक बात बता तुझे तो मुझसे ज्यादा पैसे मिलते है. मैंने तो भाभी (नकुल की मां) से ये भी सुना है की तू 1-2 खेत का पैसा इधर-उधर कर देता है, फिर मुझसे पैसे क्यों मांग रहा?


नकुल, मेरी बात सुनकर कुछ सोचते हुए… "वो सब छोड़, मेरे पास एक अच्छा ऑफर है."..


मै:- क्या ?


नकुल:- तू मुझे 20 हजार दे और मै तुम्हे 40 हजार लौटा दूंगा. अब तो खुश ना..


मै:- चल चल, उल्लू किसी और कि बनाओ, 40 हजार क्या 40 लाख का भी वादा करेगा तो मै नहीं मानने वाली. भरोसा ही नहीं रहा तुझ पर.


नकुल:- ठीक है स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट बनवाकर दू, तब मानेगी..


मै:- बहुत होशियार है तू नकुल. स्टाम्प पेपर का क्या मै अचार डालूंगी. किसी को पता चला तुझे पैसे देने के एवज में मैंने पेपर बनवाए तो पूरे परिवार में मेरी ही फजीहत होगी. तू क्यों मेरा दिमाग चाट रहा है, मै नहीं दूंगी पैसे, किसी और से माग ले.


"क्या हो गया नकुल को क्यों डांट रही है?"… मै थोड़ा ऊंचा बोल गई शायद मनीष भईया ने सुन लिया.


नकुल:- कुछ नहीं चाचू, मेनका दीदी को बहुत दिन से स्मार्ट फोन लेने का मन था, वहीं मै तबसे कह रहा था कि मनीष चाचू है यहां पर बात कर लो. इमरजेंसी कब आ जाए किसे पता. डब्बे के फोन में तो ठीक से नेटवर्क भी नहीं रहता चाचू….


कमीना सही खेल गया. अब मुझे मोबाइल दिलवाने के बहाने पैसे निकलवाने की सोच रहा है…. मनीष भईया भी उसकी बात पर कुछ देर तक सोचने के बाद… "हम्मम ! ठीक है तू अभी चला जा और जाकर मेनका के लिए एक स्मार्ट फोन ले आ."..


मै तो पहले से जानती थी, मुझे साथ भेजेंगे नहीं, और ये अपना तिकड़म लगा रहा होगा. मै मनीष भईया से बोलकर उन्हें अभी रोक तो लेती, लेकिन बाद में मेरा ही नुकसान था. बाद में जब सब सामान्य होता तो परिवार के लोग सहर में नहीं होते. या फिर ये बात भी निकालकर आती की घर में इतने फोन है, एक लैंड लाइन है, ऊपर से एक डब्बे वाला मोबाइल तो है ही मेरे पास, फिर फोन की क्या जरूरत. फिर मुझे ये भी देखना था कि नकुल अपने पैसे के लिए क्या क्या करता है? मै ये सब सोच ही रही थी कि तभी सामने से नकुल ने कहा… "चाचू, 90 हजार दो."


90 हजार की बात सुनकर भईया उसे ऐसे देखे, मानो नकुल ने जायदाद ही मांग ली हो. सटाक से एक थप्पड़ परा… "90 हजार का फोन. इतने पैसे में मै 1 बगीचे खरीद लूंगा. साला नालायक, तू कुलीन हो गया है. तुझमें बाप दादा की संपत्ति बेचकर खाने वाले गुण आ गए है. साला चोट्टा, तब भईया (नकुल के पापा) मुझ से कहते है कि ये लड़का पूरा आवारा हो गया है. ख्वाहिश देखो, 90 हजार का फोन दिमाग में है. कभी 90 रुपया भी कमाया है अपनी मेहनत से."


नकुल:- कंजूस है पुरा मिश्रा खानदान. अपने लिए कह रहा हूं क्या, मेनका दीदी के लिए कहा ना. उनसे भी कह दो जाकर अपनी मेहनत से 90 रुपया कमा कर लाने.….. अपने लिए 12 लाख की गाड़ी रखे हुए हो. दादा के लिए अलग से 7 लाख की गाड़ी. उस पर भी नहीं हुआ तो पिछली दीवाली 25 लाख के ऊपर वाली वो कौन रोवर उठा लाए थे. फालतू के पैसे जब दिखाने के लिए गाड़ी पर खर्च करते हो तब ख्याल नहीं आता कि 42-45 लाख में पूरे गांव की ही जमीन खरीद लेते. मुझे लॉजिक मत सिखाओ चाचू. खुद की खरीदारी पर कोई हिसाब नहीं और एक बहन है उसे 90 हजार का फोन नहीं दिला सकते, जबकि आज तक कभी मेनका दीदी ने कोई 10 रूपए की चीज की भी डिमांड की है क्या?"..


मनीष भईया चुप. बड़ी बड़ी आंखों से नकुल को देखने लगे. अपने हैंड बैग से 1 लाख की गद्दी निकाल कर देते हुए… "ठीक है मेनका को जो फोन पसंद अाए वो दिलवा देना. उसे भी साथ लिए जा, अपनी पसंद से ले लेगी.".. भईया इतनी मायूसी से पैसे दे रहे थे मानो उनका केलजा कट गया हो.


मै तो खुश थी, लेकिन इस भोंदू ने तो अपने 20 हजार के लिए मनीष भईया से फोन के लिए 1 लाख निकलवा लिए. ऐसा नहीं था कि मेरे भैया 1 लाख या 2 लाख मेरे लिए नहीं निकाल सकते, लेकिन उनकी सबसे खास बात यही थी कि वो एक पैसा लगाकर उससे 2 पैसे कमाने की हमेशा सोचते थे और जरूरत अनुसार ही पैसे खर्च करते थे.


मनीष भईया ने इतने पैसे उसके हाथ में दिए तो साथ में मुझे भी जाने कह दिया, ये भी आश्चर्य की ही बात थी. खैर जैसे ही 4 कदम हम निकले होंगे, भईया ने साफ शब्दों में कह दिया मोबाइल लेना और सीधा हॉस्पिटल वापस, ज्यादा समय लगे तो वापस चले आना फिर किसी दिन देख लेंगे."..


नकुल हां में सर हिलाते हुए वहां से निकल गया. हम दोनों जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े… "मेनका अब तो इतना बड़ा काम कर दिया, प्लीज 20 हजार दे दे."..


मै:- ठीक है दिए लेकिन 2 शर्त है.. पहली ये की मुझे पता होना चाहिए की मै तुम्हे पैसे क्यों दे रही हूं, इसके लिए तुम्हे अपनी बात साबित भी करनी पर सकती है. दूसरी बात मेरे फोन मेरे हाथ में आते ही, मै वीडियो रिकॉर्ड करूंगी, जिसमे तुम ये कहोगे की मैंने बहुत जिद करके मेनका दीदी से 20 हजार रूपए 2 महीने के लिए लिए, जिसे मैं फलाने तारीख तक लौटा दूंगा."


नकुल कुछ सोचते हुए…. "पैसों के मामले में पुरा तुम खानदान पर गई हो और असर होगा भी क्यों ना. बचपन से लेकर अब तक कभी घर के बाहर निकली नहीं और पुरी उम्र रुपए, कागजात और खेत में ही कट गए, असर तो दिखेगा ना."



 

nain11ster

Prime
23,655
80,785
259
दूसरी घटना... भाग:-2




मै:- तेरी बात और बात का टोन दोनो नहीं पसंद आया मुझे नकुल. ऐसा नहीं है मै तुम्हे 20 हजार नहीं दे सकती या अपने पैसों में से 5 लाख नहीं दे सकती. लेकिन बस बात फिर वही हो जाती है ना, मै तुमसे पैसे मांगने नहीं जाऊंगी, और खुद से तुम्हे लौटने की इक्छा नहीं होती.


नकुल:- सॉरी मै जारा ऊंचा बोल गया. वो मुझे नीतू के लिए एक फोन लेना है, 19200 का वो फोन है, इसलिए मुझे पैसे चाहिए थे.


"ओह तो 2-4 दिनों में बात यहां तक आ पहुंची. ये गधा है और वो कुछ ज्यादा ही फायदा उठाने लगी है."… मन में सोचती हुई मैंने नकुल को घूरा और खा जाने वाली नज़रों से देखते हुए… "थू है तुझ पर, 20 हजार का फोन लड़की के लिए. शर्म तो बेचकर ही खा गया है जो मुझे ये सब बता रहा।"..


नकुल:- मेनका प्लीज, दे दे ना... मै तो हर वक़्त तुम्हारे काम ही आया हूं ना. हमेशा तुम्हे सपोर्ट ही किया है.. आगे भी करता रहूंगा.. प्लीज, प्लीज, प्लीज..


मै:- एक टांग पर खड़ा मत हो. तुम दोनो का आपसी मामला है और मैंने बोला है तो दूंगी पैसे, लेकिन नकुल तुझमें कुछ अक्ल है या नहीं है? लड़की के ऊपर तू कर्ज लेकर पैसे खर्च कर रहा है, घोर आश्चर्य है.


नकुल:- अक्ल है ना और बस फोन के लिए ही कमिटमेंट किया हूं, आगे से कुछ नहीं दिलाने वाला उसे, कसम से कहता हूं.


मै:- हम्मम ! ठीक है मै भी यहीं हूं देख लूंगी. मै तो इतना ही कहूंगी कुछ ऐसा मत करना जिससे तुम दोनो को पछताना परे. विवादित जमीन और विवादित रिश्ते में लोग केवल बर्बाद ही हुए है. मै इतनी बात किसी को नहीं कहती, लेकिन तुझसे लगाव है और बचपन से हम साथ है तो तुझे चेताना मेरा फर्ज बनता है, आगे तुम्हारी मर्जी.


नकुल:- हां मै जानता हूं, लेकिन मेरा विश्वास करो, ना तो मै फालतू के पैसे उड़ता हूं, और नहीं उड़ाऊंगा. रही बात मेरी मां ने तुम्हे क्या बताया वो तो वहीं जाने, लेकिन बहुत जल्द मै भी अपने जमा किए पैसे से एक रेंज रोवर पिताजी को गिफ्ट करूंगा. तुम्हे ये बता रहा हूं, किसी को बोलना मत.


मै, थोड़ी चौंकती हुई… "इतने सारे पैसे कहां से आए तुम्हारे पास"..


नकुल:- तुम्हारी तरह कुछ कुछ मैने भी पेट काटा था और मां ने जो 2 खेत कहे थे वो 2 खेत नहीं, बल्कि उसके साथ 4 सब्जी के खेत और भी है.


"हम्मम ! नीतू की बात ना होती तो ये राज भी नहीं खुलता. जितना सोची थी उससे कहीं ज्यादा धूर्त है ये. पर जो भी हो अपने लिए तो बेस्ट है."… नकुल ने मानो मेरा दिल जीत लिया हो. मै उसके साथ बाजार में चल रही थी. चारो ओर का माहौल मै बहुत दिनों बाद देख रही थी… तभी पीछे से आवाज आयी… "मेला नहीं लगा यहां जो लड़की गुम जाएगी, हाथ छोड़कर चल मेरे भाई."..


पीछे से किसी ने चिल्लाया, उनकी बात सुनकर मुझे थोड़ी हसी आ गई और नकुल पीछे मुड़कर देखने लगा कि कौन कमेंट करके भाग गया. खैर भिड़ में उसे तो कोई नहीं मिला लेकिन मुझे जरूर उसके हाथ से छुटकारा मिल गया. कुछ देर बाद हम एक बड़ी सी दुकान में पहुंचे.


मै पहली बार ऐसे दुकान में आयी थी. दुकान नहीं मानो महल बनवाया हो. यहां तो चारो ओर सफेदी कि चमकार थी बिल्कुल. ऊपर से ये पहचान वालो कि दुकान थी. हालाकि मुझे नहीं पता था कि ये पहचान कि दुकान है. किसी राजवीर सिंह की दुकान थी, जो नकुल को पहचानता था. जैसे ही उन्होंने हमे देखा, वो खुद हमारे पास चले आए.


नकुल उसको देखते ही नमस्ते किया, मै भी उन्हें देखकर नमस्ते करने लगी. थोड़ा सा परिचय जब हुआ तब समझ में आया कि ओह ये वही राजवीर सिंह है जिनके परिवार के किस्से पूरे जिले में मशहूर है. हो भी क्यों ना, खानदानी राईश और राजपूत परिवार में जिले के अंदर बहुत कम लोगो ने अपने धरोहर को बचाए रखा था, उनमें से इनका परिवार सबसे ऊपर था.


हम लोगो का परिचय स्वाभाविक सा था, क्योंकि इनके बहुत से खेत हमारे खेत से लगे हुए थे तो हमारे और इनके परिवार के मुखिया की मुलाकात भी होते रहती थी, और जमीन के मसलों को लेकर इनके बीच शराब वाली बैठक भी हुआ करती थी.


थोड़ी सी बात चीत के बाद के बाद उन्होंने हमसे आने का कारन पूछा और हमने भी उन्हें बता दिया… राजवीर अंकल ने अपने 2 करमचारी को बुलाकर हमे मोबाइल दिखाने के लिए बोलकर अपना काम करने चले गए. हम दोनों एक काउंटर के पास खड़े हो गए और ये गधा मुझे अकेला छोड़कर फोन पर आशिक़ी करने लग गया.


उनके 2 करमचारी मुझे ऐसे फोन दिखा रहे थे, मानो मै कोई महारानी हूं जो इनके काम से प्रसन्न हो गई तो मालिक से सिफारिश कर इन्हे तरक्की दिलवा दूंगी. पता नहीं क्या क्या बक रहे थे… "लेटेस्ट मॉडल, 4 जीबी रैम, ड्रैगन गलास, मोंकी गलास, चिता गलास और ना जाने क्या क्या"..


15 मिनट तक दोनो ने मिलकर फोन दिखने के नाम पर मुझे टोरचर करते रहे और मै पागलों की तरह बस कभी इस फोन को हाथ में लेकर देख रही थी, तो कभी उस फोन को.… "कितने बड़े बेवकूफ हो तुम दोनो जाओ और दूसरे कॉस्टोमर देखो. हेल्लो मिस"..


मै जबतक बेवकूफों की तरह फोन देख रही थी, सामने काउंटर में एक लड़की घुसी और उन दोनों सेल्स मैन को डांट कर भगा दी, और मुझे पुकारने लगी.… मै फोन नीचे काउंटर पर रखकर, उसे देखती हुई… "हां मैडम"..


लड़की.. मैडम नहीं, मेरा नाम प्राची है.


मेरे सामने 20-21 साल की एक खूबसूरत लड़की खड़ी थी, जो दिखने में बेहद सुंदर और उसके खुले कर्ली बाल, उसके सुंदरता पर चार चांद लगा रहे थे. कान में बाड़ी-बड़ी बालियां और नाक में प्यारी सी नथनी. चेहरे पर बिल्कुल हल्का मेकअप जो उसके मुस्कुराते हुए चेहरे की सोभा बढ़ा रहा था. साथ में सलीखे से पहना गया उसका सलवार कुर्ता, मेरे लिए तो वो किसी रोल मॉडल की तरह दिख रही थी..


मै:- जी मेरा नाम मेनका है.


प्राची:- हां मेनका, तुम्हे कैसा फोन चाहिए..


मै:- मै पहली बार फोन खरीद रही हूं, मुझे ज्यादा पता नहीं है.


प्राची:- कोई बात नहीं है, अपना बजट बता दो मै उस रेंज में फोन दिखा देती हूं. लो पहले ये ठंडा पी लो.


मै:- नहीं दीदी मै ये नहीं पीती, आप मुझे फोन दिखा दीजिए.


प्राची:- ऐसे कैसे नहीं पियोगी, पी लो. तुमने दीदी कहा ना तो अपनी बड़ी बहन का कहना मानकर ही पी लो.


मै:- दीदी वो काली वाली पीने से मेरा गला जलता है, मै मैंगो वाला पीती हूं.


प्राची:- ठीक है वहीं मंगवा देते है. तुमने सुना ना इन्होने क्या कहा, तो खड़े-खड़े मुंह क्या देख रहे हो, जाकर माजा या स्लाइस लेकर आओ जल्दी. हां मेनका बताओ कितने तक का फोन चाहिए..


मै:- वो 80-90 हजार तक का फोन चाहिए..


बजट सुनते ही प्रची ने 3 फोन मेरे सामने रख दिए और कहने लगी तीनों में से कोई एक पसंद कर लेने. मैंने ब्लू रंग का एक फोन उठा लिया. प्राची उस डिब्बे के नीचे अपना नंबर लिखती… "कोई समस्या हो फोन चलाने में तो मुझे कॉल कर लेना, हां पर यदि मै कस्टमर के बीच हुई तो शायद फोन ना उठा पाऊं, तो बुरा मत मान लेना."..


"आप इस दुकान में काम करती है?".. बहुत देर से मेरे मन में ये सवाल उठ रहा था, किसी तरह हिम्मत करके मैंने भी पूछ लिया..


मेरी बात पर वो मुस्कुराई… "हां मै यहां काम करती हूं, अपने 40 कर्मचारियों के साथ. थोड़े से मूर्ख है यहां के कुछ करामचारी, लेकिन कोई बात नहीं, उनके कारन मुझे हसने का मौका मिल जाता है"..


मै:- कैसे दीदी..


प्राची:- कैसे !!! अभी की ही बात ले लो. मै दूर से देखकर समझ गई कि तुम्हे उन दोनों की कहीं एक बात भी समझ में नहीं आ रही, तब भी वो बिना ये जाने की कस्टमर की क्या डिमांड है, अपना बेस्ट प्रोडक्ट दिखा रहे थे.. और तुम ऐसे चेहरा बाना रही थी मानो यहां आकर फंस गई. उनकी मूर्खता पर तो उनकी क्लास बाद में लगाऊंगी, लेकिन तुम्हारा वो उलझनों में फसने वाला चेहरा कमाल का था. सॉरी हां..


उनकी बात सुनकर मै भी हसने लगी. इतने में नकुल भी पहुंचा… "दीदी मोबाइल देख ली अपने लिए"..


प्राची:- हेल्लो तुम्हारा नाम क्या है?


नकुल:- जी नकुल..


प्राची:- बहन को मोबाइल खरीदवाने आए थे या गर्लफ्रेंड से बात करने. 10 मिनट तुमसे रुककर इसे मोबाइल नहीं खरीदवाया गया और सीधा चिपक गए कान में फोन लगाकर.


नकुल:- मै किसी से भी बात करूं तुम्हे क्या? दीदी तुमने देख लिया ना अपने लिए मोबाइल..


मै:- हां ये वाला पसंद आया मुझे..


नकुल मोबाइल को देखकर… "आईफोन ली हो, इसके फंक्शन अलग होते है दूसरे मोबाइल से, सैमसंग का ले लो ना, वो 84000 वाला नया आया है ना उसी को"..


मै:- उसके लिए तुम्हे यहां खड़े रहकर मुझे बताना चाहिए था नकुल. प्राची दीदी इसके ओर से मै माफी चाहती हूं, अभी उतनी समझ नहीं है.


प्राची:- इट्स ओके मेनका. मै यहां शॉप चलती हूं, इसने मुझे सिखाया कि किसी के निजी मामले में टांग नहीं अड़ाते. सो बुरा मानने वाली बात नहीं है उल्टा इसने मुझे ज्ञान दिया है. खैर बिल काउंटर उधर है.. कोई समस्या हो तो मुझे कॉल कर लेना…


मै उन्हें धन्यवाद कहती हुई मुर गई और अपने बैग से नकुल को 20 हजार देते… "इसी काम के लिए रुके थे ना हॉस्पिटल, लो रखो इसे."


नकुल:- अब ये क्या है मेनका, एक स्टाफ की बात सुनकर तुम ऐसे कहोगी.. देखी नहीं कैसे बदतमीजी से वो बात कर रही थी..


मै:- हां मैंने सब देखा.. जाओ पेमेंट कर दो इस फोन का…


मै नकुल के वायव्हार से थोड़ी खींची हुई थी. थोड़ी ही देर में मै हॉस्पिटल पहुंची और भईया के हाथ में पुरा फोन का बॉक्स थमाते… "भाभी से मिले की नहीं, डॉक्टर ने क्या कहा?"


भैया:- गोली काफी नजदीक से चली थी, जो आर पार हो गई. घबराने जैसा कोई बात नहीं है, और ना ही कोई परमानेंट अंदुरूनी डैमेज है. हां, लेकिन पुरा ठीक होने में कम से कम 6 महीने का वक्त लगेगा. मेनका यदि रूपा को कुछ हो जाता तो मै क्या करता… छोटे-छोटे बच्चे है उनका क्या होता?


भैया के चेहरे पर घोर चिंता और उनके आखों में आशु थे जिसे देख मेरा खून खौल गया. मन ही मन मै अपनी भाभी को बहुत बुरा भला कहा रही थी, साथ में ये सुकून भी था कि गुस्से में मेरे मुंह से कुछ निकला नहीं, वरना सब अपनी इज्जत तो बचा लेते, शायद भईया भी इस बात को जानने के बाद भाभी का मोह छोड़ देते, लेकिन उनके दोनो बच्चों का क्या होता?


फिलहाल तो भईया का दर्द मुझसे देखा नहीं गया और मैं उनके आशु अपने हाथ से साफ करती… "भाभी को कुछ नहीं हुआ ना, तो अब ये आशु क्यों? भाभी जब घर लौटेगी तो हम अठजाम करवाएंगे.."


भईया:- हां ठीक है ना.. कल से तू भी कितना परेशान हुई है. तू तो भगवान है मेरे परिवार के लिए, जारा सा अनदेखा करती तो ना जाने क्या हो जाता…


मै:- वो सब छोड़ो, पहले ये फोन देखकर बताओ कि कैसा है?


"बिल पर 86400 है, बाकी के पैसे दे".. भईया अपना चेहरा पो हुए, मुझसे कहने लगे…


मै:- मेरे फोन के नाम पर दिए थे ना तो बचे हुए पैसे मेरे अकाउंट पर..


भैया:- अकाउंट पर पैसे रखकर क्या करेगी, वहां परे-परे पैसे में जंग लग जाता है. तू एक काम क्यों नहीं करती, मेरे साथ बिजनेस कर. 10 लाख मुझे दे और साल के अंत में मै 2 लाख का प्रोफिट जोड़ दूंगा..


मै:- मेरे पास 10 लाख कहां से आए.


भैया:- 10 लाख तो कम ही बोल दिया है. पापा की मुंशी के लिए, पापा ने 4 लाख का मेहनताना तुझे देने का फैसला किया है. पता नहीं तूने अपना अकाउंट चेक किया कि नहीं, लेकिन उस पर जमा भी हो गए होंगे..


मै:- काबकी बात है ये..


भैया:- 8-10 दिन तो हो ही गए होंगे इस बात को.


मै:- छोड़ो वो सब, जल्दी से फोन खोलो ना.. मुझे देखना है..


भैया:- फोन तो तूने शानदार लिया है, मैं भी कई बार सोचा कि एप्पल का एक फोन ले लूं, लेकिन दाम सुनकर ही कभी हिम्मत नहीं हुई. पैसे जो भी लगे हो लेकिन जो फोन तुमने लिया है ना, जब ये तुम्हारे पास होगा तो लोग मुड़कर एक बार जरूर देखेंगे.


मै:- क्या इतना बढ़िया फोन है ये?


भैया:- बोल तो ऐसे रही है जैसे आईफोन के बारे में तुझे पता ही ना हो?


मै:- सच में मुझे पता नहीं है भईया.. आप भी ना कैसी बातें करते हो..


हम दोनों भाई बहन यूं ही अपने अपने दिल का गम भुलाकर, जो सामने नजर आ रहा था उसी में खुशियां ढूंढ़ते हुए, हम आपस में बात कर रहे थे. लगभग 1 घंटे बाद मां पापा के साथ हॉस्पिटल पहुंच गई. महेश भईया घर के चारो बच्चो को लेकर सहर घुमाने गए हुए थे.


उनके आते ही हम सब भी वहां से चल दिए. मकान बनने में जब हाथ लागा था, तभी मै यहां आयी हुई थी, अब तो ये लगभग पूरा तैयार था. लंबा चौड़ा और खूबसूरत मकान बना हुआ था, लेकिन यहां के मकान का स्पेस गांव के घर के मुकाबले कुछ भी नहीं था..


एक रूम में दरवाजा और फिनिशिंग का काम पूरा हो चुका था तो भईया ने वो रूम मुझे दे दिया और बचे हुए पैसों से उन्होंने बड़ी भाभी के साथ बाजार जाकर कपड़े और अन्य जरूरत के समान ले आने के लिए बोल गए. मनीष भईया तो कह गए लेकिन मेरी बड़ी भाभी सोभा तैयार हो तो ना. थोड़ी देर थोड़ी देर करके उन्होंने 4 से 6 बजा दिए, लेकिन अपने बिस्तर से वो हिली नहीं.


मुझे बहुत तेज गुस्सा आया लेकिन मै कर भी क्या सकती थी, यहां किसी को जानती भी नहीं थी. कोई था नहीं इसलिए मै छोटी भाभी के मां के कमरे में चली गई और उनसे बाजार चलने के लिए पूछने लगी. पूछते हुए मुझे अच्छा भी नहीं कह रहा था, थोड़ी उम्रदराज थी और आखों से ज्यादा दिखता भी नहीं था. वो तो साथ नहीं आयी लेकिन छोटी भाभी का भाई अनुज मेरे साथ चल दिया.
 

SHADOW KING

Supreme
15,891
32,846
259
nice update ..nakul ko paise chahiye neetu ke liye mobile kharidne ke liye ..isliye usne menka se madad maangi ..
par nakul ke paas dimaag bahut hai isliye usne manish bhaiya ko fansa liya 😁😁😁.

par 20 hajar ka phone neetu ne maanga usse nakul ko samajh nahi aaya ki wo uska istemaal kar rahi hai 🤔🤔..
har insaan apni aukaat dekhke demand karta hai ..

manish bhaiya ne 10 lakh invest karke 2 lakh kamane ka idea achcha diya menka ko ..
 

SHADOW KING

Supreme
15,891
32,846
259
nice update ..kya manish bhaiya ko bhi do bachche hai ??? ..
salesgirl prachi ne achche se apna mobile becha ek businessmen ki tarah baat karke 🤣🤣🤣🤣..

rupa ne sahi logic diya goli lagne ka aur manish bhaiya ko 3 thappad khane pade 😁😁😁..

nakul ki naiya paar laga degi neetu 🤣🤣🤣..
 

SHADOW KING

Supreme
15,891
32,846
259
mahesh aur manish me bada kaun hai ye jaanne ke liye update ko dekhna padta hai to kya aap family intro 1st page pe nahi rakh sakte 🤔🤔🤔.....sirf family member ke naam aur kuch nahi ..

aarambik jeevan me intro hai par wo aadha padhne par pata chalta hai ki kaun kya hai ..
 

SHADOW KING

Supreme
15,891
32,846
259
Fir bathroom ke ander video call kaise hoga.. :doh:..

Ab samjhao ki kaun kiska istamal karne wala hai ... Aap bhi na Leon bhai.. launde ki bhawna ko samjho jraa :D
par 7 ya 8 hajar ke phone me bhi video call ho sakta hai 😁😁😁😁..
bas recharge karna chahiye ..

agar aap idea ya vodafone use karte ho to 3 months ke recharge pe bhi video call ka option nahi hai par jio me hai ...( personal experience ) ..
 
Top