• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

स्त्री का प्रेम और देह सुख—एक अनमोल एहसास 💋🔥

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

nidhi69sexbomb

Nidhi.agrawal
6,603
7,269
174
स्त्री का प्रेम और देह सुख—एक अनमोल एहसास 💋🔥
मेरा नाम अर्जुन है। मैं एक परंपरागत परिवार में पला-बढ़ा, जहाँ हर निर्णय मेरे पिता मधुसूदन जी के हाथों में होता था। हमारा परिवार छह सदस्यों का था—माँ कमला, पिता, और हम चार भाई-बहन। मैं सबसे बड़ा था, लेकिन मेरा छोटा भाई अविनाश सबसे ज्यादा होनहार था।

अविनाश ने IAS की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। इस हादसे ने हमारे पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। खासकर माँ और पिताजी इस सदमे से कभी उबर नहीं पाए।

पिताजी ने जल्दबाज़ी में मेरे विवाह का निर्णय लिया, और मेरी शादी श्रुति से करा दी। उस समय मैं बेरोज़गार था, लेकिन पिताजी की संपत्ति थी, इसलिए श्रुति के माता-पिता ने कोई आपत्ति नहीं की।

श्रुति—जिसने मुझे प्रेम और देह सुख का अर्थ समझाया... 💋🔥

शादी की पहली रात, जब मैंने दरवाजा खोला, तो वो घूंघट में थी। उसकी सुर्ख साड़ी, उसके काँपते हाथ, और उसके हल्के से मुस्कुराते होंठ... मैं उसे अपलक देखता रह गया।

मैं पास गया, और धीरे से उसका घूंघट हटाया।

"डर लग रहा है...?" मैंने हल्की आवाज़ में पूछा।

उसने आँखें उठाईं, उनमें एक अलग ही चमक थी।

"डर नहीं... बस, अब से सब कुछ तुम्हारा है..." 💋

उसकी ये बात सुनकर मेरी धड़कनें तेज़ हो गईं। मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया, और उसकी नज़रों में डूब गया।

"मैं हमेशा तुम्हारा रहूँगा..."

उसने मेरी शर्ट की कॉलर पकड़कर खुद को मेरे करीब खींचा, और उसके गर्म होंठ मेरे होंठों से टकरा गए।

वो रात सिर्फ प्यार की नहीं थी, वो एक वादा थी—हमेशा एक-दूसरे के होने का, हर हाल में साथ निभाने का... 🔥

परिवार के बंधन और प्यार की परीक्षा...

श्रुति ने मुझे हर कदम पर सपोर्ट किया, लेकिन मेरी माँ कमला, उससे हमेशा नाखुश रहती थीं।

एक दिन, पिताजी ने गुस्से में आकर श्रुति को मायके भेज दिया।

कुछ हफ्तों बाद, जब मुझे पता चला कि वो गर्भवती है, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैं तुरंत माँ-पिताजी के पास गया और उन्हें बताया।

पिताजी ने मेरी ओर गुस्से से देखा—

"क्या तुम्हें अपनी बीवी के बिना चैन नहीं पड़ता?"

मैं स्तब्ध रह गया।

जब मैंने श्रुति को ये बताया, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए।

"मैंने तुम्हारी हर जरूरत का ख्याल रखा, लेकिन जब मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत है, तब तुम मुझे अकेला छोड़ रहे हो?"

उसकी आवाज़ में एक अजीब-सा दर्द था। मेरे भीतर कुछ टूट गया...

मैंने उसे वापस लाने की ठान ली...

मैंने बिना किसी की परवाह किए श्रुति को वापस लाने का फैसला किया।

जब हम घर लौटे, तो माँ और पिताजी का गुस्सा और भी बढ़ गया।

पिताजी ने साफ़ कह दिया कि मुझे संपत्ति से बेदखल कर दिया जाएगा।

पर मुझे उसकी परवाह नहीं थी। मेरे लिए श्रुति ही मेरी असली दौलत थी...

कर्मों का खेल...

पिताजी ने अपनी सारी संपत्ति छोटे भाई रवि के नाम कर दी, लेकिन रवि शराब और जुए की लत में डूबा था।

कुछ ही सालों में रवि की मृत्यु हो गई—अत्यधिक शराब पीने के कारण उसका लिवर खराब हो गया था।

पिताजी अब भी अपनी ज़िद पर अड़े थे—उन्होंने कहा कि वो सारी संपत्ति किसी संस्था को दान कर देंगे, लेकिन मुझे नहीं देंगे।

कुछ ही समय बाद पिताजी को हार्ट अटैक आया, और उनका निधन हो गया।

छह महीने बाद, जब मैंने उनकी वसीयत देखी, तो पता चला कि उन्होंने संपत्ति किसी को दान नहीं की थी।

अब मैं कानूनी रूप से इसका एकमात्र वारिस था।

लेकिन अब सवाल था—

क्या मुझे इसे स्वीकार करना चाहिए?

श्रुति का फैसला...

श्रुति ने प्यार से मेरी आँखों में झाँका—

"अगर तुम्हारे पिताजी हमें यह संपत्ति देना नहीं चाहते थे, तो हमें इसे नहीं लेना चाहिए।"

मैं सोच में पड़ गया...

क्या मैं श्रुति की बात मानकर इस संपत्ति को छोड़ दूँ...?

या फिर, क्या मुझे इसे अपना अधिकार समझकर ले लेना चाहिए...?

इश्क़ में सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता है—लेकिन सवाल यह है कि क्या हर चीज़ की कीमत चुकानी चाहिए...? 💔


IMG-20250202-100226 IMG-20250202-101237 IMG-20250202-101208 3487540-3a951f0-1200x 3487543-5fd3d98-1200x 3487549-88e643a-1200x 3487552-38b255a-1200x 3487555-cf2c604-1200x 3487564-d292bab-1200x 3487567-c07cf97-1200x 3487570-b69619a-1200x 3495720-9a9b625-1200x 3495726-5104479-1200x 3495732-88162e0-1200x

3495735-4126507-1200x 3495750-f62fa08-1200x
 
Top