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Adultery विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक

Aap sabhi ka pyar chahie is Kahani ke liye

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भाग 1
हाय दोस्तो, कैसे हो आप सब… आज मैं आपको दीपाली सिंह की कहानी बताता हूँ।
दोस्तो, कहानी के सभी किरदार असली हैं..
इसमें कुछ घटना-क्रम एकदम वास्तविक है और कुछ आपके मनोरंजन के लिए अपनी कलम से लिख रह। हूँ!
और हाँ.. अबकी बार मैंने लिखने का अंदाज थोड़ा बदला है..
तो आइए आपको कहानी की ओर ले चलत। हूँ।
सर- दीपाली ये क्या है? इस बार भी फेल.. आख़िर तुम करती क्या हो..? पढ़ाई में तुम्हारा ध्यान क्यों नहीं लगता। जब स्कूल-टेस्ट में ये हाल है तो बोर्ड के इम्तिहान में क्या खाक लिखोगी?
ये सर हैं विकास वर्मा जिनकी उम्र 35 साल है और ये साइन्स के टीचर हैं..
थोड़े कड़क मिज़ाज के हैं। इनका कद और जिस्म की बनावट अच्छी है.. और एकदम फिट रहते हैं।
दीपाली- सॉरी सर प्लीज़.. मुझे माफ़ कर दो.. अबकी बार अच्छे नम्बर लाऊँगी.. प्लीज़ प्लीज़…

दोस्तो, यह है दीपाली सिंह.. अच्छे ख़ासे पैसे वाले घर की एक मदमस्त यौवन की मालकिन.. जिसकी उम्र 18 साल, कद 5’3″.. छोटे सुनहरे बाल.. गुलाब की पंखुड़ी जैसे पतले गुलाबी होंठ.. भरे हुए गोरे गाल.. नुकीले 30″ के मम्मे.. पतली कमर और 32″ की मदमस्त गाण्ड।
स्कूल में कई लड़के दीपाली पर अपना जाल फेंक रहे हैं कि काश एक बार उसकी मचलती जवानी का मज़ा लूट सकें..
मगर वो तो तितली की तरह उड़ती फिरती थी।
कभी किसी के हाथ ना आई !
और हाँ आपको यह भी बता दूँ कि गंदी बातों से दूर-दूर तक उसका वास्ता नहीं था।
वो शरारती थी.. मगर शरीफ़ भी थी।
उसको चुदाई वगैरह का कोई ज्ञान नहीं था।
सर- नो.. अबकी बार तुम्हारी बातों में नहीं आऊँगा.. कल तुम अपने मम्मी-पापा को यहाँ लेकर आओ.. बस अब उनसे ही बात करूँगा कि आख़िर वो तुम पर ध्यान क्यों नहीं देते।
दीपाली- सर आप मेरी बात तो सुनिए.. बस साइन्स में मेरे नम्बर कम आए हैं और बाकी सब विषयों में मेरे अच्छे नम्बर आए हैं।
सर- जानता हूँ इसी लिए तो हर बार तुम्हारी बातों में आ जाता हूँ.. तुम बहुत अच्छी लड़की हो.. सब विषयों में अच्छे नम्बर लाती हो.. मगर ना जाने विज्ञान में तुम पीछे क्यों रह गई.. आज तो मुझे बता ही दो आख़िर बात क्या है?
दीपाली- व..वो.. सर आप तो जानते ही हो.. मैं रट्टा नहीं मारती.. सारे विषयों को समझ कर याद करती हूँ.. विज्ञान का पता ही नहीं चलता क्या लिखा है… क्यों होता है.. बस इसी उलझन में रहती हूँ तो ये सब हो जाता है और नम्बर कम आ जाते हैं।
सर- क्या.. अरे तुम क्या बोल रही हो..? मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा ठीक से बताओ मुझे।
दीपाली- वो.. वो.. सर मानव अंगों के बारे में मेरी सहेलियाँ पता नहीं क्या-क्या बोलती रहती हैं.. बड़ा गंदा सा बोलती हैं.. म…म..मुझे अच्छा नहीं लगता.. बस इसलिए मैं विज्ञान में इतनी रूचि नहीं लेती हूँ।
दीपाली की बात सुनकर विकास सर के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
सर- अच्छा तो ये बात है.. ऐसा करो शाम को तुम किताब लेकर मेरे घर आना.. वहाँ बताना ठीक से.. अभी मेरा क्लास लेने का वक्त हो रहा है.. देखो आ जाना नहीं तो कल तुम्हारे पापा से मुझे मिलना ही होगा।
दीपाली तो फँस गई थी.. अब विकास शाम को उसका फायदा उठाएगा.. आप यही सोच रहे हो ना..
मेरे प्यारे दोस्तों देश बदल रहा है.. सोच बदलो.. खुद देख लो।
शाम को 6 बजे दीपाली विकास सर के घर पहुँच जाती है।
सर- अरे आओ आओ.. दीपाली बैठो.. अरे अनु ज़रा यहा आना.. देखो दीपाली आई है, मैंने बताया था ना तुमको…
अनुजा- जी अभी आई।
दोस्तो, यह है अनुजा वर्मा.. यह विकास सर की पत्नी है, दिखने में बड़ी खूबसूरत है, इसका फिगर 34″ 32″36″ है।
इनकी शादी को 3 साल हो गए हैं।
दोनों बेहद खुश रहते हैं।
अरे यार आप अनुजा को भूल गए.. हाँ भाई ये वही अनुजा गुप्ता और विकास हैं.. जो पहले लवर थे, अब इनकी शादी हो गई है और अनुजा गुप्ता से वर्मा बन गई है.. चलो अब आगे का हाल देखते हैं।
अनुजा- हाय दीपाली कैसी हो?
दीपाली- मैं एकदम ठीक हूँ मैम!
सर- दीपाली, ये है मेरी पत्नी अनुजा.. सुबह तुमने अपनी प्राब्लम मुझे बताई थी ना.. मैंने अनु को सब बताया है.. अब मैं नहीं ये ही तुम्हारी मदद करेंगी। चलो तुम दोनों बातें करो मैं थोड़ी देर में बाहर जाकर आता हूँ ओके..।
दीपाली- ओके सर थैंक्स।
अनुजा- हाँ तो दीपाली.. अब बताओ तुम्हारी प्राब्लम क्या है और देखो किसी भी तरह की झिझक मत रखना.. सब ठीक से बताओ ओके..
दीपाली- ओके मैम बताती हूँ।
अनुजा- अरे ये मैम-मैम क्या लगा रखा है मुझे दीदी भी बोल सकती हो.. अब बताओ तुम्हारी सहेलियाँ क्या बोलती हैं?
दीपाली- व..ववो दीदी… मैंने उनसे एक बार पूछा ये योनि और लिंग किसे कहते हैं तब उन्होंने मेरा बड़ा मज़ाक उड़ाया और मेरे यहाँ हाथ लगा कर कहा.. इसे योनि कहते हैं और इसकी ठुकाई करने वाले डंडे को लिंग कहते हैं।
दीपाली ने अपना हाथ चूत पर रखते हुए यह बात बोली तो अनुजा की हँसी निकल गई।
दीपाली- दीदी आप भी ना मेरा मज़ाक उड़ा रही हो.. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती। इसी लिए मैं किसी से इस बारे में बात नहीं करती हूँ।
अनुजा- अरे तू तो बुरा मान गई.. देख मेरा इरादा तेरा मजाक उड़ाने का नहीं था.. बस ये सोच कर हँसी आ गई कि तुम किस दुनिया से आई हो जो इतनी भोली हो.. अब सुनो मैं जो पूछू उसका सही जबाव देना और जो बोलूँ उसको ध्यान से सुनना।
दीपाली- ठीक है दीदी आप कहो।
अनुजा- सबसे पहले यह बता कि तेरी उम्र क्या है.. और तुम्हारे घर में कौन-कौन है.. तुम सोती किसके साथ हो?
दीपाली- दीदी मैं 18 की हूँ.. मैं पापा-मम्मी की इकलौती बेटी हूँ.. हमारा घर काफ़ी बड़ा है। मैं करीब 6 साल से अलग कमरे में सोती हूँ.. नहीं तो पहले मम्मी के कमरे में ही सोती थी।
अनुजा- अच्छा यह बात है.. तुम सेक्स के बारे में क्या जानती हो.. किसी से कुछ सुना होगा… वो बताओ।
दीपाली- ये सेक्स क्या होता है दीदी.. मुझे नहीं पता.. हाँ मेरी सहेलियाँ अक्सर बातें करती हैं.. बस उनसे मैंने सुना था कि लड़कों का पोपट होता है.. और लड़की का पिंजरा.. मगर मेरे कभी कुछ समझ नहीं आया।
यह कहानी आप xforum.me पर पढ़ रहे हैं !
अनुजा- ओह ये बात है.. तेरी सहेलियाँ कोडवर्ड में
बातें करती हैं और तुम सच में बहुत भोली हो। अच्छा ये बताओ क्या कभी किसी ने तुम्हारे सीने पर हाथ रखा है या इनको छुआ या दबाया है..? तुमने किसी लड़के को पेशाब करते देखा है?
दीपाली- छी छी.. दीदी आप भी ना.. मैं क्यों किसी को पेशाब करते देखूँगी और आज तक किसी ने मुझे नहीं छुआ है।
अनुजा- अच्छा ये बात है.. तभी तुम ऐसी हो.. अब अपने अंगों के नाम बताओ.. मैं भी तो देखूँ तुम क्या जानती हो।
अनुजा ने दीपाली के गुप्तांगों के नाम उससे पूछे।
दीपाली- दीदी ये सीना है.. ये फुननी है और ये पिछवाड़ा बस।
अनुजा- अरे भोली बहना.. अब सुन ये सीना को मम्मों.. चूचे या कच्ची लड़की के अमरूद भी बोलते हैं और इसको चूत या बुर बोलते हैं समझी और ये पिछवाड़ा नहीं.. एस या गाण्ड है.. जिसको मटका-मटका कर तुम चलती हो और लड़कों के लौड़े खड़े हो जाते हैं।
अनुजा बोलने के साथ दीपाली के अंगों पर हाथ घुमा-घुमा कर मज़े ले रही थी। दीपाली को बड़ा अजीब लग रहा था मगर उसको मज़ा भी आ रहा था।
दीपाली- उफ़फ्फ़ आह दीदी ये लौड़ा क्या होता है?
अनुजा- अरे पगली दुनिया की सबसे अच्छी चीज़ के बारे में नहीं जानती..? लड़कों की फुननी को लौड़ा बोलते है जो चूत के लिए बना है.. बड़ा ही सुकून
मिलता है लौड़े से।
दीपाली- दीदी कसम से.. मुझे इन सब बातों के बारे में कुछ भी पता नहीं था.. थैंक्स आपने मुझे बताया.. मगर मेरी एक बात नहीं समझ आ रही इन सब बातों का मेरे इम्तिहान में फेल होने से क्या सम्बन्ध?
अनुजा- अरे दीपाली.. तू सब विषयों में अच्छी है क्योंकि तुझे उन सबकी समझ है.. मगर विज्ञान में तू अनजान है क्योंकि तुझे कुछ पता नहीं.. ये चूत.. लौड़ा और चुदाई सब विज्ञान का ही तो हिस्सा हैं। अब देख मैं कैसे तुझे सेक्स का ज्ञान देती हूँ और देखना अबकी बार कैसे तेरे नम्बर अच्छे आते हैं.. बस तू मेरी बात मानती रहना, जैसा मैं कहूँ वैसा करती रहना।
दीपाली- ओके दीदी.. मैं आपकी सब बात मानूँगी.. बस मेरे नम्बर अच्छे आने चाहिए।
अनुजा ने आधा घंटा तक दीपाली को लड़की और लड़के के बारे में बताया और उसको जाते समय एक सेक्स की कहानी वाली किताब भी दी।
दीपाली- दीदी ये क्या है?
अनुजा- ये असली विज्ञान है.. रात को अपने कमरे में कुण्डी लगा कर सारे कपड़े निकाल कर इस किताब को पढ़ना.. और कल शाम को आ जाना.. बाकी सब कल समझा दूँगी।
दीपाली- सारे कपड़े निकाल कर.. नहीं दीदी मुझे शर्म आ रही है।
अनुजा- अरे पगली मैं किसी के सामने नंगी होने को नहीं बोल रही हूँ.. अकेले में ये करना है और नहाते वक्त क्या कपड़े पहन कर नहाती हो जो इतना शर्मा रही हो..? पास नहीं होना है क्या..?
दीपाली- सॉरी दीदी.. जैसा आपने कहा, वैसा कर लूँगी।
दीपाली वहाँ से अपने घर चली जाती है।
उफ़फ्फ़.. सॉरी दोस्तो, आपने क्या सोचा विकास बहला-फुसला कर दीपाली की चुदाई कर देगा और आपको मज़ा मिलेगा…
मगर यहाँ तो बात उल्टी हो गई।
चलो कोई बात नहीं आप निराश मत हो…
मैं हूँ ना यार चुदाई का सीन भी आएगा..
थोड़ा सबर करो।
अच्छा चलो रात होने दो दीपाली के नंगे जिस्म को आपको दिखा दूँगा.. बस खुश?
इसके आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..
 
Last edited:

Monika Singh

Mullonki diwani💕
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उसके जाने के बाद विकास कमरे में आया उसने उन दोनों की बातें सुन ली थीं।
विकास- अनु ये तुमने उसको क्या बोल दिया नकली लंड से उसको चोदोगी तो मेरा क्या होगा जान.. तुमने मुझे कच्ची कली को चोदने का सपना दिखाया.. अब नकली लौड़े की बात कर रही हो।
अनुजा- अरे मेरा राजा.. आप बहुत भोले हो अपने वो कहावत नहीं सुनी क्या.. हाथी के दाँत दिखाने के और होते हैं और खाने के और… बस कल देखना.. मैं कैसे नकली को असली बना देती हूँ.. अब आ जाओ देखो मैंने अब तक कपड़े भी नहीं पहने हैं.. आज तो आप बड़े जोश में हो.. जरा मेरी चूत को मज़ा दे दो।

विकास- अरे क्यों नहीं मेरी रानी.. चल बन जा घोड़ी.. आज तुझे लंबी सैर कराता हूँ।
अनुजा पैरों को मोड़ कर घोड़ी बन गई और विकास ने एक ही झटके में अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया।
अनुजा- आहह.. उई मज़ा आ गया राजा.. अब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारो उफ्फ.. फाड़ दो चूत को.. अई आह्ह..
विकास के दिमाग़ में दीपाली घूम रही थी और उसी कारण वो दे दनादन अनुजा की चूत में लौड़ा घुसा रहा था।
अनुजा- आह्ह.. अई वाहह.. मेरे राजा आ..आज बड़ा मज़ा दे रहे हो.. अई लगता है दीपाली समझ कर तुम मुझे चोद रहे हो.. अई उई अब तो रोज उसका नंगा जिस्म तुमको दिखना पड़ेगा.. अई ताकि तुम रोज इसी तरह मेरी ठुकाई करो।
विकास- उहह उहह.. ले रानी उहह.. अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.. आज तुम बहुत चुदासी लग रही हो ओह्ह ओह्ह।
लगभग 30 मिनट तक ये चुदाई का खेल चलता रहा.. दोनों अब शान्त हो गए थे।
अनुजा- जानू मज़ा आ गया.. आज तो काफ़ी दिनों बाद ऐसी मस्त चुदाई की तुमने.. अच्छा अब सुनो… कल किसी भी हाल में एक नकली लंड ले आना.. उसका साइज़ तुम्हारे लवड़े के जैसा होना चाहिए।
विकास- ठीक है.. ले आऊँगा मगर तुम उसकी चूत की सील नकली लौड़े से तोड़ोगी.. तो मेरा क्या होगा यार.. ऐसी मस्त चूत का मुहूर्त मुझे करना है।
अनुजा- तुम ले आना बस.. मैंने कहा ना सब मुझ पर छोड़ दो.. कल देखना मैं क्या करती हूँ।
विकास ने अनुजा की बात मान ली और आगे कुछ नहीं बोला।
वो उठ कर बाथरूम में चला गया।
दोस्तो, अब यहाँ कुछ नहीं है.. चलो दीपाली के पास चलते हैं।
घर जाकर दीपाली ने अपनी मम्मी को बोल दिया कि टयूशन में वक्त लग गया और रात का खाना खाकर अपने कमरे में जाकर सो गई।
अगले दिन भी दीपाली जब स्कूल गई, तब गेट पर तीनों उसके आने का इन्तजार कर रहे थे, मगर आज दीपाली ने उनको नज़रअंदाज कर दिया और सीधी निकल गई।
दोस्तो. अब स्कूल के पूरे 8 घंटे की दास्तान सुनोगे क्या.. चलो सीधे मुद्दे पर आती हूँ।
शाम को दीपाली ने पीले रंग का टॉप और काला स्कर्ट पहना हुआ था।
जब वो अनुजा के घर की ओर जा रही थी.. तब रास्ते में एक कुत्ता एक कुतिया को चोद रहा था।
दीपाली ने जब उनको देखा उसे बड़ा मज़ा आया।
ये सब देख कर उसको कल वाला वीडियो याद आ गया और ना चाहते हुए भी उसका हाथचूत पर चला गया।
दीपाली भूल गई कि वो बीच सड़क पर खड़ी कुत्ते की चुदाई देख रही है और अपनी चूत को मसल रही है।
तभी वहाँ से एक 50 साल का बूढ़ा गुजरा, उसने सब देखा और दीपाली के पास आ गया।
बूढ़ा- बेटी इस तरह रास्ते में खड़ी होकर ये हरकत ठीक नहीं.. अगर इतनी ही खुजली हो रही है तो चलो मेरे साथ घर पर.. कुछ मलहम लगा दूँगा।
उसकी बात सुनकर दीपाली को अहसास हुआ कि उसने कितनी बड़ी ग़लती कर दी।
वो बिना कुछ बोले वहाँ से भाग खड़ी हुई और सीधी अनुजा के घर जाकर ही रुकी।
अनुजा- अरे क्या हुआ..? ऐसे भागते हुए क्यों आई हो.. इतना हाफ़ रही हो.. यहाँ बैठो मैं पानी लेकर आती हूँ।
दीपाली वहीं बैठ गई.. अनुजा ने उसे पानी पिलाया और उससे भागने का कारण दोबारा पूछा।
तब दीपाली ने उसको सारी बात बताई।
अनुजा- हा हा हा हा तू भी ना कुत्ते की चुदाई में ये भी भूल गई कि कहाँ खड़ी है और तेरी चूत में खुजली होने लगी.. हा हा हा हा और वो बूढ़ा क्या बोला.. मलहम लगा देगा.. अगर तू उसके साथ चली जाती ना.. तो आज बूढ़े के मज़े हो जाते हा हा हा हा।
दीपाली- दीदी आप भी ना.. कुछ भी बोलती रहती हो.. पता नहीं मुझे क्या हो गया था। अच्छा ये सब जाने दो.. आप आज मुझे वो नकली लंड दिखाने वाली थीं ना.. कहाँ है वो?
अनुजा- अरे वाह.. बेबी लंड देखने के लिए बड़ी उतावली हो रही है.. चल कमरे में… मैंने वहीं रखा है।
दोनों कमरे में चली जाती हैं।
दीपाली बिस्तर पर बैठ जाती है और अनुजा अलमारी से लौड़ा निकाल लेती है.. जो दिखने में एकदम असली जैसा दिख रहा था।
लौड़े के साथ दो गोलियाँ भी थीं।
दीपाली तो बस उसको देखती ही रह गई।
अनुजा- क्यों बेबी कैसा लगा..? है ना.. एकदम तगड़ा लौड़ा।
दीपाली- हाँ दीदी.. ये तो वो फिल्म जैसा एकदम असली लगता है.. ज़रा मुझे दिखाओ मैं इसे हाथ से छूकर देखना चाहती हूँ।
अनुजा- अरे इतनी भी क्या जल्दी है.. ऐसे थोड़े तुझे हाथ में दूँगी.. आज तो खेल खेलूँगी तेरे साथ..
ये देख शहद की बोतल.. इसमें से शहद निकाल कर इस लौड़े पे लगाऊँगी.. उसके बाद तू इसको चूसना.. तब असली जैसी बात लगेगी.. समझी मेरी जान…
दीपाली- ओके दीदी.. बड़ा मज़ा आएगा आज तो…
अनुजा ने बगल में रखी दो काली पट्टी उठाईं और दीपाली को दिखाते हुए बोली।
अनुजा- मज़ा ऐसे नहीं आएगा.. ये देखो आज ‘ब्लाइंड-सेक्स’ करेंगे।
एक पट्टी तेरी आँखों पर और दूसरी हाथ पर बांधूंगी उसके बाद असली मज़ा आएगा।
दीपाली- ये पट्टी से क्या मज़ा आएगा दीदी.. नहीं ऐसे ही करेंगे ना।
अनुजा- नहीं मैंने कहा ना.. तुम पहली बार लौड़ा चूसने जा रही हो.. अगर आँखें खुली रहेगीं तो ये नकली लौड़ा तुझे दिखेगा और तेरे अन्दर लौड़े वाली मस्ती नहीं आएगी। मगर आँखें बन्द रहेगीं.. तब तू ये सोचना कि तू असली लौड़ा चूस रही है। तब मज़ा दुगुना हो जाएगा और ये देख इस लौड़े के साथ ये बेल्ट भी है.. मैं इसे अपनी कमर पर बाँध लूँगी। इससे मैं आदमी बन जाऊँगी और मेरी चूत की जगह ये लौड़ा आ जाएगा.. क्यों अब बोल क्या बोलती है।
दीपाली- हाँ दीदी.. आपने सही कहा.. इस तरह ज़्यादा मज़ा आएगा मगर ये हाथ तो खुले रहने दो ना।
अनुजा- नहीं मेरी जान हाथ बाँधने जरूरी हैं वरना तुझे ऐसा लगेगा कि लौड़े को हाथ से पकडूँ और जैसे ही तू लौड़ा पकड़ेगी असली वाली बात ख़तम हो जाएगी।
दीपाली- ओके दीदी.. जैसा आपको ठीक लगे.. चलो पट्टी मेरी आँखों पर बाँध दो।
अनुजा- अरे मेरी जान पहले ये कपड़े तो निकाल.. उसके बाद ये पट्टी बाँधूंगी।
अनुजा खुद भी नंगी हो गई और दीपाली को भी नंगा कर दिया। उसके बाद उसके दोनों हाथ पीछे करके पट्टी से बाँध दिए उसकी आँखों पर भी अच्छे से पट्टी बाँध दी।
दोस्तो, ये अनुजा का प्लान था ताकि विकास अन्दर आ जाए और दीपाली उसको देख ना सके।
दीपाली बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ गई अनुजा ने विकास को इशारा कर दिया वो अन्दर आ गया।
वो एकदम नंगा था उसने पहले ही दूसरे कमरे में कपड़े निकाल दिए थे। उसका लौड़ा भी एकदम तना हुआ था।
दीपाली- दीदी अब तो लौड़ा मेरे मुँह में दे दो.. बड़ा मान कर रहा है चूसने का।
अनुजा- हाँ यार देती हूँ.. पहले कमर पर बाँध तो लूँ.. उसके बाद शहद डाल कर तेरे मुँह में दूँगी।
अनुजा ने विकास के लौड़े पर अच्छे से शहद लगा दिया और विकास बिस्तर पर चढ़ गया। लौड़े की टोपी को दीपाली के खुले मुँह में हल्के से फँसा दिया।
दीपाली तो इसी इंतजार में थी, वो झट से अपनी जीभ से टोपी को चाटने लगी।
आनन्द के मारे विकास की आँखें बन्द हो गईं.. अनुजा वहीं पास में बैठी अपनी चूत सहला रही थी।
दीपाली लौड़े को जीभ से चाट रही थी और टोपी को अपने होंठों में दबा कर चूस रही थी। उसको बहुत मज़ा आ रहा था।
अनुजा- अरे मेरी जान पूरा मुँह में ले.. तब असली मज़ा आएगा.. इतने से क्या होगा?
दीपाली ने अनुजा की बात सुनकर पूरा लौड़ा में भर लिया और चूसने लगी।
विकास को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था और आएगा क्यों नहीं एक कमसिन कली जिसके पतले होंठों में उसका लौड़ा फँसा हुआ था।
अब विकास लौड़े को आगे-पीछे करने लगा।
एक वक्त तो लौड़ा पूरा दीपाली के गले तक पहुँच गया और उसी वक़्त दीपाली ने झट से मुँह हटा लिया और विकास ने जैसे ही लौड़ा
आगे किया उसकी गोटियाँ दीपाली के मुँह के पास आ गईं.. दीपाली को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
वो गोटियों को चूसने लगी.. तब उसको थोड़ा अजीब सा लगा और उसने मुँह हटा लिया।
अनुजा- अरे क्या हुआ रानी चूस ना।
दीपाली- दीदी मुझे ये लौड़ा एकदम असली जैसा लग रहा है और शहद के साथ-साथ कुछ नमकीन सा और भी पानी मेरे मुँह में आ रहा है इसकी गोटियों की चमड़ी भी बिल्कुल असली लग रही है।
अनुजा- अरे पगली ये सब आँख बन्द होने का कमाल है.. असली लवड़ा कहाँ से आएगा? तू चूसती रह.. इसके बाद देख.. आज मैं तेरे निप्पल और चूत को नए अंदाज से चुसूंगी।
बेचारी भोली-भाली दीपाली अनुजा की बातों में आ गई और दोबारा से लौड़ा चूसने लगी।
करीब 5 मिनट बाद विकास ने इशारे से अनुजा को कहा- अब इसको लेटा दो.. मैं इसके चूचों को मसलना और चूसना चाहता हूँ।

इसके आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..
Well written story keep it up
 
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भाग 6
अनुजा- बस दीपाली अब मेरी बारी है तू सीधी लेट जा.. अब मैं तुझे स्वर्ग की सैर कराती हूँ।
दीपाली- मैं कैसे लेटूं दीदी.. मेरे हाथ तो पीछे बँधे हैं।
अनुजा ने उसके हाथ खोल दिए उसको सीधा लिटा कर बिस्तर के दोनों बगल से उसके हाथ बाँध दिए।

दीपाली- अरे अरे.. ये क्या कर रही हो दीदी अब तो मेरे हाथ खुले रहने दो ना…
अनुजा- नहीं मेरी जान.. आज तू ऐसे ही मज़ा ले.. बस अब कुछ मत बोल.. देख मैं तुझे कैसे मज़े देती हूँ.. इतना बोल कर अनुजा ने विकास को इशारा कर दिया कि टूट पड़ो इस सेक्स की मलिका पर..
विकास को तो बस इसी मौके का इन्तजार था।
वो दीपाली के ऊपर लेट गया और सबसे पहले उसके मखमली होंठों को चूसने लगा।
उसका अंदाज ऐसा था कि दीपाली भी उसका साथ देने लगी।
वो दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे.. मगर विकास सिर्फ़ होंठों से ही थोड़े खुश होने वाला था..
थोड़ी देर बाद वो नीचे खिसकने लगा और अब उसके होंठों में दीपाली के निप्पल थे।
वो दोनों हाथों से उसके कड़क चूचे दबा रहा था और निप्पल चूस रहा था.. जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो।
दीपाली- आह आआ दीदी अई मज़ा आ गया उह.. धीरे से दबाओ ना उफ़फ्फ़.. दर्द होता है अई काटो मत ना… दीदी आइ मज़ा आ रहा है।
दोस्तो, अनुजा का प्लान तो अच्छा था मगर एक पॉइंट ऐसा था जिसके कारण दीपाली को थोड़ा शक हुआ कि कहीं अनुजा की जगह उसके ऊपर कोई आदमी तो नहीं है ना।
ना ना.. टेंशन मत लो.. आपको सोचने की जरूरत नहीं है.. मैं खुद बता देता हूँ आपको।
जब विकास होंठ चूस रहा था उसका सीना दीपाली के मम्मों को दबा रहा था और उसके सीने के बाल दीपाली महसूस कर रही थी उसने मन में सोचा भी कि अगर दीदी मेरे ऊपर हैं तो उनके मम्मों और मेरे मम्मों को आपस में टकराने चाहिए.. मगर ये तो एकदम सपाट सीना है और बाल भी हैं।
मगर ना जाने क्या सोच कर वो चुप रही।
विकास को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था और आएगा क्यों नहीं एक कमसिन कली जिसके पतले होंठों में उसका लौड़ा फँसा हुआ था।
अब विकास लौड़े को आगे-पीछे करने लगा।
एक वक्त तो लौड़ा पूरा दीपाली के गले तक पहुँच गया और उसी वक़्त दीपाली ने झट से मुँह हटा लिया और विकास ने जैसे ही लौड़ा आगे किया उसकी गोटियाँ दीपाली के मुँह के पास आ गईं.. दीपाली को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
अब विकास मम्मों से नीचे उसके पेट तक चूमता हुआ आ गया और आख़िर कर वो अपनी असली मंज़िल यानी चूत तक पहुँच गया।
विकास की गर्म साँसें दीपाली अब अपनी चूत पर महसूस कर रही थी और छटपटा रही थी कि कब दीदी के होंठ चूत पर टिकेंगे और कब उसको सुकून मिलेगा।
विकास ने चूत के होंठों को कस कर अपने मुँह से भींच लिया। दीपाली की सिसकी निकल गई।
विकास बड़े प्यार से चूत को चूस रहा था और अपनी जीभ से अन्दर तक चाट रहा था.. दीपाली एकदम गर्म हो गई थी।
दीपाली- अया ऐइ उफ़फ्फ़.. दीदी आह.. प्लीज़ चूत के अन्दर ऊँगली करो.. ना आ आहह.. चूत में बहुत बेचैनी हो रही है।
अनुजा- मेरी जान तेरी चूत की आग अब ऊँगली से ठंडी नहीं होने वाली.. इसको तो अब लौड़े की जरूरत है.. बोल क्या बोलती है।
दीपाली- दीदी आहह.. डाल दो ना.. आहह.. आपके पास तो इतना मस्त लौड़ा है आहह.. पूछ क्यों रही हो.. अई आहह.. शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था कि अपने सर से ही अपनी सील तुड़वाऊँ आहह.. प्लीज़ विकास सर आहह अब बर्दाश्त नहीं होता.. डाल दो ना आहह..
दीपाली की बात सुनकर अनुजा और विकास दोनों ही भौंचक्के रह गए.. दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया।
अनुजा- त..त..तू.. ये क..क्या.. बोल रही है व..विकास यहाँ क..क..कहाँ है?
दीपाली- अई आह.. दीदी आह.. मानती हूँ मुझे चुदाई का अनुभव नहीं है.. मगर इतनी भी भोली नहीं हूँ कि औरत और मर्द के शरीर में फ़र्क ना महसूस कर सकूँ और दूसरी बात आपकी आवाज़ मेरे बगल से आ रही है जबकि आपके हिसाब से आप मेरी चूत चाट रही हो.. आह्ह.. अब ये पट्टी खोल दो.. मुझे कोई ऐतराज नहीं कि सर मेरी चूत की सील तोड़ें.. प्लीज़ आह्ह..
यह कहानी आप xforum.me पर पढ़ रहे हैं !
विकास और अनुजा की नज़रें मिलीं और आँखों ही आँखों में दोनों की बात हो गई।
विकास ने पहले दीपाली के हाथ खोले.. उसके बाद आँखों की पट्टी निकाल दी।
दीपाली- ओह.. सर आपका लौड़ा कितना मोटा और बड़ा है.. उफ़फ्फ़ जब मेरे मुँह में था.. कसम से बड़ा मज़ा आ रहा था.. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह विज्ञान के चक्कर में चुदाई का ज्ञान मिल जाएगा.. पहले मुझे कुछ पता नहीं था.. मगर इन दो दिनों में मुझे पता चल गया कि चुदाई में जो मज़ा है.. वो किसी और चीज़ में नहीं है।
अनुजा- मेरी जान मैं तो कब से कह रही थी कि विकास को बुलाऊँ क्या.. मगर तुम ही हो कि बस मना कर रही थीं।
दीपाली- दीदी सच कहूँ.. तो जब आप सर का नाम लेती थीं.. मेरी चूत में पानी आ जाता था.. मगर शर्म के मारे आपसे कुछ बोल ना पाती थी.. अभी जब लौड़ा चूस रही थी.. तब मुझे पक्का पता चल गया कि ये लौड़ा नकली नहीं.. असली है और सर के सिवा यहाँ कौन आ सकता था.. इनके सीने के बाल भी मैंने महसूस किए थे।
विकास- ओह.. मेरी रानी… तुम जितनी सुन्दर हो.. उतनी ही समझदार भी हो।
अनुजा- अब बातों में क्यों वक्त खराब कर रहे हो.. जल्दी से लौड़ा अन्दर डालो ना.. इसकी चूत में..
दीपाली- रूको सर.. उस वक्त तो मेरी आँखें बन्द थीं और हाथ भी बँधे हुए थे.. पर अब मैं आपके लौड़े को छूकर देखना चाहती हूँ.. खुली आँखों से.. इसे चूसना चाहती हूँ.. आहह.. क्या मस्त कड़क हो रहा है।
दीपाली ने लौड़े को अपने मुलायम हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी।
विकास की तो किस्मत ही खुल गई थी.. दीपाली अब एकदम कामुक अंदाज में लौड़े को चूसने लगी।
विकास- उफ़फ्फ़.. दीपाली तेरे होंठों के स्पर्श से कितना मज़ा आ रहा है.. जब मुँह में इतना मज़ा आ रहा है तो तेरी चूत में कितना मज़ा आएगा.. आह.. चूस जान आज तेरी चूत का मुहूर्त है.. कर दे एकदम गीला मेरे लंड को उफ्फ.. आज तो बड़ा मज़ा आएगा..
दीपाली ने लौड़े को चूस कर एकदम गीला कर दिया।
अनुजा- बस भी कर अब.. क्या चूस कर ही पानी निकालोगी.. चल सीधी लेट जा.. तेरी चूत को खोलने का वक्त आ गया है।
दीपाली- हाँ दीदी.. मगर सर का लौड़ा बहुत बड़ा है.. ये अन्दर कैसे जाएगा और मुझे दर्द भी होगा ना…
अनुजा- अरे पगली.. मैंने तुझे क्या समझाया था.. चूत कितनी भी छोटी क्यों ना हो.. बड़े से बड़े लौड़े को खा जाती है.. पहली बार तो सभी को दर्द होता है.. लेकिन उसके बाद चुदवाने का लाइसेंस मिल जाता है.. तू कभी भी कहीं भी किसी से भी चुदवा सकती है जान.. बस थोड़ा सा दर्द सहन कर ले.. फिर देख दुनिया की सारी खुशियाँ एक तरफ और चुदाई से मिली ख़ुशी एक तरफ.. डर मत.. विकास बहुत एक्सपर्ट खिलाड़ी है.. बड़े आराम से तेरी सील तोड़ेगा।
ये दोनों बातें कर रही थीं तभी विकास दीपाली की चूत को चूसने लगा.. उसके दाने को जीभ से टच करने लगा।
दीपाली- आह आह आह.. उफ़फ्फ़ सर.. ये आपने क्या कर दिया.. आहह.. मेरी चूत में आग भड़क गई है.. ऊह.. डाल दो.. अब जो होगा देखा जाएगा उफ्फ.. आज कर दो मेरी चूत का मुहूर्त आह…
विकास ने मौके का फायदा उठा कर अनुजा के दोनों पैर मोड़ दिए और लौड़े की टोपी चूत पर सैट किया। अनुजा ने ऊँगलियों से चूत की दोनों फांकें खोल दीं जिसके कारण टोपी चूत की फांकों में फँस गई।
अनुजा ने जल्दी से अपने होंठ दीपाली के होंठों पर रख दिए और विकास को इशारा कर दिया।
विकास ने कमर पर दबाव बनाकर एक झटका मारा.. लौड़ा चूत की दीवारों को चौड़ा करता हुआ अन्दर घुस गया।
अभी एक इन्च ही घुसा था कि दीपाली ‘गूं-गूं’ करने लगी… वो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी। अभी तो उसकी सील भी नहीं टूटी थी.. बस लौड़ा जाकर सील से टच हुआ था।
विकास ने कमर को पीछे किया और ज़ोर से आगे की ओर धक्का मारा। अबकी बार आधा लौड़ा सील को तोड़ता हुआ चूत में समा गया।
दीपाली की तो आँखें बाहर को निकल आईं.. उसका सर चकराने लगा।
विकास ने देरी ना करते हुए आधा लौड़ा पीछे खींचा और पूरी रफ्तार से वापस चूत में घुसा दिया। अबकी बार लौड़ा चूत की जड़ तक घुस गया था। विकास की गोटियाँ दीपाली के चूतड़ों से टकरा गई थीं।
दीपाली तो सोच भी नहीं सकती थी कि अचानक उस पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ेगा।
अभी बेचारी पहले के दर्द से ही परेशान थी कि 5 सेकंड में ही दूसरा तगड़ा झटका उसको मिल गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और चीखें ऐसी कि अगर अनुजा ने कस कर उसके होंठ अपने होंठों से ना भींचे होते.. तो शायद बाहर दूर-दूर तक उसकी आवाज़ पहुँच जाती।
विकास लौड़ा जड़ तक घुसा कर अब बिल्कुल भी नहीं हिल रहा था और बस ऐसे ही पड़ा… दीपाली के मम्मों को चूस रहा था।
लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा दीपाली अब शान्त पड़ गई थी। तब अनुजा बैठ गई और दीपाली के सर पर हाथ घुमाने लगी।
दीपाली- दीदी आहह.. अई उउउ उउउ प्लीज़.. मुझे बचा लो अई.. सर प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है आ.. निकाल लो आहह…
अनुजा- अरे मेरी जान.. अब निकाल कर क्या फायदा.. तेरी सील तो टूट गई..
जितना दर्द होना था हो गया.. अब बस थोड़ी देर में तुझे मज़ा आने लगेगा और तू खुद कहेगी कि और ज़ोर से चोदो मुझे…
दीपाली- आहह.. दीदी मुझे नहीं पता था इतना दर्द होगा वरना मैं कभी ‘हाँ’ नहीं करती आहह..
कुछ देर विकास ने दीपाली के मम्मों को चूसा तो दीपाली को कुछ दर्द से राहत सी मिलती लगी।
विकास- अरे रानी.. कुछ नहीं हुआ है, बस थोड़ी देर रुक जा.. उसके बाद मज़े ही मज़े हैं.. अब तुझे दर्द कम हुआ ना..
दीपाली- आहह.. हाँ सर अब थोड़ा सा कम हुआ है।
विकास अब धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा और दीपाली के निप्पलों को चूसने लगा।
दीपाली को दर्द तो हो रहा था.. वो सिसक रही थी मगर अब उसमें ना जाने कहाँ से हिम्मत आ गई थी.. बस वो चुपचाप चुद रही थी।
दस मिनट तक विकास धीरे-धीरे चोदता रहा।
अब दीपाली का दर्द कम हो गया था और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी.. जिसके कारण लौड़ा आसानी से आगे-पीछे हो रहा था।
दीपाली- आहह.. सर दर्द हो रहा है.. उई मेरी चूत में अई.. आह्ह.. कुछ हो रहा है.. उफ़फ्फ़ अई मेरा पानी छूटने वाला है.. उई ज़ोर से आहह.. ज़ोर से क..करो आह..
मौके का फायदा उठा कर विकास अब रफ्तार से झटके मारने लगा था।
दीपाली चरम सीमा पर थी और अब उसकी चूत ने लावा उगल दिया था.. उसका बदन झटके खाने लगा था। वो काफ़ी देर तक झड़ती रही.. मगर विकास अब भी दे दनादन शॉट पर शॉट मार रहा था।
अनुजा ने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया.. वो भी एकदम गर्म हो गई थी।
विकास- ओह्ह ओह्ह.. दीपाली आहह.. क्या टाइट चूत है तेरी.. आह्ह… मज़ा आ गया.. लौड़ा बड़ी मुश्किल से आगे-पीछे हो रहा है आह्ह… दीपाली आह..
लगभग 10 मिनट तक विकास उसको चोदता रहा.. दीपाली दोबारा गर्म हो गई।
उसकी चूत में अब दर्द के साथ-साथ मीठा-मीठा करंट भी दौड़ रहा था.. वो दोबारा चरम पर पहुँच गई थी और पहुँचती भी कैसे नहीं 8″ का लौड़ा ताबड़तोड़ उसकी चूत में आगे-पीछे हो रहा था।
दीपाली- आह आह आह सर प्लीज़.. ज़ोर से आह्ह… मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है आआह आह्ह…
विकास- आह.. ले मेरी दीपा रानी ओह्ह ओह्ह ओह्ह.. मेरा भी पानी निकलने वाला है.. आह्ह… आज तेरी चूत को पानी से भर दूँगा 18 सालों से ये प्यासी थी.. आज इसकी प्यास बुझा दूँगा आह्ह… आह…
विकास के लौड़े से पानी की तेज धार निकली और दीपाली की चूत की दीवारों से जा टकराई.. गर्म-गर्म वीर्य के अहसास से उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। अब दोनों शान्त पड़ गए.. दोनों के पानी का मिलन हो गया।
बस दोस्तों आज के लिए इतना काफ़ी है। क्या आप जानना नहीं चाहते कि आगे क्या हुआ?
तो पढ़ते रहिए .......
 
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हाय दोस्तो, कैसे हो आप सब… आज मैं आपको दीपाली सिंह की कहानी बताता हूँ।
दोस्तो, कहानी के सभी किरदार असली हैं..
इसमें कुछ घटना-क्रम एकदम वास्तविक है और कुछ आपके मनोरंजन के लिए अपनी कलम से लिख रह। हूँ!
और हाँ.. अबकी बार मैंने लिखने का अंदाज थोड़ा बदला है..
तो आइए आपको कहानी की ओर ले चलत। हूँ।
सर- दीपाली ये क्या है? इस बार भी फेल.. आख़िर तुम करती क्या हो..? पढ़ाई में तुम्हारा ध्यान क्यों नहीं लगता। जब स्कूल-टेस्ट में ये हाल है तो बोर्ड के इम्तिहान में क्या खाक लिखोगी?
ये सर हैं विकास वर्मा जिनकी उम्र 35 साल है और ये साइन्स के टीचर हैं..
थोड़े कड़क मिज़ाज के हैं। इनका कद और जिस्म की बनावट अच्छी है.. और एकदम फिट रहते हैं।
दीपाली- सॉरी सर प्लीज़.. मुझे माफ़ कर दो.. अबकी बार अच्छे नम्बर लाऊँगी.. प्लीज़ प्लीज़…

दोस्तो, यह है दीपाली सिंह.. अच्छे ख़ासे पैसे वाले घर की एक मदमस्त यौवन की मालकिन.. जिसकी उम्र 18 साल, कद 5’3″.. छोटे सुनहरे बाल.. गुलाब की पंखुड़ी जैसे पतले गुलाबी होंठ.. भरे हुए गोरे गाल.. नुकीले 30″ के मम्मे.. पतली कमर और 32″ की मदमस्त गाण्ड।
स्कूल में कई लड़के दीपाली पर अपना जाल फेंक रहे हैं कि काश एक बार उसकी मचलती जवानी का मज़ा लूट सकें..
मगर वो तो तितली की तरह उड़ती फिरती थी।
कभी किसी के हाथ ना आई !
और हाँ आपको यह भी बता दूँ कि गंदी बातों से दूर-दूर तक उसका वास्ता नहीं था।
वो शरारती थी.. मगर शरीफ़ भी थी।
उसको चुदाई वगैरह का कोई ज्ञान नहीं था।
सर- नो.. अबकी बार तुम्हारी बातों में नहीं आऊँगा.. कल तुम अपने मम्मी-पापा को यहाँ लेकर आओ.. बस अब उनसे ही बात करूँगा कि आख़िर वो तुम पर ध्यान क्यों नहीं देते।
दीपाली- सर आप मेरी बात तो सुनिए.. बस साइन्स में मेरे नम्बर कम आए हैं और बाकी सब विषयों में मेरे अच्छे नम्बर आए हैं।
सर- जानता हूँ इसी लिए तो हर बार तुम्हारी बातों में आ जाता हूँ.. तुम बहुत अच्छी लड़की हो.. सब विषयों में अच्छे नम्बर लाती हो.. मगर ना जाने विज्ञान में तुम पीछे क्यों रह गई.. आज तो मुझे बता ही दो आख़िर बात क्या है?
दीपाली- व..वो.. सर आप तो जानते ही हो.. मैं रट्टा नहीं मारती.. सारे विषयों को समझ कर याद करती हूँ.. विज्ञान का पता ही नहीं चलता क्या लिखा है… क्यों होता है.. बस इसी उलझन में रहती हूँ तो ये सब हो जाता है और नम्बर कम आ जाते हैं।
सर- क्या.. अरे तुम क्या बोल रही हो..? मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा ठीक से बताओ मुझे।
दीपाली- वो.. वो.. सर मानव अंगों के बारे में मेरी सहेलियाँ पता नहीं क्या-क्या बोलती रहती हैं.. बड़ा गंदा सा बोलती हैं.. म…म..मुझे अच्छा नहीं लगता.. बस इसलिए मैं विज्ञान में इतनी रूचि नहीं लेती हूँ।
दीपाली की बात सुनकर विकास सर के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
सर- अच्छा तो ये बात है.. ऐसा करो शाम को तुम किताब लेकर मेरे घर आना.. वहाँ बताना ठीक से.. अभी मेरा क्लास लेने का वक्त हो रहा है.. देखो आ जाना नहीं तो कल तुम्हारे पापा से मुझे मिलना ही होगा।
दीपाली तो फँस गई थी.. अब विकास शाम को उसका फायदा उठाएगा.. आप यही सोच रहे हो ना..
मेरे प्यारे दोस्तों देश बदल रहा है.. सोच बदलो.. खुद देख लो।
शाम को 6 बजे दीपाली विकास सर के घर पहुँच जाती है।
सर- अरे आओ आओ.. दीपाली बैठो.. अरे अनु ज़रा यहा आना.. देखो दीपाली आई है, मैंने बताया था ना तुमको…
अनुजा- जी अभी आई।
दोस्तो, यह है अनुजा वर्मा.. यह विकास सर की पत्नी है, दिखने में बड़ी खूबसूरत है, इसका फिगर 34″ 32″36″ है।
इनकी शादी को 3 साल हो गए हैं।
दोनों बेहद खुश रहते हैं।
अरे यार आप अनुजा को भूल गए.. हाँ भाई ये वही अनुजा गुप्ता और विकास हैं.. जो पहले लवर थे, अब इनकी शादी हो गई है और अनुजा गुप्ता से वर्मा बन गई है.. चलो अब आगे का हाल देखते हैं।
अनुजा- हाय दीपाली कैसी हो?
दीपाली- मैं एकदम ठीक हूँ मैम!
सर- दीपाली, ये है मेरी पत्नी अनुजा.. सुबह तुमने अपनी प्राब्लम मुझे बताई थी ना.. मैंने अनु को सब बताया है.. अब मैं नहीं ये ही तुम्हारी मदद करेंगी। चलो तुम दोनों बातें करो मैं थोड़ी देर में बाहर जाकर आता हूँ ओके..।
दीपाली- ओके सर थैंक्स।
अनुजा- हाँ तो दीपाली.. अब बताओ तुम्हारी प्राब्लम क्या है और देखो किसी भी तरह की झिझक मत रखना.. सब ठीक से बताओ ओके..
दीपाली- ओके मैम बताती हूँ।
अनुजा- अरे ये मैम-मैम क्या लगा रखा है मुझे दीदी भी बोल सकती हो.. अब बताओ तुम्हारी सहेलियाँ क्या बोलती हैं?
दीपाली- व..ववो दीदी… मैंने उनसे एक बार पूछा ये योनि और लिंग किसे कहते हैं तब उन्होंने मेरा बड़ा मज़ाक उड़ाया और मेरे यहाँ हाथ लगा कर कहा.. इसे योनि कहते हैं और इसकी ठुकाई करने वाले डंडे को लिंग कहते हैं।
दीपाली ने अपना हाथ चूत पर रखते हुए यह बात बोली तो अनुजा की हँसी निकल गई।
दीपाली- दीदी आप भी ना मेरा मज़ाक उड़ा रही हो.. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती। इसी लिए मैं किसी से इस बारे में बात नहीं करती हूँ।
अनुजा- अरे तू तो बुरा मान गई.. देख मेरा इरादा तेरा मजाक उड़ाने का नहीं था.. बस ये सोच कर हँसी आ गई कि तुम किस दुनिया से आई हो जो इतनी भोली हो.. अब सुनो मैं जो पूछू उसका सही जबाव देना और जो बोलूँ उसको ध्यान से सुनना।
दीपाली- ठीक है दीदी आप कहो।
अनुजा- सबसे पहले यह बता कि तेरी उम्र क्या है.. और तुम्हारे घर में कौन-कौन है.. तुम सोती किसके साथ हो?
दीपाली- दीदी मैं 18 की हूँ.. मैं पापा-मम्मी की इकलौती बेटी हूँ.. हमारा घर काफ़ी बड़ा है। मैं करीब 6 साल से अलग कमरे में सोती हूँ.. नहीं तो पहले मम्मी के कमरे में ही सोती थी।
अनुजा- अच्छा यह बात है.. तुम सेक्स के बारे में क्या जानती हो.. किसी से कुछ सुना होगा… वो बताओ।
दीपाली- ये सेक्स क्या होता है दीदी.. मुझे नहीं पता.. हाँ मेरी सहेलियाँ अक्सर बातें करती हैं.. बस उनसे मैंने सुना था कि लड़कों का पोपट होता है.. और लड़की का पिंजरा.. मगर मेरे कभी कुछ समझ नहीं आया।
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अनुजा- ओह ये बात है.. तेरी सहेलियाँ कोडवर्ड में
बातें करती हैं और तुम सच में बहुत भोली हो। अच्छा ये बताओ क्या कभी किसी ने तुम्हारे सीने पर हाथ रखा है या इनको छुआ या दबाया है..? तुमने किसी लड़के को पेशाब करते देखा है?
दीपाली- छी छी.. दीदी आप भी ना.. मैं क्यों किसी को पेशाब करते देखूँगी और आज तक किसी ने मुझे नहीं छुआ है।
अनुजा- अच्छा ये बात है.. तभी तुम ऐसी हो.. अब अपने अंगों के नाम बताओ.. मैं भी तो देखूँ तुम क्या जानती हो।
अनुजा ने दीपाली के गुप्तांगों के नाम उससे पूछे।
दीपाली- दीदी ये सीना है.. ये फुननी है और ये पिछवाड़ा बस।
अनुजा- अरे भोली बहना.. अब सुन ये सीना को मम्मों.. चूचे या कच्ची लड़की के अमरूद भी बोलते हैं और इसको चूत या बुर बोलते हैं समझी और ये पिछवाड़ा नहीं.. एस या गाण्ड है.. जिसको मटका-मटका कर तुम चलती हो और लड़कों के लौड़े खड़े हो जाते हैं।
अनुजा बोलने के साथ दीपाली के अंगों पर हाथ घुमा-घुमा कर मज़े ले रही थी। दीपाली को बड़ा अजीब लग रहा था मगर उसको मज़ा भी आ रहा था।
दीपाली- उफ़फ्फ़ आह दीदी ये लौड़ा क्या होता है?
अनुजा- अरे पगली दुनिया की सबसे अच्छी चीज़ के बारे में नहीं जानती..? लड़कों की फुननी को लौड़ा बोलते है जो चूत के लिए बना है.. बड़ा ही सुकून
मिलता है लौड़े से।
दीपाली- दीदी कसम से.. मुझे इन सब बातों के बारे में कुछ भी पता नहीं था.. थैंक्स आपने मुझे बताया.. मगर मेरी एक बात नहीं समझ आ रही इन सब बातों का मेरे इम्तिहान में फेल होने से क्या सम्बन्ध?
अनुजा- अरे दीपाली.. तू सब विषयों में अच्छी है क्योंकि तुझे उन सबकी समझ है.. मगर विज्ञान में तू अनजान है क्योंकि तुझे कुछ पता नहीं.. ये चूत.. लौड़ा और चुदाई सब विज्ञान का ही तो हिस्सा हैं। अब देख मैं कैसे तुझे सेक्स का ज्ञान देती हूँ और देखना अबकी बार कैसे तेरे नम्बर अच्छे आते हैं.. बस तू मेरी बात मानती रहना, जैसा मैं कहूँ वैसा करती रहना।
दीपाली- ओके दीदी.. मैं आपकी सब बात मानूँगी.. बस मेरे नम्बर अच्छे आने चाहिए।
अनुजा ने आधा घंटा तक दीपाली को लड़की और लड़के के बारे में बताया और उसको जाते समय एक सेक्स की कहानी वाली किताब भी दी।
दीपाली- दीदी ये क्या है?
अनुजा- ये असली विज्ञान है.. रात को अपने कमरे में कुण्डी लगा कर सारे कपड़े निकाल कर इस किताब को पढ़ना.. और कल शाम को आ जाना.. बाकी सब कल समझा दूँगी।
दीपाली- सारे कपड़े निकाल कर.. नहीं दीदी मुझे शर्म आ रही है।
अनुजा- अरे पगली मैं किसी के सामने नंगी होने को नहीं बोल रही हूँ.. अकेले में ये करना है और नहाते वक्त क्या कपड़े पहन कर नहाती हो जो इतना शर्मा रही हो..? पास नहीं होना है क्या..?
दीपाली- सॉरी दीदी.. जैसा आपने कहा, वैसा कर लूँगी।
दीपाली वहाँ से अपने घर चली जाती है।
उफ़फ्फ़.. सॉरी दोस्तो, आपने क्या सोचा विकास बहला-फुसला कर दीपाली की चुदाई कर देगा और आपको मज़ा मिलेगा…
मगर यहाँ तो बात उल्टी हो गई।
चलो कोई बात नहीं आप निराश मत हो…
मैं हूँ ना यार चुदाई का सीन भी आएगा..
थोड़ा सबर करो।
अच्छा चलो रात होने दो दीपाली के नंगे जिस्म को आपको दिखा दूँगा.. बस खुश?
इसके आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..
Mast Writing Bhai

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Bittoo

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भाग 6
अनुजा- बस दीपाली अब मेरी बारी है तू सीधी लेट जा.. अब मैं तुझे स्वर्ग की सैर कराती हूँ।
दीपाली- मैं कैसे लेटूं दीदी.. मेरे हाथ तो पीछे बँधे हैं।
अनुजा ने उसके हाथ खोल दिए उसको सीधा लिटा कर बिस्तर के दोनों बगल से उसके हाथ बाँध दिए।

दीपाली- अरे अरे.. ये क्या कर रही हो दीदी अब तो मेरे हाथ खुले रहने दो ना…
अनुजा- नहीं मेरी जान.. आज तू ऐसे ही मज़ा ले.. बस अब कुछ मत बोल.. देख मैं तुझे कैसे मज़े देती हूँ.. इतना बोल कर अनुजा ने विकास को इशारा कर दिया कि टूट पड़ो इस सेक्स की मलिका पर..
विकास को तो बस इसी मौके का इन्तजार था।
वो दीपाली के ऊपर लेट गया और सबसे पहले उसके मखमली होंठों को चूसने लगा।
उसका अंदाज ऐसा था कि दीपाली भी उसका साथ देने लगी।
वो दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे.. मगर विकास सिर्फ़ होंठों से ही थोड़े खुश होने वाला था..
थोड़ी देर बाद वो नीचे खिसकने लगा और अब उसके होंठों में दीपाली के निप्पल थे।
वो दोनों हाथों से उसके कड़क चूचे दबा रहा था और निप्पल चूस रहा था.. जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो।
दीपाली- आह आआ दीदी अई मज़ा आ गया उह.. धीरे से दबाओ ना उफ़फ्फ़.. दर्द होता है अई काटो मत ना… दीदी आइ मज़ा आ रहा है।
दोस्तो, अनुजा का प्लान तो अच्छा था मगर एक पॉइंट ऐसा था जिसके कारण दीपाली को थोड़ा शक हुआ कि कहीं अनुजा की जगह उसके ऊपर कोई आदमी तो नहीं है ना।
ना ना.. टेंशन मत लो.. आपको सोचने की जरूरत नहीं है.. मैं खुद बता देता हूँ आपको।
जब विकास होंठ चूस रहा था उसका सीना दीपाली के मम्मों को दबा रहा था और उसके सीने के बाल दीपाली महसूस कर रही थी उसने मन में सोचा भी कि अगर दीदी मेरे ऊपर हैं तो उनके मम्मों और मेरे मम्मों को आपस में टकराने चाहिए.. मगर ये तो एकदम सपाट सीना है और बाल भी हैं।
मगर ना जाने क्या सोच कर वो चुप रही।
विकास को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था और आएगा क्यों नहीं एक कमसिन कली जिसके पतले होंठों में उसका लौड़ा फँसा हुआ था।
अब विकास लौड़े को आगे-पीछे करने लगा।
एक वक्त तो लौड़ा पूरा दीपाली के गले तक पहुँच गया और उसी वक़्त दीपाली ने झट से मुँह हटा लिया और विकास ने जैसे ही लौड़ा आगे किया उसकी गोटियाँ दीपाली के मुँह के पास आ गईं.. दीपाली को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
अब विकास मम्मों से नीचे उसके पेट तक चूमता हुआ आ गया और आख़िर कर वो अपनी असली मंज़िल यानी चूत तक पहुँच गया।
विकास की गर्म साँसें दीपाली अब अपनी चूत पर महसूस कर रही थी और छटपटा रही थी कि कब दीदी के होंठ चूत पर टिकेंगे और कब उसको सुकून मिलेगा।
विकास ने चूत के होंठों को कस कर अपने मुँह से भींच लिया। दीपाली की सिसकी निकल गई।
विकास बड़े प्यार से चूत को चूस रहा था और अपनी जीभ से अन्दर तक चाट रहा था.. दीपाली एकदम गर्म हो गई थी।
दीपाली- अया ऐइ उफ़फ्फ़.. दीदी आह.. प्लीज़ चूत के अन्दर ऊँगली करो.. ना आ आहह.. चूत में बहुत बेचैनी हो रही है।
अनुजा- मेरी जान तेरी चूत की आग अब ऊँगली से ठंडी नहीं होने वाली.. इसको तो अब लौड़े की जरूरत है.. बोल क्या बोलती है।
दीपाली- दीदी आहह.. डाल दो ना.. आहह.. आपके पास तो इतना मस्त लौड़ा है आहह.. पूछ क्यों रही हो.. अई आहह.. शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था कि अपने सर से ही अपनी सील तुड़वाऊँ आहह.. प्लीज़ विकास सर आहह अब बर्दाश्त नहीं होता.. डाल दो ना आहह..
दीपाली की बात सुनकर अनुजा और विकास दोनों ही भौंचक्के रह गए.. दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया।
अनुजा- त..त..तू.. ये क..क्या.. बोल रही है व..विकास यहाँ क..क..कहाँ है?
दीपाली- अई आह.. दीदी आह.. मानती हूँ मुझे चुदाई का अनुभव नहीं है.. मगर इतनी भी भोली नहीं हूँ कि औरत और मर्द के शरीर में फ़र्क ना महसूस कर सकूँ और दूसरी बात आपकी आवाज़ मेरे बगल से आ रही है जबकि आपके हिसाब से आप मेरी चूत चाट रही हो.. आह्ह.. अब ये पट्टी खोल दो.. मुझे कोई ऐतराज नहीं कि सर मेरी चूत की सील तोड़ें.. प्लीज़ आह्ह..
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विकास और अनुजा की नज़रें मिलीं और आँखों ही आँखों में दोनों की बात हो गई।
विकास ने पहले दीपाली के हाथ खोले.. उसके बाद आँखों की पट्टी निकाल दी।
दीपाली- ओह.. सर आपका लौड़ा कितना मोटा और बड़ा है.. उफ़फ्फ़ जब मेरे मुँह में था.. कसम से बड़ा मज़ा आ रहा था.. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह विज्ञान के चक्कर में चुदाई का ज्ञान मिल जाएगा.. पहले मुझे कुछ पता नहीं था.. मगर इन दो दिनों में मुझे पता चल गया कि चुदाई में जो मज़ा है.. वो किसी और चीज़ में नहीं है।
अनुजा- मेरी जान मैं तो कब से कह रही थी कि विकास को बुलाऊँ क्या.. मगर तुम ही हो कि बस मना कर रही थीं।
दीपाली- दीदी सच कहूँ.. तो जब आप सर का नाम लेती थीं.. मेरी चूत में पानी आ जाता था.. मगर शर्म के मारे आपसे कुछ बोल ना पाती थी.. अभी जब लौड़ा चूस रही थी.. तब मुझे पक्का पता चल गया कि ये लौड़ा नकली नहीं.. असली है और सर के सिवा यहाँ कौन आ सकता था.. इनके सीने के बाल भी मैंने महसूस किए थे।
विकास- ओह.. मेरी रानी… तुम जितनी सुन्दर हो.. उतनी ही समझदार भी हो।
अनुजा- अब बातों में क्यों वक्त खराब कर रहे हो.. जल्दी से लौड़ा अन्दर डालो ना.. इसकी चूत में..
दीपाली- रूको सर.. उस वक्त तो मेरी आँखें बन्द थीं और हाथ भी बँधे हुए थे.. पर अब मैं आपके लौड़े को छूकर देखना चाहती हूँ.. खुली आँखों से.. इसे चूसना चाहती हूँ.. आहह.. क्या मस्त कड़क हो रहा है।
दीपाली ने लौड़े को अपने मुलायम हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी।
विकास की तो किस्मत ही खुल गई थी.. दीपाली अब एकदम कामुक अंदाज में लौड़े को चूसने लगी।
विकास- उफ़फ्फ़.. दीपाली तेरे होंठों के स्पर्श से कितना मज़ा आ रहा है.. जब मुँह में इतना मज़ा आ रहा है तो तेरी चूत में कितना मज़ा आएगा.. आह.. चूस जान आज तेरी चूत का मुहूर्त है.. कर दे एकदम गीला मेरे लंड को उफ्फ.. आज तो बड़ा मज़ा आएगा..
दीपाली ने लौड़े को चूस कर एकदम गीला कर दिया।
अनुजा- बस भी कर अब.. क्या चूस कर ही पानी निकालोगी.. चल सीधी लेट जा.. तेरी चूत को खोलने का वक्त आ गया है।
दीपाली- हाँ दीदी.. मगर सर का लौड़ा बहुत बड़ा है.. ये अन्दर कैसे जाएगा और मुझे दर्द भी होगा ना…
अनुजा- अरे पगली.. मैंने तुझे क्या समझाया था.. चूत कितनी भी छोटी क्यों ना हो.. बड़े से बड़े लौड़े को खा जाती है.. पहली बार तो सभी को दर्द होता है.. लेकिन उसके बाद चुदवाने का लाइसेंस मिल जाता है.. तू कभी भी कहीं भी किसी से भी चुदवा सकती है जान.. बस थोड़ा सा दर्द सहन कर ले.. फिर देख दुनिया की सारी खुशियाँ एक तरफ और चुदाई से मिली ख़ुशी एक तरफ.. डर मत.. विकास बहुत एक्सपर्ट खिलाड़ी है.. बड़े आराम से तेरी सील तोड़ेगा।
ये दोनों बातें कर रही थीं तभी विकास दीपाली की चूत को चूसने लगा.. उसके दाने को जीभ से टच करने लगा।
दीपाली- आह आह आह.. उफ़फ्फ़ सर.. ये आपने क्या कर दिया.. आहह.. मेरी चूत में आग भड़क गई है.. ऊह.. डाल दो.. अब जो होगा देखा जाएगा उफ्फ.. आज कर दो मेरी चूत का मुहूर्त आह…
विकास ने मौके का फायदा उठा कर अनुजा के दोनों पैर मोड़ दिए और लौड़े की टोपी चूत पर सैट किया। अनुजा ने ऊँगलियों से चूत की दोनों फांकें खोल दीं जिसके कारण टोपी चूत की फांकों में फँस गई।
अनुजा ने जल्दी से अपने होंठ दीपाली के होंठों पर रख दिए और विकास को इशारा कर दिया।
विकास ने कमर पर दबाव बनाकर एक झटका मारा.. लौड़ा चूत की दीवारों को चौड़ा करता हुआ अन्दर घुस गया।
अभी एक इन्च ही घुसा था कि दीपाली ‘गूं-गूं’ करने लगी… वो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी। अभी तो उसकी सील भी नहीं टूटी थी.. बस लौड़ा जाकर सील से टच हुआ था।
विकास ने कमर को पीछे किया और ज़ोर से आगे की ओर धक्का मारा। अबकी बार आधा लौड़ा सील को तोड़ता हुआ चूत में समा गया।
दीपाली की तो आँखें बाहर को निकल आईं.. उसका सर चकराने लगा।
विकास ने देरी ना करते हुए आधा लौड़ा पीछे खींचा और पूरी रफ्तार से वापस चूत में घुसा दिया। अबकी बार लौड़ा चूत की जड़ तक घुस गया था। विकास की गोटियाँ दीपाली के चूतड़ों से टकरा गई थीं।
दीपाली तो सोच भी नहीं सकती थी कि अचानक उस पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ेगा।
अभी बेचारी पहले के दर्द से ही परेशान थी कि 5 सेकंड में ही दूसरा तगड़ा झटका उसको मिल गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और चीखें ऐसी कि अगर अनुजा ने कस कर उसके होंठ अपने होंठों से ना भींचे होते.. तो शायद बाहर दूर-दूर तक उसकी आवाज़ पहुँच जाती।
विकास लौड़ा जड़ तक घुसा कर अब बिल्कुल भी नहीं हिल रहा था और बस ऐसे ही पड़ा… दीपाली के मम्मों को चूस रहा था।
लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा दीपाली अब शान्त पड़ गई थी। तब अनुजा बैठ गई और दीपाली के सर पर हाथ घुमाने लगी।
दीपाली- दीदी आहह.. अई उउउ उउउ प्लीज़.. मुझे बचा लो अई.. सर प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है आ.. निकाल लो आहह…
अनुजा- अरे मेरी जान.. अब निकाल कर क्या फायदा.. तेरी सील तो टूट गई..
जितना दर्द होना था हो गया.. अब बस थोड़ी देर में तुझे मज़ा आने लगेगा और तू खुद कहेगी कि और ज़ोर से चोदो मुझे…
दीपाली- आहह.. दीदी मुझे नहीं पता था इतना दर्द होगा वरना मैं कभी ‘हाँ’ नहीं करती आहह..
कुछ देर विकास ने दीपाली के मम्मों को चूसा तो दीपाली को कुछ दर्द से राहत सी मिलती लगी।
विकास- अरे रानी.. कुछ नहीं हुआ है, बस थोड़ी देर रुक जा.. उसके बाद मज़े ही मज़े हैं.. अब तुझे दर्द कम हुआ ना..
दीपाली- आहह.. हाँ सर अब थोड़ा सा कम हुआ है।
विकास अब धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा और दीपाली के निप्पलों को चूसने लगा।
दीपाली को दर्द तो हो रहा था.. वो सिसक रही थी मगर अब उसमें ना जाने कहाँ से हिम्मत आ गई थी.. बस वो चुपचाप चुद रही थी।
दस मिनट तक विकास धीरे-धीरे चोदता रहा।
अब दीपाली का दर्द कम हो गया था और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी.. जिसके कारण लौड़ा आसानी से आगे-पीछे हो रहा था।
दीपाली- आहह.. सर दर्द हो रहा है.. उई मेरी चूत में अई.. आह्ह.. कुछ हो रहा है.. उफ़फ्फ़ अई मेरा पानी छूटने वाला है.. उई ज़ोर से आहह.. ज़ोर से क..करो आह..
मौके का फायदा उठा कर विकास अब रफ्तार से झटके मारने लगा था।
दीपाली चरम सीमा पर थी और अब उसकी चूत ने लावा उगल दिया था.. उसका बदन झटके खाने लगा था। वो काफ़ी देर तक झड़ती रही.. मगर विकास अब भी दे दनादन शॉट पर शॉट मार रहा था।
अनुजा ने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया.. वो भी एकदम गर्म हो गई थी।
विकास- ओह्ह ओह्ह.. दीपाली आहह.. क्या टाइट चूत है तेरी.. आह्ह… मज़ा आ गया.. लौड़ा बड़ी मुश्किल से आगे-पीछे हो रहा है आह्ह… दीपाली आह..
लगभग 10 मिनट तक विकास उसको चोदता रहा.. दीपाली दोबारा गर्म हो गई।
उसकी चूत में अब दर्द के साथ-साथ मीठा-मीठा करंट भी दौड़ रहा था.. वो दोबारा चरम पर पहुँच गई थी और पहुँचती भी कैसे नहीं 8″ का लौड़ा ताबड़तोड़ उसकी चूत में आगे-पीछे हो रहा था।
दीपाली- आह आह आह सर प्लीज़.. ज़ोर से आह्ह… मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है आआह आह्ह…
विकास- आह.. ले मेरी दीपा रानी ओह्ह ओह्ह ओह्ह.. मेरा भी पानी निकलने वाला है.. आह्ह… आज तेरी चूत को पानी से भर दूँगा 18 सालों से ये प्यासी थी.. आज इसकी प्यास बुझा दूँगा आह्ह… आह…
विकास के लौड़े से पानी की तेज धार निकली और दीपाली की चूत की दीवारों से जा टकराई.. गर्म-गर्म वीर्य के अहसास से उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। अब दोनों शान्त पड़ गए.. दोनों के पानी का मिलन हो गया।
बस दोस्तों आज के लिए इतना काफ़ी है। क्या आप जानना नहीं चाहते कि आगे क्या हुआ?
तो पढ़ते रहिए .......
अद्भुत
बहुत ही कामुक विस्तृत वर्णन
एबल अपडेट का इंतज़ार 👌👌
 
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