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शुक्रिया। मेरी पूर्ण रूप से कोशिश करूं कि कहानी अश्लिल नहीं उत्तेजक लगे। हर संभव प्रयास करूंगा कि ये कहानी वापस आपके दिलों पे राज करे। बस आप लोगों का सहयोग चाहिए।ये अध्याय कुल मिलाकर कहानी को आगे तो बढ़ाता है लेकिन उसकी असली ताकत और कमजोरी दोनों साफ नजर आते हैं। शुरू में साधु और शिष्य वाला हिस्सा थोड़ा गंभीर और थ्रिलर वाला मूड बनाता है, हवन कुंड की अग्नि, पिशाच की हंसी और साधु की बेचैनी, ये सब पढ़ते हुए लगता है कि कोई बड़ी लड़ाई चल रही है और पिशाच अब काबू से बाहर होता जा रहा है। “तेरे गुरु ने भी मुझे धोखे से कैद किया था” और दो सौ साल की तपस्या वाली बात जिज्ञासा जगाती है, मन में आता है कि असल कहानी क्या है, वो औरत कौन है जिससे पिशाच का क्रोध शांत होना है।
लेकिन ये हिस्सा जल्दी खत्म हो जाता है और कहानी सीधे घर के अंदर घुस जाती है। वहाँ से असली मजा और असली थकान दोनों शुरू होते हैं। माया देवी वाली सीन काफी लंबी और डिटेल में लिखी गई है। तबेले में चुदाई के बाद का वो माहौल, माया का 'मालिक' कहना, लल्लू का उसे नंगी भेजना, गांड मटकाती हुई चलना और आखिर में वो चुंबन, ये सब पिशाच के कंट्रोल और माया की पूरी समर्पण वाली इमेज को मजबूत करता है। थोड़ी देर के लिए लगता है कि माया सिर्फ शरीर नहीं दे रही, बल्कि कोई गहरी स्वीकृति दे रही है, लेकिन ये भावना जल्दी ही संभोग की तीव्रता में दब जाती है।
फिर सुधा वाला हिस्सा आता है जो इस अध्याय का सबसे अलग और शायद सबसे अच्छा हिस्सा है। लल्लू का कमरे में जाना, सुधा के पेटीकोट और गीली पैंटी को देखना, उसके मदनरस को सूंघना, फिर अचानक प्यार वाला मूड आना, ये बदलाव अच्छा लगा। पिशाच के अंदर पहली बार ग्लानि और मोह का आना, सुधा के रोए हुए निशान देखना, ये छोटी-छोटी बातें कहानी को सिर्फ अश्लीलता से थोड़ा ऊपर ले जाने की कोशिश करती हैं। चुंबन वाला लंबा सीन और फिर ब्लाउज चीरने के बाद चुचियों वाला पार्ट फ्लो में लिखा गया है, जबरदस्ती नहीं ठूंसा गया। सुधा का पिघलना, उसकी सिसकियाँ, चरमसुख और फिर लल्लू का मुंह फेरकर सो जाना, ये सब मिलाकर एक अधूरा, अधकचरा लेकिन असरदार अनुभव बनाता है।
इधर सुधा के मन में उठते सवाल 'औरत कौन थी', 'क्यों सिर्फ चुचियों से ही चरम मिल गया', 'लल्लू चाहता क्या है' ये उलझनें अच्छी हैं और उनका जवाब भविष्य के गर्त में छिपा है।
ये मेरी इस मंच की प्रिय कहानियों में से एक है और आशा करता हूँ की इस बार ये पूर्ण होगी।![]()
धन्यवाद!

